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कोरोना वैक्सीन पर कई लोग केवल गॉसिप कर रहे, हमने 123 देशों के लिए बनाई है वैक्सीन: भारत बॉयोटेक का जवाबी डोज

भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इमरजेंसी यूज की मंजूरी दे दी है। इस पर विपक्ष ने आरोप लगाया है कि ये मंजूरी हड़बड़ी में दी गई है। वैक्सीन पर जारी सियासत के बीच भारत बॉयोटेक के एमडी कृष्णा एल्ला ने सोमवार (जनवरी 4, 2021) को अपना पक्ष रखा है। एल्ला ने कहा कि वैक्सीन पर सियासत हो रही है। कुछ लोग हमारी वैक्सीन के बारे में केवल गॉसिप कर रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।

एल्ला ने कहा, “मैं ये स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरे परिवार का कोई भी सदस्य किसी भी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पास वैक्सीन बनाने का अनुभव है।”

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि भारतीय कंपनियाँ हमेशा दुनिया में हर किसी के निशाने पर क्यों रहती हैं। आपातकालीन चिकित्सा लाइसेंस जारी करना एक वैश्विक अभ्यास है। यहाँ तक कि अमेरिका का कहना है कि अगर आपके पास अच्छा टीकाकरण डेटा है, तो आपातकालीन प्राधिकरण किया जा सकता है।”

हम ग्लोबल कंपनी, 12 से अधिक देशों में किया क्लीनिकल ट्रायल 

कृष्णा एल्ला ने कहा, “हम केवल भारत में क्लीनिकल ट्रायल नहीं कर रहे हैं। हमने ब्रिटेन समेत 12 देशों में ट्रायल किए हैं। हम पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और दूसरे देशों में ट्रायल कर रहे हैं। हम केवल भारतीय कंपनी नहीं है, हम वास्तव में एक ग्लोबल कंपनी हैं।”

123 देशों के लिए वैक्सीन बनाई

उन्होंने कहा, “हम ऐसी कंपनी नहीं हैं, जिसके पास वैक्सीन बनाने का अनुभव नहीं है। हमारे पास वैक्सीन बनाने का बहुत ज्यादा अनुभव है। हमने 123 देशों के लिए वैक्सीन बनाई। इस तरह का अनुभव रखने वाली हमारी कंपनी इकलौती है।”

डेटा पर सवाल उठाने वाले आर्टिकल्स पढ़ें

एल्ला ने कहा, “कई लोग कह रहे हैं कि हमारे डेटा में पारदर्शिता नहीं बरती गई है। मुझे लगता है कि लोगों को संयम रखना चाहिए और इंटरनेट पर हमने डेटा के संबंध में जो आर्टिकल पब्लिश किए हैं, उन्हें पढ़ना चाहिए। अब तक 70 से ज्यादा आर्टिकल इंटरनेशनल जर्नल्स में पब्लिश हो चुके हैं।”

हम पर लांछन लगाना ठीक नहीं

उन्होंने कहा, “वैक्सीन पर कई लोग केवल गॉसिप कर रहे हैं, ये भारतीय कंपनियों पर लांछन है। ये हमारे लिए सही नहीं है। हमारे साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। मेरेक इबोला वैक्सीन का ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल कभी पूरा नहीं हुआ, इसके बावजूद WHO ने उसे लाइबेरिया और गिनी के लिए इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी।”

हमारे पास दो करोड़ डोज तैयार 

उनका कहना है कि मौजूदा समय में उनके पास 2 करोड़ डोज तैयार हैं। वो जल्द ही 70 करोड़ डोज तैयार कर लेंगे। ये वैक्सीन उनके चार सेंटर्स पर तैयार हो रहे हैं। इनमें से तीन हैदराबाद में है और एक बेंगलुरु में। उन्होंने कहा कि इस समय हम कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इनमें लॉजिस्टिक समस्या भी शामिल है।

BSL-3 प्रोडक्शन सुविधा सिर्फ हमारे पास

इसके साथ ही उन्होंने कहा, “गर्व की बात है कि पूरी दुनिया में केवल हमारे पास BSL-3 प्रोडक्शन सुविधा है। यहाँ तक कि US के पास भी ये सुविधा नहीं है। हम पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी में मदद करने के लिए हैं, फिर वो दुनिया के किसी भी हिस्से में क्यों न हो।”

नए कोरोना स्ट्रेन के मसले पर उन्होंने कहा कि वह एक हफ्ते में इसका पूरा कंफर्म डेटा देंगे। वहीं वैक्सीन की कीमत पर उन्होंने कहा कि शुरूआती दौर में वैक्सीन थोड़ी महँगी होगी। मगर जब वैक्सीन का प्रोडक्शन बढ़ जाएगा तब इसका प्राइस मार्केट के जरिए कंट्रोल होने लगेगा।

अखिलेश यादव ने सबसे पहले सवाल खड़े किए थे

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले इस पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि ताली-थाली बजवाकर कोरोना को भगाने वाली सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की वैक्सीन लगवाने की उस व्यवस्था पर भरोसा नहीं कर सकते, जो कोरोनाकाल में ठप्प-सी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि हम भाजपा की राजनीतिक वैक्सीन नहीं लगवाएँगे। जब हमारी सरकार बनेगी, तब हम मुफ्त में वैक्सीन लगवाएँगे।

अखिलेश के समर्थन में कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी ने अखिलेश का समर्थन किया। उन्होंने कहा था कि जिस तरह से भाजपा और प्रधानमंत्री CBI, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और ED का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं के खिलाफ कर रहे हैं, मुझे लगता है कि अखिलेश यादव का यह डर गलत नहीं है कि वैक्सीन का भी गलत इस्तेमाल हो सकता है। जिस तरह से सरकार विपक्षी नेताओं के खिलाफ काम कर रही है, यह डर वाजिब है।

शशि थरूर और जयराम रमेश ने भी सवाल उठाए थे

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि कोवैक्सिन ने अभी तक अपना तीसरा ट्रायल भी पूरा नहीं किया है। जल्दबाजी में वैक्सीन को मंजूरी दी गई और यह खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक ट्रायल पूरा नहीं हो जाता, इसके इस्तेमाल से बचा जाना चाहिए।

कॉन्ग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि भारत बॉयोटेक एक फर्स्ट रेट इंटरप्राइज है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि कोवैक्सिन के फेज-3 ट्रायल से जुड़े प्रोटोकॉल, जिन्हें इंटरनेशनल लेवल पर मंजूर किया गया है, उसे मोडिफाई किया जा रहा है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री को इसका जवाब देना चाहिए।

‘कुछ फसलों पर बाजार भाव से भी ज्यादा MSP दे रही सरकार’: नितिन गडकरी ने कृषि सुधारों से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों के भविष्य तक पर की बात

केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस को इंटरव्यू दिया। इस दौरान उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के भविष्य, इथेनॉल उत्पादन के साथ किसानों की आय में सुधार की संभावनाओं, सोडियम-आयन बैट्री पर रिसर्च, भारत में टेस्ला और कई अन्य मुद्दों पर बात की। यह उन परिवर्तनों की झलक है जो भारत आने वाले दिनों में अनुभव करेगा।

इलेक्ट्रिक वाहनों का बड़े पैमाने पर उत्पादन 

केंद्रीय मंत्री ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के बड़े पैमाने पर उत्पादन पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कई छोटी कंपनियाँ पहले से ही उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में ई-बाइक और ई-स्कूटर का निर्माण कर रही हैं। इन कंपनियों का मुख्य मुद्दा लिथियम आयन बैटरी की उपलब्धता है। लिथियम-आयन खानों में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी के रूप में, अर्जेंटीना सहित उन पर चीनी पकड़ है, यह भारतीय निर्माताओं के लिए थोड़ी सी समस्या की बात है।

हालाँकि, मंत्री ने कहा कि एल्यूमीनियम-आयन विकसित करने के लिए बहुत सारे रिसर्च चल रहे हैं। ये एल्यूमीनियम-आयन बैटरी न केवल आसानी से उपलब्ध होंगी, बल्कि लिथियम-आयन बैटरी की तुलना में काफी कम खर्चीला होगा। गडकरी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का उदाहरण दिया जो उपग्रहों को भेजने के लिए विभिन्न प्रकार की बैट्रियों का उपयोग करता है। वैकल्पिक के लिए अनुसंधान अंतिम चरण पर है और मंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि आईआईटी के छात्रों और इंजीनियरों को क्षेत्र में सफलता मिलेगी।

उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि कुछ समय में हमें बहुत सारे नए विकल्प मिलेंगे और जल्द ही इलेक्ट्रिक वाहन देश का भविष्य होंगे।” मुंबई, पुणे, नागपुर आदि शहरों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ रही है। यहाँ तक कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर भी बनने की प्रक्रिया में है। हाल ही में, गडकरी ने CNC पर चलने वाली JCB को भी लॉन्च किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में बहुत कुछ हो रहा है जो आने वाले वर्षों में प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा।

टेस्ला का भारत में आगमन

टेस्ला के बारे में बात करते हुए, मंत्री ने कहा कि कंपनी 2021 की शुरुआत तक भारत में अपना परिचालन शुरू कर देगी। हालाँकि, मंत्री ने कहा कि टेस्ला द्वारा भारत में परिचालन शुरू करने के बाद विनिर्माण के दृष्टिकोण से इसके बारे में बात करना बेहतर होगा। जैव-ईंधन, इथेनॉल, मेथनॉल, जैव-सीएनजी, जैव-डीजल, आदि के क्षेत्र में बहुत सारे शोध चल रहे हैं, जो भारत में प्रमुख ब्रांडों को लाएँगे। 

बुनियादी ढाँचों में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी

भारत में सड़कों, रेलवे, मेट्रो आदि के बुनियादी ढाँचों के बारे में बात करते हुए, मंत्री ने कहा कि यह सच है कि हम वैश्विक स्तर के नहीं हैं। हालाँकि, हम जल्दी से सुधार कर रहे हैं। उन्होंने नागपुर में 1,200 करोड़ रुपए के मल्टी-मॉडल स्टेशन का उल्लेख किया जो एक अमेरिकी वास्तुकार द्वारा डिजाइन किया गया है। उन्होंने कहा, “यह दुनिया के पाँच सबसे अच्छे रेलवे स्टेशनों में से एक होगा। तो चीजें धीरे-धीरे होने लगी हैं।”

गडकरी ने नागपुर में मेट्रो बुनियादी ढाँचे में निजी खिलाड़ियों को शामिल करने की अपनी योजना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि नागपुर, पुणे और दिल्ली में मेट्रो के निर्माण की लागत प्रति किलोमीटर 50 करोड़ रुपए है। उनके द्वारा प्रस्तावित प्रति किलोमीटर (नागपुर ब्रॉड गेज मेट्रो) की लागत 5 करोड़ रुपए होगी। ब्रॉड-गेज 6 कोच वाली मेट्रो 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। सभी अनुमतियाँ पहले ही ली जा चुकी हैं। 6 कोचों में से तीन में मोटरें होंगी और इनकी लागत 8 करोड़ रुपए होगी। बिना मोटर वाले डिब्बों पर 4 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सामान ले जाने के लिए अतिरिक्त कोच भी शामिल होंगे।

गडकरी ने उल्लेख किया कि नागपुर से अमरावती पहुँचने में लगभग ढाई घंटे लगते हैं। मेट्रो एक घंटे 15 मिनट में दूरी तय करेगी। उन्होंने कहा कि वह मेट्रो टीम और विदर्भ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के साथ बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने बैठक के लिए यात्रा और पर्यटन कंपनियों को भी आमंत्रित किया है।

अगर यह परियोजना लोकप्रिय हो जाती है तो लोग सड़क परिवहन पर मेट्रो को प्राथमिकता देंगे और यह नागपुर के लिए पहला सार्वजनिक-निजी निवेश बन जाएगा। चूँकि सिस्टम पहले से मौजूद ब्रॉड गेज का उपयोग करेगा, इसलिए लागत बहुत कम होगी। भारत में चल रही कुछ परियोजनाएँ दुनिया में पहला है।

किसानों का विरोध-प्रदर्शन

एक महीने से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे किसान विरोध के बारे में बात करते हुए गडकरी ने कहा कि भारत के पास सरप्लस अनाज है। एक समय था जब भारत में खाद्यान्न की कमी थी, लेकिन इस समय हमारे पास गोदामों में लगभग 280 लाख टन चावल है, जो पूरी दुनिया को खिलाने के लिए पर्याप्त है। बाजार मूल्य की तुलना में MSP बहुत अधिक है।

उन्होंने कहा कि पिछले साल हमने 600 करोड़ रुपए की सब्सिडी के साथ 60 लाख टन चीनी का निर्यात किया। जबकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत प्रति किलोग्राम 22 रुपए प्रति किलोग्राम है, जबकि सरकार ने गन्ने के लिए प्रति किलोग्राम 34 रुपए का भुगतान किया। कीमतों में यह अंतर समस्या है। उन्होंने उल्लेख किया कि वह सरप्लस खाद्यान्न से इथेनॉल उत्पादन की बात कर रहे हैं, लेकिन अनुमति नहीं दी गई।

इस समय भारत में 8 लाख करोड़ रुपए का ईंधन आयात किया जा रहा है। एक टन चावल को 480 लीटर इथेनॉल में बदला जा सकता है और एक टन मकई 280 लीटर इथेनॉल का उत्पादन कर सकता है। यदि इथेनॉल के उत्पादन के लिए अनुमति दी जाती है, तो बिहार और यूपी में अर्थव्यवस्था में भारी बदलाव आएगा। चीनी के बजाय गन्ने का रस और गुड़ इथेनॉल के उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

गडकरी ने कहा कि उन्होंने Bajaj और TVS द्वारा स्कूटर और बाइक लॉन्च की हैं जो इथेनॉल पर चलते हैं। इसके साथ बहुत सारे उत्पाद बनाए जा सकते हैं, जिनमें बायोडिग्रेडेबल बायो-प्लास्टिक भी शामिल है। यह किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकता है। 

गडकरी ने कहा कि भारत सरकार किसानों के लाभ और हर साल एमएसपी बढ़ाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जून में संसद में पहले से चर्चा में आए कानूनों पर अकाली दल का गठबंधन देखकर दुख होता है। सरकार बात करने के लिए तैयार है और स्थिति को हल करने के लिए सभी प्रयास कर रही है और उम्मीद है कि यह जल्द ही हल हो जाएगा।

MSME के लिए समर्थन

गडकरी ने कहा कि मई में MSME के लिए जमानत-मुक्त ऋण के लिए 3 लाख करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे। 2 लाख करोड़ पहले ही स्वीकृत हो चुके हैं और ऋणों का संवितरण 1.6 लाख करोड़ से 1.8 लाख करोड़ रुपए के बीच है। उन्होंने वित्त मंत्री से योजना में और छूट देने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि शहरी सहकारी बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने भी एमएसएमई को वित्तपोषित किया है, उन्हें इस योजना के तहत लाया जाना चाहिए जो इस क्षेत्र की मदद करेगा।

अब तक, सरकार ने संकटग्रस्त एमएसएमई के लिए 20,000 करोड़ रुपए दिए हैं। ‘fund for funds’ स्कीम के अंतर्गत MSME के लिए 50,000 करोड़ रुपए की इक्विटी सहायता प्रदान की गई थी। फिलहाल यह प्रक्रिया के तहत है। उन MSMEs जिनका अच्छा निर्यात कारोबार है, वह कर रिटर्न, जीएसटी और बैंक रिकॉर्ड पूँजी बाजार का लाभ उठाने में सक्षम होंगे। सरकार उन्हें 15 प्रतिशत इक्विटी इनफ्यूजन प्रदान करेगी और बाकी वे बाजार से प्राप्त कर सकते हैं।

सरकार ने MSME द्वारा उठाए गए समस्याओं के समाधान के लिए ‘चैंपियन’ नामक एक पोर्टल भी लॉन्च किया है। MSMEs का भारत के निर्यात में 48% का योगदान है और GDP में 30% योगदान है, सरकार उन्हें पुनर्जीवित करने और फलने-फूलने में मदद करने के लिए सभी कदम उठा रही है। इसका उद्देश्य आने वाले वर्षों में निर्यात प्रतिशत को 60% और जीडीपी योगदान को 40% तक सुधारना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि MSMEs क्षेत्र इस समय 11 करोड़ नौकरियाँ प्रदान करता है और लिक्विडिटी के बेहतर प्रवाह के साथ पाँच करोड़ अधिक रोजगार प्रदान करने में सक्षम होगा।

