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मनमोहन सिंह का PM मोदी को पत्रः पुराने मुखौटे में कॉन्ग्रेस की कोरोना पॉलिटिक्स को छिपाने की सोनिया-राहुल की नई कवायद

डॉक्टर मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार को कोरोना से लड़ने के लिए सुझाव दिए हैं। डॉक्टर सिंह के इन सुझावों में सबसे अधिक ज़ोर राज्यों को वैक्सीन की खरीद/निर्यात, उत्पादन और उनके इस्तेमाल पर नीति बनाने के लिए स्वतंत्रता की माँग को लेकर है। साथ ही उन्होंने यह माँग की है कि वैक्सीन की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से पेटेंट अधिनियम 1970 के तहत अनिवार्य लाइसेन्सिंग से सम्बंधित धाराओं का सहारा लेकर दवा बनाने वाली अन्य कंपनियों को वैक्सीन का उत्पादन करने का अधिकार दे।

इसके अलावा डॉक्टर सिंह ने प्रधानमंत्री से माँग की है कि राज्यों को और अधिक स्वतंत्रता दी जानी चाहिए ताकि वे अपनी ज़रूरतों के अनुसार अपने लिए नियम तय कर सकें। उनकी एक और माँग के अनुसार सरकार दवाओं और वैक्सीन के आँकड़ों को लेकर और पारदर्शिता बरते। यह पत्र कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी की एक मीटिंग के बाद लिखा गया है।

पिछले लगभग एक महीने से राहुल गाँधी के साथ ही विपक्ष के नेताओं ने कई बार यह माँग रखी कि सरकार भारत में बनने वाली वैक्सीन के अलावा और भी वैक्सीन आयात करने की अनुमति दे। उनके सहायकों ने उनकी इस माँग का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर बहस भी चलाई। हाल ही में सरकार ने कुछ और वैक्सीन के आयात की अनुमति दी जिसे बाद में राहुल गाँधी की जीत बताया गया। यह बात अलग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन वैक्सीन के भारतीय निर्माताओं के साथ पहले भी बात कर चुके थे।

भारत में महामारी आए एक वर्ष से अधिक हो गए। सरकार ने विपक्ष के साथ मिलकर काम किया और हर निर्णय, आदेश, अनुमति और प्रोटकॉल तय करने में राज्यों से मिलने वाली जानकारियों को आधार बनाया। कई मौक़ों पर केंद्र ने राज्य सरकारों को कोरोना से लड़ने के लिए अपने नियम ख़ुद बनाने की स्वतंत्रता दी। ऐसे में डॉक्टर सिंह की माँग कि राज्यों को नियम बनाने की अनुमति दी जाए, एक राजनीतिक माँग लगती है।

जहाँ तक आँकड़ों में पारदर्शिता की बात है, सुझाव और नियम बनाने से लेकर राज्यों को दी जाने वाली वैक्सीन और उसके इस्तेमाल के आँकड़े पहले ही सार्वजनिक हैं और मीडिया, शोधकर्ता और तमाम संस्थान अपने विश्लेषण के लिए इन आँकड़ों का इस्तेमाल करते रहे हैं। वैक्सीन उत्पादन के लिए अनिवार्य लाइसेन्सिंग से सम्बंधित धाराओं का इस्तेमाल करने का सुझाव नया नहीं है। इससे पहले वामपंथी दल यह सुझाव दे चुके हैं। इस पर कहाँ तक काम हो सकेगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वर्तमान परिस्थितियों में कोरोना के वैक्सीन से सम्बंधित पेटेंट के अंतर्राष्ट्रीय नियम क़ानूनी और व्यावहारिक तौर पर क्या कहते हैं।

डॉक्टर सिंह द्वारा लिखा गया यह पत्र कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की मीटिंग के बाद की औपचारिकता से अधिक कुछ नहीं लगता। यह बात अलग है कि जब कोरोना की दूसरी लहर शायद अपने चरम पर है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा दबाव है, ऐसे समय में यह पत्र जनता के बीच कई सवाल खड़े करता है।

पिछले एक वर्ष में जब देश के लगभग सभी राज्यों ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करते हुए पहली लहर पर लगभग हर तरह से क़ाबू पा लिया था, तब कुछ गिने-चुने राज्य, जिनमें कॉन्ग्रेस शासित राज्य भी शामिल हैं, केंद्र सरकार के साथ क्या पूरी तरह से समन्वय बना सके? महाराष्ट्र और केरल ऐसे राज्यों में से रहे हैं। पिछले एक महीने में महाराष्ट्र की तरफ़ वैक्सीन की सप्लाई को लेकर कई बार भ्रम की स्थिति पैदा की गई। वैक्सीन को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं की ओर से जो बयान दिए गए, उन बयानों पर रोक लगाने को लेकर कोई बहस क्यों नहीं हुई? यह जानना दिलचस्प रहता कि डॉक्टर सिंह ने इन राज्यों की अकर्मण्यता पर उन्हें क्या सुझाव दिया होगा?

