हरियाणा के फरीदाबाद जिले का बहुचर्चित निकिता तोमर हत्याकांड के दो मुख्य आरोपितों तौसीफ और रेहान को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बुधवार (24 मार्च) को दोषी करार दिया है। शुक्रवार 26 मार्च को दोषियों को सजा सुनाई जाएगी। वहीं, हत्याकांड में इस्तेमाल हथियार तौसीफ को उपलब्ध करवाने वाले अजरुद्दीन को बरी कर दिया गया है।
पिछले साल अक्टूबर में फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में अग्रवाल कॉलेज के बाहर 21 वर्षीय छात्रा निकिता तोमर की दो लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। दरअसल, आरोपित तौसीफ (Tauseef) ने निकिता को गाड़ी में खींचने की कोशिश की, लेकिन जब वो असफल रहा तो उसने उसे गोली मार दी थी। वहीं, वीडियो में अन्य आरोपित मोहम्मद रिहान द्वारा तौसीफ को कार में वापस खींचते देखा जा सकता है। यह पूरी घटना CCTV में भी कैद हो गई थी, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
समाचार चैनल ‘टाइम्स नाउ’ की रिपोर्ट के अनुसार, लड़की के घरवालों ने आरोप लगाया था कि निकिता (Nikita) पर तौसीफ (Tauseef) धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। तीन साल पहले इस संबंध में पंचों के सामने फैसला भी हुआ, लेकिन तौसीफ ने दोबारा लड़की के संपर्क में आने का प्रयास किया। उसने बार बार निकिता को यही कहा, ‘मुस्लिम बन जा हम निकाह कर लेंगे’ मगर जब लड़की ने उसकी बात नहीं सुनी तो उसकी गोली मार कर हत्या कर दी।
बता दें कि मृतका निकिता ने घटना के एक माह पहले ही आरोपित तौसीफ के खिलाफ छेड़खानी और उत्पीड़न की शिकायत दर्ज की थी। हालाँकि, बाद में परिवार ने मामला वापस ले लिया था। इसके बाद उसके परिवार ने आरोप लगाया था कि तौसीफ ने उसे फिर से परेशान करना शुरू कर दिया और उस पर इस्लाम अपनाने का दबाव डालने लगा था। वारदात के बाद छात्रा को तुरंत अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।
इस घटना के बाद वहाँ अफरा-तफरी मच गई थी। यह वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी, जिसके आधार पर आरोपितों की पहचान करके तौसीफ और रेहान को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मुठभेड़ के बाद कुख्यात अपराधी इमाम उर्फ इमामुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी इमाम नंदनगरी का कुख्यात अपराधी है। इमाम के विरुद्ध डकैती, दंगे और अवैध हथियारों से संबंधित गंभीर धाराओं में 18 से अधिक मामले दर्ज हैं।
इमाम उर्फ इमामुद्दीन फिलहाल एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती है और खतरे से बाहर है। पुलिस अब इमाम पर मकोका लगाने की तैयारी में है। इमाम कई बार विभिन्न अपराधों के चलते जेल जा चुका था किन्तु वह जमानत पर बाहर आ जाता है और पुनः अपराध में संलिप्त हो जाता है।
पुलिस पर हमले करने के लिए जाना जाता है इमाम
इमाम का इतिहास खतरनाक रहा है। उसने कई बार पुलिस पर जानलेवा हमले किए। 2009 में जब इमाम अपराध करने के पश्चात अपने साथियों के साथ भाग रहा था, तब पीसीआर में तैनात ओंकार ने उन्हें धर-दबोचा किन्तु इमाम ने अपने साथियों के साथ मिल कर ओंकार की बेरहमी से पिटाई कर दी। उसी घटना के पश्चात ओंकार आज तक कोमा में ही हैं। ओंकार वर्तमान में गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती हैं।
2015 में भी नन्दनगरी में एक बदमाश की हत्या के मामले में जब पुलिस घटनास्थल पर पहुँची, तब इमाम ने स्थानीय लोगों के साथ पुलिस पर लोहे की रॉड जैसे हथियारों से हमला कर दिया और वहाँ से फरार हो गया। इस मामले में इमाम गिरफ्तार हुआ किन्तु जमानत पर बाहर आ गया।
इसी वर्ष जनवरी में चोरी के कई मामलों की जाँच के लिए पुलिसकर्मी जब इमाम के घर पहुँचे, तब भी इमाम ने परिजनों के साथ मिल कर पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला कर दिया। इस मामले के बाद से ही इमाम पुलिस की पहुँच से दूर था।
स्पेशल सेल डीसीपी प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि 20 मार्च को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को इनपुट मिले कि इमाम, सराय काले खाँ के पास एक बार फिर किसी अपराध की फिराक में घूम रहा है, तब यूनिट के कुछ पुलिस अधिकारियों ने उसे आत्मसमर्पण के लिए कहा किन्तु उसने अपनी अपराधिक प्रवृत्ति के अनुसार पुलिस पर गोली चलाई। हालाँकि इस बार वह सफल नहीं हुआ और मुठभेड़ में उसके दोनों पैरों में गोली लग गई। पुलिस को इमाम के पास से चोरी का वाहन, 32 बोर की पिस्टल एवं तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।
मुंबई के एंटीलिया केस में काली स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन की मौत के मामले में आज (मार्च 24, 2021) ठाणे के सत्र न्यायालय में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने महाराष्ट्र एटीएस को मनसुख हिरेन मामले में उनकी जाँच को रोकने के आदेश दिए और पूरा केस राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को सौंपने को कहा।
बता दें कि इससे पहले एनआईए ने विशेष अदालत को इस बारे में सूचित किया था कि गृह मंत्रालय के आदेश के बाद भी महाराष्ट्र एटीएस ने मामले से संबंधित दस्तावेज राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को नहीं सौंपे हैं। एजेंसी के सूत्रों ने यह भी बताया था कि उन्होंने हर जरूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए महाराष्ट्र डीजी को भी इस संबंध में सूचित किया था लेकिन फिर भी उन्हें सहयोग नहीं मिला।
Maharashtra: Thane sessions court has asked ATS to stop investigation of Mansukh Hiren death case & hand over the case to NIA.
