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ट्विटर की कमाई पर लगेगा ब्रेक: सरकार के कठोर रुख के कारण विज्ञापनों में कमी, बचने के लिए टॉप टीम में फेरबदल

ट्विटर और सरकार के आमने-सामने आने के बाद से विज्ञापन ब्रांड्स इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्विटर पर विज्ञापन देने वाले ब्रांड ट्विटर पर कार्रवाई किए जाने या इस प्रकार के किसी फैसले के भय से ट्विटर से किनारा करने पर विचार कर सकते हैं।

ट्विटर की छवि को लेकर आए दिन चल रहे नकारात्मक प्रचार को ‘बैन ट्विटर’, ‘कू ऐप’, ‘बैन ट्विटर इंडिया’ जैसे हैशटैग के माध्यम से देखा जा सकता है। ट्विटर पर ये हैशटैग रोजाना ही ट्रेंड कर रहे हैं और लाखों लोग इन इस विषय पर ट्वीट भी कर रहे हैं।

कुछ लोगों का मानना है कि ट्विटर ने भारत सरकार के साथ टकराव की स्थिति पैदा कर अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मारने का काम किया है। वहीं, बताया जा रहा है कि ट्विटर को वर्ष 2020 में $1.14 बिलियन का घाटा हुआ है। ऐसे में, भारत जैसे करोड़ों की आबादी वाले देश में सरकार के साथ टकराव लेने का जोखिम ट्विटर को महँगा पड़ सकता है।

गौरतलब है कि केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रोद्योगिकी और क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्विटर पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब अमेरिका के कैपिटल हिल पर हिंसा होती है तो सोशल मीडिया वहाँ के राष्ट्रपति तक के अकाउंट को प्रतिबंधित कर देती है, जबकि भारत के मामले पर वह उल्टा कर रहा है।

बृहस्पतिवार (फरवरी 10, 2021) को राज्यसभा में रविशंकर प्रसाद ने कहा, “कैपिटल हिल की घटना के बाद ट्विटर की ओर से की गई कार्रवाई का समर्थन करते हैं। हैरानी की बात है कि लाल किले की हिंसा पर उनका स्टैंड अलग है।”

लाल किले पर हुई हिंसा के बाद सरकार ने ट्विटर को कुछ अकाउंट पर बैन लगाने के निर्देश दिए थे। सरकार ने कहा कि इनमें से अधिकतर अकाउंट खालिस्तान समर्थकों के हैं या फिर कुछ ऐसे लोगों के भी हैं जो कई महीनों से चल रहे किसान आंदोलन या फिर 26 जनवरी को हुई हिंसा के संबंध में दुष्प्रचार कर रहे थे और भड़काऊ सामग्री के साथ ही ग़लत खबरें और सूचनाएँ प्रसारित कर रहे थे।

ट्विटर ने मानी सरकार की बात, बेहतर संवाद के लिए करेगा संरचनात्मक सुधार

ट्विटर के अड़ियल रुख पर केंद्र सरकार के सख्त रवैये के बाद ट्विटर ने आखिरकार सरकार द्वारा दी गई सूची में से 97% से अधिक अकाउंट पर प्रतिबंध लगा दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने ट्विटर को 1,435 ट्विटर अकाउंट पर एक्शन लेने का आदेश दिया था, जिनमें से अब तक 1,398 अकाउंट को हटा दिया गया है।

इसके अलावा, ट्विटर ने अपनी भारत की टीम को पुनर्गठित करने की भी बात कही है, ताकि अपने स्थानीय कार्यालयों में अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त कर वो कानून संबंधी मामलों को अधिक कुशलता से देख सके। यह खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब यह चर्चा जोर पकड़ रही थी कि भारत सरकार ट्विटर के कुछ शीर्ष अधिकारियों को भारत के कानूनों के खिलाफ मनमानी करने और आदेशों की अवहेलना के चलते गिरफ्तार कर सकती है।

आईटी मंत्रालय ने कहा था कि ये अकाउंट ‘किसानों के नरसंहार’ जैसे किसान विरोध से संबंधित ‘भड़काऊ सामग्री’ पोस्ट करने वाले अकाउंट थे, और सरकार ने इन्हें बंद करने की माँग की थी। सरकार ने कहा कि ये भड़काऊ हैशटैग चलने वाले ज्यादातर अकाउंट्स पाकिस्तान और खालिस्तान समर्थित हैं। आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में कहा कि चाहे ट्विटर, फेसबुक, लिंक्डइन या व्हाट्सऐप हो, भारत में काम करने के लिए उनका स्वागत है, उनके करोड़ों फोलोअर्स हैं, लेकिन उन्हें भारतीय संविधान और कानूनों का पालन करना होगा।

इन्डियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, ट्विटर के अधिकारियों ने बुधवार (फरवरी 10, 2021) को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के साथ बैठक में कुछ संरचनात्मक परिवर्तनों पर सहमति व्यक्त की। मंत्रालय ने भारत सरकार और ट्विटर की वैश्विक टीम के बीच बेहतर संवाद के प्रयास के तहत इन परिवर्तनों पर जोर दिया।

