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भारतीय सेना की सूचना Pak को… गोधरा का अनस भेजता था पैसे, पूर्व सैनिक करता था जासूसी: एक्शन में यूपी ATS

उत्तर प्रदेश एटीएस ने शुक्रवार (जनवरी 08, 2021) को हापुड़ में छापा मारकर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले भारतीय सेना के एक पूर्व सैनिक सौरभ शर्मा और उसके सहयोगी अनस गितौली को गुजरात के गोधरा से गिरफ्तार किया। इनके पास से एटीएस को टेरर फंडिंग का सबूत भी मिला है। 

अब यूपी एटीएस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को किस तरह की सूचनाएँ भेजी गई हैं। सूचनाओं की संवेदनशीलता के बारे में जानने के लिए दोनों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जाँच भी कराई जा रही है। बता दें कि सौरभ से पूछताछ में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए जासूसी करने के बदले उसे रकम भेजने वाले गोधरा निवासी अनस गितौली की भूमिका सामने आई। 

जिसके बाद गुजरात एटीएस की मदद से अनस को गिरफ्तार कर लिया गया। अनस का बड़ा भाई इमरान गितौली भी आईएसआईएस के लिए काम करता था, वो भी फिलहाल जाँच एजेंसी (एनआईए) की गिरफ्त में है। 

एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार ने बताया कि सौरभ शर्मा के खिलाफ लखनऊ में केस दर्ज किया गया है। सौरभ 2013 में भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। इसके बाद उसने मेडिकल कारणों से मई, 2020 में सेना छोड़ दिया था। इस दौरान उसके बैंक एकाउंट में विदेश से काफी रकम आई।

प्रशांत कुमार ने बताया कि अभी एटीएस की टीमें कई राज्यों में कार्रवाई कर रही हैं। हर संदिग्ध से पूछताछ के साथ ही हर जगह पर छापेमारी जारी रहेगी। सौरभ हापुड़ के बहादुर गढ़ थाना क्षेत्र के बिहुनी गाँव का रहने वाला है। उसने पैसों के लिए सेना से जुड़ी गोपनीय जानकारियाँ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को भेजी थीं। लखनऊ के एटीएस थाने में सौरभ शर्मा और अनस गितौली के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कर इनको गिरफ्तार किया गया है।

सौरभ ने एटीएस के सामने स्वीकार किया है कि वह पैसों के लालच में सेना की गोपनीय सूचनाएँ समय-समय पर व्हाट्सअप के माध्यम से पाकिस्तान की एक महिला खुफिया अधिकारी को भेजता था। सौरभ शर्मा की 2014 में फेसबुक के माध्यम से एक लड़की से दोस्ती हुई थी। लड़की से उसकी काफी दिनों तक बातचीत होती रही।

लड़की ने खुद को सेना की रिपोर्टिंग करने वाली पत्रकार बताया था। वह लड़की के झाँसे में आ गया और लड़की ने सौरभ से सेना की कई गोपनीय जानकारियाँ उससे माँगी और वो देता रहा। कुछ ही दिनों बाद सौरभ पाकिस्तान का जासूस बनकर काम करने लगा। इसके बदले में उसे पैसे भी मिलते रहे।

जो बायडेन को Google व माइक्रोसॉफ्ट से डोनेशन… लेकिन ट्रम्प को बैन: बड़ी कंपनियों की ‘पाक-साफ’ राजनीति

अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बायडेन का शपथग्रहण समारोह बुधवार (जनवरी 20, 2021) को प्रस्तावित है। कई संगठन, प्राइवेट कंपनियाँ और लोग हैं, जिन्होंने 200 डॉलर (14,676 रुपए) से अधिक का डोनेशन इस समारोह के लिए दिया है। इस समारोह का आयोजन कर रही समिति ने इसकी सूची जारी की है। डोनेशन देने वाली कंपनियों में गूगल और माइक्रोसॉफ्ट भी शामिल है, जिन पर राजनीतिक पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं।

हालाँकि, समिति ने अतिरिक्त डिटेल्स जारी नहीं किए हैं और ये नहीं बताया कि किसने कितनी रकम डोनेशन के रूप में दी। क्वालकॉम, केबल प्रोवाइडर कॉम्कास्ट, चार्टर कम्युनिकेशंस, बोईंग और इन्स्युरर एंथम वो कंपनियाँ हैं, जिन्होंने जो बायडेन के शपथग्रहण समारोह के लिए डोनेशन दिया है। अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टीचर्स और यूनाइटेड फ़ूड एंड कमर्शियल वर्कर्स ने भी समारोह के लिए दान दिया है।

पूर्व सीनेटर बार्बरा बोक्सेरोफ़ और गायिका बारब्रा स्ट्रेसैंड भी उन हस्तियों में शामिल हैं, जिन्होंने डोनेशन दिया। अप्रैल 15 को फ़ेडरल कमीशन के सामने इन सभी की सूची सौंपी जाएगी। कैपिटल हिल हिंसा के बाद इस शपथग्रहण समारोह के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जो बायडेन और कमला हैरिस ने कहा है कि लोग इस दिन घर में ही रहें और इस आयोजन को टीवी पर देखें। बायडेन के सम्बोधन को लेकर भी तैयारियाँ की जा रही हैं।

गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के डोनेशन देने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जहाँ एक तरफ गूगल ने ‘Parler’ एप को अपने प्ले स्टोर से हटा दिया है और उसे ‘हिंसा को बढ़ावा देने वाले कंटेंट्स’ हटाने को कहा है क्योंकि ट्विटर-फेसबुक पर प्रतिबंधित होने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने वहाँ अकाउंट बनाया था और उनके समर्थक भी वहाँ बड़ी संख्या में हैं, वहीं दूसरी तरफ जो बायडेन के शपथग्रहण समारोह में उसने डोनेशन दिया है।

एक तरफ ये कंपनियाँ अपने प्लेटफॉर्म्स पर विचारधारा के आधार पर ये तय करने में लगी हैं कि किसके हैंडल को प्रतिबंधित किया जाएगा और किसके नहीं, वहीं दूसरी तरफ वो एक खास राजनीतिक विचारधारा और उस पक्ष के नेताओं के प्रति अपनी वफादारी दिखाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहीं। भारत-अमेरिका सहित कई देशों में दक्षिणपंथियों ने सोशल मीडिया पर भेदभाव की शिकायत की है और ‘शैडो बैन’ किए जाने की बात कही।

ये शुरू भी हो गया है। विदेशी तकनीकी कंपनियाँ अब भारत में ये तय करने लगी हैं कि किसी दंगे में पीड़ित हिन्दुओं को उनका पक्ष रखने की अनुमति देना है या नहीं, या फिर जम्मू कश्मीर को लेकर भारतीय राष्ट्रवादियों को जगह देनी है या नहीं। आज आम लोगों और छोटे सेलेब्स के साथ खेल रहा ट्विटर या फेसबुक कल को बड़े नेताओं तक पहुँच सकता है और चुनाव से पहले कंटेंट्स के माध्यम से इसे प्रभावित कर सकता है।

‘मैं पूजा हूँ, आदिल खान है मेरी मौत का जिम्मेदार’ – बब्लू बन फँसाया प्रेमजाल में, इस्लाम कबूल नहीं करने पर दूसरे से सगाई

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लव/ग्रूमिंग जिहाद का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 26 वर्षीय दलित युवती ने शुक्रवार (8 जनवरी 2021) को आत्महत्या कर ली। यह कदम उठाने से पहले उसने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें उसने अपनी मौत के लिए आदिल खान नाम के युवक को ज़िम्मेदार ठहराया है। 

सुसाइड नोट में आदिल खान को ठहराया ज़िम्मेदार 

भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र में रहने वाली युवती अपने कमरे में मृत पाई गई थी। पुलिस मामले की जानकारी मिलते ही घटनास्थल पर पहुँची और वहाँ से एक सुसाइड नोट बरामद किया। जिसमें युवती ने आदिल खान को अपनी मौत के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था। उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा था, “मेरा नाम पूजा है और मैं आत्महत्या करने जा रही हूँ। खलीक खान का बेटा आदिल खान मेरी मौत का ज़िम्मेदार है।” 

इसके बाद युवती के परिजनों ने आदिल खान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उस पर सम्बंधित धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया है। इसमें आत्महत्या के लिए उकसाना भी शामिल है। 

दोस्ती करने के लिए आदिल खान ने बदला था अपना नाम 

मृतक युवती के पिता ने आरोप लगाया है कि आदिल ने हिन्दू बन कर उनकी बेटी को अपने झाँसे में लिया। आरोपित ने उनकी बेटी से दोस्ती करने के लिए अपना नाम बबलू बताया। युवती के पिता ने अपने बयान में कहा, “मेरी बेटी को जब उसके झूठ के बारे में पता चला, तब उसने दूरी बनाने का प्रयास किया। बदले में आदिल ने उसे मौखिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।” 

दोनों पिछले 8 सालों से दोस्त थे। युवती के भाई ने बताया कि शुक्रवार की शाम पूजा अपने कमरे में गई और उसने अपना कमरा बंद कर लिया। उस वक्त घर में सभी लोग मौजूद थे। जब परिवार वालों के आवाज़ देने पर भी युवती ने दरवाज़ा नहीं खोला तब उन्होंने दरवाज़ा तोड़ दिया। इसके बाद उन्हें जो नज़र आया, उसे देख कर उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई, पूजा अपने कमरे में फंदे पर लटकी हुई थी। 

पूजा के भाई ने यह भी बताया कि आदिल उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाता था। जब उसकी बहन ने ऐसा करने से मना कर दिया तब आदिल ने दूसरी युवती के साथ सगाई कर ली। इस बात से निराश होकर पूजा ने आत्महत्या कर ली। 

