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₹2800 का Remdesivir 35000 में: डॉक्टर मोहम्मद अबीर मेडिकल स्टूडेंट के साथ मिल कर रहा था कालाबाजारी

राजस्थान के उदयपुर में एक डॉक्टर और एक एमबीबीएस छात्र रेमडेसिविर (Remdesivir) इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए पकड़ा गया है। कोरोना वायरस से संक्रमित एक मरीज के परिजन की शिकायत पर पुलिस ने कालाबाजारी कर रहे डॉक्टर मोहम्मद अबीर और और उसके साथी को गिरफ्तार किया। आरोपियों से उनके पूरे गिरोह की जानकारी प्राप्त करने के लिए पूछताछ की जा रही है।

उदयपुर पुलिस ने बताया कि उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की सूचना मिली थी। इसके बाद एक पुलिसकर्मी को ग्राहक बनाकर आरोपितों के पास भेजा गया। आरोपितों ने 2800 रुपए का रेमडेसिविर इंजेक्शन 35,000 रुपए में बेचने का सौदा तय किया। इसके बाद निजी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर मोहम्मद अबीर और उसके साथी एमबीबीएस छात्र मोहित पाटीदार को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। रुपयों के लेन-देन में डॉक्टर ने 2 इंजेक्शन लेने पर प्रति इंजेक्शन 35,000 रुपए की बात कही। डॉक्टर ने एक इंजेक्शन के लिए इससे भी अधिक कीमत बताई।

गिरफ्तार डॉक्टर मोहम्मद अबीर उदयपुर के गीतांजलि मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट है। अबीर मूल रूप से उदयपुर के सवीना का रहने वाला है। दूसरा आरोपित गीतांजलि मेडिकल कॉलेज में ही एमबीबीएस के सेकेंड ईयर का छात्र है।

उदयपुर के एकलिंगपुरा चौराहे से पुलिस बुधवार (21अप्रैल 2021) दोनों को पकड़ा। ग्राहक बनकर आए पुलिसकर्मी ने अपने साथियों की सहायता से दोनों को गिरफ्तार किया। इनके पास से इंजेक्शन भी बरामद किए गए।

ऑक्सीजन प्लांट लगा रहा श्रीराम मंदिर ट्रस्ट: मंदिरों के रुपयों का हिसाब माँगने वाले गायब, मस्जिद से पत्थरबाजी पर चुप्पी

अब जब देश कोरोना काल में एक तरह के मेडिकल आपातकाल से गुजर रहा है, ऐसे समय में ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट देश में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए आया है। ट्रस्ट ने निर्णय लिया है कि वो दशरथ मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करेगा। देश में ऑक्सीजन की दिक्कत को देखते हुए ट्रस्ट ने ये बड़ा फैसला लिया है। इस ऑक्सीजन प्लांट को स्थापित करने में 55 लाख रुपए का खर्च आएगा।

‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र ने इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए कहा कि इस समय पूरा देश कोरोना की दूसरी लहर से परेशान है, ऐसे में राम मंदिर की तरफ से भी जनहित में योगदान दिया जा रहा है। बता दें कि रामलला के अस्थायी मंदिर में दर्शन-पूजन पहले ही रोक दिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ न जुटे। इसी तरह कुम्भ के अखाड़ों ने भी हरिद्वार में अब इसे प्रतीकात्मक रखने का फैसला किया।

इस खबर से गिरोह विशेष को ज़रूर परेशानी हो सकती है, जो लगातार मंदिर-मंदिर की रट लगाए हुए था और पूछा जा रहा था कि जिस देश में मंदिर बनवाए जाते हों, वहाँ स्वास्थ्य सिस्टम कैसे सुधरेगा? अब उन्हें आत्मचिंतन करने का समय आ गया है क्योंकि मंदिर सरकार नहीं, श्रद्धालु बनवा रहे हैं। हाँ, मंदिर की संपत्ति पर ज़रूर सरकार का कब्ज़ा है। क्या किसी अन्य मजहब में ऐसा होता है? हिसाब माँगा जाता है?

हाल ही में अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने इसी तरह का प्रोपेगंडा फैलाया था। स्वरा भास्कर को ये तो जानना ही चाहिए कि इस आपात स्थिति में राम मंदिर क्या कर रहा है, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी दो और खबरें हैं, जो आजकल में ही आईं। राजस्थान के सांगनेर स्थित जामा मस्जिद में जब पुलिस लॉकडाउन का पालन कराने गई तो पुलिस पर ईंट-पत्थरों से हमला किया गया। गुजरात के कपड़वंज स्थित अली मस्जिद में भीड़ जुटाने से रोका गया तो पुलिस पर हमला हुआ।

अभी तक गिरोह विशेष के एक भी सेलेब्रिटी ने इन घटनाओं की निंदा नहीं की है। पिछले साल भी ऐसी कई घटनाएँ सामने आई थीं, ये नई नहीं हैं। कहीं ऐसा तो नहीं है कि गाँवों में स्थित छोटे मंदिरों से लेकर हजारों वर्ष पुराने भव्य मंदिर तक कोरोना काल में जिस तरह से गरीबों की सेवा कर रहे हैं, उसे छिपाने के लिए राम मंदिर के दान का मुद्दा बार-बार उठाया जाता है? साथ ही इससे इस्लामी कट्टरपंथियों की करतूतों पर भी पर्दा डाला जाता है?

