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‘ऑल्टन्यूज’ की सह-संस्थापक फेक न्यूज फैलाते पकड़ी गई, कैपिटल हिल के बवाल में PM मोदी को घसीटने की कोशिश

तथाकथित फैक्ट-चेकर (fact checker) और प्रोपेगेंडापरस्त वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ की सह संस्थापक सैम जावेद ने गुरुवार (7 जनवरी 2021) को एक बार फिर सोशल मीडिया पर फ़ेक न्यूज़ फैलाई। वामपंथी एजेंडाधारी ‘ऑल्ट न्यूज़’ की फैक्ट चेकर का कट्टरपंथी इस्लामियों के अपराधों को फ़ेक न्यूज़ की मदद से छुपाने का इतिहास पुराना है। उसने गुरुवार को ट्विटर पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2020 में डोनाल्ड ट्रंप के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कथित प्रचार को लेकर गलत जानकारी फैलाई। 

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाए जाने के बाद अमेरिका में जारी उग्र विरोध-प्रदर्शन के बीच, ‘ऑल्ट न्यूज़’ की सह संस्थापक ने सितंबर 2019 के दौरान टेक्सस के ह्यूस्टन में हुए मेगा इवेंट की एडिटेड क्लिप साझा की। पूरी बारीकी से एडिट किए गए वीडियो के इस हिस्से में प्रधानमंत्री मोदी को कहते हुए सुना जा सकता है,  “भारत के भीतर हम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बहुत अच्छे से जुड़े हुए हैं। उम्मीदवार ट्रंप के शब्द, अबकी बार ट्रंप सरकार।” इस पर सैम जावेद ने ट्वीट करते हुए लिखा, “कभी भूलिएगा मत (never forget)।”

सैम जावेद की तरफ से यह ट्वीट तब आया जब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मुखिया प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में राजनीतिक दलों और उसके समर्थकों को सुझाव दिया कि इस तरह का ‘ग़ैरक़ानूनी प्रदर्शन’ रोका जाना चाहिए। साथ ही नियमानुसार और शांतिपूर्ण तरीके से ही सत्ता स्थानांतरित की जानी चाहिए।

सैम जावेद के तथाकथित ‘फैक्ट चेकर्स’ की टीम अक्सर हिन्दुओं और देश की सरकार के लिए अपनी नफरत का नमूना पेश करती रहती है। उन्होंने इस सुनहरे मौके को भी भुनाने में देरी नहीं की। इस मौके का इस्तेमाल करते हुए ‘फैक्ट चेकर्स’ की टीम झूठा दावा करने में जुट गई कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2020 के पहले ह्यूस्टन में हुए इवेंट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप का प्रचार किया।  

क्या पीएम मोदी ने वाकई किया था डोनाल्ड ट्रंप का प्रचार?

‘फैक्ट चेकर’ सैम जावेद द्वारा किए गए दावों से ठीक विपरीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न तो डोनाल्ड ट्रंप का प्रचार किया था और न ही अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया था। यानी सैम जावेद द्वारा किया गया दावा पूरी तरह भ्रामक है क्योंकि पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप की कैम्पेन टीम द्वारा चलाए गए 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान का ज़िक्र किया था।

टेक्सस के ह्यूस्टन में हुए मेगा इवेंट ‘हाउडी मोदी’ में पीएम मोदी ने वहाँ मौजूद जनता को याद दिलाया था कि 2016 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रचार अभियान के दौरान भारतीय प्रवासियों के सामने बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, “अबकी बार ट्रंप सरकार।” ये पूरा वीडियो है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के ट्रंप के अभियान का ज़िक्र किया था।  

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “भारत में हम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बहुत अच्छे से जुड़े हुए हैं। उनके शब्द, ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ आज भी हमारे आस-पास गूँजते हैं।” साल 2016 में अक्टूबर महीने में अमेरिकी चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका के भारतीय और हिन्दुओं के पास ह्वाइट हाउस में एक ‘दोस्त’ होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के प्रख्यात नारे (2014 आम चुनाव) ‘अबकी बार मोदी सरकार’ का उपयोग करते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’।

