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काफिरों को मार कर ‘गुनाह’ धोना चाहता था आतंकी शाहरुख सैफी, ‘सच्चा मुसलमान’ बनने को केरल की ट्रेन में लगाई आग: NIA ने कोर्ट में बताया, 3 लोगों की घटना में हुई थी मौत

केरल में एक ट्रेन में आग लगाने वाला आतंकी शाहरुख सैफी काफिरों को मारने के मिशन पर था। वह मानता था कि काफिरों को मारने से उसके गुनाह खत्म हो जाएँगे। यह जानकारी राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने कोर्ट को दी है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, NIA ने सैफी के विषय में यह बातें चार्जशीट में कोर्ट को बताई हैं। NIA ने यह सारी जानकारियाँ कोर्ट को तब दीं, जब उसने अपनी जमानत के लिए याचिका डाली। हालाँकि, कोर्ट ने सैफी की याचिका को तुरंत खारिज कर दिया।

सैफी ने अपनी ज़मानत याचिका में तर्क दिया था कि उसके मामले की सुनवाई में देर हो रही है, इसलिए उसे ज़मानत मिलनी चाहिए। कोर्ट ने उसकी इस दलील को मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सैफी की ज़मानत याचिका को खारिज करते हुए पाया कि सैफी ने मुकदमे में देरी के लिए बार-बार मानसिक बीमारी का झूठा दावा किया था।

कोर्ट ने कहा कि अगर मुकदमे में कोई देरी हुई है, तो इसका दोष सैफी को जाता है, किसी और को नहीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर सैफी सहयोग करता है तो मुकदमे को तेज़ी से चलाया जा सकता है।

‘सच्चा मुसलमान’ बनना चाहता था सैफी

NIA ने कोर्ट में बताया कि दिल्ली का रहने वाला सैफी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से परेशान था और ‘एक सच्चा मुसलमान’ बनना चाहता था। NIA ने बताया था कि इसी चाहत में उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कट्टरपंथी इस्लामी मौलानाओं द्वारा फैलाए गए जिहाद के बारे में जानना शुरू किया।

NIA ने कहा, “उसने यह मान लिया था कि अपने गुनाहों से मुक्ति पाने का सबसे आसान तरीका ‘काफिरों’ को मारना है, और इसी सोच के साथ उसने आतंकवाद का रास्ता चुनने का फैसला किया।”

एजेंसी ने आगे बताया कि सैफी ने ऐसे जगह पर हमला करने की सोची जहाँ उसकी पहचान आसानी से न हो। इसलिए, वह 31 मार्च 2023 को दिल्ली से केरल के लिए ट्रेन में सवार हुआ। 2 अप्रैल 2023 को सैफी शोरानूर रेलवे स्टेशन पहुँचा, जहाँ से उसने एक पेट्रोल पंप से बोतल में पेट्रोल और स्टेशन के सामने एक दुकान से लाइटर खरीदा।

NIA ने बताया कि पेट्रोल और लाइटर को अपने काले बैग में छिपाकर, सैफी बिना टिकट के ट्रेन में चढ़ा और बाद में आग लगाई। इस आतंकी हमले में 9 यात्री बुरी तरह झुलस गए थे। 3 लोगों की जान चली गई थी।

यह भी सामने आया था कि सैफी कट्टरपंथी मौलाना जाकिर नाइक और पाकिस्तान के मौलवियों जैसे डॉ. इसरार अहमद, तारिक जमील, मुफ्ती तारिक मसूद और तैमूर अहमद की रीरें देखता था। शाहरुख सैफी पर UAPA समेत कई धाराएँ लगाई गई हैं।

जब माता लक्ष्मी हुईं भगवान विष्णु से नाराज, ढूँढते हुए धरती पर अवतरित हुए त्रिलोकीनाथ: जानिए तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़ी वो हर खास बात, जिसका शिलालेखों तक पर वर्णन

दक्षिण भारत के राज्य आंध्र प्रदेश का तिरुपति बालाजी मंदिर रहस्यमयी माना जाता है। यहाँ भगवान विष्णु की मंदिर प्रकट हुई थी। इसी कारण मंदिर को श्री वेंक्टेश्वर मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर तिरुमला की सप्तगिरी (सात पहाड़ियों) में एक वेंकटाद्रि पर स्थित है। मंदिर विष्णु के कलयुग अवतार को समर्पित है, जिन्हें गोविंदा या बालाजी के नाम से भी जाना जाता है। इसे संसार के सबसे अधिक दान प्राप्त करने वाले मंदिरों में से एक है और हर दिन लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

तिरुपति बालाजी मंदिर
तिरुपति बालाजी मंदिर में स्थापित मूर्ति (साभार : TOI)