असली कारण यही है। पीएम केयर्स फंड में जिस तरह से मंदिरों ने आगे आकर बढ़-चढ़ कर दान दिया, उसकी प्रशंसा इन सेलेब्रिटीज ने नहीं की। कुम्भ को सही समय पर समाप्त कर के अखाड़ों ने बिना किसी के कहे ही जनहित में निर्णय लिया, उसकी तारीफ़ इन वामपंथी पत्रकारों ने नहीं की। IIT कानपुर के उस रिसर्च पर आँख मूँद लिया गया, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि कुम्भ से कोरोना के प्रसार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

देश में मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन की फ़िलहाल किल्लत है, जिसके लिए रिलायंस से लेकर टाटा और कई अन्य कंपनियाँ सामने आई हैं। टाटा को जब नए संसद भवन के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी तो इन्हीं लोगों ने उसकी आलोचना की थी। अंबानी-अडानी को ये लोग रोज गाली देते हैं। इसी तरह अब वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को भी निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही एक वर्ग दोहरा रवैया अपनाते हुए ये भी पूछ रहा है कि 18 से कम के उम्र वालों को वैक्सीन पहले ही क्यों नहीं दी?

असली दिक्कत ये नहीं है। अगर हम मंदिरों की सूची गिनाने लगें जिन्होंने कोरोना काल में गरीबों के भोजन से लेकर आमजनों में जागरूकता फैलाने का काम किया है तो कई पन्ने छोटे पड़ जाएँगे। सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि लिबरल गिरोह को ह्यूमन चेन टाइप की कोई स्टोरी आजकल मिल नहीं रही है क्योंकि तबलीगी जमात प्रकरण से लेकर अबकी रमजान में छूट की माँग तक, मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कहानियों का उनके पास भी अभाव है।

आपको याद होगा एक युवती ने लिखा था कि जब राम मंदिर के लिए चंदा माँगने के लिए लोग उसके घर आए तो वो कई मिनटों तक गुस्से में काँपती रही। एक महिला ने तो चंदा माँगने वालों की बेइज्जती करते हुए वीडियो भी पोस्ट कर मजे लिए थे। अब यही लोग मंदिरों से हिसाब माँगते हैं, जबकि इन मंदिरों को बनाने से लेकर इनमें पूजा-पाठ तक, इनका योगदान शून्य ही होता है। अब सोशल मीडिया मंदिर के रुपयों से हिसाब का सवाल लिए भरा पड़ा है।

हाल ही में स्वामीनारायण मंदिर ने अपने परिसर में ही कोविड केयर यूनिट स्थापित किया। वजह ये है कि मोदी काल में पौने 2 लाख किलोमीटर सड़कें, 12 नए AIIMS, 7 नए IIT-IIM-IIIT और 35 एयरपोर्ट्स बने हैं; इन आँकड़ों को छिपाने के लिए ये नैरेटिव तो बनाना पड़ेगा न कि ‘मोदी सरकार मंदिर बनवाती है।’ अभी तो 3 करोड़ परिवारों को उज्ज्वला गैस योजना का लाभ मिलने और 11 करोड़ टॉयलेट्स बनवाने की बात हमने की ही नहीं।

मंदिर का पैसा सरकार रखती है। लेकिन, हज के लिए सब्सिडी सरकार देती है। कई राज्यों में मौलानाओं और मस्जिद के कर्मचारियों को वेतन सरकार देती है। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में दरगाह के लिए खजाने सरकार खोलती है। राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों में CM की तस्वीर के साथ मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए विज्ञापन सरकार देती है। हज हाउस सरकार बनवाती है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग सरकार का मंत्रालय है।

अब जब इस कोरोना काल में ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने अयोध्या के राजाश्री दशरथ मेडिकल कॉलेज में 55 लाख रुपए की लागत से ऑक्सीजन प्लांट लगाने का निर्णय लिया है, तो लिबरल गिरोह की जुबान सिल जाएगी। तबलीगी जमात के सुपर स्प्रेडर्स का बचाव करने वाले ये लोग श्रीराम मंदिर ट्रस्ट द्वारा ऑक्सीजन प्लांट लगाने या देश के हजारों मंदिरों द्वारा कोरोना के खिलाफ लड़ाई में योगदान दिए जाने पर चूँ तक न करेंगे।

कोरोना संकट में IAF ने संभाला मोर्चा: ऑक्सीजन और दवाइयों के साथ एयरलिफ्ट हो रहे स्वास्थ्यकर्मी

कोरोना महामारी के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए भारतीय वायुसेना ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। संकट की घड़ी में वायुसेना ऑक्सीजन कंटेनर, सिलिंडर, जरूरी दवाओं के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों को भी एयरलिफ्ट कर रही है। 

भारतीय वायुसेना ने ट्वीट कर कहा है, “IAF की ट्रांसपोर्ट फ्लीट कोरोना के खिलाफ लड़ाई में साथ है। देशभर में कोविड अस्पतालों तक मेडिकल कर्मी, जरूरी उपकरण और दवाओं को एयरलिफ्ट करना जारी है।” एयरफोर्स अधिकारियों के मुताबिक, IAF ने दिल्ली में डीआरडीओ के बनाए कोविड-19 अस्पताल में कोच्चि, मुंबई, विशाखापत्तनम और बेंगलुरु तक से नर्सिंग स्टाफ को एयरलिफ्ट कर पहुँचाया है।

बता दें कि देश में कोरोना से उपजे संकट को देखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को सभी रक्षा प्रतिष्ठानों को अपनी तैयारी पूरी रखने और सरकार की मदद के लिए आगे आने को कहा था। रक्षा मंत्री ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बिपिन रावत सहित मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में एक रूपरेखा बनाई गई थी, जिसमें यह स्पष्ट था कि संकट की घड़ी में राज्य सरकारों को किसी तरीके से मदद पहुँचाई जाए। 

