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राणा अयूब बनीं ट्रोलिंग टूल, कश्मीर पर प्रोपेगेंडा चलाने के लिए आ रहीं पाकिस्तान के काम: जानें क्या है मामला

भारत में इस्लामी पत्रकारिता की सबसे बड़ी वाहक के तौर पर अपनी पहचान स्थापित कर चुकीं राणा अयूब अब पाकिस्तान के काम आ रही हैं। उनके द्वारा परोसा गया प्रोपगेंडा पाकिस्तान की खुराक बन रहा है और इसी के बूते वह अब उन बुद्धिजीवियों को ट्रोल कर रहा है जो भारत के पक्ष में अपनी बात रखते हैं।

हाल में ऐसा मामला उस समय देखने को मिला जब माइकल रुबीन ने खुद का एक लेख अपने ट्वीट पर शेयर किया। इस ट्वीट के साथ उन्होंने वो हेडलाइन भी डाली जो उनके लेख का सार थी। उन्होंने लिखा, “कश्मीर पर भारत ने आलोचकों को गलत साबित कर दिया।” उनके इसी ट्वीट पर कई लोग आए जो विस्तृत लेख के लिए आभार व्यक्त करते दिखे। लेकिन तभी पाकिस्तान से यह चीज बर्दाश्त नहीं हुई।

माइकल के ट्वीट पर उनको ट्रोल करने के लिए पाकिस्तान वाणिज्य दूतावास जनरल वैंकूवर (कनाडा) ने उसे रीट्वीट किया और तर्कों के नाम पर जोड़ा राणा अयूब का एक पूरा लेख। ये लेख वाशिंगटन पोस्ट में 11 मार्च 2021 को प्रकाशित हुआ था। इसे शेयर करते हुए अकॉउंट से माइकल को कहा गया, “भारत के लोकतंत्र के लगातार पतन को नकारना असंभव है। आर्थिक विकास के बारे में कई कहानियाँ वास्तविकता को छुपा नहीं सकती है। ” अगले ट्वीट में इन्होंने पूछा कि आखिर उन नरसंहारों, युद्धों, अपराधों का क्या हुआ जो भारत ने कश्मीर में किए।

पाकिस्तान दूतावास के इस हैंडल पर पिछले कुछ समय में ऐसे कई ट्वीट शेयर किए गए हैं। किसी में भारत आतंकवाद जैसे शब्द का इस्तेमाल हैं तो किसी में बताया गया है कि भारत ने 5 अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को पाकिस्तान जाने से मना कर दिया है क्योंकि वह 5 अगस्त को ‘आजाद कश्मीर’ पर होने वाली असेंबली में भाग लेने वाले थे। लेकिन बावजूद इसके ये बात सोचने वाली नहीं है कि आखिर एक पाकिस्तानी दूतावास का हैंडल कश्मीर पर लेख लिखने वाले शख्स को ट्रोल कर रहा है, सोचने वाली बात यह है कि आखिर एक भारत की पत्रकार का लिखा प्रोपेगेंडा से भरा लेख पाकिस्तान के लिए कितना फिट बैठता है कि वो उसे ट्रोल करने के लिए इस्तेमाल करने लगते हैं।

क्या था राणा अयूब के लेख में

राणा अयूब ने यह लेख दिशा रवि को बेल मिलने के समय लिखा था। उसी दिशा रवि को जिस पर टूलकिट का मामला खुलने के दौरान इल्जाम लगे थे। इस आर्टिकल में अयूब ने एक जगह लिखा है, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काल में देशद्रोह के आरोप डराने-धमकाने का एक उपकरण बन गए हैं।” एक रिपोर्ट् का हवाला देते हुए अयूब ने कहा था कि 2014 में मोदी सरकार के सत्ता संभालने के बाद से 405 भारतीयों के खिलाफ राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों की आलोचना करने के लिए 96 प्रतिशत देशद्रोह के मामले दर्ज हुए।

इसके बाद वह उस फ्रीडम हाउस डेमोक्रेसी रिपोर्ट की वकालत करती दिखीं जिसमें भारत को आंशिक रूप से स्वतंत्र बताया गया था। साथ ही कश्मीर को लेकर भी कई बातें कही गई थी। अपने लेख के अंत में राणा ने लिखा था, “एक पत्रकार और एक मुसलमान के तौर पर इस देश के लिए मेरी उम्मीदें हर दिन कुचली जा रही हैं। लेकिन कई भारतीयों की तरह, जिन्होंने इस समावेशी बहुल राष्ट्र के सपने को संजोया है, मैं फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में देखती हूँ…।”

