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ISIS आतंकी को दम भर कूट कर तिहाड़ जेल में ‘जय श्री राम’ बुलवाया: वकील कौसर खान ने आरोप लगा दायर की याचिका

देश भर में आत्मघाती हमलों और सीरियल ब्लास्ट की योजना बनाने के आरोप में गिरफ्तार आईएसआईएस के एक कथित आतंकी ने बुधवार (9 जून 2021) को अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसे जेल के कैदियों ने पीटा और ‘जय श्री राम’ जैसे धार्मिक नारे लगवाए।

आरोपित राशिद जफर को देश में सीरियल ब्लास्ट और राजनेताओं को निशाना बनाने की साजिश रचने के मामले में 2018 में गिरफ्तार किया गया था। इसकी योजना सरकारी संस्थानों को भी निशाना बनाने की थी। आरोपित के वकील एमएस खान ने याचिका में दावा किया है कि उसके मुवक्किल ने तिहाड़ जेल से ही अपने पिता को फोन कर कैदियों द्वारा पीटने और जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने की घटना के बारे में बताया था।

वकील कौसर खान ने यह याचिका दायर की, इसमें उन्होंने अदालत से इस मामले की जाँच के लिए जेल सुपरिटेन्डेंट को निर्देश देने की माँग की है।

एनआईए ने 2018 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल यूनिट, यूपी एटीएस के साथ मिलकर दिल्ली के जाफराबाद, सीलमपुर और उत्तर प्रदेश के 11 स्थानों पर सर्च ऑपरेशन के बाद 9 लोगों को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के मामले में गिरफ्तार किया था। ये सभी गिरफ्तारियाँ 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह से एक महीने पहले तलाशी अभियान के दौरान हुई थीं।

NIA ने कई विस्फोटक जब्त किए थे

जाँच एजेंसी ने इस सर्च अभियान के दौरान स्थानीय स्तर पर बनाया गया एक रॉकेट लॉन्चर, सुसाइड जैकेट के लिए सामान और टाइमर के लिए इस्तेमाल की जाने वाली 112 अलार्म घड़ियों को बरामद किया गया था। इसके अलावा 25 किलो पोटैशियम नाइट्रेट, अमोनियम नाइट्रेट और सल्फर जैसे विस्फोटक पदार्थों को जब्त किया गया था।

आतंकियों ने रिमोट कंट्रोल इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज को असेंबल करने के लिए रिमोट कंट्रोल कार और वायरलेस डोरबेल भी खरीदी थी। जाँच एजेंसी को तलाशी के दौरान स्टील के कंटेनर, बिजली के तार, 91 मोबाइल फोन, 134 सिम कार्ड, 3 लैपटॉप, चाकू, तलवार, आईएसआईएस से जुड़े सामान भी मिले थे।

एनआईए ने इस अभियान की शुरुआत में ‘हरकत उल हर्ब ए इस्लाम’ आतंकी संगठन के 16 लोगों को हिरासत में लिया था, जो इस्लाम के लिए युद्ध करते थे। एजेंसी ने कहा था कि हिरासत में लिए गए 16 लोगों में से 10 को बाद में गिरफ्तार किया गया, जिसमें से पाँच यूपी के अमरोहा से और पाँच उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर और जाफराबाद इलाकों से गिरफ्तार किए गए थे।

झारखंड: ‘मदर टेरेसा वेलफेयर ट्रस्ट’ के शेल्टर होम में कई बच्चियों का यौन शोषण, डायरेक्टर की पत्नी है CWC की अध्यक्ष

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम स्थित एक शेल्टर होम में दो बच्चियों के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था, जिसके बाद अब पुलिस ने आशंका जताई है कि इसमें रहने वाली अन्य बच्चियाँ भी इसका शिकार रही हो सकती हैं। ‘मदर टेरेसा वेलफेयर ट्रस्ट (MTWT)’ द्वारा संचालित इस ट्रस्ट में आए मामले की जाँच के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए एसपी डॉक्टर एम तमिल वणन ने बताया कि पिछले 4 वर्षों से अन्य नाबालिग लड़कियाँ भी यौन उत्पीड़न का शिकार हो रही थीं।

पुलिस ने अब तक जाँच में मिले तथ्यों के बाद इसका दायरा बढ़ा दिया है। मंगलवार (जून 8, 2021) को बताया कि रेस्क्यू की गई दोनों लड़कियों की शिकायत के बाद ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम (POCSO)’ के तहत शेल्टर होम के निदेशक हरपाल सिंह थापर के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। साथ ही उनकी पत्नी पुष्पा रानी तिर्की को भी आरोपित बनाया गया है।

बता दें कि पुष्पा ‘ईस्ट सिंहभूम डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (CWC)’ की अध्यक्ष भी हैं। साथ ही वार्डन गीता सिंह, उनके बेटे आदित्य सिंह और साथ ही टोनी सिंह नाम के एक कर्मचारी को भी आरोपित बनाया गया है। सारे के सारे आरोपित फरार हैं। एसपी ने बताया कि रेस्क्यू की गई लड़कियों की उम्र 16 और 17 साल है, जिन्होंने वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से अपना बयान दर्ज कराया है और साथ ही स्पेशल POCSO कोर्ट में अपने इन बयानों को दोहराया भी है।

बच्चियों ने बताया कि शेल्टर होम में उनकी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना हुई है। साथ ही उन्हें आरोपितों की सेक्सुअल डिमांड्स पूरी करने के लिए मजबूर किया जाता था। पुलिस ने बताया कि इस प्रकरण के जो तथ्य सामने आए हैं, वो डरावने हैं। वार्डन की 19 साल की बेटी के साथ भी थापर के यौन सम्बन्ध थे और अन्य आरोपितों के साथ मिल कर वो लगातार उसका यौन शोषण करने में लगा हुआ था। नाबालिगों से काम कराए जाने के आरोप भी लगे हैं।

