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हॉकी में ब्रॉन्ज मेडल: 4 दशक के बाद टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम ने रचा इतिहास, जर्मनी को 5-4 से हराया

टोक्यो ओलंपिक के 14वें दिन यानी गुरुवार (5 अगस्त) को भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जर्मनी को करारी शिकस्त देकर ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा कर लिया। टीम इंडिया की इस मुकाबले में भले ही खराब शुरुआत रही हो, लेकिन दूसरे हॉफ में लगातार गोल दागकर भारत ने जर्मनी पर दबाव बना दिया और यह मैच 5-4 से अपने नाम कर लिया।

इस दमदार जीत के साथ भारत ने अपने चार दशक का सूखा खत्म कर देश को गौरवान्वित कर दिया है। भारतीय टीम ने जबरदस्त वापसी करते हुए महज 2 मिनट में मैच को 5-3 की बढ़त पर ला दिया।

शुरुआत में जर्मनी ने भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाया। जर्मनी के खिलाफ भारतीय टीम के हरमनप्रीत सिंह ने पेनाल्टी कॉर्नर से गोल किया, जिसके चलते भारत ने स्कोर को बराबरी पर ला दिया।

दूसरे हाफ का खेल शुरू होने के बाद दोनों टीमें एक दूसरे पर शिकंजा कसने के लिए गोल दागने की पूरी कोशिश की, जिससे यह मुकाबला और भी रोमांचक हो गया। इसके बाद रुपिंदर ने पेनाल्टी कॉर्नर लेते हुए भारत की ओर से मैच में चौथा गोल दागा, जिसके बाद भारत मैच में 4-3 से बढ़त बनाने में कामयाब रहा। इसी तरह भारत ने अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए जर्मनी के खिलाफ पाँचवा गोल दागकर उस पर पूरी तरह से शिकंजा कसने में सफल रहा। यह दमखम सिमरनजीत सिंह ने दिखाया।

दूसरे हाफ में यह मैच इतना रोमांचक हो जाएगा, शायद ही किसी ने सोचा होगा। भारत का गजब का प्रदर्शन काबिलेतारीफ रहा। भारत ने न सिर्फ लगातार गोल किए, बल्कि जर्मनी के खिलाड़ियों को नाको चने चबा दिया। यही कारण है कि जर्मनी की टीम दूसरे हाफ में बेहद दबाव में नजर आई।

बता दें कि टीम इंडिया 49 वर्ष (1972 ओलंपिक) बाद ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुँची थी। टोक्यो ओलंपिक में शानदार खेल दिखा रही भारतीय पुरुष हॉकी टीम को सेमीफाइनल मुकाबले में बेल्जियम से 2-5 से हार का सामना करना पड़ा था। भारत ने आखिरी बार मास्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन वह म्यूनिख ओलंपिक 1972 के बाद पहली बार सेमीफाइनल में पहुँचा था।

38 महीने में J&K में एनकाउंटर की 400 घटनाएँ: 630 आतंकी ढेर, 85 सुरक्षाबल वीरगति को प्राप्त

पिछले तीन सालों में जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के साथ 400 एनकाउंटर की घटनाएँ हुई हैं। इस एनकाउंटर में 85 सुरक्षाबल वीरगति को प्राप्त हुए और 630 आतंकियों को ढेर किया गया। ये आँकड़ा मई 2018 से जून 2021 का है। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार (4 अगस्त 2021) को राज्यसभा में एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए इस बात की जानकारी दी।

गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सरकार ने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस (बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने) की नीति अपनाई है और आतंकवादी संगठनों द्वारा दी जाने वाली चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सुरक्षा तंत्र के सुदृढ़ीकरण, राष्‍ट्र-विरोधी तत्‍वों के विरूद्ध कानून को सख्‍ती से लागू करने, घेराबंदी एवं तलाशी अभियानों में वृद्धि जैसे विभिन्‍न उपाय किए हैं।

गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सुरक्षा बल आतंकवादियों को सहायता देने का प्रयास करने वाले लोगों पर भी कड़ी नजर रखते हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई करते हैं। उन्होंने कहा कि जम्‍मू कश्‍मीर सीमा-पार से प्रायोजित और समर्थित आतंकवादी हिंसा से प्रभावित रहा है।

वहीं, सरकार ने मंगलवार (अगस्त 3, 2021) को कहा था कि जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LOC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) पर सीमापार गोलीबारी से संबंधित सभी समझौतों का पालन करने के लिए फरवरी में भारत और पाकिस्तान के बीच सहमति होने के बाद से संघर्ष विराम उल्लंघन की केवल छह घटनाएँ घटीं। नित्यानंद राय ने बताया कि 2020 में संघर्ष विराम उल्लंघन की 5,133 घटनाएँ घटीं, 2019 में ऐसी 3,479 और 2018 में 2,140 घटनाएँ घटी थीं।

नित्यानंद राय ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों के बीच हॉटलाइन पर निर्धारित बातचीत के बाद 25 फरवरी, 2021 को संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया, जिसमें भारत और पाकिस्तान दोनों ने 24-25 फरवरी, 2021 की दरमियानी रात से नियंत्रण रेखा पर और अन्य सभी क्षेत्रों में सभी समझौतों, सहमतियों और संघर्ष विराम का सख्ती से पालन करने पर सहमति जताई।

मंत्री के जवाब के मुताबिक, इस साल जनवरी में संघर्ष विराम उल्लंघन की 380 घटनाएँ घटीं, वहीं फरवरी में 278 घटनाएँ घटीं। उन्होंने ने बताया कि मार्च महीने में संघर्ष विराम उल्लंघन की एक भी घटना नहीं घटी, वहीं अप्रैल में एक, मई में तीन और जून में दो ऐसी घटनाएँ घटीं।

इसके साथ ही बुधवार को उन्होंने राज्यसभा में बताया कि 31 दिसंबर 2019 तक देश की जेलों में कैदियों की संख्या 4 लाख 78 हजार 600 थी। इसमें से 1 लाख 44 हजार 125 दोषी थे और 3 लाख 30 हजार 487 अंडर ट्रायल थे। मंत्री ने बताया कि इसमें महिला कैदियों की संख्या 19 हजार 913 थी।

जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किए हुए गुरुवार को 2 वर्ष हो रहे हैं। 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया गया था और लद्दाख को अलग करके अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था, जम्मू-कश्मीर भी अलग केंद्र शासित प्रदेश बन गया है।

अगर बायोलॉजिकल पुरुषों को महिला खेलों में खेलने पर कुछ कहा तो ब्लॉक कर देंगे: BBC ने लोगों को दी खुलेआम धमकी

बीबीसी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से हाल में एक ट्वीट करके चेतावनी दी गई है कि अगर किसी ने भी बायोलॉजिकल पुरुष के महिला खेल में प्रतिस्पर्धा करने पर सवाल उठाया, तो वह उन यूजर्स को ब्लॉक कर देंगे।

बीबीसी स्पोर्ट्स के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट ने एक पोस्ट में कहा, “बीबीसी स्पोर्ट में, हम चाहते हैं कि हमारे प्लेटफॉर्म चर्चा, रचनात्मक आलोचना, बहस और राय के लिए एक सम्मानजनक स्थान हो। हम जानते हैं कि हमारे अधिकांश फॉलोवर्स भी यही चाहते हैं। इसलिए हमारा फैसला ये है।”

अपनी चेतावनी में उन्होंने कहा, “हम अपने कमेंट सेक्शन में नफरत फैलाने वाले लोगों को ब्लॉक करेंगे। हम सबसे गंभीर मामलों की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को देंगे। हम अपने अकॉउंट को सज्जनतापूर्ण और सम्मानजनक स्थान बनाने के लिए काम करेंगे। हम सभी खेलों के अपने कवरेज को करते रहेंगे, और खेल में समानता के मुद्दों और चर्चाओं को कवर करते रहेंगे।”