अमेरिका में भारतीयों के सामने भाषण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया था कि कैसे इस नारे का इस्तेमाल डोनाल्ड ट्रंप ने किया था, जो कि ‘ऑल्ट न्यूज़’ द्वारा किए गए दावों से पूरी तरह अलग है कि पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में प्रचार किया था। ऑल्ट न्यूज़ जो कि खुद ‘फैक्ट चेकर’ होने का दावा करता है एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी को लेकर झूठ फैलाता हुआ पाया गया है। 

ऑल्ट न्यूज़ का फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने का इतिहास 

सैम जावेद की तरह उनकी बॉस निर्झरी सिन्हा, जिन्हें न तो फैक्ट्स की जानकारी है और न ही फैक्ट चेकिंग की, उन्होंने भी प्रधानमंत्री मोदी द्वारा डोनाल्ड ट्रंप का प्रचार किए जाने को लेकर झूठ फैलाया था। दरअसल कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत में जारी ‘किसान आंदोलन’ पर निराधार टिप्पणी की थी, जिसकी पूरे देश में जम कर आलोचना हुई थी। इसके बाद निर्झरी सिन्हा ने ट्विटर पर कनाडा के प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए कहा था कि पीएम मोदी ने किस आधार पर ह्यूस्टन में ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ का नारा लगाया था।

सिर्फ ऑल्ट न्यूज़ ही नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस और पूरे मीडिया गिरोह ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ मिथ्या प्रचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।  

भारतीय वैक्सीन को बेकार क्यों बता रहे हैं वामपंथी | Ajeet Bharti explains Left, Congress hate for Indian Covaxin

वामपंथियों की पूरी लॉबी विदेशी वैक्सीन बिकवाने के लिए भारत बायोटेक के बेहतर वैक्सीन को ले कर भ्रम फैला रही है कि सही तरीके से नहीं मिली अनुमति, जबकि सच कुछ और ही है

पूरा वीडियो यहाँ देखें

नागौर की हैवानियत पर चुप्पी, बदायूँ पर ‘जनाजा’: CM योगी के लिए बदजुबानी कर फँसी कॉन्ग्रेस

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपनी कुंठा व्यक्त करने के लिए कॉन्ग्रेस अब खुल कर जहर उगलने लगी है। पार्टी की यूथ विंग ने बदायूँ कांड पर सीएम योगी को घेरने के लिए ‘जनाजा’ शब्द का प्रयोग किया है।

यूथ कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन लिखा, “योगी जी, कुर्सी है ये तुम्हारा जनाजा तो नहीं, कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते।” यह ट्वीट यूथ कॉन्ग्रेस ने बदायूँ में घटी घटना पर सीएम योगी को जिम्मेदार ठहराने के लिए किया था। लेकिन इसमें इस्तेमाल की गई अमर्यादित भाषा ने इसे नैतिकता का मुद्दा बना दिया।

सबसे हैरानी की बात यह देखने को मिली जिस कॉन्ग्रेस ने बदायूँ पर योगी आदित्यनाथ के लिए ऐसी अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, उसी पार्टी ने राजस्थान के नागौर में महिला के साथ हुई हैवानियत पर चुप्पी साधी रखी। इसे उजागर करते हुए यूजर्स ने कहा है कि पार्टी को इससे कोई तकलीफ नहीं है क्योंकि वहाँ मुख्यमंत्री योगी, नहीं बल्कि अशोक गहलोत हैं। 

बता दें कि राजस्थान के नागौर में हुई घटना में युवती के मुँह और हाथ-पैर को टेप से बाँधकर क्रूरता से सामूहिक दुष्कर्म किया गया। बाद में उसकी कुल्हाड़ी मार कर हत्या कर दी गई। मगर, कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल पर आपको इस घटना का जिक्र नहीं मिलेगा।

मुख्यमंत्री योगी के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने के मामले में सीएम के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी लिखते हैं, “जिन्होंने पिता के निधन के बेहद कष्टकारी वक़्त भी पिता को आख़िरी बार देखने की बजाय UP की जनता को कोविड से बचाने के लिए अपना दफ़्तर चुना, ऐसे सच्चे संत के लिए राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी की कॉन्ग्रेस की भाषा देखिए, ये मानवता का अपमान है, इसका परिणाम आपको चुकाना ही पड़ेगा।”

