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भारत की कूटनीति के आगे बेबस ड्रैगन: पैंगोंग के उत्तरी किनारों से उखाड़े तंबू, ध्वस्त किए बंकर-शेल्टर

भारत की कूटनीति के आगे चीनी सेना को झुकना पड़ा। दोनों देशों के बीच कई महीने से चल रहे गतिरोध के बाद स्थिति सामान्य करने की कवायद तेज हो गई है। चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने आखिरकार पैंगोंग झील के उत्तरी तट पर फिंगर 4 क्षेत्र को खाली करना शुरू कर दिया है, जिस पर उसने पिछले साल कब्जा कर लिया था और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति में बदलाव किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ने फिंगर 5 और फिंगर 8 के बीच अपने कई शेल्टर्स और ढाँचे को भी हटा लिया है। साथ ही चीनी सैनिक अपने रहने के लिए बनाए गए शेल्टर (आश्रय) को भी नष्ट कर रहे हैं और अन्य संरचनाओं को भी हटा रहे हैं, जो उन्होंने कब्जे के दौरान स्थापित की थी। चीनी सेना के रुख को देखते हुए भारत ने भी नरमी दिखाते हुए अपने जवानों की संख्या कम कर दी है।

कहा जा रहा चालबाज चीनी सेना द्वारा उठाया गया यह कदम 10 महीनों से चल रहे गतिरोध को खत्म करने की दिशा में दोनों देश के सेना अधिकारियों द्वारा लगातार बातचीत और सैनिकों के पीछे हटने संबंधी समझौते के अनुसार हो रहा है।

समझौते के मुताबिक, चीनी सैनिक फिंगर 8 पर वापस चले जाएँगे और भारतीय सेना पैंगोंग झील के उत्तरी तट के फिंगर 2 और 3 के बीच धन सिंह थापा पोस्ट पर वापस आ जाएगी। इसके साथ ही पैंगोंग लेक के दक्षिणी किनारे से तैनाती भी वापस ले ली जाएगी। इसके अलावा, पारंपरिक क्षेत्रों में गश्त सहित सैन्य गतिविधियों पर एक अस्थायी रोक होगी, जब तक कि स्थिति समान्य न हो जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह भी कहा जा रहा है कि पैंगोंग लेक के दक्षिणी किनारे से टैंक भी हटा दिए गए हैं। दक्षिणी तट पर कुछ इलाकों में दोनों सेनाओं के टैंकों के बीच केवल 100 मीटर की दूरी ही रह गई थी, अब उन्हें दोनों तरफ से पूरी तरह वापस खींच लिया गया है और अब वे कुछ किलोमीटर दूर हैं।

बता दें, पैंगोंग झील में पास स्थित पर्वत को कई सैन्य क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जिसे फिंगर्स कहा जाता है। असल में यह पर्वत उंगलियों की तरह दिखते भी है। झील के उत्तरी किनारे को आठ फिंगर्स में बाँटा गया है। भारत ने फिंगर 8 तक अपने क्षेत्र का दावा किया है और चीन फिंगर 4 तक अपने दावों पर अड़ा है।

दोनों देशों के इन दावों के चलते सेना कई बार सेना कई बार इन क्षेत्रों में आमने-सामने आ जाती है और पिछले कुछ महीनों से तो दोनों सेनाएँ कई स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति में बनी हुई है। वहीं सैनिकों के बीच झड़प की खबरें भी सामने आती है।

गौरतलब है कि 2020 कोरोना वायरस के शुरुआती दौर में पैंगोंग झील पर चीन की सेना ने अपना दावा ठोकना चाहा था। जिसका भारतीय सेना ने पुरजोर विरोध किया था। वहीं यह विरोध इस कदर बढ़ गया था कि 15 जून को चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था। 20 भारतीय सैनिक इस हमले में शहीद हो गए। हालाँकि, चीन के कितने सैनिक मारे गए, उसने खुलासा नहीं किया।

यूपी पुलिस की पिस्टल छीन भाग रहा था, एनकाउंटर में ढेर हुआ ‘मौत का डॉक्टर’: पूर्व MLA की हत्या सहित 70 मामले थे दर्ज

लखनऊ के पॉश विभूतिखंड इलाके में पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपित और कुख्यात शूटर गिरधारी विश्वकर्मा को उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक एनकाउंटर में मार गिराया। जब ये एनकाउंटर हुआ, तब खरगापुर इलाके में हत्या में प्रयुक्त असलहे की तलाश के लिए यूपी पुलिस गिरधारी को लेकर पहुँची थी। उससे पहले उसे गिरफ्तार किया जा चुका था। गिरधारी विश्वकर्मा ने यूपी पुलिस का असलहा छीन कर भागने की कोशिश की थी।

इसके बाद पुलिस के साथ उसकी मुठभेड़ हुई, जिसमें वो मारा गया। गिरधारी ने पुलिस से बचने के लिए वही तरीका अपनाया, जो कानपुर के बिकरू कांड के आरोपित विकास दुबे ने अपनाया था। विकास दुबे भी इसी तरह के एनकाउंटर में मारा गया था। गिरधारी को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे यूपी लाया गया। आउटर नॉर्थ जिले की स्पेशल स्टाफ पुलिस ने रोहिणी इलाके से उसे दबोचा था।

फिर गिरधारी को कानूनी कार्रवाई पूरी कर के लखनऊ लाया गया। रविवार (फरवरी 14, 2021) की रात यूपी पुलिस की टीम उस असलहे की बरामदगी के लिए उसे लेकर घटनास्थल तक पहुँची थी, जिसका उपयोग हत्याकांड में किया गया था। यूपी पुलिस अपने वाहन से गिरधारी को लेकर गई थी। वहाँ गाड़ी से उतरते समय ही उसने इंस्पेक्टर अख्तर उस्मानी का पिस्टल छीन कर पुलिस पर हमला कर दिया। फिर पिस्टल छीन कर भागने लगा।

