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‘नमाज पढ़ने के लिए कमरा तो हनुमान चालीसा के लिए चाहिए हॉल’: झारखंड में गहराया विवाद, बीजेपी नेता मंदिर के लिए भी तैयार

झारखंड के नए विधानसभा भवन में नमाज पढ़ने के लिए अलग से कमरा आवंटित किया गया है, जिससे राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। भाजपा ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि राज्य विधानसभा में हिंदुओं को भी ‘हनुमान चालीसा पढ़ने’ के लिए अलग कमरा आवंटित किया जाए।

एक भाजपा नेता ने कहा, “अगर मुसलमान एक अलग कमरे में नमाज पढ़ सकते हैं, तो हिंदुओं को एक अलग कमरे में हनुमान चालीसा पढ़ने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती है। मैं झारखंड विधानसभा के सचिव से आग्रह करता हूँ कि हिंदुओं को हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए पाँच कमरे या एक हॉल आवंटित किया जाए।”

पूर्व स्पीकर और बीजेपी नेता सीपी सिंह ने भी यही माँग करते हुए कहा कि विधानसभा परिसर में भी मंदिर बनाया जाए। समाचार एजेंसी एएनआई से उन्होंने कहा, “मैं नमाज कक्ष के खिलाफ नहीं हूँ, लेकिन उन्हें झारखंड विधानसभा परिसर में एक मंदिर भी बनाना चाहिए। मैं ये भी माँग करता हूँ कि वहाँ हनुमान मंदिर की स्थापना की जाए। अगर अध्यक्ष ने मंजूरी दी तो हम अपने खर्च पर मंदिर का निर्माण कर सकते हैं।”

झारखंड के नए विधानसभा भवन में नमाज पढ़ने के लिए कमरा आवंटित करने के फैसले पर आपत्ति जताते हुए भाजपा नेता बाबू लाल मरांडी ने कहा कि लोकतंत्र का मंदिर लोकतंत्र के मंदिर के रूप में ही रहना चाहिए। मरांडी ने कहा, “झारखंड विधानसभा में नमाज के लिए अलग कमरा आवंटित करना गलत है। हम इस फैसले के खिलाफ हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2019 में कुटे ग्राम में झारखंड विधानसभा के नए भवन का उद्घाटन किया था। 465 करोड़ रुपए की लागत से बनी तीन मंजिला इमारत को देश की पहली पेपरलेस असेंबली कहा जाता है। भवन की आधारशिला 12 जून 2015 को रखी गई थी।

गौरतलब है कि झारखंड विधानसभा सचिवालय के अनुसार, 2 सितंबर को जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य के नए विधानसभा भवन में एक कमरा नमाज पढ़ने के लिए आवंटित किया गया है। विधानसभा के उप सचिव नवीन कुमार के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है, “नए विधानसभा भवन में नमाज अदा करने के लिए नमाज कक्ष के रूप में कमरा संख्या TW-348 आवंटित किया जाता है।”

पाकिस्तान ने कैसे आतंक को पाला और दिया बढ़ावा- वरिष्ठ शिक्षाविद कर रही थीं खुलासा: बीबीसी के एंकर ने बोलने से रोका, देखें वीडियो

बीबीसी न्यूज चैनल के एंकर फिलिप थॉमस ने रविवार (5 सितंबर 2021) को चैनल पर एक शो के दौरान जानबूझकर वरिष्ठ शिक्षाविद क्रिस्टीन फेयर को बोलने से रोक दिया ताकि वह आतंकवादियों को पनाह देने और पोषण करने के मामले में पाकिस्तान की भूमिका को उजागर न कर दें। एंकर के इस कदम के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

पत्रकार काइल ऑर्टन ने बीबीसी के साक्षात्कार के एक वीडियो क्लिप को शेयर किया था, जिसमें क्रिस्टीन फेयर को अफगानिस्तान में संकट को बढ़ाने में पाकिस्तान की भूमिका पर चर्चा करते हुए सुना गया था। वीडियो में क्रिस्टीन ने कहा, “पाकिस्तान अफगानिस्तान में जिस तरह की अस्थिरता चाहता है वह उसे मैनेज कर सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान शरणार्थियों की कहानियों को अपनी सामान्य किराए की रणनीतियों के तौर पर इस्तेमाल करेगा। आप देखिए, पाकिस्तान खुद ही आगजनी करता है और वह चाहता है कि लोग उसे फायर ब्रिगेड समझें। पाकिस्तान इस (संकट) का मुद्रीकरण करता है।”

