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मुफ्त आईफोन, मिनी हेलीकॉप्टर, बर्फ का पहाड़, रॉकेट लॉन्च पैड और चंद्रमा की सैर: कुछ ऐसे हैं इस प्रत्याशी के चुनावी वादे

चुनाव जीतने के लिए प्रत्याशी कई बड़े वादे करते हैं। पार्टियाँ तो अपना घोषणापत्र बनाती ही हैं साथ ही प्रत्याशी भी अपने स्तर पर कुछ घोषणाएं करते हैं। ऐसे ही एक प्रत्याशी का मैनिफेस्टो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक प्रत्याशी ने जीतने पर मुफ़्त आईफोन, एक मिनी हेलीकॉप्टर, प्रत्येक घर को सालाना एक करोड़ रुपए, शादियों में सोने के गहने, तीन मंजिला मकान और चंद्रमा की यात्रा कराने का वादा किया है।

थुलम सरवनन दक्षिण मदुरै विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। उनके द्वारा किए गए वादे न केवल उनके क्षेत्र अपितु पूरे भारत का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।

उन्होंने गृहणियों को उनका कार्यभार कम करने के लिए एक-एक रोबोट मुहैया कराने की बात की है। साथ ही क्षेत्र को ठंडा रखने के लिए एक 300 फुट ऊँचा बर्फ का पहाड़ स्थापित करने और प्रत्येक परिवार को एक बोट देने की योजना भी सरवनन के मैनिफेस्टो में है।

सरवनन यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपने क्षेत्र में चुनाव जीतने के बाद एक अंतरिक्ष शोध केंद्र एवं रॉकेट लॉन्च पैड स्थापित करने का वादा भी किया है।

आर्थिक स्थिति नहीं है सही :

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरवनन अपने गरीब माता-पिता के साथ रहते हैं। नामांकन भरने के लिए उन्होंने 20,000 रुपए उधार लिए हैं। उनके मित्र और रिश्तेदार उनकी सहायता कर रहे हैं। उन्होंने अपना चुनाव चिन्ह कचरे का डिब्बा रखा है।

उनके मैनिफेस्टो को देखकर एक बार कोई भी व्यक्ति इसे मजाक मान सकता है किन्तु उनका यह घोषणापत्र एकदम सही है। असल में सरवनन का उद्देश्य लोगों में जागरुकता लाना है। उनका मैनिफेस्टो वर्तमान राजनैतिक परिस्थितियों पर व्यंग्य है। सरवनन का कहना है कि जिस प्रकार राजनेता, जनता को तरह-तरह के लालच दे रहे हैं, उससे राजनीति दूषित हो रही है। चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए ऐसे लालच दिए जाते हैं जिन्हें पूरा करना बहुत मुश्किल होता है। इसी लालच के कारण मतदाता सही नेता का चुनाव नहीं कर पाते।

सरवनन ने कहा कि उनका उद्देश्य ही है कि जनता में जागरुकता आए। वे भले ही चुनाव जीतने में असफल रहेंगे किन्तु उनका संदेश सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित हो रहा है, यही उनकी जीत है। आपको बता दें कि तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 6 अप्रैल को चुनाव का आयोजन किया जाएगा। चुनाव परिणाम 2 मई को जारी किए जाएँगे।

‘हम 30% इकट्ठा हो जाएँ तो बना सकते हैं 4-4 पाकिस्तान, फिर कहाँ जाएँगे 70% वाले?’ : TMC नेता शाह आलम

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर हर पार्टी अपने प्रचार-प्रसार में जुटी है। इस दौरान आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। इसी कड़ी में अब तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शेख आलम ने विवादित बयान दे डाला है। उन्होंने समुदाय विशेष के लोगों को भड़काते हुए कहा है कि यदि हम 30% लोग इकट्ठा हो जाएँ तो 4-4 पाकिस्तान बन सकते हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शेख आलम ने भड़काऊ बयान देते हुए कहा, “हम जो अल्पसंख्यक लोग 30 प्रतिशत हैं और वो 70 प्रतिशत हैं? अगर पूरे भारतवर्ष में हम 30 प्रतिशत लोग एकत्र हो जाएँ तो हम 4-4 पाकिस्तान बना सकते हैं? उसके बाद कहाँ जाएँगे ये 70 प्रतिशत वाले लोग?”

आलम के इस बयान के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस व पार्टी के नेताओं की आलोचना शुरू हो गई है। भाजपा केंद्रीय सह प्रभारी अमित मालवीय ने तो इसे सुनने के बाद ट्वीट में लिखा, “बीरभूम के नानूर के बासा पाड़ा में टीएमसी नेता शेख आलम ने एक भाषण देते हुए कहा, अगर भारत में 30 प्रतिशत मुस्लिम एक साथ आते हैं तो 4 पाकिस्तान बन सकते हैं… वह स्पष्ट रूप से ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा रखते हैं…तो क्या वह इस पद का समर्थन करती हैं? क्या हम ऐसा बंगाल चाहते हैं?”

बता दें कि बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस पर पहले तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अब खुले तौर पर देश को तोड़ने वाले बयान सुनने के बाद यूजर्स का कहना है कि हमारे सेकुलर देश की यही सच्चाई है। ऐसी ही लोगों के कारण भारतीय नागरिक किसी सेकुलर पार्टी को वोट नहीं देना चाहता।

उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी टीएमसी नेता के कारण पाकिस्तान शब्द चर्चा में आया था। तब, 5वें फेज के मतदान से कुछ ही घंटों पहले ममता बनर्जी के मंत्री फिरहाद हाकिम ने गार्डन रीच इलाके को मिनी पाकिस्तान करार दे दिया था। उनके इस बयान के बाद काफी बवाल हुआ था।