मंदिर का इतिहास

तिरुपति मंदिर का इतिहास हज़ारों वर्षों पुराना माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस स्थान का उल्लेख वराह पुराण, भागवत पुराण और पद्म पुराण जैसे कई हिंदू ग्रंथों में मिलता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, जब ऋषि भृगु ने विष्णु जी के छाती पर लात रखी थी तब माता लक्ष्मी चाहती थीं कि प्रभु उन्हें सजा दें, मगर भगवान ने ऐसा नहीं किया। इसी बात से नाराज होकर माता वैकुंठ छो़ड़कर धरती पर आ गईं और उनके जाने के बाद उन्हें ढूँढते हुए धरती पर आ गए। इस दौरान उन्होंने तिरुमला पर्वत का वेंकटेश्वर के नाम से निवास किया। बाद में वही स्थान तिरुपति मंदिर रूप में प्रसिद्ध हुआ।

तिरुपति बालाजी मंदिर
ptमंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति (बाएँ), मंदिर की कलाकृति (दाएँ) ( साभार : The United Indian)

ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो इस मंदिर का निर्माण 300 ईसवी में शुरू हुआ। तमिल शिलालेखों और ताम्रपत्रों में इस मंदिर का वर्णन है। दक्षिण भारत के चोल, पल्लव, पांड्य और विजयनगर साम्राज्य के शासकों ने इस मंदिर के विकास और संरक्षण में बड़ी भूमिका निभाई थी।

विशेष रूप से 1517 में विजयनगर सम्राट कृष्णदेव राय ने जब इस मंदिर का दौरा किया तो इसकी भीतरी छत पर सोने का पानी चढ़ाने का आदेश दिया। उनके संरक्षण में मंदिर का बड़े पैमाने में विस्तार हुआ। इसके अलावा मरठा, मैसूर और ब्रिटिश काल में भी मंदिर में खूब चढ़ावा चढ़ा।

मंदिर की संरचना

तिरुपति मंदिर द्रविड़ शैली का एक अनोखा उदाहरण है। मंदिर का मुख्य हिस्सा ‘गर्भगृह’ है जहाँ भगवान वेंकटेश्वर की आठ फीट ऊँची मूर्ति है। यह मूर्ति काले पत्थर की है। माना जाता है कि मूर्ति बनाई नहीं गई बल्कि प्रकट हुई है। भगवान की मूर्ति की खास बात यह है कि उनकी आँखों में चमक है इसलिए उन्हें हमेशा आधा ढका जाता है ताकि भक्तों पर उनका सीधा प्रभाव न पड़े।

मुख्य मंदिर परिसर में एक भव्य गोपुरम (मुख्य द्वार) है जिसपर सोने की परत है। इस गोपुरम की ऊँचाई लगभग 50 फीट है और इसकी कलाकृतियाँ ही मंदिर की प्राचीनता का प्रतीक हैं।

तिरुपति बालाजी मंदिर
तिरुपति मंदिर में पूजा-अर्चना करते पुजारी (साभार : Jansatta)

इसके साथ ही मंदिर परिसर में कई महत्वपूर्ण स्थल और भवन हैं, जिनमें रणग मंडपम जो कि उत्सव और धार्मिक आयोजनो के लिए प्रयोग किया जाता है, स्वर्ण द्वार – जिसे केवल विशेष अवसरों पर ही खोला जाता है और ध्वजस्तंभ – यह मंदिर की धार्मिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है।

इसके अलावा मंदिर में एक बड़ा रसोईघर भी है जहाँ विश्वप्रसिद्ध ‘तिरुपति लड्डू’ प्रसाद तैयार किया जाता है। इस लड्डू को GI टैग प्राप्त है और इसे प्रसाद के रूप में भक्तों को वितरित किया जाता है।

कैसे पहुँचें ?

तिरुपति मंदिर तक पहुँचने के लिए करीबी हवाई अड्डा तिरुपति इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Renigunta Airport) है। जो तिरुमला से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। यहाँ से चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली जैसे शहरों के लिए सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं।

तिरुपित बालाजी मंदिर
तिरुपति बालजी मेंदिर में भक्तों का जनसैलाब (साभार : Pilgrimage)

तिरुपति रेलवे स्टेशन दक्षिण भारत का एक प्रमुख रेलवे जंक्शन है जो चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, विजयवाड़ा और अन्य बड़े शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है। स्टेशन से मंदिर तक की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है।

सिंधु जल समझौता हुआ रद्द तो ब्रह्मपुत्र पर प्रलाप कर रहे पाकिस्तानी, CM हिमंता ने लेकिन समझा दिया हिसाब: बताया – भारत में बढ़ती है नदी, चीन के पानी रोकने का नहीं होगा कोई असर

सिंधु जल समझौता स्थगित होने के बाद पाकिस्तान भारत के खिलाफ अलग-अलग पैंतरे चल रहा है। उसने हाल ही में ब्रह्मपुत्र नदी पर प्रलाप चालू किया है। इस बार उसने यह डर फैलाने की कोशिश की है कि अगर चीन ब्रह्मपुत्र का पानी रोक दे तो क्या होगा? उसके इस प्रोपेगेंडा का जवाब असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दिया है।