बीबीसी प्रेजेंटर फ़िलिप थॉमस ने उन्हें बीच में रोककर दावा किया कि वरिष्ठ शिक्षाविद द्वारा लगाए गए आरोपों का पाकिस्तान ‘खंडन’ करेगा। क्रिस्टीन फेयर ने सवाल किया, “आपको कैसे मालूम?” हालाँकि, थॉमस ने उन्हें नजरअंदाज करते हुए कहा कि ‘अस्थिर अफगानिस्तान’ को मैनेज कर पाना पाकिस्तान के लिए काफी जोखिम भरा होगा। फेयर ने जवाब दिया, “पाकिस्तान हमेशा जोखिम को स्वीकार करता रहा है। वे कभी भी जोखिम से नहीं भागे। चाहे भारत में अविश्वसनीय रूप से अपमानजनक आतंकी हमलों को देख रहे हों या 1990 के दशक में तालिबान के समर्थन को देखें।”

दक्षिण पूर्व एशियाई भू-राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ने बताया कि कैसे पाकिस्तान आतंकवादियों को इस उम्मीद से पनाह देता है कि वह केवल ‘पड़ोसियों’ पर ही हमला करेगा। क्रिस्टीन के बयान से नाराज बीबीसी प्रेजेंटर ने उन्हें यह कहते हुए आगे बोलने से रोक दिया कि उसके चैनल पर पाकिस्तान का कोई भी राजनयिक उनके आरोपों का जवाब देने के लिए उपलब्ध नहीं। फेयर ने कहा, “भगवान का शुक्र है आपके पास (एक पाकिस्तानी राजनयिक) नहीं है! अन्यथा वह अपनी कल्पनाशीलता को आगे बढ़ाता रहता।”

फिलिप थॉमस ने क्रिस्टीन फेयर को अपने शो में आगे बोलने से रोकते हुए दावा किया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तालिबान के निर्माण में किसी भी भूमिका से इनकार किया था। बीबीसी एंकर द्वारा चैनल से हटाए जाने से पहले नाराज वरिष्ठ शिक्षाविद ने कहा, “आप उसका प्रचार कर कर रहे हैं।” अपने ट्वीट में काइल ऑर्टन ने टिप्पणी की, “बीबीसी न्यूज का सार यह है कि हमारे ‘निष्पक्षता’ सिद्धांत का इस्तेमाल मूल रूप से क्रिस्टीन फेयर को बोलने से रोकने के लिए किया गया। वह भी तब जब उन्होंने अफगानिस्तान में पाकिस्तान की जिहाद नीति का वर्णन किया और जिसकी वजह से हम सभी की यह दुर्गति हुई। कोई भी ऐसा मुद्दा नहीं बचा है, जिसमें तथ्यात्मक रूप से संतुलन हो।”

‘भीड़ ने घेरा, घसीटा… मस्जिद के अंदर काटा गला’: सुदर्शन के लोगो वाले वायरल वीडियो को चैनल के CMD सुरेश चव्हाणके ने बताया षड्यंत्र

सोशल मीडिया पर एक विचलित करने वाला वीडियो वायरल है। इस वीडियो में कुछ व्यक्ति एक जिंदा इंसान को जानवर की तरह काटते दिख रहे हैं, इसलिए संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए ऑपइंडिया इस वीडियो को आर्टिकल में शामिल नहीं कर रही है। इस वीडियो को भारत का बता कर शेयर किया जा रहा है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप पर ये वीडियो वायरल हो रहा है।

फैक्ट चेक

यह वायरल वीडियो एडिट किया गया है। इसे दो अलग-अलग घटनाओं को जोड़ कर बनाया गया है। वीडियो का पहला हिस्सा उत्तर प्रदेश का है और यह मई 2021 का है, जबकि दूसरा सिर काटने वाला वीडियो वेनेज़ुएला का है। यह घटना 2018 की है।

शुरुआत में वीडियो में सुदर्शन का लोगो है, इसलिए लोग पूरे वीडियो को ही भारत का मान रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है। वीडियो को इस तरह से एडिट किया गया है कि इसे देख कर ऐसा लगता है कि व्यक्ति को मुस्लिम भीड़ ने अंदर खींच लिया और फिर उसका सिर काट दिया गया था। हालाँकि यह सच नहीं है। 

पहले हिस्से से लिया गया स्क्रीन शॉट जो मुजफ्फरनगर का मई 2021का है।

दरअसल, जिस व्यक्ति को पकड़ कर पीटा गया था, वह लाइनमैन अनुज था। वह मुजफ्फरनगर के भोपा के सीकरी गाँव में बिजली ठीक करने गया था। इसी दौरान गाँव का ही सलमान अपने भाई अय्याज के साथ वहाँ पहुँचा और लाइनमैन से घर का केबिल बदलने के लिए कहा। इस पर लाइनमैन ने बिना जूनियर इंजीनियर की अनुमति के केबिल बदलने से इनकार कर दिया। जिसके बाद ग्रामीणों ने बंधक बना कर उसके साथ मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया, उसके कपड़े भी फाड़ दिए। मौके से भागे साथियों ने इसकी सूचना डायल-112 को दी, जिस पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुँच कर अनुज को मुक्त कराया।