संदेश में बीबीसी ने अन्य ट्विटर यूजर्स से भी ऐसे लोगों को पहचान करवाने में मदद माँगी जो नस्ल, रंग, लिंग, राष्ट्रीयता, जातीयता, विकलांगता, धर्म, कामुकता, लिंग, आयु या वर्ग के आधार पर घृणा फैलाते हैं। पोस्ट में यूजर्स से कहा गया कि ऐसे ट्वीट का यूआरएल उन्हें [email protected]  पर ईमेल करें। संदेश के अंत में कहा गया, “हम साथ मिलकर अपने सोशल मीडिया अकॉउंट्स को सभी के लिए एक सुरक्षित स्थान बनाने का प्रयास करेंगे।”

बता दें कि ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करने वाली पहली ट्रांसजेंडर महिला लॉरेल हबर्ड, जो बायोलॉजिकल पुरुष हैं,  उन पर एक लेख लिखने के कारण बीबीसी को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इस आर्टिकल में न केवल बीबीसी ने लॉरेल को सराहा था बल्कि अन्य ट्रांसजेंडरों से विभिन्न खलों में भाग लेने की अपील भी की थी।

इसी लेख पर तमाम आलोचनाओं के आने के बाद अब बीबीसी ने सीधे अपने यूजर्स को चेतावनी दी है। ये चेतावनी पहले स्पष्ट नहीं थी कि किस बारे में है, लेकिन जब बीबीसी ने लॉरेल से जुड़े एक पोस्ट पर कमेंट किया तो यह स्पष्ट हो गया।

लॉरेल के टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेने पर उठे सवाल

बीबीसी के आर्टिकल के पब्लिश होने के बाद और लॉरेल के महिला खेल में भाग लेने से एक नई बहस ट्विटर पर शुरु हो गई। लोग कहने लगे कि जब लॉरेल पैदा आदमी के तौर पर हुए और बाद में महिला बने, तो यह बराबरी का मुकाबला कैसे हुआ। बराबरी तब होती जब महिला ही महिला से प्रतिस्पर्धा करती।

यूजर्स मानने को तैयार ही नहीं है कि लॉरेल कोई औरत हैं। उनका मानना है कि वह पुरुष हैं इसलिए मैच में चीटिंग हुई। कुछ उनके अंगों को हाईलाइट करके कह रहे हैं कि लॉरेल पहले ऐसे शख्स हैं जिन्होंने आदमी होने के बाद औरतों से प्रतिस्पर्धा की।

उल्लेखनीय है कि लॉरेल हबर्ड सोमवार को ओलंपिक में भाग लेने वाली पहली ट्रांसजेंडर महिला बनीं। न्यूजीलैंड की वेट लिफ्टर ने महिलाओं के 87 किग्रा से अधिक वाले मैच के फाइनल में भाग लिया, लेकिन “स्नैच” में अपने तीनों प्रयासों में विफल रहीं।

इससे पहले 2001 में, हबर्ड नेशनल रिकॉर्ड धारक थे और घरेलू पुरुषों की प्रतियोगिताओं में कुल 300 किग्रा भार उठा रहे थे। लेकिन, उन्होंने 2001 में 23 साल की उम्र में अचानक अपना करियर छोड़ दिया। तीन दशक तक बतौर पुरुष जीवन जीने के बाद हबर्ड अचानक 2012 में 33 साल की आयु में महिला बन गए और अपना स्पोर्ट करियर शुरू किया। शुरू में इस तरह के केसों को ओलंपिक के लिए अनुमति नहीं थी। मगर, टोक्यों ओलंपिक में उनकी भागीदारी, साल 2015 में जारी एक दिशा-निर्देश का परिणाम है। जिसमें कहा गया था कि अगर कोई एथलीट आदमी से महिला बना हो तो उसे महिला श्रेणी में खेलने का हक तभी है जब उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर एक निश्चित स्तर से (10 नैनोमोल प्रति लीटर – कम से कम 12 महीनों के लिए) नीचे रहा हो।

राशिद से विकास व मंजू बानो से संजू: मुस्लिम दंपति ने की 12 साल बाद इस्लाम छोड़ हिंदू धर्म में वापसी, कहा- गलती सुधार ली

