उत्तर प्रदेश के मेरठ में मवाना थानाक्षेत्र में गोवंश काटे जाने जाने की सूचना पर पहुँची पुलिस टीम पर आरोपित परिवार के सदस्यों ने हमला बोल दिया। एक महिला सिपाही को आरोपितों ने दबोचकर जान से मारने की नीयत से गले में रस्सी का फँदा डाल कर घसीटा, जिसको अन्य पुलिसकर्मियों ने काफी मुश्किल से बचाया।
पुलिस टीम पर हमले की सूचना पर तुरंत ही आसपास के थानों से पुलिस फोर्स भेजी गई। मौके से दो महिलाओं सहित तीन को हिरासत में लिया गया। इसके साथ ही, वहाँ से तीन कुंतल माँस, अवशेष तथा औजार व तीन बाइक बरामद करने का दावा किया गया है। थाना प्रभारी ने 10 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
मामले में उवेश, महराज, आफरिन, वसीम कुरैशी, डिर्रा उर्फ फिरोज कुरैशी, अमजद कुरैशी, फुरकान कुरैशी, इकराम कुरैशी, जैद कुरैशी, आफाक कुरैशी समेत कुल दस आरोपितों के खिलाफ बलवा, हत्या के प्रयास, गोकशी, साजिश रचने व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस को सठला गाँव में पशुओं के कटान की सूचना मिली थी। मुखबिर द्वारा प्राप्त इस सूचना के आधार पर पुलिस फोर्स के साथ मौके पर दबिश दी गई तो वहाँ पर पशुओं का कटान होता मिला। जैसे ही मकान का दरवाजा खुलवाया गया तो कटान कर रहे लोग उग्र हो गए। आरोपितों ने हाथों में लिए चाकू-छुरे पुलिस दल पर तान दिए और जान से मारने की नीयत से पुलिस फोर्स पर हमला बोल दिया। पुलिस फोर्स को धक्का देते हुए आरोपित छतों पर चढ़ गए और धमकी देने लगे।
इस दौरान पुलिस ने हिम्मत कर एक आरोपित को दबोच लिया। लेकिन दो आरोपित महिलाओं ने एक महिला कांस्टेबल को दबोचकर उसके गले में रस्सी का फँदा डालकर जान से मारने का प्रयास किया। पीड़ित कांस्टेबल को अन्य पुलिसकर्मियों ने बचाया। स्थिति से आला अधिकारियों को अवगत कराया। आसपास के थानों की पुलस मौके पर पहुँच गई।
एक मीडिया संस्थान है, जिसके लिए ओसामा बिन लादेन किसी का ‘पिता-पति’ था। उसी मीडिया संस्थान के लिए स्वामी विवेकानंद ‘सिगार पीने वाला सन्यासी’ है। वामपंथी मीडिया का आतंकियों का महिमामंडन करना किसी से छुपा नहीं है। इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती कि कोई व्यक्ति, मीडिया या मानसिक रूप से स्थिर व्यक्ति ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकी का गुणगान करते हुए समाज में यह नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करेगा कि वह कैसा पति और पिता था। लेकिन वामपंथी मीडिया गिरोह की ही एक टुकड़ी- ‘द क्विंट’ (The Quint) ने तो ऐसा ही किया है। और इसी दी क्विंट की हिंदू धर्म के प्रकाश को विदेशों तक पहुँचाने वाले स्वामी विवेकानंद एक ‘सिगार पीने वाले सन्यासी’ लगते हैं।
पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना रियाज नायकू का परिचय गणित शिक्षक के रुप में कराने वाले ‘दी क्विंट’ को स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर यह बताने की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस हुई कि वह एक ‘सिगार पीने वाले सन्यासी’ थे। ‘दी क्विंट’ ने 12 जनवरी को विवेकानंद के जन्मदिन पर एक लेख अपडेट और दोबारा शेयर किया है, जिसका शीर्षक Swami Vivekananda Jayanti: Cigar-Smoking Monk Is Still Relevant है। इस लेख में उन्होंने स्वामी विवेकानंद को ‘अपरंपरागत सन्यासी’ करार देते हुए ‘सिगार पीने वाला’ बताया।
हैरानी की बात ये है कि नि:स्वार्थ भाव से अपने राष्ट्र ‘भारत’ और अपनी संस्कृति से अत्यंत स्नेह और प्रेम करने वाले विवेकानंद को दी क्विंट ने सिर्फ एक ‘सिगार पीने वाले भिक्षु’ के रुप में प्रदर्शित किया। हालाँकि, क्विंट ने स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचार की कुछ सकारात्मक बातें भी बताई हैं, लेकिन उनका मुख्य ध्यान इसी पर था और ऐसा लगता है कि उनकी एकमात्र पहचान सिर्फ उनकी सिगार थी।
