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‘मेरे सिर पर लात मारिए दीदी, पर मैं आपको बंगाल के विकास को लात नहीं मारने दूँगा’: बाँकुड़ा व रामपाड़ा में PM ने कहा- 2 मई, दीदी गई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (मार्च 21, 2021) को पश्चिम बंगाल के बाँकुड़ा में एक विशाल रैली को सम्बोधित किया। अगले 10 दिनों में राज्य में उनकी 4 और रैलियाँ होनी हैं। इससे पहले उन्होंने खड़गपुर में रैली को सम्बोधित किया था। वहीं आज असम के बोकाखाट में उन्होंने एक जनसभा को सम्बोधित किया। पीएम मोदी ने कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में इस साल अपनी पहली चुनावी रैली का आगाज़ किया था।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद किया कि जब वो लोकसभा चुनाव के समय लोगों का आशीर्वाद माँगने आए थे, तो यहाँ दीदी ने उन्हें रोकने के लिए क्या-क्या किया था। पीएम मोदी ने याद किया कि तब रैली ग्राउंड तक आने वाले सारे रास्ते बंद करवा दिए थे, टेंट हाउस से कुर्सियाँ तक न मिलें इसके लिए पुलिस को लगाया था। उन्होंने कहा कि बाँकुरा की ये तस्वीर साक्षी है कि बंगाल के लोगों ने ठान लिया है- 2 मई, दीदी गई।

पीएम मोदी ने ‘आशोल पॉरिबोर्तोन’ की बात करते हुए कहा कि ये बंगाल के गौरव को बढ़ाने के लिए और बंगाल में एक ऐसी सरकार लाने के लिए है, जो गरीबों की सेवा करे, उनकी तकलीफें दूर करें, बंगाल में एक ऐसी सरकार लाने के लिए जो सरकारी योजनाओं का पैसा गरीब तक पहुँचाए, बंगाल में एक ऐसी सरकार लाने के लिए जो तोलाबाजों, सिंडिकेट वालों को जेल भेजे, भ्रष्टाचारियों पर सख्त कार्रवाई करे।

प्रधानमंत्री ने वादा किया कि यही ‘आशोल परिवर्तन’ बंगाल में BJP लाकर दिखाएगी। उन्होंने कहा कि आज जब वो बाँकुड़ा आए हैं, तो यहाँ रामपाड़ा के बहनों और भाइयों को भी विशेष तौर पर राम राम कहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि रामपाड़ा की चर्चा आजकल पूरे देश में है और रामपाड़ा में आप राम पुकारेंगे तो हर घर से राम निकलेगा। उन्होंने कहा कि बंगाल में दीदी के लोग दीवार पर तस्वीरें बना रहे हैं और तस्वीरों में दीदी मेरे सिर पर अपना पैर मार रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन तस्वीरों में ममता बनर्जी मेरे सिर के साथ फुटबॉल खेल रही हैं। उन्होंने सवाल दागा कि आप बंगाल के संस्कार और यहाँ की महान परंपरा का अपमान क्यों कर रही हो दीदी? ये बंगाल तो देश को दिशा देने वाला है। उन्होंने ममता को सम्बोधित करते हुए कहा कि अगर आप चाहती हैं तो आप अपना पैर मेरे सर पर रख सकती हैं, मुझे लात मार सकती हैं। लेकिन दीदी मेरी दूसरी बात भी कान खोलकर सुन लें।

पीएम मोदी ने कहा, “मैं आपको अब बंगाल के विकास को लात नहीं मारने दूँगा। मैं आपको बंगाल के सपनों को लात नहीं मारने दूँगा। तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति ने आपको क्या बना दिया है। आपने अपना ये असली चेहरा 10 साल पहले दिखा दिया होता तो बंगाल में कभी आपकी सरकार नहीं बनती। ये हिंसा, ये अत्याचार, ये उत्पीड़न ही करना था तो फिर माँ-माटी-मानुष की बात क्यों की आपने?”

पीएम मोदी ने तंज कसा कि वो जितना दीदी से आपके सवाल पूछते हैं, उतना वो उन पर गुस्सा करती हैं। बकौल पीएम मोदी, अब तो कह रही हैं कि उनको मेरा चेहरा भी पसंद नहीं है। अरे दीदी, लोकतंत्र में चेहरा नहीं, जनता की सेवा, जनता के लिए किया गया काम कसौटी पर होता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दीदी और उनकी सरकार ने 10 साल के दौरान पश्चिम बंगाल में क्या खेला किया, ये पूरा क्षेत्र इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।

पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि स्वर्गीय अजीत मूर्मू जैसे हमारे अनेक आदिवासी साथी तृणमूल के ‘खेला’ के कारण शहीद हो गए। उन्होंने आगे कहा कि यहाँ का किसान साल में सिर्फ एक फसल लेने के लिए मजबूर है और सिंचाई व्यवस्थाएँ जर्जर क्यों हैं, परियोजनाएँ लटकी क्यों हैं दीदी? उन्होंने पूछा कि युवा परेशान हैं, चाकरी, उद्योग, निवेश कहाँ है दीदी? आपने 10 साल में सिर्फ खोखली घोषणाएँ की हैं, जमीन पर काम कहाँ है दीदी?

पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार हर घर पाइप से जल पहुँचाने के लिए अभियान चला रही है, जिसके लिए सैकड़ों करोड़ रुपए बंगाल सरकार को दिए गए हैं लेकिन यहाँ की बहनें-बेटियाँ, बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। प्रधानमंत्री ने पूछा कि नल कहाँ है दीदी, जल कहाँ है दीदी, यहाँ खेतों में पानी क्यों नहीं है दीदी? पीएम ने वादा किया कि बंगाल में आपको भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्थाएँ मिलें, इसके लिए भाजपा सरकार जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “बंगाल में विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए भाजपा सरकार जरूरी है। आपके कॉलेज, यूनिवर्सिटिज की आधुनिकता बढ़े, इसके लिए भाजपा सरकार जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत, पीएम किसान सम्मान निधि, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांस्फर से जुड़ी योजनाओं में स्कैम नहीं कर सकते थे, इसलिए इनको लागू करने से ही इनकार कर दिया। साथ ही कहा कि दीदी अभी से EVM की रट लगा रही है, लेकिन 10 साल इसी EVM से सत्ता में रहीं।

राजस्थान में पोर्न वीडियो देख 12 साल के भाई ने 6 साल की बहन का किया रेप, ऐसे गंदी वीडियो का आदी बना बच्चा

कोरोना का सबसे ज्यादा बुरा असर बच्‍चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ऐसे में ऑनलाइन एजुकेशन ही एक मात्र विकल्प बचा है। मोबाइल पर चल रहीं क्लासेस मददगार भी हैं, वहीं इनमें कई तरह का खतरा भी हैं। राजस्थान से एक ऐसी ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जो माता पिता को बड़ी चिंता में डालने वाली वाली है। यहाँ एक 12 साल के बच्चे ने पोर्न वीडियो देखकर अपनी 6 साल की बहन का रेप कर दिया। इस घटना के बाद लाखों पेरेंट्स के लिए सावधान हो जाना चाहिए। 

पढ़ाई के बाद अश्लील वीडियो देखने लगा

दरअसल, हैरान कर देने वाला यह मामला श्रीगंगानगर जिले का है, जहाँ रायसिंह नगर में रहने वाले बच्चे ने इस घटना को 4 दिन पहले अंजाम दिया है। माता-पिता ने बच्चे की पढ़ाई के लिए मोबाइल फोन खरीद कर उसे दिया था। लेकिन वह पढ़ाई के बाद अश्लील वीडियो देखने लगा। वह ना तो बाहर खेलने जाता और ना ही अपने दोस्तों से बात करता था। जब माता-पिता कुछ कहते तो जवाब देता कि मैं पढ़ाई कर रहा हूँ। 

आधी रात को देखता था पोर्न वीडियो

ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान पोर्न वीडियो देखने के बाद उसके दिमाग में निगेटिविटी आती गईं। इतना ही नहीं वह घरवालों के सोने के बाद नींद से जागकर चुपके से देर रात तक अश्लील वीडियो देखा करता था। जिसका परिणाम यह हुआ है कि उसने इस छोटी से उम्र में अपनी ही 6 साल की बहन का रेप कर दिया।

ऐसे गंदी वीडियो का आदी बना बच्चा

पुलिस ने बच्चे को गिरफ्तार कर बाल सुधार केंद्र भेज दिया है। जाँच के दौरान सामने आया है कि आरोपित बच्चा 6ठी क्लास में पढ़ता है। वह पिछले एक साल से स्कूल नहीं जा रहा है। पूछताछ में बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई करने के दौरान उसे पोर्न वीडियो की लिंक आई थी। जिसे उसने गलती से क्लिक कर दिया। इसके बाद वह इसे रोज देखने लगा और इस शर्मनाक घटना को अंजाम दे दिया।

माता-पिता रहें ऐसे सावाधान

पेरेंट्स जो भी मोबाइल बच्चे को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए दें रहे हैं उसमें सारे ऐप डिलीट कर दें। जूम समेत किसी भी ऐप में जब तक जरूरत न हो तब तक कैमरा ऑन न करें। बच्चा जिस भी डिवाइस में ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं उसमें एंटीवायरस जरूर एक्टिव रखें। बच्चों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान माता-पिता उनके साथ रहें।

ज्वालामुखी मंदिर से हटाए गए नवनियुक्त सेवादार जशन दीन और शकीन मोहम्मद, हिंदू महासभा के विरोध के बाद भी मिलती रहेगी सैलरी

विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर में समुदाय विशेष के दो कर्मियों की नियुक्ति लंगर सेवादार के रूप में करने पर हिमगिरी हिंदू महासभा ने इसका पुरजोर विरोध किया था। अब बताया जा रहा है कि दोनों कर्माचारियों को हटा दिया गया है, लेकिन मंदिर भी उनको सैलरी देगा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे प्रपत्र के अनुसार जशन दीन और शकीन मोहम्मद नाम के दो लोगों को नियुक्त किया गया था, जिसको लेकर काफी विवाद हुआ।

हिमगिरि हिंदू महासभा प्रदेश सचिव किशन शर्मा की अगुवाई में दर्जनों सदस्यों ने एसडीएम अंकुश शर्मा को इन नियुक्तियों को निरस्त करने के लिए ज्ञापन सौंपा था और चेताया था कि अगर यह नियुक्तियाँ निरस्त नहीं होती हैं तो सभा प्रदेश व्यापी आंदोलन की राह अपनाएगी।

