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‘नशे की हालत में हमेशा ही बहक जाते हैं’: गोपाल मंडल के अंडरवियर-गंजी में घूमने का JDU सांसद ने खोला राज

जेडीयू के सांसद अजय मंडल ने विधायक गोपाल मंडल को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रेन में जेडीयू विधायक गोपाल मंडल द्वारा अंडरवियर और बनियान पहन कर घूमने पर पर सांसद अजय मंडल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि गोपाल मंडल नशे में बहक जाते हैं। सांसद अजय मंडल ने कहा कि गोपाल मंडल हमारी पार्टी के विधायक हैं। इसमें कोई शक नहीं कि गोपाल मंडल अच्छे व्यक्ति हैं। प्री प्लानिंग के तहत वे कोई गलती नहीं करते लेकिन जब नशे में होते हैं तो थोड़ा बहक जाते हैं।

जेडीयू सांसद अजय मंडल ने कहा, “हम जनता के प्रतिनिधि हैं और जनता के बीच ठीक से व्यवहार करना हमारा कर्तव्य है। हम जो कुछ भी करते हैं उसका असर समाज पर पड़ता है। गोपाल मंडल ने 2 सितंबर को तेजस राजधानी एक्सप्रेस में जिस तरह का व्यवहार किया वह स्वीकार्य नहीं है, यह निंदनीय है।”

हालाँकि इस दौरान जदयू सांसद ने गोपाल मंडल का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के निर्णय पर पहुँचने से पहले उनकी भी परिस्थिति पर भी गौर करना चाहिए। उन्हें शौच लगी थी और कपड़ा पहनकर बाथरूम में जाने में दिक्कत होती है। लेकिन बनियान पहनने के बाद उन्हें कम से कम एक गमछा या तौलिया लपेट लेना चाहिए था।

जानकारी के मुताबिक गोपाल मंडल के खिलाफ सरकारी रेलवे पुलिस ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्राथमिकी दर्ज की है। मामला अब भोजपुर जिले में ट्रांसफर कर दिया गया है। शिकायतकर्ता प्रहलाद पासवान ने आरोप लगाया कि ट्रेन में यात्रा के दौरान गोपाल मंडल नशे की हालत में थे।

गौरतलब है कि बीते दिनों जेडीयू विधायक गोपाल मंडल ट्रेन से दिल्‍ली जा रहे थे। दिल्ली जाने के लिए वे पटना स्‍टेशन से तेजस पर सवार हुए थे। ट्रेन में सवार होते ही उन्‍होंने अपने कपड़े उतार दिए। इसके बाद वे केवल अंडरवियर और बनियान पहने शौचालय जाने लगे। आरोप है कि चलती ट्रेन में उनकी इस हरकत पर आपत्ति जताने वाले एक यात्री से उन्‍होंने गाली-गलौज तक कर डाली। हालात बिगड़ने पर RPF को हस्‍तक्षेप करना पड़ा था।

यात्रियों के अनुसार विधायक ने उनके साथ इस दौरान धक्‍का मुक्‍की भी की थी। बाद में विधायक ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि उनका पेट खराब था और जल्‍दबाजी में शौचालय जाने के दौरान वे तौलिया नहीं लपेट सके। अंडरवियर और बनियान वाली तस्वीर देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। जिसके बाद विधायक पर कई तरह के सवाल उठने शुरू हो गए। इसी मामले में अब जेडीयू सांसद का बयान सामने आया है।

‘भीड़तंत्र ही लोकतंत्र में सबसे बड़ा हथियार’: ‘अल्लाह-हू-अकबर’ नारे वाली महापंचायत को राकेश टिकैत ने बताया सफल

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मुजफ्फरनगर में हुई किसानों की महापंचायत को सफल बताया है। राकेश टिकैत ने दावा किया है कि मुजफ्फरनगर में हुई महापंचायत बेहद सफल रही। उन्होंने कहा कि सड़कों पर 21 किमी तक लोगों का हुजूम था। किसान महापंचायत में 20 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए। सड़कें ब्लॉक होने के कारण स्थानीय लोग इसमें शामिल नहीं हो सके। 

‘कृषि कानूनों की वापसी तक जारी रहेगा आंदोलन’

इसके साथ ही टिकैत ने कहा कि जब तक तीन कृषि कानूनों की वापसी नहीं होगी तब तक हम ना ही धरना स्थल छोड़ेंगे और ना ही आंदोलन छोड़ेंगे। वहीं राकेश टिकैत ने ट्वीट करते हुए कहा, “भीड़तंत्र ही लोकतंत्र में सबसे बड़ा हथियार है। कोरोना से ज्यादा खतरनाक है सरकार के कानून, कोरोना एक बार मारेगा ये तिल- तिल मारेंगे।” राकेश के इस ट्वीट पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं।

एक यूजर ने ट्वीट करते हुए लिखा, “ग्राउंड रिपोर्ट ये बता रहा है कि रैली में लगभग 130-140 करोड़ लोग जुटे थे।”

वेंकटेश भारद्वाज ने लिखा, “कानून में काला क्या है टिकैत जी ये तो बताइए? हिंदुस्तान में ज्यादा खतरनाक झूठ बोलने वाले और अपने स्वार्थ साधने के लिए जनता को मूर्ख बनाकर मासूम जनता को ठगने वाले लोग हैं।”