पाकिस्तान को मिला भारतीय पत्रकारों का सहारा

मालूम हो कि यह पहली दफा नहीं हुआ है जब भारतीय प्रोपगेंडाबाजों ने पाकिस्तान को इस तरह उनके अनुकूल कंटेंट प्रदान किया हो। इससे पहले दिशा रवि की गिरफ्तारी मामले में ही भारतीय मीडिया गिरोह की रिपोर्टिंग को पाकिस्तान से हवा मिली थी। पीटीआई ने तब लिखा था, “मोदी/आरएसएस शासन में भारत अपने खिलाफ सभी आवाजों को चुप कराने में विश्वास रखता है… अब, उन्होंने दिशा रवि को भी ट्विटर टूलकिट मामले में हिरासत में ले लिया है।”

इसके अलावा पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने ‘मुस्लिम पत्रकार राणा अयूब’ की तारीफ ‘फासिस्ट मोदी सरकार का पर्दाफाश’ करने के लिए की थी। पकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने अपने आधिकारिक अकाउंट से लिखा था कि सूचना एवं प्रसारण में विशेष सहयोगी डॉक्टर फिरदौस आशिक अवान ने मोदी के फासिस्ट एजेंडा को बेनक़ाब करने वाली मुस्लिम महिला जर्नलिस्ट राणा अयूब की तारीफ की। डॉक्टर फिरदौस आशिक अवान ने लिखा था“शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वालों को इतिहास के सुनहरे पन्नों में याद रखा जाता है। जो साहस भारतीय मुस्लिम जर्नलिस्ट ने अपनी ड्यूटी में दिखाया है वह तारीफ के लायक है।

एनडीटीवी भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। एनडीटीवी की कश्मीर रिपोर्टिंग को हमेशा से पाकिस्तान का समर्थन मिलता रहा है। कुछ समय पहले पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी ने एनडीटीवी की रिपोर्टिंग की क्लिप को शेयर करते हुए चैनल की बातों का समर्थन किया था। इस वीडियो क्लिप में एक पत्रकार श्रीनगर से रिपोर्ट करते हुए दावा करता दिखा था कि वो और उसकी टीम एक बूढ़े और अंधे व्यक्ति से मिले थे। उस व्यक्ति ने उनसे कहा कि नई दिल्ली में कहा जा रहा है कि कश्मीर में हर कोई जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने से खुश है। मगर कर्फ्यू हटने के बाद वहाँ के लोग बता देंगे कि वो कितने खुश हैं। पत्रकार का इशारा हिंसा की तरफ था, मगर माइक और कैमरा होते हुए भी उन्होंने उस बूढ़े शख्स को नहीं दिखाया। उन्होंने सिर्फ दावा किया कि एक व्यक्ति ने ऐसा कहा।

कर्नाटक और J&K में NIA की रेड: मंगलौर में कॉन्ग्रेस नेता के घर छापा, बेटे और बहू के ISIS से संबंध के लिंक

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केरल के ISIS मॉड्यूल केस में जम्मू और कश्मीर एवं कर्नाटक में छापामारी की। बुधवार (04 अगस्त 2021) की सुबह शुरू हुई इस छापामारी में NIA, जम्मू और कश्मीर में 3 जगह पहुँची। वहीं कर्नाटक के बेंगलुरु और मंगलौर में भी सर्च ऑपरेशन किया गया। जाँच एजेंसी मैंगलोर में स्वर्गवासी कॉन्ग्रेस नेता बीएम इदिनब्बा के घर पहुँची जहाँ उनके बेटे और बहू के ISIS से कथित संबंधों के बारे में पूछताछ की।

जाँच एजेंसी ने जानकारी दी कि केरल के ISIS मॉड्यूल केस के सम्बन्ध में जम्मू और कश्मीर में 3 स्थानों पर छापामारी की गई है जिनमें बांदीपोरा में हार्डवेयर स्टोर के सेल्समैन का घर भी शामिल है। इसके अलावा कर्नाटक के बेंगलुरु में भी छापामारी की गई है।

