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पत्थरबाजों की संपत्ति से होगी अब नुकसान की भरपाई: MP में शिवराज सरकार ने नया कानून बनाने का किया फैसला

मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार ने राज्य में पत्थरबाजों के ख़िलाफ़ सख्त कानून बनाने का निर्णय कर लिया है। राज्य सरकार ने कहा है कि पत्थरबाजी सामान्य अपराध नहीं है। ऐसा करने वाले समाज के दुश्मन हैं और ऐसे लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री चौहान ने रविवार (जनवरी 3, 2021) को मीडिया से बात करते हुए इसका जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सजा के लिए कड़े कानून बना रहे हैं। इसमें उपद्रवियों के लिए सजा का प्रावधान होगा, साथ ही आरोपित को पीड़ित व्यक्ति को क्षतिपूर्ति भी देनी होगी।

बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन, इंदौर और मंदसौर जैसे इलाकों में आपसी झड़प और पत्थरबाजी की घटनाओं को देखने के बाद यह निर्णय लिया । उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी कोई साधारण अपराध नहीं है। इससे लोगों की जान भी जा सकती है, इससे भय और आतंक का माहौल पैदा होता है, भगदड़ मचती है, अव्यवस्थाएँ होती हैं। वह बोले कि इस तरह के अपराधी साधारण अपराधी नहीं होते हैं और इन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। इनके ख़िलाफ़ अभी तक तो मामूली सी कार्रवाई होती थी, लेकिन अब कड़ी सजा का प्रावधान करने के लिए कानून बनेगा।

वह बोले कि पथराव करने वाले अक्सर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और आगजनी करने का भी सहारा लेते हैं। यहाँ तक कि घरों और दुकानों को भी जलाते हैं। सीएम ने कहा, “लोगों को लोकतंत्र में शांति से अपने मुद्दों को उठाने का अधिकार है, लेकिन किसी को भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की स्वतंत्रता नहीं है।”

मुख्यमंत्री ने कहा है कि इन नए कानून के अंतर्गत अगर जरूरत पड़ी तो आरोपितों की संपत्ति को नीलाम करवा कर भी क्षति की भरपाई होगी। इस नए कानून के निर्माण के लिए निर्देश दे दिए गए हैं। जल्द ही इन पर काम शुरू होगा।

गौरतलब है कि अभी हाल में मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित बेगमबाग इलाके में ‘रामनिधि संग्रहण’ रैली निकालने के दौरान मुस्लिम समुदाय के अराजक तत्वों ने हिन्दू संगठन पर पथराव किया था। इस घटना के बाद संज्ञान लेते हुए पुलिस ने उन लोगों पर कड़ी कार्रवाई की थी। खबरों के अनुसार, पुलिस और नगरपालिका की संयुक्त टीम ने उस घर को ध्वस्त कर दिया था, जिसके आस-पास मौजूद होकर कुछ महिलाएँ और बच्चे यात्रा निकालने वालों पर पथराव कर रहे थे। 

नाबालिग आदिवासी लड़कियों का यौन उत्पीड़न: केरल से नौफल और शमीम गिरफ्तार, फोन पर की थी दोस्ती

केरल में आदिवासी लड़कियों का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में पुलिस ने 2 युवकों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान कंबलाक्कड़ (Kambalakkad) निवासी मोहम्मद नौफल (Mohammad Noufal) और कानिंपत्त शमीम (Kaniampatta Shamim) के तौर पर हुई है। एक की उम्र 18 साल है और दूसरा आरोपित 19 वर्ष का है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आदिवासी लड़कियाँ इन दोनों युवकों की दोस्त थीं और फोन के जरिए बात करते हुए इनके साथ रिलेशन में आई थीं। ये दोनों युवक इसी दोस्ती का फायदा उठा कर उन्हें नए साल की पूर्व संध्या पर अपने साथ ले गए और उनका यौन उत्पीड़न किया।

पूरा मामला उस समय उजागर हुआ, जब गायब लड़कियों में से एक के माता-पिता ने इस घटना की शिकायत की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमे को POCSO एक्ट व एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज किया। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार करके पॉक्सो कोर्ट में पेश किया गया।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व केरल में ही सुमदाय विशेष के दो अन्य युवकों पर 2 नाबालिग बच्चियों से रेप करने का आरोप लगा था। कथित तौर पर दोनों जुड़वाँ भाई थे और इनके नाम नौशाद व नवास थे। दोनों ने 10 साल और 5 साल की बच्चियों का कई बार रेप किया था। बच्चियों के माता-पिता ने इस मामले में दोनों भाइयों नौशाद और नवास के ख़िलाफ़ शिकायत करवाई थी और आरोप लगाया था कि दोनों बच्चियों का कई बार रेप किया गया।

पुलिस ने इस मामले को दर्ज करने बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया था और उनके ऊपर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने बताया था कि आरोपितों ने बच्चियों का कथित तौर पर रेप करने के बाद उन्हें धमकी दी थी कि वह अपने पिता और रिश्तेदारों में से किसी को इस संबंध में न बताएँ।

कहाँ, कब, कैसे और क्यों? कोरोना वैक्सीन पर हरेक सवाल का जवाब यहाँ, भ्रम फैलाने वालों से रहें दूर