हिमगिरि हिंदू महासभा प्रदेश सचिव किशन शर्मा ने बताया कि हिंदू मंदिर ज्वालामुखी में 32 वर्षों से कार्यरत कर्मियों को स्थायी नियुक्ति से दरकिनार कर विशेष समुदाय के दो कर्मियों को स्थायी निुयक्ति दिया। जिसे तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए। हिमगिरी हिंदू महासभा ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की माँग की थी।

अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू संगठन केसरिया हिन्दू वाहिनी ने भी इस मामले में अपना मोर्चा खोल दिया था। जारी बयान में अंतराष्ट्रीय हिंदू संगठन केसरिया हिन्दू वाहिनी के जिलाध्यक्ष चंद्रभूषण मिश्र ने कहा था कि संगठन ऐसी नियुक्ति का कड़ा विरोध करता है।

उन्होंने मंदिर प्रशासन से इस नियुक्ति को रद्द करने की माँग की। केसरिया हिंदू वाहिनी इस घटना पर पूरी नजर बनाए हुए है और अगर मंदिर प्रशासन इन नियुक्तियों को रद नहीं करता तो संगठन जिला प्रशासन व सरकार को इसका विरोध करते हुए ज्ञापन सौंपता और प्रदर्शन करता।

वहीं विश्व हिंदू परिषद के कांगड़ा विभाग के सह संगठन मंत्री कुलदीप राणा ने सवाल उठाया था कि कुछ हिंदू विरोधी असामाजिक तत्व हिंदू देवी देवताओं का अपमान करते हैं, तो हिंदू मंदिरों में ऐसे लोग बतौर कर्मचारी क्यों रखे गए। उधर, संगठनात्मक जिला देहरा के कार्य अध्यक्ष प्रशांत शर्मा ने भी कहा था कि प्रशासन जल्द से जल्द इन विशेष समुदाय के कर्मचारियों को मंदिर न्यास से निकाले।

पहले बाँध कर लोहे की रॉड से मारा, फिर बाइक से आधा किलोमीटर घसीटा: एजाज शेख ने कुत्ते के साथ की बर्बरता, FIR दर्ज

जहाँ एक तरफ महाराष्ट्र में कुत्तों के रेप की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य गुजरात में भी एक निर्दोष पशु के साथ क्रूरता का मामला सामने आया है। मच्छीपीठ के एक व्यक्ति ने एक कुत्ते की जम कर पिटाई की और बाइक से घसीटा। एक पशु अधिकार कार्यकर्ता ने एजाज शेख को जानवर के साथ इस तरह की बर्बरता करते देखा तो उसे पुलिस को सूचित किया। गुरुवार (मार्च 18, 2021) की रात थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई गई।

आरोपित की उम्र 25-30 साल के करीब है। पुलिस ने कहा है कि एजाज शेख को ‘लर्निंग डिसेबिलिटी’ है, अर्थात वो चीजें जल्दी भूल जाता है। शहर में पशु अधिकार के लिए कार्य करने वाले दयानंद त्रिवेदी ने कहा कि उन्हें रात के 8 बजे किसी ने फोन कॉल कर के सूचना दी कि वार्ड संख्या 8 में एक कुत्ता घायल अवस्था में पड़ा हुआ है। उन्होंने देखा कि उस कुत्ते के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे जख्म थे।

उन्होंने तुरंत उस जख्मी पशु को अस्पताल में भर्ती कराया। बाद में कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि उस व्यक्ति ने कुत्ते की जम पर पिटाई की थी। सबसे पहले तो एजाज शेख ने उस कुत्ते को बेल्ट से बाँध दिया, फिर लोहे के रॉड से उस पर कई बार प्रहार किया। इसके बाद उसने अपनी बाइक से उस कुत्ते को बाँध दिया और बाइक चलाने लगा। उसने लगभग आधा किलोमीटर तक कुत्ते को बाइक के साथ घसीटा

जब वो अपने घर से वार्ड नंबर 8 पहुँच गया तो उसने उसे वहीं घायल अवस्था में छोड़ दिया और खुद भाग गया। कुत्ते के दाँत बुरी तरह टूट गए हैं और उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। एजाज शेख के खिलाफ एनिमल वेलफेयर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। लोग उस कुत्ते को गली में खाना भी देते थे। उन्हें पता ही नहीं है कि उसकी ऐसी क्या गलती थी कि आरोपित ने इतनी बुरी तरह उसके साथ क्रूरता की।

पिछले एक महीने में मुंबई में कुत्तों के साथ रेप की 4 वारदातें सामने आई हैं। 20-25 वर्ष का तौफीक अहमद एक कुतिया का रेप करते सीसीटीवी में पकड़ा गया। मुंबई पुलिस ने 68 वर्षीय अहमद शाह को कुतिया के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया था। 2020 के अक्टूबर माह में मुबंई के पवई में गैलेरिया शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के अंदर नूरी नाम की एक कुतिया का रेप हुआ था। नेरुल रेलवे स्टेशन के बाहर एक कुतिया के रेप की वारदात सामने आई थी। 