मंगलौर में स्वर्गवासी कॉन्ग्रेस नेता बीएम इदिनब्बा के घर पर भी NIA की टीम पहुँची। NIA की यह छापेमारी की कार्रवाई इदिनब्बा के बेटे बीएम बाशा के ISIS से कथित संबंधों के चलते की गई। इस मामले में बाशा के साथ उनकी पत्नी से भी पूछताछ जारी है। रियल इस्टेट का बिजनेस करने वाले बाशा के घर पर बेंगलुरु NIA की टीम द्वारा छापामारी की गई। बाशा के दो और बेटे भी हैं जो विदेश में रहते हैं।

बाशा के परिवार के सदस्यों के द्वारा ISIS से जुड़े यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करने के बाद वो NIA के शक के दायरे में आए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बाशा और उनके परिवार के सदस्यों के मन में कट्टरपंथी आतंकी संगठन ISIS के लिए सहानुभूति है और जाँच एजेंसी को बाशा के परिवार के द्वारा जम्मू और कश्मीर के आतंकी संगठन के एक सदस्य से संपर्क करने की खुफिया जानकारी भी मिली थी।

ज्ञात हो कि पिछले ही महीने NIA ने जम्मू और कश्मीर में ISIS मॉड्यूल और आतंकी फंडिंग के मामले में कई जगह सर्च ऑपरेशन किया था। इस दौरान श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला जिलों में एजेंसी द्वारा छापामारी कार्रवाई हुई। कार्रवाई के बाद ISIS से संबंधों के आरोप में 5 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था।

राहुल गाँधी ने POCSO एक्ट का किया उल्लंघन, NCPCR ने ट्वीट हटाने के दिए निर्देश: दिल्ली की पीड़िता के माता-पिता की फोटो शेयर की थी

दिल्ली में 9 साल की एक बच्ची की संदेहास्पद हालत में मौत पर चौतरफा सियासत जारी है। इस बीच राहुल गाँधी बच्ची के परिजनों से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर मुश्किलों में घिर गए हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने राहुल गाँधी के ट्वीट पर संज्ञान लिया है और ट्विटर से इसके खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने ट्वीट करते हुए लिखा, “एक पीड़ित बच्ची के माता पिता की फ़ोटो ट्वीट कर उनकी पहचान उजागर कर POCSO ऐक्ट का उल्लंघन करने पर NCPCR ने संज्ञान लेते हुए ट्विटर इंडिया को नोटिस जारी कर राहुल गाँधी के ट्विटर हैंडल के विरुद्ध कार्यवाही करने एवं पोस्ट हटाने के लिए नोटिस जारी किया है।”

बता दें कि बीजेपी ने तस्वीरें साझा करने को कानून का उल्लंघन बताते हुए उनके खिलाफ NCPCR से संज्ञान लेने और कार्रवाई करने का निवेदन किया था।  बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गाँधी ने अपने ट्वीट में पीड़िता के परिजनों का चेहरा सार्वजनिक किया है, जो पोक्सो एक्ट की धारा 23 जुवेनाइल जस्टिस केयर के तहत चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 74 का उल्लंघन है। NCPCR इसका संज्ञान लें और राहुुल गाँधी को नोटिस जारी करे।

गौरतलब है कि दिल्ली के ओल्ड नांगल में 9 साल की एक बच्ची की संदेहास्पद हालत में मौत हो गई। आरोप है कि श्मशान घाट के भीतर रेप करने के बाद बच्ची को जला दिया गया। इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही बताया है कि पोस्टमॉर्टम से भी मौत की वजह से पर्दा नहीं उठ पाया है।

गिरफ्तार लोगों में से एक राधेश्याम को मीडिया रिपोर्टों में श्मशान घाट का पुजारी बताया जा रहा है। वहीं तीन अन्य आरोपित सलीम, लक्ष्मीनारायण और कुलदीप श्मशान घाट के कर्मचारी बताए जा रहे हैं। इन पर हत्या, बलात्कार और आपराधिक धमकी के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 376 और 506 के तहत यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम और SC/ ST एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

19 की बीवी-67 का शौहर: सुरक्षा माँगने गए हाईकोर्ट, उम्र के फासले से हैरान जज ने दिए जाँच के आदेश

पंजाब ऐंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सुरक्षा की गुहार लेकर पहुँचे एक जोड़े की निकाह के जाँच के आदेश दिए हैं। असल में इस मामले में बीवी की उम्र 19 साल तो शौहर की 67 साल है। इससे हैरान अदालत ने पलवल के एसपी को निकाह की परिस्थितियों की जाँच करने का निर्देश दिया है।

