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विदाई से पहले ट्रम्प से मिलना चाहती हैं पामेला, कहा- बायडेन के शपथ से पहले मिल जाए जूलियन असांजे को माफी

अभिनेत्री और मॉडल पामेला एंडरसन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ मुलाकात चाहती हैं, ताकि वे अपने मित्र और विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे के लिए क्षमा-प्रार्थना कर सकें। ‘Baywatch (2017)’ फिल्म में काम कर चुकीं 53 वर्षीय पामेला का कहना है कि जो बायडेन के शपथग्रहण के बाद उनके हाथ से ये मौका निकल न जाए, इसीलिए वे पहले ही ये काम पूरा करना चाहती हैं। बायडेन 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले हैं।

वो चाहती हैं कि जूलियन असांजे के ऊपर लगे जासूसी के आरोपों से उन्हें मुक्त कर दिया जाए। जूलियन असांजे के ऊपर 18 आपराधिक मामले चल रहे हैं, जिनमें सरकारी कम्प्यूटरों को हैक करने से लेकर दस्तावेजों को चुराने तक के आरोप हैं। लाखों सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक करने का उन पर आरोप है। दोषी पाए जाने पर उन्हें 175 वर्ष की सज़ा सुनाई जा सकती है। 7 वर्ष तक इक्वाडोर के एम्बेसी में रह कर निकले असांजे फ़िलहाल लंदन की जेल में बंद हैं

पामेला एंडरसन ने कहा, “मैं चाहती हूँ कि असांजे मुक्त हों। वह अपने बच्चों और पार्टनर के साथ खुली धूप में घूम सकें। क्या आप सोच सकते हैं कि पिछले एक दशक से उन्होंने स्वैच्छिक रूप से कोई कार्य नहीं किया, जैसे – चाय-कॉफी पीने जाना, फ़िल्में देखना या फिर कहीं टहलने जाना। वो एक सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे। एक ब्रिटिश जज ने उन्हें अमेरिका में प्रत्यर्पित करने के निर्णय को रोक दिया है क्योंकि उसे लगता है कि असांजे अपनी ज़िंदगी ख़त्म कर सकते हैं।”

पामेला ने कहा कि प्रत्यर्पण के भय और 10 वर्षों की प्रताड़ना के कारण उनकी दिमागी स्थिति यहाँ तक आ पहुँची है। डोनाल्ड ट्रम्प के ही जस्टिस डिपार्टमेंट ने असांजे के खिलाफ आरोप तय किए थे, लेकिन पामेला एंडरसन चाहती हैं कि ये आरोप अब वही ख़त्म करें। उन्होंने एक बिकिनी पहन कर ‘जूलियन असांजे को माफ़ी दो’ वाला पोस्टर लेकर अपनी तस्वीर भी ट्वीट की थी और डोनाल्ड ट्रम्प को टैग किया था।

उन्होंने कहा कि उनके दोस्त जिस चीज के लिए जेल में हैं, उसके लिए किसी को भी जेल नहीं होनी चाहिए। पामेला एंडरसन प्लेबॉय सर्किट में ट्रम्प से मिल भी चुकी हैं और उनके जन्मदिन पर मेहमानों में उनका नाम भी शामिल था। पामेला ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन पर गर्व होने की बात कही थी। उन्होंने ट्रम्प से ‘सही कदम’ उठाने की दरख्वास्त करते हुए कहा कि वो अन्याय से घृणा करती हैं और साहस का साथ देती हैं, इसीलिए वो जानवरों के अधिकारों के लिए भी लड़ती रहती हैं।

पामेला एंडरसन ने कहा, “जूलियन असांजे को इसीलिए सज़ा मिल रही है, क्योंकि उन्होंने युद्ध अपराधियों की पोल खोली है। वो अपने साहस और ईमानदारी के लिए इस अन्याय का सामना कर रहे हैं। व्हिसल ब्लोअर होने के कारण राजनीतिक दुर्भावना से उनके खिलाफ काम किया जा रहा है। उन्होंने एक ही गलती की और वो है कानून में विश्वास रखना। वो एक आकर्षक व्यक्ति हैं और मैं उनसे मिलना पसंद करती हूँ।”

अमेरिका में ट्रम्प के खिलाफ दोबारा महाभियोग की तैयारी चल रही है। जैसा कि पिछले दिनों खबरों में छाया रहा, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हैंडल को ट्विटर से हमेशा के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। दुनिया के सबसे ताकतवर कहे जाने वाले पद पर बैठे व्यक्ति के ट्विटर अकाउंट को सस्पेंड करने का निर्णय ट्विटर की जिस अधिकारी ने लिया था, वो भारतीय मूल की 45 वर्षीय अधिवक्ता विजया गड्डे हैं।

निधि राजदान की ‘प्रोफेसरी’ से संस्थानों ने भी झाड़ा पल्ला, हार्वर्ड ने कहा- हमारे यहाँ जर्नलिज्म डिपार्टमेंट नहीं

एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान शुक्रवार (15 जनवरी 2021) से ही चर्चा में बनी हुई हैं। उन्होंने खुद को ‘फिशिंग अटैक’ का शिकार बताते हुए कहा था कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जो ऑफर मिला था, वह फेक था। कुछ महीने पहले निधि ने बताया था की मैसाचुसेट्स के कैम्ब्रिज स्थित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में उन्होंने बतौर एसोसिएट प्रोफेसर (जर्नलिज्म) का ऑफर मिला है।

निधि द्वारा यह खुलासा किए जाने के बाद कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई थी, हार्वर्ड ने बताया है कि उसके कैम्पस में न तो पत्रकारिता का कोई विभाग और न ही कोई कॉलेज है। यहाँ तक कि पत्रकारिता के एक भी प्रोफेसर नहीं हैं।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी स्थित नीमन फाउंडेशन के जर्नलिज्म लैब के सीनियर डायरेक्टर और पूर्व डायरेक्टर जोशुआ बेंटन ने ये खुलासा किया है। उन्होंने ये भी बताया कि हार्वर्ड में जर्नलिज्म पर फोकस रख कर सिर्फ मास्टर्स ऑफ लिबरल आर्ट्स नामक डिग्री की पढ़ाई होती है, जिसे कार्यरत पत्रकारों द्वारा ही पढ़ाया जाता है।

उधर अशोका यूनिवर्सिटी ने उन सभी ट्वीट्स को डिलीट करने का फैसला लिया है, जिसमें उसने निधि राजदान का परिचय हार्वर्ड के एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में दिया था। उसने इस मामले में क्रॉस वेरिफिकेशन करने की बात भी कही है। कौटिल्य वेबसाइट ऑफ पब्लिक पॉलिसी ने भी अपनी वेबसाइट पर कई जगह निधि राजदान का परिचय इसी रूप में दिया था। अब वो भी चुपके से इसे एडिट कर बदल रहा है।

Ashoka University is withdrawing tweets related to Nidhi Razdan
अशोका यूनिवर्सिटी ने डिलीट किए ट्वीट्स

अब उसने निधि राजदान का परिचय वरिष्ठ पत्रकार एवं NDTV की पूर्व एग्जीक्यूटिव एडिटर के रूप में दिया है। कई अन्य संस्थानों ने भी ट्वीट्स और पोस्टर्स डिलीट करने शुरू कर दिए हैं। लेकिन, उन सभी के स्क्रीनशॉट्स लोगों के पास पड़े हुए हैं और वो लगातार पोस्ट कर के याद दिला रहे हैं कि बिना पुष्टि किए इन संस्थानों ने लोगों को धोखा दिया। सितम्बर 2020 में ही एक व्यक्ति ने ध्यान दिलाया था कि ऐसा कोई कोर्स हार्वर्ड में है ही नहीं।

Kautilya School of Public Policy has edited their website regarding information about Nidhi Razdan
कौटिल्या ने एडवाइजरी बोर्ड से एडिट किया निधि का परिचय

निधि ने बताया था कि वो ज्वाइनिंग का समय पहले सितंबर 2020 मानकर चल रही थीं और अपनी नई जिम्मेदारियों को उठाने की तैयारी कर रही थीं। बाद में उन्हें कहा गया कि जनवरी 2021 में उनकी क्लास शुरू होगी। धीरे-धीरे उन्हें हर चीज इतना डिले होने पर असामान्य लगना शुरू हुआ। शुरुआत में वह कोरोना महामारी के कारण सब चीजों को नजरंदाज करती रहीं। लेकिन हाल ही में उन्हें इन चीजों को लेकर शक गहराया और उन्होंने यूनिवर्सिटी के शीर्ष प्रशासन से संपर्क किया। 

बाद में यूनिवर्सिटी के अनुरोध पर निधि की ओर से हर वह प्रमाण पेश किए गए जिसे देख वह सोच रहीं थीं कि उन्हें यह सब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से मिल रहा है। आखिर में उन्हें पता चला कि वास्तविकता में हार्वर्ड ने उन्हें प्रोफेसर बनने के लिए कोई ऑफर भेजा ही नहीं, बल्कि वह तो एक तरह के ऑनलाइन हमले का शिकार हुईं हैं। धोखाधड़ी करने वालों ने बड़ी चालाकी से उनके पर्सनल डेटा, कम्युनिकेशन को एक्सेस करने के लिए सारा खेल खेला।

दिल्ली दंगों के आरोपितों को बचाने वाले महमूद प्राचा को दिल्ली पुलिस ने किया एक्सपोज़, प्रशांत भूषण के आरोपों का भी दिया जवाब

सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण द्वारा दिल्ली पुलिस की छापेमारी पर सवाल खड़े किए जाने के बाद पुलिस ने बिन्दुवार तरीके से हर प्रश्न का जवाब दिया है। भूषण ने यह सवाल ISIS पोस्टर बॉय के वकील महमूद प्राचा के विरुद्ध की गई पुलिस की रेड पर खड़े किए थे।

बता दें कि पिछले दिसंबर में महमूद प्राचा के दफ्तर और आवास पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा की गई खोजबीन के संबंध में भूषण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।   