‘ब्रह्मपुत्र’ भारत की अपनी नदी, किसी पर निर्भर नहीं

मुख्यमंत्री हिमंता ने साफ किया कि ब्रह्मपुत्र नदी चीन से भले ही आती हो, लेकिन इसमें ज्यादातर पानी भारत कि सहायक नदियाँ ही लाती हैं। चीन ब्रह्मपुत्र के कुल पानी में सिर्फ 30-35% का योगदान देता है, और वह भी ज़्यादातर पिघलते ग्लेशियरों से आता है। बाकी 65-70% पानी तो भारत के भीतर नदियाँ ही लाती हैं।

उन्होंने बताया कि बाकी 65-70% पानी तो भारत के भीतर ही बनता है, खासकर अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड और मेघालय में होने वाली भारी मानसूनी बारिश से। इसके अलावा, सुबनसिरी, लोहित, कामेंग, मानस, धनसिरी, जिया-भरली, कोपिली जैसी कई बड़ी सहायक नदियाँ भी हैं जो ब्रह्मपुत्र में पानी डालती हैं।

CM हिमंता बिस्वा ने कहा कि मेघालय की खासी, गारो और जयंतिया पहाड़ियों से भी कृष्णाई, दिगारू, कुलसी जैसी नदियों के ज़रिए ब्रह्मपुत्र में खूब पानी आता है और भारत-चीन सीमा पर (तूतिंग में) ब्रह्मपुत्र का प्रवाह लगभग 2,000-3,000 घन मीटर/सेकंड होता है।

उन्होने कहा कि असम के मैदानी इलाकों में (जैसे गुवाहाटी में), मानसून के दौरान यह प्रवाह बढ़कर 15,000-20,000 घन मीटर/सेकंड हो जाता है। इसका मतलब है कि ब्रह्मपुत्र भारत में आने के बाद और भी बड़ी और शक्तिशाली हो जाती है। यह एक भारतीय, बारिश से पोषित नदी प्रणाली है, जो किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं है।

पाकिस्तान को जाननी चाहिए यह सच्चाई

मुख्यमंत्री बिस्वा ने एक और अहम बात बताई। उन्होंने कहा कि अगर चीन कभी ब्रह्मपुत्र के पानी को कम भी कर दे (जो अभी तक किसी आधिकारिक मंच पर न तो कहा गया है और न ही इसका कोई कोई संकेत दिया गया है), तो यह भारत के लिए फायदेमंद ही होगा।

उन्होंने कहा कि हर साल असम में आने वाली भीषण बाढ़ लाखों लोगों को विस्थापित करती है और भारी तबाही मचाती है। पाकिस्तान, जिसने 74 सालों तक सिंधु जल संधि से बहुत फ़ायदा उठाया है, वह अब घबरा रहा है क्योंकि भारत अपने जल अधिकारों पर अपने हिसाब से फ़ैसले ले रहा है। मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि ब्रह्मपुत्र किसी एक देश पर आधारित नहीं है। यह भारत के भूगोल, मानसून और हमारी सभ्यता की ताकत से पोषित है।

पाकिस्तान की नई कहानी का करारा जवाब

भारतीय मीडिया के मुताबिक, भारत द्वारा सिंधु जल संधि को लेकर दिए गए स्पष्टीकरण के बाद से पाकिस्तान एक नई घबराहट फैलाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के एक पत्रकार ने अमेरिकी पत्रिका ‘द डिप्लोमैट‘ में एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें दावा किया गया कि अगर भारत सिंधु नदी का पानी रोकेगा, तो चीन ब्रह्मपुत्र का पानी रोक देगा। इस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

भारत ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान ने पुलवामा आतंकी हमले का कोई जिक्र नहीं किया, जिसमें 26 निर्दोष हिंदुओं की जान चली गई थी। यह हमला ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ ने किया था, जिसे पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी माना जाता है।

भारत ने साफ कर दिया कि चीन कोई ऐसा दोस्त नहीं है जो पाकिस्तान के कहने पर भारत से झगड़ा करेगा। चीन अपने आर्थिक हितों को पहले रखता है और पाकिस्तान को केवल कर्ज और परियोजनाओं के लिए देखता है। भारत पहले ही ब्रह्मपुत्र पर चीन की गतिविधियों पर नज़र रख रहा है और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने में सक्षम है।

भारतीय मीडिया ने पाकिस्तान की खराब आर्थिक स्थिति का भी जिक्र किया है, जो IMF के कर्ज पर निर्भर है। ऐसे में पाकिस्तान द्वारा भारत को युद्ध की धमकी देना बेकार लगता है। भारत ने यह भी बताया कि सिंधु जल संधि कोई बंधन नहीं था, बल्कि भारत की एक अच्छी पहल थी। यदि पाकिस्तान की ओर से आतंकवादी हमले जारी रहते हैं, तो भारत अपने जल अधिकारों का प्रयोग कर सकता है और ज़रूरत पड़ने पर पानी पूरी तरह से रोक सकता है। यह भारत का अपना अधिकार है।

