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13 कोरोना मरीजों की ICU में जल कर मौत: महाराष्ट्र के विजय वल्लभ अस्पताल में लगी भीषण आग

कोरोना संकट के बीच महाराष्ट्र के अस्पतालों में आग लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार (23 अप्रैल, 2021) की सुबह मुंबई के विरार स्थित विजय वल्लभ अस्पताल में आग लगने से 13 कोरोना मरीजों की मौत हो गई।

अस्पताल के सीईओ डॉ दिलीप जैन ने इस घटना की पुष्टि की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पताल के आईसीयू में 17 मरीजों का इलाज चल रहा था। सुबह लगभग 3.15 बजे एयर कंडीशनर में शॉर्ट-सर्किट के कारण आग आग लगी। इस पर 5.30 बजे तक काबू पाया गया।

घटनास्थल पर मौजूद एक अन्य अधिकारी ने बताया, “आईसीयू वॉर्ड में एसी में ब्लास्ट होने के बाद आग लगी थी। आग लगने के बाद फायर ब्रिग्रेड, हॉस्पिटल स्टाफ और पुलिस ने जब मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करना शुरू किया, तब पता चला कि आईसीयू में इलाज करा रहे 17 में से 13 मरीजों की मौत हो चुकी है।”

PM मोदी ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की है।

बताया जा रहा है कि विजय वल्लभ अस्पताल एक निजी संस्था है, जो कोविड अस्पताल के रूप में कार्य करती है। इस लापरवाही को लेकर अभी तक अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

इससे पहले महाराष्ट्र के नासिक में बुधवार (21 अप्रैल, 2021) को टैंकर से ऑक्सीजन लीक होने की वजह से 24 कोरोना मरीजों की मौत हो गई थी। यह घटना नासिक के जाकिर हुसैन हॉस्पिटल में घटी थी। यहाँ अचानक टैंकर से ऑक्सीजन लीक होने की वजह से पूरे अस्पताल परिसर में धुँआ ही धुँआ हो गया था। इससे अस्पताल में भर्ती 24 मरीजों की मौत हो गई थी। ये सभी मरीज वेंटिलेटर पर थे। महाराष्ट्र के अस्पतालों में आए दिन आग लगने की घटनाओं ने तंत्र पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कोरोना बेकाबू स्थिति में है। वहाँ लगातार नए केस बढ़ रहे हैं। गुरुवार को यहाँ 67,013 नए केस दर्ज किए गए हैं। इस दौरान 62,298 मरीज ठीक भी हुए हैं और 568 मरीजों की मौत हो गई। राज्य में अभी 40,94,840 संक्रमित केस हैं, जिसमें 6,99,858 एक्टिव हैं और कुल 33,30,747 मरीज ठीक हो चुके हैं।

Remdesivir के नाम पर अकाउंट में पैसे मँगवा गायब हो रहे धोखेबाज, सिप्ला ने चेतायाः जानें ठगी से कैसे बचें

फार्मास्यूटिकल कम्पनी सिप्ला ने रेमडेसिविर (Remdesivir) को लेकर कुछ बेईमान लोगों द्वारा की जा रही धोखाधड़ी के खिलाफ चेतावनी भरा नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में, सिप्ला ने लोगों से उन बेईमानों से सावधान रहने को कहा है, जिन्होंने फर्जी तरीके से सिप्ला लिमिटेड के नाम पर बैंक अकाउंट खुलवा लिए हैं। नोटिस में कहा गया है कि ऐसे घोटालेबाज दवा की कथित सप्लाई के नाम पर खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए लोगों को गुमराह कर कर रहे हैं।

सिप्ला ने कहा है कि ऐसे व्यक्ति कंपनी से जुड़े या अधिकृत नहीं हैं। कम्पनी ने कहा, ”अधिकारियों को सतर्क कर दिया गया है और मामले की जाँच की जा रही है। हम उपभोक्ताओं को सिप्ला उत्पादों को केवल हमारे अधिकृत स्टॉकिस्ट और चैनल भागीदारों के माध्यम से लेने का आग्रह करते हैं।”

कंपनी ने बताया है कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट से खुलासा हुआ कि घबराए लोगों ने बेईमानों को रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए पैसे दिए। जब हमने सोशल मीडिया को खँगालना शुरू किया तो हमें ऐसे लोगों के बारे में पता चला जो रेमडेसिविर इंजेक्शन का इंतजाम करने के नाम पर ठगे गए थे। हमें कुछ ऐसे ट्वीट मिले जिसमें कहा गया है कि ऐसे घोटाले उम्मीद से भी ज्यादा तेजी से हो रहे हैं।

सौरभ तिवारी ने ट्विटर पर लिखा है कि उन्होंने रेमडेसिविर के लिए मुम्बई फोन किया। दूसरी ओर से व्यक्ति ने दो घंटे में इंजेक्शन का इंतजाम करने का दावा किया। उसने तिवारी से अपने खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहा। शक होने पर जब तिवारी ने डिटेल चेक किया तो पाया कि नंबर मुम्बई का न होकर पश्चिम बंगाल का था और अकाउंट नम्बर किसी प्राइवेट बैंक का था।

एक और यूजर पूजा मेहता ने अपने कटु अनुभव के बारे में बताया है कि कैसे अभिषेक कुमार नामक एक शख्स ने उनके साथ 28000 रुपए की धोखाधड़ी की। उसने जाइडस फार्मास्यूटिकल का कर्मचारी होने का दावा किया था और टोसिलिजुआम्ब (Tocilizumab) का इंतजाम करने के नाम पर उससे 28 हजार रुपए ले लिए।

