दक्षिण भारतीय राज्य केरल में कोरोना संकट के बीच निपाह वायरस ने भी कहर मचा रखा है। रविवार (5 सितंबर 2021) को निपाह वायरस के संक्रमण की चपेट में आने के बाद 12 साल के बच्चे की मौत हो गई। निपाह वायरस से राज्य में यह पहली मौत है जो कोझिकोड जिले में हुई है। इस बीच प्रशासन ने बच्चे के संपर्क में आने वाले सभी लोगों को तुरंत अपनी जाँच कराने का सुझाव दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे में पहले इन्सेफ्लाइटिस का लक्षण नजर आया था, लेकिन जाँच के बाद निपाह का पता चला है। नए संकट की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार (4 सितंबर 2021) रात को ही एक हाई लेवल मीटिंग कर हालात पर चर्चा की। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज का कहना है कि मृतक बच्चे के शुरुआती 188 संपर्कों को ट्रेस कर लिया गया है। अब इन सभी को मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया जाएगा। इन 188 लोगों में से 20 लोग हाई रिस्क कैटेगरी में रखे गए हैं।
उच्च जोखिम वाले लोगों को कोझिकोड शीर्ष सरकारी अस्पताल कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में नए खुले आइसोलेशन वार्ड में निगरानी में रखा जाएगा। वहीं मंत्री ने कहा है कि निपाह वायरस के फैलाव को देखते हुए बच्चा कहाँ-कहाँ गया और किस-किस से मिला इसका एक रूट मैप जारी किया जाएगा। इस बीच 2 अन्य लोगों में भी इस जानलेवा वायरस का संक्रमण पाया गया है।
केंद्र ने केरल भेजी टीम
कोरोना संकट के बीच निपाह वायरस के सामने आने के बाद केंद्र चौकन्ना हो गया है। इस बीच केंद्र सरकार एक टीम केरल भेजी है, जो कि राज्य के अधिकारियों को तकनीकी तौर पर मदद करेंगे।
2018 में वायरस ने ली थी 17 जानें
केरल में दूसरी बार निपाह वायरस ने दस्तक दी है। इससे पहले साल 2018 में राज्य के कोझिकोड और मलप्पपुरम जिले में इससे 17 लोगों की मौत हुई थी। यह वायरस सुअर और चमगादड़ों से इंसानों में फैल सकता है। खास बात ये है कि अब तक इसका कोई इलाज नहीं मिल सका है।
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में एक कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल ने ब्राह्मण समाज को लेकर आपतिजनक टिप्पणी की थी। अब इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस ने भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल के खिलाफ केस दर्ज किया है। पिता के ऊपर केस दर्ज होने पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार में कोई भी कानून के ऊपर नहीं है।
सीएम बघेल ने एफआईआर दर्ज होने पर कहा, “एक मुख्यमंत्री होने के नाते मेरी ये ज़िम्मेदारी है कि अलग-अलग समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखा जाए। अगर उन्होंने समाज के खिलाफ कोई बात कही है तो, मुझे इसका दुख है। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उनके पिता के द्वारा की गई टिप्पणी से उन्हें भी दुख हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा यह बात कही जा रही है कि नंद कुमार बघेल पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी क्योंकि वे उनके पिता हैं। लेकिन वो ये साफ कर देना चाहते हैं कि उनकी सरकार सभी को एक समान दृष्टि से देखती है। उनकी सरकार में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है चाहे मुख्यमंत्री के 86 साल के पिता क्यों नहीं हो।
इसके अलावा भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि शुरू से ही उनके पिता के साथ उनके वैचारिक मतभेद रहे हैं और सबको इसके बारे में पता है। हमारे राजनीतिक विचार पूरी तरह से अलग हैं। एक पुत्र के रूप में मैं उनका सम्मान करता हूँ लेकिन एक मुख्यमंत्री के नाते ऐसी गलती को माफ़ नहीं किया जा सकता है जिससे व्यवस्था बिगड़े। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस द्वारा उचित कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल पिछले दिनों लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल ने ब्राह्मण समाज पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा था, “वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा। हम ब्राह्मणों को गंगा से वोल्गा (रुस की एक नदी) भेजेंगे क्योंकि वो परदेशी हैं। जिस तरह से अंग्रेज लोग आए और चले गए। उसी तरह से ये ब्राह्मण लोग या तो सुधर जाएँ या गंगा से वोल्गा जाने के लिए तैयार हों।”
