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महाराष्ट्र गृह मंत्री अनिल देशमुख ने दिया इस्तीफा, CM ठाकरे को कहा – ‘पद से मुक्त करें’

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अनिल देशमुख ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नाम से पत्र लिखते हुए इस्तीफा स्वीकार करने की माँग की है।

आज (5 अप्रैल 2021) ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के जरिए मुंबई के प्रतिष्ठानों से प्रति महीने 100 करोड़ रुपए की वसूली के आरोप मामले में CBI को प्रारंभिक जाँच करने को कहा है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गृह मंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफे को लेकर ट्विटर पर अपनी बात रखी थी। उनका कहना था कि बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के बाद अनिल देशमुख को स्वयं ही इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर खुद मुख्यमंत्री ठाकरे को उनसे ऐसा करने को कहना चाहिए।

बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि 15 दिनों के भीतर CBI अपनी प्रारंभिक जाँच ख़त्म कर सकती है। प्रारंभिक जाँच के बाद ये CBI के निदेशक के ऊपर होगा कि वो इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा:

“हम जानते हैं कि अनिल देशमुख राज्य के गृह मंत्री हैं, जो पुलिस के ऊपर होते हैं। एक स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। जाँच कानून के हिसाब से होनी चाहिए।”

नक्सली हमले पर घड़ियाली आँसू बहाने वाले कन्हैया कुमार, 76 CRPF जवानों की मौत का जश्न किसने मनाया था? युद्ध में चीन के साथ कौन था?

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों ने घात लगा कर हमारे सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसमें 22 जवान बलिदान हो गए। ये नक्सलियों की एक सोची-समझी साजिश थी, क्योंकि 3 गाँव खाली करा लेना और किसी क्षेत्र में 15 दिनों तक डटे रहने का अर्थ है कि उन्हें वहाँ के कुछ लोगों से समर्थन मिला और उनके शहरी आकाओं से भी। लेकिन, कन्हैया कुमार जैसे लोग इस नक्सली हमले और बलिदानी जवानों की लाशों पर राजनीति कर रहे हैं।

कन्हैया कुमार ने इस दुःखद घटना को लेकर किए गए अपने ट्वीट में लिखा, “बाप गृहमंत्री, बेटा BCCI सेक्रेटरी… बाप किसान, बेटा जवान… बेशर्म सत्ता से पूछिए कि कितने मंत्रियों के बच्चे फ़ौज में शामिल होते हैं? कायराना नक्सली हमले में लहू देश के आम लोगों का बहता है और कुर्सीजीवी इसका फ़ायदा उठाते हैं। देश को ये साज़िश समझनी होगी। वीर जवानों व किसानों को नमन!” क्या आपको किसी हिसाब से भी यह शोक जताने वाला ट्वीट लगता है?

अब आते हैं मंत्रियों के या उनके परिजनों के फ़ौज में होने की बात पर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की बेटी सेना में हैं। उनकी बेटी कैप्टन डॉक्टर श्रेयसी निशंक हरिद्वार के रुड़की स्थित मिलिट्री हॉस्पिटल में सेवारत हैं। वो 2018 में आर्मी मेडिकल कॉर्प्स में शामिल हुई थीं। उनकी इस उपलब्धि पर उनके पिता ने कहा था कि बेटियाँ किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं होतीं। क्या इससे कन्हैया कुमार के झूठ का पर्दाफाश नहीं होता?

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राज्यमंत्री विजय कुमार सिंह (जनरल वीके सिंह) भारत के सेना प्रमुख रहे हैं। जनरल वीके सिंह गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र से लगातार दो बार बड़े अंतर से सांसद बने हैं। वे भारतीय सेना के डेकोरेटेड अधिकारी रहे हैं, जिन्हें कई सम्मान प्राप्त हुए। ये तथ्य भी कन्हैया कुमार के दावों की पोल खोलता है। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर इसी साल ‘टेरिटोरियल आर्मी’ में कैप्टन बने। वो इस पद पर जाने वाले न सिर्फ पहले केंद्रीय मंत्री, बल्कि पहले सांसद हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाई सेना में सूबेदार हैं और LAC पर पहरा देते हैं। सूबेदार शैलेन्द्र मोहन यूपी सीएम के छोटे भाई हैं, जो सालों भर संवेदनशील क्षेत्र में पेट्रोलिंग में लगे रहते हैं। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री BC खंडूरी सेना में मेजर जनरल हुआ करते थे। अप्रैल 2019 में 7 और उसी साल जुलाई में 2 सैन्य अधिकारियों ने रिटायरमेंट के बाद समाजसेवा के लिए भाजपा को अपनी पहली पसंद बनाया।

