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‘नहीं मानी तो निकिता तोमर की तरह मार देंगे’: हमजा, परवेज और शाहिद ने नाबालिग को निकाह की नीयत से अगवा करने की कोशिश की

हरियाणा में नूँह के तावड़ू में लव जेहाद का मामला सामने आया है। घर से कोचिंग के लिए जा रही 12वीं की छात्रा का जबरन धर्मांतरण और निकाह के इरादे से अपहरण का प्रयास किया गया। घटना 2 अप्रैल की है। तीन मुस्लिम युवकों पर नाबालिग लड़की को अगवा करने के प्रयास का आरोप है।

रिपोर्टों के मुताबिक अपहरण करने में नाकाम रहने पर आरोपितों ने लड़की से छेड़खानी की।लड़की के विरोध करने उसे जान से मरने की धमकी भी दी। लड़की के शोर मचाने के बाद लोगों ने छेड़खानी कर रहे युवकों को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपितों की पहचान हमजा, परवेज और शाहिद के रूप में की गई है।

पुलिस से की शिकायत में लड़की ने बताया कि 2 अप्रैल को वह विजय चौक के पास अपने ट्यूशन जा रही थी। तभी आरोपितों में से दो ने उसका पीछा करना शुरू किया और छेड़खानी की। लड़की ने बताया कि उनमें से एक आरोपित कह रहा था कि यदि वह अपना धर्म बदल कर उसके साथ निकाह नहीं करेगी तो वो उसके साथ वही करेंगे जो निकिता तोमर के साथ हुआ था। इसके बाद उसने लड़की को खींचकर मोटरसाइकिल पर बैठाने का प्रयास किया।

लड़की के विरोध करने के बाद उसने अपने 6-7 और दोस्तों को बुला लिया और उसे खींच कर मोटरसाइकिल पर बैठाने का प्रयास किया। लड़की ने शोर मचाया जिससे वहाँ के लोग उसकी सहायता के लिए आए। कई युवक भागने में सफल रहे किन्तु लोगों ने तीन युवकों हमजा, परवेज और शाहिद को पकड़ लिया। इसके बाद उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया। जैसे ही इलाके के लोगों को इस बात की खबर मिली वे थाने पहुँचे और आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। लड़की के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि हमजा का परिवार अवैध गतिविधियों में लिप्त है।

बहरहाल पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

क्या हुआ था निकिता तोमर के साथ

हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बल्लभगढ़ में दिनदहाड़े एक हिंदू लड़की निकिता तोमर की 27 अक्टूबर 2020 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके घरवालों ने आरोप लगाया था कि निकिता पर तौसीफ धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। तीन साल पहले इस संबंध में पंचों के सामने फैसला भी हुआ था। तौसीफ बार-बार निकिता पर दवाब बना रहा था कि ‘मुस्लिम बन जा हम निकाह कर लेंगे’ मगर जब निकिता ने उसकी बात नहीं सुनी तो उसकी गोली मार कर हत्या कर दी गई। तौसीफ और एक अन्य को इस मामले में हाल ही में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

40 साल का हिडमा मास्टरमाइंड, 400 नक्सली, LMG और देसी रॉकेट: बीजापुर में घात लगाकर ऐसे हुआ हमला

छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन के बीजापुर जिले में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में 22 जवानों के बलिदान ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 21 जवान लापता बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मुठभेड़ में बड़ी संख्या में नक्सली हताहत हुए हैं। शनिवार को हुए इस हमले का मास्टरमाइंड माडवी हिडमा बताया जा रहा है।

कौन है माडवी हिडमा?

माडवी हिडमा की उम्र लगभग 40 वर्ष है। वह सुकमा जिले के पुवर्ती गाँव का रहने वाला है। 90 के दशक में वह नक्सली बना था। नक्सल कमांडर माडवी हिडमा कई नामों से जाना जाता है। मसलन, संतोष उर्फ इंदमुल उर्फ पोडियाम भीमा। बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ पुलिस समेत कई नक्सल प्रभावित राज्यों की पुलिस इस मोस्टवांटेड नक्सली की तलाश में है।

हिडमा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGa) बटालियन नंबर 1 का प्रमुख है और ऐसे घातक हमले करने के लिए जाना जाता है। वह महिलाओं सहित लगभग 180 से 250 माओवादियों के दस्ते का नेतृत्व करता है। माओवादी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZ) का सदस्य है। वह सीपीआई (माओवादी) की 21 सदस्यीय सेंट्रल कमेटी का युवा सदस्य है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार उसे माओवादियों के मिलिट्री कमीशन का चीफ भी नियुक्त किया गया है, लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हिडमा हमेशा छिपकर रहता है। यही कारण है कि हाल की उसकी कोई भी तस्वीर उपलब्ध नहीं है। पुलिस ने उसके सिर पर 40 लाख का इनाम घोषित किया हुआ है। बीजेपी विधायक भीम माडवी की हत्या के मामले में एनआईए ने उसके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून के बीच में नक्सली टैक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन (TCOC) चलाते हैं। इस दौरान वह अपने खतरनाक हमलों के जरिए सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हैं। दरअसल, इन दौरान पेड़ों से पत्ते गिर चुके होते हैं। ऐसे में सुरक्षाबलों की गतिविधियॉं नक्सलियों को दूर बैठे भी नजर आ जाती हैं।