एक और यूजर ने केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को जवाब देते हुए आरोप लगाया है कि उसने अजय अग्रवाल नामक किसी व्यक्ति को रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए पैसे दिए थे और अब वह उसका फोन नहीं उठा रहा है।

एक और यूजर ज्योति ने आरोप लगाया है कि उसने इंजेक्शन के लिए किसी को 15000 रुपए दिए थे, लेकिन अब उसका नम्बर स्विच ऑफ है।

इसी तरह नचिकेता ने भी एक कहानी साझा करते हुए बताया है कि उसे सोशल मीडिया से एक नम्बर मिला, लेकिन उसे ट्रूकॉलर पर रेमडेसिविर फ्रॉड (Remdesivir fraud) के नाम पर सेव किया गया था।

खुद को ऐसी धोखाधड़ी से बचाने के तरीके

सबसे पहले, इंजेक्शन के लिए ऑनलाइन भुगतान न करें, खासतौर पर दवा मिलने से पहले। जैसा कि सिप्ला ने अपनी एडवायजरी में उल्लेख किया है, इंजेक्शन के लिए हमेशा अधिकृत वितरक के पास जाएँ। सिप्ला ने Tocilizumab [PDF] और रेमडेसिविर [PDF] दोनों के लिए अधिकृत वितरकों की सूची प्रदान की है, जिन्हें उनकी वेबसाइट से एक्सेस किया जा सकता है।

सोशल मीडिया मंचों पर बहुत सारे लिस्ट की भरमार हैं जो सत्यापित होने का दावा करते हैं। उनमें से किसी पर भरोसा करने से पहले, कृपया नम्बर पर कॉल करें और यह पता लगाने की कोशिश करें कि क्या वितरक की ऑनलाइन मौजूदगी है। जानकारी की दोबारा जाँच करें और भुगतान तभी करें जब दवा आपके हाथ में आ जाए।

ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ लोगों ने कुछ लोगों के लिए कुछ दवाओं की व्यवस्था की, लेकिन बाद में पैसे इकट्ठा किए और फोन बंद कर दिया। यह विश्वास हासिल करने के लिए पहले घोटाले करने वालों की एक बुनियादी रणनीति है और फिर पैसे लेकर भाग जाते हैं। लिहाजा विवरण का सत्यापन किए बिना दवा के लिए किसी को अग्रिम भुगतान न करें।

पंजाब में पाकिस्तान से आए 200 कोरोना पॉजिटिव, सिलचर एयरपोर्ट से बिना टेस्ट के ही भागे 300 यात्री

देश में कोरोना की रफ्तार बेकाबू होने के बाद राज्य सरकारें सख्त हो गई हैं। लेकिन इस बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सहयोग करने की जगह स्थिति को और भयावह बनाने में लगे हैं। असम के सिलचर से खबर है कि वहाँ एयरपोर्ट से 300 से ज्यादा यात्री बिना कोरोना टेस्ट कराए भाग गए। वहीं पंजाब में 200 ऐसे लोग मिले जो वैसाखी मनाने पाकिस्तान गए थे और अब कोविड पॉजिटिव हैं। इन पर मेडिकल टीम के साथ दुर्व्यवहार का भी आरोप है।

असम के सिलचर एयरपोर्ट पर हुई घटना पर अधिकारियों का कहना है कि फरार हुए यात्रियों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। कथित तौतर पर सिलचर एयपोर्ट इतना बड़ा नहीं है कि वहाँ बड़ी संख्या में यात्रियों की कोविड-19 की जाँच हो सके। इसलिए एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों के लिए यह व्यवस्था सरकारी अस्पताल में की। लेकिन कुछ यात्री अस्पताल पहुँचने से पहले रास्ते में उतर गए।

डिस्ट्रिक्ट एडिशनल डिप्टी कमिशनर ने बताया कि 6 एयरक्राफ्ट से 690 यात्री एयरपोर्ट पर आए। उन्हें अस्पातल ले जाने के दौरान करीब 300 लोगों ने सिर्फ 500 रुपए के टेस्ट के लिए हल्ला मचाया। इसके बाद वह नियम का उल्लंघन कर भाग गए। केवल 189 का टेस्ट हुआ। इनमें 6 संक्रमित पाए गए। भागे गए सभी यात्रियों का डेटाबेस है और उन्हें ढूँढकर उन पर धारा 188 के तहत कार्रवाई होगी।

कुछ दिन पहले भारत के तीर्थयात्री बैसाखी मनाने वाघा बॉर्डर के जरिए लाहौर गए थे। दो दिन पहले जब ये लौटे तो इनका कोविड टेस्ट हुआ। इनमें से 200 संक्रमित पाए गए। अमृतसर में सिविल सर्जन डॉक्टर चरणजीत सिंह ने बताया कि पाकिस्तान से लौटे 816 श्रद्धालुओं में से 650 का कोविड-19 टेस्ट किया जा चुका है। इनमें 200 को संक्रमण की पुष्टि हुई है।

डॉ. चरणजीत ने कहा श्रद्धालुओं के मेडिकल टीम से दुर्व्यवहार की शिकायत के बाद जाँच बीच में रोकनी पड़ी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जाँच की जाएगी और शिकायत दर्ज की जाएगी। श्रद्धालु दो दिन पहले ही पाकिस्तान से लौटे हैं।

‘सॉरी, पता नहीं था कोरोना की दवाई है’: पुलिस स्टेशन के बाहर वैक्सीन की 622 डोज छोड़ गया चोर

हरियाणा के जींद के एक अस्पताल से चोरी हुई कोरोना वैक्सीन की 622 डोज मिल गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एक बाइक सवार सिविल लाइन पुलिस थाने के बाहर चाय की दुकान पर एक थैला छोड़ चला गया। जब इस खोला गया तो उसमें वैक्सीन की डोज थी। साथ ही एक माफीनामा भी था, जिस पर लिखा था, “सॉरी, पता नहीं था कोरोना की दवाई है।”

