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बंगाल में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और बीजेपी उम्मीदवार रंतिदेव सेनगुप्ता के काफिले पर हमला, लगाए ‘खेला होबे’ के नारे

पश्चिम बंगाल राज्य में चौथे चरण के चुनाव के लिए प्रचार गुरुवार को समाप्त हो गया है। इस बीच पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के काफिले पर टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। उनके वाहन में भी तोड़-फोड़ की गई। उन्होंने टीएमसी के कार्यकर्ताओं पर चुनाव जीतने के लिए हिंसा का सहारा लेने का आरोप लगाया है।

घटना कोलकाता के चेतला थाना क्षेत्र की है। जहाँ हमले के दौरान पुलिस के सामने ही वाहनों में तोड़फोड़ की गई। इस मामले में केंद्रीय मंत्री ने थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है।

जब घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए केंद्रीय मंत्री थाने पहुँचे तो वहाँ टीएमसी के गुंडों ने फिर से उनके काफिले को निशाना बनाया। हमले में 3-4 गाड़ियाँ भी क्षतिग्रस्त हो गईं।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण हावड़ा से भाजपा के उम्मीदवार रंतिदेव सेनगुप्ता के काफिले पर भी गुरुवार को अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया। रंतिदेव ने कहा, “मेरे वाहन पर हमला करने वाले लोग ‘खेला होबे’ के नारे लगा रहे थे। एक पार्टी ने अपनी हार स्वीकार कर ली है इसलिए वे ऐसे हमलों का सहारा ले रहे हैं।”

इससे पहले एक अप्रैल को राज्य में पहले चरण के मतदान के दौरान नंदीग्राम से बीजेपी के उम्मीदवार सुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमला किया गया था। इसमें उनके काफिले में शामिल कई गाड़ियों को नुकसान हुआ था। घटना के बाद अधिकारी ने कहा था कि बंगाल में जंगलराज है।

एक अप्रैल को ही पश्चिम बंगाल के केशपुर में भाजपा उम्मीदवार प्रीतीश रंजन कोनार के काफिले पर भी हमला किया गया था। रंजन की गाड़ियों पर पथराव किया गया था।

TMC सांसद महुआ मोइत्रा बोलीं: हमें रोमियो पसंद, योगी ने बंगाल में BJP सरकार बनने पर एंटी रोमियो स्क्वॉड का किया था वादा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 8 अप्रैल को एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी के जीतने पर यूपी की तर्ज पर एंटी रोमियो स्क्वॉड बनाया जाएगा। इसके जवाब में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि उनके राज्य को रोमियो पसंद हैं।

ट्वीट कर महुआ मोइत्रा ने कहा, “अजय बिष्ट उर्फ सीएम योगी का ताजा बयान सुनिए…’अगर बंगाल में बीजेपी सत्ता में आती है तो एंटी रोमियो स्क्वॉड बनाएँगे।’ गुड्डू जी, आपके शोहदों के उलट, बंगाली लोग हमेशा दिल से प्यार करने वाले लोग हैं। हमें अपना संगीत पसंद है, हमें अपनी कविताएँ अच्छी लगती है, हमें मिष्टी पसंद है और हाँ हमें अपने रोमियो पसंद हैं।”

टीएमसी सांसद के इस ट्वीट पर कई प्रकार की प्रतिक्रिया आ रही हैं। कुछ लोग इस ट्वीट को देख चुटकी ले रहे हैं, तो वहीं अधिकतर टीएमसी के प्रति अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। एक यूजर ने मोइत्रा को लिखा है, “तृणमूल का घटिया कल्चर बंगालियों पर मत डालो। ये सब 2 मई को खत्म हो जाएगा।”

अन्य यूजर कहते हैं, “योगी सभी गतिविधियों में निपुण हैं। उन्हें कम समझने की भूल न करें। बंगाल राज्य को गुंडागर्दी और अराजक बनाने के लिए आपको शर्म आनी चाहिए।”

गौरतलब है कि इससे पहले ममता बनर्जी के बयान के बाद गोत्र पर शुरू हुई सियासत के बीच भी महुआ मोइत्रा ने एंट्री मारी थी। उन्होंने कहा था, “केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह कहते हैं कि ममता का गोत्र रोहिंग्याओं का है। हमें इस पर गर्व है। ये चोटीवाले राक्षस गोत्र से तो कहीं बेहतर है।” जवाब में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा था, “शिखा/चुटिया हिंदुस्तान की सनातन सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है और वोट की खातिर सनातन को गाली देना उचित नहीं है। रोहिंग्या के पैर धोते रहिए…जल्द ही हिदुस्तान जवाब माँगेगा।”

योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा था

बता दें कि 8 अप्रैल को बंगाल में जनसभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि यदि भारतीय जनता पार्टी बंगाल में सरकार बनाती है तो यूपी की तरह यहाँ भी ‘एंटी रोमियो स्क्वॉड’ बनाया जाएगा और तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के सभी ‘रोमियो’ जेल में होंगे।

हुगली के कृष्णरामपुर में चुनावी जनसभा में आदित्यनाथ ने कहा कि भाजपा द्वारा सरकार में आने के बाद प्रदेश में बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो स्क्वॉड बनाया जाएगा और टीएमसी के सभी रोमियो जेल में होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि 2 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद दीदी (ममता बनर्जी) भी ‘जय श्री राम’ कहना प्रारंभ कर देंगी।

