Home Blog Page 4013

माँ-बाप-भाई एक-एक कर मर गए, अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने दिया: 20 साल विष्णु को किस जुर्म की सजा?

इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद विष्णु तिवारी करीब 20 साल बाद जेल से निकले हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। संस्था ने उत्तर प्रदेश के DGP और और मुख्य सचिव को जवाब देने को कहा है। विष्णु को रेप के मामले में फँसाया गया था। NHRC ने पूछा है कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है?

साथ ही पीड़ित विष्णु तिवारी को राहत और उनके पुनर्वास के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं, NHRC ने इसका भी विस्तृत विवरण माँगा है। इसके लिए 6 सप्ताह का समय दिया गया है। सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (सजा समीक्षा बोर्ड) पर सवाल उठाते हुए संस्था ने कहा है कि ये बोर्ड एकदम से निष्क्रिय हो गया है। ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें 75 वर्ष से अधिक की उम्र के बंदियों की जेल में ही मौत हो गई।

NHRC ने मीडिया रिपोर्ट्स के सामने आने पर इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया। कहा गया है कि एक 23 वर्ष के युवक को बलात्कार के मामले में ट्रायल कोर्ट उम्रकैद की सज़ा सुनाता है और 20 साल जेल में बिताने के बाद हाईकोर्ट उसे निर्दोष पाता है। इस अवधि के दौरान विष्णु तिवारी के परिवार के कई सदस्यों की मृत्यु हो गई।

जेल में उनका आचरण अच्छा पाया गया था। लेकिन, आश्चर्य की बात ये है कि इन सबके बावजूद उन्हें पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल नहीं दिया गया। भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने की भी अनुमति नहीं मिली। उन पर वर्ष 1999 में अनुसूचित जाति (SC) की एक महिला के साथ बलात्कार का आरोप लगा था। 2005 में वो न्याय के लिए हाईकोर्ट पहुँचे और वहाँ से उन्हें अब जाकर राहत मिली है।

बता दें कि CrPc की की धारा 433 के तहत, सरकार सज़ा को कम (मौत की सज़ा, आजीवन कारावास, सश्रम कारावास या साधारण कारावास) कर सकती है। सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को इसके लिए अदालत की सज़ा की समीक्षा करनी पड़ती है। पीड़ित को हुए आघात, मानसिक पीड़ा और सामाजिक कलंक की क्षतिपूर्ति के लिए उसे क्या राहत दी गई है, NHRC ने ये विशेष रूप से पूछा है। विष्णु तिवारी पर रेप का मामला भूमि विवाद के कारण दायर किया गया था, जिस कारण उनके जीवन के दो दशक जेल में बीत गए।

अपने भाई महादेव को जेल में खुद से मिलने आया हुआ देख कर विष्णु तिवारी हमेशा काँप जाते थे क्योंकि चार अपनों की मौत की खबर भी महादेव ही लेकर आए थे। सबसे पहले 2013 में उनके पिता की मौत हो गई। एक साल बाद ही माँ भी चल बसीं। उसके बाद उनके दो बड़े भाई भी दुनिया छोड़कर चले गए। विष्णु 5 भाइयों में तीसरे नंबर पर आते हैं। आगरा के सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस ने उनके लिए आवाज़ उठाई थी।

जेल के कैदियों का भी कहना है कि विष्णु उन सबके अच्छे मित्र बन गए थे और कैदियों के लिए भोजन पकाया करते थे। उनका सबसे पसंदीदा गाना ‘शोर (1972)’ में महेंद्र कपूर और मन्ना डे का गाया हुआ ‘जीवन चलने का नाम, चलते रहो सुबह-शाम’ है, जिसे वो हमेशा गुनगुनाते रहते थे। जेल से छूटने के बाद वो एक ढाबा चलाना चाहते हैं, लेकिन उनके पास इसके लिए कोई पूँजी नहीं है। वो कहते हैं कि कहीं नौकरी कर के कुछ रुपए जमा करेंगे।

1 साल से छात्रा को धर्मांतरण व निकाह के लिए प्रताड़ित कर रहा था सलमान, पीड़िता के लिए वरदान बना MP का नया कानून

मध्य प्रदेश के खंडवा से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। सलमान नाम का युवक एक हिन्दू छात्रा को जबरन इस्लामी धर्मांतरण के लिए पिछले 1 वर्ष से प्रताड़ित कर रहा था। मध्य प्रदेश के नए धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक के तहत यह मामला दर्ज हुआ है। खंडवा में नए कानून के तहत ‘लव जिहाद’ का यह पहला मामला है। सलमान पीड़िता पर निकाह के लिए दबाव बना कर उसे प्रताड़ित कर रहा था।

