गाजा पर कब्जा जमाए बैठे फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास ने अमेरिका के एक प्रस्ताव के जवाब में बड़ा बयान दिया है। उसने कहा कि वह 10 जिंदा बंधकों को रिहा करने और 18 मृत इजरायली बंधकों के शव सौंपने को तैयार है। लेकिन इसके बदले उसकी दो बड़ी माँगें हैं: पहला – गाजा पट्टी से इजरायली सेना की पूरी तरह वापसी, और दूसरा – युद्ध का स्थाई अंत। यह जवाब शनिवार (31 मई 2025) को आया, जब हमास ने अमेरिका के प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
अमेरिका का प्रस्ताव इजरायल के सामरिक मामलों के मंत्री और प्रमुख वार्ताकार रॉन डेरमर की सहमति से तैयार किया गया था। इस प्रस्ताव में 60 दिनों के युद्धविराम की बात थी, जिसके बाद इजरायल को फिर से युद्ध शुरू करने का विकल्प दिया गया था। इसके अलावा, इस दौरान गाजा में संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में मानवीय सहायता को बहाल करने की योजना भी शामिल थी। इजरायल ने इस प्रस्ताव को पहले ही स्वीकार कर लिया था।
हमास ने अपने जवाब में साफ किया कि वह 28 बंधकों की रिहाई के लिए तैयार है, जिनमें 10 जीवित हैं और 18 मृत। उसने यह भी कहा कि वह इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के बदले इन बंधकों को छोड़ेगा। हमास का कहना है कि उसका लक्ष्य सिर्फ अस्थाई राहत नहीं, बल्कि स्थाई युद्धविराम और गाजा से इजरायली सेना की पूरी तरह वापसी है। संगठन ने एक अलग बयान में जोर दिया कि यह प्रस्ताव युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में एक कदम होना चाहिए।
इस बीच, एक और घटनाक्रम में तनाव बढ़ गया। जॉर्डन, सऊदी अरब, मिस्र और बहरीन के विदेश मंत्रियों के साथ-साथ अरब लीग के महासचिव को रविवार (1 जून 2025) को वेस्ट बैंक के रामल्लाह में फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास से मिलने जाना था। इस मुलाकात को गाजा संकट के समाधान और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए बहुत अहम माना जा रहा था। लेकिन इजरायल ने इस यात्रा पर रोक लगा दी। इजरायल का कहना है कि वेस्ट बैंक की सीमाएँ और हवाई क्षेत्र उसके नियंत्रण में हैं, इसलिए वह इस यात्रा में कोई सहयोग नहीं करेगा।
बता दें कि फिलीस्तीन के गाजा पर हमास का करीब 2 दशकों से नियंत्रण है। गाजा पर हमास कब्जेदार की तरह है, क्योंकि फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने ही उसे कभी मान्यता नहीं दी। इजरायल हमास के संपूर्ण विनाश की प्रक्रिया में जुटा हुआ है, जबकि अपने शीर्ष कमांडरों के बारे जाने के बाद अब वो सिर्फ अपने अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रहा है।
भारतीय जनता पार्टी ने कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को अपने अभियान का चेहरा बनाने की खबरें खारिज की हैं। भाजपा ने इन्हें फर्जी खबर करार दिया है। पार्टी ने कहा है कि वह ऐसी कोई योजना पर काम नहीं कर रही है। मीडिया में चलाया गया था कि ऐसा भाजपा महिलाओं में पैठ बढ़ाने के लिए करेगी।
भाजपा के आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने एक्स (पहले ट्विटर) पर यह दावा करने वाली खबरों को लेकर लिखा। उन्होंने कहा, “यह फेक न्यूज है। भाजपा की कर्नल सोफिया कुरैशी या विंग कमांडर व्योमिका सिंह को अभियान का चेहरा बनाने की कोई योजना नहीं है।”
This is #FakeNews. The BJP has no plans to use either Col Sofia Qureshi or Wing Commander Vyomika Singh as campaign faces. The comments made by BJP Minority Morcha President Jamal Siddiqui have been misconstrued. He simply made a limited point about highlighting Col Qureshi as an… pic.twitter.com/nPttvpTWMs
आगे उन्होंने बताया, “भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने कर्नल कुरैशी को समुदाय के भीतर एक सशक्त मुस्लिम महिला के उदाहरण के रूप में दिखाने को लेकर बात कही थी।”
यह खबर Times मीडिया समूह के अखबारों ने प्रमुखता से छापी थी। टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी इस खबर में बताया गया था कि 9 जून, 2025 को भाजपा को मोदी सरकार के 11 वर्ष पूरे होने पर भाजपा महिलाओं को केंद्र में रख कर यह अभियान चलाएगी।
खबर में बताया गया था कि इस काम की जिम्मेदारी भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा को सौंपी गई है। इस खबर में बताया गया था कि मोर्चा को मस्जिदों, दरगाहों और बाकी जगहों पर ऐसी चौपालें आयोजित करने का आदेश भाजपा की तरफ से दिया गया है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर में यह भी दावा किया गया था कि पार्टी इससे अल्पसंख्यक समुदाय में अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है। हालाँकि, भाजपा ने इस खबर को पूरी तरह फर्जी बताया है। गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान विश्व के सामने जानकारी देने वाला चेहरा कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ही थीं।
इससे पहले भाजपा ने दैनिक भास्कर की उस रिपोर्ट को खारिज किया था जिसमे पार्टी के घर-घर सिंदूर भेजने के अभियान चलाने का दावा किया गया था। भाजपा ने बताया था कि उसकी ऐसी कोई योजना नहीं है।
