Home Blog Page 4013

बजट आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की भावना के अनुरूप, इसके हृदय में गाँव, गरीब, किसान, महिलाएँ, युवा: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आज प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा बजट पेश किया। पूरे राज्य में विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपए की धनराशि प्रस्तावित की गई है। प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जाने वाली जनहित योजनाओं का फ़ायदा हर वर्ग तक पहुँचाने के लिए 27 हज़ार 598 करोड़ 40 लाख रुपए की विकास योजनाओं को शामिल किया गया है। इस बजट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रतिक्रिया दी है। 

मुख्यमंत्री योगी ने पहले पेपरलेस बजट को लोक कल्याणकारी, समावेशी और विकासोन्मुखी बताया है। उनके मुताबिक़, “देश किसी भी राज्य के पहले पेपरलेस बजट के लिए मंत्री सुरेश खन्ना और उनकी टीम को बधाई देता हूँ। हर घर को नल, बिजली, हर गाँव को सड़क व डिजिटल बनाने व खेत को पानी और हर हाथ को काम देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस बजट में उत्तर प्रदेश के नवनिर्माण की सोच निहित है। यह बजट हर वर्ग के लिए कल्याणकारी साबित होगा। इस बजट के लिए प्रदेश वासियों को बधाई देता हूँ।”      

इसके बाद मुख्यमंत्री ने बजट से जुड़े कई अन्य पहलुओं पर अपनी बात कही: 

  • वित्तीय बजट 2021-22 ‘सबका साथ- सबका विकास’ की उत्कृष्ट लोकतांत्रिक भावना से परिपूर्ण है। 
  • यह बजट प्रदेश के तीव्र, धारणीय एवं सर्वसमावेशी विकास मार्ग में मील का पत्थर साबित होगा। 
  • इस बार का बजट 5,50,270.78 करोड़ रुपए का है, ये 2020-21 के बजट से 7.3% अधिक है। 
  • उत्तर प्रदेश के बजट के हृदय में गाँव, गरीब, किसान, महिलाएँ और युवा हैं। 
  • राज्य का वर्तमान बजट ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ की भावना के अनुरूप है। 
  • इस बजट में हर घर नल, हर गाँव सड़क, हर गाँव डिजिटल, हर खेत को पानी, हर युवा को रोज़गार और हर जुल्मी को जेल का संकल्प छुपा हुआ है। 
  • ये बजट प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने तथा हर नागरिक को सशक्त बनाने का संकल्प लेकर आया है। 
  • वैश्विक महामारी कोरोना की त्रासदी के बीच यह बजट आशा, ऊर्जा और उत्तर प्रदेश की नई सम्भावनाओं को नई उड़ान देगा।

वित्तीय बजट 2021- 22 में कितना कुछ है ख़ास

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा बजट पेश किया है। वित्तीय बजट 2021-22 में विधान मंडल क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए मंडल क्षेत्र विकास निधि हेतु ₹2,000 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है। सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचाने के लिए वित्तीय वर्ष 27 हजार 598 करोड़ 40 लाख रुपए की नई विकास योजनाओं को सम्मिलित किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2021-22 से ‘आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना’ संचालित की जाएगी। इस योजना के क्रियान्वयन हेतु ₹100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के किसानों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई ‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना’ के अंतर्गत ₹600 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है। किसानों को मुफ्त पानी की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ₹700 करोड़ का प्रावधान किया गया है। किसानों को रियायती दरों पर फसली ऋण उपलब्ध कराए जाने के लिए अनुदान हेतु ₹400 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित है।

लोकसभा सांसद मोहन डेलकर का शव मुंबई के होटल से बरामद, सुसाइड की आशंका

मुंबई के सी ग्रीन होटल के एक कमरे में दादर और नागर हवेली के सांसद मोहन डेलकर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में आज (फरवरी 22, 2021) बरामद हुआ। कथित तौर पर उन्होंने सुसाइड की। कुछ रिपोर्ट्स में शव के पास से सुसाइट नोट मिलने की बात सामने आई है। पत्र गुजराती भाषा में लिखा है।