पुष्पेंद्र शर्मा ने लिखा, “2007 में मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय और 2014 में अमरोहा से आरएलडी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ और हार कर जमानत जब्त करवाने वाले एक जातिवादी नेता ने आज मुजफ्फरनगर की राजनैतिक रैली में ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगा कर अपना चुनाव प्रचार शुरू किया।”

कैलाश बेनीवाल ने लिखा, “9 महीनों में किसान आंदोलन 3 कृषि कानून रद्द करो से लेकर आज अल्लाहु अकबर तक आ पहुँचा। डूबा वंश कबीर का उपजा पूत कमाल! टिकैत खान।”

गौरतलब है कि किसान नेता राकेश टिकैत ने रविवार (5 सितंबर, 2021) को किसान मोर्चा की महापंचायत में भीड़ से अल्लाहु-अकबर और हर-हर महादेव के नारे भी लगवाए। उन्होंने कहा, ”यूपी की जमीन को दंगा करवाने वालों को नहीं देंगे।”

राकेश टिकैत ने कहा था कि जब भारत सरकार उन्हें बातचीत के लिए आमंत्रित करेगी, वो जाएँगे। जब तक सरकार उनकी माँगे पूरी नहीं करती तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आजादी के लिए संघर्ष 90 साल तक चला, इसलिए उन्हें नहीं पता कि यह आंदोलन कब तक चलेगा।

पिछले दिनों स्व-घोषित किसान नेता और ‘आंदोलनजीवी’ राकेश टिकैत की एबीपी न्यूज पर एक डिबेट के दौरान उस समय बोलती बंद हो गई जब एंकर रुबिका लियाकत ने उनसे नए कृषि कानूनों को लेकर सवाल किए। टिकैत इस दौरान न केवल हकलाते हुए बल्कि मुद्दे को घुमाते हुए भी नजर आए। 

8 महीने से कथित ‘किसानों’ के साथ प्रदर्शन पर बैठे राकेश टिकैत का मुँह उस समय बिलकुल बंद हो गया जब पूछा गया कि आखिर कृषि कानूनों से समस्या क्या है। एंकर ने उन्हें वो विशेष सेक्शन हाईलाइट करने को कहे जिसके आधार पर प्रदर्शन चल रहा है। कृषि कानूनों की प्रतियाँ लेकर सवाल करने बैठीं रुबिका ने टिकैत से पूछा कि अगर उन्होंने ये कृषि कानूनों को पढ़ा है तो बताएँ कि परेशानी क्या है। इसी सवाल के बाद टिकैत बातों को गोल-मोल करने लगे।

‘कु*&% की दुम, भा*&गिरी, मुजरा’: तालिबान से की RSS की तुलना, ट्रेंड कर रहा #जावेद_अख्तर_गद्दार_है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तुलना तालिबान से करने के बाद संगीतकार जावेद अख्तर बुरी तरह फँसते नजर आ रहे हैं। आज शिव सेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में जावेद अख्तर को इस बयान के लिए लताड़ा है। दूसरी ओर सोशल मीडिया यूजर्स भी #जावेद_अख्तर_गद्दार_है हैशटैग ट्रेंड करवा कर उनसे सवाल कर रहे हैं।

मुकेश जाधव कहते हैं जैसा कि जावेद अख्तर ने कहा विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल तालिबान से ज्यादा खतरनाक हैं। मगर क्या वीएचपी, आरएसएस या बजरंग दल, महिलाओं को जबरन उठाता है? सत्ता के लिए लोगों को मारता है? धार्मिक कानून लागू करता है? आतंक में संलिप्त होता है? ड्रग स्मगलिंग करता है? या धार्मिक चिह्नों को नष्ट करता है?

कुछ लोग जावेद अख्तर के इस बयान के बाद शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी से दोबारा साथ आने की अपील कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है, “कुछ लोग कुत्ते की दुम जैसे होते हैं। ये लोग कभी नहीं बदलते। शिवसेना और भाजपा को एक साथ आना चाहिए ताकि हिंदुत्व को बचाया जा सके।”

एक अक्षय भारती नाम का यूजर कहता है, “जावेद अख्तर, तो तुम्हारे हिसाब से भारत में भी तालिबानी हैं। तुम भारतीय तालिबान में रहे। अब तुम बाकी बची जिंदगी अफगानिस्तान में बिताते हुए अनुभव क्यों नहीं अर्जित करते?”

कुछ लोग जावेद अख्तर की पोती की पुरानी तस्वीर शेयर करके पूछ रहे हैं कि आखिर जैसे उनकी पोती भारत में घूमती हैं क्या वो ऐसा ही पहनावा पहन कर तालिबान में घूम सकती हैं?

कुछ यूजर जावेद अख्तर से असहमति दिखाते हुए कहते हैं, “जावेद अख्तर साहब आपने RSS की तुलना आतंक से कैसे की अब ये बताइए कितनी बार बोल चुके हो पत्नी सहित कि भारत असहिष्णु है तो अफगानिस्तान में जाकर अपने अब्बा हुजूर के सामने भ%$ गिरी और मुजरा क्यों नहीं करते जाकर। निर्लज्ज कहीं के।”

जावेद अख्तर ने क्या कहा था?

