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‘किसान’ के साथ प्लेबॉय मॉडल और ड्रग्स एडिक्ट रही हॉलीवुड हीरोइन भी: रिसीव करने ट्रैक्टर से जाएगा ‘टीम किसान’

कथित किसान आंदोलन की आड़ में रची गईं विदेशी साजिशें अब सबके सामने हैं। पॉप स्टार रिहाना, बाल पर्यावरण कार्यकर्ता कही जाने वाली ग्रेटा थनबर्ग और पॉर्न स्टार मिया खलीफा के इनके समर्थन में सामने आने के बादे पूरी साजिश का खुलासा हुआ था। अब ‘किसानों’ के समर्थन में प्लेबॉय मॉडल अमांडा सर्नी (Amanda Cerny) और हॉलीवुड अभिनेत्री सुसान सारंडन (Susan Sarandon) भी कूदी हैं।

किसान आंदोलन को सपोर्ट करने वाली अमांडा ने ट्रैक्टर को सेक्सी बताया है। उसने ट्वीट किया, “मुझे लगता है कि आपका ट्रैक्टर सेक्सी है।” इसके बाद टीम किसान (Team kissan) नाम के समूह ने प्लेबॉय मॉडल को इंडिया आने पर ट्रैक्टर से एयरपोर्ट पर रिसीव करने की पेशकश की है।

साभार: ट्विटर

टीम किसान के ट्विटर पर 11000 से अधिक फॉलोवर्स हैं और यह सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर भी काफी सक्रिय है।

फेसबुक

इस बीच किसान आंदोलन को लेकर चल रहे ट्वीट युद्ध में अमांडा भी इस विरोध को लेकर बहुत मुखर रही हैं।

साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर

अमांडा ने अपनी टिप्पणियों के चलते सोशल मीडिया यूज़र्स से काफी आकर्षित किया है। लोगों के समर्थन के साथ ही सोशल मीडिया पर उनके जवाबों के स्क्रीनशॉट को सारे मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा भी किए जा रहे हैं।

साभार: ट्विटर

दिलचस्प बात यह है कि अपनी टिप्पणियों के प्रति लोगों का इतना झुकाव देखने के बाद प्लेबॉय मॉडल ने अपने फॉलोवर्स को याद दिलाया है कि वे एक्सक्लूसिव कंटेंट के लिए उन्हें only fans पर पेमेंट कर सकते हैं।

साभार: ट्विटर

बता दें, OnlyFans का उपयोग ज्यादातर पोर्नोग्राफिक मॉडल द्वारा खुद की नंगी तस्वीरों को बेचकर पैसा कमाने के लिए किया जाता है। हालाँकि फिटनेस पर ध्यान देने वाले और संगीतकार भी इस प्लेटफार्म का इस्तेमाल करते हैं।

इस बीच, हॉलीवुड अभिनेत्री सुसान सारंडन ने भी अब भारत के आंतरिक मामले में दखल दी है। सारंडन ne 2014 के एक इंटरव्यू में खुद के ड्रग्स एडिक्ट होने का खुलासा किया था।

किसान आंदोलन पर ज्ञान बाँटने के लिए सामने आई इस अभिनेत्री ने शुक्रवार को एक ट्वीट पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत के किसान आंदोलन के साथ एकजुटता से खड़ी हूँ। पढ़ें कि वे कौन हैं और वे क्यों विरोध कर रहे हैं।” साथ ही सुसान ने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक आर्टिकल का लिंक साझा किया, जिसका इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर भारत विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए किया जा रहा।

उल्लेखनीय है कि यह सब उस पागलपन को दर्शाता है, जो भारत विरोधी एजेंडा चलाने के लिए इस पूरे अभियान में उतर गया है। पॉप स्टार, पोर्न स्टार, स्कूल छोड़ने वाली बच्ची के बाद, अब प्लेबॉय मॉडल भी भारत के आंतरिक मसले में जबरन घुस कर लोगों का समर्थन बिटोरने का प्रयास कर रही हैं।

2 दिन तक पति के शव के पास बिलखती रहीं सुनीता, कल्याण का हाथ छोड़ सैलाब में बह गई पत्नी: केदारनाथ का वह प्रलय

