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यूपी में चलेगा गाँवों-वार्डों को कोरोना मुक्त कराने का अभियान, सबसे अच्छा काम करने वालों को पुरस्कार देगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसी बीच उन्होंने राज्य में महाअभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार (21 मई 2021) को टीम-9 के साथ कोरोना समीक्षा को लेकर हुई मीटिंग में कोरोना से मुक्त होने पर गाँवों और शहरों के वॉर्डों को पुरस्कार देने का ऐलान किया।

मुख्यमंत्री योगी ने सभी डीएम को गाँवों और शहरी वार्डों में “मेरा गाँव, कोरोना मुक्त गाँव” और “मेरा वार्ड, कोरोना मुक्त वार्ड” अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत हर जिले में सबसे अच्छा काम करने वाले तीन-तीन गाँवों और तीन-तीन वार्डों को कोरोना मुक्त का अवॉर्ड दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से ऐसे गाँवों और वार्डों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त धनराशि दी भी जाएगी।

सीएम योगी ने समीक्षा बैठक में कहा कि गाँवों में वृहद टेस्टिंग अभियान के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। निगरानी समितियों और आरआरटी टीमों की मेहनत रंग ला रही है। ऐसे में इसे मिशन के रूप में लेने की जरूरत है। सभी गाँवों में जागरूकता बढाएँ और प्रयास करें कि ‘कोरोना मुक्त गाँवों’ के संदेश को हर ग्रामवासी अपना लक्ष्य बनाएँ।

उन्होंने क​हा कि भारत सरकार द्वारा ब्लैक फंगस के उपचार के संबंध में दिए गए सुझावों एवं निर्देशों का जल्द ही क्रियान्वयन किया जाए। साथ ही महामारी अधिनियम-1897 के अन्तर्गत ब्लैक फंगस को अधिसूचित बीमारी घोषित किया जाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब तक 4 करोड़, 61 लाख, 12 हजार 448 कोविड टेस्ट किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विगत 24 घंटों में राज्य में 753 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई है। विगत कुछ दिनों में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी आने से ऑक्सीजन की माँग में भी तेजी से कमी आई है।

उन्होंने आयुष विभाग द्वारा संचालित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को एक्टिव करने का निर्देश भी दिया। सीएम ने कहा कि आयुष विभाग द्वारा प्राणायाम के अभ्यास के संबंध में लोगों को व्यापक जानकारी दी जाए व इसका प्रचार-प्रसार भी कराया जाए।

#CleanNCERT: कभी स्थानीय भाषा तो कभी बिना साक्ष्य के इतिहास, गलत शिक्षा को लेकर NCERT हेड मो सिराज निशाने पर

हाल में NCERT के पाठ्यक्रम में कक्षा-1 के छात्रों को पढ़ाए जाने वाली कविता ‘आम की टोकरी’ को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल हुआ। लोगों ने इसे डबल मीनिंग कविता करार देते हुए पाठ्यक्रम से निकालने की बात की। ये पहली बार नहीं है कि NCERT पर गलत शिक्षा देने के आरोप लगे हों। इससे पहले कई बार ऐसा हुआ। जिसके मद्देनजर इस दफा ट्विटर पर #CleanNCERT ट्रेंड करने लगा और NCERT प्रमुख भी लोगों के निशाने आ गए।

सोशल मीडिया पर यूजर्स #CleanNCERT ट्रेंड करवा कर उस सामग्री को उजागर कर रहे हैं, जिनके जरिए गलत शिक्षा छात्रों को दी जा रही है। लोग बता रहे हैं कि आखिर NCERT में क्या पढ़ाया जाना चाहिए और हमें पढ़ाया क्या जा रहा है। सक्रिय यूजर्स इस बात को उठा रहे हैं कि आखिर बाबर, औरंगजेब और खिलजी जैसे क्रूर शासक महान कैसे हो गए और क्यों छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप को विस्तार से हमें इतिहास की किताबों में नहीं पढ़ाया गया।

NCERT पर लगे गलत शिक्षा देने के आरोप

इससे पहले NCERT अपने कंटेंट को लेकर कई बार चर्चा में आया है। ‘आम की टोकरी’ कविता के अलावा NCERT की पाँचवी कक्षा में पढ़ाई जाने वाली मैरीगोल्ड के यूनिट 8 में द लिटिल बुली को लेकर भी ये बात उठी थी कि आखिर उसमें हरि नाम के बच्चे पर ऐसी कहानी क्यों गढ़ी गई कि वह लड़कियों को चिढ़ाता है या चिकोटी काट कर उन पर धौंस जमाता है।

इसी तरह कक्षा 12 में पढ़ाए जाने वाली इतिहास की किताब पर बवाल हुआ था। इसमें सिखाया जा रहा था कि औरंगजेब जैसे आक्रांताओं ने भी भारत में रहते हुए मंदिरों की रक्षा की और उनकी देख-रेख का जिम्मा उठाया था। लेकिन जब एनसीईआरटी से इस दावे का स्रोत पूछा गया तो उनके पास अपना दावा साबित करने के लिए कोई प्रमाण या स्रोत नहीं था। ऐसे ही कुतुब मीनार को लेकर भी एनसीआरटी के पास कोई सबूत नहीं थे कि उसे  कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश ने बनवाया।