उल्लेखनीय है कि विदेशों से ऑक्सीजन कंटेनर और जरूरी उपकरण मँगाने का जिम्मा भी IAF को देने पर विचार हो रहा है। बुधवार को केंद्र ने 8 राज्यों में ऑक्सीजन का कोटा बढ़ाने की भी घोषणा की थी।

‘1 लड़की ने सब पप्पू की वाट लगा रखी है’: कंगना के नाम पर शेयर हो रहा फेक ट्वीट, अभिनेत्री ने दिया जवाब

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के बेबाक रवैए के कारण सोशल मीडिया पर उनके कई विरोधी हैं। यही कारण है कि तरह-तरह के हथकंडे इस्तेमाल करके उन्हें बुरा दिखाने का प्रयास होता रहता है। कभी उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर उन पर इल्जाम मढ़े जाते हैं तो कभी वे जो कहती हैं उसे ही विवादित बना दिया जाता है।

कंगना को बदनाम करने के प्रयासों में आज ट्रोलर्स का एक नया कारनामा सोशल मीडिया पर सामने आया। दरअसल, कंगना रनौत के नाम से एक ट्वीट वायरल हुआ। इस ट्वीट की तस्वीर में एक आदमी गाय को चूम रहा है और टेक्स्ट में लिखा है, 

“जिसका भी ऑक्सीजन का स्तर नीचे गिर रहा है वो कृपया इसे ट्रॉय करें। गाय ऑक्सीजन ही छोड़ती है, इसलिए ये सबसे सरल तरीका है कुछ ही समय में ऑक्सीजन लेने का। जय श्रीराम। “

वायरल होती तस्वीर में ट्वीट की तारीख 21 अप्रैल 2021 लिखी है। हकीकत में कंगना ने ऐसा ट्वीट किया ही नहीं। उन्हें बदनाम करने के लिए इसे व्हॉट्सएप पर शेयर किया जा रहा था, जिसे यूजर्स ने पकड़ लिया और स्क्रीनशॉट शेयर कर बताया कि ये ट्वीट ही फेक है।

रोजी नाम की महिला ने ट्वीट किया,

“व्हॉट्सएप फॉर्वर्ड में कंगना के नाम से शेयर हो रहा एक फेक ट्वीट मिला। इसे कई बार फॉर्वर्ड किया गया है। लोग न सिर्फ़ कंगना को बुरा दिखाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, बल्कि हिंदू धर्म को भी बदनाम कर रहे हैं। “

रोजी के इस ट्वीट को देखने के बाद कंगना ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कंगना ने लिखा,

“ये मुझे मोदी के अभियानों की याद दिलाते हैं, ‘ये मेरे ख़िलाफ़ नहीं है, ये तुम्हारे खिलाफ हैं, लेकिन मैं इनके रास्ते में हूँ।’ अगर आप ऐसे झूठ पर यकीन सिर्फ इसलिए करेंगे क्योंकि आप बहुत आलसी हैं, तो आप उन्हें ताकत देंगे कि वो आपको बर्बाद करें। कुछ भी हो। ध्यान से निर्णय लीजिए। मेरे पास जीतने और हारने के लिए कुछ नहीं है। ”

कंगना ने इस संबंध में एक और ट्वीट किया। उन्होंने लिखा,

“बब्बर शेरनी का ऐसा प्रभाव है कि बहुत सारे अभियान, असीमित धन, रणनीतियाँ और समय एक अकेली महिला को तोड़ने में लगाए जा रहे हैं। लेकिन फिर भी पप्पू पार्टी, राजनीति से लेकर मूवी माफियाओं तक ऐसा करने में विफल हो रहे हैं। एक लड़की ने सब पप्पू की वाट लगा रखी है।”

गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार के ख़िलाफ़ खुलकर बयानबाजी करने वाली कंगना रनौत ने हाल में सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा के लिए गुहार लगाई थी। कंगना ने कोर्ट में कहा था कि उनके खिलाफ चल रहे सारे मामले हिमाचल प्रदेश में ट्रांसफर किए जाएँ, क्योंकि महाराष्ट्र में उन्हें जान का खतरा है। कंगना ने शिवसेना नेता संजय राउत के बयानों का उल्लेख करते हुए याचिका में ये भी कहा था कि महाराष्ट्र सरकार उन्हें प्रताड़ित कर रही है।

राहुल गाँधी की फ़ॉर्म्युला पॉलिटिक्स और उसमें फँसी कॉन्ग्रेस: प्रधानमंत्री बनने/बनाने की ख्वाहिश कब तक?

वर्तमान में कॉन्ग्रेस पार्टी की राजनीति का एक प्रमुख दर्शन है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मित्र गढ़ लेना। किसी उद्योगपति को उनका मित्र घोषित करके यह बताना कि मोदी उन्हें फ़ायदा पहुँचाने के लिए ही प्रधानमंत्री बने हैं। चार वर्ष पहले राहुल गाँधी बताते थे कि मोदी के दस पंद्रह उद्योगपति मित्र हैं जिन्हें वे फ़ायदा पहुँचा रहे हैं। बाद में यह संख्या कम होते-होते दो पर आ रुकी। क़रीब डेढ़ वर्षों तक दो पर टिकी रही और बड़ी मेहनत के बाद राहुल गाँधी ने एक और उद्योगपति की खोज कर ली है जिसे वे मोदी का मित्र बता सकें और ये नाम है सिरम इन्स्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया के अदार पूनावाला का। कल उन्होंने पूनावाला को भी नरेंद्र मोदी का मित्र घोषित करते हुए बताया कि; मोदी उन्हें फ़ायदा पहुँचाना चाहते हैं।

राहुल गाँधी के अनुसार नरेंद्र मोदी दिन-रात काम कर रहे हैं ताकि किसी और को फ़ायदा पहुँचे। कौन भारतीय इस बात पर विचार भी करेगा कि एक व्यक्ति, जो प्रधानमंत्री है, अपने फ़ायदे के लिए मेहनत न करके किसी और के फ़ायदे के लिए मेहनत करेगा? ऐसा कैसे है कि एक आम भारतीय की सोच की भनक उस नेता को नहीं है जो देश का प्रधानमंत्री बनने की आकांक्षा रखता है?