रिश्तेदारों से जान का खतरा बताते हुए इस जोड़े ने हाईकोर्ट में सुरक्षा देने के लिए याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट दोनों के बीच उम्र का अंतर देख हैरान रह गया औऱ स्थानीय पुलिस को मामले की जाँच कर हकीकत का पता लगाने के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा, “यह एक चौंकाने वाला मामला है। याचिकाकर्ता में से एक 19 वर्ष की लड़की है और दूसरा 67 वर्ष का पुरुष है और कहा जाता है कि उन्होंने एक-दूसरे से शादी कर ली है।” कोर्ट ने जाँच का आदेश देते हुए कहा कि इस मामले में जबरन विवाह की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है।

जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलों से साफ नहीं हो पा रहा है कि पुरुष की यह पहली शादी है या उसने इससे पहले भी शादियाँ की हैं। या फिर किन हालातों में 19 साल की लड़की को 67 साल के बुजुर्ग व्यक्ति के साथ विवाह करना पड़ा है?

यह सब देखने के बाद हाई कोर्ट ने पलवल के पुलिस अधीक्षक को एसआईटी गठित कर इस बात की जाँच करने को कहा है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, टीम में महिला अधिकारी का भी होना आवश्यक है। पलवल पुलिस अधीक्षक के द्वारा गठित टीम 67 साल के व्यक्ति की न केवल वर्तमान, बल्कि पिछली जानकारियों के बारे में जाँच करेंगे। हाईकोर्ट ने पुलिस को लड़की को सुरक्षा मुहैया कराने के साथ ही एक सप्ताह के भीतर जाँच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही मामले की सुनवाई 10 अगस्त 2021 तक के लिए टाल दी।

पृथ्वीराज चौहान के किले के पास मजार बनवाने का दावा, सोशल मीडिया में दिल्ली पुलिस की भूमिका को लेकर भी उबाल – वीडियो वायरल

जहाँ एक तरफ दिल्ली की सड़कों पर अतिक्रमण कर के मजारों से लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ आरोप लगे हैं कि अब पृथ्वीराज चौहान के ‘किला राय पिथौरा’ के पास भी मुस्लिम लोग एक मजार बनवा रहे हैं। साथ ही दिल्ली पुलिस पर उन्हें संरक्षण देने का आरोप लगाया गया है। इसके लिए एक वीडियो भी शेयर किया जा रहा है। वीडियो में लोग आरोप लगा रहे हैं कि बिना वर्दी के पुलिस वाले वहाँ खड़े होकर निर्माण कार्य करा रहे हैं।

जुलाई 2020 में ‘पांचजन्य’ में एक खबर आई थी कि ‘संजय वन’ में कई जगह हरी चादर डाल कर मजार बनवा दिए गए हैं। लॉकडाउन के दौरान वन के भीतर कई मजार बनवाए जाने के आरोप इस लेख में लगे हैं। 26 मई, 2020 को महरौली थाने में इस बाबत एक शिकायत भी दर्ज हुई थी। वन के प्रभारी का कहना था कि कुछ पत्थरों को हरे रंग से रंगा गया है। स्थानीय लोगों का कहना था कि वन पर वक़्फ़ बोर्ड की नजर है।

वहीं वायरल वीडियो के आधार पर लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। वहाँ खड़े लोगों ने जिद की कि वो देखना चाहते हैं कि आखिर ऐसा क्या हो रहा है वहाँ जो उन्हें जाने से रोका जा रहा है। जब वो लोग आगे गए तो वहाँ एक मजार के निर्माण का कार्य चल रहा था। वहाँ उपस्थित लोगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का बताया। वीडियो में पेड़ के चारों तरफ कटाई कर के मसाला बना कर कोई संरचना बनवाए जाने की बात सामने आई है।

वायरल वीडियो के अनुसार, ये सब देख कर स्थानीय लोग आक्रोशित भी हो गए। बताया जा रहा है कि ‘संजय वन’ के एकदम बीचोबीच ये चीजें चल रही हैं। लोगों ने इसे अवैध कब्ज़ा बताते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के सहयोग से ये सब हो रहा है। ये वो इलाका है, जहाँ लोग पर्यटन के लिए घूमने आते हैं। ‘पांचजन्य’ के संपादक हितेश शंकर ने कहा, “दिल्ली में आजादपुर फ्लाईओवर मजार को बचाते आदर्श नगर SHO के बाद ये लगातार दूसरा मामला देखने में आया जब दिल्ली पुलिस मजार माफिया के साथ खड़ी दिखाई दे रही है।”

