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श्रीराम दलितों की आस्था का केंद्र: राम मंदिर निर्माण के लिए अंबेडकर महासभा ट्रस्ट ने दान की चाँदी की ईंट

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए देश का हर हिस्सा आगे आ रहा है। देश के तमाम वर्ग और तमाम तरह के संगठन इस व्यापक अभियान में सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं। इसी कड़ी में अंबेडकर महासभा ट्रस्ट सामने आया है। ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा को चाँदी की ईंट प्रदान की है।

अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने रविवार (14 फरवरी 2021) को चाँदी की शिला भेंट की। उन्होंने कहा, “हमने राम मंदिर ट्रस्ट को चाँदी की ईंट भेंट की है। हम यह संदेश देना चाहते हैं कि प्रभु श्रीराम दलितों की आस्था का केंद्र हैं। आदिवासी समुदाय के लोग भगवान राम के साथ थे, जब वह 14 वर्ष के वनवास पर गए थे। हमारी इच्छा है कि अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के लिए भव्य मंदिर का निर्माण हो।”

डॉ. निर्मल के मुताबिक़ समाज के अन्य वर्गों की तरह दलित समाज भी अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर काफी उत्साहित है। जिस तरह न्यायपालिका, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया, दलित समाज उसका आभारी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने अंबेडकर महासभा का आभार जताते हुए कहा कि देश की जनता इस अभियान के लिए खुले मन से दान कर रही है। 

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर निर्माण के आर्थिक सहयोग के लिए 14 जनवरी से 27 फरवरी तक देशव्यापी अभियान चला रहा है। इस दौरान ट्रस्ट और तमाम हिन्दू संगठनों के सदस्य 5 लाख गाँवों के लगभग 12 करोड़ परिवारों तक पहुँचेंगे। हाल ही में ख़बर आई थी कि मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खाते में अब तक 1511 करोड़ रुपए इकट्ठा हो चुके हैं। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने शुक्रवार (12 फरवरी 2021) को इस बात की जानकारी दी थी।

हाल ही में झारखंड में भीख माँग कर गुजर-बसर करने वालों ने श्रीराम के नाम 2425 रुपए समर्पित किए थे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हुआ था। जिसमें एक वृद्ध और गरीब महिला राम मंदिर के लिए दान करने का निवेदन कर रही थी। वीडियो में कार्यकर्ता वृद्ध महिला से कहते हैं कि उन्हें 20 रुपए दान करने की ज़रूरत नहीं है, वह सिर्फ 10 रुपए ही दान करें। इसके बावजूद गरीब नज़र आने वाली वृद्ध महिला अनुरोध करती है कि वह 20 रुपए ही दान करेगी।

TikTok स्टार पूजा की आत्महत्या, 14 ऑडियो क्लिप्स और ठाकरे सरकार के मंत्री संजय राठौड़ का ‘कनेक्शन’

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के नेता देवेंद्र फडणवीस ने टिकटॉक स्टार पूजा चव्हाण आत्महत्या मामले में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और शिवसेना के नेता संजय राठौड़ के खिलाफ मामला दर्ज करने और गिरफ्तार करने की माँग की है। 

उनका कहना है कि संजय ने पूजा को आत्महत्या के लिए उकसाया है और इस बात की जाँच की जानी चाहिए। देवेंद्र फडणवीस के अनुसार अगर पूजा के परिजन इस मामले में शिकायत नहीं कर रहे हैं तो पुलिस को स्वत: संज्ञान लेते हुए खुद मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने पुलिस के ऊपर सरकार की तरफ से किसी तरह के दबाव होने की भी आशंका जताई।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पूजा चव्हाण मामले की जाँच का आदेश दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि जाँच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही, यह भी कहा कि जाँच पूरी होने तक किसी निर्दोष को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। 

गौरतलब है कि पुणे शहर में 8 फरवरी की रात टिकटॉक स्टार पूजा चव्हाण ने इमारत की तीसरी मंजिल से कूद कर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। हालाँकि पुलिस को पूजा चव्हाण के पास से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ था। पूजा अपने भाई के साथ पुणे में रह कर स्पोकन इंग्लिश की पढ़ाई कर रही थी।