भारत में कोरोना वैक्सीन को लेकर जम कर भ्रम फैलाया जा रहा है, इसलिए आपको इसकी पूरी प्रक्रिया और वास्तविकता से परिचित रहने की आवश्यकता है। कोरोना जैसी महामारी के खात्मे के लिए आई वैक्सीन का भी अब राजनीतिकरण किया जा रहा है। सीरम इंस्टिट्यूट और भारत बायोटेक के वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद गई है, सरकार ने एक प्रश्नोत्तरी जारी की है, जिसे पढ़ने के बाद आपका सारा भ्रम दूर हो जाएगा।

क्या कोरोना वैक्सीन सभी को एक साथ दिया जाएगा? इसका जवाब है – नहीं। ये काम चरणों में किया जाएगा। भारत सरकार ने हाई-रिस्क समूहों को चिह्नित किया है, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन दिया जाएगा। स्वास्थ्य कर्मचारियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 50 वर्ष से अधिक की उम्र के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। जरूरतमंदों के बाद पूरी जनसंख्या के लिए ये उपलब्ध रहेगी। वैक्सीन के टाइमलाइन को लेकर लोगों में काफी भ्रम है।

वैसे तो वैक्सीन के निर्माण में सालों लग जाते हैं, लेकिन इस महामारी की आपात स्थिति को देखते हुए इसे कुछ ही महीनों में तैयार किया गया। जब वैक्सीन की सटीकता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देश की नियामक संस्थाएँ उसे अनुमति देती हैं, तभी उसका प्रयोग किया जाता है। एक और बात जानने लायक ये है कि कोरोना वैक्सीन लेना अनिवार्य नहीं है। सरकार किसी को भी मजबूर नहीं कर रही कि उसे वैक्सीन लेना ही है।

सरकार बस सलाह दे सकती है कि शेड्यूल के हिसाब से लोगों को कोरोना वैक्सीन लेनी चाहिए, ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके। जो लोग कोरोना संक्रमित हो कर ठीक हो चुके हैं, वो भी अपने इम्यून सिस्टम को और मजबूत करने के लिए वैक्सीन ले सकते हैं। जिन्हें कोरोना संक्रमण है, उन्हें 14 दिनों के लिए वैक्सीन लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे वैक्सीन दिए जाने वाले स्थल पर अन्य लोगों में भी संक्रमण फैलने की आशंका है।

आप कौन सा वैक्सीन लेंगे? जिस भी वैक्सीन को सरकारी नियामक संस्थाओं ने लाइसेंस दे रखी है, उन्हें आप ले सकते हैं। आप उनमें से किसी भी वैक्सीन का प्रयोग कर सकते हैं। हाँ, आप वैक्सीन का शेड्यूल एक से ही पूरा करें, बीच में न बदलें। आपने पहला शॉट भारत बायोटेक वैक्सीन का लिया, फिर आप दूसरा शॉट सीरम वाला नहीं ले सकते। वैक्सीन के रखरखाव के लिए सरकारी सिस्टम पर आप सम्पूर्ण भरोसा कर सकते हैं।

भारत दुनिया में सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाता रहा है। हर साल कम से कम 2.6 करोड़ नवजात शिशुओं और 2.9 करोड़ माँओं को टीके दिए जाते हैं। भारत की जनसंख्या ही इतनी है कि हर वर्ष वैक्सीन मेकेनिज्म के सिस्टम को मजबूत किया जाता है। वैक्सीन का ट्रायल पूरे नियमों के तहत किया गया है, इसलिए भारत में विकसित की गई वैक्सीन भी उतनी ही प्रभावी होगी, जितनी दुनिया में कहीं और की।

मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन की सुविधा होगी और आपको सूचित कर दिया जाएगा कि आप वैक्सीन लेने के लिए योग्य हैं या नहीं। आप किसी भी सरकारी पहचान-पत्र या सर्विस कार्ड का प्रयोग कर वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद ही आपको इसकी अनुमति मिलेगी। रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन के लिए फोटो आईडी होनी ही चाहिए। कौन सा डोज कब लेना है, इसकी सूचना पंजीकृत फोन नंबर पर आ जाएगी।

वैक्सीन लेने जाएँ तो सारे प्रोटोकॉल्स का पालन करें और सोशल डिटेन्सिंग के नियमों को न भूलें। अगर कहीं भी कोरोना वैक्सीन का कोई साइड इफ़ेक्ट आता है तो कम्पनी को उसकी पूरे डिटेल्स की रिपोर्ट सरकारी नियामकों को सौंपनी पड़ेगी। डाइबिटीज या हाइपरटेंशन वाले लोगों को हाई-रिस्क वाला मानते हुए प्राथमिकता दी जाएगी। चूँकि पहले फेज में सप्लाई लिमिटेड है, इसलिए प्राथमिकता तय की गई है। वैक्सीन लगाने के 2 सप्ताह के बाद आपके शरीर की एंटीबॉडी डेवेलप हो जाएगी।

उधर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अदार पूनावाला ने भी हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत करते हुए कई सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने इसे एक बड़ी जीत बताते हुए कहा कि मार्च-अप्रैल तक वो आश्वस्त नहीं थे, लेकिन आर्थिक व तकनीकी रूप से शत-प्रतिशत प्रतिबद्ध थे। उन्होंने कहा कि इसके निर्माण में कोई जल्दबाजी नहीं की गई है। सरकार करार पर हस्ताक्षर के बाद 7 दिन का समय देगी, जिसमें वैक्सीन को कहाँ और कैसे भेजना है ये तय किया जाएगा।