युवती के परिजनों की माँग है कि आदिल खान को गिरफ्तार करके उस पर हाल ही में लाए गए धर्मांतरण (लव जिहाद) विरोधी क़ानून के अंतर्गत कार्रवाई की जाए। हालाँकि पुलिस ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि इस प्रकरण में जबरन धर्मांतरण का मामला दर्ज होगा या नहीं। आरोपित पर आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया चुका है। 

जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध मध्य प्रदेश सरकार का क़ानून 

मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शनिवार (9 जनवरी 2021) को प्रदेश सरकार द्वारा पारित किए गए जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध क़ानून को अनुमति प्रदान की थी। यह क़ानून प्रदेश के भीतर धोखे से किए जाने वाली धर्मांतरण की घटनाओं को रोकने के लिए लाया गया है। इस क़ानून के दायरे में ऐसे मामले भी आएँगे जिनमें धर्मांतरण को शादी का आधार बना दिया जाता है। 

इस क़ानून के तहत दोषी पाए जाने वालों या इसकी साज़िश में शामिल लोगों को 10 साल की कैद या जुर्माना देना पड़ सकता है। ऐसा ही एक क़ानून उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी लेकर आई है। पिछले कुछ समय में लव/ग्रूमिंग जिहाद के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है, उन मामलों को रोकने के लिए धर्मांतरण विरोधी क़ानून बनाने की माँग उठ रही थी। पिछले साल उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित एक ही इलाके में लव/ग्रूमिंग जिहाद के कई मामले सामने आए थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश ने उस मामले की जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया था।   

7 राज्यों में फैला बर्ड फ्लू संक्रमण: रोज मर रहे हैं हजारों पक्षी, तबाह हो सकती है पॉल्ट्री इंडस्ट्री!

भारत में बर्ड फ्लू की समस्या लगातार सिर उठाते जा रही है और अब उत्तर प्रदेश ऐसा 7वाँ राज्य बन गया है, हाल के दिनों में जहाँ इसका असर देखा गया। कानपुर चिड़ियाघर को सील कर दिया गया है, क्योंकि यहाँ बर्ड फ्लू के वायरस मिले हैं। 4 पक्षियों की मौत के बाद उनकी जाँच की गई थी, जिसके बाद ये पता चला। चिड़ियाघर के आस-पास के इलाकों को रेड जोन घोषित कर दिया गया है। कमिश्नर राजशेखर ने इसका आदेश दिया है।

प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है और आस-पास के लोगों को भी इस बारे में सूचित कर दिया गया है। शनिवार (जनवरी 9, 2021) में यूपी में ये मामला सामने आया। एवियन इन्फ्लूएंजा के हरियाणा और दिल्ली में पाँव पसारने के बाद दिल्ली भी वीक जोन में आ गया है। देश की राजधानी में भी कौवों के मरने की संख्या में वृद्धि होती जा रही है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि गाजीपुर पॉल्ट्री फ़ार्म पर 10 दिनों के लिए ताला जड़ दिया गया है।

साथ ही जिंदा पक्षियों के आयात को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। दिल्ली के हर जिले में इस पर निगरानी रखने के लिए सर्विलांस टीमें भी गठित की गई हैं। पशु डॉक्टरों को सर्वे के लिए लगाया गया है। संजय झील, भलस्वा झील और पॉल्ट्री मार्केट में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एक नंबर 23890318 भी जारी किया गया है, जहाँ इससे सम्बंधित सूचनाएँ दी जा सकती हैं। केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गुजरात पहले से ही इस समस्या से जूझ रहा है।

हिमाचल प्रदेश के पोंग क्षेत्र में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है, जहाँ हर वर्ष प्रवासी पक्षी आते हैं। 3500 प्रवासी पक्षियों को मार दिया गया है। राजस्थान में तो सवाई माधोपुर, पाली, दौसा और जैसलमेर सहित 11 जिले इसकी चपेट में आ गए हैं। उनमें बर्ड फ्लू का H-5 स्ट्रेन पाया गया है। हालाँकि, बर्ड फ्लू के अधिकतर स्ट्रेन मनुष्यों के लिए खतरनाक नहीं हैं लेकिन संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने से उन्हें बीमारी हो सकती है।

शनिवार यानी 9 जनवरी को पूरे देश में 1200 पक्षी मृत पाए गए। इनमें से 900 तो अकेले महाराष्ट्र के एक पॉल्ट्री फार्म में मृत पाए गए। दिल्ली से सैम्पलों को टेस्टिंग के लिए जालंधर भेजा गया है। दिल्ली में मरे पाए गए बत्तखों के सैम्पल्स में बर्ड फ्लू मिलने की आशंका है, जिनके सैम्पल्स टेस्टिंग के लिए भेजे गए हैं। राजस्थान में अब तक 2500 से अधिक पक्षियों की मौत हो चुकी है। इनमें 257 कौवे और 29 कबूतर शामिल हैं। ये सब तब हो रहा है, जब देश अभी-अभी कोरोना संकट से बाहर निकल रहा है।