बता दें कि पहले भी कई बार नक्सलियों ने इन महीनों में टीसीओसी ऑपरेशन किए हैं। मार्च 2020 में नक्सलियों ने सुकमा में 17 लोगों की जान ली थी। अप्रैल 2019 में बीजेपी विधायक भीमा माडवी, उनके ड्राइवर और तीन सुरक्षाकर्मियों को नक्सलियों ने मौत के घाट उतारा था। वहीं, अप्रैल 2010 में तडमेटला में 76 जवानों की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी।

किन हथियारों का इस्तेमाल

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के अधिकारियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के बीजापुर में शनिवार को सुरक्षाबलों पर घातक हमला करने के लिए माओवादियों ने लाइट मशीन गन (LMGs), अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (UBGL) और देसी रॉकेट का इस्तेमाल किया था।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने कहा कि ऑपरेशन में शामिल जवानों ने बीजापुर-सुकमा सीमा पर मुठभेड़ में जो कुछ भी सामने आया था उसका ब्यौरा दिया है। बताया गया है कि करीब 400 नक्सलियों के समूह ने सुरक्षाकर्मियों पर घात लगाकर हमला किया था। 

CRPF के महानिदेशक (DG) कुलदीप सिंह, जो छत्तीसगढ़ में हैं, उन्होंने 22 जवानों के बलिदान की पुष्टि की है। अधिकारियों ने News18 से बात करते हुए कहा कि इस हमले में लाइट मशीन गन (LMGs) का अधिक उपयोग किया गया था, जिसके कारण यह हमला ज्यादा भयावह था।

सिंह ने कहा कि फोर्स कमांडर ने मुझे बताया कि नक्सलियों ने एक एलएमजी को कहीं छिपा दिया था। उस स्थिति से उन्होंने अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गोलीबारी की। यूबीजीएल, देसी रॉकेट इनका प्रयोग पहले से किया जाता रहा है, लेकिन इस बार इन्हें अधिक उपयोग किया गया। इससे निपटने के लिए हमारे जवानों ने बहुत संघर्ष किया। तीन ट्रैक्टरों में नक्सली अपने मृतक और घायल साथियों को ले गए।

10 दिन में नक्सलियों का दूसरा बड़ा हमला

बीते 10 दिन में नक्सलियों ने जवानों पर यह दूसरा बड़ा हमला किया है। इससे पहले 23 मार्च को नारायणपुर में नक्सलियों ने पुलिस जवानों की बस को आईडी ब्लास्ट से उड़ा दिया था। इस हमले में भी 5 जवान बलिदान हो गए थे, जबकि 14 अन्य जख्मी हुए थे। बस में 24 जवान सवार थे।

बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपना चुनावी कार्यक्रम छोड़कर दिल्‍ली लौट आए हैं। वह इस हमले को लेकर आईबी और सीआरपीएफ के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। अमित शाह ने रविवार को कहा कि वीरगति पाने वाले जांबाज जवानों को हमारी श्रद्धांजलि है। हम उनके परिजनों और देश को विश्वास दिलाते हैं कि बहादुर जवानों ने देश के लिए जो खून बहाया है वह व्यर्थ नहीं जाएगा।

इस हमले के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हमले के बावजूद असम में चुनाव प्रचार में व्यस्त रहने को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की आलोचना हो रही है। साथ ही आईपीएस अधिकारी नलिन प्रभात की दक्षता और उन पर मेहरबानी को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं। इंटेजिलेंस फेल्योर के भी आरोप लग रहे हैं। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या सूचना तंत्र विफल रहा जिसके कारण नक्सलियों के मूवमेंट की सही जानकारी नहीं मिल पाई अथवा नक्सलियों द्वारा सुनियोजित तरीके से जानकारी देकर जवानों को फँसाया गया है।

11 साल पहले 76 जवान बलिदान, DIG थे नलिन; आज 22 जवान बलिदान, IG नक्सल ऑपरेशन हैं नलिन

छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन के के बीजापुर जिले में नक्सली हमले के बाद CRPF के एक अधिकारी का नाम चर्चा में है। ये हैं, नलिन प्रभात। नलिन इस समय IG नक्सल ऑपरेशन हैं। 11 साल पहले जब छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमला हुआ था तो वे DIG थे। उस हमले में 76 जवान बलिदान हो गए थे। बीजापुर जिले में शनिवार (3 अप्रैल 2021) को हुए हमले में 22 जवानों के बलिदान होने की पुष्टि हो चुकी है। 21 लापता हैं।