चूँकि अभी पुलिस के ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में इस कानून से सम्बंधित धाराएँ नहीं अपलोड की गई थीं, इसीलिए FIR दर्ज करने से पहले पुलिस अधीक्षक ने भोपाल के आला अधिकारियों के साथ चर्चा की। मूंदी थाना अंतर्गत जामकोटा गाँव की पीड़ित छात्रा का कहना है कि रशीद खान का बेटा सलमान उसे परेशान कर इस्लामी धर्मांतरण व निकाह का दबाव बना रहा था। वो जान से मार डालने की धमकी देता थे, जिससे छात्रा के परिजन परेशान थे।

सलमान की करतूतों से तंग आकर पीड़िता को उसके परिजनों ने मामा के घर भेज दिया। फिर भी वह बाज नहीं आया। पीड़िता 12वीं में पढ़ती है। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। आरोपित अक्सर पीड़िता का पीछा करता था और उसे धमकियाँ देता रहता था। उसकी हरकतों से तंग आकर पीड़िता ने पुलिस में मामला दर्ज कराया।

इस मामले में थाना प्रभारी मोहन सिंह सिंगोरे ने IPC की धारा 354 डी (महिला के प्रति अश्लील इशारे करना, अश्लील टिप्पणी और पीछा करना), धारा 341 (किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना), धारा 506 (जान से मारने की धमकी) और 3/5 धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2021 (शादी और किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से किए गए धर्मांतरण का मामला) के तहत FIR दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

मनसुख हिरेन की लाश, 5 रुमाल और मुंबई पुलिस का ‘तावड़े’: पेंच कई, ‘एंटीलिया’ के बाहर मिली थी विस्फोटक लदी कार

पिछले दिनों मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर एक विस्फोटक लदी SUV कार पार्क की हुई मिली थी। इसके मालिक मनसुख हिरेन की शुक्रवार (मार्च 5, 2021) को लाश मिली थी। यह घटना तब हुई जब विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हिरेन की सुरक्षा का मुद्दा कुछ ही घंटों पहले उठाया था। मुम्ब्रा की खाड़ी में उनकी लाश मिली थी। उनकी पत्नी ने आत्महत्या के दावों को नकार दिया है। परिजनों का कहना है कि उनकी कार चोरी हो गई थी।

उन्होंने चोरी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। पत्नी का कहना है कि इसके बाद उनके पति को पुलिस स्टेशन में रोज पूछताछ के लिए बुलाया जाता था। उनका दावा है कि लाश मिलने से 1 दिन पहले भी मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन फिर उनकी लाश ही मिली। पत्नी विमला हिरेन ने बताया कि कांदिवली से तावड़े नामक किसी पुलिस अधिकारी का कॉल आया था।

जाने के कई घंटों बाद जब मनसुख हिरेन का फोन नंबर नहीं मिल रहा था तो परिवार ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने इसे तकनीकी मामला बताते हुए कहा की ये कार मनसुख के पास ज़रूर थी, लेकिन वो इसके मालिक नहीं थे और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही कुछ भी कहा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि ATC (आतंक निरोधी दस्ता) इस मामले की जाँच करेगा। मनसुख के पड़ोसियों ने उन्हें एक हँसमुख व मिलनसार इंसान करार दिया है।

उन्हें 10-15 वर्षों से जानने वाले लोगों ने कहा कि ये सब कैसे हो गया, उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा। उनके तीन बेटे भी हैं। उनकी आखिरी लोकेशन ठाणे से काफी दूर विवार इलाके की थी। वो अपने इलाके के बच्चों को तैरना सिखाते थे। पूर्व सीएम फडणवीस का पूछना है क्रॉफर्ड मार्केट में उनसे मिलने वाला पहला व्यक्ति कौन था? उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस एक गवाह की सुरक्षा नहीं कर पाई। पुलिस अधिकारी सचिन वाजे से उनकी कई बार फोन पर बातचीत होने के आरोप भी उन्होंने दोहराए।

उन्होंने माँग करते हुए कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच अब NIA ही कर सकती है। उन्होंने पूछा कि धमकी भरा पत्र सचिन वाजे को ही क्यों मिला और वे घटनास्थल पर सबसे पहले कैसे पहुँचे? ये वही अधिकारी हैं, जिन्होंने अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार किया था। वहीं देशमुख का कहना है कि कि अगर फडणवीस के पास कोई जानकारी है तो वो मुंबई पुलिस से साझा करें, क्योंकि वो ठीक तरीके से जाँच कर रही है और उन पर कोई शक नहीं कर सकता।

