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मुंबई-लंदन-न्यूयॉर्क के घर, स्विस बैंक अकाउंट; नीरव मोदी की प्रॉपर्टी जब्त करवा बहन-बहनोई बने सरकारी गवाह

पंजाब नैशनल बैंक (PNB) घोटाला मामले में भगोड़े नीरव मोदी की बहन पूर्वी मोदी और उनके पति मयंक मेहता सरकारी गवाह बन गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्वी और उनके पति मयंक ने मुंबई के विशेष पीएमएलए कोर्ट के समक्ष एक अर्जी दायर करते हुए अदालत से सीआरपीसी की धारा 306 और 307 के तहत माफी माँगी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार पूर्वी और मयंक ने बैंक धोखाधड़ी के मामले में नीरव मोदी की 579 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने में मदद की। इसमें न्यूयॉर्क में दो फ्लैट, लदंन और मुंबई में 1-1 फ्लैट, दो स्विस बैंक खाते और मुंबई में एक खाता शामिल है। इसके बाद दोनों ने सरकारी गवाह बनने की अनुमति माँगी।

बता दें बेल्जियम की नागरिक पूर्वी ईडी द्वारा दर्ज मामले में आरोपित है, जबकि नीरव मोदी PNB में $2 बिलियन बैंक धोखाधड़ी मामले में मुख्य अभियुक्त है। मनी लांड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत मामलों को देखने वाले विशेष न्यायाधीश वीसी बर्डे ने सोमवार को सरकारी गवाह बनने को लेकर पूर्वी के आवेदन को स्वीकार कर लिया। अदालत ने कहा कि मामले में माफी माँगने के बाद आरोपित (पूर्वी मोदी) अब सरकारी गवाह होगी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि, “आरोपित फिलहाल विदेश में रह रही है। उसे अदालत के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया जाएगा। इसके लिए अभियोजन पक्ष जरूरी कदम उठाएगा।”

गौरतलब है कि इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक धोखाधड़ी मामले में पूर्वी मोदी, मयंक मेहता और अन्य को विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष सह-अभियुक्त बनाया था। पीएमएलए के तहत जाँच में पता चला था कि पूर्वी मोदी के पास एक दर्जन बैंक खाते हैं और विदेशों में विभिन्न कंपनियों/ट्रस्टों की ओनरशिप है।

बता दें 2 अरब डॉलर के पीएनबी घोटाले में नीरव मोदी मुख्य आरोपित है। पीएनबी घोटाला उजागर होने के बाद वह भारत से भाग गया था। नीरव मोदी और उसका मामा मेहुल चोकसी देश छोड़ कर तब भागे जब पीएनबी ने उनके खिलाफ 11,300 करोड़ के ऋण धोखाधड़ी के मामले रिपोर्ट दर्ज की थी।

एक साल की जाँच-पड़ताल के बाद आखिरकार उसे पिछले साल 20 मार्च को लंदन में गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, वह पश्चिम लंदन के एक अल्ट्रा-लग्जरी अपार्टमेंट में रह रहा था। उसकी जमानत याचिका कई बार ख़ारिज हो चुकी है और वह ब्रिटेन की जेल में है।

मामले में अन्य मुख्य आरोपित नीरव मोदी का मामा मेहुल चोकसी अब एंटीगुआ की नागरिकता ले चुका है और वहीं रह रहा है। भारत सरकार उसके प्रत्यर्पण के लिए भी प्रयास कर रही है। भारत में ED द्वारा नीरव मोदी और चोकसी के प्रॉपर्टी, मकान, लक्ज़री आइटम और व्यापार परिसर समेत कई हजार करोड़ रुपए जब्त किए जा चुके हैं।

इससे पहले जून में ईडी ने हांगकांग में दोनों के हीरे और लक्जरी मोती के आभूषणों की कई खेप बरामद की थी और 1300 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न संस्थाओं की 108 खेपों को वापस लाया था।

ISIS आतंकी शिहाबुद्दीन को NIA ने किया गिरफ्तार: तमिलनाडु पुलिस के SSI विल्सन हत्याकांड में थी तलाश

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने तमिलनाडु पुलिस के विशेष सब इंस्पेक्टर विल्सन हत्याकांड में शामिल चेन्नई के रहने वाले छठे हत्यारोपित शिहाबुद्दीन (39) उर्फ खालिद (सिराजुद्दीन) को कतर से चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुँचने पर गिरफ्तार कर लिया। दरअसल, आरोपित जनवरी 2020 से फरार था। शिहाबुद्दीन हत्याकांड के बाद कतर भाग गया था।

अधिकारियों ने लुकआउट सर्कुलर के आधार पर शिहाबुद्दीन को हिरासत में लिया। जिसके बाद उसे राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के हवाले कर दिया गया। बता दें हत्या में शामिल अन्य सभी आतंकवादियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका हैं।

एनआईए द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, हत्याकांड 8 जनवरी 2020 को घटित हुआ था। विल्सन कन्याकुमारी में केरल से लगने वाली सीमा पर एक चेक प्वाइंट पर तैनात थे। उसी दौरान आतंकवादी अब्दुल शमीम और तौफीक ने अवैध हथियारों का इस्तेमाल कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था।

एजेंसी ने 10 जुलाई को विल्सन हत्या मामले में आरोपित अब्दुल शमीम, तौफीक, खाजा मोहीदीन, महबूब पाशा, इजास पाशा और जाफर अली का उल्लेख करते हुए चार्जशीट दायर की थी और उन पर धारा 120बी, 302, 353 और 506 (ii) IPC 34, धारा 16, 18, 18B, 20, 23, 38 और 38 UA (P) अधिनियम, 1967, और धारा 25 (1B) (a) और 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।