भारतीय सेना में ईसाई कमांडिंग अफसर सैमुअल कमलेसन की सेवा बहाल नहीं की जाएगी। दिल्ली हाई कोर्ट ने अफसर की सेवा में बहाली की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कमांडिंग अफसर का काम उदाहरण पेश करना होता है, विभाजन नहीं।
बता दें कि सैमुअल कमलेसन ने पेंशन और ग्रेच्युटी के बिना सेना से निरस्त किए जाने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। साथ ही माँग की थी कि उनकी सेवा फिर से बहाल की जाए, लेकिन हाई कोर्ट ने बर्खास्तगी के आदेश को बरकरार रखने का फैसला लिया है।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शलिंदर कौर की बेंच ने अफसर की याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सशस्त्र बलों में रेजिमेंटों के नाम अक्सर धर्म या क्षेत्र से जुड़े होते हैं, लेकिन इससे सेना की धर्मनिरपेक्षता और इन रेजिमेंटों में तैनात सैनिकों की छवि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
आगे कहा, “हमारे सशस्त्र बलों में सभी धर्मों, जातियों, पंथों, क्षेत्रों और आस्थाओं के कर्मी शामिल हैं, जिनका एकमात्र उद्देश्य देश को बाहरी आक्रमणों से बचाना है और इसलिए वे अपने धर्म, जाति या क्षेत्र से विभाजित होने के बजाय अपनी वर्दी से एकजुट हैं।”
कोर्ट ने अफसर को फटकारते हुए कहा, “कमांडिंग अधिकारी का काम विभाजन नहीं बल्कि उदाहरण पेश करना होता है। यूनिट में धार्मिक गतिविधियों को सबसे ऊपर रखना चाहिए। खासकर जब वे सैनिकों की कमान संभालते हैं, जिनका नेतृत्व वे युद्ध की स्थितियों और युद्ध में करेंगे।”
धार्मिक परेड में शामिल होने से किया था इनकार
सैमुअल कमलेसन मार्च 2017 में भारतीय सेना की 3 कैवलरी रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट के तौर पर नियुक्त किया गया था। इस यूनिट में सिख, जाट और राजपूत सैनिकों के 3 स्क्वाड्रन शामिल होते हैं। उन्हें स्क्वाड्रन बी का ट्रूप लीडर बनाया गया था, जिसमें अधिकतर सिख जवान शामिल थे। कमलेसन ने कहा कि उनकी रेजिमेंट में केवल मंदिर और गुरद्वारे में धार्मिक परेड होती है। परिसर में कोई सर्व धर्म स्थल नहीं है और न ही उनकी आस्था अनुसार कोई चर्च है।
कमलेसन का कहना था कि उन्होंने मंदिर के गर्भग्रह में प्रवेश करने से छूट माँगी थी। इस पर दूसरी ओर के वकीलों ने तर्क दिया कि रेजिमेंट में शामिल होने के बाद से ही अफसर परेड में शामिल नहीं होते थे। उन्हें कमांडेट और अन्य अधिकारियों ने भी समझाया, लेकिन उन्होंने किसी की न सुनी।
कोर्ट में दलील दी गई कि कमलेसन को समझाने के बावजूद उनका व्यवहार ठीक नहीं हुआ। उनका आचरण सेना के अनुशासन और रेजिमेंट के हिसाब का नहीं था। जब सारे विकल्प समाप्त हो गए थे, तब उनके कदाचार के कारण उन्हें सेवा से बर्खास्त किया गया।
गुजरात के कच्छ जिले में रेगिस्तान के रास्ते जब थकने लगते हैं तब समुद्र की गोद में बैठा एक प्राचीन शिव मंदिर दिखता है। जिसका नाम है कोटेश्वर महादेव मंदिर। यहाँ भगवान शिव स्वयं कोटेश्वर रूप में विराजमान हैं, जिन्हें ‘संपत्ति के ईश्वर’ भी कहा जाता है। कोटेश्वर मंदिर भारत की आखिरी सीमा पर स्थित है। इसके आगे सिर्फ पानी है और पाकिस्तान की सरहद।
कोटेश्वर मंदिर का गर्भग्रह (साभार : Gujarat Tourism)
मान्यताओं के अनुसार, कोटेश्वर मंदिर का संबंध रावण से भी है। कहा जाता है कि रावण ने भगवान शिव से खुश होकर शिवलिंग माँगा था, जिसे वह लंका ले जाना चाहता था। शिव जी ने उसे एक शर्त के साथ शिवलिंग दिया कि रास्ते में उसे कहीं भी ज़मीन पर नहीं रखना है, लेकिन रावण रास्ते में थक गया और उसने एक चरवाहे बालक (जो स्वयं भगवान विष्णु थे) से मदद माँगी। उस बालक ने शिवलिंग को ज़मीन पर रख दिया। फिर वो बालक भी वहीं बैठ गया। आज उसी स्थान को कोटेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है।
मंदिर का इतिहास
कोटेश्वर मंदिर का जिक्र सबसे पहले ‘स्कंद पुराण’ में मिलता है। मंदिर का विस्तार मौर्यकाल (लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व) में हुआ। इतिहासकारों के अनुसार, ये स्थान पहले बौद्ध धर्म का केंद्र भी रहा है, लेकिन धीरे-धीरे यह शिव उपासना का बड़ा स्थल बन गया। 10वीं शताब्दी में सोलंकी वंश के शासकों ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया और इसे गुजरात के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल किया। वहीं, 1819 में आए भूकंप से इस क्षेत्र को काफी नुकसान हुआ था लेकिन इसके बाद ब्रिटिश शासन में मंदिर का आंशिक पुनर्निर्माण किया गया।
मंदिर की संरचना
मंदिर की संरचना बहुत ही साधारण लेकिन प्रभावशाली है। यह पूरी तरह से पत्थरों से बना हुआ है और इसकी बनावट पारंपरिक नागर शैली में है। जो गुजरात के मंदिरों की खास पहचान होती है। मंदिर का गर्भगृह छोटा है लेकिन बेहद पवित्र माना जाता है। इसके ऊपर ऊँचा शिखर है जो दूर से ही दिखाई देता है।
कोटेश्वर मंदिर का मुख्य द्वार और मंदिर के भीतर स्थापित नंदी की मूर्ति (साभार : Gujarat Tourism)
मंदिर की दीवारों पर नजर आने वाली सादगी ही इस मंदिर की सबसे बड़ी खूबसूरती है। समुद्र के किनारे स्थित होने के कारण यहाँ हमेशा ठंडी हवा बहती रहती है जो मंदिर के वातावरण को और भी पवित्र बना देती है।
मंदिर तक कैसे पहुँचे ?
