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किस अस्पताल को कितना और कब ऑक्सीजन… CM योगी ने लॉन्च किया ‘मॉनिट्रिंग सिस्टम’: लाइव ट्रैक होगी हर जानकारी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार (अप्रैल 23, 2021) को प्रदेश के लिए ‘ऑक्सीजन मॉनिट्रिंग सिस्टम’ की शुरुआत की। इस सिस्टम के तहत 24*7 (सातों दिन, 24 घंटे) पूरे राज्य भर में होने वाली ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम की लाइव मॉनिट्रिंग होगी ताकि जरूरत के हिसाब से प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन दी जाए।

मॉनिट्रिंग सिस्टम पर हर जिले के अस्पतालों में जरूरत पड़ने वाली ऑक्सीजन की न केवल लाइव जानकारी होगी बल्कि इसके साथ उन अस्पतालों को आवंटित ऑक्सीजन लेकर जा रहे वाहन और उस वाहन की हाइवे पर लाइव लोकेशन आदि सबकी ट्रैकिंग होगी।

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने इस संबंध में बताया कि यह प्लेटफॉर्म प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, चिकित्सा शिक्षा विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, परिवहन एवं गृह विभाग के सहयोग से रोडिक कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड (Rodic Consultants Pvt Ltd) द्वारा तैयार किया गया है। इस कंपनी के प्रतिनिधि ऑक्सीजन की आवश्यकता वाले सरकारी एवं निजी अस्पतालों में मौजूद रहकर समयबद्ध रूप से ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे। 

अवस्थी ने जानकारी दी कि इसके लिए वेब पोर्टल लिंक तैयार किया गया है, जिसको ऑक्सीजन सप्लाई चेन से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा प्रयोग किया जा सकेगा। कंपनी के प्रतिनिधि अस्पताल की ऑक्सीजन आवश्यकता का विवरण पोर्टल पर अपलोड करेंगे। 

पोर्टल पर ऑक्सीजन सप्लाई में लगे वाहनों की ऑनलाइन उपस्थिति को ट्रैक करते हुए निकटस्थ वाहन को अस्पताल के लिए रवाना किया जाएगा। इससे एक ओर अस्पतालों की ऑक्सीजन की माँग जल्द पूरी होगी, वहीं निर्धारित वाहन के पहुँचने में लगने वाले समय की भी बचत होगी।

उनके अनुसार, ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले वाहनों की रियल टाइम लोकेशन इस पोर्टल पर उपलब्ध होगी। कंपनी के प्रतिनिधि रिफिल स्टेशन पर भी उपस्थित रह कर इस काम में सहयोग करेंगे। इसके अलावा यह भी कोशिश की जा रही है कि हर ऑक्सीजन वाहन पर ड्राईवर की पर्याप्त संख्या हों, ताकि बिना किसी परेशानी के उनका आवागमन हो सके।

HC में जयपुर गोल्डन अस्पताल के वकील ने केजरीवाल को ठहराया जिम्मेदार, अस्पतालों को उनके हाल पर छोड़ने से हुईं मौतें

राष्ट्रीय राजधानी में ऑक्सीजन की कमी पर दिल्ली उच्च न्यायालय में जयपुर गोल्डन अस्पताल का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील सचिन दत्ता ने दिल्ली सरकार पर कोरोना के हालात को सँभालने में अक्षमता और ढीले रवैये का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली के अस्पतालों में लोग मर रहे थे तो दिल्ली सरकार के अधिकारी उपलब्ध नहीं होते थे।

हाईकोर्ट में दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे मेहरा को सचिन दत्ता ने बताया। उन्होंने कहा, “कल पूरे दिन हमने आपके अधिकारियों को बुलाया, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया।”

गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना वायरस के तेज होते संक्रमण के बीच जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल्स ने ऑक्सीजन सप्लाई की कमी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए वरिष्ठ वकील दत्ता ने आरोप लगाया कि अस्पतालों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया, जिस कारण से मरीजों को अपनी जान गँवानी पड़ी।

जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल की तरफ से कोर्ट में सचिन दत्ता ने कहा, “कल 25 लोगों की मौत हो गई थी, क्योंकि हमारे पास ऑक्सीजन नहीं था। हम सचमुच साँस के लिए लड़ रहे हैं।”

इस मामले में जब जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली सरकार से पूछा कि ऑक्सीजन की आपूर्ति और ऑक्सीजन प्लांट्स से संपर्क के लिए क्या प्रयास कर रही है, तो अधिवक्ता वर्मन ने जवाब दिया कि वे ऑक्सीजन की बढ़ती माँग को पूरा करने के प्रयासों को तेज करेंगे।

