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UP के ‘मुंगेरीलाल’, दिन में देख रहे ख्वाब: अखिलेश के 400 विधायक जीतेंगे, प्रियंका गाँधी बनेंगी CM, बीजेपी को कैंडिडेट भी नहीं मिलेंगे

साल 2022 में होने वाला उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव प्रियंका गाँधी वाड्रा के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। यह बात ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) के राष्ट्रीय सचिव और यूपी के प्रभारी राजेश तिवारी ने रायपुर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही।

तिवारी ने पत्रकारों से कहा कि यूपी विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से प्रियंका ही मुख्यमंत्री पद की दावेदार होंगी। साथ ही तिवारी ने यह भी दावा किया है कि यूपी की ‘जनता’ के साथ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी प्रियंका को राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं। तिवारी ने बताया कि फिलहाल समाजवादी पार्टी या किसी अन्य राजनैतिक दल से गठबंधन की कोई बात नहीं चल रही है, ऐसे में कॉन्ग्रेस की योजना सभी विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सलाहकार तिवारी ने यह भी कहा कि यूपी में चुनाव प्रबंधन का ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’ अपनाया जाएगा। हालाँकि, तिवारी ने यह स्वीकार किया कि यूपी में जमीनी स्तर पर कॉन्ग्रेस पार्टी की पकड़ कमजोर है, ऐसे में छत्तीसगढ़ मॉडल का उपयोग करके बूथ लेवल तक कॉन्ग्रेस को पहुँचाने का कार्य किया जाएगा। यही कारण है कि यूपी कॉन्ग्रेस के 100 से अधिक पदाधिकारी छत्तीसगढ़ में प्रशिक्षण ले रहे हैं। इससे पहले प्रियंका गाँधी भी यूपी में जमीनी स्तर पर कॉन्ग्रेस की कमजोर उपस्थिति को स्वीकार कर चुकी हैं। कुछ दिन पहले ही प्रियंका ने कहा था कि कॉन्ग्रेस का लक्ष्य 2022 में भाजपा को हराना है और इसके लिए कॉन्ग्रेस हर तरह का राजनीतिक गठबंधन करने को तैयार है।

उधर सपा प्रमुख और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी विधानसभा चुनावों में ‘अभूतपूर्व’ प्रदर्शन की उम्मीद लगाते हुए यह कहा है कि उनकी पार्टी 400 सीट जीत सकती है। सपा चुनावों के मद्देनजर साइकिल यात्रा का आयोजन कर रही है। इस साइकिल यात्रा से पहले पत्रकारों से चर्चा करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि पहले उन्होंने अंदाजा लगाया था कि सपा 350 सीटें जीतेगी, लेकिन जिस तरह से जनता में नाराजगी है, उससे लगता है कि सपा 400 सीटें भी जीत सकती है। इस दौरान सपा का नया स्लोगन ‘यूपी जनादेश, आ रहे हैं अखिलेश’ जारी किया गया। अखिलेश ने यह भी दावा किया कि आज की स्थिति ऐसी है कि भाजपा के पास प्रत्याशी कम पड़ जाएंगे।

वैसे इन सभी पार्टियों के दावे के विपरीत, हाल ही में हुए एक सर्वे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के रूप में पहली पसंद बताया गया था, जबकि कॉन्ग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गाँधी सबसे निचले पायदान पर रही थीं। सर्वे के अनुसार, प्रदेश के 43% लोग योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के रूप में दोबारा देखना चाहते हैं, जबकि 14% लोगों ने प्रियंका गांधी के पक्ष में अपना समर्थन जाहिर किया। वहीं, राज्य के दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती और सपा के अखिलेश यादव के पक्ष में क्रमशः 21% और 20% लोगों ने अपना वोट दिया।

हालाँकि, जिस कोरोना वायरस महामारी को लेकर सीएम आदित्यनाथ के प्रति जनता की नाराजगी की बात अखिलेश कर रहे हैं, सर्वे के अनुसार 73% लोग Covid-19 के दौरान योगी सरकार से संतुष्ट दिखाई दिए। सर्वे में शामिल 45% लोगों ने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर से लड़ने में योगी आदित्यनाथ के प्रयास से वे ‘बहुत अधिक संतुष्ट’ हैं, जबकि 28% लोगों ने ‘कुछ हद तक संतुष्ट’ बताया।

टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली हॉकी टीम को PM मोदी का फोन, सुनिए बातचीत का ऑडियो

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जर्मनी को 5-4 के अंतर से मात देकर ब्रॉन्ज मेडल जीता। भारतीय हॉकी टीम की इस सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हॉकी खिलाड़ियों से फोन पर बातचीत की और उन्हें शुभकामनाएँ दी। पीएम से बात करते हुए हॉकी खिलाड़ियों ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा किया गया उत्साहवर्धन उनके बहुत काम आया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर बातचीत के दौरान कहा, “मनप्रीत जी आपको और पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई। आपने गजब का काम किया है। पूरा देश नाच रहा है आज।” पीएम के बधाई पर खिलाड़ी ने कहा, “धन्यवाद सर, आपकी दुआएँ हमारे साथ थीं। सर आपका जो मोटिवेशन था उसने काफी काम किया हमारी टीम के लिए।” इस पर पीएम मोदी ने कहा कि नहीं, आप लोगों की मेहनत काम कर रही थी।

पीएम ने आगे कहा, “15 अगस्त को सभी को बुलाया है तो उसी दिन मिलेंगे हमलोग।” इसके बाद उन्होंने पूछा कि पीयूष जी हैं क्या वहाँ? इस पर खिलाड़ी ने पीयूष को फोन दे दिया। पीयूष से बात करते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा, “पीयूष जी बहुत-बहुत बधाई हो आपको।”