इस कॉन्फ्रेंस में भूषण ने न्यायालय के आदेश पर की जा रही इस जाँच को ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताया था और दिल्ली पुलिस की मंशा के अलावा जाँच पर भी कई सवाल खड़े किए थे। भूषण का आरोप था कि दिल्ली पुलिस प्राचा के कंप्यूटर की हार्ड डिस्क सीज़ करना चाहती थी और वारंट में इस कार्रवाई की अनुमति नहीं थी। भूषण के मुताबिक़ दिल्ली पुलिस ने महमूद प्राचा को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेकर धमकाया भी था। 

प्रशांत भूषण के इन कथित आरोपों का जवाब देते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह आदेश की अनदेखी करके खुद के खिलाफ अदालत की अवमानना के एक और मामले की ज़मीन तैयार रहे हैं। 

प्रशांत भूषण द्वारा जाँच पर लगाए गए आरोप और दिल्ली पुलिस द्वारा दिया गया उन सवालों का जवाब

1- भूषण के मुताबिक़ पुलिस जिस ईमेल की तलाश कर रही थी, उसे प्राचा ने पहले ही कमिश्नर सहित तमाम अधिकारियों को भेज दिया था। यह खोजबीन प्राचा से जुड़ी निजी जानकारी व प्राचा और उसके क्लाइंट्स के बीच हुई बातचीत की जानकारी लेने के लिए की गई थी, जिसे क़ानूनी आधार पर सुरक्षित रखा गया था। भूषण के इन आरोपों का जवाब देते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि इस खोजबीन का उद्देश्य प्राचा के कंप्यूटर में मौजूद तमाम सबूतों को अदालत के सामने पेश करना था, ताकि उस पर लगाए गए आरोपों को साबित किया जा सके।

2- प्रशांत भूषण का एक और बड़ा आरोप, जिसके मुताबिक़ दिल्ली पुलिस प्राचा की निजी जानकारी व प्राचा और उसके क्लाइंट्स के बीच हुई बातचीत की जानकारी लेना चाहती थी। इस पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि ऐसी कोई भी बातचीत जो आपराधिक गतिविधि की साज़िश रचने के लिए की गई थी, उसे क़ानूनी सुरक्षा के दायरे से बाहर रखा गया था। चाहे वकील को उस साज़िश की जानकारी हो या नहीं। दिल्ली पुलिस के बयान के मुताबिक़, “क़ानून आपराधिक गतिविधियों का षड्यंत्र रचने या उसमें शामिल होने पर सुरक्षा प्रदान नहीं करता है।” 

3- प्रशांत भूषण का कहना था कि जाँच अधिकारियों को सीआरपीसी की धारा 91 के तहत प्राचा को समन भेजना चाहिए था, जिससे वह मामले से संबंधित दस्तावेज़ पेश कर सकें। इसका जवाब देते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि एक आरोपित को अपना पक्ष रखने के लिए कई मौके दिए जाते हैं। 

दिल्ली पुलिस ने कहा, “सच ये है कि ऐसे लोग जो अदालत में रोज़ दाँव पेंच का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए यह स्वीकार करना मुश्किल हो जाता है कि क़ानून से ऊपर कोई नहीं है। प्राचा ने दिल्ली पुलिस की इस जाँच से बचने के लिए अपने हर संपर्कों का इस्तेमाल किया। जाँच के दौरान सहयोग करने की जगह प्राचा ने जाँच में बाधा डालने का हर सम्भव प्रयास किया और चश्मदीदों को डराने का प्रयास किया। उसने आरोपितों को निर्दोषों के रूप में पेश करने का प्रयास किया और निर्दोषों को गंभीर आरोपों के तहत दोषी साबित करने का प्रयास किया। वह झूठे बयान देकर और झूठे चश्मदीदों को पेश करके न्यायिक प्रक्रिया को भ्रमित करने का भी आरोपित है। एक वकील का काम लोगों को इस बात का सुझाव देना नहीं है कि वह कैसे अपराध करें।” 

सर्च वारंट पर लगाए गए आरोपों के जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह न्यायालय के लिए प्रशांत भूषण के मन में घृणा है। इसका मतलब साफ़ है कि वह देश की सबसे बड़ी अदालत का ज़रा भी सम्मान नहीं करते हैं। 

महमूद प्राचा के खिलाफ जाँच 

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने महमूद प्राचा के दफ्तर में छापेमारी की थी। प्राचा पर फ़र्ज़ी हलफ़नामा बना कर दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों के मासूमों को गलत बयान देने के लिए उकसाने का आरोप है। पुलिस ने उसके पास मौजूद दस्तावेज़ और उसकी लॉ फर्म की आधिकारिक ईमेल के आउटबॉक्स की जाँच की थी। इसके बाद प्राचा को भारतीय दंड संहिता की धारा 182, 193, 420, 468, 471, 472, 473, 120B के तहत गिरफ्तार किया गया था। 

छापेमारी के दौरान महमूद प्राचा ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ बदतमीजी की थी और जाँच रोकने का प्रयास किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 186, 353 और 34 के तहत निज़ामुद्दीन पुलिस थाने में एफ़आईआर दर्ज कराई थी।   

   