3 सितंबर को एनडीटीवी के एक शो में अख्तर ने कहा था, “आरएसएस, वीएचपी और बजरंग दल का समर्थन करने वालों की मानसिकता भी तालिबान जैसी ही है।” उन्होंने कहा, ”जिस तरह तालिबान एक मुस्लिम राष्ट्र बनाने की कोशिश कर रहा है। उसी तरह कुछ लोग हमारे सामने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पेश करते हैं।” जावेद अख्तर ने आगे कहा, “इन लोगों की मानसिकता एक जैसी है। तालिबान हिंसक हैं। जंगली हैं। उसी तरह आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का समर्थन करने वाले लोगों की मानसिकता एक जैसी है।”

शिवसेना का जवाब

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में जावेद अख्तर पर बसरते हुए कहा, ”इन दिनों कुछ लोग किसी की तुलना तालिबान से कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे समाज और मानव जाति के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। पाकिस्तान और चीन, जो लोकतांत्रिक देश नहीं हैं, वो भी अफगानिस्तान में तालिबान का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि इन दोनों देशों में मानवाधिकारों का कोई स्थान नहीं है। हालाँकि, हम एक लोकतांत्रिक राष्ट्र हैं जहाँ एक व्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है। इसलिए, तालिबान से आरएसएस की तुलना करना गलत है। भारत हर तरह से बेहद सहिष्णु है।”

संपादकीय में आगे कहा गया है कि आरएसएस और विहिप जैसे संगठनों के लिए हिंदुत्व एक ‘संस्कृति’ है। इसमें कहा गया है, ”आरएसएस और विहिप चाहते हैं कि हिंदुओं के अधिकारों का दमन न किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने कभी भी महिलाओं के अधिकारों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया। वहीं, अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति बेहद भयावह है। लोग दहशत में हैं। तालिबानियों से डर कर अपने ही देश से भाग गए और वहाँ महिलाओं के अधिकारों का दमन किया जा रहा है।”

केरल में ISRO का ट्रक रोका, रास्ता देने को ट्रेड यूनियन माँग रहे ₹10 लाख: ‘नोक्कुकूली’ पर HC की रोक के बावजूद गुंडई

केरल के तिरुवनंतपुरम में रविवार (5 सितंबर) को भारी उपकरणों से लदे इसरो के एक ट्रक को आगे जाने के लिए ट्रेड यूनियन के सदस्यों और स्थानीय लोगों ‘गॉकिंग चार्ज’ के रूप में 10 लाख रुपए की माँग की। बताया जा रहा है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक विंग विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) के भारी उपकरणों से लदे ट्रक को रास्ते में ही रोक दिया था।

विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के अधिकारियों ने कहा कि ट्रेड यूनियनों के स्थानीय लोगों द्वारा थुंबा में 10 लाख रुपए माँगने के कारण ट्रक चार घंटे से अधिक समय तक फँसा रहा। उन्होंने इस बारे में सीएम कार्यालय को सूचित किया, जिसके बाद श्रम मंत्री वी शिवनकुट्टी और थुंबा पुलिस स्टेशन के आयुक्त सहित पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप से यह मामला शांत हुआ। उन्होंने बताया कि ट्रक इसरो सेंटर के लिए कुछ भारी मशीनरी ले जा रहा था। वहीं, श्रम मंत्रालय के एक अधिकारी ने ट्रेड यूनियन और स्थानीय लोगों को भड़काने वाले मजदूर नेताओं के खिलाफ सख्त-से-सख्त कार्रवाई की बात कही है।

केरल HC ने ‘गॉकिंग चार्ज’ प्रथा के लिए राज्य को फटकार लगाई

दिलचस्प बात यह है कि केरल हाईकोर्ट द्वारा स्थानीय भाषा में ‘नोक्कूकूली’ कही जाने वाली इस अजीब प्रथा से छुटकारा दिलाने के लिए कानून को प्रभावी ढंग से लागू नहीं करने के लिए राज्य सरकार की खिंचाई करने के तीन दिन बाद इस घटना को अंजाम दिया गया है। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को मजदूरों को भुगतान करने का आदेश दिया था, ताकि वह इस तरह से माँग नहीं करें।

जस्टिस देवन रामचंद्रन ने कहा था, ”मैंने पाया है कि न्यायालय के समक्ष हर रोज गॉकिंग चार्ज की माँग से संबंधित शिकायतें आ रही हैं। यह आश्चर्य की बात है, क्योंकि मुझे पता है कि सरकार पहले भी ट्रेड यूनियन से ऐसी माँग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी कर चुकी है। नोक्कुकूली राज्य की छवि को खराब कर रहा है और इसके बारे में गलत धारणा को बढ़ावा दिया जा रहा है।”

कोर्ट ने अब नोक्कुकूली पर प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने का आदेश दिया है, जो पहले से ही साल 2018 में राज्य सरकार द्वारा लगाया गया था। पिछले साल महामारी के बीच भी इस प्रथा का खूब इस्तेमाल किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेड यूनियन गुंडों को ‘गॉकिंग चार्ज’ वसूलने के लिए स्थानीय गुंडों को नियुक्त करते हैं। इन यूनियन में सीपीएम नियंत्रित सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (CITU) के सबसे प्रमुख है।