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक मुस्लिम दंपति व उसके 4 बच्चों ने धर्म परिवर्तन कर हिंदू धर्म अपना लिया है। दंपति ने बकायदा शामली कलेक्ट्रेट पहुँच कर अधिकारियों को एक शपथ पत्र दिया और बताया कि वे अब राशिद से विकास व मंजू बानो से संजू के रूप में नाम परिवर्तित करते हुए हिंदू धर्म में लौट आए हैं। दंपति का कहना है कि 12 साल पहले उनके माता-पिता ने इस्लाम अपना लिया था, लेकिन वह अब मुस्लिम धर्म में नहीं रहना चाहते हैं इसलिए हिंदू धर्म अपना रहे हैं।

12 साल बाद की हिंदू धर्म में वापसी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शामली जिले के कांधला कस्बे के राजयादगान मोहल्ले में रहने वाले राशिद पुत्र समर व मंजू बानो पत्नी राशिद बुधवार (4 अगस्त, 2021) को शामली तहसील पहुँचे। यहाँ दोनों ने खुद को पति पत्नी बताते हुए एक अधिकारियों को एक शपथ पत्र सौंपा। राशिद ने बताया कि 12 साल पहले उसके माता-पिता ने इस्लाम अपना लिया था, लेकिन वह मुस्लिम नहीं बना रहना चाहता, इसलिए उसने अपना नाम राशिद से बदलकर विकास रख लिया है। राशिद उर्फ विकास ने बताया कि उसकी पत्नी मंजू देवी व उसके चारों बच्चों ने हिंदू धर्म में वापसी कर ली है।

‘हमने अपनी गलती सुधार ली है’

राशिद ने कहा कि जब उसके माता-पिता ने धर्म परिवर्तन किया था तो उसे समझ नहीं थी, लेकिन अब वह अपनी गलती को सुधार कर हिंदू धर्म में वापसी कर रहा है। राशिद उर्फ विकास ने कहा कि वह इस मामले को लेकर शामली के एसडीएम से भी मिले थे, लेकिन उन्होंने कहा कि इस मामले को अदालत में ले जाना पड़ेगा। राशिद ने कहा कि उसके ऊपर किसी का दबाव नहीं है और वह अपनी मर्जी से इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म में वापस आना चाहता है। वहीं, राशिद की पत्नी मंजू ने कहा कि जब उसकी शादी हुई थी तब वे सब हिंदू थे, लेकिन बाद में उनके सास-ससुर ने इस्लाम अपना लिया था।

अहमदाबाद में 3 पाकिस्तानी नागरिकों ने फर्जी दस्तावेजों से ली भारत की नागरिकता: शिकायत दर्ज

गुजरात के अहमदाबाद में 3 पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके भारत के नागरिक बनने का मामला सामने आया है।

न्यूज 18 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार तीनों पाकिस्तानी नागरिक नरोडा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने में सफल रहे। रिपोर्ट के अनुसार तीनों अहमदाबाद के कुबेरनगर इलाके में रह रहे थे। मेघानीनगर पुलिस स्टेशन में इस मामले में शिकायत दर्ज की गई है।

तीनों पाकिस्तानी नागरिकों के नाम महेश पर्पियानी, सुरेश पर्पियानी और हरेश पर्पियानी है। चुनाव अधिकारी चेतन गाँधी के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग को तीनों पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से भारत की नागरिकता लेने के सम्बन्ध में लिखित शिकायत मिली थी। शिकायत मिलने के बाद जाँच की गई जिससे पता चला कि तीनों ही भारतीय नागरिक नहीं हैं।

मनसुख हिरेन की हत्या के लिए आरोपितों को दिए गए थे ₹45 लाख, चार्जशीट दायर करने के लिए NIA ने माँगा 30 दिन का समय

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने एंटीलिया के बाहर विस्फोटक मिलने के मामले और मनसुख हिरेन हत्याकांड में चार्जशीट दायर करने के लिए 30 दिनों का और समय माँगा है। एनआईए ने विशेष अदालत को बताया कि मामले में मनसुख हिरेन की हत्या के लिए आरोपितों को 45 लाख रुपए दिए गए थे।