फोन पर बात करते हुए पीयूष ने पीएम मोदी को नमस्कार किया। इसके बाद पीएम ने कहा कि आपने जो किया उस पर पूरा देश गर्व कर रहा है। जवाब में पीयूष ने कहा कि सर आपने जो प्रोत्साहन दिया था इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

पीएम ने हॉकी टीम के मुख्य कोच ग्राहम रे से भी बात की। पीएम ने कहा, “बधाई हो! आपने इतिहास रचा है।” इसके जवाब में हॉकी के कोच ने धन्यवाद दिया और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पीएम मोदी गर्व महसूस कर रहे होंगे। रे ने कहा, “सेमीफाइनल में आपके कहे शब्दों ने हमें काफी प्रोत्साहित किया।” इस पर पीएम ने कहा, “मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं। आप सभी का कठिन परिश्रम हमें परिणाम दे रहा है।”

गैर-मुस्लिमों से शादी की शरिया में इजाजत नहीं, बच्चों का कम उम्र में करें विवाह: AIMPLB

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने बुधवार (4 अगस्त 2021) को अंतर-धार्मिक विवाह के खिलाफ बयान जारी कर मुस्लिम युवकों से मुस्लिम समुदाय के भीतर ही शादी करने की अपील की है। बोर्ड का कहना है कि मुस्लिम और गैर-मुस्लिम के बीच शादी को शरिया कानून के मुताबिक इस्लाम में हराम माना गया है। इसके अलावा यह धार्मिक रूप से गलत है।

AIMPLB के कार्यवाहक महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने मुस्लिम युवाओं, आलिमों और मुस्लिम बच्चों के माता-पिता से इस संबंध में अपील की है। बोर्ड ने प्रेस नोट में गैर-मुस्लिम से शादी को गलत चलन करार देते हुए कहा कि अगर कोई मुसलमान किसी गैर-मुस्लिम से शादी करता है तो वह जिंदगी भर गलत काम करता रहेगा।

खालिद सैफुल्ला रहमानी

इस्लामिक शिक्षा न दे पाना इसका बड़ा कारण

बोर्ड के मुताबिक, मुस्लिम धर्म के बाहर जो लोग शादी कर रहे हैं, इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि उनके अम्मी-अब्बू ने उन्हें इस्लाम की सही ढंग से शिक्षा नहीं दी है। इसके साथ ही बोर्ड ने धार्मिक नेताओं और मुस्लिम बच्चों के अभिभावकों से अपने बच्चों को समुदाय में ही शादी करने के लिए मनाने की अपील की है। एक बयान में बोर्ड ने कहा है कि ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं, जहाँ मुस्लिम लड़कियों ने गैर-मुसलमानों से शादी की और बाद में उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने इस्लामिक नेताओं से अंतर-धार्मिक विवाह से होने वाले नुकसान के बारे में तकरीरों में नियमित रूप से इस विषय को उठाने का भी आग्रह किया है।

बच्चों के मोबाइल फोन पर नजर रखने की सलाह

बोर्ड ने मुस्लिम लड़के-लड़कियों के अभिभावकों को उनके फोन पर नजर रखने और उनकी गतिविधियों को ट्रैक करने की सलाह दी है। इसके साथ ही लड़कियों को को-एड स्कूलों के बजाय लड़कियों के स्कूलों में पढ़ाने का भी आग्रह किया। बोर्ड ने कहा, “अम्मी-अब्बू को चाहिए कि लड़कियों को स्कूल के अलावा घर से बाहर समय बिताने को लेकर उन्हें हतोत्साहित करे। उन्हें ये समझाना चाहिए कि केवल एक मुस्लिम ही उनकी जीवनसाथी हो सकता है।”

बोर्ड का कहना है कि जब मुस्लिम लड़के या लड़कियाँ रजिस्ट्री कार्यालय में शादी करते हैं तो शादी से पहले उनके नाम की एक लिस्ट जारी होती है। धार्मिक संगठनों, संबंधित पक्षों, मदरसों के शिक्षकों और मुस्लिम समुदाय के महत्वपूर्ण लोगों को शादी करने वाले लोगों के पास जाकर उन्हें बताना चाहिए कि इस तरह के विवाह से जीना हराम हो जाएगा।

मुस्लिम बच्चों की जल्दी शादी कर देनी चाहिए: AIMLB

मुस्लिम पर्नल लॉ बोर्ड ने मुस्लिम अभिभावकों से कम उम्र में ही अपने बच्चों की शादी करने और उसमें देरी नहीं करने का आग्रह किया है, खासकर लड़कियों के मामले में। बोर्ड ने कहा, ”विवाह में देरी भी इस तरह के अंतर-धार्मिक विवाहों का एक प्रमुख कारण है।”

लव जिहाद के बढ़ते मामले

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश भर के कई राज्यों में लव जिहाद के खिलाफ कानूनों को अमल में लाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने पहले ही जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून पारित कर दिए हैं। शरिया कानून के मुताबिक, अगर कोई गैर-मुस्लिम किसी मुस्लिम से शादी करना चाहता है तो उसे पहले अपना धर्म त्यागकर इस्लाम धर्म अपनाना होगा। ऐसा नहीं करने पर उस विवाह को फसीद या शरिया के खिलाफ माना जाएगा। ऐसे मामलों में, अन्य धर्मों के पति या पत्नी शरिया के अनुसार कई अधिकारों के हकदार नहीं होंगे।