आतंकी कनेक्शन सामने आने के बाद मामले को तमिलनाडु पुलिस से एनआईए को सौंप दिया गया था। जिसके बाद एनआईए ने 1 फरवरी 2020 को मामला फिर से दर्ज किया था और शमीम और तौफीक को गिरप्तार किया गया था। इस साजिश में शिहाबुद्दीन भी शामिल था। एसएसआई विल्सन की हत्या में प्रारंभिक जाँच से पता चला था कि उनके हत्यारे “स्व-घोषित जिहादी” थे, जिन्होंने तमिलनाडु पुलिस द्वारा अपने ISIS सहयोगी, मोहम्मद हनीफ खान (29), इमरान खान (32) और मोहम्मद जैद (24) की गिरफ्तारी का बदला लेने के लिए पुलिसकर्मी की हत्या कर दी थी।

उन्होंने कहा कि यह मामला पिछले साल आठ जनवरी को अब्दुल शमीम और तौफीक नाम के आतंकवादियों द्वारा तमिलनाडु पुलिस के विशेष उप-निरीक्षक विल्सन की हत्या से संबंधित है। प्रवक्ता ने कहा कि विल्सन की पिछले साल आठ जनवरी की रात को उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई थी जब वह कन्याकुमारी में केरल से लगने वाली सीमा पर एक चेक प्वाइंट पर तैनात थे। तमिलनाडु सरकार ने विल्सन के परिवार को एक करोड़ रुपए के मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की थी।

बेंगलुरु में अपने आईएसआईएस के सहयोगियों की गिरफ्तारी के जवाब में आतंकवादियों ने अगले दिन विल्सन को तमिलनाडु के कालियाक्कविलाई (Kaliyakkavilai) में पद्मथलुमुडु (Padanthalumoodu) चेक-पोस्ट पर गोली मार दी थी। पुलिस के मुताबिक, 2014 में हिंदू मुन्नानी नेता की हत्या के मामले में शमीम जमानत लेने के बाद से फरार चल रहा था।

गौरतलब है कि आतंकियों को 15 जनवरी, 2020 को गिरफ्तार किया गया था। जिसके बाद इस बात का खुलासा हुआ था कि उन्होंने यह हमला अपने सहयोगियों की गिरफ्तारी का बदला लेने और लोगों के मन में आतंक फैलाने के लिए किया था।

राजदीप गिरोह का वैचारिक दोगलापन: संसद हमले को ‘महान दिन’ कहने वाले कैपिटल हिल हंगामे से हलकान

अमेरिका के कैपिटल हिल में सैंकड़ों ट्रंप समर्थकों के हंगामे के बाद भारतीय लिबरल सदमे में हैं। यूएस की संसद परिसर में हुए हमले को देखकर लिब्रांडु गिरोह का कहना है कि ये अमेरिका में हुआ हमला भारत जैसे लोकतंत्र के लिए चेतावनी है। 

सोशल मीडिया पर इस गिरोह के नामी गिरामी सदस्य यूएस में हुई घटना को आतंकी हमला जैसा बताकर भारत के प्रति अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं। इस्लामी एजेंडे की सबसे बड़ी वाहक राणा अयूब लिखती हैं, 

“ये एक रिमाइंडर है भारत जैसे लोकतंत्र के लिए। वो दिन दूर नहीं जब हम अपनी मिट्टी पर इस आतंक के गवाह बनेंगे। ऐसे घटिया वर्चस्व को सोशल मीडिया और कॉन्सिपिरेसी थ्योरी के जरिए हमारे पीछे फैलाया जा रहा है। हम इसे दिन पर दिन तैयार होते देख रहे हैं।”

स्वघोषित नेहरू प्रशंसक सागरिका घोष व राजदीप सरदेसाई की पत्नी इस हमले को भारतीय लोकतंत्र से जोड़ती हैं और हमारी डेमोक्रेसी को बेहद नाजुक करार देती हैं। वह लिखती हैं,

”जब ऐसे दृश्य विश्व की सबसे पुराने लोकतंत्र में नजर आ रहे हैं तो उन देशों के लिए यह पूर्वसूचना है जहाँ लोकतंत्र भयावह रूप से कमजोर है। जैसे भारत।”

आरफा खान्नुम शेरवानी ने तो यूएस संसद परिसर में ट्रंप समर्थकों की नाराजगी को बाबरी विध्वंस से जोड़ दिया। शेरवानी ने लिखा, “हाँ, ये अमेरिका का ‘बाबरी मस्जिद विध्वंस’ का क्षण है।” वह भारतीय न्यायव्यवस्था पर तंज कसते हुए कहती हैं कि उन्हें विश्वास है कि अमेरिका के कोर्ट इसके बावजूद कैपिटल हिल को सफेद वर्चस्ववादी आतंकियों को नहीं सौंपेंगे।

सबसे अजीब बात इन लिबरलों के तर्कों में यह है कि इनकी बयानबाजी में सिर्फ़ कुंठा है न कि कोई तथ्य। अगर होता तो सोचिए कैपिटल हिल और बाबरी के बीच कोई तुलना होती? जाहिर है कैपिटल हिल हिंदू मंदिर के मलबे के ऊपर नहीं बनाया गया। अगर कंपैरिजन होना चाहिए तो कैपिटल हिल का भारतीय संसद से होना चाहिए, जहाँ सदस्य इकट्ठा होकर नीति निर्माण आदि करते हैं।

याद करिए, सबसे सटीक तुलना इस हमले की यदि भारतीय परिप्रेक्ष्य में की जाए तो यहाँ 2001 में भारतीय संसद पर हुआ हमला है। लेकिन, ये लिब्रांडु उस पर बात नहीं करेंगे। क्योंकि ये जानते हैं कि इनके गिरोह के सदस्यों ने उस समय कैसी प्रतिक्रियाएँ दी थी। 