NIA has approached the court after ATS was not handing over the case to NIA despite MHA’s orders in this regard..
उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय ने कुछ दिन पहले ही NIA को इस मामले की जाँच सौंपी थी। लेकिन 21 मार्च को अचानक महाराष्ट्र एटीएस के DIG शिवदीप लांडे ने दावा किया कि मनसुख हिरेन की मौत का मामला सुलझा लिया गया है।
इस दौरान उन्होंने बिना कोई खास डिटेल दिए बताया कि मनसुख हिरेन की मौत के मामले में मुम्बई पुलिस के कांस्टेबल विनायक शिंदे और नरेश धारे समेत एक बुकी को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें अदालत में पेशी के बाद कोर्ट ने 30 मार्च तक एटीएस की कस्टडी में भेज दिया है।
इस केस में ATS के एक अधिकारी ने जानकारी दी थी कि शनिवार देर रात को एक पुलिसकर्मी विनायक शिंदे और एक सटोरिये नरेश धारे की गिरफ़्तारी हुई है। महाराष्ट्र ATS के DIG शिवदीप लांडे ने अपने फेसबुक पोस्ट में भी मनसुख हिरेन की हत्या की गुत्थी को सुलझाने का दावा करते हुए अपनी टीम के सभी साथियों को सैल्यूट किया था।
दिलचस्प बात यह थी कि एनआईए, एंटीलिया के बाहर पाए गए विस्फोटकों से लदी कार और सचिन वाजे प्रकरण की जाँच पहले से ही कर रही थी और ATS के खुलासे से एक दिन पहले ही मनसुख हिरेन की हत्या का मामला भी NIA को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सौंपा था।
मनसुख हिरेन केस
पिछले दिनों मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर एक विस्फोटक लदी SUV कार पार्क की हुई मिली थी। इसके मालिक मनसुख हिरेन की शुक्रवार (मार्च 5, 2021) को लाश मिली थी। यह घटना तब हुई थी जब विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हिरेन की सुरक्षा का मुद्दा कुछ ही घंटों पहले उठाया था। लेकिन समय रहते मुंबई पुलिस और उद्धव सरकार द्वारा कोई एक्शन न लेने के कारण मुम्ब्रा की खाड़ी में उनकी लाश मिली। उनकी पत्नी ने उसी समय मुंबई पुलिस के आत्महत्या के दावों को नकार दिया था और केस की पूरी जाँच में पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की भूमिका सामने आई थी। अब सचिन वाजे से जुड़े आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं।
दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार (मार्च 23, 2021) को सुनंदा पुष्कर मौत/हत्या मामले के आरोपित कॉन्ग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा द्वारा विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल के समक्ष पेश की गई याचिकाओं पर सुनवाई की।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस सुनवाई में पाहवा ने सुनंदा पुष्कर के बेटे, शिव मेनन के पुलिस को दिए बयान को पढ़ा। इसमें उन्होंने कहा था कि उनका मानना है कि थरूर एक मक्खी को भी चोट नहीं पहुँचा सकते हैं। उनके बेटे के बयान से थरूर के साथ सुनंदा के रिश्ते, उनकी मेडिकल कंडीशन और पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर द्वारा बयान में बदलाव का पता चला। शिव मेनन के बयान का हवाला देते हुए, विकास पाहवा ने पढ़ा:
“मुर्दाघर में मैंने पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर से मृत्यु के कारण के बारे में पूछा। उन्होंने मुझे बताया कि कोई विषाक्तता नहीं है… कोई धोखेबाजी नहीं है। यह शायद नींद न आना, भूख, अत्यधिक धूम्रपान और तनाव के कारण हो सकता है। लेकिन 15-20 मिनट के बाद ही डॉक्टर मीडिया में गए और बताया कि मौत का कारण जहर या अप्राकृतिक है। मेरा मानना है कि शशि एक मक्खी को भी नुकसान नहीं पहुँचा सकते। वह उन्हें नुकसान पहुँचाने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे… दुर्भाग्य से अपने जीवन के अंत में, वह अपनी मानसिक स्थिति के कारण थोड़ी अस्थिर थी लेकिन शशि उसकी हत्या नहीं कर सकते।”
सुनंदा पुष्कर की दवाओं की एक सूची पढ़ने के बाद, वरिष्ठ वकील ने उनके बेटे के बयान का उल्लेख किया, जो उनके द्वारा पुलिस को दिया गया था, “मैंने उन्हें सूचित किया कि यह एक अवसादरोधी है, नींद की गोली नहीं… वह इसे ले रही हैं। कई वर्षों तक… जब वह भारत के लिए रवाना हुईं तो उन्होंने मुझे गले लगाया… उन्होंने बताया कि मुझे बुरा लग रहा है कि मैं आपको दोबारा नहीं देख पाऊँगी। वह हमेशा बोलती थीं कि वह बीमार हैं और बहुत जल्द मर जाएँगी। मेरी माँ बहुत भावुक थीं। हर बार जब वह भारत आईं, तो वह आक्रामक मूड में थीं। वह छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाती थीं। मैंने उन्हें शांत करने की कोशिश की, शशि एक व्यस्त आदमी हैं और उनसे बहुत प्यार करते हैं… उनके बीच संवाद की कमी थी।”