देवभूमि उत्तराखंड एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। चमोली जिले में ग्लेशियर फटने की वजह से तबाही हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ धौलीगंगा और अलकनंदा का जलस्तर बढ़ने की वजह से 100 से 150 लोग बह गए हैं। इस घटना ने ‘केदारनाथ की 2013 की त्रासदी’ की भयावह यादें ताज़ा कर दी। केदारनाथ में आई उस प्रलय में हज़ारों लोग काल-कवलित हो गए थे। कुछ खुशकिस्मत थे। लेकिन प्राकृतिक तबाही को मात देने के बावजूद उनकी आपबीती दिल दहला देने वाली हैं।  

तमाम कहानियों में एक दर्दनाक कहानी है सहारनपुर निवासी सविता नागपाल की है, जो अपने पति सुरेन्द्र नागपाल के साथ केदारनाथ यात्रा पर गई थीं। जिस होटल में बुजुर्ग दंपत्ति रुके थे, आपदा की रात उसमें पानी भर गया। अपनी जान बचाने के लिए वह होटल से बाहर निकल कर सड़क पर आ गए लेकिन उन्हें इस बात का आभास नहीं था कि आगे कितनी भीषण अनहोनी उनका इंतज़ार कर रही है। बाहर पानी का बहाव इतना तेज़ था कि मलबे की चपेट में आकर सुरेन्द्र नागपाल की मौत हो गई। सविता लगभग दो दिन तक अपने पति के शव के पास बिलखती पड़ी हुई थीं। जब तीसरे दिन उनका बेटा किसी तरह वहाँ पहुँचा, तब तक सुरेन्द्र नागपाल का अंतिम संस्कार हो गया था। 

ऐसी ही एक घटना में राजस्थान के कल्याण सिंह ने अपनी पत्नी को खो दिया था। वह भी अपनी पत्नी के साथ यात्रा पर आए थे और होटल में ठहरे थे। रातों-रात होटल में पानी भरा जिसकी वजह से उनकी नींद खुल गई। अपनी जान बचने के लिए होटल की तीसरी मंजिल पर पहुँच गए, तभी उनकी पत्नी का हाथ छूटा और वह पानी में बह गईं। कुछ ही देर में उनके साथ मौजूद कई साथी भी पानी की तेज धारा में बह गए। कल्याण सिंह बताते हैं कि वह रात उनके जीवन की सबसे कठिन रात थी, जिसे वह शायद ही भुला पाएँ। 

केदारनाथ मंदिर के पुजारी रविन्द्र भट्ट 16-17 जून 2013 को आई प्रलय के बारे में बताते हैं कि रात तक सब कुछ सामान्य था। रात 8 बजे तक किसी को न तो भनक थी और न ही कल्पना। अचानक 8:15 बजे मंदिर की चारों दिशाओं से पानी का सैलाब नज़र आया। जान बचाने के लिए कुछ यात्रियों ने मंदिर के भीतर शरण ली, रात भर लोग डर के साए में रहे काँपते रहे। 17 जून की सुबह लगभग 6 बजे एक बार फिर जल प्रलय आई और इस बार की जल प्रलय के बाद का दृश्य अविश्वसनीय था। पत्थरों, चट्टानों, और रास्तों पर सिर्फ शव नज़र आ रहे थे, उस नज़ारे से भयावह शायद ही कुछ और होता। 

ऐसे ही राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझनू से लगभग 12 परिवार केदारनाथ धाम की यात्रा के लिए गए थे। केदारनाथ त्रासदी के बाद उनका पता ही नहीं चला, वह कभी अपने घरों की ओर नहीं लौटे। कोई होटल के मलबे में दबा तो कोई पानी की धार के साथ बह कर लापता हो गया।

बेशक उनसे जुड़े लोग आज भी इनकी राह देखते होंगे लेकिन सच यही है कि ऐसी आशाएँ अंतहीन हैं। सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ केदारनाथ त्रासदी में 4500 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। लेकिन कथित तौर पर मौत का आँकड़ा कहीं ज़्यादा है।           

जनता ने चुनाव जिताया पर उनसे मिलतीं नहीं: सोनिया पर कॉन्ग्रेस MLA अदिति सिंह ने कसा तंज

अदिति सिंह उत्तर प्रदेश की रायबरेली सदर सीट से कॉन्ग्रेस की विधायक हैं। पिछले कुछ अरसे से पार्टी के साथ उनके रिश्ते सहज नहीं हैं। वो लगातार पार्टी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाती रहती हैं। अब उन्होंने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष और रायबरेली की सांसद सोनिया गॉंधी पर निशाना साधा है।

