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इंदौर का चूड़ीवाला तस्लीम अली गिरफ्तार, गोलू बन 13 साल की बच्ची से की थी छेड़खानी

मध्य प्रदेश की इंदौर पुलिस ने 25 वर्षीय तस्लीम अली को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर 13 साल की बच्ची से छेड़खानी के आरोप में POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इससे पहले वायरल वीडियो के आधार पर उसके साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (पूर्व) शशिकांत कंकाने ने उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बुधवार को उसे कोर्ट में पेश किया जा सकता है। एएसपी ईस्ट जोन-3 प्रशांत चौबे का कहना है कि अली की रिमांड कोर्ट से पुलिस नहीं माँगेगी। वहीं उसके छोटे भाई जमाल अली ने कहा है कि परिवार को उससे नहीं मिलने दिया गया है।

ज्ञात हो कि यह घटना तब सुर्खियों में आई थी जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो साझा किया गया, जिसमें चूड़ी विक्रेता तस्लीम अली को लोगों के एक समूह द्वारा पीटते हुए दिखाया गया था। वीडियो में एक शख्स उसकी पिटाई कर रहा था और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए उकसा रहा था। इस वीडियो पर नेटिजन्स के एक वर्ग ने जमकर भड़ास निकाली थी।

बाद में मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया था कि उसके पास से दो आधार कार्ड मिले थे और वह अपनी पहचान छिपाकर चूड़ी बेच रहा था। इस मामले में 13 साल की नाबालिग ने अपनी शिकायत में कहा था कि 22 अगस्त को गोलू बनकर तस्लीम अली उसके घर आया था और उसके साथ छेड़खानी की। नाबालिग लड़की ने कहा था कि अली ने उसे चूड़ियाँ बेचने के लिए अपनी पहचान छुपाई और ‘आधा जला’ आधार कार्ड दिखाते हुए खुद को गोलू बताया। लड़की ने कहा, “वह रविवार दोपहर करीब 2 बजे हमारे घर आया था, जब मेरे पिता बाहर थे। उसने अपनी पहचान गोलू के रूप में बताई और आधा जला हुआ आधार कार्ड दिखाया। हमने उससे चूड़ियाँ खरीदना शुरू किया। जैसे ही मेरी माँ पैसे लेने गई, चूड़ी-विक्रेता ने मुझे गंदी नजर से देखते हुए मेरा हाथ पकड़ कर कहा, “मैं तुम्हें चूड़ियाँ पहनने में मदद करूँगा’। उसने मेरे गालों को भी गलत तरीके से छुआ।”

पीड़िता का कहना था कि जब आरोपित ने उसे छुआ तो वह चीख पड़ी। इससे पीड़िता की माँ घबरा गई और उसे बचाने के लिए दौड़ी, जिसके बाद अली ने कथित तौर पर लड़की को धमकाया और भाग गया। इस बीच पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया। इंदौर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) और IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 471 (फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में उपयोग करना) के तहत मामला दर्ज किया था।

दारू पीकर ‘राहुल गाँधी’ ने सूरत में किया हंगामा, इंस्पेक्टर को दी देख लेने की धमकी: ₹30 लाख की ऑडी कार जब्त

गुजरात में ‘राहुल गाँधी’ ने नशे की हालत में जम कर हंगामा मचाया है। नशे में धुत ‘राहुल गाँधी’ को सूरत पुलिस ने हंगामा करने के आरोप में गिरफ्तार किया, जिसके बाद उसे फिर जमानत दे दी गई। असल में गुजरात के सूरत के अथवा स्थित पनास गाम के रहने वाले ‘राहुल गाँधी’ शहर के खटोदरा रोड में उपद्रव कर के लोगों को परेशान करते हुए देखा गया। सूचना मिलने के बाद पुलिस वहाँ पहुँची।

असल में ये ‘राहुल गाँधी’ कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नहीं, इसी नाम का कोई और व्यक्ति है। गुजरात में शराब पे पूर्ण प्रतिबंध है। ऐसे में उस पर प्रोहिबिशन लॉ के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसने अपनी ऑडी कार में जम कर दारू पी और फिर लोगों को परेशान किया। 30 लाख रुपए की उस ऑडी कार को पुलिस ने जब्त कर लिया है। उक्त ‘राहुल गाँधी’ को जब पुलिस थाने ले जाया गया, तो उसने वहाँ भी हंगामा खड़ा कर दिया।

फ़िलहाल उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया है। उसने पुलिस इंस्पेक्टर को भी देख लेने की धमकी दी। पुलिस ने उसे लॉकअप में रखा हुआ था। उसने बताया कि वो सिटिलाइट के राजलक्ष्मी बंगलो का रहने वाला है।

जहाँ लिंग स्वरूप में मौजूद हैं ब्रह्मा-विष्णु-महेश, स्तंभों से निकलते हैं संगीत के सुर: कन्याकुमारी का स्थानुमलयन मंदिर

