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मालदा से BJP उम्मीदवार को गोली मारी, सीधे गर्दन में जाकर लगी: TMC ने कहा- इसमें हमारा हाथ नहीं

पश्चिम बंगाल के मालदा से भाजपा के उम्मीदवार गोपाल चंद्र साहा को कुछ अज्ञात लोगों ने गोली मार दी। उन पर ये हमला तब हुआ, जब वो रविवार (अप्रैल 18, 2021) को चुनाव प्रचार कर रहे थे। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया। रात के वक़्त गोपाल चंद्र साहा मालदा के शाहपुर इलाके में चुनाव प्रचार कर रहे थे, तभी अँधेरे का फायदा उठा कर उन पर हमला किया गया। गोली उनके गर्दन में लगी है।

सोशल मीडिया पर इस घटना के बाद का एक वीडियो फुटेज भी सामने आया है, जिसमें उन्हें स्ट्रेचर पर लिटा कर अस्पताल ले जाते हुए देखा जा सकता है। पश्चिम बंगाल में अप्रैल 22 को छठे चरण का चुनाव होना है। इसके एक सप्ताह बाद अप्रैल 29 को आठवें चरण के चुनाव के साथ ही पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव का समापन हो जाएगा। मई 2 को मतगणना होनी है। मालदा में 8वें चरण में चुनाव होना है।

हमलावर एक से अधिक की संख्या में थे, जिनकी अब तक पहचान नहीं हो सकी है। हमले से कुछ देर पहले ही साहा ने बूथ स्तर की बैठक में हिस्सा लिया था। उनका इलाज कर रहे मालदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल डॉक्टरों ने कहा है कि भाजपा उम्मीदवार की हालत अब स्थिर है। घटना के बाद इलाके में तनाव पसरा हुआ है। बंगाल पुलिस ने घटना की जाँच शुरू कर दी है, लेकिन कुछ बयान नहीं दिया है।

भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री देबाश्री चौधरी ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा का ये स्तर राज्य में राजनीतिक हिंसा की संस्कृति की ओर इशारा करता है। मालदा से TMC के उम्मीदवार कृष्णेंदु नारायण चौधरी ने कहा कि इस घटना में उनकी पार्टी का कोई हाथ नहीं है और वे दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हैं। फरवरी 2021 में पड़ोस के ही मुर्शिदाबाद में मंत्री जाकिर हुसैन एक बम हमले में घायल हुए थे।

आक्रोशित भाजपा समर्थकों ने इस घटना के बाद झंटू मोड़ को जाम कर कर के वहाँ धरना दिया। इंस्पेक्टर इंचार्ज हीरक विश्वास को भारी पुलिस बल के साथ प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए भेजा गया। पुलिस CCTV फुटेज की जाँच कर रही है, ताकि हत्यारों का पता लगाया जा सके। हमले के समय गोपाल चंद्र साहा अपनी कार में बैठ रहे थे। पश्चिम बंगाल में पहले ही 100 से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है।

‘बीजेपी को कोसने वाले लिबरल TMC पर मौन’- हर दिन मेगा रैली कर रहीं ममता लेकिन ‘ट्विटर’ से हैं दूर: जानें क्या है झोल

देशभर में कोरोना वायरस के कहर के बीच राजनीतिक बहस अब चुनावी रैलियों में जुटने वाली भीड़ पर केंद्रित हो गई है। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल में अभी तीन चरणों में विधानसभा चुनाव बचे हुए हैं। ऐसे में कई सारे राजनीतिक दल कोरोना के दौर में अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं।

इस बीच कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने देश में बढ़ते कोरोना वायरस के मामलों के लिए चुनावी रैलियों को जिम्मेदार ठहराया। जबकि, इस बात का सबूत हैं कि हाल ही में पाँचवे चरण के मतदान से पहले पश्चिम बंगाल के गोलपोखर में उन्होंने एक बड़ी चुनावी सभा को संबोधित किया था। इसके अलावा पार्टी अपनी रैलियों में भारी भीड़ जुटने का दावा करती आई है। इसी के जरिए कॉन्ग्रेस अपनी राजनीतिक किस्मत को बदलना चाहती है।

जब राहुल गाँधी को इस बात का अहसास हुआ कि चुनावी रैलियों के बावजूद कॉन्ग्रेस की नैया डूबने की कगार पर खड़ी है तो उन्होंने कोरोना का बहाना लेकर चुनाव प्रचार बंद कर दिया।