बता दें कि ‘गॉकिंग चार्ज’ (Gawking charge) या नोक्कुकूली केरल में एक सामान्य प्रथा है, जहाँ संगठित श्रमिक संघ व्यक्तियों या बिजनेसमैन से अपना सामान उतारने के लिए पैसे वसूलते हैं।

गोविंदा ने सिखाया अंडे का फंडा, इमरान खान बूझ गए मामूली नहीं ये फंडा; पर पाकिस्तानी नहीं पाड़ रहे अंडे पर अंडा

दुनिया की सबसे पुरानी पहेलियों में एक है मुर्गी-अंडे वाली पहेली। पहेली यह कि पहले मुर्गी आई या पहले अंडा? यह शायद दुनिया की सर्वप्रथम पहेली होगी जिसने पूरी दुनिया को व्यावहारिक दर्शन का मार्ग दिखाया। व्यावहारिक दर्शन अर्थात ऐसा दर्शन जिसकी प्रैक्टिस कर मनुष्य बिजनेसमैन, बिजनेसमैन नेता, नेता देवता और जनता मुर्गा बनती रही है।

इतिहास गवाह है कि इस पहेली को सबने अपनी-अपनी सोच के अनुसार हल किया है। साधारण प्रतिभा वाले जिन लोगों का विश्वास अंडे में था, उनके अनुसार पहले अंडा आया। इसी साधारण प्रतिभा वाले जिन लोगों का विश्वास मुर्गी में था, उनके अनुसार पहले मुर्गी आई। इन साधारण प्रतिभा वालों के बीच कुछ असाधारण प्रतिभा वाले भी थे जिनका विश्वास न तो मुर्गी में था और न ही अंडों में। उनका विश्वास मुर्गे में था। ऐसे लोगों का मानना रहा है कि पहले न तो अंडा आया और न ही मुर्गी, पहले मुर्गा आया।

ऐसे असाधारण प्रतिभाशाली मनुष्यों को यह दुनिया युगों-युगों से नेता के रूप में पहचानती रही है। 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की गिनती ऐसे ही प्रतिभावान लोगों में होती है। जाहिर है उनका विश्वास इस बात में है कि पहले मुर्गा ही आया था। पर चूँकि नेता जो सोचता है, जरूरी नहीं कि वही कहे इसलिए उन्होंने दुनिया की प्राचीनतम पहेली को हल करते हुए कहा; पहले मुर्गी आई। इससे पहले कि कोई उनसे उनकी बात साबित करने के लिए कहता, उन्होंने खुद ही अनाउंसमेंट कर दिया। बोले; मैं मुल्क़ की मईशत (अर्थव्यवस्था) में नए एक्सपेरिमेंट करते हुए यह साबित करूँगा कि पहले मुर्गी आई। 

लोगों ने पूछा; वो कैसे?

वे बोले; हमारी गवर्नमेंट अवाम में मुर्गियाँ बाँटेंगी। बँटी हुई ये मुर्गियाँ अंडे देंगी। उन अंडों से नई मुर्गियाँ निकलेंगी। फिर ये नई मुर्गियाँ अंडे देंगी। लोग अंडे बेंचेगे। इन बिके हुए अंडों से और मुर्गियाँ निकलेंगी। फिर इन मुर्गियों से अंडे निकलेंगे। मुर्गी और अंडे का यह रोलिंग प्लान ऐसा समय ले आएगा जब पाकिस्तान मुर्गी और अंडों का मुल्क… एक मिनट, नहीं-नहीं, मुर्गी और अंडों का नहीं बल्कि अंडे और मुर्गियों का मुल्क होगा। इन्हीं अंडे और मुर्गियों पर बैठकर एक दिन इस मुल्क की मईशत स्ट्रॉन्ग हो जाएगी। मैं यूरोप में रहा हुआ हूँ और यकीं जानें कि इन मुल्कों को अंडे और मुर्गियों का सही इस्तेमाल करने नहीं आया। वे इन्हें केवल खाना जानते हैं। वैसे तो हम भी अभी तक इन्हें खाते ही थे, लेकिन अब हम इन्हें बेचा भी करेंगे ताकि मुल्क की मईशत स्ट्रॉन्ग हो और हमें आईएमएफ न जाना पड़े।

पास बैठे एक मौलाना कोरस लगाते हुए बोले; इंशाअल्लाह! 

मुर्गी पाल प्रोग्राम शुरू हो गया। ये मुर्गी पाल कुछ कुछ जनलोकपाल जैसा सुनाई देता है। खैर, मुद्दे पर आते हैं। एक रपट आई है जिसमें बताया गया है कि इमरान खान का मुर्गीपाल प्लान विफल रहा है। रपट के अनुसार जिन नागरिकों में मुर्गियाँ बाँटी गई थी उन्होंने अंडे का इंतज़ार नहीं किया और मुर्गियों को ही खा गए। मुर्गी बँटेंगी तो पहले कटेगी!

