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अभिसार शर्मा ‘वाले’ Newsclick को ₹38 करोड़ की चायनीज फंडिंग, अर्बन नक्सल गौतम नवलखा को भी पैसे: ED

प्रवर्तन निदेशालय (ED) को न्यूज़ पोर्टल ‘Newsclick’ के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जाँच में कुछ अहम सबूत मिले हैं। इस न्यूज़ पोर्टल और इसके प्रोमोटरों ने श्रीलंका-क्यूबा मूल के एक कारोबारी नेविले रॉय सिंघम से एक करार किया था, जो शक के घेरे में है। ‘PPK Newsclick Studio Pvt Ltd’ को जो 38 करोड़ रुपए की बड़ी फंडिंग मिली थी, उसका मुख्य स्रोत इसी कारोबारी को माना जा रहा है, जिसके सम्बन्ध चीन से हैं।

वेबसाइट को ये रकम 2018-21 के बीच विदेश से भेजी गई थी। TOI की खबर के अनुसार, इस मामले की जाँच कर रहे ED के सूत्रों ने बड़ी जानकारी दी है कि कारोबारी नेविले का सम्बन्ध चीन की सत्ताधारी पार्टी ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC)’ के एक प्रोपेगंडा संगठन से है। ‘भीमा-कोरेगाँव’ हिंसा से भी इस न्यूज़ पोर्टल के तार जुड़ रहे हैं क्योंकि जो रकम इसे मिली, उसका कुछ हिस्सा तथाकथित एक्टिविस्ट्स को गया।

इसमें ‘एल्गार परिषद’ के गौतम नवलखा का नाम भी शामिल है, जो फ़िलहाल जेल में बंद है। न्यूजक्लिक के संस्थापक और मुख्य संपादक प्रबीर पुरकायस्था से संबंधों को लेकर ED ने जेल में ही गौतम नवलखा से पूछताछ भी की है। वेबसाइट को जो रकम मिली, उसके एक बड़े हिस्से को उसने ‘सेवाओं का निर्यात (Export Of Services)’ के रूप में प्रदर्शित किया है। पुरकायस्था ने सिंघम के CPC से सम्बन्ध होने या फिर खुद के पोर्टल के चीनी सरकार से सम्बन्ध होने से इनकार किया है।

उन्होंने बताया कि सिंघम एक अमेरिकी कारोबारी हैं, जो एक सॉफ्टवेयर कंपनी चलाया करते थे। उन्होंने उस कंपनी को 700-800 मिलियन डॉलर (522.27 करोड़ से लेकर 596.88 करोड़ रुपए तक) में बेच दिया था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें जो भी फंड्स मिले हैं, वो अमेरिका के जाने-माने संस्थाओं से प्राप्त हुए हैं। साथ ही उन्होंने इन मामलों में RBI के दिशानिर्देशों का पालन करने का भी दावा किया।

जबकि ED के सूत्रों का कहना है कि ‘Newsclick’ को अमेरिका के ‘जस्टिस एंड एजुकेशन फंड्स इंक’, ‘GSPAN LLC’ और ‘ट्राइकनटिनेंटल लिमिटेड इंक’ से फंड्स प्राप्त हुए। दिलचस्प ये है कि इन सभी कंपनियों का पता समान ही है। इसके अलावा ब्राजील के ‘सेंट्रो पॉपुलर डेमिदास’ से भी फंड्स मिले हैं। ED ने हाल ही में ‘Newsclick’ के शेयरधारकों के ठिकानों की तलाशी ली थी। उस समय CPC से जुड़े कई ईमेल कन्वर्सेशन हाथ लगे थे।

मीडिया संस्थान ने इन आरोपों से कई बार इनकार किया था। पोर्टल के संस्थापक ने कहा कि अगर ED के पास उनके खिलाफ कोई भी सबूत है कि उन्हें कोर्ट के सामने चार्जशीट में पेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वो सुनवाई का सामना करने और कानूनी रूप से आरोपों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। हाल ही में उन्होंने अदालत से निवेदन किया था कि ED उनके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई न करे।

अदालत ने उन्हें फ़िलहाल राहत प्रदान किया हुआ है। उन्होंने इस बात का जवाब नहीं दिया कि सिंघम चीन से काम कर रहे हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि कोरोना संक्रमण के कारण उन्होंने चीन को सुरक्षित समझ कर वहाँ अपना ठिकाना बना लिया हो। ED के सूत्रों ने कहा कि न्यूजक्लिक को मिले पेमेंट कुछ खास कामों से जुड़े थे, जैसे अफ्रीका में चीन के कामकाज को मजबूत बनाना, इत्यादि।

