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हिन्दू देवी-देवताओं के सिर पर लात मारने वाले पादरी को HDFC ने बताया था हीरो, CID ने की गिरफ़्तारी तो वीडियो हटाया

प्रवीण चक्रवर्ती नामक एक कुख्यात ईसाई पादरी ने हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमाजनक टिप्पणी की थी और साथ ही हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को ‘लात मारने’ व विकृत करने की भी धमकी दी थी। ईसाई पादरी ने इसके बदले ‘क्राइस्ट गाँवों’ की स्थापना की बात कही थी। अब ‘हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन (HDFC)’ बैंक ने उसका नाम ‘नेबरहुड हीरोज’ की सूची में से हटा दिया है। बैंक ने उसे ‘हीरो’ बताया था।

धार्मिक स्थल पर आपत्तिजनक कार्य करने और विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच दुर्भावना फैलाने के आरोप में उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जिसके बाद HDFC बैंक ने ये कदम उठाया। आंध्र प्रदेश की क्रिमिनल इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने 2013 में आए एक वीडियो के आधार पर ये कार्रवाई की है। उसे काकीनाडा से मंगलवार (जनवरी 12, 2021) को गिरफ्तार किया गया। उसे गुंटूर लाकर अगले ही दिन कोर्ट में पेश किया गया।

CID के कोस्टल सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) आर विजय पॉल ने कहा कि ये स्वतः संज्ञान का मामला नहीं है और जब कोई व्यक्ति किसी मामले के बारे में शिकायत दर्ज कराता है, तो फिर उस मामले में कार्रवाई की जाती है। जब CID ने ईसाई पादरी प्रवीण चक्रवर्ती से पूछताछ की तो उसने बताया कि वीडियो में उसकी ही आवाज़ थी। पुलिस अधिकारियों ने माना कि ये वीडियो भड़काऊ है और वैमनस्य फैलाने वाला है।

अब CID उस पादरी के वित्तीय लेनदेन और बैंक खाते सहित अन्य विवरणों की जाँच कर रही है। साथ ही ये भी खँगाला जा रहा है कि इस तरह के और कितने वीडियोज बनाए गए हैं। अगस्त 2020 में HDFC बैंक ने एक वीडियो में ईसाई पादरी को ‘नेबरहुड हीरो’ बताया था। दरअसल, ये HDFC बैंक का एक अभियान है जिसके तहत वो देश भर के नायकों को पहचान देने और उन्हें सेलिब्रेट करने का दावा करता है।

बैंक के अनुसार, इसमें ऐसे लोगों के नाम होते हैं जिन्होंने हर तरह से ज़रूरतमंद लोगों की मदद की है। लेकिन NGO लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम (LRPF) की शिकायत के बाद बैंक ने तुरंत इस वीडियो को हटा लिया। बैंक का दावा है कि पादरी ने 500 गरीबों की मदद की और वो ‘सीलोम ब्लाइंड सेंटर’ का अध्यक्ष भी है। ये वीडियो HDFC बैंक ने अगस्त 28, 2020 को अपलोड किया था। उसने लिखा था कि प्रवीण चक्रवर्ती ने एक साहस भरे क्षण से ‘सामान्य को हीरोइक बना दिया।’

हालाँकि, ये पहली बार नहीं है जब HDFC बैंक ने किसी ऐसे विवादित व्यक्ति को ‘हीरो’ बताया हो। कुछ ही सप्ताह पहले उसने लुधियाना के अशोक सिंह गरचा को गरीबों को भोजन मुहैया कराने वाला बताते हुए ‘नेबरहुड हीरो’ के अवॉर्ड से नवाजा था। बाद में पता चला कि वो ‘अब्राहमिक एंड इंडो अब्राहमिक एसोसिएशन (AIAC)’ का अध्यक्ष है। वो यहूदी-ईसाई-मुस्लिम-सिख एकता का दावा करते हुए उपदेश देता है।

HDFC बैंक ने डिलीट किया पादरी प्रवीण चक्रवर्ती का वीडियो

एनजीओ LRPF ने गृह मंत्रालय और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) विभाग के समक्ष इसकी शिकायत की थी। जबरन ईसाई धर्मांतरण के आरोप लगाते हुए प्रवीण चक्रवर्ती और उसके NGO ‘सीलोम ब्लाइंड सेंटर’ की भी मान्यता रद्द करने की भी माँग की गई थी। संस्था के FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) लाइसेंस को रद्द करने की माँग करते हुए कहा गया था कि उसके सारे बैंक खाते जब्त करके अन्य गतिविधियों पर भी लगाम लगाई जाए।

ईसाई पादरी प्रवीण चक्रवर्ती के इंडियन पैनल कोड (IPC) की खिलाफ धारा-153 ए (अवैध बातें करके किसी व्यक्ति को द्वेषभाव या बेहूदगी से निशाना बनाना, उपद्रव जैसे हालात पैदा करना), 153 बी (लिखित या मौखिक रूप से तनाव जैसे हालात पैदा करना), (धार्मिक कार्य में लगे जनसमूह को भड़काना), (पवित्र धार्मिक वस्तुओं को नुकसान पहुँचाना), 124 ए (देश की एकता-अखंडता को ठेस पहुँचाना) और धारा-115 के तहत आरोप तय किए गए हैं।

वीडियो में प्रवीण चक्रवर्ती को तेलुगु में कहते सुना जा सकता है कि वो ‘पत्थरों के भगवान’ को लात से मारेगा और पेड़ों (नीम, पीपल और तुलसी जैसे पवित्र पेड़-पौधे) को भी लात मारेगा। उसने उस वीडियो में पूरे गाँव को ईसाई बनाने को लेकर बातें की थीं। उसने दावा किया था कि बाइबिल पढ़ा कर गाँवों को ‘क्राइस्ट विलेजेज’ बनाया जाता है। उसने दावा किया कि वो खुद कई बार देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को लात मार चुका है और अपनी इस हरकत पर वो खुश है।

