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बीजेपी के लिए गृह त्याग करेंगे नीतीश कुमार? अरुणाचल के बाद अब बिहार में निशाने पर तीर

बिहार में नीतीश कुमार ने नवंबर 16, 2020 में 13 अन्य मंत्रियों के साथ सातवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। बिहार विधानसभा चुनाव में 74 सीटें जीतने वाली भाजपा (BJP) के इसमें 7 मंत्री थे। इनमें दो उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी शामिल हैं। तब से अब तक मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें ही लगाई जा रही हैं। अब इसके डेढ़ महीने बाद संजय पासवान ने नीतीश कुमार से गृह विभाग छोड़ने की माँग कर दी है।

अटल बिहारी वाजपेयी की केंद्र सरकार में मानव संसाधन राज्यमंत्री रहे संजय पासवान ने कहा कि अब गृह विभाग का जिम्मा बिहार में किसी अन्य मंत्री को स्वतंत्र रूप से दे देना चाहिए। ये बड़ी माँग है, क्योंकि जब-जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार चली है, गृह विभाग उन्होंने अपने पास ही रखा है। संजय पासवान का कहना है कि ज़रूरी नहीं कि BJP को ही ये विभाग मिले, जदयू के ही किसी नेता को भी दिया जा सकता है।

जब ऑपइंडिया ने संजय पासवान से संपर्क कर के इस माँग के पीछे के निहितार्थ को समझना चाहा तो भाजपा के विधान पार्षद ने कहा कि किसी पत्रकार को फोन पर ही उन्होंने ये बयान दिया है। हालाँकि उन्होंने कहा कि वो अब भी इस बयान पर कायम हैं। बकौल संजय पासवान, अब समय आ गया है जब नीतीश कुमार किसी अन्य नेता को गृह विभाग सौंपे। हालाँकि, उन्होंने इसे भाजपा और जदयू के बीच मतभेद के रूप में देखने से इनकार कर दिया।

साथ ही उन्होंने बिहार के गृह सचिव आमिर सुब्हानी को भी हटाने की माँग की। आमिर बिहार में नीतीश कुमार के सबसे फेवरिट ब्यूरोक्रेट्स में से एक माने जाते हैं। पिछले 15 वर्षों से नीतीश कुमार का उन पर ही भरोसा रहा है। संजय पासवान ने कहा कि चूँकि वो लंबे समय से इस पद पर बने हुए हैं, इसीलिए उनकी जगह किसी और को मौका दिया जाना चाहिए। बिहार में अभी भी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दोनों सत्ताधारी दलों में एकमत नहीं हो सका है।

बिहार में BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल भी खुलेआम राज्य में कानून व्यवस्था पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने अपनी ही सरकार पर निशाना साधते हुए जल्द ही पुलिस महानिदेशक से मुलाकात की बात कही थी। बेतिया से पटना के लिए निकले जायसवाल को सेमरा में लोगों ने घेरा और अपनी शिकायतें सुनाईं। गाँव में आए दिन चोरी की घटनाओं की उन्हें जानकारी दी गई, जिसे लेकर उन्होंने फेसबुक पोस्ट भी लिखा।

बेतिया के भाजपा सांसद जायसवाल का कहना था कि तुरकौलिया के थाना प्रभारी ने शिकायत किए जाने पर उलटा ग्रामीणों को ही धमका दिया। रक्सौल में हुए एक हत्याकांड और अन्य घटनाओं का जिक्र कर उन्होंने बिहार के पुलिस-प्रशासन को अक्षम करार दिया। राज्य में सत्ताधारी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी के मुखिया का इस तरह से बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर बयान देना जदयू को पसंद नहीं आया होगा।

इसके बाद भाजपा सांसद छेदी पासवान भी मुखर हो गए। रोहतास में एक पेट्रोल पम्प मालिक को गोलियों से भूने जाने की घटना और 72 घंटे में जिले में 5 हत्याओं पर उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक को पत्र लिखा। रोहतास में 2 सालों से एक ही एसपी है, इसे लेकर उनकी नाराजगी तो थी ही, साथ ही आम लोगों के मन में भी आक्रोश होने का उन्होंने जिक्र किया था। एसपी सत्यवीर सिंह को उन्होंने कर्तव्यहीन करार दिया।

इस तरह से इस एक महीने में भाजपा के 3 बड़े नेता राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठा चुके हैं। जहाँ बेतिया के सांसद संजय जायसवाल और सासाराम के सांसद छेदी पासवान ने अपने-अपने क्षेत्रों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर आक्रोश जताया, वहीं अब संजय पासवान ने गृह विभाग किसी अन्य नेता को देकर गृह सचिव को बदलने की माँग कर दी। भाजपा के नेता अपनी ही सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, तो इसके कुछ गहरे कारण जरूर हैं।

ये सब चर्चा तब चल रही है, जब जनता दल यूनाइटेड (जदयू) को अरुणाचल प्रदेश में बड़ा झटका लगा है और पार्टी के कुल 6 विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। इनमें से 3 विधायकों को जदयू ने पहले ही पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजा था, इसके बाद उन्हें पार्टी से निलंबित भी किया था। आखिर इन सभी को मिला कर देखा जाए तो क्या निहितार्थ निकलते हैं? क्या ‘BJP की माँग’ पर नीतीश कुमार गृह विभाग छोड़ देंगे?

इस पर हमने जब वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर से बात की तो उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी व्यक्ति के बयान को गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं है, जो किसी निर्णायक पद पर न बैठा हो। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि कई बार कुछ नेता सिर्फ अपना अस्तित्व दर्शाने के लिए ऐसे बयान देते रहते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि सीएम नीतीश को खुद बिगड़ती कानून व्यवस्था का भान है और उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक भी की है।

सुरेंद्र किशोर ने कहा, “इन नेताओं को अगर लगता है कि कुछ गलत है तो उन्हें जेपी नड्डा और अमित शाह से बात करनी चाहिए। क्या अमित शाह को नहीं पता होगा कि आमिर सुब्हानी 15 वर्षों से गृह सचिव हैं और नीतीश कुमार इतने ही समय से गृह मंत्रालय रखे हुए हैं। जिन नेताओं की हैसियत नहीं है, उनके बोलने का कोई अर्थ नहीं है। मुख्यमंत्री को परेशान करने के लिए वो बोलते रहते हैं। अगर सचमुच ऐसा है, तो बड़े स्तर पर बात होगी।”