पहला भाग– उत्तर प्रदेश, मई 2021

पहले वीडियो में सुदर्शन न्यूज का लोगो है। हालाँकि यह ट्विटर हैंडल वेरिफाइड नहीं है, लेकिन मुजफ्फरनगर पुलिस के आधिकारिक हैंडल से 4 मई 2021 को इस पर जवाब देते हुए कहा गया था कि उन्होंने इस घटना को नोट कर लिया है और अभियुक्तों की गिरफ्तारी के प्रयास व वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा पुलिस द्वारा 5 नामजद व 10-15 अज्ञात अभियुक्तों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया जा चुका है।

5 मई 2021 को मुजफ्फरनगर पुलिस ने एक और ट्वीट करते हुए इस संबंध में बयान जारी करते हुए बताया कि थाना भोपा पुलिस द्वारा 7 नामजद व 10-12 अज्ञात अभियुक्तों के खिलाफ संबंधित धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है। अभियुक्तों की शीघ्र गिरफ्तारी की जाएगी, स्थानीय पुलिस द्वारा अन्य विधिक कार्यवाही की जा रही है।

मुजफ्फरनगर पुलिस का मामले में ट्वीट

दैनिक जागरण ने मामले में 28 मई 2021 को रिपोर्ट करते हुए बताया कि विवेचक उप निरीक्षक रेशमपाल सिंह की टीम ने फरार चल रहे आरोपित सलमान, अय्याज, रफी , नाज, खालिद समेत पाँच आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जहाँ से उन्हें जेल भेजा गया है जबकि आस मोहम्मद व आबिद पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाए है। पुलिस आरोपितों की तलाश में दबिश दे रही है। प्रभारी निरीक्षक दीपक चतुर्वेदी ने जागरण को यह जानकारी दी।

दूसरा भाग- वेनेजुएला, 2018 की घटना

6 फ़रवरी 2018 की ‘News.com.au’ की रिपोर्ट में इस वीडियो को नॉर्थ अमेरिका के देश वेनेज़ुएला का बताया गया। आर्टिकल में बताया गया कि इस लड़के को दुश्मन ड्रग माफ़िया गैंग ने पकड़ लिया था और किसी अनजान जगह पर उसकी गला काटकर हत्या कर दी गई थी। उन्होंने इस घटना को शूट कर इसका वीडियो शेयर किया था। इस आर्टिकल में वीडियो के कुछ फ्रेम्स शेयर किए गए हैं।

दूसरे हिस्से का वीडियो वेनेजुएला का है।

6 फ़रवरी 2018 को द डेली मेल ने भी इस घटना के बारे में एक रिपोर्ट पब्लिश की थी। आर्टिकल के मुताबिक, ये लड़का जेल में पनपने वाले खौफ़नाक गिरोह ‘मेगाबंडस’ का शिकार हुआ था। ये गिरोह अपहरण, ज़बरन वसूली और हत्या में माहिर है। ये वीडियो सबसे पहले ‘News.com.au’ में प्रकाशित होने के बाद सामने आया था जिसने हत्या के लिए किसी एक गैंग को ज़िम्मेदार ठहराया था। 

वायरल वीडियो और सुदर्शन चैनल

इस मामले पर सुदर्शन चैनल के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ सुरेश चव्हाणके का भी पक्ष लिया गया। उन्होंने कहा, “इस वीडियो पर लगा सुदर्शन चैनल का लोगो 3 साल पहले का है। यह दो वीडियो को जोड़ कर बनाया गया है। यह सुदर्शन को ‘फेक न्यूज पेडलर’ साबित करने और सर्वोच्च न्यायालय में चल रही हमारी केस को प्रभावित करने के लिए किया गया षड्यंत्र भी हो सकता है।”

क्वेटा में सुसाइड अटैक, तीन की मौत, 20 घायल, तहरीक-ए-तालिबान ने ली जिम्मेदारी: पाकिस्तान ने अपनी करतूतों का दोष भारत पर मढ़ा

पाकिस्तान के क्वेटा शहर में हुए सुसाइड अटैक में पाकिस्तान के फ्रंटियर कोर के तीन लोग मारे गए हैं। इसके अलावा खबरों के मुताबिक हमले में 20 अन्य घायल भी हुए हैं। इस बीच इस घटना की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) ने ले ली है।