अपने तर्क को पुष्ट करने के लिए, विकास पाहवा ने खुलासा किया कि परिवार के कुछ सदस्यों के अनुसार, थरूर सुनंदा पुष्कर को भारत में डॉक्टरों के पास ले गए थे और साथ ही साथ वे फ्रांस भी ले कर गए थे, जहाँ उनकी मेडिकल कंडीशन पर विचार किया गया।
शिव मेनन के बयान के आधार पर, पाहवा ने तर्क दिया कि “मृतक के इकलौते बेटे ने स्पष्ट रूप से कहा कि थरूर का मौत से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन मेरा दोस्त (अभियोजक) उन पर आरोप लगाना चाहता है।” तर्कों को लम्बे समय तक सुनने के बाद, इस मामले को आगे की दलीलों के लिए 26 मार्च 2021 को दोपहर 2 बजे के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
सुनंदा पुष्कर मौत का मामला
कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर 17 जनवरी 2014 को दिल्ली के लीला होटल में अपने सुइट में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं। 16 जनवरी 2014 को, सुनंदा पुष्कर ने पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के साथ ट्विटर पर बहस की थी।
सुनंदा ने भी मेहर पर आईएसआई एजेंट होने और उसे घूरने का आरोप लगाया, हालाँकि, मेहर ने इन आरोपों का खंडन किया, उन्हें ‘बेतुका’ कहा। इन ट्वीट्स को सुनंदा पुष्कर की टाइमलाइन से हटा दिया गया। अगले दिन, पुष्कर को दिल्ली के लीला होटल के सुइट नंबर 345 में मृत पाया गया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स के बाद पता चला कि सुनंदा के शरीर पर 12 चोट के निशान थे और एंटी-डिप्रेशन ड्रग अल्प्राजोलम के पेट में नाममात्र के निशान पाए जाने के बाद मामला दिल्ली पुलिस को सौंप दिया गया था। 15 मई, 2018 को, दिल्ली पुलिस ने कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर पर उनकी पत्नी की आत्महत्या का आरोप लगाते हुए थरूर पर 3000 पृष्ठ की चार्जशीट में पुष्कर को क्रूरता से पेश करने का आरोप लगाया।
ब्रज के बाद यदि कहीं की पौराणिक और परंपरागत होली प्रसिद्ध है तो वह है भगवान शिव की नगरी काशी की। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में फाल्गुन शुक्ल एकादशी को रंगभरी एकादशी के रूप में मनाया जाता है, जिसे आमलकी एकादशी भी कहते हैं। होली से पहले रंगभरी एकादशी वैसे तो पूरे देश में मनाई जाती है, पर इसका सर्वाधिक उत्साह काशी में ही देखने को मिलता है। इस दिन बाबा की गौना बारात के अनूठे रंगोत्सव की परंपरा 357 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही है।
रंगभरी एकादशी होली से 5 दिन पहले आती है। ब्रज में होली की शुरुआत होलाष्टक से होती है। वहीं वाराणसी में यह रंग भरी एकादशी से शुरू होती है। इस वर्ष 24 मार्च को रंगभरी एकादशी से लेकर बुढ़वा मंगल तक अब हर तरफ “होली ही होली…” नज़र आएगी बनारस में। काशी के साथ ही जहाँ-जहाँ महादेव विराजमान हैं उन सभी मंदिरों में भक्त अपने भगवान को रंग-गुलाल से सराबोर कर उत्सव के रंग में डूब जाएँगे।
महाश्मशान की नगरी काशी में अन्नपूर्णा के रूप में निवास करने वाली देवी गौरी के पहली बार काशी आगमन के साथ ही बनारस में होली का आगाज़ हो जाता है। इस दिन से वाराणसी में रंग खेलने का सिलसिला प्रारंभ हो जाता है जो लगातार छह दिन तक चलता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव माता पार्वती से विवाह के बाद पहली बार काशी पधारे थे। इस खुशी में भगवान शिव के गण रंग-गुलाल उड़ाते हुए और खुशियाँ मनाते हुए आए थे। मान्यता है कि रंगभरी एकादशी को बाबा विश्वनाथ अपने भक्तों के साथ रंग और गुलाल से होली खेलते हैं। इस दिन भोलेनाथ की नगरी रंगों से सराबोर होती है, हर भक्त रंग और गुलाल में डूबा मस्त-मगन हो जीवन-उत्सव मनाता है।
रंगभरी एकादशी के दिन भक्तों संग होली के रंगों में सराबोर महादेव और माँ गौरा
