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A++ केटेगरी का आतंकी, 12वीं पास पर तकनीक का मास्टर: मार गिराया गया मेहराजुद्दीन, 9 साल से कश्मीर में था एक्टिव

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा में बुधवार (7 जुलाई 2021) को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिदीन का टॉप कमांडर मेहराजुद्दीन हलवाई मारा गया। मेहराजुद्दीन हलवाई उर्फ उबैद कई बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस कई सालों से उसकी तलाश कर रही थी। घाटी में पिछले 9 सालों से सक्रिय मेहराजुद्दीन सिर्फ 12वीं पास था। लेकिन वह आधुनिक संचार तकनीकी का बेहद कुशलता से इस्तेमाल करता था। इसकी वजह से वह पुलिस की पकड़ में नहीं आ रहा था।

वह तकनीक के इस्तेमाल से अन्य आतंकियों के साथ संवाद करता। आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचता और उन्हें अंजाम देता था। इंटरनेट के जरिए वह युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती कराने से लेकर आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए धन भी जुटाया करता था।

कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने बताया, “आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सबसे पुराने और कुख्यात आतंकवादियों में से एक मेहराजुद्दीन हलवाई उर्फ उबैद हंदवाड़ा में हुई मुठभेड़ में मारा गया। वह आतंकवाद की कई घटनाओं में शामिल था। यह एक बड़ी सफलता है।”

जम्मू-कश्मीर पुलिस के रिकॉर्ड में मेहराजुद्दीन हलवाई एक A++ कैटेगरी (मोस्टवांटेड) का आतंकवादी था। उसने युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पुलिस के मुताबिक मुठभेड़ वाली जगह से आपत्तिजनक सामग्री, हथियार, गोला-बारूद और दवाएँ बरामद की गई हैं।

उबैद उत्तरी कश्मीर में कई सालों से सक्रिय था और कई आतंकी गतिविधियों में शामिल था। पुलिस ने कहा है, “वह हिजबुल मुजाहिदीन के खतरनाक आतंकवादी बुरहान वानी के साथ का था। बुरहान दक्षिण कश्मीर में शहरियों, सिक्योरिटी फोर्सेज के कत्ल के मामलों में शामिल था। वहीं मेहराजुद्दीन हलवाई उत्तरी कश्मीर में नागरिकों, सुरक्षा बलों की हत्या में शामिल था।” मालूम हो कि बुरहान वानी 8 जुलाई 2016 को एक मुठभेड़ में मारा गिराया गया था।

बता दें कि मेहराजुद्दीन के खिलाफ विभिन्न थानों में कई मामले दर्ज किए गए थे। उसने जुलाई 2013 में उन्टू हमाम सोपोर के एसपीओ मुदासिर अहमद डार की हत्या की हत्या थी। 26 जुलाई 2013 को क्रैंकशिवन के सरपंच खजीर मोहम्मद परे पर हमला किया था और गोरीपोरा बोमई के सरपंच हबीबुल्लाह मीर की हत्या के साथ हार्डशिवा सोपोर की पंच जुना बेगम पर भी हमला करवाया था। इसके अलावा उसने अप्रैल 2013 में सोपोर में अपने साथियों के साथ पुलिस दल पर हमला किया था, जिसमें चार पुलिसकर्मी वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

‘बिहार में बढ़ रहा लव जिहाद व धर्मांतरण, पुलिस ने घुटने टेके’: VHP ने राज्यपाल से कहा – बिहार बन सकता है बंगाल-कश्मीर

विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने बिहार में ‘जिहादी आक्रमण’ की घटनाओं के बढ़ने और बम विस्फोट की वारदातों के मद्देनजर राज्यपाल फागु चौहान से मुलाकात की। दक्षिण बिहार VHP संगठन के शीर्षस्थ पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से बिहार के महामहिम राज्यपाल से मिलकर ज्ञापन दिया और शीघ्र कार्यवाई की माँग की। विहिप प्रतिनिधिमंडल में केशव राजू, क्षेत्र संगठन मंत्री, पद्मश्री डॉ आर एन सिंह, केंद्रीय उपाध्यक्ष, परशुराम, प्रांत मंत्री, अशोक श्रीवास्तव, क्षेत्र विशेष संपर्क प्रमुख एवं संजय कुमार, कोषाध्यक्ष शामिल थे।

संयुक्त विहिप शीर्षस्थ नेतृत्व ने महामहिम का ध्यान आकृष्ट कराते हुए बताया कि बिहार के सीमांचल क्षेत्रों में हिन्दूओ पर जिहादी आक्रमण बढ रहे है। VHP ने आरोप लगाया कि कहीं पर ‘लव जिहाद’ में हिन्दू लड़कियों को जबरन उठाया जा रहा है तो कहीं धर्मांतरण कराया जा रहा है। संगठन का कहना है कि कहीं मंदिरों के मूर्ति तोड़े जा रहे है तो कहीं हिन्दूओ के धार्मिक अनुष्ठान और पारिवारिक उत्सवों पर भी इस्लामिक आक्रमण हो रहे हैं, तो बिहार में जगह जगह बम विस्फोट हो रहे है और पुलिस प्रशासन इस्लामिक आक्रमणों के सामने बौना नजर आ रही है।