‘BJP वैक्सीन नहीं, नपुंसक बनाने की दवा के बाद अब जानलेवा टीका’: कोविड-19 को लेकर सपा की घटिया राजनीति जारी

कोरोनावायरस वैक्सीन को लेकर समाजवादी पार्टी की घटिया पॉलिटिक्स जारी है। अपने मास्टर अखिलेश यादव की तरह सपा नेता आईपी सिंह ने बर्ड फ्लू के बाद अब कोविड-19 वैक्सीन को लेकर एक विवादित बयान दिया है।

सपा नेता आईपी सिंह ने शुक्रवार (15 दिसंबर, 2021) को ट्वीट करते हुए कहा, “वैक्सीनेशन गरीबों की जान लेने वाला साबित हो सकता है। वैक्सीन का ट्रॉयल सबसे पहले भाजपाइयों के ऊपर किया जाए।” हालाँकि ट्रोल किए जाने के बाद उन्होंने तुरंत इस ट्वीट को डिलीट कर दिया।

बता दें इससे पहले विभिन्न राज्यों में फैले बर्ड फ्लू को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता आईपी सिंह ने अजीबो गरीब बयान दिया था जिसकी वजह से वे काफी विवादों में घिर गए थे। दरअसल, सपा नेता ने पीएम मोदी की एक तस्वीर को साझा किया था, जिसमे प्रधानमंत्री अपने आवास पर पक्षियों को दाना खिला रहे थे। इस तस्वीर को साझा करते हुए आईपी सिंह ने दावा किया था कि देश में बर्ड फ्लू इसलिए फैला क्योंकि पीएम मोदी ने पक्षियों को दाना खिलाया।

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के नेता लगातार स्वदेशी कोरोनावायरस वैक्सीन को बदनाम करने के लिए फर्जी खबरें फैलाकर दहशत का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी प्रमुख हों या उनके नेता कोई भी इस समय ऐसी घृणित राजनीति खेलने का अवसर छोड़ने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि वर्तमान में भारत कोरोनोवायरस के खिलाफ लड़ाई में एकजुट है।

इससे पहले खुद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोविड-19 वैक्सीन को लेकर विचित्र बयान देते हुए कहा था कि वो ‘भाजपा की कोरोना वैक्सीन’ नहीं लगाएँगे और जब उनकी सरकार आएगी तो वो लोगों को मुफ्त में वैक्सीन लगाएँगे। उन्होंने कहा, “मैं अभी कोरोना वायरस की वैक्सीन नहीं लगवाऊँगा। मैं भाजपा की वैक्सीन पर कैसे भरोसा कर सकता हूँ। जब हमारी सरकार बनेगी तो सभी को मुफ्त वैक्सीन मिलेगी। हम भाजपा की वैक्सीन नहीं लगवा सकते।”

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो सरकार ताली बजाने और थाली बजाने की बात कर रही थी, वे टीकाकरण के लिए इतनी बड़ी चेन क्यों बना रही है, वो ताली और थाली से ही कोरोना भगा दें न।

अखिलेश के इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी के नेता और मिर्जापुर के एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने भी वैक्सीन को लेकर बेहद ही घटिया दावा किया था। सपा नेता ने कहा कि अगर अखिलेश नहीं लगवा रहे है तो मतलब वैक्सीन में कुछ तो होगा जिससे नुकसान हो रहा होगा। बाद में लोग ये न कह दे कि जनसंख्या कम करने के लिए, मारने के लिए वैक्सीन लगा दी। कुछ भी हो सकता है, यह आपको नपुंसक भी बना सकता है।

केंद्रीय मंत्री को झूठा साबित करने के लिए रवीश ने फैलाई फेक न्यूज: NDTV की घटिया पत्रकारिता के लिए सरकार ने लगाई लताड़

कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के आंदोलन के बीच NDTV के रवीश कुमार एक बार फिर झूठ फैलाते हुए पकड़े गए हैं। 14 जनवरी 2021, रवीश कुमार के प्राइम टाइम में, उन्होंने भारत सरकार पर आरोप लगाया कि कृषि उत्पाद खरीद के संबंध में सरकार ने गलत डेटा प्रस्तुत किया। इसके बाद उनका ये फर्जीवाड़ा एक दिन भी नहीं चल सका और सरकार की ओर से खुद आज बताया गया कि रवीश के कार्यक्रम में पेश किए गए आँकड़े गलत हैं।

अपने कार्यक्रम में, मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पोस्ट किए गए एक इन्फोग्राफिक का जिक्र करते हुए, रवीश कुमार ने कहा था कि ग्राफिक में दिया गया डेटा गलत है। ये इन्फोग्राफिक, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल ने 11 जनवरी 2021 को पोस्ट किया था। इसमें जानकारी दी गई थी कि 10 जनवरी तक भारत सरकार ने 534 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की थी, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 423LMT थी। 

उन्होंने लिखा था, “किसान हितों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए प्रयासों से 10 जनवरी तक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 26% अधिक धान MSP मूल्य पर खरीदा गया, जिसकी मात्रा 534 LMT है। 1 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक के भुगतान से 71 लाख किसान लाभान्वित हुए।” उन्होंने कहा था किसान हित में MSP है, और रहेगा।

