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हिंदू लड़के को डेट करने की सजा, पाकिस्तानी मुस्लिम लड़की को माता-पिता ने दी जान से मारने की धमकी: इटली पुलिस ने बचाया

कट्टरपंथी मुसलमान किस हद तक हिंदुओं से नफरत करते हैं इसका एक और उदाहरण इटली में दिखा है, जहाँ एक पाकिस्तानी लड़की को हिंदू लड़के से रिश्ता रखने की सजा मिली। ANSA की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार (8 अप्रैल) को उस लड़की को इटैलियन पुलिस इटली में ओरज्जो शहर के टस्कनी से बचाया। यहाँ हिंदू लड़के के साथ डेटिंग करने के मामले में लड़की को उसके ही घर में बंद कर दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम लड़की लगभग एक साल से एक हिन्दू लड़के को डेट कर रही थी। लेकिन, उसके माता-पिता को जैसे ही पता चला कि वो जिसे डेट कर रही है वो हिंदू है, उसके बाद उस पर कई तरह की पाबंदियाँ लगा दी गईं। पीड़िता के मुताबिक, उसे घर में नजरबंद रखा गया था। लड़की के माता-पिता ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया था और कभी-कभार ही उसे अभिभावकों की देखरेख में बाहर जाने की अनुमति मिलती थी।

वापस पाकिस्तान ले जाने की दी थी धमकी

लड़की के माता-पिता ने उसे धमकी दी थी कि अगर वो हिंदू लड़के से किसी भी तरह का संबंध रखती है, तो उसे वापस पाकिस्तान भेज दिया जाएगा। इतना ही नहीं मुस्लिम लड़की और उसके हिंदू दोस्त को उसके माता-पिता ने उनकी बात नहीं मानने पर जान से मारने की धमकी दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक घर में नजरबंदी के दौरान लड़की को कंप्यूटर के इस्तेमाल की इजाजत थी, जिसका उपयोग वो दूरस्थ शिक्षा के लिए करती थी।

ईमेल भेजने के बाद पुलिस ने लड़की को बचाया

घर में नजरबंदी के दौरान माता-पिता की बार-बार जान से मारने की धमकियों से तंग आकर लड़की ने कैराबिनिरी पुलिस को एक ईमेल कर दिया। हाउस अरेस्ट की सूचना मिलने के बाद लड़की के घर पहुँची पुलिस ने उसे मुक्त कराया।

माता-पिता की गिरफ्त से उसे मुक्त कराने के बाद पुलिस ने लड़की को चिल्ड्रेन होम में शिफ्ट कर दिया है। इस बीच पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि इस मामले में लड़की के भाइयों और पिता सहित परिवार के सदस्यों को आरोपित बनाया जा सकता है।

‘गुस्ताख-ए-नबी की इक सजा, सर तन से जुदा’: यति नरसिंहानंद के खिलाफ मुस्लिम बच्चों ने लगाए नारे, वीडियो वायरल

पैगम्बर मुहम्मद के खिलाफ विवादित बयानबाजी करने वाले डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद के खिलाफ सोमवार को मुस्लिम बच्चों ने ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए। दरअसल, पिछले हफ्ते आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर महंत की गर्दन काट देने की बात की थी। तब से लाखों मुसलमानों मुहम्मद के खिलाफ विवादित बयान देने के लिए यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग कर रहे हैं। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें छोटे बच्चे कथित ईशनिंदा के लिए महंत का सिर धड़ से अलग करने के लिए नारे लगाते हुए नजर आ रहे हैं।

ट्विटर पर वायरल हो रहे इस वीडियो में बच्चों के समूह को स्वामी यति नरसिंहानंद की निंदा करने के लिए कहा गया। ये बच्चे 7 या 8 साल से अधिक उम्र के नहीं दिखते हैं। वे स्वामी यति नरसिंहानंद के खिलाफ एक पोस्टर को हाथ में लेकर चलते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में बच्चे “गुस्ताख-ए-नबी की इक सजा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा” कहते हुए दिखाई दे रहे हैं। बच्चों ने नारे लगाए कि पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ बोलने वाले के लिए केवल एक ही सजा है और वह है उसका सिर धड़ से अलग कर देना चाहिए।

दरअसल, दिल्ली पुलिस ने आप विधायक अमानतुल्ला खान की शिकायत पर हाल ही में महंत नरसिंहानंद के खिलाफ मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को कथित तौर पर आहत करने के लिए प्राथमिकी दर्ज की थी। खान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि मैंने नरसिंहानंद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। कार्रवाई के बावजूद अमानतुल्ला खान की पोस्ट ने हिंदू पुजारी के जीवन को भारी जोखिम में डाल दिया है। जब से खान सोशल मीडिया पर शेयर की गई वीडियो वायरल हुई है, तब से हजारों मुस्लिम उनकी हत्या की वकालत कर रहे हैं।

बता दें कि इस मामले में दिल्ली पुलिस ने अमानतुल्लाह खान के खिलाफ भी FIR दर्ज की है। अमानतुल्लाह पर ये एफआईआर यति नरसिंहानंद सरस्वती का गला काटने की बात कहने के आरोप में दर्ज की गई है।

गौरतलब है कि शुक्रवार 9 अप्रैल 2021 को नमाज के बाद बड़ी संख्या में मुसलमान बरेली के इस्लामिया ग्राउंड में जमा हुए। इस दौरान उन्होंने यति नरसिंहानंद के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। मौलवियों ने म​हंत का सिर काटकर अलग करने के नारे लगाए और उनकी गिरफ्तारी को लेकर भाषण दिया। कई मुसलमानों ने ट्विटर पर घटना का वीडियो साझा किया, जहाँ उन्होंने यति नरसिंहानंद को ‘भगवा आतंकवादी’ बताया था।

उसी दिन मध्य प्रदेश की बालाघाट पुलिस ने शहर के जामा मस्जिद रोड में यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ पोस्टर लगाने वाले मुस्लिम समुदाय के 4 लोगों मतिन अजहरी, कासिम खान, सोहेब खान और रजा खान को गिरफ्तार किया था।