रिपोर्टों के अनुसार प्लास्टिक की बैग में कोवैक्‍सीन की 440 और कोविशील्‍ड की 182 शीशी थी। हालॉंकि इससे पुलिस की परेशानियों का अंत होता नहीं दिखता, क्योंकि अस्पताल से वैक्सीन की 1710 डोज चोरी हुई थी। अब पुलिस बचे हुए डोज की बरामदगी की कोशिश में लगी हुई है।

चोरी का यह मामला जींद जिले के पीपी सेंटर जनरल अस्पताल का है। स्टोर रूम से कोविशील्ड के 1270 और कोवैक्सिन के 440 डोज चोरी हो गए थे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार इस घटना के बाद जिले में कोरोना का एक भी टीका बचा नहीं था।

चोर के द्वारा लिखा गया माफीनामा (फोटो : साभार रिपब्लिक)

चोरी के बाद सेंटर के इन्चार्ज ने कहा था, “मैं अपने मेन सेंटर को भी चेक करूँगा, जहाँ से पूरे जिले को सप्लाई जाती है। अधिकारियों को भी सूचित करूँगा।” जींद के स्‍वास्‍थ्‍य निरीक्षक राममेहर वर्मा ने बताया था कि रात के वक्त ताला तोड़कर वैक्‍सीन चोरी को अंजाम दिया गया। स्टोर रूम की आलमारी में रखीं कुछ फाइलें भी चोरी हुई थी। लेकिन वहीं रखी अन्य दवाइयों और 50 हजार रुपए को हाथ तक नहीं लगाया गया था।

इससे पहले राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक अस्पताल से वैक्सीन चोरी का मामला सामने आया था। वहॉं वैक्सीन की 320 डोज चोरी हुई थी। गौरतलब है कि 1 मई से 18 साल से अधिक की उम्र के सभी लोगों को वैक्सीन देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उससे पहले देश के कई हिस्सों से Ramdesivir की ब्लैकमार्केटिंग की खबरें आई हैं।

बंगाल में रैली नहीं, कोरोना पर हाई लेवल मीटिंग करेंगे PM मोदी; पर क्या आप जानते हैं रिव्यू मीटिंग में कितनी बार शामिल हुईं ममता

देश में कोरोना वायरस के गंभीर होते खतरे से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अधिकारियों और राज्यों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने शुक्रवार (23 अप्रैल 2021) एक हाई लेवल मीटिंग के लिए पश्चिम बंगाल की अपनी रैलियों को कैंसिल कर दिया है। वे बंगाल के मतदाताओं को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करेंगे।

दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार को चार रैलियाँ करेंगी। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि बीते 3 महीने में प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्रियों की एक भी बैठक में ममता ने शिरकत नहीं की है। मार्च और अप्रैल में हुई ऐसी बैठकों में शिरकत करने की बजाए उन्होंने चुनाव प्रचार को तवज्जो दी।

पीएम मोदी ने ट्विटर के माध्यम से यह सूचना दी कि Covid-19 की परिस्थितियों को रिव्यू करने के लिए बुलाई गई एक उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होने के कारण वो 23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल नहीं जा पाएँगे, लेकिन वर्चुअल माध्यम से इन रैलियों को संबोधित करेंगे। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि बंगाल भाजपा के कार्यकर्ता और मतदाता पीएम मोदी की रैली को लेकर उत्साहित थे। किन्तु अब पीएम मोदी रैली में शामिल होने के लिए बंगाल नहीं पहुँच पाएँगे।

अभी तक मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को शाम 5 बजे मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम और कोलकाता के मतदाताओं को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करेंगे।

इसके अलावा आज (22 अप्रैल) भी पीएम मोदी देश में बढ़ती ऑक्सीजन की माँग और उसके अनुसार ऑक्सीजन की आपूर्ति को सुनिश्चित करने लिए बुलाई गई एक बैठक में शामिल हुए। इस बैठक में कैबिनेट और मुख्य सचिव समेत, विभिन्न मंत्रालयों, फार्मा क्षेत्र और नीति आयोग के सदस्य भी शामिल हुए।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि देश में पिछले कुछ दिनों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन 3300 मीट्रिक टन प्रतिदिन के हिसाब से बढ़ा है। यह वृद्धि निजी और सार्वजनिक स्टील प्लांट्स, उद्योग और ऑक्सीजन निर्माताओं के सहयोग के कारण संभव हो सका है। इसके अलावा गैर-जरूरी उद्योगों में ऑक्सीजन की सप्लाई रोकी गई है।

पीएम मोदी को बताया गया कि वर्तमान में 20 राज्यों की 6785 मीट्रिक टन प्रतिदिन की मेडिकल ऑक्सीजन की माँग के मुकाबले उन्हें केंद्र द्वारा 6822 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई। बैठक में पीएम मोदी ने राज्यों को ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति पर जोर दिया। इसके लिए उन्होंने ऑक्सीजन के सिलेंडरों, टैंकरों और दवाइयों के सुगम आवागमन के लिए रेलवे और भारतीय वायु सेना का उपयोग करने की बात भी की।

बैठक के बाद देश भर में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं;