विश्व हिन्दू परिषद ने यहाँ तक आरोप लगाया कि बिहार पुलिस जिहादियों के सामने घुटने टेक रही है। संगठन ने कहा कि ‘लव जिहाद’, गोहत्या और हिन्दुओं पर आक्रमण के विरुद्ध यदि कहीं पर FIR भी हुए है तो पुलिस एक्शन में नहीं आ रही है, अधिकांश जगह पर तो FIR तक नहीं हुई है। VHP ने कहा कि जगह-जगह बम विस्फोट भी इसी प्रकार के आक्रमण का ही हिस्सा है। दरभंगा रेलवे स्टेशन, बाँका के मदरसा में बम विस्फोट, अररिया में बम विस्फोट ये सब इस्लामिक आतंकवाद का ही हिस्सा है।

VHP ने कहा, “आज बिहार का संपूर्ण सीमांचल क्षेत्र इस्लामी आतंकवादियों के निशाने पर है। किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, दरभंगा, भागलपुर, मोतिहारी का ढाका प्रखंड, बेतिया, बगहा सहित बिहार के अनेक जिले खासकर भारत नेपाल और बांग्लादेश से जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों मे प्रतिदिन ‘लव जिहाद’, धर्मांतरण, गोहत्या, मठ-मंदिरों पर इस्लामी आक्रमण, हिंदुओं के धार्मिक अनुष्ठानों पर हमले प्रतिदिन हो रहे है।”

संगठन ने राज्यपाल से किए गए निवेदन में कहा, “कई बार ‘लव जिहाद’ में तो पुलिस FIR करने से भी कतरा रही है और यदि कहीं FIR हो भी गई तो पुलिस अभियुक्त को पकड़ने और लड़की को बरामद करने में रुचि नहीं दिखा पा रही है। इसके कारण जिहदियीं का मनोबल काफी ऊँचा है और प्रतिदिन हिन्दू लड़कियाँ जिहादियों द्वारा ऊठाई जा रही है। यहाँ तक कि बेटियो की बारात पर भी हमले कर उसे रोका जा रहा है।”

विहिप ने कहा कि हिन्दू समाज अपने को असहाय महसूस कर रहा है और वो ऐसे क्षेत्रों से पलायन करने को मजबूर हो रहा है। कहीं-कहीं पर तो यदि हिन्दू ऐसे राष्ट्र विरोधी कार्यों के खिलाफ खड़ा भी होते हैं तो उन पर पुलिस द्वारा झूठे मुकदमे कर उन्हें तबाह किया जाता है और अधिकांशतः इस्लामी हमले हिंदुओं के अनुसुचित जातियो व जनजातियो पर ही हो रहे है। पूर्णिया के वायसी और मोतिहारी के ढाका प्रखंड की घटना इसका ज्वलंत उदाहरण है।

विश्व हिन्दू परिषद का मानना है कि बिहार के सीमांचल क्षेत्रों में रोहिंग्या, बंगलादेशी घुसपैठियों और PFI जैसे आतंकी संगठनों के कारण इस प्रकार की घटनाएँ घट रही है और स्थानीय जिहादी मानसिकता के मुस्लिम भी ऐसे लोगों का साथ दे रहे है तथा पुलिस प्रशासन तथा राज नेता मुस्लिम तुष्टीकरण के कारण अपना मुँह बंद किए हुए है। संगठन ने कहा कि यदि इस प्रकार की घटनाओं पर सरकार और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संज्ञान लेकर अविलंब रोक नहीं लगाया गया तो बिहार की स्थिति भी पश्चिम बंगाल और कश्मीर जैसी हो जाएगी।

विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के प्रतिनिधिमंडल ने बिहार में बढ़ रहे बम विस्फोट की घटनाओं की जाँच NIA से कराने, अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों पर हो रहे अत्याचार की जाँच के लिए राज्य स्तरीय आयोग का गठन, ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण के विरुद्ध गुजरात जैसा कठोर कानून बनाने तथा हिंदुओं के ऊपर किए गए सभी फर्जी केस वापस लेने की माँग के साथ ही महामहिम के अविलम्ब निर्देश की अपेक्षा की।

मोदी कैबिनेट से निशंक, हर्षवर्धन समेत कई की विदाई: नए मंत्रियों की लिस्ट राष्ट्रपति को भेजी गई, अनुराग ठाकुर को प्रमोशन की चर्चा

केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आज शाम छह बजे होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय द्वारा भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को उनकी सहमति के लिए नए कैबिनेट मंत्रियों की सूची भेज दी गई है।

