Home Blog Page 4152

सजा कम कर रिहा कर दिया गया अबू बशीर, 200 लोगों को उड़ाने वाले बम धमाके का था मास्टरमाइंडः खुद को शिक्षक बताता है आतंकी

इंडोनेशिया ने शुक्रवार (जनवरी 8, 2021) को आतंकी अबू बक्र बशीर को जेल से रिहा कर दिया। साल 2002 में इंडोनेशिया के बाली में नाइट क्लब में हुए धमाके का वह मास्टरमाइंड था। दो दशक पहले हुए उस हमले में कई विदेशियों समेत 200 लोगों की मौत हो गई थी।

इंडोनेशियाई सरकार का कहना है कि 82 साल के अबू की सजा पूरी हो गई है, इसलिए उसे रिहा किया गया है। इस्लामिक आतंकवादी नेटवर्क जेमाह इस्लामिया (JI) के सबसे कट्टर लीडरों में अबु बकर बशीर का नाम गिना जाता रहा है। कथित तौर पर उसके संबंध अल कायदा से भी है। खुद को अध्यापक बताने वाला कट्टरपंथी प्रचारक सारे आरोपों को गलत बताता रहा है। 

शुक्रवार को जकार्ता की गुनुंग सिंदूर (Gunung Sindur) जेल से उसे वैन में बैठाकर रिहा किया गया। मुमकिन है कि उसे सीधे उसके गृहनगर सोलो भेजा जाए, जहाँ वह दोबारा ‘इस्लामी शिक्षा’ देना शुरू करे। उसे साल 2011 में मामले की सुनवाई के दौरान 15 साल की सजा हुई हुई थी। लेकिन हाल में अधिकांश कैदियों की सजा में कटौती के बाद उसकी सजा भी कम कर दी गई और उसे रिहा कर दिया गया।

उसके वकील ने कोविड-19 का हवाला देकर भीड़भाड़ वाली जेल से उसे रिहा करने की माँग की थी। बशीर के बेटे ने भी उसे कट्टरपंथी विचारधारा का पीड़ित कहा था और ये भी कहा था कि वह कट्टर विचारों को सॉफ्ट करने की कोशिश कर रहे हैं।

दो साल पहले भी मानवीय आधार पर बशीर को छोड़ने की माँग उठाई गई थी। लेकिन उस समय ऑस्ट्रेलिया में हड़कंप मच गया और उसकी रिहाई टाल दी गई। बता दें कि जिस हमले में बशीर दोषी पाया गया था उसमें ऑस्ट्रेलिया के 88 लोग मारे गए थे। हमले से बचे लोग आज भी बशीर की रिहाई का विरोध कर रहे। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने भी रिहाई पर नाराजगी जताई है।

51 साल के Laczynski नाम के सर्वाइवर का कहना है कि उस दिन वह अपने दोस्तों के साथ ऑस्ट्रेलिया वापस लौटने ही वाला था कि अचानक क्लब में हमला हुआ। उनके 5 दोस्त हमले में मारे गए। वह कहते हैं, “उस हमले ने मुझे बहुत दुखी किया। मैं केवल न्याय चाहता हूँ।”

उनके मुताबिक आज भी कई लोग ऐसे हैं जो इंडोनेशिया के क्लब में हुए हमले को नहीं भुला पाए हैं। उनके घाव का इलाज आज तक चल रहा है। सभी पीड़ित चाहते हैं कि बस किसी तरह से इंसाफ मिल जाए। बशीर की रिहाई बिलकुल बर्दाश्त नहीं की जा सकती। वह अपील करते हैं कि उसे किसी प्रकार का मंच देकर कट्टर विचारों को फैलाने न दिया जाए। वह एक राक्षस था और हमेशा रहेगा।

इसी तरह Thiolina Ferawati Marpaung, जिनकी उस विस्फोट में हमेशा के लिए आँखें खराब हो गईं, वह कहती हैं कि बशीर की रिहाई से उन्हें बहुत डर लग रहा है। बस उम्मीद ही की जा सकती है कि प्रशासन उस पर निगरानी रखे।

उल्लेखनीय है कि 2002 में बाली में धमाके के एक साल बाद जकार्ता के जेडब्ल्यू मैरिअट होटल पर हमला करने का आरोप भी जमा इस्लामिया पर लगा था। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इंडोनेशिया के जिहादी आंदोलन में अबू बक्र बशीर की काफी बड़ी छवि है और यह असंभव नहीं है कि उसके नाम का फिर से इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

कैपिटल हिल में हिंसा के दौरान एक हिन्दू लहरा रहा था भगवा झंडा? लिबरल गिरोह के दावे का फैक्टचेक

7 जनवरी 2021 की सुबह के शुरुआती घंटों में (भारतीय समयानुसार) तमाम लोगों ने कैपिटल हिल में हिंसा देखी। जब अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति चुनावों के वोटों की गिनती जारी थी और नतीजों में जो बायडेन को बहुमत मिल रहा था, तब डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने वाशिंगटन डीसी स्थित कैपिटल हिल में उपद्रव और हिंसा शुरू कर दी। कैपिटल हिल में ही अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ़ रीप्रेजेंटेटिव बैठते हैं। ताज़ा अपडेट के अनुसार हिंसा की घटना में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है और आरएनसी और डीएनसी में दो पाइप बम बरामद किए गए थे। 

प्रधानमंत्री मोदी समेत दुनिया भर के तमाम नेताओं ने इस घटना की निंदा की थी और अमेरिका के अनेक राजनीतिक दलों से निवेदन किया था कि वो सत्ता का शांतिपूर्ण स्थानांतरण सुनिश्चित करें। लेकिन जैसा कि हमने देखा, लोकतांत्रिक संस्था में कैसे हालात नज़र आए, भारत की लिबरल जमात भी अपना दिमाग खराब करने में व्यस्त थी। इसलिए नहीं कि कैपिटल हिल में क्या हो रहा है बल्कि इसलिए कि उन्हें ‘हिन्दूवादियों’ पर झूठा आरोप लगाने का मौक़ा मिल गया। 