इससे पूर्व, बुधवार (फरवरी 10, 2021) को ट्विटर के अधिकारियों- ट्विटर की ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी वाइस प्रेसिडेंट मोनीके मेशे और जिम बेकर के साथ एक बैठक के दौरान, केंद्रीय आईटी सचिव अजय प्रकाश साहनी ने स्पष्ट किया कि इन विवादास्पद हैशटैग का उपयोग न तो पत्रकारिता की स्वतंत्रता थी और न ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है क्योंकि ये ‘गैर जिम्मेदाराना सामग्री भड़काने वाली’ साबित हो सकती है।

अजय साहनी ने ट्विटर के प्रतिनिधियों से कहा कि भारत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आलोचना का सम्मान करता है क्योंकि ये हमारे लोकतंत्र का हिस्सा है, हालाँकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निरंकुश नहीं है और इस पर भी उचित प्रतिबंध लागू होते हैं, जैसा कि भारत के संविधान के अनुच्छेत 19 (2) में वर्णित है। उन्होंने कहा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों में भी इस सिद्धांत को कई बार सही ठहराया गया है।

बजरंग दल कार्यकर्ता के घर में घुसे 25-30 लोग, पीठ में चाकू घोंप हत्या: इस्लाम, दानिश, दिलशान और दिलशाद गिरफ्तार

दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में बजरंग दल कार्यकर्ता की हत्या होने के बाद से तनाव है। कथित तौर पर 25-30 लोगों के समूह ने बुधवार (10 फरवरी 2021) को घर में घुसकर 26 वर्षीय रिंकू शर्मा पर हमला किया। वे अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए चलाए जा रहे धन संग्रह अभियान में सक्रिय थे।

रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने इस मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान मोहम्मद इस्लाम, दानिश नसीरुद्दीन, दिलशान और दिलशाद इस्लाम के तौर पर हुई है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार शर्मा पश्चिम विहार स्थित एक अस्पताल में बतौर लैब टेक्नीशियन काम करते थे और उनका पूरा परिवार बजरंग दल से जुड़ा था। रिंकू के परिवार में मॉं राधा देवी, पिता अजय शर्मा और भाई अंकित एवं मनु हैं।

सोशल मीडिया पर इस समय इस घटना का एक वीडियो वायरल है। वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे कुछ लोग रिंकू के घर में घुस कर जोर-जबरदस्ती कर रहे हैं। पत्रकार गौरव मिश्रा के अकाउंट पर ये वीडियो अपलोड है। इसमें देख सकते हैं कि कैसे कुछ युवक गाली-गलौच करते हुए रिंकू के घर में लाठी लेकर घुसे और मारपीट की। महिला से सिलेंडर छीनने का प्रयास किया और फिर एकदम से लाठियाँ चलाने लगे।

सोशल मीडिया में रिंकू के पिता का रोते-बिलखते वीडियो भी आया है। वीडियो में वे बता रहे हैं कि किस बर्बरता से उनके बड़े बेटे को मारा गया। साथ ही उनके छोटे बेटे पर भी हमला हुआ। रिंकू के पिता कहते हैं कि अचानक गेट खोलने के लिए आवाज आई और जैसे ही उनका छोटा बेटा गेट खोलने गया, सामने से 25-30 लोग आए। उन सबके हाथ में लाठियाँ थी। मेरे छोटे बच्चे को भी मारा। फिर वो घर में घुस गए। रिंकू किसी तरह बाहर भागा… थोड़ी देर बाद वे गेट पर लाठी बजाकर गए कि मार दिया, जा बचा ले अपने बच्चे को। पीछे से एक महिला ने बताया कि रिंकू को चाकू मार दिया है।

रिंकू के पिता के अनुसार कि इससे पहले भी भगवान राम को लेकर विवाद हुआ था। वे लोग मोदी को गाली देते थे। हमने तब समझौता कर लिया था। लेकिन इस बार उनके हाथ में लाठियाँ थीं, चाकू थे, वे सिलेंडर खोल रहे थे।

रिपोर्ट के अनुसार बीते महीने इलाके में राम मंदिर निर्माण को लेकर एक जागरुकता रैली निकाली गई थी। उस दौरान रिंकू का विवाद हो गया था। उस समय स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप से मामला खत्म हो गया था। इसके बाद एक जन्मदिन पार्टी में रिंकू का आरोपितों से विवाद हुआ था। उसके बाद बुधवार की रात उसके घर में घुसकर हमला किया गया। हमलावरों के जाने के बाद लोग रिंकू को संजय गाँधी अस्पताल ले गए। इलाज के दौरान गुरुवार दोपहर उन्होंने दम तोड़ दिया।

जहाँ से आएँगे पत्थर, उन्हीं के घर के पत्थर निकाले जाएँगे: MP के गृहमंत्री ने कानून बनाने के दिए संकेत

मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान की सरकार दंगाइयों और पत्थरबाजों पर नकेल कसने की तैयारी में है। राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस दिशा में कानून बनाने के संकेत देते हुए कहा, “जहाँ से पत्थर आएँगे, उन्हीं के घर के पत्थर निकाले जाएँगे।”

गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने गुरुवार को मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए कहा, “जहाँ से पत्थर आएँगे, उन्हीं के घर के पत्थर निकाले जाएँगे। राज्य की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का किसी को अधिकार नहीं है। अब पत्थर चलाने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाएगा। सूबे की सरकार ऐसे लोगों से निपटने के लिए कानून बनाने पर विचार कर रही है।”

नया कानून कैसा और क्या होगा, इसके बारे में गृहमंत्री ने ज्यादा जानकारी नहीं दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जिस तरह लव जिहाद से निपटने के लिए कानून बनाया गया है उसी तरह सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुॅंचाने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। मुख्यमंत्री भी ऐसे मामलों में आरोपितों के घर और संपत्ति पर कार्रवाई के आदेश दे चुके हैं।

इससे पहले गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अभिनेत्री कंगना रनौत की फिल्म की शूटिंग नहीं होने की धमकी देने वाले कॉन्ग्रेसियों को भी जमकर लताड़ा था। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के कॉन्ग्रेस नेता ने धमकी दी थी कि यदि कंगना किसानों के लिए कही गई बातों पर माफी नहीं माँगती हैं तो उन्हें फिल्म ‘धाकड़’ की शूटिंग नहीं करने दी जाएगी।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मिश्रा ने कहा था, “फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत को चिचोली (बैतूल) के कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा धमकाए जाने के मामले में मैंने बैतूल एसपी से चर्चा की है। मध्य प्रदेश में कानून का राज है। बेटी कंगना रनौत को किसी से डरने की जरूरत नहीं है।”

कोविड वैक्सीनेशन पूरा होते ही CAA पर अमल, बंगाल में जीतेंगे 200 से ज्यादा सीटें: अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA/सीएए) के कार्यान्वन को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि कोविड-19 वैक्सीन अभियान का काम पूरा होते ही सीएए पर अमल की दिशा में सरकार बढ़ेगी। बंगाल के मतुआ में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। वहीं इंडिया टुडे के कॉन्क्लेव में उन्होंने कहा कि बंगाल में बीजेपी 200 से ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाएगी।

मतुआ की रैली में केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि विपक्ष अल्पसंख्यकों को गुमराह करने का काम कर रहा है। लेकिन वह आश्वस्त करते हैं कि सीएए से किसी भी रूप में भारतीय अल्पसंख्यकों की नागरिकता पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, शाह ने सीएए को लेकर कहा कि इसे कोरोना महामारी के कारण अभी तक लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा, “ममता दीदी ने कहा कि ये झूठा वादा है। उन्होंने इसका विरोध किया और कहा कि वह इसे कभी लागू नहीं होने देंगी। भाजपा जो कहती है, वो करती है। हम ये कानून लाए हैं। इससे शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी।”

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी इस कानून के लागू होने तक उस पद पर नहीं रहेंगी जो विरोध कर पाएँ। जब तक यह लागू होगा तब ममता बनर्जी राज्य में मुख्यमंत्री भी नहीं रहेंगी।

अमित शाह ने रैली के दौरान ममता सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “भाजपा पश्चिम बंगाल में हिंसा का दौर रोक कर विकास का नया दौर शुरू करने जा रही है। मैं दूसरी बार ठाकुरनगर की पवित्र धरती पर आया हूँ। कुछ परिस्थितियों की वजह से मेरा पिछला दौरा रद्द हुआ, तो ममता दीदी बहुत खुश हो गईं। अरे ममता दीदी! अभी बहुत समय है अप्रैल तक, मैं बार-बार आऊँगा। जब तक आप चुनाव नहीं हारतीं, तब तक आऊँगा।”

बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने परिवर्तन रैली के चौथे चरण में कूचबिहार के रसमेला ग्राउंड से शुरूआत की। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य राज्य में बुआ-भतीजे का भ्रष्टाचार समाप्त करना है। इसके अतिरिक्त यात्रा का उद्देश्य राज्य में घुसपैठ, बेरोजगारी, बम धमाकों और किसानों की स्थिति में बदलाव लाना है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “मैं कहना चाहता हूँ कि ये लड़ाई भाजपा को मजबूत बनाने की नहीं है। ये लड़ाई ममता दीदी को उखाड़ फेंकने की नहीं है, बल्कि ये लड़ाई हमारे बंगाल को सोनार बांग्ला बनाने की है।”

कॉन्ग्रेस नेताओं ने दी धमकी, कंगना को नहीं करने देंगे ‘धाकड़’ की शूटिंग

बॉलीवुड की बेबाक एक्ट्रेस कंगना रनौत हमेशा अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहती हैं। एक्ट्रेस ने हाल ही में किसान आंदोलन की प्रमाणिकता को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद से उन्हें सोशल मीडिया पर लगातार धमकियाँ मिली। मध्यप्रदेश के कॉन्ग्रेस नेता ने भी अब उन्हें धमकाते हुए उनकी फिल्म की शूटिंग रोकने की बात कही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के कॉन्ग्रेस नेता ने धमकी दी है कि यदि कंगना किसानों के लिए कही गई बातों पर माफी नहीं माँगती हैं तो उन्हें मध्य प्रदेश में उनकी फिल्म ‘धाकड़’ की शूटिंग नहीं करने दी जाएगी। बता दें, बैतूल जिले के सारनी इलाके में कंगना रनौत अपनी नई फिल्म धाकड़ की शूटिंग कर रही हैं।