मध्य प्रदेश में भी 1100 कौवों की मौत हुई है और वहाँ के 11 जिलों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हो गई है। मालवा जिले के एक पॉल्ट्री फार्म में केस मिलने के बाद उसे 7 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। नीमच और इंदौर के फार्म्स के लिए भी यही निर्णय लिया गया। इंदौर के एक आवासीय इलाके में दिसंबर 29, 2020 को ही 50 कौवे मृत मिले थे, जिनके सैम्पल्स के जाँच के बाद उनमें से 2 में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई।

बर्ड फ्लू अधिकतर पक्षियों में पाया जाता है लेकिन मनुष्य व अन्य जानवरों को बीमार करने की भी क्षमता इसमें है। इससे भारत के पॉल्ट्री इंडस्ट्री खतरे में पड़ गई है। इस वायरस का जन्म भी 1996 में चीन में ही हुआ था, जहाँ इसका पहला केस पाया गया था। चीन में 1997 में एक पॉल्ट्री कर्मचारी भी H5N1 की चपेट में आ गया था, जो इस तरह का पहला मामला था। इसके ह्यूमन टू ह्यूमन संक्रमण की अब तक कोई बात पता नहीं चली है।

ये वायरस जैसे ही 70 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान में जाता है, ख़त्म हो जाता है। दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के विपरीत भारत में अण्डों और पक्षियों के माँस को काफी अच्छे से आग पे पका कर ही बनाया जाता है, जिससे ऐसे वायरस 100 डिग्री सेल्सियस से अधिक के तापमान में मर जाते हैं। भारत में हर महीने ऐसे 30 करोड़ पक्षी और 900 करोड़ अंडे खाए जाते हैं। कोरोना के शुरुआत में इंडस्ट्री को 2 महीनों में ही 100 करोड़ डॉलर (7338 करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ था।

पाकिस्तान में ब्लैकआउट: सर्जिकल स्ट्राइक, इमरान खान के अलावा लोग केजरीवाल को क्यों कर रहे याद?

शनिवार (9 जनवरी 2021) की देर रात हमारे पड़ोसी मुल्क के तमाम शहरों में अँधेरा छा गया। देर रात अचानक कराची, लाहौर, रावलपिंडी, इस्लामाबाद और मुल्तान जैसे कई बड़े पाकिस्तानी शहरों में लाईट गुल हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स में इस ब्लैकआउट की मुख्य वजह पावर वितरण प्रणाली में गड़बड़ी बताई जा रही है। खैर वजह कुछ भी हो, इंटरनेट की एक बड़ी आबादी अब वजह के पीछे नहीं भागती है बल्कि मीम बनाने लगती है।

इसी कड़ी में नेटिज़न्स ने पाकिस्तान के घुप्प अँधेरे में डूब जाने पर खूब मीम ‘क्रिएट’ किया। जनता इतनी रचनात्मक हो गई कि ब्लैकआउट और सर्जिकल स्ट्राइक के बीच समानताएँ खोजने लगी। जिसमें कुछ मीम या कुछ रिएक्शन ऐसे थे, जिन पर हर सूरत में गौर किया जाना चाहिए। 

एक व्यक्ति ने लिखा, “ब्लैकआउट भी एक तरह की सर्जिकल स्ट्राइक है। क्या आप मोदी जी का मास्टरस्ट्रोक देख सकते हैं? कैसे देख पाएँगे। वहाँ पहले से ही अँधेरा है।

एक ट्विटर यूज़र ने तो सीधे लिख दिया कि भारत के लिए बिलकुल सही समय है एक और सर्जिकल स्ट्राइक करने का। पाकिस्तान में पूरी तरह ब्लैकआउट है। 

एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, “पावर फेलियर होने पर ‘पाक सार’ ज़मीन की भोली जनता इस चिंता में पड़ जाती है कि कहीं भारत ने हमला तो नहीं कर दिया। इसका कारण एक ही है, ‘सर्जिकल स्ट्राइक’। हमने भले कौवा भी न मारा हो लेकिन जनता (पाकिस्तान की) तक संदेश पहुँच गया है।” 

इसी ट्वीट के अगले हिस्से में लिखा गया है कि जिन्हें ऐसा लगता है कि सर्जिकल स्ट्राइक सफल नहीं हुई थी, उन्हें वाकई कुछ नहीं पता है।

एक यूज़र ने लिखा, “इम्मू मियाँ अपने ही पोर्किस्तान को सर्जिकल स्ट्राइक करने के लिए निकल पड़े। ब्लैकआउट में मिले अवसर” 

एक यूज़र ने बताया कि ब्लैकआउट होने के बाद पाकिस्तानी सेना सर्जिकल स्ट्राइक के डर से अलर्ट हो चुकी है। 

एक यूज़र ने तो भारत के एक नेता (केजरीवाल) को ब्लैकआउट की दिक्कत सही करने के लिए पाकिस्तान भेज दिया। 

इस ट्वीट पर कुछ कहा नहीं जा सकता है और न ही इसकी व्याख्या की जा सकती है। इसे केवल महसूस किया जा सकता है, वह भी सिर्फ ‘पाकिस्तानी एयर फ़ोर्स द्वारा’।   

