उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में पिछले दिनों एक नाबालिग लड़की को 4 बच्चों के अब्बू साबिर ने अगवा किया और फिर उसके परिजनों को धमकी दी कि उनकी बेटी के धर्म परिवर्तन की पूरी तैयारी हो चुकी है, उसे अब इस्लाम कबूल करवाने के बाद ही छोड़ेंगे।
अलीगढ़ में यह हाल किसी एक परिवार का नहीं है बल्कि वहाँ पूरा एक गाँव ऐसा है, जो इस्लामी कट्टरपंथ से तंग आकर अपने मकानों पर ‘बिकाऊ’ लिखवा चुका है। वहाँ हिंदू बच्चियों को इस्लाम कबूल करवाने का अपराध सुनियोजित ढंग से चल रहा है।
नोट: यह एक सीरीज है, इस सीरीज का यह दूसरा वीडियो है। इसी सब्जेक्ट (हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन) पर और भी वीडियो आप हमारे यूट्यूब चैनल पर आगे देख पाएँगे।
उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने लुईस खुर्शीद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। वे कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और मनमोहन सरकार में मंत्री रहे सलमान खुर्शीद की बीवी हैं। मामला डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट में 71 लाख रुपए के गबन से जुड़ा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फर्रुखाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवीण कुमार त्यागी ने लुईस खुर्शीद और एक अन्य आरोपित अतहर फारूकी के खिलाफ ट्रस्ट में वित्तीय गड़बड़ी करने के आऱोप में गैर जमानती वारंट जारी किया है। फारूकी ट्रस्ट के सचिव हैं।
कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-2 की सरकार के दौरान मार्च 2010 में लुईस खुर्शीद की अध्यक्षता वाले ट्रस्ट को उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में दिव्यांगों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल और सुनने की मशीन देने के लिए 71 लाख रुपए का अनुदान दिया गया था। जब सलमान खुर्शीद यूपीए कैबिनेट में मंत्री थे तो उसी दौरान वर्ष 2012 में ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार और जालसाजी करने का मामला सामने आया था। हालाँकि, उस दौरान खुर्शीद दंपती ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।
इसके बाद साल 2017 में आर्थिक अपराध शाखा ने मामले की जाँच शुरू की और लुईस खुर्शीद व अतहर फारूकी के खिलाफ फर्रुखाबाद के कायमगंज पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई। जाँच एजेंसियों ने 30 दिसंबर 2019 को इस मामले में आरोप-पत्र दाखिल किया। इसमें आरोप लगाया गया था कि अभियुक्तों ने दिव्यांगों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार से अनुदान प्राप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षर और मुहरों में जालसाजी की थी।
इस मामले में ट्रस्ट ने दावा किया था कि उसने उत्तर प्रदेश के एक दर्जन से अधिक जिलों एटा, इटावा, फर्रुखाबाद, कासगंज, मैनपुरी, अलीगढ़, शाहजहाँपुर, मेरठ, बरेली, मुरादाबाद, गौतम बौद्ध नगर, रामपुर, संत कबीर नगर और प्रयागराज में दिव्यांग बच्चों और व्यक्तियों को व्हीलचेयर, ट्राई साइकिल देने के लिए शिविर आयोजित किए थे। दावा किया गया था कि मई 2010 में लुईस खुर्शीद के नेतृत्व में दिव्यांग बच्चों को उपकरण वितरित किए गए थे। हालाँकि, बाद में यह पता चला कि ऐसा कोई शिविर आयोजित ही नहीं किया गया था, बल्कि दिव्यांगों के लिए शिविर केवल कागज पर हुए थे।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पेगासस विवाद पर बुधवार (21 जुलाई) को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ”हमारे फोन ट्रैप किए जा रहे हैं। मैं किसी से बात नहीं कर सकती। मैंने अपना फोन प्लास्टर किया है, क्योंकि ये सब कुछ टैप करते हैं। फिर चाहे वह वीडियो हो या ऑडियो।”
ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार पेगासस पर पैसे खर्च कर रही है। उनके अनुसार केंद्र सरकार पर प्लास्टर कर देना चाहिए, नहीं तो देश तबाह हो जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने संघीय ढाँचे को गिरा दिया है। हालाँकि अपने बेतुके बयान के बाद ममता बनर्जी नेटिजन्स के निशाने पर आ गई हैं।
Our phones are tapped. Pegasus is dangerous and ferocious. I cannot talk to anyone. You are paying too much money for spying. I have plastered my phone. We should also plaster the Centre otherwise country will be destroyed. BJP has bulldozed federal structure: Mamata Banerjee
एक सोशल मीडिया यूजर ने ममता बनर्जी के बयान के साथ टीवी शो ‘साथ निभाना साथिया’ की गोपी बहू की लैपटॉप धोते हुए फोटो शेयर करते हुए हँसते हुए इमोजी के साथ लिखा, ”एक जैसी एनर्जी।”
एक अन्य यूजर ने NDTV के ट्वीट को शेयर करते हुए हँसते इमोजी के साथ टीएमसी सांसद महुआ मित्र को टैग करते हुए लिखा, ”इस बिना दिमाग वाली नेता को बताना चाहिए कि उसके फोन पर लगा प्लास्टर उतना ही काल्पनिक है, जितना कि उसके पैर पर लगी चोट थी।” एक और सोशल मीडिया यूजर ने ममता की बिना सर पैर वाली बात पर फिरकी ली। उसने लिखा, “ये एक मुख्यमंत्री है, किसने इन्हें चुना?”