इस पर वकील दत्ता ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यदि उनका घर दिल्ली सरकार के अंतर्गत होता तो मैं इस तरह की कठिन परिस्थितियों में नहीं होता।

वरिष्ठ वकील सचिन दत्ता ने दिल्ली सरकार के शुक्रवार (23 अप्रैल 2021) के उस आदेश का कड़ा विरोध किया, जिससे राजधानी में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हुई थी। दत्ता ने कहा, “आप अस्पतालों को विश्वास में रख सकते हैं, ताकि वे परिवारों को इसकी जानकारी दे सकें।”

‘फाँसी पर चढ़ा देंगे’ – केजरीवाल सरकार की निष्क्रियता पर दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी, हर एक सवाल पर लताड़ा

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ऑक्सीजन आपूर्ति के मुद्दे पर लगातार घिरती नजर आ रही है। केजरीवाल सरकार पर जहाँ एक ओर यह आरोप लग रहा है कि उन्होंने 8 ऑक्सीजन के प्लांट स्थापित करने के लिए मिले फंड के बावजूद एक ही ऑक्सीजन प्लांट बनवाया, वहीं दिल्ली उच्च न्यायालय भी लगातार इस मुद्दे पर केजरीवाल सरकार से प्रश्न कर रहा है। शनिवार को न्यायालय ने यहाँ तक कह दिया कि यदि किसी अधिकारी ने ऑक्सीजन की आपूर्ति पर रुकावट डाली तो उसे फाँसी पर चढ़ा देंगे।

जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल ने दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। न्यायालय में हॉस्पिटल की ओर से वरिष्ठ वकील सचिन दत्ता ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार की अक्षमता पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के अधिकारी उस समय नदारद रहे, जब अस्पताल में मरीज ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हैं।

दिल्ली सरकार की ओर से पक्ष रखने वाले वकील राहुल मेहरा से बहस करते हुए वरिष्ठ वकील दत्ता ने कहा कि उन्होंने शुक्रवार (23 अप्रैल) को पूरा दिन दिल्ली सरकार के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयत्न किया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

न्यायालय में दिल्ली सरकार की ओर से स्वास्थ्य सचिव आशीष वर्मा पेश हुए। न्यायालय ने दिल्ली सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा कि राजधानी में ऑक्सीजन की आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए कुछ कदम हैं, जो उठाए जाने चाहिए थे लेकिन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। सरकार की ओर से दलीलें पेश कर रहे एडवोकेट मेहरा से न्यायालय ने कहा कि टैंकर इत्यादि के माध्यम से ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति के लिए कुछ प्रक्रियाएं हैं लेकिन जब तक दिल्ली सरकार कुछ नहीं करेगी, तब तक कुछ भी नहीं होगा।

ऑक्सीजन के टैंकरों पर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने कहा कि सभी राज्य ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए टैंकरों की व्यवस्था कर रहे हैं, दिल्ली की सरकार भी करे। अरविंद केजरीवाल पर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने कहा कि वह खुद एक प्रशासनिक अधिकारी थे, ऐसे में उन्हें यह पता होना चाहिए कि इस पूरी प्रक्रिया में कैसे काम किया जाना चाहिए।

न्यायालय ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव आशीष वर्मा से कहा कि एक बार दिल्ली के लिए ऑक्सीजन अलॉट हो गई तो आपको लगा कि अब सब आपके दरवाजे पर आ जाएगा लेकिन ऐसे काम नहीं होता है। न्यायालय ने दिल्ली सरकार से प्रश्न किया कि क्या उन्होंने ऑक्सीजन संग्रहित करने के लिए टैंकरों का प्रबंध किया?

दिल्ली सरकार की निष्क्रियता पर उच्च न्यायालय की टिप्पणी

केंद्र सरकार के अधिकारी पीयूष गोयल ने न्यायालय को यह भी सूचना दी कि राउरकेला से ऑक्सीजन की आपूर्ति तैयार थी लेकिन उसे लेने के लिए कोई भी नहीं था। गोयल ने कहा कि बाकी राज्य इस मामले पर सहयोग कर रहे हैं, दिल्ली को भी करना होगा।  

केंद्र सरकार के अधिकारी का बयान

महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल की याचिका पर सुनवाई के दौरान भी दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऑक्सीजन के संकट पर तल्ख टिप्पणी की। जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि संक्रमण की इस सुनामी में यदि कोई भी अधिकारी ऑक्सीजन की आपूर्ति में बाधा डालता है तो उसे हम फाँसी पर चढ़ा देंगे। न्यायालय ने दिल्ली सरकार से कहा कि यदि स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की गलती है तो उनकी शिकायत केंद्र से करें, जिससे उन पर कार्रवाई की जा सके।   

सुमना हिमस्खलन में अब तक 8 की मौत, सेना ने 384 लोगों को किया रेस्क्यू: BRO का एक कैंप भी मलबे में दबा

उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ स्थित सुमना में ग्लेशियर टूट गया है। इसके बाद से सेना की सूर्य कमांड बचाव अभियान चला रही है। सेंट्रल कमांड ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि यहाँ अब तक 8 लोगों के शव मिल चुके हैं। 384 लोगों को रेस्क्यू किया गया है, जिसमें से 6 की हालत गंभीर है। फिलहाल सेना का बचाव कार्य लगातार जारी है।

सूर्य कमांड की ओर से जानकारी दी गई है कि हिमस्खलन की चपेट में बीआरओ का एक कैंप भी आ गया है। रेस्क्यू किए गए लोग सुमना में बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन के कैंप में थे। ग्लेशियर के टूटने के बाद रात में ही सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था, लेकिन खराब मौसम के चलते इसे दोबारा से सुबह 1:30 बजे से शुरू किया गया।

हादसे के वक्त चल रहा था सड़क निर्माण का कार्य

सीमा सड़क संगठन के कर्नल मनीष कपिल ने जानकारी दी है कि सुमना में सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था। उन्होंने ग्लेशियर के टूटने को बर्फबारी का कारण माना है। जोशीमठ-मलारी हाईवे ग्लेशियर के मलबे के नीचे दब गया है।

रिपोर्ट के मुतबिक, चमोली में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाली सुमना-2 के पास हो रही लगातार बर्फबारी के कारण ग्लेशियर टूटने से यह हादसा हुआ है। फिलहाल भापकुंड से सुमना तक के रास्ते की सफाई की जा रही है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इस प्राकृतिक आपदा पर कहा है कि इस संबंध में मैने जिला प्रशासन को अलर्ट जारी कर दिया है। उन्होंने कहा कि वो लगातार बीआरओ और जिला प्रशासन के संपर्क में हैं। साथ ही दसरी परियोजनाओं को भी रोकने के आदेश दिए गए हैं।

इससे पहले 7 फरवरी 2021 को भी चमोली में ग्लेशियर टूटने की जगह से धौलीगंगा नदी में बाढ़ आ गई थी। उस दौरान 54 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों लोग लापता हो गए थे।

देश का पूरा तंत्र हर जगह ऑक्सीजन पहुँचाने में लगा है… लेकिन NDTV के पत्रकार को यह सिर्फ दिखावा लगता है

कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने देश को झकझोर कर रख दिया है। कई राज्यों में चरमराते स्वास्थ्य ढाँचे को सँभालने की जिम्मेदारी भी केंद्र सरकार के कंधों पर है। राज्य सरकारें वेंटिलेटर से लेकर ऑक्सीजन और दवाओं की कमी से निपटने के लिए और जल्द से जल्द स्वास्थ्य ढाँचे को मजबूत करने के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम कर रही हैं।

दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में ऑक्सीजन के लिए हाहाकार है, जिसको लेकर इन राज्यों ने मोदी सरकार से मदद की गुहार लगाई है। रेल मंत्रालय इसके बाद से इन राज्यों की सहायता करने के लिए देश भर में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) और ऑक्सीजन सिलेंडर का परिवहन कर रहा है। दरअसल, भारतीय रेलवे विभिन्न राज्यों में ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए खास ऑक्सीजन एक्सप्रेस (OXYGEN Express) ट्रेनें चला रहा है।

18 अप्रैल को रेल मंत्रालय ने एक बयान में यह जानकारी दी थी कि महाराष्ट्र से खाली टैंकर चलेंगे जो विशाखापत्तनम, जमशेदपुर, राउरकेला, बोकारो से ऑक्सीजन उठाएँगे। रेलवे ने बताया कि टेक्निकल ट्रायल्स के बाद खाली टैंकरों को कलमबोली, बोइसर से मुंबई भेजा जाएगा और फिर वहाँ से वाइजाग, जमशेदपुर, राउरकेला और बोकारो भेजा जाएगा। वहाँ इनमें लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन भरी जाएगी। इसके अलावा रेल मंत्रालय ने मंजूरी देते हुए कहा कि राज्य में विभिन्न स्थानों तक लिक्विड ऑक्सीजन को रोल ऑन-रोल ऑफ सेवा के तहत पहुँचाया जाएगा।

इस पूरी जानकारी को लेकर 24 अप्रैल की सुबह, NDTV के पत्रकार संकेत उपाध्याय ने ट्विटर पर कहा कि वह ऑक्सीजन एक्सप्रेस होने की बात से इनकार करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यह इन नेताओं का एक पीआर स्टंट था। वो भी अपनी वाहवाही लूटने के लिए।

