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केन्द्र सरकार ने क्यों बदला AC पर नियम, 20°C-28°C की क्यों लगाई लिमिट… इससे बिजली की कितनी बचत: जानिए सब कुछ

केन्द्र सरकार ने बिजली की खपत को कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एयर कंडीशनर (AC) को लेकर नए नियम का ऐलान किया हैं। यह जल्द ही लागू हो जाएँगे। केन्द्र सरकार ने यह नियम एयर कंडीशनर के तापमान को लेकर बनाए हैं।

इस नियम के तहत, अब पूरे भारत में सभी AC केवल 20°C से 28°C के बीच के तापमान पर ही काम करेंगे। इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति अपने AC को 20°C से कम या 28°C से ज्यादा तापमान पर सेट नहीं कर पाएगा।

यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि बहुत कम तापमान पर AC चलाने से बिजली की भारी खपत होती है। इससे न केवल ऊर्जा की बर्बादी होती है, बल्कि बिजली की माँग भी तेजी से बढ़ती है। यह माँग गर्मियों में काफी तेजी से बढ़ती है। अब इस नई नीति से बिजली बचाने में मदद मिलेगी।

केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस नीति को एक साहसिक निर्णय बताया है और कहा कि यह AC के इस्तेमाल के आदतों में सुधार को देखते हुए ये कदम जरूरी है। अब इस निर्णय के बाद AC निर्माता कंपनियों को अपने उपकरणों के सॉफ्टवेयर को अपडेट करना होगा ताकि वे नए नियमों के अनुसार काम कर सकें। सरकार इस नीति के अमल पर नजर रखेगी।

भारत ऐसी नीति लागू करने वाला कोई पहला देश नहीं है, पहले से ही AC को लेकर दुनिया भर के अलग-अलग देशों में नियम लागू हैं।

और कौन से देशों में हैं ऐसे नियम?

सिंगापुर के सार्वजनिक भवनों में AC का तापमान 24-26°C के बीच रखा जाता है, जो वहाँ की गर्म जलवायु के लिए ठीक है। सिंगापुर की सरकार ऊर्जा बचाने के लिए ‘Go 25’ अभियान चला रही है, जिससे घरों और दफ्तरों में 25°C या उससे ज्यादा तापमान रखने को बढ़ावा दिया जा रहा है।

ऑस्ट्रेलिया में कोई तापमान रखने पर कोई कानूनी सीमा नहीं है, लेकिन सरकार 23-25°C तापमान की सलाह देती है। साथ ही ऑस्ट्रेलिया में केवल उन AC को बेचने की अनुमति है जो ऊर्जा की बचत के मानकों पर खरे उतरते हैं। जहाँ थर्मोस्टेट तापमान तय करने का कोई राष्ट्रीय नियम नहीं है।

चीन की सरकारी और व्यावसायिक इमारतों में AC का तापमान कम से कम 26°C रखने की सख्त सलाह है, खासकर गर्मियों में, ऐसा करना सार्वजनिक इमारतों में अनिवार्य है। यहाँ भी बिजली की खपत करने को यह नियम लागू किया गया है।

दक्षिण कोरिया में भी गर्मियों में AC का तापमान 26°C या उससे ऊपर रखने की नीति है। सार्वजनिक कार्यालयों को ऊर्जा बचाने के लिए इस नियम का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

भारत सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?

सरकार ने AC के तापमान को 20°C से 28°C के बीच सीमित करने का फैसला इसलिए लिया है ताकि देश में बिजली की खपत को कम किया जा सके और ऊर्जा का समझदारी से उपयोग किया जा सके। भारत में बढ़ते मध्यम वर्ग के साथ लगातार AC की बिक्री बढ़ रही है, इसी से बिजली खपत भी बढ़ रही है।

एक रिपोर्ट बताती है कि अकेले 2024 में ही देश में 1.4 करोड़ AC बिके थे। यह 4 वर्षों में दोगुनी हो चुकी है। यह अंदाजा लगाया गया है कि 2050 तक भारत में 9 गुना वृद्धि AC के मामले में होने वाली है। ऐसे में बिजली की खपत तेजी से बढ़ेगी।

मई-जून जैसे महीनों में भीषण गर्मी के चलते लोग अक्सर अपने AC को बहुत कम तापमान, जैसे 20-21°C पर चलाते हैं। इसके चलते बिजली की खपत तेजी से बढ़ती है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि बहुत कम तापमान पर AC चलाने पर बिजली खपत में 20% तक की बढ़ोतरी होती है। एकाएक बिजली की माँग बढ़ने से पॉवर ग्रिड पर भी दबाव पड़ता है।

भारत की ज़्यादातर बिजली कोयले से बनने के कारण, बिजली की ज्यादा खपत का मतलब ज्यादा प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ब्युरो ऑफ एनर्जी इफिशन्सी (BEE) का कहना है कि तापमान को 20°C से कम या 28°C से ज्यादा पर सेट करना अकुशल और नुकसानदायक है।

ऐसे में सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और बिजली बचत, दोनों को देखते हुए यह निर्णय लिया है।

इस कदम से क्या फायदे?

सरकार चाहती है कि देश में सभी लोग AC का इस्तेमाल एक तय तापमान सीमा यानि 20°C से 28°C  के बीच ही रहे, इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिजली की खपत कम होगी और देश को ऊर्जा की बचत में मदद मिलेगी।

जब कम बिजली खर्च होगा, तो देश को आर्थिक लाभ होगा और साथ ही प्रदूषण भी घटेगा, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान होगा। यह नियम हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद होगा, सभी के लिए एक समान तापमान पर AC चलने से न केवल आराम मिलेगा बल्कि बिजली का बिल भी कम आएगा।

सरकार इस बदलाव को जल्द ही लागू करने जा रही है और लोगों को इसके फायदे समझाकर जागरूक भी किया जा रहा है। इस नियम का मकसद सिर्फ तापमान सीमित करना नहीं है, बल्कि लोगों की सोच बदलना है ताकि वे ऊर्जा का उपयोग ज्यादा जिम्मेदारी से करें।

खुद को खत्म कर लेगा पर आतंकवाद खत्म नहीं करेगा कटोरा लेकर घूम रहा पाकिस्तान, भारत से लड़ने के लिए रक्षा बजट 18% बढ़ाया: स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा का पैसा घटाया

बीते लगभग एक दशक से भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अब अपनी फ़ौज पर खर्च फिर बढ़ाने जा रहा है। IMF, विश्व बैंक और सऊदी अरब जैसे देशों की चौखट पर कर्ज के लिए खड़ा रहने वाला पाकिस्तान फ़ौज पर खर्च वित्त वर्ष में 2025-26 के लिए अपने 18% बढ़ाने जा रहा है।