इस हमले के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हमले के बावजूद असम में चुनाव प्रचार में व्यस्त रहने को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की आलोचना हो रही है। साथ ही नलिन प्रभात की दक्षता और उन पर मेहरबानी को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं। इंटेजिलेंस फेल्योर के भी आरोप लग रहे हैं। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या सूचना तंत्र विफल रहा जिसके कारण नक्सलियों के मूवमेंट की सही जानकारी नहीं मिल पाई अथवा नक्सलियों द्वारा सुनियोजित तरीके से जानकारी देकर जवानों को फँसाया गया है।

इन सवालों के ठोस जवाब तो जाँच के बाद ही मिलेंगे। लेकिन यह तथ्य है कि 2010 में दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले के बाद प्रभात समेत दो अन्य अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया था। इन सभी पर लापरवाही और बिना पर्याप्त सुरक्षा के जवानों को जंगल में भेजने का आरोप लगा था। दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में हुए इस नक्सली हमले में 76 जवान बलिदान हो गए थे।

ताड़मेटला का नक्सली हमला

6 अप्रैल 2010 को सुकमा जिले के ताड़मेटला में चिंतलनार कैंप के 150 जवान डीआईजी नलिन प्रभात के ऑर्डर पर एरिया सैनिटाइजेशन के लिए निकले थे। सैनिटाइजेशन के बाद वापस लौट रही टुकड़ी पर घात लगाकर नक्सलियों ने हमला कर दिया था। इस हमले में 76 जवान बलिदान हो गए थे। ऐसा अनुमान था कि लगभग 1000 नक्सलियों ने जवानों को घेरा था। यह भारत में नक्सल समस्या के इतिहास का सबसे बड़ा हमला माना जाता है।

सीआरपीएफ और गृह मंत्रालय की जाँच

ताड़मेटला के इस भयानक हमले के बाद सीआरपीएफ ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी बैठाई और गृह मंत्रालय ने मामले की जाँच के लिए ई. राममोहन कमेटी गठित की। जाँच कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया था कि नक्सलियों के पास सीआरपीएफ का वायरलेस मौजूद था, जिससे उनके पास जवानों के मूवमेंट की पूरी खबर थी। जाँच कमेटी की रिपोर्ट में प्रभात एवं अन्य अधिकारियों को ‘कमांड एण्ड कंट्रोल’ के फेल होने और ‘स्टैन्डर्ड ऑपरेशन प्रोसिजर’ के उल्लंघन का दोषी पाया गया था। सीआरपीएफ की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी और राममोहन कमेटी की जाँच के बाद डीआईजी नलिन प्रभात और दो अन्य अधिकारियों एके बिष्ट और संजीव बांगड़े को पद से हटा दिया गया था एवं उनका तबादला भी कर दिया गया था।

इस बार क्या हुआ

शनिवार को हुई मुठभेड़ के बाद भी भी मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा कि नक्सलियों ने अपनी मूवमेंट की जानकारी जान-बूझकर अधिकारियों के पास पहुँचाई थी। ताड़मेटला हमले के बाद इन्क्वायरी में प्रभात ने कहा था कि जिस डिप्टी कमांडेंट को साथ भेजा गया था, वह अपना कार्य ठीक से नहीं कर पाया। लेकिन अब वे खुद ही नक्सल ऑपरेशन के आईजी हैं। ऐसे में इंटेलिजेंस की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के ऊपर थी।

नलिन प्रभात आंध्र प्रदेश कैडर के 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी है। उनको राष्ट्रपति का गैलेन्टरी अवॉर्ड भी मिल चुका है। यह अवॉर्ड जम्मू कश्मीर में 2008 के दौरान एक मुठभेड़ में चार आतंकियों को गिराने के लिए दिया गया था। लेकिन, दिलचस्प तथ्य यह है कि उस वक्त भी उनके पिछले रिकॉर्डों का हवाला देते हुए उन्हें यह अवॉर्ड देने पर सवाल उठाए गए थे।

AAP विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR, नरसिंहानंद सरस्वती का गला काटने की दी थी धमकी

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार एफआईआर यति नरसिंहानंद सरस्वती का गला काटने की बात पर दर्ज की गई है।

पत्रकार दीपक चौरसिया ने ट्वीट कर बताया है कि दिल्ली पुलिस ने आप विधायक के खिलाफ IPC की धारा 153A/506 के तहत मामला दर्ज किया है। इससे पहले दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में गाजियाबाद के डासना मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।

दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित तौर पर पैंगबर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी कर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में महंत के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। दिल्ली पुलिस ने बताया था कि इस वीडियो पर संज्ञान लेते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 153-A और 295-A के तहत पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यति नरसिंहानंद की टिप्पणी वाला यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है।

