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SC ने ट्विटर-केंद्र को नोटिस भेजकर दिए देशद्रोही और भड़काऊ पोस्ट के खिलाफ सिस्टम तैयार करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (फरवरी 12, 2021) को एक जनहित याचिका पर केंद्र और ट्विटर को नोटिस जारी किया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभद्र भाषा और अपमानजनक सामग्री को रोकने के निर्देश दिए हैं। मामले को एक अन्य याचिका के साथ जोड़ा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि ट्विटर पर इस तरह के संदेश आने के बाद उनकी तरफ से क्या किया जा सकता है?

याचिका में फेक न्यूज़ और फर्जी संदेशों के माध्यम से नफरत फैलाने वाले ‘देशद्रोही’ और ‘भारत विरोधी’ ट्विटर सामग्री और विज्ञापनों की जाँच करने के लिए एक सिस्टम विकसित करने की माँग की गई थी। ट्विटर पर निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट में मई, 2020 में एक याचिका दायर की गई थी। जनहित याचिका में टि्वटर पर पोस्ट होने वाली सामग्री की निगरानी करने के लिए मैकेनिज्म बनाए जाने की माँग की गई थी।

इसमें कहा गया था कि ऑनलाइन सामग्री की जाँच करने के लिए एक तंत्र या कानून की अनुपस्थिति में, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे- ट्विटर और अन्य साइट्स का उपयोग कुछ व्यक्तियों द्वारा ‘भारत संघ की भावना के खिलाफ गतिविधियों को बढ़ाने के लिए’ इस्तेमाल किया गया है।

भाजपा नेता विनीत गोयंका द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया है कि मशहूर लोगों और गणमान्य व्यक्तियों के नाम पर सैकड़ों फर्जी ट्विटर हैंडल और बोगस फेसबुक अकाउंट बनाए गए हैं।

याचिका में ये भी कहा गया है कि इन फर्जी ट्विटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट में संवैधानिक अधिकारियों और मशहूर नागरिकों की वास्तविक तस्वीरों का इस्तेमाल किया जाता है और यही कारण है कि आम आदमी ऐसे ट्विटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट से जारी संदेशों पर विश्वास कर लेते हैं।

केंद्र और ट्विटर के बीच चल रहे झगड़े के बीच सुप्रीम कोर्ट का यह नोटिस आता है। बृहस्पतिवार को ही, ट्विटर ने 97% से अधिक अकाउंट बैन कर दिए गए। ये अकाउंट पाकिस्तान-खालिस्तान का समर्थन करने के साथ ही ‘किसानों के नरसंहार’ जैसे भड़काऊ हैशटैग इस्तेमाल कर लोगों को भड़काने का काम करते पाए गए थे।

याचिका में यह भी माँग की गई थी कि ट्विटर-फेसबुक सहित सभी सोशल मीडिया अकॉउंट होल्डर्स का KYC किए जाने की जरूरत है, जिससे सोशल मीडिया पर भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले पोस्ट शेयर करने वालों की आसानी से पहचान की जा सके। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली एक पीठ, जिसमें जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यन शामिल थे, ने कहा कि वह इस मामले में नोटिस जारी कर रही है और अन्य लंबित मामलों के साथ इस याचिका को टैग कर रही है।

केरल: न्यायाधीश कलाम पाशा ने अपनी बीवी को दिया तीन तलाक, सजा से बचने के लिए तारीख में की हेरफेर

केरल के पलक्कड़ जिला सत्र अदालत के न्यायाधीश कलाम पाशा की पत्नी ने ट्रिपल तलाक देने के संबंध में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए केरल उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। कलाम पाशा की पत्नी ने यह भी आरोप लगाया है कि कलाम पाशा के भाई और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बी कमाल पाशा ने उन्हें धमकी भी दी थी। महिला के अनुसार, कलाम पाशा ने उसे धमकी दी कि अगर उसने उसे तलाक देने से इंकार किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