केंद्रीय मंत्री रहे राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने 1990-2013 तक सेना में सेवा दी थी और वो जम्मू-कश्मीर के आतंकरोधी ऑपरेशन का हिस्सा भी रहे थे। वो रिटायर्ड कर्नल हैं। जसवंत सिंह और जगतवीर सिंह जैसे सैन्य अधिकारियों ने राजनीतिक पारी के लिए भाजपा को पहली पसंद बनाया। असली बात तो ये है कि वामपंथी नेता अक्सर सेना को गाली देते हैं और फिर पूछते हैं कि तुम्हारे परिजन सेना में क्यों नहीं हैं?

ऐसे में, जब कोई कन्हैया कुमार यह कह रहा होता है कि मोदी सरकार के मंत्रियों या उनके परिजन सेना में नहीं हैं, तो वो चाहता है कि आप जनरल वीके सिंह, कैप्टन श्रेयसी निशंक और कैप्टन अनुराग ठाकुर के बारे में ये सब न जान पाएँ। ये लोग उस विधारधारा के समर्थक हैं, जिसकी पुरोधा अरुंधति रॉय जैसे लोग हैं। अरुंधति रॉय ने एक अंतरराष्ट्रीय मंच से खुलेआम कहा था कि भारतीय सेना अपने ही लोगों को मारती है।

आज जब ऐसे लोग घड़ियाली आँसू लेकर आ जाएँ तो क्या इससे वो देशभक्त साबित हो जाएँगे? रवीश कुमार को दिए इंटरव्यू में इसी कन्हैया कुमार ने कहा था कि जिन आदिवासियों को नक्सली कह कर मारा जाता है, वो निर्दोष और भोले-भाले लोग हैं। JNU में इसी कन्हैया कुमार के गैंग पर भारतीय सेना के अपमान का आरोप लगा था। आज ये खुद को जवानों का हितैषी बता कर पेश कर रहे।

अब आते हैं कन्हैया कुमार जैसों के इतिहास पर, जिससे पता चल जाता है कि सेना को लेकर बहाए गए इनके आँसू घड़ियाली हैं। जिस छत्तीसगढ़ में ये नक्सली हमला हुआ है, उसी राज्य में अप्रैल 2010 में 76 CRPF जवानों को नक्सलियों ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। उसी राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा था कि इस घटना के बाद JNU में जवानों की मौत का जश्न मनाया गया, जिससे वो व्यथित हो गए थे।

अधिकारी SRP कल्लूरी हमले के समय उसी क्षेत्र में DIG हुआ करते थे। उन्होंने याद दिलाया था कि किस तरह कुछ तथाकथित लेखकों ने तब इस जघन्य वारदात को ‘जनता की जीत’ बताया था। अप्रैल 2010 में JNU में ABVP और कॉन्ग्रेस का छात्र संघ NSUI, दोनों ने ही वामपंथियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने जवानों की हत्या का जश्न मनाया। बचाव में वामपंथियों ने कहा था कि वो तो बीएस ‘ऑपरेशन ग्रीन हंट’ का विरोध कर रहे थे।

नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने का विरोध करने वाले ये नक्सली आज उन जवानों के हितैषी बन रहे हैं। तब NSUI के महासचिव रहे शेख शाहनवाज ने बताया था कि DSU (डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन) और AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स यूनियन) ने जवानों की हत्या का जश्न मनाया था। बता दें कि AISA राजनीतिक दल CPI(M-L) लिबरेशन का छात्र संघ है। कन्हैया कुमार CPI के नेता हैं। फिर इनमें और प्रतिबंधित SIMI में कोई अंतर ही कहाँ रहा?

