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कॉन्ग्रेस MLA और पूर्व कॉर्पोरेटर पर FIR: ऑन ड्यूटी बदतमीजी और धमकी के बाद डॉक्टर ने दे दिया था इस्तीफा

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के एक विधायक और एक पूर्व कॉर्पोरेटर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। दोनों पर एक डॉक्टर के साथ बदतमीजी का आरोप है। भोपाल (दक्षिण-पश्चिम) से विधायक व पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और पूर्व कॉर्पोरेटर गुड्डू चौहान के खिलाफ मध्य प्रदेश पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। इन दोनों ने अस्पताल के परिसर में ही ऑन-ड्यूटी डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार किया था। उक्त डॉक्टर हबीबगंज के जेपी हॉस्पिटल में कार्यरत थे।

ये मामला एक मरीज की मौत से जुड़ा है। पीड़ित डॉक्टर योगेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन ये संभव नहीं हो सका। डॉक्टर ने कहा कि उन्हें ये अपमान बर्दाश्त नहीं हुआ, इसीलिए उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। उनके लिखित शिकायत के बाद सोमवार (अप्रैल 12, 2021) को मामला दर्ज हुआ। सबूत के रूप में CCTV फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान मौजूद हैं।

पुलिस ने इस मामले में IPC की धरा 353 (लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से भयोपरत करने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और धारा 189 (सरकारी कर्मचारी को क्षति पहुँचाने की धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। ये घटना शनिवार को दोपहर 12 बजे की है। कोलर कॉलोनी के 35 वर्षीय मरीज तख्त सिंह सख्या को ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण जेपी अस्पताल में लाया गया था।

दोपहर के 2:54 बजे अस्पताल के इमरजेंसी रूम में ही उनकी मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए इसे मौत का कारण बताया। इस मामले में परिजन पीसी शर्मा को बुला कर ले आए। फिर शर्मा और चौहान ने डॉक्टर को उनका कॉल न उठाने के लिए धमकी दी और बदतमीजी की। डॉक्टर को जम कर डाँटा गया और साथ ही बहस की गई।

इस पूरी घटना पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करके खेद जताते हुए कहा था, “आज हमारे डॉक्टरों के साथ जैसा बर्ताव किया गया, वह शर्मनाक है और किसी को भी डॉक्टरों के साथ बदतमीजी करने का कोई अधिकार नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि हमें राजनीति से ऊपर उठ कर एक साथ मिलकर कोरोना वॉरियर्स की सहायता करनी चाहिए। वो अपनी जान को जोखिम में डाल हमारी सेवा करते हैं।”

बंगाल: प्रचार करने पर लगी 24 घंटे की रोक के विरोध में धरना देंगी ममता बनर्जी, मुर्शिदाबाद में मिले क्रूड बम

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर चुनाव आयोग ने 24 घंटों के लिए चुनाव प्रचार करने से रोक लगा दी है। प्रतिबंध सोमवार (अप्रैल 12, 2021) शाम 8 बजे से लेकर मंगलवार (अप्रैल 13, 2021) शाम 8 बजे तक प्रभावी रहेगा।

चुनाव आयोग ने अपने आदेश में ममता के बयानों की निंदा करते हुए कहा, “ममता बनर्जी ने पिछले कुछ दिनों में 2 ऐसे बयान दिए जो प्रदेश के माहौल को खराब कर सकते हैं लिहाजा यह कार्रवाई की जा रही है।” 

इससे पहले चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी को इसी संबंध में नोटिस भी जारी किए थे। पहले नोटिस में ममता बनर्जी से आयोग ने पूछा था कि उन्होंने हुगली में जो चुनावी रैली के दौरान सांप्रदायिक तर्ज पर वोटों के लिए अपील की थी, वह उस पर अपना पक्ष बताएँ। वहीं दूसरे नोटिस में चुनाव आयोग ने ममता के उस बयान पर जवाब माँगा, जिसमें उन्होंने केंद्रीय सुरक्षाबलों पर सवाल उठाया था और जनता से सीएपीएफ के जवानों पर हमला करने को कहा था।

चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के खिलाफ़ अपनी यह कार्रवाई इन दो नोटिसों का जवाब मिलने के बाद में की है। आयोग को भेजे गए जवाब में ममता बनर्जी ने कहा था कि उन्होंने वोटों को बाँटने की बात नहीं कही, बल्कि उल्टा हिंदू-मुसलमान सब को एक साथ रहने की बात कही थी। ममता बनर्जी ने अपने जवाब में कहा था कि यह उन लोगों को कड़ा संदेश था जो लोग समाज को बाँट कर राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके बाद केंद्रीय सुरक्षा बलों के ऊपर हमले वाले बयान पर ममता बनर्जी ने जवाब दिया कि उन्होंने हमला करने की बात नहीं कही, लेकिन इतना जरूर कहा था कि अगर कोई आपको वोट करने से रोके तो आप वहाँ पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कीजिए और अपने मत का इस्तेमाल कीजिए।