रिपोर्ट के मुताबिक, विस्फोट रविवार (7 सितंबर 2021) की सुबह 7.30 बजे क्वेटा के मस्टैंग रोड पर हुआ। हमले में सोहाना खान एफसी चेक पोस्ट को निशाना बनाया गया था। इस बात की पुष्टि बलूचिस्तान काउंटर-टेररिज्म डिपार्टमेंट ने की है।

पुलिस का कहना है कि आत्मघाती हमलावर जिस मोटरसाइकिल को चला रहा था उसे ही उसने कानूनी एजेंसियों की गाड़ी में घुसा दिया था। बहरहाल मामले की आगे की जाँच जारी है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बयान जारी कर इस बर्बर हमले की निंदा की। उन्होंने कहा, “क्वेटा के मस्तुंग रोड स्थित एफसी चेकपोस्ट पर किए गए सुसाइड अटैक की निंदा करता हूँ। मेरी संवेदनाएँ शहीदों के परिवारों के साथ हैं और घायलों के ठीक होने की प्रार्थना करता हूँ। विदेशों से समर्थन पाने वाले आतंकवादियों के मंसूबों को नाकाम कर हमें सुरक्षित रखने के लिए हमारे सुरक्षा बलों और उनके कुर्बानियों को सलाम।”

पाकिस्तान के ‘मानवाधिकार’ मंत्री शिरीन मजारी ने हमले की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि हमले के पीछे भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का हाथ है। उन्होंने कहा, “आज क्वेटा में एफसी चेकपोस्ट पर टीटीपी का हमला निंदनीय है। शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना और प्रार्थना है। हमारे बहादुर सुरक्षा बल रॉ द्वारा वित्त पोषित टीटीपी के आतंकवादियों के मंसूबों को नाकाम करना जारी रखेंगी।”

उल्लेखनीय है कि यह हमला तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर नियंत्रण करने के कुछ दिनों बाद ही हुआ है। तालिबान ने सत्ता में आने के बाद कई आतंकवादियों को जेलों से मुक्त कराया है, जिनमें से कईयों को लेकर माना जाता है कि वे टीटीपी संबद्ध हैं। जबकि अफगान तालिबान ने पाकिस्तान समेत दूसरे लोगों को आश्वासन दिया है कि उसकी धरती का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाएगा। बावजूद इसके उसका पड़ोसी इस बात को लेकर चिंतित है कि टीटीपी पाकिस्तानी जमीन पर अपनी गतिविधियाँ बढ़ा सकता है।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि तालिबान ने पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से अफगानिस्तान पर काबिज हो गया, हालाँकि, टीटीपी का नया जोश पाकिस्तान के लिए महंगा साबित हो सकता है। आईएसआई प्रमुख काबुल के दौरे पर हैं और ऐसी खबरें हैं कि पाकिस्तान तालिबान को उसकी सेना के पुनर्गठन में मदद करेगा।

2 बच्चे की माँ को किडनैप कर यौन शोषण, धर्म परिवर्तन कराने के लिए खिलाया गोमांस: मोहम्मद कलीम गिरफ्तार

बिहार के सुपौल में अपहरण, यौन शोषण और धर्म परिवर्तन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। मामला भीमपुरा थाना क्षेत्र के केवला गाँव का है।

इस मामले में एक हिंदू महिला का मुस्लिम धर्म के व्यक्ति ने जबरन अपहरण किया। इसके बाद महिला के साथ महीनों तक यौन शोषण किया गया और धर्म परिवर्तन का दबाव डाला गया। महिला ने आरोपित के कैद से छूटकर भीमपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

महिला के अनुसार चापीन वार्ड नंबर 13 निवासी मोहम्मद कलीम उसका अपरहरण कर महीनों तक फारबिसगंज में कैद रखा। इस दौरान लगातार महिला का यौन शोषण किया गया। उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला गया। धर्म परिवर्तन से इनकार करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। इतना ही नहीं उसे जबरदस्ती गोमांस भी खिलाया गया। महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। जानकारी के मुताबिक पीड़िता शादीशुदा और दो बच्चे की माँ है।

महीनों तक किया यौन शोषण

पीड़ित महिला ने बताया कि 30 जून को शाम 7 बजे वो अपने घर से शौच के लिए निकली थी। इसी दौरान आरोपित कालीम ने उसका अपहरण कर आँख-मुँह बाँध कर गाड़ी में बैठा कर कहीं ले गया। इसके बाद महिला को एक कमरे में बंद कर दिया गया। यहाँ लगातार उनके साथ यौन-शोषण होता रहा। पीड़िता ने मारपीट और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का आरोप भी लगाया है। 

