Home Blog Page 3590

हिंदुओं की मौत, चिताएँ… तब दानिश सिद्दीकी के फोटो बिकते थे… अब बिक रहीं उनके अब्बा-परिवार की तस्वीरें ₹23000 में

अफगानिस्तान के कंधार के स्पिन बोल्डक जिले में तालिबानियों ने रॉयटर्स के फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी को मार डाला। जैसे ही फोटो-पत्रकार मारा गया, उसके शोक संतप्त परिवार और रिश्तेदारों की तस्वीरें स्टॉक इमेज साइट, गेटी इमेजेज (Getty Images) पर वस्तुओं की तरह बिकने लगीं

ब्रिटिश-अमेरिकी मीडिया कंपनी Getty Images अब मृतक रॉयटर्स पत्रकार के परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और उनके शोक संतप्त पिता की कई तस्वीरों को बेच रही है। स्टॉक इमेज साइट पर एडिटोरियल सेक्शन के तहत तस्वीर 23,000 रुपए प्रति पीस में बिक रही हैं, जो Getty Images पर संपादकीय तस्वीरों के एक बड़े संस्करण के लिए मानक मूल्य है। इसी तरह की तस्वीरों का एक छोटा वर्जन कम कीमत में डाउनलोड किया जा सकता है।

यहाँ कुछ तस्वीरें हैं जो 16 जुलाई को क्लिक की गई थीं, जिस दिन अफगानिस्तान के कंधार में स्पिन बोल्डक जिले में तालिबान द्वारा पत्रकार की हत्या कर दी गई थी।

दानिश सिद्दीकी के पिता की तस्वीर Getty Image पर 23,000 रुपए में बिक रही है
Capture1-3.jpg (1473×894)
दानिश सिद्दीकी के पिता और उनके रिश्तेदारों की एक और तस्वीर Getty Image पर 23,000 रुपए में बिक रही है
दानिश सिद्दीकी की मृत्यु के बाद उनके आवास पर एकत्रित हुए रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों की छवि
पत्रकार के आवास के बाहर क्लिक की गई ऐसी ही तस्वीर Getty Image पर बेची जा रही है

जब हमने Getty Images पर तस्वीरों से जुड़े नामों की लिस्ट देखी, तो हमने पाया कि वेबसाइट पर ऐसी तस्वीरों का सबसे महत्वपूर्ण योगदान हिंदुस्तान टाइम्स का है। यहाँ एक और बात ध्यान देने योग्य है कि ब्रिटिश-अमेरिकी मीडिया कंपनी दानिश सिद्दीकी की मौत के बाद ही उनके परिवार की क्लिक की गई तस्वीरों को बेच रही है। Getty Images के संपादकीय सेक्शन के तहत उनके नाम के सामने मौजूद 77 तस्वीरों में किसी में भी उनकी मृत्यु से पहले उनके परिवार को नहीं दिखाया गया है।

कई वामपंथी लिबरलों द्वारा मृतक फोटो जर्नलिस्ट की तस्वीर को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने पर आपत्ति जताए जाने के बाद दानिश सिद्दीकी के परिवार की तस्वीरें स्टॉक इमेज साइट पर दिखाई दी हैं।

अंतिम संस्कार की तस्वीरें 23,000 में मिल रही

जब भारत कोविड -19 की सबसे बुरे दूसरी लहर से जूझ रहा था, ब्रिटिश-अमेरिकी मीडिया कंपनी Getty Images कोविड-19 महामारी के कारण हुई मौत की अंतिम संस्कार की कई तस्वीरों को बेच रहा था। हिंदू चिता को प्रदर्शित करने वाली सैकड़ों तस्वीरें भी उसी कीमत (23,000) पर बिकीं, जिस कीमत पर आज ब्रिटिश-अमेरिकी मीडिया कंपनी साइट पर दानिश सिद्दीकी के परिवार और रिश्तेदारों की तस्वीरें बेची जा रही हैं।

दरअसल, इससे भी बड़ा संयोग यह है कि Getty Images पर दिल्ली की चिता की तस्वीरों में हिंदुस्तान टाइम्स का सबसे बड़ा योगदान था। समाचार एजेंसी ने 30 दिनों में लगभग 330 चित्र अपलोड किए थे। मीडिया हाउस से जुड़े कई फोटोग्राफरों ने तस्वीरें लीं, जिनमें अमल केएस, राज के राज, साकिब अली, मोहम्मद जाकिर और अन्य शामिल हैं।

रॉयटर्स के दानिश सिद्दीकी ने कई बार भारत में जलते हुए घाट की तस्वीर शेयर किया

हालाँकि, रॉयटर्स, जिसके लिए दानिश सिद्दीकी ने काम किया, पश्चिमी मीडिया हाउसों में से एक था, जो महामारी की विनाशकारी दूसरी लहर के दौरान भारतीयों, विशेष रूप से हिंदुओं की मृत्यु से अत्यधिक खुश हुआ। एक तस्वीर जो हमने पूरे सोशल मीडिया, ट्विटर, फेसबुक या यहाँ तक कि व्हाट्सएप पर फैमिली ग्रुप में देखी, वह रॉयटर्स द्वारा भारत में जलते हुए घाट का हवाई दृश्य था। इसे दानिश सिद्दीकी ने लिया था।

इस तस्वीर को ट्विटर पर कई बार साझा करते हुए, दानिश सिद्दीकी ने लिखा था, “जैसा कि भारत ने COVID मामलों का विश्व रिकॉर्ड पोस्ट किया, लोगों की अंतिम संस्कार की चिता, जो कोरोना वायरस बीमारी के कारण मारे गए थे, को 22 अप्रैल, 2021 को नई दिल्ली के एक श्मशान घाट पर चित्रित किया गया था।” उन्होंने लोगों को उनके काम की तारीफ करने के लिए धन्यवाद भी दिया था।

उस तस्वीर के अलावा, दानिश सिद्दीकी ने कई ऐसी तस्वीरें क्लिक की थीं, जो Getty Images के समान ब्रिटिश स्वामित्व वाली स्टॉक फोटोग्राफी एजेंसी अलामी (Alamy) पर बेची जा रही हैं। दूसरी लहर के दौरान भारत में कोविड -19 की मौत पर अपनी रिपोर्ट के साथ कई मीडियाहाउसों ने उन तस्वीरों का इस्तेमाल किया था।