इससे पहले विशेष अदालत ने एनआईए को 9 जून को शपथ पत्र दाखिल करने के लिए दो महीने का समय दिया था। एनआईए ने विशेष अदालत को बताया कि इस मामले में फंडिंग किसने की थी, ये पता लगाए जाने की जरूरत है। एनआईए ने अदालत को ये भी बताया कि 150 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। एक टीम ने जाँच के लिए दिल्ली जाकर भी बयान दर्ज किए हैं।

इसके अलावा एंटीलिया विस्फोटक मामले में एनआईए ने दिल्ली तिहाड़ जेल से दो फोन भी अपने कब्जे में लिए हैं। यह फोन जेल में बंद इंडियन मुजाहिदीन के कथित प्रमुख तहसीन अख्तर के पास से ज़ब्त किए गए हैं। खुद अख्तर ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि दोनों फोन उसके ही हैं। हालाँकि टेलीग्राम से मैसेज भेजने की बात पर उसने इनकार किया है।

मनसुख हिरेन की हत्या के कुछ दिन बाद उनका शव मुंब्रा की खाड़ी में मिला था। हालाँकि तब इसे आत्महत्या कहा जा रहा था। लेकिन उनकी पत्नी ने कहा था कि उनके पति की हत्या की गई है।  मनसुख हिरेन की पत्नी विमला हिरेन ने अपने पति की हत्या के मामले में वाजे को दोषी ठहराया था। वाजे के खिलाफ आईपीसी की धारा 285, 465, 473, 506(2), 120(बी) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। जिसके बाद मामले में सचिन वाजे समेत एक बाद एक कई गिरफ्तारियाँ हुईं।

मनसुख हिरेन हत्याकांड और एंटीलिया विस्फोटक मामले में एनआईए ने मुंबई पुलिस के कई पुलिस अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया है। जिनमें सचिन वाजे, रियाजुद्दीन काजी, सुनील माने और कॉन्स्टेबल विनायक शिंदे का नाम शामिल है। इन सभी पुलिस अधिकारियों को महाराष्ट्र पुलिस ने भी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इनके अलावा क्रिकेट सट्टेबाज नरेश गौर को भी गिरफ्तार किया गया है। यह सभी आरोपित फिलहाल ज्यूडिशियल कस्टडी में है। पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा समेत भी कुछ लोग गिरफ्तार किए गए थे।

गौरतलब है कि NIA ने पिछले दिनों बताया था कि उसे सीसीटीवी फुटेज मिला है, जिसमें हत्यारोपित चार मार्च को ठाणे के घोडबांदर रोड पर मनसुख के साथ देखे गए। आरोपित सतीश मुटकोरी और मनीष सोनी को पेश करते हुए एजेंसी ने उनकी हिरासत बढ़ाने की माँग की थी। एजेंसी ने कहा था कि 45 लाख रुपए के लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं। आशंका है कि इन पैसों का इस्तेमाल हिरेन की हत्या के लिए किया गया, क्योंकि वह बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे का आदेश नहीं मान रहा था।

एनआईए ने यह भी बताया था कि इस मामले में गिरफ्तार पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने आरोपी संतोष शेलार, आनंद जाधव, सतीश और मनीष को फर्जी सिम कार्ड मुहैया कराए थे। इसके अलावा सतीश, मनीष, सतीश और आनंद हत्या के बाद छुपने के लिए नेपाल भी गए थे।

दिल्ली में कमाल: फ्लाईओवर बनने से पहले ही बन गई थी उस पर मजार? विरोध कर रहे लोगों के साथ बदसलूकी, देखें वीडियो

दिल्ली में आजादपुर फ्लाईओवर के ऊपर बनी मजार के संबंध में ओ न्यूज ने 02 अगस्त 2021 को वीडियो प्रकाशित किया था। इस वीडियो में आदर्श नगर के एसएचओ के द्वारा कथित तौर पर अवैध मजार के खिलाफ आवाज उठाने वाले हिंदू युवक को कानूनी कार्रवाई के लिए धमकाते हुए देखा गया था। बाद में उस युवक को पुलिस खींचकर गाड़ी में बैठाकर ले गई।