क्विंट ने स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन ही उनकी इस ‘खूबी’ के बारे में चर्चा के लायक समझा जबकि लादेन और रियाज नाइकू जैसे आतंकियों के महिमामंडन के लिए दी क्विंट जैसे मीडिया गिरोहों को शायद ही कोई विशेष दिन की जरुरत महसूस होती हो। खैर, आतंकियों का महिमामंडन करने वाले मीडिया गिरोहों का इस तरह से लिखना अचंभित करने जैसा बिलकुल भी नहीं है।
‘द क्विंट’ में प्रकाशित लेख का अंश
9/11 आतंकी हमले को करीब दो दशक का वक्त बीत चुका है लेकिन आज भी उसका नाम आते ही दहशत का मंजर आँखों के सामने छा जाता है। अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन ने आतंकी हमले को अंजाम दिया था। साल 2011 में अमेरिका ने अपने ऊपर हुए आतंकी हमले का बदला ले लिया और ओसामा बिन लादेन मारा गया।
पूरी दुनिया में आतंक की कहानी लिखने वाले ओसामा बिन लादेन के परिवार को लेकर ‘द क्विंट’ की सहानुभूति देखने लायक रही है। लादेन की मौत की छठी सालगिरह पर मीडिया हाउस ने जीन सैसन की पुस्तक ‘Growing Up Bin Laden: Osama’s Wife and Son Take Us Inside Their Secret World’ के कुछ अंश छापे थे। जिसमें ओसामा की पत्नी और बेटे ने बताया था कि लोग आतंकवादी पैदा नहीं हैं औ न ही वे एक ही झटके में आतंकवादी बन जाते हैं। इस पूरे लेख का लब्बोलुआब यही था कि ओसामा यूँ ही आतंकवादी नहीं बना था, ये तो परिस्थितियों ने उसे मजबूर किया, वरना वो शर्मीला, विनम्र और शरारती बच्चा था।
आश्चर्य सिर्फ यह है कि पता नहीं आतंक के इस सरगना का गुणगान करने वाले ये मीडिया गिरोह ऐसा कुछ लिखने में क्यों शरमा गए कि वह निर्दोष-निहत्थे लोगों की हत्या के बाद पश्चाताप से भर उठता था और जोर-जोर से रोता था? 9/11 हमले के बाद तो वो अपनी माँ की आँचल में छुप-छुप कर रोता था।
बाहरहाल, यह कोई नई कोशिश नहीं है। क्या कोई भूल सकता है कि आतंकी याकूब मेमन की फाँसी के बाद लिखा गया था- ‘एंड दे हैंग्ड याकूब’ और बुरहान वानी के मारे जाने के बाद उसे हेडमास्टर का बेटा बताया गया था- कुछ इस अंदाज में कि वह तो एक सुदर्शन सा युवक था, जिसे बंदूकों के साथ फोटो खिंचाने का शौक लग गया था।
खूँखार आतंकियों का महिमामंडन किसी शरारत का नतीजा नहीं, सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इस रणनीति का एक अनिवार्य तत्व खूँखार से खूँखार आतंकी के चित्रण में इस बात को जोड़ना होता है कि किशोरावस्था में तो वह बड़ा ही शर्मीला, किंतु मेधावी किशोर था, लेकिन एक दिन बाजार से, बाग से, स्कूल से लौटते हुए पुलिस ने उसे पीट दिया तो वह क्रोध से भर उठा और उसने बंदूक उठा ली। इसी तरह की कहानियाँ शातिर पत्थरबाजों के बारे में गढ़ी जाती हैं। कश्मीर में जब कभी पत्थरबाज पुलिस की सख्ती का शिकार होते हैं तो कई समाचार माध्यम यह साबित करने में जुट जाते हैं कि वह तो घर के छज्जे में चुपचाप खड़ा था या फिर ट्यूूशन पढ़कर लौट रहा था।
कश्मीर में सक्रिय आतंकियों के महिमामंडन की रणनीति के वाहक भले ही विदेशी समाचार माध्यम हों, लेकिन उसे खाद-पानी देने का काम भारतीय ही करते हैं। यह एक तथ्य है कि आतंकियों को लेकर संवेदना जगाने और भारत के प्रति परोक्ष-अपरोक्ष रूप से जहर उगलने वाली खबरें भारतीय पत्रकारों ने ही लिखीं।
अब फर्जी, अधकचरी, अपुष्ट-एकपक्षीय समाचार लिखना बड़ा आसान हो गया है। किसी भी अप्रिय या अस्वाभाविक घटना पर पुलिस, प्रशासन और सरकार की निंदा-भर्त्सना करने या उन्हें गलत बताने वाला एक बयान चाहिए होता है। किसी ऐरे-गैरे-नत्थू खैरे का ऐसा कोई बयान सहज उपलब्ध हो ही जाता है। कुछ मुश्किल होती है तो आरोपित, आतंकी, आक्रांता के परिजनों की सेवाएँ ले ले जाती हैं। कौन भूल सकता है पुलवामा कांड के आत्मघाती हमलावर के बारे में उसके परिजनों के बयानों को?
