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महाराष्ट्र का दिघी पोर्ट अडानी के पास: ₹10000 करोड़ का निवेश कर गेटवे तैयार करेगी कंपनी

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) ने सोमवार (फरवरी 15 , 2021) को 705 करोड़ रुपए में दिवालिया (बैंकरप्ट) प्रक्रिया से गुजर चुकी Dighi Port Limited (DPL- दिघी पोर्ट लिमिटेड) का अधिग्रहण कर लिया है। दिघी पोर्ट को अप्रैल में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा दिवालिया घोषित किया गया था। यह महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के राजपुरी क्रीक के किनारे स्थित है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, APSEZ ने बताया कि वह इसे JNPT (Jawaharlal Nehru Port Trust) के वैकल्पिक गेटवे के तौर पर विकसित करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश करेगी। JNPT भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट है और देश के 12 बड़े बंदरगाहों में से एक भी।

दिघी पोर्ट के 100% स्टेक अडानी पोर्ट्स के पास होने के बाद कंपनी (APSEZ) के सीईओ करन अडानी ने कहा कि दिघी पोर्ट लिमिटेड (DPL) के सफल अधिग्रहण ने अडानी पोर्ट के बंदरगाहों को बनाने के लक्ष्य में एक अन्य कीर्तिमान जोड़ा है, जिससे भारत के पूरे आर्थिक क्षेत्र में सर्विस कवरेज बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कंपनी के ग्रोथ पर फोकस, अनुभव और अधिग्रहण करने की निपुणता के साथ, उन्हें DPL को शेयरधारकों के लिए बेहतर वैल्यू वाला बनाने का विश्वास है।

इस अधिग्रहण के बाद उद्योगपति गौतम अडानी के नेतृत्व वाला APSEZ, महाराष्ट्र में ग्राहकों को अपनी सेवा दे सकेगा, जिसके अंतर्गत बड़े औद्योगिक क्षेत्र, मुंबई और पुणे क्षेत्रों का विकास शामिल है। कंपनी मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत और मरम्मत करेगी और ड्राई, कंटेनर और लिक्विड कार्गो के लिए सुविधाओं के विकास में निवेश करेगी।

दिघी पोर्ट के विकास से विभिन्न उद्योगों जैसे- उपभोक्ता उपकरण, धातु, ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स, और रसायन व्यवसाय महाराष्ट्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और महाराष्ट्र में औद्योगिक विकास को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। दिघी पोर्ट को मूल रूप से मुंबई के उद्योगपति विजय कलंतरी द्वारा विकसित किया गया था।

रेजोल्यूशन प्लान की शर्तों के अनुसार, राज्य बंदरगाह नियामक ‘महाराष्ट्र मेरिटाइम बोर्ड’ (MMB) और APSEZ से कंसेशन राइट्स के ट्रांसफर को भी मंजूरी मिल गई है, जिसने फाइनेंशियल क्रेडिटर्स, MMB के बकाया और दूसरे लागत और क्लेम का सेटलमेंट कर दिया है।

बंगाल में पत्थरबाजी: शुवेंदू, शिबाजी, शंकुदेव तीनों BJP नेता घायल, एक की हालत गंभीर – TMC के गुंडों पर आरोप

कोलकाता के फूलबागान में भाजपा नेता शुवेंदू अधिकारी, शंकदेब पंडा, शिवाजी सिंहा पर कुछ लोगों द्वारा बुधवार (फरवरी 17, 2021) देर रात हमला और पथराव किया गया। इसमें भाजपा नॉर्थ कोलकाता के जिलाध्यक्ष शिबाजी सिंह रॉय गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। शुवेंदु अधिकारी और शंकदेब पंडा को भी चोट आई हैं।

ट्विटर पर पायल मेहता ने घायलों का एक वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है कि भाजपा नेताओं पर यह हमला टीएमसी के गुंडों द्वारा किया गया।

वहीं, टीएमसी छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले शुवेंदू अधिकारी ने भी इस हमले का आरोप सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस पर लगाते हुए कहा है कि यह हमला बुधवार की मेगा पब्लिक रैली के बाद किया गया।

भाजपा आईटी सेल प्रमुख वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है कि ममता बनर्जी बंगाल के लिए एक आपदा हैं और वहाँ लॉ एंड ऑर्डर जैसी कोई चीज है ही नहीं।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता बाबू मास्टर पर भी हमला हुआ था। बाबू मास्टर की गाड़ी पर भी बम से हमला किया गया था। 10-12 उपद्रवियों ने उनकी गाड़ी घेरकर गोलीबारी की थी। उस समय भाजपा नेता बाबू मास्टर बशीरहाट से कोलकाता जा रहे थे। इस हमले में वह बुरी तरह घायल हो गए थे और उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

चीन में फर्जी कोरोना वैक्सीन का भंडाफोड़, गिरफ्तार कोंग ने नमक पानी का डोज बनाकर कमाए करोड़ों

दुनिया भर को जानलेवा कोरोना वायरस महामारी की ‘सौगात’ देने वाले चीन ने अब इसकी वैक्सीन को लेकर गड़बड़ घोटाला किया है। चीन में नकली कोविड वैक्सीन के धंधे का भंडा-फोड़ हुआ है। आरोप है कि कोंग नाम के शख्स ने सलाइन और मिनरल वाटर के मिश्रण को मिलाकर 58000 डोज बनाई और इसे एंटी-कोविड वैक्सीन बताकर टुकड़ों में अस्पताल सहित कई इलाकों में सप्लाई किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने फेक वैक्सीन मामले में कोंग नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। जो कि फर्जी कोविड वैक्सीन के धंधे का सरगना है। पूछताछ में पता चला कि कोरोना काल के दौरान आरोपित ने वैक्सीन की आड़ में करोड़ो की मोटी कमाई की है।

डेली मेल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे अवैध धंधे से कोंग के गैंग ने करीब 20 करोड़ 17 लाख रुपए कमा लिया था। नकली वैक्सीन घोटाले में अब तक अधिकारियों ने 70 लोगों को गिरफ्तार किया है। पिछले साल ही उजागर हुए इस फेक वैक्सीन मामले में कुल 21 केस दर्ज किए गए है। चीन की राजधानी बीजिंग समेत कई प्रांतों की पुलिस ने अलग-अलग जगहों पर छापा मारते हुए संदिग्ध आरोपितों को हिरासत में लिया है।

पुलिस को जाँच में पता चला कि पिछले साल से ये लोग नकली वैक्सीन बेचने में लगे हुए थे। बाजार में नमक के पानी से भरे इंजेक्शन बेचकर इन्होंने मोटा पैसा कमाया है। कोरोना वैक्सीन के नाम पर इस गिरोह ने भारी कीमत पर फर्जी टीका बेचा और खूब लाभ कमाया।

रिपोर्ट के अनुसार, महामारी के चलते लोगों के डर का फायदा उठाते हुए कोंग के गैंग ने अगस्त 2020 से फर्जी वैक्सीन के घोटाले की शुरुआत की थी। लोगों ने न केवल कोरोना के डर से फर्जी वैक्सीन पर आँख मूँद कर विश्वास किया बल्कि इसके लिए इस गैंग को मुँह माँगी कीमत भी दी।