शिकायतकर्ता महिला ने कहा कि कलाम पाशा ने मार्च 1, 2018 को उनके खिलाफ ट्रिपल तलाक जारी किया था। उन्होंने उसी दिन उन्हें इस संबंध में एक पत्र भी भेजा था। लेकिन बाद में, उन्होंने उसे एक और पत्र भेजते हुए कहा कि टाइपिंग की त्रुटि थी और मूल तिथि मार्च 1, 2017 थी। महिला ने आरोप लगाया कि यह कानूनी प्रक्रियाओं से बचने का एक प्रयास था, जिस कारण तीन तलाक के खिलाफ कानून को लागू करने से पहले की किसी तारीख का उल्लेख किया गया।

सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, किसी न्यायाधीश के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए संबंधित मुख्य न्यायाधीश की अनुमति आवश्यक है। दो साल से पहले, उच्च न्यायालय के संज्ञान में मामला आने के बाद इस पर प्राथमिक जाँच की गई थी। जुलाई 30, 2019 को भारत की संसद ने तीन तलाक के खिलाफ कानून पास कर इसे दंडनीय अपराध बनाया था। इसे उसी साल एक अगस्त से लागू भी कर दिया गया।

उसने यह भी आरोप लगाया कि कलाम पाशा के भाई और सेवानिवृत्त न्यायाधीश कमाल पाशा ने उसे धमकी दी थी और उसे बताया था कि अगर उसने कलाम पाशा को तलाक देने से इंकार कर दिया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

उल्लेखनीय है कि मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत तीन बार ‘तलाक, तलाक, तलाक’ बोलना अपराध माना गया है। कानून बन जाने के बाद लिखित, मेल, एसएमएस, व्हाट्सऐप या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक चैट के माध्यम से तीन तलाक देना अब गैरकानूनी है। इस कानून के तहत दर्ज मामलों में अपराधी पाए जाने पर तीन साल तक सजा का प्रावधान है, साथ ही पीड़ित महिला और अपने और आश्रित बच्चों के लिए पति से मेन्टीनेंस (भरण-पोषण) लेने की भी हकदार है।

आमिर खान की बेटी ने सबको बता दिया – नुपुर शिखरे है उनका बॉयफ्रेंड, My Valentine लिख शेयर किया फोटो

आमिर खान की बेटी इरा खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘इन्स्टाग्राम’ पर कुछ पुरानी तस्वीरें साझा कीं। तस्वीर में उनके साथ नुपुर शिखरे मौजूद थे और तस्वीर का कैप्शन था, “It is honour to make promises to him” (उसके साथ वादे करना गर्व की बात है)। फ़िलहाल वैलेंटाइन वीक चल रहा है और बीते दिन (11 फरवरी 2021) ‘प्रॉमिस डे’ था।

इरा खान के इस पोस्ट के चलते इस बात की लगभग पुष्टि हो चुकी है कि वह नुपुर शिखरे को डेट कर रही हैं। इरा खान द्वारा साझा की गई एक तस्वीर में देखा जा सकता है कि दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्करा रहे हैं। इसके अलावा दूसरी तस्वीर इरा खान के कज़िन की शादी की है। इसके बाद की तस्वीर में दोनों एक दूसरे के नज़दीक खड़े हैं। चौथी तस्वीर में दोनों लंच कर रहे हैं और पाँचवी तस्वीर ‘कैंडिड’ है।

तस्वीरों के इस पोस्ट में इरा खान ने लिखा है, “तुम्हारे साथ और तुम्हारे लिए प्रॉमिसेज़ करना गर्व की बात है।” इसके बाद पोस्ट में तमाम तरह के हैशटैग भी डाले गए थे, जिसमें पहला मायवैलेंटाइन (#myvalentine) और दूसरा ड्रीमबॉय (#dreamboy) है। इस पोस्ट और इसमें शामिल किए गए हैशटैग के बाद से दोनों को लेकर सुर्खियाँ काफ़ी तेज़ हो गई हैं। 