सुमैया ने प्रेमी रेहान से कह अब्बा को ही कटवा डाला, सोए में कुल्हाड़ी से कई वार: रिश्ते पर जताई थी आपत्ति

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के कौशांबी में तबरेज़ अहमद (52) की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इस वारदात को अंजाम देने वाला कोई और नहीं बल्कि मृतक की बेटी सोमैया (18) और उसका प्रेमी रेहान (19) है।

मीडिया रिपोर्ट्स के पुलिस को मामले की जाँच के दौरान बेटी के बयानों पर संदेह हुआ। जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतक पिता ने अपनी बेटी के रिश्ते पर आपत्ति जताई थी। इस बात से नाराज़ होकर 12वीं में पढ़ने वाली बेटी ने प्रेमी के साथ हत्या की साज़िश रच डाली। 

तबरेज़ अहमद कौशांबी के सराय अकिल क्षेत्र का निवासी था और वहीं खेती करता था। पिछले कुछ दिनों से वह अपना मकान बनवा रहा था। मकान में काम चलने की वजह से वो अपने पड़ोसी कट्टटू के घर सोने जाता था। इसी क्रम में 28 दिसंबर 2020 को वह पड़ोसी के घर सो रहा था तभी देर रात लगभग 12 बजे वहाँ एक व्यक्ति पहुँचा। उसने तबरेज़ अहमद की गर्दन पर कुल्हाड़ी से कई वार किए जिसकी वजह से उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।

घटना के दौरान शोर होने के बाद आस-पास के लोग इकट्ठा हुआ, उन्होंने पुलिस को इस घटना की जानकारी दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मामले से संबंधित लगभग सभी लोगों और परिजनों को सर्विलांस पर रखा। इसके अलावा एसओजी ने भी जाँच शुरू की, लगभग एक हफ्ते की जाँच के बाद पुलिस ने पूरे मामले की गुत्थी सुलझा ली।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अपर पुलिस अधीक्षक समर बहादुर ने बताया कि आरोपित रेहान मृतक की बेटी सोमैया से प्यार करता था। तबरेज़ को इस बात की जानकारी हुई तो उसने आपत्ति जताई। तबरेज़ ने सोमैया का स्कूल जाना बंद करवा दिया। फिर भी दोनों का चोरी छुपे मिलना जारी था। वारदात की रात तबरेज़ को सोमैया की इस हरकत की भनक लगी तो उसने बेटी की पिटाई कर दी। सोमैया ने यह बात रेहान को बताई जिसके बाद दोनों ने हत्या की साज़िश रच डाली।   

28 दिसंबर की देर रात रेहान सोमैया के घर पहुँचा जहाँ उसे पता चला कि तबरेज़ पड़ोसी के घर में सोया है। रेहान कुल्हाड़ी लेकर वहाँ पहुँचा और तबरेज़ पर कुल्हाड़ी से कई वार किए जिसके बाद तबरेज़ की मौके पर ही मृत्यु हो गई। हत्या के बाद आरोपित रेहान अपने गाँव पुरखास भाग गया था।   

मुंबई का मालवणी, रहते थे 100 हिंदू परिवार, बचे 8-10: घर कब्जा रहे मुस्लिम गुर्गों को मंत्री असलम शेख का संरक्षण होने का दावा

90 के दशक में जो जम्मू-कश्मीर के कश्मीरी पंडितों और हाल में कैराना के हिंदुओं के साथ हुआ, वही अब मुंबई के मलाड (Malad) में भी शुरू हो गया है। मलाड के मालवानी/मालवणी (Malvani) में बहुसंख्यक आबादी (मुस्लिम आबादी) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (sc/st) समेत सभी हिंदुओं को इलाका छोड़कर जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

मालवणी के मुस्लिम बहुल इलाके में हिंदुओं को लगातार डराया-धमकाया जा रहा है कि वो अपनी घर-जमीन छोड़कर वहाँ से पलायन कर जाएँ। एक समय में इस इलाके में 100 से ज्यादा हिंदू परिवार रहा करते थे। मगर अब हिंदू परिवारों की संख्या सिर्फ़ 8 से 10 रह गई है और वह भी बहुसंख्यक आबादी के बीच से निकल कर भागना चाहते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, हिंदू परिवारों पर दबाव बनाने वाले (मुस्लिम) गुंडों को स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता व महा विकास आघाड़ी सरकार में कैबिनेट मंत्री असलम शेख का संरक्षण प्राप्त है। एक पीड़ित का दावा है कि कॉन्ग्रेस नेता की आड़ में समुदाय विशेष के लोग हिंदुओं की जमीन पर कब्जा करते हैं और बाद में दरगाह व मदरसों का निर्माण कर दिया जाता है।

मालवणी में पीड़ित के घर की छत का हाल

पीड़ित के अनुसार पुलिस भी इन गुंडों के ख़िलाफ़ कई एफआईआर होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं करती है, जबकि ये गुंडे सिर्फ़ जमीन नहीं कब्जाते बल्कि साथ में ड्रग तस्करी, अनधिकृत निर्माण और कई अवैध काम करते हैं।

मुंबई के भाजपा अध्यक्ष प्रभात लोढ़ा पहुँचे मालवानी

हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के इस मामले पर मुंबई में बीजेपी अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा ने संज्ञान लिया है। उन्होंने क्षेत्र में पहुँच कर स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उन्होंने मालवणी में हिंदुओं की स्थिति को कश्मीरी पंडितों से जोड़ा। साथ ही स्थानीय प्रशासन से अपील की कि वह बिन भेदभाव के दलितों के साथ हो रही नाइंसाफी के लिए आरोपितों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें और पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करें।

मुस्लिम गुर्गों स्थानीय नेता असलम शेख का समर्थन: बीजेपी मंडल अध्यक्ष सुनील कोली

लोढ़ा के मालवणी दौरे के बाद ऑपइंडिया ने बीजेपी मंडल अध्यक्ष सुनील कोली से संपर्क किया। कोली ने बातचीत के दौरान इलाके में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का घिनौना चेहरा उजागर किया। कोली ने कहा वह (मुस्लिम) गुंडे जो दलितों को धमकाते हैं, उन्हें क्षेत्र से जाने को मजबूर करते हैं, उन्हें स्थानीय नेता असलम शेख का संरक्षण प्राप्त है।

वह कहते हैं, “वो मुस्लिम गुंडे जो लोगों को घर खाली कराने के लिए धमकाते हैं और जमीन छोड़ने का दबाव बनाते घूमते हैं, उन सबको असलम शेख का संरक्षण प्राप्त है। उनकी तस्वीरें पूरे इलाके में बड़े-बड़े होर्डिंगों में शेख की तस्वीर के नीचे लगी दिखाई देती है। वह सिर्फ़ अपने मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने के लिए दूसरों को जगह छोड़ने के लिए मजबूर करते हैं।”

उन्होंने कहा कि एक समय में यहाँ 100 से ज्यादा हिंदू रहते थे। अब सिर्फ़ मुश्किल से 8-10 परिवार बचे हैं। कई इन गुंडों के डर से भाग गए। वह बताते हैं कि इलाके में दलित परिवारों के साथ भी वही सब होता है जो सामान्य हिंदू परिवारों के साथ हुआ। उन्हें धमकी दी जाती है, पलायन को मजबूर किया जाता है, बिलकुल हिंदू परिवारों की तरह। 

बीजेपी मुंबई अध्यक्ष पहुँचे मालवणी

महाराष्ट्र सरकार की जमीन पर बने हैं अवैध मदरसा: सुनील कोली

कोली बताते हैं, “मुस्लिम गुंडों ने भाजी मार्केट के पीछे चॉल नंबर 7 में अवैध रूप से हिंदुओं के घरों पर कब्जा किया है। वह अब दलितों को सता रहे हैं कि वह भी जगह खाली कर दें। उनके घरों पर हमला हो रहा है। उनकी औरतों को प्रताड़ित किया जाता है।” सुनील कोली जानकारी देते हैं कि मालवणी में अनधिकृत मदरसों और दरगाहों की संख्या में वृद्धि हुई है। और नए मदरसे व दरगाह महाराष्ट्र सरकार के स्वामित्व वाली भूमि पर बनाए गए हैं।