तमाम तथाकथित और स्वघोषित लिबरल्स, जिसमें से कुछ पत्रकार होने का भी अच्छा नाटक कर लेते हैं, उन्होंने ट्विटर पर फेक न्यूज़ फैलाना शुरू कर दिया कि अनेक “हिन्दूवादी” कैपिटल हिल में हुई हिंसात्मक रैली के दौरान वहीं मौजूद थे। वामपंथी गिरोह के मुताबिक हिन्दुओं ने भारत को शर्मिंदा किया। 

अमेरिका में प्रोफेसर अशोक स्वेन जो अक्सर मुद्दों पर टिप्पणी करते रहते हैं, भले उन्हें मुद्दों की जानकारी हो या नहीं। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “क्या हिन्दूवादियों को वाकई ऐसा लगता है कि श्वेत वर्चस्ववादी उन्हें स्वीकार करेंगे?” ऐसा ट्वीट करते हुए उन्होंने एक व्यक्ति की तस्वीर साझा की जो कैपिटल हिल में भगवा झंडा लेकर खड़ा था। हालाँकि, हमेशा की तरह झूठ पकड़े जाने पर चुपके से ट्वीट डिलीट कर दिया है।

डिलीट किया गया ट्वीट

इसी तरह सागारिका घोष ने ‘Hindutva Watch’ का ट्वीट साझा किया और अमेरिकी प्रोफेसर की तरह ही प्रोपेगेंडा फैलाया। 

सागारिका घोष का ट्वीट

लिबरल जमात के इन दोनों विशेषज्ञों में एक ने अपना ट्वीट खुद हटा दिया और दूसरे ने जिसका ट्वीट साझा किया था वह हटा दिया।

भारतीय झंडा लिए हुए व्यक्ति की पहचान विन्सेंट ज़ेवियर (Vincent Xavier) के रूप में हुई थी जो कि वामपंथ विरोधी है और मूल रूप से केरल का रहने वाला है। इसके पहले वह शशि थरूर से भी मिल चुका है और किसी भी लिहाज़ से ‘हिन्दूवादी चरमपंथी’ नहीं है। विवादों में आई असल तस्वीर में व्यक्ति कैपिटल हिल के सामने भगवा झंडा लेकर खड़ा था। 

वह तस्वीर जिसे कैपिटल हिल में हुई हिंसा के वक्त का बताया जा रहा है

यहाँ सबसे अहम बात ये है कि इस तरह का कोई सबूत सामने नहीं आया है कि विन्सेंट, कैपिटल हिल में हुई हिंसा में किसी भी तरह शामिल हुआ था। अमेरिका का नागरिक होने के नाते उसके पास पूरा अधिकार है कि अपने पसंद या नापसंद के उम्मीदवार का समर्थन या विरोध कर सके। यानी सिर्फ भारत का झंडा थामने की वजह से लिबरल्स ने उसे निशाना बनाना शुरू कर दिया और प्रोपेगेंडा फैलाने में लग गए। इसी तरह एक और व्यक्ति लिबरल जमात के झूठ में फँस गया था। 

व्यक्ति जिसके एक हाथ में भगवा झंडा है और दूसरे हाथ में अमेरिकी झंडा, तत्काल प्रभाव से उसे ‘कट्टरपंथी हिन्दूवादी’ के रूप में प्रचारित किया जाने लगा, जो कि कैपिटल हिल में हुई हिंसा का जश्न मना रहा है। लेकिन यह दावा भी झूठा निकला।    

वाशिंगटन डीसी में भगवा झंडा लिए हुए इस व्यक्ति की तस्वीर 5 अगस्त 2020 की है, यानी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि के भूमि पूजन के ठीक बाद की तस्वीर। इस मुद्दे पर फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस ने भी ख़बर प्रकाशित की थी जिसमें उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया था कि किस तरह दुनिया भर के हिन्दुओं ने इस ऐतिहासिक इवेंट का जश्न मनाया। 

फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट (5 अगस्त 2020)

जिस तस्वीर पर सबसे ज़्यादा सवाल खड़े किए गए थे जिसमें एक व्यक्ति के एक हाथ में भगवा झंडा है और दूसरे हाथ में अमेरिकी झंडा, पीटीआई की वह तस्वीर 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में हुए भूमि पूजन के बाद कैपिटल हिल के सामने मनाए गए जश्न की थी।

फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस के लेख से लिया गया स्क्रीनशॉट

लिबरल जमात ने बिना किसी जाँच पड़ताल के अमेरिका में रहने वाले भारतीय नागरिकों के बारे में झूठ फैलाना शुरू कर दिया। कैपिटल हिल में हुई हिंसा के बाद कानूनी संस्थाओं ने वारदात को अंजाम देने वाले लोगों के बारे में जानकारी इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। लिबरल्स ने इन दो भारतीय मूल के नागरिकों के बारे में झूठा प्रचार करके उनका जीवन ख़तरे में डाल दिया है और इतना कुछ सिर्फ इसलिए कि वो यहाँ के हिन्दुओं को बदनाम कर सकें। जब अमेरिका वहाँ के ‘लिबरल्स’ द्वारा लगाई गई आग में जल रहा था, तब भारत के ‘लिबरल्स’ फासीवादियों की तरह व्यवहार कर रहे थे।                  

प्रशासन ने हटाया परमार वंश के राजमहल से काजी परिवार की ‘निजी सम्पत्ति’ का बोर्ड

हाल ही में ऑपइंडिया पर मध्य प्रदेश स्थित विदिशा जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर प्राचीन उदयपुर नगर में तकरीबन एक हजार साल पुराने परमार वंश के राजमहल पर एक लेख प्रकाशित हुआ था। यह राजमहल एक ‘निजी सम्पत्ति’ वाले बोर्ड के कारण चर्चा का विषय बना, जिसे अब प्रशासन द्वारा हटा दिया गया है।