‘गैर-हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित’- 1 नहीं, 150 मंदिरों पर लगा बैनर, असलम चौधरी की धमकियों का उत्तराखंड में जवाब

डासना शिव मंदिर में असलम चौधरी और मुस्लिम संगठनों की धमकी की प्रतिक्रिया में हिंदू युवा वाहिनी ने उत्तराखंड के 150 मंदिरों के प्रवेश द्वार पर बैनर लगाकर कहा है कि यहाँ गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबन्ध है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू संगठन का कहना है कि देहरादून के चकराता रोड, सुद्धोवाला और प्रेम नगर इलाकों में स्थित मंदिरों पर बैनर लग गए हैं, राज्य के बाकी मंदिरों पर भी यह बैनर लगाने की उनकी योजना है।

हिंदू युवा वाहिनी के राज्य महासचिव जीतू रंधावा ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया के रिपोर्टर इशिता मिश्रा को बताया कि यति नरसिंहानंद सरस्वती को समर्थन देने के लिए यह कदम उठाया गया है। संयोग से, किशोर लड़के आसिफ के साथ हुई घटना के बाद, धौलाना के बसपा विधायक असलम चौधरी ने आरोप लगाया था कि मंदिर उनके पूर्वजों का है, उन्होंने कहा था कि वह मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने वाले बोर्ड को हटा देंगे।

रंधावा ने दावा किया कि “असलम जैसों के खतरे का मुकाबला करने के लिए, हम अब उत्तराखंड के हर मंदिर के बाहर इस तरह के बैनर लगाएँगे।” रंधावा ने यह भी कहा, “मंदिर सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के लिए पूजनीय स्थान है और इसलिए, केवल उन्हीं लोगों को अनुमति दी जाएगी जो इस धर्म के हैं।”

दरअसल, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के डासना देवी मंदिर में आसिफ नाम के एक बच्चे की पिटाई का वीडियो वायरल करते हुए यह दावा किया गया था कि पानी पीने के कारण उसके साथ ऐसा किया गया। उसके बाद तो मंदिरों को बदनाम करने का एक बार फिर से सिलसिला सा चल पड़ा। यहाँ तक कि तमाम वामपंथी गिरोह के लोग और मीडिया संस्थान बिना महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का पक्ष जाने पूरे हिन्दू समुदाय को एक बार फिर से असहिष्णु साबित करने में लग गए थे।

लेकिन, जल्द ही वामपंथी और हिन्दू विरोधी ताकतों की कलई तब खुली जब मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने पूरा सच बताया कि आसिफ बच्चा नहीं है और न वह यहाँ पानी पीने आया था। बल्कि ऐसों का मकसद मंदिर में चोरी करना या रेकी करना होता है तो वहीं बच्चे की पिटाई के बाद चर्चा में आए श्रृंगी यादव ने बताया कि आसिफ शिवलिंग पर पेशाब कर रहा था इसलिए मारा। पानी तो बस पकड़े जाने पर बहाना है। महंत जी ने मंदिर के गेट पर लगे उस बोर्ड के बारे में भी बताया जिस पर मुसलमानों के मंदिर परिसर में प्रवेश न करने की बात लिखी है।

डासना मंदिर के बाहर लगा बोर्ड

इस मामले के तूल पकड़ते ही राजनीति होने लगी। यहाँ तक कि बसपा विधायक असलम चौधरी ने धमकी दे दी कि मंदिर उनके पूर्वजों का है और वह जुमे की नमाज के बाद मंदिर में प्रवेश करेंगे और वह बोर्ड भी हटाया जाएगा, जिस पर लिखा है- “यह मंदिर हिन्दुओं का पवित्र स्थल है। यहाँ मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है।”

असलम चौधरी के धमकी का ही नतीजा रहा कि बोर्ड हटाने को कौन कहे बल्कि मंदिर के गेट पर उससे बड़ा बोर्ड हिन्दू संगठनों ने लगाकर एक तरह से असलम चौधरी की धमकी का जवाब अपनी दृढ़ता से दिया कि गया वो दौर अब हिन्दू इतना कमजोर नहीं है।

असलम चौधरी और मुस्लिम संगठनों के धमकियों की प्रतिक्रिया ही हिन्दू युवा वाहिनी के अनुसार उत्तराखंड के मंदिरों में देखने को मिल रही है। हिंदू युवा वाहिनी के सदस्यों ने देहरादून के कई मंदिरों में बैनर लगा दिए हैं। जिसपर लिखा है- “यह तीर्थ हिन्दुओं का प्रवेश स्थल है और इसमें गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है।”

देहरादून के मंदिरों में लगे बैनर

हिंदू युवा वाहिनी के सदस्यों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि वे उत्तराखंड के सभी मंदिरों में इस तरह के बैनर लगाने की योजना बना रहे हैं। वर्तमान में, देहरादून के चकराता रोड, सुद्धोवाला और प्रेम नगर इलाकों में स्थित मंदिरों में बैनर लगा दिए गए हैं।

जिसका हुआ रेप, ACP ने रिश्वत में उसी से माँगी अस्मत… रंगे हाथ पकड़ाने के बाद भी राजस्थान सरकार नर्म, नहीं किया बर्खास्त