अफ्रीका में अक्सर चीन पर तानाशाही और कैपिटलिस्ट होने के आरोप लगते हैं। इसमें जैक मा के खिलाफ कार्रवाई का बचाव करना भी शामिल है। बता दें कि ‘अलीबाबा’ के कंपनी के संस्थापक ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आलोचना की थी, जिसके बाद उन पर और उनकी संपत्तियों पर कड़ी कार्रवाई हुई थी। एक बाप्पादित्य सिन्हा नाम के व्यक्ति को भी मीडिया संस्थान से पेमेंट्स गए हैं, जो CPM नेताओं के ट्विटर हैंडल्स मैनेज करता है।

पुरकायस्था ने बाप्पादित्य के साथ अपने संबंधों को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होंने कंपनी को सॉफ्टवेयर सर्विसर्ज दी थीं, जिसके बाद उन्हें पेमेंट किया गया। कई देशों में चीन किस तरह अपने नैरेटिव के प्रचार-प्रसार के लिए मीडिया को भारी फंडिंग कर रहा है, ये छिपी हुई बात नहीं है। ‘Newsclick’ कंपनी के लॉन्च के कुछ ही महीनों के भीतर कैसे इतने बड़े फंड्स उसे आने शुरू हो गए, ये भी इस मामले को संदेहास्पद बनाता है।

वित्तीय लेनदेन की जाँच के समय के समय केंद्रीय एजेंसी को पता चला कि एक इलेक्ट्रिसियन को 1.55 करोड़ रुपए का पेमेंट किया गया है। ये किस प्रकार की सेवाओं के बदले किया गया, इसकी डिटेल्स माँगी गई है। पुरकायस्था ने दावा किया कि उनके पीछे ED के अलावा आयकर विभाग और दिल्ली पुलिस का इकोनॉमिक ऑफेंस विंग भी लगा है। उन्होंने कंपनी के प्रत्येक शेयर के दाम 11,00 रुपए होने का भी बचाव किया। 29 जय तक ED की गिरफ़्तारी से उन्हें अदालती राहत मिली हुई है।

बता दें कि ‘न्यूज़क्लिक’ ही वो वेबसाइट है, जिस पर पत्रकार अभिसार शर्मा अपने वीडियो पोस्ट करते हैं। धान को गेहूँ बताकर चर्चा में आने वाले पत्रकार से ट्विटर ट्रोल बने अभिसार शर्मा ने फरवरी 2021 में ये जानकारी दी थी कि ‘न्यूज़क्लिक’ वेबसाइट के मालिकों और शेयर होल्डर्स के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रेड मारी है। उन्होंने बताया था कि वो इसी चैनल (न्यूज़क्लिक) पर अपने शो ‘बोल के लब आज़ाद हैं तेरे’ और ‘न्यूज़ चक्र’ करते हैं।

मिस्री बीवी, इस्लामिक देशों की यात्रा, भरपूर फंडिंग: धर्मांतरण रैकेट में यूपी ATS ने एडम, कौशर और अर्सलान को किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश एटीएस ने हाल ही में धर्मान्तरण के मामले में गिरफ्तार किए गए उमर गौतम से जुड़े रैकेट से जुड़े तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपितों को महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किया गया है और अब उन्हें लखनऊ लाया जाएगा। शुक्रवार (16 जुलाई 2021) को गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम प्रकाश कावरे उर्फ ​​एडम, कौशर आलम और अर्सलान उर्फ ​​भूप्रिया बंदो हैं।

आरोपितों को लखनऊ लाने के बाद पुलिस इन्हें अदालत के समक्ष पेश करेगी और इनके षडयंत्रों एवं नेटवर्क का पता लगाने के लिए गहनता से पूछताछ हेतु न्यायालय से पुलिस रिमांड में लेने की माँग करेगी।

यूपी पुलिस के मुताबिक, एडम महाराष्ट्र नेटवर्क का संपर्क बिंदु था। वह लगातार उमर गौतम के संपर्क में था और राज्य में धर्मान्तरण की गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा था। पुलिस का कहना है कि एडम की पत्नी मिस्र की नागरिक है और वह अन्य इस्लामिक देशों के संपर्क में भी था। पुलिस का कहना है कि एडम पइस्लामिक प्रोपेगेंडा में भी शामिल रहा है।

वहीं, झारखंड के धनबाद का रहने वाला कौशर आलम महाराष्ट्र और कर्नाटक में धर्मान्तरण करवाता था। इसके अलावा, वह नेटवर्क की फंडिंग भी देखता था। एडम की उम्र लगभग 30 साल, अर्सलान की उम्र 29 साल है, जबकि कौशर आलम 50 साल का है।