कुल मिलाकर, भारत ने पाकिस्तान के इन झूठे प्रचारों का तथ्यों और मजबूती से जवाब दिया है, यह साफ करते हुए कि ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के कार्यों का भारत पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा और भारत अपने देश के हितों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार है।

राम मंदिर का दर्शन करने आए एलन मस्क के पिता सनातन की प्राचीनता से चकित, कहा- दुनिया करे शिव की अराधना तो सब ठीक हो जाएगा: भारत को बताया ‘विश्व शक्ति’, PM मोदी को ‘बेस्ट लीडर’

अमेरिकी अरबपति कारोबारी और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क के पिता एरोल मस्क भारत दौरे पर आए हैं। एरोल मस्क अयोध्या स्थित राम मंदिर में दर्शन करने भी जाएँगे। उससे पहल उन्होंने पूरे विश्व से शिव की आराधना करने को कहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी प्रशंसा की है।

एरोल मस्क ने IANS से कहा, “मुझे लगता है कि अगर पूरी दुनिया शिव की राह पर चले तो सब ठीक होगा। मैं कोई एक्सपर्ट नहीं हूँ लेकिन यह धर्म (हिन्दू) इतना पुराना है कि मैं चकित हो जाता हूँ। इससे बस यही पता चलता है कि हम कितना कम जानते हैं।”

उन्होंने इस दौरान अपने बेटे की कंपनी टेस्ला और भारत के विषय में भी बात की। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी को भारत के हितों का ध्यान रखना है और एलन को टेस्ला के हितों का ध्यान रखना है। इसलिए, वे दोनों मिलकर कुछ ऐसा करेंगे जो टेस्ला और भारत दोनों के भले के लिए हो। मैं ये सारी बातें अपने स्तर पर बोल रहा हूँ।”

एरोल मस्क ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा भी की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी वर्तमान में विश्व में सबसे अच्छे नेताओं में से एक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी को देखना काफी सुखद है।

एरोल मस्क ने इस दौरान ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी बात की। मस्क ने भारत का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा से इस मामले में भारत के पक्ष में रहा हूँ… आप यहाँ के लोगों का जीवन कठिन नहीं बना सकते।” उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तानी परेशानियाँ पैदा कर रहा है, तो इस पर एक्शन लिया जाना चाहिए।

एरोल मस्क ने भारत को वैश्विक नेता बताया और कहा कि यह चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इसके बावजूद विनम्र है। एरोल मस्क वर्तमान में भारत की यात्रा पर है। एरोल मस्क राम मंदिर भी दर्शन के लिए जाएँगे। उन्होंने अपन बेटे एलन मस्क को भी भारत आने की सलाह दी है।

बटला हाउस में चलेगा UP सरकार का बुलडोजर? सुप्रीम कोर्ट का दखल देने से इनकार, सुल्ताना शाहीन की याचिका पर अब जुलाई में होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के बटला हाउस में अवैध निर्माण की कार्रवाई में दखल देने से इंकार कर दिया है। याचिकाकर्ताओं को सक्षम अधिकारियों से संपर्क करने के लिए कहा है। उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में अवैध निर्माणों को तोड़ने के लिए नोटिस जारी कर रखा है।

इसके खिलाफ सुल्ताना शाहीन ने स्टे के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उसने बटला हाउस के 40 लोगों के निर्माण पर कार्रवाई रोकने की अपील की थी। लेकिन 2 जून 2025 को जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने इस पर सुनवाई करते हुए फौरी रहात से इंकार कर दिया। अब मामले की सुनवाई की जुलाई में होगी।

गौरतलब है कि दिल्ली के जिस इलाके में बटला हाउस आता है वहाँ उसी इलाके के जामिया नगर, ओखला स्थित मुरादी रोड और खिजर बाबा कॉलोनी में 115 अवैध निर्माण पर कार्रवाई को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया।

शाहीन का कहना है कि यहाँ पर रहने वाले लोग अपनी संपत्ति के कई वर्षों से मालिक हैं। अब इस संपत्ति को पीएम-उदय योजना के दायरे से बाहर करार देकर ध्वस्त करने का नोटिस दिया जा रहा है।

बता दें कि पीएम-उदय एक ऐसी योजना है जिसका उद्देश्य दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों की सूची के निवासियों को संपत्ति के अधिकार प्रदान करना या मान्यता देना है।

7 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को बटला हाउस क्षेत्र में अवैध संपत्तियों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद 27 मई को शाहीन की संपत्ति पर 15 दिन में ध्वस्तीकरण का नोटिस चिपकाया गया था।

सिंचाई विभाग का दावा है कि बटला हाउसक की ये संपत्तियाँ सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण हैं। इस दावे को चुनौती देते हुए शाहीन ने कहा है कि संपत्ति के मालिकों को उनका पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। ऐसे में यह कार्रवाई मनमानी और गलत है।

TOI ने सोफिया कुरैशी-व्योमिका सिंह पर ’52 बीघा’ में छापी फेक न्यूज, माफीनामा ‘चुन्नू’ सा: भाजपा के चेहरा बनाने का किया था दावा, पार्टी ने पकड़ लिया था झूठ