Alamyपर उपलब्ध दानिश सिद्दीकी द्वारा क्लिक की गई एक भारतीय अंतिम संस्कार की एक तस्वीर
Alamyपर उपलब्ध दानिश सिद्दीकी द्वारा क्लिक की गई एक भारतीय अंतिम संस्कार की एक और तस्वीर

कोविड -19 पीड़ितों के परिवार की गोपनीयता का स्पष्ट उल्लंघन होने के बावजूद, जिनकी जानकारी और अनुमति के बिना दानिश सिद्दीकी ने उन तस्वीरों को क्लिक किया था, रॉयटर्स के पत्रकार को इन तस्वीरों के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रशंसा मिली थी।

अर्बन नक्सल आनंद तेलतुम्बडे ने कोर्ट में उसी Email को अपने बचाव में दिया… जिसे वामपंथी मीडिया बता चुका था ‘प्लांटेड’

महाराष्ट्र के पुणे की भीमा कोरेगाँव हिंसा के आरोपी अर्बन नक्सलियों के समर्थन में वामपंथी मीडिया घरानों ने इस साल की शुरुआत में जाँच एजेंसियों द्वारा आरोपितों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से बरामद ईमेल और दूसरे दस्तावेजों को फर्जी बताया था। अमेरिका की कथित डिजिटल फोरेंसिक फर्म की रिपोर्ट का हवाला देते हुए वाशिंगटन पोस्ट ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि भीमा कोरेगाँव हिंसा के आरोपितों में एक रोना विल्सन के लैपटॉप से मिले डेटा की स्टडी की गई थी, जिससे पता चला था कि ये प्लांटेड था। बाद में इसी रिपोर्ट को भारत के कई लेफ्ट मीडिया ने भी कवर किया था।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपितों ने भी इसी दावे का इस्तेमाल अपने बचाव में किया था। और अब, यह बात सामने आई है कि आरोपित उसी ईमेल को अपने बचाव के लिए यह कहते हुए प्रयोग कर रहे हैं कि वह फर्जी नहीं है।

12 जुलाई 2021 को NIA की विशेष अदालत ने दलित कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बडे की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया उन पर लगे हुए आरोप सही हैं। बचाव पक्ष ने दावा किया था कि तेलतुम्बडे का एल्गार परिषद से कोई लेना-देना नहीं था। इस पर अदालत ने कहा कि एल्गार परिषद के कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र पर उनका नाम था और वो वहाँ गए भी थे।

मुंबई की NIA अदालत के आदेश को सार्वजनिक कर दिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि आरोपित ने उसी ईमेल का इस्तेमाल अपने बचाव के लिए किया था, जिसे उसने मालवेयर के जरिए प्लांट करने का दावा किया था। अदालत के आदेश के मुताबिक, सुनवाई के दौरान तेलतुम्बडे के वकील ने तर्क दिया था कि 28/06/2014 को रोना विल्सन को भेजे एक मेल में आनंद तेलतुम्बडे एक वाक्य को हटाने को कहा था। इससे पता चलता है कि वह माओवादियों के समर्थक नहीं हैं।

आनंद तेलतुम्बडे ने यह भी दावा किया था कि उनके और मामले के अन्य आरोपित हनी बाबू व स्टेन स्वामी के बीच मेल के आदान-प्रदान से इस बात का खुलासा होगा कि आरोपित को अपराधी सिद्ध करने लायक इसमें कुछ नहीं है।

आनंद तेलतुम्बडे की जमानत के लिए बचाव पक्ष के वकील ने इस ईमेल का कई बार जिक्र भी किया। इससे बचाव पक्ष ने खुद उस दावे को खारिज कर दिया कि रोना विल्सन के लैपटॉप में ईमेल प्लांट किए थे, क्योंकि इससे पहले अदालत में जिस ईमेल का उल्लेख उन्होंने किया था वह भी उसी सोर्स से आया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 28 जून 2014 को रोना विल्सन को भेजे गए ईमेल में तेलतुम्बडे ने ‘दलित उग्रवाद के साथ-साथ माओवादी नेतृत्व के तहत क्राँतिकारी पुनरुत्थान’ से संबंधित हिस्सों को प्रेस रिलीज से हटाने का अनुरोध किया था।

अदालत में अभियोजन पक्ष के वकील ने माओवादियों और उनका समर्थन करने वालों के साथ तेलतुम्बडे के बीच कई ईमेल के आदान-प्रदान का हवाला दिया है। खास बात यह है कि बचाव पक्ष ने इस मामले में यह नहीं कहा कि यह फर्जी और प्लांटेड ईमेल है। इस दौरान उन्होंने ईमेल का इस्तेमाल या तो बचाव पक्ष के तर्क के रूप में या फिर आरोप लगाने वाला कंटेंट कहकर इस पर आपत्ति जताई।

इससे ये स्पष्ट हो गया है कि रोना विल्सन समेत दूसरे आरोपितों के कम्प्यूटर से बरामद ईमेल और दूसरे दस्तावेज असली हैं। इसके अलावा, वामपंथ समर्थक मीडिया जिस तरह का दावा कर रही है, इनसे न तो छेड़छाड़ की गई है और न ही इसे प्लांट किया गया है।

‘वामपंथी बकते हैं गालियाँ, अचानक नहीं बदली मेरी विचारधारा’: प्रो बद्री नारायण ने कहा – समाज निर्माण में RSS की भूमिका

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के झूसी में स्थित ‘गोविन्द बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान (Govind Ballabh Pant Social Science Institute)’ में बतौर सामाजिक इतिहास और सांस्कृतिक मानव विज्ञान के प्रोफेसर कार्यरत बद्री नारायण तिवारी ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दिया है। मोतिहारी स्थित ‘महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (MGCUB)’ के कुलपति की रेस में शामिल बद्री नारायण पर एक छात्र संगठन ने हिन्दू विरोधी और वामपंथी होने के आरोप लगाए थे।

कौन हैं प्रोफेसर बद्री नारायण तिवारी?