हाकिम ने पाकिस्तान के डॉन अखबार से बातचीत में इलाके को मिनी पाकिस्तान कहा था। उस समय डॉन की लीहा हामिद सिद्दिकी गार्डन रीच इलाके में हाकिम की चुनावी रैली में गई थीं। इस दौरान बंगाल के शहरी विकास मंत्री हाकिम ने उनसे कहा, “प्लीज मेरे साथ आइए और मैं आपको कोलकाता के मिनी पाकिस्तान में ले चलूँगा।” रिपोर्टर सिद्दिकी ने इसी बयान के बाद ‘कोलकाता का मिनी पाकिस्तान’ हेडिंग से खबर की थी, जिसे डॉन के ऑनलाइन एडिशन में प्रकाशित किया गया था और हजारों लोगों ने फेसबुक पर शेयर भी किया था।

ननों के यौन शोषण और ईसाइयों संग लव जिहाद पर चुप्पी, पर पूछताछ से उखड़े राहुल गॉंधी: केरल में कॉन्ग्रेस दो नावों पर सवार

भारत के विपक्षी दलों की खासियत ये है कि जब पालघर में दो साधुओं की भीड़ पीट-पीट कर हत्या कर देती है तो वे चुप रहते हैं। लेकिन जब किसी आसिफ को दो थप्पड़ पड़ जाते हैं तो ये उसे कई गुना बड़ा मुद्दा बना देते हैं। पादरी पर लगे बलात्कार के आरोप पर वे शांत रहते हैं, लेकिन ननों से मामूली पूछताछ होते ही देश खतरे में आने की बातें करने लगते हैं।

2 ननों से पूछताछ पर इतना क्यों भड़क गए राहुल गाँधी?

झाँसी रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार (मार्च 19, 2021) को 4 ईसाई महिलाओं को ट्रेन से उतारा गया, जिनमें 2 नन थीं। कुछ लोगों को शक था कि ये महिलाएँ मानव तस्करी कर रही हैं, इसीलिए उन्होंने शिकायत की थी। रेलवे ने बस पूछताछ भर की और जब पुष्टि हुई कि ऐसा कुछ नहीं था तो जाने दिया। कंजीराप्पल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह भी चुके हैं कि अगर कोई प्रशासनिक गड़बड़ी हुई होगी तो कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन, उससे पहले ही इस पर राजनीति शुरू हो चुकी थी। जब कहीं कोई अपराध होता है तो एक मामले में दर्जनों लोगों से पूछताछ होती है, जिनमें आरोपित और गवाह से लेकर कई ऐसे भी होते हैं जिनसे सिर्फ जानकारी ली जाती है। किसी से पूछताछ का ये अर्थ कतई नहीं है कि वो अपराधी ही है। लेकिन, असली मुद्दा तो ईसाई वोटों का है, जिसके लिए केरल में राहुल गाँधी कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।

राहुल गाँधी ने इस पर एक के बाद एक दो ट्वीट्स किए। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा कि यूपी में केरल की ननों पर ‘हमला’ संघ परिवार के ‘घृणित प्रोपेगेंडा’ का हिस्सा है, जिसके तहत एक समुदाय को दूसरे के सामने खड़ा कर अल्पसंख्यकों को कुचला जाता है। उन्होंने कहा कि ये देश के लिए कड़े कदम उठा कर ऐसी विभाजनकारी ताकतों को परास्त करने का समय है।

कुछ देर बाद उनका एक और ट्वीट आया। इसमें राहुल गाँधी ने लिखा, “मेरा मानना है कि RSS व सम्बंधित संगठन को संघ परिवार कहना सही नहीं। परिवार में महिलाएँ होती हैं, बुजुर्गों के लिए सम्मान होता, करुणा और स्नेह की भावना होती है- जो RSS में नहीं है। अब RSS को संघ परिवार नहीं कहूँगा!”

ये वही राहुल गाँधी हैं जिन्होंने हाल ही में केरल में कहा था कि वे महिलाओं को एक ‘रहस्य’ बताना चाहते हैं कि उन्हें कोई पुरुष नहीं बताएगा – वो पुरुषों से बेहतर हैं।

पालघर पर चुप रहने वाले राहुल गाँधी ने ननों से पूछताछ होने पर मचा दिया हंगामा

ये अलग बात है कि केरल कॉन्ग्रेस की एक बड़ी नेता KC रोसक्कुट्टी ने पार्टी में महिलाओं के साथ ठीक व्यवहार न होने के कारण इस्तीफा देकर LDF का दामन थाम लिया। वो केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी की उपाध्यक्ष होने के साथ-साथ पूर्व विधायक भी हैं। लेकिन, महिलाओं के लिए बात-बात पर अच्छी-अच्छी बातें करने वाले राहुल गाँधी उस ‘लव जिहाद’ पर क्यों कुछ नहीं बोलते, जिससे केरल के ईसाई परेशान हैं?

केरल में ईसाई वोटों पर है सभी दलों की नजर

सबसे पहले आँकड़ों की बात कर लेते हैं। 2011 की जनगणना की बात करें तो केरल में हिन्दुओं की जनसंख्या 54.72% है, जबकि उसके बाद मुस्लिमों (26.56%) और फिर ईसाइयों (18.38%) का नंबर आता है। यानी, वहाँ चुनावों में ईसाई वही हैसियत रखते हैं जितनी भारत के कई राज्यों में मुस्लिम। भारत के कई राज्यों की तरह मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति यहाँ भी अपनाई जाती है, लेकिन ईसाइयों को भी खुश रखने की कोशिश होती है।

तभी केरल में जैसे ही ननों से पूछताछ की खबर आई, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने केंद्र सरकार को पत्र लिख कर विरोध दर्ज कराया। केंद्रीय केरल में ईसाई जनसंख्या ज्यादा है। एर्नाकुलम, कोट्टायम, इड्डुक्की और पथानामथिट्टा की 33 सीटों पर उम्मीदवारों की हार-जीत के लिए ईसाई वोट अहम भूमिका निभाते हैं। कॉन्ग्रेस शुरू से इनका वोट पाती रही है, लेकिन इस बार उसे डर है कि कहीं LDF या भाजपा उसे अपनी तरफ न खींच ले।