प्राचीन विरासत से जुड़े इस महल में मदरसा चलते हुए पाया गया। यही नहीं, इस पर ‘निजी संपत्ति’ का बोर्ड लगाने वाले एक काजी ने यहाँ तक दावा किया कि यह एक हजार साल पुराना ना होकर चार सौ साल पुराना है, जिसका निर्माण उनके पूर्वजों द्वारा पूरा कराया गया था। काजी के अनुसार, जहाँगीर और शाहजहाँ ने उनके परिवार के नाम यह संपत्ति कर डाली थी।

सोशल मीडिया पर इस विषय के उछलने के बाद तहसीलदार इस महल में पहुँचे और उन्होंने एक्शन लेते हुए महल से इस बोर्ड को भी हटा दिया है, जिसमें इसे काजी की निजी सम्पत्ति बताया गया था।

तहसीलदार का कहना है, “कल यहाँ किसीने निजी सम्पत्ति के नाम से बोर्ड लगा दिया था। यह एरिया उदयपुर ग्राम के खसरा संख्या- 822 में करीब साढ़े तीन बीघा जमीन पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है। इसी वजह से हम लोग आए और हमने ये बोर्ड हटवा है।”

तहसीलदार ने इसके किसी व्यक्ति के निजी सम्पत्ति होने की बात से स्पष्ट मना करते हुए कहा कि उन्होंने इसके विवरण की पुष्टि राजस्व विभाग से कर ली है।

उल्लेखनीय है कि इस महल पर अपनी निजी संपत्ति का बोर्ड लगाने वाले काजी परिवार ने महल को मुगल बादशाह जहाँगीर और शाहजहाँ से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि ये महल कोई हजार साल पुराना नहीं है, बल्कि बादशाह जहाँगीर के समय इसकी और शाही मस्जिद की नींव उदयपुर में रखी गई थी।

बोर्ड हटाए जाने के बाद, काजी परिवार के एक सदस्य ने कहा, “मुग़ल बादशाह ने हमारे काजी खानदान को ये दिया था, हमारे परिवार ने इसे बनाने का काम पूरा किया था। चार सौर साल से हमारा परिवार इसे चलाता आ रहा था। और अब मैं इसकी देखरेख कर रहा हूँ। ये चार सौ साल पुराना है और दूर-दूर तक इसका कोई वास्ता नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “वो बोर्ड हमने लगवाया था, चार सौ साल से क्या होता आया था, हमें इसकी सरकारी या कानूनी जानकारी नहीं है। सरकार ने कहा तो हमने निजी सम्पत्ति का बोर्ड हटा दिया है। लम्बी-चौड़ी जायदात थी, तो लोग भी यहाँ आते थे।”

‘पत्रिका’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, परिवार के सदस्यों का दावा है कि शाहजहाँ के समय इसका निर्माण पूरा हुआ और उसने ही इसका उद्घाटन भी ने इसका उद्घाटन किया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि डॉ इरफान अली इस काजी परिवार के मुखिया हैं। इरफ़ान अली का कहना है कि ये बादशाह का महल था, जिसे बाद में काजी परिवार को जमीदार बनाने के बाद परिवार को ही दे दिया गया।

काजी परिवार के सदस्यों की मानें तो उनकी चार पीढिय़ों का इस महल पर कब्जा है और पिछले 25 वर्षों से वही इस जगह पर मदरसा चला रहे हैं।

इस संदर्भ में ही, विजय मोहन तिवारी अपने फेसबुक प्रोफाइल पर लिखते हैं, “एक कैमरापर्सन ने सवाल पूछा तो एक साहब सीधे बादशाह जहाँगीर के दरबार में जा पहुँचे और बताया कि जहाँगीर ने इस महल की संगे-बुनियाद उदयपुर में रखी थी। शाहजहाँ के समय यह बनकर तैयार हुआ और काजी साहब के खानदान को दे दिया गया, ताकि वे मस्जिद में नमाज पढ़ाते रहें। काजी साहब कहीं शहर में बस गए और महल में मदरसा खोल दिया।”

विजय मोहन व्यंगात्मक लहजे में आगे लिखते हैं, “अगर जहाँगीर या शाहजहाँ ने इन्हें यह जगह दी है और यह इनकी निजी संपत्ति मान ली जाती है तो सरकार को वे 84 गाँव भी इन्हें देने होंगे, जिनकी जमींदारी इनके अनुसार इन्हें मुगलों ने दी थी। किले पर अपनी निजी संपत्ति का ऐलान करने वाले साइनबोर्ड की सफाई में इनके पास जहाँगीर-शाहजहाँ का यही किस्सा है। शायद उनके संज्ञान में यह नहीं है कि 15 अगस्त 1947 के बाद ही निजाम नहीं बदला है। 1857 में अंग्रेज ही आखिरी मुगल को रंगून रवाना कर चुके थे। अब लालकिले पर मुगलों का कोई दावा नहीं है। न कोई मुगल हैं। वो इरफान हबीबों के ख्यालों में रोशन हैं।”

इस महल का पूरा इतिहास ऑपइंडिया पर आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं

सुशांत का पूर्व स्टाफ व ड्रग पेडलर ऋषिकेश लापता: अहम कड़ी की तलाश में NCB का सर्च ऑपरेशन

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की असामयिक मौत के बाद बॉलीवुड ड्रग नेक्सस की जाँच कर रहे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो पूर्व असिस्टेंट डायरेक्टर ऋषिकेश पवार की तलाश कर रही है। ऋषिकेश की खोज में NCB ने सर्च अभियान शुरू किया है। ऋषिकेश दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का एक स्टाफ था। जाँच के दौरान सुशांत के स्टाफ दीपेश सावंत ने भी अपने बयान में ऋषिकेश का नाम लिया था और आरोप लगाया था कि वह सुशांत को ड्रग्स सप्लाई करता था।