33 वर्षीय कोंग और उसके दो साथियों ने पूरी प्लानिंग के साथ इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है। लोगों को शक न हो इसके लिए उन्होंने हूबहू असली वैक्सीन की पैकेजिंग की तरह ही अपने नकली डोज को तैयार किया। यह भी पता चला है कि एक बैच में इन लोगों ने 600 फर्जी वैक्सीन हॉन्ग कॉन्ग भी भेजी थी। इसके बाद अन्य देशों में इसे बेचने का सिलसिला शुरू हो गया।

चीन ने महीनों से चल रहे इस रैकेट के बारे में आधिकारिक तौर पर बुधवार (फरवरी 17, 2021) को खुलासा किया। बयान में बताया गया है कि फर्जी वैक्सीन को लेकर संदिग्ध लोगों की गिरफ्तारी 25 दिसंबर 2020 को ही हुई थी।

बजट सत्र पर तैनात होंगे STF कमांडों, PFI के अंसाद बदरुद्दीन और फिरोज खान की गिरफ्तारी के बाद हाई अलर्ट पर UP

लखनऊ की एक अदालत ने पीएफआई के सदस्यों अंसाद बदरुद्दीन और फिरोज खान को 7 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। यूपी स्पेशल टास्क फोर्स ने इन्हें मंगलवार (16 फरवरी, 2020) को लखनऊ से गिरफ्तार किया था। केरल के रहने वाले दोनों आरोपितों पर एटीएस ने देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने दो लोगों को विस्फोटक के साथ गिरफ्तार किया था। एसटीएफ का दावा है कि हिंदू संगठनों के नेता इन दोनों लोगों के निशाने पर थे।

दोनों की गिरफ्तारी के बाद से ही यूपी में अलर्ट जारी कर दिया गया है। वहीं लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस ने विधानसभा की सुरक्षा बढ़ाते हुए चाक-चौबंद कर दिया है। 18 फरवरी यानी गुरुवार से शुरू हो रहे बजट सत्र को लेकर पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। कोई अनहोनी न हो इसके लिए विधानसभा की सुरक्षा के लिए एटीएस (आतंकवाद निरोधी दस्‍ता) कमांडो तैनात किए जाएँगे।

राज्य पर मंडरा रहे आतंकी गतिविधियों को मद्देनजर रखते हुए संयुक्त पुलिस आयुक्त नवीन अरोड़ा ने सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम को लेकर लखनऊ के अधिकारियों के साथ पुलिस लाइन में बैठक की। अधिकारी ने खाका तैयार करते हुए विधान भवन में शुरू होने वाले बजट सत्र को लेकर पुलिस कर्मियों को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया है। साथ ही एटीएस कमांडो भी विधानभवन की सुरक्षा में तैनात रहँगे।

PFI के सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने जानकारी दी कि इन दोनों के पास से भारी मात्रा में विस्फोटक और दस्तावेज बरामद हुए हैं। गिरफ्तार पीएफआई सदस्य वसंत पंचमी पर हिंदूवादी संगठनों के बड़े नेताओं को निशाना बनाना चाहते थे। इसके लिए पीएफआई से कई लोगों को जोड़ रहे थे।

यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने बताया है कि इन दोनों लोगों के पास से 16 विस्फोटक, एक पिस्टल, 7 ज़िंदा कारतूस, 4800 रुपए नगद, 4 एटीएम समेत कई चीजें मिली हैं। पुलिस के इन दोनों लोगों के पास से ट्रेन के 12 टिकट और 2 पेन ड्राइव भी बरामद किए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग 1 साल में इस संगठन के 123 लोगों को हमने गिरफ़्तार किया है।

पुलिस का मानना है कि ये लोग किसी आंतकी मंसूबे को अंजाम देने यहाँ आए हुए थे। हो सकता है इनके साथी इन्हें विस्फोटक देने वाले थे या फिर ये विस्फोटक प्राप्त कर चुके थे। पुलिस इन लोगों से गंभीरता से पूछताछ कर रही है।

बता दें कि पीएफआई का नाम यूपी के हाथरस की जातीय हिंसा में भी सामने आया था। वहीं, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले साल हुई हिंसा के तार भी पीएफआई से जुड़े थे

मछुआरन ने तमिल में की राहुल गाँधी से शिकायत, कॉन्ग्रेसी CM नारायणसामी बोले- मेरी तारीफ कर रही है

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी को आज बुधवार (फरवरी 17, 2021) के दिन किसी और ने नहीं बल्कि पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने बेवकूफ बना दिया। दरअसल मछुआरा समुदाय के बीच बैठक के दौरान एक महिला द्वारा की गई शिकायत का उन्होंने गलत अनुवाद कर दिया।

कॉन्ग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी बुधवार को दो दिवसीय दौर पर पुडुचेरी पहुँचे। इस दौरान, पहले से ही अपनी सरकार बचाने का संकट झेल रहे कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री वी नारायणसामी एक विवाद में उलझ गए। उन पर आरोप लग रहे हैं कि जब एक बुजुर्ग मछुआरन ने जब राहुल से उनकी शिकायत की तो नारायणसामी ने उसकी शिकायत का झूठा अनुवाद कर राहुल को बरगला दिया। उन्होंने महिला की शिकायतों का सही अनुवाद करने की जगह कथित तौर पर यह कह दिया कि वह तो उनकी और उनकी सरकार की तारीफ कर रही है। महिला का यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है।

तमिल में बात करते हुए, दर्शकों में से एक महिला ने कहा कि पुडुचेरी में जब चक्रवात आया था तो सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस सरकार ने लोगों की मदद नहीं की। चूँकि राहुल गाँधी तमिल समझने में सक्षम नहीं तो मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने इस मौके का फायदा उठाते हुए महिला की शिकायत को अपनी तारीफ में बदल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला चक्रवात के समय उनके वहाँ भ्रमण करने और राहत सामग्री प्रदान करने की सराहना कर रही है।

हालाँकि, नारायणसामी राहुल गाँधी की आँखों में धूल झोंकने में सफल रहे, लेकिन यह सोशल मीडिया यूजर्स की नजरों से नहीं बच सका। तमिल जानने वाले सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके झूठ को पकड़ लिया। करोड़ों सोशल मीडिया यूजर्स ने जोर देकर कहा कि पुडुचेरी के मुख्यमंत्री ने खुद को एक विवेकशील नेता के रूप में चित्रित करने के लिए महिला के बयान को गलत तरीके से इस तरह पेश किया जैसे उन्होंने उनके कल्याण के लिए अथक प्रयास किए हों।

महिला जाहिर तौर पर पिछले साल नवंबर माह में चक्रवाती तूफान निवार (Cyclone Nivar) के आने पर सत्तारुढ़ कॉन्ग्रेस द्वारा किसी भी तरह की सहायता न करने को लेकर शिकायत कर रही थी। महिला ने कहा कि मुख्यमंत्री उनसे मिलने नहीं आए। हालाँकि, मुख्यमंत्री ने उनकी शिकायत को यह कहते हुए अपने पक्ष में तब्दील कर लिया कि वह केंद्र शासित प्रदेश में चक्रवात आने के समय उनके द्वारा किए गए कामों की तारीफ कर रही है।

