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एक नंबर का शराबी और नशेड़ी था जहाँगीर, एक बार में पी जाता था 20 ग्लास दारू: अंग्रेज अधिकारी की गर्लफ्रेंड को ताड़ता था

भारत के कुछ राज्यों में शराबबंदी इसीलिए हुई क्योंकि दारू पीकर लोगों को होश नहीं रहता था और वो अपनी सारी कमाई उसमें ही उड़ा देते थे, जिसका खामियाजा घर की महिलाओं को प्रताड़ना के रूप में भुगतना पड़ता था। लेकिन, भारत के इस्लामी आक्रांताओं में एक ऐसा भी बादशाह हुआ है, जिसने अंग्रेजों को सिर्फ अपना ड्रिंकिंग पार्टनर ही नहीं बनाया, बल्कि उन्हें भारत में रह कर यहाँ के लोगों को लूटने तक की अनुमति भी दे दी। शराबी जहाँगीर अंग्रेजों के साथ भी जम कर दारू पीता था।

वो सितंबर 1615 का महीना था, जब सर थॉमस रो ने अंग्रेजों की तरफ से बतौर राजदूत भारत में कदम रखा था। उस समय आगरा में जहाँगीर का दरबार लगा करता था और भारत में अपने पाँव पसारने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी ने किंग जेम्स को इस बात के लिए मना लिया कि वो विद्वान और चतुर थॉमस को आगरा के दरबार में भेजें। उससे पहले वो टैमवर्थ सांसद चुने जा चुके थे। थॉमस रो भारत आए ही नहीं, बल्कि जहाँगीर के फेवरिट भी बन गए।

इसका कारण था- अल्कोहल। जहाँगीर के बारे में कई इतिहासकारों ने माना है कि वो शराबी था। उसने शराब पीने के मामले में अपने सारे पूर्वजों के रिकॉर्ड्स तोड़ दिए थे और 1605 में गद्दी पर बैठने के साथ उसक ये शौक और परवान चढ़ा। वो शराब का इतना शौक़ीन था कि एक बार बैठता था तो 20 कप डबल डिस्टिल्ड दारू पी जाता था। बता दें कि जब भी शराब को गर्म किया जाता है और उसे भाप में बदल कर फिर से वापस शराब बनाया जाता है, तो इसे डिस्टिल करना कहते हैं।

वो गुरुवार की शाम को और शुक्रवार को नहीं पीता था। चूँकि इस दिन उसके पिता अकबर का जन्म हुआ था, इसीलिए वो इस दिन परहेज किया करता था। लेकिन, सबसे ज्यादा आश्चर्य वाली बात ये है कि जहाँगीर खुद तो इतना बड़ा शराबी था लेकिन उसने अपने दरबारियों के लिए इस पर प्रतिबंध लगा रखा था। 1616-19 तक आगरा के दरबार में सर थॉमस रो नियमित रूप से जाते रहे थे, इसलिए उन्होंने भी बादशाह की इस आदत के बारे में लिखा है।

1616 में उसने अजमेर में अपना जन्मदिन मनाया था और थॉमस रो को भी वहाँ बुलाया गया था, जहाँ उन्हें सोने के ग्लास में शराब पीने को दिया गया। थॉमस को इतना पिला दिया गया था कि उन्हें छींक पर छींक आ रही थी और बादशाह हँस रहा था। अब थोड़ी उस परिस्थिति की चर्चा कर लेते हैं, जिसने थॉमस रो को भारत में ला पटका था। दरअसल, अंग्रेजों को आसान जीत की आदत लग चुकी थी, लेकिन भारत में उनके लिए ये संभव नहीं था।

भारत में दिल्ली को जीते बिना दक्षिण की तरफ नहीं बढ़ा जा सकता था और मुगलों को जीतना इतना आसान नहीं था क्योंकि उन्होंने कई तौर-तरीके आजमा कर भारतीय राजाओं को हराया था और कुछ को साथी बना लिया था। अंग्रेजों को ये दाँव-पेंच समझने में कई वर्ष लग जाने थे। मुग़ल खुद आक्रांता थे, उनकी 40 लाख की विशाल फ़ौज थी और अव्वल तो ये कि भारत में कई राज्य थे जो आपस में ही लड़ते-मरते रहते थे।

ऐसे में अंग्रेजों ने मुगलों को अपना दोस्त बना कर भारत में व्यापार के जरिए पाँव पसारने और धीरे-धीरे यहाँ अपने पार्टनर बनाने की नीति पर जोर दिया। पुर्तगाली पहले से ही भारत में जमे हुए थे, उन्हें हटाना भी एक अलग समस्या थी। थॉमस रो अपने साथ कई शिकारी कुत्ते और ढेर सारी पेंटिंग्स के अलावा अन्य बहुमूल्य गिफ्ट लेकर आगरा आए थे। एक कूटनीतिज्ञ होने के कारण उन्हें पता था कि जहाँगीर शराबी है, इसीलिए वो अपने साथ रेड वाइन भी लाए थे।

जहाँगीर को राजकाज के अलावा इधर-उधर की बातें करने में भी खूब मजा आता था। वह थॉमस रो के साथ भी खूब विदेश की बातें करता था। लेकिन चालाक अंग्रेज को पता था कि उन्हें सबसे पहले यहाँ व्यापार बढ़ाने की अनुमति लेनी होगी। दोनों के बीच कई महीनों तक बातचीत चलती रही, लेकिन जहाँगीर व्यापार वाले मुद्दे को सुनता तक नहीं था। सूरत में अंग्रेज पहली फैक्ट्री स्थापित कर चुके थे, ऐसे में उन्हें उसके लिए भी कई फेवर चाहिए थे।