पुलिस टीम के साथ SI अनिल सिंह भी मौजूद थे, जिन्होंने उसका पीछा किया। गिरधारी तब तक झाड़ियों में छिप कर भागने की फिराक में था। घटना की सूचना तत्काल कंट्रोल रूम को दी गई, जिसके बाद लखनऊ के एसीपी ईस्ट समेत कई थानों की पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और गिरधारी को आत्मसमर्पण करने को कहा गया। घेराबंदी में वो लगातार लूटी हुई पिस्टल से फायरिंग कर के पुलिसकर्मियों को निशाना बनाता रहा।

जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिससे वो घायल हो गया। पुलिस ने इलाज के लिए उसे पास में स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल के इमर्जेंसी वॉर्ड में पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सितम्बर 2019 में वाराणसी के तहसील सदर में माफिया मुन्ना बजरंगी के करीबी नितेश सिंह बबलू की दिनदहाड़े हुई हत्या में भी वो आरोपित था। उसे अपराध जगत में ‘डॉक्टर’ के नाम से भी जाना जाता था।

गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ़ कन्हैया जुलाई 19, 2013 में आजमगढ़ के जीयनपुर कस्बे में पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू सहित दो लोगों की हत्या में भी आरोपित है। वो अपने गिरोह डी-11 के सरगना आजमगढ़ के छपरा सुल्तानपुर निवासी ध्रुव कुमार सिंह उर्फ कुंटू सिंह का सबसे खास शॉर्प शूटर बन गया था। उस पर 70 से भी अधिक मामले दर्ज हैं। पूर्वांचल के एक माफिया सांसद का भी वो करीबी था।

‘टूलकिट सिर्फ सूचना पैकेज, किसानों को विलेन बनाया जा रहा’: बेल के लिए HC पहुँची निकिता, ISI से जुड़ा तार

दिल्ली पुलिस ने सोमवार (फरवरी 16, 2021) को बताया कि वो इस बात की जाँच कर रहे हैं कि ग्रेटा थनबर्ग द्वारा ट्वीट की गई टूलकिट में पीटर फ्रेडरिक का नाम कैसे जुड़ा। पीटर पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI का आदमी है। गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा में इन सबने मिल कर साजिश रची थी। पीटर 2006 से ही भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। डॉक्यूमेंट में उसका नाम भी शामिल था।

2006 में उसका नाम तब सामने आया था, जब उसने ‘कश्मीर-खालिस्तान (K2)’ के लिए आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले भजन सिंह भिंडर उर्फ़ इक़बाल चौधरी के साथ जुड़ा था। पीटर के हैंडल से एक ट्वीट भी किया गया, जिसमें कहा गया कि वो खालिस्तान का समर्थन नहीं करता है और ये सब मोदी सरकार द्वारा फैलाया गया एक मानसिक जंजाल है, ताकि लोगों का ध्यान भटकाया जा सके। इस मामले में बेंगलुरु की तथाकथित क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि गिरफ्तार की जा चुकी है।

मुंबई की वकील निकिता जैकब और पुणे के इंजीनियर शांतनु के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। दोनों फरार अभियुक्तों की तलाश जारी है। उक्त टूलकिट डॉक्यूमेंट में कई ऐसे हाइपरलिंक थे, जो खालिस्तान से जुड़े थे। दिशा ने टेलीग्राम से उसे ग्रेटा को भेजा। प्रियंका गाँधी और अरविंद केजरीवाल जैसे नेता दिशा की गिरफ़्तारी का विरोध कर चुके हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री तक ने इसका विरोध किया।

पत्र जिस भिंडरावाले से जुड़ा हुआ है, उसका नाम हथियारों और ड्रग्स की अवैध सप्लाई में आ चुका है। पीटर का नाम टूलकिट में उन लोगों में शामिल था, जिन्हें फॉलो करने को कहा गया था। इस टूलकिट में कई गूगल ड्राइव्स, गूगल डॉक्स और अन्य वेबसाइट्स के लिंक्स थे। इनमें एक खालिस्तानी वेबसाइट ‘askindiawhy.com’ भी शामिल है। इस टूलकिट को सोशल मीडिया के ‘प्रभावशाली’ लोगों के बीच साझा किया गया था।

जनवरी 11 को हुई ज़ूम मीटिंग में टूलकिट के प्रचार-प्रसार के बारे में सब कुछ तय किया गया था। पुलिस का कहना है कि निकिता और शांतनु की गिरफ़्तारी के बाद ही इस मामले में अधिक खुलासा हो पाएगा। अब निकिता ने बयान जारी कर कहा है कि वो टूलकिट सिर्फ एक ‘सूचना पैकेज’ था और उसका उद्देश्य हिंसा भड़काना नहीं था। निकिता ने ये भी कहा कि उसने ‘किसान आंदोलन’ के लिए समर्थन जुटाया और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

उसने कहा है कि जो इस आंदोलन के बारे में सब कुछ जानना चाहते थे, उनके लिए ये टूलकिट तैयार किया गया। जैकब वैश्विक पर्यावरण संगठन ‘एक्सटिंक्शन रिबेलियन (XR)’ से जुड़ी हुई है। उसने कहा है कि लोकतंत्र और संविधान के हिसाब से इस टूलकिट को तैयार करना वैध है। जैकब के अनुसार, XR द्वारा ही इस टूलकिट को तैयार किया गया और इसके नेटवर्क में फैलाया गया। दिशा का संगठन ‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर (FFF)’ भी XR का पार्टनर है।

निकिता जैकब और शांतनु मुलुक ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी जमानत याचिका भी दायर कर दी है, जिस पर आज सुनवाई होनी है। निकिता ने हाईकोर्ट से माँग की है कि उसे 4 हफ़्तों के लिए गिरफ़्तारी से राहत दी जाए, किसी भी पुलिस कार्रवाई से उसे अंतरिम राहत मिले और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया जाए कि वो FIR की कॉपी उससे शेयर करे। शांतनु मुलुक ने जो ईमेल बनाया, वही उस टूलकिट का ऑनर था।