‘सीलोम ब्लाइंड सेंटर’ की स्थापना 1989 में हुई थी। संस्था अनाथों, बुजुर्गों और विधवाओं की मदद करने का दावा करती है। उनके लिए शिक्षा, घर, दवा और कपड़े उपलब्ध कराने का दावा करती है। संस्था पर 2012 में 15000, 2013 में 37000, 2014 में 2.92 लाख और 2015 में 6 लाख ईसाई धर्मांतरण कराने के आरोप लगे हैं। यूएस का लाइफपॉइंट चर्च मिशनरी इस संस्था को अपना ब्रांच बताता है।

शिकायत में यह भी कहा गया कि सेंटर कभी भी किसी मामले में संबंधित अधिकारियों को सूचित नहीं करता था और बाल श्रम करवाने वाले आरोपितों को बिना सजा दिलवाए जाने देता थे। इसमें लिखा है कि इस एनजीओ के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि इसने भारत को ऐसा दर्शाया है जैसे यहाँ पर अधिकांश मात्रा में गुलाम जनसंख्या रहती हो। इसके अलावा इस एनजीओ ने लॉकडाउन नियमों का भी पालन नहीं किया जिसके कारण 318 बच्चे कोविड पॉजिटिव पाए गए।

मंच पर माँ सरस्वती की तस्वीर से भड़का मराठी कवि, हटाई नहीं तो ठुकराया अवॉर्ड

एक मराठी कवि ने पुरस्कार लेने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि सम्मान समारोह के मंच पर देवी सरस्वती की तस्वीर रखी हुई थी। यह सम्मान समारोह महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित किया गया था। मराठी कवि यशवंत मनोहर का कहना था कि उन्होंने सम्मान समारोह के मंच पर रखी गई सरस्वती की तस्वीर पर आपत्ति जताई थी। फिर भी तस्वीर नहीं हटाई गई थी इसलिए उन्होंने पुरस्कार लेने से मना कर दिया। यशवंत मनोहर पहले भी इस कारण के चलते कई पुरस्कार लौटा चुके हैं। 

दरअसल, महाराष्ट्र की चर्चित साहित्य संस्था ‘विदर्भ साहित्य संघ’ ने यशवंत मनोहर को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए बुलाया था। यह सम्मान समारोह गुरुवार (14 जनवरी 2021) को रंग शारदा हॉल में आयोजित किया गया था। मराठी कवि को इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए यह भी बताया गया था कि इसमें सरस्वती पूजन भी होगा। इस बात पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। 

यशवंत मनोहर के अनुसार, “देवी सरस्वती की मूर्ति उस शोषक मानसिकता का प्रतीक है जिसकी वजह से महिला और शूद्र शिक्षा-ज्ञान प्राप्त करने से दूर रहे।” हालाँकि, आयोजकों ने मराठी कवि की इस बात को स्वीकार नहीं किया और कहा कि कार्यक्रम का प्रारूप नहीं बदला जा सकता है। अंततः यशवंत सम्मान समारोह में शामिल नहीं हुए और उन्होंने विदर्भ साहित्य संघ को मराठी में एक चिट्ठी लिखी। 

उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा, “मैं आशा कर रहा था कि विदर्भ साहित्य संघ मेरे विचारों और सिद्धांतों पर मंथन करेगा लेकिन आयोजकों का कहना है कि मंच पर देवी सरस्वती की पूजा होगी। मैं साहित्य में धर्म का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं कर सकता हूँ इसलिए मैं इस सम्मान को अस्वीकार करता हूँ। मैंने पहले भी कई पुरस्कार सिर्फ इस वजह से ही अस्वीकार किए हैं।” 

विदर्भ साहित्य संघ की स्थापना 1923 में मराठी साहित्य के विस्तार के लिए हुई थी। यह महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में साहित्य से जुड़े काम करने वाली सबसे व्यापक संस्था है। यह संस्था हर वर्ष मराठी साहित्यकारों को सम्मानित करने के लिए ऐसे आयोजन करवाती है। संस्था हर दो वर्ष के अंतराल पर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड भी देती है और इस वर्ष यशवंत मनोहर को इसके लिए चुना गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सम्मान समारोह में सरस्वती देवी की पूजा की परम्परा लगभग 9 दशकों से निभाई जा रही है। इस परम्परा को किसी भी सूरत में बदला नहीं जा सकता है।  

हार्वर्ड ने लालू यादव की बेटी के झूठ की जब खोली पोल, फुस्स हो गया था मीसा भारती का ‘स्पीकर’ वाला दावा

एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान ने जब से खुद को ‘फिशिंग अटैक’ का शिकार बताया है, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी सुर्खियों में है। यह प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी इसी तरह कुछ साल पहले तब भी खूब चर्चा में रहा था, जब लालू प्रसाद यादव की सांसद बेटी मीसा भारती ने खुद को वहाँ स्पीकर के तौर पर बुलाए जाने का दावा किया था।

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा ने यह दावा साल 2015 में किया था। उन्होंने कहा था कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के कॉन्फ्रेंस में उन्हें बतौर ‘वक्ता’ बुलाया गया था। इस ख़बर के सामने आने पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने उनके दावों को सिरे से खारिज किया था और कहा था कि वे बतौर ‘ऑडियंस’ शामिल हुई थीं।

दरअसल, राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने 7 मार्च 2015 को अपने फेसबुक पेज पर एक तस्वीर साझा की थी। तस्वीर में वह मंच पर खड़े होकर संबोधन करने की मुद्रा में थी। तस्वीर के साथ हिन्दी में कैप्शन भी लिखा हुआ था, “हार्वर्ड में युवाओं की भूमिका पर भाषण देते हुए।” इसके बाद मीडिया ने जोरशोर से यह खबर चलाई कि मीसा भारती ने अमेरिका के मशहूर विश्वविद्यालय में भाषण दिया है। यह कॉन्फ्रेंस 7 और 8 मार्च (साल 2015) को हुई थी। दावा किया गया था कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने मीसा को महिलाओं के विषय पर भाषण देने के लिए बुलाया था।

