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बहन से बात करता था फुफेरा भाई, जुबेर ने बनाया मर्डर प्लान: 14 बार चाकू गोद दादा-दादी की हत्या, फूफा को फँसाना था मकसद

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से चौंकाने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ हापुड़ नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोटला मेवतियान में एक पोते ने फूफा को फँसाने के लिए अपने ही दादा-दादी की हत्या कर दी। घटना बुधवार (14 जुलाई 2021) रात को घटी। गुरुवार (15 जुलाई 2021) को सुबह उठने के बाद हत्यारे ने खुद ही शोर मचाया, जिसके बाद पड़ोसियों को इसके बारे में पता चला।

इस मामले में पुलिस ने खुलासा किया है कि हत्या के मुख्य साजिशकर्ता जुबेर (19) का उसके फुफेरे भाई जीशान से झगड़ा चल रहा था। दोनों के बीच पहले मारपीट भी हुई थी। जुबेर जीशान की हत्या करना चाहता था औऱ इसके लिए उसने अपने छोटे भाई (14) के साथ मिलकर योजना तैयार की थी। हालाँकि, उसके फूफा रहीमुद्दीन इलाके के दबंग थे, इस कारण वो सीधे तौर पर उससे पंगा लेने से डरता था। इसलिए उसने करीब 85 साल के बुजुर्ग दादा और 80 वर्षीया दादी की हत्या कर उस केस में अपने फूफा को फँसाने की योजना तैयार की।

उसने सोचा था कि उसके दादा-दादी की हत्या के आरोप में उसके (फूफा) को जेल जाने के बाद अपने फुफेरे भाई जीशान की हत्या कर देगा। पुलिस के मुताबिक, आरोपितों ने बुजुर्ग दंपति को 12-14 बार चाकू से गोद कर हत्या की है। हत्या में इस्तेमाल किए गए चाकू और उस दौरान इस्तेमाल किए गए लोवर को बरामद कर लिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हापुड़ जिले को एसपी नीरज जादौन ने बताय़ा है कि आरोपितों से जब पूछताछ की गई तो पहले तो वो चुप रहे, लेकिन सख्ती बरतते ही उसने सब कुछ बता दिया। जुबेर का फुफेरा भाई जीशान उसकी बहन से बात करता था, जो कि उसको पसंद नहीं था। इसी कारण दोनों के बीच विवाद चल रहा था। कुछ दिन पहले ही वो अपने दादा-दादी के पास रहने के लिए आया था। एक दिन घर में जब वो जीशान की हत्या की योजना बना रहा था तो उसके दादा ने उसे सुन लिया। इसके बाद उसने इस वारदात को अंजाम दिया। उसने बकरीद पर जीशान की हत्या की योजना बनाई थी। फिलहाल आरोपितों गिरफ्तार कर लिया गया है।

5 बेटे और 3 बेटियों के बाद भी अकेले थे दादा-दादी

जुबेर और जुनैद के दादा-दादी की 8 संतानें थीं। इनमें 5 बेटे और 3 बेटियाँ थीं। बावजूद इसके वो अकेले रहने को मजबूर थे। अपने गुजारे के लिए घर में ही किराना की दुकान खोल रखी थी।

‘Islam Is Evil’: कनाडा में मिल रहे इस्लाम विरोधी पोस्टर्स, कई जगहों पर ऐसी घटना के बाद पुलिस ने शुरू की जाँच

कनाडा एक एक शहर में कई जगहों पर ऐसे पोस्टर्स मिले हैं, जिनमें इस्लाम के खिलाफ चीजें लिखी हुई हैं। ये घटना ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे में स्थित न्यूटन शहर की है। इस तरह के पोस्टर्स और दीवारों पर लिखे आपत्तिजनक नारों के मिलने के बाद ‘रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP)’ ने इस घटना की जाँच अपने हाथ में ले ली है। आरोप है कि कई जगहों पर मिले इन पोस्टर्स में मुस्लिमों को निशाना बनाया गया है।

’72 एवेन्यू’ नामक स्थान पर एक मस्जिद के बाहर स्थित एक पोल पर ही इस्लाम को लेकर आपत्तिजनक बातें लिखी हुई मिलीं। 5 जुलाई, 2021 के बाद से ही शहर में इस तरह के कंटेंट्स का सार्वजनिक रूप से मिलना शुरू हो गया था। सरे क्राइम प्रिवेंशन सोसाइटी के स्वयंसेवक जसप्रीत जंडू ने कहा कि हम जिस कठिन समय में रह रहे हैं, इस तरह की घृणा और रेसिज्म के लिए शहर में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि उन्हें इस तरह के संदेश चिपके होने के कई कॉल्स मिल रहे हैं, जिसके बाद तुरंत जाकर उन्हें हटाया जाता है। एक जगह जहाँ ये चीजें लिखी हुई मिलीं, वहाँ पास में ही एक किराने की दुकान, डेंटिस्ट क्लिनिक और पशु अस्पताल थे। परिवारिक और रेजिडेंशियल इलाकों में इस तरह के कंटेंट्स के मिलने से सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया है। सरे पुलिस का कहना है कि किसी एक व्यक्ति का चंद लोगों ने समूह ने इस तरह की हरकत की है।