नरसिंहानंद सरस्वती पर एफआईआर से पहले अमानतुल्लाह ने जामिया नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने ट्विटर पर वीडियो शेयर कर इसकी जानकारी दी थी। शिकायत से पहले अमानतुल्लाह खान ने ट्विटर पर लिखा था, “हमारे नबी की शान में गुस्ताखी हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं, इस नफ़रती कीड़े की ज़ुबान और गर्दन दोनों काट कर इसे सख़्त से सख़्त सजा देनी चाहिए। लेकिन हिंदुस्तान का कानून हमें इसकी इजाज़त नहीं देता, हमें देश के संविधान पर भरोसा है और मैं चाहता हूँ कि दिल्ली पुलिस इसका संज्ञान ले।”

रविवार (अप्रैल 4, 2021) को अमानतुल्लाह खान के ट्वीट को ट्विटर ने डिलीट कर दिया था। साथ ही भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली के ओखला से विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए यूपी पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई थी।

मंदिरों की सफाई का देशव्यापी अभियान: कपिल मिश्रा के हिंदू इकोसिस्टम का पहला ‘ग्राउंड एक्शन’

नवंबर 2020 में भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने देश के अंदर हिंदुओं के हित से संबंधित मुद्दों को महत्व दिलाने के लिए ‘हिन्दू इकोसिस्टम’ की पहल की थी। यह वॉलेंटियरशिप पर आधारित है। अभी तक सोशल मीडिया के क्रियाकलापों में सीमित रहने वाले हिन्दू इकोसिस्टम ने जमीनी स्तर पर अपना पहला कार्य प्रारंभ किया। यह कार्य है देशभर में मंदिरों की सफाई का।

3 अप्रैल 2021 को कपिल मिश्रा ने सभी हिंदुओं से आह्वान किया था कि वे 4 अप्रैल की सुबह को अपने निकट के मंदिरों में जाएँ और वहाँ सफाई करने के लिए अपनी ‘सेवा’ प्रदान करें। उनके आह्वान के बाद वॉलेन्टियर्स ने बताया कि इस पहल के अंतर्गत लगभग 300 मंदिरों की सफाई की गई है। अपने वीडियो मैसेज में कपिल मिश्रा ने कहा कि इकोसिस्टम का पहला जमीनी क्रियाकलाप ‘क्लीन टेंपल, क्लीन नेशन’ है। इसके अंतर्गत इकोसिस्टम के सदस्य अपने नजदीक के मंदिर में जाकर उसकी सफाई के लिए अपने ‘सेवा’ देंगे।

मिश्रा के इस आह्वान पर 4 अप्रैल की सुबह से ही हिन्दू इकोसिस्टम के सदस्य अपने नजदीकी मंदिरों में पहुँच गए और वहाँ साफ-सफाई की। सोशल मीडिया में #CleanTempleCleanNation हैशटैग चलता रहा और सदस्यों द्वारा मंदिरों की सफाई की फोटो और वीडियो से भरा रहा।

पश्चिम बंगाल

उत्तरप्रदेश

महाराष्ट्र

गुजरात

कर्नाटक

तेलंगाना

मध्यप्रदेश

उत्तराखंड

झारखंड

बिहार

नई दिल्ली

ओडिशा

जम्मू-कश्मीर

हरियाणा

कपिल मिश्रा ने बताया कि हिन्दू इकोसिस्टम के सदस्य हर महीने ‘सेवा’ के लिए मंदिरों में जाएँगे और साफ-सफाई, मेंटेनेंस इत्यादि कार्यों में मंदिरों की सहायता करेंगे।

2500 डॉलर का लालच, मोगा में 3 युवकों ने लहराया था खालिस्तानी झंडा: जेल में सड़ रहे, फूटी कौड़ी नहीं मिली

तीन सिख युवकों ने 14 अगस्त 2020 को पंजाब के मोगा जिला की प्रशासनिक इमारत पर खालिस्तानी झंडा लहरा दिया था। सिख फॉर जस्टिस के नेता गुरुपतवंत सिंह पन्नू के उकसाने पर उन्होंने ऐसा किया। तीनों आज भी जेल में बंद हैं और उन्हें फूटी कौड़ी नहीं मिली है। खालसा टुडे के एडिटर इन चीफ सुखी चहल ने यह बात सार्वजनिक की है।

चहल के मुताबिक तीनों युवकों का परिवार अब पन्नू को कोस रहा। उसने इस काम के बदले 2500 डॉलर देने का लालच दिया था। लेकिन, इस घटना के बाद कोई पैसा नहीं दिया।

चहल ने कहा कि भारत के बाहर रहने वाले भारत विरोधी तत्व पंजाब जैसे राज्यों में युवाओं का जीवन बर्बाद कर रहे हैं। इन तीन युवकों के केस से यह सबको पता चलना चाहिए कि यदि कोई लालच में आकर भारत विरोधी कार्य कर रहा है तो वह मात्र अपने आप को संकट में डाल रहा है।