समुद्र तट पर स्थापित कोटेश्वर महादेव मंदिर (साभार : kiaayo)
कोटेश्वर मंदिर तक पहुँचने के लिए पहले भुज आना होगा। भुज से यहाँ की दूरी करीब 150 किलोमीटर है, जिसे सड़क के रास्ते से आराम से तय किया जा सकता है। भुज रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट से यहाँ के लिए टैक्सी और बसें उपलब्ध हैं। मंदिर तक जाने वाली सड़कें अब काफी बेहतर हो चुकी हैं। रास्ते में नारायण सरोवर और लखपत जैसे अन्य धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल भी पड़ते हैं, जिनका दर्शन करते हुए कोटेश्वर पहुँचा जा सकते है।
जब भी ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ और ‘धर्मनिरपेक्षता’ की बात आती है, तथाकथित उदारवादी सेक्युलर गिरोह और वोक लिबरल्स सबसे पहले सामने आते हैं। नैतिकता का चश्मा पहनकर ये लोग बाकी दुनिया को भाषण देने में माहिर हैं।
लेकिन जब बात हिन्दू भावनाओं और हिन्दू समाज पर हमलों की आती है, तब ना तो इन्हें ‘बलात्कार की धमकियाँ’ दिखाई देती है, न ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे सुनाई देते हैं। ऐसा क्या होता है कि जब भी बात हिंदुओं पे आती है तो ये मौन व्रत धारण कर लेते हैं? क्या ये वही ‘सहिष्णुता’ है, जिसकी दुहाई इन नकली उदारवादियों द्वारा दिन-रात दी जाती है?
ज़रा सोचिए, भारत में आज भी ऐसे सैकड़ों कट्टरपंथी और हिन्दू-विरोधी तत्व रोज़ खुलेआम ज़हर उगल रहे हैं, हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान कर रहे हैं, देश और राष्ट्र की संस्कृति पर हमला कर रहे हैं, सेना को गालियाँ दे रहे हैं, लेकिन उन पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं होती।
ना ही कोई गिरफ़्तारी, ना ही कोई पूछताछ। बल्कि इन लोगों को बचाया जाता है, क्योंकि इनकी पीठ पर राजनीति की छाया है, वो भी तुष्टिकरण की राजनीति की, जो इन्हें संरक्षण देती है। अगर 22 साल की शर्मिष्ठा के साथ कोई अनहोनी होती है तो उसका ज़िम्मेदार कौन होगा?
अब आइए शर्मिष्ठा पनौली की कहानी पर। पुणे के सिम्बायोसिस लॉ कॉलेज की 22 वर्षीय छात्रा शर्मिष्ठा को 30 मई 2025 को कोलकाता पुलिस ने गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया। वजह? ऑपरेशन सिंदूर पर एक इंस्टाग्राम वीडियो, जिसे उसने बाद में डिलीट कर दिया था।
पाकिस्तान की ट्रोल आर्मी की तरफ से मिलने वाली धमकियों और गाली-गलौज का जवाब देते हुए शर्मिष्ठा ने एक टिप्पणी की, जिसके बाद उसे भारत में बैठे इस्लामिक कट्टरपंथियों ने बलात्कार, हत्या और ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारों के साथ भयानक धमकियाँ देनी शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर ऐसी खतरनाक और जानलेवा धमकियों की लाइन लग गई।
इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हुई इस घिनौनी साइबर लिंचिंग के बाद शर्मिष्ठा ने न केवल वीडियो डिलीट किया बल्कि सार्वजनिक रूप से बिना किसी शर्त माफी भी माँगी। लेकिन इसके बावजूद बंगाल पुलिस, जिसकी मुर्शिदाबाद दंगों में अपनी संदिग्ध भूमिका के लिए कठोर आलोचना हुई है। वो पुलिस 1500 किलोमीटर दूर कोलकाता से गुरुग्राम आई और शर्मिष्ठा को गिरफ्तार कर अपने साथ बंगाल ले गई।
शनिवार (31 जून 2025) दोपहर अलीपुर कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद कोर्ट के आदेश पर शर्मिष्ठा को 13 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जबकि, जिन सैंकड़ों इस्लामिक कट्टरपंथियों ने शर्मिष्ठा को जान से मारने, और उसका बलात्कार करने की धमकियां दीं हुई हैं, वो सभी के सभी आज़ाद घूम रहे हैं।
अब सवाल उठता है: जो सच में ज़हर फैला रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों नहीं होती?