सोशल मीडिया पर मजार की तस्वीरों के वायरल होने के बाद यह आरोप लगाया गया कि सड़क पर इस मजार का निर्माण अवैध रूप से किया गया है। इसके बाद ओ न्यूज के पत्रकार मजार के विषय में जानने के लिए गए। मजार की देखरेख करने वाले सिकंदर ने दावा किया कि मजार 1950 के पहले से बनी हुई है और उसके बाप-दादा भी इसकी देखरेख करते थे।

सिकंदर ने बताया कि फ्लाईओवर के नीचे भी एक मजार है जहाँ पीर बाबा की कब्र है। फ्लाईओवर के ऊपर बनी मजार 1982-83 के दौरान बनी। जब पत्रकार ने कहा कि 1982 में यह फ्लाईओवर था ही नहीं तब सिकंदर ने दावा किया कि मजार तब बनी जब फ्लाईओवर का निर्माण शुरू हुआ था। सिकंदर के दावे के विपरीत फ्लाईओवर का संचालन 2009 में शुरू हुआ था और 1982 में इसका निर्माण शुरू भी नहीं हुआ था।

सड़क पर बनी इस मजार के कारण हमेशा ही ट्रैफिक जाम की समस्या रही। पत्रकार ने जब मजार का विरोध कर रहे हिंदू युवक विजय गड़ारिया से चर्चा की तो विजय ने बताया कि उन्होंने खुद इस मजार को मात्र 10-12 साल पहले ही देखा। विजय ने यह भी कहा कि फ्लाईओवर पर जमीन कब्जाने के बाद उस पर मजार का निर्माण कर दिया गया।

इस बात को लेकर विजय की सिकंदर से बहस हुई, जिस पर आदर्श नगर के एसएचओ सीपी भारद्वाज ने विजय को रोका और कहा कि अगर उसे कोई समस्या है तो वह कानूनी रास्ता अपनाए। भारद्वाज ने कहा कि ऐसी समस्याओं के निपटारे के लिए दिल्ली सरकार ने धार्मिक कमेटी का निर्माण किया है और उसे (विजय) को वहाँ आवेदन देना चाहिए।

विजय, एसएचओ की बात से असंतुष्ट दिखाई दिए और उनसे चाँदनी चौक में मंदिर पर की गई कार्रवाई के बारे में पूछा तब एसएचओ भारद्वाज भड़क गए और उन्होंने कानूनी एक्शन की धमकी देते हुए विजय को पकड़ा और एक अन्य पुलिसकर्मी को उन्हें थाने ले चलने के लिए कहा। साथ ही रिपोर्टर के साथ गए कैमरामैन को भी धक्का दे दिया गया।

इसके बाद एसएचओ को आईपीसी की कुछ धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार करने की बात कहते हुए सुना गया। जब रिपोर्टर ने उनसे इस एक्शन के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि किसी के साथ (सिकंदर के लिए) ऐसे पेश नहीं आना चाहिए। इसके बाद जब सिकंदर के पक्ष लेने के बारे में पूछा गया तो एसएचओ भारद्वाज ने रिपोर्टर को ही सलाह दे डाली कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों को सड़क पर नहीं उठाना चाहिए।

एक दूसरे हिंदू व्यक्ति ने पत्रकार से कहा कि वो हिंदू हैं इसलिए उनकी बात नहीं सुनी जा रही है अगर मुस्लिम यही बात कहते तो यही दिल्ली पुलिस हाथ जोड़कर उनकी बात सुनती और उनसे कहती कि वो वही करें जो उनका मन करे। विजय को एक दिन के लिए हिरासत में रखा गया। हालाँकि उन्होंने और कुछ अन्य हिंदू कार्यकर्ताओं ने यह कहा है कि वो मजार को हटाने के लिए कदम उठाएँगे और अगर कोर्ट अथवा प्रशासन द्वारा इसे हटाने का निर्णय नहीं लिया गया तो वो खुद इसे हटा देंगे।

