चेन्नई की अन्ना यूनिवर्सिटी में 19 वर्ष की एक छात्रा से रेप करने के आरोपित ज्ञानसेकरन को 30 वर्ष की सजा सुनाई गई है। उसके ऊपर ₹90 हजार का जुर्माना भी ठोंका गया है। ज्ञानसेकरन ने इस छात्रा की अश्लील वीडियो भी बनाई थी। विपक्षी दलों न आरोप लगाए थे कि ज्ञानसेकरन के DMK नेताओं से लिंक हैं।
चेन्नई की एक कोर्ट ने यह सजा सोमवार (2 जून, 2025) को सुनाई है। दोषी ज्ञानसेकरन को 30 वर्ष बिना किसी माफ़ी के जेल दी गई है। ज्ञानसेकरन के खिलाफ लगाए गए सभी 11 आरोप सिद्ध हो गए थे। इन सभी मामलों में उसे सजा दी गई है।
ज्ञानसेकरन के वकील ने कहा है कि वह इस मामले में इस अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट जाएँगे। इस मामले में न्यायालय ने सुनवाई 6 महीने में पूरी की है और सजा दी है। अन्ना यूनिवर्सिटी में हुए इस रेप मामले में राज्य की DMK सरकार की काफी फजीहत हुई थी।
#WATCH | Tamil Nadu | On Chennai Mahila court sentencing accused A Gnanasekaran to life imprisonment for at least 30 years and a fine of Rs 90,000 in Anna University rape case, accused advocate BR Jayaprakash Narayanan says, "The court has found Gnanasekaran the accused in Anna… https://t.co/PvtgMvFM1Spic.twitter.com/EMjahztLDy
इस मामले में पीड़िता की पहचान उजागर करने का आरोप भी पुलिस पर लगा था। आरोपित ज्ञानसेकरन के भी DMK नेताओं से लिंक के आरोप भाजपा समेत विपक्ष ने लगाए थे। इसको लेकर राज्य भर में प्रदर्शन हुए थे। मद्रास हाई कोर्ट ने पुलिस समेत बाकी अधिकारीयों को लताड़ा था।
क्या था मामला?
अन्ना यूनिवर्सिटी में 23 दिसम्बर, 2024 को यह घटना हुई थी। यूनिवर्सिटी के भीतर ही इंजीनियरिंग की एक 19 वर्षीय छात्रा से ठेले वाले ज्ञानसेकरन ने रेप किया था। पीड़िता एक जगह अपने एक दोस्त से मिलने गई थी। इसी बीच ज्ञानसेकरन ने उसका एक वीडियो बना लिया।
इसके बाद वीडियो के आधार पर उसने लड़की को धमकाया और उसके साथ मौजूद दोस्त को भी मारपीट कर भगा दिया। इसके बाद लड़की के साथ रेप किया और फोन नम्बर लेकर कहा कि जब जहाँ बुलाए वहाँ वह लड़की आ जाए। लड़की ने जब इस घटना की रिपोर्ट दर्ज करवाई तब यह मामला खुला।
ज्ञानशेखरन ने 2011 में एक ऐसी ही घटना को अंजाम दिया था। उस पर 15 मामले दर्ज हैं। भाजपा को आरोप है कि ज्ञानशेखरन कार्रवाई से इसलिए बचता रहा क्योंकि उसे DMK का वरदहस्त प्राप्त था।
बिहार के बक्सर में 24 मई 2025 को आपसी रंजिश के चलते एक ही परिवार के पाँच लोगों पर गोलियाँ बरसाई गईं। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। इस पूरी घटना के 8 दिन बाद RJD सांसद सुधाकर सिंह और विधायक विजेंद्र यादव पीड़ितों के घर उनसे मिलने पहुँचे।
इस दौरान पीड़ितों और ग्रामीणों ने उन्हें जमकर लताड़ा। उनसे पूछा कि 8 दिन तक यहाँ अलग-अलग पार्टियों के नेता आए, लेकिन आप लोग क्यों नहीं है आए? इस पर सांसद सुधाकर सिंह प्रशासन का दबाव और सीमित संसाधनों का बहाना बनाने लगे।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि पहले प्रशासन ने आने नहीं दिया और उसके बाद वह तमिलनाडु चले गए थे। इसलिए उन्हें आने में देर हो गई।
आक्रोशित लोगों ने पूरे मामले पर अब तक कोई भी अपडेट न करने पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी के चलते वह सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं रह पाते हैं।
MLA बोले- आरोपित पगला
इसके अलावा विधायक विजेंद्र यादव ने तो आरोपित को पगला ही बता दिया। विजेंद्र यादव ने कहा कि मनोज, जो हत्याकांड में एक नामजद आरोपित है, एक ‘पगला’ और ‘सनकी’ आदमी है।
इसके अलावा वे सेना के लिए भी अनाप-शनाप कहने से बाज नहीं आए। उन्होंने कहा, “सेना भी यह सिखाती है कि जब गोलियाँ चलने लगे और आप कमजोर हों तो वहाँ से भाग जाओ। भले ही बाद में मजबूत होकर आओ।”
उनकी इस तरह की बातों पर ग्रामीणों में जमकर आक्रोश दिखा। पीड़ित परिवार ने सांसद सुधाकर सिंह से कहा कि हमने अपना परिवार खोया है। हमें न्याय चाहिए।
क्या था मामला
बक्सर के आहियापुर में बालू के विवाद में एक ही परिवार के तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों परिवारों के बीच कई दिनों से विवाद चल रहा था।
शनिवार (24 मई 2025) की सुबह टहलने निकले परिवार को नहर के पास दो स्कॉर्पियो में भर कर आए लोगों ने गोली मार दी। इनमें से विनोद, सुनील और वीरेंद्र सिंह की मौके पर मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में एक व्यक्ति को गंभीर चोट लगने के कारण उसका पैर काटना पड़ गया।
पीड़ित पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने 19 लोगों को नामजद किया है। इनमें से दो लोग संतोष यादव और मनोज यादव के राजनीतिक संबंध सामने आए हैं। इस हत्याकांड के बाद बक्सर में सियासी हलचल बढ़ गई है।
JDU के नेता इसे ‘विपक्ष की ओर से की गई हिंसा’ बता रहे हैं। पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने हत्याकांड से जुड़े आरोपित संतोष यादव की RJD नेता तेजस्वी यादव और सांसद सुधाकर सिंह के साथ की तस्वीरें साझा की और कहा कि ये प्रायोजित तरीके से की गई हिंसा है।
असम की कछार पुलिस ने हीबा नूर (कुछ जगह हबीबा खातून) नाम की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि वो अपने अकॉउंट से हिंदू घृणा से सने पोस्ट डालती थी। साथ ही साथ हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी भी करती थी। हाल में जब उसकी प्रोफाइल और उसपर डाले कंटेंट सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुए तो लोगों ने उसे अरेस्ट करने की माँग उठाई।