भाजपा इसलिए, क्योंकि दिसंबर 2020 के अंतिम हफ्ते में केरल के कई चर्चों के पादरियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल कर शिकायत की थी कि अल्पसंख्यकों के लिए जो फंड्स भेजे जाते हैं, उनका उन्हें उचित हिस्सा नहीं मिल पाता। केरल में ऑर्थोडॉक्स-जैकोबाइट ईसाई समूहों के बीच लड़ाई भी कई वर्षों से चलती रही है। उनका आरोप है कि उन फंड्स में से मात्र 20% उन पर खर्च होते हैं।

ईसाइयों की माँग है जनसंख्या के हिसाब से उन्हें उन फंड्स का 41% हिस्सा मिलना चाहिए। ऑर्थोडॉक्स-जैकोबाइट वाला मामला तो कोर्ट में भी चल रहा है। हाल के स्थानीय चुनावों में जिस तरह से LDF का प्रदर्शन रहा है, ऐसा लगा कि ईसाई वोट्स कॉन्ग्रेस से छिटक गए हैं। मार्च 2021 में ही जैकोबाइट चर्चों के कई प्रतिनिधि अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुँचे थे, लेकिन ये मुलाकात नहीं हो पाई। 2017 में भाजपा अध्यक्ष रहते शाह ने केरल दौरे में कई पादरियों से मुलाकात की थी।

मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन, ईसाइयों के लिए ट्ववीट: 2 नाव वाले राहुल

केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने भी दोनों ईसाई पंथों के बीच समझौता कराया, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकल पाया। केरल कॉन्ग्रेस (M) राज्य में ईसाइयों की सबसे बड़ी पार्टी हुआ करती थी, जो अब टूट चुकी है। उनमें से एक गुट UDF में चला में चला गया है तो एक LDF में। भाजपा ने ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून का वादा किया है। केरल में ‘लव जिहाद’ की घटनाओं पर अल्पसंख्यक आयोग ने भी चिंता जताई थी।

कॉन्ग्रेस पार्टी मुस्लिमों और ईसाइयों को एक साथ रिझाना चाहती है। कट्टरवादी इस्लामी दल ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML)’ कॉन्ग्रेस के साथ है और वायनाड में राहुल गाँधी की जीत में पार्टी की बड़ी भूमिका है। ऐसे में ईसाई ननों के लिए ट्वीट करने वाले राहुल गाँधी ईसाई लड़कियों को फाँसने वाले ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध कुछ बोलेंगे, सपने में भी ऐसी आशा नहीं की जा सकती। राहुल IUML का साथ चाहते हैं और ईसाईयों का समर्थन भी।

अगर बात ईसाई महिलाओं का हितैषी बनने की ही है, तो ‘लव जिहाद’ तो दूर की बात, राहुल गाँधी ने ननों का यौन शोषण के आरोपित फ्रैंको मुलक्कल सहित अन्य पादरियों के खिलाफ आज तक ट्वीट नहीं किया। केरल में ननों के यौन शोषण की बातें कई बार सामने आई हैं, एक नन ने किताब लिख कर भी इसे उठाया था। लेकिन, वोट बैंक तो पादरियों से आता है। इसलिए, कॉन्ग्रेस उनके खिलाफ नहीं जा सकती।

‘हम हिंदू नरमी दिखा थक चुके हैं… बहुत हुआ’: ऑक्सफोर्ड के हिंदूफोबिक अभिजीत सरकार पर कार्रवाई को लेकर कैंपेन

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के हिंदूफोबिक फैकल्टी मेंबर अभिजीत सरकार के खिलाफ़ सोशल मीडिया पर अभियान शुरू किया गया है। इसके जरिए नेटिजन्स अभिजीत के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग यूनिवर्सिटी से कर रहे हैं। ब्रिटेन के हिंदुओं ने एक ऑनलाइन पिटिशन साइन करवाने की भी शुरुआत की है। इस पर खबर लिखे जाने तक 29,078 यूजर हस्ताक्षर कर चुके थे।

पिटिशन में अभिजीत के तमाम उन ट्विट्स का जिक्र है जिनमें उसने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से हिंदुओं को निशाना बनाया है। कैंपने से जुड़े लोगों का कहना है कि जब तक यूनिवर्सिटी कोई एक्शन नहीं लेती है तब तक वह शांत नहीं बैठेंगे। यूनिवर्सिटी की बिना किसी देरी के सरकार के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

ब्रितानी हिंदुओं द्वारा उठाई गई माँग में हिंदुओं की सहिष्णुता पर बात रखी गई है। इसमें लिखा है,

“हम प्रेम और शांति से रहने वाले लोग हैं जिन्होंने गाँधी के शांति विचार, योगा, आध्यात्म,सचेतन जैसी चीजें विश्व को दीं। हमने सदियों तक आतताइयों के आक्रमण के बावजूद किसी को तलवार और मिशनरी के बल पर धर्मपरिवर्तन करने को नहीं कहा। हमने किसी को न डराया, न धमकाया। हिंदुत्व एक धर्म और आस्था से ज्यादा जीने का मार्ग है। अब यही मार्ग अभिजीत सरकार जैसे लोगों के कारण खतरे में है जो ये भूल गए हैं कि उनकी बुद्धिजीवियों जैसी उदारता और स्वतंत्र सोच का कितना श्रेय उनके बंगाली (हिंदू) माता-पिता को जाता है। हम हिंदू समुदाय के लोग नरमी दिखा थक चुके हैं। कोई भी हम पर निशाना साध लेता है। हम इस तरह के नस्लीय हमलों को नहीं झेलेंगे। अब बहुत हुआ। सरकार को ये नफरतें पाकिस्तान के मुस्लिमों के ख़िलाफ़ दिखानी चाहिए, तब हम देखेंगे कि कैसे वह फतवों का सामना करता है।”