कोरोना की दूसरी लहर आने से पहले बिहार चुनावों के समय सारे दल मिलकर इस बात पर विचार क्यों नहीं कर सके कि संक्रमण के ख़तरे को देखते हुए चुनाव प्रचार के नए संभावित तरीक़ों पर सहमति बनाई जाए? यदि कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी तब एक पत्र लिखकर सरकार और विपक्ष के बीच एक समन्वय बनाने का प्रयास करती दिखाई देती तो अच्छा रहता।

कॉन्ग्रेस पार्टी जब भी केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री को पत्र लिखती है तो उस पर हस्ताक्षर करने के लिए डॉक्टर मनमोहन सिंह को आगे ले आती है। पार्टी को शायद लगता है कि किसी भी तरह के पत्र को विश्वसनीय बनाने के लिए एक ही रास्ता है और वह है पत्र पर डॉक्टर सिंह का हस्ताक्षर। दल को शायद यह लगता है कि सोनिया गाँधी या राहुल गाँधी यदि सरकार को पत्र लिखेंगे तो उसे शायद गंभीरता से न लिया जाएगा।

वर्तमान परिस्थितियाँ किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं हैं। ऐसे में सरकार और विपक्ष जितना अधिक समन्वय बना सकें, देश के लिए अच्छा होगा। डॉक्टर सिंह के सुझावों का सरकार स्वागत करेगी पर विचार कितना करेगी वह जल्द ही दिखाई देगा। विपक्षी दलों की जो भूमिका पिछले एक वर्ष में दिखाई दी है, उसके बाद इस तरह के पत्रों को सरकार की तरफ़ से भले नहीं पर उसके समर्थकों की तरफ़ से शंका की दृष्टि से देखा जाएगा।

केरल में कुत्ते को स्कूटर से बाँधकर 200 मीटर तक घसीटता रहा जेवियर, वीडियो वायरल होने पर गिरफ्तार

केरल के मल्लापुरम से इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ पर व्यक्ति ने एक कुत्ते को स्कूटर में रस्सी से बाँध कर 200 मीटर तक सड़क पर घसीटा। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने इस पूरी घटना को अपने कैमरे में कैद कर लिया, जिसके बाद यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

बता दें कि कुत्ते के मालिक ने ही इस शर्मनाक हरकत अंजाम दिया है। वीडियो वायरल होने के बाद एडाकारा पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी और इस घटना को अंजाम देने वाले शख्स को गिरफ्तार कर लिया है। व्यक्ति की पहचान 53 वर्षीय जेवियर के रूप में हुई है। शख्स एडकरा करुनेची का निवासी है।

जानकारी के मुताबिक 200 मीटर तक घसीटने के बाद भी उसकी क्रूरता नहीं रुकी तो उमेर वालप्पन नामक एक शख्स ने उसका स्कूटर रुकवाकर कुत्ते की जान बचाई। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। इस घटना का पता चलने के बाद बचाव दल कुत्ते को नीलांबूर ले गया है।

एडाकारा पुलिस स्टेशन के एक पुलिसकर्मी ने द न्यूज मिनट को बताया, “यह घटना पश्चिमी पेरुमकुलम में शनिवार (अप्रैल 17, 2021) शाम को हुई। कुत्ते को अस्पताल ले जाया गया और अभी सेफ कस्टडी में है। कुत्ता एक सप्ताह से अधिक समय तक जेवियर के घर पर था। जब पड़ोसियों ने शिकायत की कि कुत्ते ने चप्पल चुरा लिए और उनके मुर्गियों को मार दिया तब उसने कुत्ते को छोड़ने का फैसला किया।”

उमेर वालप्पन ने कहा, “मैं एडाकारा में अपने घर वापस जा रहा था जब मैंने इस क्रूरता को देखा। मैंने उसे एक बार रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने गाड़ी चालाना जारी रखा। मैंने अपने स्कूटर पर उसका पीछा किया। आखिरकार, 200 मीटर की दूरी के बाद मैंने ओवरटेक करके उसे रोका। कुत्ता बेदम हो गया था, लेकिन वो उसे फिर भी खींच रहा था। मैं पूरा शूट नहीं कर सकता था, क्योंकि मैं भी गाड़ी चला रहा था।”

इस घटना का वीडियो देखने के बाद लोगों के अंदर गुस्सा है। लोग हर हाल में आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। बता दें कि यह पहला मौका नहीं है, जब किसी शख्स ने कुत्ते के साथ इतना क्रूर बर्ताव किया है। इसके पहले भी इस तरह की कई घटनाएँ देखने को मिली हैं।

‘छोटा सा लॉकडाउन, दिल्ली छोड़कर न जाएँ’: इधर केजरीवाल ने किया 26 अप्रैल तक कर्फ्यू का ऐलान, उधर ठेकों पर लगी कतार

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए अगले सोमवार (अप्रैल 26, 2021) तक देश की राजधानी में लॉकडाउन का ऐलान किया है। इससे पहले वीकेंड कर्फ्यू लगाया गया था। नए आदेश के मुताबिक आज (अप्रैल 19, 2021) रात से लेकर अगले सोमवार सुबह 5 बजे तक लॉकडाउन लगा रहेगा।

दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने कहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते रफ़्तार को रोकने के लिए ये निर्णय लिया गया है। इस फैसले से पहले दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कोविड-19 के प्रकोप की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। दिल्ली में वीकेंड कर्फ्यू से पहले रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक का नाइट कर्फ्यू लागू किया गया था।

इसी बीच अब दिल्ली से प्रवासी मजदूरों के पलायन का डर भी बढ़ गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वे हाथ जोड़ कर प्रवासी मजदूरों से विनती करते हैं कि ये एक छोटा सा लॉकडाउन है जो मात्र 6 दिन ही चलेगा, इसलिए वे दिल्ली को छोड़ कर कहीं और न जाएँ। AAP सुप्रीमो ने आशा जताई कि इस लॉकडाउन को आगे नहीं बढ़ाना पड़ेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार प्रवासियों का ख्याल रखेगी।

