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बदायूँ गैंगरेप: आधी रात को गिरफ्तार हुआ मुख्य आरोपित, 4 दिन तक छिपाए रखने वाला भी चढ़ा यूपी पुलिस के हाथ

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में गैंगरेप और जघन्य हत्या के मामले में मुख्य आरोपित 50 हजार के इनामी सत्य नारायण को पुलिस ने आखिरकार गुरुवार (जनवरी 7, 2021) रात को गिरफ्तार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सत्यनारायण घटना वाले दिन से गाँव में ही छिपा हुआ था। इसके आलावा यूपी पुलिस दो आरोपितों जसपाल और वेदराम को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

गौरतलब है कि 3 जनवरी की रात आँगनबाड़ी सहायिका से गैंगरेप और हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद से ही मुख्य आरोपित सत्यनारायण फरार चल रहा था। सत्यनारायण की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी हुई थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम जगह-जगह लगातार उसकी तलाश कर रही थी। यहाँ तक कि उसकी तलाश में पुलिस टीमें उत्तराखंड, बरेली, चंदौसी, कासगंज में दबिश दे रही थीं, जबकि वह उसी गाँव में छिपा रहा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार रात पुलिस को पता चला कि वह किसी सहयोगी के घर में छिपा है। रात करीब 11 बजे दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसे शरण देने वाले युवक को भी पुलिस पकड़कर थाने ले आई है। अब सत्यनारायण से पूछताछ में दरिंदगी की इस जघन्य घटना से जुड़े कुछ और तथ्य सामने आ सकते हैं।

इस बिच कई मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि गैंगरेप के बाद हत्या के मुख्य आरोपित सत्यनारायण को ग्रामीणों द्वारा पकड़ कर पुलिस को सौंपने की चर्चा भी है। मुख्य आरोपित सत्यनारायण की गिरफ्तारी के दौरान का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें पुलिस के दो कॉन्स्टेबल महंत सत्यनारायण को बाइक पर बैठाकर ले जाते हुए दिख रहे हैं। संभवतः इसी को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि महंत सत्यनारायण को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस को सौंपा है।

गौरतलब है कि बदायूँ गैंगरेप मामले में, महिला के साथ आरोपितों केवल गैंगरेप ही नहीं किया गया बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड डाली गई और उसके भीतर के अंगों (आंँतों) को भी फाड़ दिया गया था। दुष्कर्म के दौरान महिला का एक पैर और पसली भी तोड़ी गई थी। जाँच में यह पता चला कि महिला के शरीर से सारा खून बह जाने के कारण उसकी मौत हुई थी।

रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि शव का पोस्टमार्टम करते हुए स्वयं तीन महिला डॉक्टरों का पैनल हैरान हो गया था। जाँच में उन्होंने पाया कि वारदात को अंजाम देने वाले आरोपितों ने पहले महिला के प्राइवेट पार्ट में रॉड घुसाई और जब खून तेजी से बहने लगा तो उसे रोकने के लिए उन्होंने गुप्तांग में कपड़े व रुई घुसा दी। घटनास्थल पर महिला के सारे कपड़े खून से सने मिले थे।

बता दें कि बदायूँ में महिला के साथ गैंगरेप के बाद हत्या के मामले में योगी सरकार तुरंत ही एक्शन में आ गई थी। मामले के मुख्य आरोपित को पकड़ने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने STF को आदेश दिया था। साथ ही घटना का संज्ञान लेते हुए इस संबंध में ADG से रिपोर्ट माँगी थी। सीएम योगी ने आरोपितों पर NSA के तहत कार्रवाई का भी आदेश दिया था।

सुशांत का चेहरा बताता था कि वह एक मासूम, संजीदा और बेहतर इंसान थे: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि सुशांत एक मासूम, संजीदा और अच्छे इंसान थे। सुशांत सिंह की बहनों (प्रियंका सिंह और मीतू सिंह) द्वारा दायर की गई याचिका की सुनवाई करने वाली पीठ के मुखिया न्यायाधीश जेजे शिंदे ने यह टिप्पणी की

बॉलीवुड अभिनेता की बहनों ने यह याचिका उन पर दर्ज किए गए मामले ख़त्म करने के लिए दायर की थी, जिसके आधार पर उन पर सुशांत के अवसाद सम्बंधी मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन (medical prescription) में छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। यह एफ़आईआर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती ने बांद्रा पुलिस थाने में दर्ज कराई थी, जिसमें दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टर तरुण कुमार का नाम भी शामिल था। 