UP का एंटी रोमियो स्क्वॉड

उल्लेखनीय है कि 2017 में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रदेश के अंदर एंटी-रोमियो स्क्वॉड बनाने की बात कही थी। यूपी में भाजपा की सरकार बनने के तुरंत बाद ही एंटी रोमियो स्क्वॉड का गठन हुआ, जिसका कार्य था महिलाओं के खिलाफ होने वाली छेड़खानी और अभद्र व्यवहार को रोकना है।

2 बच्चों के बाप मौलवी ने मस्जिद में नाबालिग से किया रेप, कुएँ में धकेल परिवार सहित फरार: राजस्थान की घटना

राजस्थान के भिवाड़ी में एक मौलवी पर रेप का आरोप लगा है। है। आरोप है कि भिवाड़ी के एक गाँव की मस्जिद के मौलवी ने 14 साल की नाबालिग लड़की के साथ रेप किया और फिर उसे कुएँ में धकेल फरार हो गया। इस घटना के 7 दिन बाद पीड़ित बालिका के परिवार ने थाने में शिकायत दर्ज करा कार्रवाई की गुहार लगाई है। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली है।

‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार,  भिवाड़ी सीओ हरिराम कुमावत ने जानकारी दी है कि गाँव के ही एक व्यक्ति ने मौलवी जफरु के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। वह मूल रूप से हरियाणा के पुन्हाना इलाके के बिसरु गाँव का रहने वाला है। अलवर में वह परिवार सहित रहता था। शिकायत में कहा गया है कि अप्रैल 1, 2021 की रात मौलवी उसकी 14 साल की बेटी को घर से मस्जिद में ले गया।

पिता ने अपनी तहरीर में बताया है कि मौलवी ने मस्जिद में ही उसकी बेटी के साथ रेप किया। रात लगभग साढ़े 3 बजे लड़की के परिजन उसे खोजते हुए पहुँचे तो आरोपित ने पीड़िता को कुआँ में धक्का दे दिया। लड़की ने कुएँ में गिरने के बाद शोर मचाना शुरू किया, जिसके बाद आसपास के ग्रामीण वहाँ जुट गए और बड़े जतन के बाद किसी तरह उसे कुएँ से निकाला। पीड़िता का पिता ट्रक ड्राइवर है।

घटना को लेकर ‘दैनिक भास्कर’ में प्रकाशित खबर (साभार)

पिता ने कहा है कि घटना के समय वो घर पर नहीं था और कहीं बाहर काम से गया हुआ था। उसके लौटने के बाद परिजनों ने उसे इस घटना से अवगत कराया, इसीलिए रिपोर्ट दर्ज कराने में एक सप्ताह लग गए। CO ने बताया कि लड़की के मेडिकल परीक्षण के बाद बयान दर्ज किया जा रहा है। आरोपित मौलवी जफरु परिवार सहित फरार हो गया है। उसके 2 बच्चे भी हैं। मौलवी की तलाश में पुलिस की 2 टीमें लगी हैं।

TMC नेताओं के संरक्षण में ₹1352 करोड़ का कोयला घोटाला, CM ममता के ‘भाईपो’ अभिषेक बनर्जी तक भी पहुँचे पैसे: ED

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। बताया गया है कि पश्चिम बंगाल में अवैध कोयला उत्खनन के लिए एक पूरा सिस्टम काम कर रहा था, जिसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। राजनेताओं और कोयला माफियाओं के गठजोड़ ने जमकर कालाधन बनाया। आरोप है कि इसका एक हिस्सा अभिषेक और उनके परिवार तक भी पहुँचा।

ED ने बुधवार (अप्रैल 7, 2021) को इसका खुलासा किया। पश्चिम बंगाल के पुलिस अधिकारी अशोक कुमार मिश्रा, जो बाँकुड़ा पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर इंचार्ज हैं, उनको कस्टडी में लेने के लिए एक स्पेशल कोर्ट में दायर किए गए रिमांड नोट में ये दावा किया गया है। उक्त पुलिस अधिकारी के साथ TMC यूथ विंग के नेता विनय मिश्रा के भाई विकास मिश्रा को भी गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में एक कारोबारी अनूप माँझी उर्फ़ लाला मुख्य संदिग्ध है।

अप्रैल 3 को गिरफ्तार किए जाने के बाद कोर्ट ने अशोक कुमार मिश्रा को कस्टडी में भेज दिया था। अब ये कस्टडी अप्रैल 12 तक बढ़ा दी गई है। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ये मामला दर्ज किया था। आसनसोल के आसपास स्थित कुनुस्तोरिया और कजोरिया में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड से जुड़ा ये घोटाला कई करोड़ का है। नवंबर 2020 में दायर की गई CBI के FIR के अध्ययन के बाद ED ने ये मामला दर्ज किया।

ED ने अपने रिमांड नोट में बताया है कि राज्य में अवैध कोयला उत्खनन का काम सत्ताधारी राजनेताओं के संरक्षण में फल-फूल रहा था। माँझी, विनय और विकास के लिंक अभिषेक बनर्जी के परिवार से जुड़े हैं। पिछले 2 साल में माँझी ने 1352 करोड़ रुपए के अवैध कोयला खनन को अनुमति दी थी। विनय मिश्रा के जरिए ये लोग सत्ताधारी नेताओं से संपर्क में थे।