पाकिस्तान का रक्षा बजट अब 2.5 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (लगभग 14 अरब डॉलर) होगा। पाकिस्तान पर पहले से ही करीब 22 लाख 80 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। पाकिस्तान का कर्ज और GDP के बीच अनुपात लगभग 65% है। यह किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक माना जाता है।

पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार भी इतना ही बचा है कि वह केवल तीन महीने का आयात कवर कर सकता है। पाकिस्तान में महँगाई भी बहुत ज्यादा है और आर्थिक हालात दिन पर दिन बिगड़ते जा रहे हैं। अब भारत से कम्पटीशन करने की होड़ में, पाकिस्तान ऐसे फैसले ले रहा है जो उसकी आर्थिक स्थिति को और पतला कर सकते हैं।

हाल ही में भारत द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान के शेयर बाजार में 10% की गिरावट दर्ज की गई थी, इससे उसकी अर्थव्यवस्था को और झटका लगा था। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भले ही कमजोर हालत में हो, लेकिन इसके बावजूद इस्लामाबाद ने अपने बजट का करीब 18% हिस्सा फ़ौज को दे दिया है।

पाकिस्तान ने अपनी फ़ौज का यह पैस गरीबी हटाने, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे ज़रूरी क्षेत्रों के बजट में कटौती करके दिया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि पाकिस्तान की फ़ौज रोटी से ज्यादा महत्वपूर्ण बंदूकों को देती है।

हालाँकि, यह फैसला हैरानी की बात नहीं है, क्योंकि हाल ही में पाकिस्तान के फ़ौज प्रमुख असीम मुनीर को फील्ड मार्शल का पद मिला है। इससे यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान अब केवल नाम का लोकतंत्र रह गया है, असल में वहाँ फ़ौज की चलती है और देश एक तरह से फौजी तानाशाही में बदल चुका है।

डरा हुआ पाकिस्तान अब आतंकियों को दे रहा बढ़ावा

पाकिस्तान में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (PMLN) गठबंधन सरकार वर्तमान में सत्ता में है, जिसने रक्षा बजट में तेज़ी से बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। पाकिस्तानी सरकार ने इसका कारण उनके फौजी ठिकानों पर हुए भारत के हमलों को बताया है। पाकिस्तान को इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी।

खास बात यह रही कि इन हमलों के वक्त पाकिस्तान की रक्षा व्यवस्था सतर्क नहीं थी। वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान का रक्षा बजट 2122 अरब (2.122 लाख करोड़ रुपए) था, जो उससे पिछले साल के मुकाबले 15% ज़्यादा था।

अब 2025-26 के लिए इसमें और बढ़ोतरी की गई है। ऐसे में 2 वर्ष में कुल 35% की बढ़ोतरी रक्षा बजट में हुई है। हालाँकि, मौजूदा हालात और बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए इस साल का असली रक्षा खर्च इससे कहीं ज़्यादा होने की संभावना है।

पाकिस्तान की चिंता और हताशा इस बात से साफ झलकती है कि उसके योजना मंत्री अहसान इकबाल ने रक्षा बजट में बढ़ोतरी को भारत द्वारा सिंधु जल संधि को खत्म करने के फैसले से जोड़ दिया है। पाकिस्तान इस संधि को अपनी ‘जीवन रेखा’ मानता है और भारत की अपस्ट्रीम बांध परियोजनाओं को ‘जल आक्रमण’ बता रहा है।

पाकिस्तान लगातार भारत से अपील कर रहा है कि वह इस फैसले पर पुनर्विचार करे। वहीं इस बीच उसने चीन की मदद से एक नई बाँध परियोजना पर काम तेज कर दिया है। इसके लिए वह चीन की मदद लेने वाला है।

पाकिस्तान रक्षा बजट को ऐसे समय में बड़ी प्राथमिकता दे रहा है, जब देश का सार्वजनिक कर्ज मार्च 2024 तक बढ़कर रिकॉर्ड 76 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपए (22 लाख 80 हजार करोड़ रुपए) तक पहुँच चुका है, यह बात सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में भी बताया गया है।

पिछले दस वर्षों में पाकिस्तान का कुल कर्ज पाँच गुना बढ़ चुका है। 2020-21 में यह 39.8 ट्रिलियन रुपए से लगभग दोगुना होकर बढ़ा। इस कर्ज में 24.5 ट्रिलियन रुपए की विदेशी उधारी और 51.5 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपए की घरेलू देनदारियाँ शामिल हैं।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, इतना ज़्यादा कर्ज और उसका सही ढंग से प्रबंधन न होना पाकिस्तान की आर्थिक और राजकोषीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन गया है। पाकिस्तान इस समय IMF के कर्ज पर निर्भर है। मई 2025 में IMF ने पाकिस्तान को 1 बिलियन डॉलर (₹8500 करोड़) का कर्ज दिया था।

इसके साथ ही IMF ने पाकिस्तान पर 11 नई शर्तें भी लगा दीं। अब कुल मिलाकर IMF की शर्तों की संख्या 50 हो गई है, जो 7 बिलियन डॉलर के कर्ज के बदले में लगाई गई हैं। IMF ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर भारत के साथ तनाव बढ़ा, तो इससे पाकिस्तान की आर्थिक हालत और खराब हो सकती है।

IMF के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान की बेरोजगारी दर 8.5% है। वहीं गरीबी दर भी बढ़ रही है, 2017 में जहाँ 39.8% लोग गरीबी में थे, 2021 में यह बढ़कर 44.7% हो गए। गरीबी का माप प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 4.2 डॉलर आय के आधार पर किया गया है।

स्रोत: आईएमएफ

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में गरीबों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। देश में इस समय गरीबी दर 42.4% है और 2024-25 में करीब 19 लाख (1.9 मिलियन) और लोग गरीबी रेखा के नीचे चले जाएँगे। पाकिस्तान की 2.6% आर्थिक विकास दर इतनी कम है कि इससे गरीबी में कोई खास कमी नहीं हो पा रही है।

पाकिस्तान की एक गंभीर सच्चाई यह है कि जहाँ देश की 45% आबादी गरीबी में और 16.5% आबादी बेहद गरीबी (अत्यधिक गरीबी) में जी रही है, वहाँ की सेना-समर्थित सरकार गरीबी घटाने और युवाओं को रोजगार देने पर ध्यान देने के बजाय रक्षा बजट को 18% बढ़ाने को ज़्यादा जरूरी मान रही है।

