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8 ऑक्सीजन प्लांट के लिए केजरीवाल सरकार ने लिया था पैसा, बनवाया मात्र 1: दिल्ली हाईकोर्ट से फटकार

शुक्रवार (23 अप्रैल 2021) को हुई बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वह कुछ राज्यों से बात करें और दिल्ली की ऑक्सीजन की समस्या हल करवाएँ।

हालाँकि, अरविंद केजरीवाल की आपदा में भी राजनीति करने की प्रवृत्ति के बीच केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि केंद्र सरकार ने पीएम केयर्स फंड से दिसंबर 2020 में ही केजरीवाल सरकार को ऑक्सीजन के लिए राशि मुहैया कराई थी। केंद्र सरकार द्वारा यह राशि दिल्ली में 8 PSA (Pressure Swing Absorption) ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए दी गई थी लेकिन केजरीवाल सरकार ने अब तक मात्र एक ऐसा ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया।  

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले पर केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है और कहा है कि सरकार के कुप्रशासन और अक्षमता के कारण आज राजधानी में ऑक्सीजन का संकट उत्पन्न हुआ है। न्यायालय ने सरकार से यह प्रश्न भी किया है कि केंद्र सरकार द्वारा फंड दिए जाने के बाद भी केजरीवाल सरकार अब तक मात्र एक PSA ऑक्सीजन प्लांट क्यों स्थापित कर पाई है?

उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि केंद्र सरकार के अधिकारी निपुण विनायक ने बताया कि दिल्ली में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफ़दरगंज अस्पताल में अभी तक PSA ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना हेतु साइट क्लियरेन्स नहीं दिया गया है। दो अस्पतालों में साइट क्लियरेन्स का काम पूरा हो गया है जहाँ 30 अप्रैल तक ऑक्सीजन संयंत्र के उपकरण स्थापित कर दिए जाएँगे।

न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि राज्य के बाकी अस्पताल भी केंद्र की योजनाओं के साथ सामंजस्य बैठाकर कार्य करें और अगली सुनवाई में इसकी रिपोर्ट न्यायालय को सौंपी जाए। न्यायालय ने यह भी कहा है कि केंद्र सरकार को प्रतिदिन के हिसाब से ऑक्सीजन आपूर्ति की स्थिति का आकलन करना चाहिए जिससे बेहतर तरीके से ऑक्सीजन की समस्या को सुलझाया जा सके। 

दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का एक भाग

पटपड़गंज का मैक्स अस्पताल ऑक्सीजन की भारी कमी को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय पहुँच गया था जिस पर न्यायालय ने तत्काल सुनवाई की थी। न्यायालय ने केंद्र को कहा था कि चाहे भीख माँगनी पड़े या चोरी करनी पड़ जाए लेकिन चिकित्सा उद्देश्यों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति की जानी चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा था कि यदि उद्योगों से ऑक्सीजन खरीदने से वो उद्योग बंद होते हैं तो उन्हें बंद हो जाने दीजिए लेकिन लोगों की जान ज्यादा कीमती है।  

प्रधानमंत्री के साथ बैठक में अरविंद केजरीवाल का झूठ :

एक ओर जहाँ दिल्ली के अस्पताल ऑक्सीजन की कमी से लगातार जूझ रहे हैं और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ऑक्सीजन की कमी का रोना रो रहे हैं, वहाँ यह खबर आ रही है कि शुक्रवार की बैठक से पहले उन्होंने केंद्र से कभी ऑक्सीजन के मसले पर बात ही नहीं की। प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक में केजरीवाल ने भारतीय रेलवे की ऑक्सीजन एक्सप्रेस का मुद्दा उठाया लेकिन भारतीय रेलवे ने भी यह बयान जारी किया है कि दिल्ली सरकार ने फिलहाल इस मुद्दे पर उनसे कोई भी चर्चा नहीं की है। 

रेलवे के द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि महाराष्ट्र की सरकार ने 15 अप्रैल को रेल मंत्रालय से रेल के द्वारा लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के परिवहन की संभावनाओं पर चर्चा की थी जिस पर विचार करते हुए रेलवे ने एक विस्तृत प्लान तैयार किया और 19 अप्रैल को पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस विशाखापट्टनम से मुंबई के लिए रवाना हुई।

ऑक्सीजन के टैंकरों को उतारने और चढ़ाने के लिए रेलवे ने मात्र 24 घंटों में रैम्प का निर्माण करवाया। ऑक्सीजन एक्सप्रेस के इस सफल परिचालन के बाद अन्य राज्यों ने भी ऑक्सीजन एक्सप्रेस के द्वारा ऑक्सीजन के परिवहन में रुचि दिखाई है जिनमें आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश शामिल है लेकिन रेलवे ने दिल्ली के द्वारा ऐसी किसी भी माँग की जानकारी नहीं दी है।

जिस अस्पताल में जिंदा जल कर मर गए 13 मरीज, उसे NOC ही नहीं मिला था… महाराष्ट्र में ऐसे होता है सरकारी काम?