उमर गौतम और जहाँगीर कासमी को आतंकी हाफिज सईद हो सकती है फंडिंग

धर्मान्तरण के रैकेट को लेकर उत्तर प्रदेश एटीएस कई चौंकाने वाले खुलासे कर चुकी है। Zee News की रिपोर्ट मुताबिक, उत्तर प्रदेश पुलिस के सूत्रों ने पुष्टि की है कि उन्हें संदेह है कि जहाँगीर कासमी और मोहम्मद उमर गौतम द्वारा चलाए जा रहे धर्मान्तरण के रैकेट को भारत के मोस्ट वांटेड आतंकवादी और जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद फंडिग कर रहा था। जी न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपितों से पूछताछ के दौरान धर्म परिवर्तन के मामले में हाफिज सईद के जुड़े होने की बात सामने आई थी।

धर्म परिवर्तन का रैकेट जाकिर नाइक से जुड़ा

धर्मांतरण रैकेट का मुख्य आरोपी उमर गौतम के दिल्ली स्थित संगठन इस्लामिक दावा केंद्र के तार कुख्यात इस्लामी उपदेशक और भगोड़ा जाकिर नाइक के सहयोगी के साथ जुड़े हैं। इसके अलावा, इस बात का भी खुलासा हुआ था कि किस तरह से ‘प्रेरणा शिविर’ के रूप में धर्म परिवर्तन के रैकेट को संचालित किया जा रहा था। धर्मांतरण रैकेट के लोग इन शिविरों में लोगों को धर्मांतरित कराते थे और पैसे का लालच देकर इन्हें अपना एजेंट बना लेते थे। फिर इन एजेंटों को कथित ‘प्रेरणा’ शिविर में लोगों को लाने के लिए कहा जाता था, जिसके लिए उन्हें 5,000 रुपये दिए जाते थे। उस लाए गए व्यक्ति द्वारा धर्मांतरण कर लेने के बाद एजेंटों को 20-25 रुपये का भुगतान किया जाता था। इसके अलावा,

दिव्याँग बच्चों को मानव बम के रूप में इस्तेमाल करने वाला था उमर गौतम

धर्मान्तरण से जुड़े उमर गौतम और कासमी की योजना का खुलासा करते हुए ऑपइंडिया ने बताया था कि आरोपित मूक-बधिर बच्चों को इस्लाम स्वीकार करवाते थे और बाद में उन्हें मानव बम के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अपराधियों ने दिव्याँग बच्चों को गैर-मुसलमानों से नफरत करने, इस्लाम स्वीकार करने और उन्हें आत्मघाती हमलावरों के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी, क्योंकि ऐसे बच्चे विरोध कम कर पाते।

पिछले 10 साल से अब्बू-बेटी में नाजायज संबंध, अ​श्लील हरकत करते हुए गाँव वालों ने खेत में पकड़ा: वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश में मेरठ के सरूरपुर क्षेत्र के एक गाँव में रहने वाले अब्बू और उसकी बेटी का अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्रामीणों ने गुरुवार (15 जुलाई, 2021) को अब्बू-बेटी को खेत में आपत्तिजनक स्थिति में रंगे हाथों पकड़ा था। इस घटना के बाद से गाँव के लोगों में खासा रोष है। बाप-बेटी के रिश्ते ​को कलंकित करने वालों का मामला पुलिस के संज्ञान में पहुँच गया है, लेकिन अधिकारी इस पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने आरोपित को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन उन्होंने उनकी एक भी ना सुनी, बल्कि ग्रामीणों पर ही पथराव कर दिया, जिससे वहाँ भगदड़ मच गई। इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने शुक्रवार (16 जुलाई 2021) को पंचायत बैठाने की भी कोशिश की, लेकिन मौके पर पहुँची पुलिस ने लोगों को कार्रवाई का आश्वासन देकर पंचायत हटवा दी।

इस शर्मनाक करतूत को अंजाम देने वाले मुस्लिम परिवार के प्रति ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। वहीं, वीडियो वायरल होने के बाद से पुलिस भी काफी सर्तक हो गई है। स्थिति नियंत्रण में रखने के लिए आरोपित अब्बू के घर पर एहतियातन पुलिस तैनात की गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्रामीणों ने पुलिस को वीडियो वायरल मामले में संज्ञान लेने और आरोपित पिता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। एक स्थानीय ग्रामीण ने बताया कि पिछले 10 साल से अब्बू-बेटी के नाजायज संबंध हैं। दोनों समाज की परवाह किए बिना इस कुकृत्य को गाँव में अंजाम दे रहे हैं। लेकिन कहते हैं ना पाप का घड़ा कभी ना कभी तो भरता ही है। यही इस मामले में हुआ, बरसों से चल रहे इस कांड का पर्दाफाश गुरुवार (15 जुलाई) को उस वक्त हुआ जब अब्बू अपनी छोटी बेटी को बाइक पर लेकर पड़ोसी गाँव के खेत में पहुँचा।