  1. ऑक्सीजन लेकर जा रहे वाहनों के अंतरराज्यीय आवागमन पर किसी भी प्रकार की कोई रोक नहीं लगाई जाएगी।
  2. किसी एक राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश में स्थित ऑक्सीजन निर्माता अथवा सप्लायर पर अपनी आपूर्ति को उसी एक राज्य तक सीमित करने का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा।
  3. ऑक्सीजन की आपूर्ति से संबंधित किसी भी वाहन पर विभिन्न शहरों का कर्फ्यू अथवा लॉकडाउन से संबंधित कोई भी प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
  4. छूट प्राप्त उद्योगों के अतिरिक्त अन्य उद्योगों को ऑक्सीजन की सप्लाई सरकार के आगामी आदेश तक प्रतिबंधित होगी।

पिछले कुछ दिनों में देश में कोरोना वायरस संक्रमण के हालात चिंताजनक है। इससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था दबाव बढ़ता जा रहा है। संक्रमण कि इन्हीं परिस्थितियों के चलते शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है जिसमें पीएम मोदी भी शामिल होंगे।

बॉर्डर पर इफ्तार पार्टी और किसान संक्रमित हुए तो केंद्र जिम्मेदार: वैक्सीन ले दोहरा ‘खेला’ कर रहे राकेश टिकैत

कोरोना की भयानक आपदा के बीच भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रवक्ता और स्वयंभू किसान नेता राकेश टिकैत का एक वीडियो सामने आया है। 3 लाख से ज्यादा संक्रमण के मामले आने के बावजूद टिकैत इसमें कोविड नियमों को ताक पर रखते हुए गाजीपुर बॉर्डर पर इफ्तार पार्टी का आयोजन करते दिख रहे हैं। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह कथित प्रदर्शनकारी एक-दूसरे के आस-पास बैठे हैं।  

खुद कोरोना वैक्सीन लगवा चुके ये वही टिकैत हैं, जिनका कहना है कि यदि प्रदर्शनकारी किसान संक्रमित होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। वहीं इफ्तार पार्टी को लेकर सवाल किए जाने पर वे कहते हैं कि सरकार ने 50 लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत दी है। वहाँ तो सिर्फ़ 22-35 लोग थे। कोई एक-दूसरे से नहीं मिला, न किसी ने हाथ मिलाया।

मालूम हो कि सार्वजनिक स्थल को घेर कर बैठने वाले प्रदर्शनकारी इस संकट की घड़ी में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली गाड़ियों की आवाजाही भी बाधित कर रहे हैं। इनका कहना है कि प्रदर्शनस्थल इनका घर बन गया है। अब वह इसे छोड़कर कहाँ जाएँ।

टिकैत ने प्रदर्शन न खत्म करने की बात कहते हुए कहा, “किसान अपने घर ही हैं। उन्हें कहाँ जाने को कह दें। क्या कोरोना यहाँ से फैल रहा है? हम पाँच महीने से हैं यहाँ, ये हमारा घर हो गया है… कई किसानों ने वैक्सीन ले ली है। लेकिन दूसरी डोज लेने के लिए उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ रहा है। हमने अधिकारियों से यहाँ कैंप लगाने को कहा है।”

गौरतलब है कि कोरोना महामारी के बीच किसान आंदोलन खत्म न करने की जिद्द पर अड़े किसान नेता राकेश टिकैत खुद कोरोना वैक्सीन लगवा चुके हैं और बाकी किसानों के लिए कह रहे हैं कि अगर किसी किसान को कोविड हुआ तो उसकी जिम्मेदार केंद्र सरकार होगी।

रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए टिकैत ने कुछ दिन पहले कहा था, “आंदोलन अगर खत्म हो जाए तो क्या देश से कोरोना खत्म हो जाएगा। वे हमारे गाँव हैं जहाँ हम 5 महीने से रह रहे हैं। अगर किसान कोरोना वायरस से संक्रमित होते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। जब देश भर में COVID-19 के मामले बढ़ रहे हैं, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? क्या इसके लिए भी किसान ही जिम्मेदार हैं?”

टिकैत ने आगे कहा कि अगर कोई बीमारी है, तो सरकार को इसका इलाज सुनिश्चित करना चाहिए और इसके लिए अस्पतालों का निर्माण करना चाहिए। राजनेता अन्य उद्देश्यों के लिए धन एकत्र कर रहे हैं। वे रैलियाँ कर रहे हैं और चुनाव लड़ रहे हैं।

बता दें कि ये दिल्ली का दुर्भाग्य है कि एक ओर पिछले 24 घंटे में यहाँ से 24 हजार नए मामले आए हैं, जगह-जगह लोग मेडिकल सुविधा के अभाव में तड़प रहे हैं और दूसरी ओर सीमा पर बैठकर राकेश टिकैत ऐसी इफ्तार पार्टी का आयोजन कर रहे हैं।

टिकैत का कहना है कि अगर देश में लॉकडाउन लगा तो किसान प्रदर्शन फिर भी चालू रहेगा। कोविड दिशा-निर्देश प्रदर्शन पर बैठकर फॉलो किए जाएँगे। इसके अलावा बीते दिनों किसान नेता राकेश टिकैत ने जम्मू जाने के दौरान कहा था कि कोरोना नियमों का पालन करते हुए आंदोलन को जारी रखा जाएगा। ये कोई शाहीनबाग नहीं है, जिसे कोरोना वायरस के नाम पर खत्म किया जा सकता है।

पाकिस्तान के जिस होटल में थे चीनी राजदूत उसे उड़ाया, बीजिंग के ‘बेल्ट एंड रोड’ प्रोजेक्ट से ऑस्ट्रेलिया ने किया किनारा

चीन को बुधवार (21 अप्रैल 2021) को दो बड़े झटके लगे। एक पाकिस्तान में जहाँ वह लगातार दखल बढ़ा रहा है। दूसरा झटका वैश्विक प्रभाव बढ़ाने के उसके मॅंसूबों को ऑस्ट्रेलिया ने दिया है।