लड़कियों ने बताया कि पिछले 4 साल में हुई घटनाओं को लेकर उन्होंने CWC की मुखिया तिर्की से भी कई बार शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस ने बताया कि इसमें अन्य आरोपितों की भागीदारी को लेकर भी जाँच की जा रही है। शेल्टर होम में पिछले महीने में एक साढ़े 3 साल की लड़की की ब्रेन ट्यूमर के कारण मौत हुई है। इसकी भी जाँच की जा रही है। वो बच्ची एक रेप पीड़िता की बेटी थी, जो उसे अपने साथ नहीं रखना चाहती थी।

थापर, उनकी पत्नी पुष्पा या फिर ‘मदर टेरेसा वेलफेयर सोसाइटी’ ने बच्ची की मौत को लेकर पुलिस-प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी। नियमानुसार उन्हें ऐसा करना चाहिए था। पुलिस दोनों रेस्क्यूड लड़कियों की मेडिकल रिपोर्ट्स का इंतजार कर रही है, जिससे रेप होने या न होने की पुष्टि होगी। MTWT झारखंड सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त NGO है, जिसका ‘मदर टेरेसा मिशनरीज ऑफ चैरिटी‘ से कोई सम्बन्ध नहीं है।

ये शेल्टर होम खरंगाझर स्थित शमशेर टॉवर में स्थित है। इसके दूसरे फ्लोर पर स्थित दो कमरों में 22 लड़कियों को रखा गया है। वार्डन भी उसी फ्लोर पर अपने एक बेटे और एक बेटी के साथ रहती है। ग्राउंड फ्लोर पर 22 लड़कों को रखा गया है। पहले फ्लोर पर थापर और तिर्की पति-पत्नी रहते हैं। लड़कियों की देखभाल फ़िलहाल सरायकेला-खरसावाँ CWC द्वारा किया जा रहा है। सोसाइटी और तिर्की के खिलाफ कार्रवाई के लिए DM से सिफारिश की गई है।

थापर दम्पति पर ये भी आरोप है कि वो शेल्टर होम और बच्चियों के देखरेख के लिए मिले सरकारी फंड्स को अपने बैंक खातों में ट्रांसफर किया करते थे। लोग भोजन और कपड़ों के लिए जो रुपए दान में देते थे, उन्हें भी वो हजम कर जाते थे। पुलिस ने बताया कि पाँचों आरोपितों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है और जल्द गिरफ़्तारी होगी। शमशेर टॉवर और इसके आसपास के निवासियों में इस घटना को लेकर आक्रोश है।

भाजपा, आजसू और सत्ताधारी JMM के स्थानीय नेताओं ने भी इन करतूतों का विरोध किया है। 40 स्थानीय निवासियों ने प्रशासन को कार्रवाई के लिए ज्ञापन भी सौंपा है। आरोप है कि टेल्को थाना के प्रभारी ने हमेशा ऐसी शिकायतों को नज़रअंदाज़ किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि थापर-तिर्की दम्पति की करतूतों से परेशान कई लोग कहीं और रहने चले गए और पुलिस से बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से उन्हें परेशानी हो रही है।

लोगों ने बताया, “अपार्टमेंट की छठ मंजिला लिफ्ट बंद कर दी गई है। पार्किंग एरिया पर दबंगई से कब्ज़ा कर के उसे NGO कार्यालय में तब्दील कर दिया गया है। अपार्टमेंट में 4 फ्लैटों के मालिक थापर-तिर्की हैं, लेकिन उन्होंने अब तक कोई मेंटेनेंस शुल्क नहीं दिया है। MTWT ने पूरे परिसर में कूड़े-कचरे का अंबार लगा रखा है। ट्रस्ट के बच्चे झारखंड के मूलनिवासी हैं, जिन्हें भोजन तक नहीं दिया जाता। वो दूसरे फ्लैटों से छिप कर भोजन मँगा कर खाते हैं।”

‘युद्ध, विभीषण, रणनीति, कॉन्ग्रेस को तोड़ना…’ – BJP सत्ता में क्यों है, देखें 1996 का नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू

कॉन्ग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने 09 जून 2021 को भाजपा जॉइन कर ली। इसके बाद से नेताओं की राजनैतिक पार्टियाँ बदलने की प्रवृत्ति पर एक बार फिर से बहस छिड़ गई। जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना कार्यकाल शुरू किया, तब से ही कॉन्ग्रेस समेत कई अन्य पार्टियों के नेता भाजपा में आ चुके हैं।

भाजपा में आने वाले नेताओं के कई मामलों में ऐसा भी देखने को मिला है कि ये नेता पहले तो निष्क्रिय थे लेकिन जब उन्होंने अपनी पार्टी छोड़ी तो उनकी वास्तविक प्रतिभा लोगों के सामने आ गई। ऐसा ही एक उदाहरण हेमंत बिस्वा सरमा हैं, जिन्होंने 2015 में कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन की और आज वो असम के मुख्यमंत्री हैं। हालाँकि भारतीय राजनीति का यह कोई नया घटनाक्रम नहीं है। कई नेता अक्सर अपनी पार्टी बदलते रहते हैं या नई पार्टी बनाते हैं।

जितिन प्रसाद के भाजपा में आने के बाद से 1996 का नरेंद्र मोदी (तब न तो CM थे, ना ही PM) के इंटरव्यू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। यह वीडियो क्लिप 1996 के लोकसभा चुनाव के दौरान का इंटरव्यू का है। इस इंटरव्यू में पत्रकार ने नारायण राणे और नरेश अग्रवाल के भाजपा में आने पर नरेंद्र मोदी के विचार जानने का प्रयास किया था।