थॉमस रो जब भी इस पर कोई बात करते तो जहाँगीर बाद में बात करने का बहाना देकर इंग्लैंड और वहाँ के द्वीपों के बारे में पूछने लगता था। अंग्रेज अपने लोगों और व्यापारियों के लिए सुरक्षित रूट और माहौल चाहते थे। अंत में जहाँगीर अपने मुद्दे की बात पर आ गया और शराब के बारे में बातें करने लगा। अंग्रेजी शराब पी कर उसे काफी अच्छा लगता खासकर बियर के बारे में वो अक्सर पूछता था कि ये कैसे बनता है, क्या होता है।

वो ये जानने में भी उत्सुकता रखता था कि थॉमस रो कितनी शराब पीते हैं और दिन में कितनी बार पीते हैं। इसी तरह थॉमस रो जहाँगीर के शराब पार्टनर बन गए और उन्होंने अपना काम निकलवाना शुरू कर लिया। इस दौरान ही अंग्रेजों ने व्यापार में कई सहूलियतें ली। लेकिन, पुर्तगाली उनसे भी दो कदम आगे रहे थे और वो जहाँगीर के लिए और भी महँगे-महँगे गिफ्ट लेकर आते थे, जिससे उन्हें ज्यादा फायदा मिलता था।

एक और बात जानने लायक है कि थॉमस रो की कई सारी गर्लफ्रेंड्स थी, जिनमें से एक के चित्र से जहाँगीर खासा प्रभावित था और दावा करता था कि यहाँ के कलाकार उस चित्र को हूबहू बना सकते हैं। उसने उसे एक पत्र भी लिखा था। हालाँकि, जहाँगीर ने अंग्रेजों का दारू तो पिया लेकिन उनके लिए कोई बहुत बड़ा काम किया, इसका कहीं कोई प्रमाण नहीं मिलता। वो पुर्तगालियों को ज्यादा सहूलयितें दिया करता था।

थॉमस रो ने आगरा के दरबार के बारे में भी लिखा है, जहाँ जहाँगीर बैठ कर मुद्दों का निपटारा करता था। लेकिन, वो न तो एक अच्छा प्रशासक था और न ही मिलिट्री कमांडर। रो और उनके साथियों ने लिखा है कि ड्रग्स और शराब की जहाँगीर को इतनी लत थी कि नूरजहाँ को राजकाज के मुद्दे सँभालने पड़ते थे। अंग्रेजों के अनुसार, जहाँगीर की 400 बेगमें थीं और और वो एक नंबर का अय्याश भी था।

AIMIM नेता पर चाकुओं से वार, फिर ​पत्थर से सिर कुचला: बीच सड़क पर मर्डर का Video आया सामने

हैदराबाद के राजेंद्र नगर में रविवार (जनवरी 10, 2021) को AIMIM नेता अब्दुल खलील की सड़क पर बेरहमी से हत्या कर दी गई। PVNR एक्सप्रेस हाईवे के पिलर नंबर 248 के नजदीक तीन लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया।

द न्यूज मिनट के अनुसार, रविवार रात करीब 11: 45 बजे खलील उस सड़क से गुजर रहे थे। इसी दौरान तीन अज्ञातों ने उनका पीछा किया और पहले उनपर चाकुओं से वार किया, फिर पत्थरों से उनका सिर बेरहमी से कुचल दिया।

पूरी वारदात की एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आई है। इसमें तीनों आरोपित खलील के सिर पर पत्थर मारते दिख रहे हैं। पुलिस का कहना है कि वह सीसीटीवी के जरिए आरोपितों तक पहुँचने का प्रयास कर रही है। अभी तक इस घटना के पीछे आर्थिक मामलों को वजह माना जा रहा है।

स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार शमशाबाद के डीसीपी, एन प्रकाश रेड्डी ने आरोपितों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस टीमों का गठन कर लिया है। वहीं खलील के शव को अटॉप्सी के लिए उस्मानिया जनरल अस्पताल भी भेज दिया गया है। AIMIM नेताओं ने भी पुष्टि की है कि एमएम पहाड़ी निवासी अब्दुल खलील उनकी पार्टी के नेता थे और इलाके के अध्यक्ष भी थे।

बता दें कि 24 घंटों में हैदराबाद में हत्या की यह दूसरी घटना है। इससे पहले रविवार की सुबह पुलिस को एक शव सूटकेस में पीवीएनआर एक्सप्रेसवे के पिलर नंबर 223 से बरामद हुआ था। पड़ताल में पता चला कि मृतक का नाम रियाज था और वह पेशे से एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर था। 

रियाज के परिवार ने शनिवार को राजेंद्रनगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज में पाया कि वह सैयद और फिरोज नाम के दो लोगों के साथ था। पुलिस ने फौरन दोनों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में पता चला कि तीनों उस समय नशे में धुत थे और तीनों के बीच आर्थिक मामलों पर कहासुनी हो गई थी।

ब्राह्मणों को d*cks कहने वाली ‘एक्टिविस्ट’ ने सचिन तेंदुलकर के जनेऊ पर उगला जहर, बताया- स्ट्रिंग ब्रा

