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मड आइलैंड का बंगला, ₹20000 रोज का किराया: छापा पड़ा तो 2 नंगे हो कर रहे थे शूटिंग, 5 महीने बाद कुंद्रा गिरफ्तार

अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार मुंबई पुलिस ने महीनों की लंबी पड़ताल और कड़ियों को जोड़ने के बाद उनकी गिरफ्तारी की है। इसकी शुरुआत करीब 5 महीने पहले मड आइलैंड के एक बंगले से हुई थी।

इस बंगले पर 4 फरवरी 2021 को पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारा था। इस दौरान दो व्यक्ति नंगे होकर पोर्न फिल्म की शूटिंग करते मिले। पुलिस ने 5 लोगों को उस समय गिरफ्तार कर एक महिला का वहाँ से रेस्क्यू कराया था। यास्मीन रोवा खान, प्रतिभा नलवाडे, मोनू गोपालदास जोशी, भानुसूर्यम ठाकुर और मोहम्मद आसिफ उर्फ सैफी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।

रिपोर्ट के अनुसार मड आइलैंड के जिस बंगले पर छापा मारा गया था उसे 20 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से किराए पर लिया गया था। बंगला मालिक ने पुलिस को बताया था कि भोजपुरी और मराठी फिल्मों की शूटिंग के नाम पर किराए पर लिया गया था। महीनों की जाँच के बाद इसमें कुंद्रा की भूमिका का खुलासा हुआ। यह बात सामने आई की फिल्म निर्माण के लिए बने एक प्रोडक्शन हाउस की आड़ में पोर्न फिल्म रैकेट चलाया जा रहा है।

उस घटना के करीब पाँच महीने राज कुंद्रा को 19 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। कुंद्रा को मंगलवार (20 जुलाई 2021) को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 23 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

‘अंतिम समय पर बोलते थे स्क्रिप्ट में चेंज है’

पुलिस ने कहा कि मड आइलैंड बंगले से गिरफ्तार किए गए पाँचों लोगों ने बताया है कि महाराष्ट्र के बीड या झारखंड जैसे राज्यों से महत्वाकांक्षा लेकर मुंबई आने वाली अभिनेत्रियों को वेब सीरीज में रोल देने का वादा किया जाता था। इसके बाद अंतिम समय में आरोपित लड़कियों को बताते थे कि स्क्रिप्ट में बदलाव किया गया है। उन्हें कथित तौर पर नग्न होकर फिल्म शूट करने के लिए कहा जाता था।

पुलिस ने दावा किया कि ऐसी परिस्थिति में अगर अभिनेत्री इससे इनकार करती थी तो उससे शूटिंग का बिल भरवाने की धमकी दी जाती थी। इसी कारण दवाब में आकर ज्यादातर इसके लिए तैयार हो जाती थीं। शूटिंग होने के बाद आरोपित उसे कथित तौर पर हॉट हिट मूवीज और हॉटशॉट्स जैसे मोबाइल एप्लिकेशन पर डाल देते थे। इतना ही नहीं आरोपितों ने मेन स्ट्रीम ओटीटी प्लेटफॉर्म की तर्ज पर मेंबरशिप भी रखी औऱ इसके लिए सोशल मीडिया पर विज्ञापन भी डाले।

पुलिस के मुताबिक, जून 2020 में ही हॉटशॉट्स ऐप को ऐप्पल स्टोर और नवंबर 2020 में Google के प्ले स्टोर से हटा दिया गया था। क्राइम ब्रांच ने कहा है कि इस केस की जाँच के दौरान पता चला है कि एडल्ट फिल्मों की शूटिंग आम तौर पर एक दिन के भीतर मुंबई के बाहरी इलाके में मड आईलैंड जैसी जगहों पर किराए के बंगले में की जाती है। वहाँ पाँच से छह लोगों का न्यूनतम स्टाफ होता है। पुलिस का दावा है कि लॉकडाउन के दौरान इस तरह के ऐप काफी मशहूर हुए हैं।

सिद्धू से माफी माँगेंगे CM अमरिंदर सिंह? 62 विधायकों के साथ नवजोत का सिक्सर, कैप्टन के खिलाफ MLA-मंत्री

पंजाब में नए नवेले प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। अध्यक्ष बनने के बाद से ही सिद्धू लगातार अपने समर्थकों और पंजाब में कॉन्ग्रेस विधायकों के साथ मुलाकात कर रहे हैं। इसी क्रम में अमृतसर में सिद्धू के घर पर 62 कॉन्ग्रेस विधायकों की उपस्थिति की सूचना मिल रही है और सबसे बड़ी बात है कि स्वर्ण मंदिर की अपनी यात्रा के लिए सिद्धू ने जहाँ 50 से अधिक विधायकों को निमंत्रण भेजा है, वहीं उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके निकटवर्ती सहयोगियों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक बुधवार (21 जुलाई 2021) को सिद्धू के घर पर कॉन्ग्रेस के 62 विधायक उपस्थित रहे। कॉन्ग्रेस विधायक परगट सिंह ने बताया कि सिद्धू ने कॉन्ग्रेस के विधायकों को अपने घर पर नाश्ते के लिए बुलाया था। परगट सिंह ने यह भी कहा कि सिद्धू, कैप्टन (अमरिंदर सिंह) से माफी क्यों माँगे? परगट ने कहा कि सीएम कई मुद्दों को सुलझाने में असफल रहे हैं, ऐसे में माफी उन्हें (सीएम) माँगनी चाहिए।