विधायक अदिति सिंह ने सोनिया गाँधी पर आरोप लगाया है कि चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद से वह दो बार ही रायबरेली में आम जनता से मिली हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बाद उन्होंने कभी भी जिले की जनता से मुलाकात करने की कोशिश नहीं की और न ही वह किसी कार्यक्रम में शामिल होने आई हैं।

उन्होंने कहा, “अगर जनता आपको वोट देकर चुनती है, तो उस जनता की आपको प्रत्येक तरह से मदद और मुलाकात करते रहनी चाहिए। हम किसी पार्टी विशेष की बात नहीं कर रहे हैं। हम सभी राजनीतिक नेताओं की बात करते हैं जो भी चुनाव जीत कर आता है वह अपनी जनता के प्रति पूरी तरह से जिम्मेदार होना चाहिए। जो अच्छा काम करेगा, उसकी तारीफ भी करूँगी।”

अदिति सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की गुजारिश कॉन्ग्रेस ने कुछ महीने पहले विधानसभा अध्यक्ष से की थी, लेकिन उनका अनुरोध खारिज कर दिया गया था गौरतलब है कि कुछ समय पहले अदिति सिंह ने सबके सामने सीएम योगी की भी जमकर तारीफ की थी। उन्होंने कहा था, “मैं खुले मुँह से कहना चाहती हूँ कि गरीबों की जो दुकानें बची हैं वह मेरे राजनीतिक गुरु और हमारे माननीय मुख्यमंत्री महाराज योगी आदित्यनाथ की वजह से है। उनकी वजह से हम यह लड़ाई लड़ रहे हैं।”

पिछले दिनों रायबरेली कॉन्ग्रेस में बड़ी बगावत भी सामने आई थी। पार्टी के मजबूत नेता के रूप में जाने जाने वाले शिव कुमार पाण्डेय समेत 35 अन्य पदाधिकारियों ने सोनिया गाँधी को अपना इस्तीफा दे दिया था। 

नदी का छोर, 150 से 200 लाशें, नग्न, अर्धनग्न और सड़ी-गली: उत्तराखंड का वह प्रलय जिसमें तबाह हो गया था केदारनाथ

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से तबाही नज़र आ रहा है। धौलीगंगा और अलकनंदा उफ़ान पर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पानी की तेज धार में 100- 150 लोग बह गए हैं। ग्लेशियर फटने की इस घटना ने 2013 के दौरान केदारनाथ में आई प्रलय की भयावह स्मृतियाँ ताज़ा कर दी हैं। ‘केदारनाथ त्रासदी’ का ज़िक्र छेड़ देने भर से सालों पुराना खौफ़नाक मंज़र लोगों में सिहरन पैदा कर देता है। 

देवभूमि उत्तराखंड में 16 जून 2013 को आई प्रलय ने अकल्पनीय विध्वंस किया। बारिश 15 जून से ही शुरू हो गई थी। लेकिन इस बात की कल्पना शायद ही किसी ने की थी कि इस बारिश का परिणाम कितना विकराल हो सकता है। 16 और 17 जून की बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने इतनी तबाही मचाई कि लगभग 4400 से अधिक लोगों की मौत हो गई। हज़ार लोगों की लाशें अलग-अलग क्षेत्रों में मिली। 18 जून को मौसम साफ़ होने पर पूरा केदारनाथ तबाह हो चुका था। हर कोने में सिर्फ लाशें नज़र आ रही थीं। पत्थरों में फँसी लाशें, जिनमें कई पहचानी गई और कुछ नहीं। यह त्रासदी आज भी लोगों के ज़ेहन में दहशत पैदा करती है। 

यूँ तो इस त्रासदी की अनगिनत कहानियाँ हैं, जिनमें कुछ प्रलय के साथ बह गई और कुछ हम तक पहुँच पाई। 

केदारनाथ के नज़दीक रहने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना था, “मैंने अपने आँखों के सामने 60 लाशों को तैरते हुए देखा। इसके अलावा लगभग 200 ऐसे लोग हैं जिन्हें मैं जानता हूँ कि लेकिन उनका कभी कोई पता नहीं चल पाया।” ऐसा ही तबाही का दृश्य नज़र आया था हेमकुंड साहिब में जहाँ से लौटी सुखप्रीत ने प्राकृतिक आपदा के भयावह नज़ारे का वर्णन किया था। उनका कहना था कि उनकी आँखों के सामने 50 यात्री नदी में बह गए थे। 