इसके बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने एक बयान में कहा था, “मीसा भारती को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में हुई कॉन्फ्रेंस में बतौर वक्ता नहीं बल्कि प्रतिभागी के रूप में बुलाया गया था। बतौर प्रतिभागी उनकी मौजूदगी की पुष्टि इस बात से की जा सकती है कि उन्होंने जो टिकट खरीदा था वह ‘ऑडियंस’ का था। उन्हें किसी भी तरह का भाषण देने के लिए नहीं बुलाया गया था।” 

इस मामले की जानकारी सामने आते ही हार्वर्ड कैनेडी स्कूल कम्युनिकेशन विभाग (Kennedy School Communications Department) ने प्रकरण का संज्ञान लिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मीसा भारती कॉन्फ्रेंस के बाद मंच पर गई थीं और वहीं उन्होंने तस्वीरें खिंचवाई। फिर वह तस्वीरें अखबारों में भी प्रकाशित हुई थीं।

हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने साफ़ किया था कि मीसा भारती ने कोई भाषण नहीं दिया था इसलिए किसी भी अमेरिकी समाचार पत्र में यह ख़बर प्रकाशित नहीं हुई थी। अगर मीसा भारती ने कोई भाषण दिया होता तो उनकी तस्वीर या वीडियो विश्वविद्यालय के पास ज़रूर होता।

इस मुद्दे पर विवाद बढ़ने के बाद मीसा भारती ने सफाई देते हुए कहा था,

“मैं राजनीतिक पृष्ठभूमि से आती हूँ इसलिए जो कुछ करती हूँ वह ख़बर बन जाती है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने मुझे उस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया था। उस कायर्क्रम में देश के और भी मशहूर लोगों को बुलाया गया था। क्या आपको लगता है एक मशहूर चेहरा होने के बाद मैं लोगों में भ्रम में रखने की कोशिश करूँगी? मैंने उस कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें साझा की थीं, जिसमें एक तस्वीर उस मशहूर जगह की थी। जिसे तमाम समर्थकों/रिपोर्टर्स ने यह समझ कर प्रकाशित करवा दिया था कि मैं वहाँ वक्ता के रूप में गई थी। जैसे ही मुझे इस विवाद की जानकारी मिली, मैंने वह पोस्ट हटा दिया था। वहाँ पर भाषण देने की बात पार्टी के कार्यकर्ता या समर्थक द्वारा कही गई थी।”

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले निधि ने बताया था की मैसाचुसेट्स के कैम्ब्रिज स्थित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में उन्होंने बतौर एसोसिएट प्रोफेसर (जर्नलिज्म) का ऑफर मिला है। शुक्रवार (15 जनवरी 2021) को उन्होंने कहा कि वे ‘फिशिंग अटैक’ का शिकार हुईं और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जो ऑफर मिला था, वह फेक था।

मुंबई पुलिस पर मुस्लिम बहुल इलाके में भगवान श्रीराम के पोस्टर फाड़ने का आरोप, 3 विहिप नेताओं को गिरफ्तार किया

मुंबई पुलिस ने मालवणी में कथित रूप से विश्व हिन्दू परिषद् (VHP) के कम से कम 3 नेताओं को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन विहिप नेताओं ने ‘राम मंदिर समर्पण निधि’ अभियान के लिए पोस्टर लगाए थे, जिसके बाद मुंबई पुलिस ने ये कार्रवाई की। एक विहिप नेता ने ये भी आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस ने भगवान राम के पोस्टर को फाड़ डाला। सोशल मीडिया में इस घटना को लेकर लोग रोष जता रहे हैं।

राम मंदिर निर्माण के लिए धन जुटाने हेतु विहिप अभियान चला रहा है, जिसके तहत लोगों से चंदा माँगा जा रहा है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी 5 लाख रुपए देकर अपना योगदान दिया था। अयोध्या में भगवान रामलला के ‘भव्य और दिव्य’ मंदिर के निर्माण के लिए ये धनराशि इकट्ठी की जा रही है। एक विहिप नेता ने उक्त घटना के बारे में नाम न जाहिर करने की शर्त पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शुक्रवार (जनवरी 15, 2021) को डोनेशन ड्राइव के बाद VHP नेता व कार्यकर्ता घर लौट रहे थे।

उन्होंने बताया, “हमारे कार्यकर्ताओं ने देखा कि मुंबई पुलिस राम मंदिर निधि संकलन के पोस्टर्स को फाड़ रही है। इन पोस्टरों को एक-एक कर हटाया भी जा रहा था। कुछ विहिप नेताओं ने अपने मोबाइल फोन पर इस घटना को रिकॉर्ड भी कर लिया।” आरोप है कि जब मुंबई पुलिस ने अपनी हरकतों को मोबाइल फोन के कैमरे में कैद होते हुए देखा तो उनमें से एक अधिकारी ने एक विहिप नेता की पिटाई शुरू कर दी।

जब मुंबई पुलिस से इस घटना को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कथित रूप से कहा कि राम मंदिर के ये पोस्टर्स विवादित थे और इससे स्थानीय लोगों की भावनाएँ भड़क रही थीं। साथ ही ये भी बताया कि उन्हें ‘ऊपर से आदेश’ मिला है कि राम मंदिर समर्पण निधि के पोस्टर्स को हटाया जाए। बता दें कि मालवणी, मुंबई का एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। 3 विहिप नेताओं पर पुलिस की ड्यूटी में विघ्न डालने और उन्हें रोकने का आरोप लगा कर हिरासत में लिया गया।

इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसकी सूचना मिलते ही संघ, विहिप और भाजपा के कार्यकर्ता थाने में ही धरने पर बैठ गए और उन तीनों को छोड़ने की माँग करने लगे। उनकी माँग थी कि तीनों विहिप नेताओं को त्वरित रिहा किया जाए। सुबह के 4 बजे ACP मौके पर पहुँचे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि तीनों विहिप नेताओं के खिलाफ तय किए गए आरोप हटाए जाएँगे।