बनारस में परंपरानुसार महाशिवरात्रि को विवाह बंधन में बंधने के बाद बाबा विश्वनाथ पहली बार माँ गौरा का गौना कराने उनके नइहर यानी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत के घर पहुँचते हैं। ससुराल पहुँचने पर बाबा विश्वनाथ का स्वागत घर की महिलाओं द्वारा मंगल गीत के साथ किया जाता है। काशी, महादेव के इस उत्सवप्रेमी मस्तमौला शहर को बस बहाना चाहिए। काशीपुराधिपति बाबा भोलेनाथ अपनी दुल्हन लेकर निकलें और उनके गण के रूप में काशीवासी उल्लासित न हों ऐसा कैसे संभव है। बाबा भोले के भक्त बाबा विश्वनाथ से आशीर्वाद लेकर रंग-गुलाल की होली खेलते, नाचते-गाते-झूमते गौने की बारात में निकलते हैं।
रंगभरी एकादशी पर भगवान शिव के पूरे परिवार की चल प्रतिमाएँ विश्वनाथ मंदिर में लाई जाती हैं और बाबा विश्वनाथ मंगल वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच नगर भ्रमण पर निकलकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
बात काशी की हो, माँ गौरी के गौने की हो और उनके अनन्य प्रेमी शिव के विवाह की बात छूट जाए ये कैसे हो सकता है। तो थोड़ी चर्चा शिव विवाह की भी कर लेते हैं।
महाशिवरात्रि पर शिव और पार्वती का विवाह बहुत ही भव्य तरीके से हो रहा था। कहते हैं, इससे पहले ऐसी शादी कभी नहीं हुई थी। उनकी शादी में एक से बढ़कर एक अतरंगी लोग शामिल हुए। देवताओं के साथ ही असुर भी वहाँ पहुँचे। शिव पशुपति भी हैं, मतलब सभी जीवों के देवता भी हैं, तो कहा जाता है सारे जानवर, कीड़े-मकोड़े और अन्य जीव भी उनकी शादी में बाराती बने। यहाँ तक कि भूत-पिशाच, अपंग और विक्षिप्त लोग भी उनके विवाह में मेहमान बन कर पहुँचे।
शिव विवाह (पेंटिंग साभार- Deolaliker)
यह एक शाही शादी थी। एक राजकुमारी की शादी हो रही थी। इसलिए विवाह समारोह से पहले एक अहम समारोह का आयोजन होना था। वर-वधू दोनों की वंशावली घोषित की जानी थी। एक राजा के लिए उसकी वंशावली सबसे अहम चीज होती है, जो उसके जीवन का गौरव होता है। ऐसे में पार्वती की वंशावली का बखान खूब धूमधाम से किया जाने लगा। यह कुछ देर तक चलता रहा और आखिरकार जब उन्होंने अपने वंश के गौरव का बखान खत्म किया, तो वे उस ओर मुड़े जिधर वर के रूप में महादेव शिव बैठे हुए थे।
सभी अतिथि इंतजार करने लगे कि वर की ओर से कोई उठकर शिव के वंश के गौरव के बारे में बोलेगा मगर किसी ने एक शब्द भी नहीं कहा। वधू का परिवार ताज्जुब करने लगा, ‘क्या उनके खानदान में कोई ऐसा नहीं है जो खड़े होकर उनके वंश की महानता के बारे में बता सके?’ मगर वाकई कोई नहीं था। वर के माता-पिता, रिश्तेदार या परिवार से कोई वहाँ नहीं आया था, क्योंकि उनके परिवार में कोई था ही नहीं। वह सिर्फ अपने साथियों, गणों के साथ ही आए जो विकृत जीवों की तरह दिखते थे।
फिर पार्वती के पिता पर्वत राज हिमालय ने शिव से अनुरोध किया, “कृपया अपने वंश के बारे में कुछ बताइए।” शिव कहीं शून्य में देखते हुए चुपचाप बैठे रहे। वह न तो दुल्हन की ओर देख रहे थे, न ही शादी को लेकर उनमें कोई उत्साह नजर आ रहा था। वह बस अपने गणों से घिरे हुए बैठे रहे और शून्य में घूरते रहे। वधू पक्ष के लोग बार-बार उनसे यह सवाल पूछते रहे, क्योंकि कोई भी अपनी बेटी की शादी ऐसे आदमी से नहीं करना चाहेगा, जिसके वंश का अता-पता न हो। उन्हें जल्दी थी, क्योंकि शादी के लिए शुभ मुहूर्त तेजी से निकला जा रहा था। मगर शिव मौन रहे।
कहा जाता है, समाज के लोग, कुलीन राजा-महाराजा और पंडित बहुत घृणा से शिव की ओर देखने लगे और तुरंत फुसफुसाहट शुरू हो गई, “इसका वंश क्या है? यह बोल क्यों नहीं रहा है? हो सकता है कि इसका परिवार किसी नीच जाति का हो और इसे अपने वंश के बारे में बताने में शर्म आ रही हो।”
फिर नारद मुनि, जो उस सभा में मौजूद थे, ने यह सब तमाशा देखकर अपनी वीणा उठाई और उसकी एक ही तार खींचते रहे। वह लगातार एक ही धुन बजाते रहे- टोइंग टोइंग टोइंग। इससे खीझकर पार्वती के पिता पर्वत राज अपना आपा खो बैठे, ‘यह क्या बकवास है? हम वर की वंशावली के बारे में सुनना चाहते हैं मगर वह कुछ बोल नहीं रहा। क्या मैं अपनी बेटी की शादी ऐसे आदमी से कर दूँ? और आप यह खिझाने वाला शोर क्यों कर रहे हैं? क्या यह कोई जवाब है?’ नारद ने जवाब दिया, “वर के माता-पिता नहीं हैं।” राजा ने पूछा, “क्या आप यह कहना चाहते हैं कि वह अपने माता-पिता के बारे में नहीं जानता?”