बता दें अभिजीत के कुछ विवादित ट्वीट्स और लेखों को लेकर हिंदुओं की माँग है कि उसके विरुद्ध कार्रवाई हो। यूनिवर्सिटी उससे सारे अधिकार छीनकर निलंबित करे। उसके ख़िलाफ़ जाँच हो और जाँच पूरी तक उसे कोई ड्यूटी न दी जाए। इसके साथ यूनिवर्सिटी उन ट्रोलर्स की भी पहचान करे जो उनके स्टाफ का हिस्सा है और हिंदुओं खासकर ब्रितानी हिंदुओं के ख़िलाफ़ नफरत फैला रहे हैं।

हिंदुओं द्वारा यूनिवर्सिटी को लिखे पत्र में प्रशासन को आगाह किया गया है कि ऐसे सदस्यों की वजह से पूरी यूनिवर्सिटी बदनाम हो रही है। पत्र के मुताबिक सरकार पॉलिटिकल मोटिवेटिड आर्टिकल में अपनी घटिया बातें रखता है और सोशल मीडिया पर भी उसकी घृणा साफ दिखती है। पत्र में सरकार की उस थीसिस पर भी सवाल उठाए गए हैं जिसमें उसने बंगाल में पड़े सूखे के समय ‘जाति आयामों’ पर काम किया है। पत्र के मुताबिक लोग जानना चाहते हैं कि ब्रिटिश काल में हुई इस घटना पर सरकार ने 100 साल बाद काम करना क्यों चुना, वो भी जाति के एंगल से।

पत्र में लिखा गया है कि कैसे अभिजीत न केवल भारतीय सरकार पर, बल्कि हिंदू और हिंदू समाज पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते आए हैं। एक आर्टिकल में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को हिंदू महासभा और भक्तों के डैडी लिखा था। 

इसके बाद 13 मर्च 2021 को ही एक पोस्ट में बताया था कि हिंदुत्व के ठेकेदार मुस्लिम लड़के को मार रहे हैं। 2 फरवरी को सरकार ने दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन पर ट्वीट किया था। ब्रितानी हिंदुओं ने इनका हवाला देते हुए यूनिवर्सिटी से सवाल किया है कि उनके स्टाफ का ये कौन सा तरीका है? क्या ऐसे स्टाफ को झेलने का मतलब ये समझ लिया जाए कि विश्विद्यालय भी भाजपा विरोधी विचारों को बढ़ावा देता है।

एक अन्य विवादित ट्वीट का पत्र में जिक्र है जिसे सरकार द्वारा अब डिलीट किया जा चुका है, उस ट्वीट में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ किसी को मिलिट्री स्ट्राइक करने की बात कही थी। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अस्पताल में भर्ती होने पर भी सरकार ने भारतीय नेता और उनके समर्थकों का मजाक उड़ाया था। 25 अप्रैल 2020 के एक ट्वीट में उन्होंने लोकतांत्रिक भारत को ब्रिटिश राज कहा था।

बता दें कि अभिजीत सरकार पिछले दिनों रश्मि सामंत केस के बाद चर्चा में आए थे। उन्होंने पिछले दिनों एक ऐसे हिंदू विरोधी अभियान का नेतृत्व किया जिसके कारण स्टूडेंट यूनियन की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष रश्मि को इस्तीफा देना पड़ा था। इस पत्र में रश्मि के साथ हुए नस्लीय भेदभाव का भी जिक्र है। बताया गया है कि कैसे सरकार ने रश्मि के माता-पिता की फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी थी।

सरकार ने अपने एक ट्वीट में ये तक कहा था कि देसी हिंदू 1857 के बाद से एक इंच आगे नहीं बढ़े हैं। उसने सरस्वती पूजा के अवसर पर लिखा था कि कैसे वह बचपन से ही तमाम सरस्वती प्रतिमाएँ तोड़ा करता था।

गौरतलब है कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी को लिखे गए इस पत्र में अभिजीत सरकार के तमाम ट्विट्स का जिक्र है जिनसे पता चलता है कि वह लंबे समय से हिंदू विरोधी और भारत विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने में फ्रंट पर रहा। उसने न हिंदुओं के ख़िलाफ़ घृणा दिखाई बल्कि भारत के विरुद्ध बोला और कंगना रनौत व पायल घोष जैसी स्त्रियों के प्रति अपनी कुंठा जाहिर की जिन्होंने बहादुरी से बॉलीवुड के काले सच को उजागर किया था।

बनारस की अड़भंगी चिता-भस्म होली: 11 तस्वीरों और 5 वीडियो से समझिए काशी की परंपरा, जहाँ मृत्यु भी है उत्सव

बनारस की होली भी बनारस के मिजाज के अनुसार ही अड़भंगी और निराली है। यह दुनिया का इकलौता शहर जहाँ अबीर, गुलाल के अलावा धधकती चिताओं के बीच चिता-भस्म से होली खेली जाती है। घाट से लेकर गलियों तक आती-जाती चिताओं के साथ मृत्यु को भी उत्सव का स्वरुप मानते हुए होली के हुड़दंग का हर रंग मनमोहक होता है।

महादेव की नगरी काशी की होली भी अड़भंगी शिव की तरह ही निराली है। काशी में रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन महाश्मशान में होली खेली जाती है। यह दुनिया की सबसे अनूठी होली है। महादेव के भक्त, अनुयाई, शैव, शाक्त, अवघड़ सब भूतभावन भगवान के साथ इस होली में शामिल होते हैं।

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रंगभरी एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष रंगभरी एकादशी बुधवार (मार्च 24, 2021) थी और महाश्मशान की होली गुरुवार (मार्च 25, 2021) को महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर मनाई जा रही है।

ऐसी मान्यता है कि जब भगवान शिव रंगभरी एकादशी के दिन माता पार्वती और पुत्र गणेश के साथ गौना कराकर काशी लौटते हैं तो उनका स्वागत सभी लोकों के लोग करते हैं लेकिन उसमें शिव के भूत-पिशाच भक्त गण और दृश्य-अदृश्य आत्माएँ मौजूद नहीं होतीं।