इस दौरान संदेह होने पर खेत में काम कर रहे ग्रामीणों ने दोनों को अश्लील हरकत करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। दोनों को आपत्तिजनक हालात में देखने पर ग्रामीण आगबबूला हो गए और जमकर उनकी धुनाई कर दी। यहाँ तक कि उन्होंने साक्ष्य के तौर पर उनका वीडियो भी बना डाला। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। हालाँकि, हम इस तरह के वीडियो को यहाँ साझा नहीं कर सकते हैं।

बता दें कि इस क्षेत्र के पुलिस इंचार्ज सुनील कुमार ने बताया कि ग्रामीणों को हमने इस मामले में सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। यदि कोई शिकायत नहीं देता है, तभी भी पुलिस अपनी तरफ से मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करेगी।

‘अगर यूपी में योगी आदित्यनाथ दोबारा बने CM तो मैं प्रदेश छोड़कर चला जाऊँगा’: मुनव्वर राना ने भारी मन से किया ऐलान

मशहूर उर्दू शायर मुनव्वर राना अक्सर अपने विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। शनिवार (17 जुलाई 2021) को उन्होंने कहा, ”अगर औवेसी की मदद से यूपी में योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्यमंत्री बने तो मैं प्रदेश छोड़कर चला जाऊँगा। ये भी मान लूँगा कि ये राज्य मुसलमानों के रहने लायक नहीं है।” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

दरअसल, मुनव्वर राना ने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी के उतरने के बाद फिर से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन जाती है। या यूपी में बीजेपी ध्रुवीकरण करने में सफल हो जाती है और योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्यमंत्री बनते हैं तो वो सूबा छोड़कर कहीं और चले जाएँगे।

शायर ने मीडिया में कहा कि बीजेपी और ओवैसी दोनों ऐसे पहलवान हैं जो सिर्फ जनता को और अन्य सियासी दलों को दिखाने के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन मामला कुछ और ही है। उन्होंने कहा कि ये दोनों इसलिए लड़ रहे हैं ताकि वोटों का ध्रुवीकरण हो और मुस्लिम वोट ओवैसी खींच लें, ताकि अन्य सियासी दलों को इसका फायदा ना मिले और बीजेपी आसानी से चुनाव जीत ले जाए। उन्होंने आगे कहा कि अगर मुसलमानों में जरा सी भी अक्ल होगी तो वो ओवैसी को वोट नहीं देंगे।

गौरतलब है कि बीते दिनों उत्तर प्रदेश एटीएस ने अलकायदा के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इसको लेकर नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से बात करते हुए मुनव्वर राना ने इन आतंकियों पर कार्रवाई को चुनावी बताते हुए कहा था कि यह कुछ और नहीं है बल्कि चुनाव की तैयारी में टूथब्रश का इस्तेमाल है। गिरफ्तार आतंकियों को जमीयत उलेमा-ए-हिन्द द्वारा कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के प्रश्न पर राना ने AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ असभ्य भाषा का इस्तेमाल किया था।

दानिश सिद्दीकी के ट्वीट को अनुपलब्ध बता रहा ट्विटर: ‘सबका हिसाब होता है…’ वाला जवाबी ट्वीट खूब हो रहा वायरल

अफगानिस्तान में सरकार और कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकी संगठन तालिबान के बीच जारी संघर्ष को कवर करने के दौरान शुक्रवार को तालिबान ने रॉयटर्स के पुरस्कार विजेता फोटो-पत्रकार दानिश सिद्दीकी की हत्या कर दी थी। सिद्दीकी की मौत के बाद माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर अजीब घटनाएँ देखने को मिल रही हैं।

एक सोशल मीडिया यूजर ने बताया कि दानिश का वो प्रसिद्ध ट्वीट, जिसमें उन्होंने हिंदू मृतकों के अंतिम संस्कार की तस्वीरों को साझा किया था, अब वो ‘उपलब्ध नहीं’ है।

जब भी कोई दानिश सिद्दीकी के उस ट्वीट में दी गई रिप्लाई को पढ़ने के लिए उस पर क्लिक करता है तो ट्विटर कहता है कि यह ट्वीट उपलब्ध नहीं है।

साभार: ट्विटर

रजनीश शर्मा ने सिद्दीकी पर ‘हमारे लोगों की मौत’ का मजाक बनाने का आरोप लगाया था और कहा था कि भगवान के दरबार में सबका हिसाब रखा जाता है। सिद्दीकी की मौत के बाद उनका ट्वीट वायरल होने के बाद शर्मा ने कहा कि वह बेहद दुखी थे, क्योंकि उन्हें पहली लहर के दौरान चार दिनों के भीतर अपनी पत्नी और पिता का अंतिम संस्कार करना पड़ा था।