आज भारत में जो तत्व असली ज़हर फैला रहे हैं, वे खुद को ‘साहित्यकार’, ‘एक्टिविस्ट’, या “तथाकथित पत्रकार” के चोले में छिपाए बैठे हैं। एक ओर मोहम्मद जुबैर जैसे लोग हैं, जो हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक मीम्स फैलाते हैं और झूठे नैरेटिव गढ़ते हैं। फिर भी उन्हें ‘फैक्ट चेकर’ कहा जाता है।
उधयनिधि स्टालिन जैसे नेता सनातन धर्म को खुलेआम ‘कैंसर’ कहते हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। लीना मणिमेकलई जैसी फिल्ममेकर माँ काली को सिगरेट और LGBTQ झंडे के साथ दिखा कर कला की आड़ में अपमान करती हैं।
ये सभी नाम किसी न किसी रूप में हिन्दू-विरोध का एजेंडा फैलाने में जुटे हैं और विडंबना यह है कि इनके पीछे तथाकथित सेक्युलर ताकतों, अंतरराष्ट्रीय NGO नेटवर्क और कुछ राजनीतिक दलों का खुला समर्थन भी है।
मुर्शिदाबाद हिंसा में बंगाल पुलिस कहाँ गायब थी? और, किसके कहने पर?
अब बात करें मुर्शिदाबाद दंगों की, जहाँ हिन्दू घरों को जलाया गया, मंदिरों को अपवित्र किया गया और निर्दोष लोगों की जानें ली गईं। हरगोबिंद दास और उनके बेटे चंदन की निर्मम हत्या कर दी गई। 400 से ज़्यादा लोगों ने कुछ ही घंटों में वहाँ से पलायन कर लिया। 300 से ज़्यादा गिरफ़्तारियाँ हुईं। लेकिन असली मास्टरमाइंड आज भी कानून के शिकंजे से बाहर हैं।
कोलकाता पुलिस, जो एक 22 साल की छात्रा को गिरफ्तार करने में तेज़ी दिखाती है। वो धार्मिक मंचों से नफरत फैलाने वाले कट्टरपंथी मौलानाओं को पकड़ने में असहाय क्यों दिखती है? क्या यही तुम्हारा लोकतंत्र है?
एक ऐसा सिस्टम जो एक 22 वर्षीय छात्रा को सोशल मीडिया पोस्ट के लिए अपराधी बना देता है, लेकिन सैंकड़ों गरीब-मासूम लोगों की ज़िंदगी से खिलवाड़ करने वालों और दंगों के सूत्रधारों को हाथ तक नहीं लगाता?
वामपंथियों, लिबरल वोक ब्रिगेड और हिन्दू-विरोधी ताकतों से सीधा सवाल है: जब शर्मिष्ठा को बलात्कार और ‘सर तन से जुदा’ की धमकियाँ मिल रही थीं, तब तुम्हारी नैतिकता कहाँ सो रही थी? क्या सिर्फ़ हिन्दू देवी-देवताओं को गालियाँ देना ही तुम्हारा लोकतंत्र है?
क्या सनातनी भावनाओं को कुचलना ही तुम्हारी आज़ादी है? क्या भारत को गालियाँ देना और कोसना ही तुम्हारी अभिव्यक्ति है? क्या यही तुम्हारी ‘सेलेक्टिव डेमॉक्रेसी’ है?
तुम लोगों का ‘जेंडर जस्टिस’, ‘फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन’, और ‘सेफ स्पेस’ का चोला तब कहाँ उतर जाता है, जब पीड़ित कोई हिन्दू होता है?