एक सबसे अहम बिंदु जो गौर करने वाला है वो यह कि महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के अंतर्गत आने वाली चॉलों में कई अनियंत्रित मदरसों और दरगाहों का अचानक उदय हुआ है। छेदा कॉन्प्लेक्स की चॉल नंबर 5  में एक मदरसा और एक दरगाह है। कोली ने इस संबंध में आगे जानकारी देते हुए कहा कि पूरे मामले का संज्ञान भाजपा ने ले लिया है और उन लोगों की ओर से  पुलिस अधिकारियों को अल्टीमेटम दे दिया गया है कि इस संबंध में 15 जनवरी तक रिपोर्ट दी जाए। वह कहते हैं कि अगर पुलिस पीड़ितों को उनके अधिकार दिलाने में असमर्थ रहती है तो पार्टी रोड पर उतर कर प्रदर्शन करेगी।

गहलोत कहता है कि अंग्रेज़ी बोलने से नेता नहीं बनता, पायलट कहता है हाफपैंट पहनना राष्ट्रवाद नहीं

कॉन्ग्रेस नेता सचिन पायलट ने रविवार (जनवरी 03, 2021) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों के हक की बात करना असली राष्ट्रवाद है और जो नागुपर से हाफ पैंट पहनकर भाषण देते हैं, वह राष्ट्रवाद नहीं है।

कुछ ही महीनों पहले, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत से टकराव और कॉन्ग्रेस के खिलाफ बागी स्वर अपनाने के कारण चर्चा में आए सचिन पायलट केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में नजर आए और अपने एक संबोधन में, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर संगठन का नाम लिए बिना हमला किया।

भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आप लव जिहाद पर कानून बना रहे हो औऱ किसानों के भविष्य को अंधेरे में धकेल रहे हो। राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम ने नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में जयपुर में कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।

सचिन पायलट के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके जमकर मजे लिए हैं। फिल्म मेकर अशोक पंडित ने सचिन पायलट के इस भाषण का वीडियो ट्विटर पर रिट्वीट करते हुए लिखा, “सचिन पायलट जी, दुनिया को यह पता है की 2014 में आपकी निक्कर निकाल दी गई थी। आपको यह भी पता होगा की आपके 70 सालों के राज में हज़ारों किसानो ने आत्महत्या की है।”

अशोक पंडित के साथ ही कई अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने भी सचिन पायलट के भाषण पर उन्हें ट्रोल किया। ‘बींग ह्यूमर’ नाम के एक ट्विटर यूजर ने सचिन पायलट की वर्तमान स्थिति को एक मीम के माध्यम से रखते हुए एक ऐसे कुत्ते की तस्वीर शेयर की है, जिसमें उसके आगे के 2 पैर दाईं ओर तो पीछे के दो पैर बाईं ओर भाग रहे हैं।

प्रतीक पांड्या नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा है, “अगर यें हाफ पैंट पहनने वाले RSS के स्वयंसेवक नहीं होते तो आज आपका नाम सचिन पायलट नहीं, सचिन पिरजादा होता मान्यवर। वैसे अपने पिताजी के हत्यारों के साथ काम करके आपकों रात में नींद आ जाती है क्या?”

आदिरा ने सचिन पायलट के इस बयान में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि आप भूल रहे हैं कि अगर इसी भाजपा ने आपको मुख्यमंत्री बनाने में सहमति दिखाई होती तो आप भी आज ख़ुशी से ये हाफ पैंट पहन रहे होते।

गौरतलब है कि कुछ ही माह पहले अशोक गहलोत के खिलाफ बगावती होने के बाद अशोक गहलोत ने सचिन पायलट का नाम लिए बगैर उन पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि अच्छी अंग्रेजी बोलना, अच्छी बाइट देना और हैंडसम होना सब कुछ नहीं है। उन्होंने कहा था कि देश आपकी विचारधारा, नीतियों और प्रतिबद्धता के लिए आपके दिल के अंदर क्या है, सब कुछ माना जाता है।

दिल्ली के दो चिल्ड्रेन होम, शोषण का अड्डा: हर्ष मंदर का एनजीओ चला रहा, हालात देख NCPCR हैरान

दक्षिणी दिल्ली के दो चिल्ड्रेन होम। नाम- उम्मीद अमन घर (लड़कों के लिए) और खुशी रेनबो होम (लड़कियों के लिए)। इनकी स्थापना सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज (CES) ने की है। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के उल्लंघन की शिकायत मिलने के बाद नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने दोनों जगहों का निरीक्षण किया। बच्चों के शोषण के प्रमाण मिले।

NCPCR के अनुसार CES के निदेशक हर्ष मंदर हैं। वही मंदर जो यूपीए के जमाने में सोनिया गाँधी की नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (NAC) के सदस्य हुआ करते थे। जिनके संपर्क इटली की गुप्तचर सेवा और इतालवी सरकार से जुड़े संगठन से हैं।

दोनों चिल्ड्रेन होम का निरीक्षण 1 अक्टूबर 2020 को किया गया था। इसके लिए दो टीमें बनाई गई थी, जिसकी अगुवाई खुद NCPCR के अध्यक्ष कर रहे थे। NCPCR को ‘उम्मीद अमन घर’ में होने वाले यौन शोषण के बारे में पता चला, जिसका संचालन अमन बिरादरी ट्रस्ट करता है। बता दें कि अमन बिरादरी ट्रस्ट की मंदर ने की थी।

एनसीपीसीआर का कहना है कि उनके पूर्व सदस्य ने बताया था कि 2012 में भी आयोग को इसकी शिकायत मिली थी, लेकिन उस समय मामले को सही तरीके से नहीं निपटाया गया। इसे और अधिक सतर्कता से देखने की आवश्यकता है। एनसीपीसीआर ने पाया कि इन चिल्ड्रेन होम में कई मानदंड और नियमों का उल्लंघन किया गया। 

लड़कों के लिए उम्मीद अमन घर

चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन पंजीकरण को नवीनीकृत नहीं किया गया था। कोई पर्याप्त काउंसलर, कुक या हेल्पर उपलब्ध नहीं था। किसी स्टाफ की भर्ती का कोई रिकॉर्ड या वर्क प्रोफ़ाइल नहीं था और कोई भी चिकित्सा अधिकारी कॉल पर उपलब्ध नहीं था। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि, ‘घर के कमरों को अलग नहीं किया गया था और बड़े बच्चों के साथ नाबालिग बच्चों को एक साथ रखा जाता था, जिससे छोटे बच्चों को बड़े बच्चों द्वारा दुर्व्यवहार और धमकी का सामना करना पड़ता था।’

Rules violated at Umeed Aman Ghar
Rules violated at Umeed Aman Ghar

इसके अलावा बाल अधिकार संस्था ने कहा है कि उसे आश्रय गृह में होने वाले यौन शोषण के बारे में पता है, लेकिन फिर भी इसकी रिपोर्ट नहीं लिखवाई गई। आयोग ने संस्थानों में बाल यौन शोषण के संबंध में विरोधाभासी बयान भी पाया। आश्रय घरों के शुरुआती खंडन के बाद, CES ने स्वीकार किया कि ये मामले घटित हुए थे।

Child Sex Abuse at Umeed Aman Ghar
Child Sex Abuse at Umeed Aman Ghar

जिस तरीके से मैनेजर वाले मामले को निपटाया गया वह भी काफी घिनौना था। मैनेजर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के बजाए, उसे संगठन के एक घर से दूसरे स्थान पर ले जाया गया। दिल्ली सरकार के डब्ल्यूसीडी विभाग को इस बारे में पता था और फिर भी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

The NCPCR notes that the children must be shifted from Umeed Aman Ghar
The NCPCR notes that the children must be shifted from Umeed Aman Ghar
The NCPCR notes that the children must be shifted from Umeed Aman Ghar

लड़कियों के लिए खुशी रेनबो होम

लड़कियों के लिए खुशी रेनबो होम में इसी तरह के उल्लंघन पाए गए। किसी स्टाफ की भर्ती का कोई रिकॉर्ड नहीं था। 90 बच्चों के लिए केवल एक बाल कल्याण अधिकारी था। कोई भी कक्षा नहीं थी। स्टाफ का निवास मानक के अनुसार नहीं था। 90 बच्चों के लिए केवल 8 बाथरूम थे। स्वच्छता का कोई ध्यान नहीं रखा गया था। सामान्य स्थिति अत्यंत दयनीय थी।