भारत की मुख्य भूमि के दक्षिणतम छोर पर स्थित तमिलनाडु के कन्याकुमारी से करीब 13 किमी दूर सुचिन्द्रम में स्थानुमलयन/ थानुमलयन नामक एक प्राचीन मंदिर स्थापित है। यहाँ भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महादेव तीनों विराजमान हैं और वो भी लिंग स्वरूप में। मंदिर अपने म्यूजिकल पिलर्स (स्तंभ) के लिए भी जाना जाता है। इन स्तंभों को थपथपाने पर संगीत की ध्वनि उत्पन्न होती है।

इतिहास

इस स्थान का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। पहले इस स्थान पर अरण्य नामक सघन वन हुआ करता था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर गौतम ऋषि के श्राप से मुक्त होने के लिए देवताओं के राजा इंद्र ने तपस्या करके गर्म घी से स्नान कर स्वयं को पापमुक्त किया था। उन्होंने अर्धरात्रि में पूजा प्रारम्भ की थी और पूजा संपन्न होने पर देवलोक को प्रस्थान किया था। तभी से इस स्थान का नाम सुचिन्द्रम पड़ा। यह नाम स्थल पुराण द्वारा दिया गया है।

स्थानु का अर्थ है भगवान शिव, मल का अर्थ है भगवान विष्णु और अय का अर्थ है ब्रह्मा जी, इस प्रकार जहाँ ये तीनों विराजमान हैं उस स्थान का नाम स्थानुमलयन पड़ा। तमिलनाडु का हिस्सा बनने से पहले कन्याकुमारी, त्रावणकोर राज्य का एक हिस्सा हुआ करता था। मंदिर का जीर्णोद्धार 17वीं शताब्दी में हुआ, लेकिन मंदिर के कई शिलालेखों से 8वीं और 15वीं शताब्दी में मंदिर के निर्माण की जानकारी मिलती है।

संरचना

कन्याकुमारी का स्थानुमलयन मंदिर अपनी अद्भुत संरचना के लिए जाना जाता है। सबसे पहले मंदिर का प्रमुख आकर्षण यहाँ निर्मित सफेद रंग का गोपुरम है। 134 फुट ऊँचे इस गोपुरम में अनेकों देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ उकेरी गई हैं। मंदिर के दक्षिणी भाग में एक बड़ा जलकुंड है, जहाँ से मंदिर की गतिविधियों के लिए जल लाया जाता है। मंदिर के गर्भगृह के नजदीक भगवान विष्णु को समर्पित एक मंदिर है जहाँ उनकी अष्टधातु से बनी हुई प्रतिमा स्थापित है।

इसके अलावा गर्भगृह के दाईं ओर भगवान राम और माता सीता का मंदिर एवं बाईं ओर गणेश जी का मंदिर स्थापित है। मंदिर परिसर में ऐसे ही लगभग 30 छोटे-छोटे मंदिर हैं जो कैलाशनाथ, गरुड़ एवं मुरुगन स्वामी आदि को समर्पित हैं। मंदिर का प्रमुख आकर्षण है एक ही ग्रेनाइट पत्थर से बनाई गई हनुमान जी की लगभग 22 फुट की प्रतिमा। हनुमान जी के अलावा 21 फुट लंबी, 10 फुट चौड़ी और 13 फुट ऊँची एक ही पत्थर से बनी लगभग 900 वर्ष पुरानी नंदी की प्रतिमा भी श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है। मंदिर के गर्भगृह में लिंग रूप में तीनों देवता (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) विराजमान हैं।

स्थानुमलयन मंदिर में 1035 स्तंभ हैं जिनमें से 18 फुट ऊँचे 4 ऐसे स्तंभ हैं जो म्यूजिकल पिलर्स या संगीत स्तंभ कहे जाते हैं। एक ही ग्रेनाइट पत्थर से बनाए गए ये स्तंभ थपथपाए जाने पर संगीत की ध्वनि उत्पन्न करते हैं। संगीत की यह ध्वनियाँ इतनी स्पष्ट हैं कि इन्हें सुनने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो कोई कुशल संगीतकार किसी वाद्ययंत्र का उपयोग कर संगीत की धुन उत्पन्न कर रहा हो।

सुचिन्द्रम के इस मंदिर अपने त्योहारों के लिए भी जाना जाता है। 10 दिवसीय कार उत्सव यहाँ का प्रमुख त्योहार है जो दिसंबर अथवा जनवरी में मनाया जाता है। इसके अलावा अगस्त में अवनि उत्सव, अप्रैल में चितिराई उत्सव और मार्च में मासी उत्सव भी मंदिर के प्रमुख त्योहार हैं।

कैसे पहुँचे?