पूजा की आत्महत्या के साथ विदर्भ के मंत्री संजय राठौड़ का नाम जोड़ा जा रहा है। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि पूजा के संजय राठौड़ के साथ प्रेम संबंध थे। इस संबंध को आत्महत्या की वजह माना जा रहा है। अब इस मामले की जाँच के लिए बीजेपी ने आक्रमक रवैया अख्तियार कर लिया है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूजा चौहान आत्महत्या मामले में राज्य के डीजीपी हेमंत नागराले को पत्र लिख कर इस पूरे मामले की गहन जाँच करने की माँग की। पत्र के साथ उन्होंने 14 ऑडियो क्लिप्स भी भेजे। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा है कि पुलिस को इस मामले की जाँच गंभीरता से करनी चाहिए।

देवेंद्र फडणवीस ने यह भी माँग की है कि वायरल हो रहे ऑडियो क्लिप में आवाज किसकी है? और किस संदर्भ में बात की जा रही है? इन तमाम बातों से पर्दा उठना बहुत जरूरी है। इसके अलावा यह भी जाँच होनी चाहिए कि पूजा ने कहीं उकसावे की वजह से तो आत्महत्या नहीं की है?

भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने भी इस संबंध में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र भेजा था। मामले में आवाज उठाने के बाद भातखलकर ने ठाकरे सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। भातखलकर ने ट्वीट किया, “पूजा चव्हाण की संदिग्ध आत्महत्या मामले में अपनी आवाज उठाने के बाद मुझे कल से धमकी भरे फोन आ रहे हैं। ठाकरे सरकार के सत्ता में आने के बाद से यह मॉब रूल तेज हो गई है। सरकार द्वारा प्रायोजित गुंडों को यह पता होना चाहिए कि मुझे धमकी देकर डराया नहीं जा सकता।”

बीड में रहती थी पूजा चव्हाण

मूलतः बीड जिले के परली में रहने वाली 22 साल की पूजा पुणे में पढ़ाई करने के लिए आई थी। अपने भाई के साथ वह पुणे के हडपसर इलाके में रहती थी। 8 फरवरी को पूजा ने सोसायटी के तीसरे फ्लोर से कूद कर अपनी जान दे दी थी। पूजा की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। वो महमंद इलाके के हैवेन पार्क नाम की सोसाइटी में रहती थी।

Oh God का मतलब ‘या अल्लाह’… गूगल यही बता रहा, बस 2 स्टेप से कंपनी को बताइए उसकी गलती

गूगल ट्रांसलेशन पर चल रहे विवाद के बीच अब इसी से जुड़ा एक और हिंदी अनुवाद विवाद का विषय बन चुका है। सोशल मीडिया पर लोग अब गूगल ट्रांसलेशन द्वारा ‘ओह गॉड’ (Oh God) यानी, ‘हे भगवान’ का हिंदी अनुवाद ‘या अल्लाह’ बताने को लेकर ऑनलाइन सर्च इंजन गूगल से सवाल पूछ रहे हैं।

एक ट्विटर यूजर ने इसका स्क्रीनशॉट ट्वीट करते हुए लिखा है, “गूगल, ये क्या है?” दरअसल, इस स्क्रीनशॉट में ‘ओह गॉड’ का हिंदी अनुवाद ‘या अल्लाह’ बताया गया है, जिसका कि हिंदी अनुवाद से कोई मेल ही नहीं है।

हाल ही में गूगल ट्रांसलेशन द्वारा ‘गॉड ब्लेस यू’ का हिंदी अनुवाद ‘अस्सलामु अलैकुम’ बताने को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर बवाल हुआ था। कई लोगों ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए इस तथ्य को सामने रखा कि जब वो अंग्रेजी में ‘God bless you’ (गॉड ब्लेस यू) लिखते हैं तो गूगल इसका अनुवाद ‘अस्सलामु अलैकुम’ दिखाता है, जिसका हिंदी भाषा से कोई सम्बन्ध ही नहीं है।

लोगों ने गूगल पर हिंदी अनुवाद के नाम पर इस्लामी सामग्री परोसने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसका शुद्ध हिंदी में अनुवाद कुछ और होना चाहिए। बता दें कि ‘अस-सलामु अलायकुम’ अथवा ‘अस्सलामु अलैकुम’ अरबी भाषा का अभिवादन है।

इसे बोल कर मुस्लिम लोग एक-दूसरे के लिए ‘खुदा तुम्हें सलामत रखे’ की दुआ करते हैं। अरब के ईसाई भी इन शब्दों का प्रयोग कर लेते हैं। अरब से ही ये शब्द भारत में आ गए और यहाँ भी इसी तरह से मुस्लिमों ने अभिवादन की प्रक्रिया को अपना लिया। मुस्लिम विद्वान मानते हैं कि हदीस के हिसाब से ऐसा किया जा रहा है।

इस संबंध में आप क्या कर सकते हैं

आप इस ट्रांसलेशन के खिलाफ आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपको हिंदी अनुवाद के ठीक नीचे दिख रहे ‘Feedback’ (फीडबैक) विकल्प पर क्लिक करना है और गलत ट्रांसलेशन वाला विकल्प चुनना है, जिसके बाद आपसे पूछा जाएगा कि इसका सही अनुवाद क्या है?