क्या नेताजी ने पिछले डेढ़ दशकों में एक आम भारतीय में होने वाले विचार परिवर्तन के बारे कभी नहीं सोचा? कभी चिंतन नहीं किया कि कैसे एक आम भारतीय अब अपने लिए काम करना चाहता है? क्या किसी सलाहकार ने इस नेता को यह नहीं बताया कि; देखिए सर, लोगों का विचार ऐसा बदल रहा है कि नौकरी करने वाला एक आम भारतीय अब नौकरी छोड़कर बिज़नेस करना चाहता है क्योंकि उसे लगता है कि उसकी क्षमता, ज्ञान और एक्स्पर्टीज़ का फ़ायदा उसे हो रहा है जिसके लिए वह काम करता है।

फ़ॉर्म्युला पॉलिटिक्स की एक समस्या है। किस फ़ॉर्म्युला की एक्सपाइरी डेट आकर चली गई है, इस बात की भनक फ़ॉर्म्युला लगाने वाले को नहीं होती। वह बेचारा लगा रहता है उसे अप्लाई करके नए परिणाम निकालने में। इधर फ़ॉर्म्युला मन ही मन ख़ुश हो रहा होता है, यह सोचते हुए कि; इसे यह नहीं पता कि मुझमें अब फल नहीं लग सकते। इनके बार-बार दोहराए जाने के पीछे एक कारण यह भी होता है कि ऐसे फ़ॉर्म्युलों को किराए पर मिलने वाले बुद्धिजीवी, संपादक, सोशल मीडिया ऑपरेटिव और तथाकथित आरटीआइ ऐक्टिविस्ट राजनीतिक दाँव-पेंच बताकर नेता के मन में झूठा आत्मविश्वास पैदा कर देते हैं।

भारत का वर्तमान विपक्ष इसी फ़ॉर्म्युला पॉलिटिक्स का मारा है, बस इन विपक्षी नेताओं को इनके सलाहकार नहीं बता पा रहे कि ये फ़ॉर्म्युला क्यों नहीं चल रहा और उनके वांछनीय परिणाम क्यों नहीं आ रहे। इसके पीछे शायद कारण यह है कि ऐसा करने से सलाहकारों को मिलने वाला मेहनताना बंद हो जाएगा।

विपक्ष, ख़ासकर कॉन्ग्रेस के नेता को अभी भी लगता है कि भारतीय राजनीति समय के उसी बिंदु पर खड़ी है जहाँ उन्हें उनकी पार्टी विरासत में मिली थी और वही सारे फ़ॉर्म्युले आज भी प्रासंगिक हैं जो उन्हें पार्टी के साथ परंपरागत ज्ञान के रूप में मिले थे।

ऐसे में बेचारे परंपरागत ज्ञान के रूप में मिले फ़ॉर्म्युले चलाए जा रहे हैं। नवाचार के नाम पर बस उस फ़ॉर्म्युले के किसी एक नट को कस दिया जाता है या किसी दूसरे को ढीला कर दिया जाता है, इस आशा में कि ऐसा करने के बाद परिणाम कुछ अलग आएँगे। यदि ऐसी राजनीति में राहुल गाँधी का विश्वास न होता तो नोटबंदी के समय न ही वे ATM से पैसे निकालने के लिए लाइन में खड़े न होते और न ही उत्तराखंड की रैली में अपने कुर्ते की फटी जेब दिखाते।

यह भी फ़ॉर्म्युला पॉलिटिक्स का ही असर है जिसमें कॉन्ग्रेस ने अपनी राजनीतिक लड़ाई को संपादकों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और बोट्स के लिए आउट्सोर्स कर दिया है। ऐसा नहीं कि यह कोई नया फ़ॉर्म्युला है। यह पहले भी था पर चूँकि तब मीडिया की पहुँच सीमित थी इसलिए दिखाई कम देता था।

इस परिप्रेक्ष्य में मुलायम सिंह यादव का वह वक्तव्य याद आ जाता है जिसमें उन्होंने कहा था कि; कॉन्ग्रेस के हज़ारों हाथ हैं। संपादकीय, कॉलम, मीडिया हाउस और खबरों पर नियंत्रण की शक्ल आज बदल कर अजेंडा चलाने वाले गिरोह के फेसबुक पोस्ट, यूट्यूब वीडियो, ट्विटर ट्रेंड, आंदोलनजीवियों और ‘एमिनेंट’ इंटेल्लेक्टुअल्स के पत्रों और अवॉर्ड वापसी ने ले लिया है। प्रश्न यह है कि जिनके सहारे यह दल पुनः राजनीति की प्रमुख धुरी बनना चाहता है उनकी निजी विश्वसनीयता ऐसी है कि वे दिए गए काम कर सकें?

पर मेरे विचार से उससे भी बड़ा प्रश्न यह है कि एक राजनीतिक दल, जो भारतवर्ष जैसे विशाल देश में सरकार बनाकर अपने नेता को प्रधानमंत्री बनाने की ख्वाहिश रखता है, क्या अपना राजनीतिक दर्शन, संघर्ष और राजनीतिक संरचना किसी और को आउटसोर्स करने का ख़तरा बार-बार लगातार उठा सकता है?