कवि एवं समाज-वैज्ञानिक के रूप में जाने जाने वाले बद्री नारायण तिवारी के बारे में बता दें कि वे 2015-16 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ़ डिस्क्रिमिनेशन एंड एक्सक्लूजन’ में प्रोफेसर थे। वो येल विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर, इंटरनेशनल इंस्टीटयूट ऑफ एशियन स्टडीज, लाइडेन यूनिवर्सिटी, द नीदरलैंड, मैसौन द साइंसेज द ला होम, पेरिस में विजिटिंग फेलो और सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी में आईसीसीआर चेयर प्रोफेसर के पदों पर भी रहे हैं।

पिछले एक दशक से कई मीडिया संस्थानों में लेख लिख चुके और डिबेट शो में दिख चुके प्रोफेसर बद्री नारायण तिवारी जीबी पंत सोशल साइंस इंस्टिट्यूट के मानव विकास संग्रहालय में गंगा नदी-संस्कृति, विदेसिया वीथिका और दलित संस्रोत केंद्र की स्थापना की है। अभी हाल ही में आई उनकी किताब ‘रिपब्लिक ऑफ़ हिन्दुत्व : हाउ द संघ इज़ रिशेपिंग इंडियन डेमोक्रेसी (2021)’ में भारतीय लोकतंत्र की संरचना के अंदर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्य पद्धति, संगठन, विचार और उसकी व्यापकता पर प्रकाश डाला गया है।

एक लेखक व शोधकर्ता के रूप में पहले भी वो डाक्युमेंटिंग डिसेंट (2001), विमेन हीरोज एंड दलित असर्सन इन नॉर्थ इण्डिया (2006), फैसिनेटिंग हिंदुत्व-सैफ्रोन पालिटिक्स एंड दलित मोबलाइजेशन (2009), मेकिंग आफ दलित पब्लिक इन नार्थ इण्डिया (2011) और फ्रैक्चर्ड टेल्स : इनविजिबल इन इंडियन डेमोक्रेसी (2016) जैसी किताबें लिख चुके हैं। साथ ही लोक संस्कृति और इतिहास (1994), लोक संस्कृति में राष्ट्रवाद (1996), साहित्य और सामाजिक परिवर्तन (1997), संस्कृति का गद्य (1998), उपेक्षित समुदायों का आत्म-इतिहास (2006) और प्रतिरोध की संस्कृति (2012) जैसी किताबों के भी वो लेखक हैं।

MGCUB विवाद: मोतिहारी के छात्र संगठन ने क्यों किया उनका विरोध?

मोतिहारी के कुछ छात्रों ने कहा था कि कि कभी ‘हिंदुत्व का मोहिनी मंत्र’ नामक पुस्तक लिख चुने बद्री नारायण अब पद की लालसा के लिए RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) को खुश करने की जुगत में लगे हैं। राष्ट्रपति को लिखे गए पत्र में ‘चम्पारण छात्र संघ’ ने कहा था कि प्रोफेसर बद्री नारायण तिवारी ने अपने लेखन और सार्वजनिक वक्तव्यों के जरिए बहुसंख्यक समाज नागरिकों की आस्था के केंद्र भगवान श्रीराम, मेवाड़ के महाराणा प्रताप और बहराइच में गाज़ी मियाँ का वध करने वाले राजा सुहेलदेव को मिथक की संज्ञा देते हुए उनकी तुलना फासिस्टों से की है।

प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा का बतौर कुलपति कार्यकाल ख़त्म होने के बाद मोतिहारी के ‘महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (MGCUB)’ के नए कुलपति को लेकर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में पहले से ही भ्रष्टाचार और विवादों से पीड़ित MGCUB के छात्र व पूर्व-छात्र सशंकित हैं। छात्रों का कहना है कि पिछले 6 वर्षों से दो-दो कुलपतियों के विवादित कार्यकाल के कारण विश्वविद्यालय का विकास नहीं हो पाया है और अब इसे एक योग्य और अच्छे विचारधारा वाले शिक्षाविद की कुलपति के रूप में ज़रूरत है।

ऑपइंडिया से बातचीत में दिया अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब

ऑपइंडिया ने प्रोफेसर बद्री नारायण तिवारी से बात की और छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों पर उनकी प्रतिक्रिया ली। उन्होंने बताया कि वामपंथियों ने उन्हें ‘संघी’ घोषित कर रखा है और वो उन्हें लगातार गालियाँ दे रहे हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर कहा कि उनके खिलाफ कुछ लोगों द्वारा जानबूझ कर एक घृणास्पद अभियान चलाया जा रहा है। प्रोफेसर बद्री नारायण तिवारी से ऑपइंडिया के बातचीत के अंश:

सवाल: आपने ‘हिंदुत्व का मोहिनी मंत्र’ नामक पुस्तक लिखा है। क्या आप अब भी उस पुस्तक में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर कही गई बातों से इत्तिफ़ाक़ रखते हैं?
जवाब: ‘हिंदुत्व का मोहिनी मंत्र’ नामक पुस्तक का अंग्रेजी में नाम ‘फैसिनेटिंग हिंदुत्व-सैफ्रोन पालिटिक्स एंड दलित मोबलाइजेशन’ था, जो 2008 में लिखी गई थी। इसके लिए रिसर्च का कार्य 2006 के आसपास शुरू हुआ था। ये पहली ऐसी पुस्तक है, जिसमें दलित समाज के बीच हिंदुत्व की चेतना के प्रचार-प्रसार का अध्ययन किया गया है। उस समय शोध के समय मैंने देखा कि कैसे RSS दलितों को अपने साथ जोड़ रहा है। मैंने देखा कि कैसे हिंदुत्व के सर्वांगीण निर्माण के तहत वो कैसे दलित समूहों (सर्व-समाज) को साथ लेने की कोशिश में लगा है। दलितों के नायकों, पर्व-त्योहारों और संस्कृति को कैसे संघ अपनी चेतना-प्रसार की प्रक्रिया से जोड़ रहा है, इसी पर उस पुस्तक में शोध किया गया था। लेकिन, तब मैं वामपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर उसे लिख रहा था, लेकिन सामाजिक सच्चाई तो वही थी। लेकिन, उसकी जो भाषिकता थी वो वामपंथी हो गई थी। पर, सामाजिक सच्चाई उसी तरीके से आगे बढ़ रही थी। ये पहली पुस्तक है, जिसमें दलित एवं हिंदुत्व के रिश्ते को परिभाषित किया गया। लेकिन, मुझे बार-बार ये एहसास हो रहा था कि सामाजिक सच्चाई और उसकी बारीकियों को लेकर मैं जो देख रहा था, उसे मैं ठीक से प्रस्तुत नहीं कर पा रहा हूँ। हम उस समय संघ को एक अलग नजरिए दे देख रहे थे, जो वामपंथी मानसिकता का प्रभाव था। मैं लगातार अपने चिंतन की व्याख्या करता जा रहा था क्योंकि मैं हमेशा से दलित समाज का अध्ययन करता रहा हूँ। इसके बाद मैंने ‘रिपब्लिक ऑफ हिंदुत्व’ लिखना शुरू किया। उसमें मैं अपनी वामपंथी परिदृश्य, दृष्टिकोण और भाषिकता से से ऊपर उठा। इस तरह वैचारिकता के मामले में मेरा सफर रहा। इसमें मैंने उन सारी रूढ़िवादी विचारों को काटने की कोशिश की है, जिसके कारण RSS मुख्यधारा में नहीं आ पाती थी।

