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‘जेंटलमैन’ नहीं है स्टीव स्मिथ: पंत का बल्लेबाजी मार्क चुपके से मिटाया… लेकिन वीडियो हो गया वायरल, हो रही थू-थू

सिडनी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरा टेस्ट मैच चल रहा है, जिसके पाँचवें दिन सोमवार (जनवरी 11, 2021) को भारत को जीत के लिए 407 रनों का लक्ष्य मिला। सीरीज 1-1 की बराबरी पर खड़ी है, ऐसे में ये मैच दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। इस बीच ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान ऑस्ट्रेलिया के पूर्व टेस्ट कप्तान स्टीव स्मिथ पिच पर भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत द्वारा लिए गए गार्ड (बल्लेबाजी मार्क) को मिटाते दिखे।

ऋषभ पंत ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए भारत की जीत की राह आसान करते दिख रहे थे, लेकिन 118 गेंदों पर 97 रनों की उम्दा पारी खेल कर वो लंच के बाद अगले 10 ओवरों के भीतर ही आउट हो गए। क्रिकेट प्रशंसक टेस्ट रैंकिंग में दुनिया के नंबर-3 बल्लेबाज द्वारा इस तरह की हरकत किए जाने की निंदा कर रहे हैं। ऋषभ पंत ने आउट होने से पहले अनुभवी चेतेश्वर पुजारा के साथ 148 रनों की पार्टनरशिप की।

दरअसल, जब ड्रिंक्स ब्रेक हुआ तो स्टीव स्मिथ स्मिथ सहित ऑस्ट्रेलिया के कुछ खिलाड़ी पिच पर ‘शैडो बैटिंग’ प्रैक्टिस करने के बहाने से आए। इसकी आड़ में ही स्टीव स्मिथ ने बल्‍लेबाज के मार्क लेने वाली जगह को जूते से कुरेदना शुरू कर दिया। जब ऋषभ पंत वापस बल्लेबाजी करने आए तो उन्हें इसका एहसास हुआ और उन्होंने अंपायर से बात कर के फिर से गार्ड लिया। लोग इसे ध्यान भटकाने के लिए तरकीब कह रहे हैं।

दरअसल, बल्लेबाजी का मार्क लगा कर बल्लेबाज ये तय करता है कि वो स्टंप्स से कितनी दूर बैटिंग करने में कम्फर्टेबल है। अगर उस मार्क से वो हट जाता है तो आउट होने की आशंका रहती है। स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर इससे पहले भी बॉल टेम्परिंग के मामले में 1 साल का प्रतिबंध झेल चुके हैं। ‘जेंटलमैन गेम’ कहे जाने वाली क्रिकेट में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों द्वारा अक्सर इस तरह की हरकतें करने की खबरें आती रहती हैं।

इसी मैच के दौरान लगातार 2 दिन भारतीय खिलाड़ियों पर नस्लीय टिप्पणी की गई, जिसके बाद पुलिस ने 6 दर्शकों को स्टेडियम से निकाल बाहर किया। मोहम्मद सिराज ने इसकी शिकायत की थी। इससे 1 दिन पहले भी उन्होंने और जसप्रीत बुमराह ने दर्शक दीर्घा से नस्लीय टिप्पणी की शिकायत की थी। BCCI पहले ही इस सम्बन्ध में CA के समक्ष शिकायत दर्ज करा चुका है। सचिन तेंदुलकर समेत दुनिया भर के दिग्गजों ने इस हरकत की निंदा की है।

‘WhatsApp और फेसबुक पूरे भारत में हो बैन’: व्यापारी संघ CAIT ने मोदी सरकार को लिखा पत्र, राष्ट्रीय सुरक्षा की बात

‘अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (CAIT)’ ने भारत सरकार से माँग की है कि सोशल मीडिया एप्स व्हाट्सप्प (Whatsapp) और फेसबुक को प्रतिबंधित किया जाए। संगठन ने केंद्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद को पत्र लिख कर ये माँग की है। संगठन ने Whatsapp की नई प्राइवेसी नीतियों के आलोक में ये माँग की। चूँकि सोशल मीडिया जायंट फेसबुक ही Whatsapp की पैरेंट कंपनी है, इसीलिए उसे भी प्रतिबंधित करने की माँग की गई है।

‘द कन्फेडरशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT)’ ने कहा कि जो भी व्यक्ति इस एप का प्रयोग करेगा, नई प्राइवेसी नीतियों के बाद उसकी सभी तरह के व्यक्तिगत डेटा, वित्तीय लेनदेन, कॉन्टेक्ट्स और लोकेशन सहित कई प्रकार के महत्वपूर्ण सूचनाएँ कंपनी के पास चली जाएगी। साथ ही आशंका जताई गई है कि इसका उपयोग किसी भी तरीके से किया जा सकता है, जिसके बारे में कुछ भी साफ़-साफ़ नहीं बताया गया है।