‘प्लाज्मा के लिए नंबर डाला, बदले में भेजी गुप्तांग की तस्वीरें; हर मिनट 3-4 फोन कॉल्स’: मुंबई की महिला ने बयाँ किया दर्द

जहाँ कोरोना की दूसरी लहर से लोगों की जान जा रही है, वहीं मदद के लिए गुहार लगाने वालों के साथ कुछ लोग संवेदनहीन व्यवहार भी कर रहे हैं। मुंबई की एक महिला ने ऐसी ही अपनी आपबीती सुनाई है। महिला ने एक परिजन को कोविड-19 होने का बाद अपना नंबर सार्वजनिक किया था, ताकि प्लाज्मा थेरेपी के लिए ब्लड मिल सके। लेकिन, बदले में उसके नंबर पर कई लोगों ने अश्लील फोटो भेजे।

महिला ने ‘VICE’ में एक लेख के जरिए अपना अनुभव साझा किया है। मुंबई की रहने वाली महिला ने बताया कि कोरोना वायरस से उपजे खतरे का उसे सही अंदाज़ा तब लगा, जब इसने उसके परिवार में दस्तक दी। उसने यह भी बताया है कि किस तरह तमाम सावधानियाँ बरतने के बावजूद उनके परिजन संक्रमित हुए और उनका सामना ध्वस्त हो चुके स्वास्थ्य सिस्टम से हुआ।

इस महिला का नाम शास्वती सिवा है। पिछले सप्ताह उनके परिवार का एक सदस्य कोरोना पॉजिटिव हो गया। इसके बाद वह वेंटिलेटर की खोज में थीं, जिसकी महाराष्ट्र में किल्लत है। फिर उन्होंने ट्विटर पर मदद की गुहार लगाई। उनका संपर्क कुछ अच्छे लोगों से हुआ और 6 घंटे के भीतर वेंटिलेटर उपलब्ध भी हो गया। इसके 2 दिन बाद A+ ब्लड ग्रुप प्लाज्मा की ज़रूरत पड़ी। इसके लिए कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्ति की ज़रूरत थी।

रिपोर्ट नेगेटिव आने के 28 दिन बाद ही प्लाज्मा डोनेट किया जा सकता है। इसके बाद उनके एक ‘प्रभावशाली दोस्त’ ने सोशल मीडिया पर इसे डाल दिया और उनके फोन पर कई मैसेज आने लगे। कुछ अन्य लोकप्रिय हैंडल्स से भी ये शेयर किया गया। शास्वती लिखती हैं कि उन्हें अपना नंबर सार्वजनिक रूप से देख कर डर भी लगा, लेकिन फिर उन्हें दोस्तों ने बताया कि यही अंतिम विकल्प है और उन्होंने भी अपने परिजन का जीवन बचाने के लिए ये खतरा मोल लिया।

शास्वती ‘VICE’ में लिखती हैं कि जिस दिन उन्होंने इमरजेंसी रिक्वेस्ट डाला, उस दिन उनके पास हर मिनट 3-4 फोन कॉल्स आने लगे। वो ब्लड बैंक्स से बात कर रही थीं, डोनर्स का जुगाड़ कर रही थीं और दोस्तों से संपर्क बनाए हुए थीं। लेकिन, उस बीच एक व्यक्ति ने कॉल कर के पूछा कि वो SOS जारी करने वाले व्यक्ति को कैसे जानती हैं? फिर वो पूछने लगा कि क्या तुम सिंगल हो? इसके कुछ देर बाद एक और कॉल आया।

उधर से दो लोग धीरे-धीरे आपस में बात कर रहे थे, जिसके बाद एक ने फोन पर कहा कि तुम्हारी प्रोफ़ाइल पिक्चर बहुत अच्छी है। इसके बाद उनका पता, रिलेशनशिप और अन्य डिटेल्स पूछने के लिए कई फोन कॉल्स आए। शास्वती सिवा के अनुसार, एक व्यक्ति ने फोन पर किस करते हुए आवाज़ें भी निकालीं। वो लिखती हैं कि जब पारिवारिक इमरजेंसी में वो फँसी थीं, तब इस तरह की प्रताड़ना तोड़ देने वाली थी।

उन्होंने उन नंबरों को ब्लॉक किया। अगली सुबह सेकेंड्स के अंतराल में ही 7 लोगों के फोन कॉल आए। सबको ब्लॉक कर के शास्वती ने फोन साइलेंट कर के बगल में रख दिया। लेकिन, वो लिखती हैं कि जब उन्होंने व्हाट्सएप्प खोला तो वहाँ अश्लील तस्वीरें भरी पड़ी हुई थीं। कई अपरिचितों ने उन्हें अपने गुप्तांग (D#ck) की तस्वीरें भेज रखी थीं। तब तक उन्हें डोनर भी मिल चुका था। उन्होंने महिलाओं को सलाह दी है कि वो कभी अपना नंबर सार्वजनिक न करें।

‘अभी तो सिर्फ 3 इंच घुसाया है…’: सलमान खान की राधे का ट्रेलर देख यूजर्स बोले- जिंदगी के सबसे बुरे 3 मिनट

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की नई फिल्म ‘राधे- योर मोस्ट वांटेड भाई’ ईद के मौके पर 13 मई 2021 को रिलीज होगी। कुछ देर पहले यूट्यूब पर उसका ट्रेलर आया है। ट्रेलर में दिखाया गया कि कैसे मुंबई शहर में क्राइम रेट बढ़ रहा है और उसे रोकने के लिए राधे (सलमान खान) जैसे अफसर की जरूरत है।