राजदीप सरदेसाई एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने भारतीय संसद पर हुए हमले को ‘अ ग्रेट डे (एक महान दिन)’ कहा था। सरदेसाई ने देश की संसद पर हुए हमले पर बात करते हुए कहा था कि कैसे वह संसद के बगीचे में पिकनिक मना रहे थे जब आतंकी पार्लियामेंट पर हमला कर रहे थे।

सरदेसाई ने अपने कैमरामैन से कहा था कि वह बंद गेट को देखें ताकि कोई दूसरा चैनल न घुस पाए। ये वो समय था जब न्यूज पहुँचाने के लिए चैनल बहुत कम थे और सरदेसाई इस बात को लेकर उत्साहित थे कि उन्हें आतंकी हमला कवर करने के लिए एक बड़ी स्टोरी मिल गई।

इसी प्रकार, अफजल गुरु की मौत याद है? भारतीय संसद पर हमला करने के लिए उसे 9 फरवरी 2013 को फाँसी पर लटकाया गया था। राणा ने इसी घटना को आधार बना कर कहा था कि अफजल के साथ जो भारत ने किया वहीं पाकिस्तान सरबजीत के साथ कर रहा है। उन्होंने अफजल की मौत को ‘कट्टरपंथियों का तुष्टिकरण’ और ‘न्यायिक प्रक्रिया पर धब्बा’ कहा था।

अफजल की मौत पर जेएनयू से आवाज उठी थी- अफजल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं। उस समय उसी उमर खालिद के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला चला था जिसे हाल ही में 2020 के दंगों के लिए भी आरोपित बनाया गया है।

मगर, भारतीय लिबरल क्या कर रहे हैं? खालिद जैसों का समर्थन और उसे जेल से छुड़ाने की माँग। इसलिए जब ऐसे दो चेहरे वाले लोग यूएस की संसद के बाहर हुए हंगामे पर सदमे में जाने का नाटक करते हैं, तो यह सिर्फ़ उनके पाखंडी चेहरे की हकीकत दिखाता है।

भूख, पिटाई, शोषणः नफीसा ने बताया कैसे औरतों की जिंदगी जहन्नुम बनाता है शफी, कई महिलाओं ने की घर वापसी

एक माँ के लिए अपने बच्चों का पेट भरना सबसे पहली प्राथमिकता होती है। इसके लिए वह खुद हर पीड़ा झेल लेती है। हैदराबाद की नफीसा (बदला हुआ नाम) के लिए भी उसके बच्चे सबसे पहले थे। एक समय तक दो-दो नौकरी से 8000 प्रति माह उपार्जन कर उसने बच्चों का पेट भरा। लेकिन कोविड के कारण उपजी परिस्थितियों में उसके रोजगार छिन गया और वह एक धोखेबाज ट्रैवल एजेंट शफी के जाल में फँसने को मजबूर हो गई। 

शफी ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाते हुए उसे दुबई भेजने का लालच दिया। कहा कि उसे वहाँ 40,000 रुपए की नौकरी मिलेगी। वहाँ जाकर उसे नौकरी तो मिली लेकिन सैलरी के बदले उसे असहनीय प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा। भयावह बात यह है कि शफी ने केवल नफीसा की हँसती-खेलती जिंदगी को जहन्नुम में नहीं झोंका, बल्कि उसके साथ कई महिलाओं को भेजकर भी वही हश्र करवाया जो नफीसा का हुआ।

दुबई में भारतीय आव्रजन प्राधिकरण (Indian immigration authorities) के प्रयासों के बाद नफीसा 4 माह बाद हैदराबाद अपने घर लौट आई है। 27 साल की इस महिला ने भारत पहुँच कर आपबीती सुनाई। पीड़िता ने बताया कि शफी ने उसे दुबई के पार्लर में 40,000 की सैलरी दिलाने का वादा किया था। उसे लगा कि दिल की बीमारी से जूझ रही बड़ी बेटी के इलाज के लिए उसने जो 2 लाख उधार लिया था वो सब इससे चुक जाएगा। कोई भविष्य में फिर उससे तकादा करने नहीं आएगा। उसे कहीं ब्याज नहीं देना होगा। यही सब सोच कर नफीसा तुरंत मान गई।

उसने मोइनपुरा निवासी शफी को संपर्क किया और दुबई जाने की इच्छा जताई। शफी ने फौरन अवैध कागजों का इंतजाम किया और उसे दुबई भेज दिया। वहाँ जाने से पहले तक नफीसा उस शफी को इतनी मदद करने के लिए दुआएँ दे रही थीं, लेकिन उसे नहीं पता था कि वहाँ उसकी जिंदगी कितनी बदलने वाली है।

द न्यूज मिनट में प्रकाशित उसकी आपबीती के अनुसार वह 12 सितंबर दुबई पहुँची थी। लेकिन, वहाँ जाकर उसे जिस महिला ने काम दिया। उसने उसकी जिंदगी जहन्नुम से बदतर बना दी। नफीसा बताती है कि वह महिला उसे मारती थी और घर का सारा काम सुबह 5 बजे से 2 बजे तक करवाती थी। एक दिन तंग आकर जब उसने काम करने से मना किया और अपनी पगार माँगी तो उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया और खाना-पीना देना बंद कर दिया।

4 महीने तक नफीसा ने यह दुख झेला। बिना पगार एक अंजान देश में काम किया। 30 लोगों के साथ वह एक अकेले कमरे में रही, जहाँ शौचालय केवल एक था। उनकी कॉन्ट्रैक्ट एजेंसी उन सबको हर रोज काम के लिए ले जाती थी।