सरे में RCMP के मीडिया रिलेशन्स अधिकारी और कॉन्स्टेबल सरबजीत सिंह संघा का कहना है कि उनकी सुरक्षा और सेफ्टी के लिए ये सब ठीक नहीं है। पुलिस वीडियो सर्विलांस के जरिए दोषियों को ढूँढ रही है, ताकि अगर वो कैमरे में कैद हुए हैं तो उन्हें चिह्नित कर उनकी पहचान की जा सके। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि अगर उनके पास कोई सूचना है तो वो RCMP से संपर्क करें। कुछ जगह स्प्रे पेण्ट से ‘Islam Is Evil’ लिखा हुआ मिला।

कॉन्स्टेबल संघा ने कहा कि हेट क्राइम और घृणा के आधार पर किए जाने वाले अपराध का सरे में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने बताया कि अधिकारीगण पूरी जिम्मेदारी के साथ इस घटना के सम्बन्ध में कार्रवाई करने में लगे हुए हैं। ताज़ा घटना में एक डस्टबिन पर लिखा हुआ मिला, ‘इसमें कूड़ा डालना बंद करो पाकिस्तानी।’ साथ ही कई अन्य बोर्ड्स बना कर उन पर भी यही चीजें लिखी गई थीं। फ़िलहाल इन्हें मिटा दिया गया है।

NCERT किताबों में बदलाव, भारतीय इतिहास कॉन्ग्रेस कर रहा विरोध… जबकि RTI में खुलासा कि बिना तथ्यों के पढ़ाया

एकतरफ जहाँ NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एड्यूकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) खुद कई बार RTI में यह स्वीकार कर चुका है कि पाठ्यपुस्तकों में बहुत से ऐतिहासिक तथ्यों और घटनाओं को वह बिना किसी सबूत के पढ़ाता है वहीं इतिहासकारों की सबसे बड़ी संस्था भारतीय इतिहास कॉन्ग्रेस (IHC) ने NCERT की स्कूल टेक्स्टबुक में संभावित बदलाव का विरोध किया है। इसके पीछे उनका कहना है यह राजनीति से प्रेरित है न कि अकादमिक जरुरत।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की शुरुआत में, राज्य सभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर संसदीय स्थायी समिति द्वारा पाठ्यपुस्तक के पाठ्यक्रम में बदलाव के अनुमोदन की बात की थी। इसे ‘सुधार’ के रूप में प्रदर्शित करते हुए इसका मुख्य लक्ष्य ‘अनैतिहासिक तथ्यों’ और ‘हमारे राष्ट्रीय नायकों के बारे में विकृतियों’ को खत्म करना और ‘भारतीय इतिहास के सभी अवधियों के समान या आनुपातिक संदर्भ’ तय करना बताया गया था। इस विषय में जनता की प्रतिक्रिया 30 जून तक आमंत्रित की गई है और बाद में समय सीमा 15 जुलाई तक बढ़ा दी गई, अभी हाल ही में आईएचसी ने अपनी प्रतिक्रिया भेजी।

गौरतलब है कि 1935 में स्थापित IHC में 35,000 से अधिक सदस्य हैं। टीओआई की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि- उनके पास IHC का जो पत्र है, उसमें कहा गया है, “वर्तमान एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में सुधार लाने के नाम पर पेश की जा रही गलत सूचना और पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण से आईएचसी बहुत परेशान है।” उसमें कहा गया है, “सुधारों’ में निहित मौजूदा पाठ्यपुस्तकों की आलोचना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त इतिहासकारों के किसी विशेषज्ञ निकाय से नहीं बल्कि पूर्वाग्रह के गैर-शैक्षणिक समर्थकों द्वारा समर्थित राजनीतिक स्थिति से उभर रही है।”

IHC ने कहा, उसे ‘विरूपण’ की आशंका थी क्योंकि एक मिसाल है। पत्र में कहा गया है, “देश के कुछ सबसे बड़े विद्वानों द्वारा एनसीईआरटी के लिए लिखी गई स्कूल की पाठ्यपुस्तकों को हटा दिया गया था, और उनके स्थान पर 2002 में एक स्पष्ट सांप्रदायिक, बहुसंख्यक पूर्वाग्रह वाली किताबें पेश की गई थीं।” हालाँकि, 12 महीने बाद वह किताबें वापस ले ली गई थीं।