पाकिस्तान के क्वेटा में कार बम विस्फोट में पाकिस्तानी तालिबान ने उस होटल को उड़ा दिया, जिसमें चीन के राजदूत ठहरे थे। हमले में 5 लोगों की मौत हो गई जबकि 12 अन्य जख्मी हो गए। वहीं, ऑस्ट्रेलिया की स्कॉट मॉरिसन सरकार ने चीन के साथ हुए ‘बेल्ट एण्ड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई)’ से संबंधित समझौतों को रद्द कर दिया है।

ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। ये समझौते ऑस्ट्रेलिया की प्रांतीय विक्टोरिया सरकार और चीन के नेशनल डेवलपमेंट एण्ड रिफॉर्म कमीशन के मध्य अक्टूबर 2018 और अक्टूबर 2019 में हुए थे। चीन ने ऑस्ट्रेलिया के इस कदम को दुर्भावनापूर्ण और अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक बताया है।

बुधवार (21 अप्रैल 2021) को ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मेराइस पेन ने चीन के साथ हुए चार समझौतों को रद्द करने की घोषणा की। इन चार समझौतों में से दो समझौते ऑस्ट्रेलिया की विक्टोरिया प्रांत की सरकार ने किए थे, जो चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बीआरआई से जुड़े थे। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री ने कहा कि ये समझौते ऑस्ट्रेलिया की विदेश नीति और विदेशी संबंधों के प्रतिकूल थे। उन्होंने विदेशी संबंधों में स्थिरता को प्रमुख स्थान देते हुए कहा कि यह निर्णय ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय हितों पर आधारित है और देश के विदेशी संबंधों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए है।

बीआरआई के तहत समझौतों को रद्द करने के ऑस्ट्रेलिया के निर्णय के बाद चीन नाराज हो गया है। ग्लोबल टाइम्स के हवाले से चीनी एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया का यह निर्णय चीन और ऑस्ट्रेलिया के मध्य संभावित ट्रेड वॉर का कारण बन सकता है। वहीं ऑस्ट्रेलिया के चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि का यह निर्णय बताता है कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार चीन के साथ संबंधों को सुधारने के प्रति बिल्कुल भी ईमानदार नहीं है।

पिछले कुछ समय से ऑस्ट्रेलिया ने चीन को लेकर अपना रवैया अधिक स्पष्ट किया है। फिर चाहे वह चाइनीज कंपनी हुआवे को बैन करने की बात हो या फिर शिनजियांग और हॉन्गकॉन्ग में मानवाधिकारों पर आवाज उठाने की। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया ने ताइवान समेत चीन के आंतरिक मुद्दों पर चर्चा करने की माँग भी की थी। हालाँकि चीन से ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते तब से ही खराब हैं जब ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस महामारी के विषय में चीन की स्वतंत्र रूप से जाँच की माँग की थी।

जिस प्रकार से ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मेराइस पेन ने चीन के बीआरआई से जुड़े समझौतों को रद्द करने के लिए अपने विदेशी संबंधों की स्थिरता की दुहाई दी, उसे भारत के परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। भारत ने शुरू से ही चीन की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से अपनी दूरी बनाकर रखी। हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में भारत ही एकमात्र ऐसा बड़ा देश रहा है जिसने मुखरता से चीन की विस्तारवादी नीतियों की आलोचना की और इसके लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास किए।

भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान का ‘क्वाड’ समूह हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में चीन की विस्तारवादी नीतियों का सबसे बड़ा अवरोध बन सकता है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया द्वारा चीन के साथ समझौतों को रद्द किया जाना हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में नए सामरिक समीकरणों का निर्माण करेगा, जिसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं।

क्या है बेल्ट एण्ड रोड इनिशिएटिव?

बेल्ट एण्ड रोड इनिशिएटिव अथवा वन बेल्ट-वन रोड चीन की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इस परियोजना के माध्यम से चीन अपने देश को एशिया, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों से रोड और रेलवे लाइन के माध्यम से जोड़ना चाहता है। उसकी यह परियोजना प्राचीन सिल्क रूट का ही आधुनिक संस्करण है। हालाँकि चीन इसे व्यापार सुगमता और वैश्विक व्यापार के अवसरों की वृद्धि की एक पहल के रूप में प्रचारित करता है, किन्तु भारत समेत कई देश इसे चीन की एक गहरी साजिश बताते हैं। एक ऐसी साजिश जिसके तहत चीन अल्पविकसित और विकासशील देशों में विकास के नाम पर उन्हें भारी कर्ज में लाद देता है।

आप मरिए-जिन्दा रहे प्रोपेगेंडा: NDTV की गार्गी अंसारी ऑक्सीजन उत्पादन के लिए प्लांट खोलने की बात से क्यों बिलबिलाई

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के मद्देनजर वेदांता की स्टरलाइट कॉपर (Vedanta Sterlite Copper) ने तमिलनाडु के तूतुकुड़ी (Thoothukudi) में बंद पड़े अपने दो प्लांट को ऑक्सीजन उत्पादन के लिए फिर से शुरू करने की पेशकश हाल ही में की है। वेदांता ने कहा है कि उसके प्लांट में प्रतिदिन 1,050 टन ऑक्सीजन की संयुक्त उत्पादन क्षमता वाले दो संयंत्र हैं।

भारत में ऑक्सीजन की जरूरत 7 गुना अधिक बढ़ गई है। देश को 700 की जगह 5000 टन प्रतिदिन ऑक्सीजन की आवश्यकता है। बावजूद इसके तमिलनाडु सरकार ने वेदांता के इस ऑफर को नकार दिया है। कथति तौर पर वेदांता के इस ऑफर को केंद्र सरकार ने अपना समर्थन दिया है।