परगट सिंह का बयान कोई सामान्य बयान नहीं है क्योंकि पिछले कई दिनों से पंजाब कॉन्ग्रेस में शक्ति के केन्द्रीयकरण का मुद्दा गरमाया हुआ है। सिद्धू के घर में मौजूद सभी कॉन्ग्रेस विधायक सिद्धू के साथ स्वर्ण मंदिर में माथा टेकने के लिए भी गए। सिद्धू ने कॉन्ग्रेस के सभी 77 विधायकों को उनके साथ स्वर्ण मंदिर जाने के निमंत्रण भेजा था। इनमें से 62 विधायकों ने उनके घर पर हाजिरी लगाई जबकि 15 विधायक नहीं आए। इसका राजनीतिक अर्थ यह हुआ कि ये 15 विधायक पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खास हैं, उनके समर्थक हैं।

सिद्धू के घर पहुँचे कैबिनेट मंत्री सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने भी सिद्धू के समर्थन में ही बयान दिया। रंधावा का कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह, सिद्धू से माफी मँगवाना चाहते हैं लेकिन जब उन्हें सिद्धू से माफी ही चाहिए थी तो यह बात हाईकमान के पास रखनी चाहिए थी। अब जबकि हाईकमान (राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी) ने सिद्धू को प्रदेश कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष बना ही दिया है तो यह सभी को स्वीकार्य होना चाहिए।

सिद्धू के साथ हरमिंदर गिल, सुनील दत्ती, सुरजीत धीमान, राजा बड़िंग, सुखजिन्दर सिंह रंधावा, हरजोत कमाल, दविंदर घुबाया, प्रीतम कोटभाई, परमिंदर पिंकी, बरिंदर जीत पहरा, सुखविंदर डैनी, राजिंदर बाजवा, अंगद सैनी, शेर सिंह घुबाया, संगत सिंह गिलजियाँ और परगट सिंह समेत कई अन्य विधायक शामिल रहे।

ज्ञात हो कि रविवार (18 जुलाई 2021) को नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी का अध्यक्ष चुना गया। सिद्धू के अलावा 4 अन्य कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति भी की गई। इन 4 कार्यकारी अध्यक्षों में कुलजीत नागरा, पवन गोयल, सुखविंदर सिंह डैनी और संगत सिंह गिलजियां शामिल हैं। हालाँकि सिद्धू के अध्यक्ष चुने जाने के बाद भी सीएम अमरिंदर सिंह ने उन्हें बधाई तक नहीं दी और उनकी ओर से यह साफ कर दिया गया है कि जब तक सिद्धू, उनसे सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगेंगे तब तक वो सिद्धू से मुलाकात नहीं करेंगे। ऐसे में यह देखना हो गया कि एक प्रदेश का मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष के साथ कब तक बिना मुलाकात के रह सकता है और वो भी तब, जब विधानसभा चुनाव आने वाले हैं।

पिता थे CM, पर गैर कश्मीरी हिंदू से ब्याह पर छीन ली थी डोमिसाइल: अब बेटियों को नहीं दुत्कारेगा जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मंगलवार (जुलाई 20, 2021) को एक पुरानी व्यवस्था में बदलाव करते हुए प्रदेश की महिलाओं को बड़ी राहत दी। फैसले के मुताबिक अब वो महिलाएँ जिन्होंने बाहरी राज्य के लड़कों से शादी की है वो भी डोमिसाइल प्रमाणपत्र की हकदार होंगी। उनके साथ उनके पति भी डोमिसाइल सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए सरकार द्वारा खुद डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। नए फैसले से पहले ये राहत सिर्फ पुरुषों के पास थी।

जम्मू-कश्मीर ग्रांट के डोमिसाइल सर्टिफिकेट (प्रक्रिया) नियम, 2020 के तहत एक नया क्लॉज जोड़ा गया है, जो डोमिसाइल सर्टिफिकेट धारक के जीवनसाथी को कुछ दस्तावेज जमा करने पर सर्टिफिकेट प्राप्त करने की अनुमति देता है। एक डोमिसाइल धारक के पति या पत्नी को डोमिसाइल की श्रेणी प्रदान करने की शक्ति तहसीलदार को प्रदान की गई है। इसके अनुसार धारक के पति या पत्नी प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए पात्र हैं बस उनके पास अपने जीवनसाथी का निवास प्रमाण पत्र और दोनों का वैध विवाह प्रमाण पत्र होना चाहिए।

पुरानी व्यवस्था के चलते आ रही थी दिक्कत

उल्लेखनीय है कि इससे पहले की व्यवस्था में केवल 15 साल तक जम्मू-कश्मीर में रहने, निर्धारित अवधि तक प्रदेश में सेवाएँ देने और विद्यार्थियों के लिए निर्धारित नियमों के तहत ही डोमिसाइल प्रमाणपत्र पाने का प्रावधान था। लेकिन, मंगलवार को सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर डोमिसाइल प्रमाणपत्र नियमों में 7वाँ क्लॉज जोड़ा है। 7वें क्लॉज को जोड़ते हुए न तो पति और ना ही पत्नी का जिक्र किया गया है। सिर्फ स्पाउस ऑफ डोमिसाइल की श्रेणी जोड़ी गई है।

मालूम हो कि अनुच्छेद 370 और 35-ए हटने के बावजूद पुरानी व्यवस्था के चलते दिक्कतें आ रही थीं, लोगों को डोमिसाइल प्रमाणपत्र धारक से शादी करने पर भी डोमिसाइल नहीं मिल पा रहा था। दूसरे राज्यों की जो लड़कियाँ शादी करने के बाद जम्मू-कश्मीर में रहती हैं, उनके लिए स्पष्ट नियम नहीं थे। क्योंकि सामान्य मामलों में डोमिसाइल प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए 15 वर्ष तक जम्मू-कश्मीर में रहना अनिवार्य है। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों और उनके बच्चों के लिए प्रावधान हैं। अब प्रशासन ने इन्हीं दिक्कतों का निवारण करते हुए नया फैसला लिया है।