इस मामले पर फैसला सुरक्षित रखते हुए न्यायाधीश शिंदे ने फिल्म “एमएस धोनी- अनटोल्ड स्टोरी” में सुशांत सिंह के काम की सराहना की। साथ ही यह भी कहा कि कोई भी उनके चेहरे से अंदाज़ा लगा सकता था कि वह (सुशांत सिंह) एक अच्छे इंसान थे। न्यायाधीश शिंदे ने अपनी पूरी टिप्पणी में कहा, “मामला कुछ भी हो, सुशांत सिंह का चेहरा देख कर कोई भी यह अंदाजा लगा सकता था कि वह मासूम, संजीदा और एक बेहतर इंसान थे। उन्हें सभी पसंद करते थे ख़ास तौर पर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान की बायोपिक में।”   

गौरतलब है कि रिया चक्रवर्ती ये आरोप लगाती रही हैं कि सुशांत सिंह अवसाद विरोधी उपचार (anti-depressant medication) लेते थे। रिया चक्रवर्ती का दावा था कि बॉलीवुड अभिनेता की बहनों ने दिल्ली के डॉक्टर से दवाइयाँ ली थी और वही दवाइयाँ अपने भाई को देती थीं। इसके आधार पर रिया चक्रवर्ती ने आरोप लगाया था कि सुशांत की मौत का कारण ‘ड्रग्स, नशीले पदार्थ और दवाइयों का खतरनाक कॉकटेल’ हो सकता है। 

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिया चक्रवर्ती आरोपित हैं, अभिनेता के पिता ने रिया चक्रवर्ती और उसके परिजनों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कराया था। महाराष्ट्र सरकार द्वारा किए गए लंबे राजनीतिक ड्रामे के बाद सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी गई थी। इसके आधार पर सुशांत सिंह राजपूत की बहनों पर दर्ज किए गए मामले की जाँच भी सीबीआई को सौंपी गई है।   

कर्नाटक: गरीब दुल्हनों को ₹25000, पुजारियों से शादी करने पर ₹3 लाख, UPSC के लिए स्कॉलरशिप

पिछले साल ही येदियुरप्पा सरकार द्वारा स्थापित ‘कर्नाटक राज्य ब्राह्मण विकास बोर्ड’ के तहत आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) ब्राह्मणों के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दो स्कीम शुरू की गई हैं – अरुंधती (Arundhati)और मैत्रेयी (Maitrey)! इन योजना का उद्देश्य इस तबके की नव विवाहिताओं को आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है। कर्नाटक में 06 करोड़ की आबादी में से लगभग 3% ब्राह्मण समुदाय से हैं।

बोर्ड के अनुसार, पहली योजना ‘अरुंधति’ के अंतर्गत 550 गरीब ब्राह्मण लड़कियों को विवाह के लिए 25,000 रुपए प्रत्येक के अनुसार दिए जाएँगे। जबकि दूसरी योजना, ‘मैत्रेयी’ राज्य में गरीब ब्राह्मण पुजारी से विवाह करने पर 25 लड़कियों को 3 लाख रुपए प्रत्येक के हिसाब से बॉन्ड दिया जाएगा, जो कि तीन साल तक इस्तेमाल किए जा सकेंगे।

बोर्ड के अध्यक्ष एचएस सचिदानंद मूर्ति ने कहा कि विवाह करने वाली लड़कियों को कुछ अन्य शर्तों को भी पूरा करना होगा। जैसे, ब्राह्मण परिवार आर्थिक रूप से कमजोर की श्रेणी का होना चाहिए। साथ ही, विवाह करने वाली लड़की की यह पहली शादी होनी चाहिए और उन्हें एक निश्चित अवधि तक विवाहित रहना ही होगा।

बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि शुरुआत में ‘मैत्रेयी’ स्कीम ऐसी लड़कियों के लिए शुरू किए जाने की योजना थी, जो किसी गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले ब्राह्मण किसान, बावर्ची या फिर पुजारी से शादी करती। लेकिन सर्वे के बाद यह पता चला कि पुजारी वर्ग आर्थिक तौर पर बेहद कमजोर है और इसलिए इस योजना को पुजारियों के फायदे के लिए चलाने की पहल की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘मैत्रेयी’ स्कीम के अंतर्गत किसी भी विवाहित जोड़े को 3 लाख रूपए के बॉन्ड का पूरा फायदा उठाने के लिए 3 साल तक विवाहित रहना होगा और शादी के हर एक साल के अंत में 1 लाख रुपए की किश्त दंपति को दी जाएगी।

UPSC के लिए भी मिलेगी ब्राह्मणों को मदद

बोर्ड के अध्यक्ष के अनुसार, UPSC की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले गरीब ब्राह्मण छात्रों की मदद के लिए भी 14 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है, जिसका इस्तेमाल अभ्यर्थियों को स्कॉलरशिप, फीस और ट्रेनिंग देने के खर्च में किया जाएगा।