टाइम्स ऑफ़ इंडिया (TOI) ने भाजपा से जुड़ी एक झूठी खबर प्रकाशित करने के मामले में माफी माँग ली है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने एक खबर में दावा किया था कि भाजपा कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को अपने चुनावी अभियान का चेहरा बनाने वाली है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने यह माफी सोमवार (2 जून, 2025) को प्रकाशित की। TOI ने स्पष्ट किया कि उसकी रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से गलत थी। TOI की तरफ से इस खबर पर खेद व्यक्त किया गया। अखबार ने भाजपा से जुड़ी झूठी खबर छापने के लिए माफ़ी भी माँगी है।

TOI ने लिखा, “TOI के लखनऊ और चेन्नई के 1 जून के संस्करणों में एक रिपोर्ट छपी थी, जिसका शीर्षक था ‘कर्नल कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका भाजपा के प्रचार अभियान का चेहरा बनने वाले हैं’ , फिर हमें पता चला कि भाजपा की ऐसी कोई योजना नहीं है।”

आगे TOI ने बताया, “हाँलाकि यह रिपोर्ट भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी के साथ बातचीत पर आधारित थी, लेकिन हमें पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से इसकी जाँच करनी चाहिए थी। हम इस गलती के लिए माफी माँगते हैं।”

गौरतलब है कि TOI ने अपनी रिपोर्ट में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया था। इससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई थी। दरअसल सिद्दीकी ने कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को महिलाओं, विशेषकर मुस्लिम महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया था।

वहीं TOI रिपोर्ट में इसे इस तरह दिखाया गया कि जैसे भाजपा ऑपरेशन सिंदूर के विषय में दुनिया को बताने वाली इन दोनों महिला अधिकारियों को चुनाव अभियान का चेहरा बनाने जा रही हो। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 9 जून 2025 को मोदी सरकार के 11 साल पूरे होने के मौके पर भाजपा यह अभियान चालू करेगी।

खबर में बताया गया था कि भाजपा यह अभियान महिला सशक्तिकरण को लेकर चलाएगी। खबर प्रकाशित होने के बाद भाजपा ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया था। भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक्स पर इसे फेक न्यूज बताया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा की ऐसी कोई योजना नहीं है।

इससे पहले भाजपा को दैनिक भास्कर की भी ऐसी ही एक झूठी खबर के लिए सफाई देनी पड़ी थी। इस खबर में दावा किया गया था कि पार्टी घर-घर सिंदूर भेजने का अभियान चलाने वाली है। भाजपा ने इस खबर को पूरी तरह बेबुनियाद बताया था और स्पष्ट किया था कि ऐसी कोई योजना नहीं है।

ध्यान देने वाली बात है कि जब इन अखबारों ने भाजपा से जुड़ी यह खबरें बिना कोई तथ्य जाँचे छापीं, तो उन्होंने इसे मुख पन्नों पर जगह दी। उसे एकदम डिटेल में छापा। इसके चलते भाजपा के खिलाफ खूब दुष्प्रचार भी हुआ। भाजपा को इसके चलते सामने आकर खंडन करना पड़ा।

जब भाजपा ने इन अखबारों की इन खबरों को स्पष्ट तौर पर झूठा बता दिया तो इन्होने माफ़ी के तौर पर एक छोटे से कोने में इसके लिए माफी छाप दी, जिस पर शायद ही किसी की नजर पड़े। ऐसे में यह सन्देश जाता है कि अखबार फर्जी खबर को तो खूब प्रचारित करना चाहते हैं लेकिन अपनी गलती स्वीकार करने में वह बचते हैं।

किसी पार्टी के एजेंडे या अभियान को लेकर ऐसी अफवाह या भ्रामकता फैलाना उस पार्टी की छवि पर भी प्रभाव डालता है। ऐसे में इस इस छवि बिगाड़ने के जिम्मेदार अखबारों को छोटा माफीनामा नहीं बल्कि वापस पूरी खबर सही तथ्यों के साथ छापनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हो रहा, तो इसे बेईमानी ही कहा जाएगा।

बंगाल ‘विजय’ को लेकर कोलकाता में BJP का सम्मलेन, अमित शाह ने लिया ‘संकल्प’: कहा- TMC सरकार के जाते ही कार्यकर्ताओं के हत्यारे को देंगे सजा, जमीन में गड़े होंगे तो भी नहीं छोड़ेंगे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में ममता सरकार पर जमकर निशाना साधा। शाह ने राज्य की तृणमुल कॉन्ग्रेस (TMC) पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं की हत्या करने को लेकर घेरा। उन्होंने ममता सरकार को चेतावनी दी कि BJP सरकार आते ही कार्यकर्ताओं की हत्या के अपराधियों को अगर जमीन में भी गाड़ा है, तो भी उन्हें बाहर निकालकर सजा देंगे।