वहीं अभिषेक बनर्जी ने कहा कि सारी कोयला एजेंसियाँ केंद्र के अधीन आती हैं और उन पर केंद्रीय संस्थाएँ निगरानी रखती हैं। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सोचती है कि तृणमूल नेता इससे कमा रहे हैं, तो फिर कोयला खदानों का प्रबंधन कराने वालों की जाँच कराने से केंद्र को कौन रोक रहा है? उन्होंने कहा कि केंद्रीय कोयला और गृह मंत्रालय के अधिकारी अपने बॉसेज (मोदी-शाह) की बजाए TMC नेताओं के इशारे पर नाच रहे थे, ये सोचना हास्यास्पद है। उन्होंने पूछा कि भाजपा किसे मूर्ख बना रही है? इस मामले में कुछ दिन पहले अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजीरा से पूछताछ हुई थी।

डसॉल्ट ने फ्रेंच मीडिया की रिपोर्ट को किया खारिज, भारत के साथ राफेल डील में करप्शन के लगाए थे आरोप

राफेल फाइटर जेट बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट/दसॉ (Dassault) एविएशन ने फ्रांसीसी मीडिया आउटलेट मीडियाअपार्ट की उस रिपोर्ट का खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि कंपनी ने एक भारतीय कंपनी को €1.1 मिलियन की रिश्वत दी थी। डसॉल्ट ने कहा है कि सरकार से सरकार के बीच हुए इस सौदे में भारत को 36 राफेल जेट की बिक्री में नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया गया है।

कंपनी ने कहा है कि इस सौदे की फ्रांसीसी भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी समेत कई अन्य आधिकारिक संगठनों द्वारा निगरानी की गई। भारत के साथ राफेल या किसी भी डील में कोई उल्लंघन नहीं किया गया है। कंपनी ने कहा कि वह भारत के साथ 36 राफेल विमानों के ठेके और ऑफसेट करार से जुड़े सभी नियमों और मानदंडों को पूरा करती है।

भ्रष्टाचार के आरोपों पर 8 अप्रैल को एक बयान जारी कर कहा है, “भ्रष्टाचार को रोकने, औद्योगिक और वाणिज्यिक संबंधों में कंपनी की अखंडता, नैतिकता की गारंटी देने के लिए सख्त नियमों को लागू किया है। सैपिन 2 कानून को ध्यान में रखकर कंपनी ने मूल कंपनी और उसकी सहायक कंपनियों में कड़े नियमों को लागू किया है।”

डसॉल्ट ने यह भी बताया कि उसने और रिलायंस ग्रुप ने 2017 में डसॉल्ट रिलायंस एरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) ज्वाइंट वेंचर की स्थापना की थी। नागपुर में एक प्लांट का भी निर्माण किया गया है, जो 2018 से फाल्कन पार्ट्स और टुकड़ों का उत्पादन कर रहा है। फाल्कन फ्रांस के विमानन क्षेत्र की बड़ी व्यावसायिक जेट निर्माता कंपनी है।

क्या था मीडियाअपार्ट ने अपनी रिपोर्ट में

फ्रेंच मीडिया कंपनी मीडियाअपार्ट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि फ्रांस की भ्रष्टाचार-निरोधी एजेंसी ‘एग्नेस फ्रांसेइस एंटी करप्शन एजेंसी’ ने अपनी जाँच में पाया था कि डसॉल्ट ने एक बिचौलिए को एक मिलियन यूरो का भुगतान किया। उसके खिलाफ एक रक्षा सौदे के मामले में भारत में जाँच चल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, डसॉल्ट ने इस भुगतान को लेकर स्पष्ट किया है कि उसने भारतीय कंपनी को राफेल जेट के 50 बड़े प्रतिकृति मॉडल बनाने के लिए भुगतान किया था। डसॉल्ट के खाते में इसे क्लाइंट को गिफ्ट के तौर पर दिखाया गया है।

डसॉल्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो को भारतीय कंपनी डेफसिस सॉल्यूशंस के उस चालान को भी दिखाया, जिसमें राफेल के मॉडलों की आपूर्ति के लिए डील की गई थी। हालाँकि, रिपोर्ट में इस बात का भी दावा किया गया है कि कंपनी वास्तव में मॉडलों के वितरण का सबूत नहीं दिखा पाई थी।

डेफसिस सॉल्यूशन का स्वामित्व सुषेन मोहन गुप्ता के परिवार के पास है, जिसे अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2019 में भुगतान के लेनदेन के मामले में गिरफ्तार किया था। डेफसिस सॉल्यूशन ने किसी भी डिलीवरी के बिना ही डसॉल्ट एविएशन से पैसे लेने के आरोपों का खंडन किया है। कंपनी का कहना है कि उसने राफेल की प्रतिकृतियाँ बनाने के लिए पैसे लिए थे।