लाशों का एक भयावह किस्सा मिलता है पत्रकार मंजीत नेगी की किताब ‘केदारनाथ से साक्षात्कार’ में। यह घटना उस समय की है जब आपदा प्रबंधन का कार्य काफी गति पकड़ चुका था, रुद्रप्रयाग के तत्कालीन एडीएम भी इस काम में लगे हुए थे। सरस्वती और मंदाकिनी नदी पर बने ब्रिज को पार करते हुए समय उनका पैर फिसला और वह नदी में गिर गए। बहाव इतना तेज़ था कि कुछ ही देर में वह सभी की नज़रों से ओझल हो गए, कई घंटों की खोजबीन बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला। पूरे सरकारी महकमे में हड़कंप मच गया, सवाल उठने लगे कि सरकार अपने मुलाज़िम को नहीं बचा पा रही है तो आम जनता को कैसे सुरक्षित रखेगी। 

अधिकारियों ने उनका शव खोजने के लिए एक हल निकाला, डूबने वाले अधिकारी का वजन लगभग 95 किलो था। लिहाज़ा 95 किलो की तीन मैनीक्यून तैयार कराई गई। 10-10 मिनट के अंतर पर तीनों मैनीक्यून वहीं से बहाई गई जहाँ से वह डूबे थे। खोजबीन शुरू हुई, पहली मैनीक्यून का पता ही नहीं चला! दूसरी के कुछ टुकड़े मिले और तीसरी जिस हालत में और जहाँ मिली उसे देख कर सभी स्तब्ध रह गए। नदी के जिस छोर पर तीसरी मैनीक्यून मिली वहाँ लगभग 150 से 200 लाशें पड़ी हुई थीं। नग्न, अर्धनग्न और सड़ी-गली लाशें! यह घटना केदारनाथ त्रासदी के आकार और प्रभाव की तस्वीर साफ़ करने के लिए बहुत थी। ये सिर्फ एक घटना है, न जाने कितनी कहानियाँ अभी तक हमने सुनी ही नहीं। 

वर्षा चौहान का चाकू और कैंची से शौहर वारिस ने किया कत्ल, कार से भाग रहा था; ट्रक ने रौंदा

वर्षा चौहान ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उसका शौहर वारिस क्यामुद्दीन 10 साल पुरानी प्रेम कहानी का ऐसा अंत करेगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वारिस ने पहले वर्षा की हत्या की। फिर कार से फरार हो गया। इसी दौरान ट्रक की चपेट में आकर वह भी मर गया।

घटना पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ स्थित सन्नी एन्क्लेव की है। बताया जा रहे कि घरेलू कलह में वारिस ने अपनी पत्नी वर्षा को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद पुलिस से बचने के लिए मौके से फरार हो गया। लेकिन उसकी कार का चंडीगढ़ के रास्ते में एक्सीडेंट हो गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

भोपाल की रहने वाली वर्षा चौहान और नोएडा निवासी वारिस क्यामुद्दीन एक महीने पहले ही किराए पर रुम लेकर यहाँ रहने आए थे। दोनों ने लव मैरिज की थी। हालाँकि परिवारवाले इस शादी से खुश नहीं थे। पड़ोसियों का कहना है कि दोनों का आपस में अक्सर झगड़ा होता रहता था। गुरुवार देर रात भी दोनों में झगड़ा हुआ था।

बात इस कदर बढ़ गई कि गुस्साए क्यामुद्दीन ने वर्षा की तेजधार चाकू और कैंची से कई बार वार कर हत्या कर दी। जिसके बाद पकड़े जाने के डर से उसने अपनी कार से फरार होने की कोशिश की, लेकिन सारंगपुर के पास उसकी कार एक ट्रक की चपेट में आ गई।

हादसे की सूचना पर घटनास्थल पहुँची पुलिस ने वारिस के पास से मिले दस्तावेजों के आधार उसकी पहचान की। जिसके बाद मृतक के परिजनों को उसके मरने की खबर दी गई। वहीं खबर मिलते ही जब वारिस के परिजन उसके घर में पहुँचे तो उसकी पत्नी बाथरूम में खून से लथपथ हालत में पड़ी मिली। आनन-फानन में उसे अस्पताल तो ले जाएगा, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कहा जा रहा कि पुलिस को मृतका के घर से खून से सना सिलेंडर भी मिला, जिस पर उसके मृतक शौहर वारिस के फिंगर प्रिंट भी है। इसी आधार पर दोनों क्षेत्रों की पुलिस ने मामला दर्ज किया है और आगे की जाँच पड़ताल कर रही है।