उन तीनों को थाने से रिहा भी कर दिया गया। साथ ही जिन पुलिस अधिकारियों और जवानों ने राम मंदिर निधि संकलन के पोस्टर फाड़े थे, उनके खिलाफ कार्रवाई का भी आश्वासन ACP द्वारा दिया गया है। मुंबई भाजपा के अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा ने भी इस घटना की निंदा करते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि मालवणी की परिस्थिति आए दिन गंभीर होती नजर आ रही है और यहाँ पर प्रभु श्रीराम के पोस्टर लगाना अपराध सा माना जा रहा है।

विहिप नेताओं की गिरफ़्तारी के बाद धरने पर बैठे हिन्दू कार्यकर्ता

उन्होंने कहा, “मालवणी पुलिस ने विश्व हिंदू परिषद के कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था, पोस्टर भी फाड़ दिए थे। इस विषय को लेकर जल्द ही पुलिस कमिश्नर से मुलाकात करूँगा।” इसी क्षेत्र में मस्जिदों में तेज़ आवाज़ में बज रहे लाउडस्पीकर्स को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसका अब तक पुलिस ने कोई निदान नहीं निकाला है, जबकि राम मंदिर के पोस्टर्स को हटाने में पुलिस गजब की तत्परता दिखा रही है।

हाल ही में खबर आई थी कि मालवणी के मुस्लिम बहुल इलाके में हिंदुओं को लगातार डराया-धमकाया जा रहा है, ताकि वो अपनी घर-जमीन छोड़कर वहाँ से पलायन कर जाएँ। एक समय में इस इलाके में 100 से ज्यादा हिंदू परिवार रहा करते थे। लेकिन, अब हिंदू परिवारों की संख्या सिर्फ़ 8 से 10 रह गई है और वह भी बहुसंख्यक आबादी के बीच से निकल कर भागना चाहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हिंदू परिवारों पर दबाव बनाने वाले (मुस्लिम) गुंडों को स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता व महा विकास आघाड़ी सरकार में कैबिनेट मंत्री असलम शेख का संरक्षण प्राप्त है।

धूर्तता को गलती बता बहलाने की कोशिश कर रहे रवीश कुमार: फेक न्यूज का फैक्टचेक भी नहीं

NDTV के प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार अक्सर फेक न्यूज़ फैलाते पाए जाते हैं। इस बार भी उन्होंने यही किया है और बड़ी चालाकी से अपनी धूर्तता को छोटी सी गलती की तरह दिखाते हुए माफ़ी माँगने का ढोंग भी रचा है। ‘किसान आंदोलन’ की आग में घी डालने के लिए रवीश ने कृषि उत्पाद खरीद मामले में सरकार पर ही गलत आँकड़े पेश करने का आरोप मढ़ दिया था। अब वे फेसबुक पर इसे ‘गलती’ बताते हुए ‘सार्वजनिक सूचना’ दे रहे हैं।

रवीश कुमार ने एक तरह से माना है कि केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल के एक ट्वीट के विश्लेषण के चक्कर में उन्होंने झूठ बोला। केंद्रीय मंत्री ने अपनी ट्वीट में साफ़-साफ़ लिखा था कि ये आँकड़े जनवरी 10, 2021 तक के हैं। ट्वीट के टेक्स्ट में भी ये बात लिखी हुई थी और ट्वीट के साथ डाले गए पोस्टर में भी ये अंकित था। लेकिन, रवीश ने ‘बारीक अक्षरों’ पर अप्रत्यक्ष रूप से इसका दोष मढ़ते हुए ‘जवाबदेही लेने’ की बात कही है। उन्होंने लिखा:

इस पोस्टर में आप पढ़ सकते हैं कि सरकार कह रही है कि 19-20 में 423 लाख मीट्रिक टन धान की ख़रीद हुई और इस साल अब तक 543 लाख मिट्रिक टन। यानी पिछले साल की तुलना में इस साल 26 प्रतिशत अधिक हो चुकी है। अब इन्होंने पहली गलती यह की है कि धान लिखा है मगर डेटा दिया है चावल का। जब आप ‘खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग’ की साइट पर जाएँगे तो पता चलेगा कि 19-20 में कुल 519 लाख मीट्रिक टन चावल की खरीद हुई थी। इस डेटा के हिसाब से अब तक जो खरीद हुई है वो 26 प्रतिशत अधिक कैसे हो गई?”

एक तो रवीश कुमार खुद धान की खरीद के लिए चावल खरीद के आँकड़े निकालने लगे और झूठ बोलते हुए बताने लगे कि कैसे सरकार के आँकड़ों में गड़बड़ी है, ऊपर से अब वो इसे एक छोटी सी गलती की तरह दिखा रहे हैं। धान-चावल में कन्फ्यूज हुए रवीश ने ये भी नहीं समझा कि जिद्दी किसान संगठन आजकल इसी ताक में लगे हुए हैं कि कैसे किसानों को बरगला कर सरकार को बदनाम किया जा सके। सरकार ने रवीश को उनकी गलतियों की याद दिला कर उन्हें लताड़ भी लगाई।

हालाँकि, इन सब मामले में उस फेसबुक ने शायद ही कोई कार्रवाई की है, जो दक्षिणपंथियों द्वारा शेयर किए गए मजाक को भी ‘फेक न्यूज़’ मान कर उनकी पेज की रीच ही कम कर देता है। अगर किसी ऐरे-गैर वामपंथी पोर्टल ने भी फैक्ट-चेक के नाम पर रायता फैला दिया, तो भी फेसबुक आँख बंद कर ऐसी हरकत करता है। लेकिन, रवीश कुमार के मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने शायद ही ऐसा कोई एक्शन लिया हो।

वहीं लिबरल गैंग में फैक्ट-चेक का मसीहा बन कर बैठे Altnews ने भी अब तक रवीश कुमार के झूठे दावे का कोई फैक्ट-चेक नहीं किया है। ये वही वेबसाइट है, जिसे चलाने वाले जुबैर पर ट्विटर पर एक छोटी बच्ची की ऑनलाइन प्रताड़ना का आरोप लग चुका है। किसी एक ने कुछ ट्वीट कर दिया तो उसे भी ‘वायरल’ बता कर फैक्ट-चेक करने वाले इस वामपंथी और इस्लामी कट्टरवादी पोर्टल ने रवीश के दावे के पोल खुलने के कई घंटों बाद भी इसका फैक्ट-चेक करने की जहमत नहीं उठाई थी।