अब रवीश कुमार ने इन्हीं आँकड़ों को आधार बनाया और कहा कि फ़ूड एंड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन मिनिस्ट्री की वेबसाइट पर मौजूद डेटा के अनुसार, 2019-20 में कुल धान की खरीद 519 LMT थी, 423 LMT नहीं। इसलिए सरकार द्वारा दिखाई जा रही 26% वृद्धि सही नहीं है। प्रोग्राम में रवीश ने यह भी कहा कि या तो किसी ने भारत सरकार में गलती की है, या गलत संख्या का इस्तेमाल झूठ फैलाने के लिए किया जा रहा है। अब हकीकत क्या है? आइए समझाएँ।

असल में हकीकत ये है कि भारत सरकार में किसी ने झूठ नहीं फैलाया था बल्कि रवीश कुमार ने या तो गलती से या जानबूझकर फर्जी जानकारी देने के लिए पीयूष गोयल के ट्वीट की इमेज को क्रॉप किया था। जी हाँ, केंद्रीय मंत्री द्वारा साझा जानकारी में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि डेटा 10 जनवरी तक खरीद के लिए है। लेकिन सरकार को झूठा करार देने के लिए, रवीश कुमार ने पूरे साल के डेटा का इस्तेमाल किया। 

अब यहाँ हमें यह समझाने की आवश्यकता नहीं है कि किसी भी चीज की तुलना बराबर के महीनों या अवधि से की जाती है। ये नहीं होता कि आपने पूरे साल के आँकड़ों को किसी साल के 9 महीनों या 10 महीनों से तुलना की और अपने अजेंडे के मुताबिक आँकड़े निकाल कर दे दिए। इसलिए ये बिलकुल उचित बात है कि 2019-20 के लिए कुल धान खरीद 519 LMT थी, लेकिन ये भी सच है कि यह आँकड़ा इस वर्ष की खरीद की तुलना में नहीं हो सकता है क्योंकि अभी वर्ष समाप्त हो रहा है और खरीद अभी भी जारी है।  इस साल 10 जनवरी तक के आँकड़ों की तुलना पिछले साल की उसी तारीख तक के आँकड़ों से की जानी चाहिए, जो तब भी 423 LMT था।

साबित हो ही जाता है कि रवीश कुमार एक बार दोबारा अपने दर्शकों को बरगलाते हुए पकड़े गए। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस बार स्वयं केंद्र सरकार ने खुद इस पर संज्ञान लिया है। सरकार ने एनडीटीवी पत्रकार रवीश कुमार की व उनकी पत्रकारिता की निंदा की। सरकार ने यह पुष्टि की कि 10 जनवरी 2020 तक धान खरीद 423 LMT थी। और इसलिए, यह बिलकुल सही है कि उक्त अवधि में खरीद में 26% की वृद्धि हुई है।  मंत्रालय ने आगे रवीश कुमार के कार्यक्रम को घटिया पत्रकारिता और तथ्यों की अवहेलना करने वाला घिनौना प्रदर्शन कहा।

बता दें कि इस पत्र को प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा NDTV आचार समिति को भेजा गया है। इस पत्र में समझाया गया कि रवीश कुमार ने 2020-21 के लिए चल रही खरीद के साथ 2019-20 के पूर्ण वर्ष की खरीद की अनुचित तुलना की है। इसमें यह भी कहा गया है कि पीयूष गोयल के ट्वीट को टीवी कार्यक्रम में क्रॉप किया गया था, जो दर्शाता है कि यह एक कुकृत्य था।

पत्र में लिखा गया कि ऐसे संवेदनशील समय में जब किसान दिल्ली के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, उस समय रवीश कुमार ने महत्वपूर्ण तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है, जो किसानों को भ्रमित करता है और समाज में नकारात्मक भावनाओं को उकसाता है।

राम मंदिर के लिए इकबाल अंसारी भी करेंगे निधि समर्पण, कहा- यह श्रद्धा का सवाल है, इससे पुण्य मिलता है

बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी भी भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए समर्पण निधि देंगे। श्रीराम जन्मभूमि समर्पण निधि अभियान पर इकबाल अंसारी ने कहा कि बात राम मंदिर की है। बात धर्म की है। लोग बढ़-चढ़कर चंदा दें। मंदिर- मस्जिद के विवाद में लोग न आएँ।

मस्जिद मामले के पैरोकार रहे हैं इकबाल अंसारी ने कहा, “धर्म के काम में मेहनत की कमाई लगती है तो भगवान भी खुश होते हैं और अल्लाहताला भी खुश होते हैं। चंदा देने में कोई बुराई नहीं। लोग चंदा दे अब वह चाहे एक रुपए हों या एक लाख रुपए। राम मंदिर में सब का सहयोग होना चाहिए। चंदा देने से एक दूसरे की मुसीबत कम होती है। ये श्रद्धा का सवाल है। इससे पुण्य मिलता है। शबाब मिलता है।”