HT से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हमने पहले 100 मिलियन खुराक के लिए, सरकार के समक्ष 200 रुपए की लिखित में एक विशेष कीमत की पेशकश की है। यह पेशकश केवल सरकार के लिए है और वो भी सिर्फ 100 मिलियन खुराक के लिए। इससे अधिक के ऑर्डर पर कीमत अधिक अथवा अलग हो सकती है। निजी बाजार में इस वैक्सीन की एक खुराक की कीमत MRP के हिसाब से 1000 रुपए हो सकती है। हम संभवतः इसे 600-700 रुपए में बेचेंगे। विदेशों में निर्यात के लिहाज से इस वैक्सीन की एक खुराक की कीमत 3-5 डॉलर के बीच होगी।”

उन्होंने वैक्सीन को लेकर फ़ैल रहे अफवाह और भ्रम को लेकर कहा कि किसी को भी विज्ञान के तथ्यों पर सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन हमें पढ़ना चाहिए कि डेटा आखिर होता क्या है और कहाँ इसका परीक्षण किया जाता है। विशेषज्ञों के साथ राय-विचार कर आप समझ सकते हैं कि ये वैक्सीन काफी ज्यादा प्रभावी और सुरक्षित है। उन्होंने साफ़ किया कि वैक्सीन लेने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा रहा है।

याद दिला दें कि भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SRI) और भारत बायोटेक द्वारा विकसित की गई कोरोना वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। दोनों ही वैक्सीन को इमरजेंसी स्थिति में रिस्ट्रिक्टेड प्रयोग के लिए मंजूर किया गया। इसका अर्थ है कि आपात स्थिति में इन दोनों द्वारा निर्मित की गई कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी DCGI (Drug Controller General of India) ने दे दी है।

गाजियाबाद श्मशान घाट हादसे में 25 की मौत: एक्शन में UP पुलिस-प्रशासन, 3 गिरफ्तार, ठेकेदार अभी तक फरार

दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रविवार (जनवरी 4, 2020) को श्मशान घाट की छत गिरने से 25 लोगों की मौत हो गई। जहाँ अंतिम संस्कार के बाद लोगों को मोक्ष मिलता है, वहाँ भी भ्रष्टाचार की बात सामने आ रही है। जिन लोगों ने अपने मृत परिजन की आत्मा की शांति के लिए मौन रखा, वो हमेशा के लिए मौन हो गए। गलियारे की छत गिरने के बाद हुई मौतों के बाद खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सक्रिय हैं और यूपी पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है।

अधिशाषी अधिकारी निहारिका सिंह, जूनियर इंजीनियर चंद्रपाल सिंह और सुपरवाइजर आशीष की धर-पकड़ में तो पुलिस को सफलता मिली, लेकिन ठेकेदार अजय त्यागी अब भी फरार चल रहा है। उसकी गिरफ़्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। इन सबके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। इसके अलावा भ्रष्टाचार और लापरवाही सहित कई मामलों में FIR दर्ज की गई। मण्डलयुक्त अनीता शी मेश्राम मामले की समीक्षा कर रही हैं।

एसपी ग्रामीण इरज राजा ने जानकारी दी है कि मुरादनगर थाने में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। गाजियाबाद के श्मशान घाट के इस गलियारे का निर्माण 2 महीने पूर्व में ही किया गया था। 15 दिन पहले इसे आम लोगों के लिए तो खोल दिया गया, लेकिन अब तक इसका लोकार्पण नहीं हो सका था। इस हादसे ने अधिकारियों और ठेकेदारों के मिलीभगत से चल रहे भ्रष्टाचार की पोल खोल कर रख दी है।

या घटना रविवार के सुबह की है, जब एक फल विक्रेता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए लोग पहुँचे थे। तभी बारिश होने लगी, जिस कारण करीब 70 लोग इसी गलियारे में खड़े हो गए। नवनिर्मित गलियारा तुरंत ही गिर गया। इसका लिंटर ही भरभरा गया। राहत-कार्य के बाद कई लोगों को बचाया तो गया, लेकिन 25 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे। सभी घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर शोक जताते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश के मुरादनगर में हुए दुर्भाग्यपूर्ण हादसे की खबर से अत्यंत दुःख पहुँचा है। राज्य सरकार राहत और बचाव कार्य में तत्परता से जुटी है। इस दुर्घटना में जान गँवाने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूँ, साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।” वहीं सीएम योगी ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने के लिए आदेशित कर दिया गया है।

प्रदेश सरकार को तत्काल रिपोर्ट उपलब्ध कराने जाने के बाद इस घटना के पीछे के कारणों पर मंथन होगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। सांसद वीके सिंह भी अस्पताल पहुँचे और निष्पक्ष जाँच के बाद दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। ये श्मशान घाट उखरानी/बम्बा रोड में स्थित है। मृतकों में अधिकतर उखलारसी गाँव के हैं। मौके पर NDRF को भी लगाया गया था।

गाजियाबाद के जिस श्मशान घाट गलियारे के गिरने के कारण 25 लोग मौत की नींद सो गए, उसके निर्माण के लिए 50 लाख रुपए का टेंडर जारी किया गया था। स्थानीय लोगों ने निर्माण में घटिया समाग्री के इस्तेमाल की शिकायत नगरपालिका और प्रशासन ने भी की थी। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष ने काम भी रुकवाया था। लेंटर का पिलर ही कमजोर था, जिस कारण नींव में पानी जाने से वो गिर गया। दयानंद कॉलोनी निवासी दयाराम की किसी बीमारी के कारण मौत के बाद लोग वहाँ पर जमा हुए थे।