सुरेंद्र किशोर ने इसे सामान्य राजनीति करार देते हुए कहा कि याद किया जाना चाहिए कि चुनाव से पहले भी कई नेता कह रहे थे कि भाजपा को चुनाव में अकेले जाना चाहिए और नीतीश कुमार से सम्बन्ध तोड़ लेना चाहिए, लेकिन क्या भाजपा आलाकमान ने उनकी इच्छा पूरी की? इन बयानों को भी इसी तरह देखा जाना चाहिए। फ़िलहाल अब बिहार में सभी की नजरें मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी हुई हैं।

उधर राजद अब भी नीतीश कुमार के साथ गठबंधन की उम्मीदें पाल कर बैठा है और अरुणाचल प्रकरण पर भी उन्हें घेर रहा है। राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने एक दशक पहले की उस घटना की याद दिलाई, जब मोदी (तब गुजरात के सीएम) के साथ तस्वीर छपने पर नीतीश ने भाजपा नेताओं के सम्मान में आयोजित रात्रिभोज रद्द कर दिया था। तिवारी ने कहा कि मोदी इसे भूलने वाले नहीं हैं।

उन्होंने नीतीश कुमार से पूछा कि भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में पूर्ण बहुमत में होने के बावजूद जदयू को तोड़ दिया तो इसका क्या अर्थ निकाला जाना चाहिए? उन्होंने कहा कि भाजपा शुरू से नीतीश कुमार को छोटा करना चाहती थी, जिसमें वो सफल रही, वहीं अब उसने मुख्यमंत्री को अपमानित करना भी शुरू कर दिया है? इस बयान से साफ़ है कि राजद अब भी नीतीश के चेहरे को अपने पाले में करने को बेताब है।

महाराष्ट्र पुलिस नहीं RSS से क्यों माँगनी पड़ रही बॉलीवुड हीरो को मदद?

‘बिग बॉस 8’ के फाइनलिस्ट रह चुके आरजे प्रीतम सिंह ने ट्विटर अकाउंट पर आरएसएस से लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मदद माँगी है। अभिनेता ने आरोप लगाया है कि उन्हें कुछ मोहल्ले के गुंडों द्वारा धमकाया और परेशान किया जा रहा है। गौरतलब है कि प्रीतम सिंह पर मार्च के माह भी कुछ गुंडों द्वारा हमला किया गया था।

प्रीतम सिंह ने एक ट्वीट में लिखा है, “माननीय मोहन भागवत जी, मुझे मदद की ज़रूरत है। मैं नागपुर से हूँ। मैंने हाल ही में नागपुर में अपने छोटे टेक-अवे फ़ूड बिजनेस की शुरुआत की है। करन तुली नाम के एक लोकल गुंडे ने मुझ पर शारीरिक रूप से हमला किया। मुझे और मेरे माता-पिता को सबके सामने गालियाँ दीं। मदद चाहिए सर ?।”

एक अन्य ट्वीट में प्रीतम सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को टैग करते हुए लिखा है, “प्रिय उद्धव ठाकरे जी, आप हमारे सीएम हैं और नागपुर के आपने लोकल कार्यकर्ता, जिसका नाम करन तुली है, ने मेरी दुकान को तोड़ दिया, मुझे मेरी माँ के सामने बुरे शब्द कहे क्योंकि उसे शिवसेना का संरक्षण हासिल है। यह सिर्फ इस वजह से किया गया क्योंकि मैंने कंगना रनौत के ट्वीट का समर्थन किया।”

प्रीतम सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को टैग करते हुए लिखा है कि उन्हें ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो उनकी पार्टी का नाम ख़राब करते हैं। उन्होंने लिखा है कि उनके पिता दिल के मरीज हैं और माँ कैंसर से जूझ रही हैं। प्रीतम सिंह ने लिखा है कि करन तुली का इतिहास नागपुर में अच्छा नहीं रहा है।

अभिनेता का कहना है कि उन्होंने इस मामले में पुलिस के पास शिकायत भी दर्ज नहीं की क्योंकि वो जानते हैं कि तुली शिवसेना को बीच में ले आएँगे और पुलिस उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेगी।

खौफनाक: मजदूरी माँगी तो गुदाद्वार में हवा भरने वाली पाइप डाल मशीन किया चालू, दर्दनाक मौत

मध्य प्रदेश से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। कथित तौर पर एक मजदूर की मौत इस कारण हो गई, क्योंकि मालिक ने उसके गुदाद्वार में एयर कंप्रेसर डाल मशीन चालू कर दी। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार मजदूरी को लेकर विवाद में इस घटना को अंजाम दिया गया।

मृतक के भाई धनीराम धाकड़ ने इस अमानवीय घटना के बारे में बताते हुए कहा, “यह घटना 8 नवंबर को हुई थी। मेरा भाई सुबह काम पर गया था। दोपहर को मुझे बताया गया कि वह गैस्ट्रिक बीमारियों से पीड़ित है। लेकिन जब वह उससे मिला तो उसने घटना की पूरी जानकारी उसे दी। उसने बताया तीन अन्य कर्मचारियों पिंटू, रवि और पप्पू खान की मदद से मालिक ने उसके मलाशय में एयर कंप्रेसर डाल मशीन चालू कर दी। हम उसे कई अस्पतालों में ले गए लेकिन शनिवार को उसकी मौत हो गई।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना के बाद जब पीड़ित की हालत बिगड़ गई, तो आरोपित मालिक राजेश राय उसके परिवार को बताए बिना, उसे ग्वालियर के एक अस्पताल में ले गया। जब उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तो वे उसे वापस ले आए और उसे जिला अस्पताल में भर्ती करवा दिया।

पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। घटना की जानकारी देते शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेश सिंह चंदेल ने बताया कि ” घटना 45 दिन पहले घटित हुई थी। हालाँकि यह घटना आज हमारे संज्ञान में आई क्योंकि मामले में कोई औपचारिक शिकायत नहीं की गई थी। मैंने संबंधित अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।”

‘आतंकियों का साथ देने, रंगे-हाथ पकड़ाए DSP देविंदर सिंह को जमानत मिल गई’ – सुशांत सिंह ने फिर फैलाई फेक खबर