58 साल के डेलकर लोकसभा सांसद थे। 1989 में वह पहली बार इस संसदीय क्षेत्र से संसद पहुँचे थे। अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने ट्रेड यूनियन नेता के तौर पर थी। वे कॉन्ग्रेस और बीजेपी के टिकट पर सांसद का चुनाव लड़ चुके थे

हालाँकि बाद में उन्होंने भारतीय नवशक्ति पार्टी (बीएनपी) का गठन किया था। पिछले लोकसभा चुनाव यानी 2019 के चुनाव में वो बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे थे।

नेशनल हेराल्ड केस में बढ़ी सोनिया-राहुल की मुश्किल, सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर दिल्ली HC ने भेजा नोटिस

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल हेराल्ड मामले में निचली अदालत में सुनवाई पर रोक लगाते हुए सोमवार (फरवरी 22, 2021) को मामले में आरोपित कॉन्ग्रेस प्रमुख सोनिया गाँधी, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और अन्य से भाजपा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी की याचिका पर नोटिस भेजकर जवाब माँगा। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में निचली अदालत के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

स्वामी ने एक निजी आपराधिक शिकायत में सोनिया गाँधी और अन्य लोगों पर धन की हेराफेरी करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने एसोसिएटेड पत्रिकाओं के 90.25 करोड़ रुपए की रिकवरी के बदले सिर्फ 50 लाख रुपए का भुगतान किया था।

निचली अदालत ने उनकी याचिका में पेश किए गए प्रमुख साक्ष्यों के आधार पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, उनके बेटे राहुल गाँधी एवं अन्य के खिलाफ मुकदमा चलाए जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने सोनिया और राहुल गाँधी, एआईसीसी महासचिव ऑस्कर फर्नांडिस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और ‘यंग इंडिया’ (YI) से 12 अप्रैल तक स्वामी की याचिका पर जवाब देने को कहा

भाजपा सांसद की ओर से पेश हुए वकील सत्या सभरवाल और गाँधी परिवार तथा अन्य की ओर से पेश हुए वकील तरन्नुम चीमा ने उच्च न्यायालय के नोटिस जारी करने की और सुनवाई 12 अप्रैल तक स्थगित करने की पुष्टि की

बता दें कि कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक नई अव्यवसायिक कंपनी बनाई। इसमें सोनिया और राहुल गाँधी सहित मोती लाल वोरा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडिस और सैम पित्रोदा को निदेशक बनाया गया। नई कंपनी में सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के पास 76 प्रतिशत शेयर थे जबकि बाकी के 24 प्रतिशत शेयर अन्य निदेशकों के पास थे।

गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कॉन्ग्रेस प्रमोटेड एसोसिएटेड जर्नल्‍स लिमिटेड (AJL) की 16.38 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया था। ED की ओर से शनिवार (मई 9, 2020) को जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग के एक केस में यह ऐक्‍शन लिया गया। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने 2019 में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत 64.93 करोड़ रुपए की गुरुग्राम की संपत्ति कुर्क की थी।

रॉबर्ड वाड्रा से BJP पर सवाल पूछा… जवाब से पहले AajTak की मौसमी सिंह साइकिल से जमीन पर गिरीं धड़ाम!

इंडिया टुडे की पत्रकार मौसमी सिंह को रॉबर्ट वाड्रा का इंटरव्यू लेने के दौरान लाइव टीवी पर फजीहत का सामना करना पड़ा। दिलचस्प बात ये है कि इस फजीहत के पीछे का कारण उनका कोई अपना प्रश्न नहीं था बल्कि लीक से हट कर रॉबर्ड वाड्रा का इंटरव्यू लेने की चाह थी।

मौसमी सिंह आज रॉबर्ड वाड्रा से साइकिल दौड़ाते हुए इंटरव्यू लेना चाह रही थीं। मगर, कोशिश के बीच कुछ ऐसा हुआ, जिसे देख लोग उनका मजाक उड़ाने लगे।