प्रेस नोट में कहा गया है कि अगर मुस्लिम लड़कियाँ दूसरे धर्म में शादी करती हैं तो उन्हें बहुत नुकसान होता है, जबकि हकीकत में लव जिहाद या ग्रूमिंग जिहाद के मामले मुस्लिम पुरुषों से शादी करने वाली हिंदू महिलाओं के लिए अधिक घातक होते हैं। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी के लिए धर्म परिवर्तन को असंवैधानिक करार दिया था। इससे पहले अदालत ने अक्टूबर 2020 में भी इसी तरह की टिप्पणियाँ की थीं।

‘महिला हॉकी टीम ने जीता मेडल… बधाई हो… Super Stuff’ – फरहान अख्तर को सोशल मीडिया पर मिल रही गाली

बॉलीवुड अभिनेता व निर्माता फरहान अख्तर एक बार फिर से ट्रोलर्स के निशाने पर ​आ गए हैं। आज जहाँ पूरा देश भारतीय पुरुष हॉकी टीम के टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने का जश्न मना रहा है। वहीं, दूसरी ओर फरहान अख्तर ने महिला हॉकी टीम को इस जीत की बधाई देते हुए ट्वीट किया है। हालाँकि, अपनी फजीहत कराने के बाद उन्होंने तुरंत यह ट्वीट डिलीट कर दिया है। लेकिन इस ट्वीट का सोशल मीडिया यूजर्स ने स्क्रीनशॉट ले​कर इसे वायरल कर दिया है।

लोगों ने इतनी बड़ी चूक के लिए अख्तर का जमकर मजाक उड़ाया। कुछ नेटिज़न्स ने बताया कि अख्तर ने अपनी कई फिल्मों में एथलीटों की भूमिका निभाई है। हाल ही में उनकी एक बॉक्सर के जीवन पर आधारित फिल्म ‘तूफान’ रिलीज हुई है। इससे पहले उन्होंने ‘भाग मिल्खा भाग’ में दिग्गज एथलीट मिल्खा सिंह की भूमिका निभाई थी। खेल जगत की मशहूर हस्तियों का किरदार निभाने के बाद भी फरहान से ऐसी गलती होना यूजर्स को रास नहीं आई।

ट्विटर यूजर्स ने महिला हॉकी टीम को बधाई देने की हड़बड़ी पर सवाल उठाते हुए बताया कि कैसे वह पहले सीएए के विरोध में शामिल हुए थे।

यूजर्स ने फरहान का मजाक उड़ाते हुए उनकी तुलना बॉलीवुड एंटरटेनर आलिया भट्ट से की, जिनके सामान्य ज्ञान को लेकर काफी जोक्स बनाए जाते हैं।

यूजर्स ने कहा शर्म आती है, एथलिटों के जीवन पर बनी फिल्मों पर काम करने के बावजूद फरहान ने ऐसा ट्वीट किया। दरअसल, एक फिल्म में उन्होंने ओलंपिक विजेता की भूमिका निभाई थी।

कुछ ट्विटर यूजर्स ने अख्तर के इशारों-इशारों में नासमझ और कम पढ़ा लिखा भी बता दिया।

अख्तर ने बाद में एक और ट्वीट किया। इसमें उन्होंने विजेता टीम के जेंडर का जिक्र नहीं किया। उन्होंने लिखा, ”इस जीत के लिए और अपना चौथा पदक लाने के लिए टीम इंडिया पर बहुत गर्व है। सुपर स्टफ।”

कॉन्ग्रेस में डायरेक्ट सोनिया गाँधी को रिपोर्ट करेंगे प्रशांत किशोर? पंजाब CM के सलाहकार पद से दिया इस्तीफा

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के प्रधान सलाहकार रहे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा है कि वो फिलहाल कुछ वक्त के लिए पब्लिक लाइफ और एक्टिव पॉलिटिक्स से ब्रेक लेना चाहते हैं।

प्रशांत किशोर ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को लिखे पत्र में कहा, “मैं आपके प्रधान सलाहकार का पद नहीं संभाल सकता हूँ। मुझे अभी यह तय करना बाकी है कि भविष्य में क्या करना है। इसलिए आपसे निवेदन है कि मुझे इस जिम्मेदारी से मुक्त करें। मुझे चुनने के लिए धन्यवाद।”

गौरतलब है कि प्रशांत किशोर को इसी साल मार्च के महीने में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधान सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया था। इसे लेकर सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा था कि वो प्रशांत किशोर के साथ मिलकर राज्य के लोगों की बेहतरी के लिए काम करेंगे।

इस बीच मीडिया रिपोर्ट की मानें तो कॉन्ग्रेस की डूबती नैया को पार लगाने के लिए कॉन्ग्रेस आलाकमान प्रशांत किशोर को पार्टी में शामिल कराने की तैयारी कर रहा है। यह हवा तेज इसलिए भी पकड़ी क्योंकि पिछले महीने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने मंगलवार (13 जुलाई 2021) को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी से दिल्ली में उनके आवास पर मुलाकात की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक के दौरान प्रियंका गाँधी, केसी वेणुगोपाल और पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश रावत समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

हालाँकि, वो मीटिंग छत्तीसगढ़ में गहराए राजनीतिक संकट को लेकर थी, लेकिन ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें जल्द ही पार्टी में किसी बड़े पद पर शामिल किया जा सकता है।

प्रशांत किशोर की पारी की स्क्रिप्ट तैयार

रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ग्रेस में प्रशांत किशोर को शामिल किए जाने का ब्लू प्रिंट लगभग तैयार कर लिया गया है। प्रशांत किशोर की सलाह पर पार्टी में एक विशेष सलाहकार समिति का गठन किया जाएगा, जो सीधे पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को रिपोर्ट करेगा।