नंद कुमार बघेल के इन बयानों के खिलाफ रायपुर पुलिस ने धारा 153-A और धारा 505-A के तहत मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने सांप्रदायिक माहौल ख़राब करने और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। नंद कुमार बघेल के इन बयानों को लेकर बीजेपी भी कॉन्ग्रेस सरकार पर हमलावर है। पिछले दिनों ब्राह्मण समाज के लोगों ने राज्यपाल से भी इस मसले पर मुलाक़ात की थी और कार्रवाई करने को लेकर ज्ञापन सौंपा था।
In a video, Nand Kumar Baghel made remarks against Brahmins, calling them foreigners & demanded that they should be sent out of India. His statement was aimed at dividing society. Members of Deen Dayal Vipra Samaj lodged an FIR against him: Complainant Naveen Sharma pic.twitter.com/Oh0qLfj12V
शिकायतकर्ता नवीन शर्मा ने इस संबंध में कहा कि ब्राह्मणों के खिलाफ टिप्पणी करने वाले नंद कुमार बघेल को भारत से बाहर भेज दिया जाए। उनके इस बयान का मकसद समाज को बाँटना था। बता दें कि दीनदयाल विप्र समाज के सदस्यों ने बघेल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। रायपुर में डीडी नगर थाने की प्रभारी योगिता खोपर्डे ने बताया कि दो सितंबर को उन्हें सर्व ब्राह्मण समाज, सुंदर नगर से शिकायत मिली थी कि नंद कुमार बघेल ने ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ टिप्पणी की थी। चार सितंबर को मामला दर्ज किया गया। जाँच शुरू कर दी गई है।
On September 2, we received a complaint from Sarv Brahman Samaj, Sundar Nagar that Nand Kumar Baghel made remarks against the Brahmin community. The offence was registered on September 4. Probe has been initiated: Yogita Khoparde, Station Incharge, DD Nagar, Raipur pic.twitter.com/8vjSF1GOdn
अधिकारी ने शिकायत के हवाले से बताया कि नंद कुमार बघेल पर भगवान राम के बारे में भी कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है। उन्होंने बताया कि संगठन ने अपनी शिकायत में कहा कि मुख्यमंत्री के पिता की कथित टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी। इसके लिए 30 सितंबर 2021 को वोटिंग होगी और चुनाव के नतीजे 3 अक्टूबर को घोषित होंगे। इसके अलावा प्रदेश में दो अन्य सीटों शमशेरगंज और जंगीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होंगे। इसके लिए टीएमसी ने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान भी कर दिया है।
West Bengal CM and TMC chief CM Mamata Banerjee (in file photo) to contest from Bhabanipur in the Assembly bypolls
TMC candidates Jakir Hossain & Amirul Islam to contest from Jangipur & Samserganj seats respectively
तृणमूल कॉन्ग्रेस ने जहाँ शमशेरगंज से अमीरुल इस्लाम को अपना उम्मीदवार घोषित किया है तो जंगीपुर से जाकिर हुसैन पार्टी के उम्मीदवार हैं। इस चुनाव के लिए उम्मीवार 13 सितंबर तक रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं इसके बाद 16 सितंबर को नाम वापसी की आखिरी तिथि होगी।
बीजेपी ने की मीटिंग
पश्चिम बंगाल में तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने रविवार (5 सितंबर 2021) को एक मीटिंग की है। माना जा रहा है कि पार्टी ममता के खिलाफ भवानीपुर से तथागत राय रूद्रनिल घोष को पार्टी का उम्मीदवार घोषित कर सकती है। हालाँकि, अभी तक यह फिक्स नहीं हुआ है। वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है।
बहरहाल भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी के चुनाव लड़ने की खबरों के बाद टीएमसी के कार्यकर्ता उत्साहित हो उठे हैं। विधानसभा क्षेत्र में जगह-जगह ममता के बैनर पोस्टर लगाए जा रहे हैं। पार्टी ने जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है। इस बीच इस चुनाव से पहले ही टीएमसी नेता मदन मित्रा ने इसे एकतरफा मुकाबला बताते बीजेपी को अपना पैसा बर्बाद नहीं करने की नसीहत दी है।
Don't waste your (BJP's) money by fielding your candidates in Bhabanipur Assembly by-elections. This election will be totally one-sided: TMC leader Madan Mitra
West Bengal CM Mamata Banerjee will contest the Assembly bypolls from Bhabanipur pic.twitter.com/aWWtHx2gzv
गौरतलब है कि इसी साल पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान नंदीग्राम सीट से बीजेपी उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हरा दिया था। ममता बनर्जी को सुवेंदु अधिकारी ने 1956 वोटों से हराया था। वहाँ हारने के बाद पहले तो ममता बनर्जी से इसे स्वीकार कर लिया था, लेकिन बाद में वो सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ कोर्ट भी गई थीं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में रविवार (5 सितंबर 2021) को शिक्षक दिवस के मौके पर ‘प्रबुद्ध सम्मेलन’ को संबोधित किया। उन्होंने काशी को लेकर कहा कि यहाँ देश में वर्ष 1947 से सरकारें आ रही हैं और जा रही हैं, लेकिन सभी एक सीमित सोच लेकर आईं। किसी ने भी काशी की महत्ता को समझने की कोशिश नहीं की ।