कंपनी ने एक बयान में कहा, “यह सब मीडिया के एक वर्ग में किए जा रहे झूठे और निराधार दावों का जवाब है, जिसमें यह कहा जा रहा है कि डेफसिस ने राफेल विमानों के 50 प्रतिकृति मॉडल की आपूर्ति ही नहीं की है।” कंपनी ने यह भी कहा कि डिलीवरी चालान, ई-वे बिल और जीएसटी रिटर्न से संबंधित ऐसी डिलीवरी को संबंधित विभागों में सही तरीके से फाइल किया गया है।

नागार्जुन संग मंदिर में शादी, परिजनों ने घर में घुसने नहीं दिया: हीरोइन ने फिनाइल पी सुसाइड की कोशिश की

पूर्व बिग-बॉस कंटेस्टेंट चैत्रा कोटूर (Chaitra Kotoor) ने आत्महत्या का प्रयास किया है। उन्हें ‘कन्नड़ बिग बॉस 7’ में देखा गया था। उन्होंने गुरुवार (अप्रैल 8, 2021) को फिनाइल पीकर आत्महत्या का प्रयास किया। उन्हें तुरंत एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने मंड्या के एक कारोबारी नागार्जुन के साथ अपनी शादी की घोषणा की थी।

पुलिस का कहना है कि नागार्जुन के परिवार ने इस रिश्ते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। मार्च 28 को सोशल मीडिया पर चैत्रा कोटूर और नागार्जुन की एक मंदिर में शादी करते हुए तस्वीर वायरल हुई थी। दोनों ने ब्यातारनपुरा गणपति मंदिर में शादी की थी। इसमें चैत्रा के परिवार वाले भी शामिल हुए थे। दोनों पिछले 2 सालों से रिलेशनशिप में थे। चैत्रा ने बताया कि शादी के बाद जब वो नागार्जुन के पैतृक आवास गईं तो उन्हें भीतर नहीं घुसने दिया गया।

नागार्जुन के परिवार ने इस शादी को अवैध बताया और कहा कि वो उन्हें भीतर नहीं घुसने देंगे। चैत्रा कोटूर ने बताया कि नागार्जुन शादी में लगातार देरी कर रहे थे, लेकिन उन्होंने अपने परिवार और समुदाय के कुछ लोगों के सहयोग से शादी की। चैत्रा द्वारा पुलिस को दिए बयान के अनुसार, नागार्जुन के परिवार ने गालियाँ दी, उनके काम को लेकर भद्दी टिप्पणी की और नागार्जुन को न छोड़ने पर जान से मार डालने की भी धमकी दी।

चैत्रा ने बताया कि सार्वजनिक रूप से इस तरह के व्यवहार के बाद उन्होंने नागार्जुन के परिवार वाले को सुझाव दिया कि वो कोलार में मामले को सुलझा लें। कोलार पुलिस ने दोनों के ही परिजनों को थाने बुला कर बयान दर्ज कर लिया है। चैत्रा कुछ टीवी शोज के स्क्रिप्ट भी लिख चुकी हैं। ‘बिग बॉस 7’ में कन्नड़ स्टार किच्चा सुदीप होस्ट थे, जिसमें चैत्रा ने बतौर प्रतिभागी हिस्सा लिया था। उन्होंने फिल्मों को सपोर्टिंग किरदार भी निभाया है।

वहीं अब नागार्जुन ने आरोप लगाया है कि ‘कुछ लोगों के दबाव’ के कारण उन्हें शादी करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि उनकी भी शादी की इच्छा नहीं थी। दोनों की शादी मंदिर में एक सादे समारोह में ही हुई थी। बेंगलुरु में रह कर चैत्रा ने कई विज्ञापनों के स्क्रिप्ट भी लिखे हैं। ‘सुजीदारा’ फिल्म में उनके सपोर्टिंग रोल ने उनकी लोकप्रियता बनाई। 27 वर्षीय चैत्रा कोटूर का जन्म और पढ़ाई-लिखाई भी बेंगलुरु में ही हुई है।

18 अप्रैल 1669… जब औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने का दिया था आदेश, साढ़े 4 महीने में कर ली गई थी तामील

वाराणसी के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने जब काशी विश्वनाथ मंदिर को जबरन ढाह कर बनाई गई आलमगीरी मस्जिद के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) द्वारा सर्वे का फैसला दिया, तो कल (8 अप्रैल 2020) नासमझ हिंदू इस पर बल्लियों उछल रहे थे। यह सचमुच दुःख और हैरानी की बात है कि एक हिंदू राष्ट्र (भले ही संवैधानिक तौर पर इसमें धर्मनिरपेक्षता का पुछल्ला एक तानाशाह ने जोड़ दिया हो) में हिंदुओं को अपने सबसे बड़े आराध्यों के लिए बने मंदिर के लिए इतनी छोटी जीत पर भी उचक-उचक कर खुश होना पड़ता है।

यह कोई बधाई या प्रसन्नता की बात नहीं है और इसके दो कारण हैं। आज भी जब आप काशी विश्वनाथ के दर्शन को जाएँगे, तो उसकी ठीक बगल में जो आलमगीरी मस्जिद है (जिसे ज्ञानवापी भी कहा जाता है) – उसको देखकर एक धर्मप्राण हिंदू होने के नाते आपके आँसू निकल आएँगे। मस्जिद की दीवारों को देखकर ही समझ में आ जाता है कि उसे किसी ध्वस्त मंदिर के मलबे से बनाया गया है, यहाँ तक कि कुछेक जगहों पर तो दीवारों को भी नहीं मिलाया गया है।

