Homeदेश-समाजगूगल ने दी 'टूलकिट' के राज खोलने पर सहमति, दिल्ली पुलिस ने माँगी थी...

गूगल ने दी ‘टूलकिट’ के राज खोलने पर सहमति, दिल्ली पुलिस ने माँगी थी सूचना

इस 'टूलकिट' में मौजूद डॉक्यूमेंट के सम्बन्ध खालिस्तान-समर्थक समूह ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ से जुड़े नजर आए थे। इसका लक्ष्य भारत के खिलाफ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक युद्ध छेड़ना बताया गया।

हाल ही में किसान आंदोलन को भड़काने में जिस ‘टूलकिट’ का जिक्र सामने आया था, दिल्ली पुलिस ने उसे बनाने वालों के संबंध में शुक्रवार (फरवरी 05, 2021) को गूगल और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों से ईमेल आईडी, डोमेन यूआरएल और कुछ सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी देने को कहा था। बताया जा रहा है कि गूगल ने इस टूलकिट को बनाने वालों की जानकारी साझा करने के लिए अपनी सहमती दे दी है।

उल्लेखनीय है कि किसान आन्दोलन को लेकर पॉप सिंगर रिहाना के ट्वीट के बाद जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) ने ‘गलती से’ एक ‘टूलकिट’ ट्विटर पर शेयर कर डाली थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने भारत सरकार के खिलाफ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक युद्ध छेड़ने के इरादे से ये ‘टूलकिट’ तैयार करने वाले ‘खालिस्तान समर्थक’ निर्माताओं के खिलाफ FIR दर्ज की थी।

इस ‘टूलकिट’ में मौजूद डॉक्यूमेंट के सम्बन्ध खालिस्तान-समर्थक समूह ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ से जुड़े नजर आए थे। इसमें पता चला था कि गत 26 जनवरी को हुई हिंसा सहित पिछले कुछ अन्य घटनाक्रमों को एक नियत और योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया था और इसका लक्ष्य भारत के खिलाफ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक युद्ध छेड़ना है।

अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने बताया था कि इस ‘टूलकिट’ का लक्ष्य भारत सरकार के खिलाफ वैमनस्य और दुष्प्रचार के साथ ही, विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृति समूहों के बीच वैमनस्य की स्थिति पैदा करना है। गौरतलब है कि स्वीडिश एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में एक ट्वीट किया, लेकिन कुछ ही देर बाद यह ट्वीट ग्रेटा ने डिलीट भी कर दिया था। हालाँकि, तब तक बहुत देर भी हो चुकी थी। इस डॉक्यूमेंट से यह स्पष्ट हो गया है कि किसान आन्दोलन एक सोची समझी रणनीति के साथ शुरू किया गया था और 26 जनवरी का उपद्रव भी इसी रणनीति का हिस्सा था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

लाहौर में 79 साल बाद खुला ऐतिहासिक गुरुद्वारा, दिखावे के बीच पाकिस्तान में जमीनी हकीकत जस की तस: समझें ये विरासत संरक्षण के नाम...

पाकिस्तान के सरकारी और नेताओं के ऑफिसों में भगत सिंह की कितनी तस्वीरें हैं? पाकिस्तानी मदरसों और स्कूली सिलेबस से भगत सिंह क्यों गायब हैं?

एमबाप्पे VS यमाल: FIFA World Cup के सेमीफाइनल में मजबूत फ्रेंच अटैक का मुकाबला शानदार स्पेनिश डिफेंस से, लगातार तीसरी बार फाइनल में एंट्री...

फीफा विश्व कप 2026 में अब तक सिर्फ एक गोल खाने वाले स्पेन के सामने एमबाप्पे, डेंबेले और ओलीस को रोकने की बेहद कठिन चुनौती होगी।
- विज्ञापन -