निकिता जैकब ने अपनी जमानत याचिका में ये भी कहा है कि वो किसानों को ‘विलेन बनाए जाने’ और तीनों कृषि कानूनों से ‘होने वाले नुकसान’ को लेकर चिंतित थी। उसने कहा कि उसका कोई राजनीतिक, मजहबी या आर्थिक एजेंडा नहीं है। याचिका में दावा किया गया है कि आजकल महिलाओं के लिए दूसरे राज्यों में यात्रा करना कठिन है, क्योंकि इससे FIR हो जाती है। उसने आरोप लगाया कि ‘सोशल मीडिया ट्रॉल्स’ उसके फोन नंबर्स और व्यक्तिगत इन्फो सबको बाँट रहे हैं।

पुलिस के मुताबिक़, इस प्रकरण में शामिल सभी ने ‘टूलकिट’ पूरी सावधानी से बनाई है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक और अहम बात कही, वो ये कि इस टूलकिट में प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और फैक्ट चेकर्स का नाम भी शामिल है। इसमें सिर्फ मामले के आरोपित ही साबित कर पाएँगे कि क्यों टूलकिट में पीटर फ्रेडरिक का नाम मौजूद है। इसके पहले ग्रेटा थनबर्ग और दिशा रवि के बीच व्हाट्सएप चैट भी सामने आई थी। 

बसंत सिर्फ ऋतु नहीं, ज्ञान की उपासना से लेकर काम और मोक्ष का जीवंत उत्सव भी है

बसंत पंचमी हर वर्ष हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इसे माघ पंचमी भी कहते हैं। आज (फरवरी 16, 2021) बसंत पंचमी का त्योहार पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। विश्व में बेशक ऋतुओं का कोई स्पष्ट वर्गीकरण न हो पर भारत में वर्ष को जिन छह ऋतुओं में बाँटा जाता है, उनमें वसंत अर्थात जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सोने सी चमकने वाली सरसों के पीले फूलों की चादर सी बिछ जाती है, नाना प्रकार के मनमोहक फूलों से प्रकृति धरती का शृंगार करती है। जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं है, कोयल की कूक से दिशाएँ गूँजने लगती हैं।

आमतौर पर बसंत के बारे में अब की पीढ़ी ये सब किताबों में पढ़ती है क्योंकि प्रकृति आज की पीढ़ी के लिए या तो टीवी में मौजूद है या फिर किताबों में। अब की पीढ़ी की कल्पनाएँ भी इतनी उर्वर नहीं कि उनकी कल्पनाओं में भी ऐसा बसंत हो! कहाँ है आपका बसंत? अपने फ़्लैट में मत खोजिए, ना ही शहरों की अट्टालिकाओं में, प्रकृति की गोद में ही बसंत से मुलाक़ात होगी।

चलिए आज की उन पीढ़ियों को बसंत से मुलाकात कराता हूँ। बसंत, बसंत पंचमी, मदनोत्सव, सरस्वती पूजा, कुम्भ का शाही स्नान, होली की प्रारम्भिक शुरुआत, शमशान में मौत के तांडव पर भारी जीवन उत्सव – बसंत यह सब कुछ है। यह लेख आज की उस व्यस्त पीढ़ी के लिए भी है, जो एक बार फिर जीवन के उत्सव में खो जाने को तैयार हैं।

ऋतु बसंत से जुड़ी पौराणिक मान्यता

आपको पता ही होगा कि बसंत ऋतु का सम्बन्ध प्रेम भाव से है, प्रेम को जिन्होंने हर रूप में अंगीकार किया ऐसे देव भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा का शास्वत पाठ भी सनातन की ही देन है। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी के नाम से भी उल्लेखित किया गया है।


देवी भगवती माँ सरस्वती

कहते हैं कि सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों में प्रमुख मनुष्यों की रचना की। पर ब्रह्मा अपनी सर्जना से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कहीं न कहीं कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा। इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ। यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। वह दिन बसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का प्राकट्य उत्सव मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी।

सरस्वती को बागेश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। मधुर संगीत और सुरों की सृजनकर्ता होने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है-

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।

अर्थात ये परम चेतना हैं। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है।

बसंत: काम मानवता का हिस्सा है

बसंत को ऋतुओं का राजा यूँ ही नहीं कहा गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, कामदेव ही इस मौसम को बेहद रूमानी कर देते हैं। आमतौर पर कामदेव को प्रेम का देवता माना गया है। इन्हें रागवृंत, अनंग, कंदर्प, मनमथ, मनसिजा, मदन, रतिकांत, पुष्पवान और पुष्पधंव नामों से जाना जाता है।

सनातन परम्परा में काम कभी वर्जित नहीं रहा, कामुकता हमेशा से मानवता का एक अभिन्न हिस्सा रही है। इसी वजह से आज मानवता का अस्तित्व है। अगर गुफा में रहने वाले मानव ने इसे त्याग दिया होता तो क्या आज हम होते। यह हमेशा से है और रहेगी, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए कि काम आपकी चेतना पर हावी हो जाए। कहा गया है कि अगर काम आपकी चेतना पर शासन करने लगे, तो आप एक विवश इंसान हो जाएँगे। फिर आपके और किसी जानवर के बीच कोई फर्क ही नहीं रह जाएगा।