महिला ने बताया कि उसे जबरदस्ती गोमाँस भी खिलाया जाता था। पीड़िता के अनुसार महीने भर से ज्यादा उन्हें एक ही कमरे में बंद रखा गया। इसके बाद उसे पता चला कि वो फारबिसगंज के किसी घर में बंद है और शनिवार (सितंबर 4, 2021) सुबह उसे ट्रेन से कहीं ले जाया जाएगा। इस दौरान उन्होंने किसी व्यक्ति का मोबाइल माँग कर अपने परिजनों को इसकी सूचना दे दी।

ऐसे किया गया रेस्क्यू

सूचना मिलते ही पीड़िता के परिजन और विश्व हिंदू परिषद छातापुर इकाई के कार्यकर्ता फारबिसगंज पहुँचे और महिला को बचा लिया गया। इसके बाद आरोपित मोहम्मद कलीम को भी पकड़ कर भीमपुरा थाना के हवाले कर दिया गया। इस घटना के संबंध में भीमपुर थानाध्यक्ष सुबोध यादव ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपित को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में सुपौल जेल भेज दिया गया है।

वैशाली के तीन मंदिरों में तोड़फोड़- भगवान शिव, माँ काली और दुर्गा की मूर्तियों को फेंका बाहर: लोगों में आक्रोश, कार्रवाई की माँग

बिहार के वैशाली जिले में हिंदू मंदिरों में घुसकर वहाँ पर स्थापित देवी देवताओं की मूर्तियों को तोड़ने का मामला प्रकाश में आया है। असामाजिक तत्वों ने तीन मंदिरों में भगवान शिव, देवी काली और दुर्गा समेत कई मूर्तियों को तोड़कर बाहर फेंक दिया। इस बीच इस कृत्य के विरोध में स्थानीय लोगों ने सड़कों को जाम कर दिया। बाद में पुलिस ने आरोपितों को जल्द से जल्द पकड़ने का आश्वासन देकर जाम हटवाया।

रिपोर्ट के मुताबिक, जंदाहा कोठी के कैंपस में एक प्राचीन शिव मंदिर में शिवलिंग समेत अन्य प्रतिमाओं को तोड़कर उपद्रवियों ने उसे पास के ही तालाब में फेंक दिया। अगले दिन जब लोगों को इस बात का पता चला तो उनका आक्रोश भड़क उठा। इस बीच जंदाहा बाजार में स्थित माँ काली की प्रतिमा को तोड़े जाने और सर्वोदय मैदान में बने मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़े जाने की खबर भी सामने आ गई।

शहर के तीन मंदिरों में स्थापित मूर्तियों को तोड़ने जाने की खबर के बाद नाराज लोगों ने जंदाहा गाँधी चौक सड़क को जाम कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस फोर्स के साथ पहुँचे थानाध्यक्ष अजय कुमार ने किसी तरह लोगों को समझाया।

इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर हिंदू पुत्र नाम के यूजर ने कहा, “आजकल बिहार में कट्टर इस्लामिक शक्तियाँ अपने एजेंडे के तहत हिंदू अस्मिता पर चोट पहुँचाने की कोशिश कर रही हैं। जंदाहा में मंदिर में जिस तरह से तोड़फोड़ की गई है। पुलिस दोषियों को जल्द गिरफ्तार करे।”

आप तक नाम के चैनल द्वारा शेयर किए गए वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि जंदाहा में मंदिर में स्थापित मूर्तियों को तोड़े जाने के बाद लोगों ने जंदाहा में गाँधी चौक को जाम कर दिया। इसके अलावा हनुमान जी की खंडित प्रतिमा को भी देखा जा सकता है।

इस संबंध में ऑपइंडिया ने जंदाहा पुलिस से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन उनसे अभी तक हमारी बात नहीं हो सकी है।

9 खेल, 19 मेडल (5 गोल्ड मेडल भी)… टोक्यो पैरालिंपिक में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, ये है विजेताओं की पूरी लिस्ट

भारतीय खिलाड़ियों ने टोक्यो पैरालिंपिक में 19 पदकों पर कब्जा कर इतिहास रच दिया है। पैरालिंपिक के आखिरी दिन रविवार (5 सितंबर) को पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी कृष्णा नागर ने SH6 कैटेगरी में गोल्ड हासिल कर भारत की झोली में 19वाँ मेडल डाल दिया। इसके साथ ही भारत ने 5 स्वर्ण पदक, 8 रजत पदक और 6 कांस्य पदक के साथ शीर्ष 25 में स्थान हासिल किया। यह भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। आइए आपको बताते हैं टोक्यो पैरालिंपिक में किस खिलाड़ी ने किस कैटेगरी में कौन सा पदक अपने नाम किया है।