मीडिया पर सबसे बड़ा आरोप यही है कि वह अपराध या आतंकवाद के महिमामंडन का लोभ संवरण नहीं कर पाता। यही प्रचार आतंकवादियों के लिए मीडिया आक्सीजन का काम करता है। यह गंभीर चिंता का विषय है। इससे आतंकियों के हौसले तो बुलंद होते ही हैं, आम जनता में भय का प्रसार भी होता है। जाहिर तौर पर देश जब एक बड़ी लड़ाई से मुखातिब है तो खास संदर्भ में मीडिया को भी अपनी भूमिका पर विचार करना चाहिए। आज असहमति के अधिकार के नाम पर देश के भीतर कई तरह के सशस्त्र संघर्ष खड़े किए जा रहे हैं, लोकतंत्र में भरोसा न करने वाली ताकतें इन्हें कई बार समर्थन भी करती नजर आती हैं।
कॉन्ग्रेस शासित यूपीए में मुख्यधारा की मीडिया और लुटियंस पत्रकार खुद को इस देश का भाग्यविधता मानने लगे थे। उन्हें यह गुमान था कि वह जनता को जो सच-झूठ दिखाएँगे, जनता उसे ही मानेगी, उन्हें यह गुमान था कि वह जनता और सरकार के बीच वहीं केवल मध्यस्थ हैं, उन्हें यह गुमान था कि वह एक प्रिविलेस क्लास हैं जो हर वह सुविधा भोगने का अधिकारी है, जो वीआईपी श्रेणी में आता है। ऐसे पत्रकारों और मीडिया हाउसों को मोदी सरकार में निराशा हाथ लगी है, जिस कारण वह देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ शत्रुता का भाव बनाए हुए हैं।
दोहरा चरित्र और एजेंडा आधारित पत्रकारिता के कारण सोशल मीडिया के इस युग में भारतीय मुख्यधारा की मीडिया और पत्रकार आज विश्वसनीयता के संकट से जूझ रहे हैं। हर राष्ट्रविरोधी तत्व, वह चाहे जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने वाले हों या हिज्बुल का आतंकी बुरहान वानी- उनके साथ लुटियंस पत्रकार व मीडिया हाउस खड़े नजर आते हैं।
उठो, जागो और तब तक नहीं रुको, जब तक तुम अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर लेते। कर्तव्यपथ पर लगातार डटे रहने का ऐसा ध्येय वाक्य शायद दूसरा नहीं रचा जा सका। आधुनिक दुनिया में सबसे पहले और सबसे मजबूती से भारतीय संस्कृति का डंका बजाने वाले सही मायनों में भारत के राष्ट्रपुरुष स्वामी विवेकानंद का आज जन्मदिन है।
स्वामी विवेकानंद ने वैज्ञानिक सोच और तर्क से हिंदू धर्म को जोड़ दुनिया को जो संदेश दिया उसकी प्रतिध्वनि का नाद आज भी ब्रह्मांड में गूँज रहा है। शिकागो की उस प्रसिद्ध धर्म संसद में ‘मेरे भाइयों और बहनों’ का उनका आह्वान आज भी दुनिया में भाईचारे का संदेश दे रहा है। आज जरूरत है भारत के इस राष्ट्रपुरुष की सीखों पर हर दिन मनन की।
दुनिया हमेशा याद रखेगी कहानी जीतेंद्रीय नरेंद्र की
‘नरेंद्र’ यानी वह मनुष्य जिसने अपनी इन्द्रियों पर विजय पा ली हो। 12 जनवरी, 1863 को एक ऐसे ही महापुरुष का जन्म हुआ जिसने ना केवल भारतवर्ष के लिए एक मिसाल कायम किया बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अद्वितीय प्रतिभा के कारण एक महान विद्वान, आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक के रूप में स्थापित हुए।
हम उसी महापुरुष की बात कर रहें हैं, जिनका नाम स्वामी विवेकानंद है, जिन्हें बचपन में ‘नरेंद्र’ (नरेन्द्र नाथ दत्त) के नाम से पुकारा जाता था। युवा चेतना को जागृत करने तथा नैतिक मूल्यों के विकास हेतु प्रतिबद्ध, भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक दर्शन एवं मूल्यों को सुदृढ़ तथा उसकी उचित व्याख्या करने, भारतीयता के भाव के प्रखर प्रवक्ता, अध्यात्म और वैज्ञानिकता के समन्वयक तथा मानवीय मूल्यों के पुनरुत्थान हेतु स्वामी विवेकानंद का नाम सदैव याद किया जाता है।
आज का दिन ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है
युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद अपने विचारों एवं आदर्शों की वजह से हमेशा युवाओं के ऊर्जा के एक अमूल्य स्रोत के रूप में सदैव विद्यमान हैं, जिन्हें हम पढ़कर सदैव रोमांचित व गौरवान्वित हो जाते हैं। स्वामी विवेकानंद के विचारों और आदर्श ने सिर्फ भारतवर्ष बल्कि सम्पूर्ण विश्व के युवाओं को प्रभावित व प्रेरित किया है। परंतु एक प्रश्न खड़ा हो उठता है कि क्या सही मायने में हम युवा वर्ग स्वामी विवेकानंद के विचारों एवं आदर्शों को आत्मसात करते हैं या केवल प्रेरणास्रोत भर मान लेने से काम हो जाता है?