हालाँकि, चुनाव आयोग इन दोनों जवाबों से संतुष्ट नहीं दिखा। आयोग ने ममता पर कार्रवाई करते हुए उन्हें चेतावनी दी कि वह ऐसे भड़काऊ भाषण देने से बचें, क्योंकि वह राज्य की मुख्यमंत्री हैं और इस तरह के भड़काऊ भाषण से राज्य की कानून व्यवस्था खराब हो सकती है। आयोग ने बताया कि उसकी कोशिश राज्य में चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने की है, जबकि ऐसे भाषण चुनाव आयोग के प्रयास में बाधा उत्पन्न करेंगे।

चुनाव आयोग की इस कार्रवाई के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने विरोध-प्रदर्शन करने की बात कही है। ममता ने ट्वीट कर कहा, ”निर्वाचन आयोग के अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक निर्णय के विरोध में, मैं कल दोपहर (मंगलवार) 12 बजे कोलकाता के गाँधी मूर्ति के पास धरने पर बैठूँगी।”

बता दें कि बंगाल में स्थिति के मद्देनजर चुनाव आयोग 8 चरणों में विधानसभा चुनाव करवा रहा है। इनमें से 4 चरण समाप्त हो चुके हैं। पाँचवे चरण के लिए मतदान 17 अप्रैल को होगा। लेकिन हालातों को देखते हुए EC ने चुनाव प्रचार 48 घंंटे की जगह 72 घंटे पहले खत्म करने को कहा है।

इस बीच पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज इलाके में सोमवार को 14 क्रूड बम बरामद किए गए हैं। सुरक्षा बलों को शक है कि इन बमों का इस्तेमाल वोटिंग के दिन किया जाना था। मुर्शिदाबाद में मिले 14 बमों को बम स्पोजल स्क्वाड द्वारा डिस्पोज्ड कर दिया गया है।

भाई ने कर ली आत्महत्या, परिवार ने 10 दिनों तक छिपाई बात: IPL के ग्राउंड में चमका टेम्पो ड्राइवर का बेटा, सहवाग भी हुए मुरीद

1987 में क्रिकेट वर्ल्ड कप पहली बार इंग्लैंड से बाहर (भारत व पाकिस्तान में) खेला गया था। तब चेतन शर्मा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ हैट्रिक लेकर ODI में ऐसा कारनामा करने वाले पहले भारतीय बने थे। वर्ल्ड कप में हैट्रिक लेने वाले वे दुनिया के पहले बॉलर थे। लेकिन, आज हम उस चेतन की बात नहीं कर रहे। हम बात कर रहे हैं चेतन सकारिया की, जिन्हें राजस्थान रॉयल्स ने IPL में 1.20 करोड़ रुपए में खरीदा था।

सोमवार (अप्रैल 12, 2021) को पंजाब किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच मुकाबला हुआ। सभी की नजरें क्रिस गेल पर थीं, लेकिन 28 गेंदों पर 40 रन उनके कद के हिसाब से एक औसत पारी ही थी। ये मैच कप्तानों के नाम रहा। पहले बैटिंग करते हुए पंजाब के कप्तान KL राहुल ने 50 गेंद पर 91 रनों की पारी खेली, तो 221 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए राजस्थान के युवा कप्तान संजू सैमसन ने 63 गेंदों पर 119 रन ठोके।

हालाँकि, वो अपनी टीम को जीत नहीं दिला सके और राजस्थान रॉयल्स लक्ष्य से मात्र 4 रन पीछे रह गई। पंजाब की तरफ से 6 छक्के लगा कर 28 गेंदों पर 64 रनों की पारी खेलने वाली दीपक हुड्डा की धूम रही, जिन्हें अप्रत्याशित रूप से नंबर-4 पर प्रमोट किया गया था। लेकिन, जहाँ हर बॉलर को रन पड़ रहे थे, उस वानखेड़े स्टेडियम में एक और सितारा चमका। राजस्थान ने वैसे तो 20 ओवर के मैच में 8 गेंदबाजों का इस्तेमाल किया, लेकिन चेतन सकारिया का प्रदर्शन शानदार रहा।

उन्होंने 4 ओवर में 31 रन देकर 3 विकेट झटके। पंजाब के दोनों ओपनरों को उन्होंने ही चलता किया। इस पूरे मैच में जिन 13 बॉलरों को आजमाया गया, उनमें 1 ओवर फेंकने वाले रियान पराग को छोड़ दें तो चेतन सबसे किफायती गेंदबाज रहे। खास बात ये है कि ये उनका पहला ही मैच था। वीरेंद्र सहवाग जैसे दिग्गज ने उनकी तारीफ़ की है। सिराज, सैनी, नटराजन, प्रसिद्ध कृष्णा और कार्तिक त्यागी वगैरह के साथ अब वो नए उभरते भारतीय तेज़ गेंदबाजों की सूची में जुड़ गए हैं।