दरअसल, इस इंटरव्यू के दौरान मौसमी ने अपने हाथ में माइक लिया हुआ था और साथ में साइकिल चला रहे रॉबर्ड वाड्रा से सवाल कर रही थीं। अब वाड्रा का हाथ साइकिल के हैंडल पर था तो उन्हें नाक की सीध में साइकिल चलाने में दिक्कत नहीं हुई, लेकिन वीडियो में मौसमी पहले तो साइकिल चलाने की बजाय उसे किसी तरह खींचतीं नजर आईं और फिर जब प्रश्न करके जवाब माँगने के लिए वाड्रा के सामने माइक बढ़ाया तो धड़ाम से जमीन पर गिर पड़ीं।

अब 0.25 सेकेंड की वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही है। कुछ सक्रिय अकॉउंट्स पर इस क्लिप को शेयर करके कहा जा रहा है कि आज पुडुचेरी की सरकार ही नहीं बल्कि मौसमी सिंह भी गिर गईं।

सबसे हास्यास्पद बात यूजर्स को ये लग रही है कि ये घटना उसी समय घटी, जब वाड्रा से मौसमी ने बीजेपी को लेकर सवाल किया और अगले ही पल उनका बैलेंस बिगड़ गया। गिरने से पहले उन्हें कहते सुना जा सकता है कि वाड्रा जो सूट और महंगी साइकिल लेकर चला रहे हैं, बीजेपी इसे नौटंकी भी कह सकती है?

बता दें कि एक ओर जहाँ प्रियंका गाँधी वाड्रा फर्जी तस्वीरें फैला कर किसान आंदोलन के नाम पर संवेदनाएँ जमा करने में जुटी हुई हैं, वहीं पेट्रोल डीजल की महंगाई पर अपना विरोध दिखाने के लिए उनके पति रॉबर्ट वाड्रा ने आज सड़कों पर साइकिल चलाई। 

इस दौरान वह सूट बूट के साथ हेलमेट पहन कर चौड़ी सड़क पर अपना विरोध दर्ज करते दिखाई दिए। वहीं उनके पीछे कुछ गाड़ियाँ भी नजर आईं। मौसमी सिंह इस दौरान अकेली पत्रकार थीं, जो रॉबर्ट वाड्रा के इस साइकिल वाले स्टंट को दिखाने मौजूद थीं। यहीं उनसे बातचीच के दौरान ये घटना घटी।

मालूम हो कि आजतक पर स्टंट करके कंटेंट दिखाने वाली मौसमी सिंह पहली नहीं है पर चूँकि उनके पत्रकारिता के दौरान किए गए कारनामे हमेशा नए होते हैं, इसलिए वह आए दिन चर्चा में आती हैं। दो साल पहले मौसमी सिंह ने श्रीनगर एयरपोर्ट पर बड़ा हंगामा करते हुए पुलिसकर्मियों पर बदतमीजी का आरोप लगाया था। 

मौसमी सिंह के इस ड्रामे के बाद इसी के सहारे पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे पर अपने नैरेटिव को भुनाना शुरू कर दिया था और उनकी वीडियो अपने चैनल पर चलाई थी, ये दिखाने के लिए कि कश्मीर में हिंसा हो रही है।

इसी तरह कंगना रनौत के ऑफिस के बाहर तोड़फोड़ के बाद भी मौसमी की बेईज्जती घटनास्थल पर रिपोर्टिंग के दौरान हुई थी। रिपोर्टिंग करते वक्त मौसमी जैसी ही बीएमसी के खिलाफ महिला प्रदर्शनकारियों से सवाल पूछने गई, महिलाएँ उनके चेहरे पर ही “आज तक मुर्दाबाद” के नारे लगाने शुरू कर दिए।

साल 2019 के एक अन्य वाकये में प्रियंका गाँधी वाड्रा को उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रभारी के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद मौसमी सिंह को कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को वाड्रा के लिए उत्साहित दिखने के निर्देश देते हुए भी सुना गया था।

महबूबा के बाद फारूक अब्दुल्ला भी बने ‘आतंकी देश के वकील’, कहा- पाकिस्तान से बात करे केंद्र सरकार