प्रणय विक्रम सिंह लिखते हैं, “हत्याओं का अमानवीय खेल जिनका शौक-ए-सियासत हो उन कॉन्ग्रेस के लोगों के मुँह से किसी के लिए ‘जनाजा’ सम्बोधन सामान्य बात है। 1984 का सिखों का नरसंहार, 1975 में लोकतंत्र की हत्या सब तुम्हारी उपलब्धियाँ हैं ‘जनाजा’ प्रेमियों। आज लग रहा है कि एक ‘योगी’ से ‘लंकेश दल’ डर गया।”

सनातनी जिज्ञेश लिखते हैं, “राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा आप की पार्टी के लोग तमीज भूलकर बदतमीजी पर उतर चुके हैंl अब इन्हें आप लोगों ने कुछ नहीं कहा तो कॉन्ग्रेस का जनाजा भी निकलेगा और कब्र के लिए जगह भी ढूँढने आप को ही निकलना पड़ेगा। श्री राम आप को सद्बुद्धि दें, अगर आप उनको मानते हैं तो।”

कैपिटल हिल में बवाल के साथ 45% रिपिब्लकन, 69% ट्रंप को नहीं मानते दोषीः सर्वे ने बताया अमेरिका में राजनीतिक खाई कितनी गहरी

वाशिंगटन स्थित कैपिटल हिल में बुधवार (6 दिसंबर, 2021) को डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने जबरदस्त हंगामा किया। ये सब उस वक्‍त हुआ जब कैपिटल हिल में इलेक्टोरल कॉलेज की प्रक्रिया चल रही थी। इसके तहत नवंबर 2020, में हुई जो बाइडन की जीत पर मुहर लगनी थी। हालाँकि इस हंगामे को लेकर लोगों के मत काफी चौंकाने वाले सामने आए हैं। YouGov Polls के अनुसार, 45% रिपब्लिकन्स कैपिटल हिल में हुए बवाल का समर्थन करते हैं।

Yougov poll

पाँच मतदाताओं में से एक कैपिटल हिल में हुए हिंसक हंगामे का समर्थन करते हैं। वहीं 52% मतदाता प्रदर्शनकरियों को चरमपंथी मानते हैं और 49% मानते हैं कि वे लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। हालाँकि यह घटना राजनीतिक असमानता को मद्देनजर काफी हैरान करने वाली है।

डेमोक्रेट्स के 65% लोगों का मानना ​​है कि विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक था, वहीं केवल 12% रिपब्लिकन को ही ऐसा लगता है। वास्तव में रिपब्लिकन को विश्वास है कि प्रदर्शनकारी चरमपंथी, घरेलू आतंकवादी, अपराधी या लोकतांत्रिक विरोधी से अधिक देशभक्त हैं।

बता दें यह असमानता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को दोषी ठहराए जाने को लेकर भी देखी गई है। 69% रिपब्लिकन का मानना ​​है कि इस मामले में ट्रम्प को दोष देने का कोई मतलब नहीं है। इसके विपरीत ऐसा मानने वाले डेमोक्रेट का आँकड़ा 96% है।

इसी तरह कैपिटल हिल के हंगामे को 93% डेमोक्रेट लोकतंत्र के लिए खतरा मानते हैं, जबकि 62% रिपब्लिकन इसे इस तरह नहीं देखते हैं। वहीं लगभग हर मामले में इंडिपेंडेंट का डेमोक्रेट्स के रुख के प्रति झुकाव देखा गया है। हालाँकि, बहुत कट्टरता से यह झुकाव नहीं है।

यह पोल्स साबित करते हैं कि वाशिंगटन में जो हुआ वह विश्वास करने योग्य तो नहीं है, लेकिन यह हंगामा अचानक से भी नहीं हुआ है। देश के भीतर चल रहे राजनीतिक मनमुटाव के चलते ऐसा हुआ। वहीं दोनों तरफ के लोग इस बात पर भी सहमत नहीं हो सकते हैं कि कैपिटल हिल हमला करने वाले लोग डेमोक्रेसी के लिए खतरा हैं या नहीं।