NCB के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के अनुसार, “ऋषिकेश पवार की तलाश जारी है। वो सुशांत सिंह राजपूत के ड्रीम प्रोजेक्ट में असिस्टेंट डायरेक्टर थे। कई सबूत सामने आए हैं, जिसमें ये साफ हुआ है कि ऋषिकेश पवार ही सुशांत को ड्रग्स सप्लाई करता था। एनसीबी ने ऋषिकेश के घर से लैपटॉप सीज़ किया है, जिसमें कुछ डाटा भी मिला है। कई बार एनसीबी ने उन्हें बुलाया लेकिन वो नहीं आए, अब जब उनकी अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज हो गई है तो हमने उन्हें पकड़ने का प्लान बनाया है।”

इससे पहले CBI ने 12 सितंबर, 2020 को ऋषिकेश पवार को तलब किया था और फिर उसे NCB को सौंप दिया गया। दीपेश सावंत ने अपने बयान में कहा था, “उस दौरान मैं कभी सुशांत सर के लिए ड्रग्स नहीं लाया था, लेकिन मेरा एक साथी ऋषिकेश पवार सुशांत सर के लिए ड्रग्स लाता था।”

जानकारी के मुताबिक, पवार ने पहले अदालत में गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अग्रिम जमानत माँगी थी। हालाँकि, गुरुवार को विशेष एनडीपीएस अदालत के न्यायाधीश वी. विदवान ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। एनसीबी की टीम उनके घर पहुँची लेकिन वो तब तक लापता हो गए थे।

NCB के ज़ोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ने कहा, “हाँ, हम ऋषिकेश पवार की तलाश कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि NCB शुरू से ही उनसे पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन उन्होंने किसी प्रकार से भी उन्हें कोऑपरेट नहीं किया, कई नोटिस को भी उन्होंने नजरअंदाज कर दिया है। उनकी इस हरकतों ने मामले में उनकी भूमिका को लेकर हमारे शक को और मजबूत कर दिया है।

चेंबूर के निवासी पवार राजपूत के ड्रीम प्रोजेक्ट में सहायक निर्देशक के रूप में काम करते थे। हालाँकि, उन्हें कुछ समय बाद निकाल दिया गया था। फिर भी उन्होंने अभिनेता से मिलना जुलना जारी रखा। एनसीबी अधिकारियों ने कहा कि वे इसके बारे में उनसे पूछताछ करना चाहते हैं।

गौरतलब है कि पिछले साल जून में सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले की जाँच सीबीआई कर रही है। इसी मामले में ड्रग्स एंगल की भी बात सामने आई थी। जिसके बाद 26 अगस्त, 2020 से ही एनसीबी पूरे मामले की जाँच कर रही है। तब से NCB ने अभिनेता की मौत से जुड़े ड्रग मामले के संबंध में 27 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, रकुलप्रीत सिंह और अर्जुन रामपाल सहित कई बॉलीवुड हस्तियों से पूछताछ भी की जा चुकी है।

हिंदू स्कूल टीचर एकता कुमारी को अगवा कर बनाया आयशा, मियाँ मिट्ठू ने इस्लाम कबूल करवाया: जबरन धर्मांतरण के लिए सिंध में बना रखी है ‘आर्मी’

पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे। ताजा मामला 6 जनवरी 2021 का है। सिंध के घोटकी में एकता कुमारी नाम की स्कूल टीचर से जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया। अब उसका नया नाम आयशा है।

पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने एकता की तस्वीर और उसके धर्मांतरण के प्रमाण अपने सोशल मीडिया में शेयर किए हैं। उन्होंने लिखा, “एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाली हिंदू शिक्षिका और अनिल कुमार की बेटी एकता कुमारी को सिंध पाकिस्तान के घोटकी के बारझुंडी शरीफ धरकी में मियाँ मिट्ठू के जरिए इस्लाम कबूल करवाया गया। अब उसका नया इस्लामी नाम आयशा है।”

वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी नाम के ट्विटर अकाउंट ने एकता का मामला उठाते हुए लिखा, “जबरन धर्म परिवर्तन यहाँ (पाकिस्तान में) पर सामान्य हो चुका है। मियाँ मिट्ठू द्वारा एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाली हिंदू शिक्षिका को 6 जनवरी को इस्लाम कबूल करवाया गया। एक दिन ऐसा भी आएगा जब यहाँ के झंडे से सफेद रंग (अल्पसंख्यक को दर्शाने वाली पाकिस्तानी झंडे में सफेद पट्टी है) बिलकुल गायब हो जाएगा।”

बता दें कि एकता के धर्मांतरण के पीछे जिस मियाँ मिट्ठू का नाम सामने आ रहा है, उसके लिए यह कोई नई बात नहीं है। मियाँ मिट्ठू ने क्षेत्र में तमाम हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन करवाए हैं। पिछले दिनों इस कट्टरपंथी ने कविता कुमारी नाम की लड़की का धर्मांतरण करवाया था। वह भी बारझुंडी की ही थी।

राहत ऑस्टिन ने ही कविता कुमारी की वीडियो साझा करते हुए दिखाया था कि कैसे मियाँ मिट्ठू अपने सामने बैठा कर हिंदू लड़कियों को इस्लाम कबूल करवाता है और गर्व से इसकी वीडियो भी बनवाता है। कहते हैं कि इलाके में मियाँ मिट्ठू के मनसूबों को पूरा करने के लिए उसकी पूरी ‘आर्मी’ सक्रिय है।

साल 2019 में महक केसवानी का भी एक मामला आया था। उस समय महक का धर्म परिवर्तन भी इसी मियाँ मिट्ठू ने करवाया था। उससे भी पहले की बात करें तो, होली के अवसर पर घोटकी से ही 2 नाबालिग हिंदू बहनों रवीना और रीना को अगवा कर उनका धर्म परिवर्तन कराया गया था।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, मियाँ मिट्ठू घोटकी के बारझुंडी दरगाह में रहता है और अगर कोई कट्टरपंथी, किसी लड़की का अपहरण करता है तो उसे इसके पास लाता है और ये फिर उसका इस्लाम में परिवर्तन कराता है।