जिस तरह दिल्ली में कुतुबमीनार साफ-साफ मंदिरों के मलबे से बना दिखता है (और शर्मनाक तरीके से वहाँ ASI ने बोर्ड भी लगा रखा है), उसी तरह काशी-विश्वनाथ मंदिर की छाती पर पैबस्त आलमगीरी मस्जिद भी मंदिर पर निर्मित है, यह बात केवल आँख के अंधों को ही नज़र नहीं आएगी। अयोध्या में भगवान राम के मंदिर का निर्माण प्रशस्त करने का फैसला जब 9 नवंबर को आ रहा था, तो भी मैंने लिखा था कि यह बधाई या प्रसन्नता की कोई बात नहीं है।

लगभग 500 वर्षों के संघर्ष के बाद हिंदुओं को अपने आराध्य के पूजन का, उनके मंदिर का अधिकार मिला है। इसके साथ ही अदालत ने 5 एकड़ का मुआवजा भी थमा दिया है, जो हिंदुओं के ऊपर जुर्माने से कम नहीं है। भाई, मुकदमा तो इसका था न कि अयोध्या में मंदिर को तोड़कर (भारत की अधिकांश मस्जिदें, मंदिर तोड़कर बनीं) मस्जिद बनाई गई, वह स्थल हिंदुओं के आराध्य की जगह है, उसे वापस हिंदुओं को देना है।

इसमें 5 एकड़ मुआवजा क्यों देना था? हिंदुओं को तो राम के अस्तित्व का प्रमाण देना पड़ा, अदालती लड़ाई में कूदना पड़ा, जो राम इस देश के कण-कण में हैं, उस राम को झुठलाने के जिहादी-वामपंथी षड्यंत्र का कालकूट पीना पड़ा। इसमें बधाई की कौन सी बात थी। अब केवल सर्वेक्षण मात्र के फैसले पर कई सेक्युलर-कुबुद्धिजीवी खुलकर न्यायालय के फैसले की आलोचना कर रहे हैं। ओवैसी जैसा जिहादी सीना ठोक कर मुखालफत करता है।

वह कहता है कि राम जन्मभूमि की तरह ही इस मामले में भी बेईमानी की जाएगी। ध्यान दीजिएगा, उसके शब्दों पर। कौमी-कॉन्ग्रेसी-कुबुद्धिजीवियों ने अयोध्या के फैसले पर हमें याद दिलाया था कि ‘तथ्यों के मुकाबले आस्था को प्राथमिकता’ डील पर यह निर्णय हुआ। कुतुबमीनार हो या ज्ञानवापी, भोजशाला हो या मथुरा, ढाई दिन का झोपड़ा हो या कोई भी बुलंद मस्जिद, वह हिंदुओं के स्वाभिमान को ध्वस्त करने के लिए उनके परम पूज्य आराध्यों के मंदिरों को भूमिसात कर बनाई गई हैं।

आज भी उनके साक्षात प्रमाण हिंदुओं को मुँह चिढ़ाते हैं, उसके ज़ख्मों पर नमक छिड़कते हैं। और ये मक्कार, झूठे, लबार तथ्यों की बात करेंगे, जिन्होंने रोमिला-हबीब जैसे उपन्यासकारों के जरिए भयानक झूठ बोले, षड्यंत्र किए और जन्मभूमि के मामले को उलझाने की कोशिश की? कौन नहीं जानता है कि इस्लाम इस देश में एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में तलवार लेकर आया था। कौन नहीं जानता है कि मुगलों के दो सौ वर्षों के शासनकाल में, उनके सबसे सेकुलर राजाओं यथा अकबर और शाहजहाँ ने भी हिंदुओं के मंदिर तोड़े, जजिया लगाया और धर्म-परिवर्तन कराया।

कौन नहीं जानता है कि गायों को हरावल दस्ते में आगे रखकर हिंदुओं को जीतने वाले कायर रेगिस्तानी बर्बरों ने हिंदुओं की चेतना को खत्म करने के लिए मंदिरों को अपवित्र किया, मूर्तियाँ तोड़ीं और बलात्कार किए। काशी-विश्वनाथ हो या राम-मंदिर, मथुरा हो या 30 हजार मंदिरों को तोड़ना और कब्जाना, आप इस देश में जहाँ कहीं भी एक भव्य मंदिर देखेंगे, ठीक उसके साथ ही, उसकी बगल में मस्जिद तामीर कर, 5 बार लाउडस्पीकर से चीखती-पुकारती आवाज़ आप हरेक शहर में सुन सकते हैं। पटना के महावीर मंदिर से लेकर मुंबई का खारघर तक, यही कहानी है।

आलमगीरी मस्जिद प्रमाण है, औरंगजेब की कट्टरता का। 18 अप्रैल 1669 को औरंगजेब ने एक फरमान जारी कर काशी विश्वनाथ मंदिर ध्वस्त करने का आदेश दिया। यह फरमान एशियाटिक लाइब्रेरी, कोलकाता में आज भी सुरक्षित है। उस समय के लेखक साकी मुस्तइद खाँ द्वारा लिखित ‘मासीदे आलमगिरी’ में इस ध्वंस का वर्णन है। 2 सितंबर 1669 को औरंगजेब को मंदिर तोड़ने का कार्य पूरा होने की सूचना दी गई थी।