आर्टिकल 35-ए के तहत होता था भेदभाव

कुछ समय पहले तक जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद 35-ए वहाँ की विधायिका को अपने नागरिक परिभाषित करने का अधिकार देता था। इसी के कारण वहाँ के नागरिकों को रोजगार और संपत्ति का विशेष अधिकार प्राप्त था। इसके नियमों से सबसे ज्यादा समस्या महिलाओं को आती थी। अगर वह दूसरे राज्यों में शादी कर लें तो उनके पास से जम्मू-कश्मीर में संपत्ति अथवा नौकरी का अधिकार छिन जाता था। साल 2019 में जब अनुच्छेद 370 के साथ अनुच्छेद 35-ए को निरस्त किया गया, तो पुरानी व्यवस्था के चलते कुछ परेशानियाँ आ रही थीं।

डोमिसाइल प्रमाण पत्र बाँटने पर भड़के थे फारूक अब्दुल्ला

मई 2020 में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने डोमिसाइल सर्टिफिकेट बाँटने प्रारंभ किए थे, जिससे वहाँ के कई नेता नाराज हुए। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने तो यहाँ तक कहा कि नया डोमिसाइल नियम अवैध और असंवैधानिक है, इसीलिए जम्मू-कश्मीर के लोगों को ये स्वीकार्य नहीं है।

श्रीनगर के सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने नए डोमिसाइल नियम को मानने से इनकार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जब वो बार-बार कहते आ रहे हैं कि वो लोग ऐसा कुछ भी स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, जो अवैध और असंवैधानिक हो, ऐसे में वो ऐसे किसी भी नियम-क़ानून को कैसे स्वीकार कैसे कर सकते हैं, जिसके वो विरुद्ध हों।

यहाँ बता दें कि जिन फारुख अब्दुल्ला ने पिछले साल डोमिसाइल नियमों का विरोध किया था और उसे असंवैधानिक कहा था। उनकी बेटी सारा अब्दुल्ला ने भी साल 2004 में सहारनपुर में जन्मे सचिन पायलट से शादी करने के बाद अपना डोमिसाइल का हक खो दिया था। लेकिन अब प्रशासन का नया फैसला न केवल सारा अब्दुल्ला जैसी महिलाओं को बल्कि उनके पतियों को भी डोमिसाइल प्रमाण पत्र पाने का हकदार बनाएगा।

गजब प्रतिभा या अजब संयोग: राजस्थान के शिक्षा मंत्री की बहू और उनके भाई-बहन, सबको RAS इंटरव्यू में नंबर 80

कई परीक्षार्थियों को एक जैसे नंबर आना नई बात नहीं है। लेकिन राजस्थान प्रशासनिक परीक्षा (RAS) के इंटरव्यू में तीन अभ्यर्थियों को एक समान नंबर ने सबको चौंका दिया है। अब यह संयोग है या समान प्रतिभा या कुछ और, कहना मुश्किल है। ये तीनों अभ्यर्थी राजस्थान प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष और गहलोत सरकार में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के रिश्तेदार हैं।

इन तीन में से एक को RAS 2016 तो दो को 2018 के इंटरव्यू में समान नंबर मिले हैं। RAS 2016 के इंटरव्यू में डोटासरा की पुत्रवधू प्रतिभा पूनिया को 80 अंक मिले। वहीं RAS 2018 के इंटरव्यू में प्रतिभा के भाई-बहन का चयन हुआ। प्रतिभा के भाई गौरव और बहन प्रभा को भी इंटरव्यू में 80-80 अंक मिले है। इसके बाद सोशल मीडिया में कई लोग आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं।

मीडिया खबरों के मुताबिक RAS के परिणाम सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री डोटासरा पर पद के दुरुपयोग का आरोप भारतीय जनता पार्टी लगा रही है। भाजपा का कहना है कि शिक्षा मंत्री ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों को अफसर बनवाने का काम किया है।

इस मामले में सफाई देते हुए डोटासरा ने कहा है कि RAS 2016 के समय प्रतिभा की नौवीं रैंक आई थी और तब प्रतिभा उनकी पुत्रवधू भी नहीं थीं। प्रतिभा के साथ उनके बेटे का रिश्ता RAS ट्रेनिंग के दौरान हुआ। डोटासरा ने प्रतिभा के भाई-बहन के बारे में कहा कि दोनों ही अपने क्षेत्र के टॉपर हैं, ऐसे में उनका 80 अंक प्राप्त करना संभव है। डोटासरा ने कहा कि प्रतिभा की बहन प्रभा अपने दौर की टॉपर है और बीडीएस करने के बाद कई सालों से RAS की तैयारी में जुटी हुई है। इसके अलावा डोटासरा ने प्रतिभा के भाई गौरव के बारे में कहा कि वह भी दिल्ली यूनिवर्सिटी का टॉपर है।

हालाँकि इस मामले में ध्यान देने योग्य बात यह है कि जो भी इस मामले में प्रश्न उठा रहा है वह तीनों अभ्यर्थियों के परीक्षा में सफल होने के सामर्थ्य पर प्रश्न नहीं उठा रहा है, बल्कि राज्य के शिक्षा मंत्री और पीसीसी चीफ के रिश्तेदार होने के नाते तीनों अभ्यर्थियों के इंटरव्यू में एक समान अंक प्राप्त करने के संयोग पर प्रश्न उठाया जा रहा है।