उन्होंने कहा कि एक ऑक्सीजन एक्सप्रेस 19 अप्रैल को सुबह 8:05 बजे मुंबई से रवाना हुई और 22 अप्रैल को सुबह 4:15 बजे वाइजाग पहुँची। हैरानी की बात यह थी कि ऑक्सीजन एक्सप्रेस अपने उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर रही थी, क्योंकि यह एक बेहद धीमा प्रयास था।

संकेत उपाध्याय के ट्वीट के अनुसार, ऑक्सीजन एक्सप्रेस को मुंबई से वाइजाग तक पहुँचने में 2 दिन का समय लगा। यह उसके लिए थोड़ा धीमा था। जब लोग मर रहे हैं, तो देश भर में यात्रा करने में मदद करने वाली कोई भी चीज निश्चित रूप से धीमी लग सकती है। हालाँकि, अगर संकेत उपाध्याय वास्तव में एक पत्रकार थे, तो अनुमान लगाने की बजाय जनता के सामने सटीक तथ्यों को पेश करने का प्रयास करते। यहाँ ध्यान देना होगा कि इस संकट के समय में देश में ऑक्सीजन की कमी से निपटने के लिए सरकार द्वारा ऑक्सीजन एक्सप्रेस एकमात्र उपाय नहीं है।

सच्चाई तो यह है कि रेलवे की ऑक्सीजन एक्सप्रेस जितनी तेजी से यात्रा कर रही है, उतनी ही तेजी से आगे बढ़ रही है। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, मुंबई से वाइजाग तक पहुँचने के लिए ट्रेन के समय से उस दूरी को कवर किया जा सकता है, यह ऑक्सीजन टैंकर को ले जाने में लगने वाले समय से काफी कम है।

एक टैंकर को सड़क व ट्रेन द्वारा जाने में कितना समय लगेगा

एक ऑक्सीजन ट्रक केवल 11 घंटे ही सड़क पर हो सकता है और 72 घंटे में मुंबई से वाइजाग तक पहुँच सकता है, जबकि ऑक्सीजन ट्रेन दिन में 24 घंटे यात्रा कर सकती है और 48 घंटे में अपने गंतव्य स्थान तक पहुँच सकती है।

मालूम हो कि आज भारत के सामने सबसे बड़ा मुद्दा ऑक्सीजन की कमी को हर राज्य में पूरा करना है। इसलिए इसका वितरण आवश्यक है। जिंदल स्टील एंड पावर ने 21 अप्रैल को ट्विटर पर कहा था कि उनके पास उनके अंगुल प्लाँट में 500 टन से अधिक लिक्विड ऑक्सीजन है। लेकिन परिवहन के लिए कोई साधन नहीं है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (22 अप्रैल 2021) को देश में जारी ऑक्सीजन संकट को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। अधिकारियों के साथ हुई इस बैठक में पीएम मोदी ने कहा था कि ऑक्सीजन की जमाखोरी करने वालों पर राज्य सरकारें सख्त कार्रवाई करें। वहीं प्रधानमंत्री ने उत्पादन बढ़ाए जाने और वितरण में तेजी लाने पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जारी एक बयान के मुताबिक इस बैठक में प्रधानमंत्री ने ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ाने, उसके वितरण की गति तेज करने और स्वास्थ्य सुविधाओं तक उसकी पहुँच सुनिश्चित करने के लिए तेज गति से काम करने की आवश्यकता पर बल दिया।

बाबा रामदेव के पतंजलि में 83 कोविड संक्रमितों की खबर फर्जी, कोरोनिल पर NDTV की पत्रकार ने उड़ाई थी खिल्ली

गुरुवार (22 अप्रैल) को कई बड़ी मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा संचालित पतंजलि संस्थान में 83 व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं। इसके बाद वामपंथी और लिबरल गैंग ने बाबा रामदेव और उनके प्रसिद्ध उत्पाद कोरोनिल को निशाने पर लेना प्रारंभ कर दिया।

HW न्यूज नेटवर्क ने रिपोर्ट दी कि बाबा रामदेव के द्वारा संचालित पतंजलि संस्थान में 83 स्टाफ सदस्य कोरोनावायरस से संक्रमित हुए हैं। HW के द्वारा यह बताया गया कि संक्रमितों में से 46 पतंजलि योग पीठ, 9 अचार्याकुलम और 28 योग ग्राम में काम करते हैं। HW ने यह भी बताया कि संक्रमितों को हरिद्वार के पतंजलि परिसर में ही आइसोलेट किया गया है और बाबा रामदेव का भी टेस्ट किया जा सकता है।

HW News Network की खबर का स्क्रीनशॉट

ऐसी ही खबर News18 के हिन्दी संस्करण द्वारा चलाई गई। News18 की रिपोर्ट में हरिद्वार के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शंभू झा के हवाले से खबर दी गई कि 10 अप्रैल को 83 लोग कोरोनावायरस से संक्रमित हुए हैं।