इसके अलावा कॉन्ग्रेस को पुनर्जीवित करने के प्रशांत किशोर के ब्लू प्रिंट पर बीते तीन सप्ताह के दौरान गहन चर्चाएँ की गई हैं। माना जा रहा है कि उनको महासचिव का पद दिया जा सकता है, ताकि वो सीधे सोनिया गाँधी को रिपोर्ट कर सकें। अब देखना ये है कि वो कॉन्ग्रेस की डूबती नैया को किस तरह से पार लगा पाते हैं।

जिस श्रीजेश ‘The Wall’ के दम पर हॉकी में मिला ब्रॉन्ज मेडल… शिवसैनिकों ने उन्हें पाकिस्तानी समझ धमकाया था

भारत के लिए आज ऐतिहासिक दिन है। टोक्यो ओलंपिक में गुरुवार (5 अगस्त) को भारत की पुरुष हॉकी टीम ने जर्मनी को 5-4 से मात देकर इतिहास रचा दिया। कांस्य पदक जीतने का श्रेय टीम के प्रत्येक खिलाड़ी को जाता है, लेकिन इस ऐतिहासिक प्रदर्शन में टीम इंडिया की ‘दीवार’ कहे जाने वाले गोलकीपर पीआर श्रीजेश का अहम योगदान रहा है।

श्रीजेश टीम इंडिया के पूर्व कप्तान भी रह चुके हैं और उनकी गिनती दिग्गज गोलकीपरों में होती है। आज भारतीय टीम के ओलंपिक में लाजवाब प्रदर्शन और शानदार जीत के बाद श्रीजेश को लेकर सालों पुराना एक वाकया लोगों के जहन में आ गया है।

बात साल 2013 की है। मुंबई मिरर में प्रकाशित एक​ रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय खिलाड़ी श्रीजेश को नहीं पहचान पाने पर शिवसैनिकों की काफी किरकिरी हुई थी। शिवसेना के प्रतिनिधि ने राष्ट्रीय भारतीय हॉकी टीम के गोलकीपर श्रीजेश से पूछा था, ”क्या आप पाकिस्तानी हैं?” ये सुनते ही श्रीजेश शॉक्ड हो गए थे। हालाँकि, उन्होंने जबाव देने में बिल्कुल भी देर नहीं लगाई। टीम इंडिया के खिलाड़ी ने शिवसैनिको से कहा था, “यार अपने इंडिया के प्लेयर को तो पहचानते नहीं हो, पाकिस्तानी प्लेयर्स को कैसे पहचानोगे।”

श्रीजेश के इस जवाब ने हॉकी इंडिया लीग में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के खिलाफ शिवसैनिकों के तथाकथित विरोध का भंडाफोड़ कर दिया था। मालूम हो कि साल 2013 में हॉकी इंडिया लीग में हिस्सा लेने के लिए भारत आए पाकिस्तानी खिलाड़ियों के विरोध में मुंबई में शिवसैनिकों ने जमकर हंगामा किया था। शिवसैनिक ने हॉकी इंडिया के दफ्तर पहुँच कर वहाँ जम कर बवाल काटा था। इसके साथ ही शिवसैनिक पाकिस्तानी खिलाड़ियों को वापस भेजने की माँग भी कर रहे थे।

शिवसैनिकों ने न केवल मुंबई मरीन टीम को महिंद्रा हॉकी स्टेडियम में अभ्यास करने से रोका, बल्कि खिलाड़ियों के ड्रेसिंग रूम में एंट्री बैन करने की भी माँग की थी। मुंबई हॉकी संघ के अधिकारियों ने करीब 150 शिवसेना के प्रदर्शनकारियों को बताया था कि आयोजन स्थल पर कोई भी पाकिस्तानी खिलाड़ी मौजूद नहीं है।

इसके बावजूद वे अपनी बात पर अड़े रहे। शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे ड्रेसिंग रूम का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को खोजने के लिए इतने बेताब थे कि उन्होंने श्रीजेश, जो वर्षों से भारतीय पुरुष हॉकी टीम का अहम हिस्सा रहे हैं, उनसे पूछा, “क्या आप पाकिस्तानी हो।” श्रीजेश ने बाद में कहा, “मुझे यह सब सुनकर बेहद अजीब लग रहा था।”

गौरतलब है कि मुंबई हॉकी एसोसिएशन के एक अधिकारी ने बाद में मिरर को बताया कि पाकिस्तानी खिलाड़ी वास्तव में आयोजन स्थल पर ही मौजूद थे। तथाकथित निरीक्षण से एक घंटे पहले पाकिस्तान के चार खिलाड़ियों महमूद राशिद, फरीद अहमद, मुहम्मद तौसीक और इमरान बट को चुपचाप स्टेडियम से बाहर निकाल कर वापस होटल ले जाया गया था।

मंदिर में इस्लामी कट्टरपंथियों ने भगवान गणेश, शिव-पार्वती की मूर्तियों को तोड़ा, जलाया भी – पाकिस्तान से वीडियो वायरल

पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आए दिन हिंदू धर्म स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादी हिंदुओं के मंदिर में घुसकर भगवान गणेश, शिव-पार्वती की मूर्तियों को तोड़ते हुए नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर में लगे झूमर, घंटे को भी तहस-नहस कर दिया और मंदिर परिसर को भी काफी नुकसान पहुँचाया।

इस वीडियो को पाकिस्तान में ‘द राइज न्यूज’ की पत्रकार और संस्थापक संपादक वींगास (Veengas) ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है। यह घटना पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रहीमयार खान के पास स्थित भोंग शहर की है। उन्होंने लिखा, “पंजाब के रहीमयार खान के गाँव भोंग के गणेश मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। एक बार फिर पाकिस्तान में हिंदुओं पर हमला किया गया।”