अभिनेता सुशांत सिंह जो पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर फ़ेक न्यूज़ फैलाने के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं, रविवार (27 नवंबर 2020) को एक बार फिर निलंबित पुलिस अधिकारी देविंदर सिंह की रिहाई को लेकर फ़ेक न्यूज़ फैलाते हुए नज़र आए। देविंदर सिंह को पिछले साल आतंकवादियों से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 

ट्वीट करते हुए सुशांत सिंह ने दावा किया कि निलंबित पुलिस अधिकारी देविंदर सिंह को चार्जशीट नहीं दायर किए जाने की वजह से रिहा कर दिया गया था। ‘रिहाई’ के बाद से वह कहाँ हैं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। सुशांत ने कहा कि डीएसपी देविंदर सिंह अपनी गाड़ी में आतंकवादियों को जम्मू कश्मीर से दिल्ली लेकर जा रहे थे, तब उन्हें रंगे हाथों पकड़ा गया था। 

देविंदर सिंह से जुड़ी फ़ेक न्यूज़ फैलाते सुशांत सिंह

सुशांत सिंह का यहाँ तक कहना था कि NIA चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई थी, जिसके चलते देविंदर सिंह को 3 महीने में जमानत मिल गई। क्या किसी चैनल ने रिहाई के बाद उन्हें खालिस्तानी कहा? इसके बाद सरकार और सरकार के समर्थकों को घसीटते हुए अभिनेता ने लिखा, “कोई ढूँढ रहा है उसे या चीन की घुसपैठ की तरह भूल गए।” 

मोदी सरकार और आतंकवादियों की मदद करने वाले व्यक्ति पर कार्रवाई करने वाली केंद्रीय जाँच एजेंसियों की आलोचना करने की जल्दबाजी में सुशांत सिंह ने खुले तौर पर झूठ फैलाया। इस दौरान उन्होंने निलंबित पुलिस अधिकारी पर दर्ज किए गए मामले की जानकारियों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया। 

ठीक इसी तरह के दावे अन्य ट्विटर यूज़र भी कर रहे थे।

फैक्ट चेक

बता दें कि अदालत ने देविंदर सिंह और उनके वकील इरफ़ान शफ़ी मीर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा जून में दर्ज किए गए मामले के संबंध में जमानत दी थी। यह जमानत तब दी गई थी, जब अदालत को यह पता चला कि 90 दिन की अनिवार्य अवधि पूरी होने के बावजूद चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। जिसके बाद आरोपितों को 1 लाख रुपए का निजी बॉन्ड भरना था। 

मामले की जाँच करने वाले अधिकारी ने अदालत के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट पेश करते हुए कहा था, “इस तात्कालिक मामले की जाँच अभी ख़त्म नहीं हुई है, इसलिए चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकी।” 

यानी अदालत द्वारा दी गई जमानत सिर्फ दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले में प्रदान की गई थी। देविंदर सिंह पर NIA ने एक अलग मामला दर्ज किया है, जिसमें उन्हें जमानत नहीं दी गई है और इसलिए वह जेल से बाहर नहीं आ पाए हैं। 

देविंदर सिंह को दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले में भले जमानत मिल चुकी है लेकिन NIA के मामले में उन्हें अभी तक जमानत नहीं मिली है, जिसकी वजह से वह अभी भी जेल में हैं। इसलिए वह जेल से ‘बाहर नहीं आ पा रहे हैं’ जैसा कि सुशांत सिंह ने दावा किया था, बिल्कुल ही असत्य है। यही बाकी सवालों का जवाब भी है कि देविंदर सिंह अभी कहाँ हैं? वह फ़िलहाल NIA की हिरासत में हैं। 

हमेशा की तरह चुनिंदा लोग सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि आरोपित पुलिसकर्मी खुला घूम रहा है। जबकि यह सच नहीं है क्योंकि देविंदर सिंह को दूसरे मामले में जमानत मिली थी और फ़िलहाल उन्हें NIA हिरासत में ही रहना है। NIA के पास समय है और एजेंसी ने आश्वासन दिया है कि उनके पास आरोपित पुलिसकर्मी के खिलाफ़ पर्याप्त सबूत हैं और बहुत जल्द चार्जशीट भी दाखिल की जाएगी। 

देविंदर सिंह को हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादी नवीद बाबू और आसिफ़ राठेर के साथ कार में यात्रा करते हुए 11 जनवरी को पकड़ा गया था। बाद में पता चला था कि इस्लामी आतंकवादी संगठन देविंदर सिंह को रुपए देता था। इसके बाद मामले की जाँच NIA को सौंप दी गई थी। 18 जनवरी को NIA ने मामले की जाँच शुरू कर दी थी। 

सुशांत सिंह ने साझा की थी किसान आंदोलन से जुड़ी फ़ेक न्यूज़ 

कृषि सुधार क़ानूनों के विरोध में जारी ‘किसान’ आंदोलन को खालिस्तानी समर्थकों ने हथिया लिया है और घोर वामपंथियों, विपक्षी दलों ने इसे मोदी विरोध का ज़रिया बना लिया है। सोशल मीडिया पर भी काफी बड़े पैमाने पर प्रोपेगेंडा प्रचार जारी है। खुद को किसान हितैषी दिखाने की होड़ में झूठी जानकारियाँ और गलत तस्वीरें साझा की जा रही हैं। जिसकी वजह से आंदोलन का आकार बड़ा हुआ और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। 

इसी तरह सुशांत सिंह और कुछ कॉन्ग्रेसी ट्रॉल्स ने सोशल मीडिया पर एक बूढ़े मृत व्यक्ति की तस्वीर साझा की। इनके दावे के मुताबिक़ तस्वीर में नज़र आने वाला व्यक्ति एक किसान था, जो दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए आया था और विरोध के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। 

सुशांत सिंह ने किसी और सोशल मीडिया यूज़र का पोस्ट साझा किया था, जिसने खुद गलत दावा करते हुए लिखा था कि कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध करते हुए जान गँवाने वाले बूढ़े किसान की मृत्यु की वजह से वह बहुत दुखी है।            