2 मिनट 58 सेकेंड के इस ट्रेलर में सलमान खान के सुपरकॉप अंदाज के अलावा रणदीप हुड्डा नेगेटिव शेड, दिशा पटानी नायिका और जैकी श्रॉफ नायिका के भाई के रूप में दिखाई गए हैं। इस ट्रेलर में सलमान खान के अंदाज, उनके डायलॉग और सीन देखने के बाद इंटरनेट यूजर्स अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे तो कुछ उनकी खिल्ली भी उड़ा रहे हैं।

यूट्यूब की बात करें तो zee5 नाम के चैनल पर अपलोड हुआ राधे का ट्रेलर देख लोगों ने इसकी कास्टिंग पर सवाल उठाए। लोगों ने पूछा कि दिशा पटानी, सलमान खान की बेटी की उम्र की हैं, लेकिन फिर भी वो उनकी हीरोइन हैं। इसी तरह जैकी श्राफ को इस फिल्म में दिशा का भाई बनाया गया है। इस पर भी लोगों ने चुटकी लेते हुए पूछा है कि क्या ये फिल्म टाइगर श्रॉफ देखेंगे।

कई यूजर्स सलमान के डायलॉग जैसे ‘मैंने जो कमिटमेंट कर दी’ सुन कर पूछ रहे हैं कि क्या ये पुरानी फिल्मों का कम्पाइलेशन है। वहीं कुछ लोग इस बात का मजाक बना रहे हैं कि जबसे सलमान ने फिल्म में सड़क साफ और कार ड्राइविंग की बात कही, तभी से फुटपाथ वालों का दिल धक-धक हो रहा है। 

ट्रेलर में एक डायलॉग है कि सलमान खान अपराधियों को कहते हैं, “अभी तो सिर्फ़ तीन इंच घुसाया है। अगर कोई आगे बढ़ा तो उसके ब्लैडर की जगह फेफड़े और लीवर की जगह किडनी होगी।”

इस डायलॉग का भी लोगों ने कई तरह से मजाक बनाया है। लोगों का कहना है कि भाई ने इस बार फिजिक्स के साथ बॉयोलॉजी और केमेस्ट्री को भी बिगाड़ दिया है।

यूजर्स डायलॉग सुन मजाक उड़ा रहे हैं कि इस बार फिजिक्स भी बायोलॉजी से कह रही है, “हम भी पेले गए थे तुम भी पेले जाओगे।” सुभांकर आनंद नाम के यूजर ने लिखा, “कसम खुदा की जिंदगी के सबसे बुरे 3 मिनट थे ये मेरे।”

एक यूजर ने इस ट्रेलर को शर्मनाक बताया क्योंकि उसे लगा कि दिशा और सलमान की जोड़ी फिल्म में बाप-बेटी वाली है। यूजर ने लिखा, “राधे का ट्रेलर देख शुरू में काफी अच्छा लगा। सलमान और दिशा की जोड़ी बाप-बेटी के रूप में काफी अच्छी लग रही थी। लेकिन अचानक सलमान अपनी बेटी को चूमने लगता है, इस तरह का आचरण हमारी संस्कृति के विरुद्ध है, सलमान की फ़िल्म से ये उम्मीद नहीं थी!”

इसके अलावा अल्लू अर्जुन का गाना ‘सीटी मार’ कॉपी करने पर भी यूजर्स ने राधे फिल्म के ट्रेलर पर चुटकी ली है। कहा जा रहा है कि 3 मिनट का ट्रेलर ऐसा है कि न जाने इस पर कितने मीम बने।

एक सीन जहाँ सलमान दिशा को किस कर रहे हैं उसे लेकर लोगों का कहना है कि उनके सलमान भाई बिगड़ गए क्योंकि एक समय उन्होंने ये कहा था कि वह फिल्मों में किसिंग सीन नहीं देंगे।

पति से नहीं जमी तो 30 साल बड़े ससुर ने दिया सहारा, पनपा प्यार और कर ली शादी: महिला ने कहा- वे दिल से जवाँ

अमेरिका में एक महिला ने शादी टूटने पर अपने पति के सौतेले पिता के साथ ही शादी कर डाली। दोनों की उम्र के बीच 29 साल का फासला है। यह घटना अमेरिकी राज्य केंटकी के मर्सर काउंटी स्थित हैरोड्सबर्ग की है। 31 वर्षीय महिला एरिका क्वीगल ने बताया कि उनके मन में ससुर जेफ़ क्वीगल के लिए तभी प्यार पनपना शुरू हो गया था, जब वह उनके सौतले बेटे जस्टिन टॉवेल के साथ शादीशुदा थी।

जस्टिन एक फैक्ट्री में काम करते हैं, वहीं ससुर जेफ़ पेशे से इंजीनियर हैं। शादी के बाद एरिका और जस्टिन का 2011 में एक बेटा भी हुआ था। इसके बाद से ही दोनों के रिश्तों में खटास आनी शुरू हो गई। तब सौतेले ससुर जेफ़ ने ढाँढस बँधाने के लिए एरिका को अपना कँधा दिया। एरिका अपनी पहली शादी के वक़्त मात्र 29 साल की थीं। अब एरिका और उनके नए पति (पूर्व सौतेले ससुर) की एक 2 साल की बेटी भी है।

एरिका का कहना है कि वह अपने से 30 साल बड़े किसी के साथ प्यार का इजहार कर किसी को दुःखी नहीं करना चाहती थीं, लेकिन 2017 में जब उनके और उनके सौतेले ससुर, दोनों की शादियाँ ख़त्म हो गईं तो जेफ़ ने उनसे प्यार का इजहार किया और दोनों ने फिर सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के साथ रहने का फैसला किया। 2018 में दोनों की शादी हुई और उनकी बेटी ब्रेक्सली का जन्म उसी साल अगस्त में हुआ।