वे ‘भारत माता की जय’ से नाराज हो जाती हैं, देश के खिलाफ जहर उगलने वालों से नहीं: बंगाल में ममता पर बरसे मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के हल्दिया में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए सबसे पहले उत्तराखंड में हुई त्रासदी की जानकारी लोगों के साथ साझा की और बताया कि वे लगातार अपडेट ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लिए पूरा देश प्रार्थना कर रहा है।

पीएम मोदी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल में आप दीदी से अपने अधिकार की बात पूछ देंगे तो वो नाराज हो जाती हैं। यहाँ तक कि ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा दो, तो भी वो नाराज हो जाती हैं, लेकिन देश के खिलाफ बोलने वाले कितना भी जहर उगल दें, दीदी को गुस्सा नहीं आता।

उन्होंने कहा कि किसानों के पास सीधे पैसे जाए इस से यहाँ के सरकार को काफी परेशानी है। टीएमसी सरकार कैसी है। 25 लाख में से महज 6 हजार किसानों का नाम ही भेज पाई है। इन किसानों को सीधे रुपए भी हम नहीं भेज पा रहे हैं। राज्य एजेंसी का बैंक विवरण दिया ही नहीं है। एक-एक दिन कर ऐसे ही निकलता जा रहा है। माँ, माटी मानुष कहने वाली सरकार की संवेदनशीलता को लोग देख रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “अभी आपने न्यूज़ में देखा होगा कि इन दिनों भारत को बदनाम करने के लिए कैसे-कैसे अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र सामने आ रहे हैं, कैसी-कैसी अंतरराष्ट्रीय साज़िशें हो रही हैं। साजिश करने वालों की बेचैनी इतनी ज्यादा है कि भारत को बदनाम करने के लिए वो चाय से जुड़ी भारत की पहचान पर हमला करने की बात कह रहे हैं। टी वर्कर्स की कड़ी मेहनत पर हमला करने का षड्यंत्र किया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों की विकास के लिए केंद्र सरकार पूरा प्रयास कर रही है। हाईवे, पोर्ट, रेलवे, एयरपोर्ट, जल मार्ग, मेट्रो, इंटरनेट सभी पर केंद्र सरकार पैसे खर्च कर रही है। बंगाल में 73 लाख शौचालय बनाने के लिए भी केंद्र ने बड़ी मदद दी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लेफ्ट, तृणमूल और कॉन्ग्रेस मिलकर पर्दे के पीछे फिक्सिंग कर रहे हैं। दिल्ली में लेफ्ट, तृणमूल और कॉन्ग्रेस नेता मिलते हैं और बंद कमरे में बैठकर मीटिंग करते हैं और रणनीति बनाते हैं। केरल में कॉन्ग्रेस और लेफ्ट मिलकर लूटते हैं और पाँच-पाँच साल का खेल करते हैं। हमें धोखेबाजी के खिलाफ सतर्क रहना है।

उन्होंने कहा कि बंगाल फुटबाल का राज्य है। फुटबाल की भाषा में कई फाउल कर लिए गए हैं। कुशासन के फाउल से लेकर कई फाउल। बंगाल के लोग अब तृणमूल सरकार को लाल कार्ड दिखाने जा रहे हैं। बुआ-भतीजा की सरकार को बाय-बाय करेंगे।

मैंने दिलजीत को चुनौती दी, पर उसने खालिस्तानी होने पर जवाब नहीं दिया: कंगना

किसान आंदोलन को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और पंजाबी गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ के बीच कई बार जुबानी जंग हो चुकी है। अब एक बार फिर कंगना ने दोसांझ को चुनौती दी है।

कंगना ने हाल ही में न्यूज चैनल रिपब्लिक टीवी के पत्रकार अर्नब गोस्वामी को इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने कई मुद्दों को लेकर ढेर सारी बातें की हैं। इस दौरान कंगना ने दिलजीत दोसांझ को खालिस्तानी बताया। साथ ही कहा कि उन्होंने दिलजीत को यह बात करने की चुनौती दी थी कि वह खालिस्तानी नहीं है। लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।

कंगना रनौत ने कहा, “मैंने खुली चुनौती दी कि वह सिर्फ एक बार कह दें कि वह खालिस्तानी नहीं हैं। लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। युवाओं को गुमराह किया जा रहा है। उन्हें खालिस्तान के बारे में एक सपना दिखाया गया है।” कंगना ने पॉप सिंगर रिहाना पर अधारित गाना जारी करने को लेकर भी दिलजीत की आलोचना की।