??? @MahuaMoitra should tell her b₹ainless leader that the plaster on her phone is as useless as the one she had on her leg for an imaginary injury. https://t.co/DWsu9lEHOT
इस पर प्रतिक्रिया देते एक यूजर ने हँसते इमोजी के साथ लिखा, ”इनके मुँह पर टेप लगाओ कोई, कैमरे पर टेप लगाने से हैक नहीं होगा फोन? वाह रे हम्बा हम्बा रम्बा रम्बा…”
Iske muh pe tape lagao koi, camera pe tape lagane se hack nhi hoega phone? Waah re hamba hamba ramba ramba… ???
जय प्रकाश शर्मा नाम के यूजर ने लिखा, ”हाहाहा वैसे तो आपमें बहुत सी खासियत है, पर ये उससे हटकर प्रतिभा है। वैसे आप उद्धव, राहुल, अरविंद, अखिलेश से कम नहीं हो…”
Hahahah waise to bahot si khasiyat hai aapme per ye usme se ke hai that is brilliancy.. you are to brilliant to handle aur bear…??? Waise udhaav, rahul, arvind, akhilesh se kam nahi ho..
— जय प्रकाश शर्मा ???? (@JaisharmaJps) July 21, 2021
ममता बनर्जी इससे पहले भी कई मौकों पर केंद्र सरकार के खिलाफ बिना तथ्यों के आरोप लगा चुकी हैं। ममता अपनी पार्टी की सबसे बड़ी नेता हैं, इसलिए उनसे नीचे वाले सारे नेताओं ने फोन में प्लास्टर करवा लिया है और सूचना ‘दीदी’ तक पहुँच जाए, इसके लिए फोटो भी खिंचवा लिया है।
After CM Mamata Banerjee showed her taped mobile phone to prevent snooping, Trinamool Congress workers have also started taping their mobile cameras, visuals from ABP Ananda pic.twitter.com/1071J0ECAd
— Soumyajit Majumder (@SoumyajitWrites) July 21, 2021
बता दें कि वामपंथी वेबसाइट ‘द वायर’ और एनडीटीवी पेगासस विवाद पर केंद्र सरकार के खिलाफ भ्रामक प्रचार कर रही हैं। उनका कहना है कि भारत सरकार पत्रकारों, केंद्रीय मंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों, विपक्षी नेताओं और अन्य हस्तियों की जासूसी करने के लिए इजरायली कंपनी एनएसओ के पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही है। इसको लेकर आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव लोकसभा में इन्हें लताड़ भी चुके हैं। आईटी मंत्री ने कहा था कि इनकी रिपोर्ट तथ्यों से परे है और इसमें सच्चाई नहीं है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत असम के दौरे पर हैं, जहाँ उन्होंने एक पुस्तक के लॉन्च में हिस्सा लिया। इस पुस्तक में CAA और NRC को लेकर चल रही नागरिक की बहस के सम्बन्ध में लिखा गया है। इस दौरान सरसंघचालक ने कहा कि इस कानून का समर्थन और विरोध दोनों के पीछे चिंतन है, लेकिन किस चिंतन की दिशा कल्याणकारी है – हमें ये देखना है। उन्होंने कहा कि आजकल हर बात पर बवाल मचाने की पद्धति चल पड़ी है, पर हमें सच्चाई से डरना नहीं चाहिए।
उन्होंने भारत के उदाहरण देते हुए कहा कि यहाँ हजारों वर्षों से विविधताओं के बीच कई पंथ और संप्रदाय के लोग एक साथ जिस तरह से रह रहे हैं, वैसा कहीं और देखने को नहीं मिला। उन्होंने कहा कि हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक और कामरूप से लेकर कच्छ तक, अलग-अलग राज्य होने के बावजूद भारतवर्ष में लोग कहीं यात्रा कर सकते हैं। कोई पासपोर्ट वाला कंसेप्ट नहीं था। उन्होंने कहा कि हम एक-दूसरे के रिश्तेदार हैं, बंधु हैं, इसीलिए आज की तारीख़ में सारी दुनिया की नागरिक ‘वन’ है।
उन्होंने कहा कि CAA और NRC को जबरन सांप्रदायिक जामा पहनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर एक प्रदेश का अपना-अपना इतिहास है, जो मिल कर एक हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत विरोधी इतिहासकारों की भी मानें तो 4000 वर्षों से ये चल रहा है, हालाँकि ये अनुमान गलत है और हम काफी प्राचीन हैं। उन्होंने कहा कि जीवन का विचार ये नहीं होना चाहिए कि हम जहाँ भी रहें हावी रहें, ये होनी चाहिए कि सब साथ में रहें।
उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी धर्म या भाषा से हमें कोई आपत्ति नहीं है। साथ ही दोहराया कि जब ऐसा कहा जाने लगा कि यहाँ मेरा खानपान चलेगा, मेरा ईश्वर चलेगा और मेरी भाषा चलेगी – तब हमें समस्या ज्ञात हुई। उन्होंने कहा कि (नीचे के वीडियो में 1:19:50 के बाद से) 1930 से योजनाबद्ध तरीके से मुस्लिमों की संख्या बढ़ाने के प्रयास हुए हैं, ताकि वो अपना वर्चस्व स्थापित कर के देश को पाकिस्तान बना दें। उन्होंने कहा कि पंजाब, बंगाल, असम, सिंध – हर जगह ये था।
मोहन भागवत ने कहा कि कुछ मामलों में ये सत्य भी हुआ, क्योंकि भारत से पाकिस्तान अलग हो गया, लेकिन असम नहीं गया और बंगाल व पंजाब आधा-आधा चला गया। उन्होंने कहा कि बीच में वो लोग कॉरिडोर चाहते थे, लेकिन ये नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उद्देश्य एक ही था कि संख्या बढ़े, और इसके लिए आज भी उनकी सहायता की जाती है। उन्होंने कहा कि सोच ये थी कि हम जहाँ रहें वहाँ हमारा वर्चस्व चले और बाकी हमारी दया पर रहें।
पुस्तक “Citizenship Debate Over NRC & CAA” के लॉन्च के दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत (सम्बोधन 1:06 के बाद)
मोहन भागवत ने कहा, “जिनकी संख्या कम हो जाती है और उनकी बढ़ जारी है, तो कम वालों को सदा चिंता में रहना पड़ता है। ये भारत का, असम का अनुभव है। हमें आपकी भाषा-पूजा पद्धति से कोई दिक्कत नहीं है, हम सम्मान करेंगे। इस्लाम में भी ये आदर्श की बातें हैं लेकिन इन सबका अनुसरण भारत में होता रहा है। हमें ये सब दुनिया से नहीं सीखना है। हमारा रिश्ता कोई सौदा नहीं है, हम एक-दूसरे के भाई हैं।”
उन्होंने कहा, “नागरिकता एक तकनीकी मुद्दा है। संविधान में हमारे कर्तव्य बताए गए हैं। इन नागरिक कर्तव्यों को इस देश में रह कर वो करना ही है – ऐसा संकल्प करने वाला ही यहाँ का नागरिक है। दिक्कत तब आती है जब संवैधानिक कर्तव्य नहीं चाहिए और अधिकार चाहिए, ऐसा कहा जाता है। यहाँ रहने वाले प्रत्येक का इस भूमि के प्रति कर्तव्य है और वो किसी पूजा-संप्रदाय पर आधारित नहीं है।”
मोहन भागवत ने कहा, “CAA और NRC किसी भारत के नागरिक के विरुद्ध बनाया गया कानून नहीं है, इससे यहाँ के नागरिकों या मुस्लिमों को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा। आज़ादी के समय हमने अपने देश के अल्पसंख्यकों की चिंता करने की बात कही थी, जो हम आज भी कर रहे हैं पर पाकिस्तान ने नहीं किया। ये हिन्दू-मुस्लिम का विषय ही नहीं है, राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा बना दिया गया है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर कानपुर में ‘मोदी चाय’ के नाम से दुकान चलाने वाले बुजुर्ग की बेरहमी से हत्या कर दी गई। भाजपा के कार्यक्रमों में गाना गाने वाले बलराम सचान अपनी चाय दुकान के बाहर ही सोते थे। मंगलवार (20 जुलाई 2021) को भी अखंड रामायण पाठ से लौटने के बाद वे अपनी दुकान के बाहर सो गए। लेकिन सुबह उनका शव मिला। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
घटना कानपुर के घाटमपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम बंगलागोपालपुर की है। बलराम सचान ने पीएम मोदी से प्रेरित होकर ‘मोदी चाय’ नाम की एक चाय की दुकान खोल रखी थी। सचान इस चाय की दुकान के माध्यम से अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे।
कानपुर में #मोदी_चाय चलाने वाले बुजुर्ग की ईंटों से कुचलकर बेरहमी से हत्या!
आंखे भी फोड़ दी, सुबह उनका शव अपनी दुकान पर चारपाई पर मिला।
मोदी जी से प्रभावित होकर खोली थी छोटी सी अपनी चाय की दुकान!