पिछले कुछ समय से काफी विवादों में रहने वाली ब्राह्मण विरोधी तथाकथित एक्टिविस्ट मीना कंदस्वामी (Meena Kandasamy) हाल में क्रिकेट लीजेंड सचिन तेंदुलकर की एक तस्वीर में उन्हें जनेऊ धारण किए देख भड़क गईं।

मीना ने अपने ट्वीट में जनेऊ के लिए पहले लिखा, “ओह माय गॉड…क्या ये असली तस्वीर है। क्या ये जनेऊ हल्के (एक विशेष समूह के लिए आरक्षित) अंतर्वस्त्र जैसा कुछ नहीं है, जिसे कपड़ों के अंदर पहना जाता है।” इस ट्वीट के अगले थ्रेड में मीना ने जनेऊ पर अभद्र टिप्पणी करते हुए इसकी तुलना ‘स्ट्रिंग ब्रा’ से भी की।

बता दें कि मीना ने जनेऊ के प्रति अपनी घृणा जिस तस्वीर पर निकाली है, उसे सचिन तेंदुलकर ने गणेश चतुर्थी के मौके पर इंस्टाग्राम पर साझा किया था। यह तस्वीर उनके अकाउंट पर 22 अगस्त 2020 को शेयर की गई थी। 

(साभार: इन्स्टाग्राम)

ब्राह्मणों को कहा था ‘Brahmin d*cks’

ब्राह्मण विरोधी मीणा कंदस्वामी हाल में फर्जी दलित पहचान और अपने डायवोर्स केस में वसूली करने को लेकर चर्चा में आई थी। इसके पहले तथाकथित एक्टिविस्ट ने ब्राह्मणों को ‘Brahmin d*cks’ कहा था। मीना के पूर्व पति डॉक्टर गुनशेखरन धर्मराज ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी ने उन पर प्रताड़ित करने का फ़र्ज़ी मामला दर्ज कराया था। इसके बाद ही उन्होंने मीना के पिता पर हमला करने का मामला दर्ज कराया। धर्मराज ने यहाँ तक कहा था कि उनके पास इस बात के पूरे सबूत (ईमेल पर) मौजूद हैं कि तलाक की असली वजह क्या थी। 

बचाव में आया था मीडिया समूह

इन आरोपों के चर्चा में आने के बाद एक मीडिया समूह तथाकथित एक्टिविट के बचाव में कूद कर आया था। वहीं मीना ने दावा किया था कि ‘ट्रॉल्स’ उसे प्रताड़ित कर रहे हैं। इस बीच यह दावा भी किया गया था कि मीना के पति ने जितने भी आरोप लगाए हैं वह असल में ट्रॉल्स के आरोप हैं। इसके बाद धर्मराज को ही ट्रोल घोषित कर दिया गया था।  

पहले 3 करोड़ लोगों के वैक्सीनेशन का खर्च उठाएगी केंद्र सरकार, ₹200 में मिलेगी कोवीशील्ड; पीएम मोदी ने की मुख्यमंत्रियों संग बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सप्ताह 16 जनवरी से शुरू होने वाले COVID-19 टीकाकरण अभियान योजना की समीक्षा करने के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर रहे हैं।

भारतीय दवा महानियंत्रक यानी (DCGI) ने देश में 2 वैक्‍सीन को आपात इस्तेमाल के लिए अधिकृत किया है, जिसके बाद प्रधानमंत्री की मुख्यमंत्रियों के साथ यह पहली बैठक हो रही है। DCGI ने सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड (Covishield) और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन (Covaxin) के आपात इस्‍तेमाल को मंजूरी दी है।

पीएम मोदी ने आज की बैठक में कहा कि इनके अलावा चार और वैक्सीन पर भी काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस टीकाकरण में कई विदेशी ताकतें लोगों को गुमराह करने का प्रयास करेंगी, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी तरह के ‘इफ़ या बट’ की गुंजाइश ना रहे और टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक सम्पन्न हो।

पीएम मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह वैक्सीन स्वदेशी हैं और अगर हमें यह बाहर के किसी देश से मंगानी होतीं तो यह समस्या और बड़ी हो सकती थी।

कोविड -19 टीकाकरण अभियान का पहला चरण 16 जनवरी तक हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स और बुजुर्गों के साथ शुरू होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्रियों के साथ आयोजित की जा रही इस बैठक का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की समीक्षा करना है और टीकाकरण अभियान के कुशल प्रबंधन को सुनिश्चित करना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले चरण में 3 करोड़ लोगों का टीकाकरण होगा। शुरुआत की व्‍यवस्‍था ‘इन हाउस’ है। इस व्‍यवस्‍था में वे लोग है जो करोना के खिलाफ लड़ाई में शामिल हैं। बैठक में, गृहमंत्री अमित शाह भी शामिल हैं। मीटिंग में मौजूद समस्त लोग सोशल मीडिया पर टीकाकरण को लेकर अफवाह फैलाने वाले और एंटी-वैक्सीन अभियान के प्रति उठाए जाने वाले तरीकों पर भी चर्चा करेंगे।

टीकाकरण अभियान के पहले चरण में प्राथमिकता समूह वाले तीन करोड़ लोगों को वैक्सीन दी जाएगी। इनमें एक करोड़ डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी और कोरोना महामारी के खिलाफ आगे रहने वाले दो करोड़ सुरक्षाकर्मी, सफाईकर्मी और नगर निगम इत्यादि के कर्मचारी शामिल हैं।