कंगना ने कहा, “इसका मतलब साफ है कि इसकी प्लानिंग सितंबर 2020 से थी कि 26 जनवरी को एक हमला होगा और इस अश्लील गायक द्वारा एक ट्वीट किया जाएगा। अगर हर कोई अपना खुद का एक टुकड़ा चाहता है, तो चीन की यही रणनीति है कि हम फिर से 1000 साल के लिए गुलाम हो जाएँ।” 

इस दौरान उन्होंने किसान आंदोलन में ‘अंतरराष्ट्रीय फंडिग और पोएटिक जस्टिस’ की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कंगना रनौत ने कहा, “बड़े रहस्यों का खुलासा हो रहा है। बेहद विनम्र शब्द का उपयोग कर कहा जा रहा है कि यह भारत को ‘बदनाम’ करने की साजिश है। मुझे लगता है कि यह भारत को टुकड़ों में तोड़ने की साजिश है।”

उन्होंने आगे कहा, “जबसे यह आंदोलन शुरू हुआ है उसी दिन से मैं कह रही हूँ ये किसान नहीं हैं। ये साजिश है। उस समय मेरे पास 6 से 7 ब्रांड थे। उन्होंने मुझे अल्टीमेटम भेजा कि आप किसानों को आतंकवादी मत कहिए। मैंने एक महीने में 12 से 15 करोड़ रुपए के ब्रांडों को खो दिया।”

कंगना ने कहा, “रिहाना जो एक अमेरिकी पॉप स्टार है, यूएस कैपिटल हिल के दंगे के बारे में बात नहीं की। किसान विरोध पर ट्वीट करने के लिए उसने 100 करोड़ रुपए लिए होंगे। ये सारे पैसे कहाँ से आ रहे हैं? ग्रेटा, जो एक युवा बच्ची है, उसे आगे धकेला जा रहा है, उसका इस्तेमाल किया जा रहा है।”

गौरतलब है कि 3 फरवरी 2021 को दिलजीत के एक ट्वीट के जवाब में कंगना ने लिखा, “देश सिर्फ भारतीयों का है, खालिस्तानियों का नहीं। बोल तू खालिस्तानी नहीं है। बोल तू कि जिन खालिस्तानियों ने आंदोलन में हिस्सा लिया, उनकी निंदा करता है। अगर तू ये बोलता है तो मैं माफी माँग लूँगी और तुझे सच्चा देशभक्त समझ लूँगी। जल्दी बोल, मैं इंतजार कर रही हूँ।”

180 साल जिंदा रहूँगा, इसके लिए अब तक ₹7.3 करोड़ खर्च कर चुका हूँ: अमेरिकी बिजनेसमैन का दावा

अमेरिका के एक अरबपति बिजनेसमैन ने अजीबोगरीब दावा किया है। उनका कहना है कि वह 180 सालों तक जिंदा रहेंगे। इसके लिए वे अब तक करोड़ों रुपए खर्च कर चुके हैं।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, अमेरिका के रहने वाले 47 वर्षीय डेव एस्प्रे (Dave Asprey) ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि वे 180 सालों तक जिंदा रहेंगे। उन्होंने बताया कि जवान रहने के लिए अब तक अपने शरीर पर वह करीब 7.3 करोड़ रुपए खर्च कर चुके हैं। लंबी उम्र बने रहने के इस तकनीक को उसने बायोहैकिंग का नाम दिया है।

रिपोर्ट्स की माने तो डेव एस्प्रे ने लाखों रुपए खर्चकर अपने शरीर के बोन मैरो से स्टेम सेल निकलवाकर इन्हें फिर से ट्रांसप्लांट करवाया है। उनका कहना हैं, “मैंने खाने पर काबू कर, सोने का तरीका बदलकर और बुढ़ापा रोकने वाले तरीके अपनाकर खुद को इस तरह बना लिया है कि शरीर में कम से कम जलन (इन्फ्लेमेशन) हो।”

हेल्थ डाइट और अपने स्टेम सेल को ट्रांसप्लांट करवाने को लेकर डेव ने कहा, “जब हम जवान होते हैं, तो शरीर में करोड़ों स्टेम सेल होती हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, स्टेम सेल खत्म होने लगती हैं। इसलिए मैं इंटरमिटेंट फास्टिंग करता हूँ। इसमें जब शरीर भोजन नहीं पचा रहा होता है, तो वह खुद की मरम्मत करता है।”