— Utkarsh Srivastawa?? (@SpeakUtkarsh) July 21, 2021
रिपोर्ट्स के अनुसार मंगलवार को सचान अखंड रामायण में पाठ के लिए दुकान के पास ही स्थित एक रिसॉर्ट में गए हुए थे। उसके बाद वे अपनी दुकान लौट आए और दुकान के बाहर ही चारपाई पर सो गए। सुबह लोगों को उनकी लाश मिली। रिपोर्टों के अनुसार ईंटों से कुचलकर सचान की हत्या की गई और हत्यारों ने उनकी आँख भी फोड़ दी। सचान की पत्नी ने बताया कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
— Kanpur Outer Police (@KanpurOuterpol) July 21, 2021
कानपुर के पुलिस अधीक्षक ने बताया है कि सूचना मिलने के बाद घाटमपुर थाना प्रभारी ने सचान का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और उन्होंने खुद घटनास्थल पर जाकर सचान के रिश्तेदारों और गाँव वालों से पूछताछ की। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उत्तर प्रदेश के संभल जिले से लव जिहाद का एक मामला प्रकाश में आय़ा है। आरोपित आसिफ कुरैशी को जयपुर से गिरफ्तार कर यूपी पुलिस ने हिंदू नाबालिग लड़की को छुड़ाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खुद को हिंदू बता कुरैशी ने नाबालिग को अपने जाल में फँसाया था।
रिपोर्ट के अनुसार लड़की कुरैशी के साथ लिव इन में रह रही थी। संभल के एसपी ने एबीपी न्यूज को बताया कि आरोपित ने लिव इन एग्रीमेंट में खुद की पहचान आशीष के तौर पर बताई थी। इस मामले में लड़की के परिवार ने 7 जुलाई को चंदौसी थाने में कुरैशी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। एबीपी न्यूज के मुताबिक परिवार का आरोप है कि शुरुआत में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे निराश होकर उन्होंने हिंदू जागरण मंच से मदद की गुहार लगाई।
ऑपइंडिया को हिंदू जागरण मंच संभल के प्रमुख कैलाश चंद्र गुप्ता ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। एफआईआर दर्ज करने में देरी करने पर हिंदू समुदाय द्वारा बड़े पैमाने पर आंदोलन की चेतावनी दी। इसके बाद आसिफ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
कुरैशी का पता लगाने के बाद यूपी पुलिस उसे जयपुर से लेकर आई। लड़की फिलहाल पुलिस सुरक्षा में है। ऑपइंडिया को चंदौसी थाने के एसएचओ डीके शर्मा ने बताया कि बीते दिनों आसिफ को गिरफ्तार किया। गुरुवार 22 जुलाई 2021 को लड़की मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल आसिफ जेल में है और मामले की जाँच चल रही है।
देश भर में आज (21 जुलाई) ईद-उल-अजहा यानी बकरीद मनाई जा रही है। ऐसे में कोरोना संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है। खासकर, केरल जैसे राज्य में जहाँ अन्य राज्यों की अपेक्षा कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। सत्तारूढ़ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा के राज्य में एक बार फिर से लगभग 17,000 नए कोविड-19 के मामले दर्ज किए गए हैं। यहाँ अगले दो दिनों में कोरोना के मामले और बढ़ सकते हैं, क्योंकि केरल में लॉकडाउन में ढील दी गई है।
साल 2020 में देश में कोरोना महामारी आने के बाद से महाराष्ट्र के साथ-साथ केरल सबसे बड़े कोरोना प्रभावित राज्यों में से एक रहा है। इस समय देश भर में केरल ही एक ऐसा राज्य है, जहाँ सबसे अधिक कोविड-19 के नए मामले सामने आ रहे हैं। भारत कोरोना की दूसरी लहर से लड़ रहा है। मोदी सरकार इससे निपटने के लिए युद्ध स्तर पर कई प्रयास कर रही है, लेकिन केरल सरकार के मनमाने रवैये के कारण संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
केरल में बढ़ते कोरोना संक्रमण से निपटने में असमर्थ होने के बावूजद पिनराई विजयन सरकार ने मुस्लिम समुदाय को बकरीद का जश्न मनाने की इजाजत दी। उन्होंने तीन दिनों 18 जुलाई से 21 जुलाई के लिए लॉकडाउन हटा दिया। केरल सरकार ने 17 जुलाई को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बकरीद के लिए छूट देने की घोषणा की थी।