इसके साथ ही मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल और विस्तार का काउंटडाउन भी शुरू हो गया है। जिनकी मंत्रिमंडल से छुट्टी हुई है उनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री देबश्री चौधरी प्रमुख हैं। इसके साथ ही सदानंद गौड़ा ने भी इस्तीफा दे दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कैबिनेट विस्तार से पहले मोदी सरकार के अब तक 11 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है जिसमें संजय धोत्रे, थावरचंद गहलोत और राव साहब पाटिल, रतन लाल कटारिया और बाबुल सुप्रियो ने भी इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही प्रताप सारंगी और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी इस्तीफा दे दिया है।

शपथ ग्रहण समारोह आज 7 जुलाई, 2021 को शाम 6 बजे राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में होगा। भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, सर्बानंद सोनोवाल, नारायण राणे, अनुप्रिया पटेल, अजय भट, मीनाक्षी लेखी, अनुराग ठाकुर, भूपेंद्र यादव, शोभा करंदलाजे सहित वो 24 संभावित नाम है जिनके मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है।

साथ ही टीम मोदी में जदयू नेता रामनाथ ठाकुर, चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, दिलेश्वर कामत और आरएसपी सिंह के भी शामिल होने की उम्मीद है। अभी तक के रिपोर्टों के अनुसार, मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार में 19 नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही मंत्रिपरिषद की संख्या 53 से बढ़़कर 72 हो होने की सम्भावना है। कैबिनेट फेरबदल में कुछ मंत्रियों का कद भी बढ़ाया जा सकता है। इनमें प्रमुख नाम नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी का भी चल रहा है।

कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि नए मंत्रिमंडल में 12 मंत्री अनुसूचित जाति समुदाय से, 8 मंत्री अनुसूचित जनजाति से और 27 मंत्री ओबीसी समुदाय के शामिल हो सकते हैं। कैबिनेट में 11 महिलाओं के भी होने की उम्मीद है। कयास लगाए जा रहे हैं कि मौजूदा कुछ मंत्रियों को भी हटाया जा सकता है।

भोसरी लैंड डील: NCP नेता एकनाथ खडसे के दामाद गिरीश चौधरी को ED ने किया गिरफ्तार

पुणे के भोसरी जमीन घोटाले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के नेता एकनाथ खडसे को बड़ा झटका लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके दामाद गिरीश चौधरी को गिरफ्तार किया है। मनी लॉन्ड्रिंग के सिलसिले में करीब 13 घंटे की पूछताछ के बाद एजेंसी ने चौधरी को गिरफ्तार किया।

ईडी के अधिकारियों ने कहा है कि मंगलवार (6 जुलाई 2021) सुबह चौधरी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। देर शाम तक पूछताछ चलती रही और उसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान ईडी अधिकारियों ने उन दस्तावेजों को भी परखा जो चौधरी साथ लेकर आए थे।

इसी साल जनवरी में प्रवर्तन निदेशालय ने खडसे से भी पूछताछ की थी। उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा छोड़कर एनसीपी में शामिल होने के कारण उनपर ये कार्रवाई की गई है। ईडी ने कोर्ट को बताया था कि जमीन सौदे में खडसे आरोपित नहीं हैं, लेकिन वे पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं होते हैं तो उनको गिरफ्तार किया जा सकता है।

गौरतलब है कि वर्ष 2016 तक खडसे भाजपा में थे। वे फडनवीस सरकार की कैबिनेट में मंत्री भी थे। लेकिन घोटाले का आरोप लगने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

क्या है पुणे लैंड डील

पुणे के पास एमआईडीसी में जमीन खरीदी की गई थी। इसी मामले में वर्ष 2017 में एसीबी ने खडसे, उनकी पत्नी मंदाकिनी, दामाद गिरीश चौधरी समेत जमीन के मालिक अब्बास अकानी के खिलाफ केस दर्ज किया था। मामले में हेमंत गावंडे नाम के व्यक्ति ने खडसे पर सरकारी खजाने को लूटने का आरोप लगाया था। इसी आधार पर यह केस दर्ज किया गया था। हालाँकि, साल 2018 में एसीबी ने खडसे को क्लीनचिट दे दी थी।

इस मामले में खडसे ने सफाई देते हुए कहा था कि उनकी पत्नी ने वो जमीन खरीदी थी। उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने ये भी कहा था कि जमीन सौदे की चार बार जाँच हो चुकी है और हर बार उन्होंने जाँच में सहयोग किया है।

ममता बनर्जी पर ₹5 लाख जुर्माना, नंदीग्राम की सुनवाई से HC के जस्टिस कौशिक ने खुद को किया अलग

कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस कौशिक चंदा ने पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम चुनाव परिणाम को लेकर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। पश्चिम बंगाल में हुए हालिया विधानसभा चुनाव में राज्य में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की तो जीत हुई, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम में भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। ममता बनर्जी ने ही उनके इस सुनवाई से अलग होने की माँग की थी।

हालाँकि, इसके लिए खर्च के रूप में कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी को 5 लाख रुपए जमा कराने का भी आदेश दिया है। ममता बनर्जी का आरोप है कि नंदीग्राम चुनाव परिणाम में धाँधली हुई है और फर्जीवाड़ा कर के शुभेंदु अधिकारी को विजयी घोषित किया गया। जस्टिस कौशिक चंदा ने बताया कि जब 18 जून, 2021 को ये केस उनके सामने आया था, तब उनके पीछे हटने की कोई माँग नहीं की गई थी।