साभार: ट्विटर

हालाँकि, यह केवल अंतिम संस्कार की चिता का ट्वीट नहीं है जो अनुपलब्ध दिखाई देता है। जब कोई दानिश सिद्दीकी के किसी भी ट्वीट थ्रेड पर क्लिक करता है तो पिछले ट्वीट ‘अनुपलब्ध’ दिखाई देता है।

साभार: ट्विटर

जब कोई प्रतिबंधित ट्वीट के ‘अधिक जानें’ टैग पर क्लिक करता है, तो ट्विटर का ‘हेल्प‘ सेक्शन खुल जाता है, जहां विभिन्न स्तरों के लिए स्पष्टीकरण दिया गया है। हालाँकि, इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ट्वीट को प्रतिबंधित क्यों किया गया है।

साभार: ट्विटर

ऐसा लगता है कि जैसे ट्विटर ने उस ट्वीट को ही सेंसर कर दिया है, जिसके बारे में सवाल किए जा रहे हैं। हालाँकि, इसके ‘हेल्प’ सेक्शन में दिया गया स्पष्टीकरण ट्वीट पर ‘अनुपलब्ध’ टैग के बारे में अधिक जानकारी नहीं देता है। यह एक गलती भी हो सकती है जिसे पहले ही ठीक किया जा सकता था, क्योंकि दानिश सिद्दीकी के सभी ट्वीट एक ही तरह से ‘अनुपलब्ध’ दिखाई दे रहे हैं।

यह संभव है कि ट्विटर बग के कारण उनके ट्वीट अनुपलब्ध दिख रहे हों, या ये भी हो सकता है कि क्योंकि वो एक संघर्ष क्षेत्र में मारा गया है, इसलिए ट्विटर उसके ट्वीट्स को सेंसर कर रहा है। हालाँकि, ऐसा लगता है कि किसी पत्रकार के अकाउंट के साथ ऐसा नहीं किया गया है।

बता दें कि दानिश सिद्दीकी अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा अफगान बलों के साथ संघर्ष के दौरान मारा गया था। वह युद्ध से तबाह हुए देश में अफगान सुरक्षाबलों के साथ जुड़कर एक रिपोर्टिंग असाइनमेंट पर थे। वह कंधार के स्पिन बोल्डक जिले में मारे गए थे।

भारत में कोविड -19 की दूसरी लहर के चरम के दौरान सिद्दीकी विवाद के केंद्र में थे, जब मीडिया में अंतिम संस्कार की चिता की असंवेदनशील तस्वीरें छपी थीं। असंवेदनशील होने के कारण तस्वीरों की व्यापक रूप से आलोचना हुई थी। हालाँकि, तस्वीरों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी सराहना भी की गई थी।

प्रियंका गाँधी के धरने पर यूपी पुलिस का एक्शन: प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष समेत 500 से अधिक कार्यकर्ताओं पर FIR

उत्तर प्रदेश में शनिवार (17 जुलाई 2021) को गाँधी प्रतिमा के नीचे धरना देने के मामले में पुलिस ने कॉन्ग्रेस महासचिव व यूपी प्रभारी प्रियंका गाँधी पर बड़ी कार्रवाई की है। यूपी पुलिस ने प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और दिलप्रीत सिंह सहित 500 से ज्यादा कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ निषेधाज्ञा उल्लंघन, कोरोना प्रोटोकॉल उल्लंघन सहित अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

बताया जा रहा है कि शुक्रवार (16 जुलाई 2021) को लखनऊ में जीपीओ पर गाँधी प्रतिमा के नीचे प्रियंका गाँधी और अजय कुमार लल्लू सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मौन व्रत कर धरना दिया था। हालाँकि, प्रियंका का यह मौन व्रत शाम को ही खत्म हो गया था। शनिवार को यूपी पुलिस ने 500 से अधिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया, लेकिन FIR में प्रियंका का नाम शामिल नहीं है।

गौरतलब है कि प्रियंका आज सुबह लखीमपुर खीरी में उन महिलाओं से मिलीं, जिनके साथ पंचायत चुनाव के दौरान अभद्र व्यवहार करने की खबर सामने आई थी। इस दौरान कॉन्ग्रेस महासचिव ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पीड़ित महिलाओं को एक न एक दिन पर्चा भरने का मौका जरूर मिलेगा।

उन्होंने आगे यह भी कहा, ”चुनाव के दौरान महिला अपना नामांकन दाखिल नहीं कर पाई। यूपी में ऐसी स्थिति हो गई है कि महिला नामांकन भरने जाती है और उसकी पिटाई कर दी जाती है। ये लोकतंत्र नहीं है।” साथ ही प्रियंका ने आगे ये भी कहा कि हिंसा में शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने ये भी कहा कि जिन जगहों पर हिंसा हुई हैं, वहाँ चुनाव रद्द कर दोबारा चुनाव होने चाहिए।