कन्याकुमारी पहुँचने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा तिरुवनंतपुरम में स्थित है, जो सुचिन्द्रम के स्थानुमलयन मंदिर से लगभग 77 किमी की दूरी पर है। मंदिर से कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन की दूरी लगभग 12 किमी है जो तमिलनाडु के प्रमुख शहरों से रेलमार्ग के द्वारा जुड़ा हुआ है। इसके अलावा तमिलनाडु और केरल के कई प्रमुख शहरों से राज्य परिवहन सेवा का उपयोग कर कन्याकुमारी पहुँच सकते हैं, जहाँ से सुचिन्द्रम पहुँचने के लिए कई स्थानीय साधन भी उपलब्ध हैं।

भोजन करते गिरफ्तारी, आधी रात को जमानत: नारायण राणे के बेटे का ‘करारा जवाब’ वाला वीडियो, जारी रहेगी जन आशीर्वाद यात्रा

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री नारायण राणे को गिरफ़्तारी के कुछ ही घंटों बाद जमानत मिल गई। राज्य सभा के सदस्य नारायण राणे को मंगलवार (24 अगस्त, 2021) को महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर टिप्पणी करने का आरोप लगा कई धाराओं में 5 FIR दर्ज की गई थी। रायगढ़ के मलाड में मजिस्ट्रेट की अदालत में उन्हें पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जमानत मिली

नारायण राणे को उनकी गिरफ़्तारी के 9 घंटों बाद जमानत मिली। भाजपा इस दौरान मजबूती से नारायण राणे के साथ खड़ी रही। पार्टी ने कहा कि भले ही वो उनके बयान का समर्थन नहीं करती हो, लेकिन उनकी गिरफ़्तारी संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन है। शिवसेना कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह भाजपा दफ्तरों पर हमले किए। मलाड, पुणे, जलगाँव, ठाणे और पुणे में उनके खिलाफ FIR दर्ज हुए। उनकी जन-आशीर्वाद यात्रा पर पहले से कई FIR दर्ज हैं।

नारायण राणे को अदालत ने आदेश दिया है कि वो 31 अगस्त और 13 सितंबर को रत्नागिरी पुलिस के समक्ष हाजिरी दें। जाँच में सहयोग करने का निर्देश देते हुए उन्हें आगे इस तरह के ‘अपराध’ न करने की चेतावनी भी दी गई है। लगभग आधी रात को नारायण राणे जमानत पर रिहा होकर बाहर निकले। उनकी गिरफ़्तारी के दौरान उन्हें भोजन भी नहीं करने दिया गया था। वीडियो में देखा गया था कि भोजन करने के वक्त ही 69 वर्षीय राणे को गिरफ्तार कर लिया गया था।

विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष प्रवीण दरेकर ने बताया कि नारायण राणे मुंबई पहुँच गए हैं। वो एक दिन आराम करेंगे और उसके बाद जन-आशीर्वाद यात्रा यथावत शुरू हो जाएगी। मलाड के मजिस्ट्रेट ने माना कि पुलिस ने गिरफ्तार से पहले हाईकोर्ट द्वारा बताए गए नियमों का पालन नहीं किया। इस सम्बन्ध में एसपी से जवाब माँगा गया है। पुलिस को आदेश दिया गया है कि वो 7 दिनों का नोटिस देकर वॉइस सैम्पल जुटाए।

नारायण राणे को 15,000 रुपए का पर्सनल बॉन्ड भरने के बाद जमानत मिली। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि सिंधदुर्ग में लोगों के जुटान पर प्रतिबंध हटना चाहिए, नहीं तो प्रतिबंध के बावजूद वहाँ जन-आशीर्वाद यात्रा निकाली जाएगी। उन्होंने कहा कि कई बार अदालत ने सरकार को झटका दिया है, ऐसा नहीं चल सकता। नारायण राणे अब अपने खिलाफ FIRs के विरुद्ध बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करेंगे। नारायण राणे के बेटे विधायक नीतेश राणे ने ट्विटर पर फिल्म राजनीति के ‘करारा जवाब’ डॉयलॉग वाला वीडियो पोस्ट किया है।

औरंगाबाद में भाजपा कार्यकर्ताओं ने नारायण राणे की गिरफ़्तारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे के पुतले भी जलाए गए। नारायण राणे के वकील ने नियम बताते हुए कहा कि गिरफ्तारी से पहले उन्हें नोटिस तक नहीं दिया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि इस राज्य में शरजील उस्मानी खुला घूम रहा है और एक केंद्रीय मंत्री को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने इसे बदले की कार्रवाई बताया।

बता दें कि कभी शिवसेना में रहे नारायण राणे 1999 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे, जब बाल ठाकरे ने उनके नाम पर मुहर लगाई थी। साढ़े 8 महीने के उनके छोटे से कार्यकाल के बाद भाजपा-शिवसेना गठबंधन की हार हुई थी। जुलाई 2005 में बाल ठाकरे ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया, जिसके बाद वो कॉन्ग्रेस में गए थे। सितंबर 2017 में उन्होंने ‘महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष’ नाम से अपनी पार्टी बनाई। हालाँकि, अक्टूबर 2019 में उन्होंने इसका भाजपा में विलय कर दिया।

आरोप के अनुसार, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने कहा था, “ये शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को ये नहीं पता कि हमें स्वतंत्र हुए कितने वर्ष हुए हैं। अपने भाषण के दौरान उन्होंने पीछे मुड़कर अपने सहयोगी से पूछा था। अगर मैं वहाँ होता तो उन्हें जोरदार थप्पड़ मारता।” मुंबई में नारायण राणे के घर के बाहर उनकी तस्वीरें जलाई गईं। शिवसेना के कार्यकर्ता पार्टी का झंडा लेकर उनके घर का घेराव करने पहुँचे थे।

