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पूजा भारती के फेसबुक पोस्ट पर गंदे कमेंट करने वाला गिरफ्तार, हाथ-पैर बाँध डैम में फेंक दी गई थी मेडिकल छात्रा

झारखंड के गोड्डा की रहने वाली, हजारीबाग मेडिकल कॉलेज की छात्रा पूजा भारती पूर्वे हत्‍याकांड में रवि पांडेय को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने युवती के फेसबुक पोस्ट पर अश्‍लील टिप्‍पणी करने वाले इस युवक को रविवार (जनवरी 17, 2021) को हजारीबाग से गिरफ्तार किया। 

यह युवक हजारीबाग के डीसी के फर्जी फेसबुक अकाउंट से युवती के पोस्‍ट पर अश्लील टिप्पणी करता था। वह मार्खम कॉलेज का छात्र है। पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भेज दिया है। रवि पांडेय पर आइटी एक्‍ट की धाराओं में सदर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।

पुलिस पूजा हत्‍याकांड में इसे अहम सुराग मानकर चल रही है। अभी आगे की जाँच जारी है। गिरफ्तार किए गए छात्र रवि कुमार पांडेय के फर्जी फेसबुक अकाउंट को पुलिस खँगाल रही है। संभव है कि पुलिस जल्द ही किसी ठोस नतीजे पर पहुँचे और पूजा भारती की हत्‍या की गुत्‍थी सुलझा ले। 

इस बीच रामगढ़ के एसडीपीओ प्रकाश चंद्र ने कहा कि अब तक की तफ्तीश में यह पता चला है कि छात्रा की हत्‍या कहीं और की गई। इसके बाद लाश को ठिकाने लगाने के‍ लिए हाथ-पैर बाँधकर पतरातू डैम में फेंक दिया गया। उनके मुताबिक हजारीबाग मेडिकल कॉलेज की छात्रा पूजा भारती का शव हाथ-पैर बँधे हालत में 12 जनवरी को पतरातू डैम में तैरता हुआ पाया गया था। पुलिस पदाधिकारी ने कहा कि हम तथ्यों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या है पूरी घटना

पूजा भारती परीक्षा देने के लिए घर से निकली और लापता हो गई। बाद में उसकी लाश पतरातू डैम (Patratu Dam) से 12 जनवरी, 2021 सुबह बरामद हुई। 22 साल की पूजा भारती गोड्डा की रहने वाली थी।

रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि लड़की का शरीर बँधा हुआ था और उसे बाँध में डुबोकर बेरहमी से मार दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह तथ्य सामने आई है कि पूजा को जिन्दा ही डैम में फेंक दिया गया था। 

मेडिकल बोर्ड की मौजूदगी में हुए पोस्टमॉर्टम में पूजा भारती के पेट से पानी निकला। डॉक्टर्स का कहना था कि मरे हुए व्यक्ति के पेट में पानी नहीं पहुँच पाता है, जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि पूजा भारती को जिन्दा ही बाँधकर पानी में फेंक दिया गया।

पोस्टमॉर्टम में मृतका के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले थे। हत्या से पहले बलात्कार की आशंका की जाँच के लिए सैम्पल भेजे जा चुके हैं और इस पर अभी रहस्य बना हुआ है।

‘शक है तो गोली मार दो’: इफ्तिखार भट्ट बन जब मेजर मोहित शर्मा ने आतंकियों के बीच बनाई पैठ, फिर ठोक दिया

हरियाणा के रोहतक में आज भी पैरा स्पेशल फोर्स के ऑफिसर मेजर मोहित शर्मा को उनकी बहादुरी के लिए घर-घर में याद किया जाता है। मरणोपतरांत अशोक चक्र से सम्मानित इस हुतात्मा ने साल 2009 में उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एक सैन्य ऑपरेशन के दौरान अंतिम साँस ली थी। लेकिन, साल 2004 में इनके द्वारा किया गया एक ऑपरेशन आज भी कइयों के लिए प्रेरणा है।

शिव अरूर और राहुल सिंह की किताब ‘इंडिया मोस्ट फीयरलेस 2’ में  इस बात का जिक्र है कि कैसे मेजर मोहित शर्मा ने इस्लामी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन में घुसपैठ करके दो खूँखार आतंकियों को मारा। 

दक्षिण कश्मीर से 50 किमी दूर शोपियाँ में मेजर ने अपने ऑपरेशन को अंजाम दिया था। मेजर ने इस काम के लिए सबसे पहले अपना नाम और हुलिया बदला। उन्होंने लम्बी दाढ़ी-मूँछ रख कर आतंकियों की तरह अपने हाव-भाव बनाए। फिर इफ्तिखार भट्ट नाम के जरिए वह अबू तोरारा (Abu Torara) और अबू सबजार ( Abu Sabzar) के संपर्क में आए।