प्रोफेसर ने तालिबान को बताया संघ से अधिक मानवतावादी: दानिश मामले में लिबरल गिरोह भी भूला तालिबान का नाम

अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा भारतीय फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की हत्या के कुछ दिनों बाद अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के प्रोफेसर ने कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकी संगठन की प्रशंसा की है। उन्होंने तालिबान को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से अधिक मानवतावादी करार दिया है।

अमेरिका की स्टीवेन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एसोसिएट मार्केटिंग प्रोफेसर गौरव सबनीस ने शनिवार (17 जुलाई 2021) को एक ट्वीट में लिखा, “दानिश सिद्दीकी के मामले में संघ से कहीं अधिक मानवता तालिबान दिखा रहा है।” प्रोफेसर सबनीस ने सिद्दीकी की मौत के बाद हो रही आलोचनाओं के जवाब में यह ट्वीट किया था। मृतक जर्नलिस्ट ने हाल ही में भारत में कोरोना पीड़ितों की मौत के बाद उनके परिवार की गोपनीयता का उल्लंघन करते हुए अंतिम संस्कार की फोटो क्लिक की थी। इतना ही नहीं उन्होंने ब्रिटिश स्वामित्व वाली स्टॉक फोटोग्राफी एजेंसी अलामी पर उसे बेचने के लिए भी अपलोड किया था।

गौरव सबनीस के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

सिद्दीकी के बहाने अपने ट्वीट के जरिए गौरव सबनीस ने बताया है कि आरएसएस और उसके फॉलोवर्स की तुलना में कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवादी संगठन तालिबान ने एक फोटो जर्नलिस्ट की हत्या करने के बावजूद अधिक मानवता का प्रदर्शन किया है। रॉयटर्स के लिए काम करने वाले दानिश सिद्दीकी की मौत के मामले में RSS को अमानवीय दिखाने और तालिबान की भूमिका को खत्म करने के उद्देश्य से किए गए इस दावे पर नेटिजन्स ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। ‘प्रिंसेस वोक लिबरल’ नाम के एक ट्विटर यूजर ने अमेरिका में रहने वाले मार्केटिंग प्रोफेसर पर निशाना साधा और लिखा, “दानिश सिद्दीकी को तालिबान ने नहीं, आरएसएस ने मारा।” उस कमेंट के तुरंत बाद गौरव सबनीस ने इस यूजर को माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट पर ब्लॉक कर दिया।

इसके बाद अपने पहले के ट्वीट को सही ठहराने की कोशिश में सबनीस ने आरोप लगाया, “संघी गिद्धों द्वारा दानिश सिद्दीकी को चोंच मारने का एक मात्र कारण यह है कि उन्होंने भारत में कोविड से होने वाली मौतों को बड़े पैमाने पर कवर किया था। हकीकत में यही एक एक मात्र कारण है। क्योंकि उनकी कुछ तस्वीरों ने उसके गुमराह करने वाले नैरेटिव को खराब कर दिया है।”

गौरव सबनीस के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एसोसिएट मार्केटिंग प्रोफेसर ने आगे दावा किया, “ध्यान दें कि ट्विटर पर केवल दिवंगत वीर फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी को डंप करने वाले संघी ही हैं। क्योंकि वे अभी भी इस बात से परेशान हैं कि जब बीजेपी ने भारत में कोविड की दूसरी लहर में होने वाली मौतों को छिपाने की पूरी कोशिश की तो दानिश ने ये तस्वीरें खींच लीं। यही एकमात्र कारण है।” संघ और तालिबान के बारे में अपने पहले के ट्वीट के कारण लोगों के गुस्से को कम करने के लिए गौरव ने लिखा, “मोदी सबसे बेहतर हैं, इस भ्रम को बनाए रखने के लिए आप कितने लाख जीवन बलिदान करने को तैयार हैं?”

लिबरल्स ने दानिश सिद्दीकी की हत्या के लिए तालिबान को दोषी नहीं माना

फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की मौत पर कई वामपंथी ‘लिबरल-सेक्युलर’ पत्रकारों ने भी ट्विटर पर शोक व्यक्त किया है। इन्होंने मृतक फोटो जर्नलिस्ट को श्रद्धाँजलि देते हुए उनकी तस्वीरों को खूब शेयर किया, लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनमें से शायद ही किसी ने हत्या के लिए तालिबान के नाम का जिक्र किया।