भारत अब जाग चुका है और तुम्हारा दोगलापन अब सब देख रहे हैं। शर्मिष्ठा भारत की ज़िम्मेदारी है, भारत के हिंदुओं की ज़िम्मेदारी है…
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की आलोचना की, तो भाजपा की तेलंगाना इकाई ने कड़ा जवाब दिया। भाजपा ने रेड्डी के बयानों को अजीब और गैर-जिम्मेदार बताया, जो पाकिस्तान के प्रचार से मिलते-जुलते हैं।
भाजपा के तेलंगाना प्रमुख प्रवक्ता एनवी सुभाष ने शनिवार (31 मई 2025) को कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी जानबूझकर ऐसे बयान दे रहे हैं, जो भारतीयों की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं। उन्होंने रेड्डी की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर टिप्पणी की निंदा की और कहा कि यह सेना का अपमान है।
सुभाष ने कहा, “रेड्डी वही झूठे दावे दोहरा रहे हैं, जो एक अखबार ने छापे थे, लेकिन रक्षा मंत्रालय के खंडन के बाद वापस लिए गए। फिर भी, रेड्डी इन्हें दोहरा रहे हैं, शायद कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को खुश करने के लिए।”
सवाल किया कि क्या रेड्डी को भारतीय सेना पर भरोसा नहीं है। सुभाष ने AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी का जिक्र करते हुए कहा कि भले ही ओवैसी भाजपा के आलोचक हैं, लेकिन वे पाकिस्तान के धोखे को समझते हैं। मगर रेड्डी का रवैया पाकिस्तान के दावों का समर्थन करता दिखता है।
सुभाष ने रेड्डी पर राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज कर सुर्खियों में रहने का आरोप लगाया। उन्होंने तंज कसा, “रेड्डी देश के साथ एकजुटता दिखाने की बजाय मिस वर्ल्ड के साथ अखबार के पहले पन्ने पर छपना ज्यादा जरूरी समझते हैं।”
दरअसल, कॉन्ग्रेस की ‘जय हिंद यात्रा’ में रेड्डी ने कहा था कि मोदी अब ‘अमान्य 1000 रुपये के नोट’ जैसे हैं और देश को राहुल गाँधी जैसे नेता की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि राहुल अगर प्रधानमंत्री होते, तो इंदिरा गाँधी से प्रेरणा लेकर पीओके वापस ले चुके होते। उन्होंने यह भी पूछा था कि ऑपरेशन सिंदूर में कितने पाकिस्तानी लड़ाकू विमान मारे गए।
रेड्डी ने कहा कि मोदी सरकार बलूचिस्तान को आजाद कराने और पीओके पर कब्जा करने में नाकाम रही। भाजपा ने इन बयानों को गैर-ज़िम्मेदाराना कहते हुए, राष्ट्रविरोधी करार दिया है।
भारत सरकार ने शनिवार (31 मई 2025) को जम्मू-कश्मीर से लेकर गुजरात तक पाकिस्तान सीमा से सटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑपरेशन शील्ड के तहत मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस अभ्यास का उद्देश्य युद्ध जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता का परीक्षण करना था।
गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, और कश्मीर में नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट अभ्यास किए गए। ये अभ्यास ‘ऑपरेशन शील्ड’ के तहत आयोजित किया गया, जिनका उद्देश्य आपातकाल या युद्ध जैसी स्थिति में तेजी से और सही ढंग से प्रतिक्रिया देना है।
राजस्थान और हरियाणा में मुख्य सचिव सुधांश पंत ने सायरन प्रणाली को ठीक रखने और प्रतिक्रिया समय को कम करने के निर्देश दिए। बारामुला में हुई मॉक ड्रिल में एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग और एनसीसी कैडेट्स ने भाग लिया। इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की तैयारी करना है।
ऑपरेशन शील्ड मॉक ड्रिल, ऑपरेशन सिंदूर के बाद की पहली नागरिक सुरक्षा अभ्यास है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान और पीओके में स्थित आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की थी, जिसके बाद यह मॉक ड्रिल आयोजित की गई है।
नागरिकों से सहयोग की अपील
सरकार ने नागरिकों से मॉक ड्रिल के दौरान संयम बनाए रखने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। यह अभ्यास नागरिक सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता का परीक्षण करने और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिक सुरक्षा उपायों की तैयारी और प्रभावशीलता की जाँच की गई, जिससे भविष्य में किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए बेहतर रणनीतियाँ विकसित की जा सकें।
भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के तनावपूर्ण संघर्ष, जिसे दुनिया ऑपरेशन सिंदूर के नाम से जानती है। उसने भारतीय सेना का जौहर देखा। इस संघर्ष में भारत ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना कि थोड़ा-बहुत नुकसान हुआ। हालाँकि भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने साफ किया कि नुकसान की संख्या से ज्यादा जरूरी है ये समझना कि गलतियाँ कहाँ हुईं और उन्हें कैसे सुधारा गया।
इस लेख में हम ब्लूमबर्ग के साथ उनकी बातचीत, पाकिस्तान के दावों, विपक्ष के सवालों, और इस ऑपरेशन की असल जीत को समझने की कोशिश करेंगे। साथ ही उन लोगों की सोच को भी साफ करने की कोशिश करेंगे, जो भारत की इस जीत को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं।
सिंगापुर में शांगरी-ला डायलॉग के दौरान जनरल अनिल चौहान ने ब्लूमबर्ग टीवी को दिए इंटरव्यू में ऑपरेशन सिंदूर पर खुलकर बात की। उन्होंने माना कि मई में हुए इस संघर्ष में भारत को कुछ नुकसान हुआ। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा, “महत्वपूर्ण ये नहीं कि जेट्स गिरे, बल्कि ये है कि वे क्यों गिरे।” उनके मुताबिक, भारत ने अपनी टैक्टिकल गलतियाँ समझीं, उन्हें सुधारा और सिर्फ दो दिन बाद अपने ‘सारे जेट्स’ फिर से उड़ाए। इन जेट्स ने लंबी दूरी के टारगेट्स पर सटीक हमले किए।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट
जनरल चौहान ने बताया कि भारत ने पाकिस्तान के अंदर, 300 किलोमीटर गहराई तक, भारी हवाई रक्षा वाले एयरफील्ड्स पर शानदार एक्यूरेसी के साथ हमले किए। ये भारत की सैन्य ताकत और उसकी तकनीकी क्षमता का सबूत है। उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान के साथ संचार के चैनल हमेशा खुले रहे, जिससे स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली। न्यूक्लियर युद्ध की आशंका पर उन्होंने कहा कि ये सोचना ‘बहुत दूर की बात’ है कि दोनों में से कोई देश न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल करने की कगार पर था। उनके मुताबिक, पारंपरिक युद्ध और न्यूक्लियर थ्रेशोल्ड के बीच काफी स्पेस है, जिसमें कई ‘स्तर’ हैं, इनका इस्तेमाल करके हालात को संभाला जा सकता है।
बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहले दावा किया था कि उनकी फौज ने छह भारतीय फाइटर जेट्स को मार गिराया। लेकिन उनके इस दावे को जनरल चौहान ने ‘एकदम गलत’ बताकर खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जेट्स की संख्या से ज्यादा जरूरी है गलतियों को समझना और सुधारना।
India’s military confirmed for the first time that it lost an unspecified number of fighter jets in clashes with Pakistan in May, while saying the four-day conflict never came close to the point of nuclear war. https://t.co/LFu0Um9sFn
पाकिस्तान ने ये भी दावा किया कि उसने चीन और अन्य देशों से मिले हथियारों का इस्तेमाल किया, जो बहुत प्रभावी रहे। जनरल चौहान ने इन दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि ये हथियार ‘काम के ही नहीं’ थे। भारत के डिफेंस मिनिस्ट्री के एक रिसर्च ग्रुप ने भी पुष्टि की कि चीन ने पाकिस्तान को हवाई रक्षा और सैटेलाइट सपोर्ट दिया था, लेकिन भारत ने फिर भी उनके एयरफील्ड्स पर सटीक हमले किए।
जनरल चौहान के बयान के बाद सोशल मीडिया पर सवालों की बौछार शुरू हो गई। कुछ लोग पूछने लगे कि आखिर कितने जेट्स खोए गए? क्या भारत की सेना ने कोई बड़ी गलती की? विपक्ष, खासकर कॉन्ग्रेस, ने इस मौके को भुनाने की कोशिश की और सरकार पर सवालों की झड़ी लगा दी। लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ जेट्स के नुकसान पर फोकस करना सही है? ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने अपने मकसद हासिल किए – आतंकी ठिकाने नष्ट किए, पाकिस्तानी एयरबेस तबाह हुए और 100 से ज्यादा आतंकी और पाकिस्तानी फौजी मारे गए। फिर भी कुछ लोग भारत की इस जीत को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर से भारत को मिली असली जीत
युद्ध में नुकसान होना कोई नई बात नहीं है। दुनिया की कोई भी सेना, चाहे वो कितनी भी ताकतवर हो, युद्ध में नुकसान से बच नहीं सकती। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने जो हासिल किया, वो इस नुकसान से कहीं बड़ा है। आइए इसे कुछ प्वॉइंट्स में आपको समझाते हैं-
आतंकी ठिकानों का खात्मा: भारत ने पाकिस्तान के अंदर मस्जिदों में छिपे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। ये ठिकाने आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह थे, लेकिन भारत ने उन्हें ध्वस्त कर दिया। ये ऑपरेशन 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे।
पाकिस्तानी एयरबेस को नुकसान: भारत ने 11 पाकिस्तानी एयरबेस को निशाना बनाया। ये भारत की सैन्य रणनीति और तकनीकी क्षमता का सबूत है।
100+ आतंकी और पाक फौजी हुए ढेर: भारत ने न सिर्फ आतंकियों को मारा, बल्कि पाकिस्तानी फौज को भी भारी नुकसान पहुँचाया। ये भारत की जीत का साफ संदेश है।
सभी पायलट सुरक्षित: सबसे बड़ी बात, भारत के सारे पायलट सुरक्षित घर लौट आए। ये अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
ये नतीजे दिखाते हैं कि भारत ने न सिर्फ अपने मकसद पूरे किए, बल्कि दुनिया को बता दिया कि वो अपनी जनता की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। फिर कुछ नुकसान पर इतना हंगामा क्यों?
कॉन्ग्रेस ने पूछे सवाल, लेकिन इरादों पर उठ रहे सवाल
कॉन्ग्रेस ने सीडीएस के बयान के बाद इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस लगातार सवाल पूछ रही है कि पहलगाम हमले के आतंकी कब पकड़े जाएँगे? पुलवामा में RDX किसने लाया? पाकिस्तान के साथ सीजफायर की शर्तें क्या थीं? सीजफायर किसके दबाव में हुआ? पहलगाम में अपने पति खोने वाली महिलाओं को न्याय मिला या नहीं? ऑपरेशन सिंदूर से क्या सबक सीखा गया, जैसा कि CDS ने भी कहा? अब कम से कम बीजेपी हमें सवाल पूछने वालों को देशद्रोही नहीं कहेगी।” इसके अलावा मल्लिकार्जुन खड़गे भी सवाल उठाने वाले नेताओं में शामिल हो गए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पवन खेड़ा की कुटिल मुस्कान पर भी नजर डालना चाहिए।
#WATCH | Delhi: Congress leaders Pawan Khera says "Congress is continuously asking questions like when will the terrorists of Pahalgam attack get caught, who bought RDX in Pulwama, and what were the conditions for ceasefire with Pakistan?… We want strong answers to the strong… pic.twitter.com/yQw2zsMi3H
पवन खेड़ा के इस बयान से लगता है कि कॉन्ग्रेस को भारत की इस जीत से ज्यादा खुशी नहीं है। उनके सवालों का लहजा और उनकी बॉडी लैंग्वेज ये बताती है कि वो जेट्स के नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना चाहते हैं। लेकिन जनरल चौहान ने साफ कहा कि गलतियाँ सुधारी गईं और दो दिन बाद भारत के सारे जेट्स फिर से उड़ान भर रहे थे। ‘सारे’ का मतलब साफ है, फिर भी कॉन्ग्रेस इस बात को नजरअंदाज कर रही है। ऐसा लगता है कि वो जानबूझकर भारतीय सेना की ताकत पर सवाल उठाना चाहती है।
वैसे, खुद पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ मान चुके हैं कि भारत-पाकिस्तान के इस 4 दिनी जंग में पाकिस्तान को बहुत नुकसान हुआ। पाकिस्तान खुद भारत पर हमले करना चाहता था, लेकिन उससे पहले ही भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला बोलकर उसे पंगु कर दिया और पाकिस्तानी फौज जवाबी कार्रवाई तक में सक्षम नहीं रह गई। शरीफ ने अजरबैजान में साफ कहा कि भारत ने ब्रह्मोस से हमले किए, जिसने उसकी क्षमताओं को नष्ट कर दिया।
Pakistan PM Shehbaz Sharif admits that India hit their airbases with BrahMos before 'Aand forces' could act.