इसके बाद मेजर ने बतौर इफ्तिखार भट्ट दोनों हिजबुल आतंकियों को ये कहकर विश्वास दिलाया कि भारतीय सेना ने उनके भाई को साल 2001 में मारा था और अब वह बस सेना पर हमला करके बदला चाहते हैं। उन्होंने अपने मनगढ़ंत मंसूबे बताकर आतंकियों से कहा कि इस काम में उन्हें उन दोनों की मदद चाहिए।  मेजर शर्मा ने दोनों आतंकियों से कहा कि उन्हें आर्मी के चेक प्वाइंट पर हमला बोलना है और उसके लिए वह जमीनी काम कर चुके हैं।

मेजर शर्मा के इस ऑपरेशन में आतंकियों ने कई बार उनसे उनकी पहचान पूछी। लेकिन वह कहते, “मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। मुझको सीखना है।” तोरारा ने तो कई बार उनकी पहचान के बारे में उनसे पूछा। लेकिन आखिरकार वे मेजर शर्मा के जाल में फँस गए और मदद करने को राजी हो गए। आतंकियों ने उन्हें बताया कि वह कई हफ्तों तक अंडरग्राउंड रहेंगे और आतंंकी हमले के लिए मदद जुटाएँगे। किसी तरह मेजर ने उन्हें मना ही लिया कि वह तब तक घर नहीं लौटेंगे जब तक चेक प्वाइंट को उड़ा नहीं देते।

देखते ही देखते आने वाले दिनों में दोनों आतंकियों ने सब व्यवस्था कर ली। साथ ही पास के ग्रामों से तीन आतंकियों को भी बुला लिया। जब तोरारा को दोबारा संदेह हुआ तो मेजर ने उससे कहा, “अगर मेरे बारे में कोई शक है तो मुझे मार दो।” अपने हाथ से राइफल छोड़ते हुए वह आतंकियों से बोले, “तुम ऐसा नहीं कर सकते, अगर तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं है। इसलिए तुम्हारे पास अब मुझे मारने के अलावा कोई चारा नहीं है।”

मेजर की बातें सुनकर दोनों आतंकी असमंजस में पड़ गए। इतने में मेजर मोहित शर्मा को मौका मिला और उन्होंने थोड़ी दूर जाकर अपनी 9 mm पिस्टल को लोड कर दोनों आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। उन्होंने दो गोलियाँ आतंकियों के छाती पर मारी और एक सिर में। इसके बाद वह उनके हथियार उठाकर भागकर नजदीक के आर्मी कैंप में गए।

इस ऑपरेशन के 5 साल बाद कुपवाड़ा के एक सैन्य ऑपरेशन में वह स्वयं भी बलिदान हो गए। अपने आखिरी समय में भी मेजर ने अपने कई साथियों को सुरक्षित बचाया। आखिर में सीने में गोली लगने के कारण दम तो़ड़ने वाले मेजर मोहित शर्मा के शूरता के किस्से आज भी समय-समय पर दोहराए जाते हैं। हाल में उनकी कहानी नेशन फर्स्ट, ऑलवेज और एवरीटाइम नाम के ट्विटर अकॉउंट पर एक पूरे स्टोरी थ्रेड में शेयर की गई है।

हिंदूफोबिक कंटेट से लेकर वामपंथियों की सरपरस्ती तक, अमेजन प्राइम वाली अपर्णा पुरोहित की कारस्तानी कई

भारत में ‘अमेज़न प्राइम’ की कंटेंट हेड अपर्णा पुरोहित के खिलाफ भाजपा नेताओं ने आवाज़ उठाई है और कंपनी से उन्हें बरखास्त करने की माँग की है। भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ स्क्रीनशॉट्स शेयर कर दावा किया कि वे वामपंथी झुकाव वाली हैं। अपर्णा पुरोहित ने सद्गुरु जग्गी वासुदेव के खिलाफ भी पोस्ट शेयर किया था। उसमें उन्हें ‘फ्रॉड’ बताया गया था।

एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने CAA और NRC के खिलाफ चल रहे दुष्प्रचार अभियान का भी साथ दिया था और वरुण ग्रोवर की कविता ‘हम कागज़ नहीं दिखाएँगे’ को आगे बढ़ाया था। उन्होंने लिखा था कि वरुण ग्रोवर ने इन शब्दों को काफी अच्छे से पिरोया है। CAA विरोधी आंदोलन के दौरान वामपंथी मीडिया की खबरों को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा था- ‘यही है विकास का सच’ और मोदी सरकार पर कटाक्ष किया था।