Violations at Khushi Rainbow Home for girls
Violations at Khushi Rainbow Home for girls

NCPCR ने फंडिंग में पाई खामियाँ

बच्चों के आश्रय घरों को कई स्रोतों से वित्त पोषित किया जा रहा था। सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज के अलावा, रेनबो फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया (RFI), एसोसिएशन फॉर रूरल एंड अर्बन ज़रूरतमंद (ARUN-India), कैन असिस्ट सोसायटी और अमन बिरादरी के ‘दिल से कैंपेन’ और सीईएस और दिल्ली सरकार के समागम शिक्षा अभियान के बीच एक समझौता ज्ञापन शामिल है।

यह सब थोड़ा भ्रमित करने वाला है लेकिन ‘कैन असिस्ट’ की वेबसाइट के अनुसार, ARUN-India, RFI का मूल संगठन है, हालाँकि RFI की वेबसाइट पर इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता है। कैन असिस्ट वेबसाइट के अनुसार इसमें दिल्ली सरकार से प्राप्त फंड अमन बिरादरी ट्रस्ट भी शामिल है।

एनसीपीसीआर के अनुसार, हर साल लाखों रुपए बाल आश्रय घरों को दिए जाते थे। ‘उम्मीद अमन घर’ ने वित्त वर्ष 2020-21 में सिर्फ ARUN-India से 15 लाख रुपए लिए। इसे RFI से 41 लाख रुपए प्राप्त हुए। वहीं खुशी रेनबो होम को RFI से 38 लाख रुपए मिले। 

₹55 लाख का लोन, 55 सवाल: PMC बैंक घोटाला में ED के सामने संजय राउत की पत्नी की पेशी

शिवसेना सांसद संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत पीएमसी बैंक घोटाला मामले में पूछताछ के लिए सोमवार (जनवरी 4, 2020) को मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दफ्तर पहुँचीं। तीसरी बार समन मिलने पर वर्षा राउत ने ईडी के सामने हाजिरी लगाई है। इससे पूर्व 2 समन भेजे जाने पर वह स्वास्थ्य आधार पर पेश नहीं हुईं थीं। तीसरी बार में भी पेश होने के लिए उन्होंने 5 जनवरी तक का समय माँगा था।

बता दें कि इससे पूर्व खबरों में बताया गया था कि ईडी ने वर्षा राउत से पूछताछ के लिए 55 सवालों की लिस्ट तैयार की है। ईडी का मकसद यह जानना है कि उन्हें जो 55 लाख रुपए का लोन मिला, उसके स्रोत क्या हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) वित्तीय धोखाधड़ी के एक मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत के खिलाफ जाँच कर रही है। आरोप है कि PMC बैंक स्कैम के आरोपित प्रवीण राउत की पत्नी और एक अन्य कंपनी ने कुल मिला कर वर्षा के अकाउंट में 67 लाख रुपए भेजे थे। ED ने जानकारी दी थी कि प्रवीण राउत ने हाउसिंग डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (HDIL) के नाम पर अवैध लोन्स और अन्य मद में कुल 95 करोड़ रुपए की हेराफेरी की।

प्रवीण राउत को किए गए पेमेंट्स के कोई कागजात तक नहीं थे। HDIL के अकाउंट बुक से पता चलता है कि प्रवीण राउत ने पालघर में घर लेने के लिए ये रुपए लिए थे। इस आपराधिक लेनदेन में प्रवीण ने अपनी पत्नी माधुरी के अकाउंट में भी 1.6 करोड़ रुपए भेजे थे। ED ने जानकारी देते हुए कहा कि इस रकम में से 55 लाख रुपए इंटरेस्ट फ्री लोन के नाम पर वर्षा राउत को ट्रांसफर किए गए। इनमें से 50 लाख रुपए दिसंबर 23, 2010 को ट्रांसफर किए गए थे। बाकी के 5 लाख रुपए मार्च 15, 2011 को भेजे गए थे।

ED ने बताया था कि इस रकम का इस्तेमाल मुंबई के दादर ईस्ट में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया गया। M/s अवनी कंस्ट्रक्शंस नामक कंपनी में वर्षा और माधुरी पार्टनर्स भी हैं। ओवरड्रॉन कैपिटल को लोन में बदल कर इस कंपनी के द्वारा भी वर्षा राउत को 12 लाख रुपए भेजे गए। मात्र 5625 रुपए के कंट्रीब्यूशन को आधार बना कर ये रकम वर्षा को भेजी गई।

मुनव्वर फारूकी जैसी ‘कॉमेडी कौम’ के बीच नए हिन्दू का असहिष्णु होना कितना आवश्यक है?

मेरे घर में एक बार एक छोटे-से बच्चे को बेवजह, बात-बात पर गुस्सा आने लगा था, वह चिड़चिड़ा होने लगा। कहाँ वह हंसी-मजाक करने वालों को अपनी टॉफ़ी पकड़ा देता, उनके साथ बाकी की अपेक्षा और ज़्यादा खेलता था, और कहाँ इतना ‘इनटॉलरेंट’ हो गया कि हर किसी पर बिफ़र उठता! कोई उसके साथ खेलने आए तो दहाड़ें मार-मार कर चीखने लगता।

बच्चे के इस व्यवहार से हैरान-परेशान उसके माँ-बाप उसे एक बाल मनोवैज्ञानिक के पास ले गए। पता चला कि वह बच्चा ‘चाइल्ड अब्यूज़’ और ‘पीयर अब्यूज़’ का शिकार था। उसके साथ खेलने के बहाने आने वाले बच्चों में से कुत्सित मानसिकता के शिकार, गलत संस्कारों में पले-बढ़े कुछ बच्चे (और कुछ बड़े लोग भी) उसके माँ-बाप की नज़रें बचा कर उसके साथ दुर्व्यवहार करने लगे थे। वो कभी उसके कान मरोड़ते, तो कभी उसे मारते थे, उसे भद्दी-भद्दी गालियाँ देते थे और डराते थे।

धीरे-धीरे ऐसे ही उस बच्चे का स्वभाव बदलता चला गया। मनोवैज्ञानिक ने बताया कि यदि समय पर इस बच्चे की समस्या का पता न चलता, तो बड़ा होकर ये या तो एकदम ही भीरु और कायर बन जाता, या अति-हिंसक, असहिष्णु वयस्क बन जाता, जिसकी बर्दाश्त करने की क्षमता नगण्य नहीं अपितु एकदम शून्य होती। आज का ‘असहिष्णु’ हिन्दू समाज, आज का नया हिन्दू बारह सौ साल के अनवरत शोषण से कुपित वही वयस्क बनकर उभरा है।

कथित कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूकी के साथ जो हिंसा हुई, वह ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ के हर समर्थक के लिए सैद्धांतिक तौर पर जितनी दुखद है, ईमानदारी से अपने दिल के अंदर झाँकने पर उतनी ही अवश्यम्भावी लगेगी। ‘गंगाजल’ फिल्म के साइड विलेन डीएसपी भूरेलाल की ज़ुबानी बोलें तो, “ई तो साला होना ही था।”

क्यों होना था? क्योंकि आज का हिन्दू सामाजिक रूप से पूरी तरह से टूट चुका है। वह केवल चिड़चिड़ा या डरा हुआ नहीं है, बल्कि एक अँधेरे नैराश्य के काले सागर में गोते लगा रहा है। उसके लिए ‘कानून का राज’, ‘गंगा-जमुनी तहज़ीब’, ‘सर्व-धर्म-समभाव’, ‘सहिष्णुता’ आदि कोरी लफ्फाज़ी उतनी ही बेमानी है, जितनी एक डूब रहे आदमी के लिए कागज़ की नाव! वह भी उस देश में, जो उसी के विज्ञान, योग, गणित, भाषाशास्त्र, नृत्य आदि को बेच कर दुनिया के इतिहास में अपनी कॉलर ऊँची करता रहा है।

फिर वही बात- क्योंकि तुम सुनते ही नहीं

यह बात हज़ार बार कही जा चुकी ज़रूर है, पर चूँकि इस देश के हुक्मरानों के कान में जूँ रेंगने का नाम ही नहीं लेती, इसलिए इसे एक करोड़ बार और दोहराए जाने की ज़रूरत है- आखिर इस देश के सारे नियम-कानून, सारे नैतिक मापदण्ड केवल हिन्दुओं के लिए ही क्यों हैं? क्यों मुस्लिमों के हजरत को अपशब्द बोलने पर कमलेश तिवारी को न्यायपालिका से लेकर अपने ऑफिस तक हर जगह खमियाजा भुगतना पड़ता है, लेकिन ‘सेक्सी दुर्गा’ फिल्म बनाने वालों के लिए वही कानून, वही समाजशास्त्र सन्नाटा अपना लेते हैं?