1. कृष्णा नागर – बैडमिंटन (SH6 कैटेगरी) – गोल्ड

2. अवनि लेखरा – महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन (SH1 कैटेगरी) – गोल्ड

3. प्रमोद भगत – पुरुष एकल बैडमिंटन (SL3 कैटेगरी)- गोल्ड

4. सुमित अंतिल – पुरुषों की भाला फेंक (F64 कैटेगरी) – गोल्ड

5. मनीष नरवाल – मिक्स्ड 50 मीटर पिस्टल (SH1 कैटेगरी) – गोल्ड

6. भावनाबेन पटेल – महिला सिंगल क्लास 4 टेबल टेनिस- सिल्वर

7. सिंहराज – मिक्स्ड 50 मीटर पिस्टल (SH1 कैटेगरी) – सिल्वर

8. योगेश कथुनिया – पुरुषों का डिस्कस थ्रो (F56 कैटेगरी) – सिल्वर

9. निषाद कुमार – पुरुषों की हाई जंप (T47 कैटेगरी) – सिल्वर

10. मरियप्पन थंगावेलु – पुरुषों की हाई जंप (T63 कैटेगरी)- सिल्वर

11. प्रवीण कुमार – पुरुषों की हाई जंप (T64 कैटेगरी) – सिल्वर

12. देवेंद्र झाझरिया – पुरुषों की भाला फें​क (F46 कैटेगरी) – सिल्वर

13. सुहास यतिराज – पुरुष सिंगल बैडमिंटन (SL4 कैटेगरी) – सिल्वर

14. अवनि लेखरा – महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन (SH1 कैटेगरी)- ब्रॉन्ज

15. हरविंदर सिंह – पुरुषों की व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी- ब्रॉन्ज

16. शरद कुमार- पुरुषों की हाई जंप (T63 कैटेगरी) – ब्रॉन्ज

17. सुंदर सिंह गुर्जर – पुरुषों की भाला फेंक (F46 कैटेगरी) – ब्रॉन्ज

18. मनोज सरकार – पुरुष सिंगल बैडमिंटन (SL3 कैटेगरी) – ब्रॉन्ज

19. सिंहराज – पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल (SH1 कैटेगरी) – ब्रॉन्ज

अवनि लेखरा रविवार को टोक्यो पैरालिंपिक के समापन समारोह के दौरान भारतीय दल की ध्वजवाहक होंगी। पैरालिंपिक में कांस्य और स्वर्ण पदक जीतने वाली 19 साल की निशानेबाज के साथ समापन समारोह के दौरान भारतीय दल में 11 प्रतिभागी होंगे। बता दें कि जयपुर की रहने वाली अवनि लेखरा की 2012 में कार दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई थी, जिसके बाद से उनके शरीर का निचला हिस्सा लकवाग्रस्त है। लेखरा खेलों के एक संस्करण में कई पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं।

‘माफी माँगें जावेद अख्तर वरना देश भर में उनकी फिल्में नहीं’: RSS = तालिबान पर बुरे फँसे, पुलिस में शिकायत दर्ज

बॉलीवुड में काम करके पैसा कमाने वाले जावेद अख्तर अपने बयानों के कारण अक्सर विवादों में रहते हैं। इस बार वह आरएसएस की तुलना तालिबान से करके बुरी तरह से फँस गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की तुलना तालिबान से करने को लेकर जावेद अख्तर के खिलाफ शनिवार (4 सितंबर) को शिकायत दर्ज की गई है।

वकील आशुतोष जे. दुबे द्वारा मानखुर्द पुलिस स्टेशन में दायर शिकायत में ग्रेटर मुंबई पुलिस से मामले पर संज्ञान लेने और अख्तर के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। यह शिकायत अख्तर द्वारा शुक्रवार को NDTV पर दिए गए विवादित बयान को लेकर दर्ज कराई गई है।

वहीं, भाजपा ने जावेद अख्तर से माफी की माँग की है। भाजपा नेता राम कदम ने कहा है कि जब तक अख्तर आरएसएस और वीएचपी की तुलना तालिबान से करने वाले अपने बयान के लिए माफी नहीं माँगते, तब तक उनकी फिल्में देश में नहीं दिखाई जाएँगी।

3 सितंबर को एनडीटीवी के एक शो में अख्तर ने कहा, ”आरएसएस, वीएचपी और बजरंग दल का समर्थन करने वालों की मानसिकता भी तालिबान जैसी ही है।” उन्होंने कहा, ”जिस तरह तालिबान एक मुस्लिम राष्ट्र बनाने की कोशिश कर रहा है। उसी तरह कुछ लोग हमारे सामने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पेश करते हैं।”