दिलचस्प बात तो यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में काँवड़ यात्रा जैसे हिंदू धार्मिक आयोजनों के खिलाफ फैसला सुनाया, जबकि यूपी उन सफल राज्यों में से एक है, जिसने कोरोना महामारी से निपटने में सफलता हासिल की है। ऐसे में केरल सरकार को इस तरह की कार्रवाई का निर्देश क्यों नहीं दिया गया? सुप्रीम कोर्ट ने केरल में धार्मिक अनुष्ठानों, त्योहारों पर प्रतिबंध लगाने का कोई सख्त आदेश नहीं दिया, जबकि इस राज्य में कोरोना के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए थे।
बकरीद के मौके पर सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 प्रतिबंधों में तीन दिन की छूट की अनुमति देने के लिए केरल सरकार को फटकार लगाई। ढील के अंतिम दिन कोर्ट ने कहा कि केरल सरकार ने बकरीद पर पाबंदियों में इस तरह की छूट देकर देश के नागरिकों के लिए राष्ट्रव्यापी महामारी के जोखिम को बढ़ा दिया है। ऐसे में बकरीद से राज्य में कोरोना संक्रमण फैल चुका है, क्योंकि केरल में ईद के जश्न के दौरान कोरोना के रिकॉर्ड नए मामले सामने आए हैं।
बकरीद पर छूट, केरल में एक सुपर-स्प्रेडर इवेंट
ईद उल-अजहा से पहले राज्य में कोविड-19 प्रतिबंधों में ढील देने के कारण केरल अब महामारी की एक और लहर का सामना कर रहा है, क्योंकि पिछले सप्ताह की तुलना में संक्रमण बढ़ गया है। बकरीद से पहले प्रतिबंध हटाने के कारण केरल ने दो महीने के औसत आँकड़े को पार करते हुए सबसे अधिक ताजा मामले दर्ज किए हैं।
केरल में मंगलवार (20 जुलाई) को कोरोना के 16,848 नए मामले सामने आए। जिसके बाद देश में 2.27% टेस्ट पॉजिटिविटी रेट (टीपीआर) के कई हफ्तों तक 10 प्रतिशत के आसपास रहने के बाद अब टीपीआर 12 प्रतिशत हो गई है। केरल में अब देश भर में नए कोरोना मामलों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत ने पिछले 24 घंटों में 42,015 नए मामले दर्ज किए, वहीं 36,977 मरीज ठीक हुए हैं।
फोटो : Covid19India.org
इसी तरह रविवार (18 जुलाई) को केरल में कोरोना के 13,956 नए मामले दर्ज किए थे। अगले दिन यानी सोमवार (19 जुलाई) को 9,931 मामले दर्ज किए थे। राज्य में कोविड-19 मामलों की कुल संख्या अब 31,87,716 है, जो महाराष्ट्र के बाद देश में दूसरे स्थान पर है।
बकरीद मनाने वाले मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नए मामले सामने आए हैं। 2,752 मामलों के साथ मलप्पुरम में सबसे अधिक मामले हैं, इसके बाद त्रिशूर में 1,929 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा एर्नाकुलम में 1,901, कोझीकोड में 1,689, कोल्लम में 1,556, पलक्कड़ में 1,237, कोट्टायम में 1,101 और तिरुवनंतपुरम में 1,055 के साथ कुल 1,000 से अधिक नए मामले दर्ज किए गए हैं।
फोटो: Covid19India.org
केरल में कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए राज्य सरकार का कुप्रबंधन बेहद चिंताजनक है। अन्य राज्यों में पहले के मुकाबले अब कोरोना के मामलों में कमी आई है। वहीं, केरल में अभी भी 1,26,396 से अधिक सक्रिय मामले हैं।
फोटो: Covid19India.org
बीते तीन दिनों में प्रतिबंधों में ढील के बाद केरल में कोरोना वायरस के कारण 200 से अधिक लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। मंगलवार को केरल में कोरोना से 104 मौतें हुईं, जिससे राज्य में महामारी से मरने वालों का आँकड़ा बढ़कर 15,512 हो गया है।
फोटो: Covid19India.org
केरल में लगातार कोरोना के नए मामले बढ़ रहे हैं। खासकर डेल्टा-वेरिएंट के। कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे पड़ोसी राज्यों को भी महामारी की तीसरी लहर से खतरा है।
बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान को लेकर विवाद पहले ही कम नहीं थे कि अब सोशल मीडिया पर एक नया दावा होने लगा है। कुछ लोगों का कहना है कि सलमान खान की शादी हो चुकी है और उनकी पत्नी नूर व 17 साल की बेटी आइशा दुबई में रहती हैं। ये दावा पिछले साल भी कई जगह सोशल मीडिया पर देखने को मिला था। लेकिन अब सलमान खान ने इस पर चुप्पी तोड़ी है।