यह योजना ऐसे अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराई जाएगी, जो यह प्रमाणित कर सकेंगे कि उनके पास पाँच एकड़ से ज्यादा खेती लायक जमीन नहीं है और 1000 वर्ग फीट से बड़ा फ्लैट नहीं है। इसके अलावा, इस योजना का लाभ सिर्फ उन गरीब ब्राह्मणों को होगा, जो पिछड़ी या अनुसूचित जाति से नहीं आते होंगे और उनकी सालाना पारिवारिक आय 8 लाख रुपए से भी कम हो।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने वर्ष 2018-19 में अपने कार्यकाल के दौरान ‘ब्राह्मण विकास बोर्ड’ के गठन के साथ ही उसे 25 करोड़ बजट फंड उपलब्ध कराने की बात कही थी। लेकिन वर्ष 2019 के अंत में भाजपा की बीएस येदियुरप्पा सरकार ने इस बोर्ड का गठन किया और एचएस मूर्ति इसके पहले अध्यक्ष बने। इसी 25 करोड़ रुपए बजटके इस्तेमाल के लिए इस बोर्ड द्वारा ये 2 योजना जारी की गई हैं।

बताया जा रहा है कि येदियुरप्पा सरकार की यह योजना बोर्ड द्वारा ‘विवाह सहायता’ की ऐसी ही एक योजना को लेकर शुरू की गई है, जिसका नाम है- शादी भाग्य! इसे वर्ष 2013 में कॉन्ग्रेस सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर ‘अल्पसंख्यक‘ परिवारों की महिलाओं की शादी के लिए 50,000 रुपए देने के लिए शुरू किया था। येदियुरप्पा ने तब इस योजना की आलोचना करते हुए कहा था कि इसे सभी समुदायों के गरीबों को लाभ पहुँचाने के लिए विस्तारित किया जाना चाहिए।

कश्मीर पर फ्रांस ने किया भारत का समर्थन, कहा- UNSC में चीन को नहीं खेलने दिया कोई ‘प्रोसीज़रल गेम’

कश्मीर के मुद्दे पर फ्रांस ने एक बार फिर भारत का समर्थन किया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति के एक सलाहकार ने गुरुवार (जनवरी 7, 2021) को कहा कि फ्रांस, कश्मीर मुद्दे पर भारत का समर्थक रहा है। इसलिए फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन को कोई ‘प्रक्रियागत खेल’ (प्रोसीज़रल गेम) खेलने की अनुमति नहीं दी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस और भारत के बीच रणनीतिक वार्षिक संवाद के लिए भारत के दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) के कूटनीतिक सलाहकार इमैनुएल बोन (Emmanuel Bonne) ने कहा, “चीन जब नियम तोड़ता है, तो हमें बेहद मजबूत और बेहद स्पष्ट होना होगा। हिंद महासागर में हमारी नौसेना की मौजूदगी का यही सन्देश है।” उन्होंने यह भी कहा, “जो हम पब्लिकली कहते हैं, उसे चीन को प्राइवेटली भी कह सकते हैं, इसमें कोई अस्पष्टता नहीं है।”

गौरतलब है कि विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (वीआईएफ) द्वारा आयोजित ‘फ्रांस और भारत: स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत के साझेदार’ विषय पर अपने संबोधन में बोन ने कहा कि फ्रांस ‘क्वाड’– अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत का समूह- के करीब है और भविष्य में उनके साथ कुछ नौसैनिक अभ्यास भी कर सकता है। इसके अलावा दिन में उन्होंने भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी बातचीत की। जिसमें सुरक्षा सहित कई द्विपक्षीय मामले शामिल थे।

फ्रांसीसी नौसेना के ताइवान जलडमरूमध्य में गश्त करने वाली एक मात्र यूरोपीय नौसेना होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “यह उकसावे के तौर पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर डालने के लिए है। हमें टकराव की और नहीं बढ़ना है और मैं समझता हूँ कि दिल्ली के मुकाबले पेरिस से यह कहना कहीं ज्यादा आसान है, वह भी तब जब हिमालय में आपके यहाँ समस्या है और आपकी सीमा पाकिस्तान से लगी हो।”

अमिताभ का इतिहास साफ़ नहीं, ना ही वो सामाजिक कार्यकर्ता; कॉलर ट्यून से हटाई जाए आवाज: HC में PIL दायर

दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन की आवाज़ को कोरोनो वायरस के खिलाफ सावधानियों और बचाव का संदेश देने वाली कॉलर ट्यून से हटाने का अनुरोध किया गया है। याचिका में इसे हटाने का आधार यह बनाया गया है कि अमिताभ बच्चन स्वयं, परिवार के कुछ सदस्यों के साथ, वायरस से संक्रमित थे।

याचिका को राकेश नाम के एक शख्स ने एडवोकेट एके दुबे और पवन कुमार के जरिए दायर किया है। यह याचिका मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष बृहस्पतिवार (जनवरी 07. 2021) को सुनवाई के लिए लाई गई। दिल्ली उच्च न्यायलय ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और आने वाली 18 जनवरी को इस पर सुनवाई करेगा।

इस PIL के अनुसार, कोरोना के संक्रमण के खतरों से सावधानी के बारे में बताने वाली इस कॉलर ट्यून में अमिताभ बच्चन की जगह उन कोरोना वॉरियर्स की आवाज शामिल करने की बात कही गई है, जिन्होंने संक्रमण के कारण जारी लॉकडाउन के दौरान लोगों की सेवा की।

अधिवक्ताओं एके दुबे और पवन कुमार के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है, “भारत सरकार कॉलर-ट्यून पर निवारक उपायों के संबंध में आवाज देने के लिए अमिताभ बच्चन को भुगतान कर रही है।’’

PIL के अनुसार, “कुछ कोरोना वॉरियर्स हैं, जो राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं और इस कठिन समय में गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं। साथ ही, उन्हें भोजन, कपड़ा और आश्रय प्रदान कर रहे हैं तथा यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि कुछ कोरोना योद्धाओं ने अपनी कम आय को भी गरीब और जरूरतमंद लोगों में बाँट दिया।”

याचिका में कहा गया है कि कुछ प्रसिद्ध कोरोना योद्धा अब भी बिना किसी भुगतान के अपनी सेवाएँ देने और राष्ट्र की सेवा के लिए तैयार हैं ।

विभिन्न अदालतों में उनके खिलाफ लंबित कई मामलों का जिक्र करते हुए याचिका में आरोप लगाया गया है कि अमिताभ बच्चन का इतिहास बहुत साफ नहीं है और साथ ही वह सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते राष्ट्र की सेवा नहीं कर रहे बल्कि इसके लिए उनको सरकार से मेहनताना दिया गया है। जिस कारण मोबाइल के कॉलर ट्यून से अमिताभ बच्चन की आवाज हटाई जानी चाहिए।

मोबाइल फोन पर सुनाई देने वाली इस कॉलर ट्यून में अमिताभ बच्चन की आवाज में जो संदेश सुनाई देता है वो है, “नमस्कार, हमारा देश और पूरा विश्व आज कोविड-19 की चुनौती का सामना कर रहा है। कोविड-19 अभी खत्म नहीं हुआ है, ऐसे में हमारा फर्ज है कि हम सतर्क रहें। इसलिए जब तक दवाई नहीं, तब तक कोई ढिलाई नहीं। कोरोना से बचाव के लिए जरूरी है, नियमित रूप हाथ धोना, मास्क पहनना और आपस में उचित दूरी बनाए रखना। याद रखिए दो गज दूरी, मास्क है जरूरी। खाँसी, बुखार या साँस लेने में कठिनाई होने पर हेल्पलाइन नंबर 1075 पर संपर्क करें।”

मोदी सरकार को घेरने के लिए कॉन्ग्रेस ने जारी किया चीनी FDI का फर्जी डाटा, UPA जमाने के आँकड़ों में भी कर डाली हेराफेरी

मोदी सरकार को निशाना बनाने के चक्कर में कॉन्ग्रेस एक बार फिर झूठ फैलाती पकड़ी गई। इस बार उनका झूठ भारत में चीन से आ रहे फॉरेन डाइरेक्ट इन्वेस्टमेन्ट (FDI/ एफडीआई) को लेकर था। 4 जनवरी 2021 को आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कॉन्ग्रेस ने एक इंफोग्राफिक ट्वीट किया जिसमें दर्शाया गया कि मोदी काल में चीन का FDI भारत में बढ़ा है

कॉन्ग्रेस के चार्ट के अनुसार साल 2017 में चीनी एफडीआई $2.8 बिलियन थी। 2018 में यह बढ़कर $3.94 बिलियन और 2019 में $4.19 बिलियन हो गई। पार्टी ने मोदी कार्यकाल से जुड़ी इस डिटेल के बगल में अपने कार्यकाल के दौरान के आँकड़े भी पेश किए। इसमें दिखाया गया कि 2011 में ये राशि $0.3 बिलियन थी, 2012 में $0.31 बिलियन हुई और 2013 में $2.7 बिलियन पहुँची।