क्यों जिहादियों की एक भीड़ मालदा में घंटों ISIS के राज जैसा माहौल बना कर भी गोलियों का शिकार नहीं होती, लेकिन ज़ाफ़राबाद की सड़क खाली कराने के लिए धरने की बात सुनते ही दिल्ली में दंगा भड़क जाता है? क्यों लव जिहाद पर पर्दा डालते ‘एकत्वं’ का इश्तेहार बनाकर ‘सेक्युलर’ का तमगा लूटने वाली ‘तनिष्क’ की यह हिम्मत नहीं पड़ती कि एक इश्तेहार ऐसा भी दिखा दे, जहाँ एक हिन्दू लड़का किसी मुस्लिम लड़की के साथ ‘वही सब’ कर रहा है, और ‘हिन्दू फ़ासिस्टों’ को गलत साबित कर दे?

हिन्दू आखिर जाए कहाँ?

एक आम हिन्दू हर ओर तो अपने दुश्मन ही पाता है- उसकी तरफ़ से कौन खड़ा है? हिंदूवादी सरकार के राज में बंगाल और कश्मीर से लेकर राजधानी दिल्ली तक वह कट रहा है- कभी दिल्ली दंगों में अंकित शर्मा के नाम से, कभी प्रेमिका के मुस्लिम होने के अपराध में अंकित सक्सेना के नाम से। कभी कश्मीर में सतपाल निश्चल के नाम से कश्मीर का डोमिसाइल बनने पर सज़ा-ए-मौत मिलती है, कभी तमिलनाडु में रामलिंगम नाम से वह हिंदुत्व को गाली देने वाले मजहबी प्रचारकों के हाथों जिबह होता है- केरल और बंगाल में तो आत्मसम्मानी हिन्दू की शायद इंसानों में गिनती ही नहीं होती। और जानवर तो वहाँ ‘वाजिब-उल-क़त्ल’ हैं ही।

मीडिया भी इतने सब के बावजूद ‘देश में बढ़ता हिन्दू आतंकवाद’ पर घंटों के सेमिनार करता है, और कट्टरपंथियों के हाथों हिन्दुओं के कत्ल की खबर नीचे की पट्टी में ‘समुदाय विशेष’ के नाम से आती है।

यह सन्नाटा ‘ब्लैक कॉमेडी’ है

दिल्ली का चर्च बांग्लादेशी मुस्लिमों के हाथों तोड़े जाने पर हिन्दुओं को गाली देने वाली वही ‘स्टैंण्डअप कॉमेडियन’ कौम श्रीराम और भगवान सुब्रमण्यम/कार्तिकेय के मूर्तिभंजन पर मौन रहती है। हिन्दुओं के देवी-देवता, वैध परम्पराएँ भी इनके लिए ‘मैटेरियल’ तो हैं, लेकिन ‘मैटेरियल’ देने वालों के लिए इनके दिल में न ही हमदर्दी है न ही इंसानियत।

नागरिकता कानून (CAA) के ज़रिए सरकार ने जब चंद शरणार्थी, पाकिस्तानी मुस्लिमों के हाथों बलात्कार, अपहरण, लूट, बर्बरता, धर्मांतरण का शिकार होते आ रहे हिन्दुओं को मदद देने का एक कदम उठाया, तो इस ‘कॉमेडी कौम’ ने समुदाय विशेष के साथ मिलकर पूरे देश में आग लगा दी, राजधानी में सामूहिक हत्याकाण्ड के षड्यंत्र रचे और हिन्दुओं के खिलाफ एक किस्म का जिहाद छेड़ दिया गया। इस पर कलाबाजी ये, कि इस हत्याकांड का ठीकरा आँकड़ों की बाज़ीगरी के ज़रिए उसी समूह पर थोप दिया, जो इसका भुक्तभोगी था।

हिन्दू इनके लिए इंसान ही नहीं

हिन्दुओं से यह ‘कॉमेडी कौम’ और इसके अन्य साथी कितनी घृणा करते हैं, इसी का उदाहरण था AMU से निकले शरजील उस्मानी का वह ट्वीट, जिसमें वह सीएए शरणार्थियों की ही तरह इस देश में दर-दर की ठोकरें खाने वाले, 5 लाख लोगों को गँवाने वाले कश्मीरी पण्डितों को ‘पैम्पर्ड माइनोरिटी’ कहता है।

जैसा कि सोशल मीडिया में कई लोगों ने कहा, यह बोल हिन्दुओं से आसुरी वृत्ति तक की नफ़रत की पैदाइश थे। उस्मानी जैसों को ही अपना नेता मानने वाले समुदाय विशेष के समुदाय अधिसंख्य के लिए ‘काफ़िर’ तो इंसान ही नहीं है। यह ऐसा ही है, जैसे पौराणिक क्रूर दैत्यों के लिए मानव पशु-समान थे।

भूमिका ज़रूरी है

लेख में यदि आप यहाँ तक आ गए हैं तो बहुत मुमकिन है आपको लग रहा हो कि बिलावजह की लम्बी-चौड़ी भूमिका बाँधी जा रही है। आप सही भी हैं, और गलत भी। ‘पॉडकास्ट’ की भाषा में बोलें तो ‘यस एंड नो’।

ऊपर की बातें भूमिका अवश्य हैं, पर बिलावजह या नाहक नहीं। इसलिए नहीं क्योंकि हर बार जब हिन्दू हितों और हिन्दू समस्याओं की बात होती है तो हिन्दुओं को 1200 साल के हत्या, बलात्कार, और लूट का लेखा-जोखा देना ही पड़ता है। उसके बिना कोई हिन्दुओं को पीड़ित मानने को तैयार ही नहीं होता।

या तो विभाजन के समय एक बार हुए ‘बराबरी’*** के दंगों के आधार पर 1200 साल का हिन्दुओं का दर्द और मुस्लिमों की स्व-पोषित शिकायतों को एक समान कर दिया जाता है, या फिर पूरी बात ही घुमा कर, हिन्दुओं को अम्बानी और सत्या नडेला दिखा कर पूछा जाता है कि अगर दुनिया भर की ताकतें हिन्दू-विरोधी होतीं तो क्या ये लोग वहाँ पहुँच पाते जहाँ हैं!

हम खुद ही पुरानी बातों को छोड़ कर अभी की, वर्तमान की समस्याओं पर बात करना चाहते हैं- क्यों संविधान में केवल हिन्दू मंदिरों पर सरकारी कब्ज़ा जायज़ है? क्यों देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी ‘अल्पसंख्यक’ की मलाई काट रही है? क्यों सचिव पद पर बैठे ब्राह्मणों की बात करना ‘प्रोग्रेसिव’ है, जबकि यकायक समुदाय विशेष की यूपीएससी में बढ़ती तादाद की ओर ध्यान आकर्षित करना साम्प्रदायिक और हेट स्पीच?

हम खुद ही मुगलों की बात छेड़ने के बजाय उनकी जगह डॉ कलाम और कवि रसखान और अय्यप्पा के मुस्लिम भक्त वावर के नाम पर पुतले और राजमार्ग करना चाहते हैं। लेकिन हमें ऐसा करने से रोकने वालों से अग्रिम पंक्ति में यही कॉमेडियन कौम है।

हवा में नहीं पनपती अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

कथित कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूकी पर लौटें तो यद्यपि इसमें कोई दोराय नहीं कि उस पर हुआ हमला और उस पर हुई कार्रवाई, दोनों ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ हैं, लेकिन एक तथ्य यह भी है कि यह ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ ऐसी नाज़ुक चीज़ है जिसके अक्षुण्ण रहने के लिए कुछ मूलभूत चीज़ें पहले आवश्यक होतीं हैं।

पहली बात यह कि इसके लिए सम्पूर्ण समाज का, और खासकर कि बहुसंख्यक तबके का उस सरकार, संविधान और व्यवस्था में विश्वास बने रहना ज़रूरी है, जो कि इस स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं। क्या कॉमेडियन कौम से लेकर न्यायपालिका, पुलिस से लेकर मीडिया और बौद्धिक वर्ग तक हमारी सामाजिक व्यवस्था का एक भी अंग दिल पर हाथ रखकर कह सकता है कि उसके यहाँ हिन्दुओं के साथ, उनके आत्मसम्मान के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार नहीं होता?