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने एक बार फिर भारत को पाकिस्तान से बातचीत शुरू करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर हमें आतंकवाद को खत्म करना है तो पाकिस्तान से बात करनी होगी।

फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “ये सच है कि आतंकवाद आज भी मौजूद है। ये (भाजपा) जो कहते हैं कि हमने आतंकवाद खत्म कर दिया है, नहीं हुआ है। वे गलत थे जब उन्होंने कहा था कि यह खत्म हो चुका है। अगर हम आतंकवाद को खत्म करना चाहते हैं तो हमें अपने पड़ोसी (पाकिस्तान) से जरूर बात करनी होगी। मुझे वाजपेयी जी का कथन याद है कि दोस्त बदले जा सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं।”

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने कहा, “मैं उनसे (केंद्र सरकार) अपील करता हूँ कि वे उनसे (पाकिस्तान) बातचीत का कोई रास्ता खोजें जैसे उन्होंने चीन से बात की थी और वे (पीएलए जवान) अब पीछे हटने लगे हैं। या तो हम दोस्ती और समृद्धि बढ़ाएँगे या दुश्मनी जारी रखेंगे, तो कोई समृद्धि नहीं होगी।”

उनकी पार्टी द्वारा परिसीमन आयोग की बैठक का बहिष्कार करने के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा, “हमने पहले ही कहा है कि उन्होंने पाँच अगस्त (2019) को जो किया है वह हमे स्वीकार्य नहीं हैं। जब हमने यह स्वीकार ही नहीं किया है तो हम जम्मू-कश्मीर के लिए कैसे परिसीमन आयुक्त स्वीकार कर सकते हैं।”

इससे पहले जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यंमत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने भी पाकिस्तान से बातचीत की बात कही थी। महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत के जरिए ही जम्मू कश्मीर के मुद्दे का हल निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा था कि इस मसले का हल न तो युद्ध है और न ही बंदूक से इसका समाधान निकल सकता है।

महबूबा मुफ़्ती ने अपने बयान में कहा था, “आखिर कब तक जम्मू और कश्मीर के लोग, पुलिसकर्मी और सेना के जवानों को अपनी जान गँवानी पड़ेगी। भाजपा बार-बार इस बात पर ज़ोर देती है कि पाकिस्तान यहाँ के आतंकवादी तत्वों को बढ़ावा देता है, उन्हें प्रायोजित करता है। इसके आधार पर भारत को हिंसा पर काबू पाने के लिए पड़ोसी मुल्क से बातचीत शुरू करनी चाहिए। केंद्र सरकार को यहाँ के लोगों के बारे में सोचना पड़ेगा और उसके लिए पाकिस्तान से बात करना ज़रूरी है।”

नक्सल इलाकों में 5422 में से 4946 किमी सड़क का काम पूरा: सुरक्षा बलों की मदद से अब और तेज होगा निर्माण कार्य

नक्सल प्रभावित इलाकों को सड़क से जोड़ने की दिशा में सरकार रोड कनेक्टिविटी कार्यों को गति देने में जुटी है। ऐसे में खबर है कि राज्य सरकारों व निर्माण एजेंसियों को सुरक्षाबलों की मदद से निर्माण कार्य तेज करने को कहा गया है।

रिपोर्ट बताती हैं कि रोड कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के तहत अब तक मंजूर किए गए 9338 किलोमीटर सड़क में से महज 1796 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य पूरा है।

गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार रोड रिक्वायरमेंट प्लॉन (RRP1) के तहत जो काम 2009 में शुरू हुआ था उसमें उन्हें काफी हद तक सफलता मिली है। इसके मुताबिक 5422 किलोमीटर लंबाई की सड़कें बनाई जानी थीं। इनमें से 4946 किलोमीटर का काम अब तक पूरा हुआ है। प्रोजेक्ट में तेलंगाना ने अपना लक्ष्य पूरा कर लिया है वहीं छत्तीसगढ़ में कुछ काम शेष है।

वेबसाइट पर मौजूद जानकारी

 