ज्यादा उम्र जीने के लिए अरबपति बिजनेसमैन कोल्ड क्रायोथेरेपी चैंबर का उपयोग भी साथ-साथ करते है। बता दें यह एक ऐसा प्रोसेस है जोकि शरीर के क्षतिग्रस्त ऊतकों (टिश्यू) का कम तापमान में इलाज करता है।

डेव का मानना है कि 40 साल से कम उम्र वाले इन चीजों को अपनाकर 100 साल तक खुश और एक्टिव बने रह सकते हैं। इसलिए वह इंटरमिटेंट फास्टिंग करते हैं। उनका मानना है कि खाली पेट रहने से शरीर खुद की मरम्मत करता है।

चीनी लड़कों में ‘मर्दाना कमजोरी’? स्कूली बच्चों में हो ‘मर्द’ वाली खूबियाँ, कम हों ‘लड़कियों वाले गुण’- शिक्षा मंत्रालय का जोर

एक महिला विरोधी फरमान को लेकर चीन के शिक्षा विभाग की आलोचना हो रही है। चीनी शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि स्कूलों में लड़कियों के साथ रहते-रहते लड़कों में ‘लड़कियों वाले गुण’ आ रहे हैं। लिहाजा उन्हें ‘मर्दाना गुण’ देने के लिए नई तरह की शिक्षाएँ दी जाएँगी। इसके तहत चीनी छात्रों को शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। कई लोग इसे महिलाओं के खिलाफ दुर्भावना के रूप में देख रहे हैं।

कई विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को सहिष्णु और विविधता वाली शिक्षा देनी चाहिए। इस प्रस्ताव का नाम है- ‘चीन के टीनएजर लड़कों में स्त्री वाले गुण विकसित होने से रोकना’। चीन के शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि इससे युवावस्था में मानसिक अवस्था से जुड़े रिसर्च में मदद मिलेगी। 2018 में ही इस बारे में चीन के नेताओं ने कहा था कि अगर चीन के युवाओं में लड़की वाले गुण बढ़ने से नहीं रोका गया तो ये देश की स्थिरता और विकास में बाधक बनेगा।

चीन के नेताओं ने इस प्रस्ताव पर बहस में कहा था, “आजकल चीन के लड़कों में कायरता बढ़ रही है। उनके भीतर आत्मविश्वास कम हो रहा है। साथ ही उनके अंदर कमजोरी वाले लक्षण नजर आ रहे हैं। वो ‘प्रीटी बॉय सुपरस्टार्स’ की तरह बनते जा रहे हैं।” इन नेताओं का कहना है कि ऐसा इसीलिए हुआ होगा, क्योंकि नर्सरी से लेकर कॉलेजों तक इन छात्रों को अधिकतर कक्षाओं के कई विषयों में महिला शिक्षक ही मिलते हैं।

साथ ही टीवी और फिल्मों में ‘प्रिटी बॉयज’ को दिखाए जाने को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। चीनी सोशल मीडिया वेबसाइट Weibo पर इस सम्बन्ध में 200 करोड़ से अधिक बार लोग चर्चा कर चुके हैं। चीनी शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि शिक्षा के अलावा महिलाओं एवं पुरुषों को उनकी ‘जिम्मेदारियों और कर्तव्यों’ की याद दिलानी भी ज़रूरी है। मंत्रालय का कहना है कि लड़के अपने आचरण, मनोभाव और शारीरिक गठन में ‘सख्ती’ लाएँ, क्योंकि यही ‘मर्दों की खूबसूरती’ है।

चीन में महिलाओं को लेकर आम लोगों की सोच भी खास अच्छी नहीं है। मुल्क में 40% शादीशुदा या रिश्ते में आ चुकी महिलाएँ यौन हिंसा और मारपीट का शिकार होती हैं। ‘ऑल चाइना वीमन्स फेडरेशन (All-China Women’s Federation)’ ने ये आँकड़े जारी किए थे। चीन ऊपर से तो संपन्न और आधुनिक दिखता है, लेकिन महिलाओं के साथ हिंसा और उनके साथ होने वाले भेदभाव की कई घटनाएँ सामने आती रहती हैं।