गौरतलब है कि वाशिंगटन डीसी में रिपब्लिकन नेशनल कमेटी मुख्यालय से पाइप बम बरामद किए गए और मीडिया पर भी हमला किया गया। हिंसक हंगामे के दौरान चार लोगों के मरने की भी खबर है।

इतना मारा कि फूट गई खोपड़ी… फिर पार्टी की, खाना खाया और सो गईः मुंबई में 19 साल की लड़की के मर्डर में नया खुलासा

नए साल के अवसर पर मुंबई के खार वेस्ट में हुई जाह्ववी कुकरेजा की हत्या मामले में पुलिस पड़ताल से नया खुलासा हुआ है। पुलिस ने जाँच के बाद बताया कि कुकरेजा की हत्या की उसकी सहेली दीया पडानकर उस रात घटना के बाद दोबारा से पार्टी होस्ट यश आहूजा के घर पर गई। वहाँ उसने रात का खाना खाया और जाकर सोई, लेकिन एक बार भी जाह्ववी की हालत पर एक शब्द भी नहीं कहा।

आहूजा ने बाद में नोटिस किया कि दीया के होंठों से खून निकल रहा है। जिसके कारण आहूजा ने उसकी मदद भी की। इसके बाद पडानकर ने अपने पिता को बुलाया। वह उसे हिंदूजा अस्पताल लेकर गए। तभी, किसी बिल्डिंग में रहने वाले किसी शख्स ने कुकरेजा के शव को देखा और यश को उसके बारे में बताया। यश ने फौरन पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मामला प्रकाश में आया

पुलिस का कहना है कि उस रात कुकरेजा और पडानकर पूरे कार्यक्रम में रात के करीब 8:30 बजे आ गए थे। लेकिन बाद में वह वापस लौट गए और फिर सह आरोपित श्री जोगधनकर के साथ पार्टी में लौटे। उस पार्टी में अधिकतर लोगों ने नशा कर रखा था।

जैसे ही पार्टी शुरू हुई। तीनोंं ने एक अन्य लड़की के साथ एक अलग कोना पकड़ लिया। बीच में उस लड़की को उल्टियाँ शुरू हो गई और दीया उसे लेकर नीचे चली गई। जैसे ही वह वापस आई श्री ने उससे नजदीकियाँ बढ़ानी शुरू की। जिसे देख कुकरेजा गुस्सा हो गई और काफी चिल्लाई भी। पडानकर ने कथित तौर पर तब उसे झापड़ मारा और जोगधनकर के साथ उसका पीछा किया।

पुलिस का मानना है कि ये सारी झड़प पाँचवे माले पर हुई क्योंकि कुकरेजा की एक चप्पल और ईयरिंग वहीं बरामद हुए। वहीं दूसरे माले पर पुलिस को खून के निशान और मृतक के बाल मिले। पुलिस का कहना है कि सीढ़ियों पर बहुत कम लाइट थी और वहाँ कोई कैमरा भी नहीं था। डॉक्टरों का जाँच के बाद कहना है कि कुकरेजा की हत्या हुई थी न कि किसी दुर्घटना में उसकी जान गई।

पुलिस अनुमान लगा रही है कि कुकरेजा का सिर दीवार पर मार कर फोड़ा गया होगा, क्योंकि जोगधनकर का हाथ भी फ्रैक्चर है। अब पुलिस ये जानकारी जुटा रही है कि फ्रैक्चर कैसे हुआ होगा। अभी तक उनका यही मानना है कि वह झड़प के दौरान सीढ़ियों से गिरा होगा।

फोरेंसिक विशेषज्ञों ने सबके ब्लड सैंपल ले लिए हैं। अब उनका मिलान होगा। पडानकर जाँच अधिकारियों से बात कर रही है। मगर उसके बयान जोगधनकर के बयान से मिलाने आवश्यक हैं। इसलिए जोगधनकर के अस्पातल से डिस्चार्ज होने का इंतजार किया जा रहा है।