मनसुख हिरेन के शव की जाँच के दौरान उनके मुँह से 5 रुमाल भी निकले हैं, जो रहस्य को और बढ़ा रहे हैं। ठाणे में ऑटोमोबाइल पार्ट्स का कारोबार चलाने वाले हिरेन का शव संदिग्ध अवस्था में मिला था और शुरुआती बयान में मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या प्रतीत होता बताया था। जिस विरार में उनका आखिरी लोकेशन मिला, वो पालघर में है। ठाणे से वहाँ की दूरी 50 किलोमीटर के करीब है।

रुमाल वाले मामले में मुंबई पुलिस का कुछ और ही कहना है। उसका कहना है कि ये रुमाल चेहरे से बँधे हुए मिले हैं, मुँह के एकदम भीतर नहीं थे। कपड़ों से टुकड़ों से उनके चेहरे को ढक दिया गया था। महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि अंबानी के घर के बाहर मिले कार के मालिक का नाम सैम पीटर न्यूटन है, मनसुख का तो उस पर कब्ज़ा भर था। विपक्ष पूछ रहा है कि इस मामले में एक साथ इतने सारे संयोग कैसे?

इससे पहले, फडणवीस ने यह भी दावा किया कि एक नहीं बल्कि दो कारें थीं- एक स्कॉर्पियो और एक इनोवा और दावा किया कि दोनों कारें ठाणे से आई थीं और उसी रास्ते से चलकर लोकेशन तक पहुँची थीं। उन्होंने कहा कि मुकेश अंबानी के आवास के पास विस्फोटकों के साथ एक स्कॉर्पियो खड़ी थी, जबकि इनोवा इसे छोड़कर आगे बढ़ गई थी। फडणवीस ने मुकेश अंबानी के खिलाफ हमले के पीछे साजिश रचने का आरोप लगाया था।

ममता बनर्जी ने टिकट काटा तो पूर्व MLA अराबुल इस्लाम ने TMC दफ्तर को किया तबाह, समर्थकों ने लगा दी आग

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की सूची का ऐलान शुक्रवार (मार्च 5, 2021) को किया। जिन नेताओं को इस बार टिकट नहीं दिया गया है उनकी नाराजगी पार्टी को भारी पड़नी लगी है। टिकट न मिलने से नाराज TMC के पूर्व विधायक अराबुल इस्लाम ने अपनी ही पार्टी के दफ्तर में तोड़फोड़ मचाई और उसे तबाह कर डाला। साथ ही दफ्तर में रखी लकड़ी की कुर्सियों को भी आग के हवाले कर दिया।

ये घटना नॉर्थ 24 परगना के भांगर इलाके में हुई। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अराबुल इस्लाम को टिकट न मिलने से नाराज उनके समर्थकों ने जम कर हंगामा किया। समर्थकों का हुजूम विरोध करने के लिए स्थानीय TMC दफ्तर पहुँचा। आराबुल इस्लाम को 2006 में इसी क्षेत्र से विधायक चुना गया था, लेकिन पिछले चुनावों में उन्हें हार मिली थी। CPI (M) के बादल जमादार ने उन्हें हराया था।

जब समर्थकों ने उत्पात मचाया तो आराबुल इस्लाम भी रो पड़े और रोते-रोते खुद को TMC द्वारा टिकट न दी जाने की व्यथा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता उन्हें जो करने को कहेगी, वो करेंगे। उन्होंने कहा कि वे अकेले नहीं हैं, पार्टी के कई वफादार नेताओं को नजरंदाज किया गया है। 2018 पंचायत चुनावों के दौरान आराबुल इस्लाम को बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था।

उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी हफिजुर रहमान को गोली मारने की सुपारी दी थी। गोली रहमान के चेहरे में लगी थी और उनकी मौत हो गई थी। इस्लाम की गिरफ़्तारी के कुछ दिनों बाद उनके घर से कई क्रूड बम भी बरामद हुए थे। 2 पार्टी कार्यकर्ताओं की मौत के बाद 2014 में उन्हें पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। कई करोड़ों के स्कैम में भी उनका नाम है। क्षेत्र में उनकी माफिया वाली छवि है।

साथ ही वामपंथी नेता अब्दुर रज्जाक मोल्लाह पर हुए हमले का साजिश रचने के आरोप में भी वो 2013 में गिरफ्तार हो चुके हैं। उधर अडंगा के विधायक रफीकुर रहमान के समर्थकों ने भी उन्हें टिकट न दिए जाने के विरोध में सड़क पर हंगामा किया। सतगछिया से 4 बार से विधायक सोनाली गुहा को भी टिकट नहीं मिला। सीएम ममता का कहना है कि स्वच्छ छवि के नेताओं को ही टिकट दिया गया है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद इस बार नंदीग्राम से चुनाव लड़ेंगी। उम्मीदवारों की सूची में बंगाली फिल्म एक्ट्रेस सायानी घोष (Sayoni Ghosh) का भी नाम है। सायानी को टीएमसी ने पश्चिमी वर्धमान के आसनसोल (दक्षिणी) सीट से मैदान में उतारा है। वो 2015 में एक हिन्दू विरोधी और आपत्तिजनक ट्वीट को लेकर विवादों में रही थीं, जिसमें एक महिला पवित्र हिंदू प्रतीक शिवलिंग के ऊपर कंडोम डालते हुए दिख रही थी।