लेकिन, सुनवाई के बाद तृणमूल कार्यकर्ताओं ने कई तस्वीरों-बैनरों के जरिए उन पर भाजपा का करीबी होने का आरोप लगाया। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि इन घटनाओं से लगता है कि जानबूझ और सोच-समझ कर उन्हें इस सुनवाई से हटाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि उनके निर्णय पर असर डालने की कोशिश की गई। कोर्ट ने कहा कि सोची-समझी मानसिक प्रताड़ना और बदनाम करने की कोशिश के लिए याचिकाकर्ता पर 5 लाख रुपए जमा कराने के आदेश दिए जाते हैं।

ये रकम दो सप्ताह के भीतर ‘पश्चिम बंगाल बार काउंसिल’ में जमा कराई जाएगी। इस रकम का इस्तेमाल उन वकीलों के परिजनों के लिए किया जाएगा, जिनकी कोरोना के कारण मौत हुई। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्व में किसी जज के किसी राजनीतिक दल से जुड़े होने के कारण उसे सुनवाई से हटाने की माँग करना ठीक नहीं है, कोई हर जज का कोई न कोई राजनीतिक झुकाव होता है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने नोट किया कि भारत के प्रत्येक नागरिक की तरह जज भी अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं, इसीलिए इस तरह की बातें नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हर जज का राजनीतिक जुड़ाव वाला इतिहास खँगाल कर केस से हटाने की माँग की जानी लगे तो ये ‘बेंच हंटिंग’ होगा। जज कौशिक चंदा ने कहा कि वो व्यक्तिगत रूप से इस मामले में आगे की सुनवाई करने का कोई इरादा नहीं रखते, क्योंकि वो नहीं चाहते कि नए विवाद को जन्म देकर कोई न्यायपालिका पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि ये मामला मुख्य न्यायाधीश की तरफ से बिना किसी भेदभाव के उन्हें सौंपा गया था। उन्होंने कहा कि वो इस केस से खुद को अलग कर रहे हैं, क्योंकि जो दो लोग इस मामले से जुड़े हुए हैं वो राज्य में राजनीति के शिखर पर हैं। उन्होंने कहा कि समस्याएँ पैदा करने वाले इसे मुद्दा बन कर फिर हंगामा कर सकते हैं, इसीलिए उनके बिना ही इस मामले की अन्य मामलों की तरह निर्बाध सुनवाई होनी चाहिए।

ममता बनर्जी का आरोप था कि जज बनने से पहले कौशिक चंदा भाजपा के सक्रिय सदस्य हुआ करते थे। उन्होंने कहा था कि चंदा ने भाजपा सरकार में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के रूप में सेवा दी थी। उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल को इस सम्बन्ध में पत्र लिखा था। जब इस पत्र का कोई जवाब नहीं आया तो सीएम बनर्जी ने कोर्ट में एप्लीकेशन दायर किया। 24 जून को इस पर सुनवाई शुरू हुई।

हालाँकि, ये हाल में ऐसा पहला मामला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में पहले इंदिरा बनर्जी ने खुद को बंगाल चुनाव बाद हिंसा वाले मामले से और अब नारदा स्टिंग केस से अनिरुद्ध बोस ने खुद को अलग कर लिया था। इंदिरा बनर्जी ने राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा के मामले में सुनवाई से खुद को अलग करते हुए कहा था, मुझे इस मामले को सुनने में कुछ कठिनाई हो रही है। वहीं जस्टिस अनिरुद्ध बोस बोस सर्वोच्च न्यायालय में आने से पहले कोलकाता हाईकोर्ट के जज थे।

‘बीफ खिलाने की कोशिश, धन-जमीन का लालच देकर महिलाओं का धर्मांतरण’: संसद से कुछ ही दूर चल रहा ‘जॉब जिहाद’

देश की राजधानी दिल्ली में स्थित YMCA में धर्मांतरण के आरोप लगे हैं। ये खुलासा ‘फैसला आप पर’ नामक यूट्यूब चैनल पर ऋतु गुप्ता उर्फ़ ऋतु पराशर ने किया। पिछले कई वर्षों से वो कई कॉलेजों में मास कम्युनिकेशन पढ़ाती रही हैं। इससे पहले वो इसी क्षेत्र में कॉर्पोरेट में काम करती थीं। उन्होंने बताया कि उनके साथ ‘धर्मांतरण जिहाद’ करने की कोशिश की गई। तब वो YMCA में PR (पब्लिक रिलेशन्स) हेड थीं।

उन्होंने बताया कि पहले तो उन्होंने इन चीजों का नाम ही सुना था, लेकिन तब उन्हें पता चला कि हिन्दू, खासकर महिलाओं को इसका निशाना बनाया जाता है। YMCA दिल्ली में चलने वाला एक NGO है, जो संसद भवन से कुछ ही किलोमीटर दूर है। उन्होंने बताया कि YMCA में कई हिन्दू महिलाएँ काम कर रही थीं, जो शादी के बाद ईसाई बन गई थीं। YMCA ईसाई संस्था है लेकिन वो खुद को सेक्युलर बताती है।