गौरतलब है कि एक वीडियो सामने आने के बाद से मुसलमान यति नरसिंहानंद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग कर रहे हैं। यति नरसिंहानंद ने हाल ही में प्रेस क्लब में अपने वक्तव्य में पैगंबर मोहम्मद के लिए विवादित टिप्पणी की थी। इसके अलावा इस्लाम धर्म के बारे में भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था।

बता दें, साल 2020 में फ्रांस में पैगंबर मुहम्‍मद के कार्टून विवाद में एक टीचर का मुस्लिम व्यक्ति ने सिर कलम कर दिया था। 2019 में हिंदू महासभा नेता कमलेश तिवारी की मुहम्मद की आलोचना करने उनके कार्यालय में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 2015 और 2016 की शुरुआत में लाखों मुसलमानों ने सार्वजनिक रूप से कमलेश तिवारी की हत्या के लिए भारत के कई शहरों में सड़कों पर उतरे थे। इस्लामी नेताओं, राजनेताओं और इमामों द्वारा हत्या के नारे लगाने वालों को प्रोत्साहित भी किया गया था।

कुम्भ और तबलीगी जमात के बीच ओछी समानता दिखाने की लिबरलों ने की जी-तोड़ कोशिश, जानें क्यों ‘बकवास’ है ऐसी तुलना

उत्तराखंड के हरिद्वार में 1 अप्रैल से कुंभ मेला चल रहा है। मेले के भव्य दृष्य को देखकर इंटरनेट पर लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं। दुर्भावनापूर्ण इरादे के साथ सोशल मीडिया पर सेक्युलरों ने कुंभ की तुलना निजामुद्दीन मरकज़ के तबलीगी जमात से की है।

जबकि दोनों ही घटनाओं में साफ मूलभूत अंतर है। बावजूद इसके देश के तथाकथित सेक्युलर फैब्रिक को बचाने के नाम पर सोशल मीडिया पर एक हताशा वर्ग इसे तबलीगी जमात से जोड़ने में लगा है। ये लिबरल-वामपंथी और कट्टरपंथियों का समूह गलत सूचनाओं के आधार पर इसे कोरोना नियमों का उल्लंघन साबित करते हुए अपना प्रोपेगेंडा सेट करने में लगा है।

उत्तराखंड सरकार ने कुंभ मेले के आयोजन को सख्त नियमों के पालन के साथ अनुमति दी है। यहाँ नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। मेले में आने से पहले लोगों को कोरोना के आरटी पीसीआर टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट होनी चाहिए, जो कि 72 घंटे से अधिक पुरानी न हो। यही कारण है कि इस वर्ष भीड़ पिछले वर्षों की तुलना में बहुत कम है।

इसके अलावा उत्तराखंड में प्रवेश करने के सभी रास्तों पर सरकार ने कोविड-19 टेस्ट सेंटर बनाए हैं। हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्री के पास या तो पहले से कोरोना नेगेटिव आरटी पीसीआर रिपोर्ट हो या स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसकी जाँच कराई जाएगी। हर की पौड़ी में सैनिटाइजर डिस्पेंसर लगाए गए हैं। इसके अलावा विशेष कोविड -19 आईसोलेशन सेंटर भी बनाए गए हैं।

मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की समयसीमा को भी आगे बढ़ाया जा सकता है। इसीलिए, कोरोना संक्रमण संभावित संक्रमण को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। जबकि पिछले साल मरकज निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात वालों ने ऐसी किसी भी सावधानी का पालन नहीं किया था।

वो महामारी का शुरुआती दौर था और उस दौरान कोरोना वायरस का फैलाव उतना नहीं था, जितना अभी है। जमातियों ने कोरोना के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया था, जिस कारण हजारों लोग संक्रमित मिले थे।

मरकजी जमातियों ने जानबूझकर संक्रमण के हालात को बदतर बनाने के लिए इसे छिपाए रखा। निजामुद्दीन मरकज के लोगों ने कोरोना वायरस को देशभर में फैलाया। अधिकारियों की अपील के बावजूद मरकजी सामने नहीं आए।

लेकिन, जब प्रशासन ने इन जमातियों को ट्रेस कर लिया तो इन्होंने हिंसा की, क्योंकि ये लोग खुद को आईसोलेट नहीं करवाना चाहते थे। यहाँ तक ​​कि जिन लोगों को अस्पतालों और आईसोलेशन सेंटरों पर रखा गया था, वहाँ भी इन शांतिदूतों ने घृणित आचरण का परिचय दिया था। इन्होंने नर्सों का यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की और डॉक्टरों पर संक्रमण फैलाने के उद्देश्य से थूका।

तबलीगी जमात की इन्हीं हरकतों की वजह से उनकी छवि पूरी तरह से नकारात्मक हो गई। अगर तबलीगी जमातियों का मामला केवल निजामुद्दीन के मरकज तक ही सीमित होता तो शायद लोगों की संवेदनाएं इनके साथ होतीं। लेकिन, इन्होंने गाजियाबाद के अस्पताल में बहुत ही घटिया हरकत की थी। ये न केवल पूरे अस्पताल में नग्न होकर घूमते थे, बल्कि महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ छेड़छाड़ की थी। जमातियों ने खुले में शौच किया और पूरे सरकारी तंत्र को चुनौती दे दी थी।

उदाहरण के तौर पर दिल्ली में कई बार जमातियों के स्वास्थ्यकर्मियों पर थूकने की घटनाएं सामने आईं। कानपुर में जमातियों ने अस्पताल के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया। कुछ स्थानों इन्होंने गोमांस तक की माँग की। ये कुछ घटनाएं हैं बाकी इनके कारनामों की फेहरिस्त बड़ी लंबी है।

इसके उलट कुंभ मेले में इस तरह की कोई भी घटना नहीं हुई है। यहाँ भक्त धार्मिक आयोजनों को देखने के लिए आते हैं और धार्मिक ज्ञान का लाभ उठाते हैं। जो लोग कुंभ जैसे पवित्र मेले की तुलना जमातियों से करते हैं उन्हें इनकी हरकतों के बारे में जानना चाहिए।