यह हम सभी जानते हैं कि अगर युवा वर्ग स्वामी विवेकानंद के एक भी गुण को आत्मसात कर लें तो वही बहुत बड़ी बात होगी। स्वामी विवेकानंद कहते थे, “एक समय में एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।”
विवेकानंद का सबसे प्रसिद्ध तथा चर्चित संदेश -“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत”, अर्थात उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक कि अपने लक्ष्य तक न पहुँच जाओ, कमोबेश हर युवा के दिल में एक चित्र के रूप में शोभायमान होना चाहिए। ताकि हम प्रतिदिन उठकर अपने दिल में उस चित्र को देखें और ऊर्जा से लबरेज हो जाएँ। युवा वर्ग केवल इसी संदेश को ही सही मायने में अपना ले तो एक व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है।
व्यक्ति जब तक अंदर से दृढ़ इच्छाशक्ति वाला नहीं होगा तब तक संदेश मात्र से न तो स्व-निर्माण होगा और न ही राष्ट्र निर्माण में योगदान संभव हो पाएगा। विवेकानंद राष्ट्र-निर्माण हेतु युवाओं के सामर्थ्य, उचित शिक्षा तथा चरित्र निर्माण पर विशेष बल देते हैं। स्वामी विवेकानंद राष्ट्र-निर्माण में शिक्षा के महत्व को लेकर कहते थे कि युवाओं को सशक्त तथा सामर्थ्यवान बनाने के लिए शिक्षा एक मूल साधन है। विवेकानंद का मानना था कि युवा वर्ग अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलें और जो भी वो पाना चाहते हैं उसके लिए सही देशा में प्रयास करके उसे प्राप्त करें।
सन् 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद के द्वारा प्रस्तुत भाषण कमोबेश सभी को याद है। उनके भाषण ने पूरे विश्व का दिल जीत लिया था, आज भी हम सभी उन बातों को याद कर रोमांचित हो उठते हैं। स्वामी विवेकानंद केवल एक महान महापुरुष नहीं बल्कि एक सोच है। और हम युवाओं को इस सोच को आत्मसात करने की जरूरत है।
भारत युवाओं वाला राष्ट्र है। अतः भारतवर्ष का भविष्य हम युवा वर्ग के ऊपर निर्भर करता है। आज हमें सोचने की जरूरत है कि अगर हम स्वामी विवेकानंद के विचारों एवं आदर्शों को को सही रूप में अपनाना चाहते हैं, अनुसरण करना चाहते हैं तो हमारा हर दिन ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ होना चाहिए। विवेकानंद इस बात के प्रतीक हैं कि हम भारतीय अगर उनकी राह पर चले तो हमें विश्वगुरु बनने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती। विश्वगुरु बनने का मार्ग स्वामी विवेकानंद 19वीं सदी में ही प्रशस्त कर गए हैं। अब जरूरत है 21वीं सदी में उनके बताए मार्ग पर चलने और नए भारत को गढ़ने की।
आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक सोमनाथ भारती पर हुई कार्रवाई को रायबरेली से कॉन्ग्रेस विधायक राकेश सिंह ने सही ठहराया है। इसको लेकर वो योगी सरकार के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि अपशब्दों व विवादित बयान के मामले में सोमनाथ भारती पर रासुका व देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
इसके साथ ही राकेश सिंह ने सोमनाथ भारती पर स्याही फेंकने वाले हिन्दू युवा वाहिनी के जिला संयोजक जितेंद्र सिंह को 51 हजार रुपए और माला पहना कर सम्मानित भी किया है। इस कार्यक्रम के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा –
“कल हमारे प्रदेश के देवतुल्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऊपर दिल्ली के आम आदमी पार्टी के पूर्व न्याय मंत्री ने अभद्र टिप्पणी की थी और उसका जवाब जितेंद्र ने उनके मुँह पर कालिख पोतकर बहुत अच्छे से दिया। इसीलिए मैंने सोचा कि इसको 51 हजार रुपए देकर सम्मानित किया जाए। इसने रायबरेली का, पूरे हिन्दू समाज का सम्मान बचाया। ऐसे ईमानदार और कर्मठ मुख्यमंत्री के साथ जो उन्होंने अभद्रता की थी, उसका उनको फल मिल गया।”
गौरतलब है कि रायबरेली सदर के गेस्ट हाऊस में सोमवार (जनवरी 11, 2021) को उस समय हंगामा हो गया जब दिल्ली के आम आदमी पार्टी के विधायक व पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती के ऊपर हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओ का विरोध का सामना करना पड़ा। हिन्दू युवा वाहिनी के संयोजक जितेंद्र ने विधायक के ऊपर काली स्याही फेंकने को लेकर भी हंगामा हो गया।
इस बात को लेकर विधायक और पुलिस में एक दूसरे को देखने की धमकी देने लगे। विधायक सोमनाथ भारती ने कोतवाल से उनकी वर्दी उतरवाने तक की बात कही थी। इस बात को लेकर मंगलवार (जनवरी 12, 2021) को कॉन्ग्रेस के हरचंदपुर विधायक राकेश सिंह ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश सरकार की तारीफ करते नजर आए और उन पर उन्होंने AAP विधायक पर देशद्रोह जैसे मुकदमा लगाने की भी बात कही है।