बता दें कि नए साल पर हुई जाह्ववी कुकरेजा की मौत के बाद इन दोनों आरोपितों के ख़िलाफ IPC की धारा 302 (हत्या) और 34 (जब एक आपराधिक कृत्य सभी व्यक्तियों ने सामान्य इरादे से किया हो) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले कुकरेजा के दोस्तों ने कहा था कि उसकी मौत अचानक गिरने से नहीं हुई।

उन्होंने बताया, “उसे पकड़ा गया था और पीटा गया था। उसके बालों को पकड़ कर उसे घसीटते हुए छत से दूसरी मंजिल की सीढ़ियों तक लाया गया था।” वहीं पुलिस ने बाल पकड़ कर सीढ़ियों पर घसीटे जाने की बात से इनकार किया था। पुलिस का कहना था कि श्री जोगाधनकर और दीया पडानकर ने मिल कर जाह्नवी कुकरेजा के सिर को पकड़ कर कई बार सीढ़ियों की रेलिंग पर पटका। इसके बाद जाह्नवी का सर पीछे और आगे से फूट गया, जिससे चारों तरफ खून पसर गया।

जाह्नवी की लाश अधनंगी अवस्था में मिली थी। उसके पूरे शरीर पर जगह-जगह खरोंचने के निशान थे। बताया जाता है कि जाह्नवी ने अपने बॉयफ्रेंड श्री और दीया को पार्टी में आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ भी लिया था।

मुसीबत में ‘मसीहा’ सोनू सूद , BMC ने कहा- जुहू की 6 मंजिला रिहायशी इमारत को होटल में बदला

लॉकडाउन के दौरान प्रवासियों की मदद कर ‘मसीहा’ बने अभिनेता सोनू सूद के खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में अभिनेता सोनू सूद पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने बीएमसी की अनुमति के बगैर जुहू स्थित छह मंजिला आवासीय इमारत को होटल में तब्दील कर दिया। BMC ने 4 जनवरी 2020 को जुहू पुलिस से इस मामले की शिकायत की थी। 

बीएमसी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक़ सोनू सूद ने जुहू के एबी नायर रोड स्थित शक्ति सागर नाम की इमारत को होटल बना दिया है। ऐसा करने से पहले उन्होंने आधिकारिक तौर पर कोई अनुमति नहीं ली। इसके आधार पर बीएमसी ने जुहू पुलिस से कहा है कि अभिनेता सोनू सूद पर महाराष्ट्र रीजन एंड टाउन प्लानिंग एक्ट (MRTP) के तहत मामला दर्ज किया जाए। 

वहीं दूसरी तरफ सोनू सूद का कहना है कि उन्होंने किसी तरह की गड़बड़ी नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अभिनेता का कहना था कि उनके पास बीएमसी की अनुमति थी। वह सिर्फ महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी (MCZMA) की तरफ से स्वीकृति मिलने का इंतज़ार कर रहे थे। 

सोनू सूद का ये भी कहना है कि एमसीजेडएमए की तरफ से महामारी (कोविड 19) के चलते अनुमति नहीं मिल पा रही थी। होटल का निर्माण महामारी के दौरान कोरोना वारियर्स के रहने के लिए किया गया था। अगर अनुमति नहीं मिलती है तो वह इसे वापस इमारत में तब्दील कर देंगे। 

दरअसल अक्टूबर 2020 में बॉलीवुड अभिनेता इस नोटिस के खिलाफ सिविल कोर्ट गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस मामले में अभिनेता को कोई राहत नहीं दी गई थी। इसके बाद सिविल कोर्ट ने सोनू सूद को हाईकोर्ट में अपील करने के लिए 3 हफ्ते का समय दिया था। इस अवधि के बीत जाने पर भी वह स्वीकृत योजना के मुताबिक़ परिवर्तन और परिवर्धन को रीस्टोर नहीं कर पाए थे। इसके बाद बीएमसी ने MRTP अधिनियम के तहत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।     

शादी के बाद प्रेमी नहीं बना मुस्लिम तो अपने अब्बू-अम्मी के पास वापस लौटी नाजरा उर्फ़ नाजो