महाराष्ट्र में मुंबई के पालघर जिले के पश्चिम विरार स्थित विजय वल्लभ कोविड केयर सेंटर के आईसीयू में लगी भीषण आग से 13 मरीजों की मौत हो गई। बताया गया कि COVID-19 रोगियों की जहरीले धुएँ के साँस लेने से मृत्यु हो गई। उद्धव ठाकरे सरकार ने इस मामले की जाँच के आदेश भी दिए।

जाँच में जो बात सामने आई है, वो हैरान कर देने वाली है। विजय वल्लभ कोविड केयर अस्पताल में फायर ऑडिट किया गया था, लेकिन उसे अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं मिला था। मतलब ये कि अस्पताल फायर डिपार्टमेंट की एनओसी के बिना ही संचालित हो रहा था।

अस्पताल के मालिक, कर्मचारियों के खिलाफ FIR

मिरर नाउ के अनुसार, पुलिस ने अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज को जब्त कर लिया है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जिस वक्त ये हादसा हुआ, उस दौरान आईसीयू वार्ड में कोई स्टाफ था या नहीं। कहा जा रहा है कि जिस वक्त ये हादसा हुआ, उस दौरान आईसीयू में एक डॉक्टर और एक वार्ड ब्वॉय मौजूद था। हालाँकि, मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि जिस वक्त ये हादसा हुआ था, उस दौरान कोई भी कर्मचारी अस्पताल में मौजूद नहीं था।

मुंबई पुलिस ने अस्पताल के मालिक, प्रशासकों, डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304, 337, 338 और 34 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। हालाँकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

संजय कुमार पाटिल, डीसीपी (जोन 2) ने कहा, “एफआईआर में, नगरपालिका ने आरोप लगाया है कि अस्पताल ने जरूरी सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया था। इसी कारण यह हादसा हुआ। हमने दमकल विभाग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा है। हम पता लगा रहे हैं कि क्या मालिक के पास अस्पताल चलाने के लिए सभी जरूरी लाइसेंस हैं?”

विरार अस्पताल हादसा

रिपोर्टों के अनुसार, सुबह 3 बजे के बाद अस्पताल के एयर कंडीशनिंग आईसीयू में आग लगी थी। वहाँ 17 कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज किया जा रहा था। आग लगने के बाद वसई विरार निगम दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुँची और आग को बुझाया। हालाँकि, दमकल विभाग जब तक आग पर काबू पाता, तब तक 13 लोग अपनी जान गँवा चुके थे।

इस घटना के बाद, लोग मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सरकार की राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को हैंडल नहीं पाने को लेकर जमकर आलोचना कर रहे हैं।

ऑपइंडिया ने महाराष्ट्र में पिछले 4 महीनों में इस तरह की घटनाओं की रिपोर्टिंग की थी। राज्य सरकार की अक्षमता के कारण महाराष्ट्र में पिछले 4 महीनों में अस्पताल में हुए हादसों में कम से कम 57 लोगों की मौत हुई है।

वहीं महाराष्ट्र सरकार लोगों की आलोचनाओं से खुद को बचाने के लिए कोरोना संकट का ठीकरा केंद्र सरकार के सिर फोड़ रही है। जितनी उत्सुकता उद्धव सरकार ने केंद्र पर दोषारोपण करने में दिखाई है, उतनी उत्सुकता और जिम्मेदारी राज्य के अस्पतालों में होने वाली दुर्घटनाओं में नहीं दिखाई है। इतना सब कुछ होने के बाद भी उद्धव सरकार के राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने इस तरह की घटनाओं को कोई महत्व नहीं दिया है।

राधास्वामी सत्संग व्यास ने इंदौर में बनाया देश का दूसरा सबसे बड़ा कोविड केयर सेंटर: कोरोना से जंग में उतरे कई और मंदिर

देशभर में कोरोना की दूसरी लहर ने कहर मचा रखा है। ऐसे में देश के प्रतिष्ठित मंदिरों ने एक बार फिर से जनसेवा के लिए मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। राधास्वामी सत्संग व्यास ने मध्य प्रदेश के इंदौर में देश का दूसरा सबसे बड़ा कोविड सेंटर बनाया है।

इंदौर-खंडवा रोड पर बनाए गए इस कोविड सेंटर को जनसेवा के तहत तैयार किया गया है। यह प्रदेश का सबसे बड़ा कोविड सेंटर है, जिसे “माँ अहिल्या कोविड केयर सेंटर” नाम दिया गया है।

600 बिस्तरों वाले इस सेंटर में मरीजों के मनोरंजन की भी अच्छी व्यवस्था की गई है। आवश्यकता पड़ने पर अधिकतम यहाँ 6 हजार बिस्तरों की भी व्यवस्था की जा सकेगी। इसके परिसर में 10 बड़े एलईडी लगाए गए हैं, जिसमें रामायण, महाभारत के साथ ही आईपीएल का टेलीकॉस्ट भी किया जाएगा।