इसके अलावा इस बात के भी सबूत हैं कि कोरोना वायरस का संक्रमण बंद स्थानों की अपेक्षा खुली जगहों में काफी कम होता है। यह कहने की जरूरत नहीं है कि कुंभ मेले में भीड़ बाहर खुले आसमान के नीचे है। जबकि, मरकज निजामुद्दीन के मरकजी बिल्डिंग के अंदर थे।

इस जानकारी के जरिए दोनों घटनाओं में की जा रही झूठी समानता में अंतर बताया गया है। इस तरह की पूरी तुलना को ही लोग बकवास बता रहे हैं।

एंटीलिया मामले में गिरफ्तार सचिन वाजे का करीबी API रियाजुद्दीन काजी सस्पेंड, मनसुख की हत्या में भी है संदिग्ध

एंटीलिया बम विस्फोट मामले की जाँच के सिलसिले में एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद मुंबई पुलिस ने एपीआई रियाजुद्दीन काजी को निलंबित कर दिया है। कथित तौर पर निलंबन सोमवार (अप्रैल 12, 2021) को डीसीपी (स्थानीय शस्त्र) द्वारा जारी किया गया था। मामले में कथित रूप से शामिल होने के कारण काजी से कई बार पूछताछ की गई। एनआईए के एक अधिकारी ने मिड-डे को बताया, “वह न केवल पूरी साजिश का हिस्सा था, बल्कि यह बताने के लिए गवाह है कि उसने वाजे के निर्देशों पर सबूत कैसे नष्ट किए।”

विशेष लोक अभियोजक सुनील गोंसाल्वेस ने रविवार (अप्रैल 11, 2021) को विशेष एनआईए हॉलिडे कोर्ट को बताया कि रियाजुद्दीन काज़ी मामले में सह-साजिशकर्ता है। उन्होंने कहा, “वह साजिश की संरचना और डिजाइन जानता है।” 

उन्होंने कोर्ट से कहा, “8 मार्च को एनआईए को मामला सौंपने के बाद दोनों ने सबूतों को नष्ट करना शुरू कर दिया। काजी को पूरे मामले की अच्छी जानकारी थी क्योंकि स्कॉर्पियो, जिसका इस्तेमाल एंटीलिया के बाहर जिलेटिन की छड़ें लगाने के लिए किया गया था और जिसके बारे में विक्रोली पुलिस स्टेशन में चोरी का मामला दर्ज था, ठाणे में वाजे के अपार्टमेंट में पार्क किया गया था, लेकिन उसने कुछ नहीं बोला।”

फिलहाल काजी 16 अप्रैल तक राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की कस्टडी में है। सूत्रों के मुताबिक, NIA आज काजी को इस मामले में गिरफ्तार और मुंबई की तलोजा जेल में बंद सचिन वाजे के कुछ अड्डों पर ले जा सकती है। NIA का मानना है क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) में रहने के दौरान काजी अक्सर इन जगहों पर वाजे के साथ जाया करता था।

अपर पुलिस आयुक्त वीरेंद्र मिश्रा की ओर से बताया गया है कि NIA ने API रियाजुद्दीन काजी को एक्सप्लोसिव एक्ट में गिरफ्तार किया है। इसलिए रियाजुद्दीन काजी को अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया गया है। काजी की भूमिका स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या में भी संदिग्ध है। जाँच में सामने आया है कि एंटीलिया मामले में गिरफ्तार और मुंबई की तलोजा जेल में बंद सचिन वाजे के कहने पर ही रियाजुद्दीन ने इस केस से जुड़े सबूत मिटाने की कोशिश की थी।

इस मामले में NIA काजी से 15 मार्च, 16 मार्च, 17 मार्च, 20 मार्च, 23 मार्च, 26 मार्च और 27 मार्च को कई घंटे पूछताछ कर चुकी है। काजी की भूमिका शुरू से ही इस केस में संदिग्ध बताई जा रही थी। उसे सचिन वाजे का सबसे करीबी राजदार माना जाता है। इसलिए NIA को उसके पास से कई अहम सबूत मिल सकते हैं।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस के पूर्व अधिकारी सचिन वाजे ने BARC के अधिकारियों से 30 लाख रुपए की रिश्वत ली थी। वाजे ने ये रिश्वत गिरफ्तारी का डर दिखाकर ली थी। रिश्वत का ये पैसा फर्जी कंपनियों में जमा कराया गया था और बाद में वाजे के दोस्त ने हवाला के जरिए अपने पास मँगाया था। जाँच में ये भी खुलासा हुआ था कि पूछताछ के नाम पर वाजे ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के अधिकारियों को अपने पास बुलाता था और उन्हें दफ्तरों के बाहर घंटों बैठाता था। वाजे ने ये कहकर रिश्वत ली थी कि अब वह उन अधिकारियों के परेशान नहीं करेगा।

ब्लैक लाइव्स मैटर की सह-संस्थापक ने खरीदा ₹10 करोड़ का घर, आलोचकों का ट्विटर कर रहा अकाउंट लॉक

ब्लैक लाइव्स मैटर की सह-संस्थापक पैट्रिस खान कुल्लर (Patrisse Khan-Cullors) इन दिनों खासा चर्चा में हैं। उन्होंने करीब 10.5 करोड़ रुपए (14 लाख डॉलर) का घर खरीदा है। इसको लेकर जो भी उनकी आलोचना कर रहे हैं ट्विटर उनका अकाउंट लॉक कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल्लर द्वारा खरीदे गए घर के बारे में विभिन्न आउटलेट्स सहित dirt.com ने लिखा था। घर खरीदने के लिए कुल्लर की काफी आलोचना की गई। साथ ही उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने ब्लैक लाइव्स मैटर आँदोलन का इस्तेमाल अपने व्यक्तिगत हितों को साधने के लिए किया।