NCERT का बयान

आज निराधार दावों वाली शिक्षा और दोयम दर्जे की भाषा को लेकर NCERT विवादों में हैं। लेकिन अपनी सफाई में उन्होंने गलती मानने की बजाय या कोई आश्वासन देने की जगह अपनी गलती को स्थानीय भाषा का हवाला देकर ढकना चाहा। ऐसे में भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने उन्हें लताड़ा और कविता की भाषा को घटिया और स्तरहीन कहा।

दरअसल, NCERT ने लिखा था, “एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में दी गई कविताओं के संदर्भ में: एनसीएफ-2005 के परिप्रेक्ष्य में स्थानीय भाषाओं की शब्दावली को बच्चों तक पहुँचाने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ये कविताएँ शामिल की गई हैं ताकि सीखना रुचिपूर्ण हो सके।”

अगले ट्वीट में NCERT ने बताया, “ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। इसी पाठ्यचर्या की रूपरेखा के आधार पर भविष्य में पाठ्यपुस्तकों का निर्माण किया जाएगा।”

NCERT हेड मोहम्मद सिराज पर उठी उंगलियाँ

NCERT पर उठे सवालों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विश्लेषक दिव्य कुमार सोती समेत कई लोग ऐसी शिक्षा के लिए NCERT हेड को जिम्मेदार मान रहे हैं। दिव्य कुमार सोती ने मोहम्मद सिराज का बायोडेटा शेयर करते हुए लिखा,

“जो मदरसों के सिलेबस में औरंगजेब की महानता पर चैप्टर लिखने लायक थे वो  NCERT की किताबें लिख रहे हैं। 10 साल रूक जाइए, आज इनके लिखे सिलेबस को पढ़ रहे हिंदुओं के बच्चे भी उमर खालिद और शरजील उस्मानी के साथ भारत विरोधी नारे लगाते दिखाई देंगे।”

राजपांडे लिखते हैं, “अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मो सिराज अनवर जुलाई 2020 से NCERT की योजना और अनुसंधान के प्रमुख है। इसके पहले वह 2016-19 के दौरान प्रकाशन विभाग के प्रमुख (योजना निगरानी) थे। उन्होंने 1997 में NCERT ज्वाइन किया था और औरंगजेब के निजाम शाही के अनुयायी हैं। ”

इनके अलावा कई यूजर्स हैं जो इन सबके लिए मो सिराज और उससे पहले के NCERT प्रमुखों को जिम्मेदार मान रहे हैं।

गौरतलब है कि आज के समय में भारतीय सनातन संस्कृति से वामपंथी इतिहासकारों और शिक्षाविदों की घृणा का यह चरम है। यही वजह है कि हमें सालों से गलत इतिहास और ऐसी भाषा पढ़ाई जाती रही, जिसकी वजह से हमारा दिमाग एक दिशा में सेकुलरिज्म की परिभाषा गढ़ता रहे।

मसलन बाबर को किताबों में महान शासक बनाया गया। उनका महिमामंडन करने के लिए पाठ के पाठ समर्पित कर दिए गए। वहीं दूसरी ओर शिवाजी महाराज या महाराणा प्रताप को तस्वीरों या फिर एक पैराग्राफ में सीमित कर दिया गया।

तस्वीरों से लेकर भाषा तक में हमारे दिमाग का इस्लामीकरण किया जाता रहा और हम इसे पढ़ते आए। #CleanNCERT के ट्रेंड होने का मतलब यही है कि आज बड़ी तादाद में लोग ऐसे एकतरफा कंटेंट का विरोध कर रहे हैं और भारत के असली हीरोज और उसकी सभ्यता की जानकारी बच्चों को दिलवाना चाहते हैं।

‘इंडियन कोरोना’: कमलनाथ ने वायरस फैलाने वाले चीन की बजाय भारत को किया बदनाम, वीडियो वायरल

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का शुक्रवार (21 मई 2021) को कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को किसान आंदोलन के नाम पर क्षुद्र राजनीति करने और आग लगाने की सलाह देने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। वहीं, एक दिन बाद यानी शनिवार को (22 मई 2021) उनका एक और विवादित वीडियो सामने आया है। नए वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता दुनिया भर में कोरोना वायरस फैलाने वाले चीन की बजाय भारत को कोसते नजर आ रहे हैं।

कमलनाथ ने क​हा, ”दुनिया भर में देश की पहचान इंडियन कोरोना से बन गई है। इसकी शुरुआत चीनी कोरोना से हुई थी, लेकिन अब यह इंडियन वेरिएंट कोरोना है। आज भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री COVID-19 के भारतीय वेरिएंट से डरते हैं। यह कौन सा टूलकिट है? हमारे वैज्ञानिक इसे इंडियन वेरिएंट कह रहे हैं। सिर्फ बीजेपी के सलाहकार ही नहीं मान रहे हैं।”