हाल ही में इरा खान ने अपनी कज़िन की शादी की तस्वीरें साझा की थीं। इस आयोजन की एक तस्वीर में नुपुर शिखरे को भी देखा गया था। इस तस्वीर के कैप्शन में इरा ने लिखा था, “दो बेहद खूबसूरत लोगों और इनके खूबसूरत रिश्ते के लिए। बस इतना कहना चाहूँगी, आखिरकार।” 


इरा खान, आमिर खान और उनकी पूर्व पत्नी रीना दत्ता की बेटी हैं। 2019 के दौरान Euripides’ Medea के नाट्य रुपांतरण के साथ इरा खान ने अपने निर्देशन करियर की शुरुआत की थी। इसके पहले तक इरा खान बॉलीवुड की दुनिया में बहुत सक्रिय नहीं थीं।  

भारत में मुस्लिम नेता का प्रधानमंत्री बनना बहुत मुश्किल, कुछ दशकों तक यह संभव नहीं: कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद

भारत के मुसलमानों को लेकर वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद ने बड़ा बयान दिया है। आजाद का कहना है कि किसी युवा मुस्लिम नेता के लिए देश का प्रधानमंत्री बनने का सपना देखना काफी मुश्किल है। उन्होंने कहा, “निकट भविष्य में मैं ऐसा होते हुए नहीं देख रहा हूँ।”

हिंदुस्तान टाइम्स अखबार को दिए एक इंटरव्यू में आजाद ने कहा, “मैं निकट भविष्य में इसका अनुमान नहीं लगाता, शायद कुछ दशक बाद।” बता दें, हाल ही राज्यसभा से रिटायर होने वाले कॉन्ग्रेस नेता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भावुक होने वाला भाषण और उनके लिए किए गए तारीफों के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि वह अब जल्द ही भाजपा में शामिल होंगे।

हालाँकि, इसी से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि हाँ मैं भाजपा में शामिल होऊँगा अगर कश्मीर की वादियों में काले बर्फ गिरेंगे। यानी स्पष्ट रूप उन्होंने भाजपा में शामिल होने से इनकार कर दिया।

गौरतलब है कि राज्यसभा से उनकी विदाई के वक्त कई नेताओं ने उनको पीएम के रूप में देखने की बात कही थी, लेकिन आजाद ने स्पष्ट रूप से कहा है कि एक मुस्लिम नेता के लिए पीएम बनना काफी मुश्किल है।

इसके अलावा कॉन्ग्रेस के वरिष्‍ठ नेता ने राज्‍यसभा में अपने विदाई भाषण में यह भी कहा था, “अगर दुनिया में किसी भी मुस्लिम को गर्व महसूस करना चाहिए, तो यह भारतीय मुस्लिम होना चाहिए।”

खुद के भारतीय मुस्लिम होने पर फक्र करते हुए आजाद ने कहा था कि वह एक ऐसा सौभाग्यशाली भारतीय मुस्लिम हैं जो कभी पाकिस्तान नहीं गया। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर दुनिया में मुस्लिमों को अपने देश पर गर्व करने की बात आएगी तो वो भारतीय मुस्लिम होंगे जो सबसे ज्यादा गौरवान्वित महसूस करेंगे।

किसी मुस्लिम नेता के पीएम बनने की महत्वाकांक्षा को मुश्किल करार देने वाले गुलाम नबी आजाद ने 2018 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में एक कार्यक्रम में कहा था कि उनकी ही पार्टी के हिंदू नेता अब उन्हें प्रचार में बुलाने से हिचकते हैं।

गुलाम नबी आजाद ने कॉन्ग्रेस और उसके मुस्लिम एजेंडे का भंडाफोड़ करते हुए कहा था कि कॉन्ग्रेस के ऐसे काफी कम हिंदू उम्मीदवार हैं, जो उन्हें प्रचार के लिए बुलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “पहले 99 फीसदी हिंदू कैंडिडेट मुझे मुस्लिम वोटों को पाने के मकसद से चुनाव प्रचार में बुलाते थे। अब यह आँकड़ा 40 फीसदी ही रह गया है क्योंकि उन्हें मेरे जाने से हिंदू वोटों के खोने का डर है।”