जामिया हिंसा मामले में भी उन्होंने हिंसा करने वाले कट्टर इस्लामी छात्रों का साथ दिया था। भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने एक पत्र लिख कर ऑपइंडिया की खबर कंपनी के कंट्री हेड को भेजते हुए ‘अमेज़न प्राइम’ पर चल रहे हिन्दूविरोधी कंटेंट्स को लेकर चिंता जताई थी। इसमें उन्होंने लिखा था कि कैसे अपर्णा पुरोहित के अंतर्गत वीडियो प्लेटफॉर्म पर हिन्दू विरोधी कंटेंटस परोसे जा रहे हैं।

इससे पहले ‘पाताल लोक’ नामक एक सीरीज में जम कर हिन्दू विरोधी कंटेंट्स डाले गए थे। उसमें भी देवी-देवताओं का अपमान, मंदिर का अपमान और जातिवादी कंटेंट्स थे। अपर्णा पुरोहित ही ‘अमेज़न प्राइम’ की क्रिएटिव डेवलपमेंट टीम की हेड हैं। साथ ही वो प्लेटफार्म की ‘ओरिजिनल वेब टीम’ की इंचार्ज भी हैं। अपर्णा पुरोहित जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पढ़ी हैं। उनका कहना है कि वे 15 वर्षों से फ़िल्में बनाने के काम में हैं।

एक फेसबुक पोस्ट में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करते हुए उन्हें ‘अपराधी’ की तरह दिखा चुकी हैं। उन्होंने जेएनयू में हुई वामपंथी छात्रों की हिंसा के लिए पीएम मोदी और अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया था। वो ‘द वायर’ जैसे मीडिया पोर्टलों के लेख भी शेयर करती रहती हैं। उन्होंने अरुंधति रॉय का वीडियो भी शेयर किया था। वह स्वरा भास्कर जैसों का बचाव करते हुए भी नजर आई थीं। उन्होंने CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान फेक न्यूज़ भी शेयर की थी।

बता दें कि वेब सीरिज ‘तांडव’ में हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाले दृश्यों तथा डायलॉग को लेकर मचे बवाल के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि सीरीज से विवादित दृश्यों को हटा देना ही सबसे उचित होगा। इस बाबत लखनऊ मध्य के हजरतगंज थाने में रविवार (जनवरी 17, 2021) को केस भी दर्ज किया गया था।

लखनऊ पुलिस के 4 अधिकारी मुंबई रवाना, ‘तांडव’ के डायरेक्टर और स्टारकास्ट से होगी पूछताछ

अमेजन प्राइम की वेब सीरिज ‘तांडव’ को लेकर लखनऊ में दर्ज एफआईआर पर कार्रवाई शुरू हो गई है। लखनऊ पुलिस के तेजतर्रार अधिकारियों की टीम आगे की कार्रवाई के लिए मुंबई रवाना हो गई है।

वेब सीरिज के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआर दर्ज होने के बाद 4 पुलिस अधिकारी मुंबई गए हैं। ये अधिकारी फिल्म के निर्माता-निर्देशक और कलाकारों से पूछताछ करेंगे। बता दें कि हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरिज में हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले सीन हैं।

इससे पहले लखनऊ के हजरतगंज में अमेजन प्राइम की इंडिया हेड अपर्णा पुरोहित, तांडव के डायरेक्टर अली अब्बास जफर, प्रोड्यूसर हिमांशु कृष्ण मेहरा, लेखक गौरव सोलंकी और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। हजरतगंज के वरिष्ठ उपनिरीक्षक अमरनाथ यादव ने इस संबंध में मामला दर्ज कराया है। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई वेब सीरिज ‘तांडव’ को लेकर कई लोगों ने आपत्ति जताई है।

क्या है विवाद?

थाने में रविवार (जनवरी 17, 2021) रात दर्ज एफआईआर में कहा गया कि वेब सीरिज के पहले एपिसोड में हिंदू देवी-देवताओं का गलत चित्रण किया गया है जिससे धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं। इसमें अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल भी किया गया है, जिससे लोगों में काफी आक्रोश है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वेब सीरिज के निर्माता-निर्देशक, लेखक समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

केंद्र ने भी माँगा जवाब

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भी वेब सीरिज ‘तांडव’ में हिंदू देवी-देवताओं का उपहास उड़ाने संबंधी शिकायतों का संज्ञान लिया है और अमेजन प्राइम वीडियो से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण माँगा है। केंद्रीय सूचना मंत्रालय ने रविवार (जनवरी 17, 2021) को नोटिस जारी किया। इस मसले पर सोमवार तक जवाब देने को कहा गया था।