अब आप जरा स्थिति को उलटा कर के देखिए। मान लीजिए कि सरकार की जगह किसान संगठनों ने कोई आँकड़ा दिया और सुधीर चौधरी या अर्णब गोस्वामी ने उसे गलत रूप में पेश कर दिया। फिर यही वामपंथी मीडिया उन दोनों पर किसान विरोधी होने का तमगा लगा कर हल्ला मचा रहा होता और सोशल मीडिया में भी मजाक बनाया जाता। लेकिन, चूँकि मामला रवीश कुमार का है, इसीलिए सब जानबूझ कर गहरी नींद में हैं।

ऊपर से अब जब रवीश कुमार ने ‘बड़प्पन’ दिखाते हुए अपनी ‘गलती‘ को स्वीकार करने का जो ‘साहस’ दिखाया है, उस पर जरूर पत्रकारिता के वामपंथी खेमे के कुछ लोग ताली पीटेंगे। यानी चित भी उनकी और पट भी उनकी। कभी अभिसार शर्मा धान के खेतों को गेहूँ का कहते हैं तो कभी रवीश कुमार धान को चावल समझ लेते हैं, लेकिन यूट्यूब पर इनके वीडियोज को लाखों व्यूज मिलते हैं और लिबरल मीडिया उनकी पीठ थपथपाता है।

अपनी ‘गलती स्वीकार कर’ के ‘महान’ बने रवीश कुमार

बता दें कि रवीश कुमार ने जान-बूझकर फर्जी जानकारी देने के लिए पीयूष गोयल के ट्वीट की इमेज को क्रॉप किया था और अब इसे ‘गलती’ बता कर ऐसे दिखा रहे जैसे वो नींद में थे और सोते-सोते ही उन्होंने तस्वीर को एडिट कर डाली। केंद्रीय मंत्री द्वारा साझा जानकारी में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि डेटा 10 जनवरी तक खरीद के लिए है। लेकिन सरकार को झूठा करार देने के लिए, रवीश कुमार ने पूरे साल के डेटा का इस्तेमाल किया। 

ऐसे संवेदनशील समय में जब किसान संगठनों और केंद्र सरकार की 10 दौर की वार्ताओं में भी कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया है और किसान नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की समिति के समक्ष पेश होने से भी इनकार कर दिया है, रवीश कुमार जैसे पत्रकारों की इस तरह की हरकतों पर जब कोई हिंसा या दंगे जैसे हालात बनेंगे तो यही वामपंथी मीडिया मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे ‘Pogrom’ बताएगा, जैसे दिल्ली दंगों के वक़्त किया गया था।

जब CAA और NRC के मुद्दों पर पत्रकारों और लिबरल मीडिया के अलावा कई सलेब्स ने भी एक के बाद एक झूठ फैलाए थे, उसकी परिणीति हमें दिल्ली सहित कई जगहों पर दंगों और हिंसा के रूप में देखने को मिली। अब जब किसान आंदोलन में भी खालिस्तानी ताकतों के घुसने की बात सरकार ने भी स्वीकार की है, रवीश कुमार जैसे पत्रकार जिम्मेदारी भूल कर इस ‘आंदोलन’ को और हवा देने का काम कर रहे हैं और धूर्तता को ‘गलती’ बता रहे हैं।

उस्मानाबाद का नाम बदलकर ‘धाराशिव’ करने की तैयारी, संभाजी नगर पर कॉन्ग्रेस-शिवसेना में चल रही है तनातनी

महाराष्ट्र में शहरों का नाम बदलने को लेकर महा विकास अघाड़ी के साझेदारों में विवाद चल रहा है। इस बीच शिवसेना ने उस्मानाबाद का नाम ‘धाराशिव’ रखने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के कार्यालय ने एक ट्वीट में इस नाम का उल्लेख किया है।

औरंगाबाद का नाम संभाजी नगर रखने को लेकर शिवसेना और कॉन्ग्रेस के बीच पहले से ही तनातनी चल रही है। हालॉंकि इस मसले पर पीछे नहीं हटने के संकेत उद्धव पहले ही दे चुके हैं। ऐसे में उस्मानाबाद का नाम बदलने को लेकर दोनों दलों का मतभेद और गहरा सकता है।

बुधवार (13 जनवरी 2021) को महाराष्ट्र मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के आधिकारिक ट्विटर हैंडल द्वारा किए गए ट्वीट में उस्मानाबाद को ‘धाराशिव’ कहा गया। यह ट्वीट मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए फैसले से संबंधित था।

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा किए गए ट्वीट में एक तस्वीर के साथ बताया गया है कि धराशिव-उस्मानाबाद में सरकारी मेडिकल कॉलेज बनाया जाएगा। यह 100 छात्रों की क्षमता और 430 बेड का अस्पताल होगा।

इससे पहले इसी तरह ट्वीट में औरंगाबाद को संभाजी नगर बताया गया था। अब इस ट्वीट के ज़रिए शिवसेना ने अपने सहयोगी दलों (कॉन्ग्रेस, एनसीपी) को स्पष्ट संदेश दिया है कि शहरों का नाम बदलना अभी भी पार्टी के एजेंडा में है।   

कॉन्ग्रेस ने इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया है। कॉन्ग्रेस के मुताबिक़ किसी भी शहर का नाम बदले जाने के पहले उसकी ऐतिहासिक और सामाजिक पृष्ठभूमि अच्छे से पढ़ी जानी चाहिए। महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सचिन रावत ने इस मुद्दे पर कहा, “उस्मान निज़ाम साम्राज्य का सातवाँ राजा था। उस्मान ने लगभग 14 हज़ार एकड़ ज़मीन विनोबा भावे को उनके अभियान के लिए दान कर दी थी, जिसके तहत उन लोगों को ज़मीन दी जा रही थी जिनके पास बिलकुल ज़मीन नहीं थी। उस अभियान के दौरान तमाम मशहूर लोगों ने अपनी ज़मीन विनोबा भावे को दान की थी और उन्होंने ज़मीन मजदूरों को दी थी।”