राय पिथौरा किले के पास मजार बनाने के आरोप

इस घटना पर टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत पटेल उमराव ने कहा, “चाहे हसनपुर डिपो के सामने बनी अवैध मजार हो या आजादपुर फ्लाईओवर पर बनी अवैध मजार, दिल्ली पुलिस वहाँ खड़े होकर सड़कों पर नमाज अदा करवाती है और विरोध करने वाले हिंदुओं से अभद्रता करती है। दिल्ली की सड़कों में ऐसी कई अवैध मजारें और अवैध मस्जिदें पुलिस के संरक्षण में बनी हुई हैं।” कई लोगों ने उनके ट्वीट की रिप्लाई में दिल्ली पुलिस से आक्रोश जताया।

हाल ही में इसी तरह का एक और मामला सामने आया था। ये घटना दिल्ली के आज़ादपुर की है। बड़ी सब्जी मंडी होने की वजह से ये इलाका जाना जाता है। यहाँ के एक फ्लाईओवर पर अवैध मजार बना दिया गया है। जहाँ से फ्लाईओवर शुरू होता है, वहीं पर एक मजार जैसी संरचना बना दी गई है। वहाँ के प्रबंधक का कहना है कि ये एक ‘दरगाह’ है। उसने अतिक्रमण के आरोपों को झूठा करार देते हुए कहा कि ये बहुत पुराना है और उसके दादा भी यहाँ बैठते थे।

धर्मांतरण का विरोध कर रहे रामलिंगम की हत्या के आरोपित PFI सदस्य रहमान सादिक को NIA ने किया गिरफ्तार

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार (05 अगस्त 2021) को यह सूचना दी कि तमिलनाडु के तंजावुर में साल 2019 में हुई रामलिंगम की हत्या के मुख्य साजिशकर्ता रहमान सादिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। रामलिंगम ने इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ‘दावा’ कार्यक्रम का विरोध किया था जिसके बाद 05 फरवरी 2019 को उसकी हत्या कर दी गई थी।

ज्ञात हो कि रामलिंगम ने PFI के नेताओं के द्वारा किए जा रहे कार्य का विरोध किया था। इसके अंतर्गत PFI के नेता हिन्दुओं का इस्लाम में धर्मांतरण करा रहे थे। NIA ने बताया कि रामलिंगम ने एक आरोपित मोहम्मद फारुक के सिर से ताक़िया हटाकर उसके माथे पर तिरुनीर लगाकर यह जताने की कोशिश की कि सभी धर्म समान हैं। रामलिंगम की इस कोशिश का बदला लेने और लोगों के मन में खौफ पैदा करने के उद्देश्य से रहमान सादिक ने रामलिंगम की हत्या की साजिश रची।

इस मामले में 06 फरवरी 2019 को ही केस दर्ज कर लिया गया था। NIA के प्रवक्ता ने बताया कि बाद में NIA ने मामले को अपने हाथ में लिया और 07 मार्च 2019 को NIA के द्वारा दोबारा केस दर्ज किया गया। मामले की जाँच में यह सामने आया कि सादिक तंजावुर में PFI के दावा कार्य का एडमिनिस्ट्रेटर था। उसने अन्य आरोपितों के साथ मिलकर थिरुभुवनम में रामलिंगम की हत्या की साजिश रची।

NIA ने बताया कि सादिक और उसके अन्य साथियों ने हत्या के लिए हथियार, वाहन और छुपने के लिए जगह का पूरा बंदोबस्त किया। NIA ने 02 अगस्त 2019 को चार्जशीट दायर की जिसमें 18 लोगों को आरोपित बनाया गया जो PFI और SDPI से जुड़े हुए थे। सादिक, पूरी साजिश को अंजाम देने के बाद फरार हो गया था और तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई स्थानों में पिछले 2 सालों से छुपा हुआ था। सादिक पर ऐसे कार्यों के लिए कट्टरपंथियों की भर्ती करने का आरोप भी है।