गूगल ट्रांसलेशन के साथ फीडबैक का विकल्प भी देता है

अगर गूगल इसका अनुवाद इस तरह से अरबी भाषा में दिखा रहा है, तो इसे हिंदी में ‘हे भगवान’ या ‘हे ईश्वर’ लिखकर ‘गूगल’ को इस अनुवाद को लेकर प्रतिक्रिया दी जा सकती है।

फीडबैक का दूसरा और आखिरी चरण

किसान आंदोलन चलाना है… पैसा हो या शराब, हर तरह से किसानों की मदद करें: महिला कॉन्ग्रेस नेता, वीडियो हुआ वायरल

किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी मोदी सरकार पर लगातार हमलावर हैं। इस बीच कॉन्ग्रेस की महिला नेता के बयान ने पार्टी की किरकिरी करा दी है। हरियाणा में कॉन्ग्रेस की नेता विद्या रानी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में विद्या रानी किसान आंदोलन में शराब दान करने की बात कह रही हैं। 

वीडियो में कुछ लोगों के बीच मौजूद कॉन्ग्रेस नेता कहती हैं, “हम कई जगहों पर, जींद में पदयात्रा करेंगे। जिससे हमारी कॉन्ग्रेस पार्टी को नई जान मिलेगी। इससे हमारी पार्टी एक नए तरीके से जन्म लेगी। इस बार हम जो हारे हैं, तो हमारा अस्तित्व तो खत्म ही हो चुका था, लेकिन ये आंदोलन जो हमें मिला है ना, ये 26 तारीख को खत्म हो चुका था। लेकिन किसी ना किसी तरह, क्योंकि किसान के इरादे मजबूत हैं। ये दोबारा से खड़ा हुआ और इतनी मजबूती से खड़ा हुआ कि इसको हमें चलाना है। किसानों ने तो अपने तरफ से किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ी।”

वो आगे कहती हैं, “हर जगह उन्होंने अपने खाने-पीने का जितना हो सका, अपना इंतजाम किया। मैं यही कहूँगी कि हर साथी की जितनी हिम्मत है, चाहे वो पैसे-रूपए से दान कर सकता है, सब्जियों से दान कर सकता है, घी का दान कर सकता है, जैसे शराब का भी कर सकते हैं। सारी तरफ से जिससे जो भी सहयोग बनता है, करें और इस आंदोलन को बढ़ाएँ। ये आंदोलन सिर्फ किसान का नहीं है बल्कि यह आंदोलन हम सबका है और इसका फर्क हम सब पर पड़ेगा।”

उनके इसी बयान पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी नेता डॉक्टर हर्षवर्धन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विद्या रानी का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, “और कितना गिरेगी कॉन्ग्रेस? कॉन्ग्रेस नेता विद्या रानी किसान आंदोलनकारियों तक शराब पहुँचाने की बात कर रही हैं। महात्मा गाँधी को आदर्श मानने वाली कॉन्ग्रेस के लिए यह नैतिक पतन की पराकाष्ठा है। आंदोलन को कहाँ से ऑक्सीजन मिल रहा है, यह अब किसी से छिपा नहीं है।”

विद्या रानी जींद जिले के गाँव दनोदा की रहने वाली हैं। वह कॉन्ग्रेस की टिकट पर 2014 और 2019 में नरवाना से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। दोनों ही बार उनकी हार हुई थी। गौरतलब है कि वर्तमान में जब कथित किसान आंदोलन चुनिंदा नेताओं को छोड़ कर भारी जनसमर्थन नहीं पा रहा है तो इस प्रोटेस्ट को सांप्रदायिक व जातिगत रंग दिया जाने का प्रयास हो रहा है। 