News18 की खबर का स्क्रीनशॉट

बाबा रामदेव ने पतंजलि में 83 लोगों के कोरोना संक्रमित होने की खबरों को गलत बताया :

मीडिया में पतंजलि के 83 लोगों के संक्रमित होने की खबरों को निराधार बताते हुए बाबा रामदेव ने 23 अप्रैल को ट्विटर के माध्यम से बताया कि पतंजलि में कोई भी Covid-19 से संक्रमित मरीज नहीं है। उन्होंने बताया कि IPD में कुछ नए मरीज और अचार्याकुलम में प्रवेश लेने के लिए नए छात्र आए थे। पतंजलि में उनका टेस्ट किया गया जिनमें से 14 लोग संक्रमित निकले जिन्हें मुख्य परिसर से बाहर ही रखा गया।

बाबा रामदेव ने आगे कहा कि कोरोना वायरस संक्रमितों के विषय में जो बताया गया उसके अतिरिक्त सभी दावे अफवाह मात्र हैं। उन्होंने कहा कि वह रोजाना सुबह 5 से 10 बजे तक स्वास्थ्य और योग से जुड़े लाइव कार्यक्रम करते हैं। IPD, पतंजलि आयुर्वेद अस्पताल का एक हिस्सा है जो पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज के साथ बना हुआ है।

वामपंथी और लिबरल गिरोह ने बाबा रामदेव और कोरोनिल को लिया निशाने पर :

पतंजलि में 83 लोगों के कोरोनावायरस से संक्रमित होने की भ्रामक खबर सुनते ही कई प्रोपेगेंडाबाज ट्विटर पर जश्न मनाने पहुँच गए। इन वामपंथी, लिबरलों ने न केवल बाबा रामदेव को अपितु उनकी हर्बल दवा कोरोनिल को भी आड़े हाथों लेते हुए जमकर प्रोपेगेंडा फैलाया।

वामपंथी और प्रोपेगंडा फैलाने के लिए प्रसिद्ध चैनल एनडीटीवी की पत्रकार गार्गी रावत ने लिखा, “ओह नो, कोरोनिल वगैरह के बाद भी संक्रमित? क्या यह आपको सही में सुरक्षित नहीं रखती?” 

एनडीटीवी की पत्रकार गार्गी रावत के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

टाइम्स नाउ के पत्रकार निकुंज गर्ग ने भी लिखा, “इनका ईलाज कोरोनिल से किया जाना चाहिए।“

पत्रकार निकुंज गर्ग के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

कॉन्ग्रेस से शिवसेना में पहुँची पैराशूट नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “आशा है कि सभी सुरक्षित होंगे और अब पतंजलि को तुरंत ही कोविड की दवा के रूप में कोरोनिल को बेचना बंद कर देना चाहिए।“

शिवसेना की नेता प्रियंका चतुर्वेदी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इसके अलावा रिटायर्ड आईएएस सूर्य प्रताप सिंह और पत्रकार तबीना अंजुम ने भी इस झूठी खबर पर ट्वीट किया।

मात्र 14 लोगों के संक्रमित होने की खबर आने के बाद भी किसी ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया और न ही माफी माँगी। इससे तो यह स्पष्ट हो गया है कि वामपंथी और लिबरल गिरोह हमेशा ही बाबा रामदेव जैसे व्यक्ति और उनकी स्वदेशी आयुर्वेद तकनीकि और दवाओं का मजाक उड़ाता रहेगा। इन राजनैतिक गिद्धों के लिए स्वदेशी गौरव से संबंधित कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है, बजाय इनकी राजनैतिक और प्रोपेगेंडाबाजी महत्वाकांक्षाओं के।

माहवारी से 5 दिन पहले और 5 दिन बाद… न लें कोरोना वैक्सीन: बहन-भाभी-गर्लफ्रेंड सबको बताएँ यह बात – Fact Check

महावारी एक ऐसा विषय है, जिसे लेकर तमाम भ्राँतिया समाज में पहले से ही हैं। ऐसे में अब जब कोरोना का कहर टूटा है तो ऐसा कैसे हो सकता है कि इस विषय पर कोई नए तरह का दावा न हो! अभी हाल में सरकार ने कोरोना के कारण उपजे हालातों को देखते हुए 18 साल से ऊपर सभी नागरिकों को कोरोना वैक्सीन लगाने के निर्देश दिए। लेकिन इसी दौरान लड़कियों को खबरदार करने वाला एक मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