हाल ही में ये ही खबर आई थी कि चीन में कैसे कोई भी चीज तैयार करवाने के लिए मजदूरों से से दिन-रात काम करवाया जाता है। वह मुश्किल से दो-चार घंटे सो पाते हैं। हालात इतने बुरे होते हैं कि सपने में भी उन्हें सिर्फ़ वही काम दिखाई देता है। लोगों से ऐसे काम करवाने के लिए चीन में बाकायदा एक कैंप है जिसका नाम- ‘मसंजिया’ रखा गया है। एक रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे मजदूरों के हाथ कागज रगड़ते-रगड़ते हाथ छिल जाते हैं। 

क्या औकात है, जमीर मरी है, भारत रत्न के लायक नहीं: सचिन-अक्षय पर कॉन्ग्रेसी MP

कथित किसान आंदोलन की आड़ में रची गई विदेशी साजिशों के खिलाफ जिस तरह देश की नामी हस्तियों ने एकजुटता दिखाई है, वह विपक्ष को रास नहीं आ रहा है। कॉन्ग्रेस नेता तो लगातार सचिन तेंदुलकर को निशाना बना रहे हैं।

कॉन्ग्रेस सांसद जसबीर सिंह गिल ने तेंदुलकर पर हमला करते हुए कहा है कि वे ‘भारत रत्न के लायक नहीं हैं’। साथ ही दावा किया है कि सचिन अपने बेटे को आईपीएल टीम में जगह दिलाने के लिए सरकार का समर्थन कर रहे हैं। इसके अलावा अक्षय कुमार के फिल्मों का भी उन्होंने बहिष्कार करने की अपील की है।

इससे पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने सचिन को अपने क्षेत्र से इतर विषय पर बोलने में ‘सावधानी बरतने’ की ‘सलाह’ दी थी। दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार जैसी हस्तियों ने भारत के खिलाफ चलाए जा रहे वैश्विक अभियान के विरोध में एकजुट रहने का आह्वान किया था।

पंजाब के कॉन्ग्रेस सांसद जसबीर गिल ने कहा, “मैं अपील करता हूँ सभी लोगों से, देशवासियों से, किसान के समर्थकों से कि इनकी फिल्मों का बहिष्कार करना चाहिए। इन लोगों की क्या औकात है, इनकी जमीर मरी हुई है, जिन्होंने किसानों के खिलाफ बयान देकर सरकार की पूँछ पकड़ी है। मैंने तो पहले ही कह दिया कि ये सचिन तेंदुलकर ने सिर्फ अपने बेटे को आईपीएल में जगह दिलाने के लिए सरकार का समर्थन किया। आप अपने आप सोच लीजिए, मैं आपके दर्शकों पर छोड़ देता हूँ कि वो फैसला करें कि क्या ये आदमी भारत रत्न के लायक है। मैं समझता हूँ कि ये उसके लायक नहीं है।”

सचिन तेंदुलकर को 2014 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था और 2012 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। इस दौरान केंद्र में कॉन्ग्रेस नीत यूपीए की सरकार चल रही थी। ऐसे में एक कॉन्ग्रेस सांसद का यह कहना कि वह भारत रत्न के योग्य नहीं है, काफी आश्चर्यजनक है।

दिलचस्प बात यह है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रधानमंत्रियों का इतिहास रहा है कि वे खुद को ही ‘भारत रत्न’ से सम्मानित कर चुके हैं। जवाहरलाल नेहरू ने खुद को पद पर रहते हुए भारत रत्न दिया था। उनकी बेटी इंदिरा गाँधी ने प्रधानमंत्री पद पर रहते ही ऐसा किया था। लेकिन कोई भी कॉन्ग्रेस सदस्य यह सवाल नहीं करता कि क्या वे सम्मान के योग्य थे।

बता दें कि क्रिकेट का भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने हाल ही में ट्वीट कर कहा था कि किसान आंदोलन में बाहरी ताकतों को दखल नहीं करना चाहिए। भारतीय ही भारतीयों के बारे में सोचने में सक्षम हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता। बाहरी ताकत दर्शक हो सकते हैं, लेकिन भागीदार नहीं। भारतीय नागरिक भारत के बारे में जानते हैं। हम एक राष्ट्र के तौर पर एकजुट रहें।”

बाहरी ताकतों के ख़िलाफ़ सचिन के आवाज उठाते ही सोशल मीडिया पर केरल वाले यूजर्स के एक धड़े ने खुलकर न केवल उनका विरोध किया, बल्कि देश के साथ खड़े होने के लिए उनका अपमान भी किया। केरल के कोच्चि में शुक्रवार (5 फरवरी 2021) को युवा कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने विरोध जताते हुए सचिन तेंदुलकर के कट आउट पर कालिख पोत दी थी।