खजुराहो: बाहर काम भीतर शांति

भारतीय संस्कृति ही है जहाँ खजुराहों और कोणार्क जैसे मंदिर हैं जो काम पर विजय के प्रेरक हैं। मंदिर के बाहर यौनरत मुद्राएँ हैं लेकिन कहीं भी मंदिर के भीतर इस तरह की कामोत्तेजक सामग्री नहीं है। यह प्रतीकात्मक रूप से हमेशा बाहरी दीवारों पर ही मिलेगी। इसके पीछे जो सनातन सोच है वह यह है कि अगर आप यह महसूस करना चाहते हैं कि भीतर क्या है तो आपको अपनी भौतिकता या शारीरिक पहलू को यहीं बाहर छोड़ देना होगा। शारीरिक पहलू आसान होते हैं, ये बाहर ही हैं। लेकिन जो भी उसके परे है, वह तब तक उतना वास्तविक महसूस नहीं होता जब तक कि वह आपके अनुभव में न आ जाए। भारतीय परम्परा में ऐसे हर संभव साधनों का निर्माण किया गया, जिनका भौतिकता को कम करने में प्रयोग किया जा सके और जीवन की उच्चतर संभावनाओं के प्रति लोगों को ज्यादा संवेदनशील बनाया जा सके। सनातन परम्परा में बिना प्रयोग किए किसी भी चीज को अस्वीकार नहीं किया गया। पूरा जीवन ही उत्सव है यहाँ और जिसने भी जीवन को पूरी उत्सवधर्मिता से जिया, वो ईश्वर के रूप में पूजनीय है।

वासुदेव श्रीकृष्ण ने दिया था वर

पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से ख़ुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी और यूँ भारत के कई हिस्सों में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा होने लगी जो कि आज तक जारी है।

पारंपरिक रूप से बसंत पंचमी बच्चों के विद्यारम्भ के लिए शुभ है। इसलिए देश के अनेक भागों में इस दिन बच्चों की पढाई-लिखाई का श्रीगणेश किया जाता है। बच्‍चे को प्रथमाक्षर यानी पहला शब्‍द लिखना और पढ़ना सिखाया जाता है। आन्ध्र प्रदेश में तो इसे विद्यारम्भ पर्व ही कहते हैं।

पतंगबाज़ी का वसंत से कोई सीधा संबंध नहीं है। लेकिन पतंग उड़ाने का रिवाज़ हज़ारों साल पहले चीन में शुरू हुआ और फिर कोरिया और जापान के रास्ते होता हुआ भारत पहुँचा।

ज्ञान की देवी भगवती सरस्वती

यों तो माघ का यह पूरा माह ही उत्साह से परिपूर्ण है, पर वसंत पंचमी का पर्व प्राचीनकाल से ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती की विशेष कृपा का दिन है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं, वे इस दिन माँ शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं। कलाकारों का तो कहना ही क्या? जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का है, जो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है, जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू, बाट, बही खातों और दीपावली का है, वही महत्व कलाकारों के लिए वसंत पंचमी का है। चाहे वे कवि हों या लेखक, गायक हों या वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और माँ  सरस्वती की वंदना से करते हैं।

शिक्षा जो जीवन का पाठ पढ़ाए

आमतौर पर आज जिस तरह से मशीनी शिक्षा के हम आदी होते जा रहे हैं उतना ही असली शिक्षा से कहीं दूर भी होते जा रहे हैं। शिक्षा जो जीवन समृद्ध करे, विवेकवान, विचारवान बनाए। आज अधिक से अधिक लोग पढ़ तो रहे हैं, पूरा जीवन सूचनाओं के संग्रहण में खपा दे रहें हैं इस आशंका में कि हो सकता है शायद कभी जीवन में ये सब काम आए। ऐसे लोगों की पूरी ज़िन्दगी आपाधापी में बीत रही है। वे एक दिन जीने की आस में जीवन का सौंदर्य खो रहे हैं। न किसी काम में ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और न ही ठीक से उत्सवों का ही आनंद उठा पाते हैं।

ज्ञान प्राप्त होने के बाद व्यक्ति को ज्यादा शांत और ज्यादा विचारशील होना चाहिए। लेकिन आज इसका उल्टा हो रहा है। भारतीय परंपरा के अभिन्न अंग ये उत्सव जीवन को ज्यादा गहराई के साथ महसूस करने के लिए शुरू किए गए थे।

समस्या यह है कि लोगों ने जीवन को ज्यादा गहराई के साथ देखने की आदत ही खो दी है। आज जीवन इतना उथला हो चुका है कि उसमे गहराई बची ही नहीं है। परिणाम स्वरूप लोग हर चीज को केवल सतही नजरिए से ही देखने के आदी हो गए हैं।

ध्यान से देंखे तो जीवन की प्रक्रिया में ही शिक्षा है। आज हम जिसे शिक्षा कहते हैं, अगर वह जीवन से अलग है तो उसे हम शिक्षा नहीं कह सकते। क्योंकि अगर जीवन ही नहीं रहा तो शिक्षा किस काम की।

अब सवाल यह है कि कोई शिक्षा कैसे प्राप्त करता है। एक शख़्स जो कभी स्कूल नहीं गया। जो अपने खेतों में काम करता है, क्या आप उसे अशिक्षित कहेंगे? जमीन के बारे में वह आपसे ज्यादा जानता है। फसलों, मौसम, प्रकृति जैसी चीजों के बारे में उसकी जानकारी भी आपसे कहीं ज्यादा है।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं, “आप जितने संवेदनशील होंगे, आप उतनी ही सीमा तक जीवन को जान पाएँगे। तो ऐसे में जीवन के प्रति अपने को ज्यादा संवेदनशील बनाने के लिए हमें कुछ करना नहीं चाहिए? अगर हम संवेदनशील नहीं होंगे तो हम बिल्कुल नहीं जान पाएँगे। चूँकि हमारे अंदर संवेदनशीलता है, इसलिए जब मच्छर भी काटता है तो हमें पता चल जाता है। मान लीजिए आपकी त्वचा मोटी है, उसमें कोई संवेदनशीलता नहीं है। ऐसे में अगर आपको मच्छर काटता है तो आपको पता ही नहीं चलेगा। अस्तित्व को जानने के लिए चीजों को ध्यान से देखना होगा। जो भी हमारे इर्द-गिर्द है उसे ध्यान से देखकर ही आत्मसात किया जा सकता है। तब आप ज्यादा संवेदनशील होंगे। आप जितना ज्यादा संवेदनशील होंगे उतने ही अधिक जागरूक होंगे, जितने अधिक जागरूक होंगे उतना ही अधिक जीवन के करीब होंगे।”