सिर्फ इकबाल अंसारी ही नहीं राम मंदिर निर्माण के लिए मुस्लिम मंच ने भी समर्पण निधि प्रदान की है। मुस्लिम मंच के सदस्य डॉ. तारिक शाह, चाँदनी शाह बानो ने भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए 11 हज़ार रुपए का चंदा प्रदान किया है। यहीं नहीं चाँदनी शाह बानो ने दिल खोल कर राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा देने की अपील की है।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट संघ परिवार और विश्व हिंदू परिषद के सहयोग से राम जन्मभूमि समर्पण निधि अभियान संचालित किया जा रहा है। निधि समर्पण अभियान के तहत जगह-जगह कार्यालय खोले गए हैं। इसी कार्यालय से कार्यकर्ता टोलियाँ बनाकर घर-घर जाएँगे और राममंदिर निर्माण के लिए समर्पण निधि की माँग करेंगे।

गौरतलब है कि इससे पहले इकबाल अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार द्वारा धन्नीपुर में आवंटित भूमि पर बनाई जा रही मस्जिद के डिजाइन को अस्वीकार करते हुए इसका विरोध किया था। अंसारी का कहना था कि मस्जिद का डिजाइन विदेशों की तर्ज पर है। और हम भारतीय शैली पर बनी मस्जिद को स्वीकार करेंगे।

इसके अलावा उन्होंने बाबर के नाम से मस्जिद के नामकरण करने के विचार का भी उन्होंने विरोध किया था। इकबाल अंसारी ने कहा कि मस्जिद को बाबर के नाम से नहीं जाना जाना चाहिए क्योंकि वह देश के मुसलमानों का मसीहा नहीं था।

केंद्र सरकार ने पंजाब से सबसे ज्यादा कपास और धान खरीदने का बनाया रिकॉर्ड: आंदोलन में शामिल ‘किसानों’ ने भी जताई खुशी

पंजाब के प्रदर्शनकारी जहाँ एक तरफ तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर परेड की तैयारी कर रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर पंजाब से चावल और कपास की उच्चतम खरीद का रिकॉर्ड दर्ज किया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI), जो कि केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय द्वारा शासित है, ने पंजाब में दिसंबर महीने में 85% कपास (कच्चा रुई) खरीदा है। दिसंबर के अंत तक 32.50 लाख क्विंटल में से 27.5 लाख क्विंटल कपास की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर CCI द्वारा की गई थी। उल्लेखनीय है कि पिछले साल यानी 2020 में राज्य में 52.50 लाख क्विंटल कपास का उत्पादन किया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, कपास की खेती करने वाले किसान राजवीर सिंह गोल्टा ने बताया कि उन्होंने 52 क्विंटल मीडियम लॉन्ग स्टेपल कपास (26.5-27 मिमी फाइबर लंबाई) को सीसीआई को बेचा और अक्टूबर के शुरुआती और मध्य दिसंबर के बीच अपनी फ़ाइबर फ़सल पर ₹ 5,665 प्रति क्विंटल का पूर्ण एमएसपी प्राप्त किया है। गोल्टा ने सरकार के फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर एमएसपी रेट के अनुसार हुई बिक्री से उन्हें काफी मदद मिली है, क्योंकि उस समय बाजार मूल्य लगभग 4600- 4800 प्रति क्विंटल था।

किसान गोल्टा ने इस बात पर जोर दिया, “एमएसपी से ऊपर जाने वाली कीमतें केवल बड़ी खेती वाले किसानों को फायदा पहुँचाएँगी। लेकिन मुझे इस बात से ऐतराज नहीं है। मेरे लिए यह बातें अधिक मायने रखती हैं कि फसल कटाई के तुरंत बाद मंडी में अपनी फसल लाते समय मुझे एक सुनिश्चित मूल्य मिल रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “एमएसपी उन किसानों के लिए आवश्यक है, जिनके पास अपनी फसल को रोके रखने और कीमतों में वृद्धि की प्रतीक्षा करने में कोई दिक्कत नहीं है। हमें अपनी रसोई चलाने और अगली फसल बोने के लिए धन की आवश्यकता होती है।”

रिपोर्ट के अनुसार, गोल्टा और एक अन्य किसान तिवाना, जो 21 क्विंटल कपास बेच चुका है, दोनों किसानों के विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए विरोध किया कि सरकार एमएसपी पर खरीद करे और पिछली बार सीसीआई ने देर से प्रवेश किया था, जिस वजह से निजी कंपनियों ने एमएसपी से नीचे की कपास खरीदी थी।

सरकारी इकाई द्वारा समय पर खरीद के कारण बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर कपास के मूल्य में बढ़त हुई है। इस वजह से छोटे किसानों को मदद मिली है, क्योंकि वे अब आधिकारिक एमएसपी 5,665 की तुलना में प्राइवेट 5800 प्रति क्विंटल के हिसाब से अपनी उपज निजी व्यापारियों और गिन्नर को बेचने में सक्षम हैं। बता दें इसी समय कापस (27.5-28.5 मिमी) की लंबी-स्टेपल वैरायटी अब 5900-5950 रुपए के हिसाब से 5725 प्रति क्विंटल के एमएसपी के मुकाबले बेची जा रही हैं।

कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के एक अधिकारी ने इस बारे में बात करते हुए उल्लेख किया, “हमने इस सीजन में रिकॉर्ड खरीददारी की है। वास्तव में हमने पिछले 10-12 दिनों से फसल खरीदना बंद कर दिया है। जब कीमतें MSP के ऊपर बिक रही हों तो कोई आवश्यकता नहीं है। छोटे और सीमांत किसानों ने वैसे भी अपनी फसल हमें बेच दी है।” बहरहाल, सरकारी एजेंसियों ने 1,998 प्रति क्विंटल के एमएसपी पर पंजाब राज्य से 202.78 लाख टन धान खरीदा है।

गौरतलब है कि देश में गणतंत्र दिवस समारोह के हफ्ते भर पहले भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार को कहा कि प्रदर्शनकारी 26 जनवरी को लाल किले से इंडिया गेट तक एक और जुलूस निकालेंगे और अमर जवान ज्योति पर तिरंगा भी फहराएँगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्व-घोषित किसान नेता राकेश टिकैत ने दावा किया कि यह एक ऐतिहासिक दृश्य होगा जहाँ एक तरफ किसान होंगे तो दूसरी तरफ जवान होंगे।

राकेश टिकैत की इस घोषणा के ठीक दो दिन पहले खालिस्तानी आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने गणतंत्र दिवस के मौके पर इंडिया गेट पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को 1.8 करोड़ रुपए का इनाम देने का ऐलान किया था। खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे पंजाब के किसानों को लिखे गए पत्र में कहा गया था कि 26 जनवरी को इंडिया गेट पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले व्यक्ति को 1.8 करोड़ रुपए का इनाम दिया जाएगा।

13 साल के नाबालिग का जबरन लिंग परिवर्तन करवाकर होता रहा बलात्कार, स्टेशन पर मँगवाई गई भीख: केस दर्ज

दिल्ली के गीता कॉलोनी इलाके से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने लोगों को अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। यहाँ कुछ दरिंदो ने मिलकर 13 साल के बच्चे का जबरन लिंग परिवर्तन करवाया और लंबे समय तक उसके साथ सामूहिक बलात्कार करते रहे। पुलिस को मामले की जानकारी तब हुई जब पीड़ित बच्चा आरोपितों के चंगुल से किसी तरह भागा और एक अंजान शख्स से मदद की गुहार लगाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्चे की मुलाकात आरोपितों से लगभग 3 साल पहले लक्ष्मी नगर में एक डांस इवेंट में हुई थी। वहाँ आरोपितों ने शुभम ( बदला गया नाम) से दोस्ती की और डांस सिखाने के बहाने उसे मंडावली ले गए। मंडावली में कुछ समय रह कर शुभम ने डांस प्रोग्राम में हिस्सा लिया, जिसके लिए आरोपित उसे पैसे देते थे।

थोड़े वक्त बाद आरोपित शुभम से मंडावली रहने की ही जिद्द करने लग गए। धीरे-धीरे वे लोग शुभम को नशीले पदार्थ देने लगे और कुछ ही दिनों में उसका जबरन लिंग परिवर्तन के लिए ऑपरेशन करवा दिया गया। उस समय शुभम की उम्र बस 13 वर्ष थी। शुभम ने पुलिस को बताया कि उसे ऑपरेशन के बाद हार्मोनल दवाएँ भी दी गईं, जिससे वो पूरी तरह से लड़की दिखने लगा।

शुभम का लिंग परिवर्तन करवाने के बाद आरोपितों ने मिलकर उसका सामूहिक बलात्कार किया और पैसे के बदले दूसरे लोगों से भी उसका बलात्कार करवाया। रेप के बाद दरिंदों ने उसे किन्नर बनाकर स्टेशन पर उससे भीख भी मँगवाई। शुभम ने बताया कि अभियुक्त स्वयं भी महिलाओं के वस्त्र पहनकर जिस्मफरोशी करते थे और आने वाले कस्टमरों को मार पीटकर उनके पैसे छीन लेते थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, शुभम और उसका दोस्त मार्च 2020 में लॉकडॉउन लगने के बाद किसी तरह से आरोपितों के चुंगल से भाग निकले। इसके बाद शुभम अपने दोस्त के साथ अपने घर पहुँचा। जहाँ शुभम की माँ ने दोनों को एक किराए के घर में रहने की जगह दिलवाई और वह खुद (माता-पिता) भी उनके साथ रहने लगे। लेकिन आरोपितों की नजरों से दोनों पीड़ित ज्यादा दिन तक बच नहीं पाए।

दिसंबर में आरोपितों को शुभम के घर का पता चल गया। उन्होंने उसके घर पहुँचकर उसके साथ खूब मारपीट की। उनके पैसे इत्यादि भी छीनकर उन्हें वापस अपने साथ ले गए। इस दौरान शुभम की की माँ को बंदूक दिखा कर चुप रहने की धमकी भी दी गई। शुभम ने बताया कि वापस ले जाने के बाद चार लोगों ने फिर से उनके साथ बारी-बारी दुष्कर्म किया।