इसलिए, रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन महाश्मशान में महादेव अपने भक्तों के साथ भस्म से होली खेलते हैं। यह भस्म कोई साधारण भस्म नहीं होती, बल्कि इंसान के शव जलने के बाद पैदा होने वाली राख होती है।

बनारस में कहा जाता है कि महादेव कितनी भी मस्ती में क्यों न हों लेकिन अपने दृश्य-अदृश्य उन गणों को उत्सव में बिसरा दें यह हो नहीं सकता। वे गण जो थोड़े डरावने हैं।

वही जो बिना बुलाए जब शिव बारात में सब चलें गए तो द्वारचार में माँ गौरा की माँ ऐसी बारात और बारातियों को देखकर बेहोश हो गई थीं। उनके साथ शिव आज उत्सव मनाते हैं।

इसलिए, कहा जाता है कि गौना में ऐसे भूत-पिचास, अदृश्य आत्माएँ थोड़ी दूरी बना लेती हैं ताकि सब सकुशल संपन्न हो जाए। आज महाश्मशान मणिकर्णिका में ऐसे ही गणों का उत्सव है।

अब अपने उन्हीं गणों के लिए भूतभावन भगवान महादेव गौना के अगले दिन यानी रंगभरी एकादशी के एक दिन बाद महाश्मशान मणिकर्णिका पर स्वयं अपने दृश्य-अदृश्य गणों के साथ उत्सव मनाने अर्थात होली खेलने आते हैं।

भारतीय सनातन संस्कृति की इसी परंपरा पर बात करते हुए पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र बताते हैं कि बनारस की होली भी बनारस के मिजाज के अनुसार ही अड़भंगी है। 

वह कुछ याद करते हुए गुनगुनाने लगते हैं कि खेले मसाने में होरी दिगंबर, खेले मसाने में होरी, भूत पिशाच बटोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी…। वह कहते हैं कि लखि सुंदर फागुनी छटा के, मन से रंग-गुलाल हटा के चिता भस्म भर झोरी… दिगंबर खेले मसाने में होरी….।

आखिर ऐसा दृश्य कहाँ देखने को मिलेगा कि भगवान शिव के गण अपने झोली में चिता भस्म की राख भरकर मन भर होली खेलकर तृप्त हो जाते हैं। उनका कहना है कि काशी की होली में राग और विराग दोनों नजर आते हैं।

पंडित छन्नूलाल मिश्र ठहरकर कुछ समझाते हुए आगे गुनगुनाते लगते हैं कि गोप न गोपी श्याम न राधा, ना कोई रोक ना कवनो बाधा, ना साजन ना गोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी…।

भावविभोर हो वह कह उठते हैं कि शिव की नगरी काशी की होली की बात ही निराली है। जब महादेव महाश्मशान में उतरते हैं तो भूतनाथ की मंगल-होरी, देखि सिहाएं बिरिज के गोरी, धन-धन नाथ अघोरी… दिगंबर खेलैं मसाने में होरी।

काशी मोक्ष की नगरी है और मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं।

लिहाजा यहाँ पर मृत्यु भी उत्सव है और आज चिता की भस्म को उनके गण अबीर और गुलाल की भाँति एक दूसरे पर फेंककर सुख-समृद्धि-वैभव संग शिव की कृपा पाने का मनोरथ करते हैं।

(तस्वीर और वीडियो साभार: डॉ. मुनीश कुमार मिश्रा)

‘मापदंड मनमाने और तर्कहीन’: सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन पर सुप्रीम कोर्ट ने दिए 2 महीने

सेना में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने की प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट ने भेदभावपूर्ण माना है। शॉर्ट सर्विस कमीशन की करीब 650 महिला अधिकारियों की याचिका पर शीर्ष अदालत ने गुरुवार (25 मार्च 2021) को सुनवाई की। अदालत ने कहा कि स्थायी कमीशन के लिए अपनाए गए मूल्यांकन मापदंड ‘मनमाने और तर्कहीन’ हैं।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सेना को इस पर दो महीने के भीतर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए। सेना की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) की मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कई खामी है। इसे पुरुषों द्वारा पुरुषों के लिए तैयार की गई प्रक्रिया बताया।

महिला अधिकारियों ने स्थायी आयोग और संबंधित लाभ को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में कहा गया था कि बबीता पुनिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद मेडिकल फिटनेस की मनमानी सीमा लगाई गई। इसने 5 या 10 साल की सेवा से परे उनकी योग्यता की अनदेखी हुई। अदालत ने इसे मानते हुए कहा कि इसकी वजह से कई बेहतरीन महिला अधिकारी सेना से बाहर हो गई।

गौरतलब है कि फरवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को तीन महीने के भीतर महिलाओं के लिए सेना में स्‍थायी कमीशन का गठन करने के निर्देश दिए थे। उस समय अदालत ने कहा था कि महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। यह फैसला केन्द्र सरकार की उस याचिका पर आया था जिसमें इस संबंध में दिल्ली हाई कोर्ट के मार्च 2010 के फैसले को चुनौती दी गई थी।

केंद्र का तर्क था कि सेना में ‘कमांड पोस्ट’ की जिम्‍मेवारी महिलाओं को नहीं दी जा सकती, क्‍योंकि उनकी शारीरिक क्षमता इसके लायक नहीं और उनपर घरेलू जिम्‍मेदारियाँ भी होती हैं। इन कारणों के साथ केंद्र ने कहा था कि इस पद की चुनौतियों का सामना महिलाएँ नहीं कर सकेंगी। इस पर कोर्ट ने कहा कि कमांड पोस्‍ट पर महिलाओं को आने से रोकना समानता के विरुद्ध है।

‘बंद हो सड़क पर नमाज और माइक से अजान’: झारखंड हाई कोर्ट में PIL, गोवा लगा चुका है बैन

झारखंड हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर सड़क पर नमाज पढ़ने और माइक से अजान देने पर रोक लगाने की माँग की गई है। याचिकाकर्ता बीजेपी नेता अनुरंजन अशोक हैं। उन्होंने कहा है कि इस याचिका का किसी मजहब से लेना-देना नहीं है, बल्कि ध्वनि प्रदूषण जैसी समस्या से लड़ने के लिए यह जरूरी है।