ज्ञात हो कि 05 फरवरी 2019 को तंजावुर के निवासी रामलिंगम की इस्लामिक संगठनों PFI और SDPI के सदस्यों के द्वारा हत्या कर दी गई थी। हत्या करने से पहले रामलिंगम के हाथ काट दिए गए थे। NIA की चार्जशीट में बताया गया था कि इन संगठनों के ‘मजहबी कार्यों में बाधा डालने’ के कारण रामलिंगम को रास्ते से हटाया गया था।

गुजरात: ₹900 करोड़ के फर्जी GST बिल घोटाले का मास्टरमाइंड मोहम्मद अब्बास गिरफ्तार, चला रहा था 25 फर्म

गुजरात राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) विभाग ने बड़ी सफलता हासिल की है। SGST ने 900 करोड़ रुपए के फर्जी बिलिंग घोटाले के मास्टरमाइंड मोहम्मद अब्बास रफीकाली मेघानी उर्फ एमएम को भावनगर में एक ठिकाने से गिरफ्तार किया। फर्जी बिल घोटाला मामले में मेघानी 9वीं गिरफ्तारी है।

पुलिस को मेघानी के ठिकाने के बारे में सूचना मिली जिसके बाद उन्होंने उसे गिरफ्तार करने के लिए घेराबंदी कर दी। मेघानी ने पिछले दरवाजे से भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस अधिकारी उसे पकड़ने में कामयाब रहे।

राज्य पुलिस ने अब तक राज्य भर में फैले कम से कम 71 स्थानों पर छापेमारी की थी और कुल फर्जी बिलिंग या 1,741 करोड़ रुपए के फर्जी लेनदेन का खुलासा किया था। अब तक 319 करोड़ रुपए के अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया जा चुका है। छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों में अफजल सजवानी और मीनाबेन राठौड़ भी शामिल है।

मामले में मेघानी की संलिप्तता सजवानी के आवास पर चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान सामने आई थी। राज्य जीएसटी विभाग ने कहा, “हमारे पास सबूत हैं जो मामले में मेघानी की संलिप्तता को साबित करते हैं। वह 25 फर्मों का संचालन कर रहा था और उसने 739 करोड़ रुपए के फर्जी बिलों का उपयोग करके 135 करोड़ रुपए की अवैध आईटीसी का लाभ उठाया था। हमने उसे गिरफ्तार कर लिया है।”

पुलिस ने फर्जी बिल घोटाले के सिलसिले में भावनगर स्थित एचके मेटल्स की मालिक शबाना कालीवाला की भी भूमिका का पता लगाया। पुलिस ने पाया कि एचके मेटल्स ने 87 करोड़ रुपए के नकली बिलों के आधार पर 16 करोड़ रुपए के आईटीसी का दावा किया। शबाना को फर्जी बिलिंग घोटाले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस द्वारा माधव कॉपर लिमिटेड को नकली बिलिंग घोटाले में शामिल पाए जाने के बाद यह घोटाला सामने आया। संगठन ने कथित तौर पर 75 करोड़ रुपए के इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए 425 करोड़ रुपए के नकली बिलों का इस्तेमाल किया था। कंपनी ने अब तक 137 करोड़ रुपए के करों की चोरी की है और इसके अध्यक्ष नीलेश पटेल एसजीएसटी विभाग द्वारा तलब किए जाने के बाद फरार है।

पेगासस के मुद्दे पर राज्यसभा में हंगामा पड़ा महँगा, टीएमसी के 6 सांसद निलंबित: देखें उनकी हरकतें

संसद का मानसून सत्र चल रहा है, जिसमें विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार गतिरोध उत्पन्न करने की कोशिश कर रहा है। इसी क्रम में बुधवार (4 अगस्त 2021) को भी टीएमसी के सांसदों ने एक बार फिर से हंगामा किया। इस मामले में इनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उप राष्ट्रपति एम वकैंया नायडू ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के छह सांसदों को एक दिन के लिए निलंबित कर दिया है।

सभापति के इस फैसले के बाद हंगामा करने वाले ये सांसद अब सदन की कार्रवाई में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। जिन माननीयों को निलंबित किया गया है उनमें डोला सेन, मो. नदीमुल हक, अबीर रंजन बिस्वास, शांता छेत्री, अर्पिता घोष और मौसम नूर शामिल हैं। इस घटना की वीडियो क्लिप भी वायरल हो रही है, जिसमें देखा जा सकता है कि इन सांसदों ने सदन के वेल में प्रवेश किया और तख्तियाँ लहराई। सभापति की अवज्ञा की और सदन में घटिया आचरण किया।