अब आते हैं भारत में वामपंथियों के इतिहास पर। याद कीजिए, 2020 में भारत-चीन के बीच संघर्ष में जब हमारे कई जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे तब इन चीन समर्थक वामपंथी दलों ने अपने बयान में कहीं भी चीन की निंदा नहीं की थी। 50 के दशक में तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू जब चीन के साथ नजदीकियाँ बढ़ा रहे थे, तब कॉन्ग्रेस में भी उनका विरोध हुआ। लेकिन, चीन ने तब CPI से अपील की थी कि वो नेहरू का साथ दे।

1959 में CPI ने तिब्बत पर चीन के आक्रमण का समर्थन किया था और कहा था कि तिब्बत को चीन मध्यकालीन अंधकार से निकाल रहा है। तब वामपंथी पार्टियों ने तिब्बत के विद्रोह के पीछे ‘भारतीय प्रतिक्रियावादियों और पश्चिमी साम्राज्यवादियों’ का हाथ बताया था। चीन सीमा पर खड़ा था और CPI उसे भारत की सीमा मान भी नहीं रही थी। कोलकाता और पंजाब में चीन समर्थक वामपंथी खासे सक्रिय थे।

आज कन्हैया कुमार को सबसे पहले अपनी पार्टी से पूछना होगा कि सेना में उनके परिजनों के होने की बात तो दूर, वामदलों के कितने नेताओं ने भारतीय सेना का समर्थन किया है? कन्हैया कुमार को सवाल खुद से पूछना होगा कि JNU में जब देशविरोधी नारे लगे थे तो उसके बाद आरोपों की सूई घूम-फिर कर उन तक क्यों पहुँची थी? अर्बन नक्सलियों के समर्थक खुद को जंगली नक्सलियों का विरोधी बताने के हक़दार नहीं।

अंत में ये याद दिलाना ज़रूरी है कि शाहीन बाग़ और किसान आंदोलन के दौरान भीमा-कोरेगाँव में खून बहाने वाले नक्सलियों की रिहाई की माँग की गई थी। मार्च 2021 में ऐसे ही एक नक्सली वरवरा राव स्वास्थ्य कारणों के आधार पर 6 महीने की जमानत लेने में कामयाब रहा। उस पर माओवादियों के साथ मिल कर हमले की साजिश रखने का आरोप है। मार्च में वरवरा राव छूटा। अप्रैल में 22 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए।

छत्तीसगढ़ में काफी प्लानिंग के बाद करीब 400 नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया था। इस माओवादी हमले का नेतृत्व प्रतिबंधित संगठन के ‘बटालियन नंबर 1’ का कुख्यात कमांडर माडवी हिडमा कर रहा था, जिसकी तलाश पुलिस को कई वर्षों से है। जवान जब जोनगुडा, जीरागाँव और टेकलगुड़ुम से अपने कैम्प लौट रहा था, तभी ये हमला हुआ। नक्सली ये तीनों गाँव खाली करा चुके थे।

गोकशी के वारंटी को पकड़ने गई पुलिस पर पथराव, 6 घायल-पेड़ों की आड़ लेकर बचाई जान

उत्तर प्रदेश में इटावा के विल्लोचियान मोहल्ले में वारंटी को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर जानलेवा हमला किया गया। आरोपित अनीस उर्फ साजन के साथियों द्वारा किए गए पथराव में 6 पुलिसवाले बुरी तरह से घायल हो गए। इनमें एक महिला पुलिसकर्मी भी है। पुलिसवालों ने पेड़ों की आड़ लेकर खुद की जान बचाई।

पथराव में महिला सिपाही पूजा तिवारी, सिपाही सलमान, गजराज, अंकित, राजेश, जगन बुरी तरह से घायल हुए हैं। सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस बात की जानकारी जसवंतनगर कोतवाली प्रभारी नवरत्न गौतम ने दी है।

वहीं, साथियों का कवर लेकर आरोपित घटनास्थल से रफूचक्कर हो गया। उसके पाँच साथियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। मथुरा केदोता छाता मोहल्ला निवासी वकील, फक्कड़पुरा निवासी इजहार, शोएब, कसाई मोहल्ला के रहने वाले शाजिद और कटरा विल्लोचियान के रहने वाले अफीस को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इन सभी पर सरकारी काम में बाधा डालने, बलवा समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि आरोपी बीते 2 महीने से गोकशी के मामले में फरार चल रहा था।

गोकशी में क्या है सजा का प्रावधान

गोकशी के मामले में हर राज्य में अलग-अलग नियम हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में गोहत्या के कानून को सख्त बनाने के लिए “उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश-2020” को पास किया था। इसके तहत राज्य में गोहत्या पर 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। गोवंश को शारीरिक तौर पर नुकसान पहुँचाने पर 1 से 7 साल की सजा होगी। इसके अलावा गोकशी और गायों की तस्करी से जुड़े अपराधियों के फोटो भी सार्वजनिक रूप से चस्पा किए जाएँगे।

‘CM योगी आदित्यनाथ ने पत्रकार को दी गाली’ – AAP और सपा नेता जिस वीडियो को कर रहे वायरल, उसका फैक्ट चेक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया जा रहा है। वायरल वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आपत्तिजनक शब्द बोल रहे हैं।