राहुल गाँधी के इस ट्वीट के बाद लेफ्ट-लिबरल लॉबी को कोरोना के इस दौर में सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करने के बहाने बीजेपी पर निशाना साधने का मौका मिल गया। दरअसल, इस लेफ्ट-लिबरल लॉबी को यह समझ आ गया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में मुकाबला केवल भाजपा और टीएमसी के बीच दोतरफा हो गया है। ऐसे में यह लॉबी बड़ी ही आसानी से ममता बनर्जी की रैलियों में जुटने वाली भीड़ और उनकी सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी को बड़ी ही आसानी से अनदेखा कर रही है। साथ ही वामपंथियों की ये लॉबी कोरोना के जरिए बीजेपी को घेरने में जुट गई है।

टीएमसी की सोशल मीडिया रणनीति को समझते हैं

ममता बनर्जी ने अपने हजारों तृणमूल कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ रविवार (18 अप्रैल) को धाकुरिया ब्रिज से कालीघाट चौराहे तक बड़े पैमाने पर रोड शो किया। इस दौरान ममता कुर्सी पर बैठी रहीं, वहीं उनके समर्थकों ने सोशल डिस्टेंसिंग की खुलकर बखिया उधेड़ी। उनके इस रोड शो को उनके आधिकारिक फेसबुक पेज पर लाइव स्ट्रीम भी किया गया था।

ममता बनर्जी के फेसबुक लाइव वीडियो का स्क्रीनशॉट

हालाँकि, ममता के ट्विटर अकाउंट को खँगालने पर हमने पाया कि वहाँ लास्ट ट्वीट 15 अप्रैल को किया गया था, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग को एक ही बार में शेष चरणों की वोटिंग करवाने को कहा था। जबकि, रविवार को की गई चुनावी रैली या उनके रोड शो की कोई जानकारी पेज पर नहीं थी।

ऑल इंडिया तृणमूल कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर प्रोफाइल चेक करने पर हमने पाया कि वहाँ पार्टी ने अंतिम ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राजनीतिक अटैक किया था। पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी रोड शो या रैली के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

ममता बनर्जी के आखिरी ट्वीट्स का स्क्रीनशॉट

इसके बाद हमने ममता बनर्जी और तृणमूल कॉन्ग्रेस दोनों के ट्विटर हैंडल को गहराई से खंगाला, लेकिन हमें हाल के दिनों में पार्टी सुप्रीमो द्वारा आयोजित किसी भी राजनीतिक रैलियों की कोई लाइव स्ट्रीमिंग नहीं मिली। हालाँकि, टीएमसी के आधिकारिक हैंडल में ममता बनर्जी द्वारा उठाए गए सवालों और नारों की छोटी क्लिप मिलीं।

हालाँकि, हमें फेसबुक पर ममता बनर्जी के रोड शो की लाइव स्ट्रीम मिली। इसी तरह, उसके आधिकारिक एफबी पेज से शनिवार को पूर्बा बर्धमान में चुनावी रैली का पूरा वीडियो फुटेज भी शेयर किया गया था। यह मामला उत्तर 24 परगना के नोआपारा में उनकी सार्वजनिक बैठक की तरह है।

हमें कोलकाता और नादिया में 15 अप्रैल और 14 अप्रैल को होने वाली बड़ी जन सभाओं के साथ, उनकी चुनावी रैलियों की लाइव स्ट्रीम भी मिलीं।

TMC के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

ट्विटर पर अपनी राजनीतिक रैलियों की लाइव स्ट्रीमिंग से बचने के लिए, ममता बनर्जी और सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस ने सफलतापूर्वक इसे मैनेज किया है। बता दें कि ट्विटर यूजर फेसबुक यूजर की तुलना में राजनीतिक रूप से ज्यादा सक्रिय रहते हैं। लेकिन, फेसबुक से ममता बनर्जी को कोरोना संकट के इस दौर में लोगों के चुभते सवालों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

TMC के वीडियो क्लिप की स्क्रीनशॉट
ममता बनर्जी की राजनीतिक रैलियों का स्क्रीनशॉट

ममता बनर्जी का दोहरा मापदंड ये है कि उन्होंने ट्विटर पर कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर चुनाव आयोग को ट्वीट किया, लेकिन उनके फेसबुक पेज पर चुनावी रैली के वीडियो भरे पड़े हैं। इनमें स्पष्ट तौर पर पार्टी सामाजिक दूरी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती दिख रही है। चुनावी रैलियों में ममता ने राहुल गाँधी को लेकर आँखें मूँद रखीं हैं।