IHC के सदस्यों ने मीडिया संस्थान टीओआई को बताया, “पुस्तकों की हमेशा समीक्षा और जाँच की जानी चाहिए। लेकिन यह ऐतिहासिक काल की शोध-आधारित समझ से प्राप्त अकादमिक सामग्री पर ध्यान देने के साथ मान्यता प्राप्त विद्वानों को शामिल करके किया जाना चाहिए।” आईएचसी के अध्यक्ष अमिय बागची ने आगे कहा, “हम जिस चीज का विरोध करते हैं, वह इतिहास की विकृत समझ को पेश करने की कोशिश है।”

अब जरा उन सन्दर्भों पर नजर डालिये जब NCERT ने खुद स्वीकार किया है कि किताबों में जो तथ्य के रूप में वह बच्चों को पढ़ा रहे हैं उसका उनके पास खुद कोई सबूत नहीं है।

ऑपइंडिया की एक रिपोर्ट में यहाँ बताया गया है कि मुगलों का महिमामंडन मुख्यधारा की मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर उदारवादियों और वामपंथियों द्वारा अक्सर किया जाता है। यहाँ तक भी दावे किए जाते हैं कि औरंगजेब जैसे आक्रांताओं ने भी भारत में रहते हुए मंदिरों की रक्षा की और उनकी देखरेख का जिम्मा उठाया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्कूलों में जिस पाठ्यक्रम में हमें NCERT यह सब बातें सदियों से पढ़ाते आई है, उसके पास इसकी पुष्टि के लिए कोई आधिकारिक विवरण ही मौजूद नहीं है?

एक व्यक्ति ने नवंबर 18, 2020 में एक आरटीआई (RTI) आवेदन दायर कर NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) की पुस्तकों (जो स्कूलों में इस्तेमाल होती आई हैं) में किए गए दावों के स्रोत के बारे में जानकारी माँगी।

इस RTI में विशेष रूप से उन स्रोतों की माँग की गई, जिनमें NCERT की कक्षा-12 की इतिहास की पुस्तक में यह दावा किया गया था कि ‘जब (हिंदू) मंदिरों को युद्ध के दौरान नष्ट कर दिया गया था, तब भी उनकी मरम्मत के लिए शाहजहाँ और औरंगजेब द्वारा अनुदान जारी किए गए। जिसका उनके पास कोई सबूत नहीं है।

वहीं एक दूसरे मामले में, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) एक बार फिर विवादों में है। NCERT कई वर्षों से सती प्रथा को लेकर भारतीय संस्कृति के खिलाफ जहर फैलाने की कोशिश में लगा हुआ है, वह भी बिना सबूत के।

तीसरी घटना भी ऐसी ही है, किताबों में मुगलों का महिमामंडल करने वाली NCERT को भरतपुर के एक RTI कार्यकर्ता ने लीगल नोटिस भेजा था। NCERT को ये नोटिस मुगलों पर अप्रमाणित कंटेंट छापने को लेकर भेजा गया था।

दरअसल, NCERT की कक्षा-12 की इतिहास की पुस्तक में यह दावा किया गया है कि जब (हिंदू) मंदिरों को युद्ध के दौरान नष्ट कर दिया गया था, तब भी उनकी मरम्मत के लिए शाहजहाँ और औरंगजेब द्वारा अनुदान जारी किए गए। जबकि इसका उनके पास कोई प्रमाण मौजूद नहीं था।

कॉलेज में घुसे मुस्लिम लड़के, देवी सरस्वती को दी गाली, 19 साल के विशाल की निर्मम हत्या: ABVP कार्यकर्ता की 9वीं बरसी

केरल में 17 जुलाई 2012 को विशाल कुमार नाम के एबीवीपी कार्यकर्ता की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस हत्या में कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) के गुंडे शामिल थे। विशाल उन तीन कार्यकर्ताओं में से एक था जो इनके हमले में घायल हुए थे। हमला उस वक्त हुआ जब एबीवीपी कार्यकर्ता अलापुझा जिले के चेंगन्नूर क्रिस्चियन कॉलेज में प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों का स्वागत कर रहे थे।

रिपोर्ट के अनुसार, एबीवीपी कार्यकर्ता स्वागत समारोह में व्यस्त थे। उसी दौरान बाहर के कुछ मुस्लिम युवक कॉलेज में घुसे। वे लोग एबीवीपी और देवी सरस्वती को गाली दे रहे थे। इसका विरोध विशाल और उसके अन्य साथियों ने किया। इसके साथ ही विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने उन्हें वहाँ से जाने के लिए भी कहा। इसके बाद अचानक से मुस्लिम समूह ने उन पर चाकू, खंजर और अन्य हथियारों से हमला कर दिया था।

पुलिस ने बाद में हत्या के मामले में अंसार फैजल, कैम्पस फ्रंट कॉलेज इकाई के सचिव नजीम और पॉपुलर फ्रंट के समर्थक शफीक को गिरफ्तार किया था। रिपोर्ट के अनुसार, पाँच साल बाद इस मामले में एक आरोप-पत्र दायर किया गया था। इसमें इस घटना में 20 लोगों के शामिल होने जिक्र किया गया था।