इसके बाद, उन 27 करोड़ लोगों को वैक्सीन दी जाएगी, जिन्‍हें कोरोना संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है। इनमें वे लोग शामिल हैं, जिनकी उम्र 50 साल से अधिक है या जो पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। सरकार का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफार्म ‘को-विन’ कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान का आधार साबित होगा।

वहीं एक अन्य खबर में यह जानकारी सामने आई है कि कोरोना का यह एक टीका 200 रुपए में उपलब्ध होगा। यह जानकारी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के अधिकारियों द्वारा दी गई है।सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को भारत सरकार ने खरीद का ऑर्डर भेज दिया है।

ट्रैकिंग के लिए गए 3 दोस्त गूगल मैप की बताई सड़क पर चल पड़े, डैम में डूब गई कार; एक की मौत

अनजान जगहों पर गूगल मैप का इस्तेमाल करना बेहद आम बात है। लेकिन तकनीक से हासिल होने वाले नतीजे हमेशा बेहतर ही हों ऐसा ज़रूरी नहीं है। इस बात की पुष्टि करने वाली घटना हुई है, महाराष्ट्र स्थित अहमदनगर जिले के अकोले क्षेत्र में। 

पुणे में रहने वाले कोल्हापुर के तीन व्यवसायी गुरु शेखर (42), समीर राजुरकर (44) और सतीश घुले (34) बीते सप्ताह के अंत में महाराष्ट्र की सबसे ऊँची चोटी कलसुईबाई पर ट्रैकिंग करने गए थे। उन्हें रास्तों की सही जानकारी नहीं थी इसलिए उन्होंने गूगल मैप की मदद ली। 

गूगल ने उन्हें कोतुल से अकोले के लिए सबसे नज़दीकी सड़क दिखाई, जो उन्हें सीधे डैम की तरफ ले गई जहाँ उनकी कार पानी में डूब गई। यह सड़क बारिश के मौसम में ही बंद कर दी गई थी क्योंकि पिम्पलगाँव खंड डैम पानी में डूबा हुआ था। फ़िलहाल उस डैम पर लगभग 20 फीट पानी था और ऐसा होने की स्थिति में डैम बंद कर दिया जाता है। स्थानीय लोगों को यह मालूम था इसलिए वह इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं करते थे। कार चलाने वाला युवक (सतीश घुले) गूगल मैप पर भरोसा करते हुए आगे बढ़ता गया और कार सीधे पानी में चली गई। 

इस बीच समीर राजुरकर और गुरु शेखर कार से निकलने में कामयाब रहे लेकिन सतीश कार में ही फँसा रह गया। नतीजतन उसकी मृत्यु हो गई। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी विभाग की तरफ से उस जगह पर सावधानी से जुड़ा कोई नोटिस नहीं लगाया गया था। इसलिए अँधेरे के वक्त कार चलाने वाले को इस ख़तरे का अंदेशा नहीं हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग और पीड़ितों के रिश्तेदार घटनास्थल पर पहुँचे और उन्होंने सतीश घुले का शव और कार बाहर निकाला। 

25 जनवरी तक कंगना की गिरफ्तारी पर रोक, पूछताछ भी नहीं कर सकेगी मुंबई पुलिस: बॉम्बे हाई कोर्ट से अभिनेत्री को मिली राहत

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को बड़ी राहत मिली है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कंगना को 25 जनवरी तक गिरफ्तारी से राहत दे दी है। हाई कोर्ट ने सोमवार (जनवरी 11, 2021) को कंगना के खिलाफ एफआईआर रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिया। अदालत ने मुंबई पुलिस को तब तक दोनों को पूछताछ के लिए तलब नहीं करने का भी निर्देश दिया। इससे पहले 8 जनवरी को कंगना रनौत ने बांद्रा पुलिस स्टेशन पहुँचकर बयान दर्ज करवाया था। 

न्यायमूर्ति एसएस शिंदे तथा न्यायमूर्ति मनीष पितले दोनों बहनों की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें प्राथमिकी और पिछले साल 17 अक्टूबर को जारी मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया था। सरकारी अभियोजक दीपक ठाकरे ने सोमवार को अदालत को सूचित किया कि याचिकाकर्ता आठ जनवरी को अपराह्न एक बजे से तीन बजे तक पुलिस के समक्ष पेश हुई थीं। हालाँकि पूछताछ पूरी नहीं हो पाई थी।

ठाकरे ने कहा, ‘‘वह (रनौत) हमारे पूछताछ पूरी करने से पहले ही यह दावा करते हुए चली गईं कि उनकी पेशेवर प्रतिबद्धताएँ हैं। हम पूछताछ के लिए उन्हें फिर बुलाएँगे। सहयोग करने में क्या गलत है।’’ इस पर न्यायमूर्ति पितले ने कहा, ‘‘वह (रनौत) दो घंटे तक रहीं। क्या यह काफी नहीं है? आपको सहयोग के लिए और कितने घंटे चाहिए?’’