पंजाब केसरी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड सेंटर में गुरुवार (22 अप्रैल 2021) से मरीजों को भर्ती किया जाना शुरू हुआ। इस कोविड केयर सेंटर में 4 ब्लॉक बनाए गए हैं। इंदौर के चार बड़े अस्पताल बॉम्बे हॉस्पिटल, मेदांता, चोइथाराम अस्पताल और अपोलो इन चारों ब्लॉकों की निगरानी करेंगे।

यहाँ भर्ती होने वाले मरीजों की सुविधाओं का खासा ध्यान रखा गया है। मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम तो सेवा कार्यों के लिए राधास्वामी न्यास के स्वयंसेवक रहेंगे। यहाँ मरीजों को भर्ती करने के लिए शनिवार (24 अप्रैल 2021) से फोन नंबर 0731-2583838 पर सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक संपर्क किया जा सकेगा।

एसिम्टोमैटिक मरीजों को रखा जाएगा यहाँ

इंदौर स्थित प्रदेश के सबसे बड़े कोविड सेंटर में एसिम्टोमैटिक मरीजों को रखा जाएगा। ये वो मरीज हैं, जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं हैं या कम हैं। साथ ही जिन लोगों के घरों में आईसोलेशन की व्यवस्था नहीं है, उन्हें यहाँ रखा जाएगा।

दो ऑक्सीजन प्लांट भी तैयार किए जा रहे

इंदौर के कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया है कि कोविड केयर सेंटर में जनभागीदारी से करीब 2 करोड़ से अधिक की लागत से दो ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं, जिनकी क्षमता 850 लीटर प्रति मिनट की रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यहाँ मरीजों को हर तरह की सुविधाएँ मिलेंगी।

अन्य मंदिर भी जनमानस की मदद के लिए आगे आए

कोरोना के दौर में देश के कई मंदिरों ने जनता की मदद के लिए मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। ऑपइंडिया ने इसको लेकर शुक्रवार (23 अप्रैल 2021) को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसके मुताबिक, द्वारका के इस्कॉन मंदिर ने संकट के इस समय में जब दिल्ली में कई पाबंदियाँ लागू हैं, गरीबों तक भोजन पहुँचाने का फैसला लिया है। मंदिर से जुड़ी महिमा सब्बरवाल ने बताया कि ‘फ़ूड फॉर लाइफ’ के तहत ‘श्रवण कुमार सेवा’ का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत 15 हजार लोगों को इसके तहत डिब्बे में पैक करके भोजन पहुँचाया जा रहा है।

मुंबई के कांदिवली इलाके में स्थित पावन धाम जैन मंदिर में कोविड केयर अस्पताल बना दिया गया है। यहाँ 100 बेड्स हैं और हरेक बेड के लिए ऑक्सीजन का भी इंतजाम किया गया है। पावन धाम जैन मंदिर में स्टडी रूम, मेडिटेशन रूम और किचन सहित कई सुविधाएँ हैं। अब तक यहाँ धार्मिक कार्य ही होते आए हैं। इसी तरह से ओडिशा का जगन्नाथ पुरी मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, गुजरात के वड़ोदरा स्थित स्वामी नारायण मंदिर समेत कई अन्य मंदिर जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आए हैं।

किसी की माँ कोरोना संक्रमित होकर ठीक हो गईं… तो भी मोदी को नीचा दिखाने के लिए गिरोह बता रहा उसे फेक

भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर बेहद घातक साबित हो रही है। इसी बीच कई पत्रकार सोशल मीडिया पर न केवल नफरत, बल्कि फेक न्यूज फैला रहे हैं। जब तक कोई व्यक्ति मोदी सरकार से घृणा नहीं करता, तब तक उन्हें खुशी नहीं मिलती है। हाल ही में इसी तरह की एक घटना सामने आई है। दरअसल, दूरदर्शन (डीडी) के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने ट्विटर पर कोविड-19 संकट के बारे में अपना एक वाकया साझा किया, जिसको लेकर नवभारत टाइम्स के पत्रकार अवनीश मिश्रा ने उन पर अभद्र टिप्पणी है।

दूरदर्शन के पत्रकार श्रीवास्तव ने शुक्रवार (23 अप्रैल 2021) को ट्विटर पर लिखा, “मेरी माँ को कोरोना था, ऑक्सीजन लेवल 40% तक चला गया था। हम हॉस्पिटल भागे, वहाँ हालात देखे तो लगा भर्ती कराया तो अनहोनी होनी तय है। हमने ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर घर पर मँगाया, हिम्मत से दिन-रात परिवार ने सेवा की। अब वो कोरोना नेगेटिव हैं। पहले यह सब बताकर किसी को परेशान नहीं करना चाहता था।”