इसके अलावा 2016 में शुरू हुए सड़क संपर्क प्रोजेक्ट के तहत भी काम चल रहा है, लेकिन इसकी गति बहुत धीमी है। जिसके कारण संबंधित पक्षों से ऐसी देरी का कारण पूछते हुए उन्हें काम तेज करने को कहा गया है। गृह मामलों की पार्लियमेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ने भी इस धीमी गति पर जवाब भी माँगा है।

सरकारी वेबसाइट के अनुसार, इस स्कीम को सरकार ने 28 दिसंबर 2016 में शुरू किया था ताकि नक्सल प्रभावित इलाकों की रोड कनेक्टिविटी बेहतर की जा सके। इसके तहत 5412 किमी रोड और 126 ब्रिज तैयार होने थे, जिसमें लागत 11,725 करोड़ रुपए की आती। इस संबंध में 2019 की एक रिपोर्ट बताती है कि इस योजना को पूरा करने के लिए 5,065 किमी के लिए रकम सैंक्शन की गई थी, इसमें से 845 किमी का काम पूरा हो गया है जिसमें लागत 645 करोड़ आई है।

साल 2019 में खबर संबंधित प्रेस रिलीज

गृह मंत्रालय की साल 2020 की रिपोर्ट के अनुसार,  इस योजना के तहत अब तक 9,338 किमी सड़क की लंबाई को मंजूरी दी गई है। इनमें से 1,796 किमी लंबी सड़कें पूरी हैं।

गौरतलब है कि रोड रिक्वायरमेंट प्लॉन और RCPLWE रोड नेटवर्क सुधार में दो बड़ी स्कीमें हैं। RRP1 की शुरुआत 2009 में 8 नक्सल प्रभावित राज्यों के लिए हुई थी। ये राज्य- आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश हैं।

मीडिया रिपोर्ट कहती है कि आज हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट जो नक्सल इलाकों में लंबित हैं उनके पीछे कई जगह नक्सल का असर है तो कई जगह जरूरी समन्वय की कमी है। सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में गर्मियों में सघन अभियान चलाने का मन बनाया है। ऐसे में केंद्र व राज्य की सरकारों के साथ निर्माण एजेंसियों के सामने बड़ा लक्ष्य है। 

प्रियंका गाँधी के काफिले में घुसे गए 100 भेड़, कमलनाथ की लिफ्ट ऊपर जाने के बजाय गई नीचे

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में योगी सरकार पर निशाना साधने पहुँची प्रियंका गाँधी वाड्रा के काफिले के साथ अजीबोगरीब घटना हुई। जिले से 15 किमी दूर बसवार गाँव से गुजरते हुए उनके काफिले में भेड़ों का झुंड घुसने से हड़कंप मच गया। प्रियंका के काफिले में भेड़ वाला वाकया तब हुआ, जब कॉन्ग्रेस महाचसचिव यमुना किनारे कार्यकर्ताओं के साथ टूटी नावें देखने जा रही थींं।

इस दौरान प्रियंका के काफिले की स्पीड बनी रही। लेकिन वहाँ मौजूद चरवाहे डंडा लेकर भेड़ों को भगाने लगे। उनकी चिंता थी कि कहीं भीड़ भाड़ वाले काफिले में उनके भेड़ गुम न जाएँ। चरवाहा गेंदा लाल बताते हैं कि उन्हें कुछ देर पहले ही पता चला था कि इंदिरा गाँधी की पोती, प्रियंका गाँधी यहाँ आईं।

काफिले में भेड़ों के झुंड के घुसने के बारे में गेंदा लाल ने कहा, “हमें तो सिर्फ इस बात का डर सता रहा था कि भीड़ के बीच हमारी कोई भेड़ कहीं खो ना जाए। लेकिन भगवान की कृपा से हमारी सभी 100 भेड़ें मिल गईं।”

बता दें कि प्रियंका के साथ हुए वाकये को सुन कर लोग इस पर हँस रहे हैं। घटना का मजाक उड़ा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ के साथ भी एक अजीब वाकया हुआ। दरअसल वह जब पार्टी के एक वरिष्ठ नेता रामेश्वर पटेल को देखने डीएनएस अस्पताल गए तो वहाँ वह लिफ्ट ही गिर पड़ी, जिसमें वह अन्य नेताओं के साथ चढ़े थे।