राजस्थान की गहलोत सरकार ने रेप पीड़िता से रिश्वत में अस्मत माँगने वाले पुलिस अधिकारी को बर्खास्त करने के बजाय समय से पहले ही रिटायर कर दिया है। सरकार ने नरम रुख दिखाते हुए एसीपी कैलाश बोहरा को बर्खास्त करने के बजाय उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दे दिया है। इसके साथ ही उन्हें तीन महीने की एडवांस सैलरी भी दी गई है। गहलोत सरकार का ये फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है।

सोमवार को ही सदन कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने विधानसभा में कैलाश बोहरा को बर्खास्त करने का ऐलान किया था। उन्होंने साफ किया था कि किसी भी वक्त बोहरा को बर्खास्त करने के आदेश जारी किए जा सकते हैं।

शांति धारीवाल के ऐलान से उलट यूटर्न लेते हुए गहलोत सरकार ने एसपी बोहरा को बर्खास्त करने की बजाय उन्हें कंपलसरी रिटायरमेंट दे दिया है। गृह विभाग की तरफ से शनिवार (मार्च 20, 2021) को इस बारे में आदेश जारी किया गया।

आरोपित पुलिस अधिकारी का रिटायरमेंट

रेप पीड़िता से रिश्वत में इज्जत माँगने वाले एसीपी कैलाश बोहरा को कंपलसरी रिटायरमेंट देने के मामले में सरकार ने हाई लेवल स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिशों का हवाला दिया है। इसके साथ ही एसीपी बोहरा को तीन महीने की एडवांस सैलरी भी मिलेगी।

एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने RPF अफसर कैलाश बोहरा को रविवार (मार्च 14, 2021) को उनके ऑफिस में पीड़िता के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा। खबरों के अनुसार, पीड़िता ने जवाहर सर्कल थाने में किसी युवक के खिलाफ दुष्कर्म और धोखाधड़ी समेत 3 मामले दर्ज करवा रखे हैं। 

इसी केस की जाँच का हवाला देकर अधिकारी बार-बार युवती को अपने ऑफिस बुलाता और कई बार ड्यूटी पूरी होने के बाद भी मिलने के लिए दबाव बनाता। युवती लंबे समय से अधिकारी के बर्ताव से परेशान थी। उसने एसीबी के डीजी बीएल सोनी से इसकी शिकायत की। डीजी ने बताया कि आरोपित अधिकारी महिला अत्याचार अनुसंधान यूनिट में बतौर प्रभारी सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) तैनात था। 

युवती ने 6 मार्च को कैलाश बोहरा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में युवती ने कैलाश पर रिश्वत माँगने और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसी के बाद एसीबी ने अधिकारी के ख़िलाफ़ उपयुक्त एक्शन लिया।

पहले कही गई थी बर्खास्तगी की बात

मामला सामने आने के बाद विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने कहा था कि कैलाश बोहरा को बर्खास्त किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि ये मामला काफी रेयर है इसीलिए बिना किसी प्रक्रिया के उन्हें आसानी से बर्खास्त किया जा सकता है। लेकिन गहलोत सरकार ने नरमी दिखाते हुए उन्हें बर्खास्त करने की बजाय कंपलसरी रिटायरमेंट दे दिया है।

लगातार 3 बार सांसद और शुभेंदु के पिता ‘जय श्री राम’ बोल BJP में शामिल, अमित शाह से कहा – ‘बंगाल को बचाना है’

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और नंदीग्राम से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ बतौर भाजपा उम्मीदवार ताल ठोक रहे शुभेंदु अधिकारी के परिवार के सदस्य कब भाजपा (BJP) में शामिल होंगे, इस पर अटकलें चल रही थीं। अब शुभेंदु के पिता और कांथी लोकसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी बार सांसद बने वरिष्ठ नेता शिशिर अधिकारी ने ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा का दामन थामा।

शिशिर अधिकारी पूर्वी मेदिनीपुर के एर्गा में भाजपा में शामिल हुए। उन्होंने जनता से कहा, “पश्चिम बंगाल को इस क्रूरता से बचाना है। हम आपके साथ हैं। मेरा परिवार आपके साथ है। जय सिया राम! जय भारत!”

उन्होंने कहा कि अब लड़ाई मेदिनीपुर की प्रतिष्ठा की है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि उनका कहीं जाने का मन नहीं है लेकिन भाजपा में जाने के लिए TMC उन्हें धक्का दे रही थी। भाजपा नेता मनसुख मंडाविया ने उनसे मिल कर उन्हें भाजपा में आमंत्रित किया था।

शिशिर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के जिलाध्यक्ष भी थे। साथ ही वो दीघा-शंकरपुर डेवलपमेंट काउंसिल के अध्यक्ष भी थे। हाल ही में उन्हें दोनों पदों से हटा दिया गया था। उन्होंने नंदीग्राम से अपने बेटे शुभेंदु की बड़े अंतर से जीत की भविष्यवाणी करते हुए कहा कि वो खुद वहाँ जाकर भाजपा के लिए चुनाव प्रचार करेंगे।

शिशिर के भाजपा में आने की पटकथा 13 मार्च को हुगली की सांसद और चुनचरु से भाजपा उम्मीदवार लॉकेट चटर्जी के उनके साथ लंच करने के साथ ही लिख दी गई थी।