हाल ही में हरसिमरत बादल ने लोकसभा में इस पूरे आंदोलन को सिख बनाम हिंदू का मामला बता दिया था। ये भाषा बिलकुल वैसी ही थी जिस तरह से खालिस्तानी बोलते हैं। उससे पहले साल 2020 के दिसंबर माह में बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत पर ब्राह्मण विरोधी टिप्पणी करने के मामले में केस दर्ज हुआ था।

वहीं हरियाणा के बहादुरगढ़ के नामी जाट नेता हवा सिंह सांगवान ने पिछले हफ्ते ऐलान किया कि वह 21 अप्रैल को 250-300 लोगों के साथ सिख धर्म अपनाएँगे। उन्होंने कहा कि हिंदू कोई धर्म नहीं है, सबको सिख धर्म स्वीकार लेना चाहिए। बता दें कि ये वही नेता हैं जिन्होंने हरियाणा में जाट आरक्षण की आग को भड़काया था।

अयोध्या की तरह मथुरा का विकास, यमुना को स्नान नहीं… आचमन योग्य बनाएँगे: ब्रज क्षेत्र के लिए CM योगी का रोडमैप

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (14 फरवरी 2021) को मथुरा-वृंदावन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कान्हा की नगरी मथुरा में हरिद्वार कुंभ के पहले आयोजित होने वाली वैष्णव बैठक में हिस्सा लिया।

वैष्णव बैठक के मंच से मुख्यमंत्री ने मथुरा जिले को 411 करोड़ रुपए की विकास योजनाओं की सौगात दी। 47 योजनाओं का लोकार्पण और 48 योजनाओं का शिलान्यास भी किया। दरअसल उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद हरिद्वार कुंभ से पहले वृंदावन मेले का आयोजन कर रहा है। यह कार्यक्रम पूरे 40 दिनों तक चलने वाला है। योगी आदित्यनाथ के मुताबिक़:

“जब मुझे पहली बार वृंदावन कुंभ का प्रस्ताव मिला, तब देश-दुनिया कोरोना महामारी का सामना कर रही थी। आप सभी जानते हैं कि महामारी की वजह से सभी कार्यक्रम रोकने पड़े थे क्योंकि हमारे पास दो ही विकल्प थे। या तो हम त्यौहार मना सकते थे या लोगों की जान बचा सकते थे। इस लड़ाई में जिस तरह हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने हमारी अगुवाई की, वह प्रशंसनीय था। भारत इकलौता ऐसा देश है, जिसने इस माहामारी का सामना करने के लिए दो वैक्सीन तैयार की है। अब हमारे देश में और अन्य देशों में भी कोरोना वैक्सीन का वितरण किया जा रहा है। इन बातों से हमें साहस मिला कि हम यह आयोजन कर पाए, जो पूरे 12 साल बाद होने वाला है। मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता हूँ कि पहले क्या हुआ था लेकिन अब भाजपा की सरकार है। हमारी सरकार में वृंदावन कुंभ के रूप में वृंदावन बैठक भी वैसे ही होगी, जैसे प्रयागराज कुंभ किया गया था।”  

प्रयागराज कुंभ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इसकी सराहना तो UNESCO ने भी की थी। उनका कहना था कि इसके पहले भी कुंभ होता था लेकिन पिछली बार हुआ प्रयागराज कुंभ इस बात का प्रमाण था कि कैसे इसका आयोजन बड़े पैमाने पर किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साधू-संतों के आशीर्वाद की वजह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर की नींव रखी। संत समाज हमेशा इस आंदोलन का हिस्सा था, इस अभियान में पीढ़ियों का योगदान है। ऐसे ही ब्रज क्षेत्र में भी विकास कार्यों को पूरा किया जाएगा। 

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने ब्रज देवरहा बाबा के प्रख्यात संत की स्मृति में स्थापित घाट का भी उदघाटन किया। उन्होंने कहा, “हम 2022 तक यमुना जल को स्नान योग्य नहीं बल्कि आचमन योग्य बनाना चाहते हैं। हमने नमामि गंगे परियोजना में सबसे प्रदूषित शहर कानपुर में गंगा को सीवरविहीन बना दिया तो दिल्ली सरकार ये काम क्यों नहीं कर सकती है। यदि दिल्ली सरकार अपने यहाँ यमुना को शुद्ध कर ले तो उत्तर प्रदेश में यमुना की स्थिति सुधारने की ज़िम्मेदारी हमारी।”

CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद का गठन ब्रज क्षेत्र के विकास के लिए ही हुआ है।       