वह बताती है कि इस एजेंसी के कार्यालय में रहते हुए उन्होंने 5 दिन बाथरूम के नल से पानी पी पीकर गुजारे। एक दिन खुशकिस्मती से वह भागकर अस्पताल पहुँच गई। वहाँ आपबीती सुनाई और घर जाने के लिए मिन्नते कीं। बाद में जाकर दुबई में मौजूद इंडियन इमिग्रेशन अथॉरिटी के प्रयासों से उसे बचाया गया। उसके साथ 25 और महिलाएँ बच पाईं।

दुबई से लौटी रेशमा की कहानी

नफीसा की भाँति 20 साल की रेशमा (बदला हुआ नाम) भी हालातों से परेशान होकर दुबई गई थी। उसकी मजबूरी थी कि उसके शौहर का स्वास्थ्य सही न होने के कारण वह दो साल से घर में ही रहते थे और उनके इलाज में 1 लाख का खर्चा आना था। उसे कुछ भी करके पैसे इकट्ठा करने था। इसीलिए शफी से मिल कर उसने दुबई जाने की इच्छा व्यक्त की। वह चाहती थी कि वह जाकर पैसे कमाए और सर्जरी के लिए पर्याप्त राशि जुटा सके। पहली बार में उसका वीजा रिजेक्ट हो गया, लेकिन बाद में किसी प्रकार वह वहाँ पहुँच गई।

वह बताती है,” सबसे पहली बार में हैदराबाद एयरपोर्ट अधिकारियों ने मेरा वीजा रिजेक्ट करके मुझे वापस भेज दिया था। उन्हें लगा था कि मैं छोटी हूँ और मेरे वहाँ जाने में कुछ गड़बड़ हो सकती है। वह कहती है कि शायद पहली बार में रिजेक्ट हुआ वीजा खुदा का इशारा था कि मैं अपना फैसला बदल लूँ, लेकिन शफी ने मुझपर दबाव बनाया और भविष्य व उधारी की बात कर करके वहाँ भेजने के लिए मना लिया। मैं चली गई।”

रेशमा का यह फैसला उस पर बहुत भारी पड़ा। अपनी मालिक द्वारा उसे असहनीय प्रताड़ना दी गई। वह कहती है कि उन्हें भूखा रखा गया और अमानवीय स्थिति में काम करवाया जाता रहा। जब शफी से उसने लौटने को कहा तो उसने उससे गाली-गलौच करके उसके शौहर से डेढ लाख रुपए माँगे।

ट्रैवल एजेंट हुआ गिरफ्तार

शफी का यह धोखाधड़ी का धंधा ज्यादा दिन नहीं चला। 11 दिसंबर 2020 को एक पीड़ित की बहन की शिकायत पर शलिबंद पुलिस ने उसे आईपीसी की धारा 420 के तहत गिरफ्तार कर लिया। महिला तस्करी का यह पूरा मामला उस समय जानकारी में आया जब शिकायतकर्ता ने मजलिस बचाओ तहरीक पार्टी के नेता अमजद खान को संपर्क किया। अमजद चूँकि पहले भी बाहरी देशों में फँसे लोगों की मदद कर चुके थे, तो उन्होंने यह मामला उठाया और कई पीड़िताएँ बचाई गईं।

अब तक 10 महिलाएँ हैदराबाद लौट चुकी हैं। वह कहते हैं कि सरकार ऐसे धोखेबाजों के ख़िलाफ़ बहुत नरम रवैया अपनाती है और इनके ख़िलाफ़ जमानती धाराओं में मामले दर्ज होते हैं। कई महिलाओं की इसी तरह तस्करी हुई और हर बार पुलिस ने उन्हीं धाराओं में केस दर्ज करके आरोपितों को छोड़ दिया गया।

हैदराबाद के 5 परिवारों ने लगाई थी भारत सरकार से गुहार

बता दें कि इससे पहले ट्रैवल एजेंट शफी के जाल में फँसी 5 महिलाओं के परिवार ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई थी। एएनआई से बात करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अमजद उल्लाह खान ने इनके बारे में विस्तार से जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था, “तेलंगाना हैदराबाद स्थित मिसरीगंज के लोकल एजेंट सैफी ने हैदराबाद की ही 5 महिलाओं को दुबई के एक शॉपिंग मॉल में नौकरी दिलाने की बात कही थी। अक्टूबर 2020 में उसने पाँचों महिलाओं को तीन महीने के वीज़ा पर दुबई भेजा और फिर उन्हें दुबई की लेबर रिक्रूटमेंट कंपनी में काम करने वाले अल सफीर को सौंप दिया। इसके बाद प्रत्येक महिला को 2 लाख रुपए में बतौर घरों में काम करने वाली नौकरानी, अरब परिवारों को बेच दिया गया।” 

महिलाओं के हालात का ज़िक्र करते हुए अमजद उल्लाह ने बताया, “इन महिलाओं को पर्याप्त खाना और रहने की जगह दिए बिना ही इनसे 15 घंटे तक काम करवाया जाता है। इन महिलाओं को बातें नहीं सुनने पर यातनाएँ दी जाती हैं और अक्सर यौन शोषण तक किया जाता है। ये जब से दुबई गई हैं तब से ही इन्हें वेतन भी नहीं मिला है।” 

उन्होंने भारत सरकार से निवेदन किया था कि वह जल्द से जल्द इस मामले में दखल देकर मदद करें। अबू धाबी, यूएई में मौजूद भारतीय दूतावास और दुबई में मौजूद भारतीय वाणिज्य दूतावास मदद के लिए आगे आए ताकि इन महिलाओं को इस मुश्किल से बचाया जा सके और इनकी देश वापसी संभव हो सके। 