जस्टिस एसएस शिंदे और मनीष पितले की डिवीजन बेंच ने कहा, “क्या यह एकमात्र मामला है। आपके पास कई अन्य मामले हैं। इस समय का सदुपयोग उन मामलों की जाँच के लिए करें।” ठाकरे ने कहा कि पुलिस उनसे तीन और दिन तक पूछताछ करना चाहती है। हालाँकि अदालत ने उनकी इस माँग को ठुकरा दिया और 25 जनवरी तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।

शिकायतकर्ता साहिल अशरफ अली सैयद की ओर से वकील रिजवान मर्चेंट ने याचिका पर जवाब देने के लिए हलफनामा दाखिल करने के लिहाज से और वक्त माँगा। तब अदालत ने मामले में सुनवाई 25 जनवरी तक स्थगित कर दी। अदालत ने कहा, ‘‘तब तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने की अंतरिम राहत भी जारी रहेगी। पुलिस तब तक याचिकाकर्ताओं को नहीं बुलाएगी।”

इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 8 जनवरी तक कंगना की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी और ये भी कहा था कि कंगना खुद जाकर पुलिस में अपना बयान दर्ज करवाएँगी। कोर्ट के आदेश को मानते हुए कंगना 8 जनवरी को बांद्रा पुलिस स्टेशन पहुँची थीं। जहाँ करीब 3 घंटे उनसे पूछताछ हुई। कंगना के 100 से ज़्यादा ट्वीट्स पर पुलिस की नज़र है। पुलिस इन सारे ट्वीट्स के बारे में पूछताछ करना चाहती है। 8 जनवरी को सिर्फ 4-5 ट्वीट्स के बारे में ही पुलिस पूछताछ कर पाई।

क्या है मामला?

सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने के आरोप में मुंबई की एक कोर्ट ने कंगना के खिलाफ बांद्रा पुलिस को जाँच के आदेश दिए थे। जिसके खिलाफ कंगना ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कंगना के वकील ने कोर्ट में कहा था कि वो और उनकी बहन रंगोली दोनों 8 जनवरी को 12 बजे से 2 बजे के बीच खुद बांद्रा पुलिस स्टेशन में आकर अपना बयान दर्ज कराएँगी।

‘हाथरस पीड़िता की पहचान उजागर की, ट्विटर-फेसबुक पर कार्रवाई हो’: दिल्ली HC का 15 प्लेटफॉर्मों-मीडिया संस्थानों को नोटिस

हाथरस गैंगरेप पीड़िता की पहचान उजागर करने को लेकर ट्विटर, फेसबुक सहित कई सोशल मीडिया प्लेटाफॉर्मों और मीडिया संस्थानों पर कार्रवाई की माँग की गई है। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने ‘निजता के अधिकार’ का उल्लंघन मामले में एक वकील द्वारा दायर याचिका पर शुक्रवार (जनवरी 9, 2021) को सुनवाई करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों समेत कुछ मीडिया संस्थानों को नोटिस जारी किया। इस नोटिस में बलात्कार पीड़िता और सार्वजनिक क्षेत्रों में समान पीड़ितों की पहचान का खुलासा करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से जवाब-तलब किया गया है।

याचिकाकर्ता मनन नरूला ने 14 सितंबर 2020 को हुई हाथरस गैंगरेप पीड़िता की पहचान उजागर करने के लिए ट्विटर, यूट्यूब, फेसबुक आदि सहित 15 प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के खिलाफ उचित दिशा-निर्देश देने की मांँग की थी। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

याचिका को संज्ञान में लेते हुए मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमर्ति ज्योति सिंह ने नोटिस जारी किया। उन्होंने बजफीड, द सिटीजन, द टेलीग्राफ, आई दीवा, जनभारत टाइम्स, न्यूज 18, दैनिक जागरण, यूनाटेड न्यूज ऑफ इंडिया, बंसल टाइम्स, दलित कैमरा, द मिलेनियम पोस्ट, ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब और विकिफीड से जवाब माँगा है। केस की अगली सुनवाई 5 फरवरी 2021 को होगी। 

बता दें कि याचिकाकर्ता की माँग थी कि दिल्ली सरकार ऐसे सोशल मीडिया मंचों और मीडिया संस्थानों को कोई सामग्री, खबर, सोशल मीडिया पोस्ट या ऐसी कोई भी सूचना हटाने को कहे, जिनमें हाथरस सामूहिक बलात्कार पीड़िता या इस तरह के अन्य मामलों की पीड़िता की पहचान का ब्योरा हो। 

याचिका में सभी उत्तरदाताओं के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराने की भी माँग की गई, क्योंकि उन्होंने आईपीसी की धारा 228 ए का उल्लंघन किया। इसके अलावा पीड़ितों की पहचान उजागर न किए जाने के कानूनी प्रावधानों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए निर्देशित करने की अपील भी इस याचिका में की गई है।

यह याचिका अधिवक्ता सुमन चौहान और जिवेश तिवारी के जरिए दायर की गई थी। इसमें दावा किया गया कि उल्लेख किए गए उक्त सभी प्रकाशनों/पोर्टलों/ समाचार संस्थानों ने पीड़िता के बारे में ऐसी सूचना प्रकाशित की, जो व्यापक स्तर पर लोगों के बीच उसकी पहचान को उजागर करता है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में जिस दलित युवती के साथ सामूहिक बलात्कार एवं हत्या की घटना हुई, उसके नाम का ट्विटर पर सेलिब्रिटी एवं क्रिकेटर सहित बड़ी संख्या में लोगों ने ‘हैशटैग’ के साथ इस्तेमाल किया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से पुराने केस का हवाला भी दिया गया जिसमें पीड़िता की पहचान उजागर की गई थी और उच्च न्यायालय ने उस पर स्वत: संज्ञान लिया था। बता दें कि कठुआ सामूहिक बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर करने को लेकर कई मीडिया संस्थानों को कड़ी फटकार लगाई थी।

Tooter पर नहीं हैं PM मोदी: जानिए इस सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के बारे में सब कुछ