हालाँकि, कर्फ्यू के दौरान स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी पर आ-जा सकेंगे। साथ ही गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को अपने किसी एक परिजन के साथ अस्पताल जाने से नहीं रोका जाएगा। टीकाकरण या कोरोना टेस्टिंग के लिए भी लोग बाहर निकल सकेंगे। सीएम ने दिल्ली वालों से अपील की है कि वो लॉकडाउन का पालन करें, इस बार स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार ली जाएगी। उन्होंने केंद्र सरकार का सहायता के लिए धन्यवाद दिया।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रदेश में हॉस्पिटल बेड्स की संख्या बढ़ाई जाएगी और लॉकडाउन की अवधि में अधिक से अधिक ऑक्सीजन सिलिंडर और दवाओं का इंतजाम किया जाएगा। मेडिकल और फ़ूड सहित अन्य ज़रूरी सुविधाएँ मिलती रहेंगी। शादी समारोह 50 व्यक्ति के साथ आयोजित किए जा सकेंगे, जिसके लिए अलग से पास बनवाना होगा। सीएम ने कहा कि दिल्ली में ये कोरोना की चौथी लहर है।

दिल्ली में अब तक कोरोना के 8,53,460 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 74,941 अब भी सक्रिय हैं। पिछले 1 दिन में यहाँ 25,462 नए कोरोना मरीज सामने आए हैं और 161 की मौत हुई है। पिछले एक सप्ताह में कोरोना 2.4% की रफ़्तार से प्रतिदिन बढ़ा है। राज्य में मृत्यु दर 1.4% है। राज्य में अब तक 1.6 करोड़ लोगों की टेस्टिंग हो चुकी है। पिछले 1 सप्ताह में हालात ज्यादा बदतर हुए हैं। बावजूद इसके आम लोगों में भी सतर्कता का अभाव दिख रहा है। इधर केजरीवाल ने जैसे ही कर्फ्यू का ऐलान किया वैसे ही दिल्ली के ठेकों पर लंबी लंबी कतारें देखने को मिली।

‘तमीज से बात करो, जल्दी पता चल जाएगा मैं कौन हूँ’: MP के अस्पताल में अब कॉन्ग्रेस की नूरी खान ने डॉक्टर को हड़काया

‘तमीज से बात करो, जल्द ही पता लग जाएगा मैं कौन हूँ।’ ये शब्द मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता नूरी खान के हैं। कुछ दिनों पहले भोपाल के जेपी अस्पताल से कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा द्वारा की गई अभद्रता का एक वीडियो सामने आया था। अब एक वीडियो उज्जैन के माधव नगर अस्पताल से सामने आया है, जिसमें कॉन्ग्रेस नेता नूरी खान डॉक्टर से अभद्रता करते नजर आईं हैं।

कॉन्ग्रेस नेता कथित तौर पर अस्पताल में व्यवस्था देखने पहुँची थीं। इस दौरान अस्पताल के ही डॉक्टर से किसी बात पर उनकी बहस शुरू हो गई। डॉक्टर ने उनसे पूछा कि आप कौन हैं, कोविड गाइडलाइन का ध्यान रखिए। इस पर कॉन्ग्रेस नेता ने कहा, “मैं कौन हूँ, आपको जल्द ही पता लग जाएगा।”

क्या है पूरा मामला

उज्जैन के 130 कोविड मरीजों की क्षमता वाले माधव नगर अस्पताल में इस वक्त 150 से भी ज्यादा मरीज हैं। दूसरे अस्पतालों में जगह के अभाव के चलते मरीजों को यहाँ रखा गया। किसी जगह एक बेड पर दो मरीजों को रखना पड़ा, तो कहीं फर्श पर जगह कर मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गईं। कई मरीजों को साँस लेने में दिक्कत भी हो रही थीं, डॉक्टरों ने OPD खाली कर ऐसे मरीजों को वार्ड में भर्ती करा दिया।

नूरी खान माधव नगर अस्पताल में व्यवस्था देखने पहुँचीं। उनके साथ मोबाइल कैमरा ऑन किए हुए करीब 10 और लोग वार्ड में घुस गए। वार्ड में भीड़ देख डॉक्टर भोजराज शर्मा व अन्य स्वास्थ्यकर्मी वहाँ इकट्ठा हो गए। मरीजों को फर्श पर देख नेता डॉक्टरों से कहने लगीं ये व्यवस्थाएँ हैं आपके अस्पताल की, इस तरह दो गज दूरी का पालन हो रहा है। जिस पर डॉक्टर ने कहा आप कौन हैं, कृपया कोविड गाइडलाइंस का पालन कीजिए।

डॉक्टर की बात सुन नूरी खान ने कहा, “आप तमीज से बात कीजिए, आपको जल्द ही पता लग जाएगा कि मैं कौन हूँ।” उन्होंने पूछा कि ये मरीजों को रखने का कोई तरीका है, यहाँ बिना दूरी के कोरोना मरीजों का इलाज कैसे हो रहा है। डॉक्टर ने कहा कि ये कोई तरीका नहीं हुआ बात करने का। कुछ देर दोनों में बहस जारी रहने के बाद कॉन्ग्रेस नेता मोबाइल कैमरों के सामने अपना पक्ष रख कर चली गईं।

मोदी सरकार ने चुपके से हटा दी कोरोना वॉरियर्स को मिलने वाली ₹50 लाख की बीमा: लिबरल मीडिया के दावों में कितना दम

सोशल मीडिया में मीडिया रिपोर्टों के हवाले से अफवाह फैलाई जा रही है कि कोरोना की दूसरी लहर के बीच केंद्र सरकार ने चुपचाप स्वास्थ्यकर्मियों को मिलने वाले बीमा वापस ले ली है। ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ने ये प्रोपेगेंडा फैलाया, जिसे ‘द हिन्दू’ की निस्तुला हेब्बर ने आगे बढ़ाया। इस खबर में दावा किया गया है कि कोरोना की ड्यूटी के दौरान मरने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के लिए 50 लाख की बीमा योजना केंद्र सरकार ने वापस ले ली है। ‘द न्यूज मिनट’ ने भी इस खबर को आगे बढ़ाया।