पीएम मोदी, जो कि उस समय भाजपा के एक नेता थे, ने कहा था कि भाजपा युद्ध लड़ रही है और ऐसे युद्धों को जीतने के लिए विभीषणों की सहायता लेनी पड़ती है। नरेंद्र मोदी ने कहा था, “शुरुआत में हमारे कार्यकर्ता रुष्ट होते थे जब कोई दूसरी पार्टी का नेता भाजपा में आता था लेकिन हमारे कार्यकर्ताओं ने समझा कि हमें एक लंबा युद्ध लड़ना है। इसलिए कभी-कभी विभीषणों की सहायता लेनी पड़ती है और हम लेते हैं।“

उन्होंने कहा था कि यह एक युद्ध की तरह है और हम भारत के नागरिकों को यह संदेश देना चाहते थे कि कॉन्ग्रेस टूट रही है और पराजित हो रही है। उन्होंने कहा, “हम यह बताना चाहते थे कि नेता कॉन्ग्रेस छोड़कर जा रहे हैं और हम इसमें कामयाब भी रहे। युद्ध में हमें कुछ निर्णय लेने पड़ते हैं और ये उनमें से यह एक है। यह हमारी रणनीति का एक हिस्सा है।“

पूरा इंटरव्यू यहाँ

इस इंटरव्यू के 25 साल बाद भी इस रणनीति ने भाजपा की बहुत सहायता की। भाजपा लगातार 2 लोकसभा चुनावों में न केवल सबसे बड़ी पार्टी बल्कि बहुमत हासिल करने में भी कामयाब रही। इस इंटरव्यू के 5 साल बाद नरेन्द्र मोदी गुजरात के 14वें मुख्यमंत्री बने और 2014 में देश के प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव भी जीता।

वो मंदिर जहाँ तुलसीदास को हनुमान जी ने दिए थे दर्शन, 2006 में जहाँ किया गया था आतंकी हमला: संकट मोचन मंदिर

धर्म, ज्ञान और मोक्ष की नगरी वाराणसी में कई ऐसे धर्म स्थल हैं जो सिद्ध हैं, चमत्कारिक हैं और भक्तों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। अपने घाटों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध वाराणसी अपने मंदिरों के लिए भी जाना जाता है। काशी विश्वनाथ, दुर्गाकुंड, अन्नपूर्णा मंदिर, विशालाक्षी मंदिर और तुलसी मानस मंदिर समेत कई ऐसे मंदिर हैं, जो सनातन हिन्दू धर्म का केंद्र हैं। इनमें से ही एक मंदिर है हनुमान जी को समर्पित संकट मोचन मंदिर। इसी मंदिर में हनुमान जी ने रामचरितमानस की रचना करने वाले तुलसीदास जी को दर्शन दिए थे। 2006 में इस मंदिर में आतंकी हमला भी हुआ था लेकिन इस्लामी कट्टरपंथी, हिंदुओं को अपने आराध्य के दर्शन करने से नहीं रोक पाए।

गोस्वामी तुलसीदास ने की थी मंदिर की स्थापना

सन् 1631 से 1680 के बीच रामभक्त गोस्वामी तुलसीदास ने ही इस मंदिर का निर्माण करवाया। मान्यता है कि अपने काशी प्रवास के दौरान तुलसीदास गंगा स्नान के पश्चात एक सूखे पेड़ पर एक लोटा जल डाल दिया करते थे। ऐसा करते हुए उन्हें कई दिन हो गए। इसी क्रम में एक दिन जब तुलसीदास ने उस पेड़ पर जल डाला तब उसमें से एक प्रेत (कई मान्यताओं में यक्ष) प्रकट हुआ। उसने कहा, “क्या आप भगवान राम से मिलना चाहेंगे? मैं आपको उनसे मिला सकता हूँ।“ इतना सुनते ही तुलसीदास प्रसन्न हो गए। तब उस प्रेत ने कहा कि राम से मिलने से पहले उनके अनन्य भक्त हनुमान से मिलना पड़ेगा। इसके बाद उस प्रेत ने तुलसीदास से बताया कि गंगा घाट के किनारे राम मंदिर के पास एक कुष्ठ रोगी बैठा होगा, वो हनुमान जी ही हैं।

प्रेत के बताए अनुसार जब तुलसीदास जी उस रोगी के पास पहुँचे तब वह आगे बढ़ गया। इस पर तुलसीदास ने उस रोगी के पैर पकड़ लिए और कहा, “मुझे पता है कि आप ही हनुमान हैं, कृपया मुझे दर्शन दें।“ जिस क्षेत्र को आज अस्सी के नाम से जाना जाता है, वहाँ पहले सघन वन था और उसी स्थान पर अंततः हनुमान जी ने तुलसीदास जी को दर्शन दिए। तुलसीदास के अनुरोध पर ही हनुमान जी उस क्षेत्र में मिट्टी का रूप धारण कर स्थापित हो गए। इसके बाद ही तुलसीदास ने संकट मोचन हनुमान मंदिर का निर्माण कराया।

यह भी माना जाता है कि जब तुलसीदास वाराणसी में रहकर रामचरितमानस की रचना कर रहे थे तब उनके प्रेरणा स्रोत हनुमान जी ही थे। आज वर्तमान संकट मोचन मंदिर के परिसर में जो पीपल का विशाल वृक्ष है, उसी के नीचे बैठकर तुलसीदास ने रामचरितमानस का एक बड़ा हिस्सा लिखा है। वर्तमान दृश्य मंदिर की स्थापना पंडित मदन मोहन मालवीय ने सन् 1900 में कराई, जिन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना भी की।