बसंत अर्थात उत्सवों का मौसम

बसंत के आगमन के साथ ही होली, जो भारत का एक विशेष पर्व है, इसकी औपचारिक शुरुआत बसंत पंचमी के दिन से ही हो जाती है। रंगों-उमंगों का त्यौहार रंगोत्सव ब्रज में वसंत पंचमी के दिन से शुरू हो जाएगा। भारत तथा विभिन्न देशों में मनाया जाने वाला यह उत्सव अगले पचास दिन तक चलेगा। ब्रज में बसंत पंचमी के दिन मंदिरों में ठाकुरजी को गुलाल अर्पण कर, रसिया, धमार आदि होली गीतों का गायन प्रारम्भ हो जाता है और मंदिरों में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों पर भी गुलाल के छींटे डाले जाते हैं।  

प्राचीन परम्पराओं के अनुसार, मंदिरों में होली की तैयारियों के साथ ही आम समाज में भी होली का आगाज़ हो जाता है। फाल्गुन शुक्ल पूर्णमासी की रात होलिका जलाए जाने वाले स्थानों पर होलिका के प्रतीक के रूप में रेड़ गाड़ दिया जाता है जो इस बात का भी प्रतीक है कि ब्रज में अब होली के पारम्परिक आयोजन शुरू हो गए हैं।


बरसाने की लट्ठमार होली

इसी दिन, राधारानी के गाँव बरसाना में बैलगाड़ियों पर शोभायात्रा निकाली जाती है। महाशिवरात्रि पर्व पर दूसरी और फाल्गुन शुक्ल नवमी के दिन तीसरी शोभायात्रा निकाली जाती है। फाल्गुन शुक्ल नवमी के दिन बरसाना में लट्ठमार होली खेली जाती है जो ब्रज की 50 दिन चलने वाली होली का प्रमुख आकर्षण है।

फाल्गुन शुक्ल एकादशी को रंगपंचमी भी कहा जाता है। इस दिन वृन्दावन में ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर सहित सभी मंदिरों में गुलाल के स्थान पर ठाकुरजी को टेसू के फूलों से बने रंग के छींटे देकर ब्रज में गीले रंगों की होली शुरू हो जाती है। यही रंग प्रसाद रूप में भक्तजनों पर भी छिड़का जाता है।

महाशमशान में मृत्यु के मंच पर जीवन का उत्सव

बनारस में इसी दिन बाबा विश्वनाथ दरबार में भी होली की शुरुआत होती है। महाकाल से लेकर महाशमशान तक रंगों के उत्सव के रूप में बसंत की शुरुआत मृत्यु के मंच पर जीवन का उत्सव मनाने की सीख महादेव की नगरी काशी की ही देन है।

‘मायानगरी की राजनीति.. कलियुग में गलत करने वाला ही राजा है’: सुशांत के साथ काम कर चुके अभिनेता की संदिग्ध मौत

2016 में आई बायोपिक फिल्म ‘एम० एस० धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ में सुशांत सिंह राजपूत के साथ काम कर चुके बॉलीवुड अभिनेता संदीप नाहर ने आत्महत्या कर ली है। उन्होंने एक सुसाइड नोट भी लिखा। पिछले कुछ महीनों में कई बॉलीवुड अभिनेताओं ने आत्महत्या की है, जिसमें अब उनका नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने आत्महत्या से पहले एक वीडियो भी अपने फेसबुक अकाउंट से शेयर किया, जिसमें उन्होंने एक नोट लिख रखा था।

ये वीडियो काफी डिस्टर्ब कर देने वाला था। संदीप नाहर ने फेसबुक पर लिखे नोट में न सिर्फ अपने संघर्षों के बारे में बताया बल्कि बॉलीवुड में हावी राजनीति को लेकर भी दुःख जताया। अपने नोट में उन्होंने लिखा था, “2 साल से मेरा जीवन एकदम बदल गया है और मैं ये बातें कभी किसी से शेयर भी नहीं कर सकता। दुनिया को लगता है कि उनका सब कुछ कितना अच्छा रहा है, क्योंकि वो हमारे सोशल मीडिया पोस्ट्स और स्टोरीज देखते हैं।”

उन्होंने आगे लिखा था, “ये सब कुछ झूठ होता है। हो सकता वो किसी के कहने पर ये सब डालता हो। दुनिया को अच्छा दिखाने के लिए और अपनी इमेज अच्छी बताने के लिए डालता हो। लेकिन, ऐसा नहीं है। हमारी बिलकुल नहीं बनती। कंचन 2 सालों से बोलती रहती है कि आत्महत्या कर लूँगी और तुम्हें फँसा दूँगी। देखो, आज ये नोट आ गया है। आज ये नौबत आ गई है कि मुझे ये स्टेप उठाना पड़ रहा है।”

बता दें कि कंचन शर्मा उनकी पत्नी हैं, जिनके बारे में संदीप नाहर ने लिखा है कि वो उनके पास्ट को लेकर हमेशा उनसे लड़ाई करती रहती थीं। उन्होंने लिखा है कि उनकी पत्नी उनकी इज्जत नहीं करती थी, गाली देती थी और परिवार के बारे में भला-बुरा कहती थी। उन्होंने लिखा था कि उनके लिए अब ये सब सुनना बर्दाश्त से बाहर हो गया था। उन्होंने बॉलीवुड को ‘मायानगरी’ बताते हुए लिखा कि यहाँ बहुत राजनीति होती है।

उन्होंने लिखा कि लोग उम्मीद देकर आपका वक़्त बर्बाद कर देते हैं। उन्होंने लिखा, “बाद में आपको प्रोजेक्ट से निकाल दिया जाता है, एग्रीमेंट वगैरह होने के बाद भी। यहाँ लोग बिलकुल भी प्रैक्टिकल नहीं हैं। कोई इमोशन नहीं है। दिखावे की झूठी ज़िंदगी जीते हैं। वो वक़्त ही अच्छा था जब कच्चे घर होते थे और लोगों के बीच प्यार था। सब अपने-अपने में लगे रहते थे। आजकल सब अपने होकर भी पराये हैं।”