प्रदेश कॉन्ग्रेस सेवादल के सचिव मनोज आर्य और चिचोली ब्लॉक कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नेकराम यादव ने बुधवार को बैतूल में तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि कंगना रनौत दिल्ली में आंदोलन कर रहे किसानों को लेकर दिए गए अपने बयान पर शुक्रवार की शाम तक माफी नहीं माँगती है तो उन्हें सारनी में अपनी फिल्म ‘धाकड़’ की शूटिंग नहीं करने दी जाएगी।

कॉन्ग्रेस की इस धमकी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, भाजपा नेता और राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि प्रदेश कॉन्ग्रेस प्रमुख कमलनाथ को अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को रोकना चाहिए। उन्होंने कंगना रनौत को अपना पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया।

गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि, “फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत को चिचोली (बैतूल) के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा धमकाए जाने के मामले में मैंने बैतूल एसपी से चर्चा की है। मध्य प्रदेश में कानून का राज है। बेटी कंगना रनौत को किसी से डरने की जरूरत नहीं है।”

गौरतलब है कि इससे पहले भी पंजाब यूथ कॉन्ग्रेस ने किसान के विरोध पर ट्वीट करने के लिए अभिनेत्री को निशाना बनाया था और चेतावनी दी थी कि वे किसानों के दिल के भीतर की आग से ना खेले।

पंजाब यूथ कॉन्ग्रेस ने रनौत पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाले और भाजपा के कठपुतली पंजाब की संस्कृति, विविधता और इतिहास को कभी नहीं समझेंगे। उन्होंने अत्यधिक आक्रामक और अश्लील हैशटैग का इस्तेमाल भी किया था। इसके अलावा किसान आंदोलन के खिलाफ बोलने पर कंगना के खिलाफ कई नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।

हमारा सिस्टम लेफ्ट-राइट नहीं जानता, यह पूरी तरह भारतीय App: Koo पर उठे सवालों का संस्थापक ने दिया जवाब

डिजिटल यूजर्स के बीच Koo की बढ़ती लोकप्रियता के कारण कई आलोचक इस ऐप्लीकेशन पर तरह तरह के सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में सभी आशंकाओं पर विराम लगाते हुए इसके सह संस्थापक अप्रमेय राधाकृष्णा ने सारे सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने बताया कि आखिर कैसे उनकी ऐप से डेटा लीक होने वाली बात फर्जी है और कैसे उनकी ऐप पूरी तरह आत्मनिर्भर भारत की ऐप है।

अप्रमेय ने सबसे पहले उन लोगों के सवालों के जवाब दिए जिन्होंने फ्रेंच हैकर का हवाला देकर पूछा कि वह इस ऐप से डेटा ले सकता है। अप्रमेय ने बताया कि 95% यूजर्स Koo पर मोबइल नंबर के जरिए लॉग इन कर रहे हैं। कई समुदाय ईमेल लॉग इन के लिए नहीं इस्तेमाल करते थे तो उनकी प्राथमिकता में कभी ईमेल से लॉग इन का सिस्टम नहीं था। इसे अभी हाल में लाया गया है। और जो लोग ये कह रहे हैं कि इस ऐप पर डेटा विजिबल है, वह वो डेटा है जो यूजर ने डाला है। इसे डेटा लीक नहीं कहा जाएगा। अगर आप यूजर की प्रोफाइल तक जाएँगे तो वैसे भी वो आपको दिखेगा ही।

वह कहते हैं, “हम सिर्फ़ 10 माह पुराने प्लेटफॉर्म हैं। इस तरह यूजर्स की भरमार हमारे लिए बहुत अनापेक्षित थी। हम अपने प्लेटफॉर्म को हर दिन बेहतर बना रहे हैं। ये कोई ऐसी दिक्कतें नहीं है जिनसे आप निपट नहीं सकते या फिर इन्हें इम्प्रुव नहीं किया जा सकता।”

अप्रमेय अपनी ऐप पर चीनी निवेश को लेकर कहते हैं कि ये पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर भारत की ऐप है। बुक माय शो के आशीष हेमरजनी, बाउंस के विवेकानंद, जेरोधा के निखिल कमात समेत कई भारतीय उद्यमी KOO में निवेश कर रहे हैं। हाल में बॉम्बिनेट टेक्नॉलॉजी ने निवेश किया है। कू की पेरेंट कंपनी 3one4Capital है।