जावेद अख्तर ने आगे कहा, “इन लोगों की मानसिकता एक जैसी है। तालिबान हिंसक हैं। जंगली हैं। उसी तरह आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का समर्थन करने वाले लोगों की मानसिकता एक जैसी है।

तालिबान की तुलना आरएसएस, विहिप और बजरंग दल से करते हुए अख्तर ने कहा कि हिंदू संगठन जिन विचारधाराओं का पालन करते हैं, वे तालिबान से अलग नहीं हैं। उन्होंने हँसते हुए कहा, “उन्हें तालिबान की तरह अल्पसंख्यकों से कोई प्यार नहीं है। वे चाहते हैं कि तालिबान की तरह महिलाएँ घर में ही रहें। दोनों के बीच क्या अंतर है? वे कहते हैं कि उनकी धार्मिक आस्था से बढ़कर कोई कानून नहीं है, ऐसा तालिबान भी कहता है। आप उनसे कैसे अलग हैं?”

मन लगा कर पोर्न साइट्स देख रहे तालिबानी, सेक्स वर्कर्स की बना रहे लिस्ट: सार्वजनिक मौत की सजा का प्लान?

अफगानिस्तान पर शासन के बाद तालिबान ने महिलाओं को शरिया कानून के तहत बर्ताव करने की हिदायत दी है। इस बीच तालिबानी अब अफगानी वेश्याओं (Afghan Prostitutes) की किल लिस्ट (वो सूची जिसके अनुसार ये सबको मारेंगे) बना रहे हैं। इसके लिए तालिबान तमाम पोर्न साइट्स खंगाल रहा है।

माना जा रहा है कि तालिबान इन सेक्स वर्कर्स को सार्वजनिक रूप से मौत की सजा देगा। यह भी आशंका जाहिर की गई है कि तालिबान इन्हें अपने आनंद के लिए प्रताड़ित भी कर सकता है। बता दें कि तालिबानी महिलाओं के सिर काटने, पत्थर मारने या लटकाए जाने से पहले उनका बलात्कार भी करते हैं।

अश्लील साइट खंगाल रहे तालिबानी

‘द सन’ की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान का हत्यारी दस्ता (death squads) अश्लील साइटों को खंगाल रहे हैं। तालिबानियों के हाथ कुछ ऐसे वीडियो भी लगे हैं, जिसमें अफगान वेश्याएँ पश्चिमी देशों के पुरुषों के साथ संबंध बनाती दिखाई देती हैं। जिसके बाद से तालिबान इन महिलाओं की पहचान के लिए व्यापक अभियान चला रहा है। 1996 से 2001 तक तालिबान के शासन में भी कई ऐसी महिलाओं को खौफनाक और बर्बर तरीके से सार्वजनिक मौत की सजा दी गई थी।

इन महिलाओं की सार्वजनिक हत्या करने का प्लान!

एक सूत्र के हवाले से बताया गया है कि तालिबानी इन वेश्याओं की खोज के लिए पाखंड को प्रदर्शित कर रहे हैं। वे पोर्नोग्राफी की निंदा करने का दिखावा करते हैं, लेकिन खुद उसका पालन नहीं करते। तालिबानी अफगान वेश्याओं की पहचान के लिए एडल्ट साइट्स की गहराई से छानबीन कर रहे हैं। ताकि वे इन महिलाओं को पकड़कर या तो मार डालें या अपना गुलाम बना सकें।

तालिबान ने पिछले 20 साल से अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में शातिर रणनीति जारी रखी है। ये शादी से बाहर यौन संबंध रखने के लिए महिलाओं की हत्या कर देते हैं। हालाँकि, वे खुद पर और स्थानीय पुरुषों पर इस कानून को लागू नहीं करते हैं। बता दें कि अफगानिस्तान में सेक्स कार्य अवैध है, लेकिन जैसे-जैसे देश में व्यवसाय बढ़ा वैसे-वैसे सेक्स के लिए खुद को बेचने वाले पुरुषों और महिलाओं की संख्या में वृद्धि हुई क्योंकि उनके पास कोई दूसरा काम नहीं था।

अफगानिस्तान में मानवाधिकार संगठनों ने जून में चेतावनी देते हुए बताया था कि अफगानिस्तान से सुरक्षाबलों की वापसी से पहले देश की राजधानी काबुल में ‘सैकड़ों’ सेक्स वर्कर्स थे। रिपोर्ट के मुताबिक ये वेश्यालय दोस्तों के घरों, कॉफी की दुकानों और ब्यूटी सैलून में चल रहे थे।

मुस्लिम महिलाओं ने नाबालिग हिंदू लड़कियों को पहनाया हिजाब, बाँटे पर्चे: महाराष्ट्र के नागपुर में CM आवास के पास की घटना