इस बीच, भारत द्वारा सिंधु जल संधि को रद्द करने के बाद पाकिस्तान के सिंधु नदी बेसिन में पानी का बहाव कम हो गया है, जिससे देश का कृषि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। अनुमान है कि इससे फसलों की पैदावार में कपास के लिए 29.6% और चावल के लिए 1.2% तक की गिरावट आ सकती है। इससे क्षेत्रीय विकास दर 2% से भी नीचे रह सकती है।

इसके अलावा, पाकिस्तान को खाद्य सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण इलाकों में लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा की स्थिति में हैं।

पिछले 25 वर्षों में IMF ने पाकिस्तान को करीब 22 बिलियन डॉलर की आर्थिक मदद दी है। इसके बावजूद, पाकिस्तान की सामाजिक और आर्थिक स्थिति अब भी बेहद गंभीर बनी हुई है। ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है कि यह सारा पैसा आखिर जा कहाँ रहा है।

यह सवाल और भी गंभीर हो जाता है जब यह सामने आता है कि पाकिस्तान ने अब तक अपनी सेना पर 185 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं, जो कि IMF से मिली मदद से 5 से 10 गुना ज़्यादा है।

ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि दुनिया, खासकर वो देश और संस्थाएँ जो पाकिस्तान को कर्ज देती हैं, यह सवाल करें कि जब पाकिस्तान इतनी बड़ी रकम रक्षा पर खर्च कर सकता है, तो फिर उसे बार-बार आर्थिक संकट से उबरने और भुगतान संतुलन बनाए रखने के लिए कर्ज की ज़रूरत क्यों पड़ रही है।

पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिले कर्ज का गलत इस्तेमाल किया है। इस पैसे का उपयोग देश के अंदर इस्लामी आतंकवादियों को पालने, उन्हें सुरक्षा देने और उन्हें फंड करने में किया गया, जो बाद में पाकिस्तानी सेना के इशारे पर भारत में आतंकी हमले करते हैं।

पाकिस्तान में सेना का दबदबा इतना ज़्यादा है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास जैसी ज़रूरी नागरिक ज़रूरतों को बार-बार नजरअंदाज किया गया है। यह सिर्फ इस साल नहीं, बल्कि कई सालों से हो रहा है। यह एक शर्मनाक और पुराना पैटर्न बन चुका है।

भारत को नुकसान पहुँचाने और एक तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था से प्रतिस्पर्धा करने का पाकिस्तान का जुनून उसकी नीतियों और सोच को बिगाड़ चुका है। यह मानसिकता उसे खुद के विकास से भटका रही है।

पाकिस्तान की स्थिति आज घोर कुप्रबंधन, राजनीतिक अस्थिरता, भारी कर्ज और एक ऐसी सेना की वजह से खराब है जो देश के संसाधनों का बड़ा हिस्सा ले जाती है लेकिन बदले में देश को बहुत कम देती है। पाकिस्तान लगातार IMF और चीन से कर्ज लेकर अपनी अर्थव्यवस्था को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने भारी कर्ज के बावजूद, उसका रक्षा बजट हर साल बढ़ रहा है।

यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में श्रद्धा पांडे ने लिखी है, इसे यहाँ क्लिक करके विस्तार से पढ़ सकते हैं।

अमेरिका में यहूदी प्रार्थनाघर पर हमला करने वाला था पाकिस्तानी शहजेब, चाकू-राइफल और गोलियों का दिया था ऑर्डर: कनाडा ने ISIS आतंकी को किया डिपोर्ट, अब चलेगा मुकदमा

20 साल के पाकिस्तानी नागरिक मुहम्मद शहज़ेब खान को कनाडा से अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया है। मुहम्मद शहजे़ब पर आरोप है कि वह न्यूयॉर्क शहर के एक बड़े यहूदी प्रार्थना स्थल केंद्र पर ISIS के इशारे पर एक बड़ा आतंकी हमला करने की साजिश रच रहा था। शहज़ेब की योजना थी कि वह 7 अक्टूबर 2024 को, यानी हमास के इज़राइल पर हमले की पहली बरसी पर, ब्रुकलिन के यहूदी केंद्र में घुसकर अँधाधुँध गोलीबारी करे।

लेकिन अमेरिका और कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से उसकी यह खूनी साजिश नाकाम हो गई। शहज़ेब को 4 सितंबर 2024 को कनाडा में अमेरिकी सीमा के पास ही गिरफ्तार कर लिया गया था और अब उसे अमेरिका लाकर 11 जून 2025 को न्यूयॉर्क की कोर्ट में पेश किया जाएगा।

साजिश की कहानी

मुहम्मद शहज़ेब खान, जिसका दूसरा नाम शाहज़ेब जादून भी है, कनाडा में रह रहा था। लेकिन वह आतंकी संगठन ISIS की जहरीली विचारधारा से बुरी तरह प्रभावित था। नवंबर 2023 से उसने सोशल मीडिया और कुछ खास एनक्रिप्टेड ऐप्स पर ISIS का प्रचार करना शुरू कर दिया था।

इसी दौरान वह 2 अंडरकवर अमेरिकी एजेंट्स (जासूसों) के संपर्क में आया और उन्हें बताया कि वह अमेरिका में एक आतंकी हमला करना चाहता है। शुरुआत में शहज़ेब का निशाना कोई और शहर था, लेकिन अगस्त 2024 में उसने अपनी योजना बदली और न्यूयॉर्क सिटी को निशाना बनाने का फैसला किया।

शहज़ेब ने खास तौर पर ब्रुकलिन में एक यहूदी धार्मिक केंद्र को चुना। शहज़ेब ने अमेरिकी एजेंट्स से कहा था, “हम न्यूयॉर्क जा रहे हैं उन्हें काटने के लिए” और शेखी बघारी थी कि यह अमेरिका में 9/11 के बाद की सबसे बड़ी आतंकी घटना हो सकती है।

शहज़ेब ने न्यूयॉर्क शहर के ब्रुकलिन इलाके में एक यहूदी प्रार्थना स्थल को हमला करने के लिए चुना था। शहज़ेब ने अमेरिकी जासूसों से कहा था कि हम न्यूयॉर्क जा रहे हैं उन्हें खत्म करने के लिए। शहज़ेब ने यह भी डींग मारी थी कि यह हमला अमेरिका में 9/11 के आतंकी हमले के बाद की सबसे बड़ी आतंकी घटना बन सकता है।

शहज़ेब ने अंडरकवर एजेंट्स से AR-15 राइफलें, चाकू और ढेर सारी गोलियाँ मंगवाईं। 4 सितंबर 2024 को शहज़ेब एक स्मगलर (तस्कर) की मदद से अमेरिका में घुसने की कोशिश कर रहा था, लेकिन कनाडा की सीमा से करीब 12 मील पहले ही उसे पकड़ लिया गया था।