सीएम ने कहा कि एक सरकार ऐसी भी आई थी, जिसने सोमनाथ मंदिर के कार्यों का विरोध किया था और एक य़े सरकार है जो कि राम मंदिर बनवाने के लिए काम कर रही है। अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने कुम्भ मेले और उससे पहले आयोजित किए गए प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने मुझे बुलाया और पूछा कि प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन दिल्ली के बजाय काशी में हो सकता है। मैंने कहा कि बिल्कुल हो सकता है तो पीएम ने मुझे इस संबंध में विदेश मंत्रालय से बात करने को कहा। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को लगता था कि वाराणसी में होटल नहीं होने के कारण प्रवासी लोग कहाँ रुकेंगे तो हमने कहा कि वो धर्मशाला में रुकेंगे। इसके बाद हमने काशी में ‘टेंट सिटी’ तैयार कर दी और ये काशी का महत्व है कि जिन्हें हमने होटलों में रुकवाया था वो भी होटल छोड़कर टेंट में आ गए थे।”
CM योगी ने कहा, “पूर्व की सरकारें संकीर्ण एजेंडे के साथ आती थीं, इसे काशी ने महसूस किया होगा। काशी एक नया उदाहरण जन्म से अंतिम यात्रा तक बनी है। यही विकास पूरे प्रदेश के विकास का आधार था।”
उत्तर प्रदेश ने कुम्भ औऱ प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन कर पीएम के विजन को सार्थक किया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आजादी के बाद भारतीयता को मानने वाले लोगों के मनोबल पर ठेस पहुँचाने की कोशिश की गई। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय आस्था और संस्कृति की आत्मा की पहचान वाले देश के स्थानों को वैश्विक स्तर पर दिखाया गया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी से राधा कृष्ण का सम्बंध है। इसके निर्माण में सभी का योगदान अविस्मरणीय बीएचयू परिवार मानता है। सनातन धर्म का केंद्र काशी प्राचीन काल से रहा है। काशी को जानने व देखने की उत्सुकता सदा से बनी रही है। लोग इसके भौतिक स्वरूप नहीं देख पाते थे। पिछले सात वर्षों से काशी अपने नए कलेवर के रूप में पुरातन कलेवर का स्वरूप बनती जा रही है।
महात्मा गाँधी को लेकर सीएम य़ोगी आदित्यनाथ ने कहा कि महात्मा गाँधी ने वर्ष 1916 में काशी की गंदगी को दुनिया के सामने रखा था, लेकिन आज काशी नए कलेवर में प्रस्तुत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दंगों के बिना कोई त्योहार नहीं होता था, चार सालों में प्रदेश में व्यापक परिवर्तन दिखाई पड़ रहा है। सभी ने अपने क्षेत्र में कार्य किया। उत्तर प्रदर्श के बारे में जो गलत धारणाएं थीं वे चार सालों में सही हुई हैं।
दुनिया के खतरनाक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने इराक के एक शहर में चेकप्वाइंट को निशाना बनाकर हमला किया है। यह घातक हमला इराक के किरकुक शहर में हुआ है। इस हमले में 13 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई है।
13 police personnel killed in an attack by Islamic State against a checkpoint near Kirkuk in northern Iraq: AFP
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी इराक में किरकुक से 30 किमी (18 मील) दक्षिण-पश्चिम में अल-रशद शहर के एक गाँव में तैनात पुलिस और हमलावरों के बीच दो घंटे तक भिड़ंत हुई। आतंकियों ने इस हमले में पुलिस के तीन वाहनों को नष्ट कर दिया। आतंकियों ने पुलिस को चौकी तक पहुँचने से रोकने के लिए सड़क किनारे बम लगा दिए थे। हालाँकि अभी तक किसी आतंकी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। इराक के इस इलाके में इस्लामिक स्टेट के आतंकी सक्रिय हैं।
इराक के इस इलाके में आइएस आतंकी सक्रिय
इराक के उत्तरी क्षेत्र की पहाड़ियों और पश्चिमी इराक के रेगिस्तान में सेना आइएस के खिलाफ अभियान चलाती रहती है। इराक के इन क्षेत्रों में आइएस के आतंकी काफी सक्रिय हैं और वे इन इलाकों में छिपे रहते हैं। इन इलाकों में आइएस के उग्रवादी हमले करते रहते हैं। हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में यहाँ आतंकी हमलों में कमी आई है। इराक के इन इलाकों में आतंकी घात लगाकर बैठे रहते हैं और सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हैं।
जुलाई में भी हुआ था बड़ा हमला