1777-80 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया था। अहिल्याबाई होलकर ने इसी परिसर में विश्वनाथ मंदिर बनवाया जिस पर पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने सोने का छत्र बनवाया। ग्वालियर की महारानी बैजाबाई ने ज्ञानवापी का मंडप बनवाया और महाराजा नेपाल ने वहाँ विशाल नंदी प्रतिमा स्थापित करवाई। नंदी प्रतिमा का मुख उल्टा होने का रहस्य यही है कि पहले मंदिर जहाँ थी, वहाँ मस्जिद बना ली गई।

इतिहास को विकृत करने की कॉन्ग्रेसी-कम्युनिस्ट कोशिशें परवान नहीं चढ़ सकी हैं औऱ बारहाँ इतिहास कब्र से जीवित होकर उठ खड़ा होता है। ऐतिहासिक दस्तावेज चीख-चीख कर कहते हैं कि मुहम्मद गोरी से लेकर औरंगजेब तक काशी विश्वनाथ ने जितने बर्बर आक्रमण झेले हैं, उसके बावजूद काशी की आत्मा बची है, तो केवल बाबा विश्वनाथ की महिमा से, हिंदुत्व की ज्योति से। और अंत में अचानक से कुछ धिम्मियों की आत्मा जागी है, उनके अंग-विशेष से आँसू निकल रहे हैं।

वे हमें सिखा रहे हैं कि ‘प्रतिक्रिया देना मजहब विशेष से सीखें। उन्होंने जो संयम दिखाया है, उसे देखकर हिंदुओं को शर्म आनी चाहिए।’ पहली बात, सरकार के इक़बाल और पूरी तैयारी की वजह से हमारे ‘शांतिदूत’ भाई चुप हैं। हालाँकि, यह एक वृहत तैयारी के पहले की खामोशी भी हो सकती है। हिन्दू असहिष्णु होता न तो दिल्ली, पटना, मध्य प्रदेश, गुजरात, यूपी… कोई भी जगह शांत न रहती, जहाँ सीधे नंगी आँखों को मंदिरों के ऊपर तामीर की गई मस्जिद दिखाई देती है।

तीसरी और अंतिम बात, यह दूसरा मजहब यदि सचमुच सहिष्णु है तो तत्काल कम से कम काशी और मथुरा के मंदिरों को खुद खाली करे और हिंदुओं के साथ वहाँ भव्य मंदिर बनवाए। बाकी, 30 हज़ार मंदिरों की तो बात भी नहीं हुई है।

(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार व्यालोक ने लिखा है)

विदेशी फंडिंग, केरल में जिहादी वर्कशॉप, जाति के नाम मीडिया में लेख: यूपी में दंगों की PFI ने ऐसे रची थी साजिश

सितंबर 2020 में हाथरस में एक दलित युवती की हत्या के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि उसके बाद हुए बवाल के लिए पूरी सोची-समझी साजिश तैयार की गई थी। STF ने इस मामले की चार्जशीट दायर की है, जिसमें इसका शाहीन बाग़ और दिल्ली में हुए दंगों से भी लिंक सामने आया है। मथुरा कोर्ट में दायर चार्जशीट में PFI के 8 सदस्यों को आरोपित बनाया गया है। बता दें कि अक्टूबर 2020 में अतिकुर रहमान, आलम, सिद्दीकी कप्पन और मसूद एक स्विफ्ट डिजायर में पकड़े गए थे।

उनके पास से 6 स्मार्टफोन, 1 लैपटॉप और 1717 प्रिंटेड कागज़ बरामद किए गए थे। उनमें जाति और समुदाय के नाम किस तरह से हिंसा भड़कानी है और वेबसाइट बना कर इंटरनेट पर लोगों को जोड़ना है, इसका ब्यौरा था। ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ वेबसाइट बना कर दंगा भड़काने की साजिश रची गई थी। STF ने इसके पीछे एक आतंकी संगठन का हाथ होने की बात कही है, जो भारत को विभाजित करना चाहता था।

उक्त आतंकी गिरोह को देश-विदेश से अच्छी-खासी फंडिंग हुई थी। जिन चारों को गिरफ्तार किया गया था, वो PFI के कहने पर ही मथुरा से हाथरस जा रहे थे। अन्य अभियुक्त हैं: सरवर अली- कैराना, मुफ्ती शहजाद- गाजियाबाद, मुनीर- कैराना, साजिश- कैराना, फरमान- हापुड़, अहमद परवेज- गाजियाबाद, अकरम- गाजियाबाद, नसीरुद्दीन- बिजनौर, नूर हसन- हापुड़, आवेद- मेरठ, मोहम्मद दानिश- त्रिलोकपुरी, रउफ- केरल, साजिद बिन सईद- दिल्ली, मोहम्मद इलियास- दिल्ली।

ये सभी PFI की विभिन्न शाखाओं से जुड़े हुए हैं। सिद्दीकी कप्पन के व्हाट्सऐप डेटा, मोबाइल लोकेशन और आरोपित रऊफ शरीफ के बयान से पता चला है कि PFI ने एक वर्कशॉप भी आयोजित किया था। ये वर्कशॉप काफी गुप्त रखा गया था। इस वर्कशॉप में सभी को टास्क दिया गया था कि उत्तर प्रदेश में अलग-अलग सांप्रदायिक घटनाओं की आड़ में वो दंगे करें। विदेश से फंडिंग आई। फिर दंगों की आड़ में आतंकी घटना की साजिश भी बनाई गई।