हालाँकि ट्रॉल्स द्वारा साझा की गई तस्वीर जिसे ‘किसान आंदोलन’ से संबंधित बताया जा रहा था, उसका असल में विरोध प्रदर्शन से कोई लेना-देना ही नहीं था। यह तस्वीर सितंबर 2018 में ‘गरीब जाट’ नाम के पेज पर साझा की गई थी। तमाम लोगों द्वारा सही जानकारी देने के बावजूद सुशांत सिंह देविंदर से जुड़ी फ़ेक न्यूज़ नहीं हटाई।    

रूस की तरह भारत के टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगे: शिवसेना ने केंद्र-राज्य की राजनीति को लेकर की ‘घटिया’ बात

शिवसेना ने भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर हमलावर होते हुए भारत के सोवियत संघ की तरह बिखरने तक की बात कह डाली है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच संबंध बिगड़ रहे हैं। शिवसेना ने यहाँ तक कह डाला कि हमारे देश के राज्यों को सोवियत संघ (रूस) की तरह टूटने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।

इसके अलावा, अपने मुखपत्र के जरिए शिवसेना ने रविवार (दिसंबर 27, 2020) को कहा कि सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में अपने दायित्व को भूल गया है। अपने मुखपत्र ‘सामना’ के हवाले से शिवसेना ने लिखा, “अगर केंद्र सरकार को यह एहसास नहीं है कि वे राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को नुकसान पहुँचा रहे हैं, तो हमारे देश में राज्यों को सोवियत संघ की तरह टूटने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। वर्ष 2020 को देखा जाना चाहिए। यह केंद्र सरकार की क्षमता और विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाता है।”

गौरतलब है कि दिसंबर 26, 1991 को शीत युद्ध के परिणामस्वरूप सोवियत संघ (Union of Soviet Socialist Republics/USSR) विघटित होकर 15 देशों में टूट गया था।

मराठी दैनिक ‘सामना’ के सम्पादकीय में कहा गया है कि भाजपा नेता विजयवर्गीय ने एक सनसनीखेज खुलासा किया, जिसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की कमलनाथ सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए विशेष प्रयास किए।

इस लेख के अनुसार, “क्या होगा यदि हमारे प्रधानमंत्री राज्य सरकारों को अस्थिर करने में विशेष रुचि ले रहे हैं? प्रधानमंत्री देश का होता है। देश एक महासंघ के रूप में खड़ा है। यहाँ तक ​​कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें नहीं हैं, उन राज्यों में भी राष्ट्रीय हित की बात होती है। इस भावना को ख़त्म किया जा रहा है।”

अपने मुखपत्र में शिवसेना ने केंद्र पर पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया। शिवसेना का कहना है कि लोकतंत्र में राजनीतिक पराजय बहुत आम है, लेकिन ममता बनर्जी को बाहर करने के लिए जिस तरह से केंद्र सरकार का इस्तेमाल किया जा रहा है वह कष्टदायक है।

‘सामना’ में प्रकाशित लेख

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी के संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार ने बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और समाचार चैनल रिपब्लिक भारत के एडिटर-इन-चीफ़ अर्णब गोस्वामी को बचाने के प्रयास किए। महाराष्ट्र की राजनीतिक पार्टी ने नए संसद भवन निर्माण तक का भी जिक्र किया और कहा कि इससे कुछ नहीं बदलने वाला।

अपने दुखों को सामने रखते हुए शिवसेना ने यह भी आरोप लगाया कि चीनी सैनिकों ने भारत की सीमाओं में प्रवेश किया लेकिन हमारे सैनिक उन्हें पीछे नहीं धकेल सके। शिवसेना का कहना है कि राष्ट्रवाद का इस्तेमाल संकट से ध्यान हटाने के लिए किया गया। शिवसेना ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा है कि केंद्र सरकार ने चीनी वस्तुओं और चीनी निवेश के बहिष्कार को बढ़ावा दिया।

डोनल्ड ट्रम्प की पत्नी वेश्या, कॉलगर्ल… मेलानिया ट्रम्प की गंदी-गंदी फोटो शेयर कर विरोधी लिख रहे घटिया बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 2016 से ही आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है, तब से जब से उन्होंने पदभार सम्भाला है। राष्ट्रपति कार्यालय (Oval office) खाली करने से कुछ हफ्ते पहले डोनाल्ड ट्रंप के विरोधी और डेमोक्रेट समर्थकों ने उनकी पत्नी और अमेरिका की पहली महिला मेलानिया ट्रंप की स्लट शेमिंग (slut shaming) शुरू कर दी है। 

शनिवार (26 दिसंबर 2020) को अमेरिकी राष्ट्रपति ने Breitbart News के एक ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें ऐसा कहा गया था कि किसी भी बड़ी पत्रिका ने बीते 4 वर्षों में मेलानिया की कवर तस्वीर प्रकाशित नहीं की, जबकि वह अमेरिका की पहली महिला हैं। अब तक किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी के साथ इस तरह का बर्ताव नहीं किया गया था। 

Breitbart News ने लिखा, “फैशन प्रेस के अभिजात्य वर्ग ने अमेरिकी इतिहास में देश की पहली महिला को अपनी पत्रिकाओं से लगातार 4 वर्ष तक दूर रखा है।” इस बात से नाराज़ ट्रंप ने पत्रिकाओं के संबंध में लिखा, “अब तक की महानतम, फेक न्यूज़”। Breitbart ने बुधवार (23 दिसंबर 2020) को अपनी ख़बर में बताया था कि मेलानिया ट्रंप ने एलोनॉर ऑल्टा थाई हाई ब्लैक लेदर बूट (Eleonor Alta thigh-high black leather boots) पहना था, जिसकी कीमत 2195 डॉलर थी और डबल ब्रेस्टेड वुल कोट (double-breasted wool coat) पहना था, जिसकी कीमत 6610 डॉलर थी। 

इसके बाद ट्रम्प विरोधियों को मेलानिया ट्रंप का अपमान और चरित्र हनन करने का मौक़ा मिल गया। फैशन पत्रिकाओं द्वारा पहली अमेरिकी महिला को नज़रअंदाज़ करने के फैसले का समर्थन करते हुए एक यूज़र ने लिखा, “शायद इसलिए क्योंकि कोई भी एक सॉफ्ट पोर्न मॉडल को नहीं देखना चाहता, जो अक्सर सेक्स तस्करों (sex traffickers) के साथ नज़र आती थीं।”