2016-2016 में ऋतु गुप्ता वहाँ काम करती थीं और उन्हें हर साल वार्षिक रिपोर्ट तैयार करनी होती थी। वहाँ उनसे उनका नाम पूछा गया और अगला सवाल था कि वो कौन सी चर्च में जाती हैं? ऋतु का कहना है उन्होंने जवाब दिया कि वो चर्च नहीं जाती, जिस पर अगला सवाल था कि क्या उन्हें रविवार को भी चर्च जाने का समय नहीं मिलता? ऋतु ने जवाब दिया कि वो एक हिन्दू हैं और उन्हें चर्च जाने की ज़रूरत नहीं।

ऋतु गुप्ता का कहना है इसके बाद उन्हें अजीब नजरों से देखा गया और उनके साथ अजीबोगरीब बर्ताव भी किए जाने लगे। वहाँ के महासचिव और HR डिपार्टमेंट से ऋतु ने इस व्यवहार के बारे में बताया। कुछ महिलाओं ने उन्हें बताया कि वहाँ हिन्दुओं को खास कर के दबाया जाता है, इसके लिए YMCA की नौकरी का इस्तेमाल किया जाता है। ऋतु गुप्ता ने बताया कि भाजपा/RSS का समर्थन न करने वाले हिन्दुओं को भी निशाना बनाया गया था।

ऋतु गुप्ता ने कहा कि उन्हें नरेंद्र मोदी की विचारधारा और व्यक्तित्व पसंद है और ‘मोदी लहर’ आने के बाद उन्होंने RSS के बारे में पढ़ना शुरू किया और विभिन्न चर्चाओं में उनका समर्थन करना शुरू किया। एक बार नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम के लिए उन्होंने आधे दिन की छुट्टी ली और कंपनी में भी बताया। इससे कंपनी के लोग उनसे नाराज़ हुए। बता दें कि मोदी तब गुजरात के सीएम थे। ऋतु गुप्ता ने कहा कि इसके बाद से उनके साथ और बुरा बर्ताव होने लगा।

ऋतु गुप्ता ने कहा कि वो लोग नौकरी का धौंस दिखाते थे और सुबह के ईसाई प्रेयर में बुलाते थे। वो भी वहाँ जाती थीं, तो उन्हें देख कर वो लोग खुश हो जाते थे और ऐसा सोचते थे कि ये महिला कन्वर्ट हो सकती है। कई हिन्दुओं ने वहाँ उन्हें बताया कि सोमवार के सोमवार सुबह अच्छे नाश्ते के लिए वो वहाँ आते थे। वहाँ जीसस क्राइस्ट का प्रचार किया जाता है। ऋतु ने बताया कि ये ऐसे लोग थे, जिन्हें ठीक से बाइबल तक के बारे में नहीं पता था।

ऋतु गुप्ता ने बताया “2010-11 में नई दिल्ली YMCA की एक प्रॉपर्टी पर मैं गई थी, वहाँ कुछ जर्मन गेस्ट आए हुए थे। वहाँ मैंने YMCA के कुछ लोग बीफ खा रहे थे और उन्हें भी सर्व किया, लेकिन मैं शाकाहारी थीं और मैंने बीफ खाने से इनकार कर दिया। फिर वो लोग अपने मजहब में मुझे लाने के लिए जोर देने लगे और कहा कि रुपए की कोई कमी नहीं होगी, अच्छी नौकरी दी जाएगी। जमीन तक का लालच दिया गया।”

उस समय ऋतु गुप्ता ने इस ऑफर को ठुकरा दिया। ऋतु गुप्ता के अनुसार, धर्मांतरण को लेकर सिर्फ इस्लाम की बात होती है, लेकिन YMCA में सिखों तक को ईसाई बनाया गया है। हिन्दू और सिख महिलाओं की शादी करा कर उनका धर्मांतरण करा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि वो महिलाएँ वहाँ आकर काम भी नहीं करतीं और गप्पें लड़ाती हैं, क्योंकि वो निश्चिंत रहती हैं कि उनके पति ईसाई हैं और कोई उन्हें कुछ नहीं कर सकता।

ऋतु गुप्ता ने खुलासा किया कि ‘जनहित’ के नाम पर ये NGO सिर्फ फोटोशूट करता है। उन्होंने बताया कि अगर किसी के घर में कोई पूजा होती है और प्रसाद की कोई वस्तु लेकर YMCA के अधिकारियों को दिया जाता है तो वो नहीं लेते हैं, या फिर पशुओं को खिला देते हैं। जबकि हिन्दू अन्य मजहबों के कार्यक्रमों में भी शिरकत करते हैं, खुद को आधुनिक दिखाने के लिए। ऋतु ने कहा कि कोई अपने धर्म का नहीं हुआ तो वो किसी धर्म का नहीं हो सकता क्योंकि धर्म बदलने की जरूरत ही नहीं है।