चार्जशीट के अनुसार, मुख्य आरोपी नसीम, ​​अंसार फैसल, शेफिक, आसिफ मोहम्मद, शमीर रोथर एमएस, शमीर रोथर, अफजल, अल्ताज और शिबिन हबीब थे। हत्या के दो हफ्ते बाद एबीवीपी के स्टेट सेक्रेटरी एम अनीश बताया था कि, विशाल की हत्या के पीछे आतंकवादी तत्वों का हाथ था। इस वजह से लोकल पुलिस सच्चाई सामने नहीं ला सकती। अलग इन्वेस्टिगेशन टीम ही केवल इसकी सच्चाई सामने ला सकती है।

लोगों का मानना है कि विशाल कुमार को उस वक्त इसलिए निशाना बनाया गया था क्योंकि उन्होंने संघ के नेटवर्क को क्षेत्र में मजबूत करने के साथ नए शाखाओं की शुरुआत भी की थी। विशाल कुमार का जन्म सऊदी अरब में हुआ था और उन्होंने यूनाइटेड किंगडम में अपनी प्रारंभिक पढ़ाई पूरी की थी। हालाँकि, बड़े होने के बाद उन्होंने अपने माता-पिता से अनुरोध किया था, कि उन्हें भारत रहने और वहीं अपनी शिक्षा जारी रखने की अनुमति दी जाए।

विशाल के भारत आने के अनुरोध को उसके माता-पिता मानने को तैयार नहीं थे। हालाँकि विशाल अपनी बात पर लगातार अड़े हुए थे। वह संघ के माध्यम से देश की सेवा करना चाहते हैं। इसके अलावा वे गरीब घर से आने वाले चार अन्य छात्रों की शिक्षा का भी समर्थन कर रहे थे। उनके परिवार वाले भी उनकी राजनीतिक विचारों को अनोखे तरीके से देखते थे। विशाल ने संघ के प्रति अपने पिता के मन की धरणा को भी बदला था।

कैंपस फ्रंट ऑफ़ इंडिया, एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के छात्रों की शाखा है। इस संगठन के छात्र अक्सर कई अपराधों में लिप्त पाए गए है। एक बार पीएफआई के सदस्यों ने कथित रूप से इस्लामिक पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने को लेकर केरल के एक प्रोफेसर के हाथ काट दिए थे।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने पीएफआई पर केरल में लव-जिहाद मामलों में शामिल होने का भी आरोप लगाया है। वहीं 2016 में एक अन्य पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के नेता पर बेंगलुरु में आरएसएस कार्यकर्ता रुद्रेश की जघन्य हत्या में शामिल होने का आरोप है। इस तरह के अपराधों के आरोपी होने के अलावा पीएफआई पर इस साल दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में शामिल होने का भी संदेह है।

विशाल कुमार उन होनहार छात्रों में से एक था जिसके जीवन को कट्टरपंथी मुस्लिमों ने क्रूरता से खत्म कर दिया। वो भी अब संघ के उन्हीं कार्यकताओं का हिस्सा हो गया है जिसे बेहरमी से वामपंथियों या कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा अपने राजनीतिक रुझान के कारण केरल में मार दिया गया। आज भी इन हत्याओं का सिलसिला जारी है।

नाबालिग बेटी ने प्रेमी अयूब खान को बुलाकर माँ का करवाया कत्ल, दूसरे समुदाय के युवक से मिलने पर करती थी ऐतराज

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में आशिकी के नशे में 16 वर्षीया एक बेटी ने दूसरे समुदाय के अपने प्रेमी अयूब खान उर्फ सलमान के साथ मिलकर अपनी ही माँ की हत्या कर दी। लड़की को उसकी माँ का प्रेम के रास्ते में बाधा बनना रास नहीं आ रहा था। इसलिए अपनी माँ को रास्ते से हटाने का उसने निर्णय ले लिया। लड़की ने प्रेमी को घर बुलाकर अपनी माँ की हत्या करवा दी।

मामला उन्नाव के सदर कोतवाली क्षेत्र के हुसैन नगर गाँव की है। यहां बीते गुरुवार (15 जुलाई) की सुबह घर के आंगन में 50 वर्षीय पप्पी नाम की एक महिला का खून से सना शव मिला था। महिला की बेटी ने इस बारे में अपने पिता और पड़ोसियों को बताया कि किसी ने उसकी माँ की हत्या कर दी। सूचना पाकर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची उसके बाद मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी थी। पुलिस ने शंका के आधार पर लड़की की मोबाइल की जाँच तो उसने पाया कि वह अयूब खान नाम के शख्स के संपर्क में थी। इस आधार पर पुलिस ने अयूब को हिरासत में ले लिया। पुलिस की पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