बाएँ हाथ के तेज़ गेंदबाज चेतन सकारिया गुजरात के राजकोट में स्थित एक छोटे से शहर वारतेज से आते हैं। यूँ तो वो एक बल्लेबाज बनना चाहते थे, लेकिन स्कूल में अटेंशन पाने के लिए उन्होंने गेंदबाज बनने की प्रैक्टिस शुरू की। 16 वर्ष की उम्र तक उन्हें कोई कोचिंग नहीं मिली और वो खुद ही सीखते रहे। पहले वो टेनिस बॉल क्रिकेट खेला करते थे। गेंदबाजी में वे जहीर खान और इरफ़ान पठान के एक्शन को कॉपी करते थे।

कूच बिहार ट्रॉफी में 6 साल पहले सौराष्ट्र की तरफ से 6 मैच में 18 विकेट लेने के बाद उनका नाम लोगों के सामने आया। इसके बाद ‘MRF पेस फाउंडेशन’ के अंतर्गत उन्हें दिग्गज पूर्व तेज़ गेंदबाज ग्लेन मैग्रा की निगरानी में ट्रेनिंग का मौका मिला। उनके पिता का व्यापार ठप्प होने के कारण पिछले कई सालों से वो अपने घर में कमाने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं। उनके मामा ने क्रिकेट में उनका शुरुआती खर्च उठाया था।

बदले में वो भावनगर में अपने मामा की स्टेशनरी की दुकान पर काम करते थे। मार्च 2020 में सौराष्ट्र ने रणजी ट्रॉफी जीती और यहीं से IPL के चयनकर्ताओं की नजर उन पर पड़ी। IPL की नीलामी में उन्हें अच्छी खबर तो मिली, लेकिन इससे तीन सप्ताह पहले ही उनके छोटे भाई ने आत्महत्या कर ली थी। एक टेम्पो ड्राइवर के बेटे चेतन कहते हैं कि बचपन में वो उस तरह की मस्ती नहीं कर पाए, जैसा बाकी बच्चे करते हैं।

जब उन्हें 4000 रुपए के जूते की ज़रूरत थी तो विकेटकीपर बल्लेबाज शेल्डन जैक्सन ने उनसे कहा कि वो उन्हें आउट करने में सफल रहते हैं तो वो उन्हें जूते दे देंगे। तब जाकर कहीं उन्हें खेलने के लिए स्पाइक्स वाले जूते मिले। शेल्डन को पता था कि उन्हें जूतों की ज़रूरत है, इसीलिए उन्होंने अपने हिसाब से मदद की। जब उनके भाई ज़िंदा थे, तब सारी जिम्मेदारी वही निभाते थे। रेंट से लेकर समान खरीदने तक, भाई ने हर चीज में मदद की।

परिवार ने चेतन सकारिया से 10 दिनों तक छिपा कर रखा था कि उनके भाई की मौत हो गई है, ताकि उनके खेल पर कोई असर ना पड़े। तब वो ‘मुश्ताक अली ट्रॉफी’ में खेल रहे थे, जहाँ वो छठे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। भाई की मौत के बाद जब भी चेतन उनसे बात करने की इच्छा जाहिर करते, परिवार कोई न कोई बहाना बना देता था। अब चेतन और उनके परिवार का सपना राजकोट में एक घर का है।

भारतीय गणना ही सर्वोत्तम: विदेशी कैलेंडर गड़बड़ियों की तारीख से भरे, कभी 10 माह का साल तो कभी 10 दिन गायब

भारत में ‘चैत्र शुक्ल प्रतिपदा’ को ही साल की प्रथम तारीख़ माना जाता है और वैज्ञानिक रूप से भी इस पर कोई प्रश्नचिह्न खड़ा नहीं होता। लेकिन क्या आपको पता है कि जहाँ भारतीय कैलेंडर प्राचीन काल से वैसे ही चला आ रहा है, वहीं विदेशी कलेंडरों में अनेक बार गड़बड़ हुई हैं और उनमें कई संशोधन करने पड़े हैं। अलग-अलग राजाओं ने और समय के साथ अलग-अलग त्रुटियों को सुधारते-सुधारते ये कैलेंडर कई बार बदले।

इनमें माह की गणना चन्द्र की गति से और वर्ष की गणना सूर्य की गति पर आधारित है। आज इसमें भी आपसी तालमेल नहीं है। ईसाई मत में जीसस क्राइस्ट का जन्म इतिहास की निर्णायक घटना है। अत: कालक्रम को ‘B.C.(Before Christ) और A.D. (Anno Domini)’ अर्थात ‘In the year of our Lord’ में बाँटा गया। लेकिन, यह पद्धति ईसा के जन्म के कुछ सदियों तक प्रचलन में नहीं आई।