‘आप 2-3 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी होंगे… लेकिन लोगों की प्राइवेसी से ज्यादा अहम नहीं’ – WhatsApp को सुप्रीम कोर्ट

व्हाट्सएप और फेसबुक की नई प्राइवेसी पॉलिसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने फेसबुक और व्हाट्सएप से जवाब माँगते हुए कहा है कि उन्हें ‘डाटा शेयरिंग’ को लेकर अपनी पॉलिसी स्पष्ट करनी चाहिए।

कोर्ट के मुताबिक़ बेशक फेसबुक और व्हाट्सएप 2-3 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी होगी लेकिन लोगों की ‘प्राइवेसी’ (निजता) से ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने नई प्राइवेसी को लेकर फेसबुक और व्हाट्सएप दोनों से 4 हफ्ते के भीतर जवाब भी माँगा है। 

दरअसल नई प्राइवेसी पॉलिसी आने के बाद लाखों लोगों ने व्हाट्सएप को अलविदा कहा। इसके अलावा काफी लोगों ने व्हाट्सएप पे पर भी ‘साइन अप’ नहीं किया था।

व्हाट्सएप इस साल जनवरी में नई प्राइवेसी पॉलिसी लेकर आया था, जिस पर काफी विवाद हुआ। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। अब इस मामले पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक और व्हाट्सएप से जवाब माँगा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी। 

याचिकाकर्ता ने अपनी दलील में कहा था कि यूरोप और भारत में पॉलिसी अलग-अलग नहीं हो सकती है। भारत में डाटा की सुरक्षा को लेकर क़ानून बनने वाला है, उसके आने के पहले ही व्हाट्सएप नई पॉलिसी लेकर आया है। हालाँकि इस पॉलिसी पर विरोध बढ़ने के बाद व्हाट्सएप ने इसे लागू करने की तारीख़ बढ़ा कर 14 मई की है। इस मामले पर सरकार ने भी कहा था कि लोगों की प्राइवेसी से समझौता नहीं किया जा सकता है, यह लोगों का अधिकार है। 

शीर्ष अदालत के मुताबिक़ आम जनता दुनिया की किसी भी कंपनी से ज़्यादा अपनी प्राइवेसी को अहमियत देती है, भले वह कंपनी अरबों की ही क्यों हो। वहीं व्हाट्सएप का कहना था कि यूरोप में प्राइवेसी को लेकर विशेष क़ानून है। अगर भारत सरकार इस तरह का क़ानून लेकर आती है तो हम उसका पालन करेंगे।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने कर्मण्य सिंह सरीन की याचिका में किए गए अंतरिम आवेदन के आधार पर सरकार और फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप को नोटिस जारी किया।    

पिता मुलायम के समधी को बेटे अखिलेश ने पार्टी से बाहर निकाला, कहा – विधायक कर रहे थे BJP से साँठगाँठ

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सिरसागंज, फिरोजाबाद से समाजवादी पार्टी विधायक हरिओम सिंह यादव को 06 साल के लिए कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निष्कासित कर दिया। फीरोजाबाद जिले के सपा नेताओं मुलायम सिंह यादव के समधी हरिओम सिंह यादव के खिलाफ एकजुट होकर पार्टी हाईकमान से उन्हें निष्कासित करने की माँग की थी।

अखिलेश यादव ने हरिओम सिंह यादव पर पर भाजपा का साथ देने और साँठगाँठ करने का आरोप लगाया है। सोमवार (फरवरी 15, 2021) को पार्टी द्वारा यह कार्रवाई समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, विधायक हरिओम यादव के बेटे विजय प्रताप को समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप लगाते हुए पहले ही पार्टी से बाहर कर दिया था। विजय प्रताप पर पार्टी विरोधी और अनुशासनहीनता के आरोप लगे थे। 

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सपा द्वारा जारी आदेश

पार्टी द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार, “समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय अखिलेश यादव जी के निर्देशानुसार समाजवादी पार्टी के विधायक सिरसागंज, श्री हरिओम सिंह यादव, जनपद फिरोजाबाद को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने तथा भाजपा से साँठगाँठ करने के कारण पार्टी से 06 वर्ष के लिए निष्काषित किया जाता है।”

‘भं*% लोगों को कोई काम नहीं’ – क्रिकेटर युवराज सिंह के खिलाफ FIR, माँग चुके हैं पहले भी माफी