कॉन्ग्रेस नेता ने वीडियो में कहा, ”हम कहते थे कि चाइनीज कोरोना है। अगर आपको याद हो तो जनवरी 2020 में जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब हम कहते थे यह कोरोना चीन का है। चाइनीज लेबोरेटरी में बनाया गया था और एक खास शहर से आया था। हम आज कहाँ पहुँच गए हैं? आज दुनिया इसे इंडियन कोरोना कहती है।”

उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि इंडियन कोरोना से सब डर रहे हैं, सारी फ्लाइटें बंद करो। उन्होंने छात्रों और वहाँ काम करने वाले लोगों की एंट्री बंद कर दी है कि वे इंडियन कोरोना ले आएँगे। इसी वजह से आज भारत को दुनिया में पहचाना जाता है। भूल जाओ मेरा देश महान है, अब मेरा भारत COVID बन गया है। इसे दबाकर आप किसी को बेवकूफ नहीं बना सकते। इस दौरान कमलनाथ ने सरकार पर कोरोना से हुई मौतों के आँकड़ों को छिपाने का आरोप भी लगाया।

कमलनाथ का बयान सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “कुछ दिन पहले, हमने अरविंद केजरीवाल के भारतीय वेरिएंट और सिंगापुर पर नकली बयान सुना। वह (कमलनाथ) इसे इंडियन COVID भी कह रहे हैं। यह पक्का है कि कमलनाथ का टूलकिट से कनेक्शन है।”

बीजेपी नेता ने शुक्रवार (21 मई 2021) को ट्वीट कर कहा था कि देश कोरोना महामारी की वैश्विक आपदा से जूझ रहा है। ऐसी स्थिति में कमलनाथ जी जैसे वरिष्ठ नेता को देशवासियों को संकट से बचाने की बात करनी चाहिए ना कि प्रदेश और देश में आग लगाने की? हकीकत में उनकी मूल प्रवृत्ति यही है।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर पर कहा कि सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाली पार्टी के नेताओं को देश को बदनाम करने में ख़ुशी मिलती है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ऐसा इसलिए कर रही है, क्योंकि उसने 7 अगस्त, 2008 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एक समझौते (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे।

बता दें कि हाल ही में कॉन्ग्रेस के कथित टूलकिट मामले के खिलाफ देश के शीर्ष अदालत में याचिका दायर की गई है। मामले को सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काने और दुनिया में भारत की छवि बिगाड़ने का साजिश बताया गया है। याचिकाकर्ता वकील शशांक शेखर झा ने अंतरराष्ट्रीय साजिश का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से जाँच और दोष साबित होने पर कॉन्ग्रेस की मान्यता रद्द करने की माँग की है।

याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार को निर्देश जारी होना चाहिए कि वह गाइडलाइंस बनाए कि कोई भी पार्टी, ग्रुप कोई भी ऐसा पोस्टर और बैनर नहीं लगाएगा जिसमें एंटी नेशनल सामग्री हो। साथ ही कोरोना से मरे लोगों के अंतिम संस्कार और शव न दिखाए जाएँ। इसके अलावा केंद्र सरकार को कोविड-19 महामारी के दौरान आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी के बारे में निर्देश जारी किया जाए।

CM विजयन ने अल्पसंख्यक विभाग रखा अपने पास: केरल कैथोलिक यूथ मूवमेंट का असर? मुस्लिम समुदाय में नाराजगी

केरल में एक बार फिर से सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने चौंकाने वाला कदम उठाते हुए अल्पसंख्यक विभाग अपने पास रख लिया है। जबकि, सामान्य तौर पर यह विभाग कैबिनेट मंत्रियों को दिया जाता था। इसके अलावा सीएम ने गृह, निगरानी और आईटी समेत कई अन्य विभागों को भी अपने पास ही रखा है।

माना जा रहा है कि उनके इस कदम से मुस्लिम समुदायों में भी कुछ नाराजगी है। पी विजयन ने गुरुवार (20 मई 2021) को 20 कैबिनेट मंत्रियों के साथ दूसरी बार सीएम पद की शपथ ली थी। उनके मंत्रियों के विभागों की आधिकारिक लिस्ट शुक्रवार (21 मई 2021) को जारी हुई।

पी विजयन सरकार ने इस बार अपने कैबिनेट में कई फेरबदल किए हैं। इसके तहत उन्होंने अल्पसंख्यक विभाग को भी अपने पास ही रख लिया है। जबकि, उनके पिछले कार्यकाल के दौरान यह विभाग केटी जलील के पास था। केटी जलील उस दौरान राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री भी थे। वहीं सीएम ने अपने दामाद पीए मोहम्मद रियास को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का जिम्मा सौंपा है। 