सवाल: आरोप है कि आपने अचानक से अपनी विचारधारा बदल ली और अब आप एक वामपंथी नहीं हैं। इस बदलाव का कारण क्या है?
जवाब: मेरे विचारों में जो बदलाव आया, उसका कारण है कि सामाजिक सच्चाई को समझने में वामपंथी दृष्टिकोण और शब्दावली लगातार मेरी राह में बाधा पैदा कर रही थी। वामपंथी विचार एक जगह जाकर रुक गया है और उसकी शब्दावली जड़ हो गई है, जबकि सामाजिक सच्चाई दिनोंदिन बदलती ही जा रही है। एक समाज-वैज्ञानिक हमेशा सामाजिक सच्चाई की प्रक्रिया को समझने के दौरान परिपक्व होता जाता है। मेरी भी यात्रा यही है। इसीलिए, मुझमें ये परिवर्तन आया। ये ‘अचानक आया बदलाव’ नहीं है, बल्कि इसकी एक लंबी प्रक्रिया रही है। 2012-13 में मैंने पाया कि दलित समाज में एक नया तबका पैदा हो गया है, जो अन्य तबकों से इत्तिफ़ाक़ नहीं रखता। मैंने इन्हें समझने के दौरान ही खुद में बदलाव महसूस किया।

सवाल: आपने हाल ही में अपनी पुस्तक ‘रिपब्लिक ऑफ हिंदुत्व’ लॉन्च की है। इसमें क्या है? इस रिसर्च का कारण क्या है?

किसी शोध को करने या फिर पुस्तक लिखने का कोई मोटिव नहीं होता, बल्कि एक प्रेस्पेक्टिव होता है, एक परिदृश्य होता है। मेरे इस किताब में बताया गया है कि किस तरह भारतीय समाज के निर्माण में RSS की भूमिका रही है और लोकतंत्र व सामाजिक ढाँचे में विकास आ रहा है, उसमें संघ की भूमिका को नए परिदृश्य में समझने की कोशिश की गई है। इसे इस किताब को पढ़ने के दौरा समझा जा सकता है।

वामपंथियों ने प्रोफेसर बद्री नारायण तिवारी को दी थी गालियाँ

हाल ही में कई वामपंथियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रोफेसर बद्री नारायण तिवारी को गालियाँ बकी हैं और उन पर RSS के हाथों बिके होने का आरोप लगाया है। फेसबुक पर कई वामपंथियों ने उन और छींटाकशी की है। दीपक सिंह नाम के एक यूजर ने लिखा कि प्रोफेसर बद्री नारायण अब ‘संतरा संरक्षण’ में आ गए हैं। उसने आरोप लगाया कि अगर कॉन्ग्रेस की सरकार होती तो ये अब तक ‘प्रगतिशील’ होते।

वहीं रुस्तम कुरैशी नाम के एक व्यक्ति ने तो उन्हें गाली देते हुए तलवे चाटने का आरोप लगाया और कहा कि ये जीबी पंत संस्थान में संघ का एजेंडा चला रहे हैं। एक पवन गुप्ता नाम के यूजर ने लिखा कि उसे 4 साल पहले ही संस्थान के एक कार्यक्रम में इसका एहसास हो गया था। वहीं एक अन्य वामपंथी ने उन पर पद की लालसा होने का आरोप लगाया। ऑपइंडिया के पास इन कमेंट्स के स्क्रीनशॉट्स हैं।

उन्होंने हाल ही में बयान दिया था कि कोरोना काल में RSS ने गरीबों की जितनी सेवा की है, उतनी किसी ने नहीं की। इसे लेकर वामपंथियों ने उनका विरोध किया। उन पर भाजपा के एजेंट होने के आरोप लगाए गए। उन पर राजनीतिक आस्था और भावना बदलने के आरोप लगाते हुए वामपंथियों ने कहा कि वो उन्हें अपने गुट का मानते थे, लेकिन लगता नहीं कि ऐसा है। कुल मिला कर वामपंथी गिरोह उनसे खासा नाराज़ था।

RSS नेताओं ने की है प्रोफेसर बद्री नारायण के काम की तारीफ़

संघ के कई नेताओं ने प्रोफेसर बद्री नारायण और उनके कामकाज की तारीफ़ की है। विनय सहस्रबुद्धे ने कहा था कि वो ‘रिपब्लिक ऑफ हिंदुत्व’ के लिए प्रोफेसर बद्री नारायण को बधाई देते हैं। वहीं संघ के जे नंदकुमार ने भी उन्हें बधाई देते हुए उनकी तारीफ की। सहस्रबुद्धे ने कहा कि वो हमेशा से बद्री नारायण तिवारी की लेखनी के कायल हैं और कई मुद्दों पर वो रूढ़िवादी तौर-तरीकों की बजाए नए नजरिए से अध्ययन करते रहे हैं।