उन्नाव के एसपी आनंद कुलकर्णी ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि महिला की हत्या उसकी बेटी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर की थी। लड़की का पड़ोस में रहने वाले दूसरे समुदाय के युवक अयूब खान के साथ प्रेम संबंध थे। महिला ने अपनी बेटी को अयूब से मिलने के लिए मना किया था। इससे खफा बेटी ने अपने प्रेमी अयूब को घर बुला लिया। अयूब ने महिला के सिर पर ईंट से वार करके उसकी हत्या कर दी। आरोपी के निशानदेही पर पुलिस ने ईंट को बरामद कर लिया है।

दरअसल, हुसैन नगर के बचन लोध पड़ोस में ट्रैक्टर चलाने का काम करते हैं और बुधवार को ट्रैक्टर लेकर वह पूर्वा कोतवाली थाना क्षेत्र में खेत जोतने के लिए गए थे। सुबह 2:30 बजे उनकी बेटी ने फोन कर बताया कि उसकी माँ खून से लथपथ पड़ी है। बचन की एक लड़की और दो छोटे-छोटे बेटे हैं। लड़की ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसने इस दौरान किसी तरह का शोर-गुल नहीं सुना। इस पर पुलिस को शंका हुई।

पुलिस ने लड़की से उसका और उसकी माँ का फोन माँगा। इस पर लड़की ने कहा कि उसके पास मोबाइल नहीं है, लेकिन उसके छोटे भाइयों ने पुलिस को बताया कि लड़की के पास फोन है। उसके बाद पुलिस ने लड़की और उसकी माँ का फोन जब्त कर उसकी कॉल डिटेल निकाली। कॉल डिटेल में सामने आया कि लड़की ने हत्या के दिन ही अयूब खान से बातचीत की थी।

उसके बाद पुलिस ने अयूब खान को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। एसपी कुलकर्णी ने बताया कि पूछताछ में अयूब ने बताया कि लड़की से उसका अफेयर पिछले चार वर्षों से है। उसने बताया कि 10 दिन पहले लड़की की माँ ने लड़की को चेतावनी दी थी कि अगर वह अयूब से मिली थी उसे मार देगी। इसके बाद दोनों ने मिलकर माँ की हत्या की साजिश रची।

भारत में कोरोना, पश्चिमी मीडिया की पक्षपाती कवरेज: IIMC का सर्वे- अंतरराष्ट्रीय, आंतरिक राजनीति जिम्मेदार

भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार 82 प्रतिशत भारतीय मीडियाकर्मियों की राय में पश्चिमी मीडिया द्वारा भारत में कोविड-19 महामारी की कवरेज ‘पक्षपातपूर्ण’ रही है। 69% मीडियाकर्मियों का मानना है कि इस कवरेज से विश्व स्तर पर भारत की छवि धूमिल हुई है, जबकि 56% लोगों का कहना है कि इस तरह की कवरेज से विदेशों में बसे प्रवासी भारतीयों की भारत के प्रति नकारात्मक राय बनी है।

IIMC के महानिदेशक प्रोफेसर संजय द्विवेदी ने बताया कि संस्थान के आउटरीच विभाग द्वारा यह सर्वेक्षण जून 2021 में किया गया। इस सर्वेक्षण में देश भर से कुल 529 पत्रकारों, मीडिया शिक्षकों और मीडिया स्कॉलर्स ने हिस्सा लिया।

सर्वेक्षण में शामिल 60% मीडियाकर्मियों का मानना है कि पश्चिमी मीडिया द्वारा की गई कवरेज एक पूर्व निर्धारित एजेंडे के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को खराब करने के लिए की गई। अध्ययन के तहत जब भारत में कोविड महामारी के दौरान पश्चिमी मीडिया की कवरेज पर प्रतिक्रिया माँगी गई, तो 71% लोगों का मानना था कि पश्चिमी मीडिया की कवरेज में संतुलन का अभाव था।

पश्चिमी मीडिया की नकारात्मक कवरेज: कब और क्यों?

प्रो. द्विवेदी के अनुसार सर्वेक्षण में यह भी समझने की कोशिश की गई कि महामारी के दौरान पश्चिमी मीडिया में भारत के विरुद्ध यह नकारात्मक अभियान वास्तव में कब शुरू हुआ। इसके जवाब में 38% लोगों ने कहा कि यह अभियान कोरोना की दूसरी लहर के दौरान उस समय शुरू हुआ, जब भारत महामारी से लड़ने में व्यस्त था।

इस सर्वे में 25% मीडियाकर्मियों का मानना है कि यह पहली लहर के साथ ही शुरू हो गया था। वहीं 21% लोगों का मानना है कि भारत के खिलाफ नकारात्मक अभियान तब शुरू हुआ, जब भारत ने कोविड-19 रोधी वैक्सीन के टेस्टिंग की घोषणा की। 17% लोगों ने कहा कि यह नकारात्मकता तब शुरू हुई, जब भारत ने ‘वैक्सीन डिप्लोमेसी’ शुरू की।