‘इस्लाम के खिलाफ, Miss Plus World में ‘मोटी’ औरतों का आना हराम: कट्टरपंथियों का विरोध, जीत गईं जस्टीना मोहम्मद

शनिवार (जनवरी 2, 2021) को पेटलिंग जाया शहर में इस्लामी कट्टरपंथियों के विरोध के बावजूद ‘मिस प्लस वर्ल्ड मलेशिया 2020 (MPWM 2020)’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें मेलीसा मोहन टिंडल को विजेता घोषित किया गया। अब वो अमेरिका के टेक्सस में होने वाले ‘मिस प्लस वर्ल्ड पेजेंट’ में मलेशिया का प्रतिनिधित्व करेंगी। कट्टरपंथी संगठनों और यहाँ तक कि मलेशिया की सरकार ने भी प्लस साइज महिलाओं के कार्यक्रम में आने को इस्लाम के खिलाफ बताया था।

कार्यक्रम के दौरान दो अन्य विजेताओं की भी घोषणा की गई, जिसमें एक मुस्लिम महिला भी हैं। शक्ति छाबड़ा को ‘मिस प्लस इंटरनेशनल मलेशिया 2020’ का टाइटल दिया गया। जस्टीना मोहम्मद जूनूस को ‘मिस प्लस वर्ल्ड इंटरनेशनल एम्बेसडर’ का ख़िताब दिया गया। जस्टीना ने इस बात पर ख़ुशी जताई कि उनके चैरिटेबल कार्यों को पहचान मिली है। उन्होंने कार्यक्रम के विरोध को नकारात्मक ग़लतफ़हमी करार दिया।

उन्होंने बताया कि उस रात महिलाओं ने लम्बे गाउन्स के साथ-साथ इनर कपड़े भी पहन रखे थे, इसीलिए ये मुद्दा नहीं है। उन्होंने बताया कि वो हिजाब भी पहनती हैं। उन्होंने कहा कि पेजेंट का उद्देश्य लुक्स की जगह बहनचारे के बंधन की भावना को बढ़ावा देना है। इससे पहले ‘ययासह डकवाह इस्लामिया मलेशिया’ ने इस शो को कैंसल करने की माँग की थी। संगठन के अध्यक्ष नसरुद्दीन हसन ने प्रशासन को पत्र लिख कर इसे रोकने की माँग की थी।

‘PAS मुस्लिमात विंग’ ने भी इस कार्यक्रम का विरोध किया था और और इसे इस्लाम व मलेशिया के नैतिक सिद्धांतों के विपरीत बताया था। हालाँकि, आयोजकों का कहना है कि शरीर को लेकर जिन महिलाओं को बॉडी शेमिंग और कटाक्षों का सामना करना पड़ता है, उन्हें हौंसला देने के लिए इसका आयोजन हुआ था। साथ ही आयोजकों ने ये भी जानकारी दी कि प्रतिभागियों ने स्विम शूट नहीं पहना था, जो इस्लाम के अनुरूप है।

वहीं मजहबी मामलों के उप-मंत्री अहमद मार्जक शारी ने कहा था कि ऐसे कार्यक्रम का आयोजन उचित नहीं है। इस्लामी संगठनों ने इस कार्यक्रम को ‘भोगवादी’ करार दिया था, जिससे सरकार चिंतित थी। उन्होंने इसे महिलाओं का शोषण करार दिया था। वहीं उप-मंत्री ने कोरोना का भी बहाना बनाया और कार्यक्रम को टालने की कोशिश की। वहीं एक राजनेता तो यहाँ तक कहा कि इस्लाम क्या, किसी भी मजहब में इस तरह के कार्यक्रम की अनुमति नहीं है।

आयोजकों ने इसके उलट कहा, “हम नहीं चाहते कि मुस्लिम महिलाएँ अयोग्य महसूस करें, या संकोची बने रहें। हम इस कार्यक्रम का नाम बदल सकते हैं, इसमें हमें कोई समस्या नहीं है। हमने किसी कंटेस्टेंट को डिस्क्वालिफाई नहीं किया है। इस्लामी फतवा में कहा गया कि बिना शरीर कवर किए इस कार्यक्रम में प्लस साइज महिलाओं का आना हराम है। ये बिकनी शो नहीं है, न ही हमने किसी को हिजाब हटाने के लिए मजबूर किया।”

मलेशिया में हाल के दिनों में इस्लामी कट्टरपंथी गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं। ज़ाकिर नाइक ने भी भारत से भाग कर वहीं शरण ले रखी है। हाल ही में भारत में आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए मलेशिया से 2 लाख डॉलर (1.47 करोड़ रुपए) की फंडिंग की गई थी। भारत में आतंकी हमले के लिए हुए इस लेनदेन के तार जाकिर नाइक सहित कई आतंकी संगठनों से भी जुड़े हुए पाए गए थे। इस आतंकी समूह ने मलेशिया में एक महिला को भी कड़ा प्रशिक्षण दिया है। 

जिन कट्टरपंथियों ने मंदिर बनवाने वाले ‘मोहम्मद अनवर’ का घर जला डाला, UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

रायबरेली के मोहम्मद अनवर ने इस्लाम को छोड़ दिया था। स्वेच्छा से हिंदू बन कर देव प्रकाश नाम भी रख लिया था। भक्ति-भाव में आकर अपनी जमीन पर मंदिर बनवा रहे थे। लेकिन कट्टरपंथियों को यह रास नहीं आया और जिस घर में वो अपने 3 बच्चों के साथ सो रहे थे, उसमें आग लगा दिया।

पीड़ित देव प्रकाश ने गाँव के प्रधान ताहिर, रेहान उर्फ सोनू, अली अहमद, इम्तियाज सहित मदरसे के लोगों पर घर में आग लगा कर जिंदा जलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। इन सभी के खिलाफ UP पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज की गई। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने 2 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

देव प्रकाश (पहले मोहम्मद अनवर) को बच्चों सहित जिंदा जलाने की मंशा के साथ उनका घर जलाने की इस घटना में आरोपित गाँव का प्रधान फरार है। उसकी गिरफ़्तारी के लिए UP पुलिस छापे मार रही है। यह जानकारी CM योगी के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट कर दी है।

मंदिर बना कारण?

दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ देव प्रकाश पटेल अपने घर के नज़दीक स्थित ज़मीन पर मंदिर का निर्माण कराने जा रहे थे। इस बात से गाँव के कुछ लोग उनसे काफी नाराज़ हो गए थे। इस बात को आधार बनाते हुए शनिवार देर रात कई लोगों ने उनके घर को आग के हवाले कर दिया।

इस वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपितों ने देव प्रकाश के घर के दरवाज़े भी बंद किए थे। आग बढ़ने के बाद बच्चों ने चीखना शुरू कर दिया, जिसके बाद देव प्रकाश ने पीछे का दरवाज़ा तोड़ कर अपनी और अपने बच्चों की जान बचाई।

घटना के बाद जिलाधिकारी और एसपी ने भी पीड़ित देव प्रकाश से मुलाक़ात की। डीएम ने देव प्रकाश को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। इसके अलावा विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने भी पीड़ित से मुलाक़ात की।

छोड़ दिया था इस्लाम

सितंबर 2020 में रायबरेली, सलोन स्थित रतासो गाँव के निवासी मोहम्मद अनवर ने केकोगना घाट पर हिन्दू धर्म में वापसी की थी। धर्मांतरण के बाद मोहम्मद अनवर ने अपना नाम देव प्रकाश पटेल रख लिया था। धर्मांतरण के बाद उसके तीन बच्चों रेहान, अली और ख़ुशी का नाम देव नाथ, देवी दयाल और दुर्गा देवी कर दिया गया था। देव प्रकाश पटेल ने मुंडन करवाने के बाद पूरे विधि-विधान से हिन्दू धर्म में वापसी की थी।

149 हिंदुओं की हत्या, 2623 का इस्लामी धर्मांतरण, 370 मूर्तियाँ विखंडित: जिसे भारत ने आजाद कराया, वहाँ हिंदुओं की स्थिति

बांग्लादेश में 2020 में विभिन्न घटनाओं में कम से कम 149 हिन्दुओं को मौत के घाट उतार दिया गया। इतना ही नहीं, 149 की हत्या के अलावा 7036 हिन्दू घायल भी हुए। ‘जटिया हिंदू महाजोत’ संगठन ने ये आँकड़े दिए हैं। साथ ही ये भी बताया गया है कि ये आँकड़े पिछले वर्ष के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। संगठन ने बुधवार (दिसंबर 30, 2020) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के ये जानकारी दी और मुल्क में हिन्दुओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।

संगठन के महासचिव गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने बताया कि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार लगातार बढ़ता ही जा रहा है। राजधानी में ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी के दफ्तर में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनवरी 1 से लेकर दिसंबर 29 तक के 2020 के आँकड़े सामने रखे गए। अगर 2019 के आँकड़ों को देखें तो उस साल 108 हिन्दुओं की हत्या कर दी गई थी और विभिन्न घटनाओं में 484 घायल हुए थे।

वहीं 2020 में 94 हिन्दुओं का अपहरण कर के उन्हें निशाना बनाया गया। साथ ही 2623 हिन्दुओं को जबरन इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया गया। अगर 2019 की बात करें तो उस साल ये आँकड़े क्रमशः 76 और 18 थे। 2020 में इसमें कई गुना ज्यादा बढ़ोतरी हुई। कुल मिला कर बांग्लादेश में 2020 में 53 हिन्दू महिलाओं-बच्चों के साथ बलात्कार किया गया और पूरे साल में 370 मंदिरों की प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त करने की घटनाएँ हुईं।

ये दोनों आँकड़े भी 2019 में 42 और 246 थे। संगठन ने ये भी जानकारी दी कि 2020 में 2125 हिन्दू परिवारों को मुल्क छोड़ कर जाने के लिए मजबूर किया गया। ये संख्या 2019 में 379 थी। इतना ही नहीं, धार्मिक स्थलों पर हमले भी कई गुना बढ़ गए। 2020 में 163 मंदिरों पर हमला किया गया, या फिर उन्हें जला डाला गया। 2019 में ये संख्या 153 थी। कुल मिला कर हिन्दू समाज पर अत्याचार की 40,703 घटनाएँ सामने आईं।

2019 में ये आँकड़ा 31,505 था। बता दें कि बांग्लादेश से हिन्दुओं के अपहरण, जबरन धर्मांतरण, हिन्दू महिलाओं के बलात्कार, मंदिरों पर हमले, प्रतिमाओं को तोड़ने की घटनाएँ आए दिन होती रहती हैं और अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे इस अत्याचार पर मुखर नहीं रहता। वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन बांग्लादेश चैप्टर (world hindu federation bangladesh chapter) द्वारा जारी सूची के अनुसार, अकेले मई 2020 में ही हिंदुओं के 10 मंदिरों को तोड़ दिया गया था।