वहीं कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट सरकार के कार्यकाल के दौरान अल्पसंख्यक विभाग इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के मुस्लिम मंत्री मंजलमकुझी अली के पास था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा पी विजयन सरकार में अल्पसंख्यक मंत्रालय के लिए वर्तमान मंत्रिमंडल में शामिल वी अब्दुरहीमान के नाम की चर्चा थी। उन्हें ही अल्पसंख्यक मामलों का प्रभारी बताया गया था, लेकिन अंतिम लिस्ट में इसे बदल दिया गया। इस मामले में कुछ मुस्लिम संगठनों ने नाराजगी भी जताई है। उन्हें लगता है कि पिनारई विजयन ने ईसाई समुदाय को खुश करने के लिए ऐसा किया है।

हालाँकि, मुख्यमंत्री पी विजयन का कहना है, “मुस्लिम समुदाय अल्पसंख्यक है। उन्हें मुझ पर और एलडीएफ सरकार पर भरोसा है। इसकी आलोचना करने वाले इंडियन यूनियन ऑफ मुस्लिम लीग का समुदाय पर कोई एकाधिकार नहीं है।”

केरल में मुसलमान आबादी

गौरतलब है कि केरल की 3.34 करोड़ आबादी में मुसलमानों की संख्या 88.73 लाख है, जबकि ईसाइयों की आबादी 61.41 लाख है। केरल में ईसाई से ज्यादा संख्या होने के बाद भी सीएम विजयन ने मुसलमानों को अल्पसंख्यक बताया है।

कथित तौर पर अल्पसंख्यक मंत्रालय को लेकर केरल कैथोलिक यूथ मूवमेंट ने अपने बिशप को एक पत्र लिखकर सीएम पिनारई विजयन पर दवाब बनाने के लिए कहा था। इसके मुताबिक, या तो अल्पसंख्यक विभाग को किसी क्रिश्चियन मंत्री को दिया जाय या फिर सीएम विजयन इसे खुद अपने पास ही रखें। हालाँकि, मुख्यमंत्री ने इस विभाग को अपने पास ही रख लिया है। उनके इस कदम का केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल ने स्वागत किया है।

इस मामले में केरल के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष और मिजोरम के मौजूदा राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई ने कहा है कि सिरो-मालाबार कैथोलिक चर्च के मेजर आर्कबिशप कार्डिनल जॉर्ज एलेनचेरी ने “बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों” को उठाया है। उन्होंने कहा कि चिंता की बात यह है कि अल्पसंख्यकों के लिए जारी होने वाला 80 फीसदी फंड एक समुदाय विशेष में जा रहा है, जबकि पूरे ईसाई समुदाय को केवल 20 प्रतिशत ही मिल रहा है।

UP में कोरोना से जान गँवाने वाले आँगनबाड़ी अधिकारी और कर्मचारियों के परिवार को ₹50-50 लाख मुआवजा: आदेश जारी

उत्तर प्रदेश में कोरोना से संबंधित ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने के बाद अपनी जान गँवाने वाले बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों, आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मिनी आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के आश्रितों को 50-50 लाख रुपए की राशि दी जाएगी।

बाल विकास पुष्टाहार की निदेशक सारिका मोहन ने इस संबंध में जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं। विभाग की तरफ से कहा गया है कि अभी तक विभाग के 11 अधिकारी, कर्मचारी और 72 आँगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं का कोविड-19 से निधन हो चुका है। अब भी विभाग के 426 अधिकारी, कर्मचारी और 441 आँगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कोरोना से संक्रमित हैं।

निदेशक ने जिलाधिकारियों से कहा है कि जिन अधिकारियों व कर्मचारियों, आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की कोविड-19 से संबंधित ड्यूटी के दौरान संक्रमण होने से आकस्मिक मृत्यु हुई है, उनके आश्रितों को शासन के राजस्व विभाग के राजस्व विभाग के आदेश के अनुसार 50 लाख रुपए की अनुग्रह राशि प्रदान की जाए।

निदेशक ने कहा है कि विभाग की आँगनबाड़ी कार्यकर्ता, मिनी आँगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा सहायिकाएँ कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए गठित निगरानी समिति या सर्वे कार्य के लिए गठित समिति के सक्रिय सदस्य के रूप में जिला प्रशासन के निर्देशन में लगातार फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में कार्य कर रही हैं। इसके अलावा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी कोविड-19 के संक्रमण से बचाव से संबंधित किसी न किसी ड्यूटी का निर्वहन कर रहे हैं। इस कारण विभाग के इन अधिकारियों व कर्मचारियों का प्राथमिकता पर टीकाकरण भी कराया जाए। 

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसी बीच उन्होंने राज्य में महाअभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार (मई 21, 2021) को टीम-9 के साथ कोरोना समीक्षा को लेकर हुई मीटिंग में कोरोना से मुक्त होने पर गाँवों और शहरों के वॉर्डों को पुरस्कार देने का ऐलान किया।

मुख्यमंत्री योगी ने सभी डीएम को गाँवों और शहरी वार्डों में ‘मेरा गाँव, कोरोना मुक्त गाँव’ और ‘मेरा वार्ड, कोरोना मुक्त वार्ड’ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत हर जिले में सबसे अच्छा काम करने वाले तीन-तीन गाँवों और तीन-तीन वार्डों को कोरोना मुक्त का अवॉर्ड दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से ऐसे गाँवों और वार्डों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त धनराशि दी भी जाएगी।