‘वह शिक्षित है… 21 साल की उम्र में भटक गया था’: आरिब मजीद को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी बेल, ISIS के लिए सीरिया गया था

आरिब मजीद (Areeb Majeed) शुक्रवार (5 मार्च 2021) को जेल से बाहर निकल गया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने पिछले दिनों उसकी जमानत बरकरार रखी थी। उस पर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) में शामिल होने के लिए सीरिया जाने का आरोप है। कथित तौर पर वह 2014 में तीन अन्य लोगों के साथ आईएस में शामिल होने गया था। छह महीने बाद लौट आया। देश लौटते ही आतंकरोधी दस्ते ने उसे गिरफ्तार कर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के हवाले कर दिया था।

अदालत ने कहा, “हमने देखा है कि प्रतिवादी एक शिक्षित व्यक्ति है। 21 वर्ष की आयु में जब वह इराक के लिए रवाना हुआ था, तब वह सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई कर रहा था। उसने स्पष्ट रूप से कहा है कि 21 वर्ष की आयु में वह भटक गया था और उसने गंभीर गलती की है, जिसके लिए वह पहले से ही छह साल से ज्यादा वक्त जेल में काट चुका है।”

अदालत ने यह भी कहा, “पिछले छह साल की कैद में प्रतिवादी ने एनआईए कोर्ट में खुद ही अपने मामले पर बहस की है। उसने इस कोर्ट में और एनआईए कोर्ट में अपने मामले का प्रतिनिधित्व किया है और हम देख सकते हैं कि उसने अपना मामला शिष्टाचार और उचित तरीके से पेश किया है।”

आरिब मजीद ने दावा किया कि उसे एनआईए और इस्तांबुल स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की मदद से लाया गया था। लाइवलॉ की रिपोर्ट के अनुसार उस पर आईपीसी की यूएपीए की धारा 125 (भारत सरकार की सहयोगी किसी एशियाई शक्ति के खिलाफ युद्ध छेड़ना) और धारा 16 (आतंकवादी गतिविधि के लिए सजा) और धारा 18 के तहत आरोप लगाया गया है।

जब अदालत ने उससे देश से बाहर जाने को लेकर सवाल किया तो उसने कहा, “मैं 21 साल का था, मैं दुखी होकर चला गया। वहाँ जाकर मैं लोगों की मदद कर रहा था।” उसने यह भी दावा किया कि उस पर लगाए आतंकवाद के आरोप झूठे हैं।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसे जमानत देते हुए शर्तें लगाई है। इसके मुताबिक पहले दो महीनों तक दिन में दो बार, उसके बाद अगले दो महीनों तक दिन में एक बार, उसके बाद अगले दो महीने तक सप्ताह में तीन बार, उसके बाद ट्रायल पूरा होने तक सप्ताह में दो बार उसे स्थानीय पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करना होगा।

गौरतलब है कि मजीद को विशेष अदालत ने 17 मार्च 2020 को जमानत दी थी। इसके बाद एनआई ने हाईकोर्ट में अपील की और आदेश पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन, बॉम्बे हाई कोर्ट से जमानत मिलते ही उसके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया।

PM मोदी को मिला सेरावीक ग्लोबल एनर्जी एंड एनवायरनमेंट लीडरशिप अवार्ड, कहा- देश के लोगों को करता हूँ अर्पित

आज प्रधानमंत्री मोदी को एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन के दौरान CERAWeek ग्लोबल एनर्जी एंड एनवायरनमेंट लीडरशिप अवॉर्ड (Global Energy And Environment Leadership Award) से सम्मानित किया गया। इस अवसर पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, “मैं इस पुरस्कार को अपने देश के लोगों को अर्पित करता हूँ। आप किसी भी भाषा में भारतीय साहित्य को पढ़ लीजिए आपको पता चलेगा कि लोगों का प्रकृति के साथ गहरा संबंध रहा है।”

वहीं केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी ट्वीट कर यह सूचना देश के लोगों को दी, उन्होंने कहा, “आज प्रधानमंत्री मोदी जी को एक वैश्विक अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। सेरावीक वैश्विक ऊर्जा कार्यक्रम में पिछले कई वर्षों से ऊर्जा के क्षेत्र में अच्छे काम करने वाले नेतृत्व को सम्मानित करते आए हैं। इस साल उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री को चुना है।”