‘तालिबान से जान का खतरा, भारत में CAA लागू होने का डर’: अफगानियों ने दिल्ली में UNHCR के सामने किया प्रदर्शन, रखी ये तीन माँग

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद भारत में रह रहे अफगान नागरिकों को स्वदेश लौटने का डर सता रहा है। साथ ही वे भारत में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने के बाद उनका क्या होगा, से सोच कर भी घबरा रहे हैं। इसके चलते पिछले एक हफ्ते से 21 हजार से ज्यादा अफगानी रिफ्यूजी दफ्तरों और दूतावासों के चक्कर काट रहे हैं और रिफ्यूजी कार्ड की माँग कर रहे हैं।

इसको लेकर सोमवार (23 अगस्त) को सैकड़ों की संख्या में अफगानियों ने दिल्ली स्थित यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजीस (UNHCR) दफ्तर के सामने प्रदर्शन किया, ताकि उन्हें दूसरे देशों की नागरिकता मिल सके। उन्होंने माँग की है कि सभी शरणार्थियों को रिफ्यूजी कार्ड दिए जाएँ। इसके अलावा उन्होंने किसी विकासशील देश में उन्हें बसाए जाने की योजना लाने की भी माँग की।

30 वर्षीय अबदुल्ला नवरोज, जो पेशे से इंजीनियर हैं, साल 2017 में अफगानिस्तान में अपनी जान को खतरा होने पर वहाँ से भाग कर भारत आ गए थे। उनका कहना है कि अब अफगानिस्तान लौटने की सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं। हमारी UNHCR से तीन माँगे हैं। पहला रिफ्यूजी कार्ड जारी करने के जो क्लोज्ड केस हैं, उनको रीओपन किया जाए। दूसरा रिफ्यूजियों को UNHCR का पहचान पत्र दिया जाना चाहिए, तीसरा हमारा थर्ड कंट्री में रीसैटलमेंट किया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स में ह्यूमेनेटेरियन एंड इंटरनेशनल के प्रमुख सुधांशु शेखर का कहना है, ”सभी अफगानी शरणार्थियों को UNHCR कार्ड नहीं मिला है, जिनको यह मिला भी है, उन्हें भी बतौर रिफ्यूजी ज्यादा सुविधाएँ नहीं मिल पाई हैं। कई अफगानी रिफ्यूजियों को नौकरी पाने की इजाजत नहीं है। इसलिए जॉब मॉर्केट में इनका शोषण किया जाता है। महिलाओं को देह व्यापार में आने के लिए दबाव बनाया जाता है।”

मालूम हो कि भारत में CAA लागू होने पर हिंदुओं को भारतीय नागरिकता आसानी से मिल जाएगी, लेकिन मुस्लिम रिफ्यूजियों के लिए इससे संकट पैदा हो जाएगा। हालाँकि, ज्यादातर रिफ्यूजी चाहते हैं कि UNHCR द्वारा उनका थर्ड कंट्री सैटलमेंट कराए जाए। बताया जा रहा है कि यूरोप के अलावा दुनिया के कई बड़े देशों ने अपने यहाँ अफगानी रिफ्यूजियों को शरण देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में इन अफगानियों का थर्ड कंट्री सैटलमेंट होना एक बड़ी चुनौती है।

बता दें कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद कई अफगान नागरिकों को अपनी जान का खतरा है और वो मुल्क छोड़ कर भाग रहे हैं। ऐसी स्थिति में भारत सरकार यहाँ आने की इच्छा रखने वालों को आपात स्थिति के तहत वीजा दे सकती है, जो पहले 6 महीने के लिए वैध रहेगा। ऑनलाइन याचिकाओं पर नई दिल्ली में विचार किया जाएगा। हालाँकि, भारत ने यूएन रिफ्यूजी कन्वेंशन पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।

‘तालिबान हमारा यार, वो हमारे लिए करेगा कश्मीर फतह’: अब इमरान खान की पार्टी की नेता ने TV पर पकाया खयाली पुलाव, लगी फटकार

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद पाकिस्तान में बैठे कुछ लोग फूले नहीं समा रहे। हाल में इमरान खान की पार्टी नेता नीलम इरशाद शेख ने कहा है कि आने वाले समय में तालिबान कश्मीर पर फतह करेगा और उसे पाकिस्तान को दे देगा।

पाकिस्तान के एक निजी न्यूज चैनल पर तालिबान पर हो रही एक डिबेट के दौरान पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की नेता नीलम इरशाद शेख ने कहा है कि तालिबान पाकिस्तान के साथ है। वह आएगा और वो कश्मीर जीतकर पाकिस्तान को दे देगा।

अब नीलम इरशाद का यही बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि पाकिस्तान गलतफहमी में जी रहा है तो कुछ बता रहे हैं कि ऐसे ही पाकिस्तान के कश्मीर पर नापाक इरादे उजागर होते रहते हैं।

पीटीआई नेता के इस बयान के बाद शो होस्ट करने वाले एंकर ने कहा भी कि क्या इरशाद जानती हैं कि उन्होंने कहा क्या है या वो बस वॉट्सएप फॉर्वर्ड मेसेज से पढ़कर ऐसी बातें कह रही हैं। एंकर ने बार-बार पूछा कि तालिबान पाकिस्तान को कश्मीर जीत कर देगा, ये उन्हें किसने बताया? इस पर इरशाद ने कहा कि क्या वो देख नहीं पा रहे कि आज के समय में पाकिस्तान की कितनी इज्जत हो रही है। इमरान खान की कितनी इज्जत हो रही है।