पुडुचेरी को चक्रवात निवार ने गंभीर रूप से प्रभावित किया था। पुडुचेरी में नवंबर, 2020 में हुई कुल हानि 400 करोड़ रुपए आँकी गई थी। चक्रवात की वजह से राज्य में भारी बारिश हुई। तमिलनाडु में कम से कम तीन लोग मारे गए, 1,000 से अधिक पेड़ उखड़ गए और कुछ निचले इलाकों में भारी बारिश के बाद जल-जमाव हो गया।

राजनीतिक संकट के बीच पुडुचेरी में राहुल गाँधी

पुडुचेरी में राजनीतिक संकट के बीच और चुनाव के दौरान, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी के चुनाव अभियान को शुरू करने के लिए थे। अपने अभियान के एक हिस्से के रूप में, गाँधी ने एक बैठक में भाग लिया जहाँ उन्होंने मछुआरा समुदाय के साथ बातचीत की और बाद में छात्रों के साथ चर्चा की।

पुडुचेरी में हाल के दिनों में कॉन्ग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई है। ऐसा लग रहा है कि केंद्र शासित प्रदेश का राजनीतिक ड्रामा अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों तक यूँ ही चलता रहेगा। केंद्र सरकार ने उप-राज्यपाल किरण बेदी को अपने पद से हटा दिया है। उनकी जगह तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सुंदरराजन को पुडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

पुडुचेरी में कॉन्ग्रेस की सरकार अल्पमत में आ गई है क्योंकि पार्टी के एक विधायक ने इस्तीफा दे दिया है। मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी (Velu Narayanasamy) सरकार ने एक विधायक के जाने से बहुमत खो दिया है। विधायक ए जॉन कुमार ने मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को विधानसभा से अपना इस्तीफा स्पीकर वीपी शिवाकोलुन्थु को सौंप दिया है। कॉन्ग्रेस यहाँ DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के साथ गठबंधन बना कर सत्ता में है।

100 दिनों तक दिल्ली बंधक, हिन्दू धर्म का अपमान, संविधान को गाली: वो शाहीन बाग़, जहाँ पनपा दिल्ली दंगों का बीज

अब जब दिल्ली में चल रहे तथाकथित किसान आंदोलन के 3 महीने पूरे होने को हैं, हमें लगभग 1.5 वर्ष पहले शुरू हुए एक और ‘आंदोलन’ को याद करना चाहिए, जो अंत होते-होते दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में बदल गया था। ठीक उसी तरह, जैसे ‘किसान आंदोलन’ ने गणतंत्र दिवस के दिन 500 पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया। अंतर इतना था कि शाहीन बाग़ के बाद हुए दंगों ने 50 से भी अधिक लोगों की जान ले ली।

आम लोगों को परेशान करने वाला आंदोलन, जिस पर मीडिया को था नाज

आइए, एक बार फिर से याद करते हैं कि कैसे एक ऐसे आंदोलन को संविधान बचाने की लड़ाई के रूप में दिखाया गया, जहाँ संविधान को ही गालियाँ दी गईं और महात्मा गाँधी को अपशब्द कहे गए। गाँधी और आंबेडकर की तस्वीरों के साथ राष्ट्रीय ध्वज लगा कर बैठे जिन प्रदर्शनकारियों के महिमामंडन में मीडिया जुटा था, वहाँ असल में भारत में अस्थिरता फैलाने की नींव डाली जा रही थी और देश को खंडित करने की बातें हो रही थीं।

सबसे पहले याद करते हैं कि कैसे शाहीन बाग़ आंदोलन की वजह से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। 100 दिनों से भी अधिक समय तक चले इस उपद्रव के दौरान उस सड़क को इतने ही दिनों तक रोक कर रखा गया, जहाँ से प्रतिदिन 1 लाख से भी ज्यादा गाड़ियाँ गुजरती थीं। बच्चों को स्कूल के लिए देर होती थी, मरीज सही समय पर अस्पताल न पहुँचने के कारण मरते थे और कामकाजी लोगों को दूसरे रास्तों से दफ्तर जाना पड़ता था।

ये विरोध प्रदर्शन एक खास मजहब का था, लेकिन वामपंथी मीडिया ने दिखाया कि यहाँ कश्मीरी पंडितों के साथ एकता दर्शाई जा रही है। जिन कश्मीरी पंडितों को इस्लामी कट्टरपंथ ने घाटी से भगा दिया, वही इस्लामी कट्टरपंथ उनका साथ देने की बातें करके मीडिया में महान बन रहा था और वामपंथी उसे बना भी रहे थे। वहाँ एक खास मजहब ने महिलाओं को ढाल बना कर भाजपा के खिलाफ एक राजनीतिक और मजहबी लड़ाई लड़ी।

फ़रवरी 2020 आते-आते छात्रों की बोर्ड परीक्षाएँ भी शुरू हो गई थीं। कई बार सुप्रीम कोर्ट में सड़क खाली कराने की याचिका डाली गई, लेकिन शुरू में इसे पुलिस का मामला बता कर ख़ारिज कर दिया गया। कोरोना वायरस के संक्रमण और लॉकडाउन के दौरान महामारी एक्ट का खुलेआम उल्लंघन हुआ। अंत में दिल्ली पुलिस ने उन्हें वहाँ से हटाया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद उनका उद्देश्य भी सफल हो ही गया था।

क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने

इन प्रदर्शनकारियों ने ऐसा नंगा नाच मचाया था कि सुप्रीम कोर्ट तक को कहना पड़ा कि ‘विरोध प्रदर्शन के अधिकार’ का मतलब ये बिलकुल भी नहीं है कि आप कहीं भी और कभी भी अनिश्चितकाल के लिए बैठ जाएँ। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शाहीन बाग़ आंदोलन के दौरान जिस तरह से सड़क को अवरुद्ध किया गया, वो स्वीकार्य नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि आप अपने अधिकार के लिए सार्वजनिक जगहों पर कब्ज़ा कर के दूसरों के अधिकारों के आड़े नहीं आ सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया था कि प्रदर्शन के अधिकार का उपयोग कुछ निश्चित कर्तव्यों को ध्यान में रख कर ही किया जाना चाहिए। प्रदर्शन दूसरों के मार्ग में बाधा नहीं बनना चाहिए। दलील दी गई थी कि ब्रिटिश राज में ऐसे ही प्रदर्शन होते थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक लोकतंत्र में होने वाले प्रदर्शनों की तुलना उससे नहीं होनी चाहिए। इसके खिलाफ समीक्षा याचिका भी दायर हुई, जिस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस फैसले को सही माना।

वामपंथियों की सबसे बड़ी बात ये है कि वो सुप्रीम कोर्ट तक को नहीं बख्शते। राम मंदिर पर फैसले के दौरान भी देश के सर्वोच्च न्यायालय को जम कर खरी-खोटी सुनाई गई है। सबसे पहले CJI रहे दीपक मिश्रा के खिलाफ तीन जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस करवाई गई, उसके बाद उनके खिलाफ महाभियोग लाने की कोशिश की गई। उन्हीं तीन जजों में से एक रंजन गोगोई CJI बने, लेकिन राम मंदिर फैसले के बाद उन्हें भी ‘Spineless’ घोषित कर दिया गया।