‘ऑक्सीजन की कमी से हमारे यहाँ कोई नहीं मरा’ – कहा 2 कॉन्ग्रेस शासित राज्यों ने, पर ‘ट्वीटवीर’ राहुल गाँधी ने केंद्र को घेरा

राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हैं। ट्वीट करते हैं। सरकार को ‘घेरते’ हैं। बस मुद्दे या तो जनता से दूर होते हैं या फिर झूठ पर आधारित होते हैं। ये बात अलग है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और मीडिया का एक बड़ा हिस्सा जेब में होने के कारण कोई उनका फैक्ट-चेक नहीं करता। उनकी ट्वीट पर ‘छेड़छाड़ वाला कंटेंट’ का लेबल नहीं लगाया जाता। अब उन्होंने ऑक्सीजन की कमी से होने वाली मौतों पर राजनीति खेली है। ऑक्सीजन की कमी से हुई हर एक मौत पर उन्हें केंद्र से आँकड़ा चाहिए, जबकि स्वास्थ्य राज्य का मुद्दा है।

राहुल गाँधी ने क्या कहा? राहुल गाँधी ने एक खबर ट्वीट की। PTI की इस खबर में लिखा था कि केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से होने वाली मौतों को लेकर राज्यों ने अलग से कोई आँकड़ा नहीं दिया है। अब स्वास्थ्य मुख्यतः राज्य का मुद्दा है। कोरोना के आँकड़ों पर संक्रमितों की संख्या, रिकवर होने वालों की संख्या, मृतकों की संख्या – ये सब डेटा राज्य जुटा रहे थे।

राज्यों द्वारा ये आँकड़े केंद्र को भेजे जा रहे थे, जिन्हें सरकारी वेबसाइट पर अपलोड किया जाता था। इससे केंद्र सरकार को भी सहूलियत होती है कि किस राज्य में स्थिति गंभीर होने के कारण ज्यादा ध्यान देना है और किस राज्य में प्रबंधन ठीक है तो हस्तक्षेप की ज़रूरत न के बराबर है। राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार बैठक की। जहाँ स्थिति गंभीर होने की आशंका थी, उन राज्यों को चेताया भी।

‘राज्यों ने अलग से कोई आँकड़े नहीं दिए’ का अर्थ राहुल गाँधी ने क्या लगाया, अब वो देखिए। उन्होंने इसे ऐसे दिखाया जैसे केंद्र सरकार कह रही हो कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से किसी मरीज की मौत ही नहीं हुई। अब राज्यों ने बताया ही नहीं, तो केंद्र को कैसे पता चलेगा? देश के हर राज्य में स्वास्थ्य मंत्रालय है, उनका पूरा का पूरा बजट है और हर साल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय उन्हें सहयोग देता है।

केंद्र योजनाएँ बनाता है और इसके लिए वित्त की व्यवस्था करता है, लेकिन इसे धरातल पर तब तक लागू नहीं किया जा सकता, जब तक राज्य व स्थानीय प्रशासन सहयोग न करे। अब ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाओं और दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने किस तरह अड़ंगा लगाया था, ये पता होना चाहिए। योजना के वहाँ लागू न होने से जनता को ही घाटा हुआ।

ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के सहारे अपनी राजनीति चमकाने की जुगत में लगे राहुल गाँधी को सवाल राज्यों से पूछना चाहिए कि उन्होंने ऐसा कोई आँकड़ा क्यों नहीं दिया? पंजाब, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड और तमिलनाडु – ये वो राज्य हैं, जहाँ कॉन्ग्रेस ये तो सत्ता में है या सत्ता की साझीदार है। राहुल गाँधी इन पाँचों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहेंगे कि वो ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों का आँकड़ा केंद्र को भेजें?

वैसे मामला ये है कि राहुल गाँधी अगर कहें भी तो शायद ही कोई मानें। कुछ राज्यों की सरकारों का दावा राहुल गाँधी के दावे के विपरीत है तो कुछ राज्यों में उनके ही नेता उनकी नहीं सुनते। पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का फैसला अब तक स्वीकार नहीं किया है। महाराष्ट्र में उनका संगठन ‘एकला चलो रे’ का राग अलाप रहा है।

महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की बात करना यहाँ विशेष रूप से आवश्यक है। इन दोनों राज्यों का कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के आँकड़े को लेकर क्या कहना है। सबसे पहले बात छत्तीसगढ़ की। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने छत्तीसगढ़ को ‘ऑक्सीजन सरप्लस राज्य’ करार देते हुए कहा कि कोविड-19 आपदा की दूसरी लहर के दौरान राज्य में ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत ही नहीं हुई।

यहाँ उन्होंने आँकड़े देने-लेने की बात नहीं की, बल्कि सीधा ऐलान किया कि हुई ही नहीं। लेकिन, राहुल गाँधी इस पर ट्वीट कर के ऐसा नहीं लिखेंग – “सिर्फ़ ऑक्सीजन की ही कमी नहीं थी। संवेदनशीलता व सत्य की भारी कमी- तब भी थी, आज भी है।” मोदी सरकार के बयान को गलत संदर्भ में पेश कर और तोड़-मरोड़ कर उन्होंने यही चीन लिखी थी। देव ने कहा कि उन्होंने दिल्ली जैसे प्रदेशों के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के बारे में सुना, लेकिन यहाँ ऐसा नहीं था।

अब बात महाराष्ट्र की, जहाँ तीन पहियों वाली सरकार में कॉन्ग्रेस भी शामिल है। ये अलग बात है कि शिवसेना और NCP से रोज उसके कुछ न कुछ मतभेद सामने आते रहते हैं। मई के मध्य में महाराष्ट्र की सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ को स्पष्ट रूप से कहा कि ऑक्सीजन शॉर्टेज की वजह से राज्य में किसी मरीज की मौत नहीं हुई है। क्या इस पर राहुल गाँधी का कोई ‘संवेदनहीनता’ वाला ट्वीट आया?