“नहीं, इनके माता-पिता ही नहीं हैं। इनकी कोई विरासत नहीं है। इनका कोई गोत्र नहीं है। इसके पास कुछ नहीं है। इनके पास अपने खुद के अलावा कुछ नहीं है।” पूरी सभा चकरा गई। पर्वत राज ने कहा, “हम ऐसे लोगों को जानते हैं जो अपने पिता या माता के बारे में नहीं जानते। ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति हो सकती है। मगर हर कोई किसी न किसी से जन्मा है। ऐसा कैसे हो सकता है कि किसी का कोई पिता या माँ ही न हो।”
नारद ने जवाब दिया, “क्योंकि यह स्वयंभू हैं। इन्होंने खुद की रचना की है। इनके न तो पिता हैं न माता। इनका न कोई वंश है, न परिवार। यह किसी परंपरा से ताल्लुक नहीं रखते और न ही इनके पास कोई राज्य है। इनका न तो कोई गोत्र है, और न कोई नक्षत्र। न कोई भाग्यशाली तारा इनकी रक्षा करता है। यह इन सब चीजों से परे हैं। यह एक योगी हैं और इन्होंने सारे अस्तित्व को अपना एक हिस्सा बना लिया है। इनके लिए सिर्फ एक वंश है- ध्वनि। आदि, शून्य प्रकृति जब अस्तित्व में आई, तो अस्तित्व में आने वाली पहली चीज थी- ध्वनि। इनकी पहली अभिव्यक्ति एक ध्वनि के रूप में है। ये सबसे पहले एक ध्वनि के रूप में प्रकट हुए। उसके पहले ये कुछ नहीं थे। यही वजह है कि मैं यह तार खींच रहा हूँ।”
महादेव शिव के बारे में ऐसी अनेक कथाएँ प्रचलित हैं। जो शिव के उस रूप का बोध कराती हैं जो कहता है, “शिव अर्थात वह जो नहीं है।” जो सर्वेश्वर सर्वशक्तिमान अनन्तकोटि ब्रह्माण्डनायक भगवान हैं। ये अलग बात है कि महादेव रसरीति से अत्यंत सुलभ साधारण भोलेनाथ हो जाते हैं। शास्त्रों में कहा गया है, प्रेमदेवता जिसको छू लेता है, वह कुछ-का-कुछ हो जाता है। अल्पज्ञ सर्वज्ञ हो जाता है और सर्वज्ञ अल्पज्ञ हो जाता है। अल्पशक्तिमान सर्वशक्तिमान हो जाता है, सर्वशक्तिमान का भी महाविनाश हो जाता है।
महाकाल के दरबार में रंगभरी एकादशी मानते भक्तगण
जिस नगरी के कर्ता-धर्ता स्वयं महादेव शिव हों उसकी बात ही क्या! काशी तो शिव के ताल पर नृत्य करती है। ये भी कहा जाता है कि प्रेम के स्पर्श से कुछ-का-कुछ हो जाता है। प्रेमरंग में रंगे हुए प्रेमी के लिए सम्पूर्ण संसार ही प्रेमास्पद प्रियतम हो जाता है। शिव अपने प्रेम की पराकाष्ठा की वजह से ही महादेव हुए, कल्याण के हर रंग के उन्नायक हुए। यह जो रंगभरी एकादशी है, इसमें भी रंग क्या है? जिसके द्वारा जगत रंगों से सराबोर हो उठता है- ‘उड़त गुलाल लाल भए अम्बर’ अर्थात् गुलाल के उड़ने से आकाश लाल हो गया। आकाश इस सारे भौतिक प्रपंच का उपलक्षण है और काशी भौतिकता से आध्यात्म की यात्रा का महामार्ग।
रंग भरी एकादशी: आज के ही दिन बाबा विश्वनाथ का गौना होता है और काशीवाशी बाबा को गुलाल लगाकर होली खेलने की अनुमति मांगते हैं।अद्धभुत मनभावन नज़ारा होता है…..