इस मामले में मोगा पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 124A (राजद्रोह) और 121 (सरकार के विरुद्ध बगावत) के तहत केस दर्ज किया है। इसके अलावा तीनों युवकों पर राष्ट्र-गौरव अपमान-निवारण अधिनियम के तहत भी धाराएँ लगाई गई हैं।

एसएसपी हरमनबीर सिंह गिल ने कहा कि तीनों युवक प्रतिबंधित संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू के लालच में आ गए थे। गिल ने बताया कि पन्नू ने कई बार ऐसे कामों के लिए 2500 डॉलर अथवा 25,000 डॉलर देने का लालच दिया है और उसके इसी लालच के कारण कई युवा उसके जाल में फँस जाते हैं। एसएसपी गिल ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि तीनों युवक ऑफिस के छत पर चढ़ गए और वहाँ लगे तिरंगे को उतार कर खालिस्तान का झण्डा लगा दिया था। यह एक राष्ट्र विरोधी गतिविधि है।  

गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो में कहा था कि हरियाणा जो कि पंजाब का एक भाग था, खालिस्तान का भाग बनेगा।

लुधियाना सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा था कि पन्नू और जत्थेदार साहब जो जहर फैला रहे हैं उसका असर मोगा में देखने को मिला जब सिख युवकों ने भारतीय तिरंगा उतार कर उसकी जगह खालिस्तान का झण्डा लहर दिया। कानून को इन राष्ट्र विरोधी तत्वों को गिरफ्तार करके इनके माथे पर गद्दार लिख देना चाहिए। बिट्टू ने यह भी कहा था कि समय आ गया है यह समझने का कि कौन इस देश से प्यार करता है और कौन गद्दारी।

‘सिख फॉर जस्टिस’ का नेता पन्नू पंजाब के युवाओं को भड़काने के लिए ‘किसान आंदोलन’ का भी सहारा ले चुका है। उसने भारतीय सेना के सिख जवानों को लद्दाख सीमा छोड़कर सिंघू बॉर्डर आने के लिए कहा था। साथ ही उसने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों को भारत से अलग होने की सलाह भी दी थी।

पैसे को लेकर झगड़ा, किसान प्रदर्शनकारी को उसके साथी ने ही पीट-पीटकर मार डाला: टिकरी बॉर्डर पर हुआ फसाद

दिल्ली की सीमाओं पर कई महीनों से नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन चल रहा है। टिकरी बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल एक 26 वर्षीय किसान की 2 अप्रैल की रात पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आरोपित भी प्रदर्शनकारी ही है।

​रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब के बरनाला जिले का युवा किसान गुरप्रीत सिंह कई हफ्तों से किसान आंदोलन में सक्रिय था। वह अपने गाँव के ही किसान रणबीर सिंह उर्फ सट्टा सिंह के साथ टिकरी बॉर्डर पर ट्रॉली टेंट में ठहरा हुआ था। शुक्रवार को दोनों के बीच पैसों को लेकर झगड़ा हो गया।

बताया जा रहा है कि इसको लेकर गुस्साए रणबीर ने गुरप्रीत को लाठी से पीट-पीटकर बुरी तरह घायल कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित वहाँ से फरार हो गया। गुरप्रीत को घायल अवस्था में देखकर वहाँ मौजूद अन्य प्रदर्शनकारी उसे इलाज के लिए बहादुरगढ़ सिविल हॉस्पिटल ले गए। लेकिन गुप्तांगों समेत शरीर के कई अंगों में गंभीर चोट आने के कारण शुक्रवार रात को गुरप्रीत की अस्पताल में ही मौत हो गई।

शुक्रवार (3 अप्रैल 2021) रात करीब नौ बजे मामले की सूचना मिलने पर सेक्टर-6 थाना से SHO जयभगवान पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने बताया कि दोनों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर बहस हुई, जिसके बाद रणबीर ने गुरप्रीत को लाठी से पीट-पीटकर घायल कर दिया। वहाँ मौजूद अन्य प्रदर्शनकारी किसानों ने गुरप्रीत को घायल अवस्था में बहादुरगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसकी मौत हो गई। हमने शव को कब्जे में लेकर जाँच शुरू कर दी है।

बता दें कि पुलिस ने मृतक युवक के परिजनों को भी इसके बारे में सूचित कर दिया है। पुलिस ने मृतक के चाचा नाहर सिंह की शिकायत पर उनके ही गाँव के निवासी रणबीर उर्फ सट्टा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

अन्ना हजारे का आंदोलन कॉन्ग्रेस की मदद के लिए था… रास्ता भटक गया और केजरीवाल सारी मलाई चाप गए?