‘रिपब्लिक ऑफ हिंदुत्व’ किताब लॉन्च के दौरान राम माधव का सम्बोधन

RSS के राम माधव ने भी उनकी तारीफ़ की थी। जे नंदकुमार ने उनकी ताज़ा पुस्तक को हिंदुत्व से जुड़े लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण पुस्तक बताया था। राम माधव ने उन्हें ईमानदार बताते हुए कहा था कि उन्होंने सचमुच RSS को समझते हुए ये पुस्तक लिखी है, जबकि ये एक कठिन कार्य है। उन्होंने ईमानदारी से निष्कर्ष को सामने रखने के लिए उनका धन्यवाद दिया और कहा कि उन्होंने एक अच्छा प्रयास किया है।

हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन करके निकाह… शरिया मानसिकता पढ़े-लिखे लोगों में भी: नितिन गुप्ता (रिवाल्डो)

नाबालिग हिंदू लड़कियों के धर्म परविर्तन की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं। नितिन गुप्ता (रिवाल्डो) ने इस मुद्दे पर खुल कर बात करते हुए बताया कि कैसे लोग जबरन धर्मांतरण के पाप पर पर्दा डालते हैं और इसे अंतरधार्मिक (Interfaith) विवाह की खूबसूरती बताते हैं।

नितिन गुप्ता का सवाल है कि जब 12-13 साल की हिंदू लड़कियों का धर्म परिवर्तन करके निकाह कर लिया जाता है, तो फिर वह अंतरधार्मिक विवाह कैसे हुआ? वह तो अंतःधार्मिक (Samefaith) विवाह हो गया और दूसरी बात 12-13 साल की लड़की की शादी तो वैसे भी अवैध है।

पश्चिम बंगाल में 28 साल के शादीशुदा शोहिदुल रहमान ने 13 साल की लड़की को उठा लिया। किसी को घर पर बुलाया, निकाहनामा पढ़वाया और बोला कि मैं तेरा शौहर हूँ, फिर उसके साथ रेप करने लगा। वह उसे नमाज पढ़ने को बोलता और जबरदस्ती कुरान की आयतें पढ़वाता।

नितिन गुप्ता आगे बताते हैं कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी तो वैसे ही मदरसे पर मेहरबान है। बंगाल में साइंस, मैथ से ज्यादा इस्लाम की तालीम पर खर्च किया जा रहा है। खर्च इतना जितना बांग्लादेश में भी नहीं किया जा रहा। बांग्लादेश में 14 करोड़ की आबादी में मदरसों पर 7500 करोड़ का खर्च है, जबकि पश्चिम बंगाल में 3 करोड़ की मुस्लिम आबादी में मदरसों पर खर्च 4000 करोड़ है। अगर यहाँ (पश्चिम बंगाल) 14 करोड़ आबादी हो तो मदरसों पर 20000 करोड़ का खर्च किया जाएगा।

पाकिस्तान में भी यही सब चल रहा है। 28 साल का शादीशुदा अली रजा, जिसके 4 बच्चे हैं, 14 साल की महक कुमारी को उठा कर ले गया। फिर दरगाह में जाकर धर्मांतरित करवा कर उसका नाम अलीशा कर दिया।

भारत-पाकिस्तान-बांग्लादेश के अलावा नितिन गुप्ता ने खबरों के उदाहरण देकर अच्छे से समझाया है कि कैसे पढ़े-लिखे (IIT वाले, पुलिस वाले, वकील आदि) मुस्लिम भी तर्क के बजाय शरिया कानूनों से न सिर्फ सोचते हैं बल्कि जनता के बीच बर्ताव भी करते हैं।

पूरी वीडियो आप इस लिंक को क्लिक कर देख सकते हैं।

नोट: यह एक सीरीज है, इस सीरीज का यह पहला वीडियो है। इसी सब्जेक्ट (हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन) पर और भी वीडियो आप हमारे यूट्यूब चैनल पर आगे देख पाएँगे।

‘नशा मुक्त असम के लिए प्रतिबद्ध’: CM हिमंत बिस्व सरमा ने ₹20 करोड़ की जब्त की गई ड्रग्स को जलाया, देखें वीडियो

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की ड्रग्स के खिलाफ जंग जारी है। नौजवानों में ड्रग्स की बढ़ती लत को लेकर चिंतित मुख्यमंत्री इस पर शिकंजा कसने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने शनिवार (17 जुलाई 2021) को गोलाघाट और दीफू में सार्वजनिक रूप से बड़ी मात्रा में जब्त की गई ड्रग्स को जलाया, ताकि ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का संदेश दिया जा सके।

उन्होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। सीएम ने लिखा, ”ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई।” उन्होंने असम पुलिस को टैग करते हुए कहा, ”हमने असम पुलिस के सहयोग से गोलाघाट में 20 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की 802 ग्राम हेरोइन, 1205 किलो गांजा/भाँग, 3 किलो अफीम और 2,06,906 नशीली गोलियाँ नष्ट कीं।”

उन्होंने सिलसिलेवार किए गए अपने ट्वीट में कहा, ”हम एक नशा मुक्त असम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इससे निपटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसके खिलाफ असम पुलिस को कड़ी कार्रवाई करने की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई है। ताकि प्रदेश के युवाओं को इस संकट से बचाया जा सके।”

दरअसल, ड्रग्स तस्करों के खिलाफ राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। असम पुलिस ने भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद किया है। सीएम हिमंत ने इसकी तस्वीर अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर की है। साथ ही उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में वह जब्त की गई ड्रग्स को जला रहे हैं। इसमें असम पुलिस भी उनके साथ नजर आ रही है।

इसके साथ ही अपने लाइव प्रोग्राम में मुख्यमंत्री ने COVID-19 विधवा सहायता योजना के तहत प्रत्येक 4 लाभार्थियों को 2.5 लाख रुपए के चेक भी वितरित किए।