बताया जा रहा है कि इन आतंकियों ने पहले गणेश मंदिर में भगवान की मूर्तियों को पत्थर मारकर, लकड़ी के लट्ठ से मारकर तोड़ा। फिर इसके बाद पाकिस्‍तानी कट्टरपंथ‍ियों ने इस पूरी घटना को फेसबुक पर लाइव भी किया। वो यही नहीं रुके। घटना को अंजाम देने के बाद उन्होंने मंदिर को आग के हवाले कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब स्‍थानीय लोगों ने इसकी शिकायत पुलिस में की,तो उन्होंने हिंदुओं की बात पर कोई ध्‍यान नहीं दिया। इसके बाद पाकिस्तान में अल्‍पसंख्‍यक समुदाय ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से हस्‍तक्षेप की गुहार लगाई है।

पाकिस्‍तान के हिंदू परिषद के अध्‍यक्ष डॉक्‍टर रमेश वानकानी ने बताया, ”पंजाब प्रांत के रहीमयार खान जिले के भोंग शहर में हिंदू मंदिर में कट्टरपंथियों ने हमला किया है। इसके चलते इलाके में बुधवार को हालात तनावपूर्ण हो गए थे।” वानकानी ने बताया कि स्‍थानीय पुलिस हिंदुओं का ध्‍यान नहीं रख रही है, जो बेहद शर्मनाक है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश से अनुरोध किया गया है कि वे दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें।

मामला तूल पकड़ने के बाद जाँच करने के लिए उपायुक्त डॉ. खुरम शहजाद भोंग शरीफ गणेश मंदिर पहुँचे। लेकिन अभी तक इस मामले में किसी भी कट्टरपंथी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं, इस घटना के बाद पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय में खासा रोष है। इमरान खान की पार्टी के नेता जय कुमार धीरानी ने घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की माँग की है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भले ही यह दावा करते हुए नहीं थकते हो कि वह अपने देश में अल्पसंख्यकों को सुरक्षा दे रहे हैं। अल्पसंख्यक समुदाय के धर्मस्थलों के रख-रखाव के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है। पाकिस्तान में लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। आए दिन हिंदू धर्म स्थलों को तोड़ने की खबरें आती रहती हैं। इसके बावजूद इमरान खान का इन सभी घटनाओं पर चुप्पी साधे रहना पाकिस्तान के चेहरे ​को बेनकाब करता है।

दाँत काट घायल किया… दर्द से कराहते रवि कुमार दहिया ने फिर भी फाइनल में बनाई जगह – देखें वीडियो

जापान में चल रहे टोक्यो ओलंपिक 2021 में बुधवार (4 अगस्त 2021) का दिन भारत के लिए कई मायनों में खास रहा। भारतीय रेसलर रवि कुमार दहिया ने बुधवार को ओलंपिक कुश्ती के सेमीफाइनल में कजाखिस्तान के रेसलर नूरिस्लाम सनायेव को पटखनी दे कुश्ती के फाइनल में पहुँच गए। इस दौरान विरोधी रेसलर ने उनकी बाँह पर कसकर दाँत से काट लिया, जिससे उनकी बाँह पर गहरे निशान पड़ गए।

तमाम तकलीफों के बावजूद रवि दहिया ने देश के लिए मेडल पक्का करके ही दम लिया। उन्होंने 57 किलोग्राम भारवर्ग में कजाखिस्तान के पहलवान नूरिस्लाम को हराकर गोल्ड या सिल्वर मेडल तो पक्का कर ही लिया है। अब फाइनल में उनका मुकाबला रसियन ओलंपिक कमिटी के पहलवान जौर रिजवानोविच उगवे के खिलाफ होगा। अगर रवि उसे हरा देते हैं तो वे गोल्ड मेडल हासिल कर लेंगे।

बहरहाल, सेमीफाइनल रवि दहिया के साथ कजाखिस्तान के पहलवान के दुर्व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से विरोधी पहलवान ने नियमों के विरुद्ध जाकर इंडियन रेसलर को बुरी तरह से काटा।

ओलंपिक में यह घटना उस दौरान हुई जब रवि दहिया नूरिस्लाम से 9-2 से आगे चल रहे थे। इसी दौरान रवि के दाँव में फँसे विरोधी पहलवान ने खुद को बचाने के लिए भारतीय पहलवान को दाँत काट लिया, जिससे वो दर्द के कारण चीख रहे थे। बावजूद इसके उन्होंने जीत कर ही दम लिया।

कजाख पहलवान के इस व्यवहार को लेकर पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने भी सवाल उठाया है। उन्होंने ट्वीट किया, “यह अनुचित है। हमारे #RaviDahiya के खेल स्पिरिट को चोट नहीं पहुँचा सका। इसलिए कजाक के हारे हुए नूरिस्लाम ने उसका हाथ काट दिया। शर्मनाक! ग़ज़ब रवि आपने सीना चौड़ा कर दिया।”

गौरतलब है कि बुधवार को ही 23 वर्षीय भारतीय महिला बॉक्सर लवलीना बोरगेहेन ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक प्राप्त किया था। उन्होंने वीमेंस वेल्टरवेट (69 किलोग्राम) वर्ग में ये ख़िताब हासिल किया था। हालाँकि, सेमीफाइनल के दौरान तुर्की की बुसेनज सुरमैनेली से हार का सामना करना पड़ा।

योनि, मूत्रमार्ग, गुदा, मुँह में लिंग प्रवेश से ही रेप नहीं… जाँघों के बीच रगड़ भी बलात्कार ही: केरल हाई कोर्ट