सोशल मीडिया पर फ्लाईओवर के ऊपर बनाई गई मजार और एसएचओ के द्वारा किए गए बर्ताव की जमकर आलोचना हुई और एसएचओ के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग भी की गई।

हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकारी जमीन पर या रोड के किनारे मजार बना दी गई हो। इसके पहले मुरादाबाद में ताहिर ने सुंदरलाल की जमीन पर यह कहते हुए मजार बना दी थी कि पीर बाबा ने उसे ऐसा करने के लिए सपने में कहा है।

धनबाद में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की मौत- हत्या या हादसा: अब सच का पता लगाएगी CBI

झारखंड के धनबाद में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की हत्या के मामले में अब जाँच का जिम्मा सीबीआई ने ले लिया है। मंगलवार (03 अगस्त 2021) को झारखंड हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने राज्य सरकार की अनुशंसा पर न्यायधीश की मौत की जाँच करने के लिए CBI को आदेशित किया।

सत्र न्यायाधीश आनंद की मौत के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एसआईटी को घटना की जाँच करने और 03 अगस्त तक उसकी रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि उसके द्वारा लगातार निगरानी की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जाँच एसआईटी ही करेगी या फिर किसी अन्य जाँच एजेंसी को इसमें शामिल किया जाएगा।

हालाँकि मंगलवार को ही सुनवाई के दौरान केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) ने कोर्ट को सूचना दी कि उसे झारखंड राज्य सरकार के द्वारा मामले की जाँच के संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है। इसके बाद कोर्ट ने CBI को मामले की जाँच की अनुमति दे दी। इसके बाद CBI इस मामले में एफआईआर दर्ज करेगी और राज्य सरकार को मामले से सम्बंधित सभी दस्तावेज CBI को सौंपने होंगे। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को यह आदेशित किया है कि उसके द्वारा CBI का पूरा सहयोग किया जाए।

ज्ञात हो कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद, धनबाद में सुबह की सैर के लिए निकले थे तब एक ऑटो रिक्शा ने उन्हें टक्कर मारी थी। घटना का वीडियो भी सामने आया था। इससे साफ था कि उन्हें जानबूझकर टक्कर मारी गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से उनके सिर पर किसी भारी चीज से वार करने का पता चला। यह बात भी सामने आई है कि जिस ऑटो से उन्हें टक्कर मारी गई वह पाथरडीह की सुगनी देवी का है। सुगनी के अनुसार उसका ऑटो चोरी हो गया था।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी से एक हफ्ते में रिपोर्ट माँगी थी। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद धनबाद के चर्चित रंजय हत्याकांड की सुनवाई कर रहे थे। कुछ दिन पहले ही उन्होंने यूपी के ईनामी शूटर अभिनव सिंह व अमन सिंह के गुंडे रवि ठाकुर व आनंद वर्मा की जमानत खारिज की थी। वह हजारीबाग के रहने वाले थे और 6 महीने पहले ही बोकारो से धनबाद आए थे।

2023 तक दर्शनार्थियों के लिए खुल जाएगा राम मंदिर, निर्माण के लिए मिला ₹3000 करोड़ का दान

राम मंदिर के पूरे परिसर का निर्माण भले ही 2025 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए खुशी की बात ये है कि वो दिसंबर 2023 से ही राम मंदिर में पूजा शुरू कर सकेंगे। मंदिर परिसर में ही म्यूजियम, डिजिटल आर्काइव और एक रिसर्च सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। म्यूजियम और आर्काइव के माध्य से लोग अयोध्या और राम मंदिर के इतिहास के बारे में जान सकेंगे। इसके अलावा हिंदू संस्कृति के बारे में भी बताया जाएगा। 

2025 तक भव्य राम मंदिर बनकर पूरा तैयार हो जाएगा। गर्भ गृह में भगवान राम अपने बाल रूप में विराजमान होंगे लेकिन पहली मंजिल पर राम का दरबार होगा। जिसमें श्रीराम के साथ माता सीता भी विराजमान रहेंगी। 15 सितम्बर तक राम मंदिर के प्लिंथ से पहले तक का काम पूरा हो जाएगा। पूरा परिसर 110 एकड़ का होगा। राम मंदिर परिसर का मुख्य मंदिर पूरी तरह से स्टोन का बनेगा।