कॉन्ग्रेस के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

मोदी सरकार को घेरने के लिए इस इंफोग्राफिक को शेयर करते हुए शायद कॉन्ग्रेस भूल गई कि ऐसा ही उछाल उनके UPA कार्यकाल के दौरान आया था। कहीं न जाकर उनके द्वारा पेश किए आँकड़ों को हीं देखें तो 2012 से 2013 तक में काफी उछाल आया है।

लेकिन, यहाँ सवाल कॉन्ग्रेस कार्यकाल से तुलना करके मोदी सरकार को सही साबित करने का नहीं है, बल्कि तथ्यों पर बात करने का है, जो ये बताते हैं कि कॉन्ग्रेस द्वारा पोस्ट किया गया ये इंफोग्राफिक बेबुनियाद है। हकीकत में दोनों देशों के बीच उपजे विवाद के चलते हाल के सालों में चीन के एफडीआई में गिरावट आई है।

कॉन्ग्रेस के दावों से उलट साल 2019-20 में चीनी FDI इस वित्तीय वर्ष में सिर्फ़ 163.77 मिलियन डॉलर था, न कि 4.14 बिलियन डॉलर था। इसके अलावा, पिछले तीन वर्षों में भी चीनी FDI में कमी आई है। यह 2017-18 में $350.22 मिलियन, और 2018-19 में $229.0 मिलियन था।

साभार: लोकसभा

इन आँकड़ों का खुलासा वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने पिछले साल 14 सितंबर को लोकसभा में किया था जब उनसे इस संबंध में सवाल किए गए।

अब यहाँ ये भी साफ कर दें कि कॉन्ग्रेस ने सिर्फ़ भाजपा को लेकर झूठ नहीं फैलाया, बल्कि खुद के कार्यकाल को लेकर भी उनके पास जानकारी सही नहीं है। उनका दावा था कि 2013 में $2.7 बिलियन एफडीआई हुई। लेकिन हकीकत यह है कि भारत में कभी भी चीनी FDI ने 1 बिलियन डॉलर का आँकड़ा क्रॉस नहीं किया। 2013 में ये राशि $148 मिलियन थी, जो बाद के साल (2014) में गिरकर 121 मिलियन हो गई। फिर 2015 में यह $505 मिलियन पहुँची, लेकिन उसके बाद से यह लगातार कम हो रही है। 

स्रोत: Statista

उल्लेखनीय है कि कोरोनो वायरस महामारी के कारण कंपनियों की कमजोर वित्तीय स्थिति से अवसर लेने वाली भारतीय कंपनियों के चीनी अधिग्रहण पर अंकुश लगाने के लिए, भारत सरकार ने चीन से एफडीआई के मानदंडों को कड़ा कर दिया है। इस साल अप्रैल में केंद्र सरकार ने एक प्रेस नोट 3 जारी किया था, जिसमें उन्होंने सूचित किया था कि भारत से सीमा साझा करने वाले देशों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) केवल सरकार की मंजूरी के बाद ही दिया जाएगा।

अब चूँकि इस नियम में चीन का नाम अलग से नहीं है, लेकिन फिर भी इसमें यह लिखा गया है कि यह केवल भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों को लक्षित करता है, जिसका मतलब साफ है कि नियम को बनाने के पीछे मुख्य लक्ष्य चीन को टारगेट करना है।

अमेरिकी संसद हमला: वामपंथ समझ ले, दक्षिण जाग चुका है | Ajeet Bharti explains US Capitol attack

वामपंथियों ने लगातार ऐसी बवाल, उपद्रव, आगजनी, रक्तपात को ‘विरोध’ कह कर जायज ठहराया, उनके लिए यह एक संदेश है कि वही तरीका अब दूसरे भी अपनाएँगे

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मनी लॉन्ड्रिंग में टाइट हुई एजेंसी तो रॉबर्ट वाड्रा को याद आई पॉलिटिक्स, संसद में जाने की जताई इच्छा

गाँधी परिवार द्वारा देश पर राहुल गाँधी को थोपने के बाद अब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद ने राजनीति में उतरने और चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। रॉबर्ट वाड्रा ने गुरुवार को राजनीति में शामिल होने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें ‘लड़ने के लिए संसद में रहना होगा।” बता दें वाड्रा ने बेनामी संपत्ति मामले में आयकर विभाग द्वारा की गई कड़ी पूछताछ के बाद यह बयान दिया है।

कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं एक ऐसे परिवार से संबंधित हूँ, जिसने पीढ़ियों से इस देश के लोगों की सेवा की है और देश के लिए शहीद भी हुए हैं। मैंने देखा है, सीखा है, अभियान चलाया है और देश के विभिन्न हिस्सों में समय बिताया है। मुझे लगता है कि मुझे इसी शक्ति के साथ लड़ने के लिए संसद में रहना होगा।”

वाड्रा ने आरोप लगाया कि उनके साथ इस तरह का व्यवहार इसलिए किया गया, क्योंकि वह एक प्रमुख राजनीतिक परिवार से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि वह उचित समय पर राजनीति में शामिल होने का निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा, “जब मैं एक ऐसी जगह देखूँगा, जहाँ लोग मुझे प्रतिनिधित्व करने के लिए वोट देंगे और मैं उस क्षेत्र के लोगों के जीवन में एक अंतर ला सकता हूँ और अगर मेरा परिवार इसे स्वीकार करता है।”

नई दिल्ली स्थित अपने सुखदेव विहार कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए, वाड्रा ने कहा, प्रियंका बहुत सपोर्टिव हैं। मैं पूरे परिवार के बारे में बात कर रहा हूँ और जब वे इसे मंजूरी देंगे, तो मैं राजनीति में हो सकता हूँ और राजनीतिक क्षेत्र में अपने मुद्दों के लिए लड़ सकता हूँ।

गौरतलब है कि इस हफ्ते की शुरुआत में ED ने कथित बेनामी संपत्तियों के मामले में लगातार रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ की है। सोनिया गाँधी के दामाद द्वारा 2005 और 2010 के बीच खरीदी गई इन संपत्तियों का कुल मूल्य 12,000 पाउंड माना जाता है।

दिलचस्प यह है कि पहली बार वाड्रा की राजनीतिक आकांक्षाएँ सामने नहीं आई हैं। वाड्रा ने 2019 में भी संकेत दिया था कि वह ‘लोगों की सेवा करने में बड़ी भूमिका‘ के लिए तैयार हैं। यही नहीं वाड्रा के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद ही उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में उनके नाम के पोस्टर भी लगाए गए थे। जिसमें रॉबर्ट वाड्रा से मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने का अनुरोध किया गया था।

वहीं इस घटना के एक महीने बाद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से भी चुनाव लड़ने का आग्रह करने वाले पोस्टर सामने आए थे। हालाँकि 6 मार्च 2019 को एएनआई से बात करते हुए उन्होंने राजनीति में नहीं शामिल होने की कसम खाई थी जब तक कि मनी लॉन्ड्रिंग मामलों से उनका नाम साफ नहीं हो जाता।

उल्लेखनीय है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बेनामी संपत्ति के मामले में प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा को नोटिस भेजा था, लेकिन वह इनकम टैक्स के दफ्तर नहीं पहुँचे। ऐसे में इनकम टैक्स की टीम पूछताछ के लिए उनके घर पहुँच गई और उनका बयान दर्ज किया। साथ ही लगभग 23,000 दस्तावेज भी जब्त किए हैं।

बता दें ब्रिटेन में कथित तौर पर कुछ अघोषित आय रखने के आरोप में वाड्रा आयकर विभाग की जाँच के दायरे में हैं। प्रवर्तन निदेशालय भी धनशोधन विरोधी कानून के तहत उनके खिलाफ इन आरोपों की जाँच कर रहा है। पेशे से कारोबारी वाड्रा ने अपने खिलाफ लगे आरोपों और कुछ भी गलत करने से इनकार किया है। कॉन्ग्रेस ने कुछ महीने पहले कहा था कि वाड्रा के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई की जा रही है।

आरोप है कि रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ने कम दाम में बीकानेर में ज़मीन खरीदी, जिसे आगे अधिक दाम में बेचकर मुनाफा कमाया। इसी से जुड़े एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी जाँच कर रहा है। प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा पर लंदन में संपत्ति की खरीद के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। वाड्रा पर ब्रायनस्टन स्क्वायर में 1.9 मिलियन पाउंड की कीमत का मकान खरीदने का आरोप है। रॉबर्ट वाड्रा फिलहाल अग्रिम जमानत पर हैं।

ईडी ने दिल्ली उच्च न्यायालय से यहाँ तक कहा था कि रॉबर्ट वाड्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की आवश्यकता है। जाँच एजेंसी ने दलील दी थी कि धन के लेन-देन की कड़ियों से कथित रूप से उनका सीधा संबंध है। ईडी ने वाड्रा पर आरोप लगाया था कि वे अपने खिलाफ धनशोधन मामले की जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की बेटी अंजलि को बिना परीक्षा दिए ही UPSC ने सिविल सर्विसेज के लिए चुना? जानें पूरा सच