व्यापारियों के संगठन ने कहा कि या तो व्हाट्सप्प को नई प्राइवेसी पॉलिसी को लागू करने से रोका जाए, या फिर उस पर और फेसबुक पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। CAIT ने कहा कि भारत में फेसबुक के 20 करोड़ से अधिक यूजर हैं और उन्हें ऐसी सूचनाओं का एक्सेस देना न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था, बल्कि सुरक्षा के लिए भी खतरा है। जबकि व्हाट्सप्प ने कहा है कि वो पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई नीति ला रहा है।

PTI के एक मेल का जवाब देते हुए कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि फेसबुक से सुरक्षित होस्टिंग सर्विस पाने के लिए ये निर्णय लिया गया है और इससे फेसबुक को व्हाट्सप्प यूजर्स के साथ अपने कम्युनिकेशंस के प्रबंधन में मदद मिलेगी। साथ ही दावा किया कि इससे इस पर कोई असर नहीं पड़ता है कि आप किससे क्या बातें कर रहे हैं और फेसबुक के साथ डेटा शेयरिंग प्रैक्टिस में भी बदलाव नहीं किया जा रहा है।

CAIT के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि बदली हुई प्राइवेसी पॉलिसी भारत के संविधान में निहित नागरिकों के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है, इसीलिए इस मामले में सरकार का हस्तक्षेप ज़रूरी है। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक के अस्सिस्टेंट वाईस प्रेजिडेंट (AVP) जय कोटक ने कहा कि अमेरिका की 5 गैर-जिम्मेदार और अनिर्वाचित प्राइवेट तकनीकी कंपनियाँ एकतरफा रूप से और एक ही समय पर दुनिया में किसी को भी इंटरनेट से बाहर का रास्ता दिखा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि आज इन कंपनियों ने उनके साथ ऐसा किया है, जिसके विचारों से आप सहमत नहीं हैं, तो ये सही कदम नहीं हो जाता। उन्होंने कई सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा डोनाल्ड ट्रम्प को ब्लॉक किए जाने और व्यक्तिगत सूचनाओं तक उनकी पहुँच को लेकर ये टिप्पणी की। भारत में भी व्हाट्सप्प की नई प्राइवेसी पालिसी के विरोध में लोग ‘Signal’ और ‘Telegram’ जैसे एप्स का प्रयोग कर रहे हैं।

दुनिया की सबसे ‘शक्तिशाली’ भारतीय मूल की महिला, जिसने ट्रम्प के ट्विटर हैंडल को किया सस्पेंड

जैसा कि पिछले दिनों खबरों में छाया रहा, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हैंडल को ट्विटर से हमेशा के लिए सस्पेंड कर दिया गया। दरअसल, दुनिया के सबसे ताकतवर कहे जाने वाले पद पर बैठे व्यक्ति के ट्विटर अकाउंट को सस्पेंड करने का निर्णय ट्विटर की जिस अधिकारी ने लिया था, वो भारतीय मूल की हैं। 45 वर्षीय विजया गड्डे अधिवक्ता हैं और ट्विटर की अधिकारी भी। उनके नेतृत्व में ही ये निर्णय लिया गया।

शुक्रवार (जनवरी 8, 2021) को डोनाल्ड ट्रम्प के ट्विटर हैंडल्स को पहली बार ब्लॉक किया गया था, जब कैपिटल हिल में कॉन्ग्रेस की कार्यवाही के दौरान भीड़ ने अंदर घुस कर हिंसा की। विजया गड्डे ट्विटर की लीगल पालिसी, ट्रस्ट और सेफ्टी मामलों की मुखिया हैं। उन्होंने ही अपने ट्विटर हैंडल के माध्यम से सूचना दी कि आगे हिंसा की आशंका के कारण डोनाल्ड ट्रम्प के हैंडल को स्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया गया है।

विजया गड्डे ने बताया कि कंपनी ने अपनी नीतियों को अमल में लाने सम्बन्धी विश्लेषण भी प्रकाशित किया है। उन्होंने इसका लिंक शेयर करते हुए लोगों से कहा कि वो यहाँ अधिक पढ़ सकते हैं। विजया गड्डे टेक्सास में बड़ी हुई हैं, जिसे डोनाल्ड ट्रम्प का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। उनके पिता गल्फ ऑफ मेक्सिको के तेल रिफायनरीज में बतौर केमिकल इंजीनियर कार्यरत रहे हैं। इसके बाद ये परिवार ईस्ट कोस्ट की तरफ चला गया, जहाँ न्यू जर्सी में उनकी शिक्षा-दीक्षा हुई।

कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और न्यू यॉर्क लॉ यूनिवर्सिटी से कानूनी कोर्सेज पूरी करने वाली विजया गड्डे ने लगभग एक दशक तक बे एरिया में स्थित कानूनी कंपनियों में काम किया, जो टेक स्टार्टअप्स के साथ मिल कर काम करती थीं। इसके बाद 2011 में उन्होंने ट्विटर ज्वाइन किया। कॉर्पोरेट अधिवक्ता के रूप में पिछले कुछ वर्षों में ट्विटर की नीतियों और फैसलों में उनकी छाप रही है। वैश्विक नीतियों में ट्विटर के दखल की योजना भी उनकी ही है।

ओवल ऑफिस में वो CEO जैक डॉर्सी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात कर चुकी हैं और जब जैक नवम्बर 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे, तब भी वो वहाँ मौजूद थीं। जैक द्वारा जारी की गई एक तस्वीर में वो दलाई लामा का हाथ पकड़े खड़ी थीं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ‘अब तक की सबसे शक्तिशाली सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव’ के रूप में उनका चित्रण किया जाता है।

InStyle मैगजीन ने उन्हें उन 50 महिलाओं की सूची में स्थान दिया था, जो दुनिया में बदलाव ला रही हैं। वो इन्वेस्टमेंट कलेक्टिव कंपनी ‘Angels’ की भी संस्थापक हैं। साथ ही वो कंपनियों में महिलाओं को बराबर वेतन मिले, इसके लिए अभियान चलाने का दावा भी करती रही हैं। 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान पैसे लेकर ट्विटर पर राजनीतिक प्रचार नहीं किया जाएगा – ये निर्णय भी उनका ही था। ट्विटर के कर्मचारी समस्याओं के निवारण के लिए जैक की जगह उनसे ही संपर्क करते हैं।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थक ट्विटर से प्रतिबंधित होकर पहले ही ‘Parler’ एप पर जा चुके थे। अब ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम ने डोनाल्ड ट्रम्प के हैंडल्स को सस्पेंड/ब्लॉक कर दिया। वो ‘Parler’ पर गए तो उस एप को ही गूगल ने प्ले स्टोर से हटा दिया। एप्पल ने भी नोटिस थमा दिया। वामपंथी नरेंद्र मोदी के ट्विटर हैंडल को सस्पेंड करने के लिए भी अभियान चला रहे हैं और उन पर तमाम आरोप लगा रहे हैं।

माँ सीता को ‘गाली’ देने वाले TMC सांसद पर बंगाल पुलिस ने ही किया FIR: वीडियो हुआ था वायरल

देवी सीता पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले तृणमूल कॉन्ग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी कड़ी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। अभद्र टिप्पणी करने के बाद मचे सियासी बवाल के बाद उन पर एफ़आईआर दर्ज की गई है। तृणमूल सांसद के बयान वाले वीडियो की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना भी हो रही है। कल्याण बनर्जी पर हावड़ा के गोलीबारी थाने में एफ़आईआर दर्ज की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ एफ़आईआर में ऐसा कहा गया है कि देवी सीता पर की गई इस अभद्र टिप्पणी की वजह से बंगाली समाज के भावनाओं को ठेस पहुँची है। यह एफ़आईआर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के सदस्य आशीष जायसवाल ने दर्ज कराई है। उनका इस मुद्दे पर कहना है कि हमारी भावनाएँ आहत हुई हैं, हम चाहते हैं कि टीएमसी सांसद अपने इस बयान पर माफी माँगें। कल्याण बनर्जी पश्चिम बंगाल के सेरामपोर से तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद हैं। इसके अलावा वो कलकत्ता हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता भी हैं। 

टीएमसी सांसद के इस बयान पर भाजपा नेताओं की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया आई थी। भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी ने कहा था कि उनका बयान गलत है। उनके अनुसार, “ममता बनर्जी की पार्टी को तुष्टिकरण की राजनीति पसंद है। यही वजह है कि वो हमारी परम्परा रामायण और महाभारत का अपमान कर रहे हैं। जिसे हम बचपन से पढ़ते आ रहे हैं, जनता इसका जवाब उन्हें 2021 में देगी।”

इसके बाद उन्होंने ममता सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल में महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद सबसे ज़्यादा बलात्कार होते हैं। ममता बनर्जी को सबसे पहले अपना राज्य देखना चाहिए, इसके बाद उत्तर प्रदेश, राजस्थान या बिहार को देखना चाहिए। 

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से तुष्टिकरण को लेकर सवाल किया था। उन्होंने पूछा था कि क्या हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाकर ही ममता दीदी की तुष्टिकरण की राजनीति करना चाहती हैं?  