इस अवसर पर अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “मैं बहुत विनम्रता के साथ सेरावीक वैश्विक ऊर्जा और पर्यावरण नेतृत्व पुरस्कार को स्वीकार करता हूँ। मैं इस पुरस्कार को अपने महान देश की जनता को समर्पित करता हूँ। मैं यह पुरस्कार अपनी भूमि की महान परम्परा को समर्पित करता हूँ जिसने पर्यावरण को हमेशा राह दिखाई है।”

कब हुई थी इस पुरस्कार की शुरुआत

गौरतलब हैकी सेरावीक वैश्विक ऊर्जा और पर्यावरण लीडरशीप पुरस्कार की शुरुआत 2016 में हुई थी। वैश्विक ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में प्रतिबद्ध नेतृत्व के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है। डॉक्टर डेनिएल येरगिन ने 1983 में सेरावीक की स्थापना की थी। इसकी स्थापना के बाद से प्रत्येक साल मार्च महीने में हृयूस्टन में सेरावीक का आयोजन होता है। इसकी गिनती विश्व के अग्रणी ऊर्जा मंचों में होती है। इस साल यह आयोजन डिजिटल तरीके से आज आयोजित हुआ है।

इस मंच पर दुनिया को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज दुनिया फिटनेस और वेलनेस पर केंद्रित है। स्वस्थ और जैविक भोजन की बढ़ती माँग के बीच भारत अपने मसाले, आयुर्वेद उत्पादों आदि के माध्यम से इस वैश्विक परिवर्तन को ड्राइव कर सकता है।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन में प्रमुख वक्ताओं में जलवायु जॉन केरी के लिए अमेरिकी विशेष राष्ट्रपति दूत, बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सह-अध्यक्ष और ब्रेकथ्रू एनर्जी बिल गेट्स के संस्थापक और सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर भी शामिल हुए।

आज पीएम मोदी ने स्वीडन के पीएम स्टीफान लोफवेन के साथ शिखर वार्ता भी की। करीब पाँच साल में दोनों के बीच यह पाँचवीं वार्ता है। दोनों नेताओं ने पिछले साल अप्रैल में कोरोना की स्थिति को लेकर फोन पर भी बातचीत की थी।

अमेज़न पर आउट ऑफ स्टॉक हुई राहुल रौशन की किताब- ‘संघी हू नेवर वेंट टू अ शाखा’

व्यंग्य समाचार वेबसाइट- ‘द फेकिंग न्यूज़’ के संस्थापक और ऑपइंडिया के सीईओ, राहुल रौशन की पहली किताब- ‘संघी हू नेवर वेंट टू अ शाखा’ (Sanghi Who Never Went To A Shakha) जो उनकी अपनी यात्रा है उस व्यक्ति से जो ‘संघी’ शब्द से ही नफ़रत करता था से लेकर गर्व से इस शब्द को एक ओहदे के रूप में अंगीकार कर लेने तक। फिलहाल अमेज़न पर उनकी किताब रिलीज़ से पहले ही आउट ऑफ़ स्टॉक चल रही है।

हालाँकि, पुस्तक का पेपरबैक संस्करण भले वर्तमान में अमेज़न पर उपलब्ध नहीं है, फिर भी कोई भी पुस्तक के किंडल संस्करण को प्री-ऑर्डर कर सकता है, जिसे 10 मार्च तक मिल जाने की उम्मीद है। इसके अलावा, किताब का पेपरबैक संस्करण अभी भी गरुड़ बुक्स पर उपलब्ध है।

इस किताब का प्रकाशन रूपा पब्लिकेशन्स द्वारा किया गया है। आज ही रूपा पब्लिकेशन ने ट्विटर पर पुस्तक के लॉन्च की घोषणा करते हुए कुछ नए अंदाज में ट्वीट भी किया।

“फेकिंग न्यूज के प्रसिद्ध ‘पागल पत्रकार’ ​राहुल रौशन ने हिंदुत्व को एक विचारधारा के रूप में क्यों विश्लेषित किया है? यह विश्लेषण करते हुए ‘संघी’ बनने की अपनी पेचीदा यात्रा को उन्होंने साझा किया है- अपनी किताब ‘संघी हू नेवर वेंट टू अ शाखा’ में…”

आज ही कुछ घंटे पहले, स्वयं लेखक राहुल रौशन ने भी ट्विटर पर अपने शुभचिंतकों-फॉलोवर्स को यह बताने के लिए ट्वीट भी किया कि पुस्तक पहले से ही आउट हो चुकी है और कई लोगों ने तो अपनी प्रतियाँ प्राप्त भी कर ली हैं क्योंकि विक्रेता लॉन्च की तारीख से पहले ही इसे डिलीवर करने का निर्णय ले लिया है। हालाँकि, किताब की आधिकारिक लॉन्च की तिथि 10 मार्च है।