देश में बलात्कार के मामलों में कानूनी सीमाओं के दायरे को और बड़ा करते हुए केरल हाई कोर्ट ने बुधवार (4 अगस्त 2021) को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अगर आरोपित को महिला के किसी भी अंग के साथ छेड़छाड़ करने से यौन संतुष्टि मिलती है तो ये भारतीय दंड संहिता के तहत बलात्कार माना जाएगा। फिर चाहे उसने लिंग को महिला योनि में प्रवेश कराया हो या नहीं।

हाई कोर्ट ने रेप की परिभाषा बताते कहा, “महिला के शरीर में अपनी यौन संतुष्टि के लिए किसी भी तरह का हेरफेर लिंग को उसके योनि में प्रवेश कराने के समान होता है।” जस्टिस विनोद चंद्रन और जस्टिस ज़ियाद रहमान ए ए की खंडपीठ ने नाबालिग से बलात्कार के आरोपित व्यक्ति द्वारा दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है। दरअसल, बच्ची से बलात्कार के आरोपित ने कोर्ट में याचिका दायर कर अदालत से यह जाँचने की माँग की थी कि क्या बच्ची की दो जाँघों के बीच में लिंग रगड़ना बलात्कार हो सकता है?

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आईपीसी की धारा 375 में दी गई बलात्कार की परिभाषा में पीड़िता की जाँघों के बीच जननाँग को प्रवेश कराना यौन हमला है। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने POCSO एक्ट के मामले में सुनवाई के बाद आदेश में कहा, “आईपीसी की धारा 375 में योनि, मूत्रमार्ग, गुदा और मुँह (मानव शरीर में ज्ञात छेद) में लिंग के प्रवेश के अलावा यौन संतुष्टि के लिए अगर आरोपित कल्पना करके पीड़िता के शरीर के अन्य अंगों को ऐसा आकार दे कि उसे लिंग के रगड़न से यौन सुख मिले और वीर्य स्खलन हो तो यह बलात्कार की श्रेणी में आएगा।”

अदालत ने आगे कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 375 (C) में किए गए उल्लेख के मुताबिक, ‘महिला के शरीर का कोई भी हिस्सा’ चाहे वह जाँघों के बीच की गई यौन क्रिया हो, बलात्कार की तरह है। अदालत ने कहा कि जब दो जाँघों को एक साथ जोड़कर उसके बीच में लिंग को प्रवेश कराया जाता है तो यह निश्चित रूप से आईपीसी की धारा 375 के तहत परिभाषित ‘बलात्कार’ के बराबर ही होगा।

इस्लामी आक्रांताओं की पोल खुली, सेक्युलर भी बोले ‘जय श्री राम’: राम मंदिर से ऐसे बदली भारत की राजनीतिक-सामाजिक संरचना

अयोध्या के राम मंदिर विवाद में जब सुप्रीम कोर्ट ने नियमित सुनवाई शुरू की, क्या उससे पहले किसी को उम्मीद भी थी कि अयोध्या में जन्मे भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण उनके जीते जी होगा? शायद नहीं। जिस तरह से बाबरी विध्वंस को मुद्दा बनाया गया था और इसे ऐसे पेश किया गया था कि जैसे वो अनंतकाल से वहाँ खड़ा रहा हो। जबकि सच्चाई ये थी कि उसे इस्लामी आक्रांताओं ने राम मंदिर को ध्वस्त कर के बनवाया था।

इसीलिए, जब 5 अगस्त, 2020 को अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन हुआ तो कई लोगों को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ। इसीलिए नहीं हुआ, क्योंकि पिछली सरकार ने भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया था। उस सरकार के साझीदार पूछते थे कि भगवान राम ने किस इंजीनियरिंग कॉलेज से डिग्री ली थी? सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए गए थे।

भाजपा के घोषणापत्र में राम मंदिर आज से नहीं, 90 के दशक से ही था। लेकिन, अटल बिहारी वाजपेयी की गठबंधन सरकार के दौरान इसका निर्माण संभव नहीं हो सका। भाजपा को इसे कई कारणों से कुछ दिन तक किनारे रखना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट में जब के पराशरण ने दलीलें शुरू की तो लोगों के भीतर एक आस जगी। केंद्र सरकार के पास भी इच्छाशक्ति थी, इसीलिए फैसला आते ही ट्रस्ट का गठन किया था।

राम मंदिर का निर्माण देश के राजनीतिक व सामाजिक परिदृश्य में एक बहुत बड़ी घटना है। ये 500 वर्ष पहले जो घोर अन्याय हुआ था, उसका न्याय था। इसे लेकर कई बार दंगे हुए, आंदोलन हुए और समय-समय पर अलग-अलग नायक उभरे, लेकिन इस्लामी आक्रांताओं के शासनकाल में और मुस्लिम तुष्टिकरण वाली कॉन्ग्रेस सरकारों में ये संभव नहीं हो सका। आइए, यहाँ हम राम मंदिर के बाद बदले भारतीय परिदृश्य की बात करते हैं।

भारत के समाज एवं राजनीति पर राम मंदिर का प्रभाव

राम मंदिर का निर्माण शुरू होने का प्रभाव ये हुए कि देश के सभी नेताओं को समझ आ गया कि लोगों की श्रद्धा को किनारे रख कर राजनीति नहीं की जा सकती। अब उन्होंने भी भगवान राम की शरण में आने का दिखावा शुरू कर दिया, राजनीति के लिए। एक नई प्रतिस्पर्धा चल पड़ी, जिसमें सब ‘अपने-अपने राम’ लेकर आ गए। खुद को रामभक्त साबित करने की एक होड़ सी मच गई। ये राम मंदिर के प्रति जनता की श्रद्धा का कमाल था।