वायरल स्क्रीनशॉट में दिखाई दे रहा है कि हीबा खातून कमेंट पर माँ काली के लिए अभद्र शब्द बोलती थी। उसने लिखा था- वैसे काली और दुर्गा तो नं$% होती हैं इसका मतलब ये सब नंगी रहना चाहती हैं।
आगे स्क्रीनशॉट में उसने लिखा- हमें किसी के धर्म से कोई मतलब नहीं। हम आगे से किसी को गाली नहीं देते, लेकिन अगर हमें छेड़ोगे तो हम उसका जवाब जरूर देंगे।
A video recently emerged on social media in which Habiba Khatun of Tukergram, Silchar, was seen making derogatory & indecent remarks against Goddess Maa Kali, prompting arrested her & forwarded to the Hon’ble Court.@himantabiswa@HardiSpeaks@KangkanJSaikia@assampolice
उसके स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद कछार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। कछार पुलिस ने 1 जून को ट्वीट करके बताया कि हीबा खातून गिरफ्तार है। उसे कोर्ट के आगे पेश किया गया था। पुलिस ने कहा कि एक वीडियो सोशल मीडिया पर आई थी जिसमें हबीबा खातून जो सिलचर के तुकेग्राम की है। उसे माँ काली पर अश्लील टिप्पणी करते देखा गया। पुलिस उसे पकड़ चुकी है।
बता दें कि सोशल मीडिया पर हिंदू घृणा फैलाने वाली हीबा के खिलाफ जैसे ही सोशल मीडिया पर शिकायत हुई उसी के बाद हीबा का एक पोस्ट आया जिसमें उसने लिखा था- “आज से मैं रोस्टिंग वीडियो और हिंदू-मुस्लिम नफरत फैलाने वाला, जो भी कंटेंट होगा वो मैं नहीं बनाऊँगी और कुछ ऐसा कमेंट भी नहीं करूँगी।” इसके अलावा अब 19 हजार फॉलोवर वाली हीबा के सोशल मीडियासे सारे पोस्ट भी डिलीट किए जा चुके हैं।
ऐसे मामले पहले भी बहुत बार आए हैं। कुछ समय पहले खुद को फेमिनिस्ट समझने वाली प्रियंका पॉल की आईडी वायरल हुई थी जिसमें उसने न केवल हिंदुओं के लिए, बल्कि हिंदू देवी-देवताओं के लिए अश्लील बातें की हुई थीं। पोस्ट वायरल होने के बाद उसके खिलाफ भी शिकायत हुई थी।
रविवार (1 जून 2025) की तारीख रूस के लिए एक काला दिन बनकर इतिहास में दर्ज हो गया। यूक्रेन ने रूस के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया, जिसमें कई रूसी हवाई अड्डों को निशाना बनाते हुए कम से कम 40 लड़ाकू विमानों-बमबर्षकों और मल्टीरोल फाइटर जेट्स को हवा में उड़ने से पहले जमीन पर ही ढेर कर दिया गया।इस हमले में यूक्रेन ने FPV (फर्स्ट पर्सन व्यू) ड्रोन स्वार्म्स का इस्तेमाल किया, जिन्हें पहले से ही रूस के अंदर तैनात कर दिया गया था।
ये हमले रूस की सीमा में 4000 से 5000 किमी अंदर तक किए गए हैं। विशेषज्ञ इन हमलों को अभूतपूर्व बता रहे हैं। हालाँकि लोगों को कम ही पता है कि ऐसे हमले की कोशिश भारत के खिलाफ हो चुकी है, लेकिन भारत उन हमलों को विफल कर चुका है।
Ukrainian FPV drones obliterating Russian strategic bombers 4,000 km away from Ukraine. Clearly a ground-supported special op. One that will likely go down in the history books. pic.twitter.com/ADt6vN15NL
यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 40 से ज्यादा रूसी विमानों को नुकसान पहुँचाया गया या नष्ट कर दिया गया, जिसमें Tu-95 और Tu-22M3 जैसे स्ट्रैटेजिक बॉम्बर्स और कम से कम एक A-50 एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग विमान शामिल हैं। हमले का निशाना चार प्रमुख रूसी हवाई अड्डे थे – बेलाया, डायघिलेवो, ओलेन्या और इवानोवो… जो रूस के सुदूर उत्तर तक स्थित हैं। इन हमलों के लिए न तो रूस तैयार था और न ही उसकी सुरक्षा एजेंसियाँ, क्योंकि रूस के सुदूर उत्तर यानी 4000 से 5000 किमी अंदर उसे किसी हमले की अंशमात्र भी आशंका नहीं थी।
BREAKING: Ukraine unleashes its biggest strike on Russian Air Force yet. ~ Drones smuggled deep into Russian territory hit strategic airbases – up to 40 AIRCRAFT reportedly DESTROYED.
— The Analyzer (News Updates?️) (@Indian_Analyzer) June 1, 2025
यह हमला अपने आप में एक सैन्य मास्टरस्ट्रोक था। यूक्रेन ने इन ड्रोन्स को रूस के अंदर तस्करी करके पहले से ही हवाई अड्डों के पास तैनात कर दिया था, जिससे वे सटीकता के साथ विमानों को निशाना बना सके। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोज में रूसी हवाई अड्डों पर जलते हुए विमान और धुएँ के गुबार दिखाई दे रहे हैं। रूसी ब्लॉगर्स ने इसे ‘रूसी पर्ल हार्बर’ करार दिया है, जो इस हमले की भयावहता को दर्शाता है।
यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस (SBU) के एक अधिकारी ने इसे ‘दुश्मन के पीछे तक पहुँचने’ की शुरुआत बताते हुए कहा कि अब रूसी विमानों की वह ‘अनछुई’ स्थिति खत्म हो गई है, जो यूक्रेनी नागरिकों पर बमबारी करते थे। क्योंकि यूक्रेन के पास न तो इन्हें इंटरसेप्ट करने की क्षमता थी और न ही इन्हें मार गिराने की। ऐसे में रूसी बॉम्बर, अटैक फाइटर जेट आते… यूक्रेन की पहुँच से बाहर रहकर मिसाइलों से हमला करते और दूर-से-दूर ही और भी दूर निकल जाते।
This will be in textbooks. Ukraine secretly delivered FPV drones and wooden mobile cabins into Russia. The drones were hidden under the roofs of the cabins, which were later mounted on trucks.