महाराष्ट्र के नागपुर में गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन जमात-ए-इस्लामी हिंद की महिला विंग से जुड़ी कुछ मुस्लिम महिलाओं को शनिवार (4 ​सितंबर) को 15-25 साल की हिंदू लड़कियों को पर्चे बाँटते और उनसे हिजाब पहनने का आग्रह करते हुए देखा गया।

पैम्फलेट में 15-25 साल की हिंदू लड़कियों से ‘कुरान और सुन्नत का ज्ञान फैलाने’ के लिए भी आग्रह​ किया गया। यह घटना कथित तौर पर नागपुर में CM आवास के पास वॉकर स्ट्रीट पर हुई। कुछ स्थानीय लोगों ने नाबालिग लड़कियों को इस तरह से हिजाब पहनाने पर आपत्ति जताई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है। बताया जा रहा है कि नागपुर में 20 अलग-अलग जगहों पर इस तरह की घटनाएँ हुई हैं।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि जब लोगों ने मुस्लिम महिलाओं को इस तरह से हिंदू लड़कियों को हिजाब पहनाने से रोका, तो वे उन पर भड़क गईं। इस्लाम मजहब में महिलाओं को आमतौर पर हिजाब पहनना पड़ता है। लेकिन हिंदू लड़कियों को हिजाब पहनाने के लिए इकट्ठा हुईं ये मुस्लिम महिलाएँ स्थानीय लोगों पर चिल्लाने लगीं और उनसे बहस करने लगीं, क्योंकि उन्होंने उन्हें ऐसा करने से रोका। उस दौरान तीन हिंदू लड़कियों में से एक नाबालिग लड़की ने कहा कि उसने अपनी मर्जी से हिजाब पहना है।

दिलचस्प बात यह है कि हिंदू लड़कियों को हिजाब पहनने के लिए 4 सितंबर को पैम्फलेट बाँटे गए, जिसमें ‘हिजाब दिवस’ लिखा गया था। जबकि तथाकथित विश्व हिजाब दिवस हर साल 1 फरवरी को पड़ता है। इसके बाद स्थानीय लोग शिकायत दर्ज कराने थाने पहुँचे।

स्थानीय निवासियों में से एक ने कहा कि वे सीएम आवास के पास टहलने गए थे, जहाँ उन्होंने देखा कि हिजाब पहने हुए 15-20 मुस्लिम महिलाओं ने 3-4 हिंदू लड़कियों को रोका और उनसे हिजाब पहनने का आग्रह करने लगी। उन्होंने कहा कि जब हमने उन्हें ऐसा करने से रोका तो वे कहने लगीं कि 4 सितंबर ‘विश्व हिजाब दिवस’ था और इस दिन कोई भी हिजाब पहन सकता है। हालाँकि, हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि ‘विश्व हिजाब दिवस’ हर साल 1 फरवरी को पड़ता है।

उन्होंने कहा, ”कुछ महिलाओं ने यहाँ तक दावा किया कि वे हिंदू हैं और अपनी मर्जी से हिजाब पहन रही हैं, लेकिन वो झूठ बोल रही थीं। जब मुस्लिम महिलाएँ वहाँ से चली गईं, तो हमने हिंदू लड़कियों को हिजाब उतारने को कहा।”

शिकायत करने वाले लोगों ने आगे बताया कि ये (मुस्लिम) महिलाएँ फिर सीएम बंगले की ओर थोड़ा आगे बढ़ीं, जहाँ उनके पति या भाई स्कूटर पर उनका इंतजार कर रहे थे। वे तुरंत स्कूटर पर बैठकर वहाँ से चली गईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने इस बारे में पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद वह मौके पर पहुँची। मुस्लिम महिलाओं द्वारा बाँटे गए पर्चे पुलिस को सौंप दिए हैं।

विहिप (विश्व हिंदू परिषद) के एक नेता ने कहा कि वे इस तरह की घटनाओं की निंदा करते हैं और यह शर्म की बात है कि नागपुर में ऐसी स्थिति पैदा हो गई है, जो अफगानिस्तान में तालिबानी शासन के दौरान देखने को मिल रही है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

बता दें कि गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन जमात-ए-इस्लामी हिंद की महिला विंग है, जो एक इस्लामिक संगठन है। इसका गठन 1948 में जामिया नगर दिल्ली में हुआ था। यह जमात-ए-इस्लामी के एक ऑफ-शूट के रूप में स्थापित किया गया था, जिसे 1947 में भारत के विभाजन के बाद अलग-अलग संगठनों में विभाजित किया गया था। जमात-ए-इस्लामी हिंद को भारत सरकार द्वारा दो बार प्रतिबंधित भी किया जा चुका है।