एरिका और जस्टिन की बहन आपस में दोस्त थीं। इस तरह से एरिका 16 वर्ष की उम्र से ही जेफ़ को जानती थी। एरिका ने कहा कि इस रिश्ते के बारे में सुनने में ये अपवादजनक लग सकता है, लेकिन हमें एक-दूसरे से प्यार था और हम नकार नहीं पाए। उन्होंने कहा कि उनका रिश्ता अभी परफेक्ट है। उन्होंने कहा कि जेफ़ ही दिल से जवान हैं और वो बूढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि जब भी वो ऐसा कहती हैं, जेफ़ हँसने लगते हैं।

हालाँकि, एरिका ये भी कहना नहीं भूलतीं कि उनके पूर्व पति जस्टिन एक समझदार व्यक्तित्व वाले इंसान हैं। उनके बेटे की कस्टडी उनके और जस्टिन, दोनों के पास है। जस्टिन ने भी दूसरी शादी कर ली है और नजदीक की सोसायटी में ही रहते हैं। जस्टिन की माँ भी पास में ही रहती हैं। जस्टिन ने कहा कि दोनों के बीच घृणा का कोई भाव नहीं है और दोनों अपनी-जपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों को अब सिर्फ बेटे की चिंता है।

जेफ़ ने कहा कि उनके पास जो भी समय है, वो एरिका के साथ बिताना चाहते हैं और दोनों को साथ घूमना पसंद है। उन्होंने कहा कि हमने कभी उम्र के गैप पर बात ही नहीं की। 2008 में हाईस्कूल पूरी करने के बाद एरिका (तब एरिका लेन) ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ लेक्सिंग्टन में रहना शुरू किया था। वो रिलेशनशिप चला नहीं तो वो 2010 में घर आ गई और एक स्टोर डिपार्टमेंट में काम करने लगीं। फिर अपने बड़े भाई के स्कूली दोस्त जस्टिन के संपर्क में आई, जो तब 27 साल के थे।

मात्र 19 की उम्र में उन्होंने जस्टिन से शादी की। वो जस्टिन से मिलने के बाद डेट पर गईं और फिर ख्याल आया कि शादी कर लेना ठीक रहेगा। 2015 में एक बड़े मेकअप फ्रैंचाइज में उनकी जॉब लगी और उन्हें घूमना व अडवेंचर पसंद था, लेकिन जस्टिन ऐसे ही खुश थे। वो एक टीम बना कर बाहर निकलना चाहती थीं, घूमना चाहती थीं, लेकिन जस्टिन ऐसा नहीं चाहते थे। इससे दोनों में विवाद बढ़ने लगा।

एरिका कार शोज और स्थानीय फैशन मॉडलिंग प्रतियोगिता में भाग लेती रहती थीं। इनमें से एक शो का आयोजन उनके सौतेले ससुर जेफ़ ने किया था, जिससे दोनों करीब आए। इसके बाद एरिका ने उनसे शादीशुदा ज़िंदगी की समस्याएँ साझा करनी शुरू की।

एक दिन उन्हें खूब रोना आ गया और उन्होंने जेफ़ से कहा कि वो इसे और आगे नहीं ले जा सकती। 2015 के अंत तक वो जेफ़ के कँधों पर सिर रख कर रोती थीं। फिर जस्टिन और एरिका का तलाक हो गया। एरिका अपने माता-पिता के पास फिर से रहने लगी। इधर जेफ़ क्वीगल और जस्टिन की माँ की शादी भी टूट गई। 2017 की गर्मियों में दोनों का तलाक फाइनल हो गया।

वितरक से टैबलेट ले उसे फ्री में बाँटने को जमाखोरी कहेंगे?: BJP सांसद गौतम गंभीर ने AAP के आरोपों पर किया सवाल

कोरोना महामारी के बीच पूर्वी दिल्ली के भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने ऐलान किया है कि लोग फैबीफ्लू टैबलेट उनके कार्यालय में जाकर मुफ्त में ले सकते हैं। ये टैबलेट कोरोना इलाज के दौरान उपयोग की जाने वाली दवा है।

गंभीर ने ट्वीट में लिखा, “पूर्वी दिल्ली के लोग ‘Fabiflu’ मेरे कार्यालय (2, जाग्रति एन्क्लेव) से 10 से 5 के बीच मुफ़्त में ले सकते हैं। अपना आधार और डॉक्टर की पर्ची ले आएँ।”

इस ट्वीट के बाद दिल्ली की सत्ताधारी AAP के नेता दवा भंडारण का आरोप मढ़कर गंभीर पर निशाना साधने लगे। आप विधायक सोमनाथ भारती ने कहा, “क्या ये अपराध नहीं है? एक सांसद दवाइयों का भंडारण कर रहा है और अपनी इच्छा से बाँट रहा है। उन्हें इसे अस्पताल में क्यों नहीं देना चाहिए?”

आप नेता राजेश शर्मा ने कहा कि इसी वजह से बाजार से रेमडेसिवीर, फैबीफ्लू और अन्य महत्वपूर्ण दवाएँ गायब हैं। बीजेपी नेता इनका भंडारण कर रहे हैं। हमने ये गुजरात में भी देखा है। ऐसे नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया जाना चाहिए।

आम आदमी पार्टी नेताओं के आरोपों के बीच गौतम गंभीर के कार्यालय के बाहर कई लोग दवा की पर्ची लेकर दवा लेने पहुँचे। एएनआई के मुताबिक एक व्यक्ति ने कहा, ”हमें डॉक्टर ने फेबीफ्लू टैबलेट लाने को कहा है। यह दवा कहीं भी उपलब्ध नहीं है। यहाँ यह टैबलेट मुफ्त में दी जा रही है।”