यह अंश राहुल रोशन के द्वारा लिखी गई किताब “Sanghi Who Never Went To A Shakha” के अध्याय “Hindutva vs the Ecosystem” से लिया गया है।

नेहरू-गाँधी परिवार के विरुद्ध ‘इकोसिस्टम’ की चुप्पी को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के समय भी देखा गया था। अन्ना हजारे की तत्कालीन टीम में किसी भी प्रभावशाली नेता, खासकर अरविंद केजरीवाल ने, एक भ्रष्ट नेता के तौर पर सोनिया गाँधी का नाम नहीं लिया था।

अगर अन्ना हजारे का धरना एक अलग तरीके से समाप्त हुआ होता, (कॉन्ग्रेस द्वारा अन्ना के इस आंदोलन पर हमला किए जाने और आंदोलन को आरएसएस की साजिश बताए जाने के बिना) तो इस आंदोलन ने कॉन्ग्रेस की सिर्फ सहायता ही की होती। इसका एक अंत यह भी हो सकता था कि राहुल गाँधी लोकपाल की नियुक्ति का वादा करते और अपने हाथों से संतरे का जूस पिलाकर अन्ना हजारे का आमरण अनशन समाप्त करते। इसे लगातार टीवी पर चलाया जाता।

2014 में यूपीए के तीसरे कार्यकाल में राहुल गाँधी जब प्रधानमंत्री बनते तो एक नैरेटिव चला कर 2जी, कॉमनवेल्थ और कोयला घोटालों का दोष मनमोहन सिंह पर डाल दिया जाता।

2014 के लोकसभा चुनावों से कुछ समय पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह भरोसा जताया था कि इतिहास उनके साथ दयालु रहेगा। यह उनका विदाई वक्तव्य ही था क्योंकि उन्हें भी यह पता था कि चुनावों का परिणाम चाहे जो भी हो, वो दोबारा प्रधानमंत्री नहीं बनाए जाएँगे।

यदि कॉन्ग्रेस चुनाव जीत जाती… और कॉन्ग्रेस के चुनाव जीतने की उम्मीदें भी बहुत ज्यादा होतीं, यदि अन्ना हजारे का आंदोलन मेरे द्वारा बताए गए उक्त तरीके से समाप्त होता… तो इतिहास मनमोहन के प्रति बिल्कुल भी दयालु नहीं होता। ऐसा इसलिए क्योंकि राहुल गाँधी को हीरो बनाने के लिए ‘दरबारी’ इतिहासकारों द्वारा मनमोहन सिंह को विलेन बना दिया जाता। इस योजना की एक रिहर्सल सितंबर 2013 में तब हुई थी, जब राहुल गाँधी ने अपनी ही सरकार का एक अध्यादेश सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था।

मेरे पास अपने कुछ कारण हैं, जिनसे मुझे विश्वास है कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन, कॉन्ग्रेस की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए शुरू नहीं हुआ था। अन्ना हजारे की टीम के मुख्य सदस्य स्वामी अग्निवेश को कथित तौर पर फोन से कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल (हालाँकि स्वामी अग्निवेश ने बाद में कहा था कि वो किसी और कपिल से बात कर रहे थे) से बात करते हुए सुना गया था, जहाँ उन्होंने अपने साथियों (आंदोलनकारियों) की तुलना पागल हाथी से की थी।

अग्निवेश को यह कहते सुना गया था कि अन्ना हजारे की टीम अपना रास्ता भटक चुकी है और एक पागल हाथी की तरह व्यवहार कर रही है, जो अपने नियत उद्देश्य पर रुकने को तैयार नहीं है। तो, क्या इसका मतलब यही था कि अन्ना हजारे की टीम को एक सीमित तरीके में ही अपना आंदोलन बनाए रखना था और एक नियत समय के बाद उसे समाप्त करना था?

संभवतः ऐसा था भी! क्योंकि ‘इकोसिस्टम’ द्वारा सुनियोजित सीमित समय का आंदोलन कॉन्ग्रेस की ही सहायता करता। इसकी सहायता से ‘राजनैतिक वर्ग’ के भ्रष्ट होने का वातावरण निर्मित किया जाता, जिसमें कॉन्ग्रेस और भाजपा दोनों को भ्रष्टाचार रूपी एक ही सिक्के के दो पहलू दिखाए जाते। इससे जाहिर है भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा को कोई लाभ नहीं होता- जैसे 2009 के लोकसभा चुनावों के दौरान हुआ था, जब घरेलू सुरक्षा के मुद्दे पर शासन में बैठे दल के स्थान पर सम्पूर्ण राजनैतिक वर्ग के विरुद्ध वातावरण बनाया गया था। अन्ना हजारे के आंदोलन की इकोसिस्टम की रणनीति सफल होती लेकिन पता नहीं कैसे, इसे कॉन्ग्रेस के कम्फर्ट से आगे खींचने का निर्णय लिया गया।

ऐसा लगता है कि इसके लिए कई वैश्विक कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें 2010-12 की ‘अरब स्प्रिंग’ को महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए। इस दौरान मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के कई देशों में सत्ता परिवर्तन हुआ। यहीं से भारत के ‘इकोसिस्टम’ को झूठी बँधी कि वह भी भारत में कॉन्ग्रेस के सहयोग के बिना भी सीधा शासन कर सकता है। इसी झूठी आशा के कारण वे, स्वामी अग्निवेश के शब्दों में, ‘पागल हाथी’ की तरह अपने लक्ष्य से भटक गए।