वहीं रैली में पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, “मैं आज बंगाल के इस कोने में आपको यह बताने आया हूँ कि 37 साल तक आपने कम्युनिस्टों की सरकार चुनी। फिर आपने दीदी की सरकार चुनी लेकिन इन दोनों सरकारों ने बंगाल का भला नहीं किया। दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा के लिए कोर्ट की अनुमति लेनी पड़ता है। ऐसी सरकार चल सकती है क्या? अगर भाजपा सत्ता में आई तो सरस्वती पूजा, दुर्गा पूजा को कोई रोक नहीं पाएगा।”

अमित शाह ने कहा कि राज्य में हर काम के लिए कटमनी देनी पड़ती है, टोलाबाजी हो रही है। उन्होंने कहा कि ममता दीदी कहती हैं कि 500 रुपए ही तो लिए, उसमें क्या हुआ!

उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि भाजपा के आने के बाद 5 आना भी टोल मनी या कट मनी नहीं जाएगी। शाह ने कहा कि इस बार ममता दीदी के गुंडों को दिन में तारे दिखाई देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता दीदी अपने भतीजे को सीएम बनाना चाहती हैं।

साथ ही अमित शाह ने भाजपा के उद्देश्य की बात करते हुए कहा कि PM मोदी सोनार बांग्ला बनाना चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि TMC के गुंडे ये न समझें कि बच जाएँगे। शाह ने वादा किया कि प्रदेश में 2 मई को भाजपा की सरकार बनते ही TMC के गुंडों को पाताल से भी ढूँढ कर सजा दी जाएगी। वहीं शिशिर ने तेजपुर बंदरगाह के विकास पर ममता सरकार द्वारा अड़ंगा लगाने की बात हुए कहा कि अब उनका परिवार भाजपा के साथ है।

उधर असम के बोकाखाट में पीएम मोदी ने कहा कि ‘असम दर्शन’ के तहत 9000 से ज्यादा सत्रों, नामघरों और आस्था से जुड़े दूसरे स्थानों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने का काम भाजपा सरकार ने किया है। कहा कि कॉन्ग्रेस का खज़ाना अब खाली हो गया है, उसे भरने के लिए इन्हें किसी भी कीमत पर सत्ता चाहिए। पीएम ने ध्यान दिलाया कि झारखंड में, बिहार में, महाराष्ट्र में, जिनके साथ इनका गठबंधन है, वो पश्चिम बंगाल में इनके खिलाफ प्रचार कर रहे हैं।

‘अल्लाह खैर करे! ऐसे जिस्म दिखाओगी तो किस जहन्नुम में जाओगी’: हिना खान को स्विमसूट में देख भड़के कट्टरपंथी

अभिनेत्री हिना खान ने स्विमसूट में पानी के भीतर फोटोशूट कराया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उन्हें इस्लाम को लेकर नसीहत देते हुए ट्रोल किया। हिना खान ने इंस्टाग्राम पर अपनी अंडरवाटर फोटोशूट की तस्वीरें शेयर की।

हिना खान छुट्टियाँ मनाने के लिए मालदीव गई हुई हैं। इस दौरान एक इंस्टाग्राम यूजर ने उनकी तस्वीरों पर कमेंट करते हुए कहा कि माँ और दादाजी उन्हें इन कपड़ों में देखेंगे तो बेहोश हो जाएँगे। ऐसे कॉमेंट करने वाले यह अकेले नहीं थे जनाब!

बेबी ब्लू कलर के प्लंजिंग नेकलाइन डिजाइन और स्किन बेयरिंग कटआउट वाला वन पीस पहनने के कारण लोगों ने उन्हें ट्रोल किया। अदीबा हूर नामक यूजर ने उन्हें ‘बेशर्म’ करार दिया। सारा खान ने पूछा, “शर्म नहीं आ रही थोड़ी भी?”

तुसफ़ीना ज़मान नामक यूजर ने लिखा, “मुझे नहीं पता कि इस लड़की के साथ क्या गलत है।” लवंगीन खान ने लिखा, “तुम्हें शर्म आनी चाहिए।” शिखा ने पूछा, “ये कपड़े क्या कहलाते हैं?”

हिना खान के कपड़ों के लिए यूजर्स ने उन्हें किया ट्रोल (फोटो साभार: NBT)

हिना खान की तस्वीर पर ज़ेबा कुरैशी ने लिखा, “ये मुस्लिम है। लानत है ऐसी मुस्लिम पर। अल्लाह खैर करे।” वहीं शेख राइना ने पूछा, “हिना खान, क्या आप पागल हो गई हो, जो इस तरह की तस्वीरें डाल रही हो?”

एक अन्य इंस्टा यूजर ने भी सवाल दाग दिया कि आखिर उन्हें क्या होता जा रहा है। फिरदोश खान नामक कट्टरवादी ने लिखा, “अल्लाह आपको माफ़ करे। अल्लाह आपको हिदायत दे। अल्लाह आपकी आँखें खोले। इंशाअल्लाह! ऐसे ही जिस्म दिखाओगी तो कौन सी जहन्नुम में जाओगी मैम?”