इस मैजेस में दावा किया गया कि 18 साल वालों के लिए 1 मई से वैक्सीनेशन चालू हो रहा है। लड़कियों के लिए ये बहुत जरूरी है कि वह अपनी माहवारी का समय देखते हुए वैक्सीन लें। संदेश में चेताया गया है कि पीरियड्स से 5 दिन पहले और 5 दिन बाद वैक्सीन न लें, क्योंकि इस बीच इम्युनिटी बहुत कम होती है।

इस संदेश में यह भी लिखा है कि वैक्सीन पहले आपकी इम्युनिटी घटाती है और फिर इम्युनिटी बिल्ड करती है। इसलिए पीरियड्स के समय यदि वैक्सीन ली तो संक्रमण होने के ज्यादा चांस हैं। इस वायरल संदेश में अंत में ये भी लिखा है कि इसे अपनी बहन, सहेली, परिजन या प्रेमिका के साथ शर्म न महसूस करते हुए शेयर करें।

यही संदेश ट्विटर पर कई महिलाएँ शेयर कर रही हैं। शायद उन्हें लग रहा है कि हर महिला तक ये बात पहुँचाना उनका दायित्व है। लेकिन इसी बीच पीआईबी ने इस संदेश का फैक्ट चेक किया है। पीआईबी के मुताबिक ये संदेश पूरी तरह से फेक है। 

पीआईबी ने फैक्ट चेक में लिखा, “सोशल मीडिया पर फर्जी पोस्ट शेयर हो रहा है, जिसमें दावा है कि महिलाओं को माहवारी के 5 दिन पहले या 5 दिन बाद वैक्सीन नहीं लेनी। ऐसी अफवाहों में न पड़ें! 18 वर्ष से ऊपर का हर व्यक्ति 1 मई के बाद वैक्सीन ले सकता है। रजिस्ट्रेशन 28 अप्रैल से शुरू होगा।”

पीआईबी के इस ट्वीट के बाद कई यूजर्स ने उन्हें इस स्पष्टीकरण के लिए आभार व्यक्त किया है। एक लड़की ने कहा है कि उसे इस मैसेज को देखने के बाद डाउट था लेकिन अब वो क्लियर हो गया।

बता दें कि कोरोना वायरस के बीच संसाधनों से लेकर वैक्सीन पर कई तरह के झूठ सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। कभी बताया गया कि कोविड-19 रोकने में मास्क अप्रभावी है तो कभी कहा गया वैक्सीन लेने के बाद मौते हो रही हैं। हालाँकि, सरकार इस बीच सभी अफवहों पर संज्ञान लेकर अपनी ओर से वास्तविकता बताती रही। पिछले साल से अब तक ऐसे तमाम झूठ कोरोना काल में फैले हैं। इनमें से 40 झूठों की लिस्ट आप लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

रमेश बनकर मुस्लिम युवक ने हिंदू लड़की से की शादी, बेटी पैदा होने के बाद कह रहा – ‘इस्लाम कबूल करो’

हरियाणा के फतेहादाबाद जिले से लव जिहाद की घटना सामने आई है। यहाँ के टोहाना कस्बे की रहने वाली एक हिंदू महिला के साथ एक मुस्लिम व्यक्ति ने अपना धर्म छिपाकर शादी की।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपित मुस्लिम युवक ने हिंदू बनकर पहले महिला से शादी की। इसके बाद जब उसे एक बेटी पैदा हुई तो आरोपित ने महिला पर हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल करने का दवाब बनाया।

जानकारी के मुताबिक, जब महिला को अपने पति की असलियत का पता चला तो उसने पुलिस से इसकी शिकायत की, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे आजिज आकर महिला शुक्रवार को उप सचिवालय के गेट पर धरने पर बैठ गई। महिला के धरने पर बैठने की खबर मिलते ही पुलिस प्रशासन के होश उड़ गए। आनन-फानन में पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।

जिले के एसपी ने महिला राजविंदर कौर को अपने ऑफिस में बुलाकर 2-4 दिन में इस मामले में सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। वहीं फतेहाबाद के डीएसपी ने सुभाष चंद्र ने कहा है कि पीड़िता की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए घटना की जाँच के लिए महिला थाना भेज दिया गया है। डीएसपी ने महिला की शिकायत दर्ज नहीं करने के आरोपित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की बात कही है।

रमेश बनकर मुस्लिम युवक ने की थी लव मैरिज

फतेहाबाद के टोहाना की रहने वाली राजविंदर कौर ने बताया कि 7 साल पहले उसने रमेश नाम के शख्स से लव मैरिज की थी। मंदिर में दोनों की शादी हुई थी। शादी के वक्त आरोपित ने अपना धर्म हिंदू बताया था। महिला ने बताया कि करीब साढ़े तीन साल पहले उसे बेटी पैदा हुई, तो उसने पति पर ससुराल ले चलने का दवाब बनाया, पति रमेश इस पर राजी नहीं हुआ।