ऑर्केस्ट्रा में जो कभी करते थे काम… सलमान की फिल्मों को जिन्होंने कराया सुपर हिट, उस राम लक्ष्मण का निधन

मशहूर संगीतकार राम लक्ष्मण का शनिवार (22 मई) को निधन हो गया। बॉलीवुड की कई हिट फिल्मों को अपने संगीत से सजाने वाले विजय पाटिल (राम लक्ष्मण) ने नागपुर में आखिरी साँस ली। उनके बेटे अमर ने बताया कि संगीतकार राम लक्ष्मण की मृत्यु हार्ट अटैक से हुई।

राम लक्ष्मण ने कई ऐसी फिल्मों में अपना संगीत दिया, जो आज भी लोगों के बीच खासी लोकप्रिय हैं और उनके गाने वैसे ही सुने जाते हैं जैसे पहले सुने जाते थे। राम लक्ष्मण ने मैंने प्यार किया, हम साथ साथ हैं, हम आपके हैं कौन जैसी हिट बॉलीवुड फिल्मों में संगीत दिया। इसके अलावा उन्होंने कई मराठी और भोजपुरी फिल्मों को भी अपने संगीत से सजाया।

महान गायिका लता मंगेशकर ने भी राम लक्ष्मण को श्रद्धांजलि दी। लता मंगेशकर ने राम लक्ष्मण के द्वारा बनाए गए कई गाने गए। उनके द्वारा गाए गए गाने ‘कबूतर जा’ और ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’ बहुत प्रसिद्ध हुए थे। इन गानों को राम लक्ष्मण ने ही लयबद्ध किया था।

मशहूर संगीतकार राम लक्ष्मण का वास्तविक नाम विजय पाटिल था। दरअसल विजय के एक और साथी थे सुरेन्द्र। दोनों साथ मिलकर संगीत के क्षेत्र में काम करते थे। सुरेन्द्र को राम और विजय को लक्ष्मण कहा जाता था। 1976 में सुरेन्द्र की मृत्यु के बाद विजय ने अपना नाम राम लक्ष्मण ही रख लिया और इसी नाम से बॉलीवुड में प्रसिद्ध हुए।

राम और लक्ष्मण एक साथ ऑर्केस्ट्रा बैंड में काम करते थे। सत्तर के दशक में फिल्म अभिनेता और प्रोड्यूसर दादा कोंडके दोनों को बॉलीवुड में लेकर आए। इसके बाद से राम लक्ष्मण राजश्री प्रोडक्शन समेत कई फिल्म निर्माताओं से के साथ जुड़ गए और कई हिट फिल्मों में अपना संगीत दिया।   

चौकीदार की हत्या, 1 बच्चा गायब: पूर्णिया की महादलित बस्ती को 150+ की भीड़ ने लगाई आग; रिजवी, शाकिद, इलियास मुख्य आरोपित

बिहार के पूर्णिया जिले के बायसी थाना के खपड़ा पंचायत के मझुवा गाँव में मुस्लिम भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया। यहाँ भीड़ ने न सिर्फ महादलित बस्ती के एक दर्जन से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया बल्कि बस्ती के चौकीदार की पीट-पीट कर हत्या कर दी। वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और दमकल की मदद से आग पर काबू पाया गया। 

चौकीदार भरत राय ने इस ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि मौके पर उनके साथ एक और साथी दिनेश राय मौजूद थे। उन्होंने बताया कि दिन में थोड़ी बहुत मारपीट हुई थी, जिसके बाद प्रशासन ने आकर उनको समझा कर मामला शांत कर दिया था, लेकिन रात 11:30 बजे लगभग 150 की तादाद में कई गाँवों से भीड़ वहाँ पर पहुँची। यह भीड़ पूरब, उत्तर और दक्षिण, तीनों दिशाओं से आकर वहाँ पर इकट्ठा हुई थी।

भरत राय के मुताबिक सबके हाथ में पेट्रोल का गैलन था। वे घरों पर पेट्रोल डालते गए और आग लगाते गए। इस दौरान जब आदमी घर से निकल कर भागने लगे तो उसे खींच-खींच कर भीड़ मारने लगी। आरोपितों के हाथ में तलवार, फरसा, बलम, लाठी-डंडे, पेट्रोल और मोटरसाइकल वाला चेन भी था। मोटरसाइकिल वाले चेन से भी कई आदमियों को घायल किया गया है।

भरत राय ने बताया कि काफी निर्दयतापूर्वक लोगों को मारा गया है। इसमें एक आदमी की मृत्यु हो गई और लगभग 20-25 आदमी जख्मी हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। अम्बेदकर सेवा समिति के कार्यकारी अध्यक्ष सह अधिवक्ता इन्द्रदेव पासवान ने दलित युवक की हत्या के मामले के आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी की माँग की है।