अमेरिका में शहज़ेब पर दो गंभीर आरोप

पहला आरोप ‘आतंकी संगठन को समर्थन देने की कोशिश’ है। इस आरोप में उसे अधिकतम 20 साल तक की जेल हो सकती है।

दूसरा आरोप ‘सीमाओं के पार आतंक फैलाने की साजिश’ है, इस आरोप में उसे अधिकतम उम्रकैद की सजा मिल सकती है।

FBI डायरेक्टर का ट्वीट

FBI के डायरेक्टर ने इस मामले पर जानकारी देते हुए कहा, “@FBI और @NYPDNews की टीम ने न्यूयॉर्क में एक संभावित आतंकी हमले की साजिश को नाकाम कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। मुहम्मद शहज़ेब खान नामक व्यक्ति को, जो ISIS से प्रेरित था, यहूदी केंद्र को निशाना बनाने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया है।”

FBI डायरेक्टर ने आगे कहा, “यह हमारी साझा सुरक्षा एजेंसियों के बेहतरीन समन्वय और अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। हम आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में हमेशा सतर्क रहेंगे और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते रहेंगे। हमारे एजेंट्स और पार्टनर्स को सलाम।”

डोनाल्ड ट्रंप, जेडी वेंस, एलन मस्क… कौन है ‘किल लिस्ट’ जारी करने वाला अलकायदा आतंकी आतिफ अवलाकी: कहा- अमेरिकी मुस्लिमों जिहाद छेड़ो, ‘कचरा’ साफ करो

यमन बेस्ड आतंकी संगठन अल-कायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला (AQAP) के सरगना साद बिन आतिफ अल-अवलाकी ने एक 34 मिनट का वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में उसने अमेरिका में रहने वाले मुस्लिमों से जिहाद छेड़ने और वहाँ के बड़े-बड़े लोगों जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और टेस्ला कंपनी के मालिक एलन मस्क की हत्या करने की खुलेआम अपील की है। इस वीडियो का नाम है “इंसाइटिंग द बिलीवर्स”। इसे AQAP के समर्थक ऑनलाइन प्रोपेगेंडा का हथियार बनाकर सर्कुलेट कर रहे हैं।

साद ने इस वीडियो में कहा कि अमेरिका इजरायल और हमास के बीच चल रही जंग में इजरायल का साथ दे रहा है और इसके लिए उसका बदला लेना जरूरी है। उसने अमेरिका में रहने वाले करीब 45 लाख मुस्लिमों से कहा, “तुम्हें किसी से सलाह लेने की जरूरत नहीं, बस बदला लो! बदला लो! उन काफिर अमेरिकियों को मारो।” उसने ट्रंप, वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ और एलन मस्क को ‘धरती का कचरा’ और ‘सबसे बड़े अपराधी’ बताया। उसने इन नेताओं, उनके परिवारों और व्हाइट हाउस से जुड़े लोगों को निशाना बनाने की बात कही।

साद ने गाजा में जारी जंग का जिक्र करते हुए कहा कि वहाँ मुस्लिमों पर हो रहे जुल्मों के बाद अब कोई सीमा नहीं बची। उसने कहा, “गाजा में हमारे लोगों के साथ जो हो रहा है, उसका बदला लेना जरूरी है।” उसने यहूदियों के खिलाफ भी हिंसा भड़काने की कोशिश की और कहा, “यहूदियों के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं छोड़नी चाहिए, जैसे उन्होंने फलस्तीनियों के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी।” उसने गाजा में अस्पतालों पर हो रही बमबारी का हवाला दिया और मुस्लिमों से बदला लेने की अपील की।

इसके साथ ही साद ने हाल के कुछ हमलों की तारीफ भी की। उसने जुलाई 2024 में ट्रंप पर हमले की कोशिश और मई 2025 में वाशिंगटन डीसी में इजरायली दूतावास के कर्मचारियों पर हुए हमले का जिक्र किया। उसने इन हमलों को सही ठहराया और कहा कि ऐसे और हमले होने चाहिए।

साद ने सिर्फ लोगों पर हमले की बात नहीं की, बल्कि उसने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सरकार को भी नुकसान पहुँचाने की बात कही। उसने हैकर्स से कहा कि वो अमेरिका और खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को निशाना बनाएँ। उसने माइक्रोसॉफ्ट और एलन मस्क की कंपनियों जैसे टेस्ला को भी ‘वैध निशाना’ बताया। उसने AQAP की पत्रिका ‘इंस्पायर’ का जिक्र करते हुए लोगों को बम बनाने की तकनीक सीखने की सलाह दी, ताकि वो हमले कर सकें।

ये वीडियो ऐसे समय में आया है, जब AQAP को पिछले कुछ सालों में काफी कमजोर माना जा रहा है। अमेरिका के ड्रोन हमलों और संगठन के अंदर आपसी झगड़ों की वजह से इसकी ताकत कम हुई है। फिर भी संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, AQAP के पास अभी भी 3,000 से 4,000 सदस्य हैं। अमेरिका ने AQAP को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है। ये संगठन 2009 में यमन और सऊदी अरब के अल-कायदा ग्रुपों के गठजोड़ (विलय) के बाद बना था।

विशेषज्ञों का मानता है कि साद गाजा का मुद्दा उठाकर यमन के हूती विद्रोहियों की बढ़ती लोकप्रियता को चुनौती देना चाहता है। हूती विद्रोही भी इजरायल के खिलाफ हमले कर रहे हैं, और साद को लगता है कि हूतियों की लोकप्रियता से AQAP की अहमियत कम हो रही है। जानकारों का मानना है कि ये वीडियो AQAP की तरफ से अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश है।

साद बिन आतिफ अल-अवलाकी कौन है?