संकट मोचन मंदिर में विराजित हनुमान जी की मूर्ति अत्यंत मनमोहक है। मूर्ति पर सिंदूर का लेप किया गया है। इसके अलावा मंदिर में भगवान राम की मूर्ति भी स्थापित की गई है, जो हनुमान जी की मूर्ति के ठीक सामने है। परिसर में एक अत्यंत प्राचीन पीपल का वृक्ष और एक गहरा कुआँ भी है, जिसे जाल लगाकर ढक दिया गया है। संकट मोचन मंदिर को वानर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि मंदिर के आसपास फैले गहने जंगल में बहुतायत मात्रा में बंदर हैं।

2006 में हुआ था संकट मोचन मंदिर में बम विस्फोट

7 मार्च 2006 को वाराणसी में सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे। इस दिन रेलवे कैंट, दशाश्वमेघ घाट और संकट मोचन हनुमान मंदिर में इस्लामी आतंकियों ने बम ब्लास्ट किया था। संकट मोचन मंदिर में जब यह विस्फोट हुआ, तब मंदिर में हनुमान जी की आरती चल रही थी। इस हमले में मंदिर में 7 लोगों की जान गई थी। हालाँकि यह बम ब्लास्ट भी भगवान राम और हनुमान भक्तों को मंदिर आने से नहीं रोक पाया और मंदिर में पुनः उसी तरह श्रद्धालु आने लगे जैसे विस्फोट के पहले आते थे।

कैसे पहुँचे?

वाराणसी पहुँचना बहुत ही आसान है। वाराणसी में ही एक हवाईअड्डा है। साथ ही वाराणसी से 120 किमी दूरी पर स्थित प्रयागराज में भी हवाईअड्डा है जो चेन्नई, बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों से जुड़ा हुआ है। वाराणसी देश के विभिन्न हिस्सों से रेल मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। सैकड़ों की संख्या में ट्रेन वाराणसी पहुँचती हैं। सड़क मार्ग से भी वाराणसी पहुँचना आसान है। जीटी रोड पर स्थित वाराणसी देश के कई बड़े शहरों से सीधे सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत से आने वाले लोग प्रयागराज और मिर्जापुर होते हुए वाराणसी पहुँच सकते हैं।  

बीफ को जब बताया जा रहा ‘संवैधानिक अधिकार’, तब हिंदू मंदिरों की जमीन की लड़ाई कब तक और कितनी महत्वपूर्ण?

लक्षद्वीप में विकास को अवरुद्ध करने के लिए उठा कट्टरपंथियो का स्वर अब अपना असली रंग दिखाने लगा है। अब तक जहाँ केंद्र सरकार पर द्वीप के लोगों के विरुद्ध काम करने के इल्जाम लगाए जा रहे थे, वहीं मोहम्मद फैजल नाम के सांसद ने बीफ को बैन होने से रोकने के लिए उसे खाना अपना संवैधानिक अधिकार बता दिया है।

दिलचस्प बात ये है कि एक ओर लक्षद्वीप का ये समुदाय विशेष है जो विकास की राह में रोड़ा बनने को, हिंदुओं की भावना को ठेस पहुँचाने को, अपना अधिकार बता रहा है और दूसरी ओर तमिलनाडु के वह हिंदू मंदिर हैं, जिनकी जमीन को 36 साल में 46000 एकड़ गायब कर दिया गया और आज उन्हें हक पाने के लिए अभियान चलाने पड़ रहे हैं। हाईकोर्ट में अपनी बात रखनी पड़ रही है।

आज लॉस्ट टेम्पल्स के मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए मंदिरों की गायब जमीन पर तमिलनाडु सरकार से स्पष्टीकरण माँगा है। इसके अलावा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु राज्य सरकार को 75 निर्देशों का एक सेट जारी किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य में प्राचीन मंदिरों और प्राचीन स्मारकों का रखरखाव उचित ढंग से हो।

224 पन्नों के फैसले में जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस पीडी ऑदिकेसवालु की खंडपीठ ने कहा, “…हमारी मूल्यवान विरासत किसी प्राकृतिक आपदा या विपदा के कारण नहीं बल्कि जीर्णोद्धार की आड़ में लापरवाह प्रशासन और रखरखाव के कारण बिगड़ रहा है।”

हालातों को देखते हुए व राज्य में प्रशासन की आलोचना करते हुए न्यायालय ने इस बात को गौर करवाया कि कैसे लापरवाहियों के चलते 2000 साल पहले बने मंदिर खंडहर हो गए हैं। कोर्ट ने जोर दिया है कि मंदिर की भूमि हमेशा मंदिरों के पास ही रहनी चाहिए और राज्य सरकार या HR&CE (हिन्दू रिलीजियस एण्ड चैरिटेबल एंडोवमेंट विभाग) विभाग को दानदाताओं की इच्छा के विपरीत ऐसी भूमि को अलग नहीं करना चाहिए या देना नहीं चाहिए।

न्यायालय ने यह भी कहा कि अधिग्रहण के लिए मंदिर की भूमि पर ‘सार्वजनिक उद्देश्य सिद्धांत’ को लागू नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि समुदाय के हित आम तौर पर ऐसी भूमि के सा‌थ शामिल होते हैं। अदालत ने अधिकारियों को मंदिर की जमीन पर लीजहोल्ड और अतिक्रमण का जायजा लेने और बकाया किराया वसूली, बकाएदारों और अतिक्रमणकारियों को बेदखल करने के लिए तत्काल कदम उठाने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ये सारे काम HR&CEअधिनियम और उसके तहत नियमों के प्रावधानों के अनुसार होने चाहिए।