करीब दस प्रतिशत मुर्गियों ने अंडे देने से साफ़ इनकार कर दिया। तीन प्रतिशत मुर्गियाँ उन्हें अवाम में बाँटे जाने का गम बर्दाश्त नहीं कर सकीं और खुदा को प्यारी हो गई। जिन लोगों को सरकार ने मुर्गियाँ दी थी उसमें से नब्बे प्रतिशत लोगों ने अंडे बाज़ारों में बेंचे ही नहीं और खुद खा गए। हो सकता इसे लेकर नई रपट आए कि ये अंडे अपने मालिकों को छोड़कर बाजार जाने के लिए तैयार ही नहीं हुए, इसलिए इन मालिकों के पास उन्हें खुद खाने के अलावा और कोई रास्ता बचा ही नहीं था।

ऐसा देखा गया है कि अक्सर कुछ प्लान करके किया जाता है और वह नहीं होता पर कुछ प्लान न करके किया जाए वह हो जाता है। जैसे इमरान खान की सरकार ने गधों को लेकर ऐसी कोई योजना अनाउंस नहीं की थी पर मुल्क के इकनोमिक सर्वे के अनुसार इकोनॉमी में गधों का कंट्रीब्यूशन मुर्गों से… सॉरी, मुर्गियों से अधिक रहा। कई लाख पाकिस्तानी गधे चीन ने खरीद लिए। हो सकता है कि जो बिक गए उनकी क़्वालिटी अच्छी होगी पर जो अभी तक नहीं बिक सके, उनके भविष्य में बिक जाने की उम्मीद बरक़रार है। भविष्य में बिकने के लिए और गधे उपलब्ध होंगे। चीन इन गधों को खरीदेगा। मुल्क और गधे पैदा करेगा और चीन और गधे खरीदेगा। पाकिस्तान की इकोनॉमी स्ट्रॉन्ग होगी और चीन की स्ट्रॉन्गर। हो सकता है भविष्य में चीन द्वारा दिए गए लोन का री-पेमेंट गधों की शक्ल में हो क्योंकि दो देश यदि चाह लें तो गधों को करेंसी के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

वापस मुर्गी पाल पर आते हैं। इस प्रोग्राम की बड़ी चर्चा थी। इमरान खान ने पकिस्तान के लोगों को विश्वास दिलाया था कि इसी प्रोग्राम से पाकिस्तान की इकोनॉमी पर मँडरा रहा आईएमएफ का साया जाता रहेगा। पर कुछ मुर्गियों और कुछ उनके मालिकों ने धोखा दे दिया। अब प्लान के मुताबिक नई मुर्गियाँ बाँटकर पुराने प्रोग्राम को सफल बनाने का प्रयास किया जाएगा। फिर से बाँटी गई मुर्गियों ने इस बार अंडे देने से इनकार नहीं किया तो भी प्रोग्राम के सफल होने की गारंटी नहीं है, क्योंकि प्रोग्राम सफल तभी होगा जब नई मुर्गियों से निकले अंडे बाजार तक पहुँचेंगे और किसी और के घर पहुँच कर नई मुर्गी देंगे। नई मुर्गियों से निकले अंडों ने और नई मुर्गियों को जन्म दे दिया तो फिर मुल्क़ की इकोनॉमी ऑमलेट होने से बच जाएगी। 

हाँ, नई मुर्गियों ने यदि फिर अंडे देने से मना कर दिया तो फिर चीजें बिगड़ सकती हैं। देखेंगे कि बाँटी गई मुर्गियों ने नए अंडे देने से साफ़ इनकार कर दिया और मुर्गी पाल ने मुल्क़ की इकोनॉमी को बचाने की चिंता किए बगैर मुर्गी को ही खा लिया। इमरान खान को फिर से नई मुर्गियाँ बाँटनी पड़ेंगी और यह प्लान लगातार चलता ही रहेगा, भले ही इसके सफल होने की गारंटी न हो। हाँ, इस प्रोग्राम के चलाए जाने का असर यह होगा कि इसके सफल या असफल होने पर हज़ारों टीवी पैनल डिस्कशन होंगे। उन डिस्कशन के दौरान विज्ञापन चलेंगे। उससे सरकार को टैक्स रेवेन्यू आएगा और सरकार समझेगी कि इकोनॉमी सही चल रही है। तो जिस मुर्गी पाल का उद्देश्य सीधे तौर पर इकोनॉमी को दुरुस्त करने का है, वह इकोनॉमी को टेढ़े तौर पर दुरुस्त कर देगा। मुर्गी और अंडों से बने प्रोग्राम मुर्गी पाल को सफलता मिली तो टिड्डों और उनके अंडों से बने प्रोग्राम टिड्डी पाल को भी लॉन्च किया जा सकता है। 

विशेषज्ञ तमाम सलाह देंगे ताकि जनता जान सके कि किन सलाहों को नहीं मानना है। हो सकता है कुछ विशेषज्ञ यह भी कहें कि इमरान खान को मुर्गी के साथ-साथ मुर्गे भी बाँटने चाहिए थी पर है तो विशेषज्ञों की ही बात, ऐसे में इसे अधिक गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। गंभीरता से जिसे लिया चाहिए वे हैं इमरान खान और पाकिस्तान उन्हें गंभीरता से ही ले रहा है। मुर्गी पाल प्रोग्राम के सर्वे से यह बात सामने आई है कि प्रोग्राम सफल हुआ हो या असफल, इसे चलते रहना चाहिए ताकि कम से कम पाकिस्तान में तो इस पहेली का एक परमानेंट हल निकल आए कि पहले मुर्गी आई थी या पहले अंडा?