एंकर बार-बार चेतावनी देते हैं कि इरशाद शांत हो जाएँ। प्रोग्राम ऑन एयर जाएगा। इसे भारत में भी देखेंगे। हालाँकि, इरशाद अपने कहे में सुधार करने के बजाय कहती हैं कि भारत ने जो पाकिस्तान के टुकड़े किए हुए हैं वो इंशाल्लाह जुड़ जाएँगे। एंकर फिर पूछता है कि तालिबान की बात वो कैसे लेकर आईं। लेकिन वो बार-बार दोहराती हैं कि पाकिस्तान की फौज के पास ताकत है और उनकी हुकूमत के पास ताकत है। तालिबान साथ देगा और उन्हें कश्मीर मिल जाएगा।

‘खालिस्तानी आतंकी पन्नू पंजाब को तालिबान के सहारे आजाद कराने का देख रहा ख्वाब’: PM मोदी को दे डाली गीदड़भभकी, देखें वीडियो

खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने मंगलवार (24 अगस्त) को एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उनके प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने घोषणा की है कि उनका संगठन भारत से पंजाब को आजाद कराने के लिए तालिबान से मदद माँगेगा।

वीडियो में पन्नू ने कहा कि अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा भारत के लिए एक संदेश है कि जनता की आजादी की लड़ाई तब तक जारी रहती है, जब तक कि उन्हें शासकों से आजादी नहीं मिल जाती। उसने आगे कहा कि सिख 1984 से पंजाब को भारत से मुक्त कराने की कोशिश कर रहे हैं।

पन्नू ने कहा कि उनका संगठन 2022 में पंजाब के विधानसभा चुनावों के साथ जनमत संग्रह के लिए मतदान कराएगा। उसने कहा कि अगर भारत सरकार ने जनमत संग्रह के लिए मतदान को रोकने की कोशिश की, तो दिल्ली का नामो निशान मिटा देंगे। वीडियो के बैकग्राउंड में बिजली कड़कने और बादलों के गरजने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। पन्नू ने बैकग्राउंड में इन आवाजों को जोड़कर इसके माध्यम से PM मोदी को चेतावनी देने का प्रयास किया है। इसके लिए वीडियो में निम्नस्तरीय एडिटिंग भी की है।

मालूम हो कि एसएफजे ने स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी, मुख्यमंत्रियों और अन्य नेताओं को राष्ट्रीय ध्वज फहराने से रोकने वाले को नकद इनाम देने की घोषणा की थी। उसने गणतंत्र दिवस पर खालिस्तानी झंडा फहराने वालों के लिए जनवरी में भी इसी तरह के नकद इनाम की घोषणा की थी। हालाँकि, इस बार उसकी महत्वाकांक्षी योजनाएँ कारगर साबित नहीं हुई और स्वतंत्रता दिवस समारोह में कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई।

तालिबान से मदद माँगेगा एसएफजे: पन्नू

पन्नू ने सिखों को तालिबान की तरह ही सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा। उसने कहा कि एसएफजे पंजाब के लिए शांतिपूर्ण समाधान की माँग कर रहा है और विधानसभा चुनावों के साथ-साथ जनमत संग्रह भी कराएगा।

पन्नू के वीडियो का स्क्रीनशॉट जिसमें बैकग्राउंड में तालिबानी नेता दिखाई दे रहे हैं। (यूट्यूब)

उसने कहा, “आप दुनिया में एक संदेश फैला रहे हैं कि तालिबान हिंसक है, लेकिन सिखों के खिलाफ सबसे बड़ा आतंकवाद भारत द्वारा फैलाया गया है।” उसने आगे कहा, “अगर यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, अमेरिका ने तालिबान को मान्यता दी, तो एसएफजे खालिस्तान जनमत संग्रह के समर्थन के लिए उनसे संपर्क करेगा। वोट से या फौज से। एसएफजे केसरी, खंडा, खालिस्तान, टुकड़े टुकड़े कर देंगे हिंदुस्तान में विश्वास करता है।”

एसएफजे ने अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जा करने के बाद उसे बधाई देते हुए एक पत्र भी जारी किया है। इसमें लिखा है, “जैसे ही प्रमुख पश्चिमी शक्तियाँ तालिबान शासन को मान्यता देती हैं, वैसे ही अलगाववादी समूह जनमत संग्रह के माध्यम से खालिस्तान की स्थापना के लिए मदद माँगने के लिए तालिबान से संपर्क करेगा।”

दिलचस्प बात यह है कि पन्नू यह उल्लेख करना भूल गया कि तालिबान के कारण लोग डरे हुए हैं, अफगानिस्तान में दहशत का माहौल है। देश पर कब्जा करने के बाद सिख अफगानिस्तान छोड़ रहे हैं। मंगलवार (24 अगस्त) को सिख अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अफगानिस्तान से गुरु ग्रंथ साहिब जी के हाथ से लिखे तीन स्वरुप भी भारत लाए।