इससे पहले भाजपा नेता राम कदम की शिकायत पर मुंबई पुलिस की तरफ से ‘तांडव’ के मेकर्स को समन जारी किया गया था। सीरिज के खिलाफ धारा 295A, आईटी एक्ट धारा 67 ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के वकील आशुतोष दुबे ने भी अली अब्बास जफर और अमेजन प्राइम वीडियो को हिंदूफोबिक कंटेंट के लिए कानूनी नोटिस भेजा था।

वहीं बसपा प्रमुख मायावाती ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “तांडव वेब सीरिज में धार्मिक व जातीय आदि भावना को आहत करने वाले कुछ दृश्यों को लेकर विरोध दर्ज किए जा रहे हैं। जो भी आपत्तिजनक है उन्हें हटा दिया जाना उचित होगा ताकि देश में कहीं भी शांति, सौहार्द व आपसी भाईचारे का वातावरण खराब न हो।”

बता दें कि सैफ अली खान, डिंपल कपाड़िया, सुनील ग्रोवर, तिग्मांशु धूलिया, डिनो मोरिया, कुमुद मिश्रा, मोहम्मद जीशान अय्यूब, गौहर खान और कृतिका कामरा की ‘तांडव’ में मुख्य भूमिका है। फिल्मकार अली अब्बास ज़फर ने हिमांशु किशन मेहरा के साथ मिलकर राजनीति पर आधारित इस सीरीज का निर्माण एवं निर्देशन किया है। इसकी कहानी गौरव सोलंकी ने लिखी है।

मुनव्वर फारूकी को गाड़ी से ले जाएगी UP पुलिस, आरफा ने कहा – ‘मुस्लिम होना एकमात्र क्राइम’

पिछले 18 दिनों से इंदौर की जेल में कैद कथित कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी (Munawar Faruqui) को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) ले जाया जा रहा है और वो भी ‘गाड़ी’ में। कॉमेडी के नाम पर हिंदू देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के चलते मुनव्वर फारूकी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में अप्रैल, 2020 में एक केस दर्ज हुआ जिसके सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने इंदौर सेंट्रल जेल में प्रोडक्शन वारंट जारी किया था।

फारूकी को 1 जनवरी को धार्मिक भावनाएँ आहत करने के लिए इंदौर में गिरफ्तार किया गया था। मुनव्वर के साथ नलिन यादव, प्रखर व्यास, प्रियम व्यास और एडविन एंथनी नाम के 04 और लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘दी वायर’ की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी के एक ट्वीट को रीट्वीट करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “डेनमार्क के दुपन्नी अखबार में पैगंबर का कार्टून छपने पर भारत की गलियों में फूट फूट कर मातम मनाने वाले मुन्ना भाई जर्नलिस्ट माँ सीता का अपमान करने वाले शोहदे के जुतियाए जाने पर कलप रहे, MP पुलिस ने हिसाब किया है, बाकी हिसाब करने UP पुलिस पहुँची है। गाड़ी से लाएँगे फर्जी कामेडियन को।”

इससे पहले, आरफा खानम ने ट्वीट में लिखा था, “इंदौर पुलिस ने मीडिया में यह स्वीकार करने के बावजूद कि उन्हें मुस्लिम हास्य कलाकार के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला, अब यूपी पुलिस उसे गिरफ्तार करना चाहती है। वह पहले ही 18 दिन जेल में रह चुका है। उसकी मुस्लिम पहचान ही उसका एकमात्र अपराध है। भारत माता की जय!”

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुनव्वर के खिलाफ पिछले साल अप्रैल माह में दर्ज एक मामले को लेकर प्रोडक्शन वारंट जारी किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुनव्वर फारूकी को अपनी गिरफ्त में लेने के लिए इंदौर सेंट्रल जेल और सीजेएम कोर्ट के समक्ष 7 जनवरी को प्रोडक्शन वारंट प्रस्तुत किया। बताया जा रहा है कि 19 अप्रैल, 2020 में आशुतोष मिश्रा नामक एक अधिवक्ता की शिकायत पर प्रयागराज जिले के जॉर्ज टाउन पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ दर्ज एक मामले में यह प्रोडक्शन वारंट पेश किया गया है।

पुलिस ने आरोपित पर भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 153A (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295A (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, धर्म का अपमान कर किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने का इरादा) और धारा 65 और 66 आईटी एक्ट, 2008 के तहत मामला दर्ज किया था।

यह मामला फारूकी द्वारा अपलोड एक यूट्यूब वीडियो पर आधारित है। इसमें उसने हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करते हुए, गोधरा ट्रेन जलने के मामले में हिंदुओं की मौत का मजाक उड़ाते हुए और नरसंहार में आरएसएस और अमित शाह की भूमिका पर जोर दिया था।