भाजपा नेता और मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय ने भी कल्याण बनर्जी पर देवी सीता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए वीडियो पोस्ट किया। वहीं बीजेपी के चुनाव प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कल्याण बनर्जी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि बीजेपी की लोकप्रियता के कारण टीएमसी में दरार है। उन्होंने कहा, “ये सब बकवास और मूर्खतापूर्ण टिप्पणी है। मैं इस पर प्रतिक्रिया भी नहीं दूँगा क्योंकि इस तरह की बकवास फालतू लोग ही करते हैं। मैं बस यही सलाह देना चाहूँगा कि उन्हें मनोचिकित्सक के पास जाना चाहिए।”

दरअसल कल्याण बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था, “सीता राम के पास जाकर बोलीं कि मेरा सौभाग्य था कि रावण ने मेरा हरण किया। अगर तुम्हारे भगवाधारी चेलों ने मेरा हरण किया होता तो मेरा हाल यूपी के हाथरस जैसा होता।” इस विवादित बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।

बंगालियों के घर फूँको, पुलिस पर हमला: असम को जलाने की अखिल गोगोई की प्लानिंग, NIA चार्जशीट से खुलासा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने असम के धुर वामपंथी ‘एक्टिविस्ट’ अखिल गोगोई के खिलाफ दायर चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि वह असम में सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान राज्य में रहने वाली बंगाली आबादी के खिलाफ असम के लोगों को भड़काने के फ़िराक में था।

एनआईए की चार्जशीट के हवाले से ‘आवर नॉर्थईस्ट’ की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि गोगोई ने असम में समाज के दो वर्गों के बीच हिंसा भड़काने की साजिश रची थी। चार्जशीट में एक गवाह का उल्लेख है जिसने स्वीकार किया कि अखिल गोगोई ने 9 दिसंबर 2019 को विरोध प्रदर्शनों की योजना बनाने के लिए उसे बुलाया था और उससे कुछ हिंसक गतिविधि अंजाम देने के लिए कहा था।

अखिल गोगोई और गवाह के बीच हुई इस बातचीत के बाद, दोनों उसी दिन चबुआ के लिए रवाना हो गए। एनआईए ने बताया कि अखिल गोगोई और गवाह ने 6,000 से भी अधिक लोगों की भीड़ को संबोधित किया था। गोगोई ने अपने भाषण के दौरान भीड़ को उकसाया। इसके बाद भीड़ हिंसक हो गई और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पथराव के दौरान ड्यूटी पर मौजूद चबुआ का एक पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गया।

चार्जशीट में राज्य में असमिया और बंगाली लोगों के बीच दुश्मनी पैदा करने की गहरी साजिश का खुलासा हुआ। चार्जशीट में कहा गया है कि अखिल गोगोई के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी अमरावती इलाके में घरों को जलाने की योजना बना रहे थे, जो चबुआ में एक बंगाली आबादी वाला इलाका है। हालाँकि, प्रशासन द्वारा इस भयावह साजिश को विफल कर दिया गया था।

Copy of the chargesheet accessed by Our Northeast

चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि स्थिति हिंसक होने के बावजूद, अखिल गोगोई ने भीड़ को रोकने की कोशिश नहीं की बल्कि उसे और उकसाया। चार्जशीट में कहा गया है कि हिंसक भीड़ ने एक पुलिसकर्मी पर भी हमला करते हुए उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था।

चार्जशीट के अनुसार, हिंसा इतनी भयावह थी कि अखिल गोगोई के नेतृत्व में भीड़ द्वारा चबुआ रेलवे स्टेशन को भी जला दिया गया, जिसके चलते सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचा।

गौरतलब है कि गुवाहाटी हाई कोर्ट ने 7 जनवरी, 2021 को अखिल गोगोई की जमानत याचिका खारिज करते हुए विशेष एनआईए कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने कहा था कि असम में ऐंटी सीएए आंदोलन के दौरान जो हुआ था वह सत्याग्रह नहीं था, बल्कि गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) में परिभाषित टेररिस्ट ऐक्ट के तहत आता है।

जस्टिस कल्याण राय सुराना और अजीत बाठकुर की बेंच ने आदेश में कहा, “हिंसा का इस्तेमाल करते हुए अखिल के नेतृत्व वाली भीड़ ने अहिंसक आंदोलन की अवधारणा को ही खारिज कर दिया था। आंदोलन के जरिए सरकारी मशीनरी को कमजोर करने, आर्थिक नाकेबंदी, समुदायों के बीच नफरत फैलाने और शांति में बाधा उत्पन्न करके सरकार के प्रति अंसतोष पैदा करने की कोशिश की गई थी।” कोर्ट ने कहा कि इस तरह की गतिविधि यूएपीए की धारा 15 के तहत आतंकी कार्य के रूप में परिभाषित है।

बता दें कि अखिल गोगोई, कृषक मुक्ति संग्राम परिषद और राइजोर दल का नेता है। संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ कथित हिंसक प्रदर्शन के मामले में गोगोई को जोरहाट से दिसंबर 2019 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह गुवाहाटी केंद्रीय कारागार में बंद है।

नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी के ऑफिस में तोड़फोड़, पूर्वी मिदनापुर में BJP कार्यकर्ताओं पर हमला: TMC पर बंगाल में हिंसा का आरोप