इस वीडियो को सोशल मीडिया के आम यूजर के अलावा विपक्षी पार्टियाँ भी शेयर कर रही हैं। आम आदमी पार्टी से लेकर समाजवादी पार्टी के नेता तक इसे वायरल करने में लगे हुए हैं।

कुछ यूजर सीएम योगी का 26 सेकेंड का वीडियो तो कुछ 8 सेकेंड का वीडियो शेयर करके उनकी छवि को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इन वीडियो के आखिरी 3 सेकेंड में ही आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

वायरल हुए वीडियो की जाँच में जबकि यह सामने आया कि सीएम योगी के ओरिजिनल वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है। आखिरी के 3 सेकेंड के वीडियो को एडिट किया गया है।

वीडियो से संबंधित जाँच और उसे एडिटेड पाए जाने की बात जब मीडिया ने रिपोर्ट की, तो उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने रिट्वीट किया है।

देश के 60% कोरोना संक्रमित सिर्फ महाराष्ट्र में, मजदूरों का पलायन फिर शुरू: उद्धव सरकार ने की लॉकडाउन की घोषणा

महाराष्ट्र में कोरोना की रफ़्तार नियंत्रण से बाहर जाने के कारण एक बार फिर से लॉकडाउन लगाने की घोषणा हुई है। यहाँ तक कि नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने भी इस पर उद्धव ठाकरे सरकार का समर्थन करते हुए गरीबों के लिए आर्थिक पैकेज की माँग की है। वहीं इसके साथ ही मजदूरों का पलायन भी फिर से शुरू हो गया है। प्रवासी मजदूरों को डर है कि फिर से लॉकडाउन लगने के कारण वो वहाँ फँस जाएँगे।

कोरोना की पहली लहर ख़त्म होने के बाद ये सभी मजदूर वापस कमाने के लिए बड़े शहरों की तरफ निकल गए थे, लेकिन अब वो फिर से पलायन करने लगे हैं। मुंबई में 30 लाख प्रवासी कामगार रहते हैं। शहर में रविवार (अप्रैल 4, 2021) की रात से नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है। फरवरी से अब तक कोरोना मरीजों की संख्या 400% बढ़ी है। इस सप्ताह के अंत तक सरकार राज्य में और सख्ती बढ़ा सकती है।

पूरे भारत में प्रवासियों की संख्या 10 करोड़ से भी अधिक बताई जाती है, जो दूसरे राज्यों में जाकर काम करते हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पिछले साल इनके घर लौटने के लिए सरकार ने स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की थी। सभी को मुफ्त ट्रांसपोर्ट मुहैया कराए गए थे। सड़क पर लगने वाले स्टॉल, कल-कारखाने और निर्माण कार्य रुक गए थे। यूपी के कुछ शहरों में अगले कुछ दिनों तक ट्रेनों की बुकिंग भी फुल हो चुकी है।

अब बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के लिए ट्रेन पकड़ने के लिए रेलवे स्‍टेशनों पर लोगों की काफी भीड़ देखी जा रही है। मजदूरों में यूपी-बिहार के ही सबसे ज्यादा हैं। कइयों को तो रोजगार देने वालों ने ही जाने को कह दिया है। खासकर रेस्टॉरेंट्स को काम करने वाले लौट रहे हैं। यूपी के मजदूरों का कहना है कि उनके राज्य में स्थिति बेहतर है, इसीलिए वो लौट रहे हैं। कंस्ट्रक्शन कार्य में लगे मजदूर भी लौट रहे हैं।

महाराष्ट्र में कोरोना की स्थिति भयावह होती जा रही है। पूरे भारत में सक्रिय कोरोना मामलों की संख्या 7.38 लाख पहुँच गई है, जिसमें से 4.3 लाख अकेले महाराष्ट्र से हैं। देश में कुल सक्रिय मामलों के 58.27% महाराष्ट्र में ही हैं। पिछले 1 दिन में देश में 1 लाख से भी अधिक नए कोरोना मरीज सामने आए, जिनमें से 11,000 अकेले मुंबई के थे। अब तक कुल मरने वालों में से भी 33% अकेले महाराष्ट्र से हैं।