काशी प्राचीन काल से उत्सवधर्मिता और आध्यात्म की अलख जगाए हुए है, जब भी जीवन में खुशियों के रंग कम होने लगे तो आइए काशी, जहाँ मरघट पर भी जीवन का उत्सव नज़र आएगा। जहाँ मृत्यु अंत नहीं बल्कि नए जीवन का प्रस्थान बिन्दु है। मोक्ष का मार्ग है। रंगभरी एकादशी से काशी जीवन की सादगी में रंग और उमंग के साथ ही फक्कड़पने में भी मस्ती-उल्लास-आनन्द का सन्देश देती है।
तैयारियाँ पूरी
काशीपुराधिपति सपरिवार आज 24 मार्च को रंगभरी एकादशी पर काशी की गलियों में विचरण करने निकलेंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत परिवार की परंपरा के अनुसार बाबा के गौना की बारात पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के वर्तमान आवास से प्रस्थान करेगी। गौना के लिए इस बार मथुरा से खास 151 किलोग्राम अबीर गुलाल का बंदोबस्त किया गया है। काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन परंपरा का निर्वहन पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी की देखरेख में होगा। इसके पहले और रंगभरी एकादशी के सभी कार्यक्रम महंत के मौजूदा आवास टेढ़ी नीम स्थित महंत आवास में संपन्न होंगे। इस बार बाबा के गौने के लिए चंदन पाउडर, भस्म, फूलों और पत्तियों से बने हर्बल गुलालों की व्यवस्था है।
भगवान शिव पंचबदन चल रजत प्रतिमाओं को रजत पालकी में सवार करके काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह तक लाया जाएगा। परंपरा के अनुसार, आज मंगल ध्वनि, डमरू और शंखनाद के बीच बाबा पालकी पर सवार होकर सपरिवार नगर भ्रमण पर निकलते हैं। महंत के टेढ़ीनीम स्थित आवास पर तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं।
पुणे ग्रामीण पुलिस ने राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार के बारे में एक कथित आपत्तिजनक ट्वीट के संबंध में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
एनसीपी के एक अधिकारी अभिजीत भानुदास जाधव द्वारा दर्ज शिकायत के आधार पर बारामती तालुका पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले के विवरण के बारे में एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिकायतकर्ता ने शरद पवार की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस और उस ट्वीट के जवाब के बाद एक यूजर द्वारा पोस्ट किए गए आपत्तिजनक ट्वीट को लेकर पुलिस स्टेशन का दरवाजा खटखटाया था।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अधिकारी ने कहा, “ट्वीट और रिप्लाय दोनों के कंटेंट आपत्तिजनक प्रकृति की है। हमने इन अकाउंट्स की जाँच शुरू की है।” FIR भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत शत्रुता, घृणा या दुर्भावना पैदा करने या बढ़ावा देने से संबंधित थी।
भाजपा नेता सुरेश नखुआ के अनुसार, सोशल मीडिया यूजर वेदश्री उन लोगों में से एक हैं जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। वेदश्री ने स्तंभकार शेफाली वैद्य द्वारा पोस्ट किए गए एक ट्वीट को उद्धृत किया था जिसमें उन्होंने शरद पवार का मजाक उड़ाया था। बता दें कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने शरद पवार से अनिल देशमुख के अस्पताल में रहने के दौरान संवाददाता सम्मेलन को लेकर सवाल किया था तो उनकी बोलती बंद हो गई थी।
वेदश्री ने ट्वीट किया था, “बौखलाहट तो देखो ऐसी मानो गरम तवे पर रख दिया हो। दादा मजौ आ गयो।” बताया जा रहा है कि लेखक शेफाली वैद्य के खिलाफ भी एनसीपी के अधिकारी ने शिकायत दर्ज कराई हो। हालाँकि अभी यह साफ नहीं है कि शिकायत में उनका नाम है या नहीं। बता दें कि शेफाली वैद्य महा विकास अघाडी सरकार की मुखर आलोचक रही हैं।
वेदश्री का ट्वीट
शरद पवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो का हवाला देते हुए जहाँ उन्होंने अनिल देशमुख के बारे में परस्पर विरोधी तथ्यों का सामना किया, शेफाली वैद्य ने एक ट्वीट पोस्ट कर पूछा था कि वह कितना झूठ बोल रहे हैं।
बता दें कि सोमवार (मार्च 22, 2021) को पवार ने दावा किया कि देशमुख 15 से 27 फरवरी तक नागपुर में थे। पवार ने इसके जरिए यह साबित करने की कोशिश की थी कि फिर इस दौरान मुंबई में वाजे और देशमुख की मुलाकात कैसे संभव है। लेकिन, इस दावे को देशमुख ने ही गलत साबित कर दिया है। उन्होंने बताया है कि वे एक प्राइवेट प्लेन से नागपुर से मुंबई गए थे।
ट्विटर पर एक वीडियो जारी कर देशमुख ने कहा है कि नागपुर में 15 फरवरी को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। इसके तत्काल बाद आवश्यक अनुमति और सरकारी गाइडलाइन का पालन करते हुए होम क्वारंटाइन के लिए वे मुंबई निकल गए। उनका दावा है कि इसके बाद 27 फरवरी तक वह होम क्वारंटाइन में रहे।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में बहुचर्चित आरुषि गैंगरेप हत्याकांड में पॉक्सो कोर्ट (POCSO Court) ने अपना निर्णय दे दिया है। चलती कार में आरुषि के साथ गैंगरेप करने के बाद उसकी हत्या करने वाले तीन दरिंदों इजराइल, जुल्फिकार और दिलशाद को कोर्ट ने फाँसी की सजा सुनाई है। इस वीभत्स हत्याकांड के पश्चात पुलिस की लापरवाही भी सामने आई थी।
दरिंदों की हैवानियत