अशोक ने कहा है कि लाउडस्पीकर की आवाज 10 डेसीबल की सीमा के भीतर ही रहनी चाहिए। लेकिन मस्जिदों से इसका लगातार उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने पिछले वर्ष नवंबर में झारखंड सरकार से इस दिशा में कारवाई की माँग की थी। सरकार की उदासीनता के बाद अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

याचिका में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने पर भी रोक लगाने की माँग की गई है। याचिकाकर्ता ने है कहा कि एक कानून होना चाहिए जिसके तहत नमाज सिर्फ मस्जिद में पढ़ी जाए। हाल ही में झारखंड के हजारीबाग में सड़क पर बच्चों के नमाज पढ़ने की तस्वीरें वायरल हुईं थी।

गौरतलब है कि हाल ही में गोवा में लाउडस्पीकर पर अजान देने पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध भी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की याचिका पर सुनवाई के बाद लगाया गया। वहीं कर्नाटक में राज्य वक्फ बोर्ड ने रात 10 बजे से सुबह 5 बजे के बीच मस्जिदों और दरगाहों पर लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है। कुछ महीने पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अजान इस्लाम का अभिन्न अंग हो सकता है, किन्तु लाउडस्पीकर अथवा किसी तेज ध्वनि वाले यंत्र से अजान पढ़ना मजहब का अभिन्न अंग नहीं माना जा सकता है।

हाल ही में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर संगीता श्रीवास्तव द्वारा इस संबंध में शिकायत की थी। इस पर संज्ञान लेते हुए प्रयागराज रेंज के आईजी केपी सिंह ने चार जिलों के कलेक्टरों और पुलिस प्रमुखों को यह उच्च न्यायालय का आदेश लागू करने को कहा था। इसके बाद उत्तरप्रदेश सरकार के मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला ने बलिया जिला न्यायाधीश को पत्र लिखकर मस्जिदों के लाउडस्पीकर की आवाज को कोर्ट के आदेशानुसार नियंत्रित करने की माँग की थी।

‘मुझे विभिन्न लोगों को लाखों रुपए देने को कहा, जेल भेजने की धमकी दी’: मुंबई के बिल्डर ने सचिन वाजे के खिलाफ की शिकायत

मुंबई के एक बिल्डर ने सचिन वाजे के खिलाफ रंगदारी का मामला दर्ज कराया है। वाजे और उसके साथियों पर डरा-धमका कर रुपए वसूलने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में मुंबई पुलिस कमिश्नर और महाराष्ट्र के DGP को भी शिकायत पत्र भेजा है।

बिल्डर ने अपने पत्र में महाराष्ट्र सरकार के नेताओं और दलालों के बीच ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए चल रहे नेटवर्क को लेकर भी सवाल उठाया है। बिल्डर ने कहा है कि जब सचिन वाजे को सस्पेंड कर दिया गया है तो उसके द्वारा चलाए जा रहे रंगदारी और भ्रष्टाचार के रैकेट की जाँच होनी चाहिए। उसने बताया है कि वाजे और उसके साथियों ने उसे बार-बार धमकाया और रुपए न देने पर केस करने की धमकी दी।

बिल्डर ने बताया है कि उससे विभिन्न लोगों को लाखों रुपए देने को कहा गया और ऐसा न करने पर विभिन्न मामलों में फँसा कर जेल भेजने की धमकी दी गई। बिल्डर ने बताया कि वो ‘क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU)’ में सचिन वाजे से व्यक्तिगत रूप से मिलने भी गया था। लेकिन उसे नहीं मिलने दिया गया। उससे 5 लाख रुपए की डिमांड की गई। पैसा नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी दी गई।

उसने वाजे के कई साथियों पर भी आरोप लगाए गए हैं। बिल्डर ने यह भी दावा किया है कि उसके पास वाजे के सहयोगियों के कॉल रिकॉर्डस भी हैं, जिन्होंने कथित तौर पर उसे पैसे की डिमांड पूरी नहीं होने पर धमकाया था।

सचिन वाजे के खिलाफ बिल्डर ने की शिकायत

इससे पहले यह बात सामने आई थी कि मुंबई के एक स्वर्ण व्यवसायी के कहने पर मुंबई के 5 स्टार होटल ‘ट्राइडेंट’ में वाजे के लिए 100 दिनों के लिए कमरा बुक कराया गया था। इस कमरे का मात्र 1 दिन का किराया 10,000 रुपए था। इस कमरे का नंबर 1964 है जो 19वीं मंजिल पर स्थित है। एक ट्रेवल एजेंट ने ये कमरा बुक करवाया था। ‘सुशांत सदाशिव खामकार’ नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाकर कमरा बुक किया गया था।

गौरतलब है कि एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी कार रखने के मामले में वाजे एनआईए की हिरासत में है। इस कार के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या में भी उसकी संलिप्तता सामने आई है। वहीं, मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने वाजे को 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दे रखा था।

निकिता तोमर का परिवार झूठा, न लव जिहाद-न धर्मांतरण का दबाव: तौसीफ-रेहान के लिए उमड़ा ‘The Quint’ का प्रेम

प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘The Quint’ ने फरीदाबाद में निकिता तोमर की दिनदहाड़े हुई हत्या के दोषियों के पक्ष में बल्लेबाजी शुरू कर दी है। बुधवार (मार्च 24, 2021) को 5 महीने पहले हुए इस हत्याकांड के आरोपितों तौसीफ और रेहान को फास्टट्रैक कोर्ट ने दोषी पाया था। इन्हें 26 मार्च को सजा सुनाई जाएगी। एक अन्य आरोपित अजरुद्दीन को कोर्ट ने बरी कर दिया था। उस पर हथियार सप्लाई करने का आरोप था।