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल (TMC) कॉन्ग्रेस के गुंडों पर एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं के साथ हिंसा करने का आरोप लगा है। रविवार (जनवरी 10, 2021) को पूर्वी मिदनापुर में टीएमसी और बीजेपी के कार्यकर्ता भिड़ गए।

पूर्वी मिदनापुर के कोंटाई में एक कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा हमला किए जाने के बाद लगभग 15 भाजपा कार्यकर्ता घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेता शुभेंदु अधकारी के नंदीग्राम कार्यालय में तोड़फोड़ की। घटना शनिवार (जनवरी 09, 2021) रात को हुई। बीजेपी ने घटनाओं में शामिल लोगों की गिरफ्तार की माँग की है। बता दें कि तृणमूल कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद शुभेंदु अधिकारी दिसंबर 2020 में भाजपा में शामिल हुए थे।

बीजेपी नेता कनीषा पांडा ने कहा कि टीएमसी बल प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा, “हम नंदीग्राम में टीएमसी कैडर की वजह से हुई घटना के खिलाफ हैं। हम उन्हें कहना चाहते हैं कि वे अपने बल का प्रयोग करके जो कुछ भी कर रहे हैं, वो इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आज प्रशासन उनके साथ है।”

उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से कहा है कि अगर वे कार्रवाई नहीं करते हैं और आरोपितों को गिरफ्तार नहीं करेंगे तो भविष्य की घटनाओं के लिए उनको जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसके खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”

TMC ने भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया

वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इस घटना के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है। सत्तारूढ़ दल ने कहा कि ‘पुराने’ भाजपा कार्यकर्ताओं ने नंदीग्राम कार्यालय में कथित रूप से तोड़फोड़ की है। टीएमसी ईस्ट मिदनापुर जिले के उपाध्यक्ष एसके सूफियान ने कहा, “वे (भाजपा) हमेशा झूठ बोलते हैं, और उन्हें झूठ बोलने की आदत है, उन्होंने टीएमसी का झंडा फाड़ा और ममता बनर्जी की तस्वीर जला दी। शुभेंदु अधिकारी के सहायक केंद्र को पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं ने तोड़ा, जो बैठक में उपस्थित थे और उन्होंने टीएमसी के खिलाफ आरोप लगाए।” उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी को टीएमसी को दोष देने के बजाय अपने कार्यकर्ताओं को नियंत्रित करना चाहिए।

‘सेठों के बनाए हुए गोदाम जला दो’: शायर मुनव्वर राणा ने किसानों के नाम पर संसद गिराने और आगजनी के लिए उकसाया

उर्दू शायर मुनव्वर राणा ने रविवार (जनवरी 10, 2021) को सोशल मीडिया पर अपने कविता के माध्यम से भीड़ को उकसाने का प्रयास किया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लोगों से संसद भवन गिराने और गोदामों को जला देने का आह्वान किया। हालाँकि अब उन्होंने यह ट्वीट डिलीट कर दिया है।

मुनव्वर राणा ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “इस मुल्क के कुछ लोगों को रोटी तो मिलेगी, संसद को गिरा कर वहाँ कुछ खेत बना दो। अब ऐसे ही बदलेगा किसानों का मुकद्दर, सेठों के बनाए हुए गोदाम जला दो। मैं झूठ के दरबार में सच बोल रहा हूँ, गर्दन को उड़ाओ, मुझे या जिंदा जला दो।”

Munawwar Rana’s now deleted tweet (image courtesy: @befittingfacts on Twitter)

इससे पहले राणा ने अपने बयान के जरिए पेरिस में शिक्षक का गला रेतने वाले आतंकी का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि अगर उस लड़के की जगह वह होते तो भी यही करते। विवादित शायर मुनव्वर राणा के इस बयान को लेकर काफी बवाल हुआ था। बता दें कि पिछले दिनों पेरिस में शिक्षक सैमुअल पैटी ने अपनी कक्षा में छात्रों के सामने पैगंबर मोहम्मद का विवादित कैरिकेचर दिखा दिया था। इसके बाद एक कट्टरपंथी छात्र ने उन्हें दिनदहाड़े बेरहमी से मार डाला था। 

अब कोई यह तर्क दे सकता है कि एक कवि के रूप में राणा उपमा या अलंकारों की बात कर सकते हैं। उनके कहने का मतलब वाकई में यह नहीं हो सकता कि गोदाम को आग लगा देना चाहिए, संसद को गिरा देना चाहिए। तो अब यह तर्क देने का कोई मतलब नहीं रहता है, क्योंकि उपमाओं के प्रयोग करने की क्रिएटिव लिबर्टी को पहले ही दरकिनार कर दिया गया है। 2013 में एक अन्य कवि और गीतकार जावेद अख्तर ने आजाद मैदान दंगों पर कविता लिखने के लिए एक महिला पुलिस अधिकारी को बर्खास्त करने की माँग की थी।