भारत के पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह के ख़िलाफ़ हरियाणा में केस दर्ज हुआ है। सिंह पर आरोप है कि उन्‍होंने पिछले साल 1 जून को इंस्टाग्राम लाइव चैट के समय यजुवेंद्र चहल और कुलदीप यादव के प्रति अभद्र व अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया। इस चैट की वीडियो वायरल होने के बाद तब युवराज सिंह को माफी भी माँगनी पड़ी थी। उन्होंने कहा था कि वह शब्द उनके मुँह से अनजाने में निकल गए थे।

रविवार (फरवरी 14, 2021) को यह मामला दोबारा उछला, जब हरियाणा पुलिस ने हिसार के थाना हांसी में उनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153, 153ए, 295, 505 के अलावा एससी/एसटी एक्‍ट की धारा 3 {1) (r) और 3(1)(s) के तहत एफआईआर दर्ज की।

जानकारी के अनुसार, हरियाणा के थाने में एक वकील ने इस संबंध में 8 माह पहले शिकायत करवाई थी, लेकिन मामला इस पर अब जाकर दर्ज हुआ। शिकायत के अनुसार, युवराज सिंह ने चहल और यादव पर बात करते हुए जातिगत टिप्पणी की थी। उन्होंने युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव के लिए भं*% शब्द का इस्तेमाल किया था।

युवराज ने रोहित शर्मा से बात करते हुए कहा था, “भं*% लोगों को कोई काम नहीं है यूजी और इसको (कुलदीप को)।” इस पर रोहित ने कहा था, “यूजी को देखा क्या वीडिया डाला अपने फैमिली के साथ। मैंने उसको वही बोला कि अपने बाप को नचा रहा है, पागल तो नहीं है वो।”

बता दें कि इस मामले पर पिछले साल विवाद होने के बाद युवराज सिंह पहले ही माफी माँग चुके हैं। पिछले साल उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर माफी माँगते हुए लिखा था, “मैं ये बात साफ कर देना चाहता हूँ कि मैं किसी भी तरीके के भेदभाव में विश्वास नहीं रखता हूँ। चाहे वो भेदभाव जाति के आधार पर हो, रंग के आधार पर हो, लिंग के आधार पर या मजहब के आधार पर हो। मैं अपना जीवन लोगों की भलाई के लिए जीता आया हूँ और आगे भी जीता रहूँगा।”

दिशा से खालिस्तानी की Zoom पर मीटिंग… टेलीग्राम से ग्रेटा को टूलकिट: भारत के खिलाफ द्वेष बढ़ाना था लक्ष्य- दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टूलकिट केस में अब तक हुई जाँच के बारे में और दिशा रवि (Disha Ravi) की गिरफ्तारी को लेकर जानकारी दी है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह टूलकिट बेहद ही सुनियोजित तरीके से बनाई गई है और किस तरह से किसान आंदोलन को समर्थन देना है, इसमें उसकी पूरी जानकारी थी।

पुलिस साइबर सेल के जॉइंट कमिश्नर प्रेमनाथ ने कहा, “जैसा कि हम जानते हैं कि 26 जनवरी को बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। 27 नवंबर से किसान आंदोलन चल रहा था। 4 फरवरी को हमें टूलकिट के बारे में जानकारी मिली, जो कि खालिस्तानी सगठनों की मदद से बनाई गई थी।”

दिल्ली पुलिस ने बताया है कि दिशा ने टूलकिट को एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर शेयर किया फिर सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई। उन्होंने कहा कि टूलकिट को विश्वस्तर पर फैलाने की योजना थी और इसमें गलत जानकारियाँ दी गईं थीं। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि मीडिया हाउसों और ‘फैक्ट चेकर्स’ के नामों का भी टूलकिट में उल्लेख है। उन्होंने कहा कि आरोपित ही यह बता पाएँगे कि पीटरक फ्रेडरिक का नाम टूलकिट में क्यों है।

इस टूलकिट का संबंध खालिस्तानी संगठन Poetic Justice Foundation (पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन) से है और इस टूलकिट को चार फरवरी को बनाया गया था। टूलकिट में ‘भारत की पहचान योग और चाय’ की छवि को नुकसान पहुँचाने से लेकर दूतावासों को भी नुकसान पहुँचाने की बात है। इससे भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई।