At the signal, the roofs opened remotely. Dozens of drones launched directly from the… pic.twitter.com/sJyG3WyYYI
लेकिन इस घटना को देखते हुए एक सवाल उठता है – क्या इस तरह की रणनीति पहले भी कहीं देखी या कोशिश की गई है? जवाब हाँ है… और वह जगह है भारत। भारत में भी कुछ ऐसी ही कोशिश की गई थी, लेकिन भारतीय एजेंसियों ने इसे समय रहते नाकाम कर दिया। यह घटना मुंबई के पास पडघा गाँव में हुई थी, जो 2023 में एक बड़े आतंकी साजिश का केंद्र बन गया था। आइए, इस घटना को विस्तार से समझते हैं और इसे यूक्रेन-रूस घटनाक्रम से जोड़कर देखते हैं।
मुंबई से महज 50 किलोमीटर दूर पडघा एक छोटा सा गाँव है। उसे साल 2023 तक भारत में ISIS का एक प्रमुख केंद्र बनाया जा चुका था। इस गाँव को कुख्यात आतंकी साकिब नाचन ने ‘अल-शाम’ नाम दिया और इसे अलग शरिया कानूनों के तहत चलाने की कोशिश की जा रही थी। यहाँ शरिया ही लागू कर दिया गया था।
इसकी कमान संभालने वाला कुख्यात आतंकी साकिब नाचन पहले SIMI (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) जैसे आतंकी संगठन से जुड़कर मुंबई में कई आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका था। इनमें मुख्य थे- साल 2002 में मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर हुए बम धमाके, जिनमें 25 लोग घायल हुए… तो साल 2003 में विले पार्ले और मुलुंड स्टेशन पर हुए धमाकों में कई लोगों की जान गई थी। इन हमलों के बाद नाचन को गिरफ्तार किया गया, लेकिन 2017 में वह जेल से बाहर आ गया और उसने पडघा को अपने आतंकी मंसूबों का अड्डा बना लिया।
एनआईए ने फेल किए थे दुश्मनों के खतरनाक इरादे
साल 2023 में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने पडघा में एक बड़ा ऑपरेशन चलाया। इस छापेमारी में 44 ड्रोन बरामद किए गए, जो मुंबई पर हमले के लिए तैयार किए गए थे। इसके अलावा, भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और कट्टरपंथी साहित्य भी मिला। हैरानी की बात यह थी कि वहाँ से इजरायली झंडे भी बरामद हुए, जिससे संकेत मिलता है कि इस साजिश के पीछे बड़े और जटिल मकसद थे। यह साफ था कि आतंकी संगठन मुंबई में एक बड़े हमले की योजना बना रहे थे, शायद 26/11 जैसे हमले से भी बड़ा।
दोनों ही मामलों में ड्रोन्स बने मुख्य हथियार
पडघा की यह घटना और यूक्रेन का रूस पर ड्रोन हमला एक-दूसरे से कई मायनों में जुड़े हुए हैं। दोनों ही मामलों में ड्रोन्स का इस्तेमाल एक प्रमुख हथियार के रूप में किया गया। यूक्रेन ने रूस के हवाई अड्डों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन्स को पहले से तैनात कर दिया था, ठीक वैसे ही जैसे पडघा में आतंकियों ने ड्रोन्स को मुंबई पर हमले के लिए तैयार रखा था। दोनों ही घटनाओं में रणनीति एक जैसी थी – दुश्मन की सीमा के अंदर घुसकर, उनकी सुरक्षा को भेदकर, उनके ही क्षेत्र में हमला करना। लेकिन जहाँ यूक्रेन अपने मकसद में कामयाब रहा, वहीं भारत ने इस साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया।
यहाँ एक और समानता है – दोनों ही मामलों में हमलावरों ने दूसरे पक्ष की कमजोरियों का फायदा उठाया। यूक्रेन ने रूस के हवाई अड्डों की सुरक्षा में सेंध लगाई, जो शायद रूस को अजेय लगते थे। वहीं, पडघा में आतंकियों ने एक शांत गाँव को अपना अड्डा बनाकर भारत की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश की। लेकिन भारतीय एजेंसियों की सतर्कता ने इस साजिश को विफल कर दिया और मुंबई को एक बड़े हमले से बचा लिया गया।
रूस पर हमला भारत के लिए बड़ा सबक
यूक्रेन की घटना से यह साफ होता है कि आधुनिक दौर के युद्ध में ड्रोन तकनीक कितनी अहम हो गई है। लेकिन पडघा की घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि इस तकनीक का दुरुपयोग आतंकी संगठन भी कर सकते हैं। भारत में जो हुआ, वह एक चेतावनी थी कि हमें अपनी सुरक्षा को और मजबूत करना होगा, खासकर ऐसे समय में जब तकनीक तेजी से बदल रही है। यूक्रेन ने रूस को जो सबक सिखाया, वह भारत के लिए भी एक सबक है – हमें हर समय सतर्क रहना होगा, क्योंकि दुश्मन किसी भी रूप में, कहीं से भी हमला कर सकता है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 18 जनवरी, 2023 को लगभग 30 एथलीट्स कुश्ती संघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाते हुए धरने पर बैठते हैं। इस धरने की अगुवाई करते हैं पहलवान बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक। यह वो चेहरे हैं जो अब तक भारत का प्रतिनिधित्व वैश्विक स्तर पर करते रहे हैं।
खेल के माध्यम से देश का नाम ऊँचा करने वाले यह एथलीट बृजभूषण शरण सिंह पर कड़ी कार्रवाई की माँग करते हैं। इनका साथ देने वालों में धीमे-धीमे कॉन्ग्रेस नेताओं से लेकर एंटी- भाजपा लॉबी जुड़ जाती है। यौन शोषण मामले में FIR करवाने के साथ ही बृजभूषण शरण सिंह पर 100 तरह के आरोप लगाए जाते हैं।
लेकिन मई, 2025 में इनमें से POCSO वाले मामले में बृजभूषण शरण सिंह निर्दोष साबित होते हैं। धरने की शुरुआत से लेकर धरने के परिणाम तक पर नजर डाले तो दिखाई देता है कि इस पूरे आंदोलन ने सभी आंदोलनकारियों को सेटल कर दिया, किसी को राजनीति में तो किसी को वापस कुश्ती में।
लेकिन इससे एक सवाल जरूर उठ गया। सवाल है कि क्या भविष्य में इस निराधार लड़ाई का खामियाजा सत्य आधार पर लड़ने वाली महिलाओं को भुगतना पड़ेगा? क्या अब उनके लिए कोई लड़ने आएगा? क्या किसी बड़ी शख्सियत पर लगाए आरोपों को कोई तुरंत स्वीकार कर पाएगा?