5 लाख गाँव में जाएँगे स्वयंसेवक, 10 करोड़ परिवार से करेंगे संपर्क: RSS ने बताया राम मंदिर के लिए कैसे जुटाएगा चंदा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अयोध्या के राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा ऐलान किया है। ऐलान के मुताबिक़ वह अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए 5 लाख गाँवों में स्वयंसेवकों को भेजेगा। यह निर्णय गुजरात में 5 से 7 जनवरी तक चली संघ की राष्ट्रीय समन्वय समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में संघ के तमाम अनुषांगिक संगठन के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के पहले दिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद थे। 

संघ के वरिष्ठ अधिकारी कृष्ण गोपाल ने कहा, “5 अगस्त को अयोध्या में भूमि पूजन होने के बाद देश भर के लोग यही चाहते हैं कि भव्य राम मंदिर का निर्माण हो। हमारे स्वयंसेवक देश भर के 5 लाख गाँवों में जाकर इसके लिए आर्थिक सहयोग इकट्ठा करेंगे। इस बीच हम 10 करोड़ परिवारों से सीधे संपर्क करेंगे। हमारा प्रयास होगा कि हमें हर एक परिवार से पूरा सहयोग प्राप्त हो। राम मंदिर निर्माण के लिए कम से कम सहयोग राशि 10 रुपए होगी। जो लोग इससे अधिक आर्थिक सहयोग करने की इच्छा रखते हैं वह 100 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक का आर्थिक सहयोग कर सकते हैं। समृद्ध वर्ग से आने वाले लोग अपनी इच्छानुसार इससे अधिक आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।”        

संघ की बैठक में विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता और राम मंदिर ट्रस्ट के जनरल सेक्रेट्री चम्पत राय भी शामिल हुए। इसके पहले विश्व हिन्दू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग इकट्ठा करने के लिए बड़ा अभियान चलाने का ऐलान किया था। संघ और विश्व हिन्दू परिषद का यह अभियान संभावित तौर पर 15 जनवरी से शुरू होगा। इस पर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जनरल सेक्रेट्री चम्पत राय ने कहा था, “जो राम भक्त अपनी इच्छा से आर्थिक सहयोग करना चाहते हैं उनके लिए 10,100 और 1000 रुपए के कूपन उपलब्ध कराए जाएँगे।” 

संघ की इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय समन्वय समिति की बैठक में राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पश्चिम बंगाल चुनाव और कृषि सुधार क़ानूनों के विरोध में जारी किसान आंदोलन के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।        

‘नाना पाटेकर का बहिष्कार और बलात्कारी अनुराग कश्यप को बढ़ावा… नरक भी ऐसे लोगों को रखने से मना कर देगा’

बॉलीवुड फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप पर पिछले साल यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पायल घोष ने इस बार बॉलीवुड के पाखंड पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा है कि आखिर बॉलीवुड में इतनी हिप्पोक्रेसी क्यों है कि नाना पाटेकर के ख़िलाफ़ सब खड़े हो गए और अनुराग कश्यप के मामले पर किसी ने उसका बहिष्कार नहीं किया।

पायल ने ट्वीट किया, “बॉलीवुड में इतनी हिप्पोक्रेसी क्यों है। क्यों बॉलीवुड ने नाना पाटेकर का बहिष्कार कर दिया और ये अनुराग कश्यप जैसे बलात्कारी को बढ़ावा दे रहे हैं। आखिर मरने के बाद ये लोग कहाँ जाएँगे। नरक भी ऐसे झूठे, ढोंगियों, अवरसवादी लोगों को रखने से मना कर देगा। मैं ऐसे जानवरों को ‘नरक में जाओ’ भी नहीं कह सकती।”

पायल घोष का हालिया ट्वीट

बता दें कि तनुश्री और नाना पाटेकर के मामले पर बॉलीवुड के लोगों ने खुल कर अभिनेत्री के समर्थन में और पाटेकर के विरोध में बयानबाजी की थी। कई कलाकारों ने केस में क्लीनचिट पा चुके पाटेकर के साथ काम करने से भी मना कर दिया था। लेकिन पिछले वर्ष जब अभिनेत्री पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न का इल्जाम लगाया तो सबने चुप्पी साध ली और बहुत कम लोग उनके पक्ष में बोलते नजर आए। इसी बात से नाराज घोष ने उक्त ट्वीट किया।

याद दिला दें कि पिछले वर्ष घोष ने अनुराग के साथ हुई अपनी तीन मीटिंगों की एक-एक बात सोशल मीडिया के जरिए रखी थी। उन्होंने इस पर शिकायत भी दर्ज करवाई थी। हालाँकि बाद में पता चला कि कश्यप पर कोई खासी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते अभिनेत्री ने कहा कि यदि वह छत से लटकी हुई पाई गईं तो याद रखा जाए कि उन्होंने आत्महत्या नहीं की होगी

पायल घोष का आरोप

पायल घोष ने अनुराग कश्यप के साथ तीसरी मुलाकात के बारे में बताया था,

“उस दिन लगभग 7:30 बजे मैं अपनी होंडा सिटी कार में अनुराग कश्यप के घर पहुँची। वह अंदर बैठकर स्मोक कर रहा था। घर से वाकई बहुत बदबू आ रही थी और जब मैंने उससे पूछा, तो उसने कहा कि वह मारिजुआना का सेवन कर रहा था। उसने मुझे भी स्मोक करने को कहा, लेकिन मैंने मना कर दिया। वह मुझे अपने फिल्मों के संग्रह को दिखाने के लिए दूसरे कमरे में ले गया। अपनी पुरानी फिल्मों के कैसेट दिखाते हुए, उसने अचानक मुझे सोफे पर धकेल दिया। फिर उसने अपनी पैंट खोली और मुझसे जबरदस्ती करने लगा। मैंने बहुत चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन उसने मेरा मुँह दबा दिया और मेरा बलात्कार किया।”