देश में कोरोना ने अब तक 1,65,138 लोगों की जान ली है, जिसमें से 55,878 मरीजों की मौत अकेले महाराष्ट्र में हुई। महाराष्ट्र में कोरोना से जितने लोग मरे हैं, उसका एक चौथाई भी किसी अन्य राज्य में नहीं मरे। देश में पिछले 1 दिन में 1.03 लाख नए मामले सामने आए, जिसमें से 57,000 अकेले महाराष्ट्र से आए। इसमें से 12,472 पुणे से हैं। ठाणे, नागपुर और नासिक की स्थिति भी खराब होती जा रही है।

महाराष्ट्र में शुक्रवार से वीकेंड लॉकडाउन का ऐलान भी किया गया है। मॉल्स, रेस्टॉरेंट्स और यात्राओं को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उद्धव ठाकरे ने कैबिनेट बैठक में ये फैसला लिया। रात 8 बजे से सुबह 7 बजे तक कर्फ्यू अब भी जारी है। इस वीकेंड पर बाहर निकलने पर भी पाबंदी होगी। पार्क, प्लेग्राउंड और सिनेमा हॉल बंद रहेंगे। सरकारी दफ्तरों में 50% ऑक्युपेंसी रहेगी और प्राइवेट कंपनियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ के लिए कर्मचारियों को सुविधाएँ मुहैया कराने को कहा गया है।

हैकर्स ने लीक किया मार्क जुकरबर्ग का फोन नंबर, 53 करोड़ Facebook यूजर्स का डेटा खरीददारी के लिए उपलब्ध

फेसबुक पर यूजर्स का व्यक्तिगत डेटा लीक करने या फिर उनका इस्तेमाल कारोबारी हितों के लिए किए जाने पर चर्चा तो कई महीनों से चल रही है, लेकिन अब कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग का ही फोन नंबर लीक होने के बाद लोग पूछ रहे हैं कि जब कंपनी के संस्थापक का ही डेटा सुरक्षित नहीं है तो फिर आम यूजर्स का क्या? एक लोकल हैकिंग फोरम ने फेसबुक पर कई लोगों के पर्सनल डेटा को लीक किया है।

हैकिंग फोरम ने ऑनलाइन जिन लोगों के डेटा लीक किया है, उसमें ‘फेसबुक इंक’ के संस्थापक और CEO मार्क जुकरबर्ग का नाम भी शामिल है। उनका नाम, लोकेशन, शादी से जुड़े डिटेल्स, जन्मदिन और फेसबुक यूजर आईडी सहित कई डेटा लीक हो गए। उन्हें मिला कर कुल 53 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा लीक हुआ है। इनमें 106 देशों के लोग शामिल हैं। फेसबुक के सह-संस्थापकों क्रिस ह्यूज और डस्टिन मॉस्कोविट्ज के डेटा भी सुरक्षित नहीं बचे।

अमेरिका के 3.2 करोड़, यूके के 1.1 करोड़ और भारत के 60 लाख लोगों के डेटा लीक किए गए हैं। फेसबुक आईडी, नाम, लोकेशन, बायो और ईमेल एड्रेस को ऑनलाइन डाल दिया गया है। इजरायली साइबर क्राइम फर्म ‘हडसन रॉक’ के सह-संस्थापक अलोन गल ने इसका खुलासा करते हुए बताया कि ये डेटा 2 साल पुराने हो सकते हैं। हैकर्स के बीच फेसबुक से जुड़े फोन नंबर्स पहले से ही सर्कुलेट हो रहे थे।

आशंका जताई गई कि ये वही डेटाबेस हो सकता है। जबकि फेसबुक के अधिकारियों का कहना है कि जिस तकनीकी खामी की वजह से ये डेटा लीक हुए थे, उसे कंपनी ने 2019 में ही दूर कर लिया था। एक बोट उसे बेच रहा था। इसके बदले कुछ यूरो माँगे जा रहे थे। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोगों को फेसबुक पर ‘सोशल इंजीनियरिंग अटैक्स’ से बच कर रहना चाहिए और नंबर वगैरह प्राइवेट कर के रखना चाहिए।

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ CBI जाँच की मंजूरी: परमबीर सिंह के आरोपों पर बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के जरिए मुंबई के प्रतिष्ठानों से प्रति महीने 100 करोड़ रुपए की वसूली का आरोप लगाया था। अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में CBI को प्रारंभिक जाँच करने को कहा है। उन्होंने ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी धाँधली के आरोप लगाए थे।