एक और यूज़र ने तो मेलानिया को “वेश्या” ही कह दिया। GQ पत्रिका की कवर (जिस पर मेलानिया की तस्वीर प्रकाशित हुई थी) साझा करते हुए यूज़र ने लिखा, “आम तौर पर फैशन पत्रिकाएँ वेश्याओं और रूस की ऑर्डर पर आने वाली दुल्हनों (mail order brides) को अपनी कवर पर जगह नहीं देते हैं। यह तस्वीरें इतनी घटिया तो थी हीं।” 

अन्य ट्विटर यूज़र ने मेलानिया को ‘कॉल गर्ल’ बताया और एक ने कहा कि इनकी स्कूलिंग पोर्न हब नाम की पोर्न वेबसाइट से हुई है। 

एक और यूज़र ने लिखा, “जैकी ओ नैंसी रीगन, मिशेल ओबामा में फिर भी नैतिकता थी। एक बूढ़ी सॉफ्ट पोर्न मॉडल के बारे में कुछ भी नैतिक नहीं है। ये नस्लभेद को जन्म देता है।” 

एक और यूज़र ने ईसा मशीह की तस्वीर साझा की, जिसमें वह अपने शिष्यों को शिक्षा दे रहे हैं। उसका कैप्शन था, “जो बायडेन को वोट करो। उनकी पत्नी के स्तनों की तस्वीर पूरे इंटरनेट पर मौजूद नहीं है।” 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ डोनाल्ड ट्रंप इस बात से काफी नाराज़ हैं कि फैशन पत्रिकाओं ने उनकी पत्नी को नज़रअंदाज़ किया जबकि मिशेल ओबामा अक्सर पत्रिकाओं की कवर पर नज़र आती थीं। इससे पहले अभिनेता जेम्स वुड्स ने भी फरवरी 2020 में यह मुद्दा उठाया था।      

संस्कृति के लिए बलिदान से लेकर श्रीनिवासाचार्य स्वामी तक, PM मोदी ने की सबकी बात: 2020 का आखिरी ‘मन की बात’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (दिसंबर 27, 2020) को ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम के जरिए देश की जनता को सम्बोधित किया। इस साल के आखिरी मन की बात में उन्होंने कहा कि आतताइयों और अत्याचारियों से देश की हजारों साल पुरानी संस्कृति, सभ्यता, रीति-रिवाज को बचाने के लिए जो बड़े बलिदान दिए गए हैं, आज उन्हें याद करने का भी दिन है। उन्होंने याद किया कि आज के ही दिन गुरु गोविंद जी के पुत्रों, जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे अत्याचारी चाहते थे कि साहिबजादे अपनी आस्था छोड़ दें। महान गुरु परंपरा की सीख छोड़ दें। लेकिन, हमारे साहिबजादों ने इतनी कम उम्र में भी गजब का साहस और इच्छाशक्ति दिखाई। उन्होंने याद किया कि दीवार में चुने जाते समय, पत्थर लगते रहे, दीवार ऊँची होती रही, मौत सामने मँडरा रही थी, लेकिन, फिर भी वो टस-से-मस नहीं हुए। आज ही के दिन गुरु गोविंद सिंह जी की माता जी– माता गुजरी ने भी बलिदान दिया था।

प्रधानमंत्री ने देश की जनता को याद दिलाया कि करीब एक सप्ताह पहले, श्री गुरु तेग बहादुर जी के भी बलिदान का दिन था। पीएम ने बताया कि उन्हें दिल्ली में गुरुद्वारा रकाबगंज जाकर गुरु तेग बहादुर जी को श्रद्धा सुमन अर्पित करने का, मत्था टेकने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इसी महीने, श्री गुरु गोविंद सिंह जी से प्रेरित अनेक लोग जमीन पर सोते हैं और लोग श्री गुरु गोविंद सिंह जी के परिवार के लोगों के द्वारा दिए गए बलिदान को बड़ी भावपूर्ण अवस्था में याद करते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि इस बलिदान ने संपूर्ण मानवता को, देश को, नई सीख दी। इस बलिदान ने हमारी सभ्यता को सुरक्षित रखने का महान कार्य किया। उन्होंने कहा कि हम सब इस शहादत के कर्जदार हैं।

आगे पर्यावरण की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि भारत में ‘Leopards’, यानी तेंदुओं की संख्या में, 2014 से 2018 के बीच, 60% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। 2014 में देश में तेंदुओं की संख्या लगभग 7900 थी, वहीं 2019 में इनकी संख्या बढ़कर 12,852 हो गई।

उन्होंने कहा कि ये वही तेंदुए हैं जिनके बारे में जिम कॉर्बेट ने कहा था, “जिन लोगों ने तेंदुओं को प्रकृति में स्वछन्द रूप से घूमते नहीं देखा, वो उसकी खूबसूरती की कल्पना ही नहीं कर सकते। उसके रंगों की सुन्दरता और उसकी चाल की मोहकता का अंदाज नहीं लगा सकते।” साथ ही पीएम ने ये भी बताया कि देश के अधिकतर राज्यों में, विशेषकर मध्य भारत में, तेंदुओं की संख्या बढ़ी है। तेंदुए की सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र सबसे ऊपर हैं। उन्होंने इसे एक बड़ी उपलब्धि करार दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि तेंदुए, पूरी दुनिया में वर्षों से खतरों का सामना करते आ रहे हैं, दुनिया भर में उनके विचरण को नुकसान हुआ है। उन्होंने इस बात पर ख़ुशी जताई कि ऐसे समय में, भारत ने तेंदुए की आबादी में लगातार बढ़ोतरी कर पूरे विश्व को एक रास्ता दिखाया है। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले कुछ सालों में, भारत में शेरों की आबादी बढ़ी है, बाघों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, साथ ही, भारतीय वनक्षेत्र में भी इजाफा हुआ है।

उन्होंने सरकार के साथ-साथ बहुत से लोगों, सिविल सोसायटी, कई संस्थाओं के पेड़-पौधों और वन्यजीवों के संरक्षण में जुटने को कारण बताया और उन्हें बधाई दी। पीएम ने ये भी जानकरी दी कि कोयंबटूर की एक बेटी गायत्री ने, अपने पिता के साथ, एक पीड़ित कुत्ते के लिए व्हीलचेयर बना दी। उन्होंने कहा कि ये संवेदनशीलता, प्रेरणा देने वाली है और ये तभी हो सकता है, जब व्यक्ति हर जीव के प्रति, दया और करुणा से भरा हुआ हो।