शुनवेई का हालिया फंडिंग में कोई रोल नहीं है। ढाई साल पहले उससे पूँजी जुटाई गई थी। उसने वोकल प्रोडक्ट में निवेश किया था जो भारतीय भाषाओं में जवाब देती थी। हालाँकि, अब यह पूर्ण रूप से अलग हो रही है। ये स्टेक्स कोई और खरीदेगा। वर्तमान में इसके स्टेक्स 3one4Capital, कलारी के पास हैं। कुछ अन्य कंपनियाँ भी कुछ स्टेक्स खरीदेंगी। ये ऐप पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर भारत की ऐप है जिसके संस्थापक भी भारतीय हैं।

इस ऐप्लीकेशन को लेकर एक बहस ये भी हो रही है कि ये एक सरकार समर्थित व दक्षिणपंथी ऐप है। जब इस संबंध में कू के सह संस्थापक से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उनका सिस्टम ये राइट लेफ्ट नहीं समझता। सिस्टम सिर्फ़ प्रति व्यक्ति को यूजर के तौर पर देखता है। वह कहते हैं, “हमें अपने सामर्थ्य के हिसाब से सबको अच्छी सुविधा देनी है और सबसे बेहतर एक्सपीरियंस देना है।”

उनके अनुसार, “उनके और उनके साथी का कोई पॉलिटिकल कनेक्शन नहीं है। वह एक प्लेटफॉर्म चला रहे हैं जो पूरी तरह भारतीय है और भारतीय कानून व भारतीय संविधान के अंतर्गत काम करेगा।” वह कहते हैं, “संविधान की तरह हमारा सिद्धांत भी सिर्फ़ ‘लोगों का, लोगों के लिए, लोगों के द्वारा’ पर आधारित है। अभी हमारे पास रवि शंकर प्रसाद, पीयूष गोयल, बीएस येदियुरप्पा, शिवराज चौहान, समेत कुछ नाम हैं जिन्होंने इस प्लेटफॉर्म को चुना। उम्मीद है कि आने वाले समय में हर विचार वाला व्यक्ति इससे जुड़ेगा। हमारा उद्देश्य सिर्फ़ स्थानीय भाषाओं में उभरकर देश से गहराई तक जुड़ना है।”

यूपी कासगंज पुलिस हत्याकांड में शामिल हत्यारोपित नवाब गिरफ्तार, मुख्य आरोपित मोती सिंह का है दाहिना हाथ

उत्तर प्रदेश के कासगंज में शराब माफिया को पकड़ने गई पुलिस पर बेरहमी से हुए हमले और हत्याकांड के मामले में पुलिस ने नवाब नाम के एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक पकड़ा गया आरोपित कांस्टेबल देवेंद्र सिंह की हत्या में शामिल था। बता दें, नवाब इस खौफनाक कांड के मुख्य आरोपित मोती सिंह का दाहिना हाथ है। जो फिलहाल फरार है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने गिरफ्तार आरोपित नवाब सिंह के निशानदेही पर हत्या और हमले में इस्तेमाल भाला और लाठी को भी बरामद किया है। साथ ही उससे वारदात में शामिल उसके फरार साथियों का पता लगाने की कोशिश भी कर रही हैं। वहीं हिस्ट्रीशीटर मोती धीमर पर पुलिस ने 50 हजार रुपए का इनाम रखा है।

एसपी मनोज कुमार सोनकर ने बताया कि आरोपित नवाब सिंह की धर पकड़ मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी कर की गई। शराब माफिया मोती का दाहिना हाथ कहे जाने वाले नवाब ने अपने आका के कहने पर ही पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला किया था। पुलिस अलग-अलग ठिकानों पर मोती को पकड़ने के लिए दबिश दे रही हैं।

गौरतलब है कि बीते मंगलवार (9 फरवरी) की दोपहर दरोगा अशोक सिंह और कॉन्स्टेबल देवेंद्र अवैध शराब की भट्टी पर दबिश देने पहुँचे थे, जहाँ शराब माफियों ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिस पर हमला बोल दिया था। पहले माफियाओं ने दोनों पुलिसकर्मियों को बंधक बनाकर पीटा। फिर उनकी वर्दी फाड़ कर उनसे उनके हथियार छीन लिए थे। इसके बाद दारोगा को रास्ते में फेंक दिया गया व सिपाही को अपने साथ लेकर चले गए थे।

जब किसी ग्रामीण ने रास्ते में बुरी तरह घायल पुलिसकर्मी को देखा तो इसकी सूचना पुलिस को दी। जानकारी होते ही पुलिस मौके पर पहुँची और तत्काल उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। जिसके बाद सब इंस्पेक्टर अर्धनग्न अवस्था में खून से लथपथ जंगल में मिले। पुलिस उन्हें भी जिला अस्पताल लेकर गई लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था।

सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए आरोपितों के विरुद्ध रासुका लगाने के निर्देश दिया था और मृत सिपाही के परिवार को 50 लाख की मदद व एक नौकरी देने का ऐलान किया था। दूसरी ओर पुलिस ने कार्रवाई के दौरान मुठभेड़ में एक हत्यारोपित को मार गिराया था। एनकाउंटर में मारे गए शख्स की पहचान मोती धीमर के भाई एलकार के रूप में हुई थी।