रोमन कैलेंडर के बारे में बता दें कि आज के ईस्वी सन का मूल रोमन संवत ही है। यह ईसा के जन्म के 753 वर्ष पूर्व रोम नगर की स्थापना से प्रारम्भ हुआ था। तब इसमें 10 माह थे (प्रथम माह मार्च से अंतिम माह दिसम्बर तक)। उस समय वर्ष होता था सिर्फ 304 दिन का। बाद में रजा नूमा पिम्पोलिय्स ने दो माह (जनवरी, फरवरी) जोड़ दिए। तब से वर्ष 12 माह अर्थात 355 दिन का हो गया। फिर भी खगोलीय गतिविधियों के अनुरूप नहीं।

असल में 2 सितम्बर 1952 को अंग्रेजों ने सभी ब्रिटिश कॉलोनीज में पोप ग्रेगोरी XII के कैलेंडर को लागू किया, जो उन्होंने अक्टूबर 1582 में बनाया था। अलेक्सेंडरियन खगोलशास्त्री Sosigenes ने सौर वर्ष की गणना में कुछ गलती की थी, इसीलिए उसे हटा दिया गया। जूलियस सीजर ने भी रोमन कैलेंडर में ही बदलाव कर जूलियन कैलेंडर बनाया था। सीजर ने Sosigenes की सलाह पर नए कैलेंडर को सूर्य के आधार पर बनाया, चन्द्रमा नहीं।

एक सौर वर्ष की लंबाई 365.25 दिन गणना की गई, जो 11 मिनट छोटा था। इससे लीप ईयर की गणना में गड़बड़ी हो गई। जीसस क्राइस्ट के जन्म के आधार पर बने कैलेंडर का प्रचलन तो छठी शताब्दी में शुरू हुआ था। अभी भी पुराने कई सालों के कैलेंडर में कुछ खामियाँ हैं, जिन पर निर्णय लिया जाना है। एक और बड़ी बात ये है कि एक कैलेंडर से ब्रिटिश ने जब दूसरे का रुख किया तो बीच के 10 दिन न जाने कहाँ गायब हो गए।

गोवर्धन मठ के शंकराचार्य से सुनिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का महत्व

यह ग्रहों की गति से मेल नहीं खाता था, तो जुलियस सीजर ने इसे 365 और 1/4 दिन का करने का आदेश दे दिया। इसमें कुछ माह 30 व कुछ 31 दिन के बनाए और फरवरी 28 का रहा जो चार वर्षों में 29 का होता है। भारतीय काल गणना का केंद्रबिंदु अवंतिका (उज्जैन) को माना गया। कालचक्र प्रवर्तक भगवान शिव काल की सबसे बड़ी इकाई के अधिष्ठाता होने के कारण महाकाल कहलाए। आज भी वो उज्जैन में प्रतिष्ठित हैं।

कलियुग में शकारि विक्रमादित्य द्वारा नए संवत का प्रारंभ यह परकीय विदेशी आक्रमणकारियों से भारत को मुक्त कराने के महा-अभियान की सफलता का प्रतीक हुआ। भारतीय नववर्ष इसीलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्राकृतिक दृष्टि से भी वृक्ष, वनस्पति, फूल- पत्तियों में भी नयापन दिखाई देता है। वृक्षों में नई-नई कोपलें आती हैं। वसंत ऋतु का वर्चस्व चारों ओर दिखाई देता है। कारोबारियों के लिए वित्त वर्ष भी तभी शुरू होता है।

मरकज से कुम्भ की तुलना पर CM तीरथ सिंह ने दिया ‘लिबरलों’ को करारा जवाब, कहा- एक हॉल और 16 घाट, इनकी तुलना कैसे?

हरिद्वार में चल रहे कुंभ की तुलना तबलीगी जमात के मरकज से करने वालों को मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने करारा जवाब दिया है। दरअसल, सोमवार को कुंभ में सोमवती अमावस्या के मौके पर श्रद्धालुओं सहित संतों ने शाही स्नान किया। इसी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

इसके बाद सोशल मीडिया पर लिबरल, वामपंथी और कट्टरपंथियों ने कुम्भ की तुलना पिछले साल के निजामुद्दीन मरकज और तबलीगी जमात से कर दी थी। जिसका जवाब देते हुए सीएम तीरथ सिंह रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कुंभ की तुलना मरकज से नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मरकज एक हाल में होता है, लेकिन कुंभ के 16 घाट हैं। यह हरिद्वार से लेकर नीलकंठ तक विस्तृत है। बावजूद इसके लोग एक सही जगह पर स्नान कर रहे हैं और इसके लिए समयसीमा निर्धारित है।

सोमवती अमावस्या पर हुए शाही स्नान को पूरी तरह से सफल बताते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने संत समाज के पूर्ण सहयोग का जिक्र किया। अधिकारियों और मीडिया को धन्यवाद देते हुए सीएम ने कहा कि जिस तरह की सुविधाएँ संत चाहते थे वैसी सुविधा उन्हें दी गई।

28 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी है कि शाम तक 28 लाख लोग आस्था की डुबकी लगा चुके थे, जिसके 35 लाख को पार करने की संभावना उन्होंने व्यक्त की है। इस दौरान केंद्र की कोरोना गाइडलाइंस के पालन का दावा मुख्यमंत्री ने किया है। रिपोर्ट के मुताबिक सोमवती अमावस्या पर पहले सभी 13 अखाड़ों ने स्नान किया, इसके बाद ही श्रद्धालुओं ने स्नान किया।