अक्टूबर, 2020 के दौरान उत्तर प्रदेश स्थित औरैया में 19 वर्षीय मुस्लिम युवती हिन्दू युवक के साथ लापता हो गई थी। युवती के परिजनों ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी का अपहरण किया गया। युवती फ़िलहाल अपने घर वापस आ चुकी है और उसने अपहरण के दावे को खारिज कर दिया। दोनों के बीच पिछले काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था, परिजनों के विरोध की वजह से दोनों एक साथ घर छोड़ कर चले गए थे और उन्होंने कथित तौर पर औरैया जिले में आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली।

सब इंस्पेक्टर देवी सहाय वर्मा के मुताबिक़, नाजरा नाम की मुस्लिम युवती ने पुलिस से बातचीत में बताया कि वह अपनी मर्ज़ी से 20 वर्षीय आकाश कुशवाहा के साथ गई थी। बीहड़ क्षेत्र का कुलगाँव निवासी आकाश सेलफोन शॉप चलाता था। आकाश और नाजरा उर्फ नाजो, पुत्री अल्लाउद्दीन, दोनों एक-दूसरे से प्यार करते थे और 21 दिसंबर 2020 को दोनों ने दिल्ली के आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली थी। हालाँकि नाजरा ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान में कहा है कि वह सिर्फ एक स्थिति में आकाश के साथ रहने को तैयार है अगर वह (आकाश) इस्लाम कबूल करता है। 

इस घटना पर औरैया के एडिशनल एसपी कमलेश कुमार दीक्षित ने कहा, “मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयान में मुस्लिम युवती ने कहा है कि वह अपनी मर्ज़ी से हिन्दू युवक के साथ गई थी। युवती ने यह भी कहा है कि अगर हिन्दू युवक इस्लाम कबूल करता है तभी वो उसके साथ रहने के लिए तैयार होगी। अन्यथा वह अपने माता-पिता के साथ ही रहेगी। मुस्लिम युवती सोमवार (4 जनवरी 2020) को औरैया पुलिस थाने में आई थी। इसके बाद बुधवार (6 जनवरी 2020) को वह अपने परिजनों के पास वापस लौट गई थी।” 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सबइंस्पेक्टर देवी सहाय वर्मा ने बताया था कि मुस्लिम युवती के भाई ने 12 अक्टूबर 2020 को इस मामले की शिकायत की थी। शिकायत में उसने आरोप लगाया था कि एक हिन्दू युवक ने उसकी बहन का अपहरण किया है। मुस्लिम युवती के भाई ने यह भी आरोप लगाया था कि उसकी बहन युवक के उकसाने पर अस्सी हज़ार रुपए नगद और जेवर भी ले गई थी। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 366 (विवाह आदि करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना) के तहत मामला दर्ज किया था।

आंध्र प्रदेश: दो दशक पुरानी गणेश की मूर्ति खंडित, पुलिस ने कहा- किसी ने नहीं तोड़ा, ‘अफवाह’ फ़ैलाने वाले गिरफ्तार

आंध्र प्रदेश में हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियां तोड़े जाने का सिलसिला जारी है। ताज़ा मामला विशाखापट्टनम स्थित गोलूगोंडा मंडल के येती गैरमपेटा गाँव का है। यहाँ के रामालयम मंदिर में भगवान गणेश की खंडित मूर्ति पाई गई है। मूर्ति के दो हाथ टूटे हुए थे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। हालाँकि, पुलिस का इस घटना पर कहना है कि मूर्ति को किसी ने नहीं तोड़ा है।     

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इस घटना पर गोलूगोंडा के सब इंस्पेक्टर धनञ्जय नायडू ने किसी भी तरह की साज़िश से इंकार किया है। उन्होंने कहा, “यह एक छोटा सा गाँव है। चार हाथों वाली गणेश जी की मूर्ति दो दशक पुरानी है। मूर्ति के हाथ दो साल पहले टूटे थे और इसे टूटे हाथों के साथ ही इसे मंदिर में रखा गया था। इसकी मरम्मत नहीं की गई। मंदिर के नए पुजारी को कथित तौर पर इस बात की जानकारी नहीं थी। जब आज उन्होंने ये देखा कि मूर्ति के हाथ नहीं हैं तब उन्होंने दूसरों को इस बात की जानकारी दी। हाल फ़िलहाल के हालातों की वजह से युवाओं ने इस ख़बर को आगे बढ़ाया।” 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पुजारी ने मूर्ति के दोनों टूटे हाथ दिखाकर वीडियो बनाया। पुलिस ने इस घटना के पीछे किसी भी तरह के षड्यंत्र की बात को खारिज किया है। गाँव के सरपंच ने भी स्पष्ट किया है कि मामले की जाँच जारी है। पुलिस ने इस मामले में ‘अफ़वाह’ फैलाने को लेकर 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इन चारों पर आईपीसी की धारा 153ए (धर्म नस्ल के आधार पर लोगों में नफ़रत फैलाने की कोशिश) के तहत मामला दर्ज किया है।   