कई ट्विटर यूजर्स ने dirt.com में प्रकाशित लेख को सोशल मीडिया पर शेयर किया था। इसको लेकर ट्वीटर ने उनके अकाउंट को लॉक कर दिया था। ट्विटर ने कहा कि हमने यह कदम निजी जानकारी पोस्ट करने के कारण उठाया था। इसके अलावा जब एक खेल पत्रकार और बीएलएम के आलोचक जेसन व्हिटलॉक आलोचकों में शामिल हुए, तो उनका ट्वीट हटाकर उनके अकाउंट को भी लॉक कर दिया गया।

अधिकांश आलोचकों ने बीएलएम की सह-संस्थापक और स्यंभू मार्क्सवादी को लेकर कहा कि पिछले साल भारी मुनाफे के बाद उन्होंने इतना महँगा घर खरीदा। कुल्लर BLM की अन्य सह-संस्थापक जनाया खान की पार्टनर हैं।

उन्होंने एक बेस्टसेलर बुक भी प्रकाशित किया है। इसमें उनके जीवन का एक संस्मरण और इसकी अगली कड़ी के बारे में बताया गया है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने हाल ही में वार्नर ब्रदर्स के साथ ओरिजनल प्रोग्रामिंग प्रोड्यूस करने के लिए एक आकर्षक सौदे पर हस्ताक्षर किए। जो Harper’s BAZAAR सहित विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित किया गया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने लॉस एंजिल्स में मालीबू से कुछ ही दूरी पर एक सुनसान सड़क पर कुल्लर ने 14 लाख डॉलर का घर खरीदा था। घाटी के नजारों के साथ 2,370 वर्ग फुट के घर बेहद शानदार है। इसमें बड़ी सी छत रोशनदान और बहुत सारी खिड़कियाँ हैं। Topanga Canyon homestead, जिसमें एक चौथाई एकड़ में दो घर शामिल हैं, अब तीसरा घर कुल्लर का होगा। ऐसा लॉस एंजिल्स के सार्वजनिक रिकॉर्ड में बताया जा रहा है।

ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन

ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन अमेरिका के अलावा यूरोप लैटिन अमेरिका और ब्रिटेन में लगभग 2013 से चल रहा है। दरअसल, इन देशों में गोरे और काले लोगों के बीच रंगभेद नीति अपनाई जाती है, जिसमें काले लोगों को दबाया जाता है। उन्हें छोटी सी गलती होने पर बेवजह मौत के घाट उतार दिया जाता है। इस निर्मम अपराध को रोकने के लिए काले लोगों ने ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन का प्रारंभ किया था, जो वर्तमान में भी चल रहा है।

500 बेड का आइसोलेशन वार्ड, रसोई में बन रहा 2,000 के लिए भोजन: संत गजानन मंदिर आया महाराष्ट्र में मदद को सामने

भारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या हर दिन के साथ बढ़ती जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, बीते 24 घंटे में देश में कुल 1,68,912 नए केस दर्ज किए गए। जबकि 904 लोगों की मौत हुई है, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। देश में इस वक्त सबसे बुरी हालत महाराष्ट्र की है, जहाँ बीते दिन 60 हजार से अधिक केस दर्ज किए गए। 

देश में बढ़ते कोरोना कहर को देखते हुए महाराष्ट्र के सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों में से एक संत गजानन मंदिर सेवा के लिए सामने आया है। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगाँव के संत गजानन महाराज मंदिर को भक्तों के लिए भक्तों द्वारा सेवा के अपने अद्वितीय मॉडल के लिए जाना जाता है। 

अब, मंदिर अपने सभी संसाधनों के साथ कोविड -19 के खिलाफ लड़ाई में शामिल हो गया है। यह मंदिर 22 मार्च से श्रद्धालुओं के लिए बंद है। इसे चलाने वाले ट्रस्ट ने शेगाँव में 2 बड़े भवनों को सौंप दिया है, जिसमें बुलढाणा जिला कलेक्टर का विशाल सामुदायिक रसोई भी शामिल है। यहाँ उन्होंने कोरोना संदिग्धों और रोगियों के लिए 500-बेड के अलग-अलग आइसोलेशन परिसर बनाए हैं।

वहीं सामुदायिक रसोई 2,000 लोगों के लिए दोपहर और रात का भोजन तैयार कर रही है। ज्यादातर प्रवासी मजदूर बुलढाणा जिले के विभिन्न स्कूलों / कॉलेजों में शरण लिए हुए हैं। खाना मुफ्त में दिया जाता है।

बुलढाणा के जिला कलेक्टर सुमन रावत चंद्रा ने कहा, “हमने गजानन महाराज मंदिर ट्रस्ट से दो सुविधाओं की माँग की। उन्होंने सहजता से उन्हें प्रदान किया। हमने उन्हें 500 बेड तक की क्षमता के साथ क्वारंटाइन में बदल दिया है। जिले भर में हमने विभिन्न स्थानों पर लगभग 4,000 बिस्तरों की पहचान की है।”

बता दें कि बुलढाणा जिले में अब तक कोविड -19 के 17 पॉजिटिव मामले दर्ज किए हैं और एक की मौत हो गई है। इस जिले में मामले शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं। शेगांव, देउलगाँव राजा, चिखली और खामगाँव तहसील के गाँवों से 10 से अधिक मामले हैं। परिणामस्वरूप, जिले भर में संस्थागत क्वारंटाइन सुविधाओं की आवश्यकता है। बुलढाणा में सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज भी नहीं है। कलेक्टर ने कहा, “हमने पूरे जिले की जरूरत को पूरा करने के लिए गैर सरकारी संगठनों से अपील की और हमें अच्छा समर्थन मिल रहा है।”