कुंभ की जमातियों से तुलना करने वालों को सबक

उत्तराखंड सरकार ने कुंभ मेले के आयोजन को सख्त नियमों के पालन के साथ अनुमति दी है। यहाँ नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। मेले में आने से पहले लोगों के पास कोरोना के आरटी पीसीआर टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट होनी चाहिए, जो कि 72 घंटे से अधिक पुरानी न हो। यही कारण है कि इस वर्ष भीड़ पिछले वर्षों की तुलना में बहुत कम है। लेकिन लिबरल-वामपंथी और कट्टरपंथियों का समूह गलत सूचनाओं के आधार पर इसे कोरोना नियमों का उल्लंघन साबित करते हुए अपना प्रोपेगेंडा सेट करने में लगा है।

यूपी पंचायत चुनाव लड़ रहे एक प्रत्याशी के घर से भारी मात्रा समोसे-जलेबी की जब्ती, दक्षिण भारत में छिड़ा घमासान

एक हज़ार से अधिक समोसे और करीब दो क्विंटल से अधिक जलेबियाँ जब्त कर ली गईं। किसी हलवाई की दुकान पर खाद्य विभाग का छापा नहीं पड़ा कि मैदे की ख़राब क्वालिटी की वजह से ऐसा हुआ। इसलिए भी नहीं कि खाद्य क़ानून के अनुसार समोसे और जलेबी स्टॉक करना अपराध है। दरअसल ये ज़ब्ती उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव लड़ रहे एक प्रत्याशी के घर से हुई है।

क्या ज़माना आ गया है। चुनाव के मौसम में छापे मारने पर समोसे और जलेबियाँ बरामद हो रही हैं! जब ज़माना अच्छा था और सब ख़ुशी से जीवनयापन करते थे तब चुनावी मौसम में पड़ने वाले छापे में शराब जैसे चुनावी पेय पदार्थ बरामद होते थे। छापा मारने वालों को तो मजा आता ही था, खबर छापने और उसे पढ़ने वालों को भी मज़ा आता था। अब पता नहीं लोकतंत्र की ऐसी कौन सी मजबूरी है कि पुलिस मेहनत करके छापा मारती है और शराब बरामद न होकर समोसे और जलेबी बरामद होते हैं! पर कर क्या सकते है, ज़माना ख़राब है तो यही सब होना है।

अस्सी-नब्बे के दशक वाले अच्छे जमाने और सरल लोकतंत्र के दिनों में वोटरों में बँटवाने के लिए शराब वग़ैरह रखना मजबूत चुनावी संस्कृति का हिस्सा माना जाता था। प्रत्याशीगण निर्भीक होकर शराब का स्टॉक मज़बूत किवाड़ वाले गोदाम में रखवा लेते थे और सही महूरत देखकर वोटरों के हवाले कर दिया करते थे। चुनाव लोकसभा का हो या विधानसभा का, प्रत्याशी लेन-देन में ईमानदारी के क़ायल होते थे। मानो कह रहे हों; भैया वोट तो हमें आपका चाहिए पर हम ऐसे न लेंगे। आपको चाहे जितना बुरा लगे पर आपके वोट के एवज में हम आपको बिना कुछ दिए न मानेंगे। अब देखिए, आपके वोट का सही वैल्यूएशन करवाने के लिए चुनाव आयोग ने वैल्यूअर नियुक्त नहीं किए हैं इसलिए हमें पता नहीं कि आपके वोट का वैल्यू कितने रुपए है। ऐसे में मेरे और आपके धरमसंकट का एक हल यह है कि पैसा न देकर वोट के एवज़ में हम आपको शराब दें। आप भी ख़ुश, हम भी ख़ुश और लोकतंत्र भी ख़ुश।

कुछ चुनावी विद्वान आज भी उन भले दिनों को याद करते हुए बताते हैं; शराब बाँटें बिना चुनावी प्रक्रिया पूर्ण नहीं मानी जाती थी। लगता था जैसे वोट लेने के लिए शराब न बाँटी गई तो वोट की पर्ची वोटर के हाथ से निकल कर विरोधी नेता की पॉकेट में जा घुसेगी। वैसे भी कई नेताओं का लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास इतना प्रगाढ़ होता था कि बिना कुछ दिए वोट लेने के विचार से भी उनकी आत्मा परेशान रहती थी। कुछ देकर वोट लेने से लोकतंत्र का सांस्कृतिक अर्थशास्त्र न केवल जीवित रहता था पर कुलाँचे भी मारता था।