राजविंदर कौर के मुताबिक किसी तरह से वह जब रमेश के परिवार तक पहुँचने में सफल हुई तो उसे पता चला कि वह एक मुसलमान है। इसके बाद से ही आरोपित ने महिला पर इस्लाम धर्म अपनाने का दवाब बनाना शुरू कर दिया। मना करने पर उसने महिला और उसकी साढ़े तीन साल की बच्ची को बीच सड़क पर छोड़ दिया।

पीड़िता ने बताया कि उसकी हालत इतनी खराब है कि वह कमाने खाने की स्थिति में नहीं है। फिलहाल, वह किराए के मकान में रहकर अपना जीवन काट रही है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके पति रमेश के जाल में उसे फंसवाने में स्थानीय लोगों का भी हाथ है, ऐसे में उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।

माँ और नाना की मौत की झूठी खबर फैलाने वालों पर योगी सरकार सख्त, यूपी पुलिस ने दर्ज की ऐसे प्रोपगेंडाबाजों पर FIR

कोरोना संक्रमण के कारण होने वाली हर मौत हृदयविदारक है। हर राज्य प्रशासन कोशिश में लगा है कि कुछ भी करके बिगड़ती स्थिति पर काबू पा लिया जाए। लेकिन इस बीच कुछ लोग ऐसे हैं जिनके लिए ये आपदा की घड़ी अवसर बन गई है। उन्हें कोई मतलब नहीं है कि एक-एक मौत की खबर आम जन की मनोस्थिति कितना बिगाड़ रही है। वह बस अपना प्रोपगेंडा चलाने में जुटे हैं। आज यूपी सरकार ने ऐसे ही प्रोपगेंडाबाजों को सबक सिखाने के लिए उनके विरुद्ध केस दर्ज किया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने ट्विटर पर बताया, “हम महामारी में बहुमूल्य मानव जीवन की क्षति पर गहरा खेद व्यक्त करते हैं और सोशल मीडिया पर शोकाकुल परिवार के सदस्यों की नाराजगी को समझते हैं। लेकिन इसी समय हमें कुछ फेक हैंडल्स के बारे में भी पता चला जो एक ही मैसेज को कॉपी पेस्ट कर रहे हैं।”

आगे यूपी पुलिस ने कहा, “ये दुर्भावनापूर्ण और सुनियोजित ढंग से उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिष्ठा खराब करने का प्रयास है। नोएडा पुलिस आरोपितों के विरुद्ध एफआईआर कर चुकी है और आगे अफवाह फैलाने वालों और इस मुश्किल घड़ी में पैनिक क्रिएट करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी।”

गौरतलब है कि देश में एक तरफ कोरोना की स्थिति बेकाबू होती जा रही है। वहीं दूसरी ओर ये प्रोपगेंडाबाज एक तरह के मैसेज शेयर करके आम जन के बीच पैनिक क्रिएट करने की कोशिश कर रहे हैं। उदाहरण के लिए कल स्वाति मालीवाल ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने बताया कि उनके नाना को जब नोएडा के शारदा अस्पताल में आधे घंटे तक एडमिशन नहीं मिला तो उनका देहांत हो गया। बाद में इसी ट्वीट को बिना स्वाति मालीवाल का नाम मेंशन किए तमाम लोगों ने शेयर कर दिया और कइयों पर अच्छे खासे रीट्वीट भी आए।

इसी प्रकार यूपी पुलिस द्वारा शेयर किए गए एक ट्वीट में देख सकते हैं कि अमन पटेल, अंकित पांडेय, अनुराग वर्मा और शोएब नाम के अकॉउंट से ये दावा किया गया कि उन सबकी माँ तीन घंटे तक लगातार तड़पीं और फिर छोड़कर चली गईं। सबने आखिर में सीएम योगी और पीएम मोदी को कोसा है। ट्वीट में देख सकते हैं कि एक-एक शब्द और इमोजी एक जैसा है, जिससे ये साफ नहीं है कि किसकी माँ का असली में देहांत हुआ और किसने सिर्फ़ सिस्टम को कोसने के लिए ऐसा प्रोपगेंडा रचा।

मालूम हो कि इस क्रम में सिर्फ़ आम सोशल मीडिया यूजर के नाम पर ये खेल नहीं खेला जा रहा बल्कि डॉक्टरों के नाम पर भी एक ही मैसेज वायरल करके एजेंडा सेट हो रहा है। उदाहरण के लिए नीचे स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि कई आईडी से एक ही बात कही गई है कि एम्स दिल्ली में संक्रमितों का इलाज करते हुए डॉक्टर खुद संक्रमित हो गई और अब यदि कुछ हुआ तो बस उनके बच्ची की देखभाल हो।