जबकि सच्चाई कुछ और है। असल में केंद्र सरकार ने मार्च 2020 में ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज’ का ऐलान किया था, जिसकी अवधि अप्रैल 24, 2021 तक 3 बार बढ़ाई गई। इसके जरिए स्वास्थ्यकर्मियों को एक सुरक्षा कवच प्रदान किया गया गया, अगर कोरोना की ड्यूटी के दौरान उनके साथ कुछ गड़बड़ होती है तो सरकार ने उनके परिवार के लिए ये व्यवस्था की थी। PMKGP के तहत ही 50 लाख का बीमा कवर का प्रावधान था।

जिन्होंने भी अब तक कोरोना की ड्यूटी के दौरान अपनी जान गँवाई थी, उनके परिजनों को ये रकम बीमा मुआवजा के रूप में प्रदान की गई। इंश्योरेंस कंपनी ने अब तक इसके तहत 287 क्लेम का भुगतान किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इस योजना ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में लगे स्वास्थ्यकर्मियों के मनोबल को मजबूत करने में मनोवैज्ञानिक रूप से एक बड़ी भूमिका निभाई है। अप्रैल 24 तक इसके सभी क्लेम सेटल कर लिए जाएँगे।

इसके बाद मंत्रालय ने जो कहा, उसे ही मीडिया संस्थानों ने गलत तरीके से पेश किया। असल में अप्रैल 24, 2021 के बाद कोरोना वॉरियर्स के लिए एक नई व्यवस्था आने वाली है, जिसके तहत उन्हें सहायता मिलेगी। इसके लिए मंत्रालय ‘न्यू इंडिया इंश्योरेंस’ नामक एक कंपनी के साथ बातचीत भी कर रही है। अब नई और बेहतर व्यवस्था आएगी तो स्पष्ट है कि पुरानी वाली हटेगी, जिसे लेकर मीडिया अफवाह फैला रहा है।

पिछले साल केंद्र सरकार ने इस योजना की घोषणा करते हुए कहा था कि इससे 22 लाख स्वास्थ्यकर्मियों को फायदा मिलेगा। इसमें सफाई कर्मचारी, वार्ड बॉयज, आशा कर्मचारी, नर्स, पैरामेडिक्स, स्वास्थ्य के कार्य में लगे टेक्निशियंस, डॉक्टर्स और स्पेशलिस्ट सहित सभी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को कवर किया गया था। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि कोरोना से अब तक 739 MBBS डॉक्टरों की जान गई है।

पंजाब में साल भर से गोदाम में पड़े हैं केंद्र के भेजे 250 वेंटिलेटर, दिल्ली में कोरोना की जगह ‘क्रेडिट’ के लिए लड़ रहे केजरीवाल

देश में कोरोना संक्रमण ने अब तक के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। पिछले 24 घंटों में 2.74 लाख से ज्यादा नए मरीज मिले हैं और 1619 से अधिक लोगों की जिंदगी इस संक्रमण ने छीन ली है। एक तरफ राज्यों में बेड, वेंटिलेटर, रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की किल्लत बताई जा रही है, वहीं कुछ राज्यों में संसाधन बर्बाद हो रहे।  

कॉन्ग्रेस शासित पंजाब में 250 वेंटिलेटर एक साल से गोदाम में पड़े हैं। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल 20 मार्च को केंद्र सरकार ने राज्य में लगभग 30 करोड़ रुपए की लागत से 290 वेंटिलेटर भेजे थे। लेकिन राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने एक साल बाद भी इसका इस्तेमाल नहीं किया है। उसे गोदाम में बंद कर धूल जमने के लिए रखा गया है। इन वेंटिलेटर को मेडिकल कॉलेजों या अन्य कोविड सेंटर में भेजा जाना था, जहाँ पर L-3 केयर प्रदान किया जाता है। L-3 केयर उन मरीजों को दी जाती है जिन्हें दो या दो से अधिक ऑर्गन सपोर्ट या मैकेनिकल वेंटिलेशन की आवश्यकता होती है। बताया गया कि मेडिकल कॉलेजों या कोविड सेंटरों से माँग इसलिए नहीं की गई, क्योंकि वेंटिलेटर पर मरीजों की देखभाल करने वाले कुशल मैन पावर की कमी थी।  

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट में कहा गया कि यह पहला मौका नहीं था जब राज्य के अस्पताल वेंटिलेटर का उपयोग करने में विफल रहे। पाँच साल पहले, 10 वेंटिलेटर सिविल अस्पताल, लुधियाना भेजे गए थे, लेकिन पाँच साल तक उनका इस्तेमाल नहीं किया गया। बाद में विवाद होने और महामारी के बढ़ने पर एक स्थानीय निजी अस्पताल को वेंटिलेटर सौंपा गया। 

वहीं दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने दिल्ली कैंट में DRDO द्वारा छतरपुर में सरदार पटेल कोविड केयर सेंटर और कोविड केंद्र के लिए क्रेडिट लेने की कोशिश की। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ‘व्यवस्थाओं की समीक्षा’ के बहाने केंद्र में फोटो सेशन के लिए गए।

उप मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर दावा किया कि मंगलवार शाम तक यहाँ 500 बिस्तरों पर इलाज शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस केयर सेंटर को 5000 बिस्तरों वाले अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। यहाँ ऑक्सीजन और आइसोलेशन की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