अगर केंद्र सरकार को राज्य आज आँकड़े भेज देते हैं कि इतने मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई है, सरकार सदन और सुप्रीम कोर्ट को सूचित कर देगी। जो राज्य बताएँगे, सरकार उसे सार्वजनिक कर देगी। यही तो संघीय ढाँचा है, जहाँ मिलजुल कर काम होता है। ये कोई कॉन्ग्रेस का संगठन थोड़े है, जहाँ माँ और बेटा-बेटी जो यह दे, उसे ही अंतिम ब्रह्मवाक्य की तरह माना जाता है।

और ऑक्सीजन के मामले में दिल्ली सरकार को कोर्ट ने फटकारा, उसका क्या? सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई ऑडिट से खुलासा हुआ कि दिल्ली को ऑक्सीजन की जितनी आवश्यकता थी, उससे चार गुना से अधिक बढ़ा कर दिखाया गया। इस पर तो राहुल गाँधी चुप ही रहे। जिस केंद्र सरकार ने टैंकरों की व्यवस्था से लेकर ऑक्सीजन उत्पादन में वृद्धि के लिए जी-तोड़ प्रयास किया, उसे बदनाम करने में तो एक सेकेंड भी नहीं हिचके।

ये वही बात है कि वैक्सीन पर सवाल उठाने वाले वैक्सीन क्यों नहीं दिया पूछने लगे। ठीक वैसा ही है, जब ‘भाजपा की वैक्सीन’ कहने वाले नेता उसी वैक्सीन को लेने लगें। वही नीति है, जिसका पालन कर के गंगा किनारे वर्षों से चली आ रही परंपरा को कोरोना से जोड़ कर लाशों की राजनीति की जाए। ये चीजें आगे भी जारी रहेंगी और आरोप लगाने के लिए तोड़-मरोड़ का काम होता रहेगा। राहुल गाँधी भी जमीन से दूर, जनता से दूर, बैठ कर आराम से ट्वीट करते रहेंगे।

स्मृति ईरानी पर अश्लील टिप्पणी: प्रोफेसर शहरयार अली भेजे गए जेल, ‘फेसबुक अकाउंट हैक’ वाली बात कोर्ट ने की खारिज

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को लेकर फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले प्रोफेसर शहरयार अली ने मंगलवार (20 जुलाई 2021) को फिरोजाबाद के जिला व सत्र न्यायधीश अनुराग कुमार के सामने सरेंडर किया। इस मामले में कोर्ट ने बेल नहीं दिया। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

फेसबुक पोस्ट के जरिए केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रोफेसर ने अंतरिम जमानत याचिका दायर की थी। हालाँकि, कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, अली ने इसी साल मार्च 2021 केंद्रीय मंत्री के खिलाफ एक अश्लील फेसबुक पोस्ट किया था।

अली के खिलाफ केस

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 9 जुलाई 2021 को ही केंद्रीय मंत्री पर अश्लील टिप्पणी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर अली को गिरफ्तारी से सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था। उनकी याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने स्पष्ट कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल दूसरों को बदनाम करने के लिए नहीं किया जा सकता है। न्यायाधीशों ने आगे कहा कि लोगों को उस भाषा के प्रति सचेत रहना चाहिए, जो वे सोशल मीडिया पर दूसरों की आलोचना या उपहास करने के लिए करते हैं।

शहरयार अली फिरोजाबाद के एसआरके कॉलेज में इतिहास विभाग के प्रमुख हैं। 55 वर्षीय प्रोफेसर ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के साथ एक अश्लील फेसबुक पोस्ट साझा किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रोफेसर अली नौकरी छोड़कर फरार हो गए थे।

वहीं इस मामले में SRK कॉलेज ने कहा है कि वे अली के बयान का समर्थन नहीं करते हैं और कॉलेज प्रशासन महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक और अभद्र टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करेगा।

किसी को कुछ भी कहकर भाग नहीं सकते

प्रोफेसर शहरयार अली की बेल को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा, “आप इस तरीके से महिलाओं को बदनाम नहीं कर सकते। आप सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ बदनाम करने के लिए नहीं कर सकते। किस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है? आलोचना करने का भी एक तरीका होता है। चुटकुला कहने का भी एक तरीका होता है। आप किसी को भी आप जो चाहते हैं, कहकर भाग नहीं सकते हैं।”

बता दें कि प्रोफेसर अली ने इसी साल मई 2021 में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी औऱ सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई 2021 को इस केस में सुनवाई की। इससे पहले हाई कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि शुरुआती तौर पर प्रोफेसर के आचरण के चलते उन्हें जमानत का अधिकार नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने अली को रेगुलर बेल के लिए पहले आत्म समर्पण करने लिए कहा था, जो कानून सम्मत होगा।

प्रोफेसर ने कहा-अकाउंट हैक हो गया था

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेशों को चुनौती देते हुए अली के वकील विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दावा किया कि उनके मुवक्किल का फेसबुक अकाउंट हैक कर लिया गया था, और जैसे ही उन्हें अश्लील पोस्ट के बारे में पता चला, उन्होंने एक माफी माँगी।

हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय वकील के इन तर्कों से प्रभावित नहीं हुए। शीर्ष कोर्ट ने कहा था, “आप जो कह रहे हैं, वह एक सोच है। आपने माफी माँगने के लिए उसी अकाउंट का इस्तेमाल किया, लेकिन आप कहते हैं कि आपका अकाउंट हैक कर लिया गया था। इससे पता चलता है कि आप अभी भी उस अकाउंट का उपयोग कर रहे हैं। आपका अकाउंट हैक किया गया था, इसका कोई सबूत है आपके पास?” लेकिन वकील हैकिंग का कोई सबूत सर्वोच्च न्यायालय को नहीं दे सका।

केंद्रीय मंत्री के खिलाफ पोस्ट

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में भाजपा के नेता की शिकायत पर मार्च 2021 में अली को फिरोजाबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर अश्लील कंटेंट को प्रकाशित करने के आरोप में आईटी एक्ट की धारा 67ए के व समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 505 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

बिहार: हनुमान मंदिर के महंत की गोली मारकर हत्या, मंदिर से 300 मीटर दूर शव मिला

बिहार के मधेपुरा जिले में हनुमान मंदिर के महंत की हत्या कर दी गई। बुधवार (21 जुलाई 2021) की सुब​ह मंदिर से 300 मीटर दूर उनका शव मिला। बताया जा रहा है कि महंत मंगलवार की रात दो साथियों के साथ कीर्तन में गए थे। वहाँ से लौटने के बाद वे मंदिर में ही सो गए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है कि अपराधी महंत को उठाकर मंदिर से कहीं बाहर ले गए और उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। इस सनसनीखेज वारदात को उदाकिशुनगंज थाना अंतर्गत बुधमा पुलिस कैंप के सुखासनी हनुमान मंदिर के पास अंजाम दिया गया।

स्थानीय लोगों ने शव देखने के बाद इस घटना के बारे में पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने बताया है कि मृतक की पहचान 75 वर्षीय महंत भोला प्रसाद साह के रूप में हुई है। अपराधियों की तलाश की जा रही है। महंत के बेटे विकास कुमार ने बताया कि सुखासनी हनुमान मंदिर में उनके पिता भोला प्रसाद साह, पुजारी टूना चौधरी और एक सेवानिवृत्त चौकीदार रहते थे। ये सभी मंदिर में ही सोते थे। मंगलवार की रात तीनों मंदिर से एक किमी दूर कीर्तन में गए थे। वहां से तीनों बारी-बारी मंदिर लौटे।

विकास ने बताया है कि उसके पिता (भोला प्रसाद साह) बीमार रहते थे। इस वजह से परिवार के लोग अक्सर रात को भी उन्हें देखने के लिए मंदिर आया करते थे। मंगलवार की रात भी उनका एक भाई रात 9 बजे के आसपास खाना लेकर मंदिर आया है। विकास के अनुसार रात के दो बजे के करीब वह भी मंदिर की तरफ गया था और अपने पिता को सोते हुए पाया।

पुजारी टूना चौधरी का कहना है कि रात को 2 बजे के करीब जब वह मंदिर आया तो उसे बहुत नींद लगी हुई थी, जिसके चलते वह ध्यान नहीं दे पाया कि महंत सो रहे हैं या नहीं। बता दें कि इस घटना के बाद आसपास के इलाके में हडकंप मच गया है। पुलिस घटना को अंजाम देने वालों की तलाश में जुट गई है। पुलिस का कहना है कि हत्या के कारणों का पता लगाया जा रहा है। इस सिलसिले में कुछ लोगों से पूछताछ भी की जा रही है।

मोबाइल में पोर्न देखने या रखने पर हो सकती है जेल? क्यों हुई राज कुंद्रा की गिरफ्तारी?: जानिए भारत में पोर्न संबंधी कानून

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और बिजनेस मैन राज कुंद्रा पोर्नोग्राफी मामले में गिरफ्तार हुए हैं। उन पर पोर्न फिल्में बनाने और उन्हें प्रकाशित करने का आरोप लगा है। भारत में पर्सनल स्पेस पर पोर्नोग्राफी देखना प्रतिबंधित नहीं है लेकिन राज कुंद्रा को जिस पोर्नोग्राफी कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है उसमें पोर्न फिल्म बनाना, उसे सार्वजनिक तौर पर दिखाना, वितरित करना और प्रकाशित करना अपराध माना गया है।

इसके अलावा भी देश में कुछ पोर्न साइट्स पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया है और कई बार पोर्न फिल्में डाउनलोड करना और उन्हें देखना भी अपराध हो सकता है, तो आइए जानते हैं कि क्या हैं भारत में पोर्न से संबंधित कानून।

पोर्न से संबंधित कानून

भारत में ऑनलाइन अपराध को नियंत्रित करने के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2002 लागू है। IT ऐक्ट के तहत पोर्न से संबंधित कुछ विशेष परिस्थितियाँ हैं जहाँ सजा और जुर्माने के प्रावधान किए गए हैं। IT ऐक्ट की धारा 67 A के तहत यदि पोर्न का कंटेन्ट रेप या शारीरिक शोषण से जुड़ा है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा IT ऐक्ट चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में सख्त है क्योंकि यदि कोई पोर्न नाबालिगों से संबंधित है तो इसमें IT ऐक्ट की धारा 67 B के तहत कार्रवाई की जाएगी।

IT ऐक्ट के अलावा चाइल्ड पोर्नोग्राफी को रोकने और उसके लिए सजा का प्रावधान करने के लिए यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO), 2012 बनाया गया। POCSO ऐक्ट के तहत ऐसे पोर्न डाउनलोड करना, देखना और शेयर करना अपराध है जिसमें बच्चे शामिल हैं।