सलमान खान को लेकर पिछले साल भी हुए थे दावे
सलमान खान ने अपने भाई अरबाज खान के टॉक शो ‘पिंच’ के सीजन 2 में पहुँचकर इस सवाल का जवाब दिया। पहले तो उन्हें खुद नहीं पता था कि ये सोशल मीडिया से उठाकर जो सवाल अरबाज पढ़ रहे हैं, वो किससे पूछा जा रहा है। लेकिन जब अरबाज ने उन्हें पक्का किया कि लोग ये बातें उन्हीं को लेकर कर रहे हैं तो सलमान ने बताया कि वो तो 9 साल की उम्र से ही गैलेक्सी अपार्टमेंट में रहते हैं और ये बात पूरा भारत जानता है कि उनका घर कहाँ पर है। उनकी कोई बीवी-बेटी नहीं है, यह बात भी उन्होंने शो में कही।
अरबाज खान ने सलमान से पूछा सवाल
बता दें कि अरबाज कान ने जो कमेंट पढ़ा था, उसमें सलमान खान के लिए लिखा था, “‘कहाँ छुपा बैठा है डरपोक। भारत में सब जानते हैं कि तू दुबई में अपनी बीवी नूर और 17 साल की बेटी के साथ है। भारत के लोग को कब तक मूर्ख बनाएगा।”
यही सवाल सुनकर पहले तो सलमान हैरान रह गए। उन्होंने पूछा कि आखिर ये किसके लिए कहा गया है। इसके बाद अरबाज ने उन्हें कहा कि ये सवाल उन्हीं के लिए है। सलमान ने जवाब में कहा,
“इन लोगों को बहुत पता है। यह सब बकवास है। पता नहीं किसके बारे में लिखा है और कहाँ पोस्ट किया है या क्या कहना चाह रहे हैं। ये जो कोई भी है, जो सोचता है कि मैं उसे उसका नाम लेकर जवाब देने जा रहा हूँ। भाई साहब मेरी कोई बीवी नहीं है। मैं हिंदुस्तान में रहता हूँ, गैलेक्सी अपार्टमेंट में 9 साल की उम्र से रह रहा हूँ। मैं इस शख्स को जवाब देने नहीं जा रहा, पूरा भारत जानता है कि मैं कहाँ रहता हूँ।”
अरबाज खान ने इस सवाल के अलावा भी सलमान से कई ट्विट्स को लेकर बात की, जिन पर बेहद शालीनता से सलमान जवाब देते दिखे। लेकिन इस सवाल को सुनने के बाद उनके चेहरे पर हैरानी साफ देखी जा सकती है।
बता दें कि ‘पिंच 2’ के आने वाले शो मे गेस्ट के तौर पर अनन्या पांडे, कियारा आडवाणी, फरहान अख्तर, टाइगर श्रॉफ जैसे बॉलीवुड के नए चेहरे दिखाई देंगे। अरबाज का कहना है कि ये सीजन काफी बड़ा और बोल्ड होगा। उन्होंने ये भी बताया है कि कि सलमान खान को पहले सीजन में न लाने का फैसला जान बूझकर किया गया था, वह अपने बड़े भाई को शो में बुलाने से पहले खुद उस शो को कामयाब बनाना चाहते थे।
89 वर्षीय कल्याण सिंह की हालत नाजुक है और वो कई दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें लाइफ-सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। ‘संजय गाँधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ में उनका इलाज चल रहा है। उनके श्वसन तंत्र की स्थिति गिरती जा रही है, इसीलिए उन्हें विशेष वेंटिलेटर पर रखा गया है। उनकी हालत अस्थिर है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा तक ने अस्पताल में जाकर उनसे मुलाकात की।
उत्तर प्रदेश जनसंख्या के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा राज्य है। वहीं राजस्थान क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा राज्य है। पहले राज्य के कल्याण सिंह मुख्यमंत्री रहे हैं तो दूसरे राज्य में उन्होंने राज्यपाल का पद संभाला। भाजपा नेता कल्याण सिंह को राम मंदिर के कारसेवकों पर गोली चलवाने का आदेश न देने के लिए भी जाना जाता है। साथ ही हिन्दू धर्म के प्रति उनकी जो प्रतिबद्धता थी, उसके कारण वो जीवन भर कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे हैं।
मुख्यमंत्री के रूप में कल्याण सिंह का कार्यकाल एक बार मात्र डेढ़ साल (जून 1991 से दिसंबर 1992) तो एक बार मात्र 5 महीने (सितंबर 1997 से फरवरी 1998) तो तीसरी और अंतिम बार मात्र 1 वर्ष और 9 महीने (फरवरी 1998 से नवंबर 1999) का रहा। टुकड़ों में उनका मुख्यमंत्री का कार्यकाल राजनीतिक व सामाजिक उथल-पुथल के हिसाब से उत्तर प्रदेश के इतिहास के सबसे संवेदनशील अवधियों में से एक गिना जा सकता है।