इस पर नवभारत टाइम्स के पूर्व पत्रकार अवनीश मिश्रा ने अपनी निम्न मानसिकता का परिचय देते हुए अशोक श्रीवास्तव के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि वह झूठ बोल रहे हैं कि उनकी माँ कोरोना संक्रमित हैं। उन्होंने कहा कि श्रीवास्तव मोदी सरकार का बचाव करने के लिए अपनी माँ का इस्तेमाल कर रहे। अवनीश मिश्रा के अनुसार चूँकि श्रीवास्तव “मोदी भक्त” हैं, इसलिए वे देश में मौजूदा ऑक्सीजन संकट से मोदी को दूर करने की कोशिश कर रहे थे।

उन्होंने ट्वीट किया, “मैं ये दावे के साथ कह रहा हूँ कि ये झूठ बोल रहे हैं। मोदी भक्ति में ये इतना डूब चुके हैं कि इन्हें परसेप्शन क्रिएट करने के लिए माँ का सहारा लेना पड़ रहा है।” अवनीश मिश्रा ने अपने विवादित ट्वीट में कहा कि अशोक श्रीवास्तव मोदी सरकार के बारे में ‘परसेप्शन’ बनाने के लिए अपनी ही माँ का इस्तेमाल कर रहे थे।

हालाँकि, श्रीवास्तव ने अपने ट्वीट में स्पष्ट रूप से बताया है कि वह वास्तव में अपनी माँ को अस्पताल लेकर गए थे, लेकिन वहाँ कोरोना मरीजों की स्थिति देखने के बाद उन्होंने महसूस किया कि वह घर पर ही अपनी माँ की बेहतर देखभाल कर सकते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति को खुशी होगी कि अस्पताल में बिना भर्ती हुए उनकी माँ इस घातक संक्रमण से उबर गईं। मालूम हो कि कोरोना 45 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों के लिए बेहद खतरनाक है।

मिश्रा के अनुसार, श्रीवास्तव मोदी सरकार के लिए एक परसेप्शन बनाने के लिए अपनी खुद की माँ का इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन यहाँ ध्यान देना होगा कि श्रीवास्तव ने अपने ट्वीट में देश की वर्तमान स्थिति पर कोई भी टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने यह भी नहीं कहा कि अस्पताल में बेड की कोई कमी नहीं है। उन्होंने तो केवल अपनी आप बीती ट्विटर पर साझा की है कि उनकी माँ कोरोना पॉजिटिव पाई गई थीं।

इन सब के बाद अशोक श्रीवास्तव भी नहीं रुके, उन्होंने भी मिश्रा को ट्वीट कर करार जवाब दिया है। उन्होंने लिखा, “ये पत्रकार है? ऐसे समय में भी नफरत फैला रहा है, ट्रोल कर रहा है। इसे ब्लॉक करना चाहता था, पर पहले इसे सबके सामने नंगा करना जरूरी है। तेरे इनबॉक्स में नंबर भेज रहा हूँ अपना। मेरे घर किसी डॉ. को लेकर आजा, सारी रिपोर्ट दिखाऊँगा और जाँच हो जाएगी। एक बाप की औलाद है तो भागना नहीं।”

इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट किया, “सुन बे चमन… मिश्रा तेरा इनबॉक्स बन्द है। मैं अपना ईमेल id भेज रहा हूँ, उस पर अपना नम्बर भेज तुझे सबूत भेजता हूँ, दुनिया के सामने नंगा करना जरूरी है और चाहे तो किसी डॉ. का नंबर भेज अपना जज बनाकर, वो फैसला कर देगा कौन झूठ बोल रहा है।”

बता दें कि देश को कोरोना वायरस और ऑक्सीजन संकट से बचाने के लिए भारतीय वायुसेना ने कमर कस ली है। गुरुवार (22 अप्रैल, 2021) को वायुसेना ने तीन खाली ऑक्सीजन कंटेनर को एयरलिफ्ट कर पश्चिम बंगाल के पानागढ़ पहुँचाया था। यहाँ से इन्हें भरने के बाद ऑक्सीजन की कमी का सामना कर रहे देश के अलग-अलग राज्यों में भेजा जाएगा। इस बात की जानकारी भारतीय वायुसेना के अधिकारी ने दी है। अधिकारी ने बताया कि वायुसेना ने इस काम में C-17 IL-76 हैवी लिफ्ट एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया है। 

‘ईसाई बन जाओ…’ – कोई पादरी नहीं, बीवी ही कर रही पति को प्रताड़ित, मना करने पर फाड़ डाले हिंदू धर्म की पुस्तकें

मध्य प्रदेश के इंदौर में बलपूर्वक धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शुक्रवार को पति को कथित रूप से पीटने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोप में महिला और उसके परिवार के 9 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।

पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता प्रकाश नागले (36 वर्षीय) ने आरोप लगाया है कि उसे ईसाई धर्म में परिवर्तन करने के लिए 50,000 रुपए का लालच दिया गया था। जब उसने धर्मांतरण करने से मना कर दिया तो उसकी पत्नी और ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट की। उन्होंने सभी धार्मिक पुस्तकों को भी फाड़ दिया। नागले ने बताया कि अनुपम ब्रदर नाम का एक शख्स 25 फरवरी 2021 से ही उस पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बना रहा है।

मामला प्रकाश में आने के बाद द्वारकापुरी थाना प्रभारी सतीश द्विवेदी ने कहा, “हमने धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2020 की धारा 3 और 5 के तहत 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। उन सभी पर दंगा करने, बलपूर्वक धर्मांतरण कराने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया गया है।”

पति-पत्नी के बीच आए दिन होता था विवाद

थाने के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पति-पत्नी के बीच आए दिन विवाद होता रहता था। इससे पहले पत्नी दो से तीन बार पति के खिलाफ मारपीट की रिपोर्ट दर्ज करवा चुकी है। पत्नी का कहना है कि नागले उसे और उसके बच्चे के साथ मारपीट करता है। हालाँकि, हमने ताजा मामला प्रकाश में आने के बाद शुक्रवार को नागले की पत्नी, 4 साले, साली उसके बेटों और सास-सुसर के खिलाफ मामला दर्ज कर किया है। इसकी जाँच जारी है।

मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2020

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2020 की धारा 3 में यह प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी दूसरे व्यक्ति को प्रलोभन, धमकी, विवाह या किसी अन्य जरिए से धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता है। यह दंडनीय अपराध है।

इसके लिए कम से कम एक वर्ष और अधिकतम 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के धर्म परिवर्तन किए जाने पर कम से कम 2 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की सजा है। सामूहिक धर्म परिवर्तन करने पर कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की सजा। पैतृक धर्म में वापसी को इस अधिनियम में धर्म संपरिवर्तन नहीं माना गया है। पैतृक धर्म वह माना गया है, जो व्यक्ति के जन्म के समय उसके पिता का धर्म था।

इसके अलावा, अधिनियम की धारा 5 में कहा गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति धारा 3 के तहत प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो उस व्यक्ति को एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, जो एक वर्ष से कम नहीं होगी लेकिन जो पांच साल तक बढ़ सकती है।

15 हिंदू परिवारों के 50 सदस्यों ने किया धर्म परिवर्तन

दरअसल, यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी धर्म परिवर्तन कराने की कोशिशों में जुटे कई ईसाई धर्म प्रचारकों को गिरफ्तार किया जा चुका है। धर्मांतरण के लिए विदेशी धन का इस्तेमाल देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए बड़ी चुनौतियों को जन्म दे रहा है।

इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने अगस्त 23, 2020 को एक शख्स को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली का 30 वर्षीय मनदीप कुमार एटा में रहता था, जहाँ वह लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश कर रहा था। रिपोर्ट में कहा गया था कि मनदीप कुमार ने अगस्त 22, 2020 को शिवसिंहपुर गाँव में हिंदू दंपती के घर पर उन्हें जबरन बाइबिल पढ़ाने की कोशिश की थी।

वहीं, बिहार के नवादा जिले में 8 फरवरी, 2020 को 15 हिंदू परिवारों के 50 सदस्यों ने धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपना लिया था। ईसाई मिशनरी अब नेपाल के कई ठिकानों से भारतीय सीमा क्षेत्र के ग्रामीण इलाके में मजबूती से दस्तक दे रहे हैं। इनका एकमात्र मकसद यही है कि ज्यादा से ज्यादा ईसाई धर्म को मानने वाले लोग बनें।

इसके अलावा पिछले साल अक्टूबर में केरल सरकार ने ‘सेक्युलर’ फरमान जारी किया था, “हिन्दू छोड़ ईसाई बन जाओ, नौकरियों का विशेष स्कोप है यानी हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई बनने वालों के लिए विशेष तौर पर सुरक्षित किए गए इन पदों का वेतन ₹45,800 से ₹89000 रखा गया था।

12 साल की लड़की को मालिक ने जला डाला… क्योंकि जल्दी घर जाने की माँग रही थी इजाजत, 2 गिरफ्तार

असम में नागाँव जिले के राहा शहर में दिल दहला देने वाली वारदात हुई। वहाँ गुरुवार (22 अप्रैल 2021) को कथित तौर पर 12 साल की कार्बी लड़की को जला दिया गया।

टाइम 8 की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्ची एक घर में काम करती थी और घर के मालिक से जल्दी घर जाने की इजाजत माँग रही थी। लेकिन, घर के मालिक ने इससे इनकार कर दिया और इसके बाद आरोपित ने नाबालिग पर मिट्टी का तेल डालकर उसे जिंदा जला दिया। सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है कि यह घटना गुरुवार दोपहर 2 बजे की है।