आजाद मैदान दंगा

11 अगस्त 2012 को, रजा अकादमी के नेतृत्व में मुस्लिम संगठनों ने असम और म्यांमार में मुसलमानों पर कथित अत्याचारों के विरोध में आजाद मैदान मैदान में हिंसा की थी। आजाद मैदान में मुस्लिम संगठनों द्वारा रखाइन दंगों और असम दंगों की निंदा करने के लिए विरोध-प्रदर्शन किया गया, जो बाद में दंगे में बदल गया।

असम और राखाइन दंगों की निंदा करने के लिए, रज़ा अकादमी ने विरोध रैली का आयोजन किया था। हालाँकि, एक कुख्यात समूह के पुलिसकर्मियों पर हमला करने के बाद विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें पुलिस की गोलीबारी में दो लोग मारे गए और 58 पुलिसकर्मियों सहित 63 लोग घायल हो गए।

दंगों के दौरान मौजूद पुलिस अधिकारी सुजाता पाटिल ने इस पर एक कविता लिखी थी। इसमें सुजाता ने उन चीजों का जिक्र किया था, जो उन्होंने वहाँ पर देखा था।

Article on Sujata Patil’s poem

जावेद अख्तर उनकी कविता से बेहद निराश हो गए और उन्होंने उनकी कविता को ‘सांप्रदायिक’ कहा।

इसके बाद सुजाता पाटिल को माफी माँगनी पड़ी, तब जाकर उनकी नौकरी बची। इस तरह सभी के लिए एक ही तरह का व्यवहार होना चाहिए। राणा को भी उनकी तथाकथित रचनात्मक स्वतंत्रता के लिए जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

कंगना और बीजेपी सांसदों को नोटिस भेजने वाले ‘किसान’ निकले AAP नेता, एक तो लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुका है

अभिनेत्री कंगना रनौत, केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे और भाजपा सांसद रवि किशन, मनोज तिवारी तथा रमेश बिधुड़ी को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजने वाले ‘किसान’ आम आदमी पार्टी के सदस्य निकले हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाँच ‘किसानों’ ने दिल्ली और उसके आसपास तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन करने वाले प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने के लिए पाँच नेताओं और मशहूर हस्ती के खिलाफ मानहानि का नोटिस भेजा था। अब यह पता चला है कि उन कथित किसानों में से 4 आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हैं।

बता दें आम आदमी पार्टी ने किसान आंदोलन की आड़ में नेताओं और मशहूर हस्तियों के खिलाफ मानहानि के मुकदमे दायर करने में दिल्ली सीमा पर प्रदर्शन कर रहे पाँच किसानों को अपनी ओर से कानूनी सहायता देने की घोषणा की थी।

अब यह खुलासा हुआ है कि नोटिस भेजने वाले किसान AAP की पंजाब इकाई के कार्यकर्ता हैं। ऐसे ही एक किसान नरेंद्र सिंह शेरगिल, जिसे आम आदमी पार्टी ने भाजपा सांसद रमेश बिधुड़ी को कानूनी नोटिस भेजने में मदद की, वह AAP सदस्य हैं और उन्होंने मोहाली से विधानसभा और रोपड़ से संसदीय चुनाव लड़ा है। एक अन्य प्रदर्शनकारी किसान जीवन ज्योत कौर, जिन्होंने कंगना रनौत को कानूनी नोटिस भेजा है, वो AAP पंजाब की महिला शाखा से जुड़ी हुई हैं।

इसी तरह खुद को किसान बताने वाले गुरिंदर सिंह बीरिंग, जिन्होंने बीजेपी सांसद रवि किशन को कानूनी नोटिस भेजा है, वो भी AAP से जुड़े है और 2017 विधानसभा चुनाव के लिए AAP के वॉर रूम का हिस्सा थे। भाजपा सांसद मनोज तिवारी को कानूनी नोटिस भेजने वाले सुखविंदर पॉल सुखी भी पंजाब के मनसा जिले में AAP से जुड़े हैं।

कथित तौर पर, पाँच में से चार तथाकथित किसान जिन्हें AAP ने मानहानि के लिए कानूनी नोटिस भेजने में मदद करने का दावा किया है, वे सक्रिय रूप से पार्टी से जुड़े हैं और इसके कार्यकर्ता भी हैं।

इस खुलासे के बाद आम आदमी पार्टी की बहुत किरकिरी हुई। इसके बाद AAP नेता राघव चड्ढा ने सफाई पेश की है। पार्टी के कार्यकर्ताओं (जिन्होंने किसानों के रूप में नोटिस भेजा था) का बचाव करते चड्ढा ने दावा किया कि उनमें से एक या दो पार्टी से जुड़े हो सकते हैं साथ ही वे किसान भी हैं।