साइबर सेल के ज्वाइंट सीपी प्रेमनाथ ने बताया कि टूलकिट के कई स्क्रीनशॉट खुले प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं और उनकी जाँच की जा रही है। जब जाँच में पर्याप्त सबूत जुटा लिए गए तब टूलकिट की एडिटर निकिता जैकब के खिलाफ कोर्ट से 9 फरवरी को उनके खिलाफ तलाशी वारंट हासिल किया गया।

पुनीत नाम की कनाडा में रहने वाली एक महिला ने इन लोगों को खालिस्तानी गुट ‘Poetic Justice Foundation’ से मिलवाया। निकिता और शांतनु ने ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ से जूम मीटिंग की और किस तरह से सोशल मीडिया पर पूरा अभियान चलाया जाना है इसे लेकर बैठक की। पुलिस ने ये भी बताया कि दिशा रवि, ग्रेटा थनबर्ग को जानती थी, इसलिए उनसे कहा गया कि वो ग्रेटा को टूलकिट भेजें। तब दिशा ने ही ग्रेटा को टेलीग्राम एप के जरिए टूलकिट भेजी। 

उनके मुताबिक, “एक टीम मुंबई पहुँची, जहाँ उसने निकिता के घर पर 11 फरवरी को तलाशी ली। वह उसके साथी शांतनु और दिशा ने इस दस्तावेज को तैयार किया था। ई-मेल अकाउंट शांतनु ने बनाया था, जो कि इस डॉक्यूमेंट का ओनर है और बाकी लोग उसके एडिटर्स।” ज्वॉइंट सीपी के अनुसार कनाडा मूल की पुनीत (महिला) ने इन लोगों का खालिस्तानी समर्थक Poetic Justice Foundation से संपर्क कराया था।

इससे पहले टूलकिट मामले में सूत्रों के हवाले से बड़ी जानकारी मिली थी। सूत्रों के मुताबिक खालिस्तानी संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (Poetic Justice Foundation) के फाउंडर एमओ धालीवाल ने कनाडा में रह रहे अपने सहयोगी पुनीत के जरिए निकिता जैकब से संपर्क किया था। इनका मकसद 26 जनवरी से पहले ट्विटर पर एक बड़ी मुहिम छेड़ना था।

गणतंत्र दिवस से पहले इन सबकी एक ज़ूम मीटिंग भी हुई थी। इस मीटिंग में निकिता, धालीवाल के साथ दिशा भी शामिल हुई थी। पुलिस के मुताबिक 60 से 70 लोग जूम मीटिंग में शामिल हुए थे। मीटिंग में एमओ धालीवाल ने कहा था कि मुद्दे को बड़ा बनाना है। मकसद था – किसानों के बीच असंतोष और गलत जानकारी फैलाना। 

साइबर सेल के ज्वाइंट सीपी प्रेम नाथ ने कहा कि इस मीटिंग में ट्विटर स्टॉर्म के लिए हैशटैग तय किया गया और पूरी योजना बनाई गई। ये लोग जितना ज्यादा हो सके दुष्प्रचार करना चाहते थे। पुलिस का दावा है कि दिशा और निकिता के लैपटॉप से आपत्तिजनक सूचनाएँ बरामद की गई हैं।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, देश का माहौल बिगाड़ने के लिए तैयार किए गए टूलकिट की मुख्य साजिशकर्ता दिशा रवि ही है। क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने टूलकिट को ट्वीट करने के बाद डिलीट किया था, उसे दिशा रवि ने कई बार एडिट किया था। कोर्ट में जब पुलिस रिमांड पर सुनवाई हुई तो दिशा रो पड़ी और उसने कबूल किया कि उसने 2 लाइन एडिट की थी। पुलिस ने दिशा का मोबाइल जब्त किया है लेकिन उसका डाटा पहले ही डिलीट किया जा चुका था जिसे अब पुलिस रिट्रीव करेगी।

पुलिस ने कहा, “शांतनु और ‘दिशा एक्सआर’ नाम के एनजीओ से जुड़े हैं। पीटर फेडरिक ने ये प्लान किया कि किसे हैशटैग ट्रेंड करना है, किसे फॉलो करना है और कब क्या ट्वीट कराना है। 2005 से हम इन्हें जानते हैं। टूलकिट एक ऐसा डॉक्यूमेंट था, जो कुछ लोगों के बीच शेयर होना था लेकिन ग्रेटा ने गलती से ये ट्वीट कर दिया। पुलिस के अनुसार, [email protected] का एडमिन शांतनु था।”