8 ऑक्सीजन प्लांट के लिए केजरीवाल सरकार ने लिया था पैसा, बनवाया मात्र 1: दिल्ली हाईकोर्ट से फटकार

शुक्रवार (23 अप्रैल 2021) को हुई बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वह कुछ राज्यों से बात करें और दिल्ली की ऑक्सीजन की समस्या हल करवाएँ।

हालाँकि, अरविंद केजरीवाल की आपदा में भी राजनीति करने की प्रवृत्ति के बीच केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि केंद्र सरकार ने पीएम केयर्स फंड से दिसंबर 2020 में ही केजरीवाल सरकार को ऑक्सीजन के लिए राशि मुहैया कराई थी। केंद्र सरकार द्वारा यह राशि दिल्ली में 8 PSA (Pressure Swing Absorption) ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए दी गई थी लेकिन केजरीवाल सरकार ने अब तक मात्र एक ऐसा ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया।  

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले पर केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है और कहा है कि सरकार के कुप्रशासन और अक्षमता के कारण आज राजधानी में ऑक्सीजन का संकट उत्पन्न हुआ है। न्यायालय ने सरकार से यह प्रश्न भी किया है कि केंद्र सरकार द्वारा फंड दिए जाने के बाद भी केजरीवाल सरकार अब तक मात्र एक PSA ऑक्सीजन प्लांट क्यों स्थापित कर पाई है?

उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि केंद्र सरकार के अधिकारी निपुण विनायक ने बताया कि दिल्ली में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफ़दरगंज अस्पताल में अभी तक PSA ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना हेतु साइट क्लियरेन्स नहीं दिया गया है। दो अस्पतालों में साइट क्लियरेन्स का काम पूरा हो गया है जहाँ 30 अप्रैल तक ऑक्सीजन संयंत्र के उपकरण स्थापित कर दिए जाएँगे।

न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि राज्य के बाकी अस्पताल भी केंद्र की योजनाओं के साथ सामंजस्य बैठाकर कार्य करें और अगली सुनवाई में इसकी रिपोर्ट न्यायालय को सौंपी जाए। न्यायालय ने यह भी कहा है कि केंद्र सरकार को प्रतिदिन के हिसाब से ऑक्सीजन आपूर्ति की स्थिति का आकलन करना चाहिए जिससे बेहतर तरीके से ऑक्सीजन की समस्या को सुलझाया जा सके। 

दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का एक भाग

पटपड़गंज का मैक्स अस्पताल ऑक्सीजन की भारी कमी को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय पहुँच गया था जिस पर न्यायालय ने तत्काल सुनवाई की थी। न्यायालय ने केंद्र को कहा था कि चाहे भीख माँगनी पड़े या चोरी करनी पड़ जाए लेकिन चिकित्सा उद्देश्यों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति की जानी चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा था कि यदि उद्योगों से ऑक्सीजन खरीदने से वो उद्योग बंद होते हैं तो उन्हें बंद हो जाने दीजिए लेकिन लोगों की जान ज्यादा कीमती है।  

प्रधानमंत्री के साथ बैठक में अरविंद केजरीवाल का झूठ :

एक ओर जहाँ दिल्ली के अस्पताल ऑक्सीजन की कमी से लगातार जूझ रहे हैं और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ऑक्सीजन की कमी का रोना रो रहे हैं, वहाँ यह खबर आ रही है कि शुक्रवार की बैठक से पहले उन्होंने केंद्र से कभी ऑक्सीजन के मसले पर बात ही नहीं की। प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक में केजरीवाल ने भारतीय रेलवे की ऑक्सीजन एक्सप्रेस का मुद्दा उठाया लेकिन भारतीय रेलवे ने भी यह बयान जारी किया है कि दिल्ली सरकार ने फिलहाल इस मुद्दे पर उनसे कोई भी चर्चा नहीं की है। 

रेलवे के द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि महाराष्ट्र की सरकार ने 15 अप्रैल को रेल मंत्रालय से रेल के द्वारा लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के परिवहन की संभावनाओं पर चर्चा की थी जिस पर विचार करते हुए रेलवे ने एक विस्तृत प्लान तैयार किया और 19 अप्रैल को पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस विशाखापट्टनम से मुंबई के लिए रवाना हुई।

ऑक्सीजन के टैंकरों को उतारने और चढ़ाने के लिए रेलवे ने मात्र 24 घंटों में रैम्प का निर्माण करवाया। ऑक्सीजन एक्सप्रेस के इस सफल परिचालन के बाद अन्य राज्यों ने भी ऑक्सीजन एक्सप्रेस के द्वारा ऑक्सीजन के परिवहन में रुचि दिखाई है जिनमें आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश शामिल है लेकिन रेलवे ने दिल्ली के द्वारा ऐसी किसी भी माँग की जानकारी नहीं दी है।