बताया जा रहा है कि मृतक बच्ची सुमिला रॉन्गंगपी बीते 5 साल से आरोपित मालिक के घर पर काम कर रही थी।

इस संबंध में नागाँव पुलिस ने दो संदिग्धों प्रकाश बोर्थाकुर और उसके बेटे नयनमोनी बोर्थाकुर को गिरफ्तार किया है। यह भी बताया गया कि वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में फास्ट ट्रैक जाँच की जा रही है।

वहीं इस घटना पर रोष व्यक्त करते हुए कार्बी स्टूडेंट्स यूनियन ने कहा, “हम कार्बी लड़की की निर्दयतापूर्वक हत्या की कड़ी निंदा करते हैं। वह असम के मोरीगाँव के रोहा में अपने एम्प्लॉयर के यहाँ बीते 5 साल से काम कर रही थी। हम आरोपित को मौत की सजा और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की माँग करते हैं। अगर असम सरकार दोषियों को सजा नहीं दिला पाती है तो हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।”

साभार: टाइम8

इस मामले में असम के पुलिस महानिदेशक ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि लड़की जिसके यहाँ काम करती थी, उसने इसे आत्महत्या बताया है। फिलहाल यह संदिग्ध है कि लड़की की हत्या कर उसे जलाया गया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में पुलिस अधीक्षक गौरव अभिजीत दिलीप ने जानकारी दी, “हमें एम्प्लॉयर से शुरुआती जानकारी मिली है कि मृतक लड़की ने आत्महत्या की है। प्रारंभिक जाँच के बाद हमारी टीम ने उसके दावे को संदिग्ध पाया है। “

पुलिस की ओर से जानकारी दी गई है कि लड़की के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। सोशल मीडिया पर मृतक लड़की की कथित तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसमें वह घुटने के बल सिर को जमीन पर टेके हुए है। इसके अलावा तस्वीरों में एक प्लास्टिक जार और माचिस भी देखी जा सकती है।

100 करोड़ वसूली मामले में अनिल देशमुख के खिलाफ CBI की FIR: 10+ जगहों पर हो रही छापेमारी

CBI ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह मामला मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के आरोपों से जुड़ा हुआ है। इसी संबंध में CBI कई जगह छापेमारी भी कर रही है।

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने अपने राज्य के गृह मंत्री (तब तक वो मंत्री पद पर थे) अनिल देशमुख के खिलाफ वसूली के आरोप लगाए थे। उन्होंने इसे लेकर हाई कोर्ट से CBI जाँच की माँग भी की थी। 5 अप्रैल को हाई कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई जाँच के आदेश दिए थे।

आदेश देते हुए हाई कोर्ट ने कहा था कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर जो आरोप लगाए गए हैं, वह बेहद गंभीर हैं। इसी वजह से मामले की जाँच निष्पक्ष होनी चाहिए, जिसके लिए CBI जाँच की माँग मंजूर की जाती है।

परमबीर सिंह को भी फटकार

मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटाए जाने के बाद परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक चिट्ठी लिखी थी। इसमें राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट देने का आरोप लगाया था।

इस पर बॉम्बे HC ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा है कि अगर पुलिस ऑफिसर होने के बावजूद किसी अपराध को लेकर FIR दर्ज नहीं कर रहे हैं तो इसका अर्थ है कि वो अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असफल रहे हैं।

26 कब्रों के ऊपर रेस्टोरेंट, मालिक हैं कृष्णन कुट्टी… ताजे फूल चढ़े कब्रों के बीच बैठ लोग खाते-पीते हैं

लोग कब्रिस्तान में लाशों को दफनाने या अपने करीबियों को श्रृद्धांजलि देने जाते हैं लेकिन अगर आप अहमदाबाद में हैं तो आप कब्रिस्तान में बने रेस्टोरेंट में लंच या डिनर करने भी जा सकते हैं।

पुराने अहमदाबाद के खमाशा इलाके में एक रेस्टोरेंट है जो कब्रिस्तान पर बना हुआ है, नाम है ‘द न्यू लकी रेस्टोरेंट’। यह अपनी तरह की एक अनूठी जगह है जहाँ कब्रों के बीच बैठकर लंच या डिनर किया जाता है। यह रेस्टोरेंट उस स्थान पर बना, जहाँ कभी कब्रिस्तान हुआ करता था। रेस्टोरेंट के मालिक कृष्णन कुट्टी ने रेस्टोरेंट के निर्माण के समय कब्रिस्तान को यथावत बने रहने देने का निर्णय किया। इसके लिए उन्होंने कब्रों के बीच बचे स्थान में ही बैठने का बंदोबस्त कर दिया।

रेस्टोरेंट में हैं 26 कब्र, कुछ सैकड़ों साल पुरानी :