राहुल गाँधी ने फिर की ‘हेराफेरी’: किसान रैली की पुरानी फोटो दिखा मुजफ्फरनगर महापंचायत का पीटा ढोल

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड के सांसद राहुल गाँधी ने आज ट्विटर पर ‘किसानों’ की जय-जयकार करते हुए एक तस्वीर साझा की, जिसमें केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन करने के लिए बड़ी संख्या में एकत्र हुए थे। #FarmersProtest हैशटैग का उपयोग करते हुए, राहुल गाँधी ने तस्वीर के साथ कैप्शन दिया, “डटा है, निडर है, इधर है, भारत भाग्य विधाता!

हालाँकि, इस बार भी, राहुल गाँधी ने एक बड़ी चूक कर दी। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए चलाए जा रहे प्रोपेगेंडा के तहत एक पुरानी, ​​असंबंधित तस्वीर का सहारा लिया। तस्वीर दरअसल इस साल फरवरी में उत्तर प्रदेश के शामली में हुई किसान रैली की है।

वास्तव में, राहुल गाँधी ने जिस पुराने तस्वीर को हाल के किसानों के विरोध के रूप में प्रसारित करने की कोशिश की, वह समाचार एजेंसी पीटीआई की एक पुरानी तस्वीर है जिसे कई अन्य मीडिया आउटलेट्स द्वारा भी इस्तेमाल किया गया था।

इस साल 5 फरवरी को शामली पर एक लेख के लिए कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड ने भी इसी तस्वीर का उपयोग किया था।

यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि उस समय शामली प्रशासन ने सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। इसके बावजूद भारी संख्या में ‘किसान’ जमा हो गए थे।

‘सब कॉन्ग्रेस का ही किया धरा’

प्रारंभिक तथाकथित किसान विरोध पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित पंजाब कॉन्ग्रेस के नेताओं के स्पष्ट समर्थन से शुरू हुआ, इसमें अब कोई संदेह नहीं है। फिर अन्य स्व-नियुक्त नेता सहित राकेश टिकैत और आप के पूर्व नेता योगेंद्र यादव जैसे लोग भी ‘किसान नेताओं’ के रूप में शामिल हो गए।

बता दें कि तीन नए कृषि कानूनों का उद्देश्य किसानों को मौजूदा प्रणाली के अनुसार एमएसपी का सुरक्षा कवच देते हुए उन्हें अपनी उपज बेचने में मदद करना है। हालाँकि, इस कदम से बिचौलियों को लेन-देन से हटा दिया गया है, ऐसा लगता था कि कुछ तथाकथित ‘किसानों’ ने पूरी बात बिना समझे बहकावे में इसका विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। बाद में इन विरोधों में खालिस्तान समर्थक तत्वों की भागीदारी भी देखी गई है। क्योंकि, तथाकथित कृषि विरोध के दौरान कई मौकों पर खालिस्तानी प्रस्तावक जरनैल सिंह भिंडरावाले के बैनर-पोस्टर लगाए और लहराए गए।

गौरतलब है कि कुछ ही महीनों में उत्तर प्रदेश राज्य विधानसभा चुनाव होने वाले हैं ऐसे में देखा जा रहा है कि ‘किसान’ के रूप में तमाम राजनेता सत्ताधारी भाजपा के खिलाफ विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर एक छद्म राजनीतिक अभियान चलाने के लिए फिर से पूरी ताकत से सामने आए हैं। और जैसा कि देखा जा सकता है, कॉन्ग्रेस जैसे विपक्षी दलों द्वारा इन विरोधों का पूरा ‘समर्थन’ हासिल है।

‘…तो सार्वजनिक रूप से फाँसी लगा लूँगा’: ED के सामने पेशी से पहले ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी

कोयला घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ममता बनर्जी के भतीजे व तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी सोमवार (6 सितंबर) को दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश हुए। रविवार (5 सितंबर) को दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले टीएमसी सांसद ने कोलकाता हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा कि अगर वह दोषी साबित होते हैं तो ‘सार्वजनिक रूप से फाँसी’ लगा लेंगे। बनर्जी ने भाजपा पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने के बाद राजनीतिक प्रतिशोध लेने का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा, ”जैसा कि मैंने नवंबर में जनसभाओं में जो कहा था, मैं दोहराता हूँ कि अगर कोई केंद्रीय एजेंसी 10 पैसे के भी किसी अवैध लेन-देन में मेरी संलिप्तता साबित करती है तो सीबीआई या ईडी की जाँच की कोई आवश्यकता नहीं होगी, मैं मंच पर खुद को सार्वजनिक रूप से फाँसी पर लटका लूँगा।”

अभिषेक बनर्जी ने कहा, “मैं किसी भी तरह की जाँच का सामना करने के लिए तैयार हूँ। चुनाव हारने और तृणमूल कॉन्ग्रेस से राजनीतिक रूप से निपटने में नाकाम रहने के बाद वे (भाजपा नेता) अब बदला लेना चाहते हैं।” टीएमसी सांसद ने आगे कहा कि बीजेपी का एकमात्र उद्देश्य जाँच एजेंसियों का इस्तेमाल करके अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकना है।