उनके पहले कार्यकाल के दौरान ही बाबरी विध्वंस हुआ। मुख्यमंत्री बनने के बाद ही उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या जाकर ये संकल्प लिया था कि वहाँ एक भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। अयोध्या को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कवायद उन्होंने तभी शुरू कर दी थी और इसके लिए भूमि अधिग्रहण भी किया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान ही राम मंदिर की ‘आधारशिला’ रखी गई थी।
कल्याण सिंह ऐसे नेता रहे हैं, जिन्होंने बाबरी विध्वंस के बाद राम मंदिर के लिए अपनी सरकार को कुर्बान करने से भी गवारा नहीं किया। उन्होंने भाजपा को 1991 विधानसभा चुनाव में 57 से 221 सीटों तक पहुँचाया। पूर्ण बहुमत की सरकार में वो मुख्यमंत्री थे। लेकिन, उन्होंने बाबरी विध्वंस के बाद इस्तीफा देकर जनता के दरबार में जाना उचित समझा। उनके इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने राज्य की सरकार को भंग कर दिया।
उनका प्रभाव कुछ ऐसा था कि 1993 में उन्होंने अलीगढ़ के अतरौली और कासगंज, दो अलग-अलग जिलों के विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा, और दोनों जगह जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। अतरौली से उनका खास नाता था, जहाँ से वो 10 बार (मार्च 1967 से फरवरी 1980, मार्च 1985 से मई 2007 तक) विधायक रहे। 22 वर्षों तक उन्होंने इस विधानसभा क्षेत्र की सेवा की। वहीं अपने अंतिम संसदीय कार्यकाल के लिए उन्होंने 2009 में एटा को चुना।
ये दोनों क्षेत्र आज भी उन्हें सिर-आँखों पर रखते हैं, तभी उनके बेटे राजवीर सिंह लगातार दो बार से एटा से सांसद हैं और पोते संदीप सिंह 2017 में अतरौली से जीत दर्ज कर के योगी आदित्यनाथ की सरकार में शिक्षा मंत्री का दायित्व संभाल रहे हैं। स्कूलों में भारत माता की प्रार्थना के साथ छात्रों को राष्ट्रवाद की भावना जगाने का काम हो या रोल कॉल के समय ‘यस सर’ की जगह ‘वंदे मातरम्’ कहने पर जोर, उन्होंने छात्रों में देश के प्रति प्यार जगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
दूसरी बार उनकी सरकार कांशीराम और मायावती की पार्टी बसपा के समर्थन से बनी थी। बसपा ने अक्टूबर 1997 में अपना समर्थन वापस ले लिया। लेकिन, कॉन्ग्रेस के 21 असंतुष्ट विधायकों ने अलग पार्टी बना कर कल्याण सिंह की सरकार को समर्थन दिया, जिससे उनकी सरकार बच गई। हालाँकि, जिस नरेश अग्रवाल के नेतृत्व में ये विधायक आए थे, उन्होंने कॉन्ग्रेस को समर्थन दे दिया और जगदंबिका पाल की सरकार में वो उप-मुख्यमंत्री बन बैठे।
लेकिन, इलाहांबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद वो सदन में बहुमत साबित करने में सफल रहे और नरेश अग्रवाल भी वापस भाजपा के साथ आ गए। कल्याण सिंह ने 2004 का लोकसभा चुनाव बुलंदशहर से लड़ा था। इस तरह उन्होंने 4 अलग-अलग जिलों से कई चुनाव लड़े और सभी में जीत दर्ज की। भाजपा के अलावा उन्होंने अपनी पार्टी और निर्दलीय भी चुनाव लड़ा, लेकिन हारे नहीं। बीच में कुछ दिनों के लिए भाजपा से उनका मोहभंग हुआ था, लेकिन जनवरी 2004 में फिर पार्टी में वापस आ गए।
2009 में भी उन्होंने भाजपा से किनारा कर लिया था और अगले ही साल ‘जन क्रांति पार्टी’ का गठन किया, लेकिन 2013 में उन्होंने इस पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें पहले हिमाचल प्रदेश और फिर राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उन्होंने राजस्थान के राज्यपाल के रूप में 5 वर्षों का कार्यकाल पूरा किया। राज्यपाल का कार्यकाल पूरा करते वो फिर भाजपा में शामिल हुए।
6 Dec 1992 was a day of national pride, not national shame. I have no regret, no repentance, no sorrow, no grief.
– Shri Kalyan Singh.
His contribution in #RamMandir Andolan is unforgettable. Pranam to a great Rambhakt on his birthday. ?