ममता बनर्जी की राजनीतिक रैलियों के दौरान लाइव स्ट्रीमिंग का स्क्रीनशॉट

क्या जनरल वीके सिंह ने कोरोना पीड़ित अपने भाई को बेड दिलाने के लिए ट्विटर पर माँगी मदद? जानिए क्या है सच्चाई

केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए एक नागरिक की मदद करने की कोशिश की। दरअसल, एक ट्विटर यूजर ने सोशल मीडिया पर टैग कर मदद माँगी थी कि उसके भाई को कोरोना हो गया है और गाजियाबाद में बेड नहीं मिल पा रहा है।

चन्द्र प्रकाश राय का ट्वीट

दोपहर करीब 1:20 मिनट चन्द्र प्रकाश राय ने कई लोगों को ट्वीट कर गाजियाबाद में बेड के लिए अनुरोध किया। बता दें कि जनरल वीके सिंह गाजियाबाद से बीजेपी के सांसद हैं, इसलिए यूजर ने उन्हें भी टैग किया था। यह मैसेज मिलने के कुछ देर बाद केंद्रीय मंत्री ने यूजर के मैसेज को कॉपी पेस्ट कर गाजियाबाद के जिलाधिकारी से इस मामले में कार्रवाई करने को कहा।

जैसा कि सामान्यतया होता है बिना जाँचे-परखे ट्रोल्स ने उन्हें और केंद्र सरकार को निशाना बनाना शुरू कर दिया। ट्रोलर्स ने ये सिद्ध करने की कोशिश की कि देश में कोविड की हालत इतनी ज्यादा खराब है कि एक केंद्रीय मंत्री को भी ट्विटर पर बेड के लिए ‘भीख’ माँगनी पड़ रही है।

जनरल वीके सिंह का ट्वीट

केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह के ट्वीट को कॉन्ग्रेस नेताओं ने भी मोदी सरकार की आलोचना करने के अवसर के रूप में लिया। वीके सिंह के ट्वीट पर कॉन्ग्रेस नेता श्रीवत्स ने कहा कि कोरोना वायरस को कंट्रोल करने के लिए अब आर्मी को बुलाया जाना चाहिए।

विद्या कृष्णन समेत कई पत्रकारों ने कहा कि केंद्रीय मंत्री अपने भाई के लिए बेड माँग रहे हैं।

यहाँ देखें कॉन्ग्रेस नेताओं के भेड़ चाल वाले ट्वीट

कॉन्ग्रेस नेता का ट्वीट

हालाँकि, बाद में जनरल वीके सिंह ने अपना ट्वीट डिलीट करने के बाद स्पष्ट किया कि उन्होंने गाजियाबाद डीएम का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक ही ट्वीट किया था, ताकि मदद जरूरतमंदों तक पहुँच सके।

ndtv के पत्रकार और कॉन्ग्रेस नेता ने फैलाई झूठी खबर
हंसराज मीना का ट्वीट

यहाँ तक ​​कि उन्होंने डीएम को फिर से ट्वीट किया, इस बार उन्होंने राय को सही तरीके से ट्वीट किया ताकि उन तक मदद पहुँच सके।

जनरल वीके सिंह का ट्वीट

उत्तर सरकार के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस मामले पर जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

गाजियाबाद के जिलाधिकारी के केंद्रीय मंत्री द्वारा किया गया ट्वीट

राहुल गाँधी ने बंगाल में रैलियों को रद्द करने की घोषणा की, कॉन्ग्रेस नेता जुटा रहे भारी भीड़: अधीर रंजन ने शेयर की तस्वीर

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक पारा और कोरोना संक्रमण अपने उफान पर है। इसी बीच कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने रविवार को ट्वीट कर घोषणा कि वह कोरोना संक्रमण की वजह से बंगाल में होने वाली अपनी सभी रैलियाँ रद्द कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ”कोविड संकट को देखते हुए, मैंने पश्चिम बंगाल की अपनी सभी रैलियाँ रद्द करने का निर्णय लिया है। राजनैतिक दलों को सोचना चाहिए कि ऐसे समय में इन रैलियों से जनता व देश को कितना खतरा है।”

हाल ​के दिनों में देश में कोविड-19 मामलों में वृद्धि के कारण चुनावी रैलियाँ गहन जाँच के दायरे में आई हैं। विपक्षी दलों ने अपनी रैलियों पर चुप्पी साधते हुए भाजपा को निशाना बनाया है। वह इमोशन कॉर्ड खेलते हुए यह जताने का प्रयास कर रहे हैं ​कि कोरोना के बढ़ते मामलों को नजरअंदाज कर भाजपा भीड़ को आकर्षित करने में जी जान लगा रही है।