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की बेटी अंजलि बिरला को लेकर सोमवार (जनवरी 4, 2021) को खबर आई थी कि उनका चयन यूपीएससी ने सिविल सर्विसेज को लेकर किया है। इसके बाद से सोशल मीडिया में उनके चयन को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे। दावा किया जा रहा है कि बिना परीक्षा दिए ही अंजलि का नाम चयनित अभ्यर्थियों की सूची में आ गया, क्योंकि वह भाजपा नेता की बेटी हैं।

कई कॉन्ग्रेस समर्थक समेत ट्विटर यूजर्स ने इसे नेपोटिज्म और फेवरेटिज्म कहा। उनकी कई मॉर्डन तस्वीरें शेयर करके ये दावा किया गया कि वह तो मॉडल हैं और उन्हें केवल उनके लुक्स पर चुन लिया गया, उन्होंने कोई एग्जाम नहीं दिए।

विपक्षियों ने इस दौरान यह भ्रम फैलाया कि सिविल सर्विस में राजनेताओं का कोटा होता है और अंजलि उसी कोटे के जरिए चुनी गई हैं। अब सच क्या है? क्या देश की सबसे बड़ी परीक्षा में आरक्षण के जरिए कोई बिना परीक्षा दिए चुना जा सकता है? जवाब है- नहीं।

सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे इल्जाम पूरी तरह से फर्जी हैं। रिजर्व लिस्ट का मतलब रिजर्व कोटा नहीं होता। हकीकत में यूपीएससी दो लिस्ट बनाती है। एक मेन लिस्ट और दूसरी रिजर्व लिस्ट। मेन लिस्ट तत्काल प्रकाशित कर दिया जाता है, लेकिन रिजर्व लिस्ट गोपनीय रखी जाती है। ये लिस्ट तब पब्लिश होती है जब मेन लिस्ट के सभी कैंडिडेट को सीट अलॉट हो जाती है।

यह सिविल सेवा परीक्षा नियम, 2019 के नियम -16 (4) और (5) के अनुसार किया जाता है। इस नियम के अनुसार, मुख्य सूची में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर उम्मीदवारों की कुल संख्या में कटौती की जाती है, जो निर्धारित सामान्य योग्यता स्तर पर या उससे अधिक योग्यता प्राप्त करते हैं। नतीजतन, उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंकों के अनुसार, उम्मीदवारों की कटौती की गई संख्या के लिए एक आरक्षित सूची तैयार की जाती है।

इस नियम को बनाने की वजह यह है कि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार जो सामान्य मानकों पर चुने गए होते हैं, वे सामान्य श्रेणी के बजाय अपनी आरक्षित स्थिति के आधार पर सेवाओं और कैडर का चयन करना चाहते हैं, तब सामान्य श्रेणी की सीटें खाली रह जाती हैं। बची हुई सीटों को भरने के लिए आरक्षित सूची के उम्मीदवारों का उपयोग किया जाता है, जिसमें सामान्य और आरक्षित श्रेणी, दोनों उम्मीदवार होते हैं।

अब चूँकि यह ज्ञात नहीं होता कि जनरल कैटेगरी में पास होने वाले कितने रिजर्व कैटेगरी के अभ्यर्थी रिजर्व कैटेगरी की पोस्ट लेते हैं और कितने जनरल कैटेगरी के, तो इसलिए रिजर्व लिस्ट को सिर्फ़ मेन सूची में चुने गए नामों को सीट मिलने के बाद ही जारी किया जाता है। जैसे ही सारी प्रक्रिया पूरी होती है फिर मेरिट के हिसाब से रिजर्व लिस्ट निकलती है।

इसलिए, ये साबित होता है कि यूपीएससी में आरक्षण का कोटा नहीं होता। ये बिलकुल ऐसा है जैसे सेकंड मेरिट लिस्ट निकलती है या कोई वेटिंग लिस्ट निकलती है। ये प्री और मेन परीक्षा देने वाले अभ्यार्थियों में से निकाली जाती है। किसी प्रकार का अलग से आरक्षण नहीं होता।

पिछले साल देखें तो कुल वैकेंसी 927 थी। लेकिन रिजल्ट केवल 829 अभ्यार्थियों का निकला। यानी बाकी की सीट रिजर्व लिस्ट के लिए बची थी। जिसका मतलब साफ है कि 98 आरक्षित छात्रों ने सामान्य सूची के अभ्यार्थियों के लिए तय मानकों पर नंबर पाए और इनमें से 89 कैंडिडेट ने जनरल कैटेगरी के लोगों के लिए खाली सीटों को नहीं चुना। इसलिए अब उन सीट पर रिजल्ट घोषित हुआ। इन्हीं में से एक ओम बिरला की बेटी हैं।