यूएस कैपिटल हिल में हुई हिंसा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया अकाउंट पर लगे बैन के चलते अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स चर्चा का विषय हैं। ट्विटर पर लगे प्रतिबंध के बाद ही, शुक्रवार (जनवरी 08, 2021) को फेसबुक ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 20 जनवरी तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। यह ट्रंप के कार्यकाल का आखिरी दिन भी है।

इसके अलावा, PayPal, Pinterest, स्नैपचैट, यूट्यूब, ट्विच और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म्स द्वारा भी ट्रंप को बैन कर दिया गया है। अमेरिकी दक्षिणपंथियों द्वारा बनाए गए ‘Parler’ (पार्लर) नाम के वैकल्पिक मंच को भी Apple और Google द्वारा हटा दिया गया।

इसी बहस के दौरान, कई लोगों ने टूटर (Tooter) नामक एक भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के बारे में चर्चा छेड़ी और अपने साथियों से ट्विटर, फेसबुक जैसे बड़े सोशल मीडिया नेटवर्क्स की ‘दादागिरी’ से बचने के लिए ‘टूटर’ नामक इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़ने का आग्रह किया।

नंदा, जो कि स्वदेशी ‘टूटर’ के सीईओ हैं, ने ‘ट्विटर’ पर लोगों से ‘टूटर’ पर जुड़ने का आग्रह करते हुए लिखा, “हम एक दिन में ब्रिटिश द्वारा उपनिवेश नहीं बनाए गए थे। तो यह कैसे हुआ? वे 1600 की शुरुआत में व्यापार के लिए भारत आए, लेकिन उनका शासन 1757 में शुरू हुआ। यह इतना धीरे-धीरे होता है कि आप नोटिस भी नहीं करेंगे। अभी हो रहा है। डिजिटल उपनिवेशीकरण।”

नंदा ने टूटर से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि ट्विटर ने 2021 में डोनाल्ड ट्रंप पर प्रतिबंध लगा दिया है, और यह 2024 में पीएम नरेंद्र मोदी को आसानी से प्रतिबंधित कर सकता है। उन्होंने लिखा कि वो ऐसा नहीं होने देंगे और अपना एक-एक पैसा टूटर को ट्विटर के खिलाफ स्थापित करने में लगाएँगे। इसलिए, लोगों को टूटर में शामिल होना चाहिए।

पिछले कुछ दिनों में ‘टूटर’ के चर्चा में रहने की एक बड़ी वजह यह ‘खबर’ भी रही कि इस वैकल्पिक मंच को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन भी मिल चुका है। ‘टूटर’ पर यह भी देखा गया कि इस मंच पर पीएम मोदी का एक आधिकारिक अकाउंट भी मौजूद है।

PM Modi account on Tooter

पीएम मोदी के बताए जा रहे इस ‘टूटर’ अकाउंट पर उनके द्वारा किए गए कुछ ‘टूट्स’ भी हैं, जो कि उनके द्वारा ट्वीट भी किए गए हैं। यह तथ्य कई मीडिया संस्थानों द्वारा भी कवर किया गया, जिससे लोगों को यह यकीन भी हो गया कि पीएम मोदी का वास्तव में एक ‘टूटर’ अकाउंट है।

समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया और यहाँ तक ​​कि वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द क्विंट’ जैसे कई मीडिया संस्थानों ने कहा कि विराट कोहली, दीपिका पादुकोण, सलमान खान, शाहरुख खान, कई मंत्रियों और यहाँ तक ​​कि प्रधानमंत्री मोदी जैसी हस्तियों का भी ‘टूटर’ पर अकाउंट है।

हालाँकि, अब इस तरह की चर्चा से पर्दा उठने लगा है। भाजपा प्रवक्ता तजिंदर बग्गा और सुरेश नखुआ ने ट्विटर पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि पीएम मोदी ‘टूटर’ पर नहीं हैं और ‘टूटर’ द्वारा पीएम मोदी का यह अकाउंट खुद ही सिर्फ यह दावा करने के लिए बनाया है कि पीएम मोदी ने भी इस प्लेटफ़ॉर्म का समर्थन किया है।

ऑपइंडिया द्वारा जब अपने सूत्रों द्वारा इसकी पुष्टि की गई, तो हमें भी यही जानकारी मिली कि टूटर ने पीएम मोदी और अन्य मंत्रियों के वेरिफाइड अकाउंट खुद ही बनाए हैं और पीएम मोदी टूटर पर नहीं हैं।

हमने पाया कि शायद टूटर किसी तकनीक के जरिए पीएम मोदी द्वारा किए गए ट्वीट्स को स्वयं ही ‘टूट’ कर पोस्ट करता है। इस बात की पुष्टि तब हुई जब आर वैद्य ने टूटर के सीईओ नंदा से पूछा कि उनका टूटर पर एक वेरिफाइड अकाउंट कैसे है और लोग उन्हें खुद ही कैसे फ़ॉलो कर रहे हैं, जबकि उन्होंने कभी अपना अकाउंट टूटर पर बनाया ही नहीं।

इस पर नंदा ने उन्हें ‘द्रोणाचार्य’ बताते हुए अस्पष्ट तरीके से जवाब दिया और उनसे इनबॉक्स में संदेश शेयर करने की अपील की।

पीएम मोदी के टूटर पर होने की अफवाह के फैलते ही भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी ट्विटर के माध्यम से यह जानकारी दी कि ना ही पीएम मोदी, ना ही गृह मंत्री अमित शाह और किसी भाजपा नेता ने टूटर पर अकाउंट बनाए हैं।

पीएम मोदी ‘टूटर’ पर नहीं हैं, लेकिन आखिर ‘टूटर’ है क्या?