अमेरिका में जो बाइडन के जीत पर लगी मोहर, ट्रंप ने कहा- असहमत होने के बावजूद 20 जनवरी को छोड़ दूँगा कुर्सी

अमेरिका में हिंसा के बीच कॉन्ग्रेस ने जो बाइडेन की जीत पर मुहर लगा दी है। वे 20 नंवबर को राष्ट्रपति पद संभालेंगे। उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने इलेक्‍टोरल कॉलेज के वोटों के आधार पर जो बाइडन के जीत का ऐलान कर दिया है। वहीं इस फैसले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे चुनाव के नतीजों से पूरी तरह असहमत है। इसके बावजूद 20 जनवरी को कानून के मुताबिक जो बाइडेन को सत्ता का हस्तांतरण किया जाएगा।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान देते हुए कहा कि 20 जनवरी को कानून के मुताबिक जो बाइडेन को सत्ता का हस्तांतरण किया जाएगा। वो चुनावी नतीजों का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन इसके बावजूद सत्ता को जो बाइडेन को सही तरीके से सौंपेंगे।

CNN के मुताबिक ट्रंप ने जारी बयान में कहा, “मैंने कहा था कि मैं हमेशा लीगल वोटिंग के प्रति लड़ाई को जारी रखूँगा और चुनावों में पारदर्शिता तय करेंगे। यह मेरे पहले और ऐतिहासिक राष्ट्रपति कार्यकाल का अंत है। ये अमेरिका को फिर से महान बनाने की हमारी लड़ाई की सिर्फ शुरुआत है। साथ ही ट्रंप ने फिर चुनावों की धाँधली से जुड़े अपने आरोपों को दोहराया।”

बता दें अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन को 306 इलेक्टोरल कॉलेज वोट मिले हैं, जो बहुमत से ज्यादा हैं। राष्ट्रपति बनने के लिए 270 वोटों की जरूरत होती है। कॉन्ग्रेस की मंजूरी के बाद जो बाइडेन आधिकारिक तौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति होंगे।

गौरतलब है कि अमेरिका के वाशिंगटन में हिंसक बवाल हुआ था। बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के हजारों समर्थक जबरन संसद के कैपिटल हिल बिल्डिंग में घुस गए और जमकर उत्पात मचाया। वहीं इस हिंसा में 4 लोगों के मरने की खबर है और कहा जा रहा है प्रदर्शनकारियों के पास से विस्‍फोटक भी बरामद हुआ है।

वहीं हिंसा के बाद ट्रंप ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने का निवेदन किया था। उन्होंने कहा, “प्रदर्शन के बीच हिंसा नहीं होनी चाहिए, याद रखें हम एक क़ानून और व्यवस्था की पार्टी हैं।” कैपिटल भवन में हिंसा के दौरान ट्विटर ने डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर एकाउंट भी ब्लॉक कर दिया। ट्विटर ने ‘नागरिक एकता और चेतावनी भरी हिंसात्मक नीतियों’ का हवाला देते हुए ट्रंप का एकाउंट 12 घंटे के लिए बंद किया था।

ट्रंप समर्थक ने कहा- कश्मीर के लिए किया कैपिटल हिल पर हमला, JNU में बना हीरो

हाल ही में, बकरी का मुखौटा और मास्क लगाए एक ट्रम्प समर्थक गेटी की तस्वीर पूरे अमेरिका में वायरल हुई थी, उसने अभी-अभी दावा किया है कि अमेरिका के फेडरल गवर्नमेंट बिल्डिंग (कैपिटल हिल) को निशाना बनाना दरअसल, कश्मीर के लिए न्याय की लड़ाई थी।

यकीन नहीं हो रहा है तो गेटी द्वारा किए गए इस ट्वीट को खुद पढ़िए, जिसे यह रिपोर्ट लिखे जाने तक 25 हजार से भी अधिक बार रीट्वीट किया जा चुका था, “यह कश्मीर के लिए था। यह पूँजीपतियों द्वारा गरीबों पर किए गए अत्याचार करने के लिए था। यह मोदी के लिए एक चेतावनी थी। यह ट्रम्प के लिए नहीं था।”

इतना ही नहीं गेटी ने बाद के कुछ ट्वीट्स में यह भी दावा किया कि ‘वे’ कश्मीर में भारत की नीतियों पर मोदी का समर्थन करने के लिए ट्रम्प से नाराज़ थे, और वास्तव में अमेरिका की राजधानी में उन्होंने इतना बवाल इसलिए काटा था कि ट्रम्प को उनके सुनहरे बालों से पकड़कर, घसीटते हुए बाहर निकाल सके, लेकिन कहीं न कहीं ट्रम्प समर्थक होने के कारण गच्चा खा गया।

“प्रूफ क्या है?” जैसे ही यह सवाल किसी ने गेटी की तरफ उछाला, गेटी ने भी बिना देर किए अपनी बात साबित करने के लिए ट्वीट कर कहा, “वह वही व्यक्ति था जो पूरे अमेरिकी बवाल में अकेला भारतीय झंडा लहरा रहा था, यह संकेत पर्याप्त है कि उसका विरोध भारत के विरुद्ध था न कि अमेरिका के।”

“ब्लैक लाइव्स मैटर, मुस्लिम लाइव्स मैटर, रेनबो मैटर्स, एग्रीकल्चर मैटर्स, डेथ टू रेसिस्ट्स, स्मैश ब्राह्मणवादी पितृसत्ता…” यह उस एकाउंट से पोस्ट किया गया आखिरी ट्वीट था, जिसके फॉलोवर्स की संख्या 2000 प्रति मिनट की दर से बढ़ रही थी।