वहीं लोगों को मुद्दे से भटकाने के लिए राघव चड्ढा ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, “ यह एक किसान और उसके परिवार द्वारा किए गया बलिदान है, जिसके चलते भोजन हमारे घरों, हमारी थालियों तक पहुँचता है और हम जो चाहते है वह खा सकते हैं। अगर कोई ईमानदार किसान को गाली देता है, तो यह भारत माता को गाली देने के समान है।”

चड्ढा ने दावा किया कि भाजपा नेताओं ने किसानों को आतंकवादी, देशद्रोही, दलाल, गुंडा, पाकिस्तान और चीन का एजेंट करार दिया है। उन्होंने कहा, “क्या हमारे किसान आतंकवादी जैसे दिखते है? मैं बीजेपी को बताना चाहूँगा कि हमारे किसानों के साथ बहुत कुछ हो गया। उनके साथ दुर्व्यवहार और उन्हें बदनाम किया जाता है। वे अब न्याय के दरवाजे पर दस्तक देना चाहते हैं और हम वास्तव में विश्वास करते हैं कि जीत उनकी होगी।”

उन्होंने कहा, यह स्पष्ट है कि पूरी भाजपा रणनीतिक रूप से किसानों के आंदोलन को समाप्त और बदनाम करने के लिए काम कर रही है।

यही नहीं AAP नेता ने यह भी दावा किया कि किसानों के खिलाफ गलत और तुच्छ प्रचार असहनीय था। चड्ढा ने कहा कि AAP देश के किसानों के इस लड़ाई में उनके साथ खड़े रहने की कसम खाता है और भाजपा नेताओं को सजा मिलने तक उन्हें सहायता प्रदान करेगा।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अभिनेत्री कंगना रनौत को जीवन ज्योत कौर द्वारा अपमानजनक टिप्पणी के लिए नोटिस भेजा गया। कंगना ने अपने ट्वीट के जरिए कथित तौर पर किसान की वृद्ध माँ को 100 रुपए में प्रदर्शन में शामिल होने वाली महिला बताया था।

बता दें हर बार जब आम आदमी पार्टी बौद्धिक रूप से कुछ करने का प्रयास करती है, तो अंततः उनका प्रयास मूर्खतापूर्ण व पूर्णतः राजनीति से प्रेरित साबित होता है, और इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है।

​हरियाणा: किसान ‘प्रदर्शनकारियों’ की हिंसा, CM खट्टर बोले- कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्टों का हाथ

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने करनाल जिले के कैमला गाँव में ‘किसान महापंचायत’ के कार्यक्रम स्थल पर तोड़फोड़ की कड़े शब्दों में निंदा की है। सीएम खट्टर ने इस पूरे घटनाक्रम में कॉन्ग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी का हाथ होने का आरोप लगाया है। खट्टर ने कहा कि किसान आंदोलन की आड़ लेकर कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी अपनी खोई जमीन हासिल करने की कोशिश में लगी हैं। 

सीएम खट्टर ने रविवार (जनवरी 10, 2021) शाम करनाल जिले के कैमला गाँव में प्रदर्शनकारी किसानों की ओर से ‘किसान महापंचायत’ के कार्यक्रम स्थल पर तोड़फोड़ किए जाने के बाद चंडीगढ़ में मीडिया को संबोधित किया।

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा, “जो कोई भी बोलना चाहता है, उसमें बाधा डालना सही नहीं है। मुझे नहीं लगता कि लोग डॉ. बीआर आंबेडकर की ओर से दिए गए प्रावधानों के उल्लंघन को बर्दाश्त करेंगे। कॉन्ग्रेस ने 1975 में लोकतंत्र को खत्म करने का प्रयास किया था। उस समय लोगों ने उनके घृणित कार्य की पहचान की और उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया।”

उन्होंने कहा, “हमारे राष्ट्र में एक मजबूत लोकतंत्र है, जहाँ सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। हमने इन कथित किसानों और नेताओं के बयानों को कभी नहीं रोका। उनका आंदोलन चल रहा है। COVID के बावजूद, हमने उनके लिए व्यवस्था की।”

दरअसल, हरियाणा में करनाल जिले के कैमला गाँव में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर लोगों को केंद्र के तीन कृषि कानूनों के फायदे बताने वाले थे। सीएम मनोहर लाल खट्टर 2000 किसानों की एक बड़ी सभा को संबोधित करने वाले थे।

रिपोर्ट के अनुसार, इस आयोजन के लिए कुल 1500 पुलिस और सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे और आने वाले प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए 7 चौकियाँ बनाई गई थी। पुलिस ने निर्माण सामग्री से लदे ट्रकों का उपयोग करते हुए कैमला गाँव की ओर जाने वाले सभी रास्तों को अवरुद्ध कर दिया था, लेकिन यह योजना विफल रही। प्रदर्शनकारी गाँव में जाने के लिए रास्ता बनाने से पहले दिल्ली-चंडीगढ़ राजमार्ग पर करनाल में बस्तर टोल प्लाजा के पास एकत्र हो गए।