— Priyanka (Astrology Guidance) (@AstroAmigo) January 5, 2021
कल्याण सिंह राम मंदिर के कारसेवकों पर गोली न चलवाने के अपने फैसले पर हमेशा कायम रहे और कभी भी इसे लेकर कोई दुःख नहीं जताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाबरी विध्वंस को लेकर उनके मन में न कोई पछतावा है, न कोई शोक है, न कोई खेद है और न ही कोई पश्चाताप का भाव है। उन्होंने ये ज़रूर कहा कि बाबरी को बचाने के लिए पूरे सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे, लेकिन अधिकारियों को स्पष्ट आदेश था कि एक भी श्रद्धालु पर गोली नहीं चलनी चाहिए।
कल्याण सिंह लोधी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और उन्हें राजनीति में लाने का श्रेय 1977 में जनता पार्टी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हरिश्चंद्र श्रीवास्तव को जाता है। उनके बेटे सौरभ श्रीवास्तव वाराणसी के कैंट से भाजपा विधायक हैं। बहुत कम लोगों को पता है कि अतरौली में जन्मे कल्याण सिंह को 1962 में ही जनसंघ से विधानसभा का टिकट मिल गया था, लेकिन पहले चुनाव में ुनेहँ हार मिली थी।
मात्र एक बार कॉन्ग्रेस के अनवर खान ने उन्हें 1980 में अतरौली से हराया था, लेकिन 1985 में उन्होंने जोरदार वापसी की। कल्याण सिंह को एक कड़ा प्रशासक माना जाता था। उन्होंने हमेशा कहा कि वो किसी भी जाँच या कार्रवाई के लिए तैयार हैं, लेकिन राम मंदिर का संकल्प बना रहेगा। उन्हें एक दिन के लिए तिहाड़ जेल में भी रखा गया था। विश्लेषक कहते हैं कि अगर परिस्थितियाँ हल्की अलग होतीं तो अटल बिहारी वाजपेयी के बाद भाजपा की जिम्मेदारी उनके कंधे ही आती।
अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार मुंबई पुलिस ने महीनों की लंबी पड़ताल और कड़ियों को जोड़ने के बाद उनकी गिरफ्तारी की है। इसकी शुरुआत करीब 5 महीने पहले मड आइलैंड के एक बंगले से हुई थी।
इस बंगले पर 4 फरवरी 2021 को पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारा था। इस दौरान दो व्यक्ति नंगे होकर पोर्न फिल्म की शूटिंग करते मिले। पुलिस ने 5 लोगों को उस समय गिरफ्तार कर एक महिला का वहाँ से रेस्क्यू कराया था। यास्मीन रोवा खान, प्रतिभा नलवाडे, मोनू गोपालदास जोशी, भानुसूर्यम ठाकुर और मोहम्मद आसिफ उर्फ सैफी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।
रिपोर्ट के अनुसार मड आइलैंड के जिस बंगले पर छापा मारा गया था उसे 20 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से किराए पर लिया गया था। बंगला मालिक ने पुलिस को बताया था कि भोजपुरी और मराठी फिल्मों की शूटिंग के नाम पर किराए पर लिया गया था। महीनों की जाँच के बाद इसमें कुंद्रा की भूमिका का खुलासा हुआ। यह बात सामने आई की फिल्म निर्माण के लिए बने एक प्रोडक्शन हाउस की आड़ में पोर्न फिल्म रैकेट चलाया जा रहा है।
उस घटना के करीब पाँच महीने राज कुंद्रा को 19 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। कुंद्रा को मंगलवार (20 जुलाई 2021) को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 23 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
‘अंतिम समय पर बोलते थे स्क्रिप्ट में चेंज है’
पुलिस ने कहा कि मड आइलैंड बंगले से गिरफ्तार किए गए पाँचों लोगों ने बताया है कि महाराष्ट्र के बीड या झारखंड जैसे राज्यों से महत्वाकांक्षा लेकर मुंबई आने वाली अभिनेत्रियों को वेब सीरीज में रोल देने का वादा किया जाता था। इसके बाद अंतिम समय में आरोपित लड़कियों को बताते थे कि स्क्रिप्ट में बदलाव किया गया है। उन्हें कथित तौर पर नग्न होकर फिल्म शूट करने के लिए कहा जाता था।
पुलिस ने दावा किया कि ऐसी परिस्थिति में अगर अभिनेत्री इससे इनकार करती थी तो उससे शूटिंग का बिल भरवाने की धमकी दी जाती थी। इसी कारण दवाब में आकर ज्यादातर इसके लिए तैयार हो जाती थीं। शूटिंग होने के बाद आरोपित उसे कथित तौर पर हॉट हिट मूवीज और हॉटशॉट्स जैसे मोबाइल एप्लिकेशन पर डाल देते थे। इतना ही नहीं आरोपितों ने मेन स्ट्रीम ओटीटी प्लेटफॉर्म की तर्ज पर मेंबरशिप भी रखी औऱ इसके लिए सोशल मीडिया पर विज्ञापन भी डाले।
पुलिस के मुताबिक, जून 2020 में ही हॉटशॉट्स ऐप को ऐप्पल स्टोर और नवंबर 2020 में Google के प्ले स्टोर से हटा दिया गया था। क्राइम ब्रांच ने कहा है कि इस केस की जाँच के दौरान पता चला है कि एडल्ट फिल्मों की शूटिंग आम तौर पर एक दिन के भीतर मुंबई के बाहरी इलाके में मड आईलैंड जैसी जगहों पर किराए के बंगले में की जाती है। वहाँ पाँच से छह लोगों का न्यूनतम स्टाफ होता है। पुलिस का दावा है कि लॉकडाउन के दौरान इस तरह के ऐप काफी मशहूर हुए हैं।