करोना के नए मामले इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं कि इस समय मुंबई में 6 लाख से ज्‍यादा लोग होम क्‍वारंटाइन हैं। बीएमसी के मुताबिक, फिलहाल शहर में करीब 90 हजार एक्टिव केस हैं। इनमें से 75 हजार बिना लक्षणों के हैं उनकी हालत स्थिर है। ऐसे लोगों की संख्या पिछले कुछ दिनों में तेजी से बढ़ी है। इसी के साथ उन लोगों की संख्या भी बढ़ी है जो होम आइसोलेशन में रहना चाहते हैं। कुछ हफ्ते पहले ऐसे 3.11 लाख थे, जबकि फरवरी में होम आइसोलेशन में महज 99 हजार लोग थे। लेकिन इस समय होम आइसोलेशन में 6.10 लाख लोग रह रहे हैं।

बीते दिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रदेश की कोविड टास्क फोर्स के साथ मीटिंग की। टास्क फोर्स ने राज्य में कम से कम 14 दिन और 21 दिन तक का संपूर्ण लॉकडाउन लगाने की माँग की है। हालाँकि, अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। लेकिन राज्य के जिस तरह के हालात हैं, उस हिसाब से महाराष्ट्र ऐसे ही लॉकडाउन की ओर बढ़ता दिख रहा है।

‘भारत को इस्लामी मुल्क बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे सभी मुस्लिम, अब घोषित हो हिंदू राष्ट्र’: केरल के 7 बार के MLA ने लव जिहाद भी कबूला

केरल के विधायक PC जॉर्ज ने राज्य में ‘लव जिहाद’ की वास्तविकता को न सिर्फ स्वीकार किया है, बल्कि ये भी कहा है कि भारत को अब ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश के सभी मुस्लिम मिल कर भारत को एक इस्लामी मुल्क बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है। उन्होंने केरल के इडुक्की स्थित थोडुपुझा में ये बातें कही।

उन्होंने आदिवासियों के कल्याण के लिए कार्य करने वाली NGO ‘HDRC इंडिया’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत को तुरंत ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित किया जाना चाहिए, क्योंकि मुस्लिम समाज 2030 तक इसे इस्लामी मुल्क बनाने के काम पर लगा हुआ है। PC जॉर्ज ने कहा कि ये काम तेज़ी से चल रहा था, लेकिन बीच में PM मोदी ने जिस तरह से नोटबंदी की, उससे ये प्रक्रिया धीमी हो गई। उन्होंने कहा, “लव जिहाद वास्तविक है।”

इस दौरान PC जॉर्ज ने फ्रांस सहित अन्य यूरोपियन देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह से ईसाई देश में घुसपैठ कर मुस्लिम जबरन इस्लाम कबूल करवा रहे हैं, ताकि उन्हें इस्लामी मुल्क बनाया जा सके- ये भयावह है। उन्होंने पूछा कि क्या भारत को किसी समुदाय विशेष के पास जाने दिया जा सकता है? उन्होंने कहा कि इस विषय पर विचार-विमर्श की आवश्यकता है और किसी को तो आवाज़ उठानी ही पड़ेगी।

PC जॉर्ज ने कहा, “दुनिया भर के अन्य देशों को देखिए। कई पूँजीवादी राष्ट्र हैं तो कितने ही गरीब देश भी हैं। फिर आ जाते हैं भारत जैसे देश, जो तीसरी दुनिया का हिस्सा हैं। सभी देश किसी न किसी मजहब को प्राथमिकता देते हैं। अरब मुल्कों की बात करें तो वहाँ इस्लाम न सिर्फ आधिकारिक मजहब है, बल्कि जो भी चीज इस्लामी नहीं है उसे अनुचित माना जाता है। अमेरिका जैसे भी इस जाल में फँस रहे हैं, लेकिन चीजें अब बदल रही हैं।”

उन्होंने कहा फ्रांस जैसे कई ईसाई देश का अतिक्रमण कर उसे इस्लामी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘लव जिहाद’ की वास्तविकता से इनकार किया है, लेकिन वे जानते हैं कि ऐसा हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन सारी समस्याओं का एक ही समाधान है- भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करना। PC जॉर्ज इससे पहले भी विवादों में रहे हैं। केरल की महिला आयोग की अध्यक्ष ने उन पर धमकी देने के आरोप लगाए थे।

बता दें कि पिछले 31 वर्षों में 7 बार विधायक चुने जाने वाले प्लनथोट्टाथिल चाको जॉर्ज 2011-15 में कॉन्ग्रेस की सरकार के दौरान केरल विधानसभा के चीफ व्हिप भी रहे हैं। उन्होंने 1 बार KEC (1980), 1 बार JNP (1982), 3 बार KEC-M (1996, 2001, 2006), 1 बार निर्दलीय (2011) और 2016 में केरल कॉन्ग्रेस (M) से चुनाव जीता। उन्होंने 4 मलयालम फिल्मों में भी काम किया है, जिनमें से एक में उन्हें CM, एक में नेता प्रतिपक्ष और एक में पुलिस अधिकारी का किरदार मिला था।

महादेव की नगरी काशी बनेगी विश्‍व की सबसे बड़ी संस्‍कृत नगरी: CM योगी की बड़ी पहल

उत्तर प्रदेश स्थित धर्मनगरी वाराणसी किसी पहचान किसी पहचान की मोहताज नहीं है। काशी के घाट, गलियाँ, कपड़ों से लेकर खान-पान सब कुछ एक अलग ही पहचान को दर्शाते हैं। इसी प्रसिद्धि को गति दिया है राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने। जहाँ उनकी पहल के बाद देवलोक व महादेव की धर्मनगरी कही जाने वाली काशी अब विश्व में संस्कृत नगरी के रूप में जानी जाएगी।

प्रदेश में सबसे अधिक संस्कृत विद्यालय वाराणसी में है

बता दें कि उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक संस्कृत विद्यालय वाराणसी में संचालित हो रहे हैं। यहाँ पर संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों की संख्या भी सबसे अधिक है। वाराणसी में 110 से अधिक संस्कृत स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। काशी के बाद जौनपुर में संस्कृत के सबसे अधिक स्कूल हैं। संस्कृत भाषा के विस्तार और उसे अलग पहचान दिलाने के लिए प्रदेश की योगी सरकार जल्दी माध्यमिक व बेसिक शिक्षा की तर्ज पर संस्कृत निदेशालय बनाने को तैयार है। इसकी घोषणा सीएम ने अपने बजट में की थी।