दिल्ली पुलिस के साइबर सेल के अधिकारियों ने दिशा रवि को बेंगलुरु से सोलादेवनहल्ली से गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने दिशा पर संगीन इल्जाम लगाए हैं। दिशा रवि पुलिस फिलहाल पाँच दिन के पुलिस के रिमांड पर है। वहीं निकिता जैकब और शांतनु के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए गए हैं।

‘1 दिन में पइसा डबल’: राहुल गाँधी ने राजस्थान में ‘कृषि बिजनेस’ बताया ₹40 लाख करोड़, असम में ₹80 लाख करोड़

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के आँकड़े हर भाषण में बदल जाते हैं लेकिन आज तक तथाकथित फैक्ट-चेकिंग पोर्टल्स ने कभी उनके दावों में आ रहे विरोधाभाषों के बारे में नहीं बताया। राफेल को लेकर भी अक्सर ऐसा होता था और अब तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के दौरान भी यही हो रहा है। राजस्थान से असम पहुँचते ही राहुल गाँधी के आँकड़े सिर्फ बदले ही नहीं, बल्कि दोगुने हो गए।

राहुल गाँधी शनिवार (फरवरी 13, 2021) को राजस्थान में थे और इस दौरान उन्होंने पीलीभंगा में किसान महापंचायत में हिस्सा लेने के अलावा अजमेर में भी एक ट्रैक्टर रैली में जनसभा को सम्बोधित किया। इस दौरान वो राजस्थानी पगड़ी और वेशभूषा में दिखे। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान का सबसे बड़ा बिजनेस कृषि का है और अगर आप सोचते हैं कि गाड़ी बनाने या हवाई जहाज का बिजनेस सबसे बड़ा है, तो आप ग़लतफ़हमी में हैं।

आगे उन्होंने ‘सबसे ज़रूरी बात’ कहते हुए बताई कि ये दुनिया का सबसे बड़ा बिजनेस है, जो 40 लाख करोड़ रुपए का है। उन्होंने कहा कि ये एक व्यक्ति का बिजनेस नहीं है क्योंकि गाड़ी बनाने के मामले में टाटा सारी गाड़ियाँ बनाता है, महिंद्रा बनाता है। फिर उन्होंने कहा कि कृषि एक ऐसा बिजनेस है, जिसमें मजदूर से लेकर किसान तक सब शामिल हैं। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप उनका वो भाषण देख सकते हैं।

‘कृषि का बिजनेस’ वाला हिस्सा देखें 9:05 के बाद

इसके ठीक 1 दिन बाद राहुल गाँधी पहुँचे असम के शिवसागर में। राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म है, ऐसे में उनके आँकड़े भी बदल गए। यहाँ CAA विरोधी नारे लिखे गमछा पहने आए राहुल ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार अब तीन ‘खेती के बिल लेकर’ आई है, जिसके बाद पूरा ’80 लाख करोड़ का हिंदुस्तान का सबसे बड़ा बिजनेस’ सिर्फ दो लोगों के हाथ में चला जाएगा।

‘सबसे बड़ा बिजनेस’ वाला हिस्सा 20:00 के बाद

राहुल गाँधी ने दोनों जगह ये बातें दोहराई कि मोदी सरकार खेती के सिस्टम को ख़त्म करना चाहती है लेकिन कहीं कृषि कानूनों की एक भी खामी नहीं गिना पाए। गिनाया भी तो वही उल्टी-सीधी चीजें कि उद्योगपति जब जहाँ जैसे चाहेंगे, वो किसानों की फसल ‘छीन’ लेंगे। ऊपर संलग्न किए गए दोनों वीडियो कॉन्ग्रेस पार्टी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल के हैं, जिनका लाइव प्रसारण किया गया था। राजस्थान का आँकड़ा असम में दोगुना हो गया।

इसी तरह नवंबर 2016 में, राहुल गाँधी ने दावा किया था कि मोदी सरकार ने तब बड़े उद्योगपतियों के 1.1 लाख करोड़ रुपए के ऋण माफ कर दिए थे। 2017 में गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार के दौरान, राहुल गाँधी ने बेवजह इस आँकड़े को 20,000 करोड़ रुपए और बढ़ाकर 1.3 लाख करोड़ रुपए कर दिया। कर्नाटक में, उन्होंने एक कदम आगे बढ़कर एक और शानदार आँकड़ा हासिल किया था- 2.5 लाख करोड़ रुपए जो कि माफ कर दिए गए थे।