जली हुई महादलित बस्ती, साभार: KOSHI ALOK NEWS

चौकीदार ने बताया कि उनके एक साथी दिनेश राय ने भागने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने उन्हें खींच लिया और फरसा से वार कर उनका सिर फाड़ दिया। सिर फटने के बाद जब वह बेहोश होकर नीचे गिर पड़े, तो आरोपितों ने लाठी-डंडे से उनके पूरे शरीर पर वार किया। भीड़ ने दिनेश राय की मोटरसाइकल भी जला दी। भरत राय का कहना है कि भीड़ ने उन पर भी हमला किया लेकिन वो वहाँ से किसी भी तरह से भागने में सफल रहे। भीड़ ने न महिला देखा, न बच्चा और न बूढ़ा… सबकी निर्ममता से पिटाई की।

जली हुई महादलित बस्ती और घायल महिला, साभार: KOSHI ALOK NEWS

उनका कहना है कि महादलितों के पीडब्ल्यूडी में बसने के आक्रोश में भीड़ ने ऐसा किया है। महादलित यहाँ पर लगभग 30 सालों से रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि भीड़ को भड़का कर लाया गया था। इसके बाद एक मीटिंग की गई और हमले को अंजाम दिया गया। मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और बाकी की तलाश जारी है।

जली हुई महादलित बस्ती, साभार: KOSHI ALOK NEWS

भरत राय ने बताया कि जो लोग आए थे, वो मुस्लिम समुदाय के थे। उन्होंने बताया कि रिजवी, शाकिद और इलियास का यह व्यक्तिगत मामला था। बाकी लोग उसके समर्थन में बस इसलिए आए थे, क्योंकि वह मुस्लिम है। पूरी भीड़ मुस्लिम समुदाय की मदद करने के लिए आई थी। यही तीन लोग बाकी लोग को भड़का कर लाए थे। उन्होंने बताया कि प्रशासन दलितों के समर्थन में है। उन्हें मुआवजा दिया गया है और फिर से दिया जाएगा।

जली हुई महादलित बस्ती और वहाँ के स्थानीय, साभार: KOSHI ALOK NEWS

पीड़ितों ने बताया कि उनके साथ छुआछूत किया जाता है। उन्हें वहाँ से हट जाने के लिए कहा जाता है। 2015 में भी इस तरह की घटना घटी थी। उसमें भी कई घर जला दिए गए थे। कई लोगों को घायल कर दिया गया था। पिछले 24 अप्रैल को भी लोगों के बीच मारपीट और आगजनी हुई थी।

उन्होंने बताया कि यहाँ पर लगभग 60-70 महादलितों का घर है, जिसमें से 14-15 घरों को जला दिया गया है। पुलिस के गाड़ी की आवाज सुनकर भीड़ वहाँ से भागी। घटना में 3 साल का एक बच्चा भी लापता बताया जा रहा है। जिस दिन घटना हुई, वो बच्चा उसी दिन से गायब है। बताया गया कि 60 नामित और बाकी अज्ञात पर मामला दर्ज हुआ है।

एसपी दयाशंकर ने बताया कि इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल पीड़ित पक्ष का बयान लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जमीन विवाद को लेकर यह घटना हुई है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। जल्द आरोपित पुलिस की गिरफ्त में होंगे।

स्थानीय चैनल कोशी आलोक न्यूज की खबर आप यहाँ देख सकते हैं।

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में 11.5 लाख कोविड वैक्सीन की खुराक बर्बाद

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन, कई जगहों में वैक्सीन की बर्बादी भी हो रही है। राजस्थान इस मामले में सबसे आगे है। पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में कुल 11.5 लाख (करीब 7 फीसदी) वैक्सीन के डोज खराब हो गए हैं।

चुरू जिले में सबसे ज्यादा 39.7 प्रतिशत वैक्सीन बर्बाद हो गई है। इस मामले में 24.60 फीसदी के साथ हनुमानगढ़ दूसरे नंबर पर है, जबकि 17.13 प्रतिशत वैक्सीन भरतपुर में बेकार हो गई है। वैक्सीन बर्बादी के मामले में यह जिला तीसरे नंबर पर है। वहीं 16.71 फीसदी वैक्सीन को बर्बाद करके कोटा चौथे नंबर पर है।

वैक्सीन की बर्बादी पर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय मंत्री और जोधपुर के सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने सीएम को फटकार लगाई और कहा कि इससे राज्य में कोरोना का संकट घटने की बजाय बढ़ा है।

शेखावत ने कहा, “प्रधानमंत्री बार-बार कह रहे हैं कि कोविड के टीके की एक खुराक बर्बाद करना किसी व्यक्ति को जीवन कवच से वंचित करने जैसा है, लेकिन जिनकी लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने की आदत ही बन चुकी हो तो उन्हें कैसे सुधारेंगे?” उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि आखिर वैक्सीन की बर्बादी के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए?