अध्ययन में पश्चिमी मीडिया द्वारा भारत में महामारी की पक्षपातपूर्ण कवरेज के संभावित कारणों को जानने का भी प्रयास किया गया। 51% लोगों ने इसका कारण अंतरराष्ट्रीय राजनीति को बताया, तो 47% लोगों ने भारत की आंतरिक राजनीति को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। 34% लोगों ने फार्मा कंपनियों के निजी स्वार्थ और 21% लोगों ने एशिया की क्षेत्रीय राजनीति को इसका कारण बताया।

सर्वेक्षण के दौरान एक रोचक तथ्य यह भी सामने आया कि लगभग 63 प्रतिशत लोगों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब करने वाली पश्चिमी मीडिया की नकारात्मक खबरों को सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड या साझा नहीं किया।

‘2024 में मोदी के खिलाफ परफेक्ट चेहरा हैं पवार’: संजय राउत का बयान, 3 दिन बाद ही PM मोदी से 50 मिनट मुलाकात

महाराष्ट्र की सत्ता में साझीदार ‘राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP)’ के संस्थापक व अध्यक्ष शरद पवार ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों की ये बैठक करीब 50 मिनट तक चली। हालाँकि, बैठक का मुद्दा क्या रहा – ये साफ़ नहीं है। ये सब तब हो रहा है, जब 3 दिन पहले ही शिवसेना सांसद संजय राउत ने शरद पवार को नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रधानमंत्री पद का उपयुक्त उम्मीदवार बताया था।

हाल ही में शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत ने कहा था कि विपक्ष के पास 2024 लोकसभा चुनाव जीतने के चांस कम ही हैं। उन्होंने बुधवार (14 जून, 2021) को कहा था कि बिना किसी मजबूत चेहरे के नरेंद्र मोदी को हराने में विपक्ष शायद ही सफल हो। उन्होंने कहा था कि फ़िलहाल विपक्ष के पास नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई चेहरा ही नहीं है। उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव के लिए सभी विपक्षी पार्टियों को मिल-बैठ कर एक चेहरा ढूँढने की सलाह दी थी।

साथ ही संजय राउत ने शरद पवार का नाम सुझाते हुए कहा था कि वरिष्ठ होने के कारण वो 2024 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्षी दलों के संयुक्त उम्मीदवार बनने की काबिलियत रखते हैं। हालाँकि, उन्होंने इस तरह की बात पहली बार नहीं की थी। इससे पहले भी उन्होंने शरद पवार को कॉन्ग्रेस नीत UPA गठबंधन का चेहरा बनाए जाने की वकालत की थी। लेकिन, 3 दिन बाद शरद राव पवार की पीएम मोदी से मुलाकात से अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।

दिलचस्प बात ये भी है कि इस बैठक से पहले पूर्व केंद्रीय रक्षा मंत्री शरद पवार ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक की थी। राजनाथ ने यूपीए काल में रक्षा मंत्रालय संभालने वाले एके एंटनी और शरद पवार को अफगानिस्तान के साथ-साथ भारत-चीन सीमा की स्थिति पर भी जानकारी दी। इस दौरान डिफेंस स्टाफ जनरल विपिन रावत और सेना प्रमुख मुकुंद नरवणे भी मौजूद रहे। दोनों पूर्व रक्षा मंत्रियों को भारतीय रुख और कार्रवाई की जानकारी दी गई।

केंद्र में नए सहकारिता मंत्रालय के गठन और पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को गृह के साथ-साथ इसकी भी कमान दिए जाने पर भी शरद पवार ने कहा था कि इससे महाराष्ट्र के सहकारिता आंदोलन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जबकि शिवसेना ने इस फैसले का समर्थन किया था। 25000 करोड़ रुपए के ‘महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (MSCB)’ घोटाला में अजित पवार का नाम भी सामने आया है।

प्रियंका गाँधी से मिलने पहुँचे राजस्थान के बेरोजगारों को कॉन्ग्रेसियों ने मारा: किसी का सिर फोड़ा, किसी के कपड़े फाड़े

उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर राजस्थान के बेरोजगार युवकों के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। प्रियंका गाँधी उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस की प्रभारी हैं। राजस्थान से बेरोजगार युवक उनसे मिलने के लिए लखनऊ आए थे, लेकिन कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोक दिया। प्रियंका गाँधी ने अपने यूपी दौरे में बेरोजगारों के दुःख-दर्द सुनने की बात की थी। शुक्रवार (16 जुलाई, 2021) को यूपी के कम्प्यूटर ग्रेजुएट्स और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में झड़प हुई।

इस दौरान कई बेरोजगार युवक घायल भी हो गए। उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें पीटा भी गया। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्पष्ट कह दिया है कि सरकार चाहे किसी को हो, सभी लोगों को नौकरी कोई नहीं दे सकता। इससे युवक नाराज हैं। दिल्ली से जयपुर तक 100 से भी अधिक राजस्थान के बेरोजगार युवक धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। लखनऊ में प्रियंका गाँधी ने ‘बेरोजगार सम्मलेन’ आयोजित किया था, जिसमें ये पहुँचे थे।

राजस्थान के बाराँ स्थित छबड़ा से 6 बार के विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने इस घटना के बारे में बताते हुए कहा, “लखनऊ में प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी ऑफिस के बाहर प्रियंका गाँधी से मिलने के लिए पहले तो राजस्थान के बेरोजगार कंप्यूटर अभ्यर्थियों को दिन भर बिठा के रखा गया। रात को इन युवाओं के साथ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट की गई। प्रियंका जी जवाब दें कि राजस्थान के बेरोजगारों के ऐसा सलूक क्यों?”