लिफ्ट गिरने वाले वाकये को गंभीरता से देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशानुसार जिलाधिकारी द्वारा डीएनएस अस्पताल में हुई घटना की जाँच करवाई जाएगी।

कॉन्ग्रेस का डीएनएस अस्पताल में हुई घटना को लेकर कहना है कि एक बड़ा हादसा होते-होते टला। यदि लिफ्ट ओवरलोड होती तो चलती ही नहीं लेकिन लिफ्ट नीचे गिर गई। लिफ्ट का दरवाजा लॉक हो गया। 5 मिनट बाद उसे खोला गया। ये एक गंभीर लापरवाही है। ये सुरक्षा में खामी है। इसके पीछे जो भी दोषी हैं उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

मालूम हो कि जहाँ पूर्व सीएम कमलनाथ के साथ हुई घटना पर कॉन्ग्रेस प्रशासन पर सवाल करने की कोशिश कर रही है, वहीं डीएनएस हॉस्पिटल के एक अधिकारी ने लिफ्ट गिरने की बात से इनकार करते हुए कहा कि क्षमता से ज्यादा लोगों के सवार होने से यह ऊपर जाने के बजाय अचानक नीचे की ओर जाकर बेसमेंट में पहुँच गई।

अधिकारी के मुताबिक हादसे के वक्त लिफ्ट में कमलनाथ समेत 13-14 लोग सवार थे। उन्होंने कहा, “लिफ्ट के नीचे की तरफ जाने के बाद लिफ्टमैन इसे बेसमेंट में ले गया और इसमें सवार कमलनाथ और दूसरे लोगों को बाहर निकाला। ये लोग बेसमेंट से सीढ़ियाँ चढ़कर अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर पहुँचे और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता रामेश्वर पटेल के हाल-चाल जानने के बाद दूसरी लिफ्ट से नीचे उतरकर आगे रवाना हुए।”

अयोध्या में ई-सिटी, रोजगार के लिए करियर सेंटर: UP के इतिहास का सबसे बड़ा बजट, बनेगी $1 ट्रिलियन इकॉनमी

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा बजट पेश किया है। वित्तीय बजट 2021-22 में विधान मंडल क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए मंडल क्षेत्र विकास निधि हेतु ₹2,000 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है। सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचाने के लिए वित्तीय वर्ष 27 हजार 598 करोड़ 40 लाख रुपए की नई विकास योजनाओं को सम्मिलित किया गया है।

बजट पेश करते समय राज्य के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कृत संकल्पित है। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2021-22 से ‘आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना’ संचालित की जाएगी। इस योजना के क्रियान्वयन हेतु ₹100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के किसानों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई ‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना’ के अंतर्गत ₹600 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है।

किसानों को मुफ्त पानी की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ₹700 करोड़ का प्रावधान किया गया है। किसानों को रियायती दरों पर फसली ऋण उपलब्ध कराए जाने के लिए अनुदान हेतु ₹400 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित है। ग्रामीण भू-स्‍वामियों को स्‍थायी व निरंतर आय का स्रोत प्रदान करने हेतु ‘प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान’ महाभियान के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में 15,000 सोलर पंप की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।

खुद को राज्य की महिलाओं के उत्थान के लिए समर्पित बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ को और परिष्कृत कर लागू करने का निर्णय लिया है। ऐलान किया गया कि महिलाओं एवं बच्चों में कुपोषण की समस्या के निदान हेतु ‘मुख्यमंत्री सक्षम सुपोषण योजना’ वित्तीय वर्ष 2021-22 से क्रियान्वित की जाएगी। इस योजना हेतु बजट में ₹100 करोड़ की व्यवस्था की गई है।