इसके पहले विजयवाड़ा के सीताराम मंदिर में देवी सीता की मूर्ति खंडित पाई गई थी। यह मूर्ति लगभग 40 साल पुरानी बताई गई थी। यह मंदिर विजयवाड़ा के पंडित नेहरू बस कॉम्पलेक्स में स्थित है। इसके ठीक पहले प्रदेश में दो अन्य घटनाएँ हो चुकी थीं। इससे पहले विजयनगरम जिले की एक मंदिर में विराजित भगवान राम की 400 साल पुरानी मूर्ति खंडित कर दी गई थी। इसके बाद राजमुंद्री के विघ्नेश्वर मंदिर में भगवान सुब्रमण्येश्वर स्वामी की मूर्ति क्षतिग्रस्त करने का मामला सामने आया था।

मोहम्मद इजहार ने पिस्तौल दिखाकर नाबालिग क्लासमेट का साथियों के साथ किया गैंगरेप, गिरफ्तार

बिहार के मुजफ्फरपुर में 10वीं क्लास में पढ़ने वाली एक नाबालिग लड़की को बंधक बनाकर पिस्टल की नोक पर सामूहिक बलात्कार के आरोप में 22 वर्षीय मोहम्मद इजहार को पुलिस ने बुधवार (जनवरी 06, 2021) को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने कहा कि पीड़िता की उम्र 16 साल के आसपास है और वह दसवीं कक्षा में पढ़ती है। सामूहिक बलात्कार की यह घटना जिले के सकरा थाना क्षेत्र में गत 4 दिसंबर की है। समाचार पत्र ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने कहा कि मामले की सूचना पुलिस को मंगलवार (जनवरी 05, 2021) रात दी गई, जिसके बाद मुख्य आरोपित मोहम्मद इजहार को गिरफ्तार कर लिया गया।

पीड़िता की शिकायत पर महिला थाने में घटना के संबंध में 5 युवकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने कहा कि दो आरोपितों को नामजद किया गया है, जबकि बाकी तीन अज्ञात हैं।

सकरा एसएचओ रामनाथ प्रसाद ने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान मिशरौलिया गाँव के मोहम्मद इज़हार के रूप में की गई है। उन्होंने कहा, “उन्हें बृहस्पतिवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद जेल भेज दिया जाएगा।”

प्रसाद ने कहा कि एक अन्य आरोपित, जो पीड़िता का क्लासमेट है। इजहार के अलावा, एक अन्य नाबालिग आरोपित भागने में सफल रहा है जिसे पकड़ने के लिए छापे मारे जा रहे हैं। एसएचओ ने कहा कि पीड़िता का बुधवार को मेडिकल परीक्षण कराया गया और न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष उसका बयान दर्ज किया जाएगा। एसएचओ ने कहा कि दोनों मुख्य आरोपित पीड़िता को जानते हैं।

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि घटना के दिन 04 दिसंबर को वह अपनी कोचिंग क्लास के लिए जा रही थी। पुलिस अधिकारीयों के अनुसार, “यह शाम 4 बजे के आसपास हुआ, जब वे जबरन उसे एक पुराने जर्जर घर में ले गए और उसके साथ बलात्कार किया। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह आरोपितों में से अपने सहपाठी और मोहम्मद इज़हार को जानती थी, लेकिन अन्य तीन को नहीं जानती।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता किसी तरह खुद को बचाकर खिड़की के रास्ते भाग कर राष्ट्रीय हाइवे तक पहुँचने में सफल रही। जिसके बाद ग्रामीणों द्वारा सूचना देने पर लड़की के परिजन उसे अपने साथ घर ले गए। इस घटना के बाद मामला महिला थाने ले जाया गया।