गौरतलब है कि राज्य में ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ का जिक्र करते हुए कहा था कि ‘उड़ता पंजाब’ की तरह, असम भी ‘उड़ता असम’ बनने की राह पर था। लेकिन असम पुलिस जिस तरह से अपना काम कर रही है और अवैध नशीले पदार्थों के खिलाफ जंग जारी रखे हुए है, हमें लगता है कि हम राज्य के कई युवाओं, परिवारों को इससे बचाने में सफल रहे हैं। सरमा ने कहा, “हमने अब अवैध दवाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस अपनाया है और राज्य भर में बड़े पैमाने पर अभियान चल रहे हैं।”

5 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट वाला पहला राज्य होगा उत्तर प्रदेश: 71 जगहों तक फ्लाइट सेवा, 8 हवाई अड्डे अभी फंक्शन में

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में कनेक्टिविटी को लेकर काफी काम हो रहा है। सड़क के साथ ही अब एयर कनेक्टिविटी में प्रदेश का दायरा काफी बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश देश का इकलौता राज्य बनने की ओर है, जहाँ पर पाँच इंटरनेशनल एयरपोर्ट संचालित होंगे।

उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा हवाई सेवाओं वाला राज्य बनने की ओर अग्रसर है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने अब राज्य में हवाई सेवाओं के चौतरफा विस्तार की गति तेज कर दी है। लखनऊ के साथ ही वाराणसी में इंटरनेशनल फ्लाइट्स का संचालन जारी है। कुशीनगर के भी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए डीजीसीए का लाइसेंस मिल गया है। इस तरह से कुशीनगर यूपी का तीसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट हो जाएगा। इसके बाद राम नगरी अयोध्या और गौतमबुद्ध नगर के जेवर में भी इंटरनेशल एयरपोर्ट का निर्माण जारी है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने जेवर इंटरनेशनल एयपोर्ट के बारे में जानकारी देते हुए कहा, “कोरोना महामारी के बावजूद जेवर एयरपोर्ट का कार्य समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के विकास की दृष्टि से यह एयरपोर्ट न केवल प्रदेशवासियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप एयर कनेक्टिविटी और बेहतर होगी।”

उन्होंने बताया कि 2017 तक उत्तर प्रदेश के अंदर मात्र 4 एयरपोर्ट फंक्शन में थे। उनमें भी ईमानदारी से दो में ही वायु सेवा चल पाती थी। एक प्रदेश की राजधानी लखनऊ और दूसरा वाराणसी। गोरखपुर में एक फ्लाइट कभी-कभी आती थी और यही स्थिति आगरा की भी थी, लेकिन आज प्रदेश के अंदर 8 एयरपोर्ट क्रियाशील हैं। 

सीएम ने कहा, “2017 से पहले हम लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और आगरा से केवल 25 गंतव्य तक की वायुसेवा प्रदान कर पाते थे। आज ये वायुसेवा लगभग तीन गुना बढ़ चुकी है। 71 गंतव्यों तक ये वायुसेवा तेजी के साथ आगे बढ़ी है और हमारे 8 एयरपोर्ट क्रियाशील हो चुके हैं। कुशीनगर एयरपोर्ट का कार्य पूर्ण हो चुका है। यह एयरपोर्ट अंतररष्ट्रीय उड़ानों के लिए उपलब्ध है।”

जेवर एयरपोर्ट के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक सपना की तरह है। सीएम योगी ने कहा, “जेवर एयरपोर्ट प्रदेश के भविष्य की तमाम संभावनाओं को आगे बढ़ाने का एक बेहतरीन माध्यम है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह एयरपोर्ट वर्ष 2024 तक उत्तर प्रदेश की 01 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी के संकल्पों को एक नई उड़ान देने का बेहतरीन डेस्टिनेशन बनेगा।” इस दौरान उन्होंने जेवर एयरपोर्ट के अंतर्गत आने वाले उन किसानों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ मिल कर भूमि अधिग्रहण में मदद की।

बता दें कि एयरपोर्ट के पहले चरण में 1334 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण के साथ इसको खाली कराने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है। नागरिक उड्डयन विभाग के नाम मौजूद यह जमीन अब नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के नाम ट्रांसफर की जाएगी। इसके बाद यह जमीन ज्यूरिख एयरपोर्ट की सब्सिडरी कंपनी यमुना इंटरनैशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर देगी।

प्रिंसिपल रौशन जमीर ने नाबालिग छात्रा को स्कूल बुलाकर किया रेप: न्यूड तस्वीरों के सहारे 3 महीने तक करता रहा ब्लैकमेल

बिहार के अररिया जिले में शिक्षा के मंदिर में प्रिंसिपल ने हैवानियत की हदें पार कर घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। यह मामला महलगाँव थाना क्षेत्र के एक स्कूल का है, जहाँ प्रिंसिपल रौशन जमीर ने गुरु और शिष्य के रिश्ते को कलंकित किया है। बताया जा रहा है कि सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल पर कभी मिड डे मील तो कभी पोशाक की राशि दिलाने के बहाने 14 साल की नाबालिग छात्रा के साथ बलात्कार करने का आरोप है।

हद तो तब हो गई जब प्रिंसिपल रौशन जमीर ने अपना जमीर बेचकर पहली बार रेप करने के बाद छात्रा की न्यूड तस्वीरें ले ली। वह उसे तस्वीरें वायरल करने की धमकी देने लगा। फोटो वायरल होने की डर से 14 वर्षीय छात्रा को उसकी सभी शर्तें मानने लिए मजबूर होना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रिंसिपल ने लगातार 3 महीने तक छात्रा के साथ दुष्कर्म किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। इसका खुलासा तब हुआ, जब गाँववालों ने उसे रंगे हाथों पकड़ा। इसके बाद छात्रा के पिता ने महिला थाने में केस दर्ज कराया। पुलिस ने आरोपित प्रिंसिपल रौशन जमीर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

दरअसल, 29 जून 2021 की शाम को उत्क्रमित मध्य विद्यालय प्रसादपुर डुमरिया के आरोपित प्रिंसिपल ने छात्रा के पिता को फोन कर कहा कि वह अपनी बेटी को मिड डे मील का सूखा राशन लेने के लिए स्कूल भेज दें। पिता ने बच्ची को स्कूल भेज दिया, लेकिन जब वह स्कूल पहुँची तो जमीर उसे छत पर ले गया और उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा। एक स्थानीय व्यक्ति ने उसे यह सब करते हुए देख लिया और तुरंत छात्रा के पिता को इसके बारे में सूचित किया।