वीडियो क्लिप में टीएमसी सांसदों को हाथों में तख्तियाँ लिए कुर्सी की ओर चलते हुए देखा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पेगासस के मुद्दे पर मीडिया रिपोर्ट को लेकर विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच राज्यसभा को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी और जब दोबारा से सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो 18 विपक्षी सांसदों ने पेगासस के मामले पर चर्चा की माँग की।

संसद को मछली बाजार मत बनाओ

विपक्ष के हंगामें पर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन पर निशाना साधा औऱ कहा कि अगर ‘चाट पपड़ी’ से एलर्जी है तो फिश करी खा लें, लेकिन सदन को मछली बाजार न बनाएँ। उन्होंने विपक्ष पर संसद की इमेज को धूमिल करने का आरोप लगाया है।

शांतनु सेन हो चुके हैं निलंबित

तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के सांसद शांतनु सेन ने भी गुरुवार (22 जुलाई 2021) को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के हाथ से स्टेटमेंट पेपर छीना था और फाड़ कर फेंक दिया था। इसके बाद अनुशासनहीनता के कारण उन्हें मानसून सत्र से निलंबित कर दिया गया था।

पोस्टमॉर्टम से भी नहीं सुलझी दिल्ली में 9 साल की बच्ची की मौत का रहस्य: राहुल गाँधी पर पहचान सार्वजनिक करने का आरोप

दिल्ली के ओल्ड नांगल में 9 साल की एक बच्ची की संदेहास्पद हालत में मौत हो गई। आरोप है कि श्मशान घाट के भीतर रेप करने के बाद बच्ची को जला दिया गया। इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही बताया है कि पोस्टमॉर्टम से भी मौत की वजह से पर्दा नहीं उठ पाया है।

गिरफ्तार लोगों में से एक राधेश्याम को मीडिया रिपोर्टों में श्मशान घाट का पुजारी बताया जा रहा है। वहीं तीन अन्य आरोपित सलीम, लक्ष्मीनारायण और कुलदीप श्मशान घाट के कर्मचारी बताए जा रहे हैं। इन पर हत्या, बलात्कार और आपराधिक धमकी के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 376 और 506 के तहत यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम और SC/ ST एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने बताया है कि मृत बच्ची के परिवार ने यौन उत्पीड़न के बाद हत्या का संदेह व्यक्त किया है। आरोपितों ने कथित तौर पर बच्ची की माँ को बताया कि उसकी मौत करंट लगने से हुई। आरोप है कि इन्होंने आननफानन में बच्ची के शव को जला दिया। परिवार को यह कहकर पुलिस को जानकारी देने से रोका कि ऐसा करने पर शव का पोस्टमॉर्टम होगा। चीरफाड़ कर बच्ची के बॉडी पार्ट्स निकाल लिए जाएँगे। 

दिल्ली पुलिस के मुताबिक बच्ची रविवार (1 अगस्त 2021) को शाम के तकरीबन 5.30 बजे के करीब वाटर कूलर से पानी भरने गई थी। आधे घंटे बाद श्मशान के पुजारी के साथ दो-तीन और लोग आए और बच्ची की माँ को बताया कि उसे कुछ हो गया है। लड़की के होंठ नीले पड़े हुए थे और हाथ मे जले का निशान था। उन लोगों ने बताया कि बच्ची की करंट लगने से मौत हुई है।

इस बीच दिल्ली साउथ वेस्ट के DCP इंगित प्रताप सिंह ने बताया है, “बच्ची के शरीर के बचे अंगों का पोस्टमॉर्टम किया गया। डॉक्टरों के बोर्ड ने बताया है कि शरीर के​ जितने अंग हैं उनसे मौत के कारण का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। अवशेषों को हम परिवार को सौंप देंगे।”

मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने दिल्ली पुलिस से विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट माँगी है। एनसीपीसीआर ने कहा, ‘‘मामले में जाँच कर यह सुनिश्चित करें कि पीड़िता की पहचान उजागर ना हो और 48 घंटे के भीतर संबंधित दस्तावेजों के साथ मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।’’