‘टूटर’ द्वारा ‘हमारे बारे में/अबाउट अस’ सेक्शन में दी गई जानकारी के अनुसार, “हमारा मानना ​​है कि भारत में एक स्वदेशी सोशल मीडिया नेटवर्क होना चाहिए। इसके बिना हम अमेरिकी ट्विटर इंडिया कंपनी की सिर्फ एक डिजिटल कॉलोनी हैं, और यह किसी भी तरह से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन होने से अलग नहीं है। टूटर हमारा स्वदेशी आंदोलन 2.0 है। इस आंदोलन में हमसे जुड़ें। हमसे जुड़ें!”

दिलचस्प बात यह है कि जिस समय कोई व्यक्ति टूटर से जुड़ता है, उन्हें स्वतः ही टूटर पर मौजूद तीन अकाउंट्स को फ़ॉलो करना होता है – टूटर के सीईओ, आर वैद्य और एक ’न्यूज’ नाम का अकाउंट।

Inc24 की एक विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया है कि गोपनीयता नीति (प्राइवेसी पॉलिसी) सेक्शन में यह उल्लेख किया गया है कि यह किसी भी व्यक्ति को किसी यूजर की जानकारी प्रदान नहीं करेगा। इसके अनुसार, “जब तक, जान को नुकसान पहुँचाने वाली किसी धमकी जैसे आपात मामलों को छोड़कर, एक अमेरिकी अदालत द्वारा जारी किए गए अदालती आदेश द्वारा मजबूर नहीं किया जाता है।”

’18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे’ के तहत एक अन्य पैरा में जिक्र भी किया गया है, “16 साल से कम उम्र के कैलिफोर्निया निवासियों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी के संग्रह और बिक्री के बारे में अतिरिक्त अधिकार हो सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए कृपया अपना कैलिफोर्निया गोपनीयता अधिकार (नीचे) देखें।’

वास्तव में, ‘टर्म्स ऑफ़ सर्विस’ में उल्लेख किया गया है कि वेबसाइट से संबंधित मामलों में, किसी भी विवाद या दावों को अमेरिका के राज्य पेंसिल्वेनिया के आंतरिक कानूनों के अनुसार नियंत्रित किया जाएगा।

ऐसा प्रतीत होता है कि जब ‘टूटर’ लॉन्च किया गया था, तो उन्होंने किसी अन्य वेबसाइट से अपने नियमों और शर्तों को कॉपी किया होगा। हालाँकि, इसके बाद ‘Inc24’ द्वारा कवर किए जाने के बाद, टूटर ने अपनी इन नीतियों को अपडेट कर दिया।

टूटर यह भी कहता है कि इसका कोडबेस और ‘मुक्त और खुला स्रोत/फ्री एंड ओपन सोर्स’ है।

जबकि टूटर ‘ओपन-सोर्स और फ्री कोडबेस’ पर निर्भर करता है, यह इस आर्टिकल के प्रकाशित होने, यानी कम से कम नवंबर अंत तक अपने यूजर्स को वेरिफाइड बैज आदि के लिए 1,000 रुपए तक का चार्ज करता था।

‘टूटर प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक नरेश वांकयलापति और रामेश्वर राव वांकयलापति हैं। इनके बारे में, या सीईओ नंदा के बारे में बहुत जानकारी भी उपलब्ध नहीं हैं।

ऐसे में, जब कि जानकारी के स्रोत ‘विकिपीडिया’ सहित तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एक भारतीय विकल्प समय की माँग है, बिना लोगों की जानकार इऔर उनके वेरिफाइड अकाउंट्स, विशेष रूप से प्रधानमंत्री जैसी हस्तियों के, एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है क्योंकि इनके नाम से जारी की जाने वाली सूचना प्रामाणिक के रूप में गलत भी हो सकती है।

हालाँकि, प्रधानमंत्री मोदी भविष्य में Tooter (टूटर) या किसी अन्य स्वदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में शामिल हो सकते हैं, कोई भी इस निष्कर्ष पर कम से कम पहुँच ही सकता है कि वह अभी Tooter/टूटर पर नहीं हैं। इसके अलावा, जिन अन्य हस्तियों के सत्यापित अकाउंट्स अब Tooter पर दिखाई दे रहे हैं, वह भी एकदम फर्जी ही हैं।

चीनी सैनिकों को छठी का दूध याद दिलाने वाले 16 बिहार बटालियन को गैलेंट्री अवॉर्ड, कर्नल संतोष बाबू थे कमांडिंग ऑफिसर

पिछले साल जून महीने में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में मुँहतोड़ जवाब देने वाले 16 बिहार बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर, कर्नल संतोष बाबू समेत भारतीय सेना के 5 जवानों को गणतंत्र दिवस के मौके पर गैलेंट्री मेडल से सम्मानित किया जाएगा।   

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ रक्षा मंत्रालय और भारतीय सेना ने इस बारे में किसी भी तरह का खुलासा नहीं किया है कि मेडल्स की संख्या कितनी होगी। प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ कम से कम सेना के उन दो अधिकारियों और तीन जवानों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने चीनी सेना का सामना करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

जब भारत और चीन के बीच तय समझौते के मुताबिक़ चीन के सैनिकों ने पेट्रोलिंग पॉइंट 14 के नज़दीक स्थित क्षेत्र से हटने के लिए साफ़ मना कर दिया, तब वहाँ पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई। भारतीय सेना के जवानों ने चीनी सैनिकों की तमाम साज़िशों को नाकाम करने के लिए हर ज़रूरी कदम उठाया। 