इससे पहले जुलाई माह में भी आइएस के आतंकियों ने हमला किया था। उस हमले में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। यह हमला सदर सिटी के अल-वॉहेइलत बाजार में किया गया था, जो कि बगदाद का एक उपनगर है। वहीं इराक में करीब 3500 अंतरराष्ट्रीय सैनिक मौजूद हैं। इनमें से 2500 अमरीकी सैनिक हैं। हालाँकि लगातार हो रहे आतंकी हमलों के बाद अमरीका यहाँ से भी अपने सैनिकों की संख्या कम कर रहा है।
निशाने पर इराकी सेना और पुलिस के जवान
आईएस ने 2014 में इराक के कई इलाकों पर कब्जा करना शुरू किया। हालाँकि, बाद में अमेरिका के नेतृत्व में चले सैन्य अभियान के दौरान उसे मुँह की खानी पड़ी थी। इराकी सरकार ने 2017 में इस सुन्नी संगठन के हार की घोषणा कर दी थी। लेकिन स्लीपर सेल्स की मदद से यह संगठन ने यहाँ पर सुरक्षा बलों पर हमले करता रहा है। उत्तरी इराक में आईएस के निशाने पर इराकी सेना और पुलिस के जवान लगातार रहे हैं।
झारखंड के गुमला जिले के जामडीह गाँव की एक महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने कुरकुरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता ने बताया कि कुछ ग्रामीण उसके परिवार के सदस्यों को जबरन ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रताड़ित कर रहे हैं। दलित महिला ने कहा उन ईसाई ग्रामीणों ने मेरी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म भी किया, जिससे वह अभी तक सदमे में है।
गुमला पुलिस ने महिला की लिखित शिकायत के आधार पर 30 अगस्त को धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाने की सजा), 341 (गलत तरीके से रोक लगाने की सजा), 295 (अपमान के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुँचाना या अपवित्र करना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), 448 (घर-अतिचार के लिए सजा), 506 (आपराधिक धमकी के लिए सजा), 509 (किसी भी महिला का अपमान), झारखंड में धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की आईपीसी की धारा 4 (जबरदस्ती धर्मांतरण) और POCSO अधिनियम की धारा 8 (नाबालिग का यौन उत्पीड़न) के तहत प्राथमिकी दर्ज की। यह गाँव गुमला जिला मुख्यालय से लगभग 70 किमी दूर स्थित है, जो वामपंथी उग्रवाद से बुरी तरह प्रभावित है।
पुलिस के सूत्रों ने पुष्टि की कि मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसमें कहा गया है कि कुरकुरा थाने के प्रभारी अधिकारी मामले की जाँच कर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में पॉलीना बिलुंग, आकाश डुंगडुंग, निशा, शीला, फूलमनी सुरीन, उर्मिला, संतोषी, जानकी, शीतल राम, गंगी देवी, आकाश डुंगडुंग और सुशीला देवी का नाम लिया है। ये सभी ईसाई धर्म के अनुयायी हैं। महिला ने कहा कि आरोपित 14 अगस्त को उसके घर आए और उसके परिवार से ईसाई धर्म अपनाने के लिए कहा। अनुसूचित जाति की पीड़िता ने उन्हें यह कहते हुए मना कर दिया था कि वह अपने हिन्दू धर्म से खुश है।
इस बात को लेकर उनके बीच कहासुनी हुई, जिससे आरोपित हिंसक हो गए। उन्होंने घर पर अपना धार्मिक झंडा फहराया और उसकी 16 साल की बेटी के साथ यौन शोषण किया। उन्होंने लड़की के कपड़े खींचते हुए कहा कि वे उससे शादी करेंगे और फिर उसे ईसाई बना देंगे। महिला ने कहा कि आरोपितों ने ग्रामीणों को उसके परिवार के खिलाफ भी भड़काया। गुमला ईसाई मिशनरियों का धर्म परिवर्तन का केंद्र रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले साल लॉकडाउन के दौरान ईसाई मिशनरियों ने बड़ी संख्या में लोगों का धर्म परिवर्तन कराया था।
अफगानिस्तान के पूर्वोत्तर प्रांत पंजशीर में कब्जे के लिए तालिबान और नेशनल रजिस्टेंस फोर्स के बीच लड़ाई जारी है। नॉर्दर्न एलायंस ने रविवार (सितंबर 5, 2021) को दावा किया कि पंजशीर घाटी से तालिबान का सफाया कर दिया गया है और कम से कम 1,000 तालिबानियों को पकड़ लिया गया है।
नॉर्दर्न एलायंस के प्रवक्ता फहीम दशती ने ट्वीट किया, “पंजशीर के विभिन्न जिलों में सुबह से अब तक करीब 600 तालिबान का सफाया हो चुका है। 1,000 से अधिक तालिबानियों को पकड़ लिया गया है या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है।” प्रवक्ता ने आगे कहा कि तालिबान को अन्य अफगान प्रांतों से आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।
#پریان#پنجشیر از لوث وجود #طالبان کاملا پاکسازی شد. دستکم هزار تروریست به دلیل انسداد مسیر برگشت و خروج گیر افتاده بودند، تمام مهاجمان هنگام فرار و عقبنشینی توسط مردم محل با کمک رزمندگان #مقاومت کشته، تسلیم یا اسیر شدند. شمار زیادی از این اسرا خارجی و بیشتر #پاکستانی اند.