ऐसे में, हिन्दू कैसे भरोसा करे कि वह अगर मुनव्वर फ़ारूकी के साथ हाथापाई की बजाय शांतिपूर्वक उसके ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज करेगा, तो उस पर न्यायोचित कार्रवाई होगी?
दूसरी चीज़, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखने के लिए चाहिए, वह है इसका सदुपयोग।

लोगों को बुरी लगने वाली बातें कहने वाले की अपनी छवि ऐसी होनी चाहिए कि लोगों को यह विश्वास रहे कि यह बात दुर्भावनापूर्वक नहीं कही जा रही। मुनव्वर फ़ारूकी के ही समकालीन और हमकौम, मजहबी कॉमेडियंस में भी और कॉमेडियन कौम में भी, एक दूसरे जनाब हैं अहमद शैरिफ़!

अहमद शैरिफ़ भी हिन्दुओं के मज़े लेते हैं, हिन्दुओं के धर्म पर भी चुटकुले बनाते हैं, लेकिन उन्हें अब तक ऐसी प्रतिक्रिया नहीं झेलनी पड़ी। बल्कि उनके पेज और फ़ेसबुक प्रोफाइल पर हिन्दू ज़्यादा और उनके मजहब के लोग कम ही होते हैं। मज़ाक भी सीधे-सीधे ‘हिन्दू-मुस्लिम’ नाम लेकर होता है। क्यों? क्योंकि (कम-से-कम अब तक) अहमद शैरिफ़ के चुटकुलों में मज़हबी दुर्भावना नहीं आई है।

इसी के उलट, हिन्दू नाम वाले कुणाल कामरा से नफ़रत न करने वाला कोई भी आत्मसम्मानी हिन्दू तलाशना मुश्किल नहीं, शायद नामुमकिन है।

सम्मान ही नहीं, अपमान में भी अग्रणी रहा है हिन्दू

हिन्दू समाज हमेशा से अपमान, निंदा, और आलोचना को लेकर सहिष्णु ही नहीं, स्वागत मुद्रा में रहा है। श्रीराम के दरबार में नास्तिक, चार्वाक सत्यकाम जाबालि मंत्री ही नहीं थे बल्कि उन्हें मुनि की पदवी से भी जाना जाता है। वे वनवास से न डिगने पर उद्यत राम से कहते हैं कि वे (राम) नाहक ही उस पिता के पीछे जीवन नष्ट कर रहे हैं, जिनका अब (मृत्योपरांत) कोई अस्तित्व ही नहीं रहा। राम विचलित और क्रुद्ध अवश्य होते हैं, लेकिन उन्हें दंडित नहीं करते।

शिशुपाल का वध भी श्रीकृष्ण ने इसलिए किया क्योंकि वह दूसरे राजा के यज्ञ में घुस कर अपशब्द बक रहा था और विघ्न पैदा कर रहा था, न कि महज़ इसलिए कि उसने श्रीकृष्ण का अपमान किया।

चाणक्य से लेकर भीष्म और (मृत्युशैया पर दिए गए उपदेश में) रावण तक कदाचित् हर राजनीतिक पंडित ने आलोचकों की रक्षा को राजधर्म का अंग माना है। लोकतंत्र में जनता राजा है तो यह जनता का भी उत्तरदायित्व है।

कबीरदास जी ने भी कहा है-

“निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाए
बिन पानी, बिन साबुन, निर्मल करे सुभाय”

लेकिन जैसा की ऊपर वर्णित है, बोलने वाले का अधिकार और सुनने वाले का कर्त्तव्य, बहुत नाज़ुक परिस्थितयों की पूर्ति की शर्तों पर ही आधारित होते हैं। वर्तमान कॉमेडियन कौम इस कसौटी पर न केवल खरी नहीं उतरती, बल्कि वह उसके आसपास भी नहीं फटकती।

कॉमेडियन कौम का पूरा कॉन्टेंट हिन्दुओं को, और उनके धर्म को इन्सान से, इंसानियत से दोयम दर्जे पर धकेलने की दिशा में होता है, यह ‘डीह्यूमनाइज़िंग’ है। और इतिहास से लेकर मानव स्वभाव तक के जानकार यह जानते हैं कि किसी समाज को इन्सान होने से ही वंचित करना, दोयम दर्ज़े की ओर धकेलना लोमहर्षक सामूहिक हत्याकाण्ड की दिशा में पहला कदम मात्र होता है। हिटलर, स्टॅलिन, माओ, पोल पोट सबने यही किया। आसमानी किताब भी काफ़िरों को लेकर इसी दिशा में हुक्म जारी करती है।

हिन्दू वो लोग हैं, जिनके स्वस्थ धार्मिक वाद-विवाद में ‘तुम्हारे वेद तो बिना ज़हर के साँप हैं’ भी सह्य होता है। लेकिन हम ही वे लोग भी हैं, जहाँ अभिव्यक्ति की आज़ादी के बहाने यज्ञ में बाधा उत्पन्न करने वाले शिशुपाल को दंडित भी किया जाता है। आज हम उद्वेलित हैं क्योंकि सरकार, राजनीतिक पार्टियों, कानून की चौखट से लेकर निजी कम्पनियों के स्व-अंकुश और ‘सोशल मीडिया गाइडलाइंस’ तक, हर जगह से हमें दुत्कारा जा रहा है, ठगा गया है। घायल जानवर कभी-न-कभी भागने की राह न पाकर जान बचाने के लिए शिकारी पर ही झपट पड़ता है, यह हमें जानवरों की श्रेणी में डालने वालों को याद रखना चाहिए।

75 साल के बीजेपी नेता और 80 साल के उनके साथी की हत्या, ओडिशा के कानून मंत्री सहित 13 पर FIR

ओडिशा के कटक स्थित सालेपुर में एक 75 वर्षीय भाजपा नेता की उनके साथी सहित हत्या कर दी गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया है कि ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल (BJD) ने भी पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल की तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की तरह बदले की राजनीति में खून-खराबा शुरू कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने राज्य के कानून मंत्री प्रताप जेना सहित 13 के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

भाजपा नेता के साथ-साथ उनके 80 साल के सहयोगी की भी हत्या कर दी गई। ये घटना शनिवार (जनवरी 2, 2021) की है, जब 22 अपराधियों ने माहांगा पंचायत समिति के पूर्व अध्यक्ष व सालेपुर भाजपा प्रभारी कुलामणि बराल व उनके सहयोगी दिव्या सिंह बराल को बेरहमी से मार डाला। ये घटना जनकोटी गाँव के नजदीक तब हुई, तब वो दोनों मोटरसाइकिल से लौट रहे थे। कुलामणि की मौके पर ही मौत हो गई।

उनके साथी बराल को इलाज के लिए कटक के SCB मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में ले जाया गया, जहाँ रविवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। दोनों मृतक आपस में रिश्तेदार भी थे। इस घटना के तुरंत बाद कटक पुलिस ने बीजद नेता एवं मंत्री प्रताप जेना सहित 13 को इस दोहरे हत्याकांड में आरोपित बनाया। इन सबके खिलाफ IPC की धारा 302 (हत्या), 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार के साथ उपद्रव), 149 (जनसमूह द्वारा समान अपराध), 120B (आपराधिक षड्यंत्र) और 506 (आपराधिक धमकी) का मामला दर्ज किया गया।

ये हमला रात के 7:30 में हुआ था। हमले के कारण दोनों बाइक से गिर गए, जिसके बाद धारदार हथियार से मार-मार कर उन्हें अधमरा कर दिया गया। पोस्टमॉर्टम के बाद दोनों के शवों को पीड़ित परिजनों को सौंप दिया गया। वहीं प्रताप जेना का कहना है कि ये घटना निंदनीय है और बीजद हिंसा में विश्वास नहीं रखती है। उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताया। याद दिला दें कि माहांगा नृत्तांग पंचायत में भी भाजपा नेता व जाकोटी गाँव के प्रमुख विकास जेना की भी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।