भाजपा नेता प्रताप सिंह सिंघवी ने घायल युवकों की तस्वीरें शेयर करते हुए पूछा कि आखिर इन बेरोजगार युवाओं का क्या दोष था? उन्होंने प्रियंका गाँधी से कहा कि यह बस आपसे मिलना चाह रहे थे, क्योंकि लगा कि आप अगर यूपी में संविदा पर भर्ती के खिलाफ हैं तो राजस्थान में तो आपकी सरकार है तो आप मदद करेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हें बेरहमी से मारा गया। बता दें कि यूपी में संविदा का विरोध करने वाली प्रियंका गाँधी राजस्थान पर चुप हैं।

ऐसे न जाने कितने बेरोजगार हैं, जिनके साथ राजस्थान में छल हुआ है। जयपुर के महेंद्र मिश्र ने साल 2013 में 33 वर्ष की उम्र में पुजारी व प्रबंधन बनने की परीक्षा दी थी, लेकिन ज्योतिषी में पीएचडी के बावजूद वो बेरोजगार हैं। 8 सालों से परीक्षा के परिणाम के इंतजार में लोग एडमिट कार्ड साथ लिए घूम रहे हैं। राजस्थान में एक लाख से ज्यादा पद खली होने के बावजूद सरकार भर्ती नहीं निकाल रही है।

सरकार बजट का बहाना बना रही है। पिछले कई वर्षों से लगातार परीक्षाएँ टलती ही जा रही हैं। टीचर भर्ती से लेकर पटवारी तक की परीक्षाएँ तीन-तीन बार टाली जा चुकी हैं। कई परीक्षाओं में पेपर ही आउट हो गया तो वो जाँच के तिलिस्म में लंबित हैं। प्रियंका गाँधी से जब युवा अपनी बात रखने पहुँचे तो किसी का सिर फोड़ दिया तो किसी के कपड़े फाड़ डाले गए। जिस अनुबंध वाली नौकरी का यूपी में प्रियंका विरोध करती हैं, वही राजस्थान में होता है तो वो चुप हैं।

यूपी वाले मुद्दे पर प्रियंका गाँधी ने कहा था, “संविदा = नौकरियों से सम्मान विदा। 5 साल की संविदा = युवा अपमान कानून। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी इस तरह के कानून पर अपनी तीखी टिप्पणी की है। इस सिस्टम को लाने का उद्देश्य क्या है? सरकार युवाओं के दर्द पर मरहम न लगाकर दर्द बढ़ाने की योजना ला रही है। नहीं चाहिए संविदा।” राजस्थान वाले मुद्दे पर उनका कोई ट्वीट नहीं आया है।

शायर मुनव्वर राणा की बेटी के साथ UP कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने किया दुर्व्यवहार: खुद उरूसा राणा ने बताई हर बात

उत्तर प्रदेश महिला कॉन्ग्रेस की मध्य जोन इकाई की उपाध्यक्ष और विवादित शायर मुनव्वर राणा की बेटी उरूसा राणा ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। उन्होंने बीते दिन कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के लखनऊ में धरने के दौरान दुर्व्यवहार किए जाने की बात की हैं।

लल्लू पर उरूसा ने बेइज्जती का लगाया आरोप

उरूसा ने आरोप लगाया कि जब वह गाँधी प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन से पहले प्रियंका का अभिवादन करने उनके नजदीक पहुँचीं तो लल्लू ने उन्हें बेइज्जत करके वहाँ से चले जाने को कहा।

CAA-NRC के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान लल्लू सहयोग माँगते थे: उरूसा 

उरूसा ने कहा कि जब लखनऊ में संशोधित नागरिकता कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ प्रदर्शन की बारी थी तब लल्लू उनसे सहयोग माँगते थे। आज जिस तरह उन्होंने बर्ताव किया, उससे वह बहुत ‘आहत’ हैं।

लल्लू ने आरोपों को बताया गलत

उधर, प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने उरूसा के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। अजय कुमार लल्लू के अनुसार उरूसा पार्टी की सम्मानित पदाधिकारी हैं और उनका अपमान करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। लल्लू ने कहा कि बल्कि खुद उन्होंने ही प्रियंका से उरूसा का परिचय कराया था। उरूसा खुद को जहाँ से हटाए जाने की बात कर रही हैं, वहाँ प्रियंका गाँधी के अलावा किसी और को नहीं बैठना था।