वहीं, इस मामले में ईडी ने अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा को भी एक सितंबर को पूछताछ के लिए दिल्ली तलब किया था, लेकिन रुजिरा ने कोरोना महामारी का हवाला देकर दिल्ली जाने से मना कर दिया था। उन्होंने ईडी को पत्र लिखकर कोलकाता में ही अधिकारियों के समक्ष पेश होने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

बता दें कि कोयला घोटाला मामले में सीबीआई पिछले साल से अभिषेक बनर्जी के कई करीबियों के खिलाफ छापेमारी कर रही है। दिसंबर 31, 2020 को कोलकाता में तृणमूल यूथ कॉन्ग्रेस के जनरल सेक्रेटरी विनय मिश्रा के खिलाफ पशु तस्करी और अवैध कोयला खनन के मामले में तलाशी अभियान चलाया गया था और उनके खिलाफ एजेंसी ने लुकआउट नोटिस तक जारी किया था। ED ने अप्रैल 7, 2021 को इसका खुलासा किया। पश्चिम बंगाल के पुलिस अधिकारी अशोक कुमार मिश्रा, जो बाँकुड़ा पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर इंचार्ज हैं, उनको कस्टडी में लेने के लिए एक स्पेशल कोर्ट में दायर किए गए रिमांड नोट में ये दावा किया गया था। उक्त पुलिस अधिकारी के साथ TMC यूथ विंग के नेता विनय मिश्रा के भाई विकास मिश्रा को भी गिरफ्तार किया गया था।

झारखंड विधानसभा में ‘श्री राम’ का जयघोष, BJP विधायकों ने किया कीर्तन: नमाज के लिए कमरे पर विवाद गहराया

झारखंड विधानसभा में नमाज के लिए अलग कमरे के आवंटन पर विवाद गहरा गया है। इसके विरोध में विधानसभा सोमवार (6 अगस्त 2021) को ‘जय श्री राम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूँज उठा। बीजेपी विधायकों ने ढोलक और झाल के साथ कीर्तन कर इस फैसले को रद्द करने की मॉंग की। इस संबंध में आदेश जारी किए जाने के बाद से ही पार्टी हेमंत सोरेन सरकार की तुष्टिकरण का विरोध कर रही है।

मॉनसून सत्र के दूसरे दिन बीजेपी विधायकों ने इस फैसले का विरोध करते हुए नारे लगाए। सदन की कार्यवाही स्थगित होने पर उन्होंने बाहर कीर्तन कर विरोध जताया। कीर्तन में विरंची नारायण, समरी लाल, मनीष जायसवाल, अमर कुमार बाउरी, शशिभूषण मेहता समेत अन्य बीजेपी विधायक मौजूद थे। वहीं वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने सदन के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ सरकार का पक्ष रखा।

इससे पहले भाजपा नेता विरंची दास ने कहा था, “सरकार ने एक फैसला लिया है जिसके तहत विधानसभा में एक कमरा अलॉट किया गया है, जहाँ मुस्लिम समाज के लोग नमाज अदा कर सकते हैं। तो जब मुस्लिम समाज नमाज अदा कर सकते हैं तो हिंदू धर्मावलंबी हनुमान चालीसा क्यों ना पढ़ें। मैं माननीय विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह करता हूँ कि जिस तरह आपने मुस्लिम समुदाय के लिए नमाज अदा करने हेतु कमरा अलॉट किया है उसी तरह कम से कम पाँच कमरे का अलॉटमेंट या एक हॉल का अलॉटमेंट हमारे लिए भी हनुमान चालीसा के लिए करें, क्योंकि संख्याबल में तो हम ज्यादा है।”

बीजेपी का कहना है कि जब तक नमाज के लिए कमरा आवंटन रद्द नहीं किया जाता, तब तक यह विरोध जारी रहेगा। गौरतलब है कि 2 सितंबर को जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य के नए विधानसभा भवन में एक कमरा नमाज पढ़ने के लिए आवंटित किया गया है। विधानसभा के उप सचिव नवीन कुमार के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है, “नए विधानसभा भवन में नमाज अदा करने के लिए नमाज कक्ष के रूप में कमरा संख्या TW-348 आवंटित किया जाता है।”

भाजपा ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि विधानसभा में हिंदुओं को भी ‘हनुमान चालीसा पढ़ने’ के लिए अलग कमरा आवंटित किया जाए। भाजपा नेता बाबू लाल मरांडी ने इस आदेश पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि लोकतंत्र का मंदिर लोकतंत्र के मंदिर के रूप में ही रहना चाहिए। मरांडी ने कहा था, “झारखंड विधानसभा में नमाज के लिए अलग कमरा आवंटित करना गलत है। हम इस फैसले के खिलाफ हैं।”

8 महीने की गर्भवती थी अफगान पुलिसकर्मी, शौहर-बच्चों के सामने गोलियों से भूना: तालिबानी शासन में घर में घुसे बंदूकधारी