‘टॉप और ब्रा उतारो’ – साजिद खान ने जिया को कहा था, 16 साल की बहन को बोला – ‘…मेरे साथ सेक्स करना है’

यौन शोषण के आरोपित व बॉलीवुड फिल्म निर्माता साजिद खान के ख़िलाफ़ एक बार फिर सोशल मीडिया पर आवाज उठनी शुरू हो गई है। इस बार दिवंगत अभिनेत्री जिया खान की बहन करिश्मा की एक वीडियो क्लिप शेयर करके बताया जा रहा है कि साजिद खान ह्यूमर के नाम पर किस तरह लड़कियों से सेक्स की बातें किया करता था।

ये क्लिप बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री का एक हिस्सा है। इसमें करिश्मा कहती हैं, “मुझे याद है कि मैं अपनी बहन(जिया) के साथ साजिद खान के घर गई थी। उस समय मैं शायद सिर्फ़ 16 साल की थी। हम लोग किचन टेबल के पास थे। मैंने पतली स्ट्रिप वाला टॉप पहना था और टेबल पर झुकी हुई थी।” 

वीडियो में आगे जिया की बहन कहती हैं, “वो मुझे लगातार देख रहा था और उसने अचानक कहा- “ओह इसे मेरे साथ सेक्स करना है।” मेरी बहन जिया फौरन मेरे पक्ष में आई और कहा, “तुम क्या कह रहे हो।”

साजिद खान ने कहा, “देखो- ये कैसे बैठी है।” इस पर मेरी बहन ने कहा, “अरे नहीं। ये मासूम है और छोटी भी। वो ये सब नहीं चाहती।” इसके बाद करिश्मा ने बताया कि वो अपनी बहन के साथ वहाँ से चली आई। लेकिन उन्होंने वीडियो में बताया कि उन्हें बहुत हैरानी और घिनौना महसूस हो रहा था। जिया की बहन कहती हैं कि जब साजिद खान ने उनकी बहन से टॉप उतारने को कहा था, तब वह घर आकर बहुत रोईं थीं।

जिया खान की बहन करिश्मा बताती हैं:

“वो रिहर्सल का समय था। वह स्क्रिप्ट पढ़ रही थी, तभी उसने (साजिद) ने उससे उसका टॉप और ब्रा हटाने को कहा। उसे नहीं समझ आया कि वो क्या करे। उसने कहा था कि अभी तो फिल्म शुरू भी नहीं हुई और ये सब अभी से हो रहा है। वो घर आकर बहुत रोई थी। उसका कहना था कि उनके पास कॉन्ट्रैक्ट हैं। अगर मैंने छोड़ा तो मुझ पर मुकदमा होगा। अगर नहीं छोड़ा तो मेरा यौन उत्पीड़न होगा। हर स्थिति हारने वाली है।'”

बीबीसी की इस वीडियो क्लिप को सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। इसे अभिनेत्री कंगना रनौत ने शेयर करके लिखा है, “उन्होंने जिया को मार डाला, उन्होंने सुशांत को मार डाला और उन्होंने मुझे मारने की कोशिश की, लेकिन वे आजाद घूमते हैं, माफिया का पूरा समर्थन है, हर साल मजबूत और सफल हो रहे हैं। पता है कि दुनिया आदर्श नहीं है या तो आप शिकार या शिकारी हैं। आपको कोई नहीं बचाएगा, आपको खुद को बचाना होगा।”

गौरतलब है कि अभी हाल में बीबीसी ने ‘डेथ इन बॉलीवुड’ शीर्षक के साथ जिया खान की मृत्यु पर तीन वीडियो डॉक्यूमेंट्री की है। ये सीरीज केवल यूके में देखी जा सकती है। इसी सीरीज में एक वीडियो क्लिप जिया खान की बहन करिश्मा की है। जिसमें उन्होंने साजिद पर उक्त आरोप लगाए हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि साजिद खान के साथ जिया ने हाउसफुल 4 में काम किया था। इस फिल्म में कई अन्य नामी कलाकार थे। साल 2018 में साजिद के ऊपर मी टू के तहत आरोप लगने शुरू हुए और देखते ही देखते इस सूची में कई नाम जुड़े। आज करिश्मा की वीडियो शेयर करके यही कहा जा रहा है कि इतने आरोपों के बाद भी साजिद को आज तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

कोरोना टीका से हुई मुरादाबाद ज‍िला अस्‍पताल के वार्ड ब्‍वॉय की मौत? जानिए, क्या है सच