विद्वान बताते हैं कि वोट के एवज़ में पैसे बाँटने का कार्यक्रम भी होता था पर वह उन दिनों बहुत पॉप्युलर नहीं था। कई बार लोकसभा चुनावों में दिल्ली से आए आलाकमान के प्रतिनिधि वोटर को पैसे देने के कार्यक्रम पर भरोसा करते तो थे पर वे अंक गणित में लोकल नेताओं की निपुणता को लेकर शंकित रहते थे। उन भले दिनों को याद करते हुए एक विद्वान बताते हैं; एक उप चुनाव में दिल्ली से आए आलाकमान के मैनेजर के सामने बाँटने के लिए लोकल नेताओं ने पैसे का एस्टिमेट रखा तो पता चला कि प्रति वोटर जो रक़म बताई गईं थी, उसके अनुसार उस लोकसभा क्षेत्र में करीब 67 लाख वोटर थे।

राहुल गाँधी भले ही अपने बालसुलभ भाषणों में दक्षिण भारत को उत्तर भारत से महान बताएँ पर वोट के एवज़ में लेन-देन का कार्यक्रम दक्षिण भारत के लिए भी पुराना ही है। कहते हैं एक नेत्री को वोट के एवज़ में लड्डू बाँटने में बहुत सुख मिलता था। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनके विश्वास की पोल तब खुली जब पता चला कि दरअसल वे वोट के एवज़ में लड्डू नहीं बल्कि सोना बाँटती थीं। लड्डू इतना बड़ा रहता था कि उसमें सोने के छोटे गहने के साथ ही भारत का लोकतंत्र भी समा जाता था।

कितने अच्छे दिन थे जब लेन-देन के ये काम छिप-छिपाकर किए जाते थे। एक तरह का अड्वेंचर होता था। पकड़े जाने पर प्रत्याशी के बारे में लोग जान जाते और निश्चिंत हो लेते थे कि उसके बारे में क्या विचार बनाना है। अब छिपाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। अब प्रत्याशी अपनी पार्टी के घोषणापत्र में ही लिखवा देता है कि जीतने पर क्या-क्या फ़्री में देगा। ऐसी भीषण पारदर्शिता की वजह से लोकतंत्र से रोचकता कम होती जा रही है।

विशेषज्ञ बता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावों में इस बार बहुत कड़ाई बरती जा रही है। शायद सही ही कह रहे हैं। तभी तो प्रत्याशी समोसे और जलेबी जैसी चीज़ों के साथ धर लिए जा रहे हैं। वरना पिछले पंचायत चुनावों में मेरे गाँव के एक प्रत्याशी गाँव के कई लोगों को चुनाव से पहले प्लेज़र ट्रिप पर गोवा ले गए थे। यह बात और है कि वे अपना एक कार्यकाल समाप्त करके दूसरी बार प्रत्याशी बने थे। मुझे पूरा विश्वास है कि जिस प्रत्याशी के यहाँ से समोसे और जलेबी बरामद हुई है वह पहली बार चुनाव में खड़ा हुआ है और आगे चलकर जैसे-जैसे अनुभवी होगा, अगली बार वोटरों के साथ गोवा से ज़ब्त किया जाएगा।

महाराष्ट्र: दरगाह में 7 साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म करने वाला 26 साल का अकरम पठान गिरफ्तार

महाराष्ट्र के लातूर में पिछले हफ्ते 7 साल की मासूम बच्ची से कथित तौर पर दुष्कर्म करने के मामले में एक मुस्लिम शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने रविवार (11 अप्रैल 2021) को इसकी जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि 6 अप्रैल को अकरम पठान (26 साल) नाम के एक मुस्लिम शख्स ने निलांगा तहसील के शेडोल में स्थित एक दरगाह में इस शर्मनाक घटना को अंजाम दिया।

महाराष्ट्र के लातूर के निलांगा पुलिस थाने के अधिकारी के मुताबिक, आरोपित अकरम पठान को 7 साल की मासूम बच्ची से कथित तौर पर दुष्कर्म करने के आरोप में औसा के एरंडी सरोला गाँव से गिरफ्तार कर लिया गया है।

गौरतलब है कि इस वीभत्सघटना पहली नहीं है, इससे पहले भी रेप और गैंगरेप के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मासूम बच्चियों के साथ दरिंदगी की सारी हदें पार की हैं। हाल ही में (9 अप्रैल) राजस्थान के भिवाड़ी में एक मौलवी पर नाबालिग से रेप का आरोप लगा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक भिवाड़ी के एक गाँव की मस्जिद के मौलवी ने 14 साल की नाबालिग लड़की के साथ पहले रेप किया और फिर उसे कुएँ में धकेल फरार हो गया था। इस घटना के 7 दिन बाद पीड़ित बालिका के परिवार ने थाने में शिकायत दर्ज कराकर कार्रवाई की गुहार लगाई थी।

जानकारी के मुताबिक, भिवाड़ी सीओ हरिराम कुमावत ने बताया था कि गाँव के ही एक व्यक्ति ने मौलवी जफरु के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। वह मूल रूप से हरियाणा के पुन्हाना इलाके के बिसरु गाँव का रहने वाला था। अलवर में वह परिवार सहित रहता था। शिकायत में कहा गया था कि अप्रैल 1, 2021 की रात मौलवी उसकी 14 साल की बेटी को घर से मस्जिद में ले गया और उसके साथ रेप किया था।