आज ऐसे वक्त में जब लक्षद्वीप में बैठा कोई सांसद बीफ खाने को अपना संवैधानिक अधिकार बता देता है, बहुल आबादी के समर्थन के बूते वो विकास कार्यों से किनारा कर ले रहा है… उस समय हिंदुओं के लिए मद्रास हाईकोर्ट द्वारा कही गई ये बात- ”मंदिरों की जमीन का उपयोग सार्वजनिक कामों के लिए न किया जाए” बेहद अहम है और इसे हर सरकार और अधिकारियों द्वारा याद रखा जाना चाहिए, जो हिंदू मंदिरों को प्रशासन की जंजीर में जकड़ने की पैरोकारी करते हैं।

कुछ दिन पहले तमिलनाडु के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने की माँग सोशल मीडिया पर जोर पकड़ी थी। हिंदुओं में इस बात को लेकर जागरुकता बढ़ी थी कि कैसे सरकार उनके मंदिरों को अपने नियंत्रण में लेकर खिलवाड़ कर रही है। 

आज तमिलनाडु और लक्षद्वीप दोनों की स्थिति मात्र क्षेत्रीय नहीं है। यह राष्ट्रव्यापी समस्या है, जिसका अवलोकन हर हिंदू समाज के व्यक्ति को करना चाहिए कि आखिर कैसे उनके मंदिरों पर प्रशासन का हक हो गया और कैसे वहाँ दिए गए दान पर मंदिर से पहले सरकार का हक हो गया।

सोचिए कि कैसे लक्षद्वीप में केंद्र में बैठी सरकार विकास की मंशा से भी कानून लाने पर विरोध झेल रही है… और दूसरी ओर तमिलनाडु है, जहाँ मंदिर की भूमि मंदिर को वापस दिलाने के लिए भी कोर्ट का दरवाजा पीटा जा रहा है।

गीता प्रेस को आर्थिक समस्या, बंद होने के कगार पर? जर्मन मशीनों को देख गोरखपुर सांसद ने बताई वर्तमान स्थिति

गोरखपुर स्थित गीता प्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार (08 जून) को गोरखपुर सांसद रविकिशन को गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित सचित्र पुस्तक की पहली प्रति भेंट की। गीता प्रेस के व्यवस्थापक ललमनी तिवारी ने कहा कि आधुनिक मशीनों के द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री सहित देश के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भेंट की जा रही है।

इस खबर के माध्यम से हम आपको बता दें कि कई बार हमने सोशल मीडिया में गीता प्रेस के बंद होने या उसके संचालन में आर्थिक समस्या आने की खबरें देखीं और सुनीं। हालाँकि हर बार गीता प्रेस ने ही इन खबरों को निराधार बताया और कहा कि गीता प्रेस पर कोई संकट नहीं है। गीता प्रेस ने कई बार यह स्पष्टीकरण दिया कि धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन का कार्य पूरे सामर्थ्य के साथ चल रहा है। गीता प्रेस ने यह भी बताया कि प्रेस न तो सरकारी और न ही गैर-सरकारी सहायता स्वीकार करती है।

ऐसी ही कुछ अफवाहों और बेतुकी चर्चाओं के चलते गोरखपुर के सांसद रविकिशन ने गीता प्रेस का दौरा किया। टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार रोहन दुआ ने रविकिशन का वीडियो ट्विटर पर शेयर किया, जहाँ वो गीता प्रेस के बारे में पूरी जानकारी देते हुए दिख रहे हैं।

रविकिशन ने मीडिया को बताया कि 2,00,000 वर्ग फुट में फैले गीता प्रेस के दौरे में उन्होंने कई ऐसी मशीनें देखीं जो जर्मनी, जापान और इटली से आई थीं। इन मशीनों की कीमत 5-15 करोड़ रुपए तक है। रविकिशन ने बताया कि गीता प्रेस हर महीने भारत भर में लगभग 80 लाख रुपए तनख्वाह बाँटता है। रविकिशन ने मीडिया के माध्यम से यह जानकारी भी दी कि प्रेस द्वारा 15 भाषाओं में करोड़ों किताबें प्रकाशित की जा रहीं हैं, जो भारत के अलावा विदेशों में भी भेजी जा रहीं हैं।

साथ ही उन्होंने कहा कि वो मीडिया के माध्यम से सभी को यह अवगत करना चाहते हैं कि बहुत ही कम दाम में पुस्तक उपलब्ध कराने के बावजूद भी गीता प्रेस पूरी तरह से संचालित है और उसके आर्थिक संकट की बातें मात्र अफवाह हैं। गीता प्रेस के कर्मचारियों के माध्यम से रविकिशन ने यह भी बताया कि गीता प्रेस किसी भी प्रकार का कोई अनुदान नहीं लेता है और यदि कोई गीता प्रेस के लिए अनुदान की माँग भी करता है तो वह पूरी तरह भ्रामक है।

रोहन दुआ ने अपनी ही कुछ पुरानी रिपोर्ट्स ट्वीट कीं। इनमें बताया गया था कि विमुद्रीकरण (नोटबंदी) और जीएसटी लागू होने के बाद भी गीता प्रेस के कार्य में कोई रुकावट नहीं आई। रिपोर्ट में बताया गया कि हालाँकि 8 नवंबर 2016 को विमुद्रीकरण की घोषणा के बाद दिसंबर महीने में पुस्तकों की बिक्री में कुछ कमी आई थी लेकिन जनवरी में प्रेस ने धार्मिक पुस्तकों की बिक्री के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इसी तरह जीएसटी लागू होने के बाद प्रकाशन का खर्च थोड़ा बढ़ा लेकिन इसके बाद भी पुस्तकों की बिक्री में कोई कमी नहीं आई।