संदीप नाहर ने अपने दुःखों के बारे में बताते हुए लिखा था, “भीड़ में अकेला जीना भी एक कला है। ये कलियुग का दौर है। जो गलत कर रहे हैं, वो राजा हैं। वो खुश हैं। ईमानदारी से अच्छा व्यवहार करने से यहाँ लोग आपको छोटा समझते हैं। ऐटिटूड दिखाने वाले को सलाम करते हैं। अलग मामला है। बस अब मेरा दिल नहीं करता जीने का।” गोरेगाँव क्षेत्र में संदीप नहर कथित आत्महत्या को लेकर मुंबई पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच की बात कही है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।

अपनी सुसाइड नोट में संदीप ने लिखा था, “ये स्वर्ग और नरक.. शादी के बाद ही वो महसूस होता है। लेकिन, मैं पिछले 2 वर्षों से नरक भोग रहा हूँ। अनजाने में किसी का दिल दुखाया तो हाथ जोड़ कर माफ़ी। खुश रहिए और दूसरों को भी खुश रखिए। जैसी ज़िंदगी आप खुद जीना चाहते हैं, वैसी दूसरों को भी दीजिए। किसी को जबरन कैद में रख कर प्यार हासिल नहीं किया जा सकता। गलत शादी होने से काफी लोगों को मरते देखा है मैंने।”

बहन से ही ना करने लगे डेटिंग… खौफ में जी रहा 24 साल का लड़का क्योंकि पिता ने 500 बार डोनेट किया है स्पर्म

अमेरिका स्थित ऑरेगोन के रहने वाले 24 वर्षीय ज़ेव फोर्स (zave fors) की कहानी जितनी विचित्र है उतनी ही फनी भी। उसे हाल ही में पता चला कि उसके पिता ने लगभग 500 बार स्पर्म डोनेट (sperm donate) किया है।

फोर्स इस बात से इतना सहम गया कि उसने डेटिंग एप्लीकेशन का इस्तेमाल करना ही बंद कर दिया। उसे इस बात का डर था कि कहीं वो अपने ही सिब्लिंग्स (उसके पिता की संतान) से न टकरा जाए। 

पिछले कुछ सालों में फोर्स ने ऐसे 8 लोगों को खोजा है लेकिन उसे अभी तक नहीं पता है कि असल में उसके कितने भाई-बहन हैं। उसका सबसे बड़ा डर यही है कि कहीं उसका सम्बंध उसके पिता की संतान से ही न बन जाए।

हाल ही में फोर्स ने अपना डीएनए टेस्ट कराया था, तब उसे पता चला कि उसके साथ स्कूल जाने वाला डैरन मक्लेन कोलन (Daron McLennan-Colon) उसका भाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उसे इतना याद था कि डैरन उसके साथ स्कूल जाता था लेकिन रिश्ते का अंदाज़ा नहीं था। 

इस बारे में बात करते हुए फोर्स ने बताया, “वो स्कूल में मुझसे 2 साल बड़ा था। भले लोग दावा करते हैं कि इस तरह के टकराव की सम्भावनाएं कम होती हैं लेकिन फिर भी मुझे शक के दायरे में रहना पड़ता है। मेरे अन्य भाई बहनों के साथ भी कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ है। वो एक-दूसरे के बेहद नज़दीक रहते थे। डैरन को भी ये बात जान कर हैरानी हुई कि उसका जन्म इस प्रक्रिया से हुआ है और नज़दीक ही उसकी बहन रहती है। उनमें से किसी के लिए भी इस बात पर भरोसा करना आसान नहीं था।”

टेस्ट के बाद फोर्स ने Ancestry.com की मदद से अपने पिता को ट्रेस किया। तब उसे पता चला कि उसके पिता ने बीते एक दशक में सैकड़ों बार स्पर्म डोनेट किया है और उनके लगभग 50 से ज़्यादा बच्चे हैं।

फोर्स का कहना है, “क्योंकि मुझे नहीं पता कि मेरे कितने भाई-बहन हैं, इसकी वजह से मेरी डेटिंग लाइफ तबाह हो गई है। जब मैं टिंडर या कोई और डेटिंग एप चलाता हूँ तो मुझे नहीं पता होता है कि कौन मुझसे सम्बंधित है या कौन नहीं है। मेरे हर रिश्ते में एक अजीब तरह का ख़तरा बना रहेगा। अपने हर पार्टनर का जेनेटिक परीक्षण करने के बावजूद मैं इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हो पाऊँगा कि हमारे बीच कोई रिश्ता नहीं है।”

फ़िलहाल फोर्स की अपने परिवार को लेकर खोज जारी है।  

कौन है Pieter Friedrich? टूलकिट मामले में ‘फैक्टचेकर’ के साथ क्यों आ रहा ISI कनेक्शन वाले आदमी का नाम?

दिल्ली पुलिस ने सोमवार को ‘टूलकिट’ मामले में बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी किए गए बयान के मुताबिक़ भारत के विरुद्ध वैश्विक स्तर पर चलाए गए इस अभियान में एक विदेशी मूल के संदिग्ध एक्टिविस्ट का नाम सामने आ रहा है। ‘टूलकिट’ की आड़ में भारत के खिलाफ़ रचे गए अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र की जाँच में पीटर फ्रेडरिच (Pieter Friedrich) नाम के व्यक्ति की भूमिका सामने आई है।

पुलिस का कहना है कि भारत के रक्षा एजेंसियों को 2006 से ही पीटर फ्रेडरिच की तलाश है, जब यूपीए की सरकार सत्ता में थी। पीटर का नाम भजन सिंह भिंडर या इकबाल चौधरी की कंपनी में भी शामिल था और तभी से ही वह जाँच एजेंसियों के रडार पर था।