अब यही गिरोह विशेष CJI एसए बोबडे पर निशाना साधते हुए कभी उन पर भाजपा नेता की बाइक की सवारी करने का आरोप लगाता है तो कभी सोशल मीडिया और उनके खिलाफ ट्रेंड चलाए जाते हैं। यही दबाव की राजनीति है। जिस संस्था को संविधान निर्माताओं ने संविधान की व्याख्या का अधिकार दिया है, उसके फैसले को भी प्रभावित करने की कोशिश होती है। फिर भी वामपंथी ‘संविधान प्रेमी’ होने का टैग नहीं खोते।

शाहीन बाग़ प्रदर्शनों के दौरान भी प्रशांत भूषण और इंदिरा जयसिंह जैसे न जाने कितने ही बड़े अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट में तैयार रहते थे, वामपंथियों को बचाने के लिए। उसी दौरान जामिया में भी हिंसा हुई, जहाँ उपद्रवी छात्रों की तरफ से बड़े-बड़े वकील सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट ने तो कमिटी तक बना दी प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। कोरोना आने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें वहाँ से हटाया।

इस्लामी कट्टरपंथी से ज्यादा हिन्दू विरोधी आंदोलन था शाहीन बाग़

इसमें कोई शक नहीं है कि शाहीन बाग़ का आंदोलन इस्लामी कट्टरपंथी उपद्रव था, लेकिन इससे भी ज्यादा ये हिन्दू विरोधी अभियान था। एक ऐसा मंच, जहाँ से हिन्दू धर्म और हिन्दुओं के खिलाफ जो कुछ किया जा सकता था, किया गया। ऐसे पोस्टर्स शेयर किए गए, जिनमें पवित्र हिन्दू प्रतीक चिह्न स्वस्तिक को टूटते हुए दिखाया गया था। बुर्का पहनी महिलाओं को बिंदी लगाए हुए दिखाया गया। फैज की कविताओं के जरिए हिन्दू विरोधी नैरेटिव बनाए गए।

दिल्ली के शाहीन बाग़ की जब बात होती है तो पूरे देश में कई शाहीन बाग़ बनाने की कोशिश हुई, ये हमें नहीं भूलना चाहिए। भोपाल में मस्जिदों से ऐसे पैम्प्लेट्स बाँटे गए, जिनमें सिंधियों की दुकानों का बहिष्कार करने को कहा गया। क्यों? क्योंकि उन्होंने CAA का समर्थन किया था। ‘जिस दिन हम हिन्दुओं से ज्यादा हो गए, उन्हें पटक-पटक कर मारेंगे’ – एक बुर्कानशीं महिला का वीडियो सभी लोगों ने देखा।

तमिलनाडु में दुकानदारों को CAA के समर्थन में बनाई गई वस्तुओं को बेचने पर धमकाया गया। इसी शाहीन बाग़ में अफजल गुरु को हुई फाँसी की सज़ा को गलत ठहराया गया। एक तो किसी आतंकी को संसद हमले के 12 वर्षों बाद सज़ा मिली, इसके लिए पूरी वैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई – फिर भी उसका समर्थन हुआ। शाहीन बाग़ में खुलेआम कहा गया कि ये मुस्लिमों का आंदोलन है और सेक्युलर नहीं है।

बाहर मीडिया तो था ही इसे सेक्युलर साबित करने के लिए। शरजील इमाम की चर्चा के बिना शाहीन बाग की बात अधूरी है, जो इसके आयोजकों में से एक था। उसने महात्मा गाँधी को फासिस्ट बताया, जिन्ना की तारीफ की, असम को भारत से खंडित कर अलग करने की बातें की और पूरे उत्तर-पूर्व को शेष भारत से अलग करने के लिए उकसाया। उसने ‘असम में कत्लेआम’ की झूठी अफवाह भी फैलाई।

हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि शाहीन बाग़ का उपद्रव हिन्दू 100 दिनों तक सहते रहे लेकिन देश में जहाँ-जहाँ भी CAA के समर्थन में रैलियाँ हुईं, उनमें से कई जगहों पर मुस्लिम भीड़ द्वारा उस पर हमला किया गया। केरल में दलितों को पानी नहीं पीने दिया गया, क्योंकि उन्होंने CAA का समर्थन किया था। ‘सेवा भारती’ ने उनकी मदद की। ‘तेरा मेरा रिश्ता क्या’ और ‘हिन्दुओं की कब्र खुदेगी’ वाले नारे हमें नहीं भूलने हैं।

मीडिया, फिल्म और राजनीतिक जगत की हस्तियों का खुला समर्थन

वामपंथियों की एक बेशर्मी भरी खासियत ये है कि उनके आंदोलन पूर्णतः राजनीतिक होकर भी ‘निष्पक्ष’ बन जाते हैं। राकेश टिकैत के मंच से RLD के जयंत चौधरी का भाषण होगा, लेकिन आंदोलन ‘निष्पक्ष’ रहेगा। कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद का वीडियो भी इसी तरह सामने आया था, जिसमें वो एक बुर्कानशीं महिला के छोटे बच्चे को CAA और मोदी विरोधी नारे सीखा रहे थे। लेकिन नहीं, आंदोलन तो गैर-राजनीतिक था न?

कॉन्ग्रेस के मणिशंकर अय्यर शाहीन बाग़ जाते हैं, लेकिन इसे गैर-राजनीतिक बताया जाता है। AAP नेता अमानतुल्लाह खान वहाँ सारी व्यवस्थाएँ संभाले रहता है, लेकिन इसे सेक्युलर आंदोलन बताया जाता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इसका समर्थन करते हैं, लेकिन इसे राजनीति से अलग बताया जाता है। एक पूर्णतः राजनीतिक उपद्रव, जो भाजपा के खिलाफ था, जिसमें विपक्षी दलों के कई नेताओं की भूमिका थी – उसे जनसामान्य का आंदोलन बताने की कोशिश हुई।

नसीरुद्दीन शाह ने देश भर में घूम-घूम कर कई स्थानों पर CAA विरोधी आंदोलनों को सम्बोधित किया। फरहान अख्तर बिना कुछ जाने-समझे प्रदर्शन स्थल पर जाकर बैठ गए। अभिनेता सुशांत सिंह शाहीन बाग़ गए। ज़ीशान अयूब और स्वरा भास्कर जैसे फ़िल्म जगत के लोगों का तो तब से काम-धाम ही यही बन गया। पूरे देश में हर राज्य में जगह-जगह शाहीन बाग़ बनाने की कोशिश हुई। उपद्रव की साजिश देश भर में थी।