इसके बाद छात्रा के पिता अपने भाइयों और ग्रामीणों के साथ स्कूल परिसर पहुँचे और प्रिंसिपल को रंगे हाथों दबोच लिया। छात्रा ने बताया कि 3 महीने पहले पोशाक और राशन का लालच देकर स्कूल के प्रिंसिपल ने उसके साथ बलात्कार किया। उसने उसकी न्यूड तस्वीरें ले ली और इन्हें वायरल करने की धमकी देते हुए उसके साथ दुष्कर्म करता था। छात्रा 2 माह की गर्भवती है।

पीड़िता के पिता ने गाँव के मुखिया और सरपंच को भी इस मामले की जानकारी दी, जिसके बाद पंचायत में सुलह कराए जाने की कवायद शुरू हुई। हालाँकि, सरपंच और मुखिया द्वारा पंचायत में बुलाए जाने के बाद भी आरोपित शिक्षक नहीं पहुँचा। जिसके बाद पंचों की ओर से पीड़ित परिवार को पुलिस की मदद लेने का निर्देश दिया गया।

मामले को लेकर SDPO पुष्कर कुमार ने बताया कि जाँच जारी है। आरोपित प्रिंसिपल को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रिंसिपल ने ग्रामीणों और पीड़िता के बयान के आधार पर नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म करने का जुर्म कबूल कर लिया है। उसने यह भी बताया कि गाँववालों ने सुलह कराने की भी कोशिश की थी। ऐसे जघन्य अपराध में पंचायत की कोशिश गलत है। सदर SDPO ने बताया कि पंचायती करने की कोशिश करने वालों की भी जाँच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कोयंबटूर में तमिलनाडु प्रशासन द्वारा 7 मंदिरों के विध्वंस के खिलाफ हिंदू समूहों का विरोध प्रदर्शन तेज

कोयंबटूर नगर निगम द्वारा मुथन्ननकुलम के झील के किनारे पर सात हिंदू मंदिरों को ध्वस्त करने के कुछ दिनों बाद कई भक्तों और हिंदू कार्यकर्ताओं ने इसके विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन किया रिपोर्टों के अनुसार, हिंदू मुन्नानी के हिंदू कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार (जुलाई 16, 2021) को कोयंबटूर के टाउन हॉल में निगम कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और नगर निकाय के विध्वंस अभियान की निंदा की।

मंगलवार (जुलाई 13, 2021) को कोयंबटूर नगर निगम ने शहर के मुथाननकुलम बाँध के किनारे 100 साल पुराने एक मंदिर समेत सात मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था। निगम ने दावा किया था कि तालाब के उत्तरी बाँध के साथ अतिक्रमित भूमि पर मंदिरों का निर्माण किया गया था।

विध्वंस की निंदा करते हुए, हिंदू मुन्नानी के प्रदेश अध्यक्ष कदेश्वर सुब्रमण्यम ने कहा, “जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे, तो संसद में एक अधिनियम पारित किया गया था जिसमें 75 वर्ष से अधिक पुराने मंदिरों को ध्वस्त करने पर रोक लगाई गई थी। लेकिन कोयंबटूर निगम ने सदियों पुराने मंदिरों को ध्वस्त कर दिया। हम विध्वंस की कड़ी निंदा करते हैं।”

हिंदू कार्यकर्ता ने यह भी कहा कि तिरुपुर कलेक्टर कार्यालय सहित कई सरकारी कार्यालय मंदिर की भूमि पर हैं, इसलिए उन इमारतों को भूमि से हटा दिया जाना चाहिए।

सुब्रमण्यम ने कहा, “हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) मंत्री कह रहे हैं कि विभाग मंदिर की भूमि को पुनः स्वामित्व में लेगा और मंदिरों की रक्षा करेगा। उन्हें इसके बारे में जानकारी देनी चाहिए।”

हिंदू मुन्नई के राज्य सचिव जेएस किशोरकुमार ने कोयंबटूर निगम पर अतिक्रमण हटाने के नाम पर जानबूझकर मंदिरों को निशाना बनाने का आरोप लगाया और दावा किया कि शहर में 150 साल पुराने मंदिरों को तोड़ा गया। इससे पहले विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने भी मंदिरों को गिराए जाने की निंदा की थी और कोयंबटूर के गाँधी पार्क में विरोध प्रदर्शन किया था।

कोयंबटूर में मंदिरों का विध्वंस अभियान

गौरतलब है कि तमिलनाडु के कोयंबटूर में निगम ने मंगलवार (जुलाई 13, 2021) को शहर के मुथन्ननकुलम तालाब के उत्तरी बाँध पर मौजूद 7 मंदिरों को विकास के नाम पर ध्वस्त कर दिया। प्रशासन ने कथिततौर पर यह फैसला स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत झील के कायाकल्प और विकास के लिए लिया।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, निगम अधिकारियों ने अम्मान कोविल, बन्नारी अम्मान कोविल, अंगला परमेश्वरी, करुपरायण कोविल, मुनीस्वरन कोविल और कुछ अन्य मंदिरों को ध्वस्त करने के लिए अर्थमूवर और भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया।

प्रशासन ने इस कदम को उठाने से पहले साल 2020 में झील के आस-पास अतिक्रमण का हवाला देते हुए अपनी कार्रवाई की थी। उस समय करीब 2,400 परिवारों को वहाँ से हटाकर उनके घर ध्वस्त किए गए थे। इन सभी लोगों को स्लम क्लीयरेंस बोर्ड परियोजनाओं में वैकल्पिक आवास प्रदान किया गया था।

बहन से बात करता था फुफेरा भाई, जुबेर ने बनाया मर्डर प्लान: 14 बार चाकू गोद दादा-दादी की हत्या, फूफा को फँसाना था मकसद