जिस मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोली चलाई थी और कई रामभक्तों को मार डाला गया था, अब उनकी ही पार्टी भगवान राम की शरण में आ गई है। राम मंदिर भूमिपूजन के समय अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया देखिए। उन्होंने बड़ा ही धार्मिक होते हुए ‘जय महादेव जय सिया-राम, जय राधे-कृष्ण जय हनुमान’ लिखते हुए ट्वीट किया। किसी ‘सेक्युलर’ नेता इस तरह बयान देगा, ये शायद ही किसी ने सोचा होगा।

जिस देश में इस्लामी टोपी पहन कर नमाज के लिए हाथ फैलाना और इफ्तार की दावत उड़ाना ‘कूल’ माना जाता था, वहाँ ‘मौलाना मुलायम’ के बेटे जब वर्तमान व भविष्य की पीढ़ियों को मर्यादा पुरुषोत्तम के दिखाए राह पर चलने की बात करें, तो बदलाव दिख जाती है। आप दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ही प्रतिक्रिया देख लीजिए। सर्जिकल स्ट्राइक तक के सबूत माँगने वाला अचानक से हिन्दू हो जाए तो बदलाव नजर आता ही है।

अरविंद केजरीवाल ने भूमिपूजन के लिए देश को बधाई देते हुए ‘जय श्री राम! जय बजरंग बली!’ लिख कर ट्वीट किया और लिखा कि भगवान राम का आशीर्वाद हम पर बना रहे। जो लोग बाबरी विध्वंस को केवल याद करते थे और राम मंदिर के पक्ष में भी बोलने से बचते थे, वो भी भूमिपूजन की खुल कर बधाई देने लगे। जबकि भूमिपूजन कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी हिस्सा लिया था। वही संघ, जिसके विरोध पर भारत के दर्जनों राजनीतिक दलों की राजनीति टिकी है।

जो ‘सेक्युलर गिरोह’ अब तक ‘जय श्री राम’ को ‘वॉर क्राई’ बताता रहा है, अगर उसी गिरोह के नेता यही लिख कर भूमिपूजन की बधाई दें तो भारत की राजनीति में बदलाव दिखने लगता है। 9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट का राम मंदिर के पक्ष में फैसला आया, 12 दिसंबर को इसके खिलाफ दायर समीक्षा याचिकाएँ खारिज की गईं और 5 फरवरी को भारत सरकार ने ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के गठन का ऐलान कर दिया।

जिस कॉन्ग्रेस के नेता केरल में बीच सड़क पर बछड़ा काटते हैं, उसी कॉन्ग्रेस की प्रियंका गाँधी जब ‘गऊ प्रेमी’ बन जाती हैं तो इसे राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद हुआ बदलाव कहेंगे। दलितों की पार्टी कही जाने वाली बसपा जब अयोध्या से सम्मलेन की शुरुआत करती है और राम-राम जपती है, तो इसे बदलाव माना ही जाएगा। कॉन्ग्रेस-केजरी-ठाकरे जमात भक्त बन गए, लेकिन यही लोग पहले ‘तारीख़ नहीं बताएँगे’ वाला तंज कसते थे।

अब बात करते हैं सामाजिक बदलाव की। राम मंदिर का फैसला आने के 3 महीने बाद ही कोरोना का प्रकोप शुरू हो गया। ऐसे महामारी के समय में पूरे भारत से माँग उठी कि दूरदर्शन पर रामानंद सागर की ‘रामायण’ सीरियल चलाई जाए। आपदा के बीच इसे जिस तरह की प्रतिक्रिया मिली, उससे भारतीय जनमानस में हुए बदलाव का पता चलता है। भगवान राम में आस्था सब की पहले से थी, बस वो राम मंदिर पर फैसला आने के बाद और जाग्रत हो गई।

बॉलीवुड फिल्मों और सास-बहू की टीवी सीरियल वाले देश में 3 दशक पुराने ‘रामायण’ का ये प्रभाव बताता है कि किस तरह देश ने भगवान राम में अपनी आस्था को पुनर्जीवित किया। सोशल मीडिया पर राम व रामायण को लेकर वाद-विवाद शुरू हुआ। कोठरी बंधुओं जैसे राम मंदिर के लिए खुद को बलिदान करने वाले आम लोगों का सम्मान शुरू हुआ। मंदिर निर्माण के लिए जिस तरह से 1100 करोड़ रुपए से भी अधिक का चंदा लोगों ने दिया, उससे पता चला कि भारत के लोगों के लिए श्रीराम क्या हैं।

राम मंदिर निर्माण से ध्वस्त हुआ इस्लामी/वामपंथी प्रोपेगंडा

आइए, एक बार फिर से इतिहास देख लेते हैं। ‘हिन्दू पुनर्जागरण’ के इस समय में वामपंथी और इस्लामी ताकतों को सबसे बड़ा डर इसी बात का तो है कि कहीं हमें हमारा सही इतिहास न पता चल जाए। ‘रामकोट’ के पहाड़ में था बाबरी मस्जिद? इस बात का कोई सेन्स है? इससे पहले इसे ‘मस्जिद-ए-जन्मस्थान’ कहते थे? क्यों? किसका जन्म हुआ था यहाँ? 1528-29 में इसे बाबर की याद में उसके सरदार मीर बाकी ने बनवाया था।

‘रामकोट’ और ‘जन्मस्थान’ – इन दोनों नामों से ही स्पष्ट है कि यहाँ पहले हिन्दुओं का तीर्थस्थल था। अब देखिए, वामपंथियों का ये कुचक्र था कि वो हमें जीवन भर राम मंदिर विवाद में ही अटका कर रखें। अर्थात, वो कभी नहीं चाहते थे कि हम उन 30,000 मंदिरों की बात करें, जिन्हें इस्लामिक आक्रांताओं ने ध्वस्त किया और उनके ऊपर मस्जिदें खड़ी कर दीं। आज मथुरा-काशी के अलावा उन मंदिरों की भी बात होती है।