इजराइल, जुल्फिकार और दिलशाद ने 2 जनवरी 2018 को ट्यूशन पढ़ कर घर लौट रही आरुषि (16 वर्ष) का अपरहण कर लिया था। NH-91 में चलती कार में उस मासूम के साथ गैंगरेप किया गया। इसके पश्चात गला दबाकर उसकी हत्या कर दी गई और उसके शव को दादरी क्षेत्र के राजवाहे में एक नहर में फेंक दिया गया।
4 जनवरी 2018 को आरुषि की लाश मिली। परिजनों ने आरुषि की हत्या के जुर्म में इजराइल, जुल्फिकार और दिलशाद को नामजद कराया। इतने दिनों की सुनवाई के बाद अब आरुषि के हत्यारों को सजा मिली। आरुषि की माँ तीनों हैवानों को फाँसी पर लटकता हुआ देखना चाहती हैं।
मौज-मस्ती के लिए अपहरण और गैंगरेप
तब गिरफ्तार किए गए जुल्फिकार और दिलशाद ने बताया था कि वो मौजमस्ती के लिए रास्ते से किसी लड़की को उठाने का प्लान बनाए थे। ऑल्टो कार से वे लोग जब जा रहे थे, तो एक अकेली लड़की को साइकिल से जाते देखा। ट्यूशन से लौट रही इस लड़की को इन लोगों ने डेटसन शोरुम के बगल वाली गली में घुसने के साथ ही कार में खींच लिया।
पुलिस को जुल्फिकार ने बताया था कि लड़की को कार में खींचने के बाद चलती गाड़ी में पिछली सीट पर इजराइल उर्फ मेलानी ने उसका रेप किया था। दिलशाद हाथ पकड़े हुए था। लड़की जब चिल्लाने लगी थी तो जुल्फिकार गाड़ी चलाता रहा और दिलशाद व इजराइल उर्फ मेलानी ने लड़की के दुप्पटे से गला घोंट कर उसकी हत्या कर दी थी।
पहले तो इस केस की जाँच में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई थी। तत्कालीन चौकी इंचार्ज ने घटना के पश्चात बरामद किए गए सामान को कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया जबकि बरामद किया हुआ सामान केस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। कोर्ट की नाराजगी के पश्चात पुलिस जाँच में तेजी आई थी।
पुलिस ने जाँच पूरी करके इजराइल, जुल्फिकार और दिलशाद के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किया। आरोप पत्र और सबूतों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश ने तीनों अपराधियों को एक नाबालिग के अपहरण, बलात्कार और हत्या का दोषी पाया और उन्हें जुर्माने के साथ फाँसी की सजा सुनाई।
पिछले डेढ़ महीने से भी कम समय में थूक कर रोटी बनाने का अब चौथा मामला सामने आ गया है। ताज़ा मामला दिल्ली का है। ये हाल में दिल्ली का इस तरह का दूसरा मामला है। दरअसल, दिल्ली में थूक लगा कर तंदूरी रोटी बनाने का एक और वीडियो वायरल हुआ। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज क के भजनपुरा निवासी मोहम्मद खालिक को गिरफ्तार कर लिया है। वायरल वीडियो उसी क्षेत्र के मदीना ढाबा का है।
बटर नान खा लो मित्रो, एक और वीडियो थुक कर रोटी बनाते हुए सामने आया है, पुलिस ने मुहम्मद खालिक को गिरफ्तार कर लिया है, कोई नही तुम गंगा जमुनी तहजीब कायम रखो pic.twitter.com/xlxD1RpxsT
आरोपित मोहम्मद खालिक इसी ढाबे पर तंदूरी रोटी बनाने का कार्य करता है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि रोटी बनाते समय मोहम्मद खालिक उस पर थूकता है, फिर उसे तंदूर में सेंकने के लिए लगा देता है। जाँच के बाद पुलिस ने IPC की धरा 269-70 (उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रम फैलना संभाव्य हो) और 272 (किसी खाद्य या पेय में खतरनाक वस्तु मिलाना) के तहत FIR दर्ज की।
साथ ही उसके खिलाफ महामारी एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। मोहम्मद खालिक लगभग एक दशक पहले ही अपने गाँव से काम की तलाश में दिल्ली आया था। पहले वो अजीत नगर में एक ढाबे पर रोटियाँ बनाने का काम करता था। फिर वो अपने जीजा के साथ मोहनपुरी आ गया। मदीना ढाबे पर उसके साथ 5-6 और भी लोग हैं जो काम करते हैं। इस ढाबे का मालिक भी उसकी जान-पहचान का ही है।
बताते चलें कि पिछले कुछ दिनों में इस तरह का पहला मामला मेरठ से सामने आया, जहाँ नौशाद उर्फ़ सोहैल को थूक कर रोटी बनाते हुए वीडियो वायरल होने के बाद गिरफ्तार किया गया। उसका कहना है कि वो 10-15 वर्षों से ऐसा कर रहा है। गाजियाबाद में मोहसिन एक मांगलिक कार्यक्रम में ऐसा ही करते हुए पकड़ा गया। दिल्ली में होटल चाँद में सबी अनवर और इब्राहिम भी ऐसी ही हरकतें करते हुए कैमरे में कैद हुए।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। इस बीच कूचबिहार जिले के दिनहाटा टाउन मंडल के अध्यक्ष अमित सरकार का शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। मंडल अध्यक्ष का शव दिनहाटा में लटकते हुए हालत में बरामद किया गया।
Bjp Mandal President, Dinhata Coochbehar murdered and hanged 72 hrs before elections
The opposition are murderers, they are criminals. They should be prosecuted immediately@ECISVEEP you are allowing murderers to contest?
अमित सरकार की हत्या को लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कहा है कि टीएमसी की ओर से इस हत्या को अंजाम दिया गया है। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कहा कि टीएमसी चाहती है कि ऐसा करके वह बीजेपी कार्यकर्ता को डर कर घर में बैठा देंगे लेकिन हम लोग ऐसा नहीं होने देंगे। चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए लगातार प्रयास जारी रखेंगे।
Amit Sarkar, mondal president of Dinhata Town, was hanged to death by TMC goons, just 72 hours before the first phase.
Is this what TMC meant by Khela Hobe?