SFJ ने इसके लिए एक वेबसाइट भी लॉन्च की, जिसे भारतीय अधिकारियों ने प्रतिबंधित कर दिया है। एसएफजे ने दावा किया कि वह पंजाब से पहले विभिन्न देशों में जनमत संग्रह के लिए मतदान करेगा। अक्टूबर में यह स्विट्ज़रलैंड में होगा, उसके बाद कनाडा और अन्य स्थानों पर होगा।

एसएफजे का भारत के खिलाफ जहरीले वीडियो का इतिहास

यह पहली बार नहीं है, जब एसएफजे ने भारत के खिलाफ इस तरह के वीडियो जारी किए हैं। पिछले दिनों एसएफजे ने कई वीडियो जारी कर सिख युवाओं को खालिस्तान आंदोलन में शामिल होने के लिए कहा था। गणतंत्र दिवस से पहले एसएफजे ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उसने गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर अपना झंडा फहराने वाले को नकद इनाम देने की घोषणा की। साथ ही उसने किसान आंदोलन का समर्थन करने की घोषणा भी की थी।

#Muhammad: The #Pocso Criminal’ – नादिर शाह की ‘यीशु’ के जवाब में आ रही फिल्म, बवाल की संभावना

मजहबी विवादों के कारण अक्सर चर्चा में रहने वाले केरल राज्य में अब मुस्लिम और ईसाई समूह अपने मतभेदों को फिल्म की आड़ में प्रदर्शित कर रहे हैं। हाल ही में दोनों ही समूहों ने एक दूसरे के पैगंबरों के नाम पर फिल्म रिलीज करने की घोषणा की।

रिपोर्ट के मुताबिक, पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मॉलीवुड के निर्देशक नादिर शाह ने अपनी फिल्म ‘यीशु: नॉट फ्रॉम द बाइबल’ को निर्देशित करना शुरू किया। इस फिल्म में एक्टर के तौर पर जयसूर्या लीड में हैं। इसी फिल्म ने राज्य के ईसाइयों को गुस्सा दिलाया। नादिर शाह ने दावा किया कि फिल्म में इस्तेमाल हुआ नाम यीशु एक कैरेक्टर है न कि ईसा-मसीह। मगर, ईसाई समूहों ने एक न सुनी।

पूर्व विधायक पीसी जॉर्ज ने नादिर शाह पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि पूरा मॉलीवुड इस्लामी चरमपंथियों द्वारा कंट्रोल किया जा रहा है।

इस विवाद के बावजूद फेसबुक पोस्ट में 2 अगस्त को नादिर शाह ने कहा कि वो अपनी फिल्म का नाम नहीं बदलेंगे। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, “इस फिल्म का ईश्वर के पुत्र जीसस से कोई लेना-देना नहीं है, जिनका मैं बहुत सम्मान करता हूँ। यह सिर्फ एक पात्र का नाम है। इसलिए, हमने, यह देखते हुए कि शीर्षक से ईसाई समुदाय के कुछ प्यारे भाइयों को समस्या है, इस टैगलाइन ‘नॉट फ्रॉम बाइबल’ को हटाने का फैसला किया है। 

नादिर शाह ने आगे कहा कि वह ‘सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान’ करने में विश्वास करते हैं और उनके मित्र भी सभी धर्मों के हैं। निर्देशक ने दावा किया कि फिल्म की रिलीज के बाद अगर लोगों की भावनाएँ आहत हुईं, तो उनसे कोई भी सजा स्वीकार की जाएगी।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, नादिर शाह ने फिर कहा, “फिल्म का शीर्षक नहीं बदला जा सकता है। ‘ईशो’ का टाइटल और फर्स्ट लुक तीन महीने पहले जारी किया गया था। उस वक्त कोई भी पोस्टर या टैगलाइन के खिलाफ नहीं आया। हालाँकि, पिछले हफ्ते (जुलाई के अंत) मेरी एक और फिल्म का नया रूप जारी करने के बाद, कई लोगों ने ‘ईशो’ के पोस्टर पर आपत्ति जताई।” मॉलीवुड निर्देशक ने यहाँ तक ​​दावा किया कि शीर्षक उनके ‘क्रिश्चियन’ कैमरामैन रॉबी वर्गीस ने सुझाया था।

उल्लेखनीय है कि इस फिल्म के अलावा नादिर शाह की एक और फिल्म ‘केशु ई वेदिंते नाधन (Keshu Ee Veedinte Nadhan)’ के शीर्षक के लिए भी विवाद है। हालाँकि, उस फिल्म पर भी उन्होंने कहा है कि फिल्म में मुख्य चरित्र का नाम केशवन है और उसका यीशु से कोई लेना-देना नहीं है।

अब नादिर शाह के इसी अड़ियल रवैये के कारण क्रिश्चियन एसोसिएशन एंड अलायंस फॉर सोशल एक्शन (CASA) नाम के एक फेसबुक समूह ने बाल शोषण पर एक लघु फिल्म जारी करने का फैसला किया है। फिल्म का नाम ‘मुहम्मद’ रखा गया है। मालूम हो कि ‘मुहम्मद’ भी इस्लाम के पैगंबर के नामों में से एक है। वैश्विक जागरूकता अभियान के तहत CASA 19 नवंबर यानी विश्व बाल शोषण रोकथाम दिवस पर फिल्म ‘मुहम्मद: द पॉक्सो क्रिमिनल’ रिलीज करेगा।