हालाँकि, दो दिन बाद फिर दोनों पीड़ित वहाँ से भाग निकले और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाकर छिप गए। इस दौरान उन्हें एक ऐसा वकील मिला जिसने इंसानियत की असली मिसाल पेश की। वकील ने दोनों के हालात देखकर उन्हें दिल्ली महिला आयोग के दफ्तर ले गया। जहाँ से उन्हें बचा लिया गया।

दिल्ली महिला आयोग की सदस्य सारिका चौधरी ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए केस को धारा 377, 363, 326, 506, 341 और पॉक्सो के तहत मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने अब तक 2 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है और बाकी की तलाश जारी है। वहीं शुभम ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष से मुलाकात की और उन्हें भी अपनी दर्द भरी कहानी सुनाई।

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा, “ये मामला बेहद ही संगीन और दिल दहलाने वाला है। 13 वर्ष की उम्र में ही छोटे से बच्चे का जबरन लिंग परिवर्तन करवाकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया जाने लगा एवं उसे जिस्मफरोशी के व्यापार में धकेल दिया गया। ये एक बहुत बड़ा रैकेट नजर आता है। किस्मत से दोनों पीड़ित वहाँ से बच निकले और दोनों की जिंदगी बच सकी। पुलिस को जल्द से जल्द सभी आरोपितों को गिरफ्तार करना चाहिए और उन्हें ऐसी सजा मिले जो वो कभी भूल ना पाएँ।”

अजीत भारती छोड़ रहे हैं ऑपइंडिया, ऑक्सफोर्ड से आया बुलावा | Ajeet Bharti roasts Nidhi Razdan

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ये ऑपइंडिया संपादक को असोसिएट प्रोफेसर बनने का बुलावा आया है, अतः वो अब ऑपइंडिया से जा रहे हैं।

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कॉन्ग्रेस नेता ने दिया ममता बनर्जी को विलय का सुझाव, कहा- BJP को हराने का नहीं है कोई दूसरा विकल्प

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले वहाँ राजनीतिक उठा-पटक शुरू हो गई है। हाल में ममता बनर्जी के करीबी सौगात राय ने कॉन्ग्रेस और लेफ्ट पार्टियों को टीएमसी के साथ आने की सलाह दी और अब कॉन्ग्रेस ने टीएमसी को सुझाया है कि वह उनके साथ जुड़ जाएँ क्योंकि वह अकेले बीजेपी के ख़िलाफ़ नहीं लड़ पाएँगे।

जानकारी के मुताबिक, कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आगामी चुनावों में अकेली बीजेपी के खिलाफ नहीं लड़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें (ममता बनर्जी) कॉन्ग्रेस में शामिल होना चाहिए क्योंकि बंगाल में कॉन्ग्रेस के बिना बीजेपी को सत्ता में आने से रोक पाना असंभव है। 

उनका तर्क है कि कॉन्ग्रेस ने भारत में लगभग 100 सालों तक बीजेपी जैसे दलों के खिलाफ गठबंधन करके भारत में एक धर्मनिरपेक्ष माहौल बनाए रखा था। कॉन्ग्रेस नेता टीएमसी पर पलटवार करते हुए कहते हैं कि ममता बनर्जी को TMC छोड़ देना चाहिए और आज ही कॉन्ग्रेस से हाथ मिलाना चाहिए।

लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी कहते हैं कि ममता बनर्जी समझ रही हैं कि बंगाल में BJP को रोकने के लिए उनके पास कोई चारा नहीं है। BJP के खिलाफ लड़ने के लिए ममता बनर्जी की नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस की अगुवाई में आना आवश्यक है। 

उनके अनुसार ममता बनर्जी के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है। कॉन्ग्रेस नेता ने आगे कहा कि अब टीएमसी सोच रही है कि कॉन्ग्रेस के बिना राज्य में उसका रहना मुश्किल होगा और कॉन्ग्रेस पार्टी भी यही सलाह देती रही है।

शुक्रवार को 24 परगना जिले के बारासात के अदालत परिसर में खड़े होकर कॉन्ग्रेस नेता ने कहा, “टीएमसी पहले खुद को देखे। पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक पार्टियों को लाने वाले पहले खुद को देखें। हम हमेशा से सेकुलर रहे हैं। हम सेकुलर पार्टी के साथ लड़ना चाहते हैं। यह हमने बहुत पहले कहा था। हम तृणमूल कॉन्ग्रेस की तरह नहीं हैं, जो आज सेकुलर है, कल तटस्थ और परसों तानाशाही दिखाएगी। हम ऐसा नहीं करते हैं।” 

चौधरी का कहना है, “ममता दीदी को सब पता है। कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ गईं और तृणमूल कॉन्ग्रेस का जन्म हुआ, इसलिए TMC छोड़कर कॉन्ग्रेस में आना समझदारी है। सभी समस्याओं का हल है। ममता बनर्जी तृणमूल के बड़े और छोटे नेताओं से लगातार बात किए बगैर खुद सोनिया गाँधी के पास जा सकती हैं। वह सोनिया गाँधी को जानती हैं, वह दिल्ली जा सकती हैं और उनसे मिल सकती हैं।”