बता दें कि अक्टूबर 2020 में उरूसा राणा ने कॉन्ग्रेस का दामन थामा था। शायर मुनव्वर राणा की बेटियाँ फौजिया, सुमैया और उरूसा ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। तब से ये तीनों चर्चा में आई थीं। फौजिया राणा तो शाहीन बाग भी पहुँची थीं, जो सीएए विरोध का प्रमुख केंद्र रहा। फौजिया ने लखनऊ में भी घंटाघर पर सीएए के विरोध में धरना दिया था। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

उरूसा राणा ने अपनी बहन सुमैय्या और फौजिया राणा का खुलकर समर्थन किया था। साथ ही, पीएम मोदी और यूपी की योगी सरकार को खुली चुनौती देते हुए घंटाघर पर कई दिनों तक सरकार के खिलाफ चले महिलाओं के प्रर्दशन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी।

गौरतलब है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में चल रहे सीएए, एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के दौरान मुनव्वर राणा की बेटी सुमैया राणा ने कहा था, “हमें ध्यान रखना है कि हमें इतना भी न्यूट्रल (तटस्थ) नहीं होना है कि हमारी पहचान ही खत्म हो जाए। पहले हम मुस्लिम हैं और उसके बाद कुछ और हैं। हमारे अंदर का जो दीन है, जो इमान है, वह जिंदा रहना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि हम अल्लाह को भी मुँह दिखाने लायक न रह जाएँ।”

शिवम दूबे ने किया अंजुम खान से निकाह: हिंदू-मुस्लिम के जहरीले पोस्ट करती थीं शादी से पहले? सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट्स वायरल

क्रिकेटर शिवम दूबे ने लंबे समय से गर्लफ्रेंड रहीं अंजुम खान के साथ शादी रचा ली है। इन दोनों ने शुक्रवार (16 जुलाई, 2021) को मुंबई में एक प्राइवेट समारोह में शादी की। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि ये उन दोनों के हमेशा साथ रहने की शुरुआत है। भारत की तरफ से एक वनडे और 12 T20 मैच खेल चुके शिवम दूबे की पत्नी अंजुम खान को लेकर सोशल मीडिया में कई दावे किए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया यूजर्स ने ट्विटर पर ‘AnjumKh60183110’ नाम के हैंडल के बारे में दावा किया है कि ये शिवम दूबे की पत्नी अंजुम खान का है। इस हैंडल को शिवम दुबे फॉलो भी करते हैं। साथ ही ‘The Age’ के खेल पत्रकार डेनियल चेर्नी भी इस अकाउंट को फॉलो करते हैं। इस हैंडल के कुछ स्क्रीनशॉट्स वायरल हुए हैं, जिसमें अश्लील गालियों को लाइक किया गया है और भाजपा व हिन्दू विरोधी चीजों को आगे बढ़ाया गया है।

लाइक किए गए एक ट्वीट में लिखा है, “किसी को यूँ ही नहीं मिल जाती अंधभक्ति इस संसार में। इसके लिए पिछ#ड़े पर मुहर लगानी पड़ती है आसाराम के दरबार में।” इसी तरह एक लाइक किए गए ट्वीट में ‘संघियों’ को भला-बुरा कहा गया है और भाजपा को ‘गोबर भक्तों वाली पार्टी’ बताया गया है। साकिब शेख नाम के एक व्यक्ति के जिस ट्वीट को लाइक किया गया है, उसमें हिंदुस्तान को बाबा आदम का देश बताते हुए लिखा है, “तू अपनी माँ से जाकर पूछ किसकी औलाद है। कहीं कोई मुल्ला न निकल जाए।”

शिवम दूबे को IPL में ‘राजस्थान रॉयल्स’ की टीम ने 4.40 करोड़ रुपए में खरीदा था। उससे पहले भी वो ‘रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर’ समेत अन्य IPL टीमों से खेलते रहे हैं। उनकी शादी के बाद लोग उन्हें ‘स्टे सेफ’ की सलाह भी दे रहे हैं। कथित तौर पर अंजुम खान का बताए जाने वाले हैंडल द्वारा लाइक किए गए एक ट्वीट में लिखा है, “अगर दो महीने और भारत में लॉकडाउन रह गया तो भक्तों को गोबर और मूत्र पीना पड़ेगा।”

एक अन्य लाइक किए गए ट्वीट में लिखा है, “मुझे तो लगता है तेरा बाप है पप्पू और मुगलों से तेरी माँ का हलाला हुआ है। तभी तो नाम लेते हो बार-बार उन लोगों का।” शिवम दुबे को उनकी शादी के दौरान दुआ पढ़ते हुए भी देखा गया, जिससे लोग भड़क गए। शादी पूरी होने के बाद शिवम दूबे और अंजुम खान दुआ में हाथ उठाए हुए दिख रहे हैं। लोगों ने नुसरत जहाँ और निखिल जैन से इनकी तुलना कर दी।