केरल के ‘कोरोना मॉडल’ पर इतनी बातें, ड्रग्स, पॉलिटिकल मर्डर और लव जिहाद पर कब बात करेंगे कॉमरेड राहुल

बात जब गंभीर विमर्शों की हो तो कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी जैसे अपरिपक्व नेता, जिनकी सबसे बड़ी पूँजी ही परिवार का नाम है, की चर्चा का तुक नहीं बनता। गुरुवार (11 फरवरी 2021) को कॉन्ग्रेस के युवराज ने लोकसभा में ‘हम दो हमारे दो’, ‘अडानी-अंबानी’ टाइप ढेर सारी बातें की, जबकि चर्चा बजट पर थी। बावजूद उनका जिक्र भर क्योंकि वे केरल के वायनाड से ही लोकसभा पहुँचे हैं। वायनाड ने उन्हें तब सदन में भेज दिया, जब अमेठी की परंपरागत सीट पर 2019 के आम चुनावों में हार की आहट पाकर वे वहाँ गए थे।

इच्छा हो तो राहुल का ‘कालजयी’ भाषण यहॉं सुन सकते हैं

केरल एक ऐसा प्रदेश है जहाँ बारी-बारी से वाम दलों और कॉन्ग्रेस का गठबंधन सत्ता में रहता है। अभी लेफ्ट फ्रंट की सरकार है। दक्षिणपंथ के लिए यह अभी अभेद्य किला ही है। इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में इस खेमे का प्रभाव बढ़ने की उम्मीदें भी जताई जा रही है।

पर आपने कभी राजनीतिक विमर्शों में उन मुद्दों पर चर्चा सुनी है, जिनसे केरल जूझ रहा है। ऐसा नहीं है कि केरल के मुद्दे देश के राजनीतिक विमर्श में नहीं आते। कोरोना संकट के बाद लिबरलों ने केरल मॉडल का खूब झुनझुना बजाया था, जबकि तथ्य इस मॉडल के फ्लॉप होने की तस्दीक करते हैं। दिसंबर 2020 में कोरोना के जितने मामले देश में थे, उसमें 40 फीसदी महाराष्ट्र और केरल से ही थे। जनवरी 2021 में जब पूरे देश में संक्रमण में सुधार दिख रहा तब भी केरल मॉडल उछाल मार रहा था।

बावजूद इस मॉडल पर खूब शोर हुआ। लेकिन कभी आपने केरल के ड्रग्स के दलदल में धॅंसते जाने पर चर्चा सुनी है। केरल हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि केरल में नशीली दवाओं के इस्तेमाल की दर काफी ज्यादा है। न्यायालय ने इसे देखते हुए युवाओं और छात्रों को नशीली दवाओं का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार न्यायालय ने एक रिपोर्ट का विशेष तौर पर उल्लेख किया। इस रिपोर्ट के अनुसार राज्य में लगभग 400 शिक्षण संस्थान ड्रग्स की चपेट में हैं। ऐसे संस्थानों में से 74 फीसदी से ज्यादा स्कूल हैं। इसे देखते हुए अदालत ने शिक्षण संस्थानों में पुलिस कैंपस यूनिट के गठन का निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं।

‘उड़ता पंजाब’ वाले लिबरल जमात के लिए भी यह कोई महत्वपूर्ण मसला नहीं है। शायद इसलिए क्योंकि उनके ‘वैचारिक पुरोधा’ सत्ता में हैं!

ड्रग्स की तरह ही केरल लव जिहाद से भी त्रस्त है। इसे देखते हुए पिछले दिनों बीजेपी ने कहा था कि यदि वह राज्य की सत्ता में आती है तो इसे रोकने के लिए कानून बनाएगी। केरल में ईसाई भी बढ़ते लव जिहाद से हलकान है। कुछ महीनों पहले राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिख कर केरल में ईसाई लड़कियों को निशाना बनाए जाने की बात की थी। उन्होंने आँकड़ा दिया था कि 7 साल में केरल में 4000 महिलाएँ लव जिहाद की शिकार बनीं। कुरियन ने कहा था कि उन सभी का ब्रैनवॉश हुआ और जबरन इस्लाम में धर्मान्तरित किया गया। ढेरों पीड़ितों की आपबीती हैं जो बताती हैं कि कैसे उनको जान-बूझकर निशाना बनाया गया। फिर भी रवीश कुमार को यह हिन्दू-मुस्लिम सिलेबस का हिस्सा लगता है।

इसी तरह केरल में राजनीतिक हिंसा, खासकर संघ परिवार से जुड़े लोगों को जिस तरह निशाना बनाया जाता है, वह भयावह है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मोटे तौर पर 2000 के बाद से केरल में 200 से ज्यादा पॉलिटिकल किलिंग हो चुकी हैं। इनमें से आधे तो केवल कन्नूर जिले में ही अंजाम दिए जाते हैं। सत्ता में नहीं होने पर कई मौकों पर वामपंथियों की हिंसा के शिकार कॉन्ग्रेस के भी कार्यकर्ता होते हैं। लेकिन कॉन्ग्रेस उसी तरह की रहस्यमयी चुप्पी साध लेती है, जैसा उसने मरीचझापी नरसंहार के वक्त किया था।