‘रेप करने दो… वरना पत्थर से कुचल दूँगा’ – 18 साल की बेटी और 35 साल की माँ का दिल्ली में बलात्कार, वीडियो भी वायरल

ठंड के मौसम में दिल्ली से फिर शर्मसार करने वाली खबर आई है। जिस महिला के पास रहने को घर तक नहीं थे, जो सड़क पर रह कर और कूड़े जमा कर के अपना जीवन-यापन कर रही थी – दरिंदो ने उसे और उसकी बेटी को भी नहीं छोड़ा। नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली के भारत नगर में आरोपितों ने बेटी को पत्थर से कुचलने की धमकी देकर बेघर माँ-बेटी के साथ रेप किया। इस घटना का वीडियो किसी ने बना लिया, जो सोशल मीडिया पर भी चलने लगा।

इसके बाद पुलिस ने भी छानबीन शुरू कर दी। अचानक इस तरह से घटना के सामने आने के कारण पुलिस भी हैरान है। उसने पीड़िता, वीडियो बनाने वाले युवक और आरोपितों को खोज लिया है। हालाँकि, पुलिस का कहना है कि वो युवक आरोपितों में शामिल नहीं है और उसने छत से ये वीडियो बनाया। वीडियो में टोपी पहने 20 साल का एक लड़का हाथ में पत्थर लेकर महिला को धमका रहा है कि वो उसकी बेटी का सिर कुचल देगा।

पीड़ित महिला का पति के साथ झगड़ा चल रहा था, जिस कारण वो बेघर हो गई थी। उसका पति उसे छोड़ कर गाँव भाग गया था। ऐसे में महिला और उसकी बेटी के पास किराए के लिए रुपए नहीं थे। वो दोनों ही सड़क पर रहने लगीं। वो सड़क पर सोतीं और दिन में कूड़ा बीनतीं। लेकिन, एक रात 2 बजे दो नशेड़ी युवकों की बुरी नजर उन पर पड़ी और उन्होंने डरा-धमका कर रेप की इस घटना को अंजाम दिया।

पुलिस ने दोनों आरोपितों को भी गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। गिरफ्तार आरोपितों में एक जहाँगीरपुरी का सोनू (22) है और एक जेजे कॉलोनी का उसका साथी अमित (24) है। महिला की उम्र करीब 35 साल है, जबकि उसकी बेटी 18 साल की है। वीडियो बनाने वाले युवक ने बताया कि उसने अपने एक सामाजिक कार्यकर्ता दोस्त को ये वीडियो दिया था, जिसने आरोपितों को पकड़वाने के लिए इसे वायरल किया। उसने बताया कि वो डरते-डरते वीडियो बना रहा था।

पुलिस ने IPC के तहत मामला दर्ज कर लिया है। माँ-बेटी की मेडिकल जाँच के लिए अस्पताल भेजा गया है, ताकि रेप की पुष्टि हो सके। ये घटना शुक्रवार (दिसंबर 29, 2020) की रात की बताई जा रही है, जो अब जाकर संज्ञान में आई है। जब यह घटना हुई, तब माँ-बेटी सड़क पर ही सो रही थी। पीड़िता ने आरोपितों की शिनाख्त भी कर ली है। डीसीपी विजयंता गोयल आर्य ने बताया कि आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए कई टीमें बनाई गई थीं, जिन्होंने CCTV फुटेज और लोकल इंटेलिजेंस के आधार पर आरोपितों को धर-दबोचा।

दिसंबर 2020 में ही दिल्ली के ही सरिता विहार इलाके से एक हिंदू लड़की के यौन शोषण की घटना सामने आई थी। पीड़िता का आरोप था कि साहिब अली नाम के 20 वर्षीय लड़के ने पहचान छिपा कर उस पर शादी का दबाव बनाया और बाद में उसका रेप किया। इस बाबत उसने सरिता विहार थाने में अपनी शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में पीड़िता ने साकिब के घरवालों पर भी गंभीर इल्जाम लगाए थे।

चाँदनी चौक के हनुमान मंदिर विध्वंस का जिम्मेदार कौन? बीजेपी ने कहा- AAP सरकार ने नहीं किए बचाने के प्रयास

दिल्ली के चाँदनी चौक स्थित हनुमान मंदिर को तोड़ने को लेकर केंद्र शासित प्रदेश में काफी विवाद पैदा हो गया है। मंदिर को दिल्ली सरकार के चाँदनी चौक पुनर्विकास योजना के तहत ध्वस्त किया गया। लेकिन यह काम एनडीएमसी के अधीन हो रहा जिस पर भाजपा का नियंत्रण है। अब दिल्ली की AAP सरकार पर बीजेपी मंदिर नहीं बचाने का आरोप लगा रही है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नवंबर 2019 में मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया था। HC ने दिल्ली सरकार की ‘धार्मिक समिति’ के पुनर्विकास योजना के तहत हनुमान मंदिर और शिव मंदिर के एकीकरण के सुझाव को खारिज कर दिया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को मंदिरों को हटाने पर ‘यू-टर्न’ के लिए भी फटकार लगाई थी। न्यायालय ने 2015 में उत्तरी दिल्ली नगर निगम को अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था, जिसमें चाँदनी चौक पुनर्विकास परियोजना की प्रगति को रोकने वाले मंदिर भी शामिल थे।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह आदेश तब दिया जब न तो दिल्ली सरकार, न शाहजहॉनाबाद पुनर्विकास निगम और न ही एनएमसीडी ने पाँच धार्मिक ढाँचों को योजना में अवरोध बताया था। इसके बाद नवंबर 2020 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने श्री मनोकामना सिद्ध श्री हनुमान सेवा समिति की याचिका पर यह कहते हुए विचार करने से इनकार कर दिया कि हस्तक्षेप करने का अनुरोध AAP सरकार की तरफ से ही आना चाहिए।