इस बीच, क्षेत्र में बारूदी सुरंगों की मौजूदगी के कारण पंजशीर रजिस्टेंस फोर्स के खिलाफ तालिबान का आक्रमण धीमा हो गया है। तालिबान के एक सूत्र ने कहा कि पंजशीर में लड़ाई जारी है, लेकिन राजधानी बाजारक और प्रांतीय गवर्नर के परिसर की ओर जाने वाली बारूदी सुरंगों की वजह से आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है।
वहीं तालिबान का दावा है कि उसने पंजशीर के चार जिलों पर कब्जा कर लिया है। तालिबान के प्रवक्ता बिलाल करीमी ने कहा, “हमने पंजशीर प्रांत के सात में से चार जिले हमारे कब्जे में आ चुके हैं। हम अब पंजशीर की ओर बढ़ रहे हैं।”
गौरतलब है कि पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह और नॉर्दन एलायंस के नेता अहमद मसूद ने उन खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि तालिबान ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि तालिबान की ओर से फोन, इंटरनेट और बिजली लाइनों को बंद करने से परिस्थितियाँ कठिन हैं। अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति सालेह ने कहा कि दोनों पक्षों में हताहत हुए हैं। उन्होंने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि हम एक मुश्किल स्थिति में हैं। हम पर तालिबान का हमला हुआ है। हमारी सेना आत्मसमर्पण नहीं करेगी।”
बता दें कि पंजशीर नेशनल रजिस्टेंस फोर्स का गढ़ है, जिसका नेतृत्व पूर्व अफगान गुरिल्ला कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद और अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह कर रहे हैं, जिन्होंने खुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया हुआ है।
आजतक टीवी चैनल की पत्रकार और संपादक चित्रा त्रिपाठी रविवार (5 सितंबर 2021) को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसानों की महापंचायत को कवर करने के लिए गई थीं। वहाँ कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काफी परेशान किया। प्रदर्शनकारी चित्रा के आसपास जमा हो गए और ‘गोदी मीडिया हाय-हाय’ के नारे लगाने लगे। आखिरकार कार्यक्रम को कवर करने के लिए गईं पत्रकार को मौके से खदेड़ दिया गया।
मुजफ्फरनगर में आज तक की एंकर चित्रा त्रिपाठी को घेरकर ‘गोदी मीडिया हाय-हाय’ के नारे लगाए गए. pic.twitter.com/j3D1m4XPsU
इस घटना पर न्यूज़क्लिक के एक ‘पत्रकार’ श्याम मीरा सिंह ने उत्पीड़न की निंदा करने के बजाय, चित्रा त्रिपाठी पर जनता को ‘मूर्ख’ बनाने का आरोप लगाते हुए अत्याचारी आचरण को सही ठहराया। न्यूज़क्लिक के श्याम मीरा सिंह ने दावा किया कि यही लोग रवीश कुमार की सराहना करेंगे, लेकिन रवीश कुमार के खिलाफ भी होंगे।
रवीश कुमार जाएँगे तो यही जनता सर आँखों पर बिठाएगी. लेकिन गोदी मीडिया के एंकरों को जनता पहचानती है. आप स्टूडियो में इन्हें ख़ालिस्तानी कहें, बिकाऊ कहें, चोर कहें. फिर आप अपने आप को पत्रकार नहीं कह सकते. आप सरकार के दलाल हैं, दलालों को अपनी रैलियों से भगाने का पूरा हक़ जनता को है
आज मुजफ्फरनगर में कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनकारी पूरे विरोध प्रदर्शन के दौरान नियमित रूप से घिनौने आचरण में लिप्त रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले इसी साल गणतंत्र दिवस मौके पर भी किसान के रूप में प्रदर्शनकारियों का विरोध हिंसक हो गया औऱ इसके बाद राष्ट्रीय राजधानी में दंगे हुए थे।
वहीं, इंडिया टुडे के एक संपादक ने प्रदर्शन स्थल पर प्रदर्शनकारियों द्वारा महिला पत्रकारों से छेड़छाड़ करने का खुलासा किया था। संपादक ने बताया था कि ये लोग महिला पत्रकारों के नितंबों पर चुटकी काट रहे थे।
हालाँकि, किसान आंदोलन में ही दिल्ली की टीकरी सीमा विरोध स्थल पर पश्चिम बंगाल की एक लड़की के साथ भी दुष्कर्म किया गया था। 30 अप्रैल 2021 को पीड़िता की मौत के बाद प्रदर्शनकारियों ने शव को खुली जीप में रखकर जुलूस निकाला था, भले ही उसकी कथित तौर पर कोविड -19 से मृत्यु हो गई थी।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कथित किसानों ने मुजफ्फरनगर में ‘महापंचायत’ का आयोजन किया है। इसी महापंचायत में राकेश टिकैत ने भीड़ से अल्लाहु-अकबर और हर-हर महादेव के नारे भी लगवाए।