नई दिल्ली YMCA में धर्मांतरण को लेकर वहाँ की पूर्व पदाधिकारी ऋतु गुप्ता ने बताए अपने अनुभव (वीडियो साभार: ‘फैसला आप पर’)

उन्होंने बताया कि सिर्फ रुपए के लिए धर्म-परिवर्तन होता है। उन्होंने धर्मांतरण कराने वालों को ‘आतंकी’ बताते हुए कहा कि ये लोग ‘जॉब जिहाद’ करते हैं और नौकरी के बदले अपने मजहब में लाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके साथ दुर्व्यवहार और बदतमीजी भी हुई थी और शिकायत के बाद महिला आयोग ने कार्रवाई भी की थी। उन्होंने बताया कि ये लोग महिलाओं को भी निहारते थे, उन्हें तंग करते थे और सस्ते चुटकुले मारते थे।

साथ ही नई दिल्ली YMCA अधिकारियों पर उन्होंने महिलाओं को लेकर गंदी-गंदी बातें करने का आरोप लगाया। जब उन्होंने बात नहीं मानी तो उन्हें डबल पोस्ट ग्रेजुएट होने के बावजूद एक स्टोर रूम टाइप के कमरे में बिठा कर उनका पानी-चाय भी बंद कर दिया था। उन्होंने नई दिल्ली YMCA पर प्रोफेशनल होने की जगह मजहबी एजेंडा चलाने का आरोप लगाया। उनका बांग्ला साहिब गुरुद्वारा जाना भी उन्हें पसंद नहीं था और इसके बारे में वो लोग कहते थे कि ये अच्छी जगह नहीं है।

उन्होंने जानकारी दी कि हिन्दुओं के अलावा सिख, जैन और बौद्ध समुदाय के लोगों को भी निशान बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे कार्यक्रम भी होते थे, जहाँ लोग ऐसे अजीब नृत्य करते थे और ऐसी-ऐसी हरकतें करते थे जैसे उन्हें मिर्गी का दौरा पड़ा हो। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों में कम पढ़े-लिखे और गरीब लोग बुलाए जाते थे। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली YMCA में खुद पढ़े-लिखे लोग नहीं हैं, लेकिन वो खुद को एकदम एलिट दिखाते हैं।

इसी तरह हाल ही में ‘ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (AIMC)’ के अध्यक्ष जॉन ऑस्टिन (JA) जयलाल पर भी अपनी संस्था के जरिए धर्मांतरण को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे। IMA के ही एक डॉक्टर ने उनका इस्तीफा माँगा था। उन्होंने आयुर्वेद की निंदा करने वाले साक्षात्कार, व्याख्यान और सेमिनार देने में महीनों बिताए। उन्होंने कोरोना से ठीक होने का श्रेय भी जीसस को दिया। कोरोना काल में अस्पतालों का इस्तेमाल ईसाई धर्मांतरण के लिए करने की बात की।

हरियाणा का हकीमुद्दीन पूरा भारत घूमता, गाय चुराकर बुचड़खाने में बेच देता: तमिलनाडु में पकड़ा गया

तमिलनाडु की वेल्लोर पुलिस ने सोमवार (5 जून 2021) को हरियाणा के रहने वाले 43 वर्षीय अहमुद्दीन हकीमुद्दीन को गिरफ्तार किया। आरोपित गायों की चोरी कर उन्हें बूचड़खानों में बेच देता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेरनामबट पुलिस ने आंध्र प्रदेश के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली एक लॉरी को संदेह का आधार पर रोका। तलाशी लेने पर उसके भीतर एक गाय मिली।

हिंदी भाषी स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस हकीमुद्दीन को लेकर थाने आई। पूछताछ के दौरान पता चला कि बेंगलुरू में उसने अपनी दास्त शकीला से मिनी लॉरी लेकर उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगाया और गायों की चोरी के लिए ​तमिलनाडु आ गया।

पूछताछ के दौरान आरोपित ने स्वीकार किया कि वह गायें चुराता था। वेल्लोर क्षेत्र से वह अब तक कम से कम 20 गायों को चुराकर बेचा चुका है। इसमें से एक गाय मुस्लिम व्यक्ति रज्जाक की थी। उसने शिकायत की थी कि उसकी गाय चरने गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। इसके अलावा गुडियट्टम से भी कम से कम 10 किसानों ने पुलिस में गायों के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई है।

पूछताछ के दौरान हकीमुद्दीन ने कबूल किया है कि वह हरियाणा से दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों में जाकर मवेशियों की चोरी करता था। इसके बाद उन्हें (बूचड़खाने) स्लॉटर हाउस में बेच देता था। हरियाणा वापस लौटने से पहले वह दक्षिण भारत के कुछ जगहों पर रुकने वाला था।