उन्होंने कहा कि दिल्ली NCR और देश के दूसरे शहरों में ठिठुरती ठण्ड के बीच बेघर पशुओं की देखभाल के लिए कई लोग, बहुत कुछ कर रहे हैं | वे उन पशुओं के खाने-पीने और उनके लिए स्वेटर और बिस्तर तक का इंतजाम करते हैं। कुछ लोग तो ऐसे हैं, जो रोजाना सैकड़ों की संख्या में ऐसे पशुओं के लिए भोजन का इंतजाम करते हैं। ऐसे प्रयास की सराहना होनी चाहिए। कुछ इसी प्रकार के नेक प्रयास, उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में भी किए जा रहे हैं। वहाँ जेल में बंद कैदी, गायों को ठण्ड से बचाने के लिए, पुराने और फटे कम्बलों से कवर बना रहे हैं। इन कम्बलों को कौशाम्बी समेत दूसरे ज़िलों की जेलों से एकत्र किया जाता है, और फिर उन्हें सिलकर गौ-शाला भेज दिया जाता है।

पीएम मोदी ने युवाओं के एक समूह द्वारा कर्नाटक में श्रीरंगपट्न के पास स्थित वीरभद्र स्वामी नामक प्राचीन शिवमंदिर के कायाकल्प कर देने का भी जिक्र किया। उन्होंने तमिलनाडु के एक शिक्षक हेमलता एनके के बारे में बताया, जो विडुपुरम के एक स्कूल में दुनिया की सबसे पुरानी भाषा तमिल पढ़ाती हैं। कोविड 19 महामारी भी उनके अध्यापन के काम में आड़े नहीं आ पाई।

उन्होंने, कोर्स के सभी 53 चैप्टर्स को रिकॉर्ड किया, एनिमेटेड वीडियो तैयार किए और इन्हें एक पेन ड्राइव में लेकर अपने छात्रों को बाँट दिए। इसके बाद उन्होंने झारखण्ड की कोरवा जनजाति के हीरामन की चर्चा की, जो गढ़वा जिले के सिंजो गाँव में रहते हैं। कोरवा जनजाति की आबादी महज़ 6,000 है, जो शहरों से दूर पहाड़ों और जंगलों में निवास करती है। अपने समुदाय की संस्कृति और पहचान को बचाने के लिए हीरामन ने एक बीड़ा उठाया है।

उन्होंने 12 साल के अथक परिश्रम के बाद विलुप्त होती, कोरवा भाषा का शब्दकोष तैयार किया है। उन्होंने इस शब्दकोष में, घर-गृहस्थी में प्रयोग होने वाले शब्दों से लेकर दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले कोरवा भाषा के ढेर सारे शब्दों को अर्थ के साथ लिखा है। पीएम ने कहा कि कोरवा समुदाय के लिए हीरामन ने जो कर दिखाया है, वह देश के लिए एक मिसाल है। प्रधानमंत्री ने अकबर के दरबार में रहे अबुल फजल का जिक्र किया, जिन्होंने एक बार कश्मीर की यात्रा के बाद कहा था कि कश्मीर में एक ऐसा नजारा है, जिसे देखकर चिड़चिड़े और गुस्सैल लोग भी खुशी से झूम उठेंगे।

पीएम ने बताया कि दरअसल, वे कश्मीर में केसर के खेतों का उल्लेख कर थे। केसर, सदियों से कश्मीर से जुड़ा हुआ है। कश्मीरी केसर मुख्य रूप से पुलवामा, बडगाम और किश्तवाड़ जैसी जगहों पर उगाया जाता है। उन्होंने बताया कि इसी साल मई में, कश्मीरी केसर को ‘Geographical Indication Tag’ (GI Tag) दिया गया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार कश्मीरी केसर को एक वैश्विक रूप से लोकप्रिय उत्पाद बनाना चाहती है।

पीएम मोदी ने गीता जयंती का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गीता हमें हमारे जीवन के हर सन्दर्भ में प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि गीता इतनी अद्भुत ग्रन्थ इसलिए है, क्योंकि ये स्वयं भगवान श्रीकृष्ण की ही वाणी है। उन्होंने आगे कहा कि गीता की विशिष्टता ये भी है कि ये जानने की जिज्ञासा से शुरू होती है। प्रश्न से शुरू होती है। अर्जुन ने भगवान से प्रश्न किया, जिज्ञासा की, तभी तो गीता का ज्ञान संसार को मिला। ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने कहा:

“गीता की ही तरह, हमारी संस्कृति में जितना भी ज्ञान है, सब, जिज्ञासा से ही शुरू होता है। वेदांत का तो पहला मंत्र ही है– ‘अथातो ब्रह्म जिज्ञासा’ अर्थात, आओ हम ब्रह्म की जिज्ञासा करें। इसीलिए तो हमारे यहाँ ब्रह्म के भी अन्वेषण की बात कही जाती है। जिज्ञासा की ताकत ही ऐसी है। जिज्ञासा आपको लगातार नए के लिए प्रेरित करती है। बचपन में हम इसीलिए तो सीखते हैं क्योंकि हमारे अन्दर जिज्ञासा होती है। यानी जब तक जिज्ञासा है, तब तक जीवन है। जब तक जिज्ञासा है, तब तक नया सीखने का क्रम जारी है। इसमें कोई उम्र, कोई परिस्थिति, मायने ही नहीं रखती। जिज्ञासा की ऐसी ही उर्जा का एक उदाहरण मुझे पता चला, तमिलनाडु के बुजुर्ग श्री टी श्रीनिवासाचार्य स्वामी जी के बारे में! श्री टी श्रीनिवासाचार्य स्वामी जी 92 साल के हैं और वो इस उम्र में भी कम्प्यूटर पर अपनी किताब लिख रहे हैं, वो भी, खुद ही टाइप करके। उनके मन में जिज्ञासा और आत्मविश्वास अभी भी उतना ही है जितना अपनी युवावस्था में था। श्रीनिवासाचार्य स्वामी जी संस्कृत और तमिल के विद्वान हैं। वो अब तक करीब 16 आध्यात्मिक ग्रन्थ भी लिख चुके हैं।”