पत्रकार तवलीन सिंह ने हमारे रविवार को बोरिंग होने से बचा लिया। आज उन्होंने नसीरुद्दीन शाह और उन इस्लामवादियों का ‘बचाव’ करने का जिम्मा उठाया है जिन्होंने ‘हिंदुत्व ट्रोल्स’ पर उन्हें गाली देने का आरोप लगाते हुए उन्हें खारिज कर दिया था। बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह द्वारा अफगानिस्तान में तालिबान की जीत का जश्न मनाने के लिए भारतीय मुसलमानों की आलोचना करने के बाद से तमाम भारतीय मुस्लिम, तथाकथित लिबरल-वामपंथी पत्रकारों सहित कट्टरपंथी मुस्लिमों की लॉबी पुरस्कार विजेता अभिनेता को गाली देने और लताड़ने के लिए खुलेआम सोशल मीडिया पर नंगई पर उतर आई।
बता दें कि नसीरुद्दीन शाह ने एक वीडियो जारी कर हिन्दुस्तानी मुसलमानों से शांति और अहिंसा का पालन करने और कट्टरपंथी बहशी इस्लामी समूह का समर्थन नहीं करने के लिए कहा था। तवलीन सिंह ने नसीरुद्दीन शाह पर अपने कॉलम में पाँच बिल्कुल बकवास बातें कही हैं।
नसीरुद्दीन शाह पर ‘दाढ़ी वाले मुल्लाओं’ ने किया हमला
तवलीन के दावों के विपरीत, ‘लिबरल’ और खुद को ‘मोडरेट’ बताने वाले भारतीय मुस्लिम नसीरुद्दीन शाह द्वारा तालिबान का पक्ष लेने के खिलाफ सलाह देने से काफी नाखुश थे।
सबा नकवी और रिफत जावेद का ट्वीट
वह अपने कॉलम में दावा करती है, “दाढ़ी वाले मुल्लाओं द्वारा एक साथ हमला कोई आश्चर्य की बात नहीं थी।” ऊपर के ट्वीट के स्क्रीनशॉट में आप देख सकते हैं कि तथाकथित पत्रकार सबा नकवी और AAP समर्थक ब्लॉग जनता का रिपोर्टर के संपादक रिफत जवैत शायद ही ‘दाढ़ी वाले मुल्ला हैं जिनके माथे पर नमाज के निशान हैं।’
आरफा खानम शेरवानी का ट्वीट
अविश्वसनीय रूप से द वायर की पत्रकार, जो शाह द्वारा युवा भारतीय मुसलमानों को तालिबान का महिमामंडन करने के खिलाफ चेतावनी देने से नाराज थी, वह भी एक ‘दाढ़ी वाला मुल्ला’ है।
तो आप देखिए, नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणियों से नाखुश दाढ़ी वाले, रूढ़िवादी और मजहबी उन्मादी व्यक्ति नहीं थे। तालिबान पर नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणियों से न केवल दाढ़ी वाले, रूढ़िवादी और अत्यधिक मजहबी लोग परेशान थे, बल्कि शिक्षित मुसलमान, जिनमें से कई पत्रकार हैं, वो भी शाह की टिप्पणियों से नाखुश थे। तवलीन सिंह ने इस हिस्से को छोड़ दिया। इससे पता चलता है कि कैसे वह सिर्फ इस मुद्दे को उलझाना चाहती थी और दोष ‘हिंदुत्व ट्रोल्स’ पर डालना चाहती थी।
‘हिंदुत्व ट्रोल्स ने नसीरुद्दीन शाह का मजाक उड़ाया’
तवलीन सिंह को लगता है कि पिछले साल भारत के मुसलमानों के लिए असुरक्षित होने का दावा करने के लिए नसीरुद्दीन शाह से सवाल करना और उनका ‘मजाक’ उड़ाना, शाह द्वारा तालिबान का महिमामंडन न करने के लिए कहने पर भारतीय मुसलमानों द्वारा शाह पर किया गया हमला बड़ा अपराध था। उनका दावा है कि भारत में मुस्लिम होना आसान नहीं है। वह कथित ‘हेट क्राइम’ के मामलों के बारे में बात करती हैं, जहाँ ‘जय श्री राम’ का नारा नहीं लगाने पर मुस्लिम युवकों को पीटा जाता है। वह इसका जिक्र करते हुए भूल जाती हैं कि अधिकतर मामलों में यह फर्जी ही निकला।
14 जून को ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने पीड़ित बुजुर्ग का वीडियो ट्वीट किया (जो वह अब डिलीट कर चुका है)। इसके साथ उसने लिखा, “एक बुजुर्ग आदमी, सूफी अब्दुल समद सैफी पर गाजियाबाद के लोनी में 5 गुंडों ने हमला किया। उन्हें बंदूक की नोंक पर मारा गया, प्रताड़ित किया गया और जबरदस्ती उनकी दाढ़ी काट दी गई।”
मोहम्मद जुबैर का ट्वीट
इसके बाद पीड़ित का पक्ष रखते हुए जुबैर ने एक और वीडियो डाली और साथ ही पीड़ित पक्ष के नाम पर ये लिखा, “ये अब्दुल समद सैफी की घटना को बयान करते हुए पूरी वीडियो है। उनका दावा है कि उनसे जबरदस्ती जय श्रीराम का नारा बुलवाया गया।”
मोहम्मद जुबैर का ट्वीट
बाद में पुलिस ने मामले की सच्चाई बताते हुए किसी भी तरह से सांप्रदायिक एंगल होने से इनकार किया। 14 जून को ही पुलिस ने पूरे मामले के संबंध में अपनी जाँच के बाद पक्ष रखा। बताया गया ये घटना जून 5, 2021 की है, जिसके बारे में पुलिस के समक्ष 2 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने जाँच की तो पाया कि पीड़ित अब्दुल समद बुलंदशहर से लोनी बॉर्डर स्थित बेहटा आया था। वो एक अन्य व्यक्ति के साथ मुख्य आरोपित परवेश गुज्जर के घर बंथना गया था। वहीं पर कल्लू, पोली, आरिफ, आदिल और मुशाहिद आ गए।
वहाँ पर बुजुर्ग के साथ मारपीट शुरू कर दी गई। अब्दुल समद ताबीज बनाने का काम करता था। आरोपितों का कहना था उसके ताबीज से उनके परिवार पर बुरा असर पड़ा। अब्दुल समद गाँव में कई लोगों को ताबीज दे चुका था। आरोपित उसे पहले से ही जानते थे। यहाँ फर्जी ‘हेट क्राइम’ की 20 ऐसी घटनाएँ हैं जहाँ मुस्लिम युवकों ने झूठा दावा किया था कि उन्हें ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर किया गया था।