साद बिन आतिफ अल-अवलाकी यमन के शबवा प्रांत के अल-शुबाह इलाके की अल-अवालिक जनजाति से है। वो 2024 में AQAP का नेता बना, जब संगठन का पुराना सरगना खालिद अल-बतरफी मर गया। इससे पहले साद AQAP की शूरा परिषद का हिस्सा था और हमलों की योजना बनाने में शामिल था। वो अनवर अल-अवलाकी का रिश्तेदार है, जो एक कुख्यात आतंकी था और 2011 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था। अमेरिका ने साद पर 60 लाख डॉलर का इनाम रखा है, क्योंकि उसने पहले भी अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर हमले की बात कही थी।

साद का जन्म यमन में हुआ था और वो अल-कायदा की विचारधारा को फैलाने में हमेशा सक्रिय रहा है। 2023 में भी वो एक वीडियो में दिखा था, जिसमें उसने यमन की दक्षिणी जनजातियों से संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिणी परिषद के खिलाफ लड़ने को कहा था। उसका संगठन अपने खर्चे चलाने के लिए बैंक लूट, हथियार तस्करी और फिरौती जैसे अपराध करता है।

पटरी पार करने में होती परेशानी, इसलिए वृन्दावन-मथुरा ट्रेन प्रोजेक्ट का स्थानीयों ने किया विरोध: अब रेलवे ने बंद ही कर दी ₹400 करोड़ की योजना, पटरियाँ बिछा के छोड़ा

रेल मंत्रालय ने मथुरा-वृंदावन रेलवे लाइन को मीटर गेज से ब्रॉड गेज में परिवर्तित करने की अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना को स्थायी रूप से बंद कर दिया है। परियोजना पर ₹402 करोड़ खर्च होना था। रेल मंत्रालय ने इसे ‘अलाभकारी’ कहा है।

उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) जोन में मथुरा-वृंदावन क्षेत्र आता है। रेलवे ने स्थानीय लोगों के विरोध के कारण कुछ महीने पहले इसे स्थायी रूप से खत्म करने का प्रस्ताव रखा था। रेलवे बोर्ड ने इसकी जाँच भी की, जिसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने रद्द करने की मंजूरी दे दी।

रेल मंत्रालय ने 6 जून को एनसीआर जोन के महाप्रबंधक को लिखे पत्र में कहा, ” अधिकारियों ने उत्तर मध्य रेलवे के आगरा डिवीजन के मथुरा वृंदावन खंड को स्थायी रूप से बंद करने की मंजूरी दे दी है।” इसने आगे कहा कि यह निर्णय रेल मंत्रालय के वित्त निदेशालय की सहमति से लिया गया है और जोन से आवश्यक कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है।

मीटर गेज रेल लाइन को ब्रॉड गेज में बदलना था

परियोजना से जुड़े रेलवे अधिकारियों ने बताया कि दोनों शहरों के बीच रेल संपर्क का काम करीब दो साल पहले शुरू हुआ था और मथुरा और वृंदावन दोनों तरफ से पटरियाँ बिछाने में काफी समय और पैसा खर्च किया गया था।

रेलवे बोर्ड ने 2017-18 में मथुरा और वृंदावन के बीच मीटर गेज रेल लाइन को ब्रॉड गेज में बदलने की मंजूरी दी थी। इसपर ₹402 करोड़ खर्च होने थे।

फरवरी 2023 में आईएससी नामक कंपनी को ₹191 करोड़ का ठेका दिया गया। 31 मार्च 2023 को मौजूदा ट्रैक को हटाने और नया ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया शुरू की गई। ठेकेदार को 30 मार्च 2025 तक दो साल में काम पूरा करना था।

100 साल से भी अधिक समय से अंग्रेजों द्वारा निर्मित मीटर गेज ट्रैक पर एक कोच वाली रेल बस चलती थी। 2023 की शुरुआत तक दिन में इसे दो बार चलाया जाता था। ब्रॉड गेज के निर्माण के लिए ये सेवा बंद कर दी गई थी।

स्थानीय लोगों ने किया विरोध

गेज परिवर्तन का काम वृंदावन से शुरू किया गया था, लेकिन जून 2023 में मथुरा की तरफ से काम शुरू होने पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई।

रेलवे अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय लोग आसानी से ट्रैक पार कर लेते थे क्योंकि मीटर गेज ज़मीनी स्तर पर था और रेल- बस की गति 1000 मीटर प्रति घंटा थी।

अधिकारियों के अनुसार, नया ट्रैक बाँध पर बनाया जाना था। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और कहा कि इससे उन्हें पहले की तरह ट्रैक पार करने में असुविधा होगी।

1 सितंबर, 2023 को एनसीआर जोन के वरिष्ठ अधिकारियों, मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट, नगर आयुक्त, स्थानीय निवासियों और उनके प्रतिनिधियों सहित अन्य लोगों के बीच एक बैठक हुई। इसमें अधिकांश लोगों ने ब्रॉड गेज रेल लाइन के बजाय रेलवे की भूमि पर सड़क निर्माण की माँग की।

कर्नाटक के वाल्मीकि फंड घोटाला मामले में कॉन्ग्रेस नेताओं पर ED के छापे, 1 MP-3 MLA के यहाँ हो रही तलाश: ST कल्याण का पैसा हुआ था लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के एक सांसद और 3 विधायकों के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापे मारे हैं। यह कार्रवाई वाल्मीकि फंड घोटाला मामले में हुई है। ED की यह कार्रवाई कर्नाटक के बेल्लारी जिले में हुई है। वाल्मीकि घोटाला मामले में कॉन्ग्रेस के एक मंत्री की कुर्सी जा चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार (11 जून, 2025) को ED की टीमों ने 8 ठिकानों पर छापे मारे हैं। ED की कार्रवाई कॉन्ग्रेस सांसद ई तुकाराम, विधायक नारा भारत रेड्डी, विधायक जीएन गणेश और विधायक बी नागेन्द्र के ठिकानों पर हुई है। बी नागेन्द्र की ही मंत्री की कुर्सी इस मामले में गई थी।

इससे पहले भी एजेंसी इस मामले में छापेमारी कर चुकी है। वर्तमान कार्रवाई PMLA कानून के तहत की जा रही है, ऐसा रिपोर्ट्स में बताया गया है। इस कार्रवाई में क्या बरामदगी और पूछताछ भी हुई है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

यह मामला कर्नाटक में दलित और जनजातीय युवाओं के विकास के लिए बनाए गए KMVSTDC में करोड़ों की गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है। ED ने इस मामले में चार्जशीट दायर की थी।

क्या है वाल्मीकि फंड घोटाला?