इसी बीच पाकिस्तान से एक और बड़ी ख़बर सामने आई है, अफ़सोस की बात ये है कि उस ख़बर में भी पाकिस्तान का हासिल फजीहत ही है। यह ख़बर पाकिस्तान पर की गई भारत की कार्रवाई का पुख्ता सबूत भी है।

पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक आगा हिलाली ने एक टीवी शो में स्वीकार किया है कि 26 फरवरी 2019 को बालाकोट पर भारत द्वारा की गई एयर स्ट्राइक में 300 आतंकी मारे गए थे। ये पूर्व राजनयिक टीवी चर्चाओं में नियमित रूप से पाकिस्तानी सेना का पक्ष रखते हैं। यह इमरान खान के दावे से बिलकुल विपरीत है, जिसमें उनका कहना था कि एयर स्ट्राइक में किसी की मृत्यु नहीं हुई थी।

‘सिराज को कहा बंदर, बुमराह पर भी अभद्र टिप्पणी’: सिडनी में नस्लीय टिप्पणी के बाद निकाले गए 6 दर्शक

न्यू साउथ वेल्स की राजधानी सिडनी में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रहे तीसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन के खेल के दौरान रविवार (जनवरी 10, 2021) को लगातार दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों पर नस्लीय टिप्पणी की गई है, जिसके बाद पुलिस ने 6 दर्शकों को स्टेडियम से निकाल बाहर किया। मोहम्मद सिराज ने इसकी शिकायत की। इससे 1 दिन पहले भी उन्होंने और जसप्रीत बुमराह ने दर्शक दीर्घा से नस्लीय टिप्पणी की शिकायत की थी।

भारतीय तेज़ गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने इसकी शिकायत कप्तान अजिंक्य रहाणे से की, जिन्होंने फील्ड अंपायर पॉल राफेल के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई। अंपायर ने खिलाड़ियों की बात को टीवी अम्पायर और मैच रेफरी तक पहुँचाई। तब जाकर कहीं पुलिस को बुलाया गया और नस्लीय टिप्पणी करने वाले दर्शकों को बाहर किया गया। कुछ मिनट तक खेल रुकने के बाद इसे दोबारा शुरू किया गया। BCCI पहले ही इस सम्बन्ध में CA के समक्ष शिकायत दर्ज करा चुका है।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए कहा कि नस्लीय टिप्पणियों को लेकर उनकी जीरो टॉलरेंस की नीति है और वो इस प्रकार की घटना को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। मैच के तीसरे दिन भी इसी तरह की अभद्र टिप्पणी की गई, जिसके बाद BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) ने मैच रेफरी और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई ओपनर डेविड बून से इसकी शिकायत की। मोहम्मद सिराज को एक दर्शक ने ‘मंकी (बंदर)’ कहा था।

भारतीय खिलाड़ियों ने सिक्यॉरिटी अधिकारियों और अंपायर्स की मौजूदगी में इस मामले में बैठक भी की। भारत के पूर्व खिलाड़ियों पार्थिव पटेल और प्रज्ञान ओझा से लेकर ऑस्ट्रेलिया के शेन वॉर्न और माइक हसी ने भी इस घटना पर आपत्ति जताते हुए ऐसे दर्शकों पर लाइफटाइम प्रतिबंध लगाने की वकालत की है। याद हो कि 2008 में इसी तरह एंड्र्यू सायमंड्स और हरभजन सिंह के बीच झड़प हो गई थी।

प्रज्ञान ओझा ने कहा है कि BCCI को ये मुद्दा लेकर ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) के सामने इसकी शिकायत दर्ज करा के CA को सख्त संदेश देना चाहिए। टिप्पणी करने वाले दर्शक नशे में पाए गए थे, जिसके बाद सुरक्षा अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। माइक हसी ने कहा कि पिछले 1 वर्ष से दुनिया जिस दौर से गुजर रही है, उस बीच ऐसी घटना कलंक की तरह है। चौथे टेस्ट मैच को लेकर पहले ही विवाद चल रहा है।

इससे पहले ऑस्ट्रेलिया में भारतीय क्रिकेटरों पर कोरोना प्रोटोकॉल तोड़ कर रेस्टॉरेंट में भोजन करने का आरोप लगा था, जिसे BCCI ने नकार दिया था। ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन टीम इंडिया के क्रिकेटरों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगा रहा है, जिससे वो नाराज़ हैं। ब्रिस्बेन में चौथे और अंतिम टेस्ट मैच से पहले सख्त क्वारंटाइन थोपे जाने से भारतीय क्रिकेटर आक्रोशित हैं। आरोप लगे थे कि तीसरे टेस्ट मैच से पहले भारतीय टीम को अस्थिर करने के लिए ये सब किया जा रहा है।

अधिकारियों को बनाया चपरासी और चौकीदार, SDM को तहसीलदार: भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन में CM योगी