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिला अस्पताल के वार्ड ब्‍वॉय महिपाल सिंह (46 साल) की कोरोना वैक्सीन लगने के 24 घंटे बाद अचानक हालत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि कोविड-19 से बचाव के लिए अस्पताल में शनिवार को वैक्सीन लगी थी। इसके बाद ही महिपाल की हालत बिगड़ी और मौत हुई। 

हालाँकि मुख्य चिकित्सा अधिकारी एमसी गर्ग ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए मृतक के परिजनों के दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि कोविड वैक्सीन के टीकाकरण से किसी की मौत संभव नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, महिपाल की मौत हार्ट अटैक से हुई है।

16 जनवरी को महिपाल को लगी थी वैक्सीन

16 जनवरी से पूरे भारत में कोविड-19 टीकाकरण की शुरुआत हुई थी। मुरादाबाद जिला अस्पताल में भी स्वास्थ कर्मचारियों को वैक्सीन का टीका लगाया गया था। जिला अस्पताल में तैनात महिपाल सिंह ने भी 16 जनवरी को 12 बजे के करीब कोविड वैक्सीन लगवाया था। जिसके बाद बेटे को अस्पताल बुलाकर घर वापस आ गए। उसी रात में इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी भी की थी। रविवार (जनवरी 17, 2021) को ड्यूटी से घर वापस आने के बाद अचानक महिपाल की तबीयत बिगड़ गई। जिसके बाद महिपाल को जिला अस्पताल लाया गया। जहाँ डॉक्टर ने उनको मृत घोषित कर दिया।

परिजनों का यह है आरोप

परिजनों का आरोप है कि कोरोना वैक्सीन की वजह से ही महिपाल की हालत बिगड़ी और मौत हो गई। ड्यूटी करके घर वापस आए तो तबीयत खराब थी। मृतक महिपाल के बेटे विशाल ने बताया कि जब सुबह पिता अस्पताल में ड्यूटी कर घर वापस आए तो उनकी तबीयत खराब थी। मैं घर पर नहीं था। मेरे पास फोन आया कि पापा की तबीयत बहुत खराब है। परिवार वाले उनको जिला अस्पताल ले गए जहाँ उनकी मृत्यु हो गई। पापा को निमोनिया थी। उनकी साँस फूल रही थी।

महिपाल सिंह की मौत के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी एमसी गर्ग भी उनके घर पहुँचे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा, “महिपाल सिंह हमारे जिला चिकित्सालय में वार्ड ब्‍वॉय के पद पर तैनात थे। उनकी शाम 6 बजे मृत्यु हो गई। मृतक को दोपहर में सीने में दर्द और साँस फूलने में दिक्कत हुई थी और उसके बाद उन्हें जिला चिकित्सालय में मृत अवस्था में ले जाया गया। 16 जनवरी को उनको करीब बारह बजे कोरोना वैक्सीन दी गई थी।”

सीएमओ ने आगे कहा, ” इनको दिन में सीने में जकड़न और साँस फूलने में दिक्कत हुई थी, इनकी उम्र 46 वर्ष थी। मृत्यु के कारण की जाँच की जा रही है। पोस्टमार्टम कराएँगे। ये पहले कोरोना संक्रमित नहीं थे। वैक्सीन का कोई रिएक्शन प्रतीत नहीं होता है। रात में इन्होंने नाइट ड्यूटी भी की थी, कोई दिक्कत नहीं थी।”

सीएमओ ने जारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट

बाद में सीएमओ की तरफ से पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी करते हुए बताया गया कि मौत का वैक्सीन से कोई संबंध नहीं है। डॉ. शशि भूषण, डॉ. आरपी मिश्रा, डॉ. निर्मल ओझा की टीम ने पोस्टमार्टम किया। वार्ड ब्‍वॉय की हार्ट अटैक से मौत होने की पुष्टि हुई। बुखार नहीं था, फेफड़ों में पस पाया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमसी गर्ग ने बताया कि तीन डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया है। हार्ट अटैक की वजह से वार्ड ब्‍वॉय की मौत हुई है। कोरोना वैक्सीनेशन की वजह से मौत नहीं हुई है। 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट (साभार: News18)

पोस्‍टमार्टम र‍िपोर्ट में एक ओर चौंकाने वाला सच सामने आया है। च‍िक‍ित्‍सकों के मुताब‍िक सामान्‍य मनुष्‍य का हर्ट 800 ग्राम का होता है, लेकिन वार्ड ब्‍वॉय का द‍िल 500 ग्राम का निकला। इसका कारण क्‍या है, यह जाँच का व‍िषय है। उन्होंने यह भी बताया कि मुरादाबाद में 479 स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना का टीका लगाया गया था। महिपाल के अलावा सभी की हालत ठीक है।

महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक के दामाद समीर खान को कोर्ट से राहत नहीं, ड्रग्स मामले में एनसीबी ने किया था गिरफ्तार

एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक के दामाद समीर खान को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उसे ड्रग केस में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। सोमवार (जनवरी 18, 2021) को उसे मेडिकल के लिए ले जाया गया। इसके बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ उसे कोई राहत नहीं मिली।

नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 13 अक्टूबर को समीर खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने एनसीबी को समीर खान की 18 जनवरी तक कस्टडी दी थी। अब उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

दामाद की गिरफ्तारी के बाद नवाब मलिक ने कहा था, ”कोई भी आदमी कानून से ऊपर नहीं है। इसे बिना किसी भेदभाव के लागू किया जाना चाहिए। मैं अपनी न्यायपालिका में बहुत विश्वास और इसका सम्मान करता हूँ।”

दरअसल, ड्रग्स और बॉलीवुड से जुड़े मामलों की जाँच के दौरान एनसीबी को यह पता चला था कि इस मामले के एक आरोपित और समीर खान के बीच 20,000 रुपयों का ऑनलाइन लेन-देन हुआ है। इस मामले में ब्रिटिश नागरिक करण सजनानी और दो अन्य आरोपितों को 200 किलो प्रतिबंधित ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया गया था। दो अन्य आरोपितों में रहिला फर्नीचरवाला और उनकी बहन शाइस्ता फर्नीचरवाला थे। रहीला फर्नीचरवाला फिल्म अभिनेत्री दीया मिर्जा के पूर्व प्रबंधक हैं।

बता दें कि इसी ड्रग केस को रिपब्लिक मीडिया समूह ने प्रमुखता से अपने टीवी चैनल पर चलाया था। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार पर भी कई तरह के सवाल उठे और एडिटर अर्नब गोस्वामी पर उद्धव सरकार शिकंजा कसती गई। पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक ने दावा किया था कि रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी खुद पर लगे आरोपों और महाराष्ट्र सरकार द्वारा दर्ज कराए गए मामलों से निराश होकर आत्महत्या कर लेंगे।

शिवलिंग पर कंडोम: बंगाली अभिनेत्री सायानी घोष के खिलाफ ‘शिव भक्त’ नेता ने की कंप्लेन

बंगाली फिल्म अभिनेत्री सायानी घोष के ख़िलाफ़ मेघालय के पूर्व राज्यपाल व भाजपा के वरिष्ठ नेता तथागत रॉय ने शिकायत दर्ज करवाई है। यह शिकायत कोलकाता के रबींद्र सारोबार पुलिस थाने में शनिवार को दर्ज हुई।

16 जनवरी 2021 को दायर अपनी शिकायत मेंरॉय ने कहा, “मैं भगवान शिव का एक भक्त हूँ और मैंने 1996 में तिब्बत में कैलाश-मानसरोवर की यात्रा की ताकि उनकी पूजा कर सकूँ। संलग्न की गई तस्वीर में गंभीर रूप से मेरी धार्मिक मान्यताओं का अपमान किया गया। यह आईपीसी की धारा 295A के तहत अपराध है। मैं अनुरोध करता हूँ कि इस अपराध पर ध्यान दिया जाए और सायानी घोष के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई करें।”

बता दें कि शिकायत कराने से पहले भाजपा नेता ने सायानी घोष को ट्विटर पर चेतावनी दी थी कि उन्हें इस कृत्य के बदले अब परिणामों के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने लिखा था, “मिस सायानी घोष, आपने एक शिवलिंग पर कंडोम डाला है, जिसे मेरे सहित सभी हिंदू पवित्र से भी पवित्रतम मानते हैं!”

उन्होंने कहा था कि यह भारतीय दंड संहिता की धारा 295 ए के तहत एक संज्ञेय, गैर-जमानती अपराध है। इसलिए वह अब परिणाम के लिए तैयार रहें। उनके अलावा सायानी के ख़िलाफ़ गुवाहटी के पलटन बाजार थाने में भी शिकायत दर्ज हुई थी।

गौरतलब है कि साल 2015 में ट्विटर पर साझा किए गए एक हिंदूफोबिक ट्वीट के लिए सायानी घोष को सोशल मीडिया पर आलोचनाओं को सामना करना पड़ रहा है। 18 फरवरी 2015 को अभिनेत्री ने एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें एक महिला को पवित्र हिंदू प्रतीक शिवलिंग के ऊपर कंडोम डालते हुए दिख रही थी। उन्होंने इस तस्वीर को कैप्शन दिया था ‘Gods cudnt have been more useful’ (भगवान अब और उपकारी नहीं हो सकते)।