वेदांता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने पेशकश रखते हुए कहा कि यदि सर्वोच्च न्यायालय वेदांता को उसके प्लांट खोलने की अनुमति देती है, तो वह देश में ऑक्सीजन प्रोड्यूस करने में मदद कर सकती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि देश को इस समय ऑक्सीजन की आवश्यकता है और वेदांता को प्लांट चालू करने की अनमुति दी जानी चाहिए।

लेकिन, राज्य सरकार ने इस दौरान वेदांता की याचिका का यह कहकर विरोध किया कि उनके प्लांट को पर्यावरण संबंधी चिंता के कारण बंद किया गया था। कंपनी और स्थानीय लोगों के बीच विश्वास की कमी थी। रोचक बात यह है कि इस समय जब देश को सबसे ज्यादा आवश्यकता ऑक्सीजन की है, तब तमिलनाडु सरकार ऐसे तर्क दे रही है।

राज्य सरकार अकेली नहीं है जो वेदांता के इस ऑफर का विरोध कर रही है। एनडीटीवी पत्रकार गार्गी रावत अंसारी के एक ट्वीट को भी देखकर ऐसे ही लग रहा है कि उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं कि राज्य में 1000 टन ऑक्सीजन का उत्पादन मानव जीवन को बचाने में किस तरह मदद करेगा। 

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी के पोते युसूफ अहमद अंसारी की पत्नी गार्गी रावत अंसारी ने तंज भरे अंदाज में ट्वीट किया है। उन्होंने कहा, “कितना बढ़िया है कि हरीश साल्वे ने अपनी अपील में वेदांता की ईकाई को खोलने की अपील की जिसे पर्यावरणीय कारणों से बंद किया गया था। बहुत सही। इस महामारी को व्यर्थ मत जाने दो।”

कुल मिलाकर गार्गी शायद हरीश साल्वे पर टिप्पणी करते हुए ये कह रही थीं कि पर्यावरण को होने वाला नुकसान उनके लिए स्वीकार्य नहीं है, चाहे ऑक्सीजन की कमी के कारण जितनी मौते हों। 

मालूम हो कि जो गार्गी रावत तमिलनाडु में वेदांता के प्लांट खोले जाने का विरोध कर रही है, वहीं गार्गी ऑक्सीजन की कमी के चलते दूसरे राज्यों को कोस भी रही हैं।

20 अप्रैल को उन्होंने दिल्ली और देश के अन्य भागों में ऑक्सीजन की कमी की आलोचना की थी। 16 अप्रैल को वह ऑक्सीजन और दवाइयों की कमी के लिए आवाज उठा रही थीं।

लेकिन, बात जैसे ही वेदांता के प्लांट को खोलने की आई, वह तुरंत उसका विरोध करने सामने आ गईं जबकि इस प्लांट के खुलने से 1000 टन अतिरिक्त ऑक्सीजन का उत्पादन हो सकेगा।

हैरानी की बात ये है कि गार्गी अंसारी के विचारों में अस्थिरता इतनी ज्यादा है कि वो एक तरफ प्लांट खुलने का विरोध कर रही थीं और थोड़ी देर में दोबारा कोरोना के कारण हो रही मौतों पर स्थिति बताने पर आ गईं। उन्होंने एक ट्वीट शेयर किया जिसमें दर्शाया जा रहा था श्मशान घाट के पास एंबुलेंस लाइन लगा कर खड़ी है। उन्होंने इसे भयावह भी बताया।

मालूम हो कि वेदांता का यह प्लांट 2018 में कई स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद बंद हुआ था। सबका कहना था कि इस प्लांट से कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। हालाँकि प्लांट को बाद में नेशनल ग्रीम ट्रिब्यूनल से क्लीयरेंस मिला, मगर राज्य फिर सुप्रीम कोर्ट के पास पहुँच गया ऑर्डर पर स्टे लगवाने के लिए।

यहाँ शीर्ष अदालत ने एनजीटी के आदेश पर रोक लगा दी और स्टरलाइट कॉपर को मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की अनुमति दी, जिसने सरकारी आदेश को बरकरार रखा। मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली स्टरलाइट कॉपर के साथ मामला अब उच्चतम न्यायालय में है। प्लांट को सिर्फ रख-रखाव के लिए इस्तेमाल करने की कंपनी की दलील भी अब तक अदालत ने नहीं मानी है।

बता दें कि तमिलनाडु में इस स्टरलाइट कॉपर प्लांट के बंद होने के बाद कुछ व्यापक फर्क देखने को मिले। जैसे- एक समय में जहाँ देश कॉपर कैथोड के टॉप 5 निर्यातकों में से एक था वो अब कॉपर कैथोड का आयातक बन गया है।

वहीं, वामपंथियों को देखकर लगता है कि उनके लिए प्रोपेगेंडा फैलाना मानव जीवन से ज्यादा ऊपर है, तभी NGT की क्लीयरेंस पाने वाले प्लांट के खुलने का विरोध कर रहे हैं। देश में हकीकत में ऑक्सीजन की कमी है। ऐसे में अगर प्लांट्स और ऑक्सीजन का उत्पादन करें तो समस्या से लड़ा जा सकता है, लेकिन तब शायद ये धड़ा अपना प्रोपेगेंडा न चला पाए। शायद इसीलिए गार्गी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि महामारी को व्यर्थ न जानें दें।

4 घंटे का ऑक्सीजन बचा है, 44 घंटों का क्यों नहीं? क्यों अंत में ही जागता है अस्पताल और राज्य सरकारों का तंत्र?