मीडिया के कई पोर्टल्स का काम ही यही रह गया था कि वो शाहीन बाग़ से ‘पॉजिटिव स्टोरीज’ निकालें और दिखाएँ कि कैसे ये अरब स्प्रिंग से भी बड़ा आंदोलन है। जब जामिया में लदीदा फरदाना जैसी ‘छात्राओं’ को आगे करके उनके गिरने, दौड़ने और भागने के एक-एक मोमेंट्स HD कैमरे में कैद किए गए और बरखा दत्त जैसों से उन्हें ‘Shero’ बताया, तब भी सामने आया था कि कैसे मीडिया इसे एक बड़ा आंदोलन बनाने की तैयारी में है।

छात्रों की अराजकता के जरिए आंदोलन को दी गई थी धार

शाहीन बाग़ जिस तरह से देश के कई शहरों में हो रहा था, ठीक उसी तरह AMU और जामिया जैसे कई कॉलेज थे, जहाँ छात्रों ने मजहबी कट्टरता का अखाड़ा बना कर रख दिया था। दिसंबर 2019 में ही जामिया के बाहर जम कर हिंसा हुई और छात्र यूनिवर्सिटी में जाकर लाइब्रेरी में छिप गए। जब पुलिस कार्रवाई हुई तो वीडियो शेयर कर-करके दिल्ली पुलिस को बदनाम किया जाने लगा। CCTV फुटेज शेयर करने के मामले में पुलिस के साथ सहयोग नहीं किया गया।

बाद में ऐसे कई वीडियो आए जिससे उन तथाकथित छात्रों की पोल खुली। ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्था तक से बयान जारी करवाए गए। पुलिस के साथ झड़प हुई। बसें जलाई गईं। बाद में सारा फोकस ‘पुलिस की क्रूरता’ की बेहूदी बातों पर रखा गया। शाहीन बाग़ में किसी ने खिलौने वाले बंदूक से फायरिंग कर दी तो उसे ज्यादा तवज्जोह दी गई और इसके जरिए ‘हिन्दू आतंकवाद’ का शिगूफा फिर से छोड़ा गया।

इसी तरह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पुलिस द्वारा माइक से बार-बार सहयोग के लिए कहे जाने के बावजूद हिंसा हुई। NHRC ने भी अपनी जाँच में माना कि छात्रों की तरफ से हिंसा शुरू की गई थी और पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मजबूरी में बल-प्रयोग किया। संस्था ने मना कि क्षेत्र को सांप्रदायिक दंगे से बचाने के लिए ये ज़रूरी था। ‘छात्रों’ के मास्क में मजहबी कट्टरवादियों ने अपना एजेंडा चलाया।

ठीक इसी तरह 80 वर्ष से ऊपर की उम्र की मुस्लिम दादियों को, जिन्हें CAA के बारे में कुछ पता ही नहीं था, टीवी चैनलों पर बहस में स्थान दिया गया और इसके सहारे अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगंडा के लिए तस्वीरें जुटाई गईं। बिल्किस दादी को ‘Times’ ने सबसे प्रभावशाली महिलाओं की सूची में स्थान दिया। इसी तरह विदेशों में इस उपद्रव को ‘छात्रों और महिलाओं का आंदोलन’ कह कर प्रचारित किया गया, ताकि कोई आलोचना न कर सके।

शाहीन बाग़ आंदोलन ही था दिल्ली दंगों का कारण

अंत में, इन चीजों को देख कर कहा जा सकता है कि शाहीन बाग़ ही दिल्ली दंगों का कारण था। दिल्ली के अन्य स्थानों पर ही इसी तरह से मार्गों पर कब्ज़ा की कोशिश की गई और जब हिन्दुओं ने, आमजनों ने इसका विरोध किया तो उन्होंने दंगा शुरू कर दिया। शाहीन बाग़ में जो लोग शामिल थे, दिल्ली दंगा के आरोपित भी वही लोग थे। ताहिर हुसैन, इशरत जहाँ, उमर खालिद, खालिद सैफी और अमानतुल्लाह खान जैसे लोगों के इसमें नाम सामने आए।

अर्थात, 100 दिनों तक हिन्दू धर्म और उसके प्रतीक चिह्नों का अपमान हुआ तो ठीक, जब हिन्दुओं ने इसका विरोध किया तो ये भड़क गए। उन्होंने 100 दिनों तक सड़क कब्ज़ा कर रखी तो ठीक, एक कपिल मिश्रा ने सड़क खाली करने को कह दिया तो उन्होंने दंगे कर दिए। उन्होंने खुद के विरोध के अधिकारों का रट्टा लगा कर हिंसा की तो ठीक, हिन्दुओं ने आत्मरक्षा में प्रतिकार किया तो गलत। यही कारण है कि कई दिनों तक चला ये प्रोपेगंडा का खेल दंगे में बदल गया।

गिरिराज सिंह ने इतालवी में लिख ‘समुद्री किसानों’ के चिंतक राहुल गाँधी के लिए मजे, कहा- देश की बदनामी करवाते हैं

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) द्वारा ‘समुद्र के किसानों’ के लिए अलग से मंत्रालय वाले बयान पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने चुटकी लेते हुए इतालवी भाषा में ट्वीट किया है। राहुल गाँधी ने एक रैली में कहा था कि मछुआरों के लिए मंत्रालय क्यों नहीं है। इस पर गिरिराज सिंह ने कई ट्वीट किए, जिनमें से एक ट्वीट इटालियन में था और यह ट्विटर पर जमकर वायरल भी हो रहा है।

इस ट्वीट में गिरिराज सिंह ने लिखा कि इटली में मत्स्य विभाग के लिए कोई अलग मंत्रालय नहीं है, वहाँ पर यह विभाग कृषि और वन मंत्रालय के अधीन आता है। गिरिराज सिंह ने ट्वीट के साथ इटली के कृषि एवं वन मंत्रालय की वेबसाइट का लिंक भी शेयर कर दिया।

एक और ट्वीट कर उन्होंने कहा, “राहुल जी! आपको इतना तो पता ही होना चाहिए कि 31 मई, 2019 को ही मोदी जी ने नया मंत्रालय बना दिया और 20,050 करोड़ रुपए की महायोजना (PMMSY) शुरू की, जो आज़ादी से लेकर 2014 के केंद्र सरकार के खर्च (3682 करोड़) से कई गुना ज़्यादा है।”

अपने दूसरे ट्वीट में गिरिराज सिंह ने कहा, “राहुल जी! मेरा आपसे अनुरोध है कि आप नए मत्स्यपालन मंत्रालय में आएँ या मुझे जहाँ बुलाएँ, मैं आ जाता हूँ। मैं आपको नए फ़िशरीज मंत्रालय के द्वारा पूरे देश तथा पुडुचेरी में चलाई जा रही योजनाओं के बारे में बताता हूँ।”

इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने बयान देते हुए कहा, “PM ने 2019 में फिशरीज, पशुपालन, डेयरी के लिए अलग मंत्रालय बनाया। मैं मंत्री के रूप में काम कर रहा हूँ। पुडुचेरी में काम चल रहा है। राहुल गाँधी को नहीं पता इसका अलग विभाग है। मैं उन्हें बता दूँगा।”

उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल गाँधी इटली से बाहर निकल नहीं पाते। उनके दिमाग में सिर्फ इटली रहता है। वे किसानों को भ्रम में डालने का काम कर रहे हैं। उन्हें गेहूँ और जौ में फर्क नहीं पता, उन्हें बाछी और बाछा में फर्क नहीं पता। उनके कारण देश की बदनामी पूरी दुनिया में हो रही है।”

बता दें कि पुडुचेरी में अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले 4 दिनों की यात्रा के लिए वहाँ पहुँचे राहुल गाँधी ने तीनों कृषि कानूनों को मछुआरों और मत्स्य पालकों से जोड़ दिया और कहा कि उनके लिए कोई मंत्रालय नहीं। लेकिन, इस दौरान जानकारी के अभाव में उन्होंने अपनी ही किरकिरी कराने वाली बात कह दी।

राहुल गाँधी ने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने उन किसानों के खिलाफ तीन कृषि कानून पारित कर दिए, जो इस देश की रीढ़ हैं। उन्होंने आगे कहा, “आप लोग सोच रहे होंगे कि मछुआरों की बैठक में मैं किसानों की बात क्यों कर रहा हूँ। असल में मैं आप लोगों को समुद्र का किसान मानता हूँ। अगर किसानों के लिए दिल्ली में अलग से मंत्रालय हो सकता है तो फिर समुद्र के किसानों के लिए क्यों नहीं?”

सच्चाई ये है कि मत्स्य पालन और बाजार के लिए पहले से ही विभाग है और ये ‘पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन’ मंत्रालय के अंतर्गत आता है। वर्तमान में बिहार के बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह इसके मंत्री हैं। सरकार मत्स्य पालन से जुड़े किसानों के लिए ‘प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ भी लेकर आई है। यही विभाग अंतर्देशीय तथा समुद्री मत्स्यन व मात्स्यिकी से जुड़े मामलों को भी देखता है। इस हिसाब से समुद्री मछुआरों के हित भी इसी में आते हैं।

दि प्रिंट की बेशर्मी ने बनाया रिंकू शर्मा को गुनहगार, मन्नू ने बताया मीडिया में चल रहे झूठे नैरेटिव का सच: देखें वीडियो

दिल्ली के मंगोलपुरी में पिछले दिनों हुई रिंकू शर्मा की निर्मम हत्या ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। हर किसी के जहन में ये सवाल रह गए कि क्या हिंदुस्तान में हिंदू होने का हासिल आज भी इतना बर्बर है? रिंकू की आखिरी समय की तस्वीरें, उनके साथ हुई वीभत्सता, परिजनों के आँसू, हिंदुओं के सवाल हर किसी को रह-रहकर परेशान कर रहे हैं।

ऐसे में एक तथाकथित सेकुलर गुट है जो पूरी तरह से इस मुद्दे पर चुप्पी बनाए हुए हैं और दूसरी ओर वो मीडिया गिरोह है जो इतना सब होने के बावजूद इस घटना की निंदा करना तो दूर अब भी अपना प्रोपगेंडा फैलाने से बाज नहीं आ रहा है।

रिंकू शर्मा

दि प्रिंट की खबर में रिंकू शर्मा को दिखाया गया दोषी

दि प्रिंट की बेशर्मी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक तरफ जब पूरा देश रिंकू के हत्यारों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए एकजुट होकर सामने आया, तब इस मीडिया पोर्टल ने माहौल को बैलेंस करने के लिए अपनी रिपोर्ट में तथ्य लिखने के नाम पर पाठकों को आरोपित परिवार का पक्ष पढ़ाकर एक नई थ्योरी दे दी।

इसमें बताया गया कि रिंकू की हत्या जिस चाकू से हुई वो चाकू वो खुद लेकर आया था और उसी ने लड़ाई शुरू की थी। इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में आरोपित नसरुद्दीन के परिजनों का हवाला देकर कहा गया कि रिंकू ने उस दिन शराब भी पी रखी थी और विवाद तब शुरू हुआ जब वह जाहिद को जबरदस्ती शराब पिलाने लगा।

इसमें यह भी कहा गया कि रिंकू ने और उसके दोस्तों ने जाहिद को पार्टी में बुलाया था और शराब पीकर उससे मारपीट भी की थी। ऐसे में जब उन लोगों को ये पता चला कि उनके भतीजे के साथ ये हो रहा है तो वो बातचीत करने गए। वहाँ विवाद हुआ और रिंकू ने सिलेंडर मारने के लिए उठा लिया। इस रिपोर्ट की मानें तो पहले रिंकू की ओर से ही चाकू लाकर दूसरे पक्ष पर मारा गया था।

अब इस खबर को लिखने का तरीका देखिए, इसकी हेडलाइन पढ़िए और सोचिए एक 26 साल के हिंदू लड़के की असमय हुई निर्मम हत्या पर मीडिया संस्थान की संवेदनाएँ कहाँ है?

एक ओर एक नौजवान इतनी बेरहमी से मार दिया जाता है। उसके माँ-बाप के आँसू देख कर दूर प्रदेश में बैठे लोग सिहर जाते हैं। हिंदू संगठनों में वाजिब बात पर रोष उमड़ता है। छोटा भाई सिसकी भरते-भरते शांत नहीं हो पाता… फिर भी दि प्रिंट अपनी खबर में ये बता पाता है कि गलती आरोपितों की नहीं थी बल्कि रिंकू शर्मा की थी।

इस रिपोर्ट का उद्देश्य कहीं से भी पाठकों को निष्पक्ष रिपोर्ट दिखाना नहीं है। क्योंकि यदि ऐसा होता तो शीर्षक में जानबूझकर इस बात को शामिल नहीं किया जाता कि रिंकू शर्मा ही पूरी विवाद की जड़ था और उसी ने लड़ाई शुरू की थी।

दि प्रिंट की इस रिपोर्ट में उठाए गए ओछे एंगल का हमारे सेकुलर समाज में क्या मायने होंगे इस पर बात करने का कोई फायदा नहीं है। जाहिर है कि इसे उसने अपने उन्हीं पाठकों के लिए लिखा जो खोज रहे थे कि पूरे मामले में कहीं से रिंकू की गलती निकल आए तो वो भी मुद्दे पर वोकल होकर शांति बनाए रखने की अपील कर सकें और बताएँ कि गलती दोनों पक्षों की थी।

हनुमान चालीसा का पाठ

लेकिन अफसोस! यह प्रोपगेंडा ज्यादा काम नहीं कर सकता। आरोपितों के ख़िलाफ़ सबूत किसी काल कोठरी में रखें संदूक में बंद नहीं है, वो खुलेआम सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर तैर रहे हैं। हर किसी के सामने वो सीसीटीवी फुटेज भी है जिसमें 15-20 लड़के बकायदा हाथ में हथियार लेकर रिंकू के घर की ओर बढ़ रहे थे और वो वीडियो भी है जिसमें महिला से गाली गलौच और पुरूषों से मारपीट हो रही थी।

ये वीडियो यकीनन इतना तो स्पष्ट कर ही रही है कि यदि किसी को मारने की साजिश पहले से नहीं थी, मन में बदले की भावना नहीं थी, तो अचानक इतनी भीड़ कहाँ से इकट्ठा हो गई और कैसे उन सबके पास हथियार आ गए।