आज के भारत में अकबर पूजनीय नहीं है। हमें पता है कि मुग़ल आक्रांता थे और हम ये खुल कर बोलते हैं। इस्लामी कट्टरपंथियों और वामपंथियों ने यही तो प्रोपेगंडा का जाल बुना था कि हम आक्रांताओं को ‘अपना’ मानने लगें। उनके हर कुकृत्य को अच्छा बता कर पेश किया गया। हम तारीफ करते रहें कि वाह बाबरी मस्जिद की कला फलाँ किस्म की है, इसकी संरचना फलाँ तरह की है। लेकिन, अब ऐसा नहीं हो रहा।

हमें इतिहास की पुस्तकों में यही सब तो पढ़ाया गया है। लेकिन, आज जब RTI से पता चलता है कि NCERT के पास ऐसा कोई स्रोत ही नहीं है जो ये बता सके कि कुतुबमीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवाया था, तो विद्यार्थी छला हुआ महसूस करते हैं। अतिक्रमण कर के और खून बहा कर बनाई गई हर एक इस्लामी संरचना पर बात होती है। यही तो है वामपंथी प्रोपेगंडा का ध्वस्त होना।

राम मंदिर से एक जमात की घृणा रह-रह कर सामने आती है

क्या कोई किसान भगवान राम का विरोधी हो सकता है? ‘राम राज्य’ में तो किसान आत्मनिर्भर होते थे और गाँवों में समृद्धि होती थी। आज के ‘किसान आंदोलन’ में अगर भगवान श्रीराम का विरोध हो तो पता चल जाता है कि ये देश व हिन्दू विरोधी तत्वों का आंदोलन है। ताज़ा उदाहरण देखिए। इस साल गणतंत्र दिवस पर उत्तर प्रदेश की ओर से आए भव्य राम मंदिर के मॉडल को प्रथम पुरस्कार के लिए चुना गया था।

गणतंत्र दिवस के मौके पर ‘किसान’ दंगाइयों ने तिरंगा के अपमान के साथ ही राम मंदिर को निशाना बनाते हुए राम मंदिर की झाँकी के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया। दंगाइयों ने अयोध्या श्रीराम मंदिर की झाँकी के लिए बनाए गए राम मंदिर के गुम्बद को निशाना बनाकर उसे तोड़ डाला। ये घृणा कहाँ से आती है? क्या आपको पता है कि दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में भी राम मंदिर के प्रति घृणा एक कारण थी?

राम मंदिर निर्माण में रामजन्मभूमि के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अल्पसंख्यकों को वर्तमान सरकार के खिलाफ भड़काने का प्रयास किया गया। उन्हें बड़ी संख्या में इकट्ठा करने का प्रयास किया गया ताकि उनका इस्तेमाल सांप्रदायिक दंगों को अंजाम देने के लिए किया जा सके। खुद दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में ये जानकारी दी थी। राम मंदिर का नाम लेकर मुस्लिमों को भड़काया गया और हिन्दुओं का कत्लेआम हुआ।

पूर्व छात्र नेता शरजील इमाम और AAP के पार्षद रहे ताहिर हुसैन जैसों ने जो पर्चे बँटवाए, उसमें राम मंदिर का जिक्र था। आप एक और बात पर गौर कीजिए। राम मंदिर का फैसला आने के बाद उसी गिरोह ने देश की सर्वोच्च न्यायालय को सबसे ज्यादा बदनाम करने की कोशिश की, जो न्यायपालिका की सौगंध खाते नहीं थकते थे। तत्कालीन CJI रंजन गोगोई पर छींटाकशी हुई। सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार के दबाव में बनाया गया।

और यही लोग संविधान की कसमें खाते नहीं थकते। कॉन्ग्रेस के मुखपत्र में काम करने वाली संजुक्ता बासु का बयान देख लीजिए। फैसला आने के बाद उन्होंने खुद को हिन्दू बताते हुए कहा था कि उन्हें अयोध्या में सिर्फ और सिर्फ मस्जिद चाहिए। उन्होंने खुद के शर्म आने की बात कही थी। खेद भी जताया था। वो दुःखी भी थीं। राम मंदिर पर फैसले ने लिबरल गिरोह को सुप्रीम कोर्ट का भी विरोधी बना दिया।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और एआईएमआईएम जैसे संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की। शायर मुनव्वर राना ने दावा कर डाला कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे रंजन गोगोई ने अपने फैसले में लिखा कि कोई साक्ष्य नहीं मिला है कि वहाँ मंदिर तोड़कर मस्ज‍िद बनाई गई। उनकी बेटी सुमैया ने राम मंदिर परिसर में ही मस्जिद की माँग कर दी। सीपीआई की पोलित ब्यूरो की सदस्य सुभाषिनी अली ने राम मंदिर की जगह प्राचीन काल में बौद्ध विहार होने की बात कह दी

गिरोध विशेष के ऐसे 40 लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डाली, जिनका मूल मुक़दमे से कोई लेनादेना ही नहीं था। इसमें इरफ़ान हबीब, शबनम हाशमी, अपूर्वानंद झा, नंदिनी सुंदर और हर्ष मंदर जैसे लोग शामिल थे। JNU में भी राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध हुआ। अब अयोध्या में बनने वाला यही मंदिर भारत का प्रतीक बनेगा। हमारी पहचान बनेगा। हमारी संस्कृति की झलक प्रस्तुत करेगा।