दंगाइयों से सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की वसूली हो या फिर माफियाओं की संपत्ति ध्वस्त करना हो, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विभिन्न मुद्दों पर ऐसे-ऐसे कड़े फैसले लेते हैं, जो मिसाल बनते हैं और बाद में अन्य राज्य भी उसका अनुकरण करते हैं। अब उन्होंने भ्रष्टाचारी अधिकारियों पर कार्रवाई की। यूपी में एक SDM लेवल के अधिकारी को डिमोट कर तहसीलदार बनाया गया था, वहीं अब एक अन्य अधिकारी को चपरासी बना दिया गया है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए यूपी सरकार ने प्रदेश के सूचना विभाग में तैनात 4 अपर सूचना अधिकारियों को डिमोट कर के उन्हें चपरासी, चौकीदार और सिनेमा ऑपरेटर और प्रचार सहायक का पद दे दिया गया है। नवंबर 2014 में जब यूपी में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार चल रही थी, तब इन सबका गलत ढंग से प्रमोशन किया गया था। इन्हें नियम विरुद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया था।

अब इन सभी को अपने-अपने मूल पदों पर वापस भेज दिया गया है। क्षेत्रीय प्रचार संगठन के तहत चारों कर्मचारी सूचना कार्यालय में तैनात थे, जहाँ ये चारों कर्मचारी पदोन्नति के बाद अधिकारी बना दिए गए थे। सूचना निदेशक शिशिर द्वारा जारी किए गए आदेशानुसार बरेली अपर जिला सूचना अधिकारी नरसिंह को डिमोट कर चपरासी बनाया गया है। वहीं मथुरा अपर जिला सूचना अधिकारी विनोद कुमार शर्मा को पदावनत कर सिनेमा ऑपरेटर कम प्रचार सहायक का पद दे दिया गया है।

वहीं बाकी बचे 2 अधिकारियों में से भदोही (संत रविदासनगर) अपर जिला सूचना अधिकारी अनिल कुमार सिंह को डिमोट कर के सिनेमा ऑपरेटर कम प्रचार सहायक का पद थमा दिया गया है। फिरोजाबाद अपर जिला सूचना अधिकारी दयाशंकर को तो चौकीदार के पद पर बिठा दिया गया। ये आदेश बुधवार (जनवरी 6, 2021) से तत्काल प्रभाव से लागू किया गया। इन अधिकारियों को अपना मूल पद संभाल कर मुख्यालय को रिपोर्ट करना है।

इससे पहले नवंबर 2020 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया था, “योगी आदित्यनाथ ने तहसील सरधना, मेरठ में नियमविरुद्ध ढंग से विनिमय की गई पशुचर श्रेणी की भूमि के संबंध में शासकीय हितों की उपेक्षा कर अमलदरामद का आदेश पारित करने के दोषी तत्कालीन SDM, सरधना, मेरठ को SDM पद से तहसीलदार के पद पर अवनति करने का आदेश दिया है। दोषी तत्कालीन उपजिलाधिकारी, सरधना, जनपद मेरठ, संप्रति उपजिलाधिकारी मुजफ्फरनगर हैं।”

‘120 मिलियन व्यूज, 60 लाख लाइक्स’: ‘K.G.F: Chapter 2’ के टीजर पर रिकॉर्ड्स की बरसात, हॉलीवुड भी पीछे

बड़ी कमर्शियल सफलता, समीक्षकों की सराहना, अवॉर्ड्स की बरसात और देश-विदेश में ख्याति – किसी फिल्म को ये सारी चीजें एक साथ नसीब होना बहुत बड़ी बात है। जो काम हिंदी सिनेमा के लिए ‘ग़दर (2001)’, तमिल के लिए रोबोट (2010), तेलुगु के लिए बाहुबली 2 (2017) और मलयालम के लिए पुलीमुरुगन (2016) ने किया, कन्नड़ सिनेमा के लिए वही मौका ‘K.G.F: Chapter 1’ के रूप में 2018 में आया। अब ‘K.G.F: Chapter 2’ का टीजर धमाल मचा रहा है।

कर्नाटक में ‘रॉकिंग स्टार’ कहे जाने वाले यश इस फिल्म सीरीज के मुख्य अभिनेता हैं। फिल्म के पहले भाग ने दुनिया भर में 250 करोड़ रुपए की कमाई कर के खलबली मचा दी थी और पिछड़ते कन्नड़ सिनेमा को फिर से जीवन दे दिया था। अब फिल्म के दूसरे भाग के टीजर ने पहले 24 घंटे में यूट्यूब पर दुनिया में 5वाँ सबसे ज्यादा देखे जाने वाले टीजर का रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही लाइक्स के मामले में पहले 24 घंटे में ये दुनिया भर में तीसरे स्थान पर है।

तेलुगु, तमिल, हिंदी और मलयालम भाषाओं में भी फिल्म को डब किया जाएगा। 100 करोड़ रुपए के बजट के साथ ये कन्नड़ सिनेमा की अब तक की सबसे महँगी फिल्म है। ‘K.G.F: Chapter 2’ के टीजर के डायलॉग्स भी सोशल मीडिया पर खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। साथ ही मुख्य विलेन के रूप में संजय दत्त की एंट्री ने लोगों का उत्साह बढ़ा दिया है। रवीना टंडन भी राजनेत्री की भूमिका में दिखाई देने वाली हैं।