वहीं, राहुल गाँधी ने स्पष्ट रूप से लोगों की भावनाओं से खेलने की कोशिश की। हालाँकि, इस मामले में कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी राहुल गाँधी के विचारों से इत्तेफाक न रखते हुए भीड़ में शामिल हो रहे हैं। यह एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।

अधीर रंजन चौधरी ने नौडा विधानसभा सीट पर अपनी रैली की तस्वीरें साझा की हैं। यहाँ उन्होंने रैली को संबोधित किया। दरअसल, कॉन्ग्रेस पार्टी बंगाल में वाम मोर्चा और अब्बास सिद्दीकी की आईएसएफ पार्टी के साथ गठबंधन में है। उन्होंने मालदा में भी एक अन्य उम्मीदवार के समर्थन में रैली को संबोधित किया और उसकी तस्वीरें अपने ट्वीटर अकाउंट पर शेयर की हैं।

इस प्रकार यह स्पष्ट हो गया है कि राहुल गाँधी द्वारा पश्चिम बंगाल में अपनी चुनावी रैलियों को रद्द करने की घोषणा महज सोशल मीडिया पर वाहवाही लूटने की एक योजना प्रतीत होती है। जमीनी वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने भी इसी तरह की रणनीति अपनाई है, जहाँ वे ट्विटर पर अपनी रैलियों की तस्वीरें अपलोड करने से बचते हैं, वहीं राज्य में उनका चुनावी आयोजन बदस्तूर जारी रहता है।

बता दें, पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए 8 फेज में वोटिंग होनी है। अब तक 5 फेज की वोटिंग हो चुकी है। अभी तीन फेज की वोटिंग बाकी है। छठे फेज में 43 सीटों के लिए 22 अप्रैल को वोटिंग होगी। चुनाव के नतीजे 2 मई को घोषित होंगे।

मंसाराम अस्पताल में हुई अचानक ऑक्सीजन की कमी, 35 कोरोना मरीजों की जान खतरे में: दिल्ली पुलिस की तेजी ने बचाई जान

देश भर में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ऐसी परिस्थिति में हर राज्य में अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी होती जा रही है। ताजा मामला देश की राजधानी का है। दिल्ली के नांगलोई नजफगढ़ रोड स्थित मंसाराम अस्पताल में अचानक ऑक्सीजन की कमी हो जाने से यहाँ भर्ती 35 कोरोना मरीजों की जान खतरे में पड़ गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे मंसाराम अस्पताल के डायरेक्टर राजेश डबास ने पुलिस को फोन करके कहा कि यहाँ 35 कोविड मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। उनकी ऑक्सीजन सप्लाई लगभग खत्म होने वाली है। राजेंद्र डबास ने यह भी बताया कि उन्होंने कई अथॉरिटीज से मदद माँगी, लेकिन कहीं से कोई भी जवाब नहीं मिला।

बताया जा रहा है कि एडिशनल डीसीपी सुधांशु धामा ने कई अधिकारियों के साथ तुरंत संपर्क साधा और इस बारे में उनसे बातचीत की। एसीपी आशीष के निर्देशन में निहाल विहार से दो टीमों को निर्देश दिया गया कि वो तुरंत मुंडका और बवाना में जाकर ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करें।

10 ऑक्सीजन सिलेंडर आधे घंटे के अंदर पहुँचाए गए। इसके बाद 10 और सिलेंडर सहित कुल लगभग 20 ऑक्सीजन सिलेंडर पहुँचाए गए। दिल्ली पुलिस की त्वरित कार्रवाई से आज 35 कोरोना मरीजों की जान बच गईं।

बता दें कि मंसाराम अस्पताल के डायरेक्टर ने 35 कोविड मरीजों की जान बचाने के लिए उपलब्ध कराए गए ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए दिल्ली पुलिस को धन्यवाद दिया है।

पश्चिम बंगाल: लापता भाजपा कार्यकर्ता का शव झाड़ी में मिला, पार्टी ने टीएमसी के गुंडों पर लगाया हत्या का आरोप