वैसे तो कब्रिस्तान के पास से गुजरने में भी हालत खराब हो जाए लेकिन द न्यू लकी रेस्टोरेंट में लोग मजे से बैठकर खाना कहते हैं और चाय पर चर्चा करते हैं। इस जगह पर कुल 26 कब्र हैं। यहाँ आने वाले ग्राहक भी इन कब्रों के बीच बैठकर नाश्ता करने या खाना खाने में किसी प्रकार का कोई संकोच नहीं करते हैं। 

द न्यू लकी रेस्टोरेंट में कब्रों के बीच बैठे ग्राहक (फोटो : पत्रिका)

भारत की स्वतंत्रता के बाद इस प्राचीन कब्रिस्तान को केएच मोहम्मद और कृष्णन कुट्टी नायर ने खरीदा। उन्होंने यहाँ एक नीम के पेड़ के नीचे एक चाय का स्टॉल शुरू किया। चाय के अलावा वो एक क्रीम बन भी बेचा करते थे, जिसे ‘मस्का बन’ के नाम से जाना जाता था।

जल्दी ही उनकी मसाला चाय पूरे इलाके में चर्चित हो गई। बढ़ते ग्राहकों की सुविधा के अनुसार उन्होंने पेड़ के चारों ओर एक निर्माण कराया और रेस्टोरेंट शुरू किया। कृष्णन कुट्टी की मसाला चाय और मस्का बन की जोड़ी दूर-दूर से ग्राहकों को खींच कर लाने लगी। तब उन्होंने इसके अलावा और भी स्वादिष्ट व्यंजनों को अपने मेनू में जोड़ लिया।

पहले तो अहमदाबाद के लोग कब्रिस्तान में खाना खाने या चाय पीने से डरते थे लेकिन जब उन्हें यह पता चल कि यहाँ स्थित कब्रें 19 वीं सदी के लोगों की हैं, तब उनके मन से डर निकलता गया। आज भी प्रत्येक सुबह कब्रों को साफ किया जाता है और उन पर ताजे फूल चढ़ाए जाते हैं।

पेंटर एमएफ हुसैन थे रेगुलर कस्टमर

द न्यू लकी रेस्टोरेंट प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों में बराबर प्रसिद्ध है। दूर-दूर से अहमदाबाद आने वाले लोग भी इस रेस्टोरेंट में आते हैं और कब्रों के बीच बैठकर खाना खाने का अनुभव लेते हैं। यह जगह चित्रकार एमएफ हुसैन की कुछ पसंदीदा जगहों में से थी। हुसैन जब भी अहमदाबाद रुकते, इस रेस्टोरेंट में जरूर आते थे।

अहमदाबाद के द न्यू लकी रेस्टोरेंट की दीवार पर टँगी एमएफ हुसैन की पेंटिंग

एमएफ हुसैन रेस्टोरेंट के एक अन्य मालिक केएच मोहम्मद के दोस्त थे। नब्बे के दशक में उन्होंने लगातार इस रेस्टोरेंट में आना शुरू कर दिया था। 1994 में मसाला चाय और मस्का बन का स्वाद लेते हुए उन्होंने एक पेंटिंग बनाई थी, जो आज भी रेस्टोरेंट की दीवार पर टँगी हुई है। पेंटिंग में दो ऊँट, एक दुर्ग अथवा किले के जैसा कोई निर्माण और रेगिस्तान दिखाई देता है। पेंटिंग में लिखा हुआ है, “सिर्फ एक ही खुदा है, और वह है अल्लाह और मोहम्मद उनके पैगंबर हैं।“

महिला पुलिस अफसर का गला रेता, ‘अल्लाहु अकबर’ के लगाए नारे: फ्रांस के राष्ट्रपति ने बताया- इस्लामी आतंकवाद

फ्रांस में एक महिला पुलिस अफसर की गला रेतकर हत्या कर दी गई। घटना राजधानी पेरिस से 56 किलोमीटर दूर Rambouillet की है। 49 साल की महिला अफसर के गले पर दो वार किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मृतक अफसर की पहचान स्टेफनी के तौर पर बताई है। वह 13 और 18 साल की दो बेटियों की माँ थी। 36 वर्षीय हमलावर ट्यूनीशियाई मूल का था। पुलिस सूत्रों के अनुसार वह 2009 में गैरकानूनी तरीके से फ्रांस में दाखिल हुआ था। हालाँकि उसका कोई रिकॉर्ड पुलिस के पास नहीं था। हमले के बाद पुलिस फायरिंग में वह जख्मी हो गया और बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया। बीबीसी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि वह ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगा रहा था।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इसे आतंकी हमला करार दिया है। उन्होंने कहा कि फ्रांस इस्लामी आतंकवाद के आगे घुटने नहीं टेकेगा। इससे अब और सख्ती से निपटा जाएगा। प्रधानमंत्री जीन कास्टेक्स ने कहा है कि इस तरह की घटनाओं से हम हार नहीं मानेंगे। हम बेहद सख्ती से इन लोगों से निपटने को तैयार हैं। एंटी टेरर प्रॉसीक्यूटर जीन फ्रेंकोइस ने कहा कि यह बहुत घृणित घटना है। हम उन लोगों के सबक सिखाएँगे जो इसमें शामिल हैं। धुर दक्षिणपंथी नेता और चुनावों में मैक्रों की मजबूत प्रतिद्वंद्वी मैरीन ली पेन ने हमले के बाद कहा कि पुलिस को और अधिक सुरक्षित किए जाने की जरूरत है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “पुलिस का समर्थन करें, अवैध प्रवासियों को बाहर निकाले, इस्लामी कट्टरपंथ का खात्मा करें।” हमले के बाद आतंकरोधी जाँच शुरू कर दी गई है।