इस दौरान टीवी पत्रकार राजदीप सरदेसाई का 2012 का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो मराठी में कहते हुए पाए गए कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल को उस आंदोलन के साथ भारत में ‘तहरीर स्क्वायर’ जैसा कुछ करने की सलाह दी थी। (राजदीप सरदेसाई ने इस वीडियो की सत्यता स्वयं प्रमाणित की, जब उन्होंने अपनी किताब ‘2014 : The Election that Changed India, Penguin Books, New Delhi, 2014 में वही बात लिखी, जिसका जिक्र वीडियो क्लिप में किया गया था) 

तहरीर स्क्वायर, मिस्त्र की राजधानी काइरो में है, जहाँ फरवरी 2011 में एक बड़ा जन आंदोलन हुआ था, जो ‘अरब स्प्रिंग’ की एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में जाना जाता है। इस आंदोलन के कारण वहाँ के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। आंदोलन के पहले उन्होंने लगातार 30 वर्षों तक शासन किया था। 

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि ‘इकोसिस्टम’ ने सोचा था कि भारत में भी ‘अरब स्प्रिंग’ की तरह ही कोई क्रांति हो सकती है। यदि ऐसा था, तो वे सीधे सत्ता हासिल करने का प्रयास कर रहे थे, बजाय इसके कि कॉन्ग्रेस उन्हें सत्ता का एक छोटा सा हिस्सा दे। उनकी योजना उन अपराधियों या स्थानीय गुंडों के समान थी, जो किसी अन्य प्रत्याशी को समर्थन देने के स्थान पर खुद ही चुनाव लड़ने की सोचते हैं।

यदि ऐसी कोई योजना थी तो वह सफल नहीं हो सकी क्योंकि अन्ना हजारे के आंदोलन को वैसा जन सहयोग प्राप्त नहीं हो सका, जैसा अरब देशों में हुए आंदोलनों को मिला था। अन्ना हजारे की टीम दिल्ली से बाहर समर्थन प्राप्त करने में असफल रही। मुंबई में भी कुछ आंदोलन शुरू हुए थे लेकिन उन्हें भी पर्याप्त सहयोग प्राप्त नहीं हो सका था और दिल्ली में भी आंदोलन कमजोर होता जा रहा था। देश के अन्य हिस्सों में भी स्थानीय प्रदर्शनों के आह्वान को कोई खास सहयोग नहीं मिला। हालाँकि आंदोलन की जो प्रमुख टीम थी, उसमें ऊर्जा बनी हुई थी और वो समय-समय पर सोशल मीडिया के मंचों में दिखाई देती थी।

‘इकोसिस्टम’ को बहुत जल्द यह आभास हो गया कि उसके द्वारा कॉन्ग्रेस को सत्ता से हटाकर सीधे शासन करने का जो सपना देखा जा रहा है, वो व्यावहारिक नहीं है। हालाँकि उन्होंने उम्मीद नहीं खोई थी और कॉन्ग्रेस को दरकिनार करने की उनकी अभिलाषा ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ के रूप में अस्तित्व में आई, जिसने दिसंबर 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में बढ़िया प्रदर्शन किया। इस सफलता से उन्हें एक और आशा मिली कि 2014 के लोकसभा चुनावों में भी प्रभाव डाल पाएँगे, मगर अंत में उन्हें पता चल गया कि मोदी उनकी सोच से कहीं आगे की चीज हैं।

[‘Sanghi Who Never Went To A Shakha’रूपा पब्लिकेशन के द्वारा प्रकाशित (मार्च 2021) की गई है। इस पुस्तक के लेखक राहुल रोशन हैं जो एक सफल आंत्रप्रेन्योर, मीडिया प्रोफेशनल और वर्तमान में OpIndia डिजिटल समूह के सीईओ हैं]

इस लेख को आप इसके ऑरिजनल रूप में यहाँ पढ़ सकते हैं, जिसका अनुवाद ओम ने किया है।

8 अप्रैल से पहले यूपी की जेल में होगा मुख्तार अंसारी, पंजाब सरकार ने चिट्ठी लिख कहा- ले जाइए

उत्तर प्रदेश का बाहुबली और मऊ से बसपा विधायक मुख्तार अंसारी चंद दिनों में यूपी की जेल में कैद दिखेगा। 2 साल तीन महीने से पंजाब की जेल में बंद मुख्तार अंसारी को यूपी की जेल में शिफ्ट करने की तारीख तय हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब सरकार ने योगी सरकार को पत्र लिखकर उसे हैंडओवर करने की बात कही है। पंजाब के अपर मुख्य सचिव गृह ने यूपी के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी को लिखे पत्र में कहा है कि 8 अप्रैल से पहले उसे यूपी पुलिस के हवाले करने की बात कही है। पत्र में 12 अप्रैल को पंजाब में एक मामले को लेकर होने वाली सुनवाई का भी जिक्र है। इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उसकी पेशी होगी।