स्वच्छता की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमें ये भी सोचना है कि ये कचरा भारत के समुद्र तटों पर स्थित बीचों पर, इन पहाड़ों पर, पहुँचता कैसे है? उन्होंने याद दिलाया कि आखिर हम में से ही कोई लोग ये कचरा वहाँ छोड़कर आते हैं। बकौल पीएम मोदी, हमें सफाई अभियान चलाने के साथ-साथ हमें ये संकल्प भी लेना चाहिए कि हम, कचरा फैलाएँगे ही नहीं। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग को ख़त्म करने की भी बात की।

लड़कियों को अगवा कर यौन शोषण करता था मदरसे का मौलाना, फिर बेच देता था: नाबालिग बरामद, दिल्ली पुलिस ने दबोचा

दिल्ली पुलिस ने एक 16 साल की लड़की को 3 दिनों के अंदर बरामद कर अपहरणकर्ता को भी धर-दबोचा है। समयपुर बादली पुलिस ने एक सफल छापेमारी के बाद अपहरणकर्ता को गिरफ्तार किया। लड़की का अपहरण शनिवार (दिसंबर 19, 2020) को हुआ था। आउटर नॉर्थ दिल्ली जिले की पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया 45 वर्षीय मौलाना नौशाद आदतन अपराधी है और उत्तर प्रदेश के हरदोई में लड़कियों के अपहरण और शोषण के उस पर 10 से अधिक मामले दर्ज हैं।

आरोपित अपहृत की गई लड़की को सीलमपुर क्षेत्र में बेचने की फिराक में लगा हुआ था। डिप्टी कमिश्नर गौरव शर्मा ने बताया कि पुलिस कण्णुन-व्यवस्था बनाए रखने के लिए और लोगों की सुरक्षा के लिए हमेशा सतर्क है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के सिंघु सीमा पर चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के कारण पुलिस फोर्स का एक बड़ा हिस्सा वहाँ मौजूद है, जिससे इलाके में अपराधियों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

लड़की की माँ ने पुलिस को सूचित किया था कि दोपहर 2 बजे से ही उनकी बेटी गायब है और उसी इलाके में रहने वाला एक अन्य व्यक्ति भी उसी समय से गायब है, जिस पर उन्हें शक है। इसके बाद तुरंत FIR दर्ज की गई और लड़की की बरामदगी के लिए पुलिस टीम का गठन किया गया। चूँकि दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, इसीलिए डेडिकेटेड अधिकारियों की एक टीम बनाई गई है।

पुलिस ने जब मौलाना नौशाद के घर पर छापेमारी की तो वो गायब निकला और उसके परिवार वालों को भी उसके बारे में कोई सूचना नहीं थी। हरदोई के मदिया जिले का रहने वाला मौलाना नौशाद अपनी बीवी के साथ यहाँ रह रहा था। इसके बाद आरोपित और उसकी बीवी के मोबाइल नंबरों को तुरंत सर्विलांस पर रखा गया। इलाके के CCTV कैमरों के फुटेज की जाँच के बावजूद उसके बारे में कुछ पता नहीं चल पा रहा था।

इसके बाद हिमाचल प्रदेश के बद्दी में आरोपित के मोबाइल नंबर का लोकेशन मिला। जब पुलिस की टीम बद्दी के लिए निकली तो रास्ते में पता चला कि आरोपित भी दिल्ली के ही रूट में है। इसके बाद दिल्ली तक उसका पीछा करते हुए तकनीकी सर्विलांस अपनाया गया और सीलमपुर से उसे गिरफ्तार किया गया। नौशाद ने अपने साथी के साथ वहाँ से भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उसे धर लिया।

नौशाद मानव तस्करी और अपहरण के 10 से ज्यादा मामलों में नामजद है। वो एक मदरसा में बतौर शिक्षक काम करता है। वो पहले अल्पसंख्यक व गरीब लड़कियों से परिचय बढ़ाता था, फिर उन्हें लालच देकर अपने साथ ले जाता था। इसके बाद वो लड़की का यौन शोषण करता था और फिर उसे बेच देता था। इस बार भी उसने पीड़िता को लालच देकर निकाह का झाँसा दिया था। 2018 में भी उसने एक लड़की को लालच देकर उससे निकाह कर लिया था और उसके साथ रहने लगा था।

पुलिस नौशाद की पत्नी की भूमिका पर भी जाँच कर रही है क्योंकि फोन पर उसने अपने शौहर के साथ बात की थी और काम ख़त्म कर उसे भागने की भी सलाह दी थी। हिमाचल प्रदेश में लड़की का सौदा नहीं हो पाया था, इसलिए वो वापस दिल्ली लौट रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता के साथ नौशाद ने यौन शोषण भी किया है। उसकी मेडिकल जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कुछ ही दिनों पहले उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के विजयनगर थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति को अपने ही दोस्त की बच्ची से भीख मँगवाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरोपित दीन मोहम्मद ने अपने मित्र की बेटी का न सिर्फ अपहरण किया, बल्कि प्रताड़ित कर उससे भीख भी मँगवाई। पुलिस ने लगभग एक महीने बाद बच्ची को सकुशल बरामद करते हुए मुरादनगर थाना क्षेत्र स्थित नेकपुर के निवासी दीन मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया है।

‘RSS का आदमी, खालिस्तानी पर्चे’: किसान आंदोलन की आड़ में ‘एक्टिविस्ट’ शबनम हाशमी की फेक न्यूज

कॉन्ग्रेस परस्त ‘एक्टिविस्ट’ शबनम हाशमी फिर से फेक न्यूज फैलाते पकड़ी गई हैं। इस बार किसान आंदोलन की आड़ में उन्होंने यह कारस्तानी की है। शबनम ने शुक्रवार (25 दिसंबर 2020) को एक वीडियो ट्वीट करते हुए दावा किया कि किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए खालिस्तान पर्चे बॉंटते हुए “आरएसएस (RSS) का आदमी” पकड़ा गया है।

शबनम हाशमी का ट्वीट

यह ट्वीट 262 बार रिट्वीट हुआ और 253 लाइक मिले। शबनम ​हाशमी को जो लोग फॉलो करते हैं उनमें कई वामपंथी ‘पत्रकार’ और ‘एक्टिविस्ट’ हैं। मसलन, कारवॉं के संपादक हरतोष सिंह बल, आंदोलनकारी कविता कृष्णन, रेडियो मिर्ची की आरजे सायमा, द वायर की आरफा खानम और इंडिया टुडे के राहुल कँवल। ‘फैक्ट चेकर’ प्रतीक सिन्हा भी उन्हें फॉलो करते हैं। लेकिन इनमें से किसी ने भी इस सही करने का बीड़ा नहीं उठाया। 