Bengal has been reduced to blood field with political killings becoming the norm. BJP has lost over 130 of its cadres… pic.twitter.com/M1tzMkmXry
अमित सरकार का शव दिनहाटा वेटनरी हॉस्पिटल के परिसर से बरामद किया गया है। मौके पर पहुँच कर पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
मंडल अध्यक्ष का शव मिलने के बाद बीजेपी आईटीसेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने कहा है कि टीएमसी के गुंडों ने पहले चरण के वोटिंग से 72 घंटे पहले बीजेपी नेता की हत्या की है। क्या खेला होवे का यही मतलब है? इस समय बंगाल राजनीतिक हत्याओं का गढ़ बन गया है। बीजेपी ने 130 से ज्यादा कैडर राज्य में खो दिए हैं।
बता दें कि पश्चिम बंगाल में कुल आठ चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण में 30 सीटों पर 27 मार्च को वोटिंग होगी। वहीं, दूसरे चरण में 30 सीटों पर एक अप्रैल को, तीसरे चरण में 31 सीटों पर 6 अप्रैल को, चौथे चरण में 44 सीटों पर 10 अप्रैल को, पाँचवें चरण में 45 सीटों पर 17 अप्रैल को, छठे चरण में 43 सीटों पर 22 अप्रैल को, सातवें चरण में 36 सीटों पर 26 अप्रैल को और आठवें और अंतिम चरण में 35 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएँगे। वहीं, पाँच राज्यों में एक साथ 2 मई को नतीजे घोषित किए जाएँगे।
गौरतलब है कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल में एक भाजपा कार्यकर्ता की पीट पीट कर हत्या कर दी गई और 6 अन्य बुरी तरह घायल हुए। यह घटना शनिवार (12 दिसंबर 2020) को हुई जब कार्यकर्ताओं का एक समूह उत्तर 24 परगना जिले में गृह संपर्क अभियान (डोर टू डोर) के लिए निकला था। सैकत भावल (Saikat Bhawal) उस समूह में ही शामिल थे, घटना के बाद मौके पर मौजूद लोग उन्हें उपचार के लिए कल्याणी स्थित जेएनएम अस्पताल लेकर गए जहाँ डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बांकुड़ा के बिष्णुपुर में आज (मार्च 24, 2021) चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा। ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि बीजेपी बाहर से गुंडे ला रही है और बंगाल में प्रचार कर रही है। बंगाल सीएम ने जनसभा में कहा कि भाजपा उत्तर प्रदेश से भगवाधारी और गुटखा चबाने वाले गुंडों को यहाँ पर भेज रही है और वो लोग हमारे कल्चर को बर्बाद कर रहे हैं।
उन्होंने आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री पद का बेहद सम्मान करती हैं। लेकिन नरेंद्र मोदी सबसे बड़े झूठे हैं। उन्होंने जो 15 लाख देने का वादा किया था उसका क्या हुआ। सीएम बनर्जी ने दिल्ली की सड़कों को महीनों से घेर कर बैठे किसानों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर पीएम ने इस मामले पर चुप्पी क्यों साधी हुई है।
#WATCH | They (BJP) are bringing goons from outside. We don’t call people who hail from Bengal ‘bohiragoto’ (outsider)…Goons from Uttar Pradesh donning saffron clothes & chewing Pan Bahar are being sent here, they are destroying our culture: West Bengal CM in Bishnupur pic.twitter.com/G8N9HrSn9D
ममता बनर्जी ने जनसभा में कहा “नरेंद्र मोदी मिथ्यावादी हैं। नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अडानी सब लूट कर चले जाएँगे। उत्तर प्रदेश से भगवा कपड़ा पहने हुए पान चबाते हुए लोग हमारे बंगाल की संस्कृति खत्म करने आए हैं।”
वह बोलीं, “सिर्फ नरेंद्र मोदी का गैस बैलून चलेगा, जो झूठ से भरा हैं। अगर हम खाद बिना पैसे देते हैं तो आपको गैस मुफ्त में देना होगा। मैं जो बोलती हूँ वो करके दिखाती हूँ। आपने बोला- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, लेकिन एक भी पैसा नहीं दिया। हमने दिया, क्योंकि हम मोदी के तरह झूठ बात नहीं करते हैं।”
ममता बनर्जी ने आगे दावा करते हुए कहा, “हमने बंगाल में 30 प्रतिशत गरीबी को कम किया है। लेकिन बीजेपी ने दिल्ली के दंगा में कितनों का खून बहाया भूल गए हैं। उत्तर प्रदेश में कितना खून बहाया भूल गए। CAA-NRC के लिए कितने लोगों को मारा आप भूल गए।” जनसभा में लोगों से अपील करते हुए ममता ने कहा कि जो सीपीएम के समर्थक हैं मैं उनसे अनुरोध करके कहती हूँ कि आप बीजेपी को वोट देकर अपना वोट बर्बाद न करें।
बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (मार्च 24, 2021) कांथी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए दावा किया था कि बंगाल के लोग ममता बनर्जी सरकार का खेला समझ गए हैं और दो मई को उसकी विदाई तय है। उन्होंने कहा कि बंगाल के कोने से कोने से अब एक ही आवाज़ आ रही है, बंगाल के हर घर से एक ही आवाज़ आ रही है, बंगाल के हर मुख से एक ही आवाज़ आ रही है कि 2 मई दीदी जाछे और आसोल परिवर्तन आछे।