कर्नाटक सरकार KMVSTDC प्रदेश की जनजातीय जनता के कल्याण के लिए चलाती है। इसके अंतर्गत जनजातीय जनसंख्या के लिए रोजगार समेत विशेष योजनाएँ लाई जाती हैं। कर्नाटक सरकार इसके लिए अलग से बजट देती है। इसी महर्षि वाल्मीकि फंड में घोटाले की बात सामने आई थी।

यह पूरा मामला एक आत्महत्या से चालू हुआ था। मई, 2024 में इसी निगम से जुड़े एक 48 वर्षीय कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली थी। उसकी मौत के बाद एक सुसाइड नोट मिला था। इसमें उसने आरोप लगाया था कि उसके उच्चाधिकारियों ने उस पर इस बात के लिए दबाव बनाया था कि वह निगम के खातों से पैसा ट्रांसफर करे।

उसने आरोप लगाया था कि यह काम निगम का पैसा हड़पने के लिए किया गया था। उसका आरोप था कि यह काम एक मंत्री के मौखिक आदेशों के आधार पर किया गया था। उसने अपने विभाग के अलावा यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के कर्मचारियों पर भी आरोप लगाए थे। इसके बाद पूरे प्रदेश में हंगामा मच गया था।

आत्महत्या करने वाले कर्मचारी चंद्रशेखर ने सुसाइड नोट में बताया था कि उसे उच्चाधिकारियों ने इस बात के लिए निर्देशित किया था कि वह निगम के एक खाते से दूसरे खाते में पैसा ट्रांसफर करने के लिए पत्र लिखे। यह पैसा यूनियन बैंक के वसंत नगर ब्रांच से एमजी रोड ब्रांच में डाला जाना था।

इसी के तहत वाल्मीकि निगम के खातों से निकाला गया पैसा इसके बाद अन्य खातों में भेज दिया गया। इस पूरे खेल में ₹187 करोड़ का लेनदेन हुआ। इसमें से लगभग ₹88 करोड़ अवैध खातों में भेजा गया। जब यह मामला खुला तो चंद्रशेखर डर गया और उसने आत्महत्या कर ली।

यह पूरा मामला सामने आने के बाद कई बैंक कर्मचारियों समेत KMVSTDC के कई कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई। इसके बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था। इस मामले में अब ED जाँच चल रही है। इस मामले में 25 लोगों को आरोपित बनाया गया था।

ED ने इस मामले में दायर चार्जशीट में बताया था कि बेल्लारी लोकसभा में लगभग 7 लाख वोटरों को इस फंड में घोटाले के पैसे से रिश्वत दी गई। यह रिश्वत उन्हें कॉन्ग्रेस को वोट देने के लिए दी गई। यह पैसा बी नागेन्द्र ने महर्षि वाल्मीकि जनजातीय विकास निगम में घोटाला करके जुटाया था।

बेल्लारी में ₹14 करोड़ की रिश्वत

ED ने बताया था कि बेल्लारी में 7 लाख वोटरों को लगभग ₹200 की रिश्वत दी गई। ED ने कहा था कि घोटाले के पैसे से चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की गई। ED ने यह खुलासा बी नागेन्द्र के पूर्व निजी सचिव विजय गौड़ा के फोन की जाँच के बाद किया था। उसमें बेल्लारी में पैसा खर्च होने के सबूत मिले थे।

ED ने आरोप लगाया था कि बी नागेन्द्र के पास इस घोटाले का अधिकांश पैसा आया। ED को विजय गौड़ा ने बताया था कि उसने घोटाले का यह पैसा नागेन्द्र के कहने पर कई लोगों में बाँटा जो कॉन्ग्रेस से जुड़े हुए थे। यहाँ कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार ई तुकाराम के लिए घोटाले का पैसा उपयोग किया गया।

यह भी आरोप ED ने लगाया था कि बूथ पर काम करने वाले कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को ₹10000 इस घोटाले के पैसे से दिए गए। नागेन्द्र के घोटाले का यह पैसा बंटवाने में कॉन्ग्रेस के विधायकों ने भी सक्रिय रोल निभाया, यह भी ED ने बताया था। जाँच एजेंसी बताया था कि घोटाले में से लगभग ₹15 करोड़ का इस्तेमाल चुनावों को प्रभावित करने के लिए किया गया।

ED के पास पैसे से लेनदेन की फोटो भी मौजूद हैं। चार्जशीट में यह भी कहा गया था कि बी नागेन्द्र ने इन आरोपों पर कोई साफ़ जवाब नहीं दिया है। बी नागेन्द्र ने बचने के लिए तीन आईफोन तोड़े हैं। ED ने यह भी आरोप लगाए हैं कि बी नागेन्द्र ने जब पैसों की गड़बड़ी की तो इसे वित्त विभाग ने भी नहीं चेक किया।

न्यूज चैनल की एंकर शाजिया निसार के घर से मिले ₹34 लाख कैश, पत्रकार आदर्श झा भी गिरफ्तार: जानिए क्या है ₹65 करोड़ की उगाही का मामला

नोएडा पुलिस ने दो पत्रकारों शाजिया निसार और आदर्श झा को उगाही के आरोप में गिरफ्तार किया है। शाजिया निसार ‘भारत 24’ में एंकर रही है, जबकि आदर्श झा एक डिजिटल पत्रकार हैं। इन पर ‘भारत 24’ चैनल के 75 वर्षीय सीएमडी जगदीश चंद्रा को ब्लैकमेल करने और उनसे ₹2.26 करोड़ से अधिक की उगाही करने का आरोप है। निसार ने कथित तौर पर झूठे बलात्कार के मामले में फँसाने की धमकी देकर ₹ 65 करोड़ माँगे थे।

धमकी और जबरन वसूली का आरोप

नोएडा पुलिस के अनुसार भारत 24 के मुख्य संपादक और सीईओ जगदीश चंद्रा ने एफआईआर दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में चंद्रा ने कहा कि शाजिया निसार 2022 से चैनल के साथ काम कर रही थीं। उन्होंने कथित तौर पर उन्हें बलात्कार के झूठे मामले में फँसाने और ₹65 करोड़ न देने पर आत्महत्या करने की धमकी दी थी।

चंद्रा ने आरोप लगाया कि पिछले एक साल में उन्हें चेक के जरिए ₹2.26 करोड़ दिए गए और उनके पास इस बात के समर्थन में रिकॉर्डिंग और सबूत भी हैं। एफआईआर में लिखा है, “30 वर्षीय शाजिया निसार 2022 से मेरे चैनल में बतौर एंकर काम कर रही है। वह मुझे झूठे बलात्कार के मामले में फँसाने और आत्महत्या करने की धमकी देकर ब्लैकमेल कर रही है। वह मुझसे अवैध रूप से ₹60 करोड़ की माँग कर रही है। पिछले एक साल में उसने कई बार चेक के जरिए ₹2 करोड़ 26 लाख लिए हैं। मेरे पास इसके (लेनदेन के) सबूत हैं। आदर्श झा ब्लैकमेल करने में उसकी मदद कर रहा है।”

एफआईआर में एक डिजिटल न्यूज़ पोर्टल से जुड़े पत्रकार आदर्श झा का भी नाम ब्लैकमेल में शामिल बताया गया है। पुलिस ने बताया कि दोनों ने मिलकर ₹65 करोड़ की उगाही करने की कोशिश की। शिकायत 8 जून को दर्ज की गई थी।