राकेश सिंह ने आम आदमी पार्टी के विधायक पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती को बोले कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जैसा ईमानदार और पूजनीय मुख्यमंत्री शायद ही किसी प्रदेश में होगा और AAP पार्टी के विधायक, जिसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की भर्त्सना की अपशब्दों का प्रयोग किया ऐसे विधायक के ऊपर कठोर से कठोर कार्रवाई करें और देशद्रोह का मुकदमा चलाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री की जगह जगह पूजा होती है। वह लोग उनको भगवान की तरह पूजते हैं।
उन्होंने कहा कि इतना ईमानदार और कर्मठ और पूजनीय आज तक उत्तर प्रदेश में कोई मुख्यमंत्री नही हुआ है ना आगे होगा। यह पूछे जाने पर कि वो कॉन्ग्रेस के विधायक हैं और कॉन्ग्रेस लगातार भाजपा का विरोध करती है और वो बीजेपी के मुख्यमंत्री की तारीफ कर रहे हैं, इस पर उनका कहना था, “मैं कॉन्ग्रेस का विधायक बना हूँ 40 साल के बाद। मैं जन्म से हिंदू और हिंदुस्तानी हूँ। सीएम योगी और मेरे विचार मिलते हैं, इसलिए मैं उनका समर्थन करता हूँ। उनसे ज्यादा ईमानदार कॉन्ग्रेस में एक भी नेता नहीं है, जितना योगी आदित्यनाथ हैं।”
यह और कोई नहीं यह कॉन्ग्रेस के विधायक राकेश सिंह का कहना है,जो कि रायबरेली के एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह के छोटे भाई भी हैं जबकि एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह भाजपा में है और वर्तमान में हरचंदपुर विधायक राकेश सिंह भाजपा का पक्ष लेते नजर आ रहे हैं। इससे यह भी लग रहा है कॉन्ग्रेस के विधायक अपनी ही पार्टी के का विरोध कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश के योगी की तारीफ कर रहे हैं।
बिहार की राजधानी पटना में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प का मामला सामने आया है। एक बैठक के दौरान पार्टी के लोगों में आपस में ही कहासुनी हो गई। समाचार एजेंसी एएनआई ने पूरी घटना की वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ”पटना में कॉन्ग्रेस इंचार्ज भक्त चरण दास की बैठक में तनातनी का माहौल हो गया।”
एजेंसी के अनुसार, ये आपसी झड़प विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार और टिकट डिस्ट्रिब्यूशन को लेकर शुरू हुई। बाद में मामला हाथापाई तक पहुँच गया और बैठक में मौजूद लोग एक दूसरे से गाली गलौच करने लगे। मंच से सबको चुप कराने का भी प्रयास हुआ लेकिन बात और बिगड़ गई।
वीडियो में देख सकते हैं कि आपसी कहासुनी के बीच वहाँ मौजूद लोग धक्का-मुक्की करने लगते हैं। इस दौरान मंच की ओर कुर्सी भी फेंकी जाती है। नारेबाजी होती है। तभी एक व्यक्ति बीच में आकर कहता है, “कॉन्ग्रेस के दलालों होश में आ जाओ।”
Bihar: Huge ruckus during Congress in-charge Bhakta Charan Das’ meeting with party workers in Patna. The party workers were angry over the defeat of Congress in elections as well as ticket distribution. (Note: Abusive language) pic.twitter.com/dB2nfYCE5n
बता दें कि पार्टी प्रभारी बनने के बाद भक्त चरण दास अपनी तीन दिवसीय बिहार यात्रा पर बिहार की राजधानी पटना में मौजूद हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ लगातार बैठक कर रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को भी वह सदाकत आश्रम में किसान मोर्चा के साथ बैठक करने गए।
बैठक के शुरू होते ही वहाँ मौजूद कार्यकर्ताओं की आपस में कहा सुनी हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बिगड़ गया कि भक्त चरण दास सबसे शांत होने की अपील करते लगे लेकिन अन्य सभी लोग आपसी बहस में उलझ गए।
इससे पूर्व, कल भी एक बैठक के दौरान भक्त चरण दास के सामने पार्टी के कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा था। सभी कार्यकर्ता कॉन्ग्रेस को मिली हार के कारण प्रदेश नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। यही कारण था कि सोमवार मौका मिलते ही उन्होंने पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को बदलने की माँग की।
वहीं, अपनी बैठक में कार्यकर्ताओं को हंगामा करता देख भक्त चरण दास ने पहले उन्हें शांत कराया और फिर उनकी समस्याओं को सुनते हुए हर मसले पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
तुर्की में अदनान ओकतार नामक एक मुस्लिम नेता को इस्ताम्बुल की अदालत ने 1075 वर्षों के कड़े कारावास की सज़ा सुनाई है। मजहबी उपदेशक अदनान अपनी 1000 गर्लफ्रेंड्स के साथ ज़िंदगी बिता रहा था। हालाँकि, उनमें से अधिकतर महिलाओं ने उस पर बलात्कार और जबरन सम्बन्ध बनाने के आरोप लगाए हैं। वो तुर्की में मुस्लिमों के एक पंथ का मजहबी मुखिया है। यौन शोषण से लेकर देशविरोधी जासूसी तक, पिछले 1.5 वर्ष से उस पर ये मामले चल रहे थे।
अदनान ओकतार महिलाओं का सार्वजनिक रूप से भी सम्मान नहीं करता था और उनके लिए ‘बिल्लियाँ’ शब्द का इस्तेमाल करता था। अब तक उसके 236 अनुयायियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है और उसके संगठन को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। उसके खिलाफ सैन्य जासूसी, प्रताड़ना, अपहरण, फोन टैपिंग, धोखाधड़ी, धमकी, हत्या का प्रयास, जालसाजी और यौन शोषण के आरोप भरे पड़े हैं।