बरूदीन और फिरोज खान को लखनऊ से दबोचा गया, जिनके पास से मिली विस्फोटक सामग्रियों से स्पष्ट है कि किसी बड़े आतंकी घटना की साजिश थी। आतंकियों के पास से बरामद लैपटॉप में प्रतिबंधित संगठन SIMI के आतंकियों की भड़काऊ स्पीच भी मिली। चैट्स से पता चला कि दलितों और आदिवासियों के नाम पर भड़काने की कोशिश थी। साथ ही मीडिया में कई सांप्रदायिक लेख भी लिखे गए थे। गुप्त व्हाट्सएप्प ग्रुप बना कर दंगा भड़काने की साजिश थी।

बता दें कि दिल्ली दंगों में भी PFI की फंडिंग के सबूत मिले थे। जिस वर्कशॉप की बात STF ने की है, उसे केरल में आयोजित किया गया था। इनके तार रिहेब इंडिया फाउंडेशन नामक संस्था से जुड़े हुए हैं। रउफ शरीफ के बैंक खाते में आई रकम 18 लाख रुपए से शाहीन बाग स्थित दफ्तर का किराया दिया गया था।

जहाँ तक सिद्दीकी कप्पन की बात है, वो पत्रकार है। उसके खिलाफ UAPA के तहत कार्रवाई की जा रही है। ED ने उससे जुड़े 1.36 करोड़ रुपए के अवैध लेन-देन का पता लगाया है। उसने अल-कायदा के संस्थापक आतंकी ओसामा बिन लादेन को ‘शहीद’ बताया था। कई दंगों का वो मास्टरमाइंड है और केरल में ऐसी कितनी ही साजिश रच चुका है। यूपी पुलिस ने 5000 पन्नों की चार्जशीट दायर की है।

साथी के साथ मस्जिद में छिपा आतंकी कमांडर, इमाम और भाई भेजे गए अंदर: सरेंडर पर फोकस ताकि मस्जिद को न हो नुकसान

जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ में गुरुवार (9 अप्रैल 2021) को शुरू हुआ सुरक्षा बलों का ऑपरेशन फिलहाल जारी है। यहाँ आतंकी संगठन अंसार गजवात-उल हिंद (HGH) का कमांडर इम्तियाज मीर अपने एक साथी के साथ मस्जिद में छिपा है। वहीं अवंतीपोरा के त्राल एरिया के नवावबाग में भी आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ चल रही है। दो आतंकियों को अब तक मार गिराने की सूचना है।

शोपियाँ में सुरक्षाबलों के साथ एनकाउंटर के बाद मीर अपने एक साथी के साथ मस्जिद जान मुहल्ला में छिप गया। उससे पहले उसके तीन साथियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था।

आतंकियों को सरेंडर करने के लिए मनाने की खातिर सुरक्षाबलों ने एक आतंकी के भाई और स्थानीय इमाम को मस्जिद के अंदर भेजा है। ताकि वह आतंकियों से बातचीत कर उनसे सरेंडर करवा सके। इस बीच मुठभेड़ में जवानों ने गुरुवार शाम तक तीन आतंकियों को मार गिराया है। वहीं, तीन जवान भी घायल हुए हैं।

हालात को देखते हुए प्रशासन ने शोपियाँ और पुलवामा में इंटरनेट सेवा बंद कर दी है। ऑपरेशन में सेना को दिक्कत यह हो रही है कि एनकाउंटर स्थल के पास ही जामिया मस्जिद है और सुरक्षाबल पूरा प्रयास कर रहे हैं कि मस्जिद को किसी तरह का नुकसान न हो। कश्मीर पुलिस के आईजीपी और सेना की विक्टर फोर्स के मेजर जनरल राशिम बाली इस पर नजर रख रहे हैं। एजीएच को जम्मू-कश्मीर में अलकायदा का अंग माना जाता है।

जानकारी के मुताबिक गुरुवार को पुलिस ने सेना की 44 आरआर और सीआरपीएफ के जवानों के साथ शोपियाँ के जान मोहल्ले की घेराबंदी शुरू की। घनी आबादी होने के कारण पहले इस इलाके से सुरक्षाबलों ने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद दोपहर करीब तीन बजे सेना का शिकंजा कसता देख एक मकान में छिपे आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी।

शाम करीब 6 बजे एक आतंकी को ढेर कर दिया गया। उसका शव उठाते समय आतंकियों की गोली से एक जवान घायल हो गया। इसके बाद फिर से एनकाउंटर शुरू हो गया। रात करीब 8 बजे दो अन्य आतंकी भी ढेर कर दिए गए।

बुरहान वानी का ममेरा भाई भी ढेर

एनकाउंटर में सेना के जवानों नें आतंकी बुरहान वानी के ममेरे भाई को भी ढेर कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मरने वाले आतंकी इश्तियाक, जाहिद कोका और काशिफ मीर हैं। काशिफ मीर हिजबुल मुजाहिदीन के पोस्टर बॉय रहे बुरहान वानी का ममेरा भाई है। काशिफ के दो बड़े भाई भी आतंकी ही थे। इनमें से आदिल ने हिजबुल मुजाहिदीन के नेटवर्क को दक्षिण कश्मीर में स्थापित किया था। उसी ने आतंकी जाकिर मूसा और बुरहान वानी को तैयार किया था।