क्या था पूरा मामला ?
बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरने पर बैठे पहलवानों का आरोप था कि बृजभूषण शरण सिंह कुश्ती संघ को गलत तरीके से चला रहें हैं और महिला पहलवानों के साथ यौन शोषण को अंजाम दिया जा रहा है। वहीं बृजभूषण धरने और आरोप दोनों को बेबुनियाद बताते हुए खुद को निर्दोष होने की बात कहते हैं।
धरने को बढ़ता देख खेल मंत्री अनुराग ठाकुर पहलवानों से मिलते हैं, जिसके बाद 21 जनवरी 2023 को धरना समाप्त किया जाता है। 23 जनवरी 2023 को पहलवानों की माँग के अनुसार जाँच के लिए समिति बनाई जाती है। इसके बाद सूत्रों से पता चलता है कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं।
23 अप्रैल को जाँच से नाखुश पहलवान वापस धरने पर बैठते हैं। अबकी बार इन्हें तमाम बड़े राजनीतिक हस्तियों का साथ मिलता है। अंत में नाबालिग लड़की के आरोप पर POCSO एक्ट के तहत बृजभूषण पर FIR पर दर्ज की जाती है। और एक अन्य FIR बाकी पहलवानों के आरोपों पर भी दर्ज होती है।
आरोप-प्रत्यारोप, नारेबाजी और ड्रामा
अगला आरोप पहलवानों ने दिल्ली पुलिस पर लगाया और कहा कि पुलिस उनके धरने में बाधा डाल रही है। आरोप ये भी था कि प्रदर्शन स्थल की बिजली और पानी की आपूर्ति भी बाधित की जा रही है। 28 मई 2023 को पहलवान विरोध प्रदर्शन करने के लिए नए संसद भवन की तरफ जा रहे थे।
इस दौरान पुलिस और पहलवानों के बीच झड़प हुई और दिल्ली पुलिस ने धरना कर रहे पहलवानों को हिरासत में ले लिया, लेकिन 28 मई की रात तक सभी को छोड़ दिया गया। इसके बाद अगले कदम के तहत विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया जीतकर प्राप्त मेडल को गंगा में प्रवाहित करने हरिद्वार की यात्रा पर निकल गए।
यहाँ भारतीय किसान यूनियन टिकैत के राष्ट्रीय प्रवक्ता नरेश टिकैत ने पहलवानों को बढ़ावा दिया। पहलवानों ने अपने इस समर्थक को ही अपना मेडल भी सौंप दिया और आगे बढ़े। 7 जून 2023 को केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर अपने आवास पर पहलवानों के साथ फिर बैठक करते हैं।
छह घंटे की इस बैठक के बाद अनुराग ठाकुर का बयान आता है। वह कहते हैं, “पहलवानों के साथ सकरात्मक बातचीत बहुत संवेदनशील मुद्दे पर हुई है। लगभग छह घंटे चली इस बैठक में जिन मुद्दे पर चर्चा हुई है उसमें जो आरोप लगाए गए हैं उन आरोपों की जाँच पूरी करके 15 जून तक चार्जशीट दायर की जाए और रेसलिंग फेडरेशन का चुनाव 30 जून तक किया जाए। रेसलिंग फेडरेशन की आंतरिक शिकायत समिति बनाई जाए और उसकी अध्यक्षता कोई महिला करे।”
कोर्ट का फैसला और कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल
15 जून 2023 को पुलिस की तरफ से राउज एवेन्यू के जिला अदालत में 1000 पन्ने की चार्जशीट दाखिल की गई। इसी दिन दिल्ली पुलिस नाबालिग पहलवान के मामले में पटियाला हाउस के जिला अदालत में आरोपों को निराधार और झूठा बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल करती है।
18 जुलाई 2023 को बृजभूषण को अंतरिम जमानत मिल जाती है। आरोप प्रत्यारोप का ये सिलसिला तब खतम हुआ, जब कोर्ट ने 26 मई 2025 को पुलिस द्वारा दी गई क्लोजर रिपोर्ट के बाद मामले को बंद कर दिया।
पहलवानों को मिली लाइमलाइट तो खेल छोड़ शुरू की नेतागिरी –
इस पूरे आंदोलन को हवा देने वाली कॉन्ग्रेस से पहलवानों को खूब लाइमलाईट मिली। भले ही यह आरोप साबित ना हो पाए हों लेकिन इस बीच कॉन्ग्रेस ने इस मुद्दे को भुनाने का पूरा प्रयास हरियाणा विधानसभा चुनाव में किया।
कॉन्ग्रेस ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में जुलाना सीट से विनेश फोगाट को टिकट दिया और प्रतिद्वंदी योगेश बैरागी को 6015 वोटों से हराते हुए वह जीत गई। इसी तरह बजरंग पुनिया ने भी खेल से अधिक रुचि राजनीति करने में दिखाई, तो उन्हें भी भारतीय किसान कॉन्ग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया।
सवाल हर स्त्री का
बृजभूषण शरण सिंह पर लगाया नाबालिग का आरोप नहीं साबित हो सका। इस बीच बृजभूषण के बेटे करण भूषण सांसद हो गए। बृज भूषण के करीबी संजय सिंह कुश्ती संघ के नए मुखिया हो गए। विनेश और बाकी पहलवान राजनीति में सेटल हो गए तो बाकी अपने खेल की तरफ लौट गए। लेकिन सब एक सवाल छोड़ गए।
बड़े पदों को पाने के बाद इन लोगों का उस नाबालिग बच्ची से भी मतलब नहीं रह गया, जिसके कैरियर का अभी आगाज भी नहीं हुआ था। कोर्ट में नाबालिग बच्ची के पिता ने अपना बयान कुछ ही महीनों के बाद बदल लिया था। लड़की के पिता ने गलत बयान देने की बात कोर्ट में कही थी।
सवाल उठता है कि POCSO का यह मामला गलत साबित होने के बाद उन महिलाओं पर इसका क्या असर पड़ेगा, जिनके साथ सच में यौन शोषण की घटनाएँ होती हैं। अगर उस पीड़ित महिला का हर आरोप सत्य होगा फिर भी ये तो जरूर याद रखा जाएगा कि किस तरह इस मामले में आरोपों को इस्तेमाल किया गया।
साथ ही, वह बच्ची अब अपने साथियों और खेल जगत समेत बाकी जगह कैसे लोगों का सामना करेगी। कैसे वह पिता लोगों को बताएगा कि उसने यह आरोप शुरू में क्यों लगाए और बाद में वापस क्यों लिए?