गेटी, एक 21 साल का तेजतर्रार विद्रोही, जैसा कि उसका परिचय उसके ट्विटर बायो में ही लिखा है। जिसके लिए सर्वनाम ‘वे’ का प्रयोग ऊपर किया गया है, ने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर द्वारा अपने 12 घंटे के लिए ‘ब्लॉक प्रमुख’ बनाए जाने अर्थात 12 घंटे का प्रतिबन्ध समाप्त होने पर ट्विटर पर जब अपना स्पष्टीकरण पोस्ट किया। तो वह ट्वीट ही वायरल हो गया और परिणाम में गेटी को मिला एक ब्लू टिक यानी अब उसके ट्विटर एकाउंट को सत्यापित कर दिया गया है।

मारे ख़ुशी के, अब उस 21 साल के विद्रोही ने अपनी प्रोफ़ाइल पिक्चर को अपडेट कर दिया था, जिसमें लाल रंग के पृष्ठभूमि में एक बंद मुट्ठी ताने एक नौजवान दिखाई दे रहा है, जबकि कवर तस्वीर में अफ़ज़ल गुरु सहित कई हस्तियों का एक कोलॉज था, वही अफजल गुरु, जिसने 2001 में भारतीय संसद पर आतंकी हमला किया था।

जैसे ही यह जानकारी वामपंथियों को हुई उन्होंने यह महसूस करते हुए कि गेटी ने एक महान कार्य किया है, जो कि 2001 में अफ़ज़ल गुरु द्वारा किए गए कार्यों से बिलकुल भी अलग नहीं है, और वह भी एक वाजिब उद्देश्य के लिए, कहा जा रहा है कि ऐसे ‘महान क्रांतिकारी’ गेटी के विभिन्न पोस्टरों से जेएनयू को पाट दिया गया है।

दिल्ली में लिबरलों के सुरक्षित आरामगाह जहाँ लिबरल्स के अलावा किसी भी अन्य नत्थू-खैरे को बोलने की अनुमति नहीं है, ऐसे जेएनयू यानी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्रों और प्रोफेसरों ने गेटी के समर्थन में न सिर्फ घंटों बतोलेबाजी अर्थात भाषण दिया बल्कि उनके जैसे अन्य संभावित प्रदर्शनकारियों ने कैपिटल हिल की घेराबंदी करने की भी कोशिश की, और उसका / उसकी / उसके अर्थात आपस में ही सबने एक दूसरे के कार्यों का जमकर स्वागत करते हुए, एक-दूसरे को तिसमारखान घोषित किया।

नव-अफ्रीकी फेयरनेस क्रीम अध्ययन के प्रोफेसर महमूद भास्कर ने ऑपइंडिया को फोन पर बताया, “हमें गेटी और अन्य ट्रम्प समर्थकों जैसे आम लोगों के बीच अंतर स्पष्ट करना होगा क्योंकि एक लोकतंत्र की रक्षा और दबे-कुचले लोगों के लिए आवाज उठाने की कोशिश कर रहा था, जबकि अन्य लोकतंत्र का गला घोटने, उसे खत्म करने और फासीवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे।”

“गेटी हम शर्मिंदा हैं, तुझे जलील करने वाले ज़िन्दा हैं!” जैसे नारे बुलंद करते हुए एक छात्र नेता ने गेटी के समर्थन में कहा कि हमें उन सभी की कड़ी निंदा करनी चाहिए जिन्होंने 21 साल के वैश्विक विद्रोही को आगजनी करने वाला और अपराधी करार दिया था।

जेएनयू समुदाय, पूरे वैश्विक जागृत समुदाय के साथ, आश्वस्त है कि गेटी सच बोल रहा है और कश्मीर के लिए लड़ रहा था, क्योंकि वे ऐसा कहते हैं। जेएनयू के एक छात्र आनंद संघनॉट ने यह भी कहा, “भारतीय झंडे फहराना अपने-आप में इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है। तिरंगे लहराना और अफ़ज़ल गुरु का गुणगान करना, कहीं से गलत नहीं है- हमने शाहीन बाग और सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी ऐसा ही करते हुए देखा था।”

ऑपइंडिया के हाथ लगे खुफिया सूत्रों के अनुसार महत्वपूर्ण खबर यह है कि, जेएनयू इस बार गणतंत्र दिवस नहीं मनाएगा, इसके बजाय ‘वी आर ऑल गेटी’ डे मनाएगा।

नोट: ऑपइंडिया सीईओ राहुल रौशन द्वारा लिखे इस व्यंग्य को आप मूल रूप में अंग्रेजी में यहाँ पढ़ सकते हैं।

कहीं ‘किसान’ आंदोलन में न पैदा हो जाए ‘तबलीगी जमात’ जैसे हालात: सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना को लेकर जताई चिंता

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने लगभग एक महीने से अधिक समय से कृषि सुधार क़ानूनों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन पर चिंता जताई है। इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए सीजेआई एस ए बोबड़े ने कहा ‘किसान आंदोलन’ में निजामुद्दीन मरकज़ के तबलीगी जमात जैसी स्थित पैदा हो सकती है। 

मामले की सुनवाई करने वाली पीठ की अध्यक्षता करते हुए सीजेआई ने सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, क्या प्रदर्शनकारी किसानों के बीच कोरोना संबंधी एहतियात बरते जा रहे हैं? उन्होंने अपनी टिप्पणी में कहा, “किसानों के विरोध प्रदर्शन से भी समान समस्या जन्म ले सकती है। मुझे नहीं पता कि किसानों को कोविड-19 से सुरक्षित किया गया है।” 

तबलीगी जमात को अनुमति देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई एस ए बोबड़े ने सॉलीसिटर जनरल ने तुषार मेहता से पूछा, “क्या आपको जानकारी है कि किसान कोविड 19 से सुरक्षित हैं? क्या आपने अपने अनुभव से कुछ सीखा है (तबलीगी जमात की घटना का ज़िक्र करते हुए)?”