संस्कृत भाषा को मिलेगी नई पहचान

निदेशालय बनने के बाद संस्कृत भाषा को नई पहचान मिल सकेगी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संस्कृत में प्रेस विज्ञप्ति जारी करने का काम किया। साथ में उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से संस्कृत में ट्वीट भी किया था। सीएम की इस पहल के बाद संस्कृत बोर्ड ने भी प्रदेश में संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने का काम शुरू कर दिया।

अधिकारियों के मुताबिक इस बार प्रदेश में संस्‍कृत के 13 नए विद्यालयों को मान्‍यता देने की तैयारी है। इन स्‍कूलों ने अपने निर्धारित मानकों को पूरा कर लिया है। इसमें काशी में दो और नए विद्यालय खुलेंगे। बता दें कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की ओर से प्रदेश में संस्‍कृत के कुल 1164 विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। इसमें से 971 विद्यालय अनुदानित है जबकि 2 संस्‍कृत भाषा के राजकीय विद्यालय है। इनमें 97 हजार से अधिक छात्र-छात्राएँ अध्‍ययन कर रहे हैं।

नि:शुल्‍क भोजन व छात्रावास की सुविधा

नए सत्र में इनमें 13 विद्यालय और जुड़ जाएँगे। संस्कृत विद्यालयों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए इनमें कंप्यूटर शिक्षा के साथ कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों को एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाया जा रहा है। यही नहीं योगी सरकार ने प्रदेश के 200 से अधिक गुरुकुल पद्धति के संस्‍कृत विद्यालयों के 4 हजार से अधिक छात्रों को नि:शुल्‍क भोजन व छात्रावास की सुविधा देने का फैसला भी किया है।

‘शिखर पर जाने का शॉर्ट-कट नहीं, ऊपर जाकर नीचे गिरना सरल’ – युवाओं के लिए ‘गुरुजी’ का मंत्र

अनेकों मौकों पर अगर हम समय पर निर्णय नहीं लेते हैं तो जो अभी तक हमारी ताकत के तौर पर हमें दिखाई देता है, वही एक विशाल समस्या के तौर पर भी उभर सकता है। इसके अनेकों उदाहरण हैं। जैसे भारत में पर्याप्त अनाज पैदावार होता है लेकिन उसके सही तरीके से वितरण न करने के कारण वह अनाज ख़राब हो जाता है और सड़ जाता है। जिसके कारण भुखमरी भी बढ़ती है, राष्ट्र को आर्थिक नुकसान भी होता है और बड़ी संख्या में किसान की लम्बी समय की मेहनत अल्प समय में बर्बाद हो जाती है।

इसी प्रकार आज भारत में युवाओं की संख्या जो 25 वर्ष की उम्र के हैं, वह 60 करोड़ के आसपास है और अगर यही 35 वर्ष तक के युवाओं की गणना करें तो वह लगभग 78 करोड़ के पास बैठेगी। लेकिन अगर इस युवा शक्ति को समय पर दिशा नहीं मिली और यह दिग्भ्रमित या भ्रांतिमय हो गया तो वह मात्र उसका व्यक्तिगत दिग्भ्रमित होना नहीं होगा बल्कि हम एक राष्ट्र के तौर पर दिशाहीन हो जाएँगे।

इसी संदर्भ में हमें एक बिंदु पर अधिक महत्व देना होगा और वह यह है कि मात्र उम्र के कारण अगर हम एक मनुष्य को बच्चा, तरुण, युवा या वयस्क कह रहे हैं तो यह सोचने योग्य बात है कि क्या यही एक मात्र परिभाषा ठीक है? युवा तो वह होता है जो शारीरिक तौर पर योग्य हो, मानसिक तौर पर तेज हो, भावनात्मक तौर पर संतुलित हो, आध्यात्मिकता की तरफ झुकाव हो और इसके साथ निर्भीक हो, निडर हो, जो जोश में होश न खोए,जो प्रामाणिक हो, जो मात्र अपने समाज अपने राष्ट्र से माँगे नहीं बल्कि देने की भावना रखे वो युवा। और सबसे महत्वपूर्ण, जिसके जीवन में उद्देश्य हो वह युवा, क्योंकि अगर उसके जीवन में उद्देश्य नहीं है तो एकमात्र वह दिशाहीन नहीं है बल्कि राष्ट्र भी दिशाहीन हो जाएगा क्योंकि हर व्यक्ति का उद्देश्य राष्ट्र के उद्देश्य से भिन्न नहीं होना चाहिए।

इनमें से अगर सभी नहीं तो कम से कम कुछ बिंदु तो एक युवा के अंदर दिखे, जिसके कारण वह युवा कहलाए। इन सभी चुनौतियों पर अपने विचार रखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर (‘गुरुजी’) ने अनेकों ऐसे अनुकरणीय बिंदु दिए, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक है, जितने उस समय थे। ‘गुरुजी’ मानते थे:

”युवाओं को लोकप्रियता दिलाने वाले निरर्थक आंदोलनों से घृणा पैदा होती है। विद्यार्थी बंधुओं का ध्यान आन्दोलनप्रियता की ओर से मोड़ कर स्वयं के जीवन में राष्ट्रोपयोगी गुण एवं ज्ञान – संवर्धन करने में लगाया जाए।”

आज भी हम देखते हैं कि भेड़-चाल के चक्कर में युवा अपना कीमती समय ऐसे निरर्थक आंदोलनों में लगा देते हैं, जिनका उन्हें विषय भी पता नहीं होता। अपने ही राष्ट्र की संपत्ति को नष्ट और ध्वस्त कर देते हैं। बौद्धिक स्तर पर ऐसा विष नवयुवकों के अंदर भर दिया जाता है कि वह अपने ही राष्ट्र की संपत्ति को बर्बाद करके फक्र महसूस करता है। इसीलिए बाल्यकाल से ही राष्ट्र, समाज और परिवार के लिए जीवनयापन करने वाले विचार युवाओं को देना आवश्यक है।