पश्चिम बंगाल पुलिस ने जिस वजाहत खान कादरी रशीदी की शिकायत पर लॉ स्टूडेंट शर्मिष्ठा पनोली को गिरफ्तार किया है, अब उसकी घिनौनी हरकतें सामने आ रही हैं। हिंदू देवी-देवताओं के अपमान, अभद्र टिप्पणियों और उसके सोशल मीडिया पर उगले गए जहर को लेकर वजाहत खान कादरी रशीदी के खिलाफ 3 एफआईआर दर्ज हुई हैं। 2 एफआईआर दिल्ली में और एक एफआईआर गुवाहाटी में दर्ज किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं।
हालाँकि, अब वज़ाहत खान खुद मुश्किलों में घिर गया है। इंटरनेट यूजर्स की जाँच में यह तथ्य सामने आया कि वज़ाहत खान कादरी रशीदी नाम का जो व्यक्ति पैगंबर मोहम्मद और इस्लाम के कथित अपमान से नाराज़ होकर शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ़ कार्रवाई की माँग कर रहा था, वह खुद सोशल मीडिया पर हिंदू धर्म और हिंदू देवी-देवताओं का बार-बार अपमान करता रहा है।
बता दें कि शर्मिष्ठा ने जिस टिप्पणी के लिए माफ़ी माँग ली थी, उसी को आधार बनाकर रशीदी फ़ाउंडेशन के सह-संस्थापक वज़ाहत खान कादरी रशीदी ने कोलकाता पुलिस में उसके खिलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी और कोलकाता पुलिस ने शर्मिष्ठा को 1500 किमी दूर गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया था। वज़ाहत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी की माँग की थी, शिकायत दर्ज कराने की जानकारी साझा की थी और बाद में उनकी गिरफ्तारी का जश्न भी मनाया था।
लेकिन अब उस वजाहत के कई आपत्तिजनक पोस्ट सामने आए हैं, जिनमें वो हिंदू देवी-देवताओं के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करता था। इन पोस्ट्स में से कई को वज़ाहत ने बाद में डिलीट भी कर दिया। उसने अपनी पोस्ट में हिंदू देवी-देवताओं और सनातन धर्म के खिलाफ अपमान जनक भाषा का प्रयोग किया। उसके कुछ पोस्ट इस प्रकार हैं..
“एक हिंदू अपनी साली को अंग अंग पर रंग लगाते हुए और अपने दोस्तों को भी उसके साथ ऐसा करने का निमंत्रण देते हुए… सी हिंदुओं… यहीं है इनकी असलियत… बलात्कारी संस्कृति”
“नहीं वो उसकी बात कर रहा है जिसकी 16108 राखेलो के साथ रंग रसिया मनाता था…या चुपके-चुपके लड़कियों को नहाते हुए देखता था…”
“मेरे पास आपके लिए कुछ है… पहले अपने धर्म के बारे में पढ़ो। मूत्र पीने वाले मैल हैं।”
“तुझ जैसी &^$^&* पेट की औलाद रसूल के बारे में बारे में बात करे ये जेब नहीं देता…तू इसकी बात कर, तेरा कृष्णा कैसा रंगीला था देख…सच्चाई देख, वहम में मत जी… $%टू साले, तूने जो भी कहा वो सब तो झूठ और बहुत है लेकिन ये तेरे ही किताब का है सच पढ़, सुवर के पिल्ले”
वज़ाहत खान के ट्विटर पोस्ट का स्क्रीनशॉट
इन आपत्तिजनक पोस्ट्स के आधार पर एडवोकेट विनीत जिंदल ने वज़ाहत खान के खिलाफ़ दिल्ली पुलिस और साइबर क्राइम यूनिट में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने वज़ाहत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 194, 195, 356 और आईटी एक्ट की धाराओं 66, 67, 69 के तहत एफआईआर दर्ज करने की माँग की है।
उन्होंने ऑनलाइन शिकायत में लिखा, “मैं सोशल मीडिया पर वज़ाहत खान कादरी रशीदी नामक व्यक्ति द्वारा प्रसारित की जा रही बेहद आपत्तिजनक, घृणित और अपमानजनक पोस्ट की एक सीरीज के बारे में एक औपचारिक शिकायत दर्ज करने के लिए लिख रहा हूँ, जिनके प्रोफ़ाइल और पोस्ट ट्विटर (अब एक्स) जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।
? एडवोकेट वीनेत जिंदल ने @DelhiPolice और @DCP_IFSO को वज़ाहत खान क़ादरी राशिदी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। आरोप:⁰? ऑनलाइन नफ़रत फैलाना⁰? धार्मिक भावनाओं का अपमान⁰? अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग वज़ाहत खान Rashidi Foundation का सदस्य है — वही संस्था जो Sharmistha… pic.twitter.com/oH6J6g7j9I
— Adv.Vineet Jindal (@vineetJindal19) June 1, 2025
उन्होंने आगे कहा की व्यक्ति ने हिंदू समुदाय, उसकी मान्यताओं, प्रथाओं और भगवान कृष्ण सहित पूजनीय व्यक्तियों को निशाना बनाते हुए अभद्र भाषा वाले बार-बार पोस्ट किए हैं। पवित्र ग्रंथों और देवताओं का मज़ाक उड़ाते हुए यौन रूप से स्पष्ट और अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया है। सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने के उद्देश्य से सांप्रदायिक उकसावे की कार्रवाई की गई है। धार्मिक भावनाओं का उपहास करने और उन्हें भड़काने के उद्देश्य से ग्राफ़िक गलत सूचना और मॉर्फ़ की गई तस्वीरें।
एडवोकेट विनीत जिंदल के आनुसार सामग्री में बलात्कारी संस्कृति, मूत्र पीने वाले और हिंदू त्योहारों, देवताओं और मंदिरों (जैसे, कामाख्या देवी मंदिर) पर अपमानजनक टिप्पणी जैसे अपमानजनक शब्द शामिल हैं। ये पोस्ट धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का एक स्पष्ट और जानबूझकर किया गया प्रयास प्रतीत होता है, जो 194,195,356 बीएनएस और आईटी अधिनियम की धारा 66,67,69 के तहत दंडनीय अपराध है। इसलिए उपरोक्त व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए मैं तैयार हूँ। मैं आगे कोई भी जानकारी देने या आवश्यकतानुसार जाँच प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए भी तैयार हूँ”।
अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने कोलकाता में रहने वाले वजाहत खान के खिलाफ दिल्ली में साकेत पुलिस के साइबर अपराध में दूसरी शिकायत दर्ज कराई है।
Law Must Be Equal for All: No Double Standards in Justice
A formal complaint has been filed with the Saket Cyber Crime Cell against Wazahat Khan Qadri Rashidi (@rashidi_wazahat) for his offensive posts on X targeting Bhagwan Shri Krishna and Hindu Dharma, clearly aimed at… pic.twitter.com/421P0GMNSz
— Amita Sachdeva, Advocate (@SachdevaAmita) June 1, 2025