भजन सिंह भिंडर आईएसआई की K2 डेस्क का प्रबल समर्थक/प्रस्तावक था। पीटर के भिंडर से सम्पर्क में आने की सबसे बड़ी वजह थी – वो ‘इनफो वॉर ऑपरेशन’ (info war operation) चलाता था और खुफ़िया जानकारियों का लेन-देन करता था। 

पुलिस के मुताबिक़ इस प्रकरण में शामिल सभी ने ‘टूलकिट’ पूरी सावधानी से बनाई है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक और अहम बात कही, वो ये कि इस टूलकिट में प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और फैक्ट चेकर्स का नाम भी शामिल है। इसमें सिर्फ मामले के आरोपित ही साबित कर पाएँगे कि क्यों टूलकिट में पीटर फ्रेडरिच का नाम मौजूद है। इसके पहले ग्रेटा थनबर्ग और दिशा रावी के बीच व्हाट्सएप चैट भी सामने आई थी। 

स्वीडन की कथित जलवायु परिवर्तन ‘एक्टिविस्ट’ ग्रेटा ने सोशल मीडिया पर भारत विरोधी ‘टूलकिट’ साझा की थी। इसके बाद दिशा ने उससे कहा था, “क्या कुछ समय के लिए हम इस मुद्दे पर कोई बात नहीं करें। मैं इस पर वकीलों से बात करने जा रही हूँ।” रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दिशा रावी और निकिता जैकब ने पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के धलीवाल के साथ ऑनलाइन मीटिंग में हिस्सा लिया था, जिसने पहले ही खुद को ‘खालिस्तानी समर्थक’ बताया था।

मीटिंग में उन्होंने गणतंत्र दिवस के पहले ट्विटर पर प्रोपेगेंडा फैलाने और ‘स्टॉर्म’ (storm) लाने की योजना पर चर्चा की थी। जिसके बाद देश की राजधानी में तथाकथित ‘किसानों’ ने विरोध प्रदर्शन की आड़ में बड़े पैमाने पर हिंसा को अंजाम दिया। हमने पहले उन मीडिया संस्थानों और फैक्ट चेकर्स पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि जिनका नाम टूलकिट में शामिल है। ऑल्टन्यूज़ का ज़ुबैर उनमें से ही एक है। वहीं दिशा रावी फ़िलहाल पुलिस हिरासत में है।        

पाखंडी बाबा, महिला भक्तों के साथ यौन संबंध… आमिर खान के बेटे जुनैद खान की डेब्यू फिल्म ‘महाराजा’ की कहानी

आमिर खान (Aamir Khan) की पहली पत्नी रीना दत्ता के बेटे जुनैद खान जल्द बॉलीवुड में डेब्यू करने वाले हैं। जुनैद खान की डेब्यू फिल्म की शूटिंग 15 फरवरी से शुरू हो गई है। इस फिल्म का नाम ‘महाराजा’ है और यह सच्ची घटना पर आधारित फिल्म है।

इस फिल्म में जुनैद के साथ शालिनी पांडे, शरवरी वाघ और जयदीप अहलावत भी काम कर रहे हैं। फिल्म की शूटिंग शुरू होने पर जुनैद की बहन इरा ने एक फोटो शेयर की है, जिसमें वो भाई जुनैद को फूलों का गुलदस्ता देती नजर आ रही हैं।

इस फोटो के साथ इरा खान ने लिखा है, “जुन्नू, यह उसका पहला प्ले या पहला शो या हमारा साथ में पहला प्ले नहीं था बल्कि… आज उसकी शूटिंग का पहला दिन है। और मुझे यह तस्वीर बहुत पसंद है। वह पिछले कुछ सालों से ऐक्टिंग में है लेकिन फिर भी अभी मेरे लिए नया है। उसने मेरे प्ले में भी काम किया है तो मैं उससे ऊपर हूँ… लेकिन किसी और चीज से बढ़ कर मैं उसकी छोटी बहन हूँ।”

अपनी पोस्ट में इरा ने आगे लिखा, “उसका प्रफेशनलिजम बेहतरीन है। मैं उसके लिए बेहद उत्साहित हूँ और उसे सभी को पीछे छोड़ते हुए देखना चाहती हूँ और उन सभी को इसकी प्रॉपरनेस से परेशान करना चाहती हूँ। (उसने मुझे फिल्म के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया है। बहुत इरिटेटिंग है, मैं अंदर की बात जानना चाहती हूँ) और उसके बाद मैं सेट पर जाकर उसे परेशान और शर्मिंदा करूँगी।”

बात करें फिल्म की कहानी की तो अभी तक आई खबरों के मुताबिक, यह फिल्म एक पीरियड ड्रामा फिल्म है। फिल्म में साल 1862 के एक मशहूर बाबा के केस को दिखाया जाएगा। इस केस में एक पाखंडी बाबा मशहूर जर्नलिस्ट और समाजसेवी करसनदाल मलीजी पर उनके संप्रदाय को बदनाम करने का आरोप लगाएगा।

खबरें हैं कि इस फिल्म में पत्रकार समाज सुधारक करसनदास मलजी का रोल जुनैद खान करेंगे। वहीं इस फिल्म में ‘पाताल लोक’ फेम जयदीप अहलावत (Jaideep Ahlawat) भी एक मुख्य किरदार में होंगे। जयदीप का रोल फिल्म में जादूनाथजी बृजनाथजी महाराज होगा, जिसका महिला भक्तों के साथ यौन संबंध होगा। जुनैद उसके कारनामे को सबके सामने लाएँगे।

गौरतलब है कि हाल ही में आमिर खान की बेटी इरा खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘इन्स्टाग्राम’ पर कुछ पुरानी तस्वीरें साझा कीं। तस्वीर में उनके साथ नुपुर शिखरे मौजूद थे और तस्वीर का कैप्शन था, “It is honour to make promises to him” (उसके साथ वादे करना गर्व की बात है)। इरा खान के इस पोस्ट के चलते इस बात की लगभग पुष्टि हो चुकी है कि वह नुपुर शिखरे को डेट कर रही हैं। इरा खान द्वारा साझा की गई एक तस्वीर में देखा जा सकता है कि दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्करा रहे हैं।