चाक-चौबंद हो मुख्तार की सुरक्षा: पंजाब सरकार

बताया जा रहा है कि मुख्तार अंसारी को पंजाब की रोपड़ जेल से यूपी की बांदा जेल में शिफ्ट किया जाएगा। इसको लेकर पंजाब सरकार ने पत्र में लिखा है कि मुख्तार को लाने के लिए विधिवत सुरक्षा और मेडिकल व्यवस्थाएँ हों। साथ ही शिफ्टिंग के लिए वाहन का बंदोबस्त करते वक्त अंसारी की मेडिकल रिपोर्ट्स को भी ध्यान में रखा जाए।

47 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज

रिपोर्ट्स के मुताबिक, माफिया मुख्तार अंसारी पर 47 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसको लेकर उसे यूपी की कई अदालतों में पेश होना है। लेकिन वह अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए काफी दिनों से पंजाब की जेल में बंद है। बताया जाता है कि योगी सरकार ने अकेले मऊ में ही मुख्तार अंसारी के करीबियों के 22 करोड़ से अधिक की संपत्ति पर बुलडोजर चलाने का काम किया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रास्ता हुआ था साफ

सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च को बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश भेजने का आदेश दिया था। कोर्ट ने मुख्तार की कस्टडी ट्रांसफर याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि वह यूपी की किस जेल में रहेगा, यह प्रयागराज MP-MLA कोर्ट तय करेगी।

बता दें कि मुख्तार अंसारी के खिलाफ पंजाब के एक कारोबारी ने रूपनगर में रंगदारी का मामला दर्ज कराया था, जिसके बाद पंजाब पुलिस उसे जनवरी 2019 को बांदा जेल रूपनगर थाने ले आई थी। वहाँ उसे कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ से कोर्ट ने मुख्तार को रोपड़ जेल भेजने के आदेश दिए थे।

फेक न्यूज फैलाओ-अवॉर्ड पाओ: राजदीप सरदेसाई की झोली में ‘बेस्ट’ पुरस्कार, 26 जनवरी को कहा था- पुलिस की गोली से मरा किसान

अब फेक न्यूज फैलाने वालों को भी पत्रकारिता के अवॉर्ड मिल रहे हैं। हम बात कर रहे हैं इंडिया टुडे के राजदीप सरदेसाई की, जिन्हें पत्रकारिता के कई अवॉर्ड मिले हैं। शनिवार (3 अप्रैल 2021) को ENBA अवॉर्ड्स में सरदेसाई को विभिन्न कैटेगरी में अवॉर्ड दिए गए गए। इनमें ‘बेस्ट न्यूज कवरेज’ का अवॉर्ड भी शामिल है। यह अवॉर्ड उन्हें तब मिला है जब उन पर इसी 26 जनवरी को दिल्ली में हिंसा के दौरान फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगा था और उन्हें कुछ समय के लिए इंडिया टुडे ने सस्पेंड भी किया था।

राजदीप सरदेसाई को बेस्ट ऐंकर, बेस्ट न्यूज कवरेज (राष्ट्रीय), बेस्ट टॉक शो, बेस्ट न्यूज कवरेज (अंतर्राष्ट्रीय) और बेस्ट बिजनेस प्रोग्राम के लिए अवॉर्ड दिए गए हैं। ज्ञात हो कि 26 जनवरी की हिंसा के दौरान ट्रैक्टर पलटने से एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी। उसकी मौत के संबंध में फेक न्यूज फैलाने के आरोप में सरदेसाई को एक महीने के लिए बर्खास्त किया गया था। सरदेसाई ने ट्वीट करके अवॉर्ड मिलने की खुशी जाहिर की और आलोचना करने वालों का धन्यवाद भी दिया। उन्होंने अपने ‘कार्य’ को निष्काम कर्म भी कहा।

26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान एक प्रदर्शनकारी नवरीत सिंह पुलिस बैरिकेड तोड़ने का प्रयास कर रहा था। इसी प्रयास में उसका ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस पर सरदेसाई ने ट्वीट किया कि नवरीत की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है। हालाँकि पुलिस ने घटना से संबंधित एक वीडियो जारी किया जिसमें यह देखा गया कि पुलिस बैरिकेड को तोड़ने के प्रयास में नवरीत का ट्रैक्टर बुरी तरह से पलट गया। सच्चाई सामने आने के बाद सरदेसाई ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया था।  

राजदीप सरदेसाई के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इससे पहले राष्ट्रपति भवन में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की तस्वीर लगाए जाने के बाद भी सरदेसाई तस्वीर के विषय में फेक न्यूज फैलाते पकड़े गए थे। लगभग एक महीने की बर्खास्तगी के बाद 23 फरवरी को सरदेसाई पुनः इंडिया टुडे में अपने कार्य पर लौटे थे।