अगर आपने ‘K.G.F: Chapter 1’ देखी है तो इसका किरदारों से परिचित ही होंगे। जहाँ यश ने रॉकी नाम के गैंगस्टर का किरदार निभाया था, जिसे अपनी दिवंगत माँ को दिया वादा निभाना है, वहीं सुर्यवर्द्धन ‘कोलर गोल्ड फ़ील्ड्स’ के मालिक का नाम था। ये किरदार रमेश इंद्रा ने निभाया था। सूर्यवर्द्धन का बेटा गरुड़ा मुख्य विलेन था, जिसका किरदार रामचंद्र राजू ने अदा किया था। दिलचस्प बात ये है कि रामचंद्र इस फिल्म में रोल पाने से पहले पहले यश के बॉडीगार्ड हुआ करते थे।

‘K.G.F: Chapter 2’ का टीजर बना रहा है यूट्यूब रिकॉर्ड्स

सूर्यवर्द्धन का भाई अधीरा अगले भाग का मुख्य विलेन है, जिस किरदार में संजय दत्त दिखेंगे। टीजर की रिलीज के साथ ही यश भारत में ट्विटर ट्रेंड के मामले में नंबर-1 पर आ गए थे। खबर लिखे जाने तक लगभग 12 करोड़ लोगों ने इसे यूट्यूब पर देखा था और 60 लाख लोगों ने लाइक किया था। विशेषज्ञ अंग्रेजी डायलॉग्स के साथ इसे रिलीज करने को भी निर्माताओं का मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं, क्योंकि इससे पैन-इंडिया लोकप्रियता में वृद्धि हुई है। ये नंबर्स कई बड़े हॉलीवुड फिल्मों से भी ज्यादा हैं।

इसके उलट हाल के दिनों में आई कई बॉलीवुड फिल्मों और उनके ट्रेलरों को दर्शकों ने नकार दिया। जहाँ महेश भट्ट की ‘सड़क 2’ पिट गई, वहीं डेविड धवन की ‘कुली नंबर 1’ की जम कर आलोचना हुई। फिल्मों में हिन्दूफ़ोबिक नैरेटिव गढ़ने के कारण कई लोगों ने अब दक्षिण भारत की फिल्मों का रुख किया है। बॉलीवुड के कंटेंट्स में हिन्दू धर्म और साधु-संतों का मजाक बनाए जाने और नकारात्मक छवि दिखाए जाने से लोग नाराज़ हैं।

‘जामिया से वाल्मीकि समुदाय के 23 कर्मचारियों को निकाला, खाने तक के पैसे नहीं’: वीडियो में भावुक अपील

साउथ-ईस्ट दिल्ली के ओखला में स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर से विवादों में है। राजेश कुमार वाल्मीकि नामक एक व्यक्ति ने वीडियो बना कर दावा किया है कि यूनिवर्सिटी से वाल्मीकि समुदाय के 23 स्वच्छता कर्मचारियों (Sanitation Workers) को निकाल दिया गया है। उन्होंने स्वच्छता दफ्तर से वीडियो बनाते हुए कहा कि उन्हें अधिकारियों ने बताया है कि मंत्रालय से 132 स्वच्छता कर्मचारियों में से 23 को निकालने का आदेश आया है।

उन्होंने कहा, “केवल हमारे वाल्मीकि समाज के ही सारे कर्मचारियों को हटाया गया है। हम 15-20 वर्षों से जामिया में काम कर रहे हैं। कोरोना के कठिन काल में भी हमने पूरी मेहनत से यहाँ पर काम किया है। नालियों की सफाई से लेकर सब कुछ किया। लेकिन, जब हटाने की बारी आती है तो सबसे पहला नाम हम लोगों का है यहाँ। हमारे साथ यहाँ भेदभाव हो रहा है। जामिया में हम बहुत परेशान हैं।”

वाल्मीकि समुदाय से आने वाले राजेश ने आगे कहा कि वो लोग यहाँ के ‘Sweeper Man’ हैं उन्हें झाड़ू लगाने का काम दिया गया है। उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बताया कि वो खुद 10वीं कक्षा उत्तीर्ण हैं और कई कर्मचारी ऐसे भी हैं, जिन्होंने बारहवीं तक की पढ़ाई कर रखी है। उन्होंने वीडियो में ये लिस्ट भी दिखाई और कहा कि उनके वरिष्ठ अधिकारी कह रहे हैं कि ये सूची मानव संसाधन मंत्रालय से आई है।

राजेश ने दावा किया कि विभाग में 16 आदमी केवल चपरासी-प्यून के पदों पर बैठे हुए हैं। साथ ही कहा कि मलेरिया की रोकथाम के लिए भी कर्मचारी हैं, जिनका कुछ ही महीनों का सीजनल काम ही होता है। राजेश ने कहा, “लेकिन हमलोग यहाँ नियमित हैं। हमें 3-4 महीनों से वेतन नहीं मिला है। हम में से कई किराए के घर में रहते हैं। बच्चों के खाने तक के पैसे नहीं हैं। फोन कैसे रिचार्ज कराएँ? ये है जामिया का हाल।”