सावंत के अनुसार उस्मान ने 1965 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान 5 टन सोना दान किया था जिसकी कीमत आज के हिसाब से लगभग 1600 करोड़ रुपए होगी और यह भारतीय इतिहास में किए गए सबसे अधिक दान में एक है। इसके अलावा उसने तमाम अस्पताल, डैम, विश्वविद्यालय और सड़कें बनवाई और हमेशा ज़रूरतमंदों की मदद की।

वहीं शिवसेना ने अपने इस कदम को लेकर दो टूक जवाब दिया है। पार्टी ने कहा कि वह हिन्दुत्व की विचारधारा के रास्ते पर ही चलेगी। भले गठबंधन में कॉन्ग्रेस और एनसीपी उनके सहयोगी दल हैं।          

PM मोदी ने किया विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान का आगाज, कोरोना वैक्सीनेशन पर प्रोपेगेंडा से किया आगाह

भारत के लिए शनिवार (जनवरी 16, 2021) का दिन बहुत बड़ा है, क्योंकि इस दिन विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुई। इसका आगाज़ सुबह 10:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्बोधन के साथ हुआ। कोरोना वायरस पर अंतिम प्रहार के रूप में होने वाले इस टीकाकरण अभियान के लिए 2 मॉक ड्रिल्स पहले ही किए जा चुके हैं। प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ये रूटीन टीकाकरण अभियान चलेगा।

टीकाकरण अभियान के पहले ही दिन 3 लाख की रिकॉर्ड संख्या में स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका दिया जाएगा और इसके लिए देश भर में 3006 साइट्स तैयार किए गए हैं। PMO पहले ही कह चुका है कि ये पूरे देश की लम्बाई-चौड़ाई को मापने वाला अभियान होगा। स्वास्थ्य कर्मचारियों को वैक्सीन देने का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठा रही है। सार्वजनिक हेल्थकेयर केंद्रों पर टीकाकरण के लिए जगह तैयार की गई है।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आज वो वैज्ञानिक, वैक्सीन रिसर्च से जुड़े अनेकों लोग विशेष प्रशंसा के हकदार हैं, जो बीते कई महीनों से कोरोना के खिलाफ वैक्सीन बनाने में जुटे थे। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे आमतौर पर एक वैक्सीन बनाने में बरसों लग जाते हैं, लेकिन इतने कम समय में एक नहीं, दो ‘मेड इन इंडिया’ वैक्सीन तैयार हुई हैं। उन्होंने जनता को इस बारे में भी जागरूक किया कि कोरोना वैक्सीन की 2 डोज लगनी बहुत जरूरी है।

पधानमंत्री ने समझाया कि पहली और दूसरी डोज के बीच, लगभग एक महीने का अंतराल भी रखा जाएगा। साथ ही बताया कि दूसरी डोज़ लगने के 2 हफ्ते बाद ही आपके शरीर में कोरोना के विरुद्ध ज़रूरी शक्ति विकसित हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इतिहास में इस प्रकार का और इतने बड़े स्तर का टीकाकरण अभियान पहले कभी नहीं चलाया गया है। उन्होंने आँकड़े गिनाए कि दुनिया के 100 से भी ज्यादा ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या 3 करोड़ से कम है, और भारत वैक्सीनेशन के अपने पहले चरण में ही 3 करोड़ लोगों का टीकाकरण कर रहा है।

बकौल पीएम मोदी, भारत का टीकाकरण अभियान बहुत ही मानवीय और महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर आधारित है और जिसे सबसे ज्यादा जरूरत है, उसे सबसे पहले कोरोना का टीका लगेगा। उन्होंने देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि आज के दिन का पूरे देश को बेसब्री से इंतजार रहा है। कितने महीनों से देश के हर घर में बच्चे, बूढ़े, जवान सभी की जुबान पर ये सवाल था कि कोरोना वैक्सीन कब आएगी। उन्होंने कहा, “अब वैक्सीन आ गई है, बहुत कम समय में आ गई है।”

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि दूसरे चरण में कोरोना के खिलाफ इस टीकाकरण अभियान को 30 करोड़ की संख्या तक ले जाना है। जो बुजुर्ग हैं, जो गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं, उन्हें इस चरण में टीका लगेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 30 करोड़ की आबादी से ऊपर के दुनिया के सिर्फ तीन ही देश हैं- खुद भारत, चीन और अमेरिका। पीएम ने कहा कि भारत के वैक्सीन वैज्ञानिक, हमारा मेडिकल सिस्टम, भारत की प्रक्रिया की पूरे विश्व में बहुत विश्वसनीयता है और हमने ये विश्वास अपने ट्रैक रिकॉर्ड से हासिल किया। उन्होंने कहा:

“कोरोना से हमारी लड़ाई आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की रही है। इस मुश्किल लड़ाई से लड़ने के लिए हम अपने आत्मविश्वास को कमजोर नहीं पड़ने देंगे, ये प्रण हर भारतीय में दिखा। हमारे वैज्ञानिक और विशेषज्ञ जब दोनों मेड इन इंडिया वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभाव को लेकर आश्वस्त हुए, तभी उन्होंने इसके इमरजेंसी उपयोग की अनुमति दी। इसलिए, देशवासियों को किसी भी तरह के प्रोपेगेंडा, अफवाह और दुष्प्रचार से बचकर रहना है। संकट के उसी समय में, निराशा के उसी वातावरण में, कोई आशा का भी संचार कर रहा था, हमें बचाने के लिए अपने प्राणों को संकट में डाल रहा था। हमारे डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस ड्राइवर, आशा वर्कर, सफाई कर्मचारी, पुलिस और दूसरे फ्रंटलाइन वर्कर्स।”