बताया जा रहा है कि इससे पहले पीड़िता का परिवार सकरा थाने को इसकी सूचनादे चुका था और घटना के अगले दिन वो एक आरोपित को पकड़ कर पुलिस को सौंप चुके थे। आरोप है कि सकरा पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से न लेते हुए पीड़ित परिवार को फटकार भी लगाई।

सकरा थाने की लापरवाही के बाद ही पीड़िता अपने परिजन के साथ महिला थाने गए और सामूहिक बलात्कार को लेकर आवेदन दिया। शिकायत के आधार पर महिला थाने की थानेदार नीरू कुमारी ने ‘पॉक्सो एक्ट’ में मामला दर्ज किया है।

अमेरिकी संसद में उत्पात के बीच गोलीबारी में एक की मौत: ट्विटर ने ट्रंप पर लगाया 12 घंटे का बैन

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा। चुनावी नतीजों पर अमेरिकी संसद में बुलाई गई बैठक से पहले डोनाल्ड ट्रंप समर्थकों की भीड़ ने व्हाइट हाउस और कैपिटल भवन को घेर लिया। ट्रंप के समर्थकों ने कैपिटल भवन पर जम कर हंगामा किया। वाशिंगटन डीसी स्थित कैपिटल में अमेरिकी कॉन्ग्रेस के लोग बैठते हैं।

विरोध प्रदर्शन के दौरान समर्थकों की पुलिस के साथ झड़प हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, हंगामे के बीच एक नागरिक (महिला) को गोली भी लगी है। जिसकी अस्पताल में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। अमेरिकी राजधानी में हंगामे और हिंसा के बीच कई लोग घायल भी हुए हैं।  

उपद्रव और हंगामे की इन घटनाओं के बाद वाशिंगटन डीसी में कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी नतीजों में धांधली का आरोप भी लगाया। हाल ही में हुए चुनावों के दौरान राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित जो बायडेन ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है। 

उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आह्वान करता हूँ कि वह शपथ पूरी करें, संविधान की रक्षा करें और इस घेराव को बंद ख़त्म करने की माँग उठाएँ। कैपिटल भवन पर जिस तरह का हंगामा हुआ है हम असल में वैसे नहीं हैं। यह क़ानून का पालन नहीं करने वालों की छोटी संख्या है। इस तरह की घटना राजद्रोह है।”

इस घटना पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “वाशिंगटन में हुई दंगों और हिंसा की घटनाओं से निराश हूँ। सत्ता का स्थानान्तरण आदेशानुसार और शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। संवैधानिक प्रक्रिया को इस तरह के असंवैधानिक प्रदर्शन से तबाह नहीं किया जा सकता है।” 

हालाँकि, ट्रंप ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने का निवेदन किया था। उन्होंने कहा, “प्रदर्शन के बीच हिंसा नहीं होनी चाहिए, याद रखें हम एक क़ानून और व्यवस्था की पार्टी हैं।” कैपिटल भवन में हिंसा के दौरान ट्विटर ने डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर एकाउंट भी ब्लॉक कर दिया। ट्विटर ने ‘नागरिक एकता और चेतावनी भरी हिंसात्मक नीतियों’ का हवाला देते हुए ट्रंप का एकाउंट 12 घंटे के लिए बंद किया था। 

ट्विटर ने स्पष्ट किया कि इस तरह के भड़काऊ विचारों को बढ़ावा देने पर एकाउंट स्थाई रूप से रद्द किया जा सकता है। ट्विटर के बाद फेसबुक ने भी डोनाल्ड ट्रंप का वीडियो हटा दिया था। अमेरिकी राजधानी में उपद्रव और हिंसा के दौरान ट्रंप ने समर्थकों को सम्बोधित किया था। जिस पर फेसबुक ने कहा था, “ट्रंप का वीडियो हिंसा और हंगामे को कम करने की बजाय बढ़ाने में मदद कर रहा था।”