महिलाओं का आर्थिक स्वावलंबन सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2021-22 से ‘महिला सामर्थ्य योजना’ का संचालन किया जाएगा। इस नई योजना के लिए ₹200 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है। प्रदेश के बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित ‘पुष्टाहार कार्यक्रम’ के लिए वित्तीय वर्ष 2021-22 में ₹4,094 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है। राष्ट्रीय पोषण अभियान हेतु ₹415 करोड़ की धनराशि का प्रावधान किया गया है।

महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए प्रदेश सरकार राज्य में ‘मिशन शक्ति’ का संचालन कर रही है। इसी क्रम में महिला शक्ति केंद्रों की स्थापना के लिए बजट में ₹32 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है। युवाओं के उत्थान हेतु ‘मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना’ के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में पात्र छात्रों को टैबलेट उपलब्ध कराया जाएगा। संस्कृत विद्यालयों में अध्ययनरत निर्धन छात्रों को गुरुकुल पद्धति के अनुरूप निःशुल्क छात्रावास व भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

उत्तर प्रदेश के 12 अन्य जनपदों में मॉडल कैरियर सेंटर स्थापित किए जाने की योजना प्रस्तावित है। इससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार से जोड़ने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने हेतु सरकार सतत प्रयासरत है। इसके लिए युवा खेल विकास एवं प्रोत्साहन योजना हेतु ₹8.55 करोड़ की व्यवस्था प्रस्तावित की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में युवा फिटनेस को बढ़ावा देने हेतु ग्रामीण स्टेडियम एवं ओपन जिम के निर्माण हेतु ₹25 करोड़ की बजट व्यवस्था की गई।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने हेतु जनपद मेरठ में नए स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु ₹20 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया गया। यूपी सरकार ने कहा कि 5 लाख 50 हजार 270 करोड़ 78 लाख रुपए के आकार का वित्तीय वर्ष 2021-22 बजट उत्तर प्रदेश का समग्र विकास सुनिश्चित करने तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने ये भी ऐलान किया कि जेवर एयरपोर्ट के पास एक इलेक्ट्रॉनिक सिटी बनाई जाएगी। प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर आईटी पार्क बनाए जा रहे हैं। यूपी में कक्षा एक से आठ तक मुफ्त ड्रेस देने का काम किया जा रहा है। दिल्ली-मेरठ RRTS के लिए 1326 करोड़ रुपए, गोरखपुर-वाराणसी मेट्रो के लिए 100-100 करोड़ रुपए दिए गए हैं। सरयू नहर परियोजना हेतु 610 करोड़ रुपए, पूर्वी गंगा नहर परियोजना हेतु 271 करोड़ रुपए तथा केन बेतवा लिंक नहर परियोजना हेतु 104 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।

इस्लाम में बाल शोषण: हिंदू-मुस्लिम पर उपन्यास लिख चुकीं महिला को ‘वेश्या’ की गाली, टूट पड़े कट्टरपंथी

इस्लाम के संदर्भ में जब-जब महिलाओं की बात होती है तो सबसे पहले दिमाग में हिजाब, नकाब, बुर्का उभर कर आते हैं। कई नारीवादियों का मानना रहा है कि ये पोशाक इस्लाम में पसरी कट्टरता और पितृसत्ता का प्रभाव है। तस्लीमा नसरीन ऐसी ही एक नारीवादी हैं, जो इस मजहबी कट्टरता का पुरजोर विरोध करती हैं और इस बेबाक रवैये के कारण उन्हें आए दिन कट्टरपंथियों के गुस्से का शिकार होना पड़ता है। 

रविवार (फरवरी 21, 2021) की शाम एक बार दोबारा ऐसा ही हुआ, जब उन्होंने हिजाब पहनी छोटी बच्ची की तस्वीर अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर डाली। तस्लीमा ने इन तस्वीरों के साथ लिखा, “इस्लाम इन बच्चों से इनका बचपन छीन रही है। इनके अभिभावकों को बाल अधिकार नकारने के लिए दंडित किया जाना चाहिए। ये निश्चित तौर पर बाल शोषण है।”