केंद्रीय मंत्री ने वैक्सीन की बर्बादी को अपराध बताते हुए कहा, “ये लोगों के जीवन का सवाल है इसलिए इस कृत्य नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने आगे कहा कि ये गहलोत की जिम्मेदारी है कि वे अपराधियों को सजा दें, अन्यथा हम ये मान लें कि इसके लिए मुख्यमंत्री खुद ही जिम्मेदार हैं।

वैक्सीन की बर्बादी पर पीएम मोदी कर चुके हैं आगाह

कोरोना संक्रमण के कारण वैक्सीन की कमी के बीच इसकी बर्बादी को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (20 मई 2021) को सभी जिलाधिकारियों से कोविड -19 टीकों की कम से कम बर्बादी सुनिश्चित करने का आग्रह किया था।

पीएम ने कहा था, “वैक्सीन की बर्बादी एक गंभीर मुद्दा है। एक भी खुराक बर्बाद करने का मतलब है किसी के जीवन को ढाल देने से वंचित कर देना।”

उन्होने कहा था, “जब आप सभी को टीके दिए जाते हैं, तो हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह बर्बाद न हो। आप सभी को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में इस पर नजर बनाकर रखना चाहिए।”

वैक्सीन विरोधी अभियान चला रही कॉन्ग्रेस

भारत सरकार द्वारा कोरोना वायरस से निजात पाने के लिए चलाए जा रहे वैक्सीनेशन अभियान के खिलाफ पिछले कुछ महीनों से गैर-एनडीए दल खासकर कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी टीकाकरण अभियान पर ओछी राजनीति कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस भाजपा शासित केंद्र सरकार की छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रही है। वह कोरोना की वैक्सीन बनाने वाली भारतीय कंपनियों के खिलाफ कैंपेनिंग करते हुए विदेशी कंपनियों के महंगे टीकों का प्रचार कर रही है। इसी साल जनवरी में केंद्र सरकार ने कोरोना के इलाज के लिए भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के एमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दे दी थी। लेकिन उसे बदनाम करने के लिए कॉन्ग्रेस ने अभियान चलाया।

अपने प्रोपेगैंडा के शुरुआती चरण में कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर, मनीष तिवारी और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव जैसे कॉन्ग्रेस नेताओं ने टीकाकरण के अभियान को ही सीमित कर दिया। उसके इस प्रोपागैंडा में वामपंथी मीडिया कॉन्ग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहा है और लोगों में वैक्सीन के प्रति भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।

PM मोदी की तस्वीर से एलर्जी, कॉन्ग्रेसी CM की तस्वीर OK है: छत्तीसगढ़ में वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट

कोविड टीकाकरण सर्टिफिकेट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर पर उठ रहे सवालों के बीच झारखंड के बाद अब कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ ने राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तस्वीर के साथ 18-44 आयु वर्ग के टीकाकरण के लिए अपना प्रमाणपत्र जारी करना शुरू कर दिया है।

राज्य सरकार ने टीकाकरण के लिए 18-44 वर्ष के बच्चों को पंजीकृत करने के लिए अपना स्वयं का पोर्टल CGTEEKA शुरू किया था। बता दें कि केंद्र द्वारा टीकाकरण के लिए शुरू किए गए पोर्टल CoWin के बजाय राज्य में  CGTEEKA के माध्यम से टीकाकरण प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इस पर कोई मुद्दा होना चाहिए। जब भारत सरकार पैसा और वैक्सीन मुहैया करा रही थी तो उन्होंने प्रधानमंत्री की तस्वीर रखी। अगर राज्य सरकार कुछ कर रही है तो हम उसकी जगह मुख्यमंत्री की तस्वीर का इस्तेमाल करेंगे। जब केंद्र ने वित्तीय बोझ उठाने की जिम्मेदारी राज्यों पर छोड़ दी है और राज्य सरकारें अपने स्वयं के टीके खरीद रही हैं, तो वे अपने स्वयं के टीकाकरण प्रमाण पत्र क्यों नहीं जारी करें? टीकाकरण प्रमाण पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर क्यों होनी चाहिए?”

प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर पर मुख्यमंत्री बघेल की तस्वीर का उपयोग करने के कॉन्ग्रेस सरकार के दृष्टिकोण का विरोध करते हुए, छत्तीसगढ़ के भाजपा नेता प्रतिपक्ष धर्मलाल कौशिक ने कहा, “केंद्र की योजनाओं पर अनुचित क्रेडिट लेना छत्तीसगढ़ सरकार का एक स्टैंडर्ड प्रैक्टिस है। हालाँकि यह केंद्र का निर्णय है कि राज्यों को टीका खरीदना चाहिए, लेकिन जब 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लिए टीकाकरण अभियान केंद्र का निर्णय है, तो राज्यों को प्रधानमंत्री की तस्वीर का उपयोग करने पर विचार करना चाहिए।”

गौरतलब है कि यही कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियाँ कोरोना वैक्सीन सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी की तस्वीर पर बवाल कर रहे थे और अब खुद अपने मुख्यमंत्री की तस्वीर लगा रहे हैं। बता दें कि पिछले दिनों टीएमसी और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) ने भी सर्टिफिकेट पर से पीएम मोदी की तस्वीर हटाने की माँग की थी।

कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि ब्रिटेन में पढ़ाई कर रहे उनके छोटे बेटे ने वैक्सीन की पहली डोज ली। जो सर्टिफिकेट मिला, उसमें कहीं कोई बोरिस जॉनसन की तस्वीर उस पर नहीं था, जैसा हमारे देश में हो रहा है। जयराम रमेश ने इसके जरिए पीएम मोदी पर निशाना साधा।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस पर पलटवार करते हुए ट्वीट करके लिखा कि देश के लगभग सभी हॉस्पिटल छोटे या बड़े सबके नाम की शुरुआत नेहरू, इंदिरा और राजीव गाँधी के नाम से ही है। जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के अधिकांश कस्बों और शहरों में, न केवल टीकाकरण केंद्र बल्कि हर बीमारी का इलाज, बड़े या छोटे, नेहरू, इंदिरा या राजीव गाँधी के नाम पर वाले अस्पतालों में हो रहा है।

खेल मंत्री किरण रिजिजू ने जयराम रमेश पर तंज कसते हुए लिखा, “जयराम जी, भारत में हमारा एक ही वंश काफी है। पूर्वोत्तर के राज्यों को भी नहीं बख्शा! आप कॉलेजों से लेकर विश्वविद्यालयों तक, इमारतों से लेकर संग्रहालयों तक, पार्कों से लेकर खेल के मैदानों तक केवल एक परिवार के नाम देख सकते हैं।”

वहीं जयराम रमेश के इस ट्वीट पर अन्य लोगों ने भी तरह-तरह के कमेंट किया और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी का जिक्र किया। एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “वेम्बली स्टेडियम लंदन, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम दिल्ली, हीथ्रो एयरपोर्ट लंदन, इंदिरा गाँधी एयरपोर्ट दिल्ली, गेटविक एयरपोर्ट लंदन, राजीव गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैदराबाद।”

लेखिका शेफाली वैद्य ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “मेरी बेटी जो 12 साल की है वो मुझसे पूछती है कि क्यों हमारे देश के अधिकांश एयरपोर्ट और सड़कों का नाम इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के नाम पर है। जयराम जी इसका जवाब शायद आप दे पाएँ।”

‘नहीं लेंगे’ – तेजस्वी यादव कोविड सेंटर के लिए अपना घर दे रहे थे, बिहार सरकार का आया दो टूक जवाब

बिहार सरकार ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सरकारी आवास में बने कोविड केयर सेंटर को टेक ओवर करने से मना कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने शुक्रवार (21 मई 2021) को कहा कि आवासीय परिसर का प्रयोग रहने के लिए किया जाता है। इसलिए यहाँ कोरोना मरीजों का इलाज संभव नहीं है।

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि सरकार के पास पर्याप्त संख्या में खाली ऑक्सीजन युक्त बेड उपलब्ध हैं, जहाँ मरीजों का इलाज किया जा सकता है। बेड की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार काम कर रही है।

नेता प्रतिपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को पत्र लिखकर कोविड केयर सेंटर को टेक ओवर करने की अपील की गई थी। इसको लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने अपना जवाब भेजा है।

स्वास्थ्य मंत्री ने तेजस्वी से आग्रह किया कि वो भी अपने माध्यम से आम जनों को बताएँ कि सरकारी अस्पतालों में इलाज की समुचित व्यवस्था की गई है, ऐसे में वो अपना इलाज अस्पतालों में कराएँ। साथ ही लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करते हुए महामारी के समय में सरकार की मदद करें।

मंत्री ने पाँच पन्नों के पत्र में आगे कहा, ”कोरोना महामारी से निपटने के लिए सरकार तत्परता पूर्वक कार्रवाई कर रही है। चिकित्सा क्षेत्र में आधारभूत संरचनाओं का विकास हो या जरूरी दवाइयों की व्यवस्था, जाँच लैब हो या संक्रमितों के इलाज हेतु ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था, सरकार ने सभी काम किए हैं।”

उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की टीम गठित कर उपचार के लिए प्रोटोकोल तैयार किया गया है। होम आइसोलेशन के मरीजों को जिला नियंत्रण कक्ष से टेलीकंसल्टेशन की सुविधा दी जा रही है।

गौरतलब है कि तेजस्वी यादव के अपने पटना के सरकारी आवास को कोविड केयर सेंटर में तब्दील करने का ऐलान करने के बाद बिहार में अरसे तक विपक्ष के नेता और उपमुख्यमंत्री रहे सुशील मोदी कई सवाल उठाए थे।

उन्होंने कहा कि सरकारी आवास की जगह तेजस्वी यादव ने अवैध तरीके से पटना में अर्जित दर्जनों मकानों में से किसी को कोविड अस्पताल क्यों नहीं बनाया? साथ ही उन्होंने कहा कि तेजस्वी के परिवार में दो बहनें एमबीबीएस डाक्टर हैं। ऐसे में कोरोना महामारी से निपटने के लिए उनकी सेवाएँ क्यों नहीं ली गईं?