इसके अलावा एक दूसरी घटना में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक मदरसे में पढ़ाने वाले 25 साल के मौलवी को 9 साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। खबरों के मुताबिक यह घटना 9 अगस्त 2020 की है।

पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक आरोपित का नाम मौलाना अरशद रहमानी बताया गया था। रायपुर शहर के खमारडीह थाना क्षेत्र में शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अरशद रहमानी को गिरफ्तार कर लिया था।

पुलिस ने बताया कि आरोपित मौलाना रहमानी पंडरी क्षेत्र के मदरसे में शिक्षक था। वह बच्ची और उसकी बहन को अरबी पढ़ाने के लिए उनके घर पर जाता था। आरोपित मौलाना पिछले 15 दिनों से अरबी पढ़ाने बच्ची के घर जा रहा था। 9 अगस्त के दिन उसने बच्ची को अकेला देखकर उसके साथ बलात्कार किया था।

100 करोड़ की वसूली के मामले में अनिल देशमुख को CBI का समन, 14 अप्रैल को होगी ‘गहन पूछताछ’

100 करोड़ रुपए की वसूली के मामले की जाँच कर रही केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीबीआई) ने दायरा बढ़ाते हुए महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को पूछताछ के लिए समन भेजा है। सीबीआई ने 14 अप्रैल को अनिल देशमुख को हाजिर होने को कहा है। गौरतलब है कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख ने 100 करोड़ की वसूली के लिए सचिन वाजे को टारगेट दिया था।

इससे पहले केंद्रीय जाँच एजेंसी ने देशमुख के दो सहायकों से संजीव पलांडे और सचिव कुंदन शिंदे से मुंबई सांताक्रूज स्थित डीआरडीओ ऑफिस के गेस्ट हाउस में पूछताछ की थी। बता दें कि परमबीर सिंह के आरोपों के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख के खिलाफ जाँच का आदेश सीबीआई को दिया था।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एसपी रैंक के दो आईपीएस अघिकारी पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख से पूछताछ करेंगे। जाँच एजेंसी 100 करोड़ रुपए की वसूली के मामले में अब तक परमबीर सिंह, निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, एसीपी संजय पाटिल और शिकायतकर्ता जैश्री पाटिल से पूछताछ कर चुकी है।

महाराष्ट्र सरकार के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के वसूली कारोबार का खुलासा 20 फरवरी को हुआ था, जब मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने इस मामले में सीएम उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा। इसमें आईपीएस अधिकारी ने आरोप लगाया कि एनसीपी नेता ने ही सचिन वाजे से मुंबई के 1750 बार, रेस्टोंरेंट और अन्य प्रतिष्ठानों से प्रति माह 100 करोड़ रुपए की वसूली करने को कहा था। इसके साथ ही परमबीर सिंह ने देशमुख के उस बयान का भी खंडन किया था कि एंटीलिया बम केस में चूक के कारण उनका ट्रांसफर किया गया था।

बीते 8 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ देशमुख और महाराष्ट्र सरकार की अपील पर सुनवाई की थी। उस दौरान महाराष्ठ सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने केवल महाधिवक्ता की दलीलें सुनीं, जबकि राज्य सरकार को काउंटर दायर करने का मौका तक नहीं दिया। देशमुख की तरफ से वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट ने उनके मुवक्किल की बात ही नहीं सुनी।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में सीबीआई पर बल देते हुए कहा था, “हाईकोर्ट ने जो आदेश जारी किया है उसे हम देख रहे हैं और हम आरोपों और व्यक्ति इसकी गंभीरता को देखते हुए इसकी जाँच के लिए एक स्वतंत्र जाँच एजेंसी की आवश्यकता है। यह लोगों के विश्वास का मामला है। हम यह भी जोड़ सकते हैं कि जो निर्देश दिया गया है वह एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा केवल एक प्रारंभिक जाँच है।”

आंध्र या कर्नाटक… कहाँ पैदा हुए रामभक्त हनुमान? जन्म स्थान को लेकर जानें क्यों छिड़ा है नया विवाद

हनुमान जी का जन्म कहाँ हुआ था, इसको लेकर कर्नाटक और आँध्र प्रदेश में बहस छिड़ गई है। दोनों राज्यों ने दावा किया है कि भगवान हनुमान का जन्म स्थान उनके क्षेत्र में है। हालाँकि, अब कर्नाटक के शिवमोगा में एक अन्य धार्मिक प्रमुख ने हनुमान के जन्म स्थान को लेकर नया दावा किया है। उनका कहना है कि भगवान राम के विश्वास पात्र हनुमान जी का जन्म कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के तीर्थस्थल गोकर्ण में हुआ था।