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच हिंसा की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इसी कड़ी में रविवार को नादिया जिले में रोआवारी गाँव के मंडलपारा में भाजपा कार्यकर्ता का शव मिला है। यह क्षेत्र चकदहा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहाँ पाँचवें चरण के तहत मतदान हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की पहचान दिलीप कार्तनिया के रूप में हुई है, जो भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे। वह शनिवार को बूथ स्तर पर पार्टी के लिए काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि पोलिंग के दिन कुछ अज्ञात बदमाशों ने कार्तनिया को धमकी दी थी। बाद में लगभग 11 बजे उन्हें किसी अज्ञात ने बुलाया तो वे घर से चला गए, लेकिन फिर नहीं लौटे।

भाजपा कार्यकर्ता का शव रविवार सुबह उनके घर के पीछे झाड़ियों से बरामद किया गया। चश्मदीदों ने बताया कि दिलीप कीर्तानिया की नाक, कान और मुँह से खून बह रहा था। उनकी हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत चकदाहा स्टेट जनरल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

जब दिलीप की मौत की खबर उसके परिवार के सदस्यों को दी गई, तो उन्होंने अस्पताल के बाहर धरना दिया। परिजनों का आरोप है कि दिलीप को बेरहमी से पीटा गया है और चोट लगने से उनकी मौत हो गई। दिलीप कीर्तानिया के परिवार वालों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। बाद में हालात को काबू करने के लिए पुलिस अधिकारियों की टीम अस्पताल पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

हत्या पर राजनीतिक दलों की बयानबाजी शुरू

घटना के बाद आक्रोशित भाजपा कार्यकर्ताओं और पार्टी के नेताओं ने सड़क जाम कर दिलीप कीर्तानिया को न्याय दिलाने की माँग की। भाजपा कार्यकर्ताओं ने पलापारा पुलिस स्टेशन की ओर आने वाली ट्रेनों को भी रोक दिया। भाजपा ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों पर हत्या का आरोप लगाया है।

भाजपा नेता जयप्रकाश मजूमदार ने कहा, “यह तृणमूल कॉन्ग्रेस की संस्कृति है। उन्होंने भाजपा के पोलिंग एजेंट को बुलाया और उसकी हत्या कर दी। भाजपा का समर्थन करना टीएमसी की नजर में अपराध है। उन्हें विपक्षी दलों के खिलाफ ऐसे अपराध करने के लिए उनकी पार्टी हाईकमान द्वारा निर्देशित किया जाता है। यही कारण है कि निचले स्तर के कार्यकर्ता अपने तरीके से काम कर रहे हैं। हम दोषियों को सजा दिलाने की माँग कर रहे हैं।”

वहीं टीएमसी नेता और पूर्व मंत्री तापस रॉय ने आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया, “2019 के लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में भाजपा ने हत्या की राजनीति शुरू की। वे राजनीति में इतने निचले स्तर तक गिरकर खुशी महसूस करते हैं। वो इस हत्या की जाँच के बिना किसी नतीजे पर कैसे पहुँच सकते हैं? वे टीएमसी पर आरोप कैसे लगा सकते हैं? जाँच होने दीजिए। सच्चाई सामने आ जाएगी। ”

भाजपा के पोलिंग एजेंट को टीएमसी के गुंडों ने बेरहमी से पीटा

दूसरी घटना शनिवार की है, बताया जा रहा है कि उत्तर 24 परगना जिले के हरोआ विधानसभा क्षेत्र में अपना वोट डालने जा रहे अजीत धर नाम के एक भाजपा पोलिंग एजेंट पर कथित तौर पर एक टीएमसी कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक टीएमसी के गुंडों ने भाजपा नेता का कॉलर पकड़कर उसे भाजपा को वोट नहीं देने की धमकी दी थी। भाजपा का आरोप है कि मारपीट में पार्टी के पोलिंग एजेंट के सिर में फ्रैक्चर हुआ था। अजीत धर ने बताया कि उनके सिर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने लाठियों से हमला किया था।

भाजपा कार्यकर्ता को इलाज के लिए बर्धमान मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। टीएमसी कार्यकर्ता ने भाजपा एजेंट से पूछा कि वह कहाँ जा रहा था और उसने अम्फान चक्रवात के दौरान तृणमूल सरकार से पैसे क्यों लिए। इसी को लेकर भाजपा के पोलिंग एजेंट और TMC गुंडों के बीच गर्मागर्मी हुई। भाजपा के एक अन्य पोलिंग एजेंट सुब्रतो घोष ने बताया कि उसने देखा है कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने धर पर हमला किया था। हमले के बाद वह पोलिंग स्टेशन तक पहुँच ही नहीं सके।