बॉम्बे उच्च-न्यायालय ने कहा कि 15 दिनों के भीतर CBI अपनी प्रारंभिक जाँच ख़त्म कर सकती है। प्रारंभिक जाँच के बाद ये CBI के निदेशक के ऊपर होगा कि वो इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करना चाहते हैं। कोर्ट ने ये भी कहा कि सरकार द्वारा कमिटी बनाने के निर्णय के बाद लगता है कि इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की ज़रूरत नहीं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा:

“हम जानते हैं कि अनिल देशमुख राज्य के गृह मंत्री हैं, जो पुलिस के ऊपर होते हैं। एक स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। जाँच कानून के हिसाब से होनी चाहिए।”

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हालाँकि कहा कि CBI को इस मामले में तुरंत FIR दर्ज करने की ज़रूरत नहीं। ऐसा इसीलिए कहा गया क्योंकि महाराष्ट्र की सरकार ने पहले ही जाँच के लिए एक उच्च-स्तरीय कमिटी के गठन का निर्णय लिया है।

इससे पहले बॉम्बे HC ने पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को फटकार लगाते हुए कहा था कि अगर पुलिस ऑफिसर होने के बावजूद किसी अपराध को लेकर FIR दर्ज नहीं कर रहे हैं तो इसका अर्थ है कि वो अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असफल रहे हैं। कोर्ट ने परमबीर सिंह से पूछा था कि उन्होंने FIR क्यों नहीं दर्ज किया, जबकि ये उनका कर्तव्य है? कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ CM को पत्र भेजने से कुछ नहीं होता, इसके लिए परमबीर सिंह से जवाब माँगा जा सकता है।

अक्षय कुमार के बाद अब फिल्म ‘राम सेतु’ से जुड़े 45 कलाकार कोरोना+: रुकी शूटिंग, सभी को किया गया क्वारंटाइन

फिल्म ‘राम सेतु’ की शूटिंग के लिए कुछ ही दिनों पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और फिर अयोध्या पहुँचे अभिनेता अक्षय कुमार कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। मुंबई के मढ द्वीप पर इस फिल्म की शूटिंग होनी थी। अभिनेत्री नुसरत भरूचा और जैकलीन फर्नांडिस भी इस फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। अब इस फिल्म से जुड़े 45 जूनियर आर्टिस्ट कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित हो गए हैं।

सोमवार (अप्रैल 5, 2021) को 100 जूनियर कलाकारों की एक टीम शूटिंग में शामिल होने वाली थी। फिल्म के मुख्य अभिनेता अक्षय कुमार और निर्माता विक्रम मल्होत्रा ने फिल्म की शूटिंग में शामिल होने वाली सभी कलाकारों का कोरोना टेस्ट अनिवार्य कर रखा है। ‘ET’ की खबर के अनुसार, 100 की टीम में से 45 का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव निकला। ‘फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्पलॉईज (FWICE)’ ने इस खबर की पुष्टि की है।

संगठन के महासचिव अशोक दुबे ने कहा कि ‘राम सेतु’ की शूटिंग के दौरान पूरी सावधानी बरती जा रही है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सभी 45 कोरोना पॉजिटिव कलाकारों को क्वारंटाइन कर दिया गया है। अब शूटिंग को भी रोक दिया गया है। अगले 15 दिनों में इस फिल्म की शूटिंग फिर से शायद ही शुरू हो पाए। हर दो दिन पर सावधानी के लिए सेट पर सबका कोरोना टेस्ट किया जाता है।

बताया गया है कि पॉजिटिव आने वालों को आइसोलेट करने के साथ ही उनका खर्च भी ‘राम सेतु’ की टीम ही वहन करती है। अगर किसी को कुछ तकलीफ महसूस होती है तो उसे तुरंत आइसोलेट किया जाता है। अक्षय कुमार ने खुद कई बार टेस्ट कराया है। महाराष्ट्र में पहले से ही कोरोना के रोज 50,000 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। पिछले 1 दिन में देश में 1 लाख मामले सामने आए, जो अब तक का सर्वाधिक है।

अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा, “आप सभी की शुभकामनाओं और प्रार्थनाओं के लिए आभार। ऐसा लग रहा है जैसे उनका असर हो रहा है। मैं ठीक हूँ, लेकिन सावधानी के तौर पर मेडिकल सलाहों को मान कर मैं अस्पताल में हूँ। मैं जल्द ही घर वापस लौटूँगा।” इससे पहले अक्षय कुमार होम क्वारंटाइन में थे। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में अपने संपर्क में आए सभी लोगों को कोरोना टेस्ट कराने की सलाह दी थी।