आज जो पीड़ा रिंकू शर्मा का परिवार झेल रहा है, उसे देख ऐसी निर्मम हत्या मामले में कोई भी एंगल रखकर आरोपितों के कृत्य को जस्टिफाई करना किसी प्रकार से प्रेस की नैतिकता का हिस्सा नहीं हो सकता। लेकिन मीडिया फिर भी झूठ फैला कर माहौल बैलेंस करने में लगा है।

रिंकू के जाने के बाद भी जारी है हनुमान चालीसा का पाठ

आज रिंकू की हत्या को लगभग एक हफ्ता हो गया है। लेकिन इलाके के लोगों की स्मृतियों से रिंकू का चेहरा थोड़ा बहुत भी धुँधला नहीं हुआ। सब रिंकू को याद कर रहे हैं और उन्हीं की हर जगह चर्चा है। कुछ लोग बताते हैं कि रिंकू ने अस्पताल जाते-जाते भी जय श्रीराम के नारे लगाए थे और अस्पातल पहुँचकर भी उनका जोश राम नाम लेने के लिए उतना ही बरकरार था। हालाँकि, वहाँ (अस्पताल) खड़े मुस्लिम परिवार के हत्यारोपितों में से दो ज़ाहिद और ताजुद्दीन ने रिंकू के दोस्तों पर हमला किया था और ज़ाहिद ने सबूत मिटाने के लिए पहले पीठ में धँसी चाकू निकालकर भागने की कोशिश की, जब फँसा हुआ चाकू नहीं निकला तो अंदर ही और घुमा दिया था।

दूसरी ओर जिन्हें आपत्ति थी कि राम मंदिर शिलान्यास के बाद से रिंकू शर्मा के कारण इलाके में हर मंगलवार को हनुमान चालीसा होने लगी, उन लोगों को जवाब देते हुए इलाके में उस परंपरा को रिंकू के जाने के एक हफ्ते बाद भी विधि विधान से निभाया गया।

ऑपइंडिया की मन्नू शर्मा से बात और मीडिया के झूठों का खुलासा

कल ऑपइंडिया के सीनियर एडिटर जब रिंकू शर्मा की मौत पर मीडिया में फैलाए जा रही बातों की सच्चाई जानने पहुँचे तो वहाँ हनुमान चालीसा का कार्यक्रम चालू था। हमारे सीनियर एडिटर उस जगह गए तो मन्नू शर्मा से बात करने थे। लेकिन उन्होंने वहाँ पाया कि कल से पहले तक जो आयोजन हनुमान भक्ति में आयोजित किया जाता था, कल उसी आयोजन का मकसद कहीं न कहीं रिंकू को याद करना भी था। वह उस कार्यक्रम में शामिल हुए और बाद में मन्नू शर्मा से मीडिया में फैले झूठों पर बात की।

मीडिया झूठ की पोल खोलते रिंकू शर्मा के भाई मन्नू शर्मा

जब उन्होंने मन्नू से पूछा कि आखिर जो बातें बर्थडे पार्टी और शराब आदि को लेकर मीडिया में कही जा रही हैं, उसकी सच्चाई क्या है? इस सवाल को सुन मन्नू ने कहा कि ये सब पूरी तरह फर्जी बातें हैं। रिंकू शर्मा ने न तो शराब पी थी, न पिलाई थी और न ही उनका जाहिद (आरोपितों में से एक) से झगड़ा था। जाहिद किसी और के साथ पार्टी में आया था और उसका झगड़ा भी किसी और से था। रिंकू शर्मा से कोई बात नहीं हुई थी। 

 मन्नू बताते हैं कि जो लोग ये कह रहे हैं कि उनके भैया की ओर से हमले हुए तो इस बात की सच्चाई ये है कि दूसरे पक्ष के सब लोग पहले लाठी डंडे लेकर घर में आए थे और उन्होंने ही गेट खोला था। इसके बाद उन सबने अपनी करनी की वीडियो नहीं बनाई और जब उनके भैया ने सिलेंडर बचाव में उठाया तो उसे कैमरे में कैद कर लिया।

बकौल मन्नू, वह लोग पूरे परिवार को तबाह करना चाहते थे लेकिन उनके भैया ने हिम्मत दिखाई और अकेले बलिदान हो गए। मन्नू के अनुसार, पुलिस पूरे मामले में उन्हें कॉपरेट कर रही है। वह चाहते हैं कि जितने बचे हुए आरोपित हैं सब पकड़े जाएँ। उनका या उनके संगठन का मकसद कहीं से भी तक प्रशासन के विरुद्ध कोई कार्य करने का नहीं है।

दैनिक भास्कर की खबर

गौरतलब है कि एक ओर रिंकू शर्मा और उनका परिवार रह रहकर जहाँ केवल इंसाफ माँग रहा है। वहीं द प्रिंट आरोपितों के कुकर्म पर नया एंगल देकर सफाई पेश कर रहा है और दैनिक भास्कर बता रहा है कि हिंदू संगठनों के लोग रिंकू के घर की चौखट पर माथा टेककर बदला लेने की बात कर रहे हैं जबकि मन्नू शर्मा का कहना है कि उनका ऐसा कोई उद्देश्य नहीं है।

यहाँ तक की डर कर मुस्लिमों के भाग जाने की बात भी सही नहीं है। रिंकू शर्मा की गली में उनके घर से महज 20 मीटर की दूरी पर स्थित हत्यारों के परिवार के अलावा और कोई नहीं भागा है। जो रिंकू शर्मा की हत्या में शामिल थे वही और उनका परिवार फरार है। जबकि गली के लगभग सभी लोगों का कहना है इन्हें फरार नहीं बल्कि जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए।

एक बात और इस मामले में जो सबसे शर्मनाक निकल कर सामने आ रही है, वो ये कि सीसीटीवी फुटेज के रूप से जितने भी सबूत मिले हैं वो प्राइवेट सीसीटीवी से लिए हुए बताए जा रहे हैं। रिंकू शर्मा के भाई ने भी इस बात को बताया है। उनके अनुसार जो कैमरे केजरीवाल सरकार द्वारा लगवाए गए थे, उनसे आरोपितों के विरुद्द कोई सबूत नहीं मिले है। घटना वाले दिन के बाद से उनके खराब होने की बात सामने आई है।

ठीक ऐसी ही बात दिल्ली दंगों के समय भी नजर आई थी जहाँ दंगा प्रभावित क्षेत्रों में ठीक उसी दिन से CCTV के ख़राब हो जाने का दावा किया गया था। फिलहाल, क्राइम ब्रांच इस पूरे मामले पर सघनता से जाँच कर रही है। पाँच- नसीरुद्दीन, मेहताब, ज़ाहिद, इस्लामुद्दीन, ताजुद्दीन जैसे आरोपित गिरफ्तार हैं। बाकी की भी जल्द से जल्द गिरफ़्तारी की माँग की जा रही है।

किसानों ने की ‘रेल रोको’ की घोषणा: 4 राज्यों में अतिरिक्त फोर्स तैनात, राकेश टिकैत बोले- यह रेल खोलो आंदोलन है