मीडिया से बात करते हुए एसएचओ अमित कुमार ने कहा, “जब उनसे उनके खाते में पैसे के बारे में पूछा गया, तो उनके पास इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं था। उन्होंने हमें बताया कि यह मुआवज़ा था।” चैनल स्टाफ़ की और शिकायतें भारत24 की कंसल्टिंग एडिटर अनीता हाडा और एचआर हेड अनुश्री धर ने आरोपी के खिलाफ़ दो और शिकायतें दर्ज कराईं।

हाडा ने निसार के उत्पीड़न के आरोपों को खारिज़ करते हुए कहा, “अगर ऐसा होता, तो वह शिकायत दर्ज करातीं। मैं उनका समर्थन करता।” कंपनी ने पहले पुलिस के पास जाने के बजाय निसार को पैसे क्यों दिए?, इस सवाल पर मीडिया से बात करते हुए हाडा ने कहा, “हमें कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की चिंता थी।”

छापेमारी और बरामदगी

एफआईआर के बाद, नोएडा सेक्टर 58 पुलिस ने दिल्ली में निसार के आवास पर छापा मारा और 34.5 लाख रुपए नकद, तीन मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और एक स्कॉर्पियो वाहन जब्त किया। गाजियाबाद के इंदिरापुरम में आदर्श झा के आवास पर भी छापेमारी की गई, जहाँ से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों को गौतम बुद्ध नगर जिला न्यायालय में पेश किया गया और 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने पुष्टि की है कि निसार की मां का नाम भी इस रैकेट में कथित भूमिका के लिए एफआईआर में दर्ज है, हालाँकि गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है।

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को मिला प्रमोशन, अब बने आर्मी के डिप्टी चीफ… बेटी ने पोस्ट में पिता को बताया ‘कूल’: उत्तम युद्ध सेवा मेडल भी मिला, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में थे सेना का चेहरा

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को हाल ही में देश के सबसे बड़े सैन्य सम्मानों में से एक, ‘उत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से नवाजा गया है। यह सम्मान उन्हें 4 जून 2025 को ‘डिफेंस इंवेस्टीचर सेरेमनी 2025 (फेज़-II)’ के दौरान दिया गया।

इसके अलावा, सोमवार (9 जून 2025) जनरल राजीव घई को भारतीय सेना में एक बेहद अहम पद, ‘डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (स्ट्रेटेजी)’ भी सौंपा गया है। यह पद सेना के ऑपरेशन और खुफिया जैसे महत्वपूर्ण कामों की देखरेख करता है। उनकी बेटी, शरण घई ने भी सोशल मीडिया पर अपने ‘कूल’ पिता की जमकर तारीफ की है।

‘उत्तम’ सेवा का सम्मान और नई जिम्मेदारी

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई इस समय ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO)’ के पद पर भी कार्यरत हैं। राजीव घई को ‘उत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया जाना उनकी असाधारण बहादुरी और युद्ध के समय दी गई बेहतरीन सेवाओं का प्रमाण है।

यह मेडल युद्ध या संघर्ष के दौरान असाधारण सेवा के लिए दिया जाने वाला एक उच्च सैन्य सम्मान है। यह ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ का युद्धकालीन रूप है और इसे सशस्त्र बलों के सभी रैंकों, जिनमें सहायक, आरक्षित और नर्सिंग कर्मचारी शामिल हैं, को आउटस्टैंडिंग ऑपरेशनल लीडरशिप और विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है।

बेटी को है अपने ‘कूल’ डैड पर गर्व

बेटी शरण घई ने अपने पिता की तारीफ में एक दिल छू लेने वाला संदेश पोस्ट किया है। शरण घई ने लिखा, “आप पर बहुत गर्व है, डैड। यह देखकर खुशी हुई कि आखिर सब लोग समझ रहे हैं कि आप कितने कूल हैं। हम तो यह सब जानते ही थे। लव यू, @RgGhai, अगले जो भी अद्भुत काम आप करेंगे, उन्हें देखने का इंतजार नहीं कर सकती।” यह संदेश उनके पिता के प्रति उनकी गहरी भावनाओं और गर्व को दर्शाता है।

ऑपरेशन सिंदूर: ‘राख से राख’ तक का जवाब

लेफ्टिनेंट जनरल घई ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। यह सैन्य अभियान 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 हिंदू पर्यटक मारे गए थे। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया और 100 से ज़्यादा आतंकवादियों को मार गिराया गया था।

इन हमलों के दौरान, पाकिस्तान के DGMO ने लेफ्टिनेंट जनरल घई को फोन किया और कथित तौर पर सीजफायर की गुहार लगाई थी। घई ने बाद में भारत के इस जवाब को ‘राख से राख‘ वाक्यांश का उपयोग करके समझाया था। जनरल घई ने बताया कि कैसे देश की एयर डिफेंस ने खतरों को बेअसर कर दिया।

पहले भी निभाई हैं महत्वपूर्ण भूमिकाएँ

इसी साल 2025 की शुरुआत में, लेफ्टिनेंट जनरल घई ने भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के लिए मणिपुर का दौरा किया था। जनरल घई ने वहाँ बुनियादी ढाँचे और राज्य अधिकारियों के साथ समन्वय की समीक्षा की थी।

कुमाऊं रेजिमेंट के एक अनुभवी अधिकारी, श्री घई ने अक्टूबर 2024 में DGMO की भूमिका संभालने से पहले जम्मू और कश्मीर में चिनार कॉर्प्स का भी नेतृत्व किया था। उनका लंबा और शानदार करियर भारतीय सेना के प्रति उनके अटूट समर्पण और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।

क्या है ब्रिगेड 313? पाकिस्तान में अल-कायदा की आतंकी शाखा जिसे इस्लामाबाद नहीं चाहता कि आप जानें: सवाल सुन पीपीपी नेता शेरी रहमान की हुई बोलती बंद

स्काई न्यूज ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की उपाध्यक्ष शेरी रहमान का एक इंटरव्यू 10 जून को प्रसारित किया। इसमें अलकायदा से संबद्ध ब्रिगेड 313 के बारे में सवाल उठाए गए थे। स्काई न्यूज की पत्रकार यल्दा हकीम ने इस बारे में सवाल पूछा तो रहमान की बोलती बंद हो गई।

जब हकीम ने आतंकवाद अनुसंधान और विश्लेषण संघ (टीआरएसी) से प्राप्त जानकारी के आधार पर उनसे पूछा कि ब्रिगेड 313 पाकिस्तान से संचालित अल-कायदा के नेतृत्व वाला संगठन है और कश्मीर में हमलों का समन्वय कर रहा है, तो रहमान ने जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की।