‘संघी हू नेवर वेंट टू अ शाखा’: किताब के बारें में कुछ खास बातें

‘संघी हू नेवर वेंट टू अ शाखा’ एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो एक ‘कॉन्ग्रेसी हिंदू’ परिवार में पैदा हुआ था, लेकिन कालांतर में मोदी समर्थक ‘संघी’ बन गया – वह भी आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के एक भी शाखा (नियमित सभा) में शामिल हुए बिना। यहाँ तक कि संघ का स्वयंसेवक या अपने पहले के वर्षों से नरेंद्र मोदी के प्रशंसक होने के बिना भी।

यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक पीढ़ी की कहानी है जिसने विश्वास की छलाँग लगाई है। यह कहानी लेखक के ‘लिबरल’ से ‘संघी’ होने के संक्रमण काल के बारे में नहीं है, वो भी बिना कभी संघ की शाखा में गए बिना बल्कि यह उन घटनाओं को कोलाज है जिन्होंने इस संक्रमण को आकार देने और इसे प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यह पुस्तक राहुल रौशन के व्यक्तिगत जीवन यात्रा के उबड़-खाबड़ पड़ावों से गुजरते हुए भारत के समकालीन राजनीतिक इतिहास का एक दस्तावेज है। एक ऐसे ‘संघी’ की यात्रा जिन्होंने एक पत्रकार के रूप में शुरुआत की, लम्बा अनुभव अर्जित किया, एक सफल उद्यमी रहे, और अब एक उतने ही लोकप्रिय समाजशास्त्रीय टीकाकार-टिप्पणीकार हैं।

हिंदू महिला को अगवा कर 14 दिनों तक रेप, धर्म परिवर्तन का दबाव: पहचान छिपा असफाक खान ने बनाया शिकार

उत्तर प्रदेश के महोबा से ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) का मामला सामने आया है। महोबा शहर की कोतवाली पुलिस ने आरोपित मुन्ना खाँ उर्फ असफाक खान को गिरफ्तार कर लिया है। उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत उसकी गिरफ्तारी हुई है। उस पर हिंदू बनकर 21 साल की एक महिला को प्रेम जाल में फँसाने और फिर किडनैप कर उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्टों में कोतवाली एसएचओ अनूप कुमार दुबे के हवाले से कहा गया है, “गुरुवार को 21 वर्षीय महिला की शिकायत पर उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। शुक्रवार को महोबा शहर के ही एक मुहल्ले में रहने वाले आरोपित मुन्ना खाँ को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।”

महिला ने अपनी शिकायत में कहा था कि मुन्ना खाँ ने हिन्दू बनकर उसे प्रेम जाल में फँसाया। पिछले साल आठ दिसंबर को उसकी शादी कहीं और हो गई। इसके बाद वह अपने पति के साथ दिल्ली में रहने लगी थी। पीड़िता के अनुसार 18 फरवरी को दिल्ली से वह अपने मायके आई। उसी उसी दिन मुन्ना उसे किडनैप कर उरई में अपनी बहन के घर ले गया। वहाँ उसे 14 दिन रखकर उसके साथ रेप किया।

पीड़िता के अनुसार उरई में ही उसे पता चला कि मुन्ना हिंदू नहीं है। उसने रेप की घटना का अश्लील वीडियो भी बनाया है। कथित तौर पर इसे सोशल मीडिया में वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता पर धर्म बदलने के लिए दबाव डाला।

गौरतलब है कि पिछले साल देश के अलग-अलग हिस्सों से लव जिहाद की कई खौफनाक घटनाएँ सामने आईं थी। इसे देखते हुए यूपी में कानून लाया गया था। कई अन्य भाजपा शासित राज्य भी लव जिहाद को रोकने के लिए सख्त कानून लाने की तैयारी कर रहे हैं।

मुंबई पुलिस अफसर के संपर्क में था ‘एंटीलिया’ के बाहर मिले विस्फोटक लदे कार का मालिक: फडणवीस का दावा

हाल ही में, बिजनेसमैन मुकेश अंबानी के घर (एंटीलिया) के बाहर एक संदिग्ध कार बरामद हुई थी। वहीं, आज कार के मालिक मनसुख हिरेन के आत्महत्या का दावा किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कार मालिक मनसुख ने कलावा ब्रिज से कूदकर जान दी है। ठाणे के डीसीपी ने बताया कि मनसुख हिरेन जिनकी कार मुकेश अंबानी के घर के बाहर मिली थी, उसने आत्महत्या कर ली। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की पुलिस छान बीन कर रही है।