उन्होंने अपने बीते दिनों के बारे में बताया कि यह वह भारत था, जहाँ उन्होंने 1979 में महाराष्ट्र से 95% हिंदू मतदाताओं वाले वोटबैंक में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उनके अनुसार, “मेरे खिलाफ जनता पार्टी का हिंदू उम्मीदवार था, लेकिन मैं फिर भी जीता।”

जिसकी गर्भवती पत्नी को 2 बार दिया खून, भाई को कोरोना पर किया मदद… उसी मो. इस्लाम ने रिंकू शर्मा को मारा चाकू

दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में बजरंग दल के कार्यकर्ता रिंकू शर्मा (26 वर्ष) की हत्या कर दी गई। रिंकू अयोध्या में होने वाले भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए जारी धन संग्रह अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहे थे। अब इस मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जागरण की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन कर रिंकू शर्मा ने अपना खून दिया था, उन्हीं लोगों ने ही रिंकू शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी। 

पुलिस ने इस मामले में अभी तक 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों की पहचान मोहम्मद इस्लाम, दानिश नसीरुद्दीन, दिलशान और दिलशाद इस्लाम के रूप में हुई है। इस हत्याकांड में शामिल मोहम्मद इस्लाम की पत्नी लगभग 1.5 साल पहले गर्भवती थी। दिल्ली के रोहिणी स्थित अस्पताल में उसका उपचार हो रहा था। उसकी पत्नी की हालत गंभीर थी और उसे खून की सख्त ज़रूरत थी। 

इसके बाद रिंकू ने इस्लाम की पत्नी को एक नहीं बल्कि दो बार खून दिया था। आरोपितों को रिंकू शर्मा की ओर से मदद का सिलसिला यहीं ख़त्म नहीं होता है। रिंकू शर्मा ने आरोपित मोहम्मद इस्लाम के भाई शुकरु को कोरोना होने पर अस्पताल में भर्ती कराने पर भी मदद की थी।

रिंकू ने इस बात की शायद ही कल्पना की होगी कि खून का एहसान कुछ इस तरह चुकाया जाएगा। तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि रिंकू शर्मा नेक दिल इंसान थे। उनका किसी से कोई विवाद नहीं था। 

कथित तौर पर 25-30 लोगों के समूह ने बुधवार (10 फरवरी 2021) को घर में घुसकर 26 वर्षीय रिंकू शर्मा पर हमला किया था। वे अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए चलाए जा रहे धन संग्रह अभियान में सक्रिय थे। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने इस मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है

सोशल मीडिया में रिंकू के पिता का रोते-बिलखते वीडियो भी आया है। वीडियो में वे बता रहे हैं कि किस बर्बरता से उनके बड़े बेटे को मारा गया। साथ ही उनके छोटे बेटे पर भी हमला हुआ।

रिंकू के पिता कहते हैं कि अचानक गेट खोलने के लिए आवाज आई और जैसे ही उनका छोटा बेटा गेट खोलने गया, सामने से 25-30 लोग आए। उन सबके हाथ में लाठियाँ थी। मेरे छोटे बच्चे को भी मारा। फिर वो घर में घुस गए। रिंकू किसी तरह बाहर भागा… थोड़ी देर बाद वे गेट पर लाठी बजाकर गए कि मार दिया, जा बचा ले अपने बच्चे को। पीछे से एक महिला ने बताया कि रिंकू को चाकू मार दिया है।  

रिपोर्ट के अनुसार बीते महीने इलाके में राम मंदिर निर्माण को लेकर एक जागरुकता रैली निकाली गई थी। उस दौरान रिंकू का विवाद हो गया था। उस समय स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप से मामला खत्म हो गया था। इसके बाद एक जन्मदिन पार्टी में रिंकू का आरोपितों से विवाद हुआ। उसके बाद बुधवार की रात उसके घर में घुसकर हमला किया गया। हमलावरों के जाने के बाद लोग रिंकू को संजय गाँधी अस्पताल ले गए। इलाज के दौरान गुरुवार दोपहर उन्होंने दम तोड़ दिया।