दरअसल, रविवार (01 जून 2025) को केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में ‘विजय संकल्प कार्यकर्ता सम्मेलन’ में शिरकत की। यहाँ बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शाह ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की सरकार में हुए अपराध गिनाए। शाह ने ये भी कहा कि आगामी 2026 बंगाल चुनाव में बीजेपी के वापस आते ही सभी अपराधियों को सजा मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “बंगाल में चुनाव के दौरान और दीदी को विजय मिलने के बाद सैकड़ों बीजेपी के कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार दिया गया। दीदी, कब तक बचाओगी उनको…मेरी बात सुन लो, आपका समय अब समाप्त हो गया है। साल 2026 में बीजेपी की सरकार बनने वाली है।”रहे

अमित शाह ने मुर्शिदाबाद हिंसा और तमाम हिंदू कार्यकर्ताओं की हत्या पर भी बात की। शाह ने ममता सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “TMC की सरकार जाते ही हमारे कार्यकर्ताओं की हत्या के अपराधियों को देखा जाएगा। अगर उन्हें जमीन में भी गाड़ा है, तो भी बाहर निकालकर सजा दिलाएँगे।”

सम्मेलन में शामिल रहे पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी ममता सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाला। सुवेंदु ने कहा कि मुर्शिदाबाद दंगों के दौरान हिंदुओं पर हुए हमलों का बदला लिया जाएगा। पार्टी उन लोगों को सबक सिखाएगी, जिन्होंने हत्या की साजिश रची।

बीजेपी नेता ने आगे कहा, “TMC ने अप्रैल 2025 में धुलियान, शमशेरगंज और जिले के अन्य इलाकों में बड़े पैमाने पर आगजनी और हिंदुओं पर सशस्त्र हमलों के दौरान चुपचाप बैठकर देखा। अगर सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने लोगों की जान बचाई, अगर ऐसा नहीं होता तो हालत बदतर हो सकते थे।”

‘ऑपरेशन पुश-बैक’ से डरे बांग्लादेशी घुसपैठिए, 2000 खुद ही बॉर्डर पर पहुँचे: कहा- जाना चाहते हैं वापस, सुरक्षा एजेंसियों ने 2000+ को पहले ही सीमा पार धकेला

ऑपरेशन सिंदूर के बाद चलाए गए ‘ऑपरेशन पुश-बैक’ का असर सामने आ रहा है। अब तक 2000 अवैध घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजा जा चुका है। इसके अलावा देश के अलग-अलग जगहों पर छुपकर रह रहे लगभग 2000 घुसपैठिए अब सामने से सीमा पर आकर वतन वापसी के लिए तैयार हो गए हैं।

भारत के कई राज्यों ने अवैध घुसपैठियों की पहचान की प्रक्रिया को तेज कर दी है। भारत ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकाल बाहर करने के लिए एक नई तरकीब निकाली है। अनाधिकारिक रूप से इसे ऑपरेशन पुश-बैक का नाम दिया गया है।

अकेले दिल्ली में ही 900 से अधिक अवैध बांग्लादेशियों की पहचान की गई थी। बीते 6 महीने में 700 घुसपैठिय़ों को दिल्ली से खदेड़ा भी जा चुका है। इसी तरह गुजरात से भी सबसे अधिक संख्या में घुसपैठियों पर कार्रवाई हुई है। इसके अलावा महाराष्ट्र, असम, हरियाणा समेत कुछ अन्य राज्यों में भी घुसपैठियों के पहचान की प्रक्रिया तेज हो गई है।

कानूनी प्रक्रिया से डरे घुसपैठिए

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑपरेशन पुश-बैक के अभियान में भारतीय सुरक्षा का साथ बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड्स (BGB) भी दे रहा है है। अवैध रूप से भारत में घुसे बांग्लादेशियों के पकड़े जाने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए अब तक 2000 लोग वतन वापसी के लिए बॉर्डर पर अपनी मर्जी से पहुँचे हैं।

सुरक्षा एजेंसियाँ अब घुसपैठियों की जानकारी बॉयोमेट्रिक के जरिए भी सहेज रही है। इसे राष्ट्रीय डेटाबेस से भी जोड़ा जाएगा। इससे दोबारा देश में घुसपैठियों के घुसने पर जानकारी निकालना और कार्रवाई करना आसान हो जाएगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सीमा पर पहुँचने वाले लोगों में ज्यादातर गरीब या निचले तबके से जुड़े लोग हैं। उन्हें पता है कि पकड़े जाने पर उन्हें जेल जाना पड़ सकता है और कानूनी प्रक्रिया में काफी समय और पैसा खर्च होगा। ऐसे में चुपचाप वापस जाने में ही अपनी भलाई समझी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि ये संख्या इस हफ्ते तक 10 से 20 हजार तक पहुँचेगी। इसके बाद बांग्लादेश सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

ऑपरेशन पुश-बैक क्या है?