निकिता तोमर के परिवार ने कई बार कहा है कि उस पर इस्लाम अपनाने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। परिवार ने फाँसी की माँग भी की है। लेकिन, ‘The Quint’ जैसे वेबसाइटों ने इस पर प्रोपेगेंडा शुरू कर दिया है। मुस्लिमों द्वारा किए गए अपराध को ढकने के लिए कुख्यात पोर्टल का कहना है कि चूँकि आरोपित मुस्लिम थे, इसलिए निकिता के परिवार ने इसे ‘लव जिहाद’ बताया। साथ ही दक्षिणपंथी वेबसाइटों को भी दोषी ठहराया है।

याद कीजिए जब दिल्ली में एक किसान प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर पर स्टंट करते हुए मरा था और राजदीप के पीछे ‘हुआँ-हुआँ’ करते हुए तमाम मीडिया पोर्टलों ने इसके लिए दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि वो पुलिस की गोली से मरा। सब कुछ साफ़-साफ़ वीडियो में दिख रहा था, फिर भी उसके दूर के रिश्तेदारों के बयान के आधार पर झूठे दावे किए गए।

अब यही पोर्टल निकिता तोमर के परिवार पर सवाल खड़े कर रहे हैं, जो कई महीनों से आरोपितों के अत्याचार को झेल रहे थे और एक बार अपहरण के मामले में आरोपितों के परिजनों के आग्रह पर समझौता भी हुआ था। ‘The Quint’ का कहना है कि तौसीफ निकिता के पीछा पड़ा था और स्कूल के समय से ही उसके प्रति आकर्षित था, इसलिए निकिता ने जब उसका प्रस्ताव ठुकराया तो उसने हत्या कर दी।

निकिता तोमर को लेकर ‘The Quint’ का प्रोपेगेंडा

आखिर ‘लव जिहाद’ ये नहीं है तो फिर क्या है? ऐसे मामलों में मुस्लिमों द्वारा इस्लामी धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया जाता है, ये डिफ़ॉल्ट है। ये अंडरस्टूड होता है। क्या वामपंथी पोर्टल को पुलिस और मृतक के परिजनों से ज्यादा पता है? इस खबर में आरोप लगाया गया है कि करणी सेना और देव सेना जैसे संगठनों द्वारा इसे ‘लव जिहाद’ का मुद्दा बनाए जाने के बाद परिवार ने भी ऐसा कहना शुरू कर दिया।

साथ ही अपनी ही अक्टूबर 2020 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि निकिता तोमर के घर के बाहर दक्षिणपंथी इसे कम्यूनल एंगल दे रहे थे। उसके कहना का अर्थ है कि तौसीफ ने भले ही निकिता को धर्मांतरण की धमकी दी हो, लेकिन ये कम्यूनल नहीं है। हाँ, अगर कोई इस चीज का जिक्र करते हुए इसके खिलाफ आवाज उठाता है तो वो कम्यूनल है। आरोपित स्थानीय कॉन्ग्रेस नेताओं के प्रभावशाली परिवार से आता है।

‘The Quint’ सब कुछ मान सकता है कि हत्याएँ होती हैं, अपहरण होते हैं और प्यार में ठुकराने पर बदला लिया जाता है, लेकिन एक अपराध ऐसा है जिसका उसके लिए इस धरती पर कोई अस्तित्व ही नहीं है। जबरन इस्लामी धर्मांतरण नाम की कोई चीज उसके लिए है ही नहीं। निकिता तोमर के पिता ने स्पष्ट कहा था कि अगर ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध क़ानून होता तो शायद उनकी बेटी की जान नहीं जाती।

वहीं निकिता तोमर के भाई ने कहा था कि अगर हिन्दू की बेटी है तो क्या कोई कुछ भी करेगा, अगर वही मुस्लिम की बेटी होती तो सारा प्रशासन यहाँ इकट्ठा हो जाता। साथ ही सवाल दागा था कि इससे पहले पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, क्या वो उनकी बहन के मरने का इंतजार कर रहे थे? आरोप है कि तौसीफ ने बार-बार निकिता को यही कहा, ‘मुस्लिम बन जा हम निकाह कर लेंगे’, लेकिन लड़की के न झुकने पर उसने हत्या कर दी।

आखिर क्यों ‘The Quint’ हत्या और अपहरण को छोड़ कर अवैध धर्मांतरण वाले आरोप के पीछे ही पड़ा हुआ है? ऐसे ही मेवात में उसके पत्रकारों ने घूम कर पाया कि वहाँ ‘लव जिहाद’ का कोई केस नहीं है और सब कुछ शांत है। वहाँ उसके पत्रकार पेड़ की छाँव में खड़े हुए, सड़क पर चहलकदमी की, आसमान निहारा और चाय-नाश्ता कर के पाया कि ‘लव जिहाद’ पीड़ित कहीं दिख ही नहीं रहे हैं। ये है इनके रिपोर्टिंग का तरीका।

तौसीफ और रेहान का बचाव करना तो बहुत छोटी बात है। उन्होंने हजारों निर्दोषों की जान लेने वाले आतंकी संगठन अल-कायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन तक के ‘मानवीय पक्ष’ को दुनिया के सामने लाने की कोशिश की थी। ‘The Quint’ के लिए लादेन एक ‘अच्छा पति और अच्छा पिता’ था। हो सकता है इसके लिए ‘The Quint’ वालों ने ओसामा की पाँचों पत्नियों से बात की हो। आतंकियों का महिमामंडन करने वालों के लिए तौसीफ तो एक अपराधी भर है।

इसी तरह हैदरबाद में एक महिला डॉक्टर के रेप और हत्या के आरोपितों के महिमामंडन का प्रयास भी ‘The Quint’ ने किया था। उसने आरोपितों के परिजनों के इंटरव्यू लेकर तरह-तरह के आरोप लगाए थे। आज यही मीडिया संस्थान निकिता के परिजनों की बात को गलत बता रहा। ‘The Quint’ ने एक बलात्कार और हत्या के आरोपित के परिजनों से बात कर के जाना कि वो अपराध करने के बाद कितना ‘चिंतित और डरा हुआ’ था।