साल 1967 की सिक्स-डे वॉर में इजरायल ने 250 लड़ाकू जेट्स के साथ सिर्फ 352 उड़ानों (Sorties) में 600 विमानों वाली दुश्मन सेनाओं को हरा दिया। उन्होंने दुश्मनों के 452 जेट्स को नष्ट किया, जिसमें से 79 फाइटर जेट्स को डॉग फाइट में ढेर कर दिए गए। इस दौरान इजरायल ने अपने 46 फाइटर जेट्स खोए। इजरायल ने इस युद्ध में शानदार जीत दर्ज की, भले ही उसे 46 फाइटर जेट्स का नुकसान हुआ। लेकिन क्या कभी किसी इजरायली ने सवाल उठाया कि ‘हमने कितने जेट्स खोए?’ नहीं! क्योंकि एक राष्ट्रवादी के लिए जीत मायने रखती है, न कि छोटे-मोटे नुकसान।
भारत के मामले में भी यही बात लागू होती है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने अपने मकसद पूरे किए। आतंकी ठिकाने, एयरबेस, और दुश्मन सैनिकों को नुकसान पहुँचाया। यह जीत नहीं तो और क्या है? जो लोग भारत के जेट्स के नुकसान पर सवाल उठा रहे हैं, वे देश की ताकत और सेना के शौर्य को कमजोर करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? क्या वे नहीं चाहते कि भारत आतंकियों को सबक सिखाए? क्या वे चाहते हैं कि पाकिस्तान के झूठे दावों को सच माना जाए?
जो लोग भारत की सेना पर सवाल उठा रहे हैं, उनसे एक सीधा सवाल: आपके लिए देश की सुरक्षा और सम्मान ज्यादा जरूरी है या फिर सियासत और विदेशी फंडिंग से चलने वाला एजेंडा? अगर भारत ने आतंकी ठिकानों को तबाह किया, पाकिस्तान को सबक सिखाया और अपने सैनिकों को सुरक्षित वापस लाया, तो क्या यह जीत नहीं है? आप क्यों सिर्फ नुकसान की बात कर रहे हैं? क्या आप चाहते हैं कि भारत चुप रहे और आतंकी हमले सहता रहे? देश की सेना पर उंगली उठाने से पहले अपने इरादों पर सवाल उठाइए।
ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य ताकत और उसकी दृढ़ता का प्रतीक है। ये ऑपरेशन एक साफ संदेश है कि भारत अपनी जनता की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। जो लोग इस जीत को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए ये उपलब्धि दिल तोड़ने वाली हो सकती है। लेकिन राष्ट्रवादियों के लिए ये गर्व का पल है।
कोलंबिया ने शुक्रवार (30 मई 2025) को भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तानी जनहानि पर अपनी संवेदना वाले विवादास्पद बयान को वापस लिया। यह फैसला कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के वरिष्ठ कोलंबियाई अधिकारियों से आतंकवाद और आत्मरक्षा पर भारत की स्थिति स्पष्ट करने के बाद हुआ। इसके बाद कोलंबिया ने भारत के प्रति समर्थन का संदेश जारी किया।
#WATCH | Colombia officially withdraws its earlier statement that it issued expressing condolences on the loss of lives in Pakistan after the Indian strikes; earlier, Shashi Tharoor, who is leading the all-party delegation, raised concern and said – we (India) were a little… pic.twitter.com/iVFmLUl1yP
कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल बहु-राष्ट्रीय यात्रा के तहत पनामा और गुयाना होते हुए कोलंबिया पहुँचा। गौरतलब है कि कोलंबिया ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों द्वारा किए गए हिंदूओं के नरसंहार पर चुप्पी साधे रखी थी जबकि इसके जवाबी एक्शन में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में हुए नुकसान पर संवेदना जताई थी। इसे लेकर थरूर ने बोगोटा पहुँचकर कोलंबिया की इस प्रतिक्रिया पर निराशा जताई।
Began today with an excellent meeting with the Vice Minister of Foreign Affairs of Colombia, Rosa Yolanda Villavicencio, and her senior colleagues dealing with the Asia-Pacific. I expressed India’s view of recent events and voiced disappointment at Colombia’s statement on 8 May… pic.twitter.com/OdRoUIguJl
इस भारतीय प्रतिनिधिमंडल में भाजपा और कॉन्ग्रेस के सांसद शामिल थे। उन्होंने कोलंबियाई अधिकारियों को बताया कि ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम में 26 हिंदुओं की हत्या वाले आतंकी हमले के जवाब में किया गया था। प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी वाली वे फोटोज भी दिखाई, जो मारे गए आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में शामिल थे। सांसद शशि थरूर ने कहा, “हम आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। आतंकवादियों और उनका विरोध करने वालों की तुलना नहीं की जा सकती।”
#WATCH | Bogotá, Colombia | Congress MP Shashi Tharoor says, "There (in Pakistan) was a well-publicised funeral of one of the terrorists on the sanctions list. That funeral was attended by uniformed senior military and police personnel from Pakistan. That is the extent of… pic.twitter.com/ASPpVPFYnW