बता दें कि ट्वीट पर विवाद होने के बाद अभिनेत्री ने इस हिंदूफोबिक ट्वीट को हैकर द्वारा किया गया ट्वीट बताया था। उन्होंने दावा किया था कि अपमानजनक पोस्ट हैकर की करतूत थी। उन्होंने खुद के ट्वीट को ‘अप्रिय’ करार देते हुए लिखा था,

“डिअर ऑल, 2015 के एक पोस्ट मेरे ध्यान में लाया गया है जो अत्यंत अप्रिय है। आपकी सभी जानकारी के लिए बता दूँ कि मैंने 2010 में ही ट्विटर ज्वाइन कर लिया था लेकिन कुछ ही दिनों तक उपयोग करने के बाद मैंने उपयोग करना छोड़ दिया। हालाँकि अकाउंट बना रहा।”

ट्विटर पर भारी विरोध झेलने के बाद उनका कहना था कि वो लोगों की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने वाली सामग्री को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएँगी। बस उन्हें गलत न समझा जाए, क्योंकि उनके लिए धर्म बहुत मायने रखता है। हालॉंकि बाद में नेटिजन्स ने प्रमाणों के साथ अकाउंट हैक करने के उनके दावे का खंडन करते हुए उनकी मंशा पर सवाल उठाए थे।

कनाडाई सांसद ने की कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की निंदा, कहा- पुनर्वास के लिए PM मोदी के प्रयास सराहनीय

मार्खम यूनियनविले, कनाडा के सांसद बॉब सरोया (Bob Saroya) ने जनवरी, 1990 में सरहद पार के इस्लामी आतंकवादियों द्वारा कश्मीर की हिन्दू आबादी के नरसंहार की निंदा की और कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनके पुनर्वास के लिए किए जा रहे प्रयासों का समर्थन किया है।

समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर की हिंदू आबादी पर हमले की 31वीं वर्षगांठ पर कनाडा स्थित ओंटारियो इलाके के मार्खम यूनियनविले से सांसद ने एक बयान में लिखा, “मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने और मानवता के खिलाफ इस प्रकार के अपराधों को रोकने का आग्रह करता हूँ। कश्मीरी हिन्दुओं को अपने घर सुरक्षित वापस लौटने के लिए मैं भारत सरकार की मदद करने की योजना का समर्थन करता हूँ।”

Tahir Aslam Gora ताहिर गोरा طاہر گورا (@TahirGora) | Twitter
कनाडाई सांसद द्वारा दिया गया बयान सोशल मीडिया पर भी खूब शेयर किया जा रहा है

दुनियाभर में विस्थापित कश्मीरी पंडित हर साल 19 जनवरी को ‘प्रलय दिवस’ (होलोकॉस्ट/एक्सोडस डे) के रूप में मनाते हैं। यह जनवरी 1990 में कश्मीर घाटी की हिंदू आबादी पर बर्बर हमले की 31वीं वर्षगाँठ है, जो पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार इस्लामी आतंकवादियों द्वारा किया गया था।

जनवरी, 1990 में कश्मीरी पंडितों के भीषण नरसंहार और जातीय सफाए को याद करते हुए बॉब सरोया (Bob Saroya) ने लिखा, “मैं इस हत्याकांड में मारे गए, बलात्कार का शिकार हुए और घायल हुए सभी लोगों के परिवारों और दोस्तों के प्रति संवेदना व्यक्त करना चाहूँगा।”

बॉब सरोया ने कश्मीर में प्राचीन हिंदू मंदिरों की बदहाली की निंदा के साथ ही स्थानीय पंडित समुदाय की निष्ठा और साहस की सराहना की। सोशल मीडिया पर भी कनाडाई सांसद के कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार पर दिए गए इस बयान की तारीफ हो रही है।

उल्लेखनीय है कि कश्मीरी पंडितों ने अपना निर्वासन (बलपूर्वक निकाल देना) खत्म कराकर उनकी घर वापसी कराने की अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से की थी। इस नर संहार के परिणामस्वरुप कश्मीरी पंडितों की करीब 07 लाख की जनसंख्या पूरे विश्व में फैल गई और तबसे आज तक अपनी शर्तों पर अपनी मातृभूमि लौटने का इंतजार कर रही है।

19 जनवरी, 1990 के दिन मस्जिदों से घोषणाएँ कीं गईं कि कश्मीरी पंडित काफ़िर हैं और पुरुषों को या तो कश्मीर छोड़ना होगा, इस्लाम में परिवर्तित होना होगा या फिर उन्हें मार दिया जाएगा। मई, 1990 तक करीब 05 लाख कश्मीरी पंडित जान बचाने के लिए अपनी मातृभूमि छोड़ कश्मीर से पलायन कर चुके थे, जो स्वतंत्रता के बाद भारत का सबसे बड़ा पलायन माना जाता है।