इस 89 अभ्यार्थियों की सूची में 73 सामान्य सूची, 14 ओबीसी, 1 EWS, 1 अनुसूचित जाति के कैंडिडेट हैं। अंजलि का नाम 67वें स्थान पर है। इसका अर्थ है कि उन्होंने परीक्षा दी और उसे उत्तीर्ण करने वाले अंक भी प्राप्त किए। इसलिए ये कहना बिलकुल गलत है कि केवल भाजपा नेता की बेटी होने के नाते उनका चुनाव सिविल परीक्षाओं के लिए किया गया।

पाकिस्तानी बिल्डिंग में इस्लामी संगठन का हेडक्वार्टर, सीलिंग के दौरान जमात के अड़ंगा से चेन्नई में तनाव

चेन्नई के मन्नाडी (Mannady) इलाके में बुधवार (जनवरी 6, 2021) को शत्रु संपत्ति अधिनियम (Enemy Property Act) का उल्लंघन होने पर एक इमारत सील करने पहुँचे कुछ अधिकारियों को देखने के बाद तमिलनाडु तौहीद जमात नाम के इस्लामी संगठन ने हंगामा मचाकर क्षेत्र में तनाव उत्पन्न कर दिया। इस बिल्डिंग से इस संगठन का हेडक्वार्टर संचालित हो रहा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय पुलिस व राजस्व अधिकारियों के साथ ये ऑफिसर वहाँ पहुँचे थे। जिसे शत्रु अधिनियम संपत्ति 1968 के तहत पाकिस्तान की संपत्ति के रूप में पंजीकृत किया गया है।

तौहीद जमात के कार्यालय पर इससे पहले कई बार अधिनियम का उल्लंघन होने के मामले में नोटिस भेजे जा चुके थे। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर स्थानीय पुलिस, राजस्व अधिकारियों के साथ कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी ऑफ इंडिया के अधिकारियों को बिल्डिंग सील करने के लिए पहुँचना पड़ा

कथिततौर पर यह इमारत संगठन के उपाध्यक्ष अब्दुल रहमान को लुंगी फर्म चलाने के लिए दी गई थी। लेकिन रहमान ने इसका इस्तेमाल हेडक्वार्टर चलाने के लिए किया। जबकि वास्तविकता में रहमान के पास सिर्फ़ इसकी पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी है, लेकिन हकीकत में संपत्ति तूबा खलीली की है, जो अब पाकिस्तान में रहती हैं। 

बता दें कि साल 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद, 1968 में शत्रु संपत्ति अधिनियम बनाया गया, जो ऐसी संपत्तियों को नियंत्रित करता है और संरक्षक की शक्तियों को सूचीबद्ध करता है। यही अधिनियम संशोधित होने के बाद से कस्टोडियन को ही प्रॉपर्टी का मालिक मानता है और उन्हें ही उससे जुड़े अधिकार देता है।

अब ऐसे में जैसे ही इस अधिनियम के उल्लंघन पर अधिकारियों ने मुख्यालय पर कार्रवाई की तो तौहीद जमात के लोग इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने लगे। करीब दो घंटों तक विवाद चला। रहमान ने कहा कि जब सरकार ने शत्रु अधिनियम के तहत संपत्ति के निपटान का फैसला किया, तो उन्होंने सरकार को किराया देना शुरू कर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि उन लोगों ने जमीन खरीदने का विचार किया था। हालाँकि, बुधवार को बिना किसी जानकारी के पुलिस वहाँ तैनात हुई और उन्हें जाने को कह दिया गया।

उनके अनुसार, “केंद्र सरकार ने बिना सूचना दिए संपत्ति सीज करने को कहा है। ये स्वीकार्य नहीं होगा।” रहमान कहते हैं, “इस कदम के पीछे राजनीतिक उद्देश्य है। सरकार हमें परेशान करना चाहती है, लेकिन हम गुस्सा नहीं करेंगे। अगर हम प्रदर्शन भी करेंगे तो लोकतांत्रित ढंग से।

बता दें कि देश में कुल 9,400 शत्रु संपत्तियाँ हैं, जो कि स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान चले गए लोगों द्वारा छोड़ी या बेची गई जमीन है, इसकी कीमत 1 लाख करोड़ रुपए है। 2017 में, केंद्र सरकार ने शत्रु संपत्ति (संशोधन और सत्यापन) अधिनियम पारित किया, जिसने शत्रु संपत्ति पर उनके कानूनी उत्तराधिकार को अस्वीकार कर दिया था।