IT ऐक्ट और POCSO ऐक्ट के अलावा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 292, 293, 294, 500, 506 व 509 के तहत भी पोर्नोग्राफी के मामलों में सजा का प्रावधान किया गया है। अब प्रश्न यह उठता है कि जब भारत में निजी तौर पर पोर्न देखना प्रतिबंधित नहीं है (चाइल्ड पोर्न को छोड़कर) तो फिर राज कुंद्रा को किस अपराध में गिरफ्तार किया गया है? भारत में लागू IT ऐक्ट के अंतर्गत किसी वेबसाइट या डिजिटल पोर्टल पर पोर्न सामग्री अपलोड करना, जब कोई थर्ड पार्टी इसका एक्सेस कर सके, अपराध माना गया है।

इसके अलावा सोशल मीडिया, ईमेल, व्हाट्सऐप, मैसेज के जरिए पोर्न फिल्मों का प्रसारण करना, किसी दूसरे व्यक्ति को अश्लील फोटो या वीडियो भेजना भी अपराध माना गया है। राज कुंद्रा भी पोर्न फिल्म बनाने और उसे प्रकाशित करने का आरोपित हैं।

पोर्न फिल्मों का प्रकाशन

भारत के IT ऐक्ट के तहत कोई व्यक्ति अथवा डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी भी तरह की पोर्न सामग्री के प्रकाशन अथवा प्रसारण का कारण बनता है तो उसे भी पोर्नोग्राफी कानून के तहत दोषी माना जाएगा। इस कानून के तहत उस डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालक भी दंडात्मक कार्रवाई के अधीन माने जाएँगे, जहाँ से पोर्न फिल्मों या वीडियो का प्रकाशन या प्रसारण हुआ है। IT ऐक्ट के इंटरमिडियरी गाइडलाइंस के तहत यह डिजिटल प्लेटफॉर्म का दायित्व बनता है कि वो यह सुनिश्चित करें कि उनके माध्यम से किसी भी प्रकार की पोर्न सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण न हो।

इस दायरे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भी आते हैं। हाल ही में ट्विटर पर भी चाइल्ड पोर्नोग्राफिक कंटेंट दिखाने के लिए देश में लागू IT ऐक्ट और POCSO कानून के तहत ही केस दर्ज किया गया था।

भारत में सरकार द्वारा लगभग 1,300 ऐसी पोर्न साइट्स को प्रतिबंधित किया गया है जहाँ चाइल्ड पोर्न से संबंधित सामग्री मौजूद थी। हालाँकि पिछले कुछ समय से सरकारें लगातार पोर्न सामग्री के विनियमन को लेकर सक्रिय हुई हैं क्योंकि कई बार सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा यह मुद्दा उठाया गया कि इंटरनेट पर सहजता से उपलब्ध पोर्न फिल्मों और वीडियो के कारण युवाओं की मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

देहरादून की एक स्कूल में पोर्न देखने के बाद एक छात्रा का गैंगरेप उसी के साथ पढ़ने वाले छात्रों ने किया था। इसके बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकार से पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी सरकार को चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में निर्देशित किया गया था जिसके बाद सरकार ने कई ऐसी पोर्न साइट्स को प्रतिबंधित किया जिनमें हिंसात्मक एवं चाइल्ड पोर्न से संबंधित सामग्री उपलब्ध थी।

राज कुंद्रा ने दरअसल पोर्न वीडियो भारत में ही बनाए लेकिन जिस एप्लीकेशन पर उनका प्रसारण किया जाता था वह हॉटशॉट्स ऐप विदेश में रजिस्टर्ड केनरिन नाम की कंपनी द्वारा बनाया गया था। भारत के साइबर पोर्नोग्राफी कानूनों से बचने के लिए यह कंपनी विदेश में रजिस्टर्ड कराई गई थी और भारत में शूट की गई पोर्न फिल्में ‘वीट्रांसफर’ नाम के डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए केनरिन को भेजी जाती थीं।

‘वीट्रांसफर’ के माध्यम से बड़ी से बड़ी साइज की फाइल्स (वीडियो, इमेज आदि) आसानी से ट्रांसफर की जा सकती हैं। हालाँकि हॉटशॉट्स ऐप न तो गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध था और न ही एप्पल प्ले स्टोर पर लेकिन इसे APK फ़ाइल की मदद से फोन में इंस्टाल किया जा सकता है। हॉटशॉट्स पर भारत से करीब 10 लाख यूजर मौजूद हैं। हॉटशॉट्स के अलावा पोर्न फिल्मों को कई अन्य एप्लीकेशन पर पेड सब्स्क्रिप्शन के साथ भी बेचकर भारी मुनाफा कमाया गया।

‘गंदी नाली है Bullywood, अगली फिल्म में करूँगी पर्दाफाश’: राज कुंद्रा की गिरफ़्तारी पर बोलीं कंगना – हर चमकने वाली चीज सोना नहीं

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति व कारोबारी राज कुंद्रा की पोर्नोग्राफी मामले में गिरफ्तारी पर टिप्पणी की है। उन्होंने इसके लिए इंस्टाग्राम पोस्ट किया, जिसमें कंगना ने राज कुंद्रा द्वारा चलाए जा रहे पोर्न फिल्म के रैकेट को ‘पोर्नोग्राफी स्कैंडल’ करार दिया। बॉलीवुड की ‘क्वीन’ ने कहा कि इसीलिए वो फिल्म उद्योग को ‘गटर’ कहती हैं।

कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी शेयर कर कहा कि चमकने वाली सभी चीजें सोना ही नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि वो अपनी आने वाली फिल्म में ‘बुलीवुड’ के अपराधों को उजागर करेंगी। ‘बुलीवुड’ शब्द का इस्तेमाल अभिनेत्री ने बॉलीवुड के संदर्भ में किया है। जावेद अख्तर और महेश भट्ट जैसे फिल्म उद्योग की हस्तियों पर उन्होंने धमकी देने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि हमें फिल्म उद्योग में एक मजबूत वैल्यु सिस्टम बनाने की आवश्यकता है।