कोरोना की दूसरी लहर तेज और ख़तरनाक है। परिस्थितियों को उन्हें देखकर कहा जा सकता है कि दूसरी लहर ने हमें जिस रफ़्तार से हिट किया है, उसकी कल्पना अधिकतर भारतीयों ने नहीं की थी। यह अलग बात है कि लगभग तीन महीने पूर्व केंद्र सरकार ने राज्यों को कोरोना पर क़ाबू पाने के लिए अपने नियम ख़ुद बनाने का अधिकार भी दिया है।

पर आज एक समाचार में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का एक वक्तव्य पढ़ने को मिला जिसमें उन्होंने कहा है कि; केंद्र सरकार ने कोरोना की दूसरी लहर को लेकर राज्यों को आगाह नहीं किया। यदि आगाह कर देते तो हम तैयार रहते।

इस महामारी को लेकर बघेल की समझ क्या है वह नहीं पता, पर वक्तव्य पढ़कर लगा जैसे उन्हें इस बात का विश्वास था कि दूसरी लहर को लेकर भविष्यवाणी तूफ़ान के बारे में मौसम विभाग द्वारा की गई भविष्यवाणी जैसी होती है, जिसे केंद्र सरकार के विभाग क़रीब दो सप्ताह पहले बता सकते हैं। और यदि केंद्र सरकार बता देती तो बघेल सरकार तैयार रहती, भले ही बघेल आसाम में पार्टी के चुनाव प्रचार में व्यस्त थे।

महामारी के समय सूचना, वक्तव्य, निर्देश और राजनीति की भरमार है पर उससे इस महामारी को नियंत्रित करने में मदद नहीं मिल सकती। उद्धव ठाकरे की प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्रों को ही ले लीजिए। वे कोरोना पर प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग करते हैं पर उन्हें ही दूसरे दिन पत्र भी लिख डालते हैं, कभी इस माँग के साथ कि स्टेट डिज़ैस्टर मैनज्मेंट फंड का इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार कोरोना को प्राकृतिक आपदा घोषित कर दे और कभी यह बताने के लिए कि उन्होंने प्रधानमंत्री को फ़ोन किया था पर उनके कार्यालय से जवाब मिला कि प्रधानमंत्री बाहर हैं और अभी नहीं मिल सकते। शायद इसीलिए महाराष्ट्र का हाल यह है कि वहाँ तो पहली लहर ही ख़त्म नहीं हुई और जब देश के और राज्यों ने पहली लहर पर लगभग पूरी तरह से क़ाबू पा लिया था, महाराष्ट्र सरकार अपने राज्य के नागरिकों को कभी विश्वास ही नहीं दिला पाई।

इस मामले में दिल्ली का हाल भी कोई अलग नहीं रहा। दिल्ली के मुख्यमंत्री वीडियो बनाकर दावा करते रहे कि राज्य के अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में बेड उपलब्ध हैं और इधर जनता उनके इस दावे की पोल खोलती रही।

लगभग हर राज्य दवाई, ऑक्सीजन, इंजेक्शन की कमी से जूझ रहा है। अंतर बस इतना है कि उनमें से कुछ इस स्थिति से निकलने की कोशिश कर रहे हैं और कुछ इसी में बने रहने के लिए राजनीति करते जा रहे हैं।

अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी को ही ले लीजिए। कई मौक़े पर देखने को मिला कि ऑक्सीजन जब ख़त्म होने वाला रहता है, उसके तीन-चार घंटे पहले वक्तव्य आता है कि बस चार घंटे के लिए ही ऑक्सीजन है। यदि चार घंटे में मुहैया न कराया गया तो फलाने अस्पताल के मरीज़ न बच सकेंगे। यह कैसी व्यवस्था है जिसमें अस्पताल को चार घंटे पहले ही पता चलता है कि ऑक्सीजन ख़त्म होने वाला है और अब इसे लेकर शोर मचाना चाहिए? कहीं कोई स्टॉक रजिस्टर होता होगा या नहीं? क्या हम मान लें कि अस्पताल को यह नहीं पता है कि उसके पास कितना ऑक्सीजन है और कब ख़त्म होगा? या उसके पास कितने इंजेक्शन हैं और कब ख़त्म होंगे?

हमारे घरों में गृहणी भी यह जानती हैं कि रसोई में रखा गैस सिलेंडर कितने दिनों तक चलता है और यदि अचानक खाने वालों की संख्या बढ़ जाएगी तो कितनी जल्दी ख़त्म होगा। यदि एक गृहणी बिना किसी ERP सिस्टम के हिसाब लगा लेती हैं तो राज्यों और उसके अस्पतालों के पास तो सिस्टम है स्टॉक को ट्रैक करने का। शिफ़्ट इंचार्ज होते होंगे, जो जाने वाले इंचार्ज से पेपर लेते होंगे। फिर ऐसा क्यों है कि जीवन और मृत्यु के मामले तय करने वाला अस्पताल तंत्र अंत में ही जागता है? उसे इतनी देर से ही क्यों पता चलता है कि ऑक्सीजन बस ख़त्म ही होने वाला है?