दिल्ली हाई कोर्ट की बेंच ने कहा, “एक बार इस तरह की स्वतंत्रता को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (GNCTD) को दे दिया गया था और अब तक GNCTD ने किसी राहत के लिए इस अदालत से संपर्क नहीं किया है। हम हस्तक्षेप के लिए इस आवेदन पर विचार करने का कोई कारण नहीं देखते हैं। यह एक ही मुद्दे को फिर से शुरू करने का प्रयास है जिसे पहले के आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया है।”

उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने दिसंबर में दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि वह जल्द ही हनुमान मंदिर को ध्वस्त करना चाहता है। विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए विध्वंस को कई बार स्थगित किया गया था। विध्वंस की तारीख 20 दिसंबर निर्धारित की गई थी, लेकिन तब भी कुछ नहीं हुआ। अंततः इसे 2 और 3 जनवरी के बीच की मध्यरात्रि में ध्वस्त कर दिया गया।

भाजपा ने हनुमान मंदिर विध्वंस के लिए AAP को ठहराया जिम्मेदार

ऑपइंडिया ने इस मामले को लेकर बीजेपी दिल्ली के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर से बात की। हमने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण माँगा कि एनडीएमसी ने मंदिर को ध्वस्त कर दिया, जो कि भाजपा द्वारा नियंत्रित है। उन्होंने हमें बताया कि दो अन्य धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त करने का प्रस्ताव था, जिन्हें दिल्ली सरकार द्वारा संरक्षित किया गया, लेकिन AAP ने हनुमान मंदिर के लिए ऐसा करने से इनकार कर दिया।

प्रवीण शंकर कपूर ने कहा, “योजना दिल्ली सरकार की थी, यह आदेश दिल्ली उच्च न्यायालय से आया था। दिल्ली सरकार ने दो अन्य धार्मिक स्थलों को बचाया है, हनुमान मंदिर को क्यों नहीं?” कपूर ने यह भी कहा कि मेयर को सूचित किए बिना विध्वंस किया गया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के कमिश्नर सतनाम सिंह ने तोड़फोड़ की। उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

कपूर ने यह भी कहा कि उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया है कि एनडीएमसी ने विध्वंस को अंजाम दिया, लेकिन जोर देकर कहा कि एनडीएमसी दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को मानने से इनकार नहीं कर सकती। केवल एक ही आपत्ति हो सकती है जो दिल्ली सरकार की थी, लेकिन यह कभी नहीं आई। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि हनुमान मंदिर को फिर से बनाया जाना चाहिए।

विध्वंस के लिए किसे दोषी ठहराया जाए?

दोषारोपण खेल चल रहा है। यहाँ यह उल्लेख करना उचित है कि दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा नवंबर 2019 के आदेश को दिल्ली सरकार द्वारा दायर एक याचिका के जवाब में पारित किया गया था जिसमें अदालत के पहले के निर्देशों को बदलने की माँग की गई थी कि उपराज्यपाल को धार्मिक संरचनाओं को हटाने की योजना में बाधा डालने के उपाय करने चाहिए।

आर्किटेक्ट ने कहा कि मंदिर प्रस्तावित काम में बाधा डालेगा और सरकारी समिति द्वारा की गई माँगों को लागू नहीं किया जा सकता। जिसके बाद कोर्ट ने मंदिर को गिराने का फैसला दिया। अब AAP को भाजपा इस विध्वंस के लिए दोषी ठहरा रही है, जबकि इसे NDMC ने किया। उनका दावा है कि दिल्ली सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर सकती थी, लेकिन नहीं किया।

भाजपा का यह भी दावा है कि AAP ने दो अन्य संरचनाओं को बचाया, लेकिन हनुमान मंदिर के मामले में ऐसा नहीं किया। यह भी स्पष्ट है कि जब NDMC ने कहा कि वे मंदिर को ध्वस्त करेंगे, तो उनका मतलब था कि वे न्यायालय के आदेश को लागू करेंगे। सिविक बॉडी ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया जहाँ कहा गया, “अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से नगर निगम की है। हालाँकि, इस तरह के प्रयास में, सरकार को निगम को समर्थन देना चाहिए।”

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि एनडीएमसी ने मंदिर के विध्वंस के आदेश को पलटने के लिए कोई प्रयास किया या फिर ऐसा कोई उपाय किया जिससे कि मंदिर को ध्वस्त होने से बचाया जा सकता था। ऐसा नहीं लगता है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को पलटने के लिए किसी तरह का कोई प्रयास किया गया हो। दिल्ली सरकार ने विध्वंस के आदेश को पलटने की कोशिश की, लेकिन ऐसा लगता है कि उन्होंने भी बहुत जल्द इस प्रयास को छोड़ दिया।

इस प्रकार, यह कहा जा सकता है कि जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंदिर को गिराने का आदेश दिया तो भाजपा नियंत्रित NDMC और AAP सरकार, दोनों ही मंदिर को बचाने में विफल रहे।