हाल ही में नुसरत ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ तस्वीरें शेयर की थीं, जिसमें वह ‘राम सेतु’ की स्क्रिाप्ट पढ़ते हुए नजर आ रही थीं। उन्होंने लिखा था, “Let’s do this!!”। इसी के साथ उन्होंने अक्षय कुमार, जैकलीन फर्नांडीज और फिल्म के डायरेक्टर अभिषेक शर्मा को भी टैग किया था। उन्होंने इस फिल्म में मौका मिलने के लिए खुद को ‘सौभाग्यशाली’ करार दिया था। अक्षय, नुसरत और जैकलीन यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मिले थे।

4 महीने की बच्ची का अपहरण… 4 लोगों के हाथों बिकते हुए मुंबई से बेंगलुरु: शारमीन, सिद्दीकी, फरजाना गिरफ्तार

मुंबई के देवनार क्षेत्र में रविवार (अप्रैल 4, 2021) को एक शिशु के अपहरण के मामले में 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 3 महिलाएँ हैं। गुरुवार को ही 4 महीने की बच्ची गायब हो गई थी, जिसके बाद परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया था। शारमीन और उसके शौहर सिद्दीकी खान पर अपहरण के आरोप लगे थे। पुलिस ने इस सूचना के आधार पर शारमीन और सिद्दीकी से पूछताछ की, जिसके बाद एक और महिला का नाम सामने आया।

पता चला कि बच्ची को एंटोप हिल क्षेत्र में रहने वाली महिला फरजाना सैय्यद शेख को दे दिया गया है। फिर फरजाना ने उस छोटी सी बच्ची को चेम्बूर की रहने वाली आशा पवार को दे दिया था। पवार ने उस बच्ची को फिर से बेच दिया। अबकी माटुंगा की रहने वाली जूलिया फर्नांडिस ने उसे खरीदा। पुलिस ने अंततः बेंगलुरु से बच्ची को बरामद करने में कामयाबी पाई। बच्ची को उसके परिजनों को सौंप दिया गया है।

शारमीन, सिद्दीकी, फरजाना और आशा को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में अभी और गिरफ्तारियाँ होनी हैं। ये सभी मिल कर शिशुओं की तस्करी का रैकेट चला रहे थे। शारमीन और सिद्दीकी पीड़ित परिजनों के पड़ोसी ही थे। जूलिया फर्नांडिस की 10 दिनों पहले ही डिलीवरी हुई थी। बेंगलुरु में उसकी मुलाकात एक ऐसे जोड़े से हुई थी, जिसका कोई बच्चा नहीं था। वो लोग किसी बच्चे को गोद लेना चाहते थे।

जूलिया ने उनसे कहा कि ये बच्ची उसकी है और ख़रीदे गए शिशु को बेच डाला। पुलिस अब तक उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई है लेकिन आश्वासन दिया है कि उसे जल्द ही धर-दबोचा जाएगा।

नक्सलियों ने बनाया था ‘U व्यूह’, 15 दिन किया इंतजार: हत्या से पहले काटे इंस्पेक्टर के हाथ, टीम लीडर पर जवानों से अधिक हमले

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में हुए नक्सली हमले में 22 जवानों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। सशस्त्र बलों को गुप्त सूचना मिली थी कि एक बड़ा माओवादी कमांडर वहाँ छिपा हुआ है, जिसके बाद वो इलाके में पहुँचे थे। बीजापुर में हुए इस हमले में नक्सलियों ने ‘U’ शेप का व्यूह बनाया हुआ था। यहाँ तक कि सशस्त्र बलों तक वो ‘गुप्त सूचना’ भी उन्होंने ही पहुँचवाई थी। इसके बाद वो जैसे ही इलाके में पहुँचे, माओवादियों ने अपना जाल बिछा कर हमला बोल दिया।

इस माओवादी हमले का नेतृत्व प्रतिबंधित संगठन के ‘बटालियन नंबर 1’ का कुख्यात कमांडर माडवी हिडमा कर रहा था, जिसकी तलाश पुलिस को कई वर्षों से है। उसने अपने साथ 300 की संख्या में नक्सलियों को जुटाया और आसपास के 3 गाँवों को खाली करा लिया। जानबूझ कर जवानों को जंगल वाले इलाके में ले जाया गया। जब तक जवानों को इसका पता चलता, वो फँस चुके थे और भौगोलिक रूप से भी सही स्थिति में नहीं थे।