उसने कहा, “क्या हम हर बार भारत में हमले के समय युद्ध करने जा रहे हैं? पाकिस्तान को बार-बार सीमा पार आतंकवाद के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना ठीक नहीं है।” उसने आगे कहा कि भारत के भीतर कई तथाकथित विद्रोहियों की मौजूदगी है और दावा किया कि पाकिस्तान अब एक ‘बदला हुआ’ देश है।

इंटरव्यू के दौरान एफएटीएफ द्वारा पाकिस्तान की पिछली ग्रे-लिस्टिंग और 26/11 के साजिशकर्ता साजिद मीर की भूमिका पर भी चर्चा की गई। रहमान ने सीधे जवाब नहीं दिए, केवल इतना कहा कि पाकिस्तान का आतंकवाद के साथ ‘लंबा इतिहास’ है, जिसमें इससे लड़ना भी शामिल है। एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “आप आतंकवाद के बारे में बात करते रहते हैं, लेकिन वह पाकिस्तान का अतीत है। हम आतंकवाद से लड़ रहे हैं। पाकिस्तान अब काफी बदल चुका है।”

ब्रिगेड 313 क्या है?

2000 के दशक की शुरुआत में गठित ब्रिगेड 313 एक पाकिस्तान-आधारित आतंकवादी गठबंधन है। इसे व्यापक रूप से इस क्षेत्र में अल-कायदा के सबसे घातक विस्तारों में से एक माना जाता है। आतंकी संगठन का नाम पैगम्बर मुहम्मद के 313 साथियों से प्रेरित है, जिन्होंने बद्र की लड़ाई लड़ी थी।

गठबंधन का नेतृत्व इलियास कश्मीरी ने किया था, जो पाकिस्तानी सेना का एक पूर्व कमांडो था, जो बाद में 2011 के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने से पहले अल-कायदा के शीर्ष कमांडरों में से एक बन गया था।

ब्रिगेड 313 कथित तौर पर एक हाइब्रिड संगठन के रूप में काम करता है। यह एक स्वतंत्र संगठन नहीं है, बल्कि लश्कर-ए-तैयबा, लश्कर-ए-झांगवी, हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी, जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान गुटों के आतंकवादियों का एक समन्वय है। यह अल-कायदा की छत्रछाया में काम करता है और इसके लश्कर अल-ज़िल या ‘शैडो आर्मी’ का हिस्सा है। ‘शैडो आर्मी’ को सटीकता और योजना के साथ हाई-प्रोफाइल आतंकवादी अभियानों को अंजाम देने के लिए जाना जाता है।

यह समूह पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर दोनों में टारगेटेड हत्याओं, बम विस्फोटों और समन्वित हमलों की एक श्रृंखला के पीछे रहा है। विश्लेषकों द्वारा इसे इस क्षेत्र की सबसे खतरनाक और प्रभावी जिहादी गुट में से एक बताया गया है। आतंकवाद निरोधक केंद्र के अनुसार, दक्षिण एशिया से परे, सीआईए ने विभिन्न यूरोपीय शहरों में ब्रिगेड 313 के गुर्गों की जानकारी ली है। इससे अंतरराष्ट्रीय खतरे भी पता चलता है।

बीबीसी के अनुसार, यह समूह हूजी के भीतर एक विशेष लड़ाकू इकाई है। यह भारत में भयानक मिशन को अंजाम देने में लगा रहता है। समूह से जुड़े आतंकवादियों ने कथित तौर पर पाकिस्तान की सेना और खुफिया नेटवर्क की मौन सहमति या सक्रिय समर्थन के साथ ऑपरेशन किए।

समूह की संचालन संरचना, भर्ती रणनीति और कई आतंकी संगठनों से सदस्यों के एकीकरण ने इसे वैश्विक जिहादी परिदृश्य में एक शक्तिशाली ताकत बना दिया है। जबकि कश्मीरी में सेना के अभियान ने घाटी में इसे कमजोर किया है। ब्रिगेड 313 की कट्टर विचारधारा और नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय चिंता का कारण बने हुए हैं।

भारतीय तट के पास धू-धू कर जल रहा था सिंगापुर का जहाज, इंडियन नेवी ने सवार 18 लोगों की बचाई जान: इनमें 14 चीनी, बीजिंग ने जताया आभार

केरल के तट के पास समंदर में आग से जूझ रहे एक जहाज को भारतीय नौसेना ने अपनी दिलेरी से बचा लिया। यह जहाज सिंगापुर का था और इसमें 14 चीनी नागरिक सवार थे। इस बड़े बचाव अभियान के लिए चीन ने भारत का दिल से शुक्रिया अदा किया है।

कैसे लगी जहाज में आग?

सोमवार (9 जून 2025) की सुबह, केरल के कोझिकोड के पास एमवी वान हाई 503 नाम के सिंगापुर के एक बड़े कंटेनर जहाज में अचानक ज़ोरदार धमाका हुआ और फिर आग लग गई। इस जहाज पर कुल 22 क्रू मेंबर थे, जिनमें से 14 चीन के नागरिक थे और इनमें से 6 ताइवान से थे। जैसे ही भारतीय नौसेना को इस घटना की खबर मिली, उन्होंने बिना देर किए तुरंत कार्रवाई की।

आईएनएस सूरत नाम का नौसेना का एक जहाज कोच्चि बंदरगाह से तुरंत मौके पर भेजा गया। भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने भी बचाव के लिए कई जहाज और एक विमान को भेजा। आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया, लेकिन जहाज से घना धुआँ निकल रहा था।

सोमवार (9 जून 2025) देर रात तक 18 क्रू मेंबर को बचाकर सुरक्षित मंगलुरु लाया गया, लेकिन 4 लोग अभी भी लापता हैं। इस घटना में एक चीनी इंजीनियर बुरी तरह घायल हो गया है, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

चीन ने जताया आभार

भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भारतीय नौसेना और मुंबई कोस्ट गार्ड की जमकर तारीफ की और इस बचाव अभियान के लिए उनका शुक्रिया अदा किया। यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर लिखा, “हम भारतीय नौसेना और मुंबई कोस्ट गार्ड की ओर से किए गए बचाव अभियान के लिए आभार व्यक्त करते हैं। हम चाहते हैं कि आगे के सर्च ऑपरेशन भी कामयाब रहें और घायल क्रू मेंबर जल्दी ठीक हों।”

इसके अलावा, इस घटना के बाद संभावित तेल रिसाव (oil spill) को लेकर अधिकारियों ने मंगलवार (10 जून 2025) को चेतावनी जारी की है, ताकि समंदर में प्रदूषण न फैले। यह घटना अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भारतीय नौसेना की मुस्तैदी का एक बड़ा उदाहरण है।