अभिनेत्री कंगना रनौत की इंस्ट्राग्राम पोस्ट

दरअसल, कंगना रनौत की आगामी फिल्म ‘टिकू वेड्स शेरू’ का प्रोडक्शन ‘मणिकर्णिका’ के बैनर तले किया जा रहा है। इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म का निर्देशन साई कबीर ने कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कंगना का यह पहला डिजिटल मीडिया प्रोडक्शन होगा।

पोर्नोग्राफी मामले में राज कुंद्रा गिरफ्तार

गौरतलब है कि बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा को पोर्न फिल्में बनाने और उसे इंटरनेट पर अपलोड करने के मामले में रविवार को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। मुंबई पुलिस के मुताबिक राज कुंद्रा फरवरी 2021 के स्कैंडल के मामले के मुख्य साजिशकर्ता थे। इतना ही नहीं, राज कुंद्रा ने पोर्न फिल्मों के धंधे से बड़ी कमाई की है।

फिलहाल, कुंद्रा एक एप कंपनी में सीनियर पद पर रहे रेयान थार्प के साथ 23 जुलाई, 2021 तक पुलिस हिरासत में हैं। राज कुंद्रा के गिरफ्तार होने के बाद बॉलीवुड अभिनेत्रियों पूनम पांडे और शर्लिन चोपड़ा ने खुलासा किया था कि उनकी वजह से ही वो एडल्ट इंडस्ट्री में आई हैं।

बेंगलुरु में 200 महिलाओं का यौन शोषण, जम्मू में 7वीं की छात्रा से रेप: J&K के पूर्व कॉन्ग्रेसी मंत्री का बेटा है आबिद

जम्मू की दोमाना पुलिस ने एक पूर्व मंत्री के बेटे के खिलाफ चालान पेश किया है। 6 वर्ष पुराने बलात्कार के मामले में ये कार्रवाई की गई। पूर्व अब्दुल गनी वकील के बेटे आबिद गनी पर 200 महिलाओं के यौन शोषण के आरोप हैं। ये मामला 7वीं कक्षा की एक नाबालिग लड़की से बलात्कार का है। उस पर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भी रेप के मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, तब उसने कबूला था कि उसने 200 लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की है।

नाबालिग पीड़िता दोमाना क्षेत्र में एक खेल कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पहुँची हुई थीं। कार्यक्रम ख़त्म होने के बाद जब वो अपने घर जा रही थी, तभी आबिद अपने दोस्तों के साथ आ धमका और छात्रा का रास्ता रोक लिया। उसने खुद को छात्रा के पिता का दोस्त बताते हुए कहा कि उसके पिता ने ही उसे लेने के लिए भेजा है। किसी तरह धोखाधड़ी से वो छात्रा को अपनी कार में बिठाने में कामयाब रहा।

इसके बाद वो पीड़िता को अपने तालाब तिल्लो स्थित क्वार्टर लेकर गया, जहाँ उसके साथ बलात्कार किया गया। चूँकि वो एक मंत्री का बेटा था , इसीलिए जम्मू कश्मीर में सरकारें आती-जाती रहीं लेकिन ये मामला 6 साल तक यूँ ही दबा कर रखा गया। इस मामले के सामने आते ही पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार किया और सोमवार (19 जुलाई, 2021) को उसके खिलाफ कोर्ट का चालान पेश किया।

पुलिस ने जून 2021 में सोपोर स्थित उसके घर पर छापेमारी कर के उसे दबोचा था। वो अपने पिता अब्दुल गनी वकील के साथ उनके ही घर पर रहता था। अब्दुल गनी पहले कॉन्ग्रेस में हुआ करते थे, लेकिन फिर पीपल्स कॉन्फ्रेंस पार्टी में आ गए। वो 2006-08 में गुलाम नबी आज़ाद की सरकार में कश्मीर के समाज कल्याण मंत्री हुआ करते थे। दिलचस्प ये है कि अब्दुल गनी ने बच्चों के साथ रेप पर मौत की सज़ा वाले मोदी सरकार के कानून का स्वागत करते हुए इसे तुरंत जम्मू कश्मीर में लागू करने की माँग की थी।

30 वर्षीय आबिद गनी जब बंगलौर में हुआ करता था, तब वहाँ भी उसने कई महिलाओं के साथ छेड़खानी की थी। एक जॉब इंटरव्यू के दौरान ही उसने एक महिला के साथ यौन दुर्व्यवहार किया था। उसके अब्बा अब्दुल गनी भी 2014 में एक लड़की से अश्लील बातें करते हुए पाए गए थे। इसका ऑडियो टेप वायरल हुआ था। आबिद की अम्मी अब्दुल की दूसरी बीवी हैं और जम्मू कश्मीर के वित्त विभाग में कार्यरत हैं।

2017 में कर्नाटक में गिरफ्तार होने के बाद उसने खुद के एक नेता और अधिवक्ता का बेटा होने की धमकी दी थी। उसे जेपी नगर में एक मस्जिद के पास से गिरफ्तार किया गया था। एक बैंक इंटरव्यू के मंगलुरु से आई एक महिला का उसने यौन शोषण किया था। उसने 2 साल में बेंगलुरु में 200 महिलाओं का यौन शोषण किया था। 25 साल की महिला ने उसके खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। हालाँकि, फिर वो इस केस में जमानत पाने में कामयाब रहा था।