प्रताप जेना ने उलटा भाजपा पर ही इस दोहरे हत्याकांड के राजनीतिकरण का आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में कुछ भी गलत होने पर बीजद को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जाँच के बाद सब साफ़ हो जाएगा क्योंकि वो व्यक्तिगत रूप से प्रयास करेंगे कि दोषियों को सज़ा मिले। उन्होंने कहा कि अभी सबका लक्ष्य दोषियों को कानूनन सज़ा दिलाना होना चाहिए।

इन सबके अलावा आर्म्स एक्ट की धाराएँ 25 और 27 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। भाजपा ने बीजद पर तृणमूल की तरह ‘कोल्ड-ब्लडेड हत्याएँ’ कराने का आरोप लगाया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजद इन हत्याओं के द्वारा विरोधियों का सफाया करना चाहती है। मृतक बराल नृतंगा ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री जन आवास योजना में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर पिछले कुछ दिनों से मुखर थे। उन्होंने गरीबों की PMAY योजना के तहत बीजद नेताओं के आवास हड़पने पर आपत्ति जताई थी।

इसके बाद स्थानीय पुलिस ने इस योजना के अयोग्य लाभार्थियों के खिलाफ FIR भी दर्ज की थी। राज्य में भाजपा के प्रवक्ता गोलक महापात्रा ने बताया कि BJD के नेताओं ने लम्बे समय से उनके खिलाफ दुर्भावना पाल रखी थी। साथ ही उन्होंने माँग की कि अब जब इस मामले में राज्य के कानून मंत्री ही आरोपित हैं, उन्हें अपने पद से तत्काल प्रभाव से हटाया जाना चाहिए। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी घटना की निंदा करते हुए पुलिस से कड़ी कार्रवाई करने को कहा है।

भाजपा नेता विजयंत जय पांडा ने भी जाँच की माँग करते हुए कार्रवाई न होने पर आंदोलन की बात कही। ओडिशा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष निरंजन पटनायक ने भी आशंका जताई कि राज्य में अब विरोधी नेताओं की राजनीतिक हत्या का सिलसिला शुरू हो गया है और कुलामणि एक मजबूत नेता थे, जिनकी हत्या दुःखद है। मृतक नेता के बेटे रमाकांत ने बताया कि उनके पिता ने पहले ही पुलिस को सूचित कर दिया था कि उनकी जान को खतरा है, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया।

उन्होंने बताया कि उनके पिता ने कई सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की पोल खोली थी। पीएम मोदी को पत्र तक लिखा था। माहांगा पंचायत समिति के एक पूर्व सरपंच के पति को भी इस मामले में आरोपित बनाया गया है। उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाया कि मंत्री प्रताप जेना ही आरोपितों को बचा रहे हैं। कटक ग्रामीण के एसपी जुगल किशोर बनोथ ने बताया कि आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस ने 6 टीमें गठित की हैं और जल्द ही उनकी गिरफ़्तारी होगी।

भाजपा अब कटक के हर पुलिस थाने और प्रखंड दफ्तर के समक्ष विरोध-प्रदर्शन की योजना बना रही है। प्रदेश अध्यक्ष समीर मोहंती ने कहा कि प्रताप जेना अगर खुद इस्तीफा नहीं देते हैं तो उन्हें बरखास्त किया जाना चाहिए। बराल ने हाल ही में सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी, जिन्हें उनकी हत्या की वजह बताया जा रहा है। अब भाजपा मंत्री के इस्तीफे के लिए प्रदर्शन करेगी।

हाल के दिनों में ये पहली घटना नहीं है, जब किसी गंभीर अपराध में बीजद नेता का नाम आया हो। नवंबर 2020 में एक बेरहम हत्या का मामला विधानसभा में भी गूँजा था। इस मामले में मृतक की आँखें फोड़ दी गई थीं और दोनों किडनियाँ गायब थीं। उस मामले में भी मुख्य आरोपित नयागढ़ के BJD नेता और ओडिशा सरकार में मंत्री अरुण साहू का करीबी बताया जाता है। पीड़ित माता-पिता ने न्याय के लिए विधानसभा के बाहर आत्मदाह का प्रयास भी किया था।

‘किसान’ आंदोलन से ₹27000 करोड़ का नुकसान: दिल्ली और आस-पास के राज्यों में 80000 ट्रकों की आवाजाही प्रभावित

दिल्ली और इसके आस पास चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के चलते बीते एक महीने से ज़्यादा समय में दिल्ली तथा उससे सटे राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब एवं राजस्थान को लगभग 27,000 करोड़ रुपए के व्यापार का नुकसान हुआ है। ट्रेडर्स बॉडी ने इसकी  जानकारी दी है। 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कहा कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमा पर किसान एक महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं। इस वजह से दिल्ली से कई राज्यों को जोड़ने वाली सड़कें बंद हैं। 

ट्रेडर्स बॉडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और उसके राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि पंजाब और हरियाणा से दिल्ली आने वाले माल की आपूर्ति पर काफी फर्क पड़ा है। इन दोनों राज्यों से विभिन्न वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए काम किया जा रहा है। इसके लिए अन्य राज्यों से दिल्ली में सामान लेकर आने वाले वाहनों को राजमार्ग को छोड़कर अन्य वैकल्पिक मार्गों से काफी लंबा चक्कर लगा कर दिल्ली आना पड़ रहा है।

सीएआईटी प्रमुख ने मीडिया को बताया कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और देश के अन्य राज्यों से दिल्ली आने वाले सामानों की आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 50 हजार ट्रक देश भर के विभिन्न राज्यों से सामान लेकर आते हैं। लगभग 30 हजार ट्रक प्रतिदिन दिल्ली से बाहर अन्य राज्यों के लिए सामान लेकर जाते हैं। 

किसान आंदोलन के चलते न केवल दिल्ली सामान आने पर बल्कि दिल्ली से पूरे देश में सामानों के जाने पर भी काफी प्रभाव पड़ा है। ऐसे में जितनी जल्दी सरकार और किसान नेताओं के बीच चर्चा के जरिए समाधान निकल जाए, उतना अच्छा होगा।

इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा है कि अगर सरकार ने 4 जनवरी को अगले दौर की वार्ता के दौरान उनकी माँगों को पूरा नहीं किया तो वे अपना आंदोलन तेज करेंगे। किसान आंदोलन के वरिष्ठ नेता दर्शन पाल ने भी कहा कि पेट्रोल पंप और उनके द्वारा संचालित शॉपिंग मॉल सहित कुछ औद्योगिक समूहों की वस्तुओं और सेवाओं का बहिष्कार जारी रहेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आंदोलन के हिस्से के रूप में प्रमुख राजमार्गों पर टोल प्लाजा को निशाना बनाया जाएगा।

किसान आंदोलन की आगे की रणनीति के बारे में बात करते हुए क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा था, “23 जनवरी को हम विभिन्न राज्यों में राज्यपालों के घरों की ओर मार्च निकालेंगे और अगर सरकार के साथ बैठक में कोई ठोस हल नहीं निकला तो आने वाली 26 जनवरी को दिल्ली में ‘ट्रैक्टर किसान परेड’ आयोजित की जाएगी।”

किसानों और केंद्रीय सरकार के बीच आज होगी 7वीं वार्ता

प्रदर्शनकारी किसान और केंद्र सरकार सोमवार (जनवरी 4, 2020) को सातवें दौर की वार्ता करेंगे। गतिरोध खत्म करने के लिए अब तक 6 दौर की वार्ता विफल रही है। छठे दौर की बैठक के बाद केंद्र सरकार और नए किसान कानूनों के खिलाफ प्रदर्शनकारी किसानों के बीच चार माँगों में से दो पर सहमति बनी थी। हालाँकि, किसानों ने दावा किया है कि वे तब तक विरोध प्रदर्शन को समाप्त नहीं करेंगे जब तक कि उनकी अन्य दो माँगें पूरी नहीं होतीं। वो दो माँगें हैं- नए कृषि कानूनों को रद्द करना और एमएसपी पर कानून बनाना।