फेसबुक कमेंट के स्क्रीनशॉट

यह फिल्म असम के डिब्रूगढ़ जिले में एक बांग्लादेशी नागरिक मुहम्मद द्वारा 6 साल की बच्ची के बलात्कार और हत्या पर आधारित है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की शूटिंग नवंबर के पहले हफ्ते से शुरू होगी और इसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जाएगा। फिल्म का पोस्टर CASA के फेसबुक पेज ने सोमवार (23 अप्रैल) को एक पोस्ट में जारी किया। ‘मुहम्मद: द पॉक्सो क्रिमिनल’ शीर्षक वाली लघु फिल्म को केरल के ईसाइयों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। एक यूजर ने इसे जबरदस्त आइडिया बताया। वहीं दूसरे ने बताया कि मुहम्मद के आगे ये भी लिखा जाना चाहिए कि ये शब्द कुरान से नहीं लिया गया है। जैसे नादिर शाह की मूवी में है कि यीशु- नॉट फ्रॉम बाइबल लिखा गया है।

उल्लेखनीय है कि प्रतिक्रिया के तौर पर बनाई जाने वाली मुहम्मद फिल्म पर बवाल होने की संभावना है। इससे पहले भी कई बार पैगंबर मुहम्मद के नाम पर बनी फिल्मों पर हंगामा हो चुका है। कुछ साल पहले अमेरिका स्थित कॉप्टिक ग्रुप ने ‘इनोसेंस ऑफ मुसलिम्स’ ऑनलाइन फिल्म का निर्माण किया था, जिसमें पैगंबर मोहम्मद साहब के बारे में ‘अपमानजनक’ बातें कही गई थी।

बंगाल में डरी हुई बलात्कार पीड़िता ने लगाई मदद की गुहार, कहा- ‘खोज रहे हैं TMC के गुंडे, कभी भी कर सकते हैं हमला’

पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद हुई हिंसा में गैंग रेप पीड़िता रितु (बदला हुआ नाम) ने आरोप लगाया है कि टीएमसी के कुछ गुंडे उसके घर के पास आए थे और उस पर हमले करने की तैयारी कर रहे थे। पीड़िता ने आरोप लगाया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों का एक समूह उसके घर के बाहर इकट्ठा हो गया था। सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा से बात करते हुए रितु ने कहा कि 6 टीएमसी गुंडे उसके घर के पास एक पेड़ के नीचे इंतजार कर रहे हैं और अधिक लोगों को जमा करने के लिए उन्हें फोन कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की पीड़िता ने कहा कि उसे डर है कि कहीं गुंडे उसके घर पर कभी भी हमला न कर दें।

रितु ने आगे कहा कि गुंडों ने उसके चचेरे भाई से संपर्क किया था, जो उनके घर के पास किराने की दुकान चलाता है। उसके चचेरे भाई ने उसे फोन करके बताया कि गुंडे उसे पूछ रहे हैं। जब उसके भाई ने कहा कि वह किसलिए रितु के बारे में पूछ रहे हैं, इस पर उन्होंने कहा कि वे केवल रितु से ही बात करेंगे।

वकील मोनिका अरोड़ा से बात करते हुए पीड़िता ने कहा कि उन्हें आखिरकार टीएमसी के गुंडों की माँगों को स्वीकार करना पड़ा, जो पार्टी में शामिल होने के लिए उनका पीछा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हालाँकि वह पार्टी में शामिल हो गई हैं, लेकिन वह कभी इसका हिस्सा नहीं बनेंगी। उन्होंने आगे कहा कि वह खुद को और अपने पिता को पिछले कई दिनों से लगातार मिल रही धमकियों और बदनामी से बचाने के लिए टीएमसी में शामिल हुई हैं।

रितु ने आगे कहा कि उनके पिता ने उन्हें केवल एक शो करने के लिए पार्टी में शामिल होने की सलाह दी थी। उन्होंने उसे आश्वासन दिया था कि सीबीआई के हस्तक्षेप के कारण वे सुरक्षित रहेंगे और यह उन्हें रोज़मर्रा के उत्पीड़न से दूर रखने का काम करेगी।

टीएमसी के गुंडे बार-बार रितु पर पार्टी में शामिल होने का दबाव बना रहे हैं

26 जुलाई को ऑपइंडिया की संपादक ने 2 मई को पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस की विधानसभा चुनाव में जीत के बाद टीएमसी के अत्याचारों की शिकार हुई रितु से बात की। उसने बताया था कि कैसे राज्य पुलिस और टीएमसी के गुंडों द्वारा उस पर लगातार अपना बयान वापस लेने और टीएमसी में शामिल होने या फिर गंभीर परिणाम भुगतने के लिए दबाव डाला जा रहा था।