1979 में मरीचझापी द्वीप पर बांग्लादेशी नामशूद्रों का ऐसा नरंसहार किया गया था कि कई लोगों का दावा है कि इसकी वजह से सुंदरबन के बाघ आदमखोर हो गए। उस समय बंगाल की सत्ता में वामपंथी थे और विपक्ष में कॉन्ग्रेस। आज दोनों बंगाल के मैदान में साथ उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

उस समय मरीचझापी को न तो वामदलों ने मुद्दा बनने दिया था और न कॉन्ग्रेस ने नामशूद्रों की फिक्र की थी। केरल में भी वही युगलबंदी है। वामपंथी न तो अपनी हिंसा पर चर्चा चाहते हैं, न लव जिहाद की साजिशों पर। ड्रग्स जैसे मुद्दे तो खैर कभी हमारी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा ही नहीं बन पाए।

कॉन्ग्रेस को बचना है तो ‘हम दो (मॉं-बेटे), हमारे दो (लिबरल-लेफ्ट)’ से छुटकारा पाना ही होगा। फिलहाल इसकी उम्मीद दिखती नहीं!

73 देशों में हमारा संगठन, उनसे है हमारा गठजोड़: BKU वाले राकेश टिकैत ने कबूला ग्लोबल कनेक्शन

केंद्र द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ ‘किसान आंदोलन’ का नेतृत्व करने वाले प्रमुख नेताओं के रूप में उभरे भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने हिंदी न्यूज़ चैनल आज तक पर दिए एक इंटरव्यू में अपने ग्लोबल लिंक होने की बात स्वीकार की है।

आजतक के शो ‘सीधी बात’ पर पत्रकार प्रभु चावला से बात करते हुए टिकैत ने पुष्टि की कि वह जिस संगठन से जुड़े हैं, उसकी शाखाएँ 73 देशों में हैं और उनका भारतीय शाखा के साथ भी गठबंधन है। बीकेयू के प्रवक्ता ने आगे कहा कि उनके संगठन का प्रदर्शन ब्राजील देश में भी हो रहा है, जहाँ ब्राज़ीलियाई मजदूरों को किसानों में परिवर्तित करने का प्रयास किया जा रहा है। राकेश टिकैत ने कहा, “ब्राजील में हम मजदूर से किसान बना रहे हैं।”

हालाँकि, इंटरव्यू के दौरान टिकैत अंतरराष्ट्रीय सितारों, जैसे रिहाना, मिया खलीफा और पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग को नहीं जानने का दिखावा भी करते है, जिन्होंने भारत के किसान विरोध का समर्थन किया था। वहीं बातचीत के दौरान उन्होंने अनजाने में ही सही लेकिन विदेशों से अपने कनेक्शन के बारे में खुलासा कर दिया।

दुनियाभर में फैले संगठन की सभी 73 शाखाओं से मिल रहे समर्थन को लेकर प्रभु चावला द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कि बीकेयू नेता ने पुष्टि की कि वे सभी सदस्य जिनकी विचारधारा उनके जैसे हैं, वह उनका समर्थन कर रहे हैं।

गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर रैली प्रदर्शन के दौरान राष्ट्र की राजधानी में प्रदर्शनकारियों द्वारा हुए उपद्रव और हिंसा के लिए संदेह के घेरे में आए टिकैत ने साक्षात्कार के दौरान स्वीकार किया कि वह जिस संगठन से जुड़े हुए है वह आने वाले 50 सालों की नीतियों को लेकर पॉलिसी बना रहा है, जोकि आंदोलन के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर चल रही बड़ी साजिश का खुलासा करता है।

गौरतलब है कि इस पूरे इंटरव्यू के दौरान राकेश टिकैत काफी भ्रमित दिखाई दिए, क्योंकि उन्हें पता ही नहीं था कि वह वास्तव में सरकार से क्या चाहते हैं या पिछले 75 दिनों से वे वास्तव में किस लिए विरोध कर रहे हैं। इस समय उन्हें बस इतना पता था कि वह बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ मैदान में उतरे हुए हैं।

यहीं नहीं जब पत्रकार ने टिकैत को बताया कि इस साल एमएसपी में सरकार की धान खरीद का रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गया है तो उनके चेहरे पर एक अजीब ही झुंझलाहट देखने को मिली। और वहीं जब कई बार सरकार द्वारा इस साल एमएसपी में अधिक धान खरीद के दावे को लेकर पत्रकार ने सवाल किया, तो टिकैत उनकी बातों से भागते नजर आए।

इसके अलावा भ्रमित बीकेयू नेता को यह कहते हुए सुना गया कि उनकी एकमात्र माँग यह है कि सरकार को यह आश्वासन देना चाहिए कि व्यापारी भी किसान की उपज एमएसपी या एमएसपी से अधिक कीमत पर खरीदेंगे।