प्रदर्शनकारियों ने हेलीपैड को तोड़ दिया

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एडीजीपी रैंक के अधिकारी को भी तैनात किया गया था। लेकिन किसान सभी बैरिकेड को तोड़कर आगे बढ़ गए। इस दौरान पुलिस के साथ किसानों की जबरदस्त झड़प भी हुई। पुलिस द्वारा रोके जाने के बावजूद किसानों ने कार्यक्रम स्थल पर लगे मंच को भी तोड़ दिया। आसपास लगे बैनरों को फाड़ दिया गया और हेलीपैड को भी नुकसान पहुँचाया गया, जहाँ सीएम खट्टर को उतरना था। इसकी वजह से अधिकारियों को सीएम के उतरने के लिए वैकल्पिक स्थल खोजने के लिए मजबूर होना पड़ा।

प्रदर्शनकारियों ने आयोजन स्थल पर की तोड़फोड़

इस बीच, पुलिस को बेकाबू भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले, वाटर कैनन और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। हालाँकि, प्रदर्शनकारी वहाँ पहुँचने में सफल रहे, जहाँ किसान महापंचायत कार्यक्रम आयोजित किया जाना था। नए कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए उन्होंने आयोजन स्थल पर तोड़फोड़ की, बैनर फाड़ दिए और कुर्सियाँ फेंक दी। उन्होंने टेंट भी उखाड़ दिए, ताकि सीएम को आयोजन रद्द करना पड़े।

आयोजन स्थल को नुकसान पहुँचाने के अलावा उन्होंने आयोजकों के साथ भी हाथापाई की। आयोजन में शामिल होने आए किसानों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे। बता दें कि किसान महापंचायत कार्यक्रम कृषि कानूनों को लेकर किसानों के एक वर्ग के बीच व्याप्त आशंकाओं को दूर करने के लिए था। हालाँकि, प्रदर्शनकारियों ने राज्य में भाजपा नेतृत्व पर इस तरह की बैठकें आयोजित करके किसानों को विभाजित करने का आरोप लगाया है।

पेंसिल से भाई-बहन ने 2100 पन्नों में लिख दी पूरी रामायण, एक की उम्र 9 साल तो दूसरी 6 वर्ष की

कोरोना संक्रमण काल की शुरुआत में हुए लॉकडाउन के दौरान जब सभी लोग महामारी से भयभीत होकर अपने-अपने घरों में बंद थे, तब राजस्थान के जालौर जिले के दो छोटे बच्चों ने समय का सदुपयोग करते हुए समाज के समक्ष आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। चौथी कक्षा में पढ़ने वाले माधव और तीसरी में पढ़ने वाली अर्चना ने दूरदर्शन पर रामायण देखकर 8 महीने के अंदर 2100 से अधिक पन्नों में पूरी रामायण लिख डाली है। इन्हें पूरा रामायण कंठस्थ याद भी है।

भाई-बहन की इस जोड़ी ने 20 कॉपियों का इस्तेमाल कर 2100 से अधिक पृष्ठों में संपूर्ण रामायण लिखकर सबको चौंका दिया है। महामारी के चलते स्कूल बंद होने पर दोनों ने खुद ही पूरी रामायण कलम और पेंसिल से लिख डाली। कहा जा रहा है इन दोनों बच्चों ने पूरी रामायण इस कदर याद कर ली है कि इनसे कुछ भी पूछा जाए ये बिना अटके दोहे, छंद, चौपाइयाँ सुना देते हैं।

9 वर्षीय माधव और उसकी 6 साल की बहन अर्चना ने रामचरितमानस के सातों कांड ज्यों के त्यों उतार दिए हैं।
माधव ने 14 कॉपियों में बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड और उत्तरकांड लिखा है, वहीं अर्चना ने छह कॉपियों में किष्किंधा कांड, सुंदर कांड और लंका कांड लिखा है। ये दोनों भाई-बहन आदर्श विद्या मंदिर जालौर के विद्यार्थी हैं।

माधव ने बताया कि दूरदर्शन पर प्रसारित रामायण देख कर इसे पढ़ने की इच्छा हुई। पहले परिवार के साथ और बाद में दोनों भाई-बहन ने मास पारायण और नवाह पारायण में श्रीरामचरितमानस का तीन बार पाठ किया। इसके बाद पिता द्वारा प्रोत्साहित करने पर दोनों बच्चों ने पूरी रामायण खुद से लिखने की ठान ली और यह कामयाबी हासिल की।

आदर्श विद्या मंदिर के प्रधानाध्यापक सत्यजीत चक्रवर्ती बताते हैं कि इससे बच्चों का संस्कृति और इतिहास से जुड़ाव होता है। वहीं लेखन में सुधार और पढ़ने-लिखने का प्रभाव भी बच्चों पर पड़ता है।