इससे पहले पिछले महीने (जून, 2021) कर्नाटक के उडुपी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसमें उडुपी जिले के नेजर गाँव में इब्राहिम ने गंगाधर नाम के हिंदू पड़ोसी की गाय को चुराकर उसकी हत्या कर दी थी। गंगाधर अपनी गाय को चरने के लिए छोड़ गया था। इसी दौरान इब्राहिम गाय को चुराकर अपने घर ले गया और उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने बीफ बाजार में बेच दिया।

पति वाजपेयी सरकार में थे मंत्री, रात के वक्त 3 लोग घर में घुसे; तकिए से मुँह दबा कर दी हत्या

पूर्व केंद्रीय मंत्री पीआर कुमारमंगलम की पत्नी किट्टी कुमारमंगलम की दिल्ली के वसंत विहार इलाके में स्थित उनके घर में हत्या कर दी गई। वारदात मंगलवार (6 जून 2021) की रात को घटी। शुरुआती जाँच में पता चला है कि बदमाश लूटपाट के इरादे से उनके घर के अंदर घुसे थे। पुलिस ने कहा है कि तीन बदमाश उनके घर के अंदर घुसे और उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री की पत्नी किट्टी कुमारमंगलम (67) का मुँह तकिए से दबाकर उनकी हत्या कर दी।

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, किट्टी कुमारमंगलम के घर में काम करने वाली मेड ने बताया है कि रात 8.30 बजे धोबी राजू आया था और उसके साथ 2 और लोग थे। उन्होंने किट्टी कुमारमंगलम को बाँध दिया और उनकी हत्या कर दी। पुलिस ने धोबी को हिरासत में ले लिया है।

आरोपितों ने मेड को भी एक कमरे में बंद कर रखा था। हत्या और लूट की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपित जब चले गए तो नौकरानी ने पुलिस को रात 11 बजे इसकी सूचना दी। रिपोर्ट के मुताबिक, किट्टी कुमारमंगलम सर्वोच्च न्यायालय की वकील थीं।

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के डीसीपी ने बताया, “दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री पी रंगराजन कुमारमंगलम की पत्नी किट्टी कुमारमंगलम की कल रात (मंगलवार, 6 जून 2021) वसंत विहार स्थित उनके आवास पर हत्या कर दी गई। एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है और दो अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री पीआर कुमारमंगलम पहली बार 1984 में लोक सभा के लिए चुने गए थे। वो नरसिम्हा राव की सरकार में मंत्री थे। बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। इसके बाद वे वाजपेयी सरकार के दैरान भी केंद्रीय मंत्री रहे।

आरिफ हाशमी होटल में लड़कियों को बुलाता, मार-मार कर निकाल देता था खून: लव जिहादी की अखिलेश-संजय सिंह संग तस्वीरें वायरल

आगरा में एक पूर्व IAS की बेटी इस्लामी धर्मांतरण का शिकार हो गईं। इस मामले के सामने आने के बाद FIR दर्ज हुई और आरिफ हाशमी नाम का आरोपित जेल भेजा गया। आरिफ हाश्मी ने आदित्य बन कर छद्म हिन्दू नाम का इस्तेमाल किया, ताकि वो पीड़िता को अपने जाल में फँसा सके। पीड़िता होटल भी चलाती हैं। आरिफ हाशमी के जेल में जाने के बावजूद वो डर के साए में जी रही हैं, क्योंकि उनका मानना है कि वो एक खतरनाक व्यक्ति है।

सोशल मीडिया पर आरिफ की कुछ तस्वीरें भी वायरल हुई हैं, जिसमें वो समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और AAP नेता सजाय सिंह समेत अन्य बड़े नेताओं के साथ दिख रहा है। आरिफ हाशमी न सिर्फ पीड़िता का शरीरिक, मानसिक व आर्थिक शोषण करता था, बल्कि वो उनके होटल के फंड्स भी हड़प लिया करता था। साथ ही वो मौत की धमकी भी देता था। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने बहुत हिम्मत जुटा कर आगरा सदर थाने में FIR दर्ज कराई।

पीड़िता ने सोमवार (जुलाई 5, 2021) को कोर्ट में कलमबंद बयान दर्ज कराए। सदर इंस्पेक्टर अजय कौशल ने जानकारी दी है कि पुलिस ने पीड़िता के बयान का अवलोकन कर लिया है। होटल का संचालन करने वाली पीड़िता ने आरिफ हाशमी को बेनकाब करने के लिए कमरे में एक कैमरा छिपाया था। जब वो आगरा से बाहर जाती थीं तो आरिफ अय्याशी के लिए पेशेवर युवतियों को बुलाया करता था।

इस कैमरे में न सिर्फ उनकी इस अय्याशी कैद हो गई, बल्कि पीड़िता के साथ वो जो दुर्व्यवहार कर रहा था वो भी कैद हो गया। पुलिस का कहना है कि पीड़िता ने कुछ फोटोग्राफ्स जमा किए हैं, जो डराने वाले हैं। उनकी बुरी तरह पिटाई की जाती थी। उनका चेहरा सूज गया था। एक फोटो में उनके होठों से खून बह रहा है। अब सबूतों के मिलने के बाद उस पर चौतरफा शिकंजा कसा जा रहा है। आरिफ हाशमी लखनऊ के राजाजी पुरम का निवासी है।