साल 2016 के आँकड़ों के अनुसार, उसके खिलाफ 117 मामले दर्ज हो चुके हैं। पाकिस्तान में हिंदू लोग मियाँ मिट्ठू के खिलाफ कई बार सड़कों पर भी उतरे हैं। लेकिन उसके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई की खबर नहीं है। कई तस्वीरों में उसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ भी देखा जा सकता है।

पाक के सिंध प्रांत में धर्म परिवर्तन की फैक्ट्री चलाने वाला मियाँ मिट्ठू

अपने ही घर में मरे मिले थे अन्वय नाइक और उनकी मॉं, उद्धव ठाकरे ने खरीदा था मकान; CM ने 19 घरों की जानकारी छिपाईः बीजेपी नेता किरीट सौमैया का आरोप

भारतीय जनता पार्टी के नेता किरीट सोमैया ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री सीएम उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे द्वारा शिवसेना पार्टी विधायक रवींद्र वायकर की पत्नी मनीषा के साथ संयुक्त रूप से अलीबाग के कोरलाई गाँव में 23,500 स्क्वायर फीट के 19 घरों की खरीद पर सवाल उठाए हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में 19 घरों का खुलासा नहीं किया। सोमैया ने बृहस्पतिवार (जनवरी 08, 2021) को एक ट्वीट में कहा, “सीएम उद्धव ठाकरे ने अपने चुनावी हलफनामे में 5.29 करोड़ रूपए मूल्य के 23,500 स्क्वायर फीट के 19 घरों का खुलासा नहीं किया।”

सोमैया ने दावा किया कि ठाकरे ने 21 मार्च, 2014 को इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक से ग्राम कोरलाई (अलीबाग) में भूमि/मकान खरीदा था। गौरतलब है कि ये वही अन्वय नाइक (Anvay Naik) हैं, जिन्होंने 2018 में आत्महत्या कर ली थी।

सोमैया ने पूछा कि इस सौदे का खुलासा सीएम के चुनावी हलफनामे में क्यों नहीं किया गया, जबकि सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि इन 19 संपत्तियों को मार्च, 2014 में अन्वय नाइक से खरीदा गया, लेकिन नवंबर, 2020 में यह ठाकरे के नाम पर ट्रांसफर कर दिया गया था।

भाजपा नेता ने बृहस्पतिवार को एक प्रेस वार्ता में कहा, “5.29 करोड़ रुपए मूल्य के ये 19 घर 12 नवंबर, 2020 तक ठाकरे की बेनामी (बेनामी) सम्पत्ति थे। मैंने कोरलाई गाँव का दौरा किया और ठाकरे के भूमि रिकॉर्ड और अन्वय नाइक के परिवार के लेन-देन की जाँच की।” प्रेस वार्ता के दौरान, सोमैया ने लेनदेन के दस्तावेज भी दिखाए।

उल्लेखनीय है कि नवंबर, 2020 में जब अन्वय नाइक की आत्महत्या का मामला फिर से खुला और पत्रकार अर्णब गोस्वामी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, तो सोमैया ने कोरलाई गाँव में 9.35 एकड़ जमीन खरीदने के बारे में इसी तरह के आरोप लगाए थे और पूछा कि यह सौदा सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?

अन्वय नाइक और उनकी माँ कुमुद नाइक को मई, 2018 में अलीबाग स्थित उनके घर पर मृत पाया गया था। पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर सुसाइड नोट में अन्वय नाइक ने कहा था कि वह अपना जीवन समाप्त कर रहा है क्योंकि उसे टीवी एंकर अर्णब गोस्वामी और दो अन्य लोगों द्वारा 5.40 करोड़ रुपए का बकाया भुगतान नहीं किया गया।

किरीट सोमैया ने अर्णब की गिरफ्तारी के समय भी कहा था कि मई, 2018 में आत्महत्या कर चुके अन्वय नाइक की पत्नी अक्षता और मुख्यमंत्री ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे के बीच 2014 में जमीन के 21 सौदे हुए थे। भाजपा नेता सोमैया ने ये खुलासे इस बात को सामने रखने के लिए किए थे कि ठाकरे और नाइक परिवारों के बीच पहले से ही आर्थिक लेनदेन को लेकर सम्बन्ध रहे थे।

‘फेक TRP’ मामले में इंडिया टुडे समूह के सीएफओ को समन: जाँच के लिए ED ने बुलाया मुंबई

मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ़ अर्णब गोस्वामी और अन्य कर्मचारियों को निशाना बनाए जाने के बीच फेक टीआरपी मामले में अहम मोड़ आया है। सूत्रों के मुताबिक़ फ़र्ज़ी टीआरपी मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इंडिया टुडे के सीएफ़ओ को समन भेजा है। 

सूत्रों द्वारा ऑपइंडिया को दी गई जानकारी के मुताबिक़ जॉइंट डायरेक्टर कार्यालय ने इंडिया टुडे समूह के सीएफ़ओ को समन भेजा है। फ़र्ज़ी टीआरपी घोटाला मामले में समूह के सीएफ़ओ को दिल्ली से मुंबई के लिए समन भेजा गया है, जिन्हें सोमवार को पेश होना है। इस मामले में ऑपइंडिया ने इंडिया टुडे के न्यूज़ डायरेक्टर राहुल कँवल से संपर्क करके उनका पक्ष जानने का प्रयास किया लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।    

पूरे मामले में यह पड़ाव तब सामने आया है जब मुंबई पुलिस रिपब्लिक टीवी पर फ़र्ज़ी टीआरपी मामले में शामिल होने का आरोप लगा रही थी। जबकि हंसा रिसर्च की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई एफ़आईआर में इंडिया टुडे का नाम शामिल था। मामले से जुड़ी एक और अहम बात ये है कि मुंबई पुलिस ने अभी तक इंडिया टुडे समूह को न तो समन भेजा है और न ही समूह के खिलाफ़ जाँच शुरू की है।  