चीनी सैनिक इस टकराव के लिए पूरी तैयारी के साथ आए थे। उनके पास लाठी-डंडे, रॉड, ड्रैगन पंच और कटीले तारों वाले कई हथियार मौजूद थे। गौरतलब है कि जून में LAC पर हुई हिंसा 1975 के बाद पहली ऐसी हिंसा थी, जिसमें सैनिकों ने जान गँवाई।

लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई और संघर्ष में भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे जबकि चीन के 43 से अधिक जवानों के हताहत होने की सूचना सामने आई थी। 

भारत-चीन विवाद के बीच उस दौरान (जुलाई 3, 2020) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक लेह दौरे पर गए थे। उन्होंने वहाँ तैनात सैनिकों से मुलाकात की थी और सेना की तैयारियों का जायजा भी लिया था। इसके अलावा उन्होंने गलवान घाटी में चीनी सैनिकों को खदेड़ने वाले बहादुर सैनिकों से भी मुलाकात की थी। उन्होंने सेना के शौर्य की गाथा का बखान करते हुए हर सैनिक की हौसला अफजाही की। उन्होंने कहा था कि पूरे भारत को हमारे सैन्य बल पर गर्व है।

भारतीय सेना के जवानों ने गलवान घाटी में हुए टकराव के बीच असीम साहस और पराक्रम का परिचय दिया था। चीनी की सेना ने इस बात की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की थी कि उनके कितने जवानों की जान गई थी। लेकिन भारतीय सेना और खुफ़िया एजेंसियों द्वारा किए गए दावों के मुताबिक़ चीनी कमांडिंग ऑफिसर समेत लगभग 60 से अधिक चीनी सैनिकों की जान गई थी।  

NSEL घोटाले में शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक पर ED का शिकंजा, 112 संपत्तियाँ जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 5600 करोड़ रुपए के नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL) घोटाले के सिलसिले में शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक की फर्म से जुड़ी 112 संपत्तियाँ जब्त की है।

बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने ट्विटर पर जानकारी देते हुए बताया कि ईडी द्वारा संलग्न प्लॉट महाराष्ट्र के ठाणे जिले के टिटवाला में स्थित है। ईडी द्वारा यह कार्रवाई आस्था समूह नाम के फार्म में हुए घोटाले के बाद की गई। बता दें कि मोहित अग्रवाल के स्वामित्व वाले आस्था समूह ने कथित तौर पर निवेशकों को 250 करोड़ रुपए के भुगतान में चूक की थी और प्रताप सरनाईक के विहंग समूह ने मनी लॉन्ड्रिंग में उसकी मदद की थी।

रविवार (जनवरी 10, 2021) को प्लॉट का दौरा करने वाले भाजपा नेता किरीट सोमैया ने पिछले महीने प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों से मुलाकात की और आरोप लगाया कि प्रताप सरनाईक ने केंद्रीय जाँच एजेंसी द्वारा अटैच होने के बावजूद प्लॉट को बेच दिया। रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा नेता ने कहा कि प्रताप सरनाईक और मोहित अग्रवाल ने जब्त किए गए प्लॉट को खरीदने के लिए नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड से 100 करोड़ रुपए भी लिए।

जब ईडी ने राजस्व विभागों के कार्यालय के साथ दावों का सत्यापन किया, तो पाया कि 112 प्लॉट, जो उन्होंने अपने कब्जे में ले लिए थे, रिकॉर्ड में नहीं दिखे। प्रवर्तन निदेशालय ने शनिवार को कुर्की का विवरण प्रस्तुत किया। हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि राजस्व रिकॉर्ड में ED द्वारा किए गए जब्ती के बारे में कोई विवरण कैसे नहीं था।

सरनाईक के निवास पर छापे; उद्धव ठाकरे ने बचाव किया

गौरतलब है कि ED ने नवंबर 2020 में प्रताप सरनाईक के घर, दफ्तरों और उनके कारोबारी सहयोगियों समेत 10 ठिकानों पर छापा मारा था। 175 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले में छापेमारी के बाद ED ने सरनाईक को पूछताछ के लिए तलब किया था। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक के सबसे करीबी दोस्त अमित चंदोल को भी गिरफ्तार कर लिया।

छापे के एक दिन बाद, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपने नेता के बचाव में सामने आए थे। उन्होंने एजेंसी द्वारा सरनाईक के परिवार के खिलाफ की गई कार्रवाई को ‘विकृत राजनीति’ करार दिया। ठाकरे ने आरोप लगाया कि ईडी द्वारा सरनाईक के परिवार को निशाना बनाया जा रहा है।

घर से मिला पाकिस्तानी महिला का क्रेडिट कार्ड

छापेमारी के दौरान प्रताप सरनाईक के आवास से पाकिस्तानी नागरिक का क्रेडिट कार्ड बरामद हुआ था। इस क्रेडिट कार्ड पर उनके ही आवास का पता लिखा था। जिसके नाम का क्रेडिट बना हुआ था, वो एक महिला थी। उसके पति का नाम फरहाद था। ये दोनों ही पाकिस्तानी नागरिक हैं। बताया गया कि ये क्रेडिट कार्ड किसी भारतीय बैंक का नहीं था। ये क्रेडिट कार्ड कैलिफोर्निया के एक बैंक का था।