उसने पूर्व IAS अधिकारी की विवाहित बेटी से 2010 में राजधानी लखनऊ में ही स्थित अलीगंज के आर्य समाज मंदिर में शादी की थी। यहाँ दस्तावेज में आरिफ ने अपना नाम आदित्य आर्य लिखवाया था। धोखाधड़ी का असली सबूत पुलिस यहीं से जुटाएगी। आरिफ ने अजमेर ले जाकर पीड़िता का इस्लामी धर्मांतरण करवाया था। निकाहनामा मिलते ही इस मामले में यूपी के नए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता आसान हो जाएगा।

आरोपित के मोबाइल फोन से भी पुलिस को कुछ फर्जी पत्र और दस्तावेज मिले हैं। इसका इस्तेमाल वो अधिकारियों पर रौब जमाने के लिए करता था और अपनी पहुँच दिखाता था। लोगों को फँसाने के लिए उसने ये सब फोन में सेव कर रखा था। पुलिस होटल के कर्मचारियों का भी बयान दर्ज कर रही है, जहाँ वो रहता था। पीड़िता को टॉर्चर किए जाने के सम्बन्ध में गवाहों के बयान दर्ज किए जाएँगे। आरोपित रसूख वाला है, इसीलिए पीड़िता डरी हुई हैं।

पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि हाशमी ने एक बार उनकी टीका लगाते हुए फोटो खिंचवा ली और बाद में इसी फोटो के दम पर वह पीड़िता को ब्लैकमेल करने लगा। पीड़िता के अनुसार, इस फोटो में ऐसा प्रतीत होता है जैसे हाशमी उसकी माँग भर रहा है। इसके बाद हाशमी ने पीड़िता पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया, उसके परिवार को बदनाम करने का भय दिखाकर पीड़िता का यौन उत्पीड़न किया और अप्राकृतिक संबंध भी बनाए।

पादरी ने 10 साल की बच्ची का किया यौन शोषण, फिर ₹50 का नोट पकड़ा चुप रहने को कहा

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा स्थित सर्पवरम में पादरी द्वारा 10 साल की नाबालिग बच्ची का यौन शोषण करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने 46 वर्षीय पादरी अलावला सुधाकर को गिरफ्तार कर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित काकीनाडा क्षेत्र के एक गाँव में पादरी है।

रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि आरोपित पादरी ने 22 जून 2021 को यौन शोषण करने के साथ ही पीड़िता से मारपीट भी की थी। बच्ची की माँ को जैसे ही इस घटना के बारे में पता चला तो उसने सर्पवरम थाने में पादरी के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। पादरी के खिलाफ POCSO एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया। आरोपित को कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

सर्पवरम सर्किल के इंस्पेक्टर बी राजशेखर ने कहा, “काकीनाडा के रहने वाले पादरी की पहचान अलवला सुधाकर के तौर पर हुई है। 22 जून 2021 को वह शहर में हुए एक समारोह में वह शामिल हुआ था। इसी दौरान आरोपित ने कथित तौर पर लड़की को पास की एक झोपड़ी में ले जाकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया।”

एक स्थानीय समाचार की रिपोर्ट में बताया गया है कि 22 जून को आरोपित पादरी एक समारोह में शामिल हुआ था। वहीं पर 10 वर्षीय बच्ची भी आई हुई थी। आरोपित सुधाकर बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ चर्च से दूर ले गया और दुर्व्यवहार किया।

मदद के लिए गुहार लगाने पर आरोपित ने बच्ची को 50 रुपए का का नोट पकड़ाकर इसके बारे में किसी से कुछ नहीं बताने को कहा। हालाँकि, ग्रामीणों और परिजनों के बार-बार पूछने पर पीड़िता ने अपने साथ हुई घटना के बारे में सबकुछ बयाँ कर दिया। इसके बाद पीड़िता की माँ ने आरोपित पादरी के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। जिसके आधार पर पादरी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पादरियों द्वारा नाबालिगों का यौन शोषण लंबे समय से एक ज्वलंत मुद्दा रहा है, जिसे चर्च प्रशासन ने हमेशा से छुपाने की कोशिश की है। हाल ही में पोलैंड स्थित एक कैथोलिक चर्च के पादरियों पर नाबालिगों के साथ हुए यौन अपराधों के मामलों को दबाने का आरोप लगा था। एक रिपोर्ट के मुताबिक 1958 से वर्ष 2020 तक 292 पादरियों ने 300 बच्चों का यौन शोषण किया था। मामले में बवाल मचने के बाद कैथोलिक चर्च ने इस बात को स्वीकार किया था कि उसे पिछले तीन वर्षों में 368 लड़कों और लड़कियों के यौन शोषण की शिकायतें मिली थीं। इस मामले को दबाए जाने की बात को मानते हुए पोलिश चर्च के आर्कबिशप वोजशिक पोलाक ने पीड़ितों से माफी माँगी थी।