‘गुरुजी’ के अनुसार हमें शिक्षा की गुणवत्ता को भी बढ़ाना पड़ेगा और उसके उदेश्यों को भी स्पष्ट करना होगा। 26 जून 1958, मद्रास में विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए ”शिक्षा” के विषय में बोलते हुए उन्होंने कहा था, ”शिक्षा का अर्थ केवल पढ़ना और लिखना ही नहीं होता। शिक्षा प्राप्ति का स्वाभाविक परिणाम होना चाहिए, राष्ट्र के बारे में श्रद्धा की जागृति और अपने कर्त्तव्य का बोध।”

माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर (‘गुरुजी’) कहते थे कि भारतीय युवाओं को उमंग और सामर्थ्य से भरे हुए जीवन जीने की तैयारी करनी चाहिए। सुस्ती, ढिलाई… यह युवा के जीवन को कमजोर करती है और यह एक युवा के जीवन को शोभा देने वाली बातें भी नहीं हैं। उनके अनुसार, ”छोटी-छोटी बातों को ठीक करो, तो बड़ी बात कदापि नहीं बिगड़ेगी।”

आज भी हम अधिकतर युवाओं के जीवन में देखते हैं कि अनुसाशन के भारी कमी है। घर में अनुसाशन ना के बराबर होता है। स्कूल में वह दिखावे तक सीमित रह जाता है तो फिर अनुसाशन आएगा कहाँ से? वह छोटी-छोटी बातों को ठीक करने से आएगा। जैसे सुबह उठने के और रात्रि में सोने के समय को तय करना, भोजन, व्यायाम, ध्यान का समय तय करना, अनावश्यक ना खाना, अपने दिन का अवलोकन करना।

‘गुरुजी’ युवाओं द्वारा पूछे गए अनेकों महत्वपूर्ण और सूक्ष्म प्रश्नों का बहुत ही सरलता से जवाब देते हुए अनेकों बार उनका मार्ग प्रशस्त किया करते थे। जो युवा राष्ट्र निर्माण के कार्य में सतत संलग्न रहते थे, वो मौका मिलने पर ‘गुरुजी’ से पूछते थे कि यह राष्ट्र निर्माण का कार्य, चरित्र निर्माण का कार्य, संगठन का कार्य कब तक करना होगा? इसकी कोई मर्यादा है क्या? ‘गुरुजी’ की दृष्टि में यह प्रश्न विचित्र थे। वह कहते थे कि जब बीमार होने पर लोग वैद्य के पास जाते हैं तो औषधि लेते वक्त वैद्य से पूछते हैं कि कितने दिन औषधि लेनी पड़ेगी? तो जवाब यही मिलता है वैद्य की तरफ से – स्वस्थ होने तक लो और अगर स्वास्थ्य बार-बार ख़राब होने की आशंका हो तो जन्म भर लो। इसीलिए यह कार्य तो संकल्प लेकर निरंतर, जीवनभर, अंतिम सांस तक करते रहने का है।

माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर (‘गुरुजी’) का यही मानना था कि जब तक भारत माता के एक-एक पुत्र और पुत्री अपने राष्ट्र के प्रति श्रद्धा, अपने स्वयं के प्रति विश्वास और सबके लिए सम्मान की भावना नहीं जागृत कर लेता, तब तक यह कार्य गंगा के निर्मल प्रवाह की तरह यूँ ही चलता रहना चाहिए। लेकिन ‘गुरुजी’ ने एक महत्वपूर्ण चिंता भी व्यक्त की थी। उनके अनुसार आजकल मन का नियंत्रण कम हो जाने के कारण, लगातार एक काम करने की प्रवृति कम हो गई है। कोई काम चार दिन करके छोड़ देंगे, फिर दूसरा कुछ करेंगे।

आज भी हमारे युवाओं के सामने यही चुनौती है। वह एक कार्य हाथ में लेते हैं और अकस्मात सफलता की इच्छा रखते हैं और जैसे ही मार्ग में कुछ बाधाओं से सामना होता है, वह मार्ग बदलने का सोचने लगते हैं। धारणा शक्ति अत्यंत कमजोर हो गई है, जिसके कारण जीवन में अनेकों भटकाव आते हैं।

इसलिए आज जरूरत है एक विचार को धारण करने की और फिर उस विचार से ओत-प्रोत होने की। साथ ही साथ अन्य सभी विचारों से दूर रहने की, जो आपके भटकाव का कारण बने। जिसके लिए मेहनत और परिश्रम अत्यंत आवश्यक है। ‘गुरुजी’ कहते थे:

”शिखर पर जाने के लिए शॉर्ट-कट नहीं हुआ करता। एक-एक कदम मजबूती से रखना पड़ता है। परिश्रम करना पड़ता है, साधना करनी पड़ती है, तब शिखर पर पहुँचा जाता है। हाँ, शिखर से नीचे आने के लिए शॉर्ट-कट हो सकता है, ऊपर जाकर नीचे गिरना सरल है।”

‘गुरुजी’ युवाओं को उनके समाज के प्रति कर्त्तव्य को हमेशा याद दिलाते रहते थे। वह कहते थे कि प्रत्येक मनुष्य को समाज के ऋण को कभी नहीं भूलना चाहिए। उनके अनुसार, ”समाज के कारण ही व्यक्ति को प्रतिष्ठा, सुविधा व संरक्षण प्राप्त होता है। इसीलिए समाज का ऋण चुकाना अत्यंत आवश्यक है। और यह राष्ट्र, समाज और संगठन का कार्य इसलिए नहीं करना कि यह करने से इनका भला होगा बल्कि इस भाव से करना है कि यह कार्य मातृभूमि के पूजन का कार्य है, विशुद्ध देशभक्ति का काम है, वह अपना सर्वस्व लगाकर करने में हमारे हिन्दू के नाते जीने की सार्थकता है, ऐसा सोचना अधिक योग्य है।”