दूसरी तरफ इस घटना का सियासी फायदा उठाने की भी कोशिशें हो रही है। इसी कोशिश में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी विवादों में घिर गए हैं। राहुल गाँधी बुधवार (अगस्त 4, 2021) सुबह पीड़ित परिवार से मुलाकात करने पहुँचे। इसके बाद कहा, “माता-पिता के आँसू सिर्फ़ एक बात कह रहे हैं- उनकी बेटी, देश की बेटी न्याय की हक़दार है और इस न्याय के रास्ते पर मैं उनके साथ हूँ।”

राहुल गाँधी ने ट्विटर पर बच्ची के माता-पिता से मुलाकात की तस्वीर भी साझा की। बीजेपी ने उन पर पीड़ित की पहचान उजागर करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की माँग की है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि राहुल गाँधी ने अपने ट्वीट में पीड़िता के परिजनों का चेहरा सार्वजनिक किया है, जो पोक्सो एक्ट की धारा 23 जुवेनाइल जस्टिस केयर के तहत चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 74 का उल्लंघन है। दूसरी ओर सोशल मीडिया में राजस्थान की घटनाओं को संज्ञान में लाकर लोग राहुल गाँधी से सवाल कर रहे हैं कि कॉन्ग्रेस शासित प्रदेश के मामलों पर वे चुप्पी क्यों साध लेते हैं।

वहीं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी बुधवार को पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “बच्ची के परिवार से मिला, उनका दर्द बाँटा। परिवार को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देंगे। मामले की मजिस्ट्रेट जाँच होगी। दोषियों को सजा दिलवाने के लिए बड़े वकील लगाएँगे। केंद्र सरकार दिल्ली में क़ानून-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए कड़े कदम उठाए। हम पूरा सहयोग करेंगे।”

Tokyo Olympics 2020: रेसलर रवि कुमार दहिया ने फाइनल में बनाई जगह, भारत का एक और मेडल हुआ पक्का

परुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारत के रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar Dahiya) ने फाइनल में अपनी जगह बना ली है। इसी के साथ टोक्यो ओलंपिक्स में भारत का चौथा मेडल भी पक्का हो चुका है। बुधवार (4 अगस्त, 2021) को खेले गए सेमीफाइनल मैच में रवि ने कजाकिस्तान के नूरइस्लाम सानायेव को मात दिया। ओलंपिक्स में कुश्ती के फाइनल में पहुँचने वाले दहिया दूसरे भारतीय हैं। इससे पहले यहाँ तक सुशील कुमार पहुँचे थे।

बता दें कि रवि दहिया ने पहले दौर में कोलंबिया के टिगरेरोस उरबानो आस्कर एडवर्डो को 13-2 से हराने के बाद बुल्गारिया के जॉर्जी वेलेंटिनोव वेंगेलोव को 14-4 से हराया था। ऐसे में उन्हें फाइनल मुकाबले में प्रवेश का प्रबल दावेदार माना जा रहा था।

बुल्गारिया के जॉर्जी वेलेंटिनोव वेंगेलोव के खिलाफ दहिया शुरू से ही हावी रहे और उन्होंने उन्हें इस मैच में कोई मौका नहीं दिया। इससे पहले प्री-क्वॉर्टर फाइनल में रवि कुमार और कोलंबिया के पहलवान के बीच पहले राउंड की शुरुआत में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दहिया ने शानदार प्रदर्शन कर पहले मिनट में दो अंक हासिल किए, लेकिन उरबानो ने रिवर्स टेकडाउन से स्कोर बराबर कर लिया। इसके बाद रवि ने वापसी की और एक और अंक अर्जित किया। इसके साथ ही वो टिगरेरोस उरबानो से पहला राउंड 13-2 से जीतने में कामयाब रहे। सेमीफाइनल में पुनिया का सामना अमेरिका के पहलवान डेविड टेलर से होगा।

बता दें कि इससे पहले भारतीय महिला बॉक्सर लवलीना बोरगेहेन को टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक प्राप्त हुआ है। हालाँकि, सेमीफाइनल में उन्हें तुर्की की बुसेनज सुरमैनेली ने हरा दिया। 23 वर्ष की लवलीना बोरगेहेन ने पहले ही भारत के लिए मेडल सुनिश्चित कर लिया था। उन्हें वीमेंस वेल्टरवेट (69 किलोग्राम) वर्ग में ये ख़िताब प्राप्त हुआ। पहले दोनों राउंड में लवलीना ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन तुर्की की खिलाड़ी ने अंतिम कुछ सेकेंड्स में वापसी की।