उन्होंने लिखा कि कोलकाता स्थित रशीदी फाउंडेशन के सह-संस्थापक वज़ाहत खान कादरी रशीदी के खिलाफ़ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर हिंदू धर्म, देवी-देवताओं, त्योहारों और संस्कृति को निशाना बनाकर आपत्तिजनक, अपमानजनक और भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने के आरोप में शिकायत दर्ज की गई है। जिंदल ने कहा कि इन पोस्टों से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं, जिसमें वह स्वयं भी शामिल हैं, और इनसे सांप्रदायिक तनाव भड़कने की आशंका है।
इस बीच, वजाहत के खिलाफ तीसरी एफआईआर भी दर्ज हुई है। वजाहत के खिलाफ तीसरी एफआईआर गुवाहाटी में दर्ज कराई गई है। वायस ऑफ असम और सांतनु सैकिया ने ये एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें कामाख्य मंदिर पर दिए उसके घृषित पोस्ट को आधार बनाया गया है।
I, along with @ModifiedChokra, have filed an FIR against Wazahat Khan, the instigator behind Sharmistha Panoli’s arrest.
A habitual offender, Wazahat Khan regularly spews venom against Hindu beliefs, makes vile remarks about Maa Kamakhya and Lord Krishna, and mocks Sanatan… pic.twitter.com/RNvjOx9D5f
कथित रूप से, वज़ाहत खान ने अब अपने सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसे कई आपत्तिजनक पोस्ट डिलीट कर दिए हैं। इसी तरह, शर्मिष्ठा पनोली ने भी अपने कथित आपत्तिजनक वीडियो को डिलीट कर दिया था और सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगी थी। इसके बावजूद, पश्चिम बंगाल पुलिस ने शर्मिष्ठा पनोली को गिरफ्तार करने के लिए 1500 किलोमीटर दूर चली गई और कोलकाता की अलीपुर कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया जबकि वज़ाहत खान जो वही कोलकाता में मौजूद है उसके खिलाफ बंगाल पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ के वापस पैर पसारने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है। शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद आई मोहम्मद यूनुस की सरकार लगातार इन तत्वों को शह दे रही है। इसी कड़ी में बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी को चुनाव लड़ने की मंजूरी मिल गई है।
यह मंजूरी बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने दी है। सुप्रीम कोर्ट ने जमात के चुनावी पंजीकरण को दर्ज किए जाने का आदेश दिया है। जमात को शेख हसीना की सरकार ने बैन कर दिया था। बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला रविवार (1 जून, 2025) को दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह जमात का दोबारा पंजीकरण करके उसे चुनाव चिन्ह भी दे। यह फैसला जमात द्वारा दायर एक याचिका के बाद लिया गया है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया।
बांग्लादेश में 2013 में जमात के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई गई थी। इस फैसले को हाई कोर्ट ने तब बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सीधा असर बांग्लादेश के आगामी चुनावों पर होने वाला है। बांग्लादेश में वर्तमान में अंतरिम सरकार मोहम्मद यूनुस चला रहा है और उस पर राजनीतिक दबाव है।
बांग्लादेश में 2025-26 में कभी भी चुनाव हो सकते हैं। वर्तमान में बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) भी चुनाव की जल्द माँग कर रही है। आवामी लीग को बांग्लादेश में पहले ही बैन किया जा चुका है। ऐसे में BNP और जमात के बीच अब सीधी टक्कर होगी।
ध्यान देने वाली बात है कि जमात-ए-इस्लामी वहीं संगठन है, जिसने 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के समय अपने लोगों की जगह पाकिस्तान का समर्थन किया था। इसके रजाकारों ने पाकिस्तानी फ़ौज के साथ मिलकर बांग्लादेश के लोगों और हिन्दुओं की हत्याओं, रेप और नरसंहार में हिस्सा लिया था।
जमात-ए-इस्लामी पर 1971 के बाद भी बैन लगा दिया गया था। इसी इस्लामी कट्टरपंथी संगठन ने जुलाई, 2024 के बाद शेख हसीना की सत्ता के खिलाफ खूब हिंसा की थी तख्तापलट में अहम रोल निभाया था।
बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ के समर्थन में उठाया गया यह कोई पहला कदम नहीं है। वर्तमान में बांग्लादेश का सुप्रीम कोर्ट, यूनुस सरकार और बाकी अंग लगातार इसी दिशा में काम कर रहे हैं। हाल ही में बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने जमात के एक ऐसे आतंकी को रिहा किया था, जिसे 1200 से अधिक लोगों की हत्याओं के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी।
उस पर रेप, नरसंहार और अपहरण जैसे गंभीर दोष सिद्ध हो चुके थे। इस रिहा होने वाले नेता का नाम ATM अजहरुल इस्लाम है। यह कोई अकेला ऐसा मामला नहीं है। बांग्लादेश में जबसे यूनुस की सरकार आई है, तब से जमात के नेताओं के साथ ही आतंकियों तक को छोड़ा जा रहा है।
बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की सत्ता आने के बाद जसीमुद्दीन रहमानी को छोड़ा गया था। वह इस्लामी आतंकी संगठन अंसारुल बांग्ला का मुखिया है। उसने रिहा होने के कुछ ही घंटे के भीतर भारत के खिलाफ जहर उगला था। यहाँ तक कहा गया है कि बांग्लादेश में कई आतंकी तो बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के ही छोड़ दिए जा रहे हैं।
इस्लामी कट्टरपंथ की दिशा में कदम बढ़ाने वाली यूनुस सरकार सिर्फ आतंकियों को ही नहीं छोड़ रही है, वह बांग्लादेश के संविधान को बदलने की तरफ भी कदम बढ़ा चुकी है। बांग्लादेश में संविधान सुधार के नाम पर बनाए गए एक आयोग ने यह सिफारिश की थीं कि संविधान में से सेक्युलर शब्द को हटा दिया जाए।
इसके अलावा ‘राष्ट्रवाद’ शब्द हटाने की बात भी कही गई थी। यह बदलाव बांग्लादेश को इस्लामी कट्टरपंथ की तरफ धकेलने का एक और कदम था। बांग्लादेश में पूरी तरह से यह अभियान चल रहा है कि उसकी 1971 के बाद बनी बंगाली राष्ट्रवाद की छवि मिटा कर पाकिस्तान जैसे एक इस्लामी मुल्क की छवि गढ़ी जाए।