मुशायरा और कव्वाली
तवलीन सिंह भारतीय इस्लाम को इस तरह परिभाषित करती हैं जैसे कि यह मुशायरों, कव्वाली, निहारी और बिरयानी के बारे में है। मानो तालिबान जैसे कट्टरपंथी और इस्लामी गुट मुशायरे और बिरयानी का लुत्फ खुद नहीं उठाते। नसीरुद्दीन शाह ने एक प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक गुलफ़ाम हसन की भूमिका निभाई, जो विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए और दिल्ली में नियमित संगीत कार्यक्रम आयोजित करते हैं। वह फिल्म में पाकिस्तानी खुफिया विभाग के लिए भी काम करते थे और भारत के साथ युद्ध करना चाहते थे। तो स्पष्ट रूप से, मुशायरा और बिरयानी से प्यार करने वाले मुसलमान कट्टरपंथी नहीं हो सकते हैं, यह एक बहुत ही अजीब स्थिति है।
यहाँ तवलीन ‘भारतीय इस्लाम’ के बारे में कहती हैं: “शाह सही कहते हैं जब वे कहते हैं कि भारतीय इस्लाम एक ऐसे धर्म के रूप में विकसित हुआ जो आधुनिकता से अच्छी तरह निपटता है। इसलिए, एक प्राइमटाइम शो में हिंदुत्व की एक प्रमुख घोषणा को सुनकर मुझे झटका लगा कि केवल एक तरह का इस्लाम और एक ही तरह का मुसलमान था। फिर उन्होंने कुरान की आयतों की संख्या का जिक्र किया जो काफिरों और नास्तिकों के खिलाफ हिंसा की सलाह देते हैं।”
यह वास्तव में सच है कि केवल एक ही प्रकार का इस्लाम है जो कुरान में विश्वास करता है और इस्लामी पवित्र पुुस्तक कुरान के अनुसार जो अल्लाह को नहीं मानते हैं, उन काफिरों को मारना और उनका सिर काटना जायज है।
90 के दशक में भारतीय मुसलमानों के लिए चीजें बदलने लगीं
तवलीन सिंह ने बिना स्पष्ट हुए भारतीय मुसलमानों को दोष देने की कोशिश की कि उनकी धार्मिक पहचान अयोध्या में राम जन्मभूमि पर विवादित ढाँचे के विध्वंस का परिणाम है जिसे अक्सर ‘बाबरी मस्जिद’ कहा जाता है। 6 दिसंबर 1992 को संरचना को ध्वस्त कर दिया गया था, जिससे देश में व्यापक सांप्रदायिक दंगे हुए। वह कश्मीर में 90 के दशक के बारे में बात करती है, लेकिन बड़ी धूर्तता से कश्मीरी हिंदू पलायन को नजरअंदाज करती है, जहाँ इस्लामियों और पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवादियों ने हिंदुओं को उनके घरों से भगा दिया।
तवलीन, कई ‘लिबरलों’ की तरह यह कहना चाहती हैं कि भारत में कट्टरपंथी इस्लाम के बीज 1990 के दशक में ही बोए गए थे। हालाँकि, सच्चाई इससे कोसो दूर है। हमें आजादी के बाद भारत के विभाजन के रूप में ज्यादा पीछे जाने की जरूरत नहीं है, जब मुस्लिम कट्टरपंथियों ने भारत के एक हिस्से को अलग इस्लामिक देश बना दिया और हम इस बारे में भी बात नहीं करते हैं कि कैसे लाखों बंगाली हिंदुओं का नरसंहार किया गया। या फिर 1921 में केरल में मोपला नरसंहार, जहाँ सिर्फ हिंदू होने के कारण हजारों हिंदू मारे गए थे।
सच्चाई यह है कि भारत में कट्टरपंथी इस्लाम के बीज 70 और 80 के दशक के अंत में बोए गए थे और सऊदी अरब ने सलाफीवाद और वहाबवाद का अंतर्राष्ट्रीय प्रचार शुरू किया था। मुस्लिम और गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक वाले देशों में सैकड़ों इस्लामिक कॉलेज, इस्लामिक केंद्र, मस्जिद, मदरसे बनाए गए। कुरान की लाखों प्रतियाँ दुनिया भर में छपी और वितरित की गईं।
लगभग 70 और 80 के दशक में, कई भारतीय, विशेष रूप से मुसलमान काम के लिए सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में गए। इस पैसे से भारत में ग्रामीण इलाकों सहित बड़ी मस्जिदें और मदरसे बनाए गए। भारत में मुसलमान अब अपनी पहचान मुसलमानों के रूप में करने लगे थे और अपने धर्म को बिना मिलावट के जानना और अपनाना चाहते थे।
इसके बाद राजीव गाँधी सरकार द्वारा शाह बानो के फैसले को पलट दिया गया। 1986 में, राजीव गाँधी के नेतृत्व वाले भारतीय राज्य ने मुस्लिम कट्टरपंथियों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम की। मो. अहमद खान बनाम शाह बानो बेगम और अन्य मामले एवं 1986 में राजीव गाँधी सरकार द्वारा पारित कानून को अक्सर भारत के राजनीतिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक के रूप में याद किया जाता है।
तो, नहीं, तवलीन सिंह, आपने अपने मुशायरों और संगीत कार्यक्रमों से ब्रेक लेने के बाद 90 के दशक में भारत में कट्टरपंथी इस्लाम पर ध्यान दिया होगा, लेकिन कट्टरपंथी तत्व हमेशा आसपास रहे हैं।