अफगानिस्तान में कथिततौर पर तालिबान ने एक 8 माह गर्भवती महिला पुलिस को उसके शौहर और बच्चों के सामने मौत के घाट उतार दिया। घोर प्रांत के फिरोजकोह में बानू नेगर (Banu Negar) के साथ घटी यह घटना शनिवार (4 सितंबर) को उस समय हुई जब तालिबान जगह-जगह लोगों को मार रहे थे। महिला की गलती शायद बस ये थी कि वो स्थानीय जेल में काम करती थी। 

महिला की हत्या मामले में तालिबान ने अपनी संलिप्तता से इंकार किया है। तालिबानी प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा, “हमें इस घटना के बारे में पता है और मैं कन्फर्म करता हूँ कि तालिबान ने ऐसा नहीं किया। हमारी जाँच चल रही है।” मुजाहिद के मुताबिक, तालिबान ने पूर्व सत्ता के लिए काम करने वालों को माफी देने का निर्णय लिया है। वहीं नेगर की हत्या पर बयान दिया कि महिला की मौत किसी ज्यादती दुश्मनी या फिर किसी दूसरे कारण से हुई है।

जानकारी के मुताबिक, एक ओर जहाँ तालिबान अपने आपको पहले से ज्यादा शालीन दिखाने की कोशिश कर रहा है। वहीं दूसरी ओर ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो उनकी बर्बरता को बयान कर रही हैं।

शनिवार को हुई बानू की हत्या मामले में कहा जा रहा है कि पहले तीन बंदूकधारी महिला के घर में घुसे। परिवार को रस्सी से बाँधा और फिर गोलियाँ चला कर हत्या को अंजाम दिया। घर की दीवारों पर खून धब्बे लगे हुए हैं। इस घटना से पहले कई और मामले भी सामने आए हैं जहाँ तालिबानी पूर्व में अफगान सरकार के लिए काम करने वालों को ढूँढ-ढूँढकर मारते दिखे।

कुछ दिन पहले की बात है तालिबानियों ने एक अफगान की पूर्व पुलिसकर्मी को बुरा तरह पीटा था। 34 साल की गुलफरोज ना जाने कितनी महिलाओं के लिए प्रेरणा थीं, मगर तालिबान ने सारे हालात बदल दिए। कुछ दिन पहले वह हामिद करजई एयरपोर्ट के गेट पर तालिबान का निशाना बनीं, जहाँ उन्होंने 5 रातें काटी थीं ताकि वह वहाँ से बचकर निकल सकें। वह कहती हैं कि उन्होंने कई एंबेसियों को सूचना भेजी थी लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आया। इसके अलावा तालिबान को उन औरतों पर हमला करते भी देखा गया जो उनके ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट कर रही थीं

‘CM योगी राक्षस, शैतान और खूनी दरिंदे जैसे’: आजम खान के लिए पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने तोड़ी मर्यादा, FIR

उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी के खिलाफ प्रदेश सरकार के विरोध में अपमानजनक टिप्पणी के लिए राजद्रोह और धर्म के आधार पर दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने की कोशिश करने के आरोप में FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने सोमवार (सितंबर 6, 2021) को इसकी जानकारी दी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुरैशी के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 153 ए, 153बी, 124ए और 505 1 बी के तहत मामला दर्ज किया गया है।

भाजपा नेता आकाश कुमार सक्सेना ने रविवार (सितंबर 5, 2021) को रामपुर के सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सक्सेना ने आरोप लगाया कि कुरैशी सपा नेता आजम खान के घर गए और उनकी बीबी तज़ीन फातमा से मिलने के बाद अपमानजनक बयान दिया। उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार की तुलना ‘राक्षस, शैतान और खून पीने वाले दरिन्दे’ से की।

आकाश कुमार सक्सेना ने शिकायत में कहा, “कुरैशी ने अपने बयान में आजम के खिलाफ कार्रवाई को इंसान और दानव के बीच की लड़ाई करार दिया। यह बयान दो समुदायों के बीच तनाव और समाज में अशांति पैदा कर सकता है।” शिकायत के साथ सक्सेना ने पुलिस को विभिन्न चैनलों में प्रसारित कुरैशी के बयान की पेन ड्राइव भी दी है। पुलिस ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की जाँच की जा रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि तजीन फातिमा से मिलने के बाद अजीज कुरैशी ने कहा, “योगी सरकार ने आजम खान पर ज्यादती की। सरकार ने जिस तरह आजम खान को प्रताड़ित किया, उसके लिए कुछ कहने की जरूरत नहीं है। इस मामले में मैं लगातार बयान देता रहा हूँ। अब भाभी से कहने आया था कि आप हिम्मत रखिए और लोग आपके साथ हैं। जीत आपकी ही होगी।” इस दौरान उन्होंने रामपुर के युवाओं को भड़काने की भी कोशिश की। उन्होंने कहा, “रामुपर के युवा आगे आएँ और रास्ता रोकें। आजम खान पर हुई कार्रवाई जुल्म है। गजनवी, अब्दाली और दुर्रानी से भी ज्यादा जुल्म है।”

अजीज विवादित बयान देने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पहले कहा था कि पुलवामा में आतंकी हमला लोकसभा चुनाव जीतने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्व नियोजित साजिश थी।