यह सही है कि जिस व्यक्ति के बारे में शबनम ने दावा किया है वह पंजाब में किसान ‘आंदोलन’ में शामिल थे। लेकिन, वे खालिस्तानी पर्चे नहीं बाँट रहे थे, जिसका शबनम ने दावा किया है। वीडियो में दिख रहे व्यक्ति विकास कुमार मंडल कृषि कानूनों और आरएसएस के समर्थन में सामग्री बॉंट रहे थे।

इस व्यक्ति के पास जो पोस्टर मिले थे वह ये थे, 

व्यक्ति के पास से मिले पोस्टर

तमाम ट्विटर यूज़र्स ने शबनम हाशमी को बताने का प्रयास किया कि वीडियो को लेकर किया गया उनका दावा झूठा है। लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी उन्होंने अपना दुष्प्रचार जारी रखा। 

यह पहला मौक़ा नहीं है जब उन्होंने फ़ेक न्यूज़ फैलाई है। इसमें सबसे उल्लेखनीय था जब नवंबर 2016 में शबनम हाशमी ने दावा किया उंझा नगरपालिका चुनावों में कॉन्ग्रेस से भाजपा पूरी 36 सीट हार चुकी है। 

तत्कालीन कॉन्ग्रेस सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने भी फैलाया था शबनम हाशमी का झूठ

जिन ‘चुनावों’ का शबनम हाशमी ने ज़िक्र किया वो दिसंबर 2015 में हुए थे। भाजपा ने इन चुनावों में एक भी उम्मीदवार नहीं उतारा था और कॉन्ग्रेस ने 5 उम्मीदवार उतारे थे। परिणाम आने के बाद पता चला था कि कुल 36 सीटों में से 35 सीटों पर स्वतंत्र उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी और कॉन्ग्रेस को सिर्फ 1 सीट हासिल हुई थी। इस सूरत में भी शबनम हाशमी का दावा सच नहीं हो सकता कि कॉन्ग्रेस ने सारी सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि पार्टी ने सिर्फ 5 उम्मीदवार उतारे थे। 

वह अक्सर इस तरह की चीज़े साझा करती हैं जो उन्हें व्हाट्सएप पर मिलती हैं, इसके बाद उसकी तस्दीक करने की ज़िम्मेदारी दूसरों पर छोड़ देती हैं। 

शबनम हाशमी SFI कार्यकर्ता सफ़दर हाशमी की बहन हैं, जिनकी हत्या 1989 में ‘हल्ला बोल’ नुक्कड़ नाटक के मंचन के दौरान कॉन्ग्रेस नेताओं ने की थी।     

…तो सिर्फ गुजरात में ही चलेगी बुलेट ट्रेन: CM उद्धव की बेरुखी से महाराष्ट्र में केवल 22% भूमि का ही अधिग्रहण

देश में बुलेट ट्रेन दौड़ाने की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में महाराष्ट्र सरकार की उदासीनता आड़े आ रही है। यूँ तो बुलेट ट्रेन अहमदाबाद-मुंबई के 508 किलोमीटर के कॉरिडोर पर चलनी है। लेकिन महाराष्ट्र में महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण में आ रही समस्याएँ हल नहीं हुईं तो फ़िलहाल गुजरात में ही इसका परिचालन होगा।

बुलेट ट्रेन को दो फेज में चलाया जाना है। लेकिन भारतीय रेल ने कहा है कि अगर महाराष्ट्र सरकार भूमि अधिग्रहण में साथ नहीं देती है तो फिर इसे एक फेज में ही चलाया जाएगा। पहले फेज में बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से वापी के बीच 350 किलोमीटर के ट्रैक पर फर्राटे भरेगी। भूमि अधिग्रहण के लिए जब महाराष्ट्र में मँजूरी मिलेगी, तब दूसरे फेज में इसे वापी से लेकर मुंबई तक चलाया जाएगा। फ़िलहाल उद्धव ठाकरे सरकार का रुख नकारात्मक ही है।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने कहा कि भारतीय रेलवे चाहता है कि दोनों फेज में साथ ही काम हो, ताकि बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई तक सरपट दौड़े। हालाँकि, उन्होंने ये भी बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि अगले 4 महीनों में 80% के आसपास का भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक बार ये कार्य पूरा हो जाए तो प्रोजेक्ट महाराष्ट्र और गुजरात में साथ ही चलेगी।

साथ ही इसकी भी तैयारी की जा रही है कि अगर महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण नहीं हो पाता है तो अहमदाबाद से वापी तक ही इसे चलाया जाए। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए जमीन का 67% हिस्सा प्राप्त हो गया है। इसमें गुजरात में 956 हेक्टेयर में से 825 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है। गुजरात में करीब 90% भूमि का अधिग्रहण का कार्य पूरा होने के कारण टेंडर जारी कर जमीनी काम शुरू कर दिया गया है।

जहाँ तक महाराष्ट्र की बात है, वहाँ 432 हेक्टेयर भूमि में से 97 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण ही किया जा सका है। जितनी भूमि की जरूरत है, उसका ये मात्र 22% हिस्सा ही है। कोरोना काल में भारतीय रेलवे अपने व्यय में कटौती कर के बचत भी कर रहा है, जिससे पिछले वर्ष की तुलना में खर्च 12% कम हुआ है। ईंधन व अन्य मदों में बचत के बाद खाद्यान्न और उर्वरकों जैसी वस्तुओं की ढुलाई से आमदनी बढ़ने की उम्मीद है।

फरवरी 2019 में ही केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री का सपना साझा करते हुए बताया था, “आने वाले दौर में जल्द ही ऐसे 30 सेमी हाई स्पीड ट्रेनों को चलाने की तैयारी है। ट्रेन-18 सीरीज के स्लीपर ट्रेन भी आएँगे, फिर 2020 तक ट्रेन-20 और साथ ही भारत के विस्तृत क्षेत्र को बुलेट ट्रेन से जोड़ देने का भी प्रधानमंत्री का सपना है।” कोरोना काल में भी भारतीय रेलवे ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों को रुकने नहीं दिया है।