पीएम मोदी ने बताया कि भारतीय वैक्सीन विदेशी वैक्सीन की तुलना में बहुत सस्ती हैं और इनका उपयोग भी उतना ही आसान है। उन्होंने कहा कि विदेश में तो कुछ वैक्सीन ऐसी हैं जिसकी एक डोज 5,000 हजार रुपये तक में हैं और जिसे -70 डिग्री तापमान में फ्रीज में रखना होता है। उन्होंने जानकारी दी कि हर हिंदुस्तानी इस बात का गर्व करेगा की दुनिया भर के करीब 60% बच्चों को जो जीवन रक्षक टीके लगते हैं, वो भारत में ही बनते हैं और भारत की सख्त वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से होकर ही गुजरते हैं।

पीएम मोदी ने आश्वासन दिया कि भारत की वैक्सीन ऐसी तकनीक पर बनाई गई है जो भारत में ‘Tried and Tested’ है। उन्होंने कहा कि ये वैक्सीन स्टोरेज से लेकर ट्रांसपोर्टेशन तक भारतीय स्थितियों और परिस्थितियों के अनुकूल हैं। साथ ही उम्मीद जताई कि वैक्सीन भारत को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक जीत दिलाएगी। कोरोना टीकाकरण अभियान पर पीएम मोदी ने कहा कि ये ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ताकत है।

टीकाकरण अभियान के शुभारंभ के दौरान पीएम मोदी का सम्बोधन

बता दें कि भारत के वैक्सीन की माँग पूरे देश-विदेश में है। अब तक ब्राजील, मोरक्को, सऊदी अरब, म्यांमार, बांग्लादेश, दक्षिण अफ्रीका, मंगोलिया और श्रीलंका जैसे देशों ने आधिकारिक रूप से भारत से वैक्सीन के लिए अनुरोध किया है। कई देशों ने भारत से अनुरोध किया है कि वे सरकारी स्तर पर (गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट के आधार पर) या सीधे वैक्सीन डेवलपर्स के साथ समझौते की छूट दी जाए। नेपाल ने भी 1.2 करोड़ डोज माँगे हैं।

गोरखपुर से रिटायर आर्मी अफसर की बेटी को अगवा किया, इस्लाम कबूल करवाया: यूपी पुलिस ने कर्नाटक से महबूब को दबोचा

उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार (15 जनवरी 2021) कर्नाटक के विजयपुर जिले से एक 21 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया। उस पर गोरखपुर की एक नाबालिग लड़की का अपहरण करने और उसे जबरन इस्लाम कबूल कराने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ युवक ने अपनी मज़हबी पहचान छुपा कर लड़की से दोस्ती की थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में लड़की की उम्र 19 वर्ष बताई गई है। 5 जनवरी 2021 को पीड़िता के कॉलेज से घर वापस नहीं लौटने पर उसके पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

गोरखपुर स्थित चिलुअतल पुलिस थाने के एसएचओ नीरज कुमार राय ने बताया, “जाँच के दौरान पीड़िता के फोन से मिले कॉल रिकॉर्ड के ज़रिए पता चला कि वह एक युवक से काफी बातें करती थी। ट्रूकॉलर पर उसका नाम ‘महबूब’ बता रहा था और उसकी लोकेशन कर्नाटक नज़र आ रही थी। यह जानकारी सामने आने के बाद 11 जनवरी को उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोपित और पीड़िता की तलाश के लिए 3 पुलिसकर्मियों की टीम कर्नाटक भेजी गई थी।” 

अपहृत लड़की के पिता सेवानिवृत्त सेनाधिकारी हैं। उन्होंने एफ़आईआर में कहा है कि आरोपित महबूब ने पिछले साल पहचान छुपा कर उनकी बेटी से सोशल मीडिया पर दोस्ती की थी। इसके बाद नौकरी का लालच देकर अपनी बातों में फँसाया। आरोपित पर आईपीसी की धारा 366 (अपहरण, शादी के लिए मजबूर करना या दबाव बनाना), 363 (अपहरण) और हाल में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पारित किए गए धर्मांतरण क़ानून की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।  

वहीं एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ आरोपित महबूब के पिता ने कहा, “मुझे इस मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बुधवार (13 जनवरी 2021) को पुलिस वाले आए और उन्होंने बताया कि मेरे बेटे ने एक लड़की का अपहरण कर लिया है। साथ ही उसने हिन्दू लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन भी कराया, अगर उसने वाकई ऐसा कुछ किया है तो उसे इसकी सज़ा मिलनी चाहिए। पुलिस वाले मेरे बेटे को उत्तर प्रदेश लेकर गए हैं, उन्होंने मुझे कुछ बताया भी नहीं है।”

इस घटना को लेकर विजयपुर एसपी अनुपम अग्रवाल का कहना था कि बुधवार को उत्तर प्रदेश पुलिस के तीन पुलिसकर्मियों की टीम आरोपित और हिन्दू लड़की की तलाश में वहाँ आई थी। पुलिस को शुरुआत में संदेह था कि वह गोवा में हो सकते हैं और इसके बाद उन्होंने आरोपित को पकड़ने के लिए उसके पिता की मदद ली। वहीं गोरखपुर की चितुअल पुलिस का कहना है, “फ़िलहाल हम आरोपित से लगातार पूछताछ कर रहे हैं। मामले की जाँच की जा रही है।”      

पहले देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ टूटी, अब पुजारियों की गिरफ्तारी: मंदिरों पर हमलों को पुलिस ने ‘पॉलिटिक्स’ से जोड़ा

आंध्र प्रदेश में मंदिरों में तोड़फोड़ और प्रतिमाओं को खंडित करने के मामले में राजनीति तेज़ हो गई है। राज्य पुलिस के मुखिया ने इसके लिए विपक्षी पार्टियों TDP और भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है। DGP गौतम सवांग ने शुक्रवार (जनवरी 15, 2021) को मंदिरों में उत्पात और प्रतिमाओं को नुकसान पहुँचाने के मामले में राजनीतिक साजिश होने की बात कही और सोशल मीडिया पर प्रोपेगेंडा फैलाए जाने का आरोप लगाया।