बता दें कि जामिया का विवादों से पुराना नाता रहा है। जामिया मिलिया इस्लामिया की आधारशिला मौलाना महमूद हसम ने रखी थी। लेकिन इसके संस्थापकों में मोहम्मद अली जौहर का भी नाम शामिल था, जिसके बारे में कहा जाता है कि उनका सपना हिंदुस्तान को दारुल इस्लाम बनाना था और जिसने 1923 में भरी सभा में खड़े होकर सबके बीच वंदे मातरम का विरोध कर दिया था। CAA विरोधी प्रदर्शनों और हिंसा में भी जामिया के छात्रों का रोल सामने आया था।

‘2000+50 मुस्लिमों के हत्यारे PM मोदी का ट्विटर हैंडल सस्पेंड करो’ – कट्टरपंथी इस्लामी और वामपंथियों ने चलाया ट्रेंड

अमेरिका में जिस तरह से फेसबुक, ट्विटर और गूगल ने वहाँ के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ कार्रवाई की है, उसके बाद से ही वामपंथियों के एक धड़े में खासा उत्साह है। अब वो चाहते हैं कि ट्विटर इसके बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हैंडल को हमेशा के लिए सस्पेंड कर दे। ऑस्ट्रेलिया के लेखक सीजे वर्लमन (CJ Werleman) से लेकर प्रोफेसर खालिद बेयदौन जैसों ने ‘मोदी नेक्स्ट’ ट्वीट के साथ जैक से पीएम मोदी का हैंडल सस्पेंड करने की माँग की।

दुनिया भर में मुस्लिमों पर तथाकथित अत्याचार को लेकर आवाज़ उठाने का दावा करने वाले सीजे वर्लमन ने लिखा कि नरेंद्र मोदी को ट्विटर से प्रतिबंधित करना एकदम जायज है। उन्होंने दावा किया कि 2002 में मोदी ने ही गुजरात में 2000 मुस्लिमों के नरसंहार के लिए भड़काया था। साथ ही दिल्ली में 2019 में ’50 मुस्लिमों की हत्या’ का आरोप भी उन पर मढ़ा। उन्होंने पीएम मोदी पर भारतीय समाज को कट्टरवादी बनाने का आरोप लगाया।

उधर प्रोफेसर खालिद बेयदौन ने लिखा कि ट्विटर के CEO जैक डॉर्सी को अब नरेंद्र मोदी का हैंडल सस्पेंड कर देना चाहिए, क्योंकि ये तार्किक है और अगला कदम यही उठाया जाना चाहिए। तथाकथित इस्लामोफोबिया को लेकर रिसर्च करने वाले प्रोफेसर के अनुसार, किसी देश के मुखिया द्वारा सत्तावादी ढंग से लोगों को भड़काने का काम सिर्फ अमेरिका में ही नहीं हो रहा है। उन्होंने ‘मोदी नेक्स्ट’ ट्वीट करने की भी अपील की।

इसी तरह कई मुस्लिमों ने भी ऐसा ट्रेंड चलाया। राना सरफराज नामक यूजर ने ट्विटर को ‘मानवता और शांति’ के लिए ऐसा करने की अपील की। हामजा ज़फर ने आरोप लगाया कि भारत में पीएम मोदी और ‘RSS के शासन’ के अंतर्गत मुस्लिमों के खिलाफ अत्याचार में वृद्धि हुई है। उसने जम्मू कश्मीर के लोगों और भारतीय मुस्लिमों के लिए पीएम मोदी को खतरा करार दिया। रमील खान और राहील शरीफ नामक यूजर ने भी इससे सहमति जताई।

तंजीम मोहम्मद नामक वामपंथी ने आइडिया दिया कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी को बैन कर दिया जाए। हालाँकि, इस दौरान भारत के कई लोग प्रधानमंत्री के समर्थन में भी आए और कहा कि जिस दिन ट्विटर ने नरेंद्र मोदी के हैंडल को सस्पेंड किया या उनके हैंडल के साथ कुछ भी किया, तो वो तुरंत ही इस प्लेटफॉर्म को छोड़ देंगे। कुछ लोगों ने कहा कि ऐसी स्थिति में हिन्दू ट्विटर का संपूर्ण बहिष्कार करेंगे।

बता दें कि ट्विटर और फेसबुक के बाद गूगल और एप्पल ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर शिकंजा कसा है। गूगल ने सोशल नेटवर्किंग एप्लीकेशन पार्लर (Parler) को प्ले स्टोर से हटा दिया और आरोप लगाया कि वो भड़काऊ कंटेंट्स को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने में असफल रहा। एप्पल ने भी नोटिस थमाया। डोनाल्ड ट्रम्प और उनके समर्थकों ने भी सोशल मीडिया से प्रतिबंधित किए जाने के बाद ‘Parler’ को ही अपनी बात रखने का जरिया बनाया था।