सीधी बात ये है कि ‘The Quint’ जैसे संस्थान ये पचा ही नहीं पाते कि मुस्लिम अपराध कर सकते हैं, इस्लामी आक्रांता कभी हुआ करते थे या फिर मजहब के नाम पर खून बहाया जाता है। उनकी पहली कोशिश होती है मुस्लिम अपराधी/आतंकी को बचाना। ऐसा न हो पाया तो उसका ‘मानवीय पक्ष’ निकाल कर लाना। ये भी न हो पाया तो अंत में ये साबित करते हैं कि इसका मजहब, इस्लाम या धर्मांतरण से कोई लेना-देना नहीं।

ढाका यूनिवर्सिटी में हिंसक हुआ मोदी विरोधी प्रदर्शन, वामपंथी बोले- हमें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा: PM मोदी के स्वागत में बांग्लादेश तैयार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (मार्च 26, 2021) को बांग्लादेश में होंगे। बांग्लादेश की स्वतंत्रता के गोल्डन जुबली समारोह में उन्हें ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ के रूप में आमंत्रित किया गया है। ये कार्यक्रम राजधानी ढाका में होगा। बांग्लादेश मार्च 26, 1971 को स्वतंत्र हुआ था। एक तरफ जहाँ बांग्लादेश पीएम मोदी के स्वागत को तैयार है, वहीं वहाँ पाकिस्तान का समर्थन करने वाले व कट्टर इस्लामी समूहों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

बांग्लादेश की सुरक्षा एजेंसियाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम कर रही है, क्योंकि पाकिस्तान समर्थित इस्लामी कट्टरवादी समूह ‘हिफाज़त’ ने धमकी दी है कि वो पीएम मोदी के रास्ते को ब्लॉक करेंगे। एयरपोर्ट से उन्हें सड़क मार्ग से ही यात्रा करनी है। मुल्क की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ऐसे किसी भी प्रयास पर कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया है। ये दौरा इसीलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि भारत-बांग्लादेश का ट्रांसपोर्ट सुचारु हो जाए तो दोनों देश की आय 10% से भी अधिक बढ़ जाएगी।

उधर पीएम मोदी के दौरे को लेकर छात्रों के दो गुट में झड़प भी हुई। ‘प्रगतिशील छात्र जोट’ ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के खिलाफ ढाका यूनिवर्सिटी के ‘टीचर्स स्टूडेंट सेंटर (TCS)’ के सामने विरोध-प्रदर्शन का आयोजन किया था। तभी ‘छात्र लीग’ ने हमला बोल दिया और विरोधियों को पकड़-पकड़ कर पीटा। 20 छात्र नेता घायल हो गए। इनमें ‘समाजतांत्रिक छात्र फ्रंट’ के अध्यक्ष मसूद राणा को भी गहरी चोटें आई। घायलों को इलाज के लिए ढाका मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

ये घटना मंगलवार (मार्च 23, 2021) को शाम साढ़े 5 बजे हुई। उससे कुछ दिन पहले बांग्लादेश छात्र लीग (BCL) के नेता और संगठन की ढाका यूनिवर्सिटी यूनिट के अध्यक्ष संजीत चंद्रा दास ने एक रैली की थी, जिसमें उन्होंने मोदी-विरोधी प्रदर्शनकारियों को चेताते हुए कहा था कि अगर किसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया तो उसकी चमड़ी उधेड़ दी जाएगी।

ढाका यूनिवर्सिटी कैम्पस में मारपीट

‘प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स अलायन्स’ के संयोजक अल कादरी जॉय ने बताया कि उनलोगों का विरोध-प्रदर्शन पहले से ही प्लांड था और पीएम मोदी का पुतला भी जलाया जाना था। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान ही छात्र लीग के नेताओं ने ईंट-पत्थर और पेड़ की टहनियाँ हाथ में लेकर हमला बोल दिया। उन्होंने बताया कि पहले हमले के बाद जब वहाँ से कोई नहीं गया तो दूसरी बार हमला किया गया।

वहीं छात्र लीग के महासचिव लेखक भट्टाचार्जी ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी कैम्पस के दो वामपंथी छात्र गुटों ने आपस में ही लड़ाई की और हमारे छात्र बीच में फँस गए। उन्होंने कहा कि उनके संगठन का इस हमले से कोई लेना-देना नहीं। वामपंथी समूहों का कहना है कि उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। एक पत्रकार के कैमरे पर हेलमेट से वार किया गया। घायलों में दोनों तरफ के छात्र शामिल हैं।

वहीं कई पाकिस्तानियों ने ‘हिफाज़त-ए-इस्लाम’ संगठन के उस घोषणा का स्वागत किया है, जिसमें उसने पीएम मोदी को ढाका में न घुसने देने की धमकी दी है। वहीं ग्लादेश लिबरेशन समर्थक गुट का कहना है कि भारत ने मुल्क की स्वतंत्रता में साथ दिया था, इसीलिए ISI मतभेद पैदा कर रहा है। बदले में कई बांग्लादेशियों ने भी पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाते हुए पूछा कि विकास के मामले में वो इतना पीछे क्यों है?

कुछ ही दिनों पहले जुमा की नमाज के बाद 500 मुस्लिमों ने बांग्लादेश के बैतुल मोकर्रम मस्जिद के बाहर मार्च किया था। बड़ी तादाद में इस्लामी टोपी पहने और बड़ी-बड़ी दाढ़ी रखे लोगों ने सड़कों पर भारत और भारत के प्रधानमंत्री के विरुद्ध नारेबाजी की थी। इन सभी के हाथ में चप्पल थी और ये माँग कर रहे थे कि प्रधानमंत्री मोदी के ढाका दौरे को निरस्त किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा था, “अगर नरेंद्र मोदी को बांग्लादेश आने को कहा गया तो हम आतंकी बन जाएँगे। बंगाल बनेगा अफगानिस्तान और हम बनेंगे तालिबान।”