वहीं अपने नेचर से ही संदिग्ध लग रहे इस मामले पर भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि मैंने मनसुख हिरेन को संरक्षण देने के लिए सदन में सवाल उठाया था, क्योंकि वह इस पूरे मामले की मुख्य कड़ी थे। उन्होंने कहा कि अभी हमें उनके आत्महत्या के बारे में पता चला है। यह इस मामले को और भी ज्यादा संदिग्ध बनाता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस आतंकी साजिश को देखते हुए हम मामले की जाँच एनआईए को सौंपने की माँग करते हैं।

आज महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने महाराष्ट्र विधानसभा में बोलते हुए एंटीलिया के बाहर विस्फोटक रखे जाने से जुड़े मामले में कई सनसनीखेज दावे किए। विधानसभा में बोलते हुए, फडणवीस ने आरोप लगाया कि स्कॉर्पियो कार के मालिक, जिनकी गाड़ी का इस्तेमाल जिलेटिन की छड़ें लगाने के लिए किया गया था और उसी कार से मुंबई में मुकेश अंबानी के आवास के बाहर एक धमकी पत्र मिलने का दावा भी किया गया था। वह एक ऐसे मोबाइल फोन नंबर के संपर्क में थे जो मुंबई पुलिस के एक अधिकारी के नाम पर पंजीकृत है और वह अधिकारी कोई और नहीं बल्कि मुंबई के ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ सचिन वाजे हैं।

कार के मालिक का नाम मनसुख हिरेन था, जिसने यह आरोप लगाया था कि उसकी कार मुलुंड-ऐरोली लिंक रोड से चुराई गई थी। हिरेन ने लापता कार के बारे में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। आज उसी हिरेन को मुंबई में एक नाले में मृत पाया गया। जिससे यह पूरा मामला और भी संदिग्ध नजर आ रहा है।

“जिस व्यक्ति ने अंबानी के घर के बाहर पाई गई कार की गुमशुदगी दर्ज कराई थी, उसने एक नंबर पर कुछ कॉल किए थे और उस नंबर से भी कई फोन कॉल आए थे। जब जाँच की गई तो पता चला कि यह नंबर मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वाजे के नाम पर है। फडणवीस ने कहा कि दोनों के बीच पहली बातचीत 8 जून को हुई थी। रिकॉर्ड्स देखने पर पता चलता है कि एक और कॉल 24 जुलाई को की गई थी। पिछले कई महीनों में दोनों के बीच इस तरह के कई और कॉल हुए हैं।

इससे पहले, फडणवीस ने यह भी दावा किया कि एक नहीं बल्कि दो कारें थीं- एक स्कॉर्पियो और एक इनोवा और दावा किया कि दोनों कारें ठाणे से आई थीं और उसी रास्ते से चलकर लोकेशन तक पहुँची थीं। उन्होंने कहा कि मुकेश अंबानी के आवास के पास विस्फोटकों के साथ एक स्कॉर्पियो खड़ी थी, जबकि इनोवा इसे छोड़कर आगे बढ़ गई थी। फडणवीस ने मुकेश अंबानी के खिलाफ हमले के पीछे साजिश रचने का आरोप लगाया है। उनका साफ़ कहना है कि यह संयोग नहीं हो सकता है कि कार ठाणे से चुराई गई थी, जिस रास्ते पर वे चल कर यहाँ आए वह भी ठाणे से होकर गुजरता है और मामले की जाँच कर रहे आईओ भी ठाणे में रहते हैं।

इस रहस्य को समझते हुए, फड़नवीस ने आगे कहा, “सचिन वाजे वो पहले पुलिस अधिकारी थे जो घटनास्थल पर सबसे पहले पहुँचे थे और फिर उन्हें ही जाँच अधिकारी (IO) के रूप में नियुक्त किया गया। तीन दिन पहले, उन्हें अचानक IO के रूप में हटा दिया गया था और मैं यह समझने में असफल हूँ कि आखिर उन्हें क्यों हटाया गया था।” फडणवीस ने कुछ गंभीर संकेत करते हुए पूछा कि स्थानीय पुलिस से पहले सचिन वाजे कैसे मौके पर पहुँच गए।

संदेह के घेरे में आई कार मनसुख हिरेन के नाम से दर्ज थी, जिन्होंने पुलिस को बताया था कि उनकी कार 16 फरवरी को मुलुंड-ऐरोली लिंक रोड पर ख़राब होने बाद चोरी हो गई थी। हिरेन ने कहा था कि जब उनकी कार रास्ते में ख़राब हो गई थी, तो उन्होंने सड़क के किनारे कार पार्क करने का फैसला किया था और अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए एक कैब ले ली थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि जब वह अगले दिन वह कार लाने के लिए लौटे, तो वह वहाँ नहीं थी। जिसके बाद उन्होंने पुलिस कार गायब हो जाने की शिकायत भी दर्ज कराई थी।