29 जुलाई को ऑपइंडिया ने बताया कि कैसे 28 जुलाई को रितु को स्थानीय टीएमसी बदमाश मामून शेख से मिलने के लिए ले जाया गया था, जिसके कहने पर 2 मई, 2021 को टीएमसी के गुंडों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया था। उन्होंने उस पर बलात्कार की शिकायत वापस लेने के लिए भी दबाव डाला। साथ ही टीएमसी में शामिल होने या गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट मोनिका अरोड़ा को अपनी दुर्दशा के बारे में बताया था और उसके बाद एनएचआरसी में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

NHRC में शिकायत दर्ज

28 जुलाई को NHRC में दर्ज शिकायत में रितु (बदला हुआ नाम) ने बताया कि कैसे शिकायत दर्ज करने के बाद से उसे TMC से धमकियाँ मिल रही थीं। रितु और उसके पिता पर TMC के गुंडों द्वारा की बर्बरता का उल्लेख भी शिकायत में किया गया था।

उसने कहा, “मैं बेहद डरी हुई हूँ और मुझे डर है कि टीएमसी के लोग और पुलिस दोनों एक साथ हैं और मुझ पर अपनी शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं जो मैंने एनएचआरसी को दी थी।” रितु ने अपनी शिकायत में अनुरोध किया कि मेरा एकमात्र अपराध यह है कि मैं एक हिंदू हूँ और मैंने भाजपा को वोट दिया। कृपया मेरी और मेरे परिवार की जान बचाएँ।

रितु ने ऑपइंडिया से बात की

26 जुलाई को ऑपइंडिया से बात करते हुए रितु ने खुलासा किया था कि कैसे टीएमसी के गुंडों ने राज्य पुलिस की मिलीभगत से 2 मई की रात को बंगाल के कई गाँवों और कस्बों में उसे और कई अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किया था। रितु ने कहा कि भाजपा के कई पीड़ित जेल में बंद हैं, जबकि टीएमसी के अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं, इसलिए वे उनसे काफी डरी हुई थीं।

रितु ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मदद की गुहार लगाने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि उनमें कोई ‘ममता’ नहीं बची है। हालाँकि, उन्होंने पीएम मोदी से मदद की अपील की थी। पूरा इंटरव्यू जहाँ रितु ने ऑपइंडिया की संपादक नुपुर जे शर्मा के साथ अपनी दर्दनाक कहानी साझा की यहाँ पढ़ा जा सकता है।

‘योगी नहीं भोगी…इसे तो चप्पल से मारना चाहिए’ : केंद्रीय मंत्री नारायण राणे पर कार्रवाई के बाद उद्धव ठाकरे की Video वायरल, उठी गिरफ्तारी की माँग

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के ख़िलाफ़ कथिततौर पर ‘आपत्तिजनक’ बयान देने के मामले में केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की गिरफ्तारी के बाद अब सीएम उद्धव ठाकरे का एक पुराना वीडियो वायरल होना शुरू हुआ है। इस वीडियो में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए अपशब्द कहे हैं। वीडियो को शेयर करते हुए अब कुछ लोग महाराष्ट्र सीएम की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वीडियो साल 2018 की है। बयान देते समय उद्धव ठाकरे पालघर लोकसभा उपचुनाव के लिए एक रैली को संबोधित कर रहे थे। उस दौरान उद्धव ठाकरे ने योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा था, “कल आदित्यनाथ आए थे। योगी! अरे, यह तो भोगी है। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठता है, ये कैसा योगी! ये गैस का गुब्बारा है। चप्पल (खड़ाऊँ) पहनकर (छत्रपति) शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर हार पहना रहा था। उसी चप्पल से उसे मारना चाहिए।

उद्धव ठाकरे के इस बयान के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था, “मेरे अंदर उनसे (उद्धव ठाकरे से) कहीं ज्यादा शिष्टाचार है और मैं जानता हूँ कि कैसे श्रद्धांजलि दी जाती है। मुझे उनसे कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है।”

अब इसी पुरानी वीडियो के मद्देनजर प्रियंका शर्मा लिखती हैं, “उद्धव ठाकरे को योगी आदित्यनाथ पर ऐसी टिप्पणी के लिए लखनऊ की जेल में बंद कर देना चाहिए।” वहीं एक अन्य यूजर कहता है, “महाराज जी आपके बारे में इस प्राणी के तुच्छ विचार मन को अति पीड़ा देने वाले हैं। मेरी उत्तर प्रदेश पुलिस से गुज़ारिश हैं इस प्राणी को जल्द से जल्द गिरफ़्तार कर के जेल में डाला जाए। इसके ब्यान से एक योगी ही नहीं सबसे बड़े राज्य के CM का अपमान किया है।”

उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर उद्धव ठाकरे की 3 साल पुरानी वीडियो केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री नारायण राणे की गिरफ्तारी के बाद वायरल होनी शुरु हुई, जिन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने महाराष्ट्र सीएम के लिए कहा था, “ये शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को ये नहीं पता कि हमें स्वतंत्र हुए कितने वर्ष हुए हैं। अपने भाषण के दौरान उन्होंने पीछे मुड़कर अपने सहयोगी से पूछा था। अगर मैं वहाँ होता तो उन्हें जोरदार थप्पड़ मारता।”