किसानों ने अब 18 फरवरी को देश भर में दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ‘रेल रोको कार्यक्रम’ आयोजित करने की घोषणा की है। इस दौरान चार घंटे तक रेल यातायात के प्रभावित होने की आशंका है। किसानों की इस घोषणा के बाद आरपीएफ (Railway Protection Force) और जीआरपी (Government Railway Police) पूरी तरह अलर्ट पर हो गई हैं। इसके लिए अंबाला कैंट से भी जीआरपी कर्मियों को बुलाया गया है। बहादुरगढ़ में जीआरपी की ओर से हर रेलवे स्टेशन पर पुलिसकर्मी तैनात किए जाएँगे।

रेल रोको अभियान के चलते फतेहाबाद में भी पुलिस के द्वारा चार डीएसपी, 10 एसएचओ और 500 के करीब पुलिस कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात किए गए हैं। किसी भी उपद्रवी से निपटने के लिए पुलिस द्वारा पूरी तैयारी की गई है। 

जानकारी के मुताबिक देशभर में रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स की 20 अतिरिक्त कंपनियाँ यानी करीब 20 हजार जवान तैनात किए गए हैं। मुख्य फोकस पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल पर रखा गया है। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के डायरेक्टर जनरल अरुण कुमार ने पीटीआई से बातचीत में कहा, “हम चाहते हैं कि किसान यात्रियों के लिए असुविधा पैदा न करें। हम चाहते हैं कि वे 4 घंटे शांति से बीत जाए।”

इस बीच दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता राकेश टिकैत कल के आंदोलन को ‘रेल रोको’ की बजाय ‘रेल खोलो’ आंदोलन बता रहे हैं। उन्‍होंने कहा, “कल रेल रोको अभियान 12 बसे से 3-4 बजे तक रहेगा। हम तो रेल चलाने की बात कर रहे हैं। अगर रेल रोकेंगे तो संदेश देंगे कि रेल चले। गाँव के लोग अपने हिसाब से रेल रोको अभियान का संचालन कर लेंगे।”

बता दें कि सिंघु सीमा पर फिर से दिल्ली पुलिस के एक SHO पर तलवार से हमला किया गया। मंगलवार (फरवरी 16, 2021) की रात 8 बजे हरप्रीत सिंह नामक प्रदर्शनकारी ने तलवार के बल पर जानलेवा हमला कर के दिल्ली पुलिस की कार छीन ली।

गौरतलब है कि केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन बीते 84 दिनों से लगातार जारी है। नए कानून के मुद्दे पर केंद्र और किसान संगठनों के बीच अब तक 11 दौर की वार्ता भी हो चुकी है, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका है।

ऐसे में अब किसान इस आंदोलन को तब तक जारी रखना चाहते हैं जब तक कि सरकार उनकी सारी माँगों को नहीं मान लेती और कानूनों को वापस नहीं कर लेती। इस क्रम में आंदोलन को रफ्तार देने के लिए किसान नेता राकेश टिकैत ने कल रेल रोको अभियान का ऐलान किया है।

इमरान खान की कंगाल रेलवे में जान फूँकने के वादे से मुकरा चीन, हर साल हो रहा है ₹40 अरब का घाटा

पाकिस्तान अब अपने जिगरी दोस्त चीन से ही ठगा हुआ महसूस कर रहा है। दरअसल, आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने घाटे में चल रही अपनी रेलवे में फिरसे जान फूँकने के लिए चीन से आर्थिक मदद की भीख माँगी थी, लेकिन पाकिस्तान के हालात देखते हुए चीन ने भी उससे अब किनारा कर लिया है।

पाकिस्‍तानी अखबार ‘डॉन’ के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का मानना था कि आर्थिक समस्या से जूझ रहे उसके देश को चीन के 6.8 अरब डॉलर के निवेश से पेशावर से कराची के बीच मेन लाइन-1 को अपग्रेड कर दिया जाएगा, जिससे रेलवे में चल रही मंदी को फिर से जीवनदान मिलेगा। हालाँकि, चीन ने पाकिस्तान के इस भरोसे को तोड़ दिया।

चीन पाक की इमरान खान सरकार को धोखा देते हुए अपने किए हुए वादे से मुकर गया और रेलवे के लिए पैसा देने से इनकार कर दिया। चीन के इस झटके से पाकिस्तान का यह प्रोजेक्ट बीच में ही लटक गया है और काम में देरी हो रही है।

पाकिस्‍तान की खस्ता रेलवे हालात के बारे में नए रेलमंत्री आजम खान स्‍वाती ने खुलासा किया है कि पिछले 2 दशक में पाकिस्‍तान रेलवे को हुए कुल 1.2 ट्रिलियन रुपए के घाटे में 90 फीसदी नुकसान हुआ है, जिस कारण उन्हें हर साल करीब 35 से 40 अरब रुपए का घाटा हो रहा है। वहीं, चीन के इस रवैए के चलते इमरान खान सरकार को अब यह समझ नहीं आ रहा है कि कैसे रेलवे को वापस अपने पैरों पर खड़ा किया जाए।

बता दें कि कराची-पेशावर मेन लाइन को सुधारने का काम इसी साल जनवरी में शुरू होना था, लेकिन अभी तक यह शुरू नहीं हो सका है। खबर यह भी है कि कर्ज में डूबे पाकिस्तान के पास अब रेलवे कर्मचारियों को सैलरी तक देने के पैसे नहीं हैं।

FATF की ग्रे सूची से जून तक नहीं निकल पाएगा पाकिस्तान

उल्लेखनीय है कि आतंकियों की फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में घिरा पड़ोसी देश पाकिस्तान अब जून तक फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (Financial Action Task Force) की ग्रे सूची से नहीं निकल पाएगा।

‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी FATF की आगामी बैठक के परिणाम को लेकर आशान्वित हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान कम से कम जून तक ‘ग्रे’ सूची में रहेगा।

इससे पहले, पिछले साल अक्टूबर माह में हुई FATF की एक बैठक में तय किया गया था कि पाकिस्तान फरवरी, 2021 तक ग्रे सूची में बना रहेगा क्योंकि वह 06 प्रमुख दायित्वों को पूरा करने में नाकाम रहा है। इनमें भारत के दो सर्वाधिक वांछित आतंकवादियों – मौलाना मसूद अजहर और हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई करना भी शामिल है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान को जून, 2018 में एफएटीएफ ‘ग्रे’ सूची में रखा गया था। 27 मुद्दों को लागू कर वैश्विक चिंताओं को दूर करने के लिए समय सीमा दी गई थी। ग्रे सूची में वो देश शामिल होते हैं जहाँ आतंकवादी गतिविधियों को फंडिंग और आतंकियों को मनी लॉन्ड्रिंग करने का जोखिम सबसे ज़्यादा होता है। वहीं, पाकिस्तान अपने आपको लगातार इस ग्रे लिस्ट से निकालने के लिए प्रयास कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स’ यानी FATF एक अंतर-सरकारी निकाय है जो 1989 में मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनेंसिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता के लिए अन्य संबंधित खतरों का मुकाबला करने के लिए स्थापित किया गया है।