बार डांसर के साथ मादक डांस करते दरगाह के सदर अरब अली का वीडियो वायरल, मजहबी संगठनों का पारा गरम

इंदौर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़े स्तर पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में खजराना स्थित नाहरशाहवली दरगाह के सदर, अरब अली पटेल बार डांसर के साथ डांस करते और उसे गले लगाते हुए देखे जा रहे हैं।

बृहस्पतिवार (फरवरी 11, 2021) को इस वीडियो के वायरल होने के बाद इस पर विवाद गहराता जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस वीडियो के सामने आने के बाद शहर काजी भी इस हरक़त से बहुत नाराज हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, वीडियो में बार डांसर के साथ नजर आ रहे सदर अरब अली पटेल ने कहा कि ये दो साल पुराना वीडियो उनके भांजे की शादी समारोह का है और अब ये वीडियो सिर्फ उन्हें बदनाम करने के लिए शेयर किया जा रहा है।

इस वीडियो में सूट-बूट में नजर आ रहे खजराना के नाहरशाहवली दरगाह के सदर, अरब अली पटेल पहले बार डांसर को गले लगाया और बाद में उसकी कमर में हाथ डालकर नाचते नजर आ रहे हैं। अरब अली पटेल कॉन्ग्रेस नेता अंसार पटेल के भाई बताए जा रह हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अंसार पटेल ने ही कॉन्ग्रेस के राज में विधायक सज्जन वर्मा के जरिए अरब अली को दरगाह का सदर नियुक्त करवाया था।

बताया जा रहा है कि शहरकाजी डॉ इशरत अली ने इस वीडियो की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि किसी भी धार्मिक स्थल पर पर अच्छी मानसिकता के लोग ही होने चाहिए।

इशरत अली ने कहा कि ऐसी प्रकृति के लोगों को किसी भी धार्मिक दरगाह का सदर बनने की अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि पता नहीं कैसे ऐसे लोगों को ऐसी गरिमामयी जिम्मेदारियाँ मिल जाती हैं। उन्होंने कहा कि वो अरब अली को पद से हटाने के सम्बन्ध में कलेक्टर मनीष सिंह से भी बात करेंगे।

दरअसल, प्राचीन नाहरशाह वली की दरगाह पर हर साल श्रद्धालु जाकर चादर चढ़ाते हैं। इस वीडियो पर जिला हज कमेटी के पूर्व अध्यक्ष फारुक राइन ने भी आपत्ति जताई और कहा कि इस घटना के बाद वक्फ बोर्ड को सदर को बर्खास्त करने के लिए पत्र लिखेंगे। वीडियो को आप इस यूट्यूब लिंक पर भी देख सकते हैं –

पूरी दुनिया भारत से मँगा रही कोविड-वैक्सीन, छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार कह रही – ‘मत भेजो’

पूरी दुनिया कोरोना महामारी का सामना करने के लिए भारत की तरफ आशा भरी नज़रों से देख रही है। पड़ोसी देशों से लेकर दुनिया के तमाम बड़े देशों तक, सभी भारत से कोरोना वैक्सीन की माँग कर रहे हैं। इसके विपरीत भारत का एक राज्य ऐसा है, जिसने कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति (सप्लाई) पर रोक लगाने की माँग की है। छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार ने भारत सरकार से साफ़ तौर पर कहा कि कोवैक्सीन (COVAXIN) की सप्लाई पर रोक लगा दी जाए। 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने गुरुवार (11 फरवरी 2021) को छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव से कहा कि कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों ही वैक्सीन सुरक्षित हैं। महामारी का प्रसार रोकने के लिए इनका जल्द से जल्द इस्तेमाल बेहद ज़रूरी है। दरअसल कोवैक्सीन के परीक्षण (ट्रायल) पर चिंता जाहिर करते हुए टीएस सिंह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिख कर इसकी सप्लाई पर रोक लगाने की माँग की थी। 