हिना खान ‘स्टार प्लस’ के सीरियल्स ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ और ‘कसौटी ज़िंदगी की’ से सुर्ख़ियों में आई थीं। 2015-16 में टीवी की दुनिया की सबसे महँगी अभिनेत्री होने का ख़िताब उनके नाम था।

वो ‘फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी 8’ और ‘बिग बॉस 11’ जैसे रियलिटी शोज में भी हिस्सा ले चुकी हैं। श्रीनगर में जन्मी हिना खान के भाई आमिर एक ट्रेवल एजेंसी चलाते हैं। उन्होंने गुरुग्राम के CCA इंस्टिट्यूट से MBA किया हुआ है।

‘कॉन्ग्रेस मतलब घोटालों और झूठ की गारंटी’: असम में PM मोदी ने कहा – केरल में लेफ्ट को गाली, बंगाल में लगाते हैं गले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (मार्च 21, 2021) को असम के बोकाखाट में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित किया। उनकी ये रैली स्थानीय मोहुरा पाथर मैदान में हुई। असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए इसी महीने 27 मार्च से तीन चरणों में चुनाव होने है। काजीरंगा नेशनल पार्क से मात्र 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बोकाखाट, गोलाघाट जिले का हिस्सा है। इस जगह का महत्व इसीलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ये असम के लगभग बीचोंबीच स्थित है।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि अब ये तय हो गया है- असम में दूसरी बार भाजपा सरकार, असम में दूसरी बार NDA सरकार, असम में दूसरी बार डबल इंजन की सरकार। पीएम मोदी ने कहा कि आज वो यहाँ बैठीं सभी माताओं, बहनों, बेटियों ने जिस जिम्मेदारी और जिन उम्मीदों के साथ भाजपा की सरकार चुनी थी, उसे पूरा करने के लिए हमने जी-जान से मेहनत की है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की सरकार के समय उसी पार्टी की लूट से बचाना एक बड़ी जिम्मेदारी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काजीरंगा सहित तमाम अभ्यारण्य व वनक्षेत्र को देश की धरोहर बताते हुए कहा कि पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी हैं और रोजी रोटी के साधन भी हैं। उन्होंने इस बात पर ख़ुशी जताई कि 5 साल में असम में वनक्षेत्र में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जहाँ कॉन्ग्रेस राज में सवाल था कि ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों के बीच आपस में कनेक्टेविटी कैसे बढ़े, लेकिन NDA के सेवाकाल में ब्रह्मपुत्र पर आधुनिक पुल बन रहे हैं, पुराने अधूरे पुलों को पूरा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राजग की सरकार ने गैंडों का शिकार करने वालों को जेल में डाला है और सरकार यहाँ की जनता के साथ-साथ पशु-पक्षियों की सुरक्षा के लिए भी कार्य कर रही है। उन्होंने लोगों को बताया कि जंगलों के बढ़ने से पर्यटन और आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ती हैं। उन्होंने भारत को प्राकृतिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल बनाने के लक्ष्य की बात करते हुए कहा कि असम में ये सभी चीजें हैं।

उन्होंने बताया कि ‘असम दर्शन’ के तहत 9000 से ज्यादा सत्रों, नामघरों और आस्था से जुड़े दूसरे स्थानों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने का काम भी भाजपा और राजग की सरकार ने किया है। साथ ही कहा कि असम की एक और बहुत बड़ी ताकत है पेट्रोलियम और इससे जुड़े उद्योग। उन्होंने याद किया कि दशकों तक कॉन्ग्रेस असम के इस सामर्थ्य पर भी बैठी रही, लेकिन बीते 6 साल में तेल और गैस के सेक्टर में असम में 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया गया है।

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि आज से 90 साल से भी पहले अंग्रेजों ने एक कानून बनाकर बैंबू को वृक्ष की कैटेगरी में डाल दिया था, जिसके तहत प्राइवेट जमीन पर उगाए गए बैंबू को काटने और उनके ट्रांसपोर्टेशन पर रोक लगाता था। आजादी के बाद भी 70 साल तक ये कानून ऐसे ही चला। उन्होंने कहा कि अब जब केंद्र में NDA सरकार है और राज्य में भी NDA सरकार है, तो डबल इंजन की ताकत असम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा:

“अब हाईवे बनाने पर डबल ताकत से काम हो रहा है क्योंकि राज्य सरकार भी असम को देश से जोड़ रही है और केंद्र सरकार भी। 50 साल से ज्यादा असम पर राज करने वाले लोग आजकल असम को 5 गारंटी दे रहे हैं। असम के लोग इनकी रग-रग से वाकिफ हैं। इन लोगों को झूठे वायदे करने की, झूठे घोषणापत्र बनाने की आदत पड़ गई है। कॉन्ग्रेस मतलब झूठे घोषणापत्र की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब कंफ्यूजन की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब अस्थिरता की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब, बम, बंदूक और ब्लॉकेड की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब हिंसा और अलगाववाद की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब भ्रष्टाचार की गारंटी, घोटालों की गारंटी।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि भाजपा के नेतृत्व में NDA सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन आज के कॉन्ग्रेस नेताओं को तो सिर्फ सत्ता से मतलब है, वो चाहे कैसे भी मिले। उन्होंने अंदेशा जताया कि असल में कॉन्ग्रेस का खज़ाना अब खाली हो गया है, उसे भरने के लिए इन्हें किसी भी कीमत पर सत्ता चाहिए। पीएम ने ध्यान दिलाया कि झारखंड में, बिहार में, महाराष्ट्र में, जिनके साथ इनका गठबंधन है, वो पश्चिम बंगाल में इनके खिलाफ प्रचार कर रहे हैं।