अदनान ओकतार को प्लास्टिक सर्जरी कराई हुई महिलाओं के साथ टीवी शोज में डांस करना भी खासा पसंद था। सुनवाई के दौरान उसके खिलाफ एक के बाद एक कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। छापेमारी के दौरान उसके घर से 69,000 गर्भ-निरोधक गोलियाँ निकलीं। उसने खुद ही जज को बताया था कि उसकी 1000 गर्लफ्रेंड्स हैं। उसने अदालत को यह भी बताया था कि महिलाओं के दिल में उसके दिल में लगातार प्यार उमड़ता रहता है और एक मुस्लिम की यही तो खूबी है।
Turkey Islamic televangelist cult leader Adnan Oktar was sentenced to almost 1,100 years in prison on charges of sexual abuse of minors, as well as espionage and leading a criminal organization https://t.co/opIgfatpR5
उसने इसे ‘प्यार’ नाम देते हुए कहा था कि मनुष्य के लिए ये सबसे खास होता है। वो कहता था कि उसके पास बाप बनने की असाधारण क्षमता है। अदनान का ‘N9’ नाम का टीवी चैनल भी चलता है और वह कई सेक्स स्कैंडल्स में भी लिप्त रहा है। महिलाओं ने बताया कि अदनान ओकतार ने कई महिलाओं का यौन शोषण कर के जबरन गर्भ-निरोधक गोलियाँ खिलाई हैं। तुर्की के कई अन्य मजहबी नेताओं ने उसकी निंदा की थी।
नाबालिगों के साथ भी अदनान ने बलात्कार किया था। तुर्की में इसके गैंग के लोग सबसे पहले किसी सुन्दर युवती को फाँसते थे और फिर उसके साथ रेप कर के उसे कहते थे कि इसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया गया है। फिर ब्लैकमेल कर के इस्लाम को लेकर उन महिलाओं को उलटी-सीधी शिक्षाएँ दी जाती थीं। 1980 के दशक में कुछ अमीर अनुयायियों को उसने लुभाया था। वो यूनिवर्सिटी ड्रॉपआउट भी है। प्रासीक्यूटर ने बताया कि भारी मेकअप वाली महिलाओं को लेकर वो पागल था।
दिल्ली सीमा पर जारी किसान विरोधी आंदोलन को बिचौलियों, खालिस्तानियों के साथ ही वामपंथी और अन्य इस्लामी तत्वों द्वारा हाइजैक किए जाने के बाद इसकी विश्वसनीयता खो चुकी है। PFI का समर्थन मिलने के बाद अब अनुभवी प्रदर्शनकारी और भारत विरोधी लेखिका अरुंधति रॉय किसान विरोध वाली जगह पर उपद्रव करने के लिए पहुँच गई है।
9 जनवरी को अरुंधति रॉय ने बहादुरगढ़ में एक धरना-प्रदर्शन स्थल पर बीकेयू के सदस्यों की एक सभा को संबोधित किया। किसानों से बात करते हुए उन्होंने अपने सामान्य लहजे के साथ शुरू किया कि कैसे ‘गोदी मीडिया’ ने पहले ही उन्हें एक नक्सली और राष्ट्र-विरोधी के रूप प्रचारित किया, इसलिए वह पहले किसानों से ‘मिलने नहीं’ आई, ताकि कहीं उन्हें भी उनकी तरह की नक्सली न साबित कर दे। हालाँकि, चूँकि मीडिया ने पहले ही उन्हें ‘आतंकवादी’ के रूप में ब्रांडेड कर दिया है, इसलिए अब वह उनसे मिलने आई है।
दिलचस्प बात यह है कि वास्तव में मीडिया ने इन प्रदर्शनकारी ‘किसानों’ को समर्थन दिया है और जिसने भी वैध सवाल उठाए हैं, उन्हें बदनाम किया। उदाहरण के लिए, जब खालिस्तानी तत्व प्रधानमंत्री की हत्या के बारे में बयान दे रहे थे, तो मीडिया ने देखा और उन लोगों को बदनाम किया जो खालिस्तानियों की उपस्थिति के बारे में सवाल पूछ रहे थे। इसके अलावा, जब ये बात सामने आई थी कि अधिकांश किसानों को उन तीन कृषि कानूनों के बारे में पता ही नहीं है, जिसका ये विरोध कर रहे थे, तब भी मीडिया ने इनसे सहानुभूति दिखाते हुए इनका समर्थन किया था।
अरुंधती रॉय कहती है कि पूरा देश ‘किसानों’ को दिल्ली की सीमा पर देख रहा है और उन पर अपनी उम्मीदें टटोल रहा है। उसने कहा कि किसानों ने उन वास्तविकताओं को जमीन पर लाया है, जिसे उसके जैसे लोग पिछले 20 वर्षों से लिख रहे थे। याद दिला दें कि अरुंधति रॉय वही लेखिका हैं जिन्होंने सशस्त्र आतंकवादियों और नक्सलियों को ‘बंदूकों के साथ गाँधीवाद’ की संज्ञा दी थी।
हालाँकि, उसके भाषण का सबसे खतरनाक पहलू बाद में आता है। वह कहती है कि सरकार उनके साथ जो भी कर रही है या करने जा रही है, वो ठीक वैसा ही जैसा उन्होंने ‘बस्तर में लड़ने वालों के साथ’ किया। किसानों से बात करते समय उन्होंने यह कहते हुए बस्तर के नक्सलियों के कार्यों का बचाव किया कि वे ‘लड़ाई’ लड़ रहे हैं क्योंकि सरकार ने आदिवासियों के जल, जंगल, ज़मीन को छीन लिया और इसे बड़े उद्योगपतियों को दे दिया। वह फिर कहती है कि किसानों के साथ वही खेल खेला जा रहा है।
यह बयानबाजी और कितनी खतरनाक है, इसे 2018 के साक्षात्कार से समझा जा सकता है, जो कि पहाड़ सिंह ने ऑपइंडिया को दिया था। पहाड़ सिंह एक नक्सली थे, जिन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। उन्होंने 18 साल तक जंगल में लड़ाई लड़ी थी।
पहाड सिंह ने कहा कि ये ‘निठल्ले बुद्धिजीवी’ आदिवासियों को गुमराह कर रहे हैं और जल, जंगल, ज़मीन के बारे में बयानबाजी करके उन्हें भी नक्सलवाद का लालच दिया गया था।