भारतीय मुसलमानों ने भारतीय धर्मों से सीखा
तवलीन ने अंत में कहने के लिए बेहतरीन बेतुकी बातों को सहेज कर रखा था। अंत में, सिंह का दावा है कि भारतीय मुसलमानों ने ‘आधुनिक दुनिया के साथ बेहतर व्यवहार’ किया है और उन्होंने भारतीय धर्मों से बहुत कुछ सीखा है। नहीं, तलवीन, कोई भारतीय मुसलमान, यहाँ तक कि एक शिक्षित व्यक्ति भी इसे स्वीकार नहीं करेगा। यह बकवास है।
इसके अलावा, अन्य भारतीय धर्मों के लोगों के साथ भारतीय मुसलमान कितनी अच्छी तरह रहते हैं, इसका प्रदर्शन देखने के लिए, कश्मीर पर एक नज़र डालें, जहाँ हिंदुओं को उनके घरों से निकाल दिया गया था और उन्हें वापस अपने घर जाने के लिए अनुच्छेद 370 को निरस्त होने तक 30 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा था। हाल ही में उत्तर प्रदेश के नूरपुर में, हिंदुओं को मुस्लिमों के डर से अपने घरों पर ‘मकान बिकाऊ है’ बोर्ड लगाना पड़ा।
इसके अलावा, पाकिस्तान 1947 में विभाजन तक केवल भारतीय इस्लाम था। आज देखिए पाकिस्तान में अल्पसंख्यक कहाँ खड़े हैं। यदि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी इस्लामी देशों में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ उत्पीड़न नहीं होता, तो भारत सरकार को उन लोगों के लिए भारतीय नागरिकता में तेजी लाने के लिए नागरिकता संशोधन अधिनियम लाने की आवश्यकता नहीं होती।
सुरक्षित और पॉश जगहों पर रहते हुए तवलीन सिंह जो कहती हैं, वह उनके अच्छे अच्छे शब्द हैं। और अब जबकि उनके जैसे लोगों ने इसे इतनी बार दोहराया है कि वे उनके यूटोपिया पर विश्वास करने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में राजकीय इंटर कालेज मैदान में संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत में हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड समेत कई राज्यों से किसान पहुँचे हैं। इस दौरान राकेश टिकैत ने दिल्ली बॉर्डर पर डटे किसानों को लेकर कहा कि भले ही वहाँ हमारी कब्रगाह बन जाए, लेकिन हम वहाँ से नहीं जाएँगे। उन्होंने कहा, ”हम आपसे वादा लेकर जाते हैं कि अगर वहाँ पर हमारी कब्रगाह बनी तो भी हम मोर्चा नहीं छोड़ेंगे और बगैर जीते वापस नहीं आएँगे।”
When Govt of India will invite us for talks, we will go. The farmers’ agitation will continue until the Govt fulfil our demands. The struggle for Independence continued for 90 years so I have no idea for how long this agitation will run: BKU (Arajnaitik) leader Rakesh Tikait pic.twitter.com/vIZPeYkRCG
टिकैत ने अपने मंच से लगवाए अल्ला-हू-अकबर के नारे लगवाए
किसान नेता राकेश टिकैत ने रविवार (5 सितंबर) को किसान मोर्चा की महापंचायत में भीड़ से अल्लाहु-अकबर और हर-हर महादेव के नारे भी लगवाए। उन्होंने कहा, ”यूपी की जमीन को दंगा करवाने वालों को नहीं देंगे।”
राकेश टिकैत ने कहा कि जब भारत सरकार हमें बातचीत के लिए आमंत्रित करेगी, हम जाएँगे। जब तक सरकार हमारी माँगे पूरी नहीं करती तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। आजादी के लिए संघर्ष 90 साल तक चला, इसलिए मुझे नहीं पता कि यह आंदोलन कब तक चलेगा।
When Govt of India will invite us for talks, we will go. The farmers’ agitation will continue until the Govt fulfil our demands. The struggle for Independence continued for 90 years so I have no idea for how long this agitation will run: BKU (Arajnaitik) leader Rakesh Tikait pic.twitter.com/vIZPeYkRCG
टिकैत ने कहा कि मुजफ्फनगर की जमीन पर पैर नहीं रखेंगे, जब जीत होगी तभी हम यहाँ आएँगे। उन्होंने कहा, “सरकार बात करने को तैयार नहीं है। उसने बात करनी बंद कर दी है। हम बात करना चाहते हैं पर लगता है सरकार इसका कोई समाधान नहीं चाहती है।” उन्होंने आगे कहा कि अब मिशन सिर्फ यूपी नहीं बल्कि देश को बचाना है। पूरे देश के मुद्दे उठाएँगे।
पत्रकार सुशांत सिन्हा ने अपने ट्विटर हैंडल पर किसानों को एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें बड़ी संख्या में किसान एक महिला पत्रकार को घेरे हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने वीडियो के साथ लिखा, ”एक महिला पत्रकार को घेरकर अपने ‘किसान’ होने का परिचय देते गुंडे।” बता दें कि मंच से संयुक्त किसान मोर्चा ने 27 सितंबर को भारत बंद की घोषणा की है।