‘कॉन्ग्रेसी’ साकेत गोखले ने फैलाया झूठ: रेमडेसिविर की आपूर्ति पर महाराष्ट्र सरकार द्वारा ब्रुक फार्मा के निदेशक के उत्पीड़न का किया बचाव

कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले ने एक बार फिर से फेक न्यूज फैलाने का काम किया है। गोखले ने बेबुनियाद ट्वीट्स की सीरीज में आरोप लगाया कि भाजपा ने महाराष्ट्र में अपने पार्टी कार्यालय में 4.75 करोड़ रुपए की रेमडेसिविर (Remdesivir) की जमाखोरी की है।

साकेत गोखले ने यह आरोप मुंबई पुलिस द्वारा शनिवार को दमन स्थित ब्रुक फार्मा कंपनी के रेमडेसिविर सप्लायर को हिरासत में लेने और सवाल पूछे जाने के बाद लगाया। बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई ने कंपनी से  रेमडेसिविर को महाराष्ट्र में लोगों को आपूर्ति करने का आदेश दिया था, लेकिन पुलिस ने कंपनी के निर्देशक को हिरासत में ले लिया। हालाँकि, देवेंद्र फडणवीस द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद उसे रिहा कर दिया गया। गोखले द्वारा विपक्षी पार्टी पर लगाए गए गंभीर आरोपों का कोई सबूत नहीं है और उस दावे का सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है।

साकेत गोखले का दावा

गोखले ने सवाल किया कि कैसे देवेंद्र फडणवीस जैसे ‘निजी व्यक्ति’ गुजरात से रेमडेसिविर का स्टॉक खरीद सकते हैं, जब बिक्री केवल सरकार को करने की अनुमति है?

देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बात करते हुए कहा था, “चार दिन पहले, हमने ब्रुक फार्मा को महाराष्ट्र में रेमडेसिविर इंजेक्शन के स्टॉक की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि वे अनुमति नहीं दे सकते थे। मैंने केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया से बात की और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से रेमडेसिविर सप्लाई के लिए अनुमति ली, जिसके बाद आज रात (अप्रैल 17, 2021) लगभग नौ बजे, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।”

महाराष्ट्र में विपक्षी दल द्वारा राज्य में कोविड -19 के उपचार में प्रयुक्त महत्वपूर्ण दवा की तीव्र कमी को देखते हुए यह व्यवस्था की गई थी। इससे यह भी स्पष्ट है कि केंद्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री ने महाराष्ट्र को दवा पहुँचाने की मंजूरी दी थी, इसलिए यह सरकार के लिए अज्ञात ‘निजी डील’ नहीं था।

गोखले ने यहाँ पर भूगोल के कम ज्ञान को भी प्रदर्शित किया। ब्रुक प्लांट दादरा नगर हवेली और दमन दीव में स्थित है, न कि गुजरात में, जैसा कि साकेत गोखले ने दावा किया।

इसी ट्वीट में गोखले ने एक और बेबुनियाद दावा किया कि पार्टी कार्यालय में बीजेपी द्वारा रेमडेसिविर स्टॉक जमा किया जा रहा है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मंजूनाथ सिंगे ने उन्हें बताया कि उनके पास इनपुट थे कि कुछ निर्यातकों के पास 60,000 रेमडेसिविर की शीशियाँ थीं और वे केवल उसी की जाँच के लिए जा रहे हैं। लेकिन वहाँ जाकर उन्होंने गिरफ्तारी कर ली।

एनसीपी नेता नवाब मलिक के ढकोसले को आगे बढ़ाते हुए, गोखले ने अपने अगले ट्वीट में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र सरकार को रेमडेसिविर की आपूर्ति रोक दी है।

भाजपा नेताओं ने जल्द ही इस निराधार आरोप को खारिज करने में तनिक भी देर नहीं लगाई। बीजेपी सांसद मनोज कोटक ने महाराष्ट्र और गुजरात की संबंधित राज्य सरकारों की एफडीए द्वारा जारी की गई दो समान चिट्ठियों की तस्वीरें साझा की हैं, जिसमें कहा गया है कि केंद्र की इस मामले में कोई भूमिका नहीं है।

मुंबई भाजपा के प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने भी क्रमशः गुजरात और महाराष्ट्र सरकार द्वारा पत्र साझा किए और कहा कि एमवीए सरकार संकट से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है।