वहीं, इससे पहले कर्नाटक की तरफ से ये दावा किया जाता रहा है कि हनुमान का जन्म हकोप्पल जिले के एंगुंडी के पास किष्किंधा में अंजनाद्रि पहाड़ी पर हुआ था। दूसरी ओर आँध्र प्रदेश के मुताबिक हनुमान की जन्मभूमि तिरुपति की 7 पहाड़ियों में से एक पर है। इस पहाड़ी का नाम भी अंजनाद्रि है।

बताया जाता है कि तिरुपति में स्थित तिरुमला मंदिर हिंदुओं की मान्यता का बड़ा केंद्र है। तेलुगु में तिरुमला का अर्थ होता है सात पहाड़ियाँ। यह मंदिर इन्हीं सात पहाड़ियों को पार करने पर आता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हनुमान के जन्म स्थान को लेकर शिवमोगा की रामचंद्रपुरा मठ के प्रमुख राघवेश्वरा भारती रामायण का जिक्र करते हुए कहते हैं कि हनुमान ने सीताजी को बताया था कि उनका जन्म समुद्र तटीय गोकर्ण में हुआ था। उन्होंने कहा, “रामायण में साक्ष्यों के आधार पर, हम कह सकते हैं कि गोकर्ण हनुमान की जन्मभूमि है और किष्किन्धा में अंजनाद्रि उनकी कर्मभूमि थी।”

गौरतलब है कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा गठित एक विशेषज्ञ पैनल 21 अप्रैल को इस मामले पर अपनी रिपोर्ट सौंप सकता है। पैनल में वैदिक विद्वानों, पुरातत्वविदों और एक इसरो वैज्ञानिक भी शामिल हैं।

TTD ट्रस्ट बोर्ड के कार्यकारी अधिकारी केएस जवाहर रेड्डी ने कहा कि हमारे पास तिरुपति में हनुमान का जन्म होने का प्रमाण देने के लिए पौराणिक और पुरातात्विक साक्ष्य हैं। वहीं, कर्नाटक ने किष्किंधा में अंजनाद्रि को हनुमान की जन्मभूमि घोषित करने के लिए एक परियोजना शुरू की है। हंपी से सटे किष्किंधा की पहाड़ियों का रामायण में एक संदर्भ है जहाँ यह वर्णन किया गया है कि भगवान राम और लक्ष्मण हनुमान से मिले थे।

हिंदू लड़के को डेट करने की सजा, पाकिस्तानी मुस्लिम लड़की को माता-पिता ने दी जान से मारने की धमकी: इटली पुलिस ने बचाया

कट्टरपंथी मुसलमान किस हद तक हिंदुओं से नफरत करते हैं इसका एक और उदाहरण इटली में दिखा है, जहाँ एक पाकिस्तानी लड़की को हिंदू लड़के से रिश्ता रखने की सजा मिली। ANSA की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार (8 अप्रैल) को उस लड़की को इटैलियन पुलिस इटली में ओरज्जो शहर के टस्कनी से बचाया। यहाँ हिंदू लड़के के साथ डेटिंग करने के मामले में लड़की को उसके ही घर में बंद कर दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम लड़की लगभग एक साल से एक हिन्दू लड़के को डेट कर रही थी। लेकिन, उसके माता-पिता को जैसे ही पता चला कि वो जिसे डेट कर रही है वो हिंदू है, उसके बाद उस पर कई तरह की पाबंदियाँ लगा दी गईं। पीड़िता के मुताबिक, उसे घर में नजरबंद रखा गया था। लड़की के माता-पिता ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया था और कभी-कभार ही उसे अभिभावकों की देखरेख में बाहर जाने की अनुमति मिलती थी।

वापस पाकिस्तान ले जाने की दी थी धमकी

लड़की के माता-पिता ने उसे धमकी दी थी कि अगर वो हिंदू लड़के से किसी भी तरह का संबंध रखती है, तो उसे वापस पाकिस्तान भेज दिया जाएगा। इतना ही नहीं मुस्लिम लड़की और उसके हिंदू दोस्त को उसके माता-पिता ने उनकी बात नहीं मानने पर जान से मारने की धमकी दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक घर में नजरबंदी के दौरान लड़की को कंप्यूटर के इस्तेमाल की इजाजत थी, जिसका उपयोग वो दूरस्थ शिक्षा के लिए करती थी।

ईमेल भेजने के बाद पुलिस ने लड़की को बचाया

घर में नजरबंदी के दौरान माता-पिता की बार-बार जान से मारने की धमकियों से तंग आकर लड़की ने कैराबिनिरी पुलिस को एक ईमेल कर दिया। हाउस अरेस्ट की सूचना मिलने के बाद लड़की के घर पहुँची पुलिस ने उसे मुक्त कराया।

माता-पिता की गिरफ्त से उसे मुक्त कराने के बाद पुलिस ने लड़की को चिल्ड्रेन होम में शिफ्ट कर दिया है। इस बीच पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि इस मामले में लड़की के भाइयों और पिता सहित परिवार के सदस्यों को आरोपित बनाया जा सकता है।