उन्होंने बताया कि उन्होंने पहली बार तेंदू के पत्तों को इकट्ठा करते समय जंगलों में पहली बार नक्सलियों को देखा था। उन्होंने कहा कि नक्सली आदिवासियों से संपर्क करते थे और दावा करते थे कि वे जनजातीय अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। आदिवासी अस्मिता। नक्सली आदिवासियों को बताते थे कि सरकार भ्रष्ट है और आदिवासियों को रोज़गार देने में असमर्थ है इसलिए उन्हें उनकी गरिमा के लिए लड़ने के लिए उनके साथ जुड़ना चाहिए।
पहाड सिंह से पूछा गया था कि वह ‘बेरोजगार बुद्धिजीवियों’ द्वारा प्रदर्शित विरोधाभास के बारे में क्या सोचते हैं क्योंकि वे एक ओर दावा करते हैं कि सरकार द्वारा आदिवासियों को ब्राह्मणवादी दमन द्वारा दबाया जा रहा है और दूसरी ओर आदिवासी स्वयं श्रम का उपयोग करते हैं। उनका जवाब था कि नक्सल नेताओं की कथनी और करनी में बहुत अंतर है। वे जनजातीय अधिकारों और शक्तियों के बारे में प्रचार करते हैं, जबकि वे आदिवासी आबादी की बुनियादी संरचनाओं और जरूरतों से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं।
यह पूछे जाने पर कि ‘चार मंजिल’ (एक पहाड़ी जहां बॉलर के साथ सेंट्रल कमेटी के सदस्य या नक्सली विचारक बैठते हैं) में बैठे आदिवासियों पर हुकूमत करने और शासन करने वाले लोग कौन हैं, उन्होंने जवाब दिया कि आदिवासी अधिकारों और न्याय पर बात करने वाले पाखंडी हैं। उनके पास शक्ति थी, उनके पास हथियार थे। जिन आदिवासियों की वे भर्ती करते हैं, उन्हें दुनिया की वास्तविकताओं के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है, उनमें से कई ऐसे निर्दोष हैं, जिन्होंने अपने जीवन में कभी ट्रेन नहीं देखी थी, ऐसे लोगों का उनकी सेवा के लिए शोषण किया जाता है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी यह भी नहीं जानते हैं कि गाँव का मुखिया कौन है, माओ की विचारधारा क्या है, यह समझना भूल जाते हैं। वे भरोसा करते हैं कि उन्हें जल, जंगल, ज़मीन’ के नाम पर मनाया जा सकता है। वह कहते हैं कि जबकि बाकी दुनिया विज्ञान और विकास के साथ आगे बढ़ रही है, आदिवासियों के उत्थान के लिए एक असफल विचारधारा कैसे हो सकती है। यहाँ यह ध्यान देने योग्य है कि पहाड सिंह ने खुद को शहर में 18 वर्षों में पहली बार देखा था।
पहाड़ सिंह ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण हैं और यही कारण है कि नक्सली नेता वन क्षेत्रों पर नियंत्रण रखने का प्रयास करते हैं। वे जंगलों से प्राप्त हर प्राकृतिक उत्पाद और खनिज के लिए ठेकेदारों और व्यापारियों से हिस्सेदारी की माँग करते हैं। करोड़ों रुपए जमा होते हैं और इसमें से कोई भी आदिवासियों या निचले कैडर नक्सलियों के पास नहीं जाता है। सारा पैसा उच्च समिति को जाता है।
वह बताते हैं कि निचले कैडर के नक्सलियों को न तो वेतन मिलता है और न ही लाभ। उनके परिवारों को बताया जाता है कि माओवादी के लिए सेवा निस्वार्थ और समर्पित होनी चाहिए। वह आगे कहते हैं कि शीर्ष नेता और शहरी नक्सली अक्सर बाहरी दुनिया के लिए एक और चेहरा बनाए रखते हैं ताकि सरकार और मीडिया को आदिवासी क्षेत्रों में उनकी गतिविधियों का पता न चले।
इस प्रकार यह स्पष्ट है कि ‘जल, जंगल, ज़मीन’ की ट्राफियाँ गरीब वनवासियों को राज्य के खिलाफ हथियार उठाने के लिए लालच देती हैं और अरुंधति रॉय जैसे विचारधारा वाले लोग अच्छी तरह से कमाते हैं।
यह जगजाहिर है कि अरुंधति का प्रयास न केवल प्रदर्शन पर बैठे तथाकथित किसानों को कट्टरपंथी बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि वे सरकार के खिलाफ रहें, बल्कि यह भी है कि वो ‘बेरोजगार बुद्धिजीवियों’ के कहने पर उन नक्सलियों का भी बचाव करें जो राज्य के खिलाफ लड़ रहे हैं और पुलिसकर्मियों की हत्या कर रहे हैं।
किसान आंदोलन पर सरकार द्वारा बनाए कानूनों पर रोक लगा कर सुप्रीम कोर्ट ने ब्लैकमेलरों को वैधानिकता प्रदान कर दी है। न सिर्फ अराजकतावादी लोगों को अब ये कहने का मौका मिल गया है कि संसद द्वारा पारित कानून गलत है, बल्कि आगे अब किसी के पास 2000 की भीड़ हो तो वो सरकारों को झुका सकते हैं।
राजस्थान से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने मानवता को तार-तार कर दिया है। यहाँ एक नाबालिग लड़के के साथ बलात्कार किए जाने का आरोप लगा है। ये घटना बीकानेर जिले के बज्जू क्षेत्र की है। पीड़ित परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनके ही 4 पड़ोसियों ने मिल कर 15 साल के बच्चे का न सिर्फ अपहरण किया, बल्कि 1 महीना तक बँधक बना कर रखा। साथ ही उन पर नाबालिग के साथ कई बार रेप करने का भी आरोप लगाया।