राना अय्यूब ने दानिश सिद्दीकी और उनके काम के बारे में बताया कि उन्हें फोटोग्राफी का कितना शौक था। उन्होंने एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें वह मृत पत्रकार के बगल में बैठी नजर आ रही थीं। हालाँकि, इस संदेश का लहजा हैरान करने वाला था। ऐसा लग रहा था कि फोटो जर्नलिस्ट की मौत किसी प्राकृतिक बीमारी के कारण हुई है और उसकी हत्या इस्लामिक आतंकवादियों ने नहीं की है। इसी तरह की रणनीति न्यूजलॉन्ड्री की मनीषा पांडे, स्तुति मिश्रा, आरफा खानम शेरवानी, योगेंद्र यादव और रवीश कुमार ने भी अपनाई।

हैरान करने वाली बात यह है कि एक भी शोक संदेश में दानिश सिद्दीकी की हत्या करने वाले कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन की ओर इशारा तक नहीं किया गया। एक भी लिबरल पत्रकार में यह टिप्पणी करने का नैतिक साहस नहीं था कि उन्हें (दानिश) अफगानिस्तान में तालिबान ने मार डाला। इस लिबरल जमात ने उनकी मौत को राजनैतिक मुद्दा बनाने के लिए उसकी फोटोग्राफी का जमकर इस्तेमाल किया, लेकिन यह उल्लेख नहीं किया कि यह तालिबान था, जिसने उसे अफगान बलों के साथ संघर्ष के दौरान मार डाला था। इसके बजाय, उन्होंने इस घटना पर लीपा-पोती करते हुए यह नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की कि सत्ता सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करने के लिए दानिश सिद्दीकी से प्रेरणा लेने की जरूरत है।

पाकिस्तान में अफगान राजदूत की बेटी सिलसिला का अपहरण: रिहा करने से पहले जमकर किया गया प्रताड़ित, अस्पताल में भर्ती

पाकिस्तान में अफगानिस्तान के राजदूत की बेटी का अपहरण कर लिया गया है। हालाँकि, कुछ देर बाद ही उन्हें रिहा कर दिया गया। अभी वह अस्पताल में भर्ती हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, शनिवार (17 जुलाई 2021) को पाकिस्तान में तैनात अफगान राजदूत नजीबुल्लाह अलीखिल की बेटी सिलसिला अलीखिल का अपहरण कर लिया गया और रिहा करने से पहले उन्हें पाकिस्तान के कुछ अज्ञात लोगों द्वारा जमकर प्रताड़ित किया गया।

अफगान विदेश मंत्रालय ने घटना की निंदा करते हुए कहा, ”हम इस जघन्य अपराध की निंदा करते हैं और पाकिस्तानी मिशन में तैनात अपने राजनयिकों, कर्मचारियों और उनके परिजनों की अंतरराष्ट्र्रीय कानूनों के तहत सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग करते हैं।” उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के समक्ष इस मामले को रखेंगे और दोषियों के खिलाफ तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने की माँग करेंगे।

अफगान विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस्लामाबाद में अफगान के राजदूत नजीबुल्लाह अलीखिल की बेटी सिलसिला अलीखिल को शुक्रवार (16 जुलाई, 2021) को दोपहर डेढ़ बजे जिन्ना मार्केट के पास से अगवा कर लिया गया था। पाकिस्तान के कुछ अज्ञात लोगों द्वारा जमकर प्रताड़ित करने के बाद शाम सात बजे सिलसिला को तहजीब बेकरी के पास जख्मी हालत में छोड़ दिया गया। फिलहाल, पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। हालाँकि, अभी तक अपहरणकर्ताओं का पता नहीं चल पाया है। अलीखिल को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

बता दें कि पाकिस्तान पर अफगानिस्तान में हिंसा के जरिए सत्ता वापसी की कोशिश में लगे तालिबान की लगातार मदद करने के आरोप लगते रहे हैं। अमेरिकी सेना की वापसी के बाद पाकिस्तान और उसकी एजेंसियों पर खुलेआम तालिबान को समर्थन की खबरें आती रहती हैं।

माँ विंध्यवासिनी मंदिर में वीआईपी लाइन पर भड़के भक्त, बीजेपी विधायक ने सभी के लिए खुलवाया रास्ता

ईश्वर के दरबार में अमीर हो या गरीब सभी को समान रूप से देखा जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के विंध्याचल में स्थित माँ विंध्यवासिनी मंदिर में जिला प्रशासन ने वीआईपी कल्चर लागू कर दिया। वीआईपी लोगों के लिए माँ के दर्शन करने के लिए अलग से एक लाइन रखी गई और उसमें टोकन की भी व्यवस्था की गई, ताकि वीआईपी श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत न हो। इसकी वजह से मंदिर में आनी वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से समस्याएँ बढ़ती जा रही थीं। इसके बाद भाजपा के स्थानीय विधायक रत्नाकर मिश्रा ने जिला प्रशासन के वीआईपी रास्ते को आम जनता के लिए खुलवा दिया।