कोलंबिया की उप-विदेश मंत्री रोसा योलांडा विलाविसेनियो से बैठक के बाद सांसद शशि थरूर ने कहा कि कोलंबिया का भारत पर दिया गया विवादास्पद बयान वापस ले लिया है। थरूर ने कहा, “यह अच्छी खबर है, उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया है और हमारे रुख के समर्थन में एक सकारात्मक बयान जारी किया है।” एएनआई से बात करते हुए कोलंबिया की मंत्री ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल के विस्तृत स्पष्टीकरण के बाद कोलंबिया को अब साफ तौर पर स्थिति का अंदाजा हो रहा है। इस पर आगे भी संवाद जारी रहेगा।
कोलंबिया के रुख में आए बदलाव ने दोनों देशों की कूटनीति को प्रभावी ढंग से पेश किया है। भाजपा नेता और पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि कोलंबिया ने भारत-विरोधी बयान वापस लेकर आतंकवाद पर भारत के रुख को स्वीकार किया है। भाजपा सांसद शशांक मणि ने कोलंबिया को उसके आतंकवाद प्रभावित इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि वह भारत की स्थिति को बेहतर समझ सकता है। उन्होंने कहा, “हम शांति का संदेश लेकर आए हैं, लेकिन हर आतंकी हमले का ठोस जवाब देंगे।”
कोलंबिया, जो जल्द ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य बनेगा, अब पाकिस्तान की बजाय भारत के साथ खड़ा है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल अपना अगला दौरा ब्राजील और अमेरिका में करेगा। यह भारत की कूटनीतिक सफलता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ उसके कड़े रुख को स्पष्ट करता है।
हिंदू सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा को शुक्रवार (30 मई 2025) को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी तब हुई जब शर्मिष्ठा को इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ऑनलाइन ‘डॉक्सिंग’ का शिकार बना रही थी और उनके साथ रेप करने से लेकर ‘सर तन से जुदा’ की भी धमकियाँ मिल रही थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शर्मिष्ठा को ‘सर तन से जुदा’ जैसी धमकियाँ देने वाले इस्लामी कट्टरपंथी सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय ममता बनर्जी की पुलिस ने शर्मिष्ठा को ही पकड़ लिया। कोलकाता पुलिस इसके लिए 1500 किलोमीटर का सफर तय करके गुरुग्राम तक पहुँच गई।
सोशल मीडिया एक्टिविस्ट सुनैना होले का कहना है कि पुलिस के पास कोई उचित दस्तावेज या वारंट नहीं था, लेकिन वे मजिस्ट्रेट का आदेश लेने में कामयाब रहे।
यही नहीं, शर्मिष्ठा को कोलकाता पुलिस अपने साथ ले गई और शनिवार (31 मई 2025) को उन्हें कोलकाता की अलीपुर कोर्ट में पेश किया। इस दौरान कोर्ट से शर्मिष्ठा को बेल नहीं मिली और उन्हें जेल भेज दिया गया।
#WATCH | Kolkata: Sharmistha Panoli, arrested from Gurugram by Kolkata Police for allegedly hurting religious sentiments through her comments on social media, produced in Alipore Court in Kolkata. pic.twitter.com/T1NQCruPAm
यह विवाद 14 मई को शुरू हुआ जब एक पाकिस्तानी मुस्लिम हैंडल ने पहलगाम आतंकी हमले में 24 हिंदुओं के नरसंहार को छिपाने की कोशिश की। इस हमले में इस्लामी आतंकवादियों ने पीड़ितों की धार्मिक पहचान की पुष्टि करने के बाद उनकी हत्या की थी।
शर्मिष्ठा ने गुस्से में उस पाकिस्तानी हैंडल का मजाक उड़ाया और पूछा कि क्या उन्हें पहलगाम और अन्य पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमलों की जानकारी है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या भारतीय सेना को इन हमलों के खिलाफ कुछ नहीं करना चाहिए। इसके बाद कुछ पाकिस्तानी और भारतीय मुस्लिम यूजर्स ने शर्मिष्ठा के वीडियो को गलत संदर्भ में लेकर इस्लाम और पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगाया।
शर्मिष्ठा को मिल रही धमकियों के स्क्रीनशॉट
इसके बाद दोनों देशों के कुछ मुस्लिम यूजर्स ने शर्मिष्ठा को बलात्कार, मौत और ‘सर तन से जुदा’ की धमकियाँ देना शुरू कर दिया। भारतीय मुस्लिम यूजर्स ने पुलिस को टैग करके शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी की माँग की।
शर्मिष्ठा ने दबाव में आकर अपना वीडियो डिलीट कर दिया और बिना शर्त माफी भी माँगी। लेकिन कोलकाता पुलिस ने धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय शर्मिष्ठा को गिरफ्तार करने के लिए गुरुग्राम तक का सफर तय करना ज्यादा पसंद किया। ऐसे में शर्मिष्ठा के खिलाफ कोलकाता पुलिस की ये कार्रवाई कई सवाल भी खड़े कर रही है, जो समय के साथ सामने आते जाएँगे।