फेसबुक पोस्ट को लेकर हयात खान की शिकायत पर भूषण सोनी गिरफ्तार, मजहबी भावना को ‘ठेस’ का आरोप

गुजरात के सोनगढ़ में पुलिस ने सोमवार (फरवरी 15, 2021) को एक समुदाय के खिलाफ कथित तौर पर घृणा भरे संदेश (हेट स्पीच) और आपत्तिजनक तस्वीरें पोस्ट करने के आरोप में 32 वर्षीय भूषण सोनी को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने कहा कि हयात खान पठान नामक व्यक्ति द्वारा की गई शिकायत के बाद संदेशों और तस्वीरों को भी इंटरनेट से हटा दिया गया है। आरोपित भूषण सोनी सूरत में एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करता है और वह सोनगढ़ का निवासी है।

समाचार पत्र ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि कथित घृणा संदेश और आपत्तिजनक तस्वीरें पोस्ट करके धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपों को लेकर रमणिया पार्क सोसाइटी के निवासी भूषण सोनी के खिलाफ रविवार को तापी जिले के सोनगढ़ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज हुई थी।

पुलिस ने हयात खान की शिकायत के आधार पर धर्म, जाति, जन्म स्थान, और भाषा के आधार पर सोनी के खिलाफ विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने के संबंध में आईपीसी 153 (ए) के तहत केस दर्ज किया है। इसके अलावा, धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों के लिए 295 (ए) के अंतर्गत भी केस दर्ज किया गया है।

पुलिस ने कहा कि भूषण सोनी के पोस्ट को विभिन्न सोशल मीडिया ग्रुप्स पर कई बार शेयर किया गया था, जिसके बाद कई लोग सोनगढ़ पुलिस स्टेशन पहुँचे और पुलिस से आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध किया।

सोनगढ़ पुलिस इंस्पेक्टर एचसी गोहिल ने कहा, “सोनी को रविवार को अपने फेसबुक पेज पर अभद्र पोस्ट अपलोड करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने हमारे निर्देशों पर अपने अकाउंट से इन संदेशों को हटा दिया है। हमें पता चला है कि करीब एक साल पहले भी उसने अपने फेसबुक पेज पर इस तरह के अभद्र संदेश और तस्वीरें डाली थीं। उस समय, कोई भी पुलिस शिकायत दर्ज नहीं की गई थी और स्थानीय निवासियों द्वारा उन्हें इस तरह की हरकत दोबारा ना करने की भी सख्त सलाह दी गई थी।”

वामपंथी कह रहे ‘हत्या’, TMC बता रही ‘आत्महत्या’ – मैदूल इस्लाम मामले में कॉन्ग्रेसी भी घेर रहे ममता बनर्जी को

पश्चिम बंगाल में 11 फरवरी को वाम मोर्चे द्वारा राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ की ओर कूच करने के दौरान पुलिस के साथ हिंसक झड़प में घायल हुए डीवाईएफआई के एक कार्यकर्ता की सोमवार (फरवरी 15, 2021) सुबह मौत हो गई। इससे राज्य में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

माकपा ने युवा कार्यकर्ता की मौत के लिए तृणमूल सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे ‘हत्या’ करार दिया है। वहीं, राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी ने इसे ‘आत्महत्या’ बताया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि बांकुड़ा जिले के कोतुलपुर के निवासी मैदूल इस्लाम मिद्दा का दक्षिण कोलकाता के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।

उन्होंने बताया कि मिद्दा की हालत लगातार बिगड़ रही थी और सुबह अत्यधिक रक्तस्राव से उनकी मौत हो गई। कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शेक्सपीयर सरनी पुलिस थाने में मिद्दा की मौत के सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम हर पहलू को ध्यान में रख कर मामले की जाँच कर रहे हैं। शव का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा।’’ इस बीच, माकपा ने मिद्दा की मौत के लिए तृणमूल सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। माकपा के नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘यह हत्या का मामला है। मार्च के दौरान जिस तरह से छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, यह दर्शाता है कि तृणमूल सरकार डरी हुई है और चिंतित है।’’ 

पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए, सुजान चक्रवर्ती ने कहा, “यह सिर्फ एक मौत नहीं है, यह एक हत्या है- सरकार ने एक युवा को मार डाला है, जो अपने परिवार में एकमात्र कमाने वाला था और सभी के लिए शिक्षा और नौकरी की माँग करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहा था।”

भाजपा के प्रदेश प्रमुख दिलीप घोष ने भी मिद्दा की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए तृणमूल सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। यह दर्शाता है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस ने सभी चीजों पर नियंत्रण खो दिया है। पश्चिम बंगाल में जो कुछ भी हो रहा है, वह सही नहीं है।’’

वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पंचायती मामलों के मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने कहा, ‘‘कोई भी मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन उस दिन पुलिस ने बहुत समझदारी से कार्रवाई की। मुझे लगता है कि यह आत्महत्या का मामला है।’’

गौरतलब है कि मार्च के दौरान वामदल की युवा शाखा स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) से जुड़े कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ हिंसक झड़प हो गई थी। पुलिस ने इस दौरान कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, आँसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछारें भी की थीं। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की राज्य इकाई के अध्यक्ष श्रीजन भट्टाचार्य ने कहा, “पुलिस की क्रूरता के कारण उनकी मृत्यु हुई।” 

माकपा के राज्य सचिव सूरज कांता मिश्रा और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता अब्दुल मन्नान ने भी आरोप लगाया है कि लाठीचार्ज के दौरान लगी चोटों से मिद्दा की मौत हुई। कॉन्ग्रेस नेता अब्दुल मन्नान ने कहा, “एक युवा कार्यकर्ता, जिसने सभी के लिए शिक्षा और नौकरी की माँग की थी, नबन्ना की रैली के दौरान पुलिस द्वारा पीटा गया था और आज उनकी मृत्यु हो गई – हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।”