न्यायाधीश ए एस बोपन्ना और न्यायाधीश वी राम सुब्रमण्यम ने भी पूछा कि क्या दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारी कोरोना महामारी का प्रसार रोकने के लिए सावधानी बरत रहे हैं? 

मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि किसान आंदोलन में भी ठीक वैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, “मुझे नहीं पता कि किसानों को कोविड 19 से सुरक्षित किया गया है या नहीं।” इसके जवाब में तुषार मेहता ने कहा, “वह (प्रदर्शनकारी) सुरक्षित नहीं हैं।” 

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है कि प्रदर्शन स्थल पर महामारी का प्रसार रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। पीठ के मुताबिक़ वह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि राजधानी की सीमा पर जारी किसान आंदोलन में महामारी का प्रसार न हो। साथ ही केंद्र सरकार को इसकी पुष्टि करने के लिए कहा कि कोरोना सम्बंधित दिशा निर्देशों का पालन किया जाए।  

भारत में कोरोना फैलाने वाली तबलीगी जमात

निजामुद्दीन मरकज़ में मार्च के पहले-दूसरे हफ्ते के बीच इकट्ठा हुई तबलीगी जमात जिसने पूरे भारत में कोरोना वायरस फैलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी। फ़िलहाल कोरोना वायरस से प्रभावित लगभग 1 तिहाई मामले उससे जुड़े हुए हैं। मरकज़ में शामिल होने वाले जितने लोग अपने घरों की तरफ वापस गए और अन्य लोगों से मिले, उन्होंने देश के भीतर कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी की। 

निजामुद्दीन मरकज़ में इकट्ठा हुई तबलीगी जमात को लेकर पूरे देश में जम कर विरोध हुआ था। तबलीगी जमात ने उस दौरान देश में लगभग 30 फ़ीसदी कोरोना पॉजिटिव मामलों को जन्म दिया था। मरकज़ में सिर्फ भारतीय मुस्लिम ही नहीं बल्कि विदेशी मुस्लिम भी शामिल हुए थे। इस मुद्दे पर तभी कार्रवाई होनी चाहिए थी जब इस संगठन से संबंधित लोग इंडोनेशिया के नागरिक दिल्ली से करीमनगर की यात्रा (इज्तेमा) करने के बाद तेलंगाना में कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे।

लेकिन तबलीगी जमात के लोगों का देश के कोरोना वायरस के मामलों में योगदान तब सामने आया जब दिल्ली की बंग्लेवाली मस्जिद में 300 जमातियों में कोरोना वायरस के लक्षण मिले। इसके बाद उन्हें भर्ती कराने पर आधे से अधिक कोरोना वायरस से प्रभावित पाए गए।         

दिल्ली बॉर्डर पर ट्रैक्टर मार्च, BKU वाले राकेश टिकैत ने कहा- 2024 से पहले आंदोलन खत्म नहीं करेंगे

तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त कराने की माँग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसान जल्द आंदोलन खत्म करने के इरादे में नहीं हैं। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार (7 दिसंबर,2021) को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वे वर्ष 2024 से पहले आंदोलन खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं।

जब एक पत्रकार ने राकेश टिकैत से पूछा कि उनका कब तक आंदोलन जारी रखने का इरादा है तो उन्होंने कहा, “तीन साल चलेगा यह आंदोलन, 2024 तक जारी रहेगा।”

बता दें सोमवार को सरकार और किसान नेताओं के बीच सातवें दौर की बातचीत के बाद भी कोई हल नहीं निकला था। सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों ने गुरुवार को ट्रैक्टर रैली निकाली। इस दौरान बीकेयू प्रमुख ने कहा कि आज का यह ‘ट्रैक्टर मार्च’ 26 जनवरी के ‘गणतंत्र दिवस परेड’ का ट्रेलर है।

न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि ट्रैक्टर रैली 26 जनवरी की तैयारी है। हमारा रूट यहाँ से डासना है, उसके बाद अलीगढ़ रोड पर हम रुकेंगे, फिर वहाँ से हम वापस गाज़ियाबाद आएँगे। केंद्र सरकार से हमारी अगली बातचीत कल (8 जनवरी, 2021) है।

गौरतलब है कि राकेश टिकैत ने पिछले सप्ताह विपक्षी दलों से विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने और सड़कों को ब्लॉक करने का आग्रह किया था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर सरकार बातचीत के दौरान तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती है तो किसान पूर्वी और पश्चिमी दोनों एक्सप्रेसवे को बंद कर देंगे।

बता दें यह दोनों एक्सप्रेसवे अब दिल्ली-एनसीआर से उत्तर भारत का एकमात्र मार्ग है, क्योंकि किसानों ने नेशनल हाइवे-44 पर सिंघु बॉर्डर को पहले से ब्लॉक कर रखा है जो कि पानीपत की ओर आने जाने का रास्ता है। साथ ही रोहतक, औचंदी, सफियाबाद, पियाओ मनियारी और सबोली की ओर जाने वाली एनएच-9 पर टिकरी बॉर्डर को भी प्रदर्शनकारियों ने ब्लॉक कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि इन कथित किसानों द्वारा अपनाए जा रहे तौर-तरीके एक दम वहीं हैं जो पिछले साल एंटी-सीएए प्रदर्शनकारियों द्वारा किया गया था। सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम को रद्द नहीं करने पर उन्होंने दिल्ली में चक्का जाम करने की चेतावनी दी थी।