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री ने अपने पत्र में लिखा था, “मैंने उनसे (केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री) से अनुरोध किया है कि जब तक हमारे स्वास्थ्य विभाग की सहमति से जुड़े पहलुओं पर विचार नहीं किया जाता, तब तक छत्तीसगढ़ में कोवैक्सीन की सप्लाई नहीं की जाए। जिससे दवा की शुरूआती खुराक की एक्सपायरी और बर्बादी से बचा जा सके।”

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने टीएस सिंह की इस बात का जवाब देते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट (Drugs and Cosmetics Act) 1940 के न्यू ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल्स रूल्स (New Drugs and Clinical Trials Rules) 2019 के अंतर्गत इस वैक्सीन का परीक्षण किया गया है।

इसके अलावा डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि दोनों ही वैक्सीन सुरक्षित और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली हैं। लिहाज़ा इनका इस्तेमाल जल्द से जल्द किया जाना चाहिए, जिससे ज़रूरतमंदों को लाभ मिल सके। महामारी का दायरा बढ़ने से रोकने के लिए भी वैक्सीन ही इकलौता प्रभावी विकल्प है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक़ कोवैक्सीन पर एक्सपायरी तारीख नहीं होने की छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री की चिंता पूरी तरह निराधार है क्योंकि, वैक्सीन की शीशियों पर लेबल लगा कर इस तरह की जानकारी प्रदान की जाती है।   

गौरतलब है कि कुछ देशों ने भारत सरकार से इसकी माँग की है तो कुछ सीधे वैक्सीन डेवलपर कंपनियों को इसके ऑर्डर भेज रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत की वैक्सीन को लेकर डोमिनिकन रिपब्लिक अपनी काफी दिलचस्पी दिखाई थी। वहाँ के प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था।

डोमिनिकन रिपब्लिक से पहले वैक्सीन को लेकर ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख चुके हैं। इसके अलावा बोलीविया की सरकार ने 50 लाख डोज कोरोना वैक्सीन के लिए सीरम इंस्टीट्यूट के साथ कॉन्ट्रैक्ट किया है

दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, जापान, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड भी भारत की वैक्सीन के लिए बेताब हैं। भारत सरकार अपने पड़ोसी नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार समेत कई पड़ोसी देशों को पहले वैक्सीन की खेप भेजेगी। इसी के तहत कई देशों को वैक्सीन की आपूर्ति भी की जा चुकी है तो वहीं कुछ देशों को आने वाले कुछ ही दिनों में की जाएगी। 

मुस्लिम/ईसाई बन चुके दलितों को आरक्षण का लाभ नहीं, हिन्दू-सिख-बौद्ध दलितों को मिलता रहेगा लाभ: कानून मंत्री

इस्लाम या ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले दलितों को चुनावों में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा वह आरक्षण से जुड़े अन्य लाभ भी नहीं ले पाएँगे। गुरुवार (11 फरवरी 2021) को राज्यसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए क़ानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने यह जानकारी दी। 

हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म स्वीकार करने वाले अनुसूचित जाति के लोग आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के योग्य होंगे। साथ ही साथ, वह अन्य आरक्षण सम्बन्धी लाभ भी ले पाएँगे। भाजपा नेता जीवी एल नरसिम्हा राव के सवाल का जवाब देते हुए रविशंकर प्रसाद ने इस मुद्दे पर जानकारी दी। 

आरक्षित क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की पात्रता पर बात करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा, “स्ट्रक्चर (शेड्यूल कास्ट) ऑर्डर के तीसरे पैराग्राफ के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म से अलग है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा।” इन बातों के आधार पर क़ानून मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि इस्लाम या ईसाई धर्म स्वीकार करने वाले दलितों के लिए आरक्षण की नीति कैसी रहेगी। 

क़ानून मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि संसदीय या लोकसभा चुनाव लड़ने वाले इस्लाम या ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति को निषेध करने के लिए संशोधन का प्रस्ताव मौजूद नहीं।    

भारत-विरोधी फंडिंग का खुलासा, The Print ने ‘गलती’ से छाप भी दिया… बाद में चुपके से किया डिलीट