रोहन दुआ की रिपोर्ट

गीता प्रेस, गोरखपुर

गीता प्रेस, सोसायटीज रजिस्ट्रेशन ऐक्ट 1860 के अंतर्गत स्थापित गोबिन्द भवन कार्यालय की एक इकाई है, जो वर्तमान में पश्चिम बंगाल सोसायटी ऐक्ट 1960 के तहत संचालित होती है। गीता प्रेस की स्थापना श्रीजयदयालजी गोयन्दका ने सन् 1923 में की थी। गीता प्रेस का मुख्य उद्देश्य ही सस्ते से सस्ते साहित्य के माध्यम से धर्म का प्रचार करना है। गीता प्रेस के अनुसार उनके द्वारा पुस्तकों के मूल्य प्रायः लागत से भी कम रखे जाते हैं लेकिन फिर भी कभी भी गीता प्रेस पर कोई आर्थिक संकट नहीं आया।

गीता प्रेस की वेबसाइट में दी गई जानकारी के अनुसार प्रेस के द्वारा मार्च 2019 तक लगभग 68 करोड़ 28 लाख पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है। इनमें से सर्वाधिक लगभग 14 करोड़ से अधिक श्रीमद्भगवतगीता और लगभग 10 करोड़ से अधिक श्रीरामचरितमानस की पुस्तकों का प्रकाशन किया गया। पुस्तक प्रकाशन के अलावा संस्था कई आश्रम, सेवा संस्थान, आयुर्वेद चिकित्सालय और प्रवचन स्थल भी चलाती है। यहाँ लोगों के न केवल शारीरिक अपितु मानसिक शांति के लिए भी क्रियाकलाप आयोजित किए जाते हैं।

आज भारत भर में यदि सनातन के वेद, पुराणों और ग्रंथों का ज्ञान सुलभता से सभी तक पहुँच सका है तो इसमें गीता प्रेस का योगदान अभूतपूर्व है। स्टेशन स्टॉल, किताब की दुकानों और गीता प्रेस के आधिकारिक थोक एवं फुटकर विक्रेताओं के माध्यम से अनेकों धर्म पुस्तकें आज भारत के घर-घर में प्रचलित हैं। अब तो गीता प्रेस के ऑनलाइन स्टोर से भी ये पुस्तकें खरीदी जा सकती हैं। जब भी कभी पौराणिक सत्यता और प्रमाणिकता की बात आती है तो सभी को एक ही नाम पर भरोसा समझ आता है, गीता प्रेस।    

UP के 23.2 लाख श्रमिकों को CM योगी ने दिया भरण-पोषण भत्ता, खातों में ट्रांसफर किए ₹230 करोड़

कोरोना महामारी के कारण प्रभावित राज्य के श्रमिकों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (जून 9) को 230 करोड़ रुपए की सौगात दी। प्रदेश के 23.2 लाख पंजीकृत श्रमिकों के खाते में भरण पोषण भत्ते के तौर पर सीएम योगी द्वारा 1000-1000 रुपए ट्रांसफर किए गए। इस दौरान सरकारी आवास पर एक कार्यक्रम में सीएम ने 5 श्रमिकों को खुद ये धनराशि दी। वहीं बाकियों से फोन कॉल के जरिए बात की ।

हर श्रमिकों के बैंक खाते में 1000 रुपए ट्रांसफर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते सवा साल से न केवल प्रदेश बल्कि पूरा देश और दुनिया कोरोना माहमारी से लड़ रही है, लेकिन सामूहिक प्रयास से आज यूपी की स्थिति नियंत्रित है। वर्चुअल माध्यम से हमीरपुर के अतुल, वाराणसी के मिथिलेश, कानपुर के प्रवीण मिश्र, मेरठ के कुलदीप और झांसी के राशिद अली से बात करते हुए सीएम ने पहले सभी के कामकाज, घर-परिवार का हाल-चाल लिया और फिर सभी से सरकारी योजनाओं के बारे में फीडबैक लिया। 

एक-एक कर सभी श्रमिकों ने बताया कि उन्हें बच्ची की शादी, पढ़ाई और मेडिकल जरूरतों के लिए सरकार से मदद मिली है। इसके अलावा, मुफ्त राशन मिलने पर सबने सीएम का आभार जताया। इस दौरान सीएम योगी ने यूपी राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड में असंगठित क्षेत्र में कामगारों के पंजीकरण के लिए पोर्टल का शुभारंभ किया। 

सीएम ने कहा,

“दैनिक रूप से काम कर अपना जीविकोपार्जन करने वाले ठेला, खोमचा, रेहड़ी, खोखा आदि लगाने वाले पटरी दुकानदार हों, दिहाड़ी मजदूर हों, रिक्शा चालक, पल्लेदार हों अथवा नाविक, नाई, धोबी, मोची, हलवाई आदि जैसे असंगठित क्षेत्र के श्रमिक हों अथवा औद्योगिक इकाइयों आदि में काम करने वाले संगठित क्षेत्र के मजदूर, अपना पंजीकरण जरूर कराएँ। यह पंजीकरण राज्य सरकार को उनकी सुरक्षा के लिए प्रबन्ध करने में सहायक होगा।”