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से चौंकाने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ हापुड़ नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोटला मेवतियान में एक पोते ने फूफा को फँसाने के लिए अपने ही दादा-दादी की हत्या कर दी। घटना बुधवार (14 जुलाई 2021) रात को घटी। गुरुवार (15 जुलाई 2021) को सुबह उठने के बाद हत्यारे ने खुद ही शोर मचाया, जिसके बाद पड़ोसियों को इसके बारे में पता चला।

इस मामले में पुलिस ने खुलासा किया है कि हत्या के मुख्य साजिशकर्ता जुबेर (19) का उसके फुफेरे भाई जीशान से झगड़ा चल रहा था। दोनों के बीच पहले मारपीट भी हुई थी। जुबेर जीशान की हत्या करना चाहता था औऱ इसके लिए उसने अपने छोटे भाई (14) के साथ मिलकर योजना तैयार की थी। हालाँकि, उसके फूफा रहीमुद्दीन इलाके के दबंग थे, इस कारण वो सीधे तौर पर उससे पंगा लेने से डरता था। इसलिए उसने करीब 85 साल के बुजुर्ग दादा और 80 वर्षीया दादी की हत्या कर उस केस में अपने फूफा को फँसाने की योजना तैयार की।

उसने सोचा था कि उसके दादा-दादी की हत्या के आरोप में उसके (फूफा) को जेल जाने के बाद अपने फुफेरे भाई जीशान की हत्या कर देगा। पुलिस के मुताबिक, आरोपितों ने बुजुर्ग दंपति को 12-14 बार चाकू से गोद कर हत्या की है। हत्या में इस्तेमाल किए गए चाकू और उस दौरान इस्तेमाल किए गए लोवर को बरामद कर लिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हापुड़ जिले को एसपी नीरज जादौन ने बताय़ा है कि आरोपितों से जब पूछताछ की गई तो पहले तो वो चुप रहे, लेकिन सख्ती बरतते ही उसने सब कुछ बता दिया। जुबेर का फुफेरा भाई जीशान उसकी बहन से बात करता था, जो कि उसको पसंद नहीं था। इसी कारण दोनों के बीच विवाद चल रहा था। कुछ दिन पहले ही वो अपने दादा-दादी के पास रहने के लिए आया था। एक दिन घर में जब वो जीशान की हत्या की योजना बना रहा था तो उसके दादा ने उसे सुन लिया। इसके बाद उसने इस वारदात को अंजाम दिया। उसने बकरीद पर जीशान की हत्या की योजना बनाई थी। फिलहाल आरोपितों गिरफ्तार कर लिया गया है।

5 बेटे और 3 बेटियों के बाद भी अकेले थे दादा-दादी

जुबेर और जुनैद के दादा-दादी की 8 संतानें थीं। इनमें 5 बेटे और 3 बेटियाँ थीं। बावजूद इसके वो अकेले रहने को मजबूर थे। अपने गुजारे के लिए घर में ही किराना की दुकान खोल रखी थी।

‘Islam Is Evil’: कनाडा में मिल रहे इस्लाम विरोधी पोस्टर्स, कई जगहों पर ऐसी घटना के बाद पुलिस ने शुरू की जाँच

कनाडा एक एक शहर में कई जगहों पर ऐसे पोस्टर्स मिले हैं, जिनमें इस्लाम के खिलाफ चीजें लिखी हुई हैं। ये घटना ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे में स्थित न्यूटन शहर की है। इस तरह के पोस्टर्स और दीवारों पर लिखे आपत्तिजनक नारों के मिलने के बाद ‘रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP)’ ने इस घटना की जाँच अपने हाथ में ले ली है। आरोप है कि कई जगहों पर मिले इन पोस्टर्स में मुस्लिमों को निशाना बनाया गया है।

’72 एवेन्यू’ नामक स्थान पर एक मस्जिद के बाहर स्थित एक पोल पर ही इस्लाम को लेकर आपत्तिजनक बातें लिखी हुई मिलीं। 5 जुलाई, 2021 के बाद से ही शहर में इस तरह के कंटेंट्स का सार्वजनिक रूप से मिलना शुरू हो गया था। सरे क्राइम प्रिवेंशन सोसाइटी के स्वयंसेवक जसप्रीत जंडू ने कहा कि हम जिस कठिन समय में रह रहे हैं, इस तरह की घृणा और रेसिज्म के लिए शहर में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि उन्हें इस तरह के संदेश चिपके होने के कई कॉल्स मिल रहे हैं, जिसके बाद तुरंत जाकर उन्हें हटाया जाता है। एक जगह जहाँ ये चीजें लिखी हुई मिलीं, वहाँ पास में ही एक किराने की दुकान, डेंटिस्ट क्लिनिक और पशु अस्पताल थे। परिवारिक और रेजिडेंशियल इलाकों में इस तरह के कंटेंट्स के मिलने से सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया है। सरे पुलिस का कहना है कि किसी एक व्यक्ति का चंद लोगों ने समूह ने इस तरह की हरकत की है।

सरे में RCMP के मीडिया रिलेशन्स अधिकारी और कॉन्स्टेबल सरबजीत सिंह संघा का कहना है कि उनकी सुरक्षा और सेफ्टी के लिए ये सब ठीक नहीं है। पुलिस वीडियो सर्विलांस के जरिए दोषियों को ढूँढ रही है, ताकि अगर वो कैमरे में कैद हुए हैं तो उन्हें चिह्नित कर उनकी पहचान की जा सके। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि अगर उनके पास कोई सूचना है तो वो RCMP से संपर्क करें। कुछ जगह स्प्रे पेण्ट से ‘Islam Is Evil’ लिखा हुआ मिला।

कॉन्स्टेबल संघा ने कहा कि हेट क्राइम और घृणा के आधार पर किए जाने वाले अपराध का सरे में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने बताया कि अधिकारीगण पूरी जिम्मेदारी के साथ इस घटना के सम्बन्ध में कार्रवाई करने में लगे हुए हैं। ताज़ा घटना में एक डस्टबिन पर लिखा हुआ मिला, ‘इसमें कूड़ा डालना बंद करो पाकिस्तानी।’ साथ ही कई अन्य बोर्ड्स बना कर उन पर भी यही चीजें लिखी गई थीं। फ़िलहाल इन्हें मिटा दिया गया है।