बृहस्पतिवार (11 फरवरी) को ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म YouTube ने एक वायरल वीडियो को हटा दिया। इस वीडियो में ‘दी स्ट्रिंग’ नाम के एक यूट्यूब चैनल ने दावा किया था कि उसने जॉर्ज सोरोस जैसे विदेशियों की भारत-विरोधी षड्यंत्रों के लिए फंडिंग और उस फंडिंग से लाभ कमाने वालों को सामने रखा था।

इसके साथ ही, इस वीडियो में ग्रेटा थनबर्ग द्वारा सार्वजानिक की गई टूलकिट के तार मजहबी फैक्ट चेकर वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ से लेकर बरखा दत्त जैसे ‘निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारों’ से जुड़े भी बताए थे। स्ट्रिंग ने इस वीडियो के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से अपनी जान की सुरक्षा की भी माँग की थी।

इसके ठीक एक दिन बाद अब, शेखर गुप्ता के वेब पोर्टल ‘द प्रिंट’ ने बिना किसी विशेष कारण के जॉर्ज सोरोस और ग्रेटा वाली टूलकिट के मीडिया संस्थानों से लिंक को उजागर करने वाले वीडियो को हटाए जाने के सम्बन्ध में प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है।

‘दी प्रिंट’ से अप्रकाशित की गई रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

YouTube द्वारा की गई मनमानी कार्रवाई के बाद, कई रिपोर्ट्स में यूट्यूब के इस कदम को उजागर किया गया था। इन्हीं में से एक, शेखर गुप्ता का ‘द प्रिंट’ भी था। हालाँकि, इस रिपोर्ट का कुछ हिस्सा ऑनलाइन सर्च इंजन गूगल में अभी भी सुरक्षित है और इसे देखा जा सकता है, लेकिन गुप्ता के प्रिंट की वेबसाइट पर जाने पर यह ‘एरर 404’ का सन्देश देता है।

सर्च इंजन में इस रिपोर्ट का हिस्सा अभी भी मौजूद है

हालाँकि, इसका कोई स्पष्ट कारण अभी तक भी सामने नहीं आ सका है कि ‘द प्रिंट’ ने एक ऐसी रिपोर्ट को किस कारण अप्रकाशित या फिर डिलीट कर दिया, जिसमें सोशल मीडिया के दिग्गजों द्वारा अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश लगाए जाने की बात को रखा गया था। इस रिपोर्ट में जॉर्ज सोरोस की ‘एंटी-इंडिया फंडिंग’ और इस फंड से लाभ उठाने वाले मीडिया संस्थानों के बारे में बताने वाले वाले वीडियो का विस्तार से जिक्र किया गया।

टूलकिट का संबंध ऑल्ट न्यूज़ से बताने वाला वीडियो यूट्यूब ने किया डिलीट

अभिव्यक्ति की आजादी की बहस के बीच ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग वेबसाइट यूट्यूब ने ‘दी स्ट्रिंग’ (The String) नाम के एक चैनल का वीडियो डिलीट कर दिया है। ‘दी स्ट्रिंग’ ने हाल ही में चर्चा में आई ‘टूलकिट’ का वामपंथी मीडिया और ऑल्ट न्यूज़ जैसे कुछ स्वघोषित फैक्ट चेकर्स से संबंधों को उजागर करने का दावा किया था।

ट्विटर पर ‘द स्ट्रिंग’ (The String) ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया है कि यूट्यूब द्वारा उनका वीडियो डिलीट कर दिया गया है। ग्रेटा थनबर्ग द्वारा किसान आन्दोलनों को लेकर ‘गलती से’ सार्वजानिक की गई एक ‘टूलकिट’ पर जारी विवाद को लेकर ‘दी स्ट्रिंग’ नाम के इस चैनल ने दावा किया था कि वो इस टूलकिट को लेकर खुलासे करेगा, जिनसे स्पष्ट होगा कि किस तरह से मजहबी फैक्ट चेकर वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ का भी इस टूलकिट से सम्बन्ध है। हालाँकि, इस वीडियो के प्रकाशित होने के कुछ देर बाद ही यह यूट्यूब द्वारा हटा दिया गया।