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार में हर एक श्रमिक को चाहे वह संगठित क्षेत्र का हो या असंगठित क्षेत्र का हो, सामान्य कामगार हो या फिर कहीं एक्सप्रेस-वे पर काम कर रहा हो, उसे मात्र एक रजिस्ट्रेशन से 5,00,000 रुपए का वार्षिक बीमा कवर प्रदान करने का कार्य पूरी प्रतिबद्धता के साथ हो रहा है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार प्रदेश के अंदर दोनों क्षेत्रों के सभी श्रमिकों का पंजीकरण कर उन्हें 2 लाख रुपए की सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देगी। उन्होंने ये भी बताया कि श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने और इनके हितों का ख्याल रखने के लिए सरकार ने प्रदेश में आयोग गठित किया है।

उन्होंने श्रमिकों का प्रोत्साहन बढ़ाते हुए कहा कि श्रमिकों ने अपने परिश्रम और पुरुषार्थ से प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले सवा साल से कोरोना के खिलाफ़ लगातार जारी जंग में श्रमिकों ने सरकार के साथ कंधे से कंधा मिला कर मुकाबला किया। कोरोना की पहली लहर में घोषित लॉकडाउन के कारण चुनौतियाँ ज्यादा थीं। 40 लाख प्रवासी उस बीच राज्य में आए। सरकार ने इनके लिए भरण-पोषण से लेकर रोजगार तक की व्यवस्था की।

Reliance Jio से पाएँ कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता WhatsApp पर, पिनकोड डाल कर एक क्लिक पर सब कुछ

रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने एक व्हाट्सऐप आधारित चैटबॉट सेवा शुरू की है। इसके माध्यम से ग्राहक वैक्सीन की उपलब्धता की जानकारी के साथ, रिचार्ज करने, शिकायत करने, उनके समाधान और अन्य सेवाओं का लाभ ले सकते हैं। यह सेवा जियो के साथ दूसरे टेलीकॉम ऑपरेटर्स के ग्राहकों के लिए भी उपलब्ध है।

जियो की इस व्हाट्सऐप चैटबॉट सुविधा के माध्यम से ग्राहक Covid-19 वैक्सीन की उपलब्धता की जानकारी हासिल कर सकते हैं। अभी तक उपलब्ध अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स में वैक्सीन की जानकारी लेने के लिए वन टाइम पासवर्ड की जरूरत होती है और उसके साथ ही रिफ्रेश करते रहने की जरूरत भी होती है लेकिन जियो की व्हाट्सऐप चैटबॉट सुविधा के माध्यम से ग्राहक बिना किसी परेशानी के मात्र अपने क्षेत्र का पिनकोड देकर वैक्सीन की जानकारी हासिल कर सकते हैं।

रिलायंस जियो की इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ता को व्हाट्सऐप नंबर ‘7000770007’ पर ‘Hi’ लिखकर भेजना होगा। इसके बाद उपभोक्ता के मोबाइल पर सारे ऑप्शन आ जाएँगे।

जियो उपभोक्ताओं को वैक्सीन की जानकारी के अतिरिक्त रिचार्ज करने, भुगतान करने, सेवा संबंधी शिकायत करने, उनका समाधान प्राप्त करने, जियो फाइबर और जियो मार्ट की सुविधा भी दी गई है। हालाँकि दूसरे दूसरे टेलीकॉम ऑपरेटर्स के ग्राहक वैक्सीन की जानकारी हासिल करने और जियो एकाउंट्स को रिचार्ज करने के लिए रिलायंस जियो चैटबॉट की सेवा ले सकते हैं। हालाँकि गैर-जियो उपभोक्ताओं को एकाउंट संबंधी जानकारी देने पर चैटबॉट की वैरिफिकेशन संबंधी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

ज्ञात हो कि रिलायंस जियो और फेसबुक के मध्य 43,574 करोड़ रुपए की डील वर्ष 2020 में हुई थी। इस डील के माध्यम से फेसबुक ने जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर्स में 9.99% इक्विटी खरीदी। इस डील के माध्यम से जियो की पहुँच फेसबुक के मालिकाना वाले व्हाट्सऐप तक बढ़ गई, जिसके माध्यम से रिलायंस खुदरा और थोक व्यापारियों को आपस में जोड़ना चाहता है। रिलायंस का उद्देश्य है फेसबुक और व्हाट्सऐप का उपयोग करके भारत में ऑनलाइन व्यापार को नई दिशा प्रदान करना।

भारत सरकार की फटकार के बाद ट्विटर आया पटरी पर: नए नियम मानकर 2 की नियुक्ति, 1 का नाम लगभग फाइनल

भारत सरकार द्वारा ट्विटर को आईटी रुल्स के अनुपालन के लिए अंतिम नोटिस जारी किए जाने के बाद खबर है कि ट्विटर ने इस पर अपना काम शुरू कर दिया है। कंपनी ने भारत सरकार को बताया है कि उन्होंने इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमिडियरी गाइडलाइंस एण्ड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 के तहत दो अधिकारियों को नियुक्त कर लिया है और तीसरे को भी फाइनल करने की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है।

टाइम्स नाऊ के ट्वीट के अनुसार, ट्विटर ने नोडल कॉन्टैक्ट पर्सन और रेसीडेंट ग्रिवांस ऑफिसर को नियुक्त कर लिया है। इसके अलावा वह चीफ कंप्लायन्स ऑफिसर को भी फाइनल कर रहे हैं। इन सबको जल्द उनकी ड्यूटी असाइन की जाएँगी। इस काम के बाद आगे ट्विटर आधिकारिक तौर पर भारत सरकार को हलफनामा देगा, जिसमें बताया जाएगा कि उन्होंने नए नियमों में दिए गए दिशा-निर्देशों का अनुपालन कर लिया है।