ईडी ने टीआरपी मामले में दर्ज की ECIR  

ईडी ने फ़र्ज़ी टीआरपी मामले में एन्फोर्समेंट केस इनफार्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की है जो कि पुलिस की एफ़आईआर के समानांतर होती है। ईडी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों की जाँच कर रहा है और रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आई थी कि एफ़आईआर में जितने चैनल्स का नाम शामिल है सभी की जाँच होगी। मूल एफ़आईआर में शामिल किए गए नामों के अलावा (जिसमें रिपब्लिक का नाम शामिल नहीं है) मुंबई पुलिस की पड़ताल भी जाँच के दायरे में आ सकती है। ईडी इस मामले से जुड़ने वाली दूसरी केन्द्रीय एजेंसी है, इसके पहले सीबीआई ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज की थी। 

ईडी का खुलासा: मुंबई पुलिस ने नहीं किया था BARC के आँकड़ों का परीक्षण

दिसंबर 2020 में ईडी ने हंसा रिसर्च के अधिकारियों को समन भेजा था, जिसकी एफ़आईआर के आधार पर असल जाँच शुरू की गई थी। 

इस दौरान ऑपइंडिया ने ख़बर प्रकाशित की थी जिसके मुताबिक़ हंसा रिसर्च ने ईडी की पूछताछ में इंडिया टुडे का ज़िक्र किया था न कि रिपब्लिक टीवी का। इसके बाद जब BARC के दो अधिकारियों को समन भेजा गया था, पहला विजिलेंस विभाग से और दूसरा आईटी विभाग से। दोनों को इस तथ्य के आधार पर गिरफ्तार किया गया था कि मुंबई पुलिस ने BARC के आँकड़ों (raw data) के लिए समन नहीं भेजा था। आँकड़ों का मतलब लगाए गए बार-ओ-मीटर से मिलने वाली जानकारी और यही जाँच की शुरुआत का केंद्र भी था। आरोपों के अनुसार मुंबई पुलिस ने इन आँकड़ों का परीक्षण नहीं किया था। 

एक तरफ मुंबई पुलिस ने BARC के आँकड़ों का परीक्षण नहीं किया था और दूसरी तरफ एफ़आईआर के 48 घंटों के भीतर उसी मुंबई पुलिस ने प्रेस वार्ता की थी। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि रिपब्लिक टीवी टीआरपी घोटाला मामले में शामिल है। हंसा रिसर्च की रिपोर्ट में रिपब्लिक टीवी का नाम कहीं मौजूद नहीं था। 

फ़र्ज़ी टीआरपी मामला 

8 अक्टूबर को मुंबई पुलिस कमीश्नर परमबीर सिंह द्वारा की गई प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा था कि तमाम चैनल अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। रिपब्लिक टीवी इसमें मुख्य आरोपित है। यह शिकायत हंसा रिसर्च ने की थी जो BARC के लिए टीआरपी रिकॉर्ड करने वाली डिवाइस को रेगुलेट करती है। 

शुरूआती एफ़आईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम नहीं मौजूद था बल्कि इंडिया टुडे को मुख्य आरोपित बताया गया था। इसके बाद ऐसे कई सबूत सामने आए थे जिससे यह पता चला कि मुंबई पुलिस ने तमाम लोगों को रिपब्लिक टीवी के खिलाफ़ बोलने के लिए उकसाया था। हंसा समूह ने यह शिकायत भी की थी कि मुंबई पुलिस उसके कर्मचारियों को रिपब्लिक टीवी के खिलाफ़ बयान देने के लिए धमका रही है।    

तिरंगा लहराने वाले शख्स के साथ नजर आईं शशि थरूर की पुरानी तस्वीरें, बचाव में कहा- भटके हुए समर्थकों के लिए मैं जिम्मेदार नहीं

अमेरिकी कैपिटॉल हिल (US Capitol) में बुधवार (जनवरी 06, 2021) को हुए हंगामे के बीच भारतीय तिरंगा चर्चा का विषय बन गया। शुरुआत में जब यह तस्वीरें सामने आईं तो लोगों ने अपने-अपने अनुसार इसे लेकर प्रतिक्रियाएँ दीं। कुछ मजहबी ‘फैक्ट चेकर्स’ ने तो उसे ‘भक्त’ भी घोषित कर दिया। तिरंगे को लेकर ‘ज्ञान’ देने वालों में से एक कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर भी थे, लेकिन उन्होंने शायद ही सोचा होगा कि जिसकी वो निंदा कर रहे हैं, वो वही ज़ेवियर विन्सेंट (Vincent Xavier) है, जो उनका ही एक प्रशंसक है और शशि थरूर उसके साथ डिनर भी कर चुके हैं।

अमेरिकी संसद में जब ‘इलेक्टोरल कॉलेज वोट’ की गिनती हो रही थी, उसी दौरान हुए इस हंगामे की तस्वीरों के बीच तिरंगा नजर आने पर इस पर सवाल उठाने वालों में से ही एक भाजपा नेता वरुण गाँधी भी थे। भाजपा नेता ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “भारतीय ध्वज वहाँ क्यों है? यह एक ऐसी लड़ाई है, जिसमें हमें निश्चित रूप से भाग लेने की आवश्यकता नहीं है।”

वरुण गाँधी के इस ट्वीट पर ‘ज्ञान’ देने उतरे कई लोगों में से एक कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर भी थे। शशि थरूर ने वरुण गाँधी का ट्वीट शेयर करते हुए लिखा, “कुछ भारतीय भी डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों की मानसिकता वाले हैं, जो तिरंगे को सम्मान की बजाय एक हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं और जो उनसे मेल नहीं खाता है, उसे एंटी-नेशनल करार देते हैं। वहाँ पर दिख रहा वो झंडा हम सभी के लिए चेतावनी है।”

कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के इस ट्वीट पर वरुण गाँधी ने जवाब देते हुए लिखा, “अपनी शान दिखाने के लिए तिरंगा लहराने वाले लोगों का मजाक उड़ाना आजकल आसान हो गया है। साथ ही, गलत मकसद के लिए भी तिरंगा लहराना आसान हो गया है। दुर्भाग्यवश कई लिबरल भारत में भी एंटी-नेशनल प्रदर्शन (JNU जैसे) में भी तिरंगे के गलत इस्तेमाल की चेतावनी को नजरअंदाज करते आए हैं। तिरंगा हमारे लिए गर्व का चिन्ह है, ऐसे में हम इसका सम्मान बिना किसी ‘मानसिकता’ के करते हैं।”

इस बीच, शुक्रवार (जनवरी 08, 2021) की सुबह तक ट्रम्प के समर्थन में हिंसा करने वालों के बीच तिरंगा लहराने वाले इस व्यक्ति की पहचान भी सामने आ गई। जेवियर विन्सेंट नाम के इस शख्स की पहचान और तस्वीरें जब सामने आईं तो पता चला कि वो शशि थरूर के साथ डिनर भी कर चुका है।

ये स्क्रीनशॉट वास्तव में विन्सन जेवियर पलाथिंगल नाम के व्यक्ति के सोशल मीडिया अकाउंट से लिए गए हैं। कुछ स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है कि ट्रंप समर्थक जेवियर विन्सेंट कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर की जीत पर ख़ुशी जाहिर कर चुके हैं और अप्रैल, 2015 में वॉशिंगटन में उनके निमंत्रण पर थरूर ने उनके साथ डिनर भी किया था।

भाजपा नेता वरुण गाँधी ने इन तस्वीरों को ट्वीट करते हुए शशि थरूर को अपने जवाब में लिखा, “प्रिय शशि थरूर, अब जबकि हम जानते हैं कि ये पागल तुम्हारा इतना प्रिय मित्र था, तो कोई केवल यही उम्मीद कर सकता है कि इस तबाही के पीछे तुम और तुम्हारे सहयोगी ही पीछे से जिम्मेदार नहीं थे।”

इन स्क्रीनशॉट्स के सामने आने पर गोलपोस्ट शिफ्ट करते हुए थरूर ने वरुण गाँधी को एक और ट्वीट में जवाब देते हुए लिखा, “इसे पूरी तरह से अस्वीकार करता हूँ। क्या आप हर शुभचिंतक के ‘भटके हुए’ कार्यों के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हैं? मैं अपने देश के प्रिय झंडे को शर्मनाक अमेरिकी भीड़ के बीच लाने के किसी भी प्रयास की निंदा करता हूँ।”

विन्सेंट जेवियर के सोशल मीडिया अकाउंट तलाश करने पर लोगों ने पाया कि वह अमेरिका का नागरिक है और कम से कम 2008 से ही अमेरिकी चुनावों में मतदात करते आ रहे हैं।

ट्रंप के समर्थकों की भीड़ में यूएस कॉन्ग्रेस के बाहर तिरंगा लहराने वाले विन्सेंट ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इसकी तस्वीरें भी शेयर की हैं। हालाँकि, यह कह देना कि ट्रंप समर्थक होने के साथ-साथ विंसेंट जेवियर भी दंगाइयों में से एक थे, जल्दबाजी होगी। इसके इतर, एक नागरिक होने के नाते, किसी भी राजनीतिक दल के साथ सहमती या असहमति व्यक्त करना उनका निजी अधिकार है।

हिन्दू लड़कियों को झाँसे में लेने के लिए ‘आलम’ बना ‘अनमोल’: नाबालिग के साथ फ़रार, यूपी पुलिस कर रही तलाश

उत्तर प्रदेश पुलिस आलम अंसारी नाम के युवक की तलाश कर रही है जो कि 2 जनवरी 2021 से एक नाबालिग लड़की के साथ फ़रार है। दैनिक जागरण में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश पुलिस ने जानकारी दी कि आलम अंसारी ने हिन्दू नाम (अनमोल मिश्रा) से इन्स्टाग्राम अकाउंट बनाया। 

इसकी मदद से उसने नाबालिग लड़की को अपने झाँसे में लिया और उसके साथ फ़रार हो गया। ‘अनमोल मिश्रा’ नाम से बनाए गए आलम अंसारी के फ़र्ज़ी अकाउंट के बायो में ‘आई लव इंडियन आर्मी’ भी लिखा हुआ था जिससे उसका पेज और असल नज़र आए।  

आलम अंसारी का फ़र्ज़ी इन्स्टाग्राम अकाउंट

पुलिस के मुताबिक़, आलम अंसारी उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले स्थित शोहरतगढ़ का रहने वाला है। वह सोशल मीडिया की मदद से लड़कियों को अपने झाँसे में लेता था। वह अनमोल मिश्रा बन कर नाबालिग लड़की से घंटों बात करता था। जैसे ही उसने नाबालिग लड़की को अपने झाँसे में लिया वैसे ही वह उसके साथ फ़रार हो गया। पुलिस फ़िलहाल दोनों की तलाश में जुटी हुई है। 

मामला तब प्रकाश में आया जब नाबालिग लड़की 2 जनवरी की देर शाम तक घर वापस नहीं लौटी। नतीजतन लड़की के परिजनों ने थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने आलम अंसारी पर मामला दर्ज करके मामले की जाँच शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने आलम अंसारी और नाबालिग लड़की की खोजबीन के लिए दो पुलिस अधिकारियों की टीम का गठन किया। इसके अलावा एक सर्विलांस टीम दोनों की मोबाइल लोकेशन खोज रही है। हालाँकि, पुलिस अभी तक दोनों की लोकेशन खोजने में नाकामयाब रही है। 