अपने अंतिम ट्वीट में गोखले ने गैर-एनडीए दलों के नेताओं को टैग किया और उनसे अनुरोध किया कि यदि भाजपा अन्य राज्यों में इसी तरह की योजना चला रही है, तो इसकी जाँच करें। इस मामले की जाँच की माँग करने के साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा, “मोदी सरकार की मिलीभगत से फडणवीस बीजेपी कार्यालयों में जमाखोरी करते हुए महाराष्ट्र के रेमडेसिविर आपूर्ति को भुना रहे हैं।”

हालाँकि, यह जानना अनिवार्य है कि महाराष्ट्र सरकार की विलंबता की वजह से विपक्ष को मौजूदा संकट से निपटने के लिए मजबूर होना पड़ा। FDA के एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि वे प्रत्यक्ष बिक्री के लिए कुछ निर्माताओं को आपातकालीन स्वीकृति देने के लिए अभी भी योजना चरण में थे। लेकिन अभी यह बातचीत के चरण में है। ब्रुक को अभी तक मार्केटिंग स्वीकृति नहीं दी गई है।

भारत में वर्तमान में सात ऐसी कंपनियाँ हैं, जो रेमडेसिविर इंजेक्शन का निर्माण कर रही हैं। रेमडेसिविर इंजेक्शन के उत्पादन के लिए इन कंपनियों का अमेरिका की Gilead Sciences के साथ अग्रीमन्ट है। इन कंपनियों की उत्पादन क्षमता फिलहाल 33.80 लाख इंजेक्शन प्रति महीने की है।

देश में बढ़ते कोरोनावायरस के संक्रमण के बीच केंद्र सरकार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन और रेमडेसिविर ऐक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट्स (API) के निर्यात को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है। इसके अलावा मरीजों को रेमडेसिविर की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। रेमडेसिविर का उपयोग कोविड-19 के ईलाज में होता है।

अमेरिका के न्यूयॉर्क का अनोखा मामला, अपने ही वयस्क बच्चों से शादी करना चाहते हैं माता-पिता: फेडरल कोर्ट में याचिका

अमेरिका के न्यूयॉर्क से एक अनोखा मामला सामने आया है। यहाँ एक माता-पिता अपने वयस्क बच्चे से शादी करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने कानूनी तौर पर मैनहट्टन फेडरल कोर्ट में कानूनी कागजात दाखिल किए हैं और इसे ‘व्यक्तिगत स्वायत्तता’ का मामला बताया है।

अपनी इस व्यक्तिगत स्वायत्तता के पीछे के कारण को समझाते हुए माता-पिता ने कहा कि यह आवेदन समाज के एक बड़े हिस्से के लिए नैतिक, सामाजिक और जैविक रूप से खिलाफ है। लेकिन वे चाहते हैं कि इसके लिए कानून बने ताकि इस अनाचार प्रथा में कोई रुकावट ना हो।

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबि​क, माता-पिता ने अपने अनोखे आवेदन को समझाते हुए कहा, ”विवाह के स्थायी बंधन के जरिए दो व्यक्ति चाहे उनके बीच कोई भी रिश्ता हो, वे भाव, अंतरंगता (अंतरंग होने की अवस्था) और आध्यात्मिकता के उच्चतम शिखर को हासिल कर सकते हैं।”

दाखिल आवेदन में यह स्पष्ट किया गया है कि होने वाले पति-पत्नी वयस्क हैं और इसके साथ ही उन्होंने यह भी साझा किया है कि आपस में उनका रिश्ता माता-पिता और बच्चे का है। हालाँकि, मैनहट्टन के इस परिवार और वैवाहिक कानून एटॉर्नी एरिक रुबेल का कहना है कि ऐसा कभी संभव नहीं है।

बता दें कि इस अनोखे आवेदन को दाखिल करने वाले माता-पिता ने अपनी और अपने बच्चे के पहचान का खुलासा नहीं किया है। इस बात की जानकारी भी नहीं दी गई है कि अभिभावक और बच्चे की उम्र, लिंग आदि क्या है।

कोर्ट में दाखिल आवेदन के मुताबिक, पहचान जाहिर न करने के पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि अभिभावक की यह माँग समाज के एक बड़े हिस्से को पसंद नहीं आएगी और इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा।

गौरतलब है कि न्यूयॉर्क के कानून के अनुसार अपने किसी सगे संबंधी के साथ यौन संबंध बनाने पर 4 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इस नजरिये से देखा जाए तो यह वहाँ आपराधिक मामला बनता है। इसके अलावा अपने रिलेटिव से शादी को भी यहाँ अमान्य माना जाता है।

‘गोरखपुर कांड’ के आरोपित डॉ कफील खान कोरोना के इलाज के लिए ‘स्टेरॉयड’ के इस्तेमाल की सलाह दे फिर फँसे