16 फरवरी की घटना के बारे में बोलते हुए, फडणवीस ने कहा, “स्कॉर्पियो कार के मालिक ने गाड़ी ख़राब होने के बाद दक्षिण मुंबई में क्रॉफोर्ड मार्केट तक पहुँचने के लिए एक ओला कैब ली थी जहाँ वह एक व्यक्ति से मिले थे। इस मामले को सुलझाने के लिए उस व्यक्ति की पहचान महत्वपूर्ण है। चूँकि उन्होंने एक OLA लिया, इसलिए यह पता लगाया जा सकता है कि उनका ड्राइवर कौन था और उससे पूछताछ की जा सकती है कि क्या उसने उस व्यक्ति को देखा है जिससे हिरेन मिले थे।”

मामले में संयोगों की एक शृंखला का हवाला देते हुए, पूरी क्रोनोलॉजी समझाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री फड़नवीस ने मामले की एनआईए जाँच की माँग की है।

गौरतलब है कि उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर से जिलेटिन और धमकी भरे खत वाली जो स्कार्पियो कार मिली थी उस कार के मालिक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। उनके आत्महत्या का दावा स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन का शव मुंब्रा रेती बंदर रोड के पास खाड़ी से मिलने के बाद किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, शव को सवेरे 10 बजकर 25 मिनट पर बाहर निकाला गया है। कहा जा रहा है कि परिवार ने शुक्रवार दोपहर ही लापता की शिकायत नौपाडा पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी। ऐसे में मामला संदिग्ध नजर आ रहा है।

दूसरी तरफ एंटीलिया के पास संदिग्ध कार से विस्फोटक और धमकी भरा ख़त मिलने के मामले में मुंबई पुलिस को रोज नए सबूत मिल रहे हैं। पुलिस ने अंबानी के घर एंटीलिया के आस-पास मौजूद सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला है जिसमें सामने आया है कि ये कार 24 फरवरी की रात करीब एक बजे वहाँ खड़ी की गई थी। कार इससे पहले रात 12:30 बजे हाजी अली जंक्शन पहुँची थी और वहाँ करीब 10 मिनट तक रुकी भी रही थी। मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि संदिग्ध एंटीलिया की बीते एक महीने से रेकी कर रहे थे।

कल्याणकारी योजनाओं में आबादी के हिसाब से मुस्लिमों की हिस्सेदारी ज्यादा: CM योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश में आबादी के अनुपात में मुसलमानों की राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में अधिक हिस्सेदारी है। यह बात बुधवार (3 मार्च 2021) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कही। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में मुस्लिम की हिस्सेदारी उनकी आबादी से कहीं ज्यादा है।

उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या में मुस्लिमों की आबादी 17-19 फीसदी है। लेकिन कल्याणकारी योजनाओं में उनकी हिस्सेदारी 30-35 फीसदी है।” सपा विधायक और नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन का ध्यान आकर्षित करवाते हुए उन्होंने यह बात कही।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह बात कहते हुए केंद्रीय आवास योजना, मुफ्त बिजली कनेक्शन, उज्जवला योजना के तहत गैस कनेक्शन और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का जिक्र भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बिना किसी भेदभाव और तुष्टिकरण के बगैर सभी लोगों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचा रही हैं। पिछली सरकारों के दौरान योजनाओं का लाभ पहुँचाने में भेदभाव किए जाने की बात भी उन्होंने कही।

उन्होंने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ किसे मिले यह तय करने के लिए पिछली सरकारे ‘पिक एंड चूज़’ पॉलिसी का इस्तेमाल करती थी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ विजन के साथ कार्य करने को प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के वक्त उत्तर प्रदेश आर्थिक रूप से उन्नत देश के शीर्ष राज्यों में था। लेकिन, राज्य की इकोनॉमी में पिछली सरकारों के दौरान लगातार गिरावट हुई। चाहे वह सपा की सरकार रही हो या बसपा की या फिर कॉन्ग्रेस की। उन्होंने कहा, “2016 में हम 5वें या छठे पायदान पर थे। लेकिन, हालिया रैंकिंग में उत्तर प्रदेश देश की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनकर उभरा है।”

सीएम योगी ने कहा कि राज्य सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में जाति, पंथ, धर्म, क्षेत्र और भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं किया। उन्होंने कहा, “इसे हम मोदी मॉडल कहते हैं।” समाजवादी पार्टी की आलोचना करते हुए सीएम ने कहा कि आचार्य नरेंद्र देव, जय प्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया जैसे नेता जिस तरह के समाजवाद की बात करते थे, आज सपा नेताओं का उससे कोई नाता नहीं रहा। उन्होंने कहा कि आज का समाजवाद जाति और परिवार तक सिमट गया है और शिवपाल यादव तक पहुँच कर यह ‘प्रगतिशील’ हो जाता है।