3 जनवरी को पुलिस को दोनों की लोकेशन बलरामपुर स्थित राधाकृष्ण मंदिर के पास मिली थी। जिसके बाद सब इंस्पेक्टर हरी नारायण दीक्षित की अगुवाई वाली टीम उस लोकेशन पर भेज दी गई थी लेकिन जब तक वह मौके पर पहुँचे आरोपित आलम अंसारी नाबालिग के साथ फ़रार हो चुका था। पुलिस ने यह अनुमान लगाया था कि अंसारी को दबिश की जानकारी मिल गई थी जिसकी वजह से वह मौके से भागने में कामयाब रहा। 

अनमोल मिश्रा के अकाउंट की डीपी (डिस्प्ले पिक्चर) में आलम अंसारी की तस्वीर लगी है। जाँच के दौरान पुलिस को यह पता चला कि अंसारी ने अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट से नाबालिग लड़की को हिन्दू बन कर अपने जाल में फँसाया। अनमोल मिश्रा नाम के अकाउंट में जो तस्वीर लगी थी वह असल में आलम अंसारी की थी, जिसकी वजह से पुलिस यह पहचानने में सफल हुई कि वह असल में आलम अंसारी है। फ़िलहाल पुलिस आरोपित के सोशल मीडिया अकाउंट को खंगालने में जुटी हुई है कि किन कारणों से उसने फ़र्ज़ी नाम से ये हरकत अंजाम दी। 

भारत में फैलता ‘ग्रूमिंग जिहाद’ खासकर उत्तर प्रदेश 

यह कोई पहला पहला ऐसा मामला नहीं है जिसमें एक मुस्लिम युवक ने खुद को हिन्दू बता कर नाबालिग और मासूम लड़की को अपने जाल में फँसाया है। पिछले कुछ सालों में लव/ग्रूमिंग जिहाद के तमाम हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं। इस तरह की डरावनी कहानियों में कई मामले ऐसे भी हैं, जिनमें मुस्लिम युवक अपनी पहचान हिन्दू बता कर किसी अन्य धर्म की युवती से शादी करता है और कुछ समय बाद उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता है। दबाव बनाने के दौरान तस्वीरें वायरल करने की धमकी, लड़की के साथ मारपीट, यौन हिंसा, बीफ़ खाने का दबाव बनाना, हिन्दू धर्म और हिन्दुओं का मज़ाक बनाना, पीड़िता को उसके परिवार से अलग करना जैसी हरकतें की जाती हैं।  

क्योंकि इस तरह के तमाम मामले सामने आए हैं और समाज में इसके षड्यंत्र की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं इसलिए ग्रूमिंग जिहाद की घटनाओं पर काबू पाने के लिए क़ानून बनाया गया है। इसमें भाजपा शासित राज्य शामिल हैं, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा।        

लंदन में बाल कलर कराने सैलून पहुँची प्रियंका चोपड़ा तो लोगों ने बुला ली पुलिस: जानिए क्या है मामला

बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जोनास (Priyanka Chopra Jonas) बुधवार (जनवरी 06, 2021) शाम लंदन में एक हेयर सैलून जाने के कारण चर्चा में आ गई हैं। दरअसल, ऐसा कर के उन्होंने ब्रिटेन के कोविड -19 लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन किया है क्योंकि वायरस के नए स्ट्रेन के मिलने के बाद इसके प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए, ब्रिटेन में फरवरी के मध्य तक लॉकडाउन की घोषणा की गई है। इन नियमों के तहत सैलून और स्पा भी बंद रखने के आदेश दिए गए हैं।

ब्रिटेन में COVID-19 के कारण जारी लॉकडाउन के बीच 38 वर्षीय प्रियंका चोपड़ा जोनास को उनकी माँ डॉ मधु चोपड़ा, और उनकी पालतू कुतिया ‘डायना’ के साथ शाम 4.55 बजे सेलिब्रिटी स्टाइलिस्ट जोश वुड के सैलून जाते देखा गया था।

इसके बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया पर प्रियंका चोपड़ा की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि सेलिब्रेटी ये क्यों सोचते हैं कि वो बाकी लोगों से हटकर हैं? साथ ही, ये सवाल भी उठाए कि क्या लॉकडाउन के निर्देश सिर्फ आम लोगों के ही लिए हैं?

‘डेली मेल’ के अनुसार, स्थानीय लोगों ने प्रियंका चोपड़ा द्वारा गाइडलाइंस का उल्लंघन किए जाने पर स्थानीय पुलिस को सतर्क कर दिया और फ़ौरन वहाँ पुलिस पहुँच गई। पुलिस द्वारा सैलून में मौजूद उसके मालिक जोश वुड को मौखिक चेतावनी दी गई। हालाँकि, COVID-19 प्रोटोकॉल के उल्लंघन के लिए कोई जुर्माना नहीं लगाया गया।

अभिनेत्री के अनुसार, उनके बालों को उनकी आने वाली एक फिल्म के लिए कलर करने की आवश्यकता थी, जिसके बाद सैलून को COVID ​​-19 परीक्षण किए जाने के बाद निजी तौर पर उपयोग के लिए खोला गया था। गौरतलब है कि सख्त लॉकडाउन के बावजूद लंदन में फिल्म और टीवी सम्बन्धी प्रक्रियाओं को COVID-19 दिशानिर्देशों का पालन करते हुए जारी रखने की अनुमति दी है।

अभिनेत्री के एक प्रवक्ता ने कहा कि सरकारी दिशानिर्देशों के बाद, प्रियंका चोपड़ा जोनास के बाल फिल्म के लिए जोश वुड द्वारा कलर कर लिए गए थेऔर वह वर्तमान में शूटिंग कर रही हैं।

प्रियंका चोपड़ा कथित तौर पर लंदन में अपने पति निक जोनास के साथ फंसी हुई हैं। वह अपनी आगामी फिल्म, ‘टेक्स्ट फॉर यू’ की शूटिंग के लिए शहर में थीं। इस महीने के अंत में फिल्मांकन मूल रूप से समाप्त होने वाला था, प्रोडक्शन टीम सभी के लिए जल्द से जल्द अमेरिका लौटने की व्यवस्था करने की कोशिश कर रही है।