‘ऑपरेशन पुश-बैक’ अप्रैल 2025 से चल रहा है। ये भारत सरकार की एक नई रणनीति है, जिसका उद्देश्य अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं से त्वरित रूप से निपटना है। ये वे लोग हैं जो कई वर्षों से अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं। 

इस ऑपरेशन के तहत अब पुलिस को सौंपना, FIR दर्ज करना, अदालत में पेश करना, मुकदमा चलाना और फिर निर्वासन प्रोटोकॉल की लंबी प्रक्रिया से भारत सरकार ने किनारा कर लिया है।

भारत के गृह मंत्रालय (MHA) ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि के लिए 30 दिन की समय सीमा तय की है। इसके बाद भारतीय सुरक्षाबल घुसपैठियों को तुरंत सीमा पार बांग्लादेश की ओर धकेल रहे हैं।

भारत में 2 करोड़ से अधिक बांग्लादेशी

भारत-बांग्लादेश की खुली सीमा से अवैध घुसपैठ लगातार जारी है। इसमें भारत के अंदर बैठे एजेंटों और दलालों की भी उन्हें मदद मिलती है। 2016  के आँकड़ों के अनुसार, भारत में 2 करोड़ से अधिक बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं।

बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने 8 मई, 2025 को भारत को पत्र लिखकर देश में अवैध रूप से प्रवेश कर रहे लोगों को वापस धकेलने पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने 22 मई, 2025 को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि भारत में वर्तमान बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक मौजूद हैं।

देश ने बांग्लादेश से इन लोगों की राष्ट्रीयता की पुष्टि करने का अनुरोध किया है। वर्तमान में 2360 से अधिक ऐसे मामलों की सूची लंबित है। राष्ट्रीयता की पुष्टि की प्रक्रिया कई मामलों में 2020 से लंबित है।

जिस साकिब नाचन के ठिकानों से मिले थे 44 ड्रोन, उसके घर पर ATS ने मारा छापा: ठाणे के गाँव को बना दिया था ‘अल शाम’, ISIS का सरगना बन दिलाई थी ‘बैयत’ की कसम

महाराष्ट्र के आतंकवादी निरोधी दस्ते (ATS) ने ठाणे के पडघा गाँव में छापेमारी की है। यह छापेमारी आतंकी साकिब नाचन के ठिकानों पर हुई है। ATS की यह छापेमारी आतंक से जुड़े एक मामले में हुई है। साकिब नाचन के कई ठिकानों की पुलिस और ATS तलाशी ले रही है।

ATS और महाराष्ट्र पुलिस की यह कार्रवाई सोमवार (2 जून, 2025) को की गई है। नाचन के घर समेत कई ठिकानों पर जाँच की गई है। आतंक से जुड़े कुछ और लोगों पर ATS यह तलाशी ले रही है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया है कि उन्हें कुछ सूचनाएँ मिली थीं, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

साकिब नाचन के ऊपर पहले छापेमारी में ड्रोन मिले थे। सुरक्षा एजेंसियों को 44 ड्रोन मिले थे। यह नई छापेमारी भी ऐसे समय में सामने आई है, जब रूस के भीतर यूक्रेन ने ऐसे ही ड्रोन से हमला किया है।

कौन है साकिब नाचन ?

गौरतलब है कि जिस साकिब नाचन के ऊपर यह कार्रवाई चल रही है, उस पर NIA के छापे भी 2023 में पड़ चुके हैं। उसे इस दौरान गिरफ्तार भी किया गया था। 63 वर्षीय साकिब मूल रूप से मुंबई के ठाणे जिले के बोरीवली का रहने वाला है। नाचन 3 बच्चों का अब्बा है, जिसमें 2 बेटे और एक बेटी शामिल हैं।

साकिब प्रतिबंधित आतंकी संगठन SIMI (सिमी) का सचिव भी रह चुका है। साकिब का कनेक्शन भगोड़े आतंकी जाकिर नाइक से भी है। वह युवाओं को जिहाद के लिए उकसाता था और खलीफा का राज लाने के लिए ‘बैयत’ (कसम) दिलाता था।

उस पर आतंकवाद से जुड़े दर्जनों केस दर्ज हैं, जिसमें से 2 में उसे अदालत से भी सजा मिल चुकी है। साकिब को साल 1997 में भारत में आतंकी वारदातों की साजिश रचने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराया गया था। तब साकिब का खालिस्तानी आतंकियों से भी कनेक्शन सामने आया था।

साकिब को मुंबई में साल 2002-03 के दौरान हुए 3 बम धमाकों में पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर आरोपित बनाया था। एक दर्जन लोगों की जान लेने वाले ये धमाके मुंबई सेंट्रल, विलेपार्ले और मूलुंड में हुए थे। धमाकों में 100 से अधिक लोग घायल भी हुए थे।

इस मामले में भी साल 2016 में साकिब को अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई। पहली और दूसरी सजाएँ एक साथ चलने की वजह से साकिब 2017 में जेल से रिहा हो गया। साकिब बम बनाने में माहिर माना जाता है। वह अन्य युवाओं को न सिर्फ बम बनाने बल्कि उसका परीक्षण और भीड़भाड़ वाली जगहों पर ब्लास्ट करने की भी ट्रेनिंग देता है। 