त्राल सेक्टर में भी दो आतंकियों को सेना ने किया ढेर

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक सेना और आतंकियों के बीच अवंतीपोरा के त्राल इलाके में मुठभेड़ शुरू हो गई है, जिसमें सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया है। इस बात की जानकारी जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजी ने दी है। फिलहाल, सुरक्षा बलों का ऑपरेशन चल रहा है।

कौन है सचिन वाजे का ‘गुरु’ प्रदीप शर्मा: एंटीलिया के बाहर बम रखने से लेकर मनसुख हिरेन की हत्या तक था एक्टिव

एंटीलिया बम कांड और मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में मुंबई पुलिस के पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट व शिवसेना नेता प्रदीप शर्मा भी एनआईए (NIA) के घेरे में हैं। प्रदीप शर्मा इन दोनों मामले में जाँच एजेंसी के दायरे में आने वाले पाँच अधिकारियों में से एक हैं। सचिन वाजे ने जाँच एजेंसी को प्रदीप शर्मा के बारे में कई पुख्ता जानकारियाँ दी हैं। वाजे ने बताया कि वो प्रदीप शर्मा के साथ काम कर चुका है और उसे अपना ‘गुरु’ मानता है।

रिपब्लिक टीवी में प्रकाशित खबर के मुताबिक सचिन वाजे ने अपने बयान में शर्मा का नाम लिया था। वाजे ने एनआईए को बताया कि शर्मा ने उद्योगपति मुकेश अंबानी की ‘एंटीलिया’ के बहार विस्फोटक लदी स्कॉर्पियो खड़ी करने में उसकी मदद की थी। 5 मार्च को मनसुख हिरेन की लाश मिलने तक प्रदीप शर्मा लगातार वाजे के संपर्क में था। एनआईए के पास भी इसके कई ठोस सबूत हैं।

गौरतलब है कि एनआईए ने प्रदीप शर्मा से बुधवार को करीब साढ़े सात घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों ने बताया कि एनआईए शर्मा के कुछ सवालों के जवाब से संतुष्ट नहीं थी। लिहाजा उसे गुरुवार को दोबारा तलब किया। बताया जाता है कि स्कॉर्पियो में रखी जिलेटिन की 20 छड़ें वाजे को प्रदीप शर्मा ने ही उपलब्ध कराई थीं।

कौन हैं प्रदीप शर्मा

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा मुंबई पुलिस के सबसे चर्चित अफसर रहे हैं। अपने 36 साल के करियर में प्रदीप शर्मा ने करीब 312 लोगों का एनकाउंटर किया। अब वे शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने शिवसेना के टिकट पर पिछला विधानसभा चुनाव पालघर की नालासोपारा सीट से लड़ा था। बताया जाता है कि शिवसेना का शीर्ष नेतृत्व भी उन्हें बहुत पसंद करता है।

शर्मा की टीम का हिस्सा रह चुके हैं वाजे और शिंदे

मनसुख हिरेन हत्याकांड में गिरफ्तार सचिन वाजे और विनायक शिंदे प्रदीप शर्मा की टीम का हिस्सा रह चुके हैं। उनकी टीम में रहते हुए सॉफ्टवेयर इंजीनियर ख्वाजा यूनुस की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में 2002 में सचिन वाजे का नाम सामने आया था। इसके चलते उन्हें हाई कोर्ट के निर्देश पर निलंबित कर दिया गया था। वहीं, विनायक शिंदे को 2006 में हुए लखन भैया एनकाउंटर मामले में आरोपित बनाया गया था। इस मामले में शर्मा तो बाइज्जत बरी हो गए थे, लेकिन शिंदे सहित कई और पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

बता दें कि मुंबई पुलिस के जूनियर अफसरों को 100 करोड़ की वसूली का टारगेट देने के मामले में सीबीआई ने जाँच शुरू कर दी है। सीबीआई की टीम ने गुरुवार को मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को कालीना के डीआरडीओ गेस्ट हाऊस में बुलाकर पूछताछ की। सिंह के अलावा सीबीआई ने एसीपी संजय पाटिल और एड. जयश्री पाटिल का भी बयान दर्ज किया।

वहीं महाराष्ट्र में गृहमंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफे के बाद राज्य के भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने भी एक बड़ा दावा किया है। पाटिल ने गुरुवार (अप्रैल 8, 2021) को कहा कि राज्य के दो और मंत्रियों को 15 दिन में इस्तीफा देना पड़ेगा। उनके अनुसार, राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिहाज से उपयुक्त स्थिति है। 

पाटिल का यह बयान मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वाजे का पत्र मिलने के बाद सामने आया है। इसमें वाजे ने देशमुख पर आरोप लगाया कि देशमुख ने उन्हें नौकरी पर वापस रखने के लिए उनसे 2 करोड़ रुपए माँगे थे। वहीं परिवहन मंत्री अनिल परब ने कॉन्ट्रैक्टर्स से रुपए इकट्ठा करने को कहा था।