तस्लीमा के इस ट्वीट के बाद कई लोग ऐसे दिखे, जिन्होंने उनका पूर्णत: समर्थन किया, मगर कुछ ने मामले की गंभीरता को नकारते हुए इसे इस्लाम पर हमले जैसे माना और लेखिका को गाली देने लगे।

हसन मुहम्मद ने इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, “जब वेश्या के मुँह से शब्द निकलते हैं तो हिंसक शब्दों के अलावा कुछ बाहर नहीं आता।”

नौमन खान लिखते हैं, “जिस महिला को अपनी लापरवाही के कारण अपने ही देश से प्रतिबंधित कर दिया गया, वो अब इस्लामी जगत को सिखाएगी। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि आधुनिकता अपना तन ढकने में है क्योंकि नग्नता पहले हुआ करती थी, जब ब्राह्मण दलितों को उनका वक्ष ढकने से रोकते थे। इसके और भी उदाहरण हैं।”

सैयद लिखते हैं, “तुम्हें हमसे क्या मतलब है? क्या तुम मुस्लिमों, इस्लाम, और कुरान के अलावा कुछ और नहीं सोच सकती। शायद ऐसा इसलिए है क्योंकि तुम जानती हो कि सच क्या है और तुम उसे मानने को तैयार नहीं। तुम्हें बहुत दिक्कत है। तुम इस्लामोफोब हो।”

जुनैद अनवर लिखते हैं, “तुम्हें अपने काम से काम रखना चाहिए और सिर्फ पश्चिम की आलोचना करनी चाहिए और उनके द्वारा किए गए बाल शोषण पर बोलना चाहिए।”

महिला, उठा हुआ नितंब और अधनंगा मर्द: मोदी सरकार पर निशाना साधने के लिए शशि थरूर का मीम… अब पड़ रही गाली

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर एक महिला की आपत्तिजनक अवस्था में तस्वीर शेयर कर के मोदी सरकार पर निशाना साधने का प्रयास किया है। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से लगातार तीसरी बार सांसद चुने गए थरूर की इस हरकत से लोग नाराज़ दिखें और उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि कभी ये व्यक्ति संयुक्त राष्ट्र महासचिव बनने की दौर में शामिल हुआ करता था।

उक्त तस्वीर में एक महिला लाल गद्दे पर पेट के बल हल्के लेटी हुई है। उसके नितंब आपत्तिजनक अवस्था में ऊपर उठे हुए हैं और वो पीछे की तरफ देख रही है। पीछे एक व्यक्ति अधनंगे अवस्था में खड़ा है। साथ ही तस्वीर में कैप्शन लिखा हुआ है – “ये कौन सा पोजीशन है?” शशि थरूर ने तस्वीर के साथ लिखा कि जब भाजपा सत्ता में हो तो हर दिन ‘राष्ट्रीय योग दिवस’ है। इस तरह उन्होंने योग का भी मजाक बनाया।

कई ट्विटर यूजरों ने शशि थरूर की इस हरकत पर उनकी क्लास लगाई। एक व्यक्ति ने लिखा कि वो दिन पर दिन अंदर से बुरे होते जा रहे हैं। वहीं एक अन्य यूजर ने ‘3 इडियट्स’ फिल्म का ‘अश्लील है ये लौंडा’ वाला दृश्य शेयर किया। एक यूजर ने पूछा कि क्या एक महिला की तस्वीर इस पोज में शेयर करना ही कॉन्ग्रेस का महिला सशक्तिकरण है? एक यूजर ने लिखा कि ये उनकी अगली पुस्तक की थीम हो सकती है – ‘ठरक: नाम है थरूर’।

याद कीजिए, ग्रेटा थनबर्ग ने जिस खालिस्तानी टूलकिट को गलती से लीक कर दिया था, उसमें भी लिखा था कि भारत की ‘योग और चाय’ वाली छवि को नुकसान पहुँचाना है। ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ व अन्य खालिस्तानी संगठनों ने इस टूलकिट को तैयार किया था। पीएम मोदी ने असम की रैली में इस बात को उठाया भी था, जहाँ चायपत्ती की खेती होती है। भारत के प्रयासों से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 21 जून योग दिवस घोषित हुआ था।