राम मंदिर परिसर के निर्माण पर लगभग 1000 करोड़ रुपए खर्च होंगे। राम मंदिर ट्रस्ट को दान के रूप में अभी तक लगभग 3000 करोड़ रुपए प्राप्त हो चुके हैं। राम मंदिर निर्माण में स्टील का इस्तेमाल नहीं होगा। मंदिर में स्टील की जगह कॉपर का इस्तेमाल किया जाएगा। कार सेवक पुरम में तराशे गए पत्थरों में से 70 फीसदी का इस्तेमाल होगा। बाकी पत्थर राजस्थान के बंशी पहाड़पुर से मँगाए जाएँगे।

CM योगी आदित्यनाथ जाएँगे अयोध्या, PM मोदी कर सकते हैं संबोधित

बता दें कि गुरुवार (5 अगस्त, 2021) को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की शुरुआत हुए एक साल पूरा हो रहा है। इस मौके पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ अयोध्या का दौरा करेंगे। बताया जा रहा है कि इस इवेंट को पीएम नरेंद्र मोदी भी वर्चुअली संबोधित कर सकते हैं।

5 अगस्त, 2020 को पीएम मोदी ने किया था भूमि पूजन

बीते साल कोरोना पाबंदियों के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था। अयोध्या में आयोजित सरकारी कार्यक्रम के तहत 100 से अधिक लोगों को पीएम गरीब कल्‍याण अन्‍न योजना का लाभ दिया जाएगा। इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात में योजना के लाभार्थियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की थी।

अर्जेंटीना ने मैच जीता, भारतीय लड़कियों ने दिल: सेमीफाइनल में 2-1 से हारने के बाद भी हो रही महिला हॉकी टीम की तारीफ

टोक्यो ओलंपिक्स 2020 में ऑस्ट्रेलिया को हराकर सेमीफाइनल्स में एंट्री लेने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम पहले ही हर किसी के दिल में उतर चुकी थीं, लेकिन आज अर्जेंटीना से उनके मुकाबले के बाद जो मायूसी उनके चेहरों पर दिखी उसने सबको निराश कर दिया। ये मायूसी सिर्फ सेमीफाइनल में 2-1 से पिछड़ जाने की थी, क्योंकि उनकी कोशिशें तो ऐसी थी कि जिसने सभी का दिल जीत लिया।

मैच के शुरुआती 5 मिनट में ही भारतीय टीम ने अपना दबदबा कायम कर लिया था। सबसे पहले गुरजीत कौर ने पेनल्टी कॉनर्र को गोल में बदलकर भारतीय टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। हालाँकि मैच के दूसरे क्वार्टर में अर्जेंटीना ने वापसी की। अर्जेंटीना की कप्तान मारिया बैरियोन्यूवो ने 18वें मिनट में एक पेनल्टी को गोल किया और मुकाबला बराबरी पर पहुँच गया। 

इसके बाद भारत को तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन टीम को उसका फायदा नहीं हुआ। तीसरे क्वार्टर में मारिया बैरियोन्यूवो ने अर्जेंटीना को बढ़त दिलाने के लिए फिर एक और पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला। इसी गोल के साथ उन्होंने बढ़त बनाई और जो मैच शुरुआत में भारत के हिस्से नजर आ रहा था वह अंत तक पूरा पलट गया। इस मैच में भारतीय डिफेंडरों ने अच्छा खेला। अब आगे कास्य पदक के लिए टीम 6 अगस्त को मैच खेलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुकाबले के बाद ट्वीट कर टीम के संघर्ष की सराहना की। उन्होंने ट्वीट किया, “एक चीज जिसे हम टोक्यो ओलंपिक में याद रखेंगे, वह है हमारी हॉकी टीमों का शानदार प्रदर्शन। आज हमारी महिला हॉकी टीम ने धैर्य के साथ खेला और शानदार कौशल दिखाया। टीम पर गर्व है। आगे के खेल और भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएँ।”