वो जगह ऐसी थी, जहाँ दोनों तरफ से पहाड़ियाँ थीं और माओवादियों की फायरिंग चालू थी। जवान न भाग सकते थे और न उनके पलटवार का ज्यादा असर होता। जब जवानों ने वहाँ से लौटने की कोशिश की तो उन्हें घेर लिया गया। ‘U शेप व्यूह’ के बारे में बता दें कि इसमें भागने के लिए एक ही जगह होती है – वो रास्ता, जहाँ से आपने एंट्री ली हो। जीरागाँव 3 ओर से पहाड़ियों से घिरा है और लौटते हुए जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई।

जब वो वापस उसी रास्ते से लौटने लगे, तब माओवादियों ने उन्हें घेर लिया। बता दें कि महाभारत युद्ध के तीसरे दिन जब भीष्म पितामह ने दुर्योधन के साथ मिल कर ‘गरुड़’ के आकार की व्यूह रचना की थी, तब पांडवों ने ‘U शेप’ का व्यूह बना कर ही उसे ध्वस्त करने में सफलता पाई थी। इसी ‘U शेप’ एनकाउंटर का सामना जवानों को बीजापुर में करना पड़ा। माडवी हिडमा ने बस्तर के विभिन्न इलाकों से नक्सलियों को बुलाया था।

उसकी साजिश काफी पुरानी थी, लेकिन सशस्त्र बलों ने 15 दिनों तक क्षेत्र में जाना उचित नहीं समझा। वो बौखलाता जा रहा था क्योंकि इतने दिनों तक इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों के रहने और राशन-पानी की व्यवस्था में खासा खर्च आ रहा था। शुक्रवार (अप्रैल 2, 2021) को 1700 जवानों ने सुकमा और बीजापुर में तलाशी अभियान शुरू किया था। 11 बजे अभियान शुरू हुआ और 45 मिनट बाद 450 जवानों का एक दल जोनगुडा, जीरागाँव और टेकलगुड़ुम से अपने कैम्प लौट रहा था।

तीनों गाँव पहले ही नक्सलियों द्वारा खाली करा लिए गए थे। जंगलों और पत्थरों के कारण ये नक्सलियों का गढ़ है और वो उसी का फायदा उठा कर छिपे हुए थे। ये भी माना जा रहा है कि पुलिस-प्रशासन ने माओवादियों की क्षमता को कम कर के आँका। माओवादियों की संख्या के बारे में उन्हें पता था लेकिन रणनीतिक योजना नहीं बनाई गई। नक्सलियों ने पहले ही सारी प्रैक्टिस कर ली थी। टीम का नेतृत्व कर रहे जवानों पर अधिक हमले किए गए।

फील्ड कमांडरों को निशाना बनाया गया। CRPF कोबरा और ‘डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व गार्ड (DRG)’ के फील्ड कमांडरों को निशाना बनाया गया। सिल्गेर गाँव में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा कैम्प स्थापित करने के फैसले से माओवादी भड़के हुए थे। इस कैम्प के बनने से बीजापुर और सुकमा के बीच माओवादियों का ‘सेफ रूट’ ख़त्म हो जाता। मार्च से जुलाई के बीच हर साल नक्सलियों के खिलाफ वार्षिक ऑपरेशन चलाया जाता है।

इस हमले में 31 जवान घायल हुए हैं और कई अभी भी गायब बताए जा रहे हैं। माओवादियों की एक टुकड़ी ने एक इंस्पेक्टर की हत्या से पहले उनका हाथ काट डाला और फिर हथियार लूट कर फरार हो गए। उन्होंने बुलेटप्रूफ जैकेट्स और बंदूकें भी लूट ली। कुछ जवान डिहाइड्रेशन की वजह से बलिदान हो गए। डेढ़ दर्जन के करीब नक्सलियों की लाशें भी मिली हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह असम में चुनावी अभियान बीच में छोड़ कर दिल्ली लौटे और बैठकें की।

माडवी हिडमा की उम्र लगभग 40 वर्ष है। वह सुकमा जिले के पुवर्ती गाँव का रहने वाला है। 90 के दशक में वह नक्सली बना था। नक्सल कमांडर माडवी हिडमा कई नामों से जाना जाता है। मसलन, संतोष उर्फ इंदमुल उर्फ पोडियाम भीमा। बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ पुलिस समेत कई नक्सल प्रभावित राज्यों की पुलिस इस मोस्टवांटेड नक्सली की तलाश में है। हिडमा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGa) बटालियन नंबर 1 का प्रमुख है और ऐसे घातक हमले करने के लिए जाना जाता है।