इसी के चलते बांग्लादेश अपने यहाँ हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचारों को लेकर एकदम गंभीर नहीं दिखता। मोहम्मद यूनुस तक हिन्दुओं के खिलाफ हुई हिंसा को झुठलाने का प्रयास करते हैं। हाल ही में हिन्दुओं खिलाफ हुई हिंसा की एक घटना को मोहम्मद यूनुस ने झूठा करार देने का प्रयास किया था।
यह खबर ऑपइंडिया ने प्रकाशित की थी। लेकिन इसे झूठा साबित करने की कोशिश में मोहम्मद यूनुस को मुँह की खानी पड़ी और उसे अपना ट्वीट डिलीट करना पड़ा। इससे पहले भी यूनुस हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा को ‘राजनीतिक हिंसा’ बताता रहा है। बांग्लादेश में हो रही यह सभी कोशिशें उसे इस्लामी मुल्क बनने की तरफ ले जा रही हैं।
bangladesh supreme court lifts ban from jamat e islami to fight election
असम के जोरहाट में शनिवार (31 मई 2025) को महिला पत्रकारों, पुलिसकर्मियों के साथ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने बदतमीजी और मारपीट की, जिससे वह घायल हो गईं। इस दौरान महिला पत्रकार के कपड़े भी फट गए, वहीं मारपीट के दौरान उनका हाथ टूट गया। यह घटना जोरहाट के रवरिया हवाई अड्डे पर हुई, जहाँ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता अपने नए प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई का स्वागत करने के लिए जमा हुए थे।
जानकारी के मुताबिक, जोरहाट कॉन्ग्रेस ने नवनियुक्त प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के स्वागत समारोह को कवर करने के लिए मीडिया को आमंत्रित किया था। इसके लिए कई पत्रकार रवरिया हवाई अड्डे पर पहुँचे थे। लेकिन जब गौरव गोगोई हवाई अड्डे पर उतरे, तो कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने वहाँ भारी हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने न केवल पत्रकारों को, बल्कि वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों को भी धक्का-मुक्की की।
बता दें कि लोकसभा में कॉन्ग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे हैं। उन्हें भूपेन कुमार बोरा की जगह असम प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया गया है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद वो पहली बार अपनी संसदीय सीट जोरहाट के दौरे पर पहुँचे थे। इस दौरान ये सारा घटनाक्रम हुआ।
गौरव गोगोई के स्वागत के दौरान मारपीट और बदतमीजी की शिकार हुई असमिया पत्रकार प्रियंका सेनापति ने पूरा घटनाक्रम साझा किया। वो असम के एनडी24 न्यूज चैनल की पत्रकार हैं। उन्होंने गौरव गोगोई को निशाने पर लेते हुए फेसबुक पर लिखा, “आज मुझे कुछ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं का व्यवहार देखकर शर्मिंदगी महसूस हुई। आज का माहौल देखकर यह साफ हो गया कि अगर आप सत्ता में आए, तो क्या करेंगे। गौरव गोगोई के असम कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने की खुशी सभी को है, यह समझ में आता है। लेकिन रवरिया एयरपोर्ट पर उनके आने के बाद कुछ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिस तरह महिला पत्रकारों के साथ बदतमीजी की, वह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।”
प्रियंका ने आगे लिखा, “कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने मेरे कपड़े तक फाड़ दिए। मैं ऐसी स्थिति कभी नहीं चाहती। कार्यकर्ताओं की धक्का-मुक्की की वजह से लोग गिर गए। अगर आप नहीं चाहते कि खबरें कवर की जाएँ, तो कृपया आगे से पत्रकारों को न बुलाएँ। हम आपसे इससे ज्यादा की उम्मीद नहीं कर सकते।”
प्रियंका ने अपनी घायल हाथ की तस्वीर भी फेसबुक पर पोस्ट की, जिसमें उनकी उँगलियों पर प्लास्टर बँधा हुआ दिख रहा है। उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि गौरव गोगोई के हवाई अड्डे से बाहर आने के बाद कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने कैसे हंगामा मचाया और वहाँ मौजूद लोगों को धक्का-मुक्की की।
घटना के बाद सामने आए एक वीडियो में गौरव गोगोई को अपने समर्थकों की हरकत के लिए माफी माँगते हुए सुना जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी को इतनी बड़ी भीड़ की उम्मीद नहीं थी।
प्रियंका ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नहीं है और वे केवल कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की बदतमीजी के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रही हैं।
घटना के वीडियो में दिख रहा है कि सुरक्षाकर्मी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को नियंत्रित करने की कोशिश में जूझ रहे थे। एक वीडियो में एक महिला की आवाज सुनाई दे रही है, जो कार्यकर्ताओं की बदतमीजी की शिकायत कर रही है।
Absolute shameful scenes from Jorhat yesterday as Congress workers, in their frenzy to welcome Gaurav Gogoi, turned the town into a lawless arena. A woman journalist was allegedly manhandled, her clothes torn, and she was left injured by the unruly mob — all for doing her duty.… pic.twitter.com/XjN1PLp8pM
— Ron Bikash Gaurav (@RonBikashGaurav) June 1, 2025
विडंबना यह रही कि असम कॉन्ग्रेस ने खुद ही अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर वह तस्वीरें साझा कीं, जिनसे यह खुलासा हुआ कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपने नए अध्यक्ष गौरव गोगोई का स्वागत करते हुए एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मचा दी। इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि समर्थक गोगोई के पीछे भीड़ में धक्का-मुक्की करते हुए सभी को पीछे छोड़ते जा रहे हैं।
Snapshots : Jorhat rises to welcome Assam PCC President @GauravGogoiAsm , a powerful show of support as a new chapter begins for Congress in Assam. pic.twitter.com/0KFyxsGURW