VHP ने बयान जारी कर CM केजरीवाल पर लगाया आरोप

वहीं इंद्रप्रस्थ विहिप ने इस मामले में एक बयान जारी किया है। विहिप ने अपने बयान में, मंदिर को ध्वस्त होने से न बचाने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार को दोषी ठहराया है। विहिप ने कहा है कि उनके कार्यकर्ता दिल्ली की कड़ाके की ठंड में मंदिर की रक्षा कर रहे हैं। लेकिन जैसे ही विहिप के कार्यकर्ता वहाँ से हटे, मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया। विहिप ने यह भी कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मंदिर के विध्वंस को रोकने और अदालत में पर्याप्त कदम उठाने के लिए याचिका दायर की थी।

इंद्रप्रस्थ विहिप ने कहा कि महीनों बाद भी न तो उन्हें कोई समय दिया गया और न ही हनुमान मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई कदम उठाया गया। उन्होंने हनुमान मंदिर के विध्वंस के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की और अरविंद केजरीवाल से इस बारे में कार्रवाई करने का आग्रह किया। इसके साथ ही मंदिर के पुनर्निर्माण की माँग की गई और चेतावनी दी गई है कि ऐसा न करने पर वो आंदोलन करेंगे।

3 बच्चों के साथ कट्टरपंथियों ने जिंदा जलाने की कोशिश की, क्योंकि मंदिर बनवा रहे थे देवप्रकाश बन चुके मोहम्मद अनवर

उत्तर प्रदेश के रायबरेली में कट्टरपंथियों ने शनिवार (2 जनवरी 2021) रात देव प्रकाश के घर में आग लगा दी थी। पीड़ित देव प्रकाश ने कुछ महीने पहले ही इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया था। उन्होंने अपना नाम मोहम्मद अनवर से बदलकर देव प्रकाश रखा था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वह अपनी जमीन पर मंदिर बनवा रहे थे। इससे नाराज होकर कट्टरपंथियों ने इस घटना को अंजाम दिया।

हिन्दू समुदाय के लोगों द्वारा की गई मदद से प्रभावित होकर उन्होंने इस्लाम त्यागा था। बताया जा रहा है कि वे अपने घर के नज़दीक मंदिर बनवाने जा रहे थे। इसकी वजह से उनके आस-पास रहने वाले ‘शांतिप्रिय समुदाय’ के कट्टरपंथी काफ़ी नाराज़ थे। 

दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ देव प्रकाश पटेल अपने घर के नज़दीक स्थित ज़मीन पर मंदिर का निर्माण कराने जा रहे थे। इस बात से गाँव के कुछ लोग उनसे काफी नाराज़ हो गए थे। इस बात को आधार बनाते हुए शनिवार देर रात कई लोगों ने उनके घर को आग के हवाले कर दिया। इस वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपितों ने देव प्रकाश के घर के दरवाज़े भी बंद किए थे। आग बढ़ने के बाद बच्चों ने चीखना शुरू कर दिया, जिसके बाद देव प्रकाश ने पीछे का दरवाज़ा तोड़ कर अपनी और अपने बच्चों की जान बचाई। 

पीड़ित ने ग्राम प्रधान ताहिर अहमद, अली अहमद, इम्तियाज़ आदि पर ज़िंदा जलाने के प्रयास का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने ग्राम प्रधान समेत कुल 5 आरोपितों पर मामला दर्ज कर लिया है। इस घटना पर पुलिस का कहना है कि आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। घटनास्थल पर शांति कायम है। घटना के बाद जिलाधिकारी और एसपी ने भी पीड़ित देव प्रकाश से मुलाक़ात की। डीएम ने देव प्रकाश को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने भी पीड़ित से मुलाक़ात की।           

सितंबर 2020 में रायबरेली, सलोन स्थित रतासो गाँव के निवासी मोहम्मद अनवर ने केकोगना घाट पर हिन्दू धर्म में वापसी की थी। धर्मांतरण के बाद मोहम्मद अनवर ने अपना नाम देव प्रकाश पटेल रख लिया था। धर्मांतरण के बाद उन्होंने अपने तीन बच्चों रेहान, अली और ख़ुशी का नाम देव नाथ, देवी दयाल और दुर्गा देवी कर दिया था। देव प्रकाश पटेल ने मुंडन करवाने के बाद पूरे विधि-विधान से हिन्दू धर्म में वापसी की थी। 

लेकिन आस-पास रहने वाले कट्टरपंथियों को यह बात हज़म नहीं हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ शनिवार को ग्राम प्रधान ताहिर अहमद ने देव प्रकाश पटेल के घर को आग के हवाले कर दिया। इस घटना के दौरान घर में मौजूद सभी लोग सो रहे थे। देव प्रकाश ने किसी तरह अपनी और अपने बच्चों की जान बचाई। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसका घर पूरी तरह जल कर राख हो गया है। 

देव प्रकाश पटेल धर्मांतरण से पहले फ़कीर बिरादरी से ताल्लुक रखते थे। कुछ साल पहले उनकी पत्नी का निधन हो गया था। उनके दो बेटे और एक बेटी है। उनके सामने जीवनयापन की बड़ी चुनौती थी। इस बीच आस-पास रहने वाले हिन्दू परिवारों ने बिना किसी भेदभाव के उनकी काफी मदद की। वह इस बात से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने इस्लाम धर्म त्याग दिया। देव प्रकाश ने हिन्दू धर्म स्वीकार करने से पहले प्रशासनिक अधिकारियों को भी सूचित किया था। साथ ही यह भी कहा था कि उन्होंने यह कदम अपनी इच्छा से उठाया है।