जैसे हम जब भगवान की पूजा करते हैं तो उसकी आवश्यकता भगवान को नहीं है, आवश्यकता तो हमारी है। इसीलिए आज भारत के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती है, वह अपनी युवा जनसंख्या को दिशा प्रदान करना और उद्देश्यपूर्ण जीवन की तरफ ले जाना है। वह उद्देश्य, जो राष्ट्र के उद्देश्य से भिन्न न हो।

अगर माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर (‘गुरुजी’) के जीवन चरित्र का युवा कुछ प्रतिशत भी अध्ययन करें और जीवन में अंगीकार करने की कोशिश करें तो उनके देह में शक्ति होगी, मन में उत्साह होगा, मातृभूमि के लिए प्रेम होगा, आत्मविश्वास दिन-ब-दिन बढ़ेगा, इच्छाशक्ति प्रबल होगी और जीवन में नियम और मूल्यों की स्थापना होगी। जिससे आत्मविश्वास से भरा हुआ, राष्ट्र से स्नेह करने वाला और सेवा के लिए तत्पर युवाओं का निर्माण होगा, जो चाहे किसी भी विभाग में जाए, वहाँ सर्वश्रेष्ठ देगा और मात्र सफल ही नहीं बल्कि एक सार्थक जीवन जी पाएगा।

‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए साथ आए फ्लिपकार्ट और अडानी: लिबरल गिरोह को लगी मिर्ची, कहा- Flipkart का करेंगे बहिष्कार

‘अडानी ग्रुप’ ने स्वदेशी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट को अपना नया स्ट्रेटेजिक पार्टनर बनाया है। खुद चेयरमैन गौतम अडानी ने इसकी घोषणा की है। उन्होंने बताया कि जहाँ AdaniConneX एक नया टायर-4 डेटा सेंटर का निर्माण करने जा रहा है, वहीं लॉजिस्टिक्स के मामले में भारत में अग्रणी ‘अडानी लॉजिस्टिक्स’ इसके लिए 5,34,000 स्क्वायर फीट क्षेत्र में फुलफिलमेंट सेंटर बनाएगा। इससे मुंबई में हजारों नई नौकरियाँ पैदा होंगी।

फ्लिपकार्ट ने भी ‘अडानी ग्रुप’ के साथ इस स्ट्रेटेजिक और कमर्शियल साझेदारी की पुष्टि की है। इससे कंपनी का सप्लाई चेन इंस्फ्रास्ट्रक्टर मजबूत होगा और लगातार बढ़ रहे ग्राहकों तक पहुँचने में भी उसे आसानी होगी। पश्चिमी भारत में ई-कॉमर्स वेबसाइट के बढ़ते ग्राहकों को संतुष्ट करने के लिए अडानी का फुलफिलमेंट सेंटर फ्लिपकार्ट को लीज पर दिया जाएगा। इससे क्षेत्र के कई लघु उद्योग और हजारों विक्रेताओं को सीधे बाजार तक पहुँच मिलेगी

आशा जताई है कि 2020 की तीसरी चौमाही में ये डेटा सेंटर काम करना चालू कर देगा। इसमें किसी भी समय हजारों विक्रेताओं की वस्तुओं के 1 करोड़ यूनिट्स को स्टोर कर रखने की क्षमता होगी। इससे न सिर्फ MSMEs और विक्रेताओं को मदद मिलेगी, बल्कि फ्लिपकार्ट प्रत्यक्ष रूप से 2500 और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नौकरियाँ पैदा करेगा। अडानी के साथ साझेदारी का फायदा उठाते हुए वो चेन्नई में अपना तीसरा डेटा सेंटर चालू करेगा।

‘अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ)’ के CEO करण अडानी ने कहा कि भारत के दो सबसे तेज़ी से विकसित हो रही कंपनियाँ साथ आ रही हैं, जिससे काफी संवेदनशील और अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि यही तो ‘आत्मनिर्भर भारत’ है। ये एक यूनिक मॉडल होगा, जिससे फ्लिपकार्ट के डिजिटल और फिजिकल ज़रूरतें पूरी होंगी। इससे तकनीकी रूप से भी समृद्धता आएगी।

अडानी ने कहा कि देश के MSME सेक्टर को और सुदृढ़ करने के लिए और ग्राहकों तक उनकी ज़रूरतें पहुँचाने के लिए ये साझेदारी अहम साबित होगी, जो लंबी भी चलेगी। फ्लिपकार्ट के CEO कल्याण कृष्णमूर्ति ने कहा कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में ‘अडानी ग्रुप’ का कोई सानी नहीं है, क्योंकि इसने लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट, ग्रीन एनर्जी और डेटा सेंटर्स का यूनिक कॉम्बो पेश किया है। उन्होंने इस साझेदारी पर ख़ुशी जताई।

ये भी याद करने लायक है कि कॉन्ग्रेस पार्टी और इसके पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने किस तरह बार-बार ‘अम्बानी-अडानी’ की रट लगा कर दोनों उद्योगपतियों और उनकी कंपनियों को लेकर देश में नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की। वो अब भी लिबरल गिरोह और वामपंथी मीडिया के सहयोग से इस कार्य में लगे हुए हैं। इनलोगों ने भारत में जॉब्स पैदा करने और GDP में योगदान देने वाले उद्योगपतियों को ‘जनता का दुश्मन’ बताने का अभियान चला रखा है।

स्थिति ये है कि अब तो गिरोह विशेष और उससे जुड़े लोगों ने सोशल मीडिया पर फ्लिपकार्ट का भी बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। कुछ यूजर्स का कहना है कि अडानी उनका डेटा चुरा लेगा, इसीलिए वो अब फ्लिपकार्ट से कुछ नहीं खरीदेंगे। सच्चाई ये है कि जिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का प्रयोग कर वो ये सब कह रहे हैं, उन्हीं पर डेटा की सुरक्षा से लेकर बेचने तक के आरोप हैं। कइयों ने आलिया भट्ट और वरुण धवन को फ्लिपकार्ट का एड न करने की सलाह दी है।