रिपोर्टों के अनुसार मृतक महिला एडमिनिस्ट्रिटिव अफसर थीं। हमले के वक्त वह लंच ब्रेक से वापस लौट रही थीं। चश्मदीदों के अनुसार हमलावर पुलिस स्टेशन के बाहर मोबाइल पर बात कर रहा था और उसने अफसर के सुरक्षा द्वार से बाहर आने का इंतजार किया।

गौरतलब है कि हाल के समय में फ्रांस में इस्लामिक आतंकवाद की कई घटनाएँ सामने आई हैं। शिक्षक सैमुअल पैटी को इस्लामी कट्टरपंथी अब्दुल्लाख ने सिर्फ इसीलिए मार डाला था, क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर अपनी कक्षा में पैगम्बर मुहम्मद के कार्टून्स दिखाए थे।

रेमडेसिविर की जगह कोरोना मरीजों को नॉर्मल इंजेक्शन लगाती थी नर्स, असली वाला कालाबाजारी के लिए प्रेमी को दे देती

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर मारामारी मची हुई है। इसका फायदा उठाकर कुछ तत्व कालाबाजारी में लगे हुए हैं। मध्य प्रदेश से इस इंजेक्शन के गोरखधंधे का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। भोपाल के एक अस्पताल की नर्स मरीजों की रेमडेसिविर इंजेक्शन चुराकर उसे अपने प्रेमी को ब्लैक मार्केट में बेचने के लिए दे देती थी।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल के जेके अस्पताल की एक नर्स मरीजों को नॉर्मल इंजेक्शन लगाकर, असली रेमडेसिविर बेचने के लिए अपने प्रेमी को दे देती थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब राजधानी की कोलार पुलिस ने इंजेक्शन की कालाबाजारी को लेकर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उसकी पहचान गिरधर कॉम्प्लेक्स, दानिशकुंज निवासी झलकन सिंह के तौर पर हुई। उसने बताया कि उसकी प्रेमिका शालिनी जेके अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ है। वह मरीज को नॉर्मल इंजेक्शन लगाकर असली उसे दे देती थी। मामले का खुलासा होने के बाद से आरोपित नर्स फरार है।

20-30 हजार रुपए में बिकता था एक इंजेक्शन

पुलिस की पूछताछ में आरोपित ने कबूल किया है कि उसकी प्रेमिका अस्पताल में मरीजों को लगाने के लिए मिलने वाले इंजेक्शन चोरी कर उसे दे देती थी। कोरोना संक्रमितों को वह नॉर्मल इंजेक्शन लगाती थी। एक इंजेक्शन को वह 20-30 हजार रुपए में बेचता था। यहीं नहीं आरोपित ने जेके अस्पताल के ही डॉक्टर शुभम पटेरिया को भी 13 हजार रुपए में रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचा था, जिसका उसे वर्चुअल पेमेंट भी किया गया था।

दोनों पर रासुका के तहत होगी कार्रवाई

भोपाल पुलिस के डीआईजी इरशाद वली ने कहा है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए धरपकड़ की जा रही है। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 389, 269, 270 समेत अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। डीआईजी ने ऐसे सभी आरोपितों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करने की बात कही है।

मरीज के परिजनों की वजह से हुआ गोरखधंधे का खुलासा

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपित झलकन ने जेके अस्पताल में ही भर्ती एक मरीज के परिजनों के साथ रेमडेसिविर को लेकर सौदा हुआ था। लेकिन इसके रेट पर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पा रही थी। इसी बीच कोरोना संक्रमित मरीज की मौत हो गई। इसके बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस को इसकी जानकारी दे दी। पुलिस ने इसके बाद घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।

इससे पहले राजस्थान के उदयपुर में एक डॉक्टर और एक एमबीबीएस छात्र को रेमडेसिविर (Remdesivir) इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए पकड़ा था। कोरोना वायरस से संक्रमित एक मरीज के परिजन की शिकायत पर पुलिस ने डॉक्टर मोहम्मद अबीर और और उसके साथी को गिरफ्तार किया था।