जिला प्रशासन के इस फैसले पर शुरू से ही विवाद खड़ा हो गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर का प्रबंधन देखने वाली संस्था और संतों के साथ सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार और सीओ सिटी प्रभात राय ने मंदिर को पंडों के साथ एक बैठक की थी। इस दौरान मंदिर के प्रवेश द्वार को दो भागों में बाँटने का निर्णय लिया गया था। इसमें से एक रास्ते को वीआईपी लोगों के रिजर्व करने का निर्णय जिला प्रशासन ने लिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के दौरान प्रशासन ने मंदिर में सुबह चार बजे से शाम के चार बजे तक श्रद्धालुओं द्वारा माँ विंध्यवासिनी का चरण स्पर्श करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अलावा किसी भी वीआईपी को अंदर जाने देने से पहले उसे प्रशासनिक भवन पर नाम-पता, पद व मोबाइल नंबर दर्ज कराना होता था। उनके तीर्थ पुरोहित को भी अपना विवरण दर्ज कराना होता था। इसके बाद मुहर लगी टोकन दी जाती थी, जिसे अंदर जाते वक्त गेट पर ले लिया जाता था। इसका शाम को मिलान भी किया जाता था कि जो अंदर गया था वो लौटा या नहीं। मंदिर तक वाहन नहीं पहुँच सके, इसके लिए 8 बैरियर भी लगाए गए थे।

विंध्यवासिनी मंदिर का रास्ता है संकरा

गौरतलब है कि विंध्यवासिनी मंदिर की महिमा और प्रसिद्धि के कारण दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। इसकी वजह से मंदिर में भारी भीड़ हो जाती है, जबकि मंदिर और इसका परिसर बहुत छोटा है। इसकी वजह से दर्शन के लिए आने वालों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा मंदिर में एक लाइन वीआईपी के लिए आरक्षित करना समस्या को और बढ़ाने जैसा था।

लव सीन का स्क्रिप्ट सुनाते समय गलत तरीके से छूने लगा: ‘तारक मेहता…’ वाली हिरोइन पिता के साथ भी हो जाती है अब अनकंफर्टेबल

लोकप्रिय टेलीविजन शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में ‘दीप्ति जासूस’ का किरदार निभाकर मशहूर हुईं एक्ट्रेस आराधना शर्मा ने कास्टिंग काउच को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ‘स्पिलिट्सविला 12’ की एक्स कंटेस्टेंट आराधना शर्मा ने हाल ही में खुलासा किया कि उन्होंने 19 साल की उम्र में कास्टिंग काउच का सामना किया था। उन्होंने बताया कि कास्टिंग एजेंटों में से एक ने उनके साथ गंदी हरकत की। इस घटना ने उनको जिंदगी भर के लिए इतना डरा दिया कि उनको किसी पर भी विश्वास नहीं होता था। यहाँ तक कि वो अपने पिता के साथ भी अनकंफर्टेबल हो गई थीं।

आराधना शर्मा ने एक इंटरव्यू में बताया, ”मेरे साथ एक ऐसी घटना घटी, जिसमें मैं पूरी जिंदगी नहीं भूल सकती। चार-पाँच साल पहले की बात है, मैं तब पुणे में पढ़ रही थी। इसके साथ मॉडलिंग का असाइनमेंट भी करती थी, तो लोग थोड़ा मुझे जानते थे। एक व्यक्ति था, जो मुंबई में कास्टिंग कर रहा था। उसने मुझसे कहा कि वो किसी भूमिका के लिए कास्टिंग कर रहा है। ऐसे में मुझे अपने होम टाउन रांची जाना पड़ा, क्योंकि कास्टिंग से जुड़ी बातचीत के लिए मुझे वहीं बुलाया गया था।”

उन्होंने आगे कहा, ”इसके बाद हम कमरे में बैठकर स्क्रिप्ट पढ़ ही रहे थे कि तभी उस शख्स ने मुझे गलत तरीके से छूने की कोशिश की। कुछ वक्त तो मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि ये क्या हो रहा है। मुझे सिर्फ उसे धक्का देना, दरवाजा खोलना और भागना याद है। मैं इस बात को कुछ दिनों के लिए किसी से शेयर नहीं कर सकी। यह एक लव मेकिंग सीन की स्क्रिप्ट पढ़ने के दौरान हुआ था, जो काफी बुरा था। इस घटना को मैं पूरे जीवन में कभी नहीं भूल सकती हूँ।”

एक्ट्रेस ने कहा कि इस घटना ने मुझ पर इतना प्रभाव डाला कि इसके बाद से मैं किसी आदमी के साथ एक ही कमरे में नहीं रह सकती थी। यहाँ तक कि अपने पिता के साथ भी नहीं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में महिलाओं को न केवल इस तरह के उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, बल्कि उन्हें बॉडी शेमिंग और कैजुअल सेक्सिजम का भी सामना करना पड़ता है।