सत्येंद्र जैन ने भी इसी तरह का ट्वीट करते हुए लिखा, “माननीय उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ DRDO के मेक शिफ्ट अस्पताल का दौरा किया। यह सोमवार से चालू हो जाएगा। 250 आईसीयू बेड कल से चालू हो जाएँगे और अगले कुछ दिनों में 250 और जोड़े जाएँगे।”

उल्लेखनीय है कि AAP का आधिकारिक हैंडल, सिसोदिया या जैन, किसी ने भी ये जिक्र नहीं किया कि ITBP सेंटर और DRDO सेंटर को केंद्र सरकार के समर्थन से बनाया गया है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी उनके ट्वीट को रीट्वीट किया, लेकिन उन्होंने भी समर्थन के लिए केंद्र का शुक्रिया अदा नहीं किया।

यह पहली बार नहीं है जब AAP ने दिल्ली सरकार द्वारा कोविड मामलों में वृद्धि को नियंत्रित करने में विफल रहने के बाद केंद्र सरकार द्वारा की गई पहल का श्रेय लिया। पिछले साल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद, सरदार पटेल कोविड सेंटर की स्थापना भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के सहयोग से की थी। सेटअप हो जाने के बाद, AAP ने केंद्र के लिए श्रेय लेने की कोशिश की। AAP के संजय सिंह ने दावा किया कि बीजेपी ने सरदार पटेल की मूर्ति का निर्माण किया, जबकि दिल्ली सरकार ने कोविड सेंटर का निर्माण किया।

ऑक्सीजन की कमी पर केजरीवाल का केंद्र पर आरोप

दिल्ली के सीएम केजरीवाल बार-बार कह रहे हैं कि दिल्ली में अब ऑक्सीजन, बेड में कमी आ रही है। इसी कड़ी में केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है कि दिल्ली को मिलने वाला ऑक्सीजन का कोटा अन्य राज्यों को भेजा जा रहा है। 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, “दिल्ली में ऑक्सीजन की बहुत कमी हो गई है। बढ़ते केसों को देखते हुए दिल्ली में सामान्य से अधिक सप्लाई की जरूरत है। लेकिन सप्लाई बढ़ाने की बजाय हमारी आपूर्ति घटा दी गई है। दिल्ली का कोटा दूसरे राज्यों को डायवर्ट कर दिया गया है। दिल्ली में ऑक्सीजन इमर्जेंसी बन गया है।”

अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को चिट्ठी भी लिखी है। जिसमें उन्होंने कहा है, “केंद्र सरकार ने दिल्ली के हिस्से की मेडिकल ऑक्सीजन को जो दूसरे राज्यों को डायवर्ट किया है उसको वापिस रीस्टोर किया जाए। इसके अलावा रोजाना 700 मेट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाई जाए।”

उन्होंने आगे मंत्री से अनुरोध किया, “एनसीटी में COVID-19 स्थिति को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए दिल्ली में  M/s INOX द्वारा ऑक्सीजन की 140MT की आपूर्ति की 140MT की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधितों को उचित निर्देश दें।”

मंत्रालय ने सीएम केजरीवाल के दावों की हवा निकाल दी

आउटलुक की रिपोर्ट के मुताबिक वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आरोपों को खारिज किया और इसे ‘खुल्लम खुला झूठ’ करार दिया। आधिकारिक आँंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के अस्पतालों को 16 अप्रैल को 254 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन रिसीव की गई। 17 अप्रैल को यह मात्रा 2.4 गुना बढ़ गई और अस्पतालों को 612 मीट्रिक टन प्राप्त हुए। हालाँकि, दिल्ली से दैनिक माँग 197 मीट्रिक टन थी। दिल्ली के लिए गोयल गैस, लिंडे, आईनॉक्स और एयर लिक्विड पर कुल स्टॉक 311 मीट्रिक टन है। रिपोर्ट में कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी में मेडिकल ऑक्सीजन का कुल स्टॉक 700 मीट्रिक टन है।

केजरीवाल की केंद्र से अपील

दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामले और ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार (अप्रैल 18, 2021) की सुबह पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात की और दोपहर में पीएम मोदी को भी पत्र लिखकर दिल्ली में केंद्र के अस्पतालों में 10 में से 7 हजार हजार बेड्स कोविड के लिए रिजर्व करने और ऑक्सीजन की सप्लाई करने की माँग की थी।

‘F@#k Bhakts!… तुम्हारे पापा और अक्षय कुमार सुंदर सा मंदिर बनवा रहे हैं’: कोरोना पर घृणा की कॉमेडी, जानलेवा दवाई की काटी पर्ची

भारत के कॉमेडियंस खुद को कुछ ज्यादा ही प्रभावशाली और बाकी दुनिया से ऊपर मानते हैं। एक तरफ वे खुद को कॉमेडियन बताते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्षी प्रोपेगेंडा को भी धार देते हैं। हाँ, सत्ता के खिलाफ बोलने का दंभ भरने वाले ये कॉमेडियन उद्धव ठाकरे के खिलाफ चूँ तक करने की हिम्मत नहीं रखते। अधिकतर कॉमेडियंस मुंबई में ही रहते हैं।

सुशांत मामले से लेकर अभी 100 करोड़ की वसूली के आरोपों तक, इनके जुबान सिले हुए ही रहे। वो इसीलिए भी चुप रहते हैं क्योंकि वो नहीं चाहते कि किसी सुबह उनके घर के बाहर कोई विस्फोटक लदी गाड़ी पार्क की हुई मिले और इसके पीछे पुलिस का ही हाथ हो। अब उन्होंने कोरोना की आड़ में उन ‘भक्तों’ को निशाना बनाना शुरू किया है, जिनके परिजन संक्रमण की चपेट में आकर मृत्यु को प्राप्त हो गए। रोहन जोशी जैसों ने इसकी शुरुआत की है।