पीड़ित की माँ ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा दिसंबर 15, 2020 को अपने ननिहाल जाने के लिए घर से निकला था। तभी, रास्ते में ही उसके पड़ोसी जसराज बिश्नोई, उसके रिश्तेदार हरीश, सोमराज और विकास ने मिल कर उसका अपहरण कर लिया। आरोप है कि इसके बाद चारों ने पिकअप में पीड़ित बच्चे को बिठा लिया और लूणकरणसर चले गए। वहाँ उसे जबरन शराब पिलाई गई और जम कर मारपीट भी हुई।
पीड़ित परिजनों की शिकायत के अनुसार, आरोपितों ने बच्चे के गुप्तांग में पेट्रोल डाला और साथ ही उसके शरीर को सिगरेट से भी दागा। जंभेश्वर भादू भाई होटल में नाबालिग के साथ बलात्कार की बात कही गई है। परिजनों ने बताया कि जनवरी 4, 2021 को नाबालिग बच्चा किसी तरह आरोपितों के चंगुल से छूट कर निकला और अपने परिवार वालों को घटना की जानकारी दी। फिर वो लोग सीधे पुलिस के पास पहुँचे।
बज्जू पुलिस थाने में माँ की शिकायत के बाद FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया है कि जाँच जारी है और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं बीकानेर की एसपी प्रीति चंद्रा ने आरोपित व पीड़ित परिजनों के बीच लम्बे समय से दुश्मनी की बात कही है। पुलिस का कहना है कि बच्चे के गुप्तांग पर व शरीर के अन्य हिस्सों पर ‘मामूली चोटें’ हैं। पीड़ित परिजनों ने पुलिस से आरोपितों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की माँग की है।
राजस्थान में पिछले कुछ महीनों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं। अक्टूबर 2020 में आए एक मामले में एक 19 वर्षीय युवती के साथ 8 दिन तक बलात्कार किया गया था। चूरू की इस घटना में 9 लोगों ने उसके साथ गैंगरेप किया था। इसी महीने में आए एक अन्य मामले में भीनमाल क्षेत्र के एक गाँव की दो नाबालिग चचेरी बहनों का अपहरण कर के 4 युवकों ने गैंगरेप किया था। आरोपित दोनों को पहाड़ियों पर फेंक कर भाग गए थे।
उत्तर प्रदेश जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मौत की धमकी देने वाले आम आदमी पार्टी विधायक सोमनाथ भारती अपने रवैए के चलते पुलिस की हिरासत में है। इस बीच सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पुलिस द्वारा सोमनाथ भारती हिरासत में पहली शाम तो नहीं ‘पेले’ गए, लेकिन अब पुलिस उन्हें ‘पेलने’ वाली है।
क्या है मामला
ट्विटर पर एक पुलिसकर्मी की वीडियो शेयर करके दावा किया जा रहा है कि ये उस समय की है, जब मीडिया ने रायबरेली पुलिस से सोमनाथ भारती के बारे में पूछा। वीडियो में सुन सकते हैं कि पुलिस अधिकारी मीडिया से बातचीत में कहते हैं, “अभी तो शायद नहीं पेला है। सुबह देखते हैं कि पेलते हैं कि नहीं पेलते।”
‘Ex capt’ नाम के एक ट्विटर अकॉउंट से साझा की गई इस वीडियो पर कई ट्विटर यूजर्स सोमनाथ भारती का मजाक उड़ा रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि ये वीडियो न तो सोमनाथ भारती से संबंधित है और न ही उत्तर प्रदेश पुलिस के किसी अधिकारी की है। वास्तविकता यह है कि यह वीडियो लगभग 3 साल पुरानी है।
फैक्ट चेक
Zee 24 Taas नाम के यूट्यूब चैनल पर पुलिस अधिकारी की वीडियो 5 अप्रैल 2018 को अपलोड की गई थी। इस वीडियो के अनुसार, जोधपुर सेंट्रल जेल के डीआईजी विक्रम सिंह उस समय सलमान खान के जेल में जाने को लेकर मीडिया के सवालों के जवाब दे रहे थे।
वीडियो में सुना जा सकता है कि डीआईजी ने सलमान से जुड़े कई मुद्दों पर मीडिया को बताया। लेकिन 11 मिनट 16 सेकेंड की इस वीडियो में 8 मिनट, 40 सेकेंड पर उनसे किसी पत्रकार ने पूछा कि पिछली बार सलमान खान ने बैरेक में दंड पेले थे, उन्होंने पेंटिंग्स भी की थी, क्या इस बार भी वो दंड पेल रहे हैं?
इस पर डीआईजी कहते हैं, “अभी तो शायद दंड नहीं पेला है। सुबह देखते हैं कि पेलते हैं पेलते कि नहीं।” इस सवाल के बाद भी डीआईजी ने मीडिया के कई सवालों के जवाब दिए। कुल मिलाकर पुलिस अधिकारी के हाव-भाव, उनके सामने मीडिया चैनल्स के माइक और उनके द्वारा दी जा रही जानकारी से यही साबित होता है कि ये वीडियो सलमान खान की गिरफ्तारी के समय की है, ना कि रायबरेली पुलिस की। सोमनाथ भारती की गिरफ्तारी से या उनके ‘पेले’ जाने की कोई भी साजिश पुलिस नहीं चला रही है।
सोमनाथ भारती से जुड़ा विवाद
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक सोमनाथ भारती कल (जनवरी 11, 2021) सुबह से चर्चा में हैं। रायबरेली में उनके चेहरे पर स्याही फेंके जाने की घटना के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मारने की धमकी दी। पुलिस अधिकारियों के साथ अभद्रता करने पर उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस बीच सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर कई तरह दावे किए जा रहे हैं। उनसे जुड़े पुराने किस्से दोबारा प्रासंगिक बना दिए गए हैं। कई वीडियो शेयर करके उन पर मीम भी बन रहे हैं।
उनकी यूपी पुलिस को धमकी देते हुए वीडियो भी आई। उन्होंने कहा “आपकी वर्दी उतरवाएँगे हम। हम पहचान रहे हैं आपको। जो-जो आज बद्तमीजी कर रहा है मेरे साथ, सबकी वर्दी उतरवाऊँगा मैं। आप हट जाइए यहाँ से।”