टीकाकरण की योजना का क्रियान्वयन भी कई राज्यों में औसत से नीचे रहा है। महाराष्ट्र सरकार और सत्ताधारी दलों द्वारा टीके की उपलब्धतता को लेकर भी राजनीति की गई कि केंद्र सरकार राज्य को पर्याप्त मात्रा में टीके नहीं दे रही है। छत्तीसगढ़ तो उससे भी कई कदम आगे रहा जहाँ मुख्यमंत्री ने भी भारत में बनने वाले टीके को लेकर वक्तव्य दिया, उसे रद्दी बताया और देश तथा प्रदेश की जनता के मन में टीके को लेकर शंका पैदा की। शुरुआती दिनों में राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक में भी टीकाकरण की रफ़्तार संतोषजनक नहीं थी। देखकर लगता है जैसे एक ही बात हमारी सरकारों को जोड़ती है और वह है अक्षमता। जैसे राज्य इस मामले में एक-दूसरे से होड़ लगा रहे हैं।

अब तक जो भी हुआ है उसे सुधारने का मौका सरकारों के पास फिर आएगा और वह मौक़ा होगा एक मई से शुरू होने वाले वृहद् टीकाकरण को सुचारु रूप से चलाना और उसकी योजना को पूरा करते हुए नागरिकों में एक विश्वास पैदा करना। इस बार ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ना आसान न होगा क्योंकि केंद्र ने राज्यों को पर्याप्त अधिकार देने की घोषणा पहले ही कर दी है।

कोरोना की आड़ में बॉर्डर से हटाया तो भुगतने पड़ेंगे गंभीर परिणामः BKU की मोदी सरकार को एक और धमकी

दिल्ली में कोरोना वायरस का कहर लगातार जारी है। हालात गंभीर होते जा रहे हैं, लेकिन दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे कथित किसानों ने प्रदर्शन स्थल से एक इंच भी हिलने से साफ इनकार कर दिया है। ये वही कथित किसान हैं, 26 जनवरी को लाल किला हिंसा में भी शामिल रहे हैं। दिल्ली की सीमाओं पर महीनों से डेरा डाले इन कथित किसानों के कारण कोरोना मरीजों की जान बचाने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाले वाहनों का रास्ता भी बाधित हो रहा है।

कोरोना की दूसरी लहर जहाँ पहले से कहीं खतरनाक होकर सामने आ रही है, वहीं इन कथित किसानों ने एक बार फिर से पंजाब से दिल्ली तक मार्च करने का निर्णय लिया है। राकेश टिकैत की अगुवाई वाली भारतीय किसान यूनियन ने भाजपा सरकार को हाल ही में प्रदर्शन स्थल खाली नहीं करने की धमकी दी थी। अब बीकेयू के गुरनाम सिंह चढूनी ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर सरकार ने कोरोना संकट की आड़ में सीमाओं को खाली करने की कोशिश की तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

मजे की बात यह है कि ऐसा ही बयान इच्छाधारी प्रदर्शनकारी के नाम से कुख्यात योगेंद्र यादव ने भी दिया था। योगेंद्र यादव ने भी कहा था कि मोदी सरकार कोरोना वायरस महामारी के बहाने विरोध-प्रदर्शन को खत्म करने की कोशिश कर रही है।

इससे पहले 17 अप्रैल को भी चढूनी ने बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने की धमकी दी थी। उन्होंने ट्वीट में लिखा था, “बीजेपी को यह नहीं समझना चाहिए कि वो किसानों के प्रदर्शन स्थल को खाली कराने में सक्षम है। अगर सरकार इस तरह की कोई भी कार्रवाई करती है, तो भाजपा अपना चेहरा तक नहीं बचा पाएगी।”

कुछ दिनों पहले, जम्मू के दौरे पर गए किसान नेता राकेश टिकैत ने जोर देकर कहा था कि किसानों का आंदोलन शाहीन बाग नहीं है, जिसे कोरोना वायरस के नाम पर खत्म किया जा सके।

कथित किसानों की ये नौटंकी यहीं समाप्त नहीं होती है। ऐसे वक्त में जब देश में कोरोना संकट की वजह से एक दिन में ही 3 लाख से अधिक नए कोरोना संक्रमण के मामले दर्ज किए गए। प्रदर्शनकारी किसानों ने राष्ट्रीय राजधानी में गाजीपुर की सीमा पर एक इफ्तार पार्टी रखी, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग के सभी नियमों का जमकर उल्लंघन हुआ। प्रदर्शन स्थल की चौंकाने वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हुईं। इसमें किसान नेता एक बड़े समूह के साथ भोजन करते दिखे। उस दौरान कोरोना के नियमों की जमकर धज्जियाँ उड़ीं।

पूरे देश में व्याप्त कोविड-19 महामारी के मौजूदा संकट को पूरी तरह से अनदेखा करते हुए भारतीय किसान यूनियन ने कृषि कानूनों के विरोध में 21 अप्रैल को दिल्ली में एक मार्च की भी घोषणा की थी। यह ऐलान ऐसे वक्त में किया गया था, जब दिल्ली में संक्रमितों के मामलों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में अस्पतालों में बेड, रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की किल्लत मची हुई है।

किसानों के कंधों पर बंदूक रखकर निशाना लगा रहे राकेश टिकैत ने कहा है महामारी का बहाना बनाकर किसान आंदोलन को रोका नहीं जा सकता है। खास बात यह है कि राकेश टिकैत ने खुद वैक्सीन की डोज ले ली है। टिकैत ने यह भी कहा है कि अगर दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहा एक भी किसान कोरोना संक्रमित होता है तो इसके लिए केंद्र सरकार ही जिम्मेदार होगी।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के साथ बात करते हुए टिकैत ने कहा, “अगर किसान वायरस से संक्रमित होते हैं तो जिम्मेदारी पूरी तरह से सरकार की होगी। जब देश भर में COVID-19 मामले बढ़ रहे हैं तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? क्या इसके लिए भी किसान जिम्मेदार हैं? ”

उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई बीमारी है, तो सरकार को इसका इलाज सुनिश्चित करना चाहिए और इसके लिए अस्पतालों का निर्माण करना चाहिए। राजनेता दूसरी चीजों के लिए धन जुटा रहे हैं। वे रैलियाँ कर रहे हैं और चुनाव लड़ रहे हैं।”