एक तस्वीर में एक महिला पुलिसकर्मी गौरव गोगोई के ठीक पीछे खड़ी दिख रही है, जिसके चेहरे पर असहजता साफ झलक रही है, क्योंकि कार्यकर्ता उसे पीछे से धक्का दे रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के खिलाफ टिप्पणी करने वाली शर्मिष्ठा पनोली को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल के एक मुस्लिम संगठन ने करवाई है। शर्मिष्ठा पनोली पर इस्लाम के खिलाफ बोलने का आरोप कथित तौर पर लगाया गया है। इस बीच शर्मिष्ठा की मदद को एक हिन्दू संगठन आगे आया है।
श्री राम स्वाभिमान परिषद नाम के इस हिंदू संगठन ने 22 वर्षीय इन्फ्लुएंसर का समर्थन किया है। मीडिया से बात करते हुए इस संगठन के सचिव सूरज कुमार सिंह ने कहा कि जिस मुस्लिम संगठन ने शर्मिष्ठा के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है, उसका एक कार्यालय पाकिस्तान के कराची शहर में है।
सिंह ने दावा किया है कि स्काई फाउंडेशन नामक संगठन के कुछ सदस्यों ने कोलकाता में शर्मिष्ठा के खिलाफ FIR दर्ज कराई और उनकी गिरफ्तारी की माँग की थी। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन के सदस्यों ने यह भी धमकी दी थी कि अगर पुलिस शर्मिष्ठा के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है तो वे कानून अपने हाथ में ले लेंगे और उन्हें मार डालेंगे।
Kolkata, West Bengal: The Shri Ram Swabhiman Parishad has come out in support of Sharmistha Panoli, who was arrested for allegedly hurting religious sentiments through her social media posts related to Operation Sindoor
सूरज सिंह ने एक वीडियो दिखा कर यह भी दावा किया है कि स्काई फाउंडेशन के लोगों ने शर्मिष्ठा के गिरफ्तार होने के बाद कोर्ट में जश्न मनाया। उन्होंने शर्मिष्ठा के साथ कुछ होने का जिम्मेदार ममता सरकार को करार दिया है।
गौरतलब है कि शर्मिष्ठा के खिलाफ लगातार इस्लामी कट्टरपंथी सोशल मीडिया पर अभियान चला रहे थे। इसके बाद कोलकाता में दर्ज एक FIR के चलते उन्हें गुरुग्राम से 30 मई, 2025 को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। शर्मिष्ठा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
शर्मिष्ठा को गिरफ्तार किए जाने की आलोचना आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण और कॉन्ग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी की है। गौरतलब है कि शर्मिष्ठा ने अपने वीडियो के बाद माफ़ी भी माँग ली थी, इसके बाद भी पश्चिम बंगाल पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर ले गई।
दरभंगा की डिप्टी मेयर और बिहार कॉग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा की उपाध्यक्ष नाजिया हसन के विरोध में जमकर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान उनके कार्यालय का घेराव भी किया गया। दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता ने आरएसएस और पाकिस्तान की तुलना करते हुए दोनों से नफरत करने की बात कही थी। इसके बाद उनका विरोध बढ़ गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दरभंगा की डिप्टी मेयर नाजिया हसन ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट में लिखा, “हम लोग हिंदू भाई से उतनी ही स्नेह रखते हैं जितनी मुस्लिम भाई से, हम लोग पाकिस्तान से उतनी ही नफरत करते हैं जितनी आरएसएस से क्योंकि दोनों ‘टू नेशन थ्योरी’ के समर्थक रहे हैं।” इस बयान के बाद लोगों में गुस्सा भड़क गया और उन्होंने इसका जोरदार विरोध शुरू कर दिया।
पोस्ट के वायरल होने के बाद शनिवार (31 मई 2025) को दरभंगा नगर निगम कार्यालय के बाहर बीजेपी और आरएसएस समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने नाजिया हसन के खिलाफ नारेबाजी की और उनका पुतला जलाया। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम ऑफिस में जबरन घुसने की कोशिश की, जहाँ उस वक्त नाजिया अपने चेंबर में मौजूद थीं। दरवाजा बंद होने की वजह से प्रदर्शनकारी अंदर नहीं घुस पाए, लेकिन उन्होंने ऑफिस के बाहर लगी नाजिया की नेमप्लेट को उखाड़कर तोड़ दिया और तोड़फोड़ की।
Darbhanga, Bihar: BJP workers and Hindu organizations protested against a controversial post by Deputy Mayor Nazia Hasan, who compared the RSS to Pakistan on social media pic.twitter.com/oGSbNV9P8A
मामला बिगड़ता देख कई थानों की पुलिस मौके पर पहुँची। सदर एसडीपीओ अमित कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने हालात को काबू में किया और दोनों पक्षों से बातचीत की। प्रशासन के दबाव में नाजिया हसन ने अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँग ली। हालाँकि, मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें प्रशासन के दबाव में माफी माँगनी पड़ी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अगर किसी को उनके बयान से आपत्ति थी, तो उसे कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए था। साथ ही, उन्होंने प्रशासन पर समय पर मदद न देने का भी आरोप लगाया।
दूसरी तरफ, बीजेपी और आरएसएस कार्यकर्ताओं ने नाजिया हसन पर पाकिस्तान और ISI से संबंध होने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने माँग की कि नाजिया को डिप्टी मेयर के पद से हटाया जाए और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाए। उनका कहना है कि सिर्फ माफी माँगने से मामला खत्म नहीं होगा और अगर प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो उनका आंदोलन जारी रहेगा।
सदर एसडीपीओ अमित कुमार ने बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। अगर कोई लिखित शिकायत देता है, तो जाँच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन सतर्क है और मामले की बारीकी से निगरानी कर रहा है।
बता दें कि दरभंगा की मेयर अंजुम आरा भी विवादों में रही हैं। उन्होंने होली और नमाज को लेकर विवादित बयान दिया था, जिसके बाद उन्हें माफी माँगनी पड़ी थी।