इससे पहले भारत सरकार ने ट्विटर को भेजे गए आखिरी नोटिस में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कानून का अनुपालन करने को कहा था। नोटिस में कहा गया था कि ट्विटर ने नए आईटी रूल्स के अंतर्गत नियुक्त किए जाने वाले चीफ कंप्लायन्स ऑफिसर से संबंधित कोई जानकारी साझा नहीं की है और ट्विटर द्वारा नियुक्त किए गए रेसीडेंट ग्राइवेंस ऑफिसर और नोडल कान्टैक्ट पर्सन भी ट्विटर के कर्मचारी नहीं हैं। नोटिस में बताया गया था कि नए आईटी रूल्स के तहत अनुपालन में असमर्थ रहने पर ट्विटर आगामी परिणामों के लिए जिम्मेदार होगा।

बता दें कि ट्विटर द्वारा आईटी एक्ट के नए नियमों का पालन न किए जाने पर भारत सरकार ने कंपनी को फटकार लगाई थी। ट्विटर की ओर से जारी बयान में अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देकर चिंता जाहिर करने पर सरकार ने कंपनी को कहा था कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना भारत सरकार की जिम्मेदारी है न कि ट्विटर जैसी किसी निजी लाभकारी, विदेशी संस्था की।

मंत्रालय के बयान में कहा था कि ट्विटर को इधर-उधर सिर मारना बंद करना चाहिए और भारतीय कानून का पालन करना चाहिए। कानून बनाना और नीति बनाना संप्रभु राष्ट्र का विशेषाधिकार है और ट्विटर सिर्फ एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है। भारत की कानूनी नीति की रूपरेखा क्या होनी चाहिए, यह तय करने में इसका कोई अधिकार नहीं होगा।

रोहिंग्याओं को आधार, पैन कार्ड और भारत में रहने की जगह भी: आमिर के साथ नूर आलम UP के डासना से अरेस्ट

उत्तर प्रदेश पुलिस की एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (ATS) टीम ने बांग्लादेश के रास्ते अवैध रूप से भारत आए 2 रोहिंग्या को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान नूर आलम उर्फ मोहम्मद रफीक और आमिर हुसैन के तौर पर हुई है। ये दोनों सोमवार (जून 7, 2021) शाम गाजियाबाद के डासना में पकड़े गए। कोर्ट में पेशी के बाद इन्हें जेल भेज दिया गया है।

एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि नूर आलम देश में रोहिंग्या लोगों को अवैध रूप से प्रवेश कराकर उन्हें यहाँ की भारतीय नागरिकता दिलाने का मास्टरमाइंड है। दोनों आरोपित मूल रूप से म्यांमार के हैं। वहीं नूर, 6 जनवरी को गिरफ्तार हुए रोहिंग्या अजीजुल्लाह का बहनोई है। अजीजुल्लाह के गिरफ्तारी के बाद से एटीएस नूर की तलाश कर रही थी।

जानकारी के मुताबिक, नूर आलम, रिफ्यूजी कैंप नयापाड़ा में रहता था। उसने कई साल पहले अवैध तरीके से भारत में आकर मेरठ के दरबार लबर खास में अपना ठिकाना बनाया था। वहीं आमिर हुसैन खजूरी खास स्थित श्रीराम कॉलोनी में रह रहा था। दोनों की जान पहचान कुछ माह पहले हुई थी। नूर ने आमिर को आश्वासन दिया था कि वह उसके जाली दस्तावेज बनवा देगा।

पुलिस की छानबीन में आरोपितों के पास से आधार कार्ड, पैन कार्ड, यूएनएचआरसी कार्ड, मोबाइल और 70000 रुपए बरामद हुए हैं। एटीएस का कहना है कि जनवरी माह से आरोपित उनके रडार पर थे। यूपी एटीएस के आईजी जीके गोस्वामी ने बताया कि यूपी एटीएस ने संतकबीर नगर से अजीजुल्लाह को गिरफ्तार किया था।

पूछताछ में उसने बताया था कि उसका बहनोई नूर आलम अवैध तरीके से म्यांमार से लोगों को भारत में प्रवेश कराता था। इसके बाद वह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उन्हें भारत के अलग-अलग इलाकों में शरण दिलाता था। तभी से एटीएस को नूर आलम की तलाश थी। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस व मुखबिर से सूचना मिली कि नूर आलम अपने साथी के साथ गाजियाबाद में है। मंगलवार को घेराबंदी करते हुए नूर आलम व उसके साथी आमिर हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया।

भाजपा नेता ने उठाई थी रोहिंग्याओं को पकड़ने की माँग

गौरतलब है कि लोनी विधान सभा क्षेत्र से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने डेढ़ साल पहले शासन को पत्र लिखकर गाजियाबाद में रोहिंग्या मुसलमान होने की बात कही थी। उन्होंने उनकी धरपकड़ की माँग की थी। मंगलवार को गाजियाबाद से इन दो रोहिंग्या पकड़े जाने के बाद नंदकिशोर गुर्जर ने कहा कि दिल्ली से नजदीकी व एनसीआर क्षेत्र होने के कारण गाजियाबाद में एक लाख से अधिक रोहिंग्या व बांग्लादेशी हैं।

इस संबंध में वह मुख्यमंत्री और गृह सचिव को पत्र लिखकर गाजियाबाद में सघन अभियान चलाने की माँग करेंगे, ताकि रोहिंग्याओं व बांग्लादेशी बेनकाब हो सकें और उन्हें भारत से भगाया जा सके।  नंदकिशोर गुर्जर ने कहा कि बीते दिनों दिल्ली पुलिस ने कश्मीर निवासी आतंकी जान मोहम्मद को गिरफ्तार किया था। उसने खुलासा किया था कि वह मसूरी स्थित डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या की फिराक में था। विधायक का कहना है कि इस साजिश में रोहिंग्या व बांग्लादेशी भी शामिल हो सकते हैं।