अपने ट्विटर अकाउंट से ‘दी स्ट्रिंग’ ने मंगलवार (फरवरी 09, 2021) को अपने इस वीडियो द्वारा अहम खुलासे करने की घोषणा करते हुए लिखा था, “आपका तथाकथित ‘देशभक्त’ मोहम्मद जुबैर वास्तव में एक भारत-विरोधी तत्व है, जो देशद्रोही है और वो लीक होने से पहले ही ग्रेटा थनबर्ग वाली टूलकिट साजिश का हिस्सा था। मेरे पास अपने दावे के बचाव में और इस दंगा भड़काने वाले को जेल भेजने के लिए पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं।”

यूट्यूब पर ‘दी स्ट्रिंग’ द्वारा पोस्ट किए गए इस वीडियो की शुरुआत में ही कुछ वामपंथी मीडिया गिरोहों का नाम लेते हुए इसके एंकर कहते हैं, “मुझे नहीं पता कि इस वीडियो को बनाने के बाद मुझे नहीं पता कि मैं जिन्दा रहूँगा या नहीं। लेकिन इसके लिए जो लोग जिम्मेदार होंगे उनके नाम साकेत गोखले, बरखा दत्त, मोहम्मद जुबैर, ध्रुव राठी, वायर, क्विंट, न्यूज़लौंड्री, स्क्रॉल, कारवाँ, दी न्यूज़ मिनट, आउटलुक डॉट कॉम, इंडिया स्पेंड, परी नेटवर्क, और कॉन्ग्रेस पार्टी।”

‘शिव छत्रपति’ के नाम पर सिर्फ अवॉर्ड… महाराष्ट्र के ‘BEST’ खिलाड़ियों को नौकरी नहीं दे रही ठाकरे सरकार

महाराष्ट्र में ठाकरे की सरकार है। इनकी पार्टी का नाम है शिवसेना। राजनीति भी घूमा-फिरा कर शिवाजी, छत्रपति और मराठा-मराठी के आस-पास ही रहती है। लेकिन सिर्फ नाम के लिए! वरना इसी नाम पर आधारित अवॉर्ड जीत चुके खिलाड़ी एक अदद सरकारी नौकरी के लिए भटक नहीं रहे होते।

100 से ज्यादा खिलाड़ी अपने पुरस्कार महाराष्ट्र सरकार को लौटाने वाले हैं। अलग-अलग वर्षों में ये खिलाड़ी देश-प्रदेश का नाम रौशन करके ‘शिव छत्रपति अवॉर्ड (Shiv Chhatrapati Award)’ जीत चुके हैं। अपने-अपने क्षेत्र के इन धुरंधर खिलाड़ियों को अवॉर्ड के साथ सरकारी नौकरी भी देने का वादा सरकार ने किया था। अब जब खिलाड़ी नौकरी माँग रहे हैं, तो सरकार इस माँग को नजरअंदाज कर रही है।

24 फरवरी को दिन तय किया गया है। इस दिन ‘शिव छत्रपति अवॉर्ड’ पाए 103 खिलाड़ी मुंबई पहुँचेंगे। सरकार को अपने-अपने पुरस्कार और प्रमाणपत्र लौटाने के लिए। खिलाड़ियों ने महाराष्ट्र सरकार को शिव जंयती से पहले इस संबंध में फैसला लेने का अनुरोध किया था। 19 फरवरी को शिव जंयती है। ठाकरे सरकार अगर फैसला लेने से चूकती है, तो उनकी खोखली राजनीति एक बार फिर जगजाहिर होगी।

सरकारी नौकरी के अभाव में ‘शिव छत्रपति अवॉर्ड’ पाए कई खिलाड़ियों को किसानी, पेंटिंग और छोटे-मोटे काम कर पेट पालना पड़ रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से विभिन्न जगहों के ये खिलाड़ी आपसे में संवाद किए और सरकार से नौकरी की माँग की। बार-बार नजरअंदाज किए जाने के बाद अब इन लोगों ने अवॉर्ड लौटाने का फैसला किया है।