उसने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, “वो सभी भक्त जिन्होंने इस महामारी के दौरान अपने किसी परिचित को खोया, आप मजबूत बने रहिए। आपके पापा और अक्षय कुमार मिल कर एक सुन्दर सा मंदिर बना रहे है, जहाँ जाकर आप अपने मृत परिजनों की आत्माओं की शांति के प्रार्थना कर सकते हैं।” अव्वल तो ये कि रोहन जोशी ने अपनी अगली स्टोरी में इस बयान का खुल कर बचाव भी किया।

उसने लिखा, “लोग मेरी पिछली इंस्टाग्राम स्टोरी को अभद्र बता रहे हैं। मुझे लगता है कि आप सब ने मेरे क्रोध और अपमान को कम कर आँका है। F@#k Bhakts! इस परिस्थिति के लिए सीधे वही जिम्मेदार हैं। मैं अब भी देख रहा हूँ कि उनमें से अधिकतर अभी भी उनका (पीएम मोदी) बचाव कर रहे हैं। मुझे उनके लिए जरा सी भी सहानुभूति नहीं है, बल्कि केवल अवमानना का भाव है।” आप इन शब्दों पर गौर कीजिए।

रोहन जोशी ने महामारी के मृतकों को लेकर पीटी ताली

रोहन जोशी ने ट्विटर को अलविदा कह रखा है और अब वह फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए घृणा फैलाता है। अब एक और कॉमेडियन की बात करते हैं, जो इसी तरह का काम कर रही हैं। उन्होंने डॉक्टर बनते हुए ये तक शेयर कर दिया कि कोरोना होने पर क्या करना चाहिए और कौन सी दवाएँ लेनी चाहिए। एक डॉक्टर ने उन्हें आईना दिखाते हुए इसे तुरंत डिलीट करने को कहा, क्योंकि उनके हिसाब से इन दवाओं को लेने से मरीज मर भी सकता है।

अदिति मित्तल बन गईं डॉक्टर

इस कॉमेडियन का नाम है अदिति मित्तल, जिन्होंने कहीं से व्हाट्सएप्प के जरिए प्राप्त हुई तस्वीर अपने हजारों फॉलोवर्स के लिए इंस्टाग्राम पर चेंप दी। बाद में उन्होंने उस स्टोरी को डिलीट करने के बाद लिखा कि वो एक सर्टिफाइड पोस्ट था, लेकिन गालियाँ मिलने के बाद उन्होंने हटा दी है। उन्होंने कहा कि उनके पास सैकड़ों निवेदन आए हैं, इसीलिए ज़रूरतमंद लोगों को वो मैसेज के जरिए ये तस्वीर पहुँचाएँगी।

लोगों ने सुनाई खरी-खरी तो डिलीट की स्टोरी

बता दें कि ‘Me Too’ अभियान के तहत अदिति मित्तल पर एक अन्य महिला ने जबरन किस करने के आरोप लगाए थे और रोहन जोशी ने सब कुछ जानते हुए भी कुछ नहीं किया था। जहाँ देश भर के मंदिर कोरोना के खिलाफ समाजसेवा में लगे हुए हैं, ये कॉमेडियन अपने घरों में बैठ कर लोगों के मरने पर ख़ुशी जता रहे हैं।

नासिर ने बीड़ी सुलगाने के लिए माचिस जलाई, जलती तीली से लाइब्रेरी में आगः 3000 भगवद्गीता समेत 11 हजार पुस्तकें राख

हाल ही में कर्नाटक के मैसूर की एक लाइब्रेरी में आग लगने की घटना सामने आई थी। इसमें 3000 भगवद्गीता समेत 11 हजार पुस्तकें जल कर राख हो गई थी। मामले में मैसूर पुलिस ने सैयद नासिर नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक मैसूर सिटी पुलिस ने लापरवाही से जलती माचिस की तीली फेंकने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया है। इसी वजह से आग लगी थी। पुलिस का कहना है कि 35 वर्षीय आरोपित ने बीड़ी सुलगाने के लिए माचिस की तीली जलाई और फिर बिना इधर-उधर देखे उसे लापरवाही से फेंक दिया।

शहर के पुलिस आयुक्त चंद्रगुप्त ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आरोपित सैयद नासिर देर रात नशे की हालत में घर लौटा। उसका अपनी माँ और बहनों से झगड़ा हुआ। इसके बाद वह घर से बाहर निकल गया। बाहर निकल कर उसने बीड़ी और माचिस की तीली जलाई और खुले में एक मरम्मत की दुकान के बाहर रखे फर्नीचर और कुशन पर माचिस की तीली फेंक दी।

घटनास्थल से उसके निकलने के कुछ ही मिनटों बाद आग लग गई। दो स्थानीय लोगों ने इस घटना को देखा और उन्होंने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। आग की लपटें बढ़ती गई और जल्द ही पूरी लाइब्रेरी राख के ढेर में तब्दील हो गई। 

पुलिस ने डिटेल्स पता करने के लिए सीसीटीवी में कैद तस्वीरों का सहारा लिया। पुलिस का कहना है कि सैयद नासिर और सैयद इसाक के बीच में कोई दुश्मनी नहीं है। इसाक ने आरोप लगाया था कि उपद्रवियों ने कन्नड़ भाषा के प्रति दुश्मनी के कारण पुस्तकालय को आग लगा दी। हालाँकि यह पता लगाने के लिए आगे की जाँच चल रही है कि घटना जान-बूझकर की गई थी या अनजाने में। 