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 2017 में हुए ऑक्सीजन कांड के आरोपित डॉ कफील खान अब सोशल मीडिया पर लोगों को कोरोना से बचने की सलाह दे रहे हैं। बिना चिकित्सकीय देखरेख के इस्तेमाल पर जिन दवाओं से गंभीर नुकसान हो सकता है कफील खान उसे लोगों को खुद से लेने की सलाह दे रहे हैं।

खान द्वारा दिए गए सुझाव का स्रोत कनाडा के एक डॉ जैन चागला हैं, जो संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ हैं।

हालाँकि, ऑपइंडिया एक जिम्मेदार मीडिया प्लेटफॉर्म होने के कारण आपसे ये अनुरोध करता है कि किसी भी दवाओं का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।

सोशल मीडिया पर डॉ कफील की जानकारी के बाद लोगों ने स्टेरॉयड के जोखिमों के बारे में उन्हें याद दिलाया, जिसके बाद उन्होंने एक अन्य ट्वीट करते हुए कहा कि “डेक्सामेथासोन” को केवल प्रशिक्षित डॉक्टर देखरेख में ही सेवन किया जाना चाहिए। हालाँकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और ट्वीट को सैकड़ों रीट्वीट और हजारों लाइक मिल चुके थे।

बता दें कि वर्ष 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के कारण 72 शिशुओं की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद प्रशासन ने इलाज में लापरवाही बरतने के कारण उन्हें निलंबित कर दिया। बाद में डॉ कफील खान को गिरफ्तार भी किया गया था।

दो साल बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने जाँच के बाद लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों को वापस ले लिया था। लेकिन, डॉक्टर कफील खान पर निजी क्लीनिक चलाने समेत दो अन्य आरोप लगाए गए। मामले में उन्हें 9 महीने जेल में बिताने के बाद 2018 में रिहा कर दिया गया था।

इससे पहले सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैलाने के मामले में विभागीय जाँच के बाद उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने अक्टूबर में गलत सूचना फैलाने और निलंबन की अवधि में भी जबरन एक अस्पताल में घुसकर रोगियों के इलाज की कोशिश करने के मामले में नया जाँच शुरू की थी।

योगी सरकार रेमडेसिविर इंजेक्शन के जमाखोरों के खिलाफ सख्त, NSA के तहत होगी कार्रवाई

योगी सरकार ने यूपी में रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ पकड़े गए आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का फैसला किया है। इसके बाद से ही उत्तर प्रदेश एसटीएफ और लोकल पुलिस की टीमें जमाखोरों तथा कालाबाजारी करने वालों की तलाश में जुट गई हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ सरकार ने 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ पकड़े गए 3 व्यक्तियों के खिलाफ कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के प्रावधानों के तहत सजा देने का फैसला किया है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा, “राज्य सरकार ने पुलिस को ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, जो कोविड-19 दवाओं की कालाबाजारी करते हैं।”

वहीं, पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने कहा कि संकट के इस समय में कोई भी गैरकानूनी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरोपितों को सख्त से सख्त सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह मानवता के खिलाफ एक अपराध है। हम गुरुवार को रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपितों के खिलाफ एनएसए लगाकर कार्रवाई करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार अपने लोगों को रेमडेसिविर दवाएँ और अन्य कोविड से संबंधित दवाओं की उपलब्धता की सुविधा को आसान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बीच एसटीएफ के सूत्रों ने कहा कि वे कोविड से जुड़ी दवाओं की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रहे हैं।

बता दें कि कानपुर की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने गुरुवार को 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो इसकी कालाबाजारी करने में शामिल थे। रेमडेसिविर एक मुख्य दवा है, जिसका उपयोग कोरोना वायरस के उपचार में किया जाता है। लोगों की परेशानी का फायदा उठाकर कुछ लोग इसे ऊँचे दामों में बेच रहे हैं।

गौरतलब है कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की आपूर्ति को बेहतर करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर 10 नए ऑक्सीजन प्लाँट स्थापित किए जाएँगे। इसमें डीआरडीओ का सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा, लखनऊ स्थित अवध शिल्प ग्राम में एच.ए.एल. के सहयोग से एक नया सर्व सुविधायुक्त कोविड हॉस्पिटल तैयार किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग एच.ए.एल. से समन्वय स्थापित कर इस अतिमहत्वपूर्ण कार्य को तत्काल क्रियाशील करे।