शामिल और उसका अब्बा साकिब ने अपने मुंबई बोरीवली स्थित घर को आतंकवाद की ट्रेनिंग के लिए एक सेंटर पॉइंट के तौर पर प्रयोग किया था। शामिल नाचन जुल्फिकार अली बड़ोड़ावाला, मोहम्मद इमरान खान, मोहम्मद यूनुस साकी, सिमाब नसीरुद्दीन काजी और अब्दुल कादिर पठान और कुछ अन्य संदिग्धों के साथ मिल कर ISIS मॉड्यूल खड़ा कर रहा था।

ठाणे के गाँव को बना रहा था अल शाम

नाचन ISIS का पूरा मॉड्यूल चला रहा था। NIA ने इस मामले में उसे मुख्य आरोपित बनाया था। नाचन समेत बाकी आरोपितों ने महाराष्ट्र के ठाणे के एक गाँव को ‘अल शाम’ यानी इस्लामिक शासन वाला आजाद क्षेत्र घोषित कर दिया था। ये भारत में शरिया के तहत इस्लाम का शासन स्थापित और आतंकी हमलों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।

NIA ने नाचन के अलावा हसीब जुबेर मुल्ला, काशिफ अब्दुल सत्तार बालेरे, सैफ अतीक नचन, रेहान अशफाक सुस, शगफ साफीक दिवकर, फिरोज दास्तगीर कुआरी को पकड़ा था। इस मामले में अन्य कई जगह से भी आतंकी पकड़े थे।

साकिब नचान ने कुख्यात आतंकी संगठन ISIS को आतंकी संगठन घोषित करने के खिलाने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।  ISIS के सरगना रहे नाचन ने इस्लामिक स्टेट और अन्य समूहों को आतंकवादी संगठन घोषित करने वाली सरकारी अधिसूचना को रद्द करने की माँग की थी।

 

जुबैर ने महिला टीचर को मदरसे में बुलाकर किया रेप, बेसुध छोड़कर भागा: पुलिस ने किया गिरफ्तार, मुजफ्फरनगर में तालीम लेने आई बच्ची से मौलवी सद्दाम ने की दरिंदगी

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मदरसा संचालक जुबैर ने जुमे के दिन टीचर को मदरसा बुलाया और रेप किया। टीचर बेसुध हालत में मदरसे में पड़ी रही। पुलिस ने जुबैर को गिरफ्तार कर लिया है। इसी तरह की घटना मुजफ्फरनगर से भी सामने आई है। यहाँ मौलवी ने 15 साल की छात्रा के साथ रेप किया।

बरेली के मीरगंज थाना क्षेत्र में शुक्रवार (30 जून 2025) जुमे के दिन छुट्टी के बाद भी मदरसा संचालक जुबैर ने एक महिला टीचर को मदरसा बुलाया। टीचर अपने भाई के साथ मदरसा पहुँची, भाई बाहर गेट पर छोड़कर वापस चला गया। टीचर अंदर पहुँची तो वहाँ कोई भी बच्चा नहीं था। इस पर टीचर को थोड़ा शक हुआ।

अचानक जुबैर भीतर से आया और टीचर को एक क्लासरूम में ले गया। वहाँ कमरे में जाकर बोला कि तुम्हें देखना है और टीचर के साथ दरिंदगी की। टीचर की हालत बिगड़ी तो जुबैर वहाँ से भाग निकला।

उधर, काफी देर तक घर वापस न आने पर टीचर के परिजन मदरसा पहुँचे। जहाँ टीचर बेसुध अवस्था में थी और उसके कपड़े अस्त-व्यस्त थे। परिजन पीड़िता को लेकर तुरंत अस्पताल पहुँचे। जहाँ शाम तक पीड़िता को होश आया और परिजन को सारी आपबीती सुनाई। इसके बाद परिजन ने पुलिस को शिकायत दी।

पुलिस ने रविवार (01 जून 2025) को आरोपित जुबैर को गिरफ्तार कर लिया। थाना इंचार्ज प्रदीप चतुर्वेदी ने बताया कि पीड़िता का मेडिकल परिक्षण कराया गया है। जुबैर से पूछताछ की जा रही है।

मुजफ्फरनगर में भी नाबालिग से रेप

बरेली जैसा ही मामला मुजफ्फरनगर जिले से भी सामने आया है। यहाँ रविवार (01 जून 2025) को मदरसे में एक नाबालिग छात्रा को डाउट क्लियर करने व पढ़ाने के बहाने बुलाया गया। फिर मौलवी सद्दाम हुसैन ने 15 वर्षीय छात्रा के साथ बलात्कार किया। पीड़िता चीखती-चिल्लाती रही।

पीड़िता छात्रा ने घर पहुँचकर परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद छात्रा के परिजन उसे थाने लेकर गए और मामला दर्ज कराया। सीओ रुपाली राव ने बताया कि पुलिस ने सद्दाम हुसैन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपित को नई मंडी थाने से गिरफ्तार कर लिया गया है।