साथ ही कहा कि कैसे केरल में लेफ्ट को गाली देते हैं, पश्चिम बंगाल में कुर्सी की आस में लेफ्ट को गले लगाते हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस वाले खुद को सेकुलर बताते हैं, लेकिन असम, पश्चिम बंगाल और केरल में संप्रदाय के आधार पर बने दलों के साथ दोस्ती करते हैं। पीएम मोदी ने जनता से कहा कि सत्ता के सामने कॉन्ग्रेस को कुछ नहीं दिखता और इसी कारण अब उसके नेताओं की बातों पर देश में कोई भरोसा नहीं कर रहा।

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस ने चाय बागान में काम करने वाले परिवारों को भी वर्षों तक अभाव में रखा, लेकिन बीते 5 सालों में भाजपा ने NDA सरकार ने चाय बागान में काम करने वाले साथियों के लिए पढ़ाई, कमाई और दवाई से जुड़ी जरूरतों के लिए एक के बाद एक कदम उठाए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि चाय जनजाति के साथियों और इस जनजाति से निकली महान विभूतियों को मान-सम्मान और स्वाभिमान का जीवन देने के लिए NDA प्रतिबद्ध हैं।

प्रधानमंत्री ने लोगों को भरोसा दिलाया कि टी गार्डन्स में काम करने वाले श्रमिक साथियों की दैनिक मजदूरी बढ़े इसके लिए भी असम सरकार पूरी तरह गंभीर है।

जिन्होंने कहा – ‘इस्तीफा नहीं देंगे अनिल देशमुख’… उन्हें शरद पवार ने दिल्ली तलब किया: बदलेगी महाराष्ट्र की सत्ता?

महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख का नाम 100 करोड़ की वसूली के प्रयास में आने के बाद उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। वहीं शरद पवार की NCP के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा कि अनिल देशमुख इस्तीफा नहीं देंगे।

NCP के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा कि परमबीर सिंह ने किसी को खुश करने के लिए ये पत्र लिखा है। उन्होंने शिवसेना का भी बचाव करते हुए कहा कि सचिन वाजे को पार्टी से जोड़ना ठीक नहीं।

परमबीर सिंह ने अपने पत्र की एक प्रति राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भी भेजी है, जिसमें लिखा है कि एंटीलिया केस में गिरफ्तार किए गए निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के माध्यम से अनिल देशमुख ने 100 करोड़ प्रतिमाह की उगाही का लक्ष्य रखा था। वहीं NCP के संस्थापक-अध्यक्ष शरद पवार ने अनिल देशमुख से लंबे समय तक फोन पर बातचीत की, जिसमें देशमुख ने सफाई में अपना पक्ष रखा।

महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भी बातचीत कर के अपने बचाव में पक्ष रखा। भाजपा नेता राम कदम ने पूछा है कि सचिन वाजे अपनी गाड़ी में कैश गिनने वाली मशीन लेकर क्यों चलते थे? उन्होंने अनिल देशमुख का नार्को टेस्ट और इस्तीफे तक अपना आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा किसी का पक्ष नहीं ले रही, लेकिन परमबीर सिंह के खुलासे के बाद अनिल देशमुख से पूछताछ होनी चाहिए।

परमबीर सिंह ने पत्र में दावा किया है कि सचिन वाजे ने अनिल देशमुख से कहा था कि 1 महीने में 100 करोड़ की उगाही का लक्ष्य बहुत ज्यादा है और वो मुश्किल से इसका आधा ही जुटा सकते हैं, जिसके बाद उन्हें ‘नए तरीके ईजाद करने’ का निर्देश गृह मंत्री से मिला था। उधर संसद सत्र के दौरान दिल्ली में रह रहे शरद पवार ने अपने भतीजे व महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार के साथ-साथ जयंत पाटिल को भी वहीं तलब किया है।

उद्धव ठाकरे की सरकार दबाव में आ गई है और तीन पार्टियों के सूत्रधार के रूप में काम कर रहे बुजुर्ग शरद पवार अब इन नेताओं से बातचीत कर के अनिल देशमुख के राजनीतिक भविष्य पर फैसला लेंगे। नागपुर में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा कि चूँकि उद्धव सरकार के 15 महीने हो गए हैं, उसे 1500 करोड़ रुपए की उगाही का हिसाब जनता को देना चाहिए।

परमबीर सिंह के पत्र की एक और बड़ी बात ये है कि उन्होंने इस पूरे प्रकरण के साथ-साथ दादर एंड नगर हवेली लोकसभा क्षेत्र से 7वीं बार सांसद बने मोहन डेलकर की आत्महत्या वाले मामले का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट के हिसाब से दादर एंड नगर हवेली में अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी थी लेकिन गृह मंत्री देशमुख उन पर बार-बार केस रजिस्टर करने का दबाव बना रहे थे और नहीं चाहते थे कि वो इस पर वकीलों की राय लें।