बीकेयू नेता आगे दावा करते हैं कि प्रदर्शनकारी किसानों और सरकार के बीच सभी 11 दौर की वार्ता के दौरान, मंत्रियों में से किसी ने भी उनसे बात नहीं की। टिकैत ने कहा, “हम तो सरकार को ढूँढ रहे हैं। सरकार है कहाँ? उन्होंने आगे माँग की कि भारत के प्रधानमंत्री को बातचीत के लिए व्यक्तिगत रूप से समय प्रदान करनी चाहिए।

टिकैत के पूरे इंटरव्यू को यहाँ देखें।

उल्लेखनीय है कि राकेश टिकैत मौजूदा किसान आंदोलन का चेहरा रहे हैं। वह अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने के लिए इस विरोध का तरह अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे है। दिल्ली में 26 जनवरी को हुई हिंसक ट्रैक्टर रैली के पीछे एक बड़ी साजिश और आपराधिक घटना के मास्टरमाइंड का पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस ने भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत के खिलाफ लोगों को भड़काने और उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया था।

गणतंत्र दिवस पर हुए हिंसा से पहले टिकैत का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह प्रदर्शनकारियों से ट्रैक्टर रैली में लाठी, झंडे लेकर चलने के लिए कह रहे थे। जिसके बाद गणतंत्र दिवस पर हुए ट्रैक्टर रैली के दौरान, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजधानी में काफी उत्पात मचाया और पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ते हुए हिंसा को अंजाम दिया।

हजारों प्रदर्शनकारियों ने लाल किले पर भी धावा बोल दिया, और इसकी प्राचीर पर खालिस्तानी झंडे को फहराकर भारत की संप्रभुता के प्रतीक को अपमानित किया। रैली के मद्देनजर जो हिंसा हुई उसमें 300 से अधिक पुलिस कर्मियों को गंभीर चोटें आईं। प्रदर्शनकारियों द्वारा बसों, निजी कारों और सरकारी संपत्तियों की भी तोड़फोड़ की गई थी।

हालाँकि, बाद में टिकैत ने हिंसा की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया, और केंद्र और दिल्ली पुलिस को गणतंत्र दिवस के व्यवधान के लिए दोषी ठहराया था।

लाल किला हिंसा में गिरफ्तार दीप सिद्धू की ‘गर्लफ्रेंड’ रीना रॉय रह चुकी हैं मिस साउथ एशिया: खुला वीडियो से जुड़ा राज

लाल किला पर हुई हिंसा के मुख्य आरोपित दीप सिद्धू के पकड़े जाने के बाद उसकी गर्लफ्रेंड रीना रॉय का नाम चारों ओर मीडिया में है। रीना ही वह शख्स हैं जिन्होंने सिद्धू के गायब होने के बाद इंटरनेट पर उनकी वीडियो पोस्ट की और जब पुलिस ने लोकेशन का पता लगाना चाहा तो पता चला कि वीडियोज विदेश (कैलीफोर्निया) से अपलोड हो रही हैं। 

कुछ दिन पहले जब दीप सिद्धू गिरफ्तार हुआ तो रीना का नाम प्रकाश में आया। अब पुलिस रीना के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। वहीं डिजिटल मीडिया के पाठक भी ये जानने में उत्सुक हैं कि रीना कौन हैं? आइए आज इसी सवाल का जवाब देते हैं:

विभिन्न यूट्यूब चैनल्स पर मौजूद जानकारी के अनुसार रीना राय अपने ब्वॉयफ्रेंड दीप सिद्धू की तरह पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री का मशहूर चेहरा हैं। सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहने के अलावा वह अपने रिलेशनशिप के लिए भी चर्चा में रहती हैं। हालाँकि, दीप के साथ रिश्ते पर उन्होंने कभी खुल कर बात नहीं की थी।

हाल में जब दीप 26 जनवरी की हिंसा को लेकर विवादों में फँसा तो उसने विभिन्न फोन का इस्तेमाल करके रीना को अलग-अलग नंबरों से संपर्क किया। साथ ही टेलीग्राम एप्लीकेशन के जरिए उसे वीडियोज भेजी, जिसे रीना ने उसके फेसबुक से अपलोड किया।

दैनिक जागरण के अनुसार रीना की मुलाकात दीप से पंजाबी फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी। कहा जाता है कि तो रीना का मकसद कभी फिल्मों में आने का नहीं था। उनके पास तो डिग्री भी फिजिशियन की है। मगर साल 2014 में जब उन्हें मिस साउथ एशिया यूएसए चुना गया तो उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अभिनय जगत में खुद को आजमाया।

कई म्यूजिक वीडियोज में काम करने के बाद साल 2018 में रंग पंजाब नाम की फिल्म से रीना ने फिल्मों में कदम रखा। इसी फिल्म में दीप भी लीड रोल में थे। रीना का कहना था कि वह खुद को बहुत खुशकिस्मत समझती हैं जो उन्हें ये मौका मिला कि वो दीप के साथ फिल्म कर पाईं। बता दें कि सोशल मीडिया पर रीना की काफी फैन फॉलोइंग है। लेकिन उन्होंने अपना अकॉउंट प्राइवेट किया हुआ है।