बता दें कि यह सार्वजनिक पुस्तकालय सैयद इसाक नाम के शख्स का था। सैयद इसाक दिहाड़ी मजदूर हैं। इसाक ने इस सार्वजनिक पुस्तकालय को अमार मस्जिद के पास राजीव नगर में एक निगम पार्क के अंदर एक शेड जैसी संरचना में स्थापित किया था। हर दिन, 100-150 से अधिक लोग उनके पुस्तकालय में आते थे।  इसाक कन्नड़, अंग्रेजी, उर्दू और तमिल सहित 17 से अधिक समाचार पत्रों की खरीद करते थे। वह लाइब्रेरी के रख-रखाव और अखबारों की खरीद पर लगभग 6,000 रुपए खर्च करते थे।

‘मैं इसे किस करूँगी, हाथ लगा कर दिखा’: मास्क के लिए टोका तो पुलिस पर भड़की महिला, खुद को बताया SI की बेटी-UPSC टॉपर

जहाँ एक तरफ देश की राजधानी कोरोना के कारण बेहाल है, वहीं आम लोग इससे जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन करने में कोताही बरत रहे हैं। दिल्ली में मास्क के लिए टोके जाने पर एक महिला इतनी भड़क गई कि उसने पुलिस को ही खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी। महिला की पहचान पटेल नगर निवासी आभा यादव के रूप में हुई है।

रविवार (अप्रैल 18, 2021) को शाम साढ़े 4 बजे वह अपने पति पंकज दत्ता के साथ टाटा टियागो गाड़ी से जा रही थी। पति-पत्नी में से किसी ने भी मास्क नहीं लगा रखा था। दरियागंज इलाके में पुलिस ने इन्हें रोका। दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने बाहर निकलने से पहले मास्क पहनना अनिवार्य किया हुआ है। बदतमीजी करने वाले पति-पत्नी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। महिला को थाने ले जाने के लिए महिला पुलिस बुलाई गई।

दोनों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है। दिल्ली में नाइट कर्फ्यू तो पहले से ही है, शनिवार और रविवार को AAP सरकार ने वीकेंड कर्फ्यू की घोषणा भी कर रखी थी। महिला से जब पुलिस ने मास्क न पहनने का कारण पूछा तो उसने कहा कि वो अदालत तक जाएगी, लेकिन जुर्माना नहीं भरेगी। उसने धमकी देते हुए कहा कि उसका बाप भी पुलिस में है और SI के पद पर है। साथ ही दिल्ली पुलिस को ‘भिखमंगा’ कह कर सम्बोधित किया।

महिला ने कहा, “आ गए मास्क के नाम पर चालान माँगने भिखमंगे।” इसके बाद महिला ने अजीबोगरीब व्यवहार करते हुए कहा कि वो अपने पति के साथ है और उसे किस भी करेगी, कोई उसका क्या कर लेगा? उसने पुलिसवालों को चुनौती दी कि वो उसे किस करने से रोक लें। आभा यादव नामक इस महिला ने कहा कि कोई कोरोना वगैरह है ही नहीं, सिर्फ बेवजह लोगों को परेशान किया जा रहा है।

महिला ने खुद को UPSC टॉपर और पुलिसकर्मियों को ‘कम पढ़ा-लिखा’ बताया। उक्त दंपति के पास न तो कर्फ्यू पास था और न ही मास्क। महिला ने वहाँ खड़े लोगों को उकसाने का प्रयास किया। साथ ही पुलिसकर्मियों का हाथ पकड़ कर झटक दिया। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि वीडियो देखने के बाद इस मामले में और धाराएँ जोड़ी जा रही हैं। दोनों के खिलाफ IPC की धारा 188 और 51 B DDMA के तहत मामला दर्ज हुआ है।

उक्त महिला के पति ने भी पुलिस को कार को हाथ लगा कर दिखाने की चुनौती दी। महिला ने कहा कि पुलिस चाभी भी छू कर दिखा दे। दिल्ली में कोरोना से हालत बदतर होते जा रहे हैं और 74,941 सक्रिय केसेज के साथ ये देश भर में छठे स्थान पर है। पिछले 1 दिन में 25,462 नए मामले सामने आए हैं और 161 लोगों की मौतें हुईं। प्रदेश में कोरोना ने अब तक 12,121 लोगों की जान ली है, जो महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु के बाद सर्वाधिक है।

ग्रीन कॉरिडोर बनाकर ‘ऑक्सीजन एक्सप्रेस’ चलाएगी रेलवे, उद्योगों की आपूर्ति पर रोक: टाटा स्टील जैसी कंपनियाँ भी आईं आगे

कोरोना की दूसरी लहर के लगातार गंभीर होने के बीच देश के कई राज्यों से ऑक्सीजन की कमी को लेकर खबरें आ रही है। इसे देखते हुए रेलवे ने ‘ऑक्सीजन एक्सप्रेस’ चलाने का फैसला किया है। कई स्टील कंपनियों ने भी अपने प्लांट से ऑक्सीजन आपूर्ति का ऐलान किया है। 22 अप्रैल से 9 सेक्टरों को छोड़कर अन्य उद्योगों को ऑक्सीजन की सप्लाई बंद करने का भी फैसला किया गया है।