DGP का कहना है कि इन मामलों में अब तक 21 लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से 17 चंद्रबाबू नायडू की पार्टी TDP से जुड़े हैं और 4 भाजपा के हैं। इनमें से 15 को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि 9 मामलों के 21 आरोपितों में से TDP के 13 और भाजपा के 2 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी YSRCP और मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने भी यही आरोप लगाए थे।

YSRCP का दावा रहा कि सरकार की छवि को बदनाम करने के लिए विपक्षी दल इस तरह की साजिश रच रहे हैं। TDP ने इन आरोपों को नकारते हुए राज्य की पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाया है। वहीं DGP सवांग का कहना है कि ‘जान-बूझकर अपना हित साधने के लिए’ कुछ समूहों और राजनीतिक दलों ने इस तरह की हरकतें की हैं, ताकि राज्य में सांप्रदायिक शांति और कानून-व्यवस्था को खराब किया जा सके।

सितम्बर 12, 2020 को राजामहेन्द्रवरम में प्रतिमाओं के अपमान के सम्बन्ध में पुलिस ने कहा कि उन हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं पर जिस पदार्थ का छिड़काव किया गया था, वो अपवित्र या आपत्तिजनक नहीं था। इस मामले में भी TDP और भाजपा नेताओं को ही आरोपित बनाने की बात कही गई है। कडप्पा जिले के बडवेल मंडल में स्थित कोंगलाविदु में आंजनेय स्वामी को चप्पलों की मामला पहनाए जाने के मामले में भी TDP नेता को आरोपित बनाया गया है।

दिसंबर 5, 2020 को हुई इस घटना पुलिस ने शरारती तत्वों की करतूत बताया था। दिसंबर 29, 2020 को कुर्नूल के मद्दिकेरा में स्थित मद्दाम्मा मंदिर में प्रतिमाओं को नुकसान पहुँचाए जाने के सम्बन्ध में पुलिस ने 8 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 4 के TDP कैडर से होने की बात बताई गई है। कुर्नूल के ही मालमंदा में सीताराम प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किए जाने के सम्बन्ध में पुलिस ने कुछ अलग ही बयान दिया है।

आंध्र प्रदेश पुलिस का कहना है कि एक बिजली मैकेनिक लाइट्स को ठीक कर रहा था, तभी उसका पाँव गलती से फिसल गया और इससे प्रतिमा को नुकसान पहुँचा। इस मामले में मंदिर समिति के अध्यक्ष, पुजारियों और पत्रकारों को ही प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। DGP ने लोगों से पुलिस की कार्रवाई में सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि राज्य में सांप्रदायिक शांति बरकरार रखा जाए।

बताते चलें कि आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर हमलों की जाँच के लिए मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली YSRCP सरकार ने 16 सदस्यों वाली स्पेशल जाँच समिति (SIT) का गठन किया था। SIT सितम्बर 2020 के बाद राज्य में मंदिरों पर हुए हमलों की जाँच कर रही है। ACB विजयवाड़ा के एडिशनल डायरेक्टर अशोक कुमार को इसका मुखिया बनाया गया है। SIT अपनी रिपोर्ट सीधे सीएम जगन को सौंपेगी।

झटकों के बाद व्हाट्सएप ने ‘प्राइवेसी अपडेट’ टाला, बढ़ती लोकप्रियता के बीच डाउन हुआ सिग्नल

व्हाट्सएप ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी (privacy policy) को लेकर फिर से बड़ा ऐलान किया है। शुक्रवार (15 जनवरी 2021) को किए गए ऐलान में व्हाट्सएप ने कहा कि वह फ़िलहाल अपना ‘प्राइवेसी अपडेट’ टाल रहा है। जिससे यूज़र्स को अपडेट समझने और उसकी समीक्षा करने का पर्याप्त समय मिल सके। इसकी वजह से बड़ी संख्या में यूज़र्स ने मेसेजिंग एप ‘सिग्नल’ का रुख किया था। लेकिन तकनीकी कारणों से दुनियाभर में वह डाउन हो गया है। इसके कारण यूजर्स को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

व्हाट्सएप का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि यूज़र्स के बीच नए अपडेट को लेकर काफी गलत जानकारियाँ पैदा हो गई थीं। कंपनी के मुताबिक़, “8 फरवरी को किसी का भी अकाउंट सस्पेंड या डिलीट नहीं होगा। हम प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर फैली गलत जानकारी दूर करने के लिए काम कर रहे हैं।” 

दरअसल इस महीने व्हाट्सएप यूज़र्स के पास एक नोटिफिकेशन आया था जिसके तहत व्हाट्सएप के पास यूज़र्स की जानकारी फेसबुक एप से साझा करने का अधिकार होगा। इसके अलावा अपडेट में ‘बिज़नेस फीचर्स’ (business features) भी शामिल किए गए थे। इस अपडेट को लेकर दुनिया भर में विरोध हुआ, नतीजतन अब व्हाट्सएप ने इसे टालने की बात कही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अब यह प्राइवेसी अपडेट मई तक जारी किया जा सकता है। 

दूसरी तरफ सिग्नल के विकल्प का चुनाव करने वाले यूज़र्स का कहना है कि इससे मोबाइल और डेस्कटॉप दोनों पर ही संदेश (मैसेज) भेजने में परेशानी आ रही है। इस समस्या को लेकर कंपनी का कहना है कि वह तकनीकी समस्या का हल निकालने के में लगे हुए हैं और जल्द से जल्द समाधान निकालेंगे। यूज़र्स की प्राइवेसी का उल्लेख करते हुए कंपनी ने लिखा, “आज हमारे द्वारा लगाए गए सारे आशावादी अनुमानों से ज़्यादा प्रतिक्रिया मिली है। लाखों यूज़र्स हमें संदेश भेज रहे हैं कि प्राइवेसी महत्वपूर्ण है। हम आपके धीरज को समझते हैं। बहुत जल्द हमारी ऑनलाइन सेवा अच्छे से काम करेगी।”