वहीं गौतम गंभीर ने AAP के आरोपों के जवाब में कहा है, “यदि किसी वितरक से प्राप्त की गई टैबलेट की 100 स्ट्रिप्स मुफ्त में दी जा रही है, तो क्या इसे जमाखोरी कहेंगे? क्या मेरे कारण फैबीफ्लू की कमी हो रही है? आप मुझे गलत कह सकते हैं लेकिन मैं लोगों की जान बचाने के लिए सब कुछ करूँगा।”

गौरतलब है कि संक्रमण से दिल्ली की स्थिति दिन पर दिन गंभीर हो रही है। पिछले 24 घंटे में 24,638 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 249 लोगों की मौत भी हुई है। आज सुबह ही कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक वालिया का कोरोना से निधन हो गया। दिल्ली में कोरोना से मरने वालों का कुल आँकड़ा 12, 887 हो गया है। वहीं एक्टिव केस की संख्या 85, 364 है। दिल्ली में अब तक कुल 9,30, 179 संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं।

18+ वालों को लगेगी कोरोना वैक्सीन: इसके लिए रजिस्ट्रेशन की 2 प्रक्रिया… कब से और कैसे, जानें सब कुछ

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग को और धारदार बनाते हुए केन्द्र सरकार ने 1 मई से 18 साल से अधिक उम्र वाले सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाने का फैसला किया है। मोदी सरकार ने देश में कोरोना के बढ़ते हुए संकट को देखते हुए सोमवार (19 अप्रैल) को यह फैसला लिया।

18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लोगों के लिए कोरोना वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 28 अप्रैल से कोविन (CoWin) प्लेटफॉर्म पर शुरू होगी।

सरकार ने कहा है कि इस टीकाकरण अभियान में स्वदेशी वैक्सीन सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के अलावा जल्द ही रूस की वैक्सीन स्पूतनिक का प्रयोग भी किया जाएगा।

आइए जानते हैं कि 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए 1 मई से शुरू होने वाले कोरोना वैक्सीनेशन का हिस्सा बनने के लिए क्या प्रक्रिया है।

18+ उम्र के लोग कैसे करें कोरोना वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन

cowin.gov.in पर लॉग इन करें और अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें।

आपके मोबाइल नम्बर पर एसएमएस द्वारा एक OTP आएगा।

OTP के वैलिडेट होने के बाद ”रजिस्ट्रेशन ऑफ वैक्सीनेशन” पेज खुलेगा

”रजिस्ट्रेशन ऑफ वैक्सीनेशन” पेज पर आवश्यक जानकारियां भरें, जैसे कि आपका फोटो आईडी प्रूफ।

आपसे पूछा जाएगा कि क्या आपको कोई बीमारी है, इसका जवाब हाँ या नहीं में दिया जा सकता है।

रजिस्ट्रेशन के लिए जानकारियाँ भरने के बाद पेज के दाईं ओर नीचे की तरफ ”रजिस्टर” बटन पर क्लिक करें।

सफलतापूर्वक रजिस्ट्रेशन के बाद आपको एक पुष्टिकरण का मैसेज आएगा। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपका ”अकाउंट डिटेल्स” दिखाई देगा। ”अकाउंट डिटेल्स” पेज से ही आप अपॉइंटमेंट शेड्यूल कर सकते हैं।

नागरिकों को इस मोबाइल नम्बर से तीन और लोगों को जोड़ने की अनुमति होती है, ऐसा करने के लिए पेज के दाईं ओर नीचे ”ऐड मोर” पर क्लिक करें। इसमें शामिल किए जाने वाले सभी व्यक्तियों की डिटेल्स भरें और फिर ऐड बटन पर क्लिक करें।

अपनी अपॉइंटमेंट बुक करने या वैक्सीनेशन के लिए आप आरोग्य सेतु ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए इसमें एक अलग टैब बनाया गया है, जिसमें आप नाम, उम्र और लिंग समेत अपनी आवश्यक जानकारियाँ भर कर खुद को वैक्सीनेशन के लिए रजिस्टर कर सकते हैं।

आरोग्य सेतु ऐप के माध्यम से कैसे करें रजिस्ट्रेशन

आरोग्य सेतु ऐप पर जाएँ> होम स्क्रीन पर CoWIN टैब पर क्लिक करें

वैक्सीन रजिस्ट्रेशन को सेलेक्ट करें, उसमें अपना फोन नंबर डालें, फिर जो ओटीपी आए, उसे डाल कर वेरीफाई पर क्लिक करें।

अब आपको वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन पेज पर रिडायरेक्ट कर दिया जाएगा।

‘CoWIN पोर्टल के जरिए वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया (इसी लेख में ऊपर दिया गया है) का पालन करें।

प्रत्येक नागरिक को कोरोना वायरस वैक्सीन की दो खुराक दी जानी है। CoWIN पोर्टल के मुताबिक, कोवाक्सिन की दूसरी खुराक पहली खुराक के बाद 28 दिनों से 42 दिनों के बीच लेनी चाहिए। कोविशिल्ड की दूसरी खुराक पहली खुराक के बाद 28 दिनों से 56 दिनों के बीच लेनी चाहिए।

बुधवार को, सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा कि वह वैक्सीन को राज्यों को 400 रुपए और निजी अस्पतालों को 600 रुपए में बेचेगा, जबकि केन्द्र सरकार के लिए कीमत वही (150 रुपए) रहेगी।

हाल ही में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, असम, बिहार ने 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए मुफ्त वैक्सीनेशन की घोषणा की है।

केन्द्र ने 16 जनवरी से स्वस्थ्य सेवा और फ्रंटलाइन श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू किया था और 1 अप्रैल से 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को इसमें शामिल करते हुए इसका विस्तार किया था।