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने रविवार (अप्रैल 18, 2021) को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर कहा है कि अगर बहुत जरूरी ना हो तो औद्योगिक उद्देश्यों के लिए ऑक्सीजन सप्लाई को रोकें। सिर्फ छूट प्राप्त सेवाओं के लिए ही सप्लाई को अनुमति दें। उन्होंने कहा कि कोविड के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में मेडिकल ऑक्सीजन की माँग भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक डिमांड है। इन राज्यों में केंद्र सरकार द्वारा गठित सशक्त समूह- II की समीक्षा की गई है, जिसके बाद ये फैसला लिया गया।

इस मुश्किल घड़ी में रेलवे ने ‘ऑक्सीजन एक्सप्रेस’ नाम से एक ट्रेन चलाने का ऐलान किया है। इन खास ट्रेनों की आवाजाही में देरी न हो इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने का फैसला किया गया है। इससे ऑक्सीजन की सप्लाई तेज़ी से हो सकेगी। रेल मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा, “रेलवे तरल मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) और ऑक्सीजन सिलेंडर के ट्रांसपोर्ट के लिए पूरी तरह से तैयार है। रेलवे ऑक्सीजन एक्सप्रेस चलाने की तैयारी में है। ऑक्सीजन एक्सप्रेस की तेज़ आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाए जाएगा।”

रेलवे ने बताया कि टेक्निकल ट्रायल्स के बाद खाली टैंकरों को कलमबोली/बोइसर से मुंबई भेजा जाएगा और फिर वहाँ से वाइजाग जमशेदपुर/राउरकेला/बोकारो भेजा जा रहा है। वहाँ इनमें लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन भरी जाएगी। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सरकारों ने रेलवे से यह पता लगाने का अनुरोध किया था कि क्या रेलवे लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंकरों को ले जा सकती है। रेलवे ने तुरंत इस पर विचार किया और यह फैसला लिया। लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन को रोल ऑन रोल ऑफ सर्विस के जरिए ले जाया जा सकता है। इसके लिए रोड टैंकर्स को फ्लैट वैगंस पर रखना होगा। वेगन में 31-31 टन लिक्विड ऑक्सीजन के टैंकर की रैक होंगी। सबसे पहले महाराष्ट्र को स्टॉक पहुँचाया जा रहा है।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि दिल्ली के शकूरबस्ती स्टेशन पर 50 कोविड-19 आइसोलेशन कोच तैयार हैं जिनमें 800 बिस्तरों की सुविधा है। इसी तरह आनंद विहार स्टेशन पर 25 कोच कोरोना मरीजों के लिए उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि राज्यों की माँग पर रेलवे देश भर में 3 लाख से अधिक आइसोलेशन बेड्स का इंतजाम कर सकती है।

मंत्रालय ने महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में भी 94 कोविड केयर कोच उपलब्ध कराए हैं, जहाँ अब तक 6 कोविड-19 मरीजों को भर्ती किया जा चुका है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार महाराष्ट्र ने भारतीय रेलवे से कोविड केयर कोच की माँग की, जिसके बाद रेलवे ने इन कोच को राज्य को आवंटित किया।

गौरतलब है कि कोविड-19 के मरीजों के लिए बेहद उपयोगी ऑक्सीजन सिलेंडर की देश में भारी किल्लत देखी जा रही है। इसे दूर करने के लिए सरकारी और गैर सरकारी दोनों स्तर से प्रयास जारी हैं। उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज महाराष्ट्र को मुफ्त में ऑक्सीजन दे रही है। रिलायंस ने गुजरात के जामनगर स्थित अपनी रिफाइनरियों से 100 टन ऑक्सीजन की सप्लाई की है। 

इसके अलावा टाटा स्टील, सेल समेत कई इस्पात कंपनियों ने कोविड मरीजों के उपचार के लिए ऑक्सीजन आपूर्ति की घोषणा की है। टाटा स्टील ने रविवार को घोषणा की कि उसने कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए विभिन्न राज्य सरकारों और अस्पतालों को दैनिक आधार पर 300 टन चिकित्सा ऑक्सीजन की आपूर्ति की है।

टाटा स्टील ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘देश की जरूरत को ध्यान में रखते हुए, हम विभिन्न राज्य सरकारों और अस्पतालों को रोजाना 200-300 टन तरल चिकित्सा ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहे हैं। हम कोरोना की रोकथाम के लिये जारी अभियान में साथ हैं और निश्चित रूप से इससे पार पाएँगे।’’

निजी क्षेत्र की जेएसपीएल ने भी कहा कि वह अपने अंगुल (ओडिशा) और रायगढ़ (छत्तीसगढ़) स्थित कारखानों से 50 से 100 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रही है। इससे पहले, सार्वजनिक क्षेत्र की सेल ने शनिवार को ट्विटर पर लिखा था, ‘‘सेल ने अपने एकीकृत इस्पात कारखाने बोकारो (झारखंड), भिलाई (छत्तीसगढ़), राउरकेला (ओड़िशा), दुर्गापुर और बर्नपुर (पश्चिम बंगाल) से कोविड मरीजों के उपचार के लिए 99.7 प्रतिशत शुद्धता वाले 33,300 टन तरल चिकित्सा ऑक्सीजन की आपूर्ति की है।’’ आर्सेलर मित्तल निप्पन स्टील इंडिया लि. (एएमएनएस इंडिया) ने कहा कि वह गुजरात में स्वास्थ्य केंद्रों को प्रतिदिन 200 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रही है।

वहीं बिहार के बेगूसराय में डीएम ने ऑक्सीजन की किल्लत को देखते हुए बीते एक साल से बंद पड़ी फैक्ट्री को शुरू करने का